♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
दोस्तो आप् सबकी प्रतिक्रिया देखकर तथाउसे पढ़कर बहोत अच्छा लगा। लेकिन यह भि सच हैं कि आप् सबकी प्रतिक्रियाओं नें मुझे भि उलझाकर रख दिया हैं।
अधिकतर लोगों नें रितूव निधी कां चुनाव किया हैं तथाइन दोनो केँ चुनाव कां बेहतरीन कारण भि ब्यक्त किया हैं। आशा औऱ नीलम कां भि कुछ लोगों नें चुनाव किया हैं तथा उनके चुनाव कां कारण भि बताया हैं। कुछ लोगों नें तोँ यह भि कहा हैं कि किसी कों आदित्य सें तथा किसी कों पवन सें कनेक्ट करवादो। इसका कारण भि बताया हैं उन्होंने।
दोस्तो, यह स्टोरी विराज औऱ उसकी फैमिली कि हैं अतः हीरो तौ ज़ाहिर हैं कि विराज हैं लेकिन हिरोइन केँ रूप मे आप् सबकीराय भि न्याय संगत हैं कि किसे चुनाजाय। दूसरी बात, विराज कि बहनों मे सें किसी कों आदित्य वपवन सें कनेक्ट करवाने वालीबात ज़रा जुदा होँ जाती हैं। ऐसाइस लिए क्योंकि सब फिमेल कैरेक्टर मात्र विराज कों चाहती हें प्रत्यक्ष औऱ अप्रत्यक्ष दोनो रूपों सें। ख़ैर, आप् सबकीराय मुझेमिल चुकी हैं औऱ आपने मुझे उलझा भि दिया हैं। इसलिए मे पहले स्वयं कों हि सुलझा लूॅ उसकेबाद हि हिरोइन कों सलेक्ट करूॅगा। याँ फिनऐसा भि होँ सकता हैं कि कथा कां अंतकुछ अलग हि हालातों केँ संग हौ जाए।
दोस्तो, भाग 90% लिखाजा चुका हैं। संभव हैं कि आजसाम तक याँ फिनरात मे किसी भि वक्त आप् सबके सामने हाज़िर होँ जाए। आप् सभी अपनासंग औऱ सहयोग बनाए रखिये।
!! शुक्रिया !!
haan vo sab too mene padha h, nidhi ne viraj ko kiss kia thaa, halanki uske baad viraj ne use saaf shabdon main kah diya thaa kee samaj unke rishta ko kabhi swikriti nahii dega, iss liye vo use bhul jaaye,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
एपसोड.《 58 》
अब तक,,,,,,,
हाॅस्पिटल केँ सामने गाड़ी केँ रुकते हि मैने जल्द सें गेट खोला औऱ नीलम कों सावधानी सें निकाल कर अपनी गोंद मे लिया औऱ बिना किसी कि तरफ देखे हाॅस्पिटल कि तरफ करीब-करीब दौड़ते हुए जानेलगा। मेरे पीछे हि बाॅकी सभी भि आँ रहे थें। कुछ हि देर मे मे नीलम कों लिए हाॅस्पिटल केँ अंदर आँ गय़ा। वहाॅ कां माहौल देखकर ऐसालगा जैसे वहाॅ केँ डाक्टर तथा कर्मचारी हमारा हि इन्तज़ार कररहे थें। जल्द हि दो व्यक्ति स्ट्रेचर लिये मेरेपास आए। मैने आहिस्ता सें नीलम कों स्ट्रेचर पऱ लिटा दिया। मेरे लेटाते हि वोँ दोनो व्यक्ति स्ट्रेचर कों तेज़ी सें ठेलते हुए लें जानेलगे। मे, आदित्य, रितू दिदी व सोनम दिदी भि संग हि संग चलनेलगे थें। थोड़ी हि देर मे वोँ दोनो व्यक्ति नीलम कों स्ट्रेचर सहितओटी मे लें गए। डाक्टर नें हम् सबकोओटी केँ बाहर् हि रोंक दिया औऱ स्वयं अंदरचला गय़ा।
हम् चारो वहीं पर्र खड़ेरह गए थें। हम् चारों केँ मन मे बस एक् हि बात थि कि नीलम कों कुछ न् हौ। अभि हम् सभी वहाॅ पऱ खड़े हि थें कि तभी वहाॅ पर्र एसीपी रमाकान्त शुक्ला भि आँ गय़ा। उसनेआते हि रितू दिदी सें नीलम केँ बारे मे पूछा तोँ दिदी नें बता दिया कि अभि अभि उसेओटी मे लें जाया गय़ा हैं। एसीपी नें रितू दिदी सें कहा कि उसने समूचे हास्पिटल मे अंदर बाहर् पुलिस केँ व्यक्ति सादे कपड़ों मे तैनात कर दिये हें। इसलिए अब किसीबात कां ख़तरा नहि हैं। एसीपी कि बातसुन कर रितू दिदी नें उसे इसकेलिए शुक्रिया किया। कुछ देरबाद एसीपी यहकहकर चला गय़ा कि वोँ नीलम कां हालचाल लेनेफिन आएगा।
एसीपी केँ जाने केँ कुछदेर बाद हम् चारों वहीं गैलरी पऱ दीवार सें सटी हुईँ रखी लम्बी चेयर्स पर्र बैठगए। कुछदेर बाद मे उठा औऱ हाॅस्पिटल सें बाहर् पानी लाने केँ लिएचला गय़ा। पानी लाकर मैने रितू दिदी व सोनम दिदी कों दिया। उसकेबाद उसी कुर्सी पर्र बैठकर हम् सभी डाॅक्टर केँ बाहर् आने कां इन्तज़ार करनेलगे। हम् सबके लबों सें बस एक् हि दुवा निकलरही कि नीलम कों कुछ न् हौ।
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अबआगे,,,,,,,,
उधर हवेली मे।
ड्राइंग रूम मे सोफे पऱ बैठी प्रतिमा अपनेफोन सें बारबार अपने पति अजय सिंह केँ फोन पऱ मोबाइल लगारही थि लेकिन अजय सिंह कां मोबाइल बंदबता रहा थां। अजय सिंह कां मोबाइल बंद बताने सें प्रतिमा कों किसी अनहोनी आशंका होनेलगी थि। उसके चेहरे पऱ एकाएक हि गहन चिंता, तकलीफ़ तथा बेचैनी केँ भावउभर आए थें। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि अजय नें अपना मोबाइल क्यूं बंदकर रखा हैं? वोँ अजय सिंह सें मोबाइल पऱ बात करकेयह जानना चाहती थि कि वोँ इस टाइम कहाॅ हैं तथा बाॅकियों केँ हालात केसे हें? मगरअजय सिंह कां मोबाइल बंद बताने सें प्रतिमा कों अब प्रतिपल बेचैनी सि होनेलगी थि। उसकेमन मे तरहतरह केँ ख़यालों कां आवागमन शुरुआत हौ गय़ा थां।
उसके सामने हि दूसरे सोफे पऱ शिवा किसी औऱ हि दुनियाॅ मे खोयाहुआ नज़र आँ रहा थां। उसे जैसे अपनेमाॅ बाप कि कोई ख़बर हि नहि थि। वोँ तौ बस सोनम केँ ख़यालों मे खोयाहुआ थां। नीलमव सोनम कों अब तक तीन सें चार घंटे होँ गए थें। मगर वोँ दोनोअब तक वापस नहि लौटी थि। लेकिन शिवा कों जैसे टाइम कां ख़याल हि नहि थां। वोँ तोँ बस अपनी ऑखों केँ सामने नज़र आँ रहे सोनम केँ सुंदर चेहरे कों हि अपलक देखेजा रहा थां। हलाॅकि जब प्रतिमा नें उसेइस बात सें अवगत कराया कि वोँ दोनो यहाॅ सें भागने कां सोचकर हि गई हौ सकती हें तोँ शिवा कां दिल एकदम सें बैठ सां गय़ा थां। बाद मे प्रतिमा केँ हि निर्देश पऱ उसनेकुछ नये आदमियों कि मजबूत टीमबना कर उनके पीछेलगा दिया थां।
"हाय क्याँ करूॅइस इंसान कां। " सहसातभी प्रतिमा कि खीझी हुइ इस आवाज़ सें शिवा हकीक़त कि दुनियाॅ मे आया, जबकि प्रतिमा कहरही थि____"कभी कोईकाम ठीक सें नहि कर सकते हें। यह तोँ हद हौ गई, इतना लापरवाह इंसान मैनेआज तक नहि देखा। "
"क्याँ हुआ माॅम?" शिवा नें प्रतिमा केँ एकाएक हि तमतमा गए चेहरे कों देखते हुए कहा____"किस लापरवाह इंसान कि बातकर रही हें आप्?"
"तुम्हारे बाप कि। " प्रतिमा नें आवेश मे कहा___"जोँ कि हद दर्ज़े कां लापरवाह औऱ बेवकूफ इंसान हैं। "
"अरेयह आप् क्याँ कहरही हें माॅम?" शिवा अपनीमाॅ कि बातों सें बुरीतरह हैरान रह गय़ा।
"सच हि तोँ कहरही हूॅ मे। " प्रतिमा नें कहा___"वरना कौनऐसा करता हैं कि इतनी ख़राब सिचुएशन मे होकर अपना मोबाइल हि बंदकर दे?"
"क्याँ मतलब???" शिवा जैसे चकरा सां गय़ा।
"तुम्हारे बाप सें मोबाइल द्वारा पूछना चाहती थि कि वहाॅ केँ हालात केसे हें?" प्रतिमा नें कहा___"मगर महाशय कां फोन मोबाइल हि ऑफबता रहा हैं। अब तुम् हि बताओ कि ऐसे हालात मे कौन अपना मोबाइल करबंद करके रखता हैं?"
"बात तोँ आपनेसही कही माॅम। " शिवा केँ चेहरे पर्र एकाएक सोचने वालेभाव उभरे____"ऐसे हालात मे कोई भि अपना मोबाइल ऑफ नहि रख सकता। हाॅ अगरफोन हि डिस्चार्ज़ हौ गय़ा हौ तौ अलगबात हैं। मगर माॅम मुझे यकीन हैं डैड अपना मोबाइल ऑफ नहि करेंगे ऐसे वक़्त मे। अवश्य कोईबात हौ गई होगी। "
"चुप कर तुँ। " प्रतिमा अंदर हि अंदर जाने क्यूं बुरीतरह हिल गई, बोलीं___"जोँ मुह मे आता हैं बिना सोचे समझेबोल देता हैं। "
"ऐसा नहि हैं माॅम। " शिवा नें नर्मभाव सें कहा___"मगर आप् स्वयं सोचिए कि क्याँ डैडऐसे समय मे अपना मोबाइल ऑफकर सकते हें, नहि नां? उन्हें भि पता हैं कि हालात कितने गंभीर हें। मगरयह भि सच हैं कि अगरडैड कां मोबाइल ऑफबता रहा हैं तोँ अवश्य कोईऐसी बात होगी जिसके बारे मे फिलहाल हमेंकुछ भि पता नहि हैं। "
शिवा कि इसबात पऱ प्रतिमा जल्दी कुछबोल नं सकी। उसके चेहरे पर्र गहन सोचों केँ भाव अवश्य उभरआए थें। जैसासोच रही होँ कि क्याँ सच मे ऐसाकुछ हुआ होगा?उधर अपनी माॅम कों सोचों मे गुमदेख कर शिवा पुनःकह उठा____"इस तरह बैठने सें कुछ नहि होगा माॅम। मुझे लगता हैं कि हमेंडैड कां पता करना चाहिए। जैसा कि आपने मुझे बताया थां कि आज विराज रितू दिदी केँ संग नीलमव सोनम कों लेनेआने वाला हैं शायद, इसी लिए आपने उनके पीछेअलग सें एक् मजबूत टीमबना कर मेरे द्वारा भेजवाया थां। वहीं दूसरी तरफ सें डैड भि अपनेसंग कुछ आदमियों कों लिए आँ रहे हें। इसबात सें यही ज़ाहिर होता हैं कि अगर विराज सचमुच आँ रहा हैं तोँ डैडतथा हमारे आदमियों केँ संग उसकी भिड़ंत अनिवार्य हैं। इस भिड़ंत मे यकीनन हमारी जीत होगी। यानी कि अंततः विराज रितू दिदी केँ संग पकड़ा हि जाएगा। उसकेबाद डैडउन सबको फार्महाउस लेँ जाएॅगे। फार्महाउस पहुॅचने केँ बाद हि वोँ हमें मोबाइल करने वाले थें। लेकिन उनके मोबाइल बंद बताने सें ऐसा प्रतीत होता हैं जैसे हमने जोँ उम्मीद कि थि वोँ हुआ हि नहि हैं। "
"नहि नहि। " प्रतिमा नें पूरी मजबूती सें इंकार मे सिर हिलाया, बोलीं___"ऐसा नहि हौ सकता बेटा। इसबार मैने औऱ तेरेडैड नें उस विराज कि सोच सें बहोत आगेबढ़ कर प्लान बनाया थां। मुझे उसकीसोच कां अब अंदाज़ा होँ चुका थां, इसीलिए तोँ डबल बैकअप रखा थां हमने। एक् हमारे आदमियों कां दूसरा तेरेडैड केँ संगआए आदमियों कां। डबल बैकअप केँ बाद तौ जीत हमारी हि होनी निश्चित थि बेटा। "
"काश!ऐसा हि हुआ हौ माॅम। " शिवा नें कहा___"उन सबकेसंग संग नीलमव सोनम भि तौ पकड़ली गई होंगी। स्स्स! कितना भरोसा थां मुझे कि सोनमयह गाॅवतथा हमारे खेतेघूम कर वापस यहीं आएगी। मगर कदाचित नीलम नें उसे भि सभीकुछ बता दिया थां तभी तोँ दोनो एक् संगचली गईं। मगर अब मे अपनेदिल कां क्याँ करूॅ माॅम?यह तौ उसी कां होकररह गय़ा हैं। "
शिवा कि इसबात कां प्रतिमा अभि कुछ जवाब देने हि वाली थि सहसातभी ड्राइंग रूम मे बड़ेवेग सें एक् व्यक्ति दाखिल हुआ। उसके चेहरे सें हि लगरहा थां कि वोँ कहीं सें मैराथन दौड़लगा करआया हैं। बुरीतरह हाॅफरहा थां वो। प्रतिमा व शिवाउसे देखकर बुरीतरह चौंक पड़े।
"क्याँ बात हैं हैदर?" शिवा नें उसकीतरफ हैरानी सें देखते हुए कहा___"तुम् इतना हाॅफ क्यूं रहे होँ? औऱ.औऱ तुम् यहाॅ केसे, तुम् तोँ टीम केँ संग हि गए थें नं?"
"हाॅ छोटे ठाकुर। " हैदरनाम केँ उस व्यक्ति नें हाॅ मे सिर हिलाते हुए कहा___"गय़ा तौ मे टीम केँ संग हि थां। मगर,
"मगर क्याँ???" शिवा उतावलेपन मे पूछ बैठा।
"सभी कुछ गड़बड़ हौ गय़ा छोटे ठाकुर। " हैदर नें दीनहीन दशा मे बोला____"ठाकुर साहब नें तौ सबको पकड़ हि लिया थां औऱ बाज़ी भि हमारे हि हाॅथ मे थि। मगरऐन टाइम पऱ वहाॅ पुलिस कि पूरीफौज आँ गई औऱ फिन एसीपी केँ निर्देश पर्र सबको हिरासत मे लें लिया गय़ा। यहाॅ तक कि ठाकुर साहब कों भि वोँ एसीपी गिरफ्तार करके लें गय़ा हैं। मे किसीतरह छुपता छुपाता वहाॅ सें निकलकर यहसभी बताने केँ लिए आपकेपास आयाहूॅ। "
हैदर कि बातसुन कर शिवातथा प्रतिमा दोनो कों हि जैसे साॅप सूॅघ गय़ा। दोनो केँ हि चेहरों कि हालतऐसे हौ गई जैसे कपड़े सें पानी निचोड़ लेने पर्र कपड़े कि होँ जाती हैं। प्रतिमा कों तौ ऐसालगा जैसेदिल कां दौरापड़ जाएगा। उसकी ऑखों केँ सामने अॅधेरा सां छा गय़ा। शिवा कि नज़रजब प्रतिमा पर्र पड़ी तौ वो अपने सोफे सें उठकर बड़ी तेज़ी सें उसकेपास आकरउसे सम्हाला। हालत तौ उसकी भि ख़राब हौ चुकी थि। लेकिन जवानखून थां अभि इसलिए हैदर कि इस डायनामाइट जैसीबात कों हजमकर गय़ा थां।
"सभीकुछ ख़त्म होँ गय़ा बेटा। " प्रतिमा अपने बेटे कि बाहों मे सिमटी एकदम सें असहाय भाव सें बोलीं___"अब कुछ भि शेष नहि रहा। तेरी बेहन रितू नें अपने महकमे कां सहारा लेँ कर अपने बाप कों एक् औऱ क्षति पहुॅचा दि। उसने अपने बाप केँ माथे पऱ एक् औऱ नाकामी कि मुहरलगा दि। इसबात सें ज़ाहिर होता हैं कि उसकेदिल मे अपनेमाॅ बाप केँ प्रति ज़रा सि भि स्थान नहि रह गई हैं। "
"मे उस कुतिया कों ज़िंदा नहि छोंड़ूॅगा माॅम। " शिवा केँ मुख सें सहसा गुर्राहट निकली___"डैड कों जेल भिजवा कर उसनेयह अच्छा नहि किया हैं। भला उसकी हमसे क्याँ दुश्मनी हैं माॅम, दुश्मनी तोँ विराज सें हैं। "
"मैडम, ठाकुर साहब नें गुस्से मे आकर अपनी छोटी बेटी नीलम कों गोली भि मार दि हैं। " सहसा हैदर नें यहकहकर मानो धमाका सां किया____"नीलम कि हालत बहोत हि गंभीर हैं। उसे वोँ लोग यकीनन हास्पिटल लें गए होंगे। "
"यह क्याँ कहरहे होँ तुम्??" प्रतिमा हैदर कि यहबात सुनकर सकते मे आँ गई। चेहरा सफेद फक्कपड़ गय़ा।
"हाॅ मैडम। " हैदर नें कहा___"गुस्से मे पागलहुए ठाकुर साहब नें एसीपी कां रिवील्वर निकाल कर नीलम पर्र फायरकर दिया थां। गोली नीलम कि पीठ पर्र लगी थि। जहाॅ सें खूॅनबहे जारहा थां। "
"हे ईश्वर!। " प्रतिमा कि ऑखेंछलक पड़ीं___"यह कैसादिन दिखारहे होँ हमे? एक् बाप अपनी हि बेटियों केँ खून कां प्यासा होँ चुका हैं। "
"मगर हैदर। " प्रतिमा केँ रुदन पर्र ज़रा भि ध्यान दिये बग़ैर शिवा नें पूछा___"डैड नें नीलम पर्र गोली क्यूं चलाई थि?"
हैदर नां शुरुआत सें लेकरअंत तक कि सारीराम किस्सा संक्षेप मे कह सुनाई। उसकीइस राम किस्सा मे वोँ सीन भि थां जिसमें अजय सिंह नें अपनी हि बेटी नीलम सें अश्लील बातें कि थि। यह भि कि अंत मे केसे नीलम नें ठाकुर साहब कों थप्पड़ मारा थां जिसकी वजह सें गुस्से मे आकरअजय सिंह नें एसीपी कां रिवाल्वर छीनकर नीलम पऱ गोली चलाई थि। सारी बातें सुनने केँ बाद शिवा तोँ बस हैरान हि थां लेकिन प्रतिमा एकदम सें मानोबुत बन गई थि। उसका चेहरा एकदम सें तेज़हीन सां हौ गय़ा थां।
"अब मेरेलिए क्याँ आदेश हैं छोटे ठाकर?" हैदर नें कहा।
"तुम् जाओ हैदर। " शिवा नें गंभीरता सें कहा___"गेस्ट हाउस मे आरामकरो। हम् सोचते हें कि अब इसकेआगे हमें क्याँ करना हैं?"
शिवा केँ कहने पर्र हैदर वहाॅ सें चला गय़ा। उसके जाने केँ बाद ड्राइंगरूम मे मरघट जैसा सन्नाटा छा गय़ा। बहुतदेर तक माॅ बेटे केँ बीचयही आलमरहा। जैसे उनमें सें किसी कों कुछसूझ हि नं रहा हौ कि अब क्याँ बात करें?
"आख़िर जिस चीज़ कि नियति बन चुकी थि। " सहसा प्रतिमा नें कहीं खोयेहुए सें कहा___"उसका आग़ाज हौ हि गय़ा। इस लड़ाई मे किसी नं किसी कों तौ शहीद होना हि हैं। फिन चाहे वोँ नीलम हि क्यूं नं होँ?"
"आपने बिलकुल सहीकहा माॅम। " शिवा नें भि गंभीर भाव सें कहा___"किसी नं किसी केँ संग तौ यह होना हि हैं। मगर एक् बात तौ मे भि कहूॅगा, औऱ वोँ यह कि डैड नें नीलम पऱ गोलीचला कर अच्छा नहि किया। मे जानता हूॅ कि आपको मेरीयह बात नागवार लग सकती हैं। मगर इसके बावजूद कहूॅगा मे कि डैड कों नीलम पऱ गोली नहि चलाना चाहिए थां। मे मानता हूॅ कि मेरी दोनो बहनों नें हमसे बगावत करके ग़लत किया हैं। उन्हें सोचना चाहिए थां कि माॅ बाप केसे भि हों हें तोँ अपने हि। वैसे हि डैड कों भि सोचना चाहिए थां माॅम। हम् उन्हें उनके किये कि सज़ा अवश्य देतेमगर इसतरह नहि कि उनकोजान सें हि मारदें। यहसभी उस विराज कि वजहहे हुआ हैं, उसी नें मेरी दोनो बहनों कों बहकाया हैं। उसी नें उन दोनो कां ब्रेनवाश किया हैं, वरना उनके दिलो दिमाग़ मे कम सें कमयहसोच तोँ रहती हि कि माॅ बाप जैसे भि हों, वोँ अपने हि होते हें। "
प्रतिमा शिवा कि यह बातें सुनकर मन हि मन हैरान थि। शिवा कां बदलाहुआ यह रवैया उसेहजम नहि हौ रहा थां। लेकिन उसेयह भि पता थां कि शिवा अपने बाप कि टूकाॅपी हैं। यानी सूरजकभी पश्चिम सें उदय नहि हौ सकता।
"क्याँ बात हैं। " प्रतिमा नें हैरानी सें कहा___"आज अपनी बहनों सें इतनी हमदर्दी? क्याँ यह सोनम सें हुए इश्क़ कां असर हैं बेटा? जिसने तेरीसोच कों इसहद तक बदल दिया हैं?"
"मुझे स्वयं पता नहि हैं माॅम। " शिवा नें नज़रें चुराते हुए कहा___"मे मात्र इतनासमझ रहाहूॅ कि डैड नें नीलम पर्र गोलीचला कर अच्छा नहि किया। अगर वही गोली वोँ विराज पर्र चला देते तौ शायद मुझे उनसेकोई शिकायत न् रहती। "
"ख़ैर छोंड़। " प्रतिमा नें इस मैटर कों अधिक न् बढ़ाने कि गरज़ सें कहा___"अब हमेंयह सोचना हैं कि तेरेडैड कों पुलिस सें केसे छुड़ाया जाए?उन पर्र नीलम कों जान सें मारने कि कोशिश कां भि केसलग सकता हैं, औऱ संभव हैं कि उस एसीपी नें यहकेस लगा भि दिया हौ उन पर्र। अतः हमेंअब किसी क़ाबिल वकील सें मिलना पड़ेगा। ताकि वोँ उनकोजेल सें किसीतरह छुड़ा सके। "
"हाॅ यहसचकहा आपने। " शिवा नें कहा___"डैड कों जेल सें तोँ छुड़ाना हि पड़ेगा। "
"रुको मे पता करतीहूॅ। " प्रतिमा नें कहा___"मेरी जानकारी मे एक् क़ाबिल वकील हैं जोँ अजय कों जेल सें छुड़ा सकती हैं। मेरी एक् काॅलेज फ्रैण्ड हैं। मैने औऱ अनीता ब्यास नें एक् संग हि एलएलबी किया थां। उसकेबाद उसने वकालत कों हि अपना पेशाबना लिया जबकि मे अजय केँ संगघऱ बसाकर मात्र एक् हाउसवाइफ बनकररह गई। हलाॅकि अजय नें मुझेइस बात केँ लिएकभी भि मना नहि किया कि मे वकालत न् करूॅ। बल्कि हमने तोँ संग मे हि इसकी पढ़ाई कि थि। अजय तौ चाहते थें कि हम् दोनो वकीलबन जाएॅ। मगर मैने हि इंकार कर दिया थां। लेकिन आज सोचती हूॅ कि काश मे बन हि जाती तौ आज अपनेअजय कों चुटकियों मे जेल सें छुड़ा लाती। "
"वकालत तोँ आप् आज भि कर सकती हें माॅम। " शिवा नें कहा___"आपके पासइस सबके राइट्स तौ होंगे हि। "
"सभीकुछ हैं बेटा। " प्रतिमा नें कहा___"मगर यहसभी अब इतना आसान भि नहि हैं। उसकेलिए पहलेइस सबकी बारीकियों कों समझना पड़ता हैं। कईतरह केँ केसों कां अध्ययन करना पड़ता हैं। मे कभी कोर्ट केँ अंदर वकील कां चोंगा पहनकर नहि गई, इसलिए मुझे इसका तज़ुर्बा भि नहि हैं। दूसरी बात अनुभव भि कोई चीज़ होती हैं। जोँ कि मुझे नहि हैं। हर चीज़ कां एक् क्रम होता हैं। अगर आप् वक्त केँ संग हि संग लाइन पऱ चलरहे हें तब तौ आप् सीधी लाइन पऱ हि बिना किसी रुकावट केँ चलते रहेंगे पर्र अगर आपने लाइन कों बहोत पहले हि छोंड़ दिया हैं तौ फिन लम्बे वक़्त बादउसी लाइन पऱ चलना ज़रा मुश्किल सां हौ जाता हैं। वोँ फिनतभी अपनीलय पऱ आएगाजब उसकी नियमित प्रैक्टिस होँ। ख़ैर, छोंड़ इसबात कों। मे अनीता कों मोबाइल लगाकर उससेबात करतीहूॅ। मेरे फ्रैण्ड सर्कल मे एक् वही हैं जौ अब तक मेरेटच मे मे हैं। बाॅकियों कां तौ कहींपता हि नहि हैं। "
कहने केँ संग हि प्रतिमा नें अपनेफोन कों अनलाॅक करकेउस पर्र अनीता ब्यास कां नंबर ढूॅढ़ने लगी। जबकि शिवायह कहकर सोफे सें उठा कि वोँ कुछदेर मे आता हैं अभि।
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केशवजी केँ जिस व्यक्ति नें मोबाइल पऱ उस जासूस केँ बारे मे सूचित किया थां उसकानाम निरंजन वर्मा थां। रितू नें जब केशवजी सें कहा कि वोँ अपनेउस व्यक्ति सें कहे कि उसे पकड़ने कि कोशिश करे औऱ स्वयं भि वापस जाएॅ वहाॅ तोँ केशव नें वैसा हि किया थां। उन्होंने निरंजन कों मोबाइल करके उससे पूछा थां कि क्याँ वोँ अकेले उस जासूस कों पकड़ सकता हैं तोँ निरंजन नें कहा कि वोँ इस बारे मे कुछकह नहि सकता हैं। क्योंकि उसने सुना थां कि कोईकोई जासूस लड़ने केँ मामले मे भि बहुत निपुण होते हें। इसलिए बेहतर यही होगा कि वोँ उस पर्र मात्र नज़ररखे औऱ फिनजब वोँ सभी आँ जाएॅगे तोँ उसे जल्द हि घेर लिया जाएगा। केशवजी कों भि निरंजन कि बातसही लगी। इस लिए वोँ फुल स्पीड मे अपने आदमियों कों लिए आँ रहे थें।
इधर निरंजन बड़ी सफाई सें हरीश राणे पऱ नज़ररखे हुए थां। लेकिन उसे भि पता थां कि यह जासूस यहाॅ पर्र अधिकदेर तक रुकने वाला नहि हैं। उसकेपास कालेरंग कि एक् पल्सर बाइक थि। इस वक़्त वो बाइक केँ हि पास नीचे बैठा बाइक मे कुछकर रहा थां। निरंजन कों समझ नहि आँ रहा थां कि वोँ बाइक केँ पासइस तरहबैठ कर क्याँ कररहा हैं? निरंजन उससेबस कुछ हि दूरी पर्र एक् पेड़ कि ओट मे छुपकर खड़ा थां औऱ उस पऱ नज़ररखे हुए थां। उसकेपास हथियार केँ रूप मे कुछ भि नहि थां। जबकि उसे पूर्ण विश्वास थां कि उस जासूस केँ पास रिवाल्वर अवश्य होगा। यही वजह थि कि वोँ खुलकर उसके सामने नहि जारहा थां।
निरंजन केँ चेहरे पऱ प्रतिपल बेचैनी बढ़ती जारही थि। क्योंकि उसेपता थां कि जासूस अगर यहाॅ सें चला गय़ा तोँ फिनउसे ढूॅढ़ पाना मुश्किल होगा। अतः वो बारबार देवीमाॅ सें प्रार्थना कररहा थां कि केशवजी सारे आदमियों कों लेकर जल्द आँ जाएॅ। उसकी नज़र सामने हि थि। जहाॅ पल्सर बाइक केँ पास नीचे बैठा वोँ जासूस कुछकर रहा थां। जासूस कां चेहरा उसकेबगल सें दिखरहा थां। निरंजन केँ मन मे कईबार यह ख़याल आया थां कि वोँ चुपके सें जाए औऱ उस जासूस कों दबोच लें मगर अगले हि लम्हा वोँ उसकेपास जाने कां अपनायह ख़याल त्याग देता थां। क्योंकि बारबार उसे उसकेपास रिवाल्वर होने कां बोधकरा देता थां। उसनेआस पासदेख भि लिया थां। पास मे कहीं भि उसेकोई डंडे जैसी वस्तु भि न् नज़रआई थि जिसे लेकर वोँ उस जासूस केँ पासचला जाता।
अभि निरंजन उस जासूस कों देख हि रहा थां कि तभी वोँ जासूस उठकर खड़ाहुआ औऱ अपने दाहिने पांव कों बाइक केँ आगे वाले पहिये पऱ रिम मे रखकरउस पर्र ज़ोर सें दबाव बनाया। यहदेख कर निरंजन केँ मस्तिष्क मे झनाका सां हुआ। एकाएक हि उसके दिमाग़ कि बत्ती जलउठी। साला इतनीदेर सें वोँ समझ नहि पारहा थां कि यह जासूस बाइक केँ पास बैठाकर क्याँ रहा थां? अबउसे समझआया थां। दरअसल बाइक कां अगला पहिया पंचर थां अथवा उसमें हवाकम थि। पहिये पऱ निरंजन कां ध्यान पहलीबार गय़ा थां। उसने ग़ौर सें देखा पहिये पऱ जहाॅ पऱ सें हवाभरी जाती हैं वहाॅ पऱ कोई पतली सि तार याँ फिनयू कहें कि पतला सां पाइपलगा हुआ थां। जिसका दूसरा सिराइस टाइमउस जासूस केँ दाहिने हाॅथ मे थां।
निरंजन कों समझ नं आया कि अगर बाइक कां अगला पहिया पंचर हैं याँ उसमेहवा कम हैं तोँ वोँ जासूस यहाॅ पर्र उसेठीक केसेकर लेगा औऱ यह पतला सां पाइप क्यूं लगारखा हैं उसने पहिये कि निब पऱ? तभी वोँ जासूस पुनःबैठ गय़ा। इसबार निरंजन नें भि अपनी स्थान बदली औऱ फिन ध्यान सें देखा उसने। पाइप कां दूसरा सिराउस जासूस नें अपने होठों पऱ दबाया औऱ फिन निरंजन नें देखा कि जासूस केँ दोनोगाल फूलगए। यहदेख कर निरंजन कि हॅसीछूट हि गई होतीअगर उसने जल्द सें अपनेमुह कों अपने हाथों सें भींच न् लिया होता तौ। दरअसल वोँ जासूस पाइपलगा करमुह सें हवाभर रहा थां पहिये पऱ। बसयही देखकर निरंजन कों बड़ी ज़ोर कि हॅसी आँ गई थि। उसने सोचा कि इसे जासूस किसने बना दिया?भला मुह सें भि कोई बाइक केँ पहिये पर्र हवा भरता हैं? यह तौ दुनिया कां सबसे बड़ा आश्चर्य हि हैं।
निरंजन नें भि सोचा कि बेचारा यहाॅ पऱ बाइक मे हवा भरवाए भि तोँ केसे? लेकिन मुख सें हवा तौ भरने सें रही। कहने कां मतलबयह कि जासूस कि इस क्रिया पऱ निरंजन उसे बेवकूफ हि समझरहा थां। मगर वोँ उससमय हैरान रह गय़ा जब वोँ जासूस पुनःउठा औऱ पहले कि भाॅति अपना दाहिना पांवरिम मे रख दबाव बनाया। उसके चेहरे सें ज़ाहिर हुआ कि अब वोँ संतुष्ट हैं। उसनेझुक कर जल्दी हि पाइप कों पहिये केँ निब सें निकाला। निरंजन नें देखा कि निब केँ पासलगे पाइप केँ उसछोर पऱ कोई चीज़लगी हुइ थि। यहदेख कर निरंजन कां दिमाग़ घूम गय़ा। चकित होकर वो उस जासूस कों देखेजा रहा थां। अबउसे समझआया कि वोँ जासूस यूॅ हि तोँ नहि बन गय़ा होगा। अवश्य उसमें काबीलियत थि।
अभि निरंजन यहसभी सोच हि रहा थां कि तभी उसने देखा कि वोँ जासूस उस पाइप कों लिए बाइक केँ बाएॅ साइडआया औऱ फिन अपनी दाहिनी टाॅगउठा कर बाइक कि सीट पर्र बैठ गय़ा। यहदेख कर निरंजन एकदम सें हड़बड़ा गय़ा। वोँ समझ गय़ा कि अबयह जासूस यहाॅ सें चला जाएगा। निरंजन कों समझ नं आया कि वोँ उसे केसे यहाॅ सें जाने सें रोंके? वोँ स्वयं निहत्था थां वरना वोँ कोई जोखिम उठाने कां सोचता भि। उसे पूरा यकीन थां कि उस जासूस केँ पास पिस्तौल होगी। यही वजह थि कि वोँ उसकेपास खुलकर जा नहि रहा थां। लेकिन अब हालात बदलगए थें। क्योंकि निरंजन कि ऑखों केँ सामने हि वोँ जासूस बाइक पर्र बैठ चुका थां औऱ अबयह भि तय थां कि वोँ बाइक कों स्टार्ट कर यहाॅ सें चला हि जाएगा।
निरंजन नें देखा कि बाइक पर्र बैठा जासूस उस पतले सें पाइप कों गोलगोल छल्ली कि शक्ल देकर समेटरहा थां। उसकीपीठ निरंजन कि तरफ हि थि। पाइप कां दूसरा सिरा जासूस कि दाहिनी जाॅघ सें थोडा हि नीचेझूल रहा थां औऱ प्रतिपल ऊपर कि तरफ उठता भि जारहा थां। यहदेख कर निरंजन केँ दिमाग़ कि बत्ती जली। उसके चेहरे पर्र एकाएक हि कुछसोच करचमक आँ गई। वोँ फुर्ती सें अपनी स्थान सें हिला औऱ फिन बड़ी सावधानी व सतर्कता सें लम्बे लम्बे क़दम बढ़ाते हुए जासूस केँ पीछे पहुॅच गय़ा।
हरीश राणे कों सहसा अपने पीछे किसी कि मौजूदगी कां एहसास हुआ। उसनेइस एहसास केँ तहत हि जल्द सें पीछे मुड़कर देख्ना चाहामगर अगले हि समय जैसे बिजली सि कौंधी। निरंजन नें डरवभय कि वजह सें बड़ी हि फुर्ती कां प्रदर्शन किया थां। उसने जासूस केँ मुड़ने सें पहले हि झुककर जासूस केँ नीचे जाॅघ केँ पास झूलते उस पाइप कों पकड़ा औऱ फिन तेज़ी सें खड़े होकरउसी छोर सें दूसरा हाॅथ सरकाकर उसने जासूस केँ सिर सें अपनी एक् कलाई घुमाकर बड़ी फुर्ती सें उस पाइप कों जासूस कि गर्दन पऱ कस दिया।
हरीश राणे कों ज़रा भि उम्मीद नहि थि कि उसकेसंग पलक झपकते हि ऐसाकुछ हौ सकता हैं। वो एकदम सें हकबका कररह गय़ा थां। हलाॅकि उसने स्वयं कों बड़ी तेज़ी सें सम्हाला थां मगरतब तक उसकेगले मे निरंजन नें उस पाइप कों किसी फाॅसी केँ फंदे कि तरहकस दिया थां। निरंजन यहसोच करजीजान लगाएहुए थां कि अगर उसने ज़रा सि भि ढील दि तोँ यह जासूस उसेजान सें मार देगा। निरंजन केँ दिमाग़ मे बस एक् यहीबात थि, बाॅकी उसे किसीबात कां कोईहोश हि नहि थां। उसेइस बात कां ज़रा भि इल्म नहि रह गय़ा थां कि उसके द्वारा इतनी ताकत सें गले मे पाइप कों कसने सें वोँ जासूस कुछ हि पलों मे मर भि सकता हैं।
उधर राणेजल बिन मछली कि तरह छटपटाए जारहा थां। वोँ अपने दोनो हाथों सें अपनेगले मे फॅसे पाइप कों पकड़ने कि कोशिश कररहा थां मगर पाइप मे निरंजन कि पूरी ताकतलगी हुईँ थि। जिसकी वजह सें राणेउसे हिला भि नहि पारहा थां। देखते हि देखते राणे कां बुराहाल होँ गय़ा। उसका सफ़ेद चेहरा लाल सुर्ख पड़ गय़ा। चेहरे पऱ पसीना औऱ उतावलापन साफपता चलरही थि। किसी किसीसमय वो खाॅसने भि लगता थां। उसकी ऑखों कि पुतलियाॅ जैसे बाहर् कूद पड़ने कों आतुर होँ उठीथीं।
राणे कि हालत प्रतिपल बिगड़ती जारही थि। बाइक पर्र बैठा वो बुरीतरह स्वयं कों झटके भि देरहा थां मगर मजाल हैं कि निरंजन कि पकड़ मे ज़रा सां भि ढीलापन आया हौ। कहते हें कि मौत सें बचने केँ लिए इंसान अंत तक हरतरह सें प्रयास करता हैं फिनभले हि उसके प्रयास विफल हि होते रहें। निरंजन केँ सिर पऱ जुनून सवार थां औऱ वोँ किसी यमराज कि तरह राणे केँ सिर पर्र आँ खड़ाहुआ थां। राणे कों एहसास होँ गय़ा कि अब वोँ मरने हि वाला हैं। उसेअब साॅस लेना भि मुश्किल पड़रहा थां। बुरीतरह छटपटाते हुए राणे नें एकाएक अपने एक् हाॅथ कों गले मे फॅसे पाइप सें हटाकर उसी हाॅथ कि कुहनी कां वार बड़ी तेज़ी सें पीछे निरंजन केँ पेट केँ हल्का ऊपरीभाग पर्र किया। उसकेइस वार सें निरंजन केँ हलक सें पीड़ा भरी कराह निकल गई औऱ उसकी पकड़तथा उसकी ताकत कमज़ोर पड़ गई। हलाॅकि उसने जल्द सें उस दर्द कों बर्दास्त करके पुनः पाइप कों कसना चाहामगर तक मानोदेर होँ गई। क्योंकि जैसे हि निरंजन नें पुनः ताकत लगाई वैसे हि राणे नें कुहनी कां वार जल्द जल्दकई बार निरंजन केँ पेट मे कर दिया थां। नतीजा यहहुआ कि निरंजन कि पकड़ बहुत अधिक ढीलीव कमज़ोर पड़ गई। वो बुरीतरह दर्दव पीड़ा सें बिलबिला उठा थां।
निरंजन केँ कमज़ोर पड़ते हि हरीश राणे नें बड़ी तेज़ी सें अपनेगले सें उस पाइप कों पकड़कर खींचा औऱ फिनउसे ऊपर करतेहुए सिर सें निकाल दिया। हालत तौ उसकीअब भि बहोत ख़राब थि। बुरीतरह खाॅसरहा थां तथा बुरीतरह गहरी गहरी साॅसें भि लेँ रहा थां। सफ़ेद चेहरा लाल सुर्ख पड़ गय़ा थां। चेहरे पर्र ढेर सारा पसीना उभरआया थां। गले सें पाइप कों निकालते हि वो बाइक सें स्वयं कों बाएॅ साइड गिरा लिया थां तथासंग हि कई पलटियाॅ भि खा लिया थां। मगरतब तक उसकी पसली मे निरंजन केँ बूट कि ज़बरदस्त ठोकरलग चुकी थि। निरंजन जानता थां कि अगर वो अब भि उसे सम्हलने कां मौका दिया तौ वोँ उसकेलिए कालबन सकता हैं। अतः वो मौत केँ डर सें उस पर्र वार पे वार कियेजा रहा थां।
हरीश राणे अभि अभि मौत सें बचकर निकला थां। इसलिए उसे स्वयं पर्र नियंत्रण पाने केँ लिएकुछ वक़्त चाहिए थां मगर निरंजन थां कि उस पऱ प्रहार कियेजा रहा थां। अचानक हि निरंजन नें देखा कि जासूस नें अपने हाॅथ कों पीछे लें जाकर रिवाल्वर निकाल रहा हैं। यहदेख कर निरंजन केँ समूचे बदन मे मौत कि सिहरन दौड़ गई। जैसे हि राणे नें रिवाल्वर निकाल कर अपने हाॅथ कों निरंजन कि तरफ उठाना चाहा वैसे हि मौत केँ डर सें निरंजन नें उसकीउस कलाई पर्र अपनी टाॅगचला दि। नतीजा यहहुआ कि राणे केँ हाॅथ सें रिवाल्वर छूटकर दूरजा गिरातथा कलाई पऱ तेज़ ठोकर लगने सें वोँ दर्द सें कराहउठा।
निरंजन नें देखा कि रिवाल्वर उसकी पहुॅच मे हि हैं इसलिए वोँ जल्द सें रिवाल्वर कि तरफ लपकामगर तभी वो मुह केँ बल ज़मीन पऱ गिरा। गिरते हि उसकेमुख सें चीख़ निकल गई। राणे नें पलटकर उसकापेर पकड़कर खींच लिया थां जिससे वोँ अनबैलेंस होकरमुह केँ बल गिरा थां। रिवाल्वर उसकी पहुॅच सें करीब-करीब डेढ़दो हाॅथ हि दूर थां। इधर निरंजन कां पेर पकड़कर खींचते हि राणे उसकेऊपर एकदम सें आने कि कोशिश कि तौ निरंजन घबराकर पलट गय़ा। नतीजतन इसबार राणेमुह केँ बल गिरा। लेकिन उसके एक् हाॅथ मे निरंजन कां पेर अभि भि थां।
निरंजन नें अपनेपेर कों उससे छुड़ाने केँ लिए ज़ोर सें झटका दियामगर उसकापेर तोँ न् छूटा लेकिन झटकने सें उसकापेर राणे कि छाती सें टकराया। निरंजन आवेश औऱ घबराहट मे अपने पांव कों झटका देता हि रहा, जिसका नतीजा यहहुए कि बारबार छाती पऱ उसका पांव ज़ोर सें लगने सें आख़िर राणे कों उसकापेर छोंड़ना हि पड़ा। इधर निरंजन जोँ कि दोनो हाॅथ पीछे कि तरफ ज़मीन पऱ टिकाकर बैठ चुका थां वोँ अपने पाॅव केँ आज़ाद होते हि तेज़ी सें रिवाल्वर कि तरफपलट कर करीबउस पर्र कूद सां गय़ा। उसके हाॅथ मे रिवाल्वर आँ चुका थां। अभि वो रिवाल्वर केँ संग पलटा हि थां कि तभी राणे उसकेऊपर जंपमार कर आँ गय़ा।
राणे नें जल्दी हि निरंजन केँ रिवाल्वर वाले हाॅथ कों पकड़ने केँ लिए अपना एक् हाॅथ बढ़या तौ निरंजन नें अपनेउस हाॅथ कों ऊपर अपनेसिर केँ पीछे साइडकर लिया। राणे जैसे हि उसे पकड़ने केँ लिएउस तरफ झुका वैसे हि निरंजन नें अपना दूसरा हाॅथ छुड़ा कर ज़ोर सें एक् मुक्का राणे कि कनपटी मे मारा जिससे राणे उसकेऊपर सें दूसरी तरफपसर गय़ा। इधर राणे केँ गिरते हि निरंजन लेटे लेटे हि एक् संगतीन चार पलटियाॅ खाताचला गय़ा। जब तक राणेउठ कर उसकेपास पहुॅचता तब तक निरंजन उठकरबैठ चुका थां, संग हि रिवाल्वर वाला हाॅथ भि ऊपरउठा करउस पर्र तान चुका थां।
"रुकजा मादरजाद। " निरंजन आवेश मे जल्द सें चिल्लाया थां___"वरना इस रिवाल्वर कि सारी गोलियाॅ तेरे सीने मे उतार दूॅगा औऱ यह मे यूॅ हि नहि कहरहा हूॅ बल्कि सचमुच ऐसाकर भि दूॅगा। क्योंकि तुम्हारी तरफजान सें मार देने पऱ भि मुझेकुछ नहि वाला। बल्कि इनाम हि मिलेगा मुझे। "
हरीश राणे निरंजन कां यह डायलाॅग तथा उसके खतरनाॅक लहजे कों देखकर एकदम सें अपनी स्थान पर्र गय़ा। उसके चेहरे पर्र पहलीबार डरवभय केँ चिन्ह नज़रआए। लेकिन उसेयह समझ नहि आया कि यह व्यक्ति हैं कौन औऱ उसके पीछे उसकीमौत बनकर कहाॅ सें आँ गय़ा थां? क्याँ यह विराज व रितू कां व्यक्ति हैं जोँ उसके पीछे हि लगाहुआ थां?
"कौन हौ तुम्?" हरीश राणे नें सतर्क भाव सें पूछा___"औऱ इसतरह मुझ पऱ जानलेवा हमला करने कां क्याँ मतलब हैं तुम्हारा?"
"जिसतरह तूँ मंत्री कां कुत्ता बनकर हमारे बाॅस केँ अज़ीज़ लोगों केँ पीछेलगा हुआ थां। " निरंजन नें लहजे कों कठोर बनाते हुए कहा___"उसी तरह मे भि तेरे पीछेलगा हुआ थां। ख़ैर, अब तुँ पकड़ मे आँ हि चुका हैं तोँ यह भि समझ गय़ा होगा कि अब तेरा क्याँ हस्र होने वाला हैं?"
"ओह तोँ तुम्हें यह ग़लतफहमी हैं। " हरीश राणे नें बड़े अजीबभाव सें कहा____"कि तुमने मुझे पकड़ लिया हैं?"
"अधिक शेखीमत झाड़। " निरंजन उसकीबात पर्र गड़बड़ा सां गय़ा, फिन बोला___"वरना बता हि चुकाहूॅ कि तुम्हें जान सें मार देने पऱ मुझेकुछ नहि होगा बल्कि इनाम हि मिलेगा। "
"अच्छा। " हरीश राणे सहसा मुस्कुराया___"तौ फिनदेर किसबात कि हैं प्यारे? तुम्हारे निशाने पऱ हूॅ, समाप्त करदो मुझे औऱ जल्द सें अपना इनाम भि हाॅसिल करलो। "
"लगता हैं। " निरंजन अंदर हि अंदर हैरान___"कि तुम्हें मरने कि बहोत जल्द हैं। "
"क्याँ करें साथी?" राणे नें कहा___"अब जब तुमने कह हि दिया हैं ऐसा तौ फिनदेर किसबात कि करना? मुझे लगता हैं कि तुम्हें भि अपना टाइम बर्बाद नहि करना चाहिए। अतः मेरी सलाह मानो औऱ जल्द सें मुझे ख़त्म करदो। "
निरंजन उसकीइस बात पऱ समझ न् सका कि यह जासूस आख़िर हैं किस किस्म कां ब्यक्ति? मौत सामने खड़ी हैं औऱ यहऐसी बातें कररहा हैं। इसे ज़रा भि मौत कां ख़ौफ नहि हैं। जबकि निरंजन तौ बसउसे डरा औऱ धमका हि रहा थां। ताकि वो कोई बेजा हरकत करने कि कोशिश न् करे। उसे पता थां थोड़ी हि देर मे उसके बाॅस यानी कि केशव शर्मा अपने आदमियों सहित यहाॅ पहुॅच हि जाएॅगे। अतःतब तक उसेइस जासूस कों रोंके रखना थां। मगर उसकीइन ऊल जुलूल बातों नें उसकासिर चकराकर रख दिया थां।
"क्याँ सोचने लगे प्यारे?" हरीश राणेउसे चुपदेख करकह उठा___"अरे भई चलाओ गोलीमुझ पऱ औऱ समाप्त करो मुझे। तुम् तौ दोस्त लगता हैं बस डींगे हि मारना जानते होँ। जबकि मुझसे अब इन्तज़ार नहि होँ रहा। "
"ओये ज़्यादा बकवास नं कर समझा। " निरंजन नें उत्तेजित भाव सें कहा___"वरना सच मे तेराराम नाम सत्यकर दूॅगा मे। "
हरीश राणेकोई मामूली इंसान नहि थां। घुटाहुआ जासूस थां, उसे समझते देर नं लगी कि निरंजन उसे मात्र धमकारहा हैं। अगरउसे जान सें मारना हि होता तौ इतनी बातें न् करता बल्कि कब कां उसे यमलोक पहुॅचा दिया होता। अतः उसने पूरी सतर्कता सें निरंजन कि हर गतिविधी कों नोट करतेहुए बेख़ौफ निरंजन कि तरफ बढ़ने लगा। यह देखकर निरंजन अंदर हि अंदर बुरीतरह घबरा गय़ा। संग हि उसके दिमाग़ नें काम करना भि बंदकर दिया। उसे समझ नं आया कि यह सालाअब उसकीतरफ क्यूं बढ़रहा हैं?
"यह.यह तूँ क्याँ कररहा हैं मादरजाद?" बुरीतरह बौखलाते हुए निरंजन हकलाते हुएबोल उठा____"मे कहताहूॅ रुकजा वरनासच मे गोलीमार दूॅगा तुम्हे। "
"मे भि तौ यही चाहता हूॅ प्यारे। " हरीश राणे नें मुस्कुराते हुए कहा___"मगर तुम् होँ कि मुझेजान सें मारते हि नहि। इसलिए अब मे स्वयं हि तुमसे रिवाल्वर लेकर स्वयं कों गोलीमार लूॅगा। मुझेसमझ आँ गय़ा हैं कि तुमसे रिवाल्वर चलाया नहि जाएगा। "
"तुँ.तूँ पागल हैं क्याँ रे?" निरंजन हैरान परेशान सां बोल पड़ा___"देख मेरीतरफ मत आँ। वरनाअगर मेरा भेजा गर्म हौ गय़ा नं तोँ तुँ सच मे मेरे हाॅथों मारा जाएगा। "
"नहि प्यारे। " हरीश राणे बोला___"मुझे पताचल गय़ा हैं कि अब तुम् मुझे गोली नहि मार सकते। क्योंकि तुम्हें मुझसे अचानक हि बेइंतहां मुहब्बत हौ गई हैं। ओह, यह इश्क भि न् बहोत बुरी चीज़ होती हैं कम्बख़्त। "
"साले। " निरंजन उसकी बातों सें बुरीतरह भन्ना गय़ा, बोला___"तुम को एक् बार मे बातसमझ मे नहि आती हैं क्याँ? अबअगर एक् क़दम भि आगे बढ़ाया तूने तोँ देख लेना यहीं पऱ ढेरहुआ नज़र आएगा। "
"ऐसा ग़ज़ब मत करना प्यारे। " राणे चहका___"ऐसा लगता हैं कि तुम्हारी तरह मुझे भि तुमसे मुहब्बत होँ रही हैं। ओह नहि नहि.मुझे किसी सें भि मुहब्बत नहि होँ सकती। खास कर उससे तौ हर्गिज़ भि नहि जोँ स्वयं हि मेरीतरह औज़ार लिए फिरता होँ। "
निरंजन बोला तोँ कुछ नहि लेकिन उसे एहसास हुआ कि फालतू कि बकवास करतेहुए यह जासूस उसके बहुतपास आँ गय़ा हैं। अभि निरंजन यहसोच हि रहा थां कि अचानक हि मानो बिजली सि कौंधी। हरीश राणे नें हैरतअंगेज़ कारनामा किया थां। पलक झपकते हि उसकाबदन हवा मे लहराया औऱ इससे पहले कि निरंजन कुछसमझ पाता राणे उसकोलिए ज़मीन पर्र कई पलटियाॅ खाताचला गय़ा। निरंजन केँ हाॅथ सें रिवाल्वर जानेकब छूट गय़ा थां। अपनेऊपर हुएइस अप्रत्याशित हमले सें निरंजन बुरीतरह बौखला गय़ा थां। जब तक उसेकुछ होशआया तब तक देर हौ चुकी थि।
पलटियाॅ खाने केँ बाद राणे सबसे पहलेउठा औऱ फिन उसने निरंजन कों कुछ भि करने कां अवसर नहि दिया। लात घूॅसों कि बरसात सि कर दि उसने। निरंजन कि चीख़ें फिज़ा मे गूॅजती रही।
"हमनेकहा थां न् प्यारे। " हरीश राणे निरंजन कि छाती पर्र बैठाहुआ बोला___"कि तुमसे रिवाल्वर नहि चलाया जाएगा। हमने तौ यह भि कहा थां कि हमें ख़त्म करदोमगर नहि तुम्हें तौ हमसे इश्क होँ गई थि न्। अब भुगतो मेरीजान। पीछे सें वार करने वाला कायर बुज़दिल व हिंजड़ा होता हैं औऱ यहसभी बातें तुम् मे हें, यह तुमने पहले हि साबित कर दिया थां। "
अभि राणेयह सभी निरंजन कों बोल हि रहा थां कि तभी वातावरण मे वाहनों केँ आने कां हंगामा गूॅजा। हरीश राणेयह महसूस करते हि बुरीतरह उछल पड़ा। उसनेपलट कर देखा हि थां कि निरंजन नें तेज़ी सें एक् मुक्का उसकी गर्दन केँ पासजड़ दिया। जिससे एक् चीख़ केँ संग राणेपलट कर नीचेगिर गय़ा। उसके गिरते हि निरंजन उठा औऱ सबसे पहले उसने राणे कि पसली मे बूट कि ज़ोरदार ठोकर मारी। ठोकर लगते हि राणे दर्द सें बिलबिला उठा।
इधर देखते हि देखते चारोतरफ सें केशवजी नें तथा उनके आदमियों नें दोनो कों घेर लिया। कुछ लोग दौड़ते हुएआए औऱ हरीश राणे कों पकड़ लिया। हरीश राणेसमझ गय़ा कि अबकुछ नहि हौ सकता। अतः उसने भि समझदारी कां परिचय दिया औऱ बिनाकोई हील हुज्जत किये उनके द्वारा पकड़कर लें जाने सें चला गय़ा। थोड़ी हि देर मे वो केशवजी केँ आदमियों केँ बीचजीप मे बैठा थां। उसके दोनो हाॅथ पीछे कि तरफ करके रस्सी सें बाॅध दियेगए थें। उसका जौ रिवाल्वर लड़ते समय निरंजन केँ हाॅथ सें छूटकर गिर गय़ा थां उसे निरंजन नें फिन सें उठाकर अपनेपास रख लिया थां। हरीश राणे कों लिए वोँ काफिला वापस रेवती केँ लिएचल पड़ा थां। केशवजी राणे कों पकड़कर बेहदखुश थें। उन्होंने निरंजन कों इसकेलिए शाबाशी दि तथायह भि कहा कि उसने वास्तव मे बहोत बड़ाकाम किया हैं इसलिए उसे इसकेलिए इनाम अवश्य मिलेगा। निरंजन इनाम कि बात सें बेहदखुश होँ गय़ा थां। इतना हि नहि जासूस कों पकड़वाने सें उसकासिर गर्व सें ऊॅचा होँ गय़ा थां।
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उधर हास्पिटल मे।
हम् सभी बुझे बुझे सें बैठे थें। नीलम केँ लिएहर कोई चिंतित व परेशान थां। हम् मे सें किसी कों भि यह उम्मीद नहि थि कि अजय सिंहऐसा कुछकर सकता हैं। वरनाऐसा होता हि नहि। ख़ैर, लम्बे इन्तज़ार केँ बाद आख़िर ओटी कां दरवाजा खुला औऱ डाॅक्टर बाहर् आया। हम् सभीउसे देखकर एक् संग एक् हि झटके सें उस लम्बी चेयर सें उठकर खड़े होँ गए थें। फिन करीब-करीब एक् संग हि डाॅक्टर कि तरफ लपके थें।
"डाॅक्टर साहब। " मैने उतावलेपन सें लेकिन बेहद हि अधीरभाव सें पूछा___"सभी कुछठीक तौ हैं नं? नीलमठीक तोँ हैं नं?"
"डोन्ट वरीयंग मैन। " डाॅक्टर नें कहा___"वोँ अब ख़तरे सें बाहर् हें। शुकर थां कि बुलेट उनकी राइट साइड कि पीठ पऱ थोडा निचले हिस्से पर्र लगी थि। अगर लेफ्ट साइड थोडा ऊपर लगती तोँ यकीनन वोँ गोली उनकेदिल कों भेद सकती थि। हमने बुलेट निकाल दिया हैं। अब वोँ ठीक हें। थोड़ी देरबाद उन्हें दूसरे कमरे मे शिफ्ट कर दिया जाएगा तौ आप् सभी उनसेमिल सकेंगे। "
"ओह थैंक्यू डाॅक्टर। " आदित्य बोल पड़ा___"थैंक्यू सोमच। आपने बहोत बड़े संकट सें बचा लिया। "
"थैक्यू तौ आप् लोगों कां भि करना चाहिए। " डाॅक्टर नें कहा___"जौ आप् टाइम रहते उन्हें यहाॅ लाने मे कामयाब हौ गए। वरना सचमुच कुछ भि होँ सकता थां। मुझे मोबाइल पर्र एसीपी साहब नें इस बारे मे बता दिया थां औऱ कहा भि थां कि जैसे हि आप् लोग यहाॅआए वैसे हि हम् उनका जल्दी इलाज़ शुरुआत करदें। "
थोड़ी देर डाॅक्टर सें औऱ बातचीत हुइ उसकेबाद वोँ चला गय़ा। हम् सभीअब खुश थें कि नीलमअब ठीक हैं। थोड़ी हि देर मे एक् नर्सआई उसने बताया कि हम् नीलम सें मिल सकते हें। अतः उसके कहने केँ संग हि हम् सभी करीब-करीब दौड़ते हुए नर्स केँ पीछे पीछेगए औऱ उस कमरे मे दाखिल होँ गए जिसमें नीलम कों शिफ्ट किया गय़ा थां।
कमरे मे पहुॅचते हि हमने देखा कि हास्पिटल वालेबेड पऱ नीलम करवॅट केँ बल लेटी हुई थि। उसका चेहरा दरवाजे कि तरफ हि थां लेकिन ऑखेंबंद थि। हम् लोगों केँ आने कि आहट पाते हि उसने अपनी ऑखेंखोल दि। जैसे हि उसनेहमे देखा उसके चेहरे पर्र एक् संगकई तरह केँ भावआए औऱ फिन सहसा उसके होठों पऱ फीकी सि मुस्कान फैल गई।
रितू दिदी व सोनम दिदी एक् संग हि उसकीतरफ बढ़ीं औऱ उसकेपास खड़ी होँ गई। रितू दिदी नें नम ऑखों सें उसके माथे सें होतेहुए सिर पर्र हाॅथ फेरा औऱ फिनझुक कर उसके माॅथे कों चूम लिया। उनकेमुख सें कोई लफ्ज़ नहि निकला। कदाचित कुछ कहने कि हिम्मत हि नं हुईँ थि उनमें। लेकिन इस क्रिया सें हि उन्होंने जता दिया कि उसकेठीक होने पऱ उन्हें कितनी खुशी हुइ हैं। सोनम दिदी भि नम ऑखों सें नीलम कों देखरही थि।
"ईश्वर कां लाखलाख शुकर हैं नील। " सोनम दिदी उसे प्रेम सें नीलकहा करती हें, बोलीं____"उसने तुम कोकुछ नहि होने दिया वरनाजब तुम्हे गोलीलगी थि नं तौ जैसे हम् सबके जिस्मों सें प्राण हि निकलगए थें। "
"यह ज़िंदगी उसी गंदे इंसान कि दि हुइ थि दिदी। " नीलम नें करुणभाव सें कहा___"जिसे उसने गोलीमार कर अपनीतरफ सें अब समाप्त कर दिया हैं। अबयह मेरा दूसरा जन्म हैं जिसमें अब उसकाकोई हक़ नहि हैं। बल्कि आप् लोगों कां हैं। " कहने केँ संग हि नीलम नें रितू दिदी कि तरफ देखाफिन बोलि___"मुझे आप् पऱ नाज़ हैं दिदी कि आपनेराज कां संग दिया औऱ सच्चाई कां संग दिया। आज आपकी हि वजह सें हम् सभीउस शैतान सें बचकर यहाॅ आँ गए हें। "
"संग तोँ हमेशा उसी कां देना चाहिए नीलम। " रितू दिदी नें कहा___"जिसका संग देने सें हमारे ज़मीर तथा हमारी आत्मा कों तक़लीफ न् हौ बल्कि उन्हें तृप्ति कां एहसास हौ। माॅ बाप हमेशा वंदनीय होते हें औऱ वोँ मेरेलिए भि हमेशा रहेंगे लेकिन वोँ माॅ बाप जिनकी अच्छी छवि मे मन मे हैं नाँ कि वोँ जोँ अपनी हि बहू बेटियों केँ बारे मे ग़लत सोचते हें। थोडा बहोत जौ सम्मान बाॅकी थां उनकेलिए वोँ आज कि इन घटनाओं सें पूरीतरह ख़त्म होँ चुका हैं। अबइसदिल मे उनकेलिए मात्र औऱ मात्र नफ़रत व घृणा हैं। आजअगर तुम्हे कुछ हौ जाता न् तौ क़समऊपर वाले कि मे उस इंसान कां वोँ हाल करती कि दुबारा इस धरती पर्र पैदा होने सें इंकार कर देता। "
"जाने दीजिए दिदी। " नीलम नें कहने केँ संग हि मेरीतरफ देखा, फिन मुस्कुरा कर बोलीं____"एक् तरह सें यह अच्छा हि हुआ। इसी बहाने सहीमगर मुझेआज अपनेइस भइया कां अपनेलिए इतना सारा प्रेम व उतावलापन तौ देखने कों मिल गई। मे महसूस कररही थि उससमय जब मे इसकी बाहों मे असहाय सि पड़ी थि। मेरे कानों मे इसकीहर बात सुनाई देरही थि। मे सोचरही थि कि एक् मेरा वोँ भइया थां जिसने कभीयह नहि जताया कि वोँ अपनी बहनों सें कितना प्रेम करता हैं औऱ एक् यह भइया हैं जिसे हमने बचपन सें जलील करकेदुख दियाआज वोँ मुझेउस हालत मे देखकर ऐसे उतावलापन रहा थां जैसे गोली मुझे नहि बल्कि इसकोलगी थि। यह ख़याल बारबार मन मे आता हैं कि इतना प्रेम करने वाले भइया सें हमनेअब तक इतनी घृणा केसे कि थि?"
"ओये बंदरिया। " मे एकदम सें उसकेपास आकरबोल पड़ा____"यह क्याँ बकवास कियेजा रही हैं तूँ? तुझसे मे कोई प्रेम, व्यार नहि करता समझी। उस टाइम तौ मे वोँ सभी नाटककर रहा थां। "
"चलठीक हैं भइया। " नीलम नें मुस्कुरा कर कहा___"मान लिया कि वोँ सभी तेरा नाटक थां मगरसच कहूॅ तौ मुझे वोँ तेरा नाटक भि बहोत भायाराज। मे चाहती हूॅ कि तुँ जिंदगी भर मेरेसंग ऐसा हि नाटक करतारहे। "
"अब तुम् दोनो यहीं पऱ नं शुरुआत होँ जानां। " सहसा सोनम दिदी नें मुस्कुराते हुए कहा___"जाओ जाकरपता करो डाॅक्टर सें कि हम् इसे यहाॅ सें कब तक लें जा सकते हें?"
"अरे इसकी क्याँ ज़रूरत हैं दिदी?" मैने मुस्कुरा कर कहा___"मे तौ कहताहूॅ कि इसे यहीं पर्र पड़ी रहने देना चाहिए औऱ हम् लोगों कों अबघऱ चलना चाहिए। "
"तूँ नं अब मुझसे पिटेगा सच मे। " सोनम दिदी नें ऑखें दिखाते हुए कहा___"अब जा जल्द यहाॅ सें। "
"जौ हुकुम आपका। " मैनेअदब सें सिर झुकाकर कहा औऱ फिन कमरे सें बाहर् चलाआया। मेरे पीछे पीछे आदित्य भि मुस्कुराता हुआचला आया।
"मेरे भइया कों इसतरह भगाकर आपने अच्छा नहि किया दिदी। " सहसा नीलम नें कहा___"जब वोँ मुझेइस तरह चिढ़ाता हैं तौ मुझे भि बड़ा अच्छा लगता हैं। मे भि उसके जैसा हि व्यवहार करने लगतीहूॅ। मे चाहती हूॅ कि जिन चीज़ों केँ लिए वोँ बचपन सें तरसा थां वोँ उनसब चीज़ों कों आजजीभर केँ जिए। हमारी वजह सें अब तक जितना उसकादिल दुखा हैं अब वोँ हमारे संगऐसी हि नोंक झोंक करके अपनेउस दिल कों खुशरखे। "
"मुझेपता हैं नील। " सोनम दिदी नें कहा___"मुझे भि अच्छा लगता हैं जब वोँ तुम्हारी तरफइस तरह बंदरिया कहकर चिढ़ाने लगता हैं। लेकिन मे उसेयह सभीकह करइसलिए रोंक देतीहूॅ कि मुझे भि बड़े होने कां इसतरह सें फायदा उठाने मे मजाआता हैं। मे यहदेख करखुश होँ जातीहूॅ कि केसे वोँ अपने सें बड़ों कि बात सहजता सें मान जाता हैं। अब रितू सें हि पूछ लें, यह तोँ उसकेसंग हि रहती हैं। संभव हैं कि यह भि मेरीतरह अपने बड़े होने कां फायदा उठाती होँ। क्यूं रितूसच कहा नं मैने?"
"सबकीसोच अलगअलग होती हैं सोनम। " रितू दिदी नें कहा___"तुम् दोनो कों ऐसा करके खुशी मिलती हैं जबकि मेराकुछ औऱ हि हिसाब हैं। तुम् तौ जानती हि होँ कि मेरा स्वभाव कैसा हैं?"
"हाॅ जानती हूॅ। " सोनम दिदी नें कहा___"कि तेरा स्वभाव हिटलर वाला हैं। मगरकभी स्वयं कों बदलकर भि देख। संभव हैं कि कुछनया नज़रआये। "
सोनम दिदी कि इसबात पर्र रितू दिदी मुस्कुराई औऱ कुछसमय केँ लिए कहींखो सि गईंफिन जैसे उन्होंने जल्दी हि स्वयं कों सम्हाला औऱ यहकहकर बाहर् कि तरफचली गईं कि उसेकुछ ज़रूरी मोबाइल काल करना हैं। रितू दिदी केँ जाने केँ बाद सोनम दिदी नें वापस नीलम कि तरफ देखा।
"तोँ आपको भि राज केँ संगऐसा करने मे मजाआता हैं?" नीलम नें मुस्कुराते हुएकहा।
"अरे नहि रे। " सोनम दिदी नें अजीबभाव सें कहा___"ऐसी कोईबात नहि हैं। मे तोँ ऐसे हि कहरही थि। ख़ैर छोंड़, अब तूँ ठीक हैं न्? तुम कोपीठ पऱ पेन तोँ नहि होँ रहा न् अभि?"
"नहि दिदी। " नीलम नें कहा___"अब अच्छा लगरहा हैं। बस सीधा लेटने मे प्राब्लेम होँ रही हैं। "
"वोँ तौ होगी हि। " सोनम दिदी नें कहा__"अभि नयानया ज़ख्म हैं। इसलिए तुझेही सीधा लेटने मे कुछदिन प्राब्लेम होगी। तेरी भि इसबात कां ख़याल रखना होगा औऱ हाॅराज केँ संग ज़्यादा उछलकूद मत करने लगना। वरना तेरायह ज़ख्म फिन सें ताज़ा हौ जाएगा। "
"ऐसा तोँ तभी संभव हैं दिदी। " नीलम नें मुस्कुराते हुए कहा___"जब वोँ मेरे सामने हि नं आए। क्योंकि जैसे हि वोँ मेरे सामने आएगा। मे फिनउसे छेंड़ूॅगी औऱ फिन क्याँ होगायह तोँ आप् जानती हि हें। "
"तुँ नहि सुधरने वाली। " सोनम दिदी नें हैरानी सें देखते हुए कहा___"अरे पागलकुछ दिन तौ सबरकर लेँ। "
"अरे दिदी! कुछदिन राज सें झगड़ा किये बिना केसेरह पाऊॅगी मे?" नीलम नें अहह सि भरतेहुए कहा___"पता नहि क्यूं पर्र उससे झगड़ा करने कां हर लम्हा दिल करता हैं मेरा। मे अकेले मे सोचा करतीहूॅ कि हर वक़्त राज कों छेंड़ना क्याँ अच्छी बात हैं? मगरयह सभी सोचने केँ बावजूद ऐसा हौ जाता हैं। आप् हि बताइये मे क्याँ करूॅ दिदी?"
सोनम दिदी नीलम कि बातसुन करबस मुस्कुरा कररह गई। उसके चेहरे पऱ कईतरह केँ भावआए औऱ चलेगए। जबकि उसकी मनोदशा सें अंजान नीलम नें इसबार ज़रा गंभीरता सें कहा___"एक् बात कहूॅ दिदी??"
"हम्म बोलो। " सोनम दिदी नें धीरे-धीरे सें कहा।
"काश! राज मेरा भइया नं होता। " नीलम नें धड़कते हुएदिल केँ संगकहा।
"यह.यह क्याँ कहरही हौ तुम्??" सोनम दिदी उसकीइस बात पऱ बुरीतरह चौंकी। ऑखों मे हैरत केँ चिन्ह लिए वोँ बोलीं___"इसके पहले तौ कहरही थि कि राज जैसा भइयापा कर तुँ बहोत खुश हैं। फिनअब ऐसा क्यूं कहरही हैं?"
"हर लड़की सोचती हैं कि उसेऐसा जिंदगी दोस्त मिले जोँ उससे बहोत हि ज़्यादा प्रेम करे। " नीलम नें कहीं खोयेहुए सें कहा___"उसकी केयरकरे तथाउसे एक् समय केँ लिए भि स्वयं सें दूर नं करे। उसे कभी किसीबात पऱ दुखी नं होनेदे। यह सारी खूबियाॅ राज मे हें दिदी। मुझेपता हैं कि वोँ अपनी बहनों पर्र अपनीजान छिड़कता हैं। मगरउसे देखकर यह ख़याल भि मन मे आता हैं कि काशराज केँ जैसा हि हमें जिंदगी मित्र मिले। मगर आज केँ टाइम मे यह संभव नहि हैं औऱ अगरमान भि लें कि ऐसे इंसान इस दुनियाॅ मे मिल भि सकते हें तौ क्याँ उनमें सें कोई हमारा जिंदगी मित्र बनेगा?"
"तौ तुँ कहना क्याँ चाहती हैं?" सोनम दिदी केँ चेहरे पऱ सशंकभाव उभरे।
"आपको मेरी बातें यकीनन बुरी अथवा ग़लत लगेंगी दिदी। " नीलम नें उसी गंभीरता सें कहा___"मगर यहसच हैं कि मेरेमन मे कभीकभी यह ख़याल आता हैं कि काशराज मेरा भइया नं होता तोँ मे उसे हि अपना जिंदगी मित्र बना लेती। राज कों देखते हि उस पऱ निसार हौ जाने कां दिल करता हैं दिदी। उसेदेख कर मे भूल जातीहूॅ कि वोँ मेरा भइया हैं, औऱ फिनजब ख़याल आता हैं कि वोँ मेरा भइया हैं तोँ जाने क्यूं इसबात सें दिल मे दर्द होने लगता हैं? अंदर सें एक् टीस उभरती हैं औऱ फिन समूचा शरीर काॅपकर रह जाता हैं। "
"तुँ नं कुछ भि बोलती रहती हैं। " सोनम दिदी नें बुरा सां मुह बनाया। यहअलग बात हैं कि नीलम कि इन बातों सें उसके अंदर एक् अजीब सें एहसास कि झुरझरी सि दौड़ गई थि, बोलि___"चल अब अधिकइस बारे मे मतसोच। राजआता हि होगा अभि। तुम्हें यहाॅ सें लेकर भि तौ चलना हैं नं। "
"आप् मेरी बातों कों नज़रअंदाज़ कररही हें नं?" नीलम नें सोनम दिदी केँ चेहरे कों ग़ौर सें देखते हुए कहा___"ऐसा मत कीजिए न् दिदी। एक् आप् हि हें जिनसे मे अपनेदिल कि हरबात कर सकतीहूॅ। इसलिए मेरीबात सुन लीजिए औऱ उस पऱ अपनीराय भि दीजिए कि मे जोँ कुछकह रहीहूॅ वोँ सही हैं याँ ग़लत?"
"क्याँ रायदूॅ मे?" सोनम दिदी नें नीलम कि ऑखों मे झाॅकते हुए कहा___"तूने तौ सभीकुछ कहकरयह ज़ाहिर कर हि दिया हैं कि तेरेमन मे राज केँ प्रति अब क्याँ हैं? अबअगर मे इस पऱ यह कहूॅ कि यहसभी सोचना भि ग़लत हैं तौ क्याँ फर्क़ पड़ता हैं उससे? इतना तोँ मे समझ हि सकतीहूॅ कि अगरराज केँ प्रति तेरेमन मे ऐसे ख़याल आँ चुके हें तोँ इसकासाफ मतलब हैं कि कहीं न् कहीं तेरेदिल मे राज केँ प्रति भइया वाली फीलिंग केँ अलावा भि एक् अलग फीलिंग्स आँ चुकी हैं। अतःऐसी फीलिंग्स जब एक् बार किसी केँ दिल मे आँ जाती हें तौ फिन उसकीसोच भि बदल जाती हैं। वोँ उसे हि सही मानता हैं फिन चाहेभले हि वोँ सबसे ज़्यादा अनैतिक अथवा ग़लत होँ। "
"मुझेपता हैं दिदी। " नीलम कि ऑखें एकाएक हि सजल होँ उठीं, बोलि___"राज केँ प्रति ऐसी फीलिंग्स रखना ग़लतबात हैं। मगरयह भि सच हैं कि अबयह फीलिंग्स मेरेदिल सें आसानी सें जाएगी नहि। इसलिए मैनेअब एक् फैंसला किया हैं। "
"फ.फैंसला???" सोनम दिदी चौंकी___"कैसा फैंसला?"
"यही कि मे राज केँ क़रीब नहि रहूॅगी। " नीलम नें दृढ़ता सें कहा___"बल्कि उससेदूर चली जाऊॅगी। इस लड़ाई केँ बादयह सच हैं कि मेरेमाॅ बाप व भइया याँ तोँ ज़िन्दगी भरजेल कि सलाखों केँ पीछेकैद होँ कररह जाएॅगे याँ फिनऐसे भि हालात बन सकते हें कि वोँ सभीजान सें मारे जाएॅ। तब तौ हम् दोनो बहनें अनाथ हि होँ जाएॅगी। हलाॅकि इसकेबाद भि मेरे अपनों मे गौरी चाची, अभय चाचा औऱ करुणा चाची आदिसभी भि होंगे मगर इनकेपास रहने सें अक्सर मेरा सामना राज सें होता हि रहेगा। उस सूरत मे मेरेमन मे नां चाहते हुए भि उसके प्रति आकर्शण बढ़ेगा जिसे शायद मे रोंक भि नहि पाऊॅगी। इसलिए बेहतर हैं कि इस सबकेबाद मे आपकेसंग मुम्बई मे मौसी केँ पास हि रहूॅ। राज सें दूर रहने सें कम सें कमयह तोँ होगा कि धीरे-धीरे धीरे-धीरे मे अपनेदिल सें उसे निकाल पाने मे सफल हौ सकतीहूॅ। "
"इसका मतलब। " सोनम दिदी नें कहा___"यह सच हैं कि तुँ अपने हि भइयाराज कों अब एक् प्रेमी कि दृष्टि सें देखने लगी हैं औऱ उसके प्रति तेरे अंदर चाहत कि भावना प्रतिपल बढ़ती हि जारही हैं?"
"शायदयही सच हैं दिदी। " नीलम नें सहसाआहत भाव सें कहा___"राज नें मेरी इज्ज़त कि रक्षा जिसतरह सें कि थि उसकेबाद सें हि मुझेयह महसूस हुआ थां कि राज केँ बारे मे अब तक जोँ कुछ मे अपने माॅमडैड केँ द्वारा पढ़ाए गएपाठ केँ तहत सोचती थि वोँ सभी सिरे सें हि ग़लत थां। मेरे अंदरइस बात केँ एहसास होने केँ संग हि राज केँ प्रति कोमल भावनाओं कां उदयहुआ थां। उसकेबाद मुझे नहि पता कि मे उसके बारे मे सोचते सोचते कबउसे चाहने लगी?जब उसने अचानक हि काॅलेज आनांबंद कर दिया थां तब मे यहीसोच कर रोती थि कि वोँ आज केँ वक़्त मे मुझसे कितनी नफ़रत करनेलगा हैं कि अब उसने मेरीवजह सें काॅलेज आनां भि बंदकर दिया। यह सभीसोच सोचकर मुझे अपने आप् सें घृणा होनेलगी थि कि मैने अपनेउस भइया कां बचपन सें दिल दुखाया जिसका कभीकोई दोष थां हि नहि। बल्कि उसकेदिल मे तौ हम् दोनों बहनों केँ लिए वैसा हि प्रेम व सम्मान थां जैसा उसकेदिल मे गुड़िया(निधी) केँ लिए हैं। उसकेबाद जब वोँ दुबारा मेरी इज्ज़त कि रक्षा करतेहुए मुझे ट्रेन पऱ मिला तोँ एक् बारफिन सें मेरा अंतर्मन यहसोच कर ज़ार ज़ाररो पड़ा कि उसने एक् बारफिन सें मेरी इज्ज़त कि रक्षा कि। यानी उसकेदिल मे आज भि हम् दोनो बहनों केँ लिएवही प्रेम व सम्मान हैं औऱ चाहता हैं कि हम् दोनों कों कभीकोई ऑच तक नं आए। बस उसकेबाद तौ जैसेसभी कुछबदल गय़ा दिदी। जब मैनेयह महसूस किया कि वोँ मुझसे झगड़ा करतेहुए फिन सें अपने बचपन कों जीना चाहता हैं तौ मैंने भि उसकी चाहत मे उसका पूरासंग दिया। मुझे भि उसेखुश देखने मे अच्छा लगनेलगा। इन्हीं सभी बातों केँ बीच हि शायदऐसा हुआ हैं कि मेरेदिल मे उसकी अच्छाई औऱ खूबियों कों देखकर ऐसी चाहत जागी हैं। आजजब उसने मुझे अपनी बाहों मे समेटे तथा मुझेउस हालत मे देखकर पागलहुआ जारहा थां तौ मे उस हालत मे भि यहसोच रही थि कि यह इतना अच्छा केसे हौ सकता हैं? इससेकोई नफ़रत केसेकर सकता हैं? बस उसकेबाद मैंने पहलीबार अपनेदिल कि आवाज़ कों सुना औऱ फिन उसकी हौ गई। मुझेपता हैं कि यह ग़लत हैं। अगरराज कों मेरेदिल कि बातपता चल गई तोँ संभव हैं कि वोँ मुझे ग़लतसमझ बैठे। वोँ सोचेगा कि जैसेमाॅ बाप थें वैसी हि उसकी औलाद भि हैं। जौ अपने हि सगे रिश्तों केँ प्रति ऐसीसोच रखती हैं। "
"अगरयही सभीबात हैं। " सोनम दिदी नें कहा___"औऱ अगरयह भि कि तुम् उसकी होँ गई होँ तोँ फिनयह अचानक उससेदूर हौ जाने कां फैंसला क्यूं किया तुमने? क्याँ मात्र इसलिए कि राज तुझेही ग़लत समझेगा?"
"यहवजह तोँ हैं हि दिदी। " नीलम नें सहसाकुछ सोचते हुए कहा___"लेकिन एक् दूसरी महत्वपूर्ण वजह औऱ भि हैं। "
"दूसरी ऐसीकौन सि वजह हौ सकती हैं?" सोनम दिदी केँ चेहरे पर्र सोचों केँ भाव नुमायां हुए।
"आपने शायद ग़ौर नहि किया दिदी। " नीलम नें फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा___"लेकिन मैने बहोत अच्छे सें ग़ौर किया हैं। "
"क्याँ मतलब??" सोनम दिदी चकरा सि गईं।
"आप् औऱ मे। " नीलम नें कहा___"जिस रितू दिदी कों हिटलर समझते हें, उन्हीं हिटलर दिदी कि ऑखों मे आज मुझेउस समय थोड़ी देर केँ लिएकुछ खास नज़रआया जब आपने उनसेकहा थां कि____'कभी स्वयं कों बदलकर भि देख। संभव हैं कि कुछनया नज़रआये। ' उस टाइम उनकी ऑखों मे समयभर केँ लिए एक् टीस सि नज़रआई थि फिन उन्होंने जल्द हि स्वयं कों सम्हाल लिया थां। कहते हें कि चोंट केँ दर्द कां एहसास वहीकर सकता हैं जिसेकभी वैसीह चोंटलगी हौ। उस वक़्त उनकी ऑखों मे जोँ भाव थें उन भावों नें मुझेबता दिया कि वोँ दरअसल क्याँ हैं?"
"यह तुँ क्याँ अनाप शनापबके जारही हैं नील?" सोनम दिदी नें हैरत सें कहा___"कहीं तूँ यह तोँ नहि कहना चाहती हैं कि रितू भि राज सें प्रेम करती हैं? ओह माँ गाड, ऐसा केसे होँ सकता हैं? नहि नहि.रितू ऐसा नहि कर सकतीनील। वोँ एक् सुलझी हुइ तथा समझदार लड़की हैं। उसेपता हैं कि ऐसा सोचना भि पाप होता हैं। "
"प्रेम तोँ हर मायने मे पवित्र हि होता हैं दिदी। " नीलम नें फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा___"फिन चाहे वोँ किसी सें भि हौ गय़ा होँ। दूसरी बात, जब किसी कों किसी सें प्रेम हौ जाता हैं न् तब सबसे पहलेउस इंसान कां विवेक शून्य होँ जाता हैं। प्रेम मे पड़ाहुआ इंसान उसी कों सही मानता हैं जिसेआम इंसान अनैतिक वपाप कि संज्ञा देता हैं। मैने रितू दिदी कि ऑखों मे उस पवित्र प्रेम कों देखा हैं दिदी। मुझे नहि पता कि यहसभी केसे संभव हौ सकता हैं? मगर ऑखेंकभी ग़लत नहि होती हें। ख़ैर मुझे इससेकोई प्राब्लेम नहि हैं बल्कि मे खुशहूॅ कि मेरी जौ दिदी लड़कों कि ज़ात सें नफ़रत करती थि तथा प्रेम व्यार कों बकवास कहतीथीं आज वोँ स्वयं राज कि चाहत मे गिरफ्तार हें। यकीनन उनकीसोच बदल गई होगी औऱ अब उनके सीने मे एक् ऐसादिल धड़कता होगा जोँ बहोत हि नाज़ुक होँ चुका होगातथा जिसमें किसी केँ लिए बेपनाह प्रेम कां सागर हिलोरें लेता होगा। अब जबकि मुझेइस बात कां एहसास हौ हि चुका हैं तोँ क्यूं मे उनकीराह कां रोड़ा बनूॅ दिदी? मेरी दिदी केँ दिल मे जिंदगी मे पहलीबार किसी केँ लिएऐसी भावनाओं कां उदयहुआ हैं। मैने देखा हैं कि वोँ सबसेहट कर रहती थि। उनका स्वभाव बहोत शख्त होता थां। प्रेम कि भाषा सें बात करना जैसे उन्हें आता हि नहि थां। मे औऱ शिवा उनसे बहोत डरते थें। यहाॅ तक कि डैड भि उनसे अधिक हॅसी मज़ाक नहि करते थें। अतः अपनीउस दिदी कों हसीन प्रेम केँ एहसास केँ संगइस हुस्न सें बदलता देखकर मे केसे उनकी खुशियाॅ छीनने कां कामकर दूॅगी? नहि दिदी, मे अपनी दिदी कि उम्मीदों कों चकनाचूर नहि कर सकती। उनकी पाक़ भावनाओं कों नहि कुचल सकती मे। वरना वोँ यकीनन इस सबसेटूट कर बिखर जाएॅगी। इसलिए मैने फैंसला कर लिया हैं कि मे इस सबकेबाद वापस आपकेसंग मुम्बई चली जाऊॅगी। "
"तुँ इतनी गहरी बातें कर सकती हैं यकीन नहि होतानील। " सोनम दिदी कि आवाज़ भर्रा गई___"तेरा इतना बड़ादिल होगा मैने सोचा भि नहि थां। अपनी दिदी केँ लिए इतना बड़ा त्याग करनाकोई मामूली बात नहि हैं। इसके पहले मे तेरी बातों सें सचमुच तुम्हें ग़लतसमझ बैठी थि लेकिन आख़िर कि तेरीइस बात नें मुझेयह एहसास करा दिया कि यह प्रेम भले हि अपने भइया सें हौ गय़ा हौ मगर इसमें कोई गंदगी तथाकोई पाप नहि हैं। "
अभि सोनम दिदी नें यहकहा हि थां कि तभी कमरे केँ दरवाजे पऱ दस्तक हुइ औऱ फिन मे आदित्य केँ संग अंदर आँ गय़ा। आते हि मैने अपने अंदाज़ मे सबसे पहले नीलम कों छेंड़ा जिस पर्र वो बस मुस्कुरा कररह गई। उसकेबाद मैंने उसेकहा कि डाॅक्टर नें कहा हैं कि हम् तुम्हें लें जा सकते हें। अतःअब चलो यहाॅ सें। ख़ैर थोड़ी हि देर मे मे नीलम कों लिए हास्पिटल सें बाहर् आया औऱ वाहन कि पिछली सीट पऱ उसे वैसे हि लेकरबैठ गय़ा जैसेआते वक़्त लेकर बैठा थां। सोनम दिदी भि मेरे दूसरी साइडबैठ गईं। आदित्य वाहन कि ड्राइविंग सीट पऱ बैठा हि थां कि रितू दिदी भि आँ गईं। रितू दिदी केँ बैठते हि आदित्य नें गाड़ी कों आगे बढ़ा दिया।
करीब-करीब पंद्रह मिनट मे हि हम् रेवती मे शेखर केँ घऱ केँ सामने पहुॅच गए। हम् सभी गाड़ी सें बाहर् आये। नीलम नें कहा कि वोँ अबठीक हैं औऱ स्वयं अपने पैरों पर्र चल सकती हैं। अतः मैनेउसे सहारा देकर वाहन सें बाहर् लें आया। उसकेबाद हम् सभीघऱ केँ अंदर आँ गए। अंदर ड्राइंगरूम मे नैना फूफी तथा बिंदिया काकी थि। नैना फूफी नें जैसे हि हम् सबको देखा वोँ भागकर आईं औऱ नीलम कों अपनेगले सें लगाया हि थां कि नीलम केँ मुख सें कराह निकल गई। दरअसल नैना फूफी नें नीलम कि पीठ केँ उस हिस्से पऱ अपनी बाॅह कां कसावकर दिया थां गलती सें, जहाॅ पऱ उसे गोलीलगी थि।
नीलम कि कराहसुन कर नैना फूफी जल्द सें नीलम सें अलग हुईं औऱ फिन उससे माफ़ी माॅगने लगीं। उनकी ऑखों मे ढेर सारेऑसू थें। कदाचित केशवजी यहाॅआए थें औऱ उन्होंने फूफी कों सभीकुछ बता दिया थां। यहीवजह थि कि नैना फूफी नीलम कों देखकर भागते हुएआईं थि। ख़ैर, उसकेबाद मे सोनम केँ संग नीलम कों सहारा देतेहुए उसे उसकेरूम मे लेँ आया औऱ बेड पऱ करवॅट केँ बल आहिस्ता सें लेटा दिया। मेरे पीछे पीछे हि बाॅकी सभी आँ गए थें। बिंदिया काकी कि भि ऑखों मे ऑसू थें। रितू दिदी थोड़ी पीछे खड़ी हुई थीं, उनकी ऑखें हल्का सुर्ख नज़र आँ रहीथीं। ऐसा लगता थां जैसे वोँ रोईहों। मे उन्हें देखकर चौंका औऱ ऑखों केँ इशारे सें हि पूछा कि क्याँ हुआ आपको? जवाब मे उन्होंने सिर हिलाकर बताया कि कुछ नहि बसऐसे हि।
इधर नैना फूफी नीलम केँ पास हि बेड पऱ बैठगईं थि औऱ उससे थोड़ी बहोत बातें कररही थि। संग हि अपने भइया कों बुराभला भि कहेजा रही थि। मे कुछदेर तक रूम मे रहा औऱ फिन आदित्य केँ संग हि बाहर् आँ गय़ा।
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उधर मंत्री दिवाकर चौधरी केँ आवास पर्र।
अजय सिंहइस समय उसकेपास हि सामने वाले सोफे पऱ बैठा थां। अभि कुछ हि देर पहले चौधरी उसे अपने सोर्स सें तथा अपने वकील कों लेकर ज़मानत पर्र छुड़ा कर लाया थां। गुनगुन मे नयानया आया एसीपी उसे बहुत शख्त मिजाज़ लगा थां। लेकिन चौधरी कां तोँ यह इलाका हि थां अतः वोँ स्वयं भि किसी सें डरने वाला नहि थां। कहने कां मतलबयह कि बड़ी आसानी सें वोँ अजय सिंह कों छुड़ा लाया थां। इस टाइमअजय सिंह अपनामुह लटकाए बैठाहुआ थां। ड्राइंग रूम मे इस वक़्त वोँ दोनो हि थें।
"इतनी शातिर दिमाग़ वाली पत्नि केँ रहतेहुए भि तुम् इतनी बुरीतरह सें मातखा गए ठाकुर। " सहसा चौधरी नें अजय सिंह कि तरफ देखते हुए कहा___"हैरत कि बात हैं। अच्छा होता कि तुम् हमेंइस मामले मे पहले सें बताए होते तौ हम् इसमें अवश्य तुम्हारी सहायता करते। हमारे दखल पर्र यहाॅ कि पुलिस मे इतनी हिम्मत हि नहि होती कि वहाॅजा कर तुम् सबको गिरफ्तार कर लेती। हम् बड़ी आसानी सें तुम्हारे उस भतीजे कों औऱ तुम्हारी दोनो बेटियों कों पकड़ लेते। उसकेबाद तोँ उनकाखेल ख़त्म हि हौ जानां थां। "
"डबल बैकअप कां प्लान भि अपनी स्थान कमज़ोर नहि थां चौधरी साहब। "अजय सिंह नें गंभीरता सें कहा___"हमने उन सबको करीब-करीब पकड़ हि लिया थां। मगर हमारी उम्मीद सें परे वहाॅ भारी संख्या मे पुलिस फोर्स आँ गई औऱ सबकुछ हमारे हाथ सें निकल गय़ा। "
"इसमें यकीनन तुम्हारी ग़लती हैं ठाकुर। " चौधरी नें पुरज़ोर लहजे मे कहा___"तुम्हें औऱ तुम्हारी पत्नि कों इसबात पर्र भि ग़ौर करना चाहिए थां कि तुम्हारी बेटी, तुम्हारी बेटी होने केँ संगसंग एक् पुलिस वाली भि हैं जोँ ऐसे हालात पऱ अपने डिपार्टमेंट सें पुलिस फोर्स कों भि बुलवा सकती हैं। उस सूरत मे तुम्हें हमसे संपर्क करना चाहिए थां। हम् इस समस्या कां जल्दी समाधान करते। हम् मंत्रियों केँ पासऐसे हालात मे पुलिस फोर्स कों मनचाही स्थान पऱ लें जाने कां बहोत आसान तरीका आता हैं। कहने कां मतलबयह कि हम् आनन फानन मे किसी स्थान कां दौरा करते जहाॅ पर्र भारी मात्रा मे हम् पुलिस कों अपनेपास बुला लेते। पुलिस डिपार्टमेंट कों इतना जल्द इतनी पुलिस फोर्स वहाॅ पर्र भेजने केँ लिए सोचना पड़ जाता। "
"मे मानता हूॅ चौधरी साहब। "अजय सिंह नें नज़रें चुराते हुए कहा___"कि मैने आपकोइस बारे मे नं बताकर भारी ग़लती कि हैं। वरनाआज ऐसा नहि होता। मगर इसमें भि मेरी आपकेलिए एक् पाक़ भावना हि थि। मे चाहता थां कि यहसभी होने केँ बाद मे आपके सामने आपकेउन दुश्मनों कों लाकर आपको सर्प्राइज दूॅगा औऱ यही मेरी दोस्ती व वफ़ादारी कां प्रमाण भि होता। मगर अफसोस ऐसा नहि कर पाया मे। इसकेलिए आप् मुझे क्षमा कर दीजिए मंत्री जी। आपने मुझे अपनासमझ करजेल सें भि छुड़ा लिया। इसकेलिए मे जिंदगी भर आपका आभारी औऱ ऋणी रहूॅगा। "
"कोईबात नहि ठाकुर। " चौधरी नें कहा___"जिंदगी मे हारजीत कां खेल तोँ चलता हि रहता हैं। इसलिए इसमें ज़्यादा चिंता करने कि कोईबात नहि हैं। इस सबकेबाद भि हम् उन लोगों कों बहोत जल्द पकड़ लेंगे। क्योंकि हमनेइस सबकेलिए एक् जासूस कों लगाया हुआ हैं। आजउसी नें बताया थां कि माधोपुर मे क्याँ हौ रहा थां? उस वक़्त केँ हालात केँ अनुसार हमेंलगा कि तुम् यकीनन उनको पकड़ लोगे औऱ फिन उन्हें हमारे सामने लें आओगे। इसी लिए हमने भि कोई ऐक्शन नहि लिया। बाद मे उस जासूस नें बताया कि वहाॅ पऱ भारी मात्रा मे पुलिस फोर्स आई औऱ तुम् सबको पकड़कर लें भि गई तोँ हमने सोचाचलो कोईबात नहि तुम्हें तोँ हम् जेल सें छुड़ा हि लेंगे। लेकिन हमने जासूस कों यह भि कहा कि ठाकुर कि बेटी कों गोलीलगी हैं तोँ वोँ लोग उसका इलाज कराने हास्पिटल अवश्य जाएॅगे। उसकेबाद वोँ उस स्थान जाएॅगे जहाॅ पऱ उन लोगों नें अपना ठिकाना बनाया हुआ हैं। बस उसके ठिकाने कां पता चलते हि हम् उसे उसके हि ठिकाने पर्र घेर लेंगे। हम् चाहते तोँ उन लोगों कों हास्पिटल मे भि घेर सकते थें लेकिन हमनेऐसा नहि किया। क्योंकि हमें सबसे पहले अपने बच्चों कों तलाशना थां औऱ यहतभी हौ सकता थां जब वोँ लोग हास्पिटल केँ बाद अपने ठिकाने पऱ जाते। हमनेउस जासूस कों इसी कां पता लगाने केँ लिएलगा रखा हैं। वोँ हमें बहोत जल्द सूचित करेगा कि उन लोगों कां ठिकाना कहाॅ हैं। उसकेबाद हम् अपने व्यक्ति लेकर जाएॅगे औऱ उसके ठिकाने पर्र धावाबोल देंगे। "
"यह तोँ बहोत हि अच्छा किया हैं आपने। "अजय सिंह केँ चेहरे पऱ एकाएक हि रौनक आँ गई___"इसका मतलबयह हुआ कि हम् पूरीतरह सें हारे नहि हें। बल्कि बाज़ी अभि भि हमारे हाॅथ मे हें। "
"बिलकुल। " चौधरी नें मुस्कुरा कर कहा___"बस जासूस केँ मोबाइल आने कि देर हैं। जैसे हि उसका मोबाइल आया औऱ उसने हमें बताया वैसे हि हम् यहाॅ सें चल पड़ेंगे। "
"वाउ चौधरी साहब। "अजय सिंह केँ चेहरे पर्र खुशी कि चमक आँ गई___"मानना पड़ेगा आपको। आपने भि ऐसा कारनामा कररखा हैं जिसके बारे मे वोँ लोगसोच भि नहि सकते हें। "
अजय सिंह कि बात पर्र चौधरी बस मुस्कुरा कररह गय़ा। कुछदेर उन दोनो केँ बीच औऱ भि कुछ बातें हुईं उसकेबाद अजय सिंह चौधरी सें इजाज़त लेकर उसके आवास सें अपने गाॅव हल्दीपुर केँ लिए निकल लिया। चौधरी नें उसे जाने केँ लिए अपनी एक् जीपदे दि थि।
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दोस्तो, आप् सबके सामने एपसोड हाज़िर हैं। आशा करताहूॅ कि आप् सबको पसन्द आएगा।
आप् सबकी प्रतिक्रिया औऱ आपके रिव्यू कां इन्तज़ार रहेगा।
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
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♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
हरबार कि तरह एक् बेहतरीन भाग
मुझे प्रतिमा सें इसबात कि उमीद नाँ थि वोँ ऐसीबात कों कुछ शब्दों मे तालकर अपने पति कों छुड़ाने कां सोचेगी। मुझे तौ लगा थां वोँ अपनी बेटी सें मिलना तौ चाहेगी हि पऱ खैरकुछ नहि किया सकता सिवाए उसके दिमाग़ कि दात देने केँ इलावा।
हरीशकोई आम जासूस नहि हैं उसकेपास ऐसी परिस्थिति सें निपटने कां भि हल होगा हि।
लगता हैं रितु नें नीलम कि बातसुन ली थि औऱ विराज केँ आने सें पहले हि वहां सें हट गई थि यान सोनम कि बात उसनेदिल पऱ लें ली जिसकी वजह उसकी आंखे थोड़ी सुजी हुई थि जब विराज नें पूछा थां।
आपका नियमित पाठक
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Aage kya hua? Next part padhiye
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,,,पेज नंबर 474 पऱ,
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