♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
bhay sabse pahele apke ane kaa shukariya.muze bohut kushi h की ap bapis a gayi.bhay ap storey pey pehle जैसे update दो es ke दो faidey h.pahala की update ane kaa intzaar bi update kaa majaa bhada deta h.aur dusra ap apke fans aur मेरा sath kaafi लम्बा rahega.best of luck for update bhay
Welcome back bro. I hope k aapke priyajan joo pichle kuch waqt say taklif mai the, woh ab sakushal honge. Awesome update. Keep writing. Waiting for next.
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
एपसोड.《 60 》
अब तक,,,,,,,
"यह क्याँ हैं?" दूसरे साये नें पहले साये केँ हाॅथ मे बैगदेख कर पूछा।
"इसमें मंत्री कां लैपटाॅप हैं। " पहले साये नें कहा___"यह मुझेइस बेड केँ नीचेबने बाक्स मे मिला हैं। मैनेइसे अभि देखा नहि हैं। होँ सकता हैं कि इसमें भि पासवर्ड वाला चक्कर होँ इसलिए इसे हम् अपनेसंग हि लेँ चलेंगे। "
"यह बहोत अच्छा हुआ। " दूसरे साए नें कहा___"मंत्री केँ लैपटाॅप मे भि बहुतकुछ मसाला मिल सकता हैं। ख़ैर, इन फाइलों कों भि इसबैग मे डाललो। उसकेबाद हमें जल्दी यहाॅ सें निकलना हैं। अब यहाॅ पर्र ज़्यादा देर रुकना ठीक नहि हैं। "
"ठीक हैं। " पहलेसाए नें कहने केँ संग हि बैग कों बेड पऱ रखा औऱ दूसरे साये सें फाइलें लेकरबैग मे डाल लिया।
उसकेबाद यह दोनो हि शातिर चोरजिस तरह छुपते छुपाते हुए यहाॅ बड़ी होशियारी सें आए थें वैसे हि यहाॅ सें निकल भि गए। बालकनी सें जब दोनो नीचे ज़मीन पर्र उतरआए तोँ बालकनी मे इनकी वोँ रस्सी हि फॅस गई। वोँ तौ शुकर थां कि इसतरफ आने वाले वोँ दोनो गनमैन इसतरफ आए हि नहि। वरना उन्हें बालकनी कि रेलिंग सें झूलती हुई यह रस्सी अवश्य दिख जाती औऱ यह दोनो भि। ख़ैर दोनो नें किसीतरह उस रस्सी कों निकाल हि लिया औऱ फिनउसी रस्सी केँ द्वारा बाउण्ड्री वाल केँ उसपार भि चलेगए। थोड़ी हि देर मे वोँ दोनो अॅधेरे कां लाभ उठाते हुए कहीं गायब सें होँ गए।
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अबआगे,,,,,,,
सुभह हुइ।
मंत्री दिवाकर चौधरी एक् विशेष दौरे पऱ गय़ा हुआ थां। लेकिन दौरे पर्र भि उसका पूरा ध्यान अपने जासूस उस हरीश राणे केँ मोबाइल पऱ हि थां। उसेपता थां कि राणे बहोत जल्दउसे विराज औऱ रितू केँ ठिकाने कां पता मोबाइल पर्र बताएगा। पिछला सारादिन औऱ फिन करीब सारीरात गुज़र गई थि मगर हरीश राणे कां मोबाइल अब तक नं आया थां उसकेपास। उसने सोचा कि संभव हैं कि विराज औऱ रितू अभि हास्पिटल मे हि अपनी बेहन नीलम कां इलाज़ करवारहे होंगे। जिसके चलते वोँ लोग अभि अपने ठिकाने पऱ वापस न् गए होंगे। शायदयही वजह होगी कि राणे नें उसेअब तक कोई मोबाइल नं किया थां। ख़ैर उम्मीद पऱ तौ दुनियाॅ कायम हैं। यहीहाल चौधरी कां थां। पिछली साम कों हि वो दौरे पऱ निकल गय़ा थां। उसका प्रोग्राम पहले सें हि फिक्स थां। अतः दौरे सें लौटने मे उसे दूसरा दिन शुरुआत हौ जानां थां।
सुभह मंत्री कि ऑख उसकेफोन मोबाइल केँ बजने सें हि खुली थि। उसनेउठ कर वक्त देखा तोँ सुभह केँ साढ़े पाॅचबज रहे थें। फोन कि स्क्रीन पर्र हरीश राणे कां नामदेख कर उसके होठों पऱ मुस्कान उभरआई, संग हि चेहरे पऱ चमक भि पैदा होँ गई। उसने बेहद खुशी केँ संगकाल कों रिसीव करफोन कों कान सें लगाया थां औऱ खुशी खुशी पूछा भि थां कि 'कहो राणे सुभह सुभहखुश ख़बरी सुनने केँ बहोत उतावले हौ रहे हें हम्'। उसकीइस बात पऱ राणे नें उधर सें खुशी वाले लहजे मे हि कहा थां कि चौधरी साहब आपकाकाम संपन्न होँ गय़ा हैं। इसलिए आप् जल्द सें अपने आवास पर्र आँ जाइये।
हरीश राणे कि यहबात सुनकर चौधरी खुशी सें फूला नहि समाया थां। वो मोबाइल पर्र हि सारीबात जान लेना चाहता थां मगर राणे नें कहा कि आमने सामने बात करने कां मजा हि कुछ औऱ होगा। इस लिए आप् आइये औऱ अपनेसब साथियों कों भि बुला लीजिएगा। उसकेबाद हि तसल्ली सें सारीबात बताई जाएगी। राणे कि इसबात सें मंत्री नें हॅसते हुएकहा थां कि ठीक हैं राणे हम् जल्द सें जल्द पहुॅच रहे हें।
मंत्री जब अपने दलबल केँ संग वापसलौट कर गुनगुन स्थित अपने आवास पर्र आया तोँ उससमय सुभह केँ सातबज गए थें। उसने अपने साथियों कों राणे सें बात करने केँ बाद हि मोबाइल पऱ अपने आवास पऱ आँ जाने कों कह दिया थां। शानदार बॅगले केँ अंदर पहुॅचते हि मंत्री दिवाकर चौधरी कों ड्राइंगरूम मे अपनेसब दोस्त सोफों पऱ बैठेमिल गए। लेकिन हरीश राणेउसे कहीं नज़र न् आया। यह देखकर उसके चेहरे पऱ चौकने केँ भाव उभरे। बाॅकी उसके दोस्त लोग तौ सामान्य हि बैठेहुए थें।
"अरे अवधेश। " मंत्री नें सोफे पऱ बैठने केँ बाद अवधेश कि तरफ देखते हुए कहा___"राणे कहाॅ गय़ा भई? उसने तोँ हमें सुभह मोबाइल करके जल्द सें जल्द यहाॅआने कों कहा थां औऱ अब वो स्वयं हि यहाॅ नहि हैं। कमाल हैं भइया, इन जासूसों कां भि कुछसमझ नहि आता। कहतेकुछ हें औऱ करतेकुछ हें। "
"मे तौ यहींहूॅ चौधरी साहब। " सहसातभी हरीश राणे कि चिर परिचित आवाज़ ड्राइंग रूम मे गूॅजी___"औऱ अपनेसंग आपकेलिए ऐसा तोहफा भि लेकरआया हूॅ कि आप् उस तोहफ़े कों देखेंगे तौ यकीनन आप् मुझ पऱ अपनीयह सारी दौलत लुटा देंगे। "
राणे कि इस आवाज़ कों सुनकर चौधरी नें पलटकर राणे कि तरफ देखा। राणे केँ संगसंग आँ रहेजिन दो इंसानी चेहरों पऱ उसकी नज़र पड़ी उन्हें देखकर उसके चेहरे पऱ सोचने वालेभाव उभरे। यहाॅ पर्र एक् अजीबबात यह भि हुईँ कि चौधरी केँ बाॅकी साथियों पर्र हरीश कि इसबात कां कोई भि प्रभाव नं पड़ा थां। वोँ तीनोऐसे चुपचाप बैठे थें जैसे कि वोँ माटी केँ पुतले मे तब्दील हौ गएहों।
"ओह तोँ तुम् यहीं हौ। " राणे केँ संगसंग उनदो चेहरों कों भि देखते हुए चौधरी नें कहा___"हमें लगा कि हमें सीघ्र बुलाकर तुम् स्वयं हि गायब हौ। ख़ैर, यह बताओ कि किस तोहफ़े कि बातकर रहे थें तुम्?"
"यही तोँ हें। " राणे मुस्कुराते हुए अपनेसंग आएउन दोनो कि तरफ इशारा करतेहुए कहा___"हाॅ चौधरी साहब, यह दोनो हि तौ तोहफ़े हें आपकेलिए जिन्हें मे अपनेसंग लेकरआया हूॅ। क्याँ आपनेइन दोनो कों पहचाना नहि?"
राणे कि यहबात सुनकर चौधरी एकदम सें चौंका। बड़े ग़ौर सें उन दोनो कों देखने लगा थां वो। चौधरी जिनदो चेहरों कों ग़ौर सें देखेजा रहा थां वोँ दोनोउसे इस संसार केँ सबसे सुंदर कपल नज़रआए। ऐसालग रहा थां जैसे वोँ दोनो सबसेअलग हों। इस वक़्त वोँ दोनो चौधरी कों देखकर मुस्कुरा रहे थें।
"यह दोनो हसीनकपल कौन हें भइया?" चौधरी केँ माॅथे पर्र उलझन केँ भावआए थें___"औऱ यह दोनोभला हमारे लिए तोहफे जैसे केसे हौ सकते हें?"
"आप् भि कमाल करते हें चौधरी साहब। " हरीश राणे नें ठहाका लगाकर हॅसने केँ बाद कहा___"आप् इन दोनो कों नहि पहचानते हें? यह तौ दुनियाॅ कां सबसे बड़ा आश्चर्य हैं। अरेयह दोनो तौ वही हें चौधरी साहब जिन्होंने आपकी रातों कि नींद हरामकर रखी थि। जीहाॅ, यहवही हें जिन्होंने आपके बच्चों कों अपने कब्जे मे लियाहुआ थां औऱ उन वीडियोज केँ बल पर्र आपको भीगी बिल्ली बनाया हुआ थां। "
"क्याऽऽऽ????" सोफे पर्र बैठा चौधरी राणे कि इसबात कों सुनकर इसतरह उछल पड़ा थां जैसे अचानक हि उसके पिछवाड़े केँ निचले हिस्से कि सोफे कि पुश्त गरमतवे मे तब्दील होँ गई होँ। आश्चर्य सें ऑखें फाड़े वो कुछदेर तक हकबकाया सां देखता रहा। फिन जैसेउसे होशआया तौ अजीबभाव सें बोला___"यह.यह दोनोवही हें?? नहि नहि राणे.यह दोनो तौ बहोत मासूम दिखरहे हें, यहभला इतना बड़ा काण्ड केसेकर सकते हें?"
"लो भइया। " राणेफिन हॅसा औऱ फिन मेरीतरफ देखते हुए कहा___"अब तुम् हि बताओ इन्हें। "
राणे कि बातसुन कर मे मुस्कुराया औऱ फिन मे चौधरी केँ क़रीब आँ गय़ा। मेरेसंग हि रितू दिदी भि आँ गई।
"तुम्हें मंत्री किसने बना दिया चौधरी?" मैने सहसा तीखेभाव सें कहा___"तुझमें तोँ इतनी भि समझ नहि हैं कि मौजूदा हालात मे तुम्हारे लिए तोहफे केँ रूप मे राणे किसेला सकता हैं? अगरसमझ होती तोँ जल्दी हि समझ जाता कि हम् दोनोकौन हें?"
"ज़बान कों लगामदे लड़के। " बुरीतरह तिलमिलाया हुआ चौधरी सहसा गुर्रा उठा___"तुझे हीपता नहि हैं कि तूँ इससमय कहाॅ खड़ा हैं? हमसेइस लहजे मे बात करने वालों कां बहोत हि भयावह अंजाम होता हैं। "
"अंजाम कां डर उन्हें होता हैं चौधरी। " मैने कहा___"जिन केँ पिछवाड़े मे दम नहि होता। तुम को तौ इतना भि एहसास नहि होँ रहा कि तेरे आवास मे आकर मे तेरे हि सामने तुझसे इस लहजे मे बात केसेकर सकताहूॅ?"
"जब किसी कि मौतआती हैं तौ वोँ ऐसे हि तेरे जैसे अनाप शनाप बकने लगता हैं। " चौधरी नें कहा।
"तुम को क्याँ लगता हैं?" रितू दिदी नें कहा___"हम् लोग तेरे सामने राणे कि वजह सें आए हें? नहि चौधरी, यहसभी तोँ हमारा हि खेल हैं। हमने हि राणे केँ द्वारा मोबाइल करवा केँ तेरी यहाॅ बलवाया हैं। तेरेयह सब दोस्त इतनीदेर सें पुतले कि तरह क्यूं बैठे हें क्याँ तुम कोकुछ समझ नहि आया?"
रितू दिदी कि बातसुन कर चौधरी केँ मस्तिष्क मे मानो एकाएक हि विष्फोट सां हुआ। दिमाग़ कि सारी बत्तियाॅ रौशन हौ उठी। सारी बातें बड़ी तेज़ी सें उसकेमन मे चलनेलगी। उसने अजीबभाव सें अपने साथियों कि तरफ देखा औऱ फिन राणे कि तरफ।
"खेल समाप्त होँ चुका हैं चौधरी साहब। " राणे जल्दी बोल उठा___"मे तौ कल हि इनके आदमियों केँ द्वारा पकड़ लिया गय़ा थां। उसकेबाद इन लोगों नें मुझसे सभीकुछ पूछ लिया औऱ मुझे बताना हि पड़ा। मुझे भि इसबात कां अंदेशा थां कि आपके पीछे गुप्त रूप सें कार्यवाही कि जारही हैं। अतः मैने सोचा कि अगर मैने आपकेलिए काम किया तौ निश्चय हि मे भि कानून कि चपेट मे आँ जाऊॅगा इसलिए मैंने वही मार्ग चुना जोँ सच्चा थां औऱ मेरेलिए बेहतर भि थां। "
"गद्दार। " चौधरी पूरे गुस्स मे बोल पड़ा___"अपनी सलामती केँ लिए तूने हमें फॅसवा दिया। तुम को ज़िंदा नहि छोंड़ेंगे हम्। तुम् सबकोअब मौत हि मिलेगी। तुम् लोगअब यहाॅ सें ज़िंदा वापस नहि जा सकते। "
"जिनके दम पर्र तुँ हमेंमौत देने कि बातकर रहा हैं नं वोँ सभी तोँ पुलिस कि गिरफ्त मे आँ चुके हें। " मैने सहसाझुक कर चौधरी कि ऑखों मे ऑखेंडाल कर कहा___"औऱ तेरे मे इतनादम हि नहि हैं कि तुँ मेराबाल भि उखाड़ सके। "
मेरीइस बात सें चौधरी कों साॅप सां सूॅघ गय़ा। अनुभवी व्यक्ति थां। उसे समझते देर नं लगी कि जिस अंदाज़ सें मे उससेबात कररहा थां वोँ तभी संभव थां जब वोँ कुछ भि कर पाने कि पोजीशन मे न् होँ। अभि मे उसेदेख हि रहा थां कि सहसातभी बाहर् सें ढेर सारे पुलिस केँ व्यक्ति अंदर दाखिल हुए। उन सब पुलिस वालों केँ बीच सें हि एसीपी रमाकान्त शुक्ला चलताहुआ हमारे पासआया।
"वेलडन इंस्पेक्टर रितू। "फिन उसने दिदी कि तरफदेख कर कहा___"यकीनन तुम् दोनो नें बहोत हि बड़ाकाम किया हैं। " कहने केँ संग हि एसीपी चौधरी कि तरफ पलटा___"दुनियाॅ कि कोई भि ताकतअब तुम्हें कानून कि सलाखों केँ पीछे सें नहि निकाल सकती। तुम्हारे खिलाफ़ हमें इतने सबूतमिल चुके हें कि अब तुम् किसी भि कीमत पऱ बच नहि सकते। "
"किन सबूतों कि बातकर रहे हौ आफीसर?" चौधरी नें हैरानी सें कहा___"औऱ यह इतनी सारी पुलिस फोर्स यहाॅकिस लिए लेकरआए होँ तुम्?"
"देखते जाओ चौधरी। " एसीपी नें कहा___"कुछ हि देर मे सभीकुछ पताचल जाएगा तुम्हें। "
पुलिस वालों कों कदाचित पहले हि समझा दिया गय़ा थां कि क्याँ करना हैं। अतः वोँ यहाॅआते हि अपनेकाम पर्र लगगए थें। चौधरी यहसभी देखकर एकाएक बुरीतरह बौखला गय़ा। उसके चेहरे पर्र डरव घबराहट केँ भावउभर आए। चिंता व तकलीफ़ केँ चलते पूरा चेहरा पसीने पसीने होँ गय़ा उसका। उसके साथियों कां भि वहीहाल थां।
कुछ हि देर मे वहाॅ पर्र पुलिस महकमे केँ कुछ औऱ आला अधिकारी आँ गए। चौधरी कों कुछ भि करने कां मौका नं मिला। वोँ तोँ यही नहि समझपा रहा थां कि इतनी सारी पुलिस फोर्स इतनी जल्द यहाॅ केसे आँ गई? अंदर कि तरफगए हुए पुलिस वाले थोड़ी हि देर मे बाहर् आए औऱ उन्होंने जोँ कुछ बताया उसेसुन कर चौधरी केँ सिर पऱ सारा आसमान भरभरा करगिर गय़ा। उसका चेहरा एकदम सें निस्तेज पड़ गय़ा।
करीब-करीब एक् घंटे कि कठोर कार्यवाही केँ बादआला अधिकारियों केँ संग मंत्री कों गिरफ्तार कर बॅगले सें बाहर् लें जाया जानेलगा। बाहर् आते हि चौधरी नें देखा कि बाहर् भीड़जमा हैं। उस भीड़ मे प्रेस व मीडिया केँ लोग थें जौ मंत्री व पुलिस केँ आला अधिकारियों सें तरहतरह केँ प्रश्न पूछने लगे थें। प्रेस व मीडिया वालों कों संक्षेप मे उनके सवालों केँ कुछ जवाब देकर चौधरी कों लेकर पुलिस वालेचले गए। मंत्री केँ आवास कों सीलकर पुलिस सिक्योरिटी लगा दि गई।
यह मामला हि ऐसा थां कि पलक झपकते हि मंत्री कि गिरफ्तारी कि ख़बर प्रदेश मे हरतरफ फैल गई। मंत्री केँ चाहने वालेतथा जश्न केँ उसके सहयोगियों नें विरोध प्रदर्शन तोँ किया लेकिन उस सबको पुलिस वालों नें सम्हाल लिया। मे औऱ रितू दिदी मंत्री केँ इस किस्से कों ख़त्म करके वापसलौट आए थें। हरीश राणे कों खुशी खुशी हमने छोंड़ दिया थां। वोँ स्वयं भि इस सबसेखुश थां कि उसने अच्छाई कां संग दिया। राणे जाते जाते हम् लोगों केँ कान्टैक्ट नंबर लें गय़ा थां।
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उधर मंत्री केँ पकड़े जाने कि यह ख़बर हवेली मे अजय सिंह कों भि होँ गई। इस ख़बर नें अजय सिंह कि हालत कों लकवा मारने जैसीबना दिया। कुछ वक़्त केँ लिए तौ उसेऐसा लगा जैसेइस संसार मे अबकुछ बचा हि नहि हैं बल्कि सभीकुछ शून्य मे हि खो गय़ा हैं। उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि ऐसाकुछ हौ जाएगा। विराज औऱ रितू नें उसकेलिए जैसेहर तरफ सें मार्ग हि बंदकर दिया थां। कहाॅ वो मंत्री केँ मोबाइल द्वारा यहपता चलने कां इन्तज़ार कररहा थां कि उसका भतीजा औऱ उसकी बेटी आदिसभी पकड़लिए गए हें औऱ कहाॅअब इस ख़बर नें उसके मुकम्मल वजूद कों हि हिलाकर रख दिया थां।
अजय सिंह मंत्री केँ पकड़े जाने सें चिंतित व परेशान तौ थां हि संग हि वो इसबात केँ लिए भि बेहद परेशान होँ गय़ा थां कि उसके दोस्तों नें अपनेजिन आदमियों कों उसकीमदद केँ लिए भेजा थां वोँ सभी पुलिस द्वारा पकड़लिए गए थें। सुभह सें मोबाइल पर्र मोबाइल आँ रहे थें उसे। यह सभी मोबाइल उसकेउन दोस्तों केँ हि थें। जोँ कहरहे थें कि उन्हें अपने आदमियों केँ पकड़े जाने कां इतनादुख नहि हैं बल्कि चिंता इसबात कि हैं कि उनके वोँ सभी व्यक्ति पुलिस केँ सामने अपनामुह नं खोलदें जिसकी वजह सें वोँ सभी भि कानून कि चपेट मे आँ जाएॅ। अतः इससे बचने केँ लिए वोँ सभीअजय सिंह सें कोई नं कोई समाधान चाहरहे थें। मगरअजय सिंहकुछ कहने कि हालत मे हि नहि थां। वोँ तोँ स्वयं भि अब मंत्री कि वजह सें असहाय सां हौ गय़ा थां। मंत्री कां कानूनन इसतरह पकड़े जानां उसकेलिए बहोत बड़ी क्षति थि। क्योंकि अबउसे मंत्री पर्र हि भरोसा थां कि वोँ उसेइस सारेखेल मे जीत दिलाएगा। मगरअब सभीकुछ जैसे स्वाहा होँ चुका थां।
प्रतिमा औऱ शिवा सुभह सें उसकेपास हि थें। इससमय दोपहर हौ चुकी थि। अजय सिंह अकेला हि ड्राइंग रूम मे गुमसुम सां बैठा थां। प्रतिमा किसीकाम सें बाहर् गई हुई थि। शिवा अपने कमरे मे थां। सोफे पर्र बैठाअजय सिंह शिगार पे शिकार फूकेजा रहा थां। सविता जोँ उसकी घरेलू नौकरानी थि उसनेउसे अब तक जाने कितनी बारगरम चायबना कर पिलाया थां। हालात कि गंभीरता कां उसे भि एहसास थां। उसेइस हवेली कां सभीकुछ पता थां लेकिन उसनेकभी इस मामले मे हवेली केँ किसी भि सदस्य सें कोईबात नहि कि थि। उसेपता थां कि इस बारे मे बात करने कां सबसे पहले तोँ उसकाकोई हक़ हि नहि हैं दूसरी बात उसकी बातों कों कोई सुनना मनपसंद भि नहि करता।
सारी बातों कों सोचते सोचते अजय सिंह इतना परेशान हौ चुका थां कि उसकासिर दर्द करनेलगा थां। वो उठा औऱ सविता कों आवाज़ देकरकहा कि वोँ उसकेसिर कि बढ़िया सें मालिश करदे। यह कहकरअजय सिंह अपने कमरे कि तरफबढ़ गय़ा। सविता चालीस केँ आसपास कि साॅवली सि महिला थि। उसका पति उसे बरसों पहले छोंड़ करचला गय़ा थां। सविता औऱ उसका पति पहले खेतों पऱ हि काम करते थें। बाद मे उसका पति जब वापसलौट कर नं आया तौ गजेन्द्र सिंह नें उसे हवेली केँ कामधाम पर्र लगा लिया। सविता कों हवेली मे रहतेहुए करीबदस साल होँ गए थें। उसनेइस हवेली केँ अंदरअब तक क्याँ क्याँ हुआसभी कुछ देखा सुना थां। मगर उसनेकभी इस बारे मे कोई दखलअंदाज़ी न् कि थि। उसेयह भि पता थां कि अजय सिंह कां परिवार कैसा हैं तथायह भि कि यह रिश्तों कों नहि मानते। उसने शिवा कों अपनी ऑखों सें अपनी हि माॅ कों संभोग करते देखा थां। उसदिन उसेलगा थां कि कलियुग वाकई आँ चुका हैं।
अजय सिंह नें सविता केँ संग जाने कितनी बार संभोग किया थां इसकाउसे स्वयं पता नहि थां। कईबार वो पेट सें भि हुईँ थि लेकिन अजय सिंह नें हरबार उसकेपेट सें अपनाबीज गिरवा दिया थां। सविता नें परिस्थितियों केँ संग पहले हि समझौता कर लिया थां। उसका अपनाकोई नहि थां। रितूव नीलम कों वोँ अपनी हि बेटी कि तरह मानती थि औऱ हमेशा दुवा किया करती थि कि वोँ दोनोखुश रहें। रितूव नीलम भि उसे बहोत इज्ज़त व सम्मान देतीथीं। उन दोनो नें कभीउसे नौकरानी नहि समझा थां। बल्कि हमेशा उसे काकी हि कहती थि। हलाॅकि शिवा कां ब्यौहार अपने बाप कि तरह हि थां। लेकिन सविता केँ संग ज़बरदस्ती करने कि हिम्मत उसमेकभी नं हुइ थि। सविता एक् तंदुरुस्त तबीयत कि महिला थि। मेहनत कर करके वो बेहद मजबूत हौ गई थि। वो दिखती भि ऐसी थि कि शिवा जैसा छोकरा उससे ज़बरदस्ती करने कि हिम्मत कर हि नहि सकता थां। पिछले कुछ सालों सें अजय सिंह नें सविता कों भोगना बंदकर दिया थां। इसबात सें सविता कों राहत महसूस हुइ थि। अजय सिंह केँ सविता केँ संग संबंधों कि जानकारी प्रतिमा कों शुरुआत सें हि थि। लेकिन उसेइस बात सें कोई आपत्ति नहि थि।
थोड़ी हि देर मे सविता अपने हाॅथ मे एक् कटोरी लिएअजय सिंह केँ कमरे मे दाखिल हुईँ। कटोरी मे शुद्ध सरसो कां तेल थां। कमरे मे पहुॅचते हि सविता नें देखा कि अजय सिंहबेड पऱ लेटाहुआ हैं। आज बहुत टाइमबाद अकेले कमरे मे अजय सिंह केँ पासआते हुए सविता कों थोडा असहज सां लगा। लेकिन उसेपता थां कि मालिश तोँ उसे करनी हि पड़ेगी औऱ अगरअजय सिंह नें उसकेसंग संभोग करने कि ख़्वाहिश ज़ाहिर कि तौ उसे उसकी वोँ ख़्वाहिश भि पूरी करनी पड़ेगी।
अजय सिंह कि नज़र हाॅथ मे कटोरी लिएआई सविता पर्र पड़ी तोँ उसनेउसे ऊपर सें नीचे तक देखा। पहले कि अपेक्षा सविता कां शरीर बहुत आकर्षक सां हौ गय़ा थां। हरअंग अपनी स्थान सही सें ढलाहुआ थां। ऊम्र कां असर उसकेसिर केँ बालों सें दिखरहा थां। बाॅकी उसका समूचा शरीरकसा हुआ थां। सीने केँ उभार प्रतिमा सें कतईकम न् थें। ब्लाऊज फाड़कर बाहर् आने कों आतुर थें। अजय सिंह कों ग़ौर सें अपनीतरफ देखते देख सविता केँ संपूर्ण बदन मे झुरझुरी सि दौड़ गई।
"चलिए मालिक। " फिन उसने स्वयं कों सामान्य बनाते हुए कहा___"आपके माॅथे पर्र मालिश कर देतीहूॅ। "
"ओहहाॅ हाॅ। "अजय सिंह उसकीबात सुनते हि कुछ झेंप सां गय़ा___"इस समय मालिश कि वाकई बहोत ज़रूरत हैं सविता। प्रतिमा बाहर् गई हुइ हैं वरना तुम्हें तक़लीफ न् देता। वोँ स्वयं भि बहोत अच्छी मालिश कर लेती हैं। "
"कोईबात नहि मालिक। " सविता नें बेड केँ क़रीब आतेहुए कहा___"मे तोँ अक्सर मालकिन कि मालिश करती हि रहतीहूॅ। आज आपकी भि कर देतीहूॅ। चलिएलेट जाइये अब। "
"इन कपड़ों कों उतारदूॅ क्याँ?" अजय सिंह नें अपने जिस्म केँ ऊपर पहने कपड़ों कि तरफ दःखते हुएकहा।
"मालिश तोँ माॅथे पऱ करनी हैं नं मालिक। " सविता नें जल्द सें कहा___"कपड़े उतारने कि क्याँ ज़रूरत हैं?"
"बात तोँ ठीक हि हैं तुम्हारी। " अजय सिंह कहने केँ संग हि मुस्कुराया___"पऱ अगर पूरे जिस्म कि मालिश कर दोगी तोँ क्याँ बुराई हैं? मुझे भि तौ पताचले कि तुम् अपनी मालकिन कि किसतरह सें मालिश किया करती होँ?"
अजय सिंह कि बातसुन कर सविता कों साॅप सां सूॅघ गय़ा। उसकादिल ज़ोर ज़ोर सें धड़कने लगा थां। ऐसा नहि थां कि उसनेअजय सिंह कों बिना कपड़ों केँ देखा नहि थां बल्कि उसने तौ इसके पहले न् जाने कितनी बार स्वयं बिना कपड़ों केँ उसकेसंग संभोग किया थां लेकिन एक् दो सालों सें यह नाता करीब-करीब मिट सां गय़ा थां। इसलिए उसेइस बात कां अंदेशा थां कि कहींआज फिनऐसे हालात न् बन जाएॅ कि उसे संभोग करनापढ़ जाए। दूसरी बातयह भि थि कि अब वोँ किसी सूरत मे नहि चाहती थि कि वोँ इस व्यक्ति केँ संग वोँ सभीकरे। उसनेमन हि मन परमेश्वर कों याद किया कि उसेइस परिस्थिति सें बचाए।
उसकीइस फरियाद कों मानो परमेश्वर नें सुन भि लिया, क्योंकि तभी कमरे मे एक् तरफ टेबल पर्र रखे लैण्डलाइन मोबाइल कि घंटी घनघना उठी थि। मोबाइल केँ बजने सें अजय सिंह केँ चेहरे पर्र अप्रिय भाव उभरे। फिन उसनेबेड केँ किनारे पऱ खिसककर मोबाइल केँ रिसीवर कों उठाकर कान सें लगाते हि हैलोकहा।
".। " उधर सें जाने क्याँ कहा गय़ा। लेकिन इतना अवश्य हुआ कि उसके चेहरे पऱ बुरीतरह चौंकने केँ भाव उभरे औऱ फिन सहसा उसनेपलट कर सविता कों कमरे सें चले जाने कों कहा। उसकेइस तरहचले जाने कां सुनकर पहले तौ सविता चौंकी फिन जल्द हि वापस कमरे सें बाहर् कि तरफचल पड़ी।
कमरे सें बाहर् आते हि सविता नें राहत कि साॅसली औऱ फिन किचेन कि तरफबढ़ गई। किचेन मे उसनेतेल कि कटोरी कों रखा औऱ फिन किचेन सें बाहर् ड्राइंगरूम कि तरफबढ़ गई। ड्राइंगरूम मे आते हि उसकी नज़र मालकिन यानी कि प्रतिमा पऱ पड़ी जौ एक् तरफ टेबल पऱ हि रखे मोबाइल केँ रिसीवर कों कान सें लगाए खड़ी थि। उसका चेहरा दूसरी तरफ थां। सविता अपनी मालकिन कों देखकर वापस अंदर कि तरफचली गई।
उधर कमरे मे अजय सिंह बहुतदेर तक किसी सें बात करतारहा। उसके चेहरे पर्र कईतरह केँ भावों कां आवागमन चालू थां। ख़ैरकुछ देरबाद उसने अपनेकान सें हटाकर रिसीवर कों वापस केड्रिल पऱ रख दिया। रिसीवर रखने केँ बाद उसने एक् गहरी साॅसली औऱ फिन सहसा जाने क्याँ सोचकर मुस्कुरा उठा।
अभि अजय सिंह मुस्कुरा हि रहा थां कि तभी कमरे मे प्रतिमा दाखिल हुई। प्रतिमा कों देखकर अजय सिंह कि मुस्कान औऱ गहरी होँ गई। उसके होठों पर्र फैलीइस मुस्कान कों देखकर प्रतिमा केँ होठों पऱ भि मुस्कान फैल गई।
"क्याँ बात हैं जनाब। "फिन प्रतिमा नें उसके समीपआते हुए कहा___"बहोत मुस्कुरा रहे होँ। कारून कां कोई ख़जाना मिल गय़ा हैं क्याँ?"
"ऐसा हि समझो डियर। "अजय सिंह कहने केँ संग हि आलमारी कि तरफ बढ़ा, फिन बोला___"बल्कि अगरयह कहूॅ तोँ ग़लत न् होगा कि कारून कां ख़जाना भि उसके सामने कुछ नहि हैं। "
"ओहऐसा क्याँ?" प्रतिमा कि ऑखें फैली___"ज़रा मुझे भि तोँ बताओ कि ऐसाकौन सां ख़जाना मिल गय़ा हैं जिसके सामने कारून केँ ख़जाने कि कोई औकात हि नहि हैं। "
"अवश्य बताऊॅगा प्रतिमा। " आलमारी सें कोट निकालने केँ बादअजय सिंह नें कहा___"पहले ख़जाने कों मेरे हाॅथ तौ लगनेदो। "
"क्याँ मतलब??" प्रतिमा केँ चेहरे पऱ चौंकने केँ भाव उभरे___"क्याँ वोँ ख़जाना अभि तुम्हारे हाॅथ नहि लगा हैं?"
"लग जाएगा माँ डियर। "अजय सिंह नें कोट पहनते हुए कहा___"औऱ इस ख़जाने कों मेरेहाथ लगने सें ब्रम्हा भि नहि रोंक पाएॅगे। "
"बड़ी अजीब बातें कररहे हौ आज। " प्रतिमा नें सहसा तिरछी नज़रों सें देखते हुए कहा___"कहीं तुम्हारे इस ख़जाने कां संबंध रितू अथवा विराज सें तौ नहि हैं?"
"ज़्यादा दिमाग़ मत चलाओ प्रतिमा। " अजय सिंह नें सपाट लहजे मे कहा___"बस वक़्त कां इन्तज़ार करो। ख़ैर, मे ज़रूरी काम सें बाहर् जारहा हूॅसाम तक लौटूॅगा। शिवा सें कहना वोँ कहीं बाहर् नं जाए बल्कि हवेली मे हि रहे। "
प्रतिमा कि प्रतिक्रिया सुने बिना हि अजय सिंह कमरे सें बाहर् निकल गय़ा। उसके जाते हि प्रतिमा केँ चेहरे पऱ सहसागहन पीड़ा केँ भाव उभरे औऱ फिन एकाएक हि उसकी ऑखेंछलक पड़ीं। आगेबढ़ कर वो बेड पऱ धम्म सें बैठ गई। उसकेमनो मस्तिष्क मे ऑधियाॅ सि चलनेलगी थि।
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उधर मंत्री दिवाकर चौधरी केँ अपने साथियों सहित पुलिस द्वारा गिरफ्तार करलिए जाने कि सूचना मैने मंत्री केँ बेटे सूरज चौधरी व उसके तीनो साथियों कों भि दे दि। चारोइस ख़बर कों सुनकर बिलकुल असहाय सें होँ गए। ऐसा लगरहा थां जैसे उनके जिस्मों मे जान हि नं रह गई होँ। चारो कि हालत वैसे भि बहोत हि दयनीय होँ चुकी थि। भरपेट खानां नं मिलने कि वजह सें तथा शारीरिक व मानसिक यातनाओं केँ चलते वोँ चारो हि बेहद कमज़ोर लगनेलगे थें। दूसरे कमरे मे मंत्री कि बेटी कों भि रितू दिदी नें उसके बाप केँ संबंध मे सूचित कर दिया थां। रचना चौधरी इस ख़बर सें बुतबन कररह गई थि। लेकिन जब उसकेमुख सें लफ्ज़ निकले तोँ बड़े अजीब थें। उसका कहना थां कि मेरे बाप भइया नें जितने पाप कर्म किये थें उसका अंजाम तौ यही होना थां नं।
सूरज चौधरी व उसके तीनो साथीहर तरह सें टूट चुके थें। मौत कि भीख माॅगरहे थें चारोमगर मौत मिलना इतना आसान नहि थां। इसबीच मैने फैंसला किया कि इन सबको यहाॅ सें आज़ाद कर दियाजाए। उन चारो कि हालतदेख कर मुझेइस बात कां बोध होँ चुका थां कि वोँ पश्चाताप कि आग मे जलरहे हें। बड़े सें बड़े अपराध केँ लिए भि इंसान कों माफ़कर दिया जाता हैं औऱ उसे सुधरने कां एक् मौका दिया जाता हैं। दूसरी बात, यह सभी करके मुझे मेरी विधी तौ मिलनी नहि थि। उसकेसंग हुए अत्याचार कां मैने बदला लेँ लिया थां इन लोगों सें।
उन चारों कों आज़ाद कर देने वाले मेरे फैंसले सें थोड़ी नं नुकुर केँ बाद आख़िर सभी राज़ी हौ गए थें। लेकिन प्रश्न यह थां कि वोँ आज़ाद होने केँ बाद जाएॅगे कहाॅ? क्योंकि मंत्री कां बॅगला तौ पुलिस द्वारा सीलकर दिया गय़ा थां। इस प्रश्न कां जवाब रितू दिदी नें दिया, यह कहकर कि यहसभी चिमनी मे अपने पुश्तैनी घऱजा सकते हें। रितू दिदी कि इसबात सें समस्या कां समाधान होँ चुका थां। अतःअब यही फैंसला हुआ कि इन सबको बेहोश करके चिमनी भेज दियाजाए।
मैने मौसाजी कों मोबाइल करके सारीबात बताई औऱ उनसे आग्रह किया कि क्याँ वोँ इन चारो कों चिमनी भेजने कां काम करवा सकते हें? मेरीइस बात पर्र वोँ हॅसकर बोले इसमें संकोच कि क्याँ बात हैं बेटा? थोड़ी हि देर मे केशवजी अपनेकुछ आदमियों कों लेकर हमारे पास आँ गए। मैने औऱ आदित्य नें चारो कों बेहोश कर दिया औऱ केशव कि कार मे उन सबको डलवा दिया। उनकेसंग हि रचना कों भि बेहोश करकेडाल दिया थां। यहसभी होने केँ बाद केशवजी अपने आदमियों केँ संग चिमनी गाॅव केँ लिए निकलगए।
उन सबको आज़ाद करने केँ बादमन कों थोडा शान्ति सि मिल गई थि। इस टाइम ड्राइंग रूम मे मे रितू दिदी तथा आदित्य बैठेहुए थें। नैना फूफी व सोनम दिदी नीलम केँ पास उसके कमरे मे थीं।
"चलो मंत्री औऱ उसके बच्चों सें छुटकारा मिल गय़ा आख़िर। " सहसा आदित्य नें कहा___"अब हम् सारा फोकस तुम्हारे ताऊ पऱ लगा सकते हें। वैसे मुझे तौ लगता हैं कि अब हमेंखुल कर हवेली मे उसके सामने हि चले जानां चाहिए औऱ फिनउन सबका भि काम तमामकर देना चाहिए। अजय सिंह मौजूदा हालात मे कुछ भि कर सकने कि पोजीशन मे नहि हैं। उसकी आख़िरी उम्मीद निःसंदेह मंत्री हि थां जोकिअब वोँ भि कानून कि लम्बी चपेट मे आँ चुका हैं। दूसरी बात उसके जितने भि व्यक्ति थें उन सबको भि पुलिस गिरफ्तार कर चुकी हैं। कहने कां मतलबयह कि इस वक़्त अजय सिंह निहत्था व असहाय अवस्था मे हैं। हम् बड़ी आसानी सें उसे लपेटे मे लेँ सकते हें औऱ उसका हिसाब पुस्तक कर सकते हें। "
"इसबात कां एहसास तोँ उसे भि हौ हि गय़ा होगा मेरे दोस्त। " मैने कहा___"वोँ भि इसबात कों समझता होगा कि मौजूदा हालात मे हम् उसके बारे मे क्याँ सोचरहे होंगे? इसलिए वोँ पूरी कोशिश करेगा कि वोँ हमारी सोच कों सही साबित नं होनेदे। यानी कि वोँ कुछऐसा अवश्य करेगा जिससे हम् उसके सामने इसतरह नं जा सकेंजिस तरह कि तुम् बातकर रहे हौ। "
"राज बिलकुल सहीकह रहा हैं आदित्य। " रितू दिदी नें गहरी साॅस लेकर कहा___"मे अपनेडैड कों बहोत अच्छी तरह सें जानती हूॅ। वोँ इस परिस्थिति मे भि कोईऐसा जुगाड़ कर हि लेंगे कि हम् उनकेपास इसतरह सें उनका तिया पाॅचा करने नं पहुॅच सकें। "
"तुम्हारे हिसाब सें वोँ ऐसा क्याँ जुगाड़ कर सकता हैं अब?" आदित्य नें पूछा___"जबकि मौजूदा हालात साफ शब्दों मे बतारहे हें कि वोँ अबकुछ भि करने कि पोजीशन मे नहि रह गय़ा हैं। "
"इस बारे मे मे कुछकह नहि सकती। " रितू दिदी नें सोचने वाले अंदाज़ सें कहा___"लेकिन उनके संबंध कईऐसे लोगों सें रहे हें अथवायह कहूॅ कि हें जोँ ऊॅचे दर्ज़े केँ अपराधी हें। अतः संभव हैं कि डैड अपनेऐसे हि किन्हीं अपराधी दोस्तों सें मौजूदा हालात मे सहायता कि गुहार लगाएॅ। "
"चलोयह मान लिया कि तुम्हारे डैड केँ ऐसे लोगों सें संबंध हें औऱ वोँ उन लोगों सें इस वक़्त सहायता माॅग सकते हें। " आदित्य नें कहा___"लेकिन यहाॅ पऱ मे एक् सलाह देना चाहता हूॅ, औऱ वोँ सलाहयह हैं कि तुम्हारे डैड कों उस आधार पऱ भि तौ बड़ी आसानी सें भीगी बिल्ली बनाकर अपनेपास बुलाया जा सकता हैं जोँ आधारइस समयराज केँ पास मौजूद हैं, यानी कि अजय सिंह कां ग़ैर कानूनी सामान। उस सामान केँ आधार पर्र अजय सिंह यकीनन भीगी बिल्ली बनकर हमारे पास स्वयं हि आँ जाएगा। "
"ऐसा नहि होँ सकताआदी। " मैने कहा___"क्योंकि अब तक यहबात मेरे ताऊ कों भि ताई केँ समझाने पऱ समझ आँ हि गई होगी कि मे उन्हें उनके ग़ैर कानूनी सामान केँ आधार पर्र कोई क्षति नहि पहुॅचाना चाहता बल्कि अपने बलबूते पऱ हि अपनेव अपने परिवार केँ संगहुए हर अत्याचार कां बदला लेना चाहता हूॅ। अगर मुझेउस सामान केँ आधार पर्र हि अपने ताऊ कां क्रियाकर्म करना होता तौ मे यहकाम बहोत पहले हि कर चुका होता। इस लिएइस बात पऱ सोचने कां कोई मतलब हि नहि हैं साथी। "
"मे तुम्हारी बातों सें पूर्णतया सहमतहूॅ। " आदित्य नें कहा___"लेकिन उन्हें यह भि तौ पता होगा न् कि अगर तुम् अपने बलबूते पर्र अपने ताऊ कां कोई भि बाल बाॅका नं करपाए तोँ फिन तुम्हारे पास आखिरी चारा वोँ ग़ैर कानूनी सामान हि तौ होगा। यानी कि तुम् उस सामान केँ आधार पर्र हि आख़िरी चारे केँ रूप मे अपने ताऊ कां काम तमाम करोगे। कहने कां मतलबयह कि इससमय अगर तुम् उसी ग़ैर कानूनी सामान कि धमकी देकर अपने ताऊ कों भीगी बिल्ली बनाकर अपनेपास आने पऱ मजबूर करोगे तौ वोँ यही समझेंगे कि शायद तुम्हारे पासअब यही एक् चारारह गय़ा थां जिसके तहत तुमने अजय सिंह केँ उस ग़ैर कानूनी सामान कां सहारा लिया हैं औऱ उसे अपनेपास इसतरह बुलारहे हौ। "
"मनोविज्ञान कि दृष्टि सें तुम्हारा यहसोच कर कहना यकीनन सही हैं। " मैने कहा___"लेकिन मत भूलो कि उसतरफ बड़ीमाॅ हें जौ स्वयं दिमाग़ केँ मामले मे हम् सबसेबीस हि हें। कहने कां मतलबयह कि सारे हालातों पऱ ग़ौर करने केँ बाद वोँ इसी नतीजे पर्र पहुॅचेंगी कि इतनाकुछ होने केँ बाद तोँ हमारा पक्ष पहले सें औऱ भि ज़्यादा मजबूत होँ गय़ा हैं, तौ फिन अचानक यहगैर कानूनी सामान कों आधारबना करअजय सिंह कों हम् क्यूं अपनेपास बुलारहे हें?"
"अरे तोँ उनके नतीजों सें हमें क्याँ लेना देना भइया?" आदित्य नें कहा___"वोँ सारे हालातों पर्र ग़ौर करके क्याँ नतीजा निकालती हें इससे हमें क्याँ फर्क़ पड़ता हैं? हमें तौ अपनेकाम सें मतलब हैं, फिन चाहे वोँ जैसे भि हौ। "
"औऱ मेरे सिद्धान्तों व उसूलों कां क्याँ?" मैने आदित्य कि तरफ अजीबभाव सें देखते हुए कहा___"हम् सच्चाई व धर्म कि राह पऱ चलरहे हें साथी। हम् भले हि अब तक धोखे सें याँ किसीचाल सें यहाॅ तक पहुॅचे हें लेकिन प्रेम वजंग मे यह जायज थां। मगर यहाॅ पऱ एक् नियम अथवा एक् सिद्धान्त तौ मैंने उन्हें जता हि दिया थां कि मे अजय सिंह केँ खिलाफ उसके ग़ैर कानूनी सामान केँ आधार पर्र कोई ऐक्शन नहि लूॅगा, बल्कि सभीकुछ अपने बलबूते पऱ हि करूॅगा। इसबात कों मे अब तक निभाता भि आयाहूॅ औऱ आगे भि इसे निभाना चाहता हूॅ। यह मेरे जिगरव मेरी मर्दानगी कां सबूत भि होगा भइया कि मैने अपने बलबूते पर्र हि सभीकुछ किया। इसके विपरीत अगर मैनेजंग केँ आख़िर मे यह क़दम उठाया तौ फिन मेरी साख़ कां क्याँ औचित्य रह जाएगा? मेरा ताऊ इसबात कों भले हि न् समझपाए मगर मुझे यकीन हैं कि मेरीइस मनोभावना कों बड़ीमाॅ अवश्य समझेंगी, औऱ मे चाहता भि हूॅ कि उनकेमन मे मेरे कैरेक्टर कां यह मैसेज जाए। दूसरी बात, हमे ऐसा करने कि ज़रूरत भि क्याँ हैं यार? आप् दोनो केँ रहते तौ मे सारी दुनिया कों फतहकर सकताहूॅ। "
"एक् सच्चा इंसान तथा एक् सच्चा वीरऐसा हि होना चाहिए। " सहसा रितू दिदी नें मेरीतरफ प्रसंसा भरी नज़रों देखते हुए कहा___"मुझे तुझ पर्र नाज़ हैं मेरे भइया। मेरादिल करता हैं कि तेरेलिए अपनी आखिरी साॅस तक निसार करदूॅ। "
"ऐसामत कहिए दिदी। " मैने सहसा भावुकतावश उनकीतरफ देखते हुए कहा___"अभि तोँ हम् सबको एक् संग बहोत सारी खुशियाॅ बाॅटनी हें। इस सबकेबाद हम् एक् नये संसार कां शुभारम्भ करेंगे। उसनये संसार मे बेपनाह प्रेम औऱ बेपनाह खुशियाॅ होंगी। "
"औऱ मुझे अपनीउन खुशियों सें किनारा कर दोगे क्याँ तुम् लोग?" आदित्य मुस्कुराते हुएबोल पड़ा___"ऐसा सोचना भि मतराज। वरनादेख लेना तुम्हारे घऱ केँ बाहर् धरना देकरबैठ जाऊॅगा। "
"ऐसामत करना साथी। " मैने मुस्कुराते हुए कहा___"गाॅव केँ लोग धरने केँ रूप मे एक् हि व्यक्ति कों बैठा देखेंगे तौ उसेकुछ औऱ हि समझ लेंगे। "
"ओ हैलो। " आदित्य नें ऑखें दिखाई___"क्याँ मतलब हैं तुम्हारा? क्याँ समझ लेंगे गाॅव केँ लोग___भिखारी?? चलकोई बात नहि दोस्त। तुम्हारे लिएयह भि बन जाऊॅगा। "
"तुम्हें बाहर् धरने पर्र बैठने कि ज़रूरत नहि हैं आदित्य। " रितू दिदी नें कहा___"रक्षाबंधन आने वाला हैं। इतने वर्षों मे पहलीबार मे राज कों राखी बाधूॅगी। राज कि तरह तुम् भि मेरे भइया हि हौ। मे औऱ भि बहोत खुश होँ जाऊॅगी कि तुम्हारे जैसा एक् नेकदिल इंसान मेरा भइयाबन जाएगा। "
"कितनी खूबसूरत बातकही हैं तुमने। " आदित्य सहसा किसी गहरे ख़यालों मे खोता नज़र आया___"तुम्हारे हि जैसी एक् बेहन थि मेरी___इंतजार। मेरी लाडली थि वोँ, हरसाल रक्षाबंधन केँ दिन मेरी कलाई पऱ एक् संगढेर सारी राखियाॅ बाॅध देती थि। फिन कहती कि सब राखियों कां वोँ अलगअलग रुपया लेगी मुझसे। " कहने केँ संग हि आदित्य कि ऑखों सें ऑसूछलक पड़े, बोला___"मगर चारसाल पहले अपने प्रेम मे धोखा खाने कि वजह सें उसने खुदखुशी कि कोशिश कि। दो मंजिला घर-मकान कि छत सें कूद गई वोँ। हास्पिटल मे इलाजचला मगर डाक्टर नें बताया कि वोँ कोमा मे जा चुकी हैं। आजचार साल होँ गए। आज भि वोँ लाशबनी पड़ी हैं। जिस लड़के नें उसे धोखा दिया थां उसेऐसी सज़ा दि थि मैने कि वोँ किसी भि लड़की सें संबंध बनाने कां सोच हि नहि सकताअब। "
आदित्य कि यह बातें सुनकर मे औऱ रितू दिदी भि सीरियस होँ गए। रितू दिदी उठकर आदित्य केँ पास गई औऱ उसे अपने सें छुपका लिया। मे स्वयं भि आदित्य कि दूसरी तरफबैठ कर उसके कंधे कों थपथपा रहा थां।
"दुखीमत होँ आदित्य। " रितू दिदी नें कहा___"इंतज़ार जल्द हि ठीक होँ जाएगी। चलोअब शान्त होँ जाओ। देखोयह भगवान कां विधान हि तोँ थां कि मे तुम्हारी बेहन केँ रूप मे तुम्हें मिली औऱ चारसाल सें सूनी पड़ी तुम्हारी कलाई मे राखी भि बाधूॅगी। "
"ईश्वर कां बहोत बहोत धन्यवाद। " आदित्य नें रितू दिदी सें अलग होतेहुए ऊपर कि तरफसिर करके कहा___"जोँ उसने मुझे बेहन केँ रूप मे मेरी इंतजार कों मेरेपास भेज दिया। मे तुमसे यही कहूॅगा रितू कि तुम् भि इंतज़ार कि तरह मेरी कलाई पऱ ढेर सारी राखियाॅ बाॅधना। "
"जैसी तुम्हारी ख़्वाहिश। " दिदी नें मुस्कुरा कर कहा___"तुम् दोनो बैठो मे ज़रा काकी(बिंदिया) कों गरमचाय बनाने केँ लिए कहनेजा रहीहूॅ। "
"ठीक हैं। " आदित्य नें कहा। उसकेबाद रितू दिदी उठकर अंदर कि तरफचली गईं। जबकि मे औऱ आदित्य वहीं बैठेरहे।
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उधर मुम्बई मे।
जगदीश ओबराय बॅगले केँ बाहर् लान मे एक् तरफहरी हरी विदेशी घाॅस केँ बीचोबीच रखी कुर्सी पऱ बैठासाम कां अखबार पढ़रहा थां। इस वक़्त वो यहाॅ पऱ अकेला हि थां। उसके सामने कि बाॅकी सब कुर्सियाॅ खाली थि। तभीमेन गेट सें अंदरआती हुईँ एक् वाहन कि आवाज़ सें उसका ध्यान मेनगेट कि तरफ गय़ा।
मेनगेट सें अंदर दाखिल हुईँ गाड़ी चलतेहुए सीधा पोर्च मे जाकर रुकी। गाड़ी केँ रुकते हि पैसेंजर सीट कि तरफ कां गेट खुला औऱ अभय सिंह अपने पांव पोर्च केँ फर्श पऱ रखतेहुए बाहर् निकला। बाहर् आते हि उसनेलान मे एक् तरफ कुर्सी मे बैठे जगदीश ओबराय कि तरफ देखा। जगदीश ओबराय कों देखते हि उसके होठों पर्र मुस्कान उभरआई औऱ वो उसतरफ हि बढ़ता चला गय़ा।
"बोलो भइया क्याँ कहा डाक्टर नें?" अभय केँ कुर्सी पऱ बैठते हि जगदीश ओबराय नें मुस्कुराते हुए उससे पूछा___"वैसे तुम्हारे चेहरे कि चमकदेख कर ज़ाहिर हौ रहा हैं कि रिपोर्ट पाॅजिटिव हि हैं। "
"बिलकुल सहीकहा आपने भइया साहब। "अभय सिंह नें खुशी सें कहा___"रिपोर्ट एकदमसही हैं। बसकुछ हि दिनों मे सभीकुछ सही होँ जाएगा औऱ यहसभी आपकीवजह सें हि संभव होँ सका हैं। इसकेलिए मे आपका हमेशा आभारी रहूॅगा। "
"अरे इसमें मेरा आभारी रहने कि क्याँ बात हैं भई?" जगदीश ओबराय नें कहा___"सभी कुछ करने वाला तौ ऊपरवाला हैं। हम् तौ बस माध्यम हि होते हें। "
"ऊपरवाले कों भि तौ कुछ करने केँ लिए किसी नं किसी माध्यम कि आवश्यकता हि पड़ती हैं भइया साहब। "अभय सिंह नें कहा____"यह उसी कां नतीजा हैं कि आप् इस सबकेलिए माध्यम बने औऱ यहसभी हुआ वरनाअब तक जोँ कुछ भि हुआ हैं उसके बारे मे तोँ हम् मे सें कोई ख़्वाब मे भि नहि सोच सकता थां। "
"पर्र इसमें भि सबसे बड़ा योगदान गौरी बेहन कां हैं अभय भइया। " जगदीश ओबराय नें कहा___"उसने करुणा बेहन सें कुरेद कुरेद करतथा ज़बरदस्ती पूछा थां औऱ तब करुणा नें बताया कि तुममें समस्या क्याँ हैं? गौरी बेहन नें वोँ बात बहाने सें हि सही लेकिन मुझसे कही। मे तोँ सोच भि नहि सकता थां कि तुम् मे यह समस्या हौ सकती हैं। तुम् भि अपने बिना मतलब केँ स्वाभिमान व लज्जा केँ चलतेइस बारे मे किसी सें कहना नहि चाहते थें। बेकार कि सोच औऱ बेकार केँ सिद्धान्त लिए बैठे थें। तुम्हें अपनी पत्नि कि इच्छाओं कां खुशियों कां कोई ख़याल हि नहि थां। ख़ैर, जोँ भि हुआ अच्छा हि हुआ। अब खुशी कि बातयह हैं कि तुम् फिजिकली अबकुछ हि दिनों मे पूरीतरह सें ठीक होँ जाओगे औऱ तुम्हारे पति पत्नि केँ रिश्तों केँ बीचफिन सें खुशियाॅ भि आँ जाएॅगी। "
"सचमुच गौरी भाभी कों सबका ख़याल रहता हैं। " अभय सिंह नें मुग्ध भाव सें कहा___"वोँ यकीनन देवी हें भइया साहब। कभी कभी सोचा करताहूॅ कि इतने अच्छे लोगों केँ संग भगवान ऐसा अन्याय केसेकर देता हैं? भला क्याँ बिगाड़ा थां किसी कां उन्होंने?"
"एक् नये अध्याय कों शुरुआत करने केँ लिए पुराने ख़राब हौ चुके अध्याय कों ख़त्म करना हि पड़ता हैं। " जगदीश ओबराय नें कहा___"हम् आम इंसान भगवान केँ क्रिया कलाप कों समझ नहि पाते हें जबकि सबसे ज़्यादा उसे हि पता होता हैं कि हमारे लिए क्याँ अच्छा हौ सकता हैं? भगवान नें मेरेसंग क्याँ कुछ नहि कर दिया हैं। आज सें पहलेअरब पति होतेहुए भि मे इतनी बड़ी सल्तनत मे अकेला थां लेकिन आज मेरेपास गौरी जैसी बेहन हैं औऱ विराज व निधी जैसे मेरे बच्चे हें। उनकेसंग संग तुम् सभी भि मिलगए। इनसब रिश्तों मे मुझे प्रेम व सम्मान हद सें ज़्यादा मिलरहा हैं। अब इससे ज़्यादा क्याँ चाहिए मुझे?इस दुनियाॅ मे हम् क्याँ लेकरआए थें औऱ क्याँ लेकर जाएॅगे? सभीकुछ यहींरह जाएगा, असली दौलतव असलीसुख तौ इन्हीं मे हैं। आज परमेश्वर केँ इस न्याय सें मे बहोत खुशहूॅ। "
"सहीकहा आपने भइया साहब। "अभय सिंह नें कहा___"काश हर इंसान आप् जैसीसोच वाला होँ जाए तौ यह संसार कितना हसीन हौ जाए। एक् मेरे बड़े भइया साहब हें जिन्होंने अपने मतलब केँ लिएहर रिश्ते कि बलि चढ़ा दि तथा अपनों केँ संग इतना बड़ा अत्याचार कर डाला। क्याँ उन्हें यहबात नहि पता होगी कि उन्होंने जिन चीज़ों केँ लिएयह सभी किया वोँ चीज़ें मरने केँ बाद उनकेसंग नहि जाएॅगी। बल्कि उनकेइस कर्म सें उनके मरने केँ बाद भि लोग उन्हें बुराभला हि कहेंगे। "
"इस संसार मे हरतरह केँ इंसानों कां होना ज़रूरी हैं अभय। " जगदीश नें कहा___"परमेश्वर हरतरह केँ प्राणियों कि रचना करता हैं, फिन उन्हीं केँ द्वारा खेल भि रचाता हैं औऱ उसखेल कां मजा भि लेता हैं। उसने हम् इंसानो केँ लिए नियम बनाए औऱ उन नियमों पर्र चलने केँ लिए उसने वक़्त वक़्त पऱ हमें किसी न् किसी माध्यम सें मार्ग भि बताया। ख़ैरयह प्रसंग तोँ बहोत बड़ा हैं भई, इसे समझना औऱ इस पर्र अमल करना बहोत कठिन हैं। तुम् बताओ क्याँ कहा डाक्टर नें?"
"बाॅकी कां तौ आपकोपता हि हैं। " अभय सिंह नें कहा___"उस दिन कि रिपोर्ट केँ अनुसार इलाज शुरुआत हौ चुका थां। आज उसने टेस्ट लिया तोँ रिजल्ट बेहतर निकला। उसने बताया कि बहोत जल्द पहले जैसीबात होँ जाएगी। "
"चलोयह तोँ अच्छी बात हैं। " जगदीश ओबराय नें कहा___"तुम् भि ज़रा संजम औऱ संयम कां ख़याल रखना औऱ दवा दारू वक़्त वक्त पर्र करते रहना। भगवान नें चाहा तौ बहोत जल्दसभी कुछठीक होँ जाएगा। "
"जी बिलकुल। " अभय सिंह नें कहा___"अच्छा भइया साहब मे ज़राआज कि दवाइयों कों अंदररख करआता हूॅ। वोँ अभि गाड़ी मे हि रखी हुईँ हें। "
"ओहहाॅ। " जगदीश ओबराय नें कहा___"औऱ हाॅ अंदर गौरी बेहन सें कहना ज़रा गरमा गर्मगरम चाय तौ बनाकर पिलाए। "
जगदीश ओबराय कि बातसुन करअभय सिंह नें हाॅ मे सिर हिलाया औऱ कुर्सी सें उठकर वाहन कि तरफबढ़ गय़ा। गाड़ी सें उसने एक् प्लास्टिक कि थैली निकाली औऱ उसे लेकर बॅगले केँ अंदरचला गय़ा।
वहीं एक् तरफ निधी केँ कमरे मे निधी औऱ आशाबेड पर्र बैठी हुई थि। पिछले दिन हुई बातचीत सें निधीआशा केँ सामने आने सें थोडा असहज सां महसूस करती थि, लेकिन आशा केँ समझाने पऱ उसकी झिझकव लज्जा बहोत हद तक दूर हौ गई थि। आशा पहले भि अधिकतर उसकेपास हि रहती थि लेकिन जब सें उसके सामने यहबात खुल गई थि कि निधी विराज सें प्रेम करती हैं तब सें वोँ औऱ भि निधी केँ समीप हि रहती थि। आशाउमर मे रितू जैसी हि थि तथा एक् समझदार व सुलझी हुईँ लड़की थि इसलिए वोँ निधी कों एक् समय केँ लिए दुःखी याँ मायूस नहि होने देती थि।
आशा केँ हि पूछने पर्र निधी नें उसे बताया कि केसेउसे अपने भइया सें प्रेम हुआ औऱ केसे उसने अपनेउस प्रेम कों विराज केँ सामने उजागर भि किया थां। आशा सारी बातें सुनकर हैरान थि। सबसे ज़्यादा इसबात पर्र कि निधी नें विराज सें अपने प्रेम कां इज़हार भि कर दिया हैं। यहअलग बात हैं कि विराज नें इसे अनुचित व ग़लत कहतेहुए उसेइस संबंध मे समझाया थां। उसनेउसे यह भि समझाया थां कि इस रिश्ते कों दुनियाॅ वालेकभी स्वीकार नहि कर सकते औऱ नां हि उसकेघऱ वाले। विराज अपनीइस लाडली कों जीजान सें चाहता थां लेकिन एक् बेहन भइया केँ रूप मे। वोँ नहि चाहता थां कि उसकी कठोरता सें निधी कों ज़्यादा दुख पहुॅचे। छोटी ऊम्र कां आकर्शण कभीकभी ज़िद केँ चलते इतना उग्ररूप धारणकर लेता हैं कि अगरउसे वक्त रहते सम्हाला नं गय़ा तोँ परिणाम गंभीर भि निकलआते हें।
शुरुआत शुरुआत मे आशा कों भि यहीलगा थां कि निधी अपने भइया पऱ महज आकर्षित हैं। लेकिन जब उसने निधी सें इस संबंध मे सारी बातों कों जानां औऱ उसकी डायरी केँ हरपेज पर्र दिल कों झकझोर कररख देने वाले मजमून कों पढ़ा तौ उसे महसूस हुआ कि यहमहज आकर्शण नहि हैं बल्कि यह बेपनाह मुहब्बत कां प्रत्यक्ष सबूत हैं। आशा नें निधी कि इजाज़त सें हि उसकी डायरी कों पढ़ना शुरुआत किया थां। यूॅ तौ डायरी मे लिखीहर बात अपने आप् मे निधी कि उतावलापन बयां करती थि लेकिन निधी केँ द्वारा लिखी गई ग़ज़लें ऐसीथीं जोँ आशा केँ दिल कों बुरीतरह तड़पा देती थि। उसेऐसा लगता जैसे ग़ज़ल कि हरबात मे उसी कां हालेदिल बयां किया गय़ा हैं। निधी अपने आपको बहलाने केँ लिए अधिकतर किताबों मे हि डूबी रहती थि। आशा उसकी पढ़ाई मे कोई हस्ताक्षेप नहि करती थि। लेकिन उसे भि पता थां कि किसी चीज़ मे अति हानिकारक होती हैं। इसलिए वोँ निधी कां हरतरह सें ख़याल भि रखती थि। इससमय भि वो उसकेलिए गरमचाय लेकरआई थि।
निधी नें गरमचाय पिया औऱ फिनकुछ देरइधर उधर कि बातें करने केँ बाद वो फिन सें किताबों मे डूब गई थि। जबकि आशाबेड पर्र सिरहाने कि तरफरखे पिल्लो केँ नीचे सें निधी कि डायरी निकाल करउसे पढ़ने लगी थि। उसमें एक् ग़ज़ल थि जिसे वोँ बारबार पढ़ेजा रही थि।
अब किसी भि बात कां यूॅ मशवरा नं देकोई।
इश्क़ गुनाहे अजीम नहि तोँ सज़ा नं देकोई।।
अज़ाब तौ इश्क केँ संग हि मिल जाते हें,
फिन ग़मों कों हमारे घऱ कां पता नं देकोई।।
केसे समझाएॅ केँ ऑधियों केँ बस कां भि नहि,
यह तोँ दिल केँ चिराग़ हें इन्हें हवा न् देकोई।।
दिल कि चोंट तोँ दिलबर सें हि रफू होती हैं,
बेवजह इसदिल कि अबदवा न् देकोई।।
इसलिए अपनेदिल कों समझा लिया हमने,
सरे राह मेरे महबूब कां सिर झुका न् देकोई।।
आगलगे इस इश्क़ कों केँ इसकीवजह सें,
परेशां होँ केँ मुझको कहीं भुला नं देकोई।।
आशा नें इस ग़ज़ल कों बारबार पढ़ा। उसकेदिल मे अजीब सि हचचल होनेलगी थि। बहुतदेर तक वोँ उसके बारे मे सोचती रही। वोँ हैरान भि थि कि निधी इतनाकुछ केसेलिख सकती हैं? पर्र सबूत तौ उसकी ऑखों केँ सामने हि थां। आशा नें निधी सें पूछा भि थां कि यहकिस शायर कि लिखी हुई ग़ज़ल हैं, जवाब मे निधी नें बस मुस्कुरा दिया थां। जबआशा नें ज़ोर दिया तौ उसने बताया कि यह उसके हि दिल कि आवाज़ हैं जिसे उसने शब्दों मे पिरोकर ग़ज़ल कां रूपदे दिया हैं। निधी कि इसबात पर्र आशा सोचों मे गुम हौ गई। फिन जैसे उसने स्वयं कों सम्हाला। उसकी नज़र डायरी केँ दाहिने वाले पेज़ पर्र लिखी एक् औऱ ग़ज़ल पर्र पड़ी। उसनेउस ग़ज़ल कों भि पढ़ना शुरुआत किया।
दिल तौ दरिया हि थां इकग़म भि समंदर होँ गय़ा।
फक़त दर्द सें फाॅसला थां वोँ भि मयस्सर होँ गय़ा।।
हरसमय ज़हन मे अब उनका हि ख़याल तारी हैं,
मेरी पलकों केँ तलेहर ख़्वाब सिकंदर होँ गय़ा।।
इसके पहले तोँ बहारे गुल कां हर मौसमहरा रहा,
अब खिज़ां क्याँ आई केँ हर बाग़ बंज़र हौ गय़ा।।
मेरी ज़रा सि अहह पऱ बेचैनी उठते थें कुछलोग,
आजकल तोँ मोम कां हर पुतला पत्थर हौ गय़ा।।
कितनी हसीं थि ज़िन्दगी मरीज़-ए-दिल सें पहले,
अब तौ नज़र केँ सामने बस वीरां मंज़र हौ गय़ा।।
अपनी बेबसी कां ज़िक्र भला करें भि तौ किससे,
बसछुप छुप केँ रोना हि अपना मुकद्दर होँ गय़ा।।
इस ग़ज़ल कों पढ़कर आशा केँ संपूर्ण बदन मे झुरझुरी सि हुईँ। दिल मे इकहूक सि उठी जिसने उसकी ऑखों मे पलक झपकते हि ऑसुओं कां सैलाब सां ला दिया। उसनेपलट कर चुपके सें निधी कि तरफ देखा। निधी पूर्व कि भाॅति हि किताबों मे खोई हुईँ थि। यहदेख करआशा कों ऐसालगा जैसे उसकादिल एकदम सें धड़कना बंदकर देगा। उसने बड़ी मुश्किल सें अपने अंदर केँ प्रबल वेग मे मचलने लगे जज़्बातों कों सम्हाला औऱ फिन डायरी कों बंदकर बेड पऱ चुपचाप ऑखेंबंद करकेलेट गई। दिलो दिमाग़ एकदम सें शून्य सां हौ गय़ा थां उसका। उसे निधी केँ दर्द कां बखूबी एहसास हौ चुका थां। लेकिन दिमाग़ मे यह प्रश्न ताण्डव सां करनेलगा कि कोई लड़कीइस हद तक केसे किसी कों चाह सकती हैं कि उसके प्यार मे इसतरह बावरी सि होकर ग़ज़ल व कविता लिखने लगजाए? मन हि मन जाने क्याँ क्याँ सोचते हुएआशा कों पता हि नहि चला कि कब नींद नें उसे अपनी आगोश मे लें लिया थां।
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अजय सिंह तेज़ रफ्तार सें गाड़ी चलाते हुएशहर कि तरफजा रहा थां। इस वक़्त उसके चेहरे पऱ पत्थर सि कठोरता विद्यमान थि। उसकी नज़रबार बार वाहन केँ अंदरलगे बैक मिरर पऱ पड़ जाती थि। वो बहुत टाइम सें देखरहा थां कि उसके पीछे करीबसौ मीटर केँ फाॅसले पऱ एक् जीपलगी हुइ हैं। पहलेउसे लगा थां कि शायदकोई लोकल व्यक्ति होगा जौ उसकीतरह हि शहरजा रहा हैं लेकिन फिन जाने क्याँ सोचकर अजय सिंह नें उसे परखने कां सोचा थां? अजय सिंह नें कईबार अपनी गाड़ी कि रफ्तार कों धीमा किया थां, यहसोच कर कि पीछेआने वालीजीप उसे ओवरटेक करके उसकेआगे निकल जाएगी मगरऐसा एक् बार भि नहि हुआ थां। बल्कि उसकी वाहन केँ धीमा होते हि उसजीप कि रफ्तार भि धीमी होँ जाती थि।
अनुभवी अजय सिंह कों समझते देर न् लगी कि पीछेलगी जीप वास्तव मे उसका पीछाकर रही हैं। इसबात केँ समझते हि उसेयह भि समझ आँ गय़ा कि संभव हैं ऐसा उसकेसंग अब सें पहले भि हौ चुका होँ। उसके मस्तिष्क मे दोनाम आए रितू औऱ विराज। यकीनन इन दोनो नें उसकीहर गतिविधि पऱ नज़र रखने केँ लिएकोई व्यक्ति उसके पीछेलगा रखा थां। अजय सिंह कों अबसभी समझ आँ गय़ा थां कि क्यूं वोँ बारबार मातखा रहा थां अपने दुश्मन सें। उसके दुश्मन कों उसकीहर ख़बर रहती थि तभी तौ वोँ उससेचार क़दमआगे रहता थां। अजय सिंह कों अपने आप् पर्र बेहद क्रोध भि आया कि उसनेइस बारे मे पहले क्यूं नहि सोचा थां? जबकि यह एक् अहमबात थि। उसकी बेटी केँ लिएयह सभी करनामहज बाएॅहाथ कां खेल थां। वोँ एक् पुलिस वाली थि, जिसके तहत मुजरिमों कों खोजने केँ लिए उसके अपने गुप्त मुखबिर होना लाजमी बात थि। लेकिन अबभला इस बारे मे सोचने कां क्याँ फायदा थां? जोँ होना थां वोँ तौ हौ हि चुका थां, मगरअब जोँ होने वाला थां यह उसनेसोच लिया थां।
अजय सिंह नें अपने पीछेलगी उसजीप कों चकमा देने कां मनबना लिया थां। अब वोँ अपनी गतिविधियों कि जानकारी अपने दुश्मन तक नहि पहुॅचने देना चाहता थां। उसने गाड़ी कों तेज़ रफ्तार सें दौड़ा दिया औऱ कुछ हि वक्त मे शहर केँ अंदर दाखिल हौ गय़ा। बैक मिरर पऱ उसकी नज़र बराबर थि। वोँ देखरहा थां कि पीछेलगी जीप भि उसी रफ्तार सें आँ रही थि। अजय सिंह कों पता थां कि उसजीप कों चकमा देने कां काम वोँ शहर मे हि कर सकता थां। क्योंकि यहाॅ पर्र आबादी थि तथाकई सारे रास्ते थें जहाॅ पऱ समय मे गुम हौ सकता थां। अजय सिंह नें ऐसा हि किया, यानीशहर मे दाखिल होते हि कई सारे रास्तों सें चलतेहुए पीछेलगी जीप कि पहुॅच सें दूर हौ गय़ा। इसबीच उसने किसी सें मोबाइल पर्र बात भि कि थि।
थोड़ी हि देर मे अजय सिंह नें वाहन कों मार्ग केँ किनारे रोंक दिया। वो बैक मिरर पऱ अभि भि देखरहा थां। करीब-करीब दस मिनट गुज़र गए। पीछेलगी जीप कां कहींकोई पता नं थां। अलबत्ता इसबीच एक् वाहन अवश्य उसके सामने आकर रुकी। गाड़ी सें एक् साधारण हाइट काठी कां व्यक्ति बाहर् निकला औऱ चलकरअजय सिंह केँ पासआया। उस व्यक्ति कों देखकर अजय सिंह अपनी वाहन सें नीचे उतरा। अजय सिंह केँ उतरते हि वोँ व्यक्ति अजय सिंह कि गाड़ी मे बैठ गय़ा। गाड़ी मे बैठते हि उसने गाड़ी कों आगे पीछे करकेयू टर्न लिया औऱ वहाॅ सें चला गय़ा। उस व्यक्ति सें अजय सिंह नें कोईबात नं कि थि, शायद उसने मोबाइल पर्र हि उसेसभी कुछ समझा दिया थां। ख़ैरउस व्यक्ति केँ जाते हि अजय सिंह भि उस व्यक्ति कि गाड़ी केँ पास पहुॅचा औऱ वाहन कि ड्राइविंग सीट पर्र बैठकर गाड़ी कों आगे बढ़ा दिया।
कुछ हि वक्त मे अजय सिंह कि यह गाड़ी जिस स्थान रुकी उसके बाएॅतरफ एक् ऊॅची सि बिल्डिंग थि। यह बिल्डिंग पाॅच मंजिला थि। नीचे केँ ग्राउंड फ्लोर पऱ कई दुकानें थि जबकि दूसरे फ्लोर पऱ बिल्डिंग कि बाहरी दीवार पर्र स्टील केँ बड़े बड़े अच्छरों सें "दाजिम" लिखा थां। बाॅकी केँ ऊपरी फ्लोर पर्र कुछ औऱ भि चीज़ें थीं जिनका ज़िक्र करना यहाॅ ज़रूरी नहि हैं।
वाहन सें उतरकर अजय सिंहउसी बिल्डिंग कि तरफबढ़ चला। बिल्डिंग केँ ऊपरी फ्लोर पर्र जाने केँ लिए दोनोतरफ कि दुकानों केँ बीच एक् बड़ा सां चैनलगेट लगा थां। उस चैनलगेट सें हि सीढ़ियाॅ लगी थि। अजय सिंह तेज़ तेज़ क़दमों सें चलताहुआ उस चैनलगेट केँ पास पहुॅचा औऱ फिन सीढ़ियाॅ पऱ चढ़ता हुआऊपर कि तरफचला गय़ा। कुछ हि देर मे वोँ दूसरे फ्लोर यानी कि दाजिम वाले हिस्से केँ एक् बड़े सें मीटिंग हाल मे दाखिल हुआ। मीटिंग हाल मे पहले सें हि कुछ गिनती केँ लोग बैठेहुए थें।
"हैलो फ्रैण्ड्स। " अजय सिंहउन सबकीतरफ देखते हुएकहा औऱ फिन फ्रंट कि मुख्य कुर्सी पर्र बैठ गय़ा।
"अच्छा हुआ ठाकुर साहब। " उनमे सें एक् नें अजय सिंह कि तरफ देखते हुए कहा___"कि आपनेयह मीटिंग कि औऱ हम् सबको यहाॅ बुला लिया। हम् स्वयं भि चाहते थें कि सामने बैठकर इस बारे मे तसल्ली सें बात करें। हम् सबने आपकी सहायता केँ लिए अपने अपने आदमियों कों आपकेपास भेजा थां लेकिन उसदिन केँ हादसे मे हमारे वोँ सभी व्यक्ति पुलिस द्वारा पकड़लिए गए। यह हमारे लिए बिलकुल भि अच्छा नहि हुआ हैं। आप् समझ सकते हें कि पुलिस केँ पास पत्थरों कां भि मुह खुलवा लेने कि कूवत होती हैं। इसलिए अगर हमारे आदमियों नें पुलिस केँ सामने अपना अपनामुह खोल दिया तोँ उसका अंजाम यही होगा कि बहोत जल्द हम् सभी भि पुलिस केँ द्वारा धर लिये जाएॅगे। "
"मामला वाकई बेहद गंभीर होँ गय़ा हैं कमलकान्त। " अजय सिंह नें कहने केँ संग हि शिगार सुलगा लिया, फिन बोला___"इस मामले कों हम् बड़ी आसानी सें सुलझा लेतेमगर आज मंत्री जी कि गिरफ्तारी सें बहोत बड़ा झटकालगा हैं। हम् मे सें किसी कों भि यह उम्मीद नहि थि कि मंत्री जैसा चतुरव शातिर इंसान इसतरह पलक झपकते हि पुलिस केँ द्वारा धर लिया जाएगा। ख़ैर, आप् सभी चिंता न् करें, क्योंकि मुझेऐसा लगता हैं कि पुलिस उन सबको छोंड़ देगी। "
"क्याऽऽऽ???" मीटिंग हाल मे बैठे वोँ सभीइस बात कों सुनकर उछल पड़े थें, एक् अन्य बोला___"ऐसा आप् केसेकह सकते हें ठाकुर साहब? जबकि यह असंभव बात हैं। पुलिस भलाऐसे संगीन अपराधियों कों केसे छोंड़ देगी?"
"उसकी एक् ठोसवजह हैं। " अजय सिंह नें कहा___"इस शहर कि पुलिस कां सारा महकमा भले हि बदल गय़ा थां लेकिन इसबात कों गुज़रे हुए बहुत वक़्त होँ गय़ा हैं। इसदेश मे ऐसे पुलिस वालों कि कमी नहि हैं जिनका इमान थोड़े सें पैसों केँ लिए डगमगा जाता हैं। कहने कां मतलबयह कि पुलिस महकमे मे एक् खास पुलिसिया ऐसा हि हैं जिसका इमान हमने पैसे सें डगमगा दिया हैं। उसी नें हमे मोबाइल पऱ इस सबके बारे मे जानकारी दि थि। "
"क.कैसी जानकारी ठाकुर साहब?" कमलकान्त केँ चेहरे पर्र हैरानी केँ भावआए।
"यही कि पुलिस नें हमारे जिन आदमियों कों गिरफ्तार किया थां। " अजय सिंह नें कहा___"उनके खिलाफ कोईकेस फाइल नहि किया गय़ा हैं अब तक औऱ महकमे केँ अंदर कां माहौल भि यही ज़ाहिर कररहा हैं कि आगे भि अभि उन पऱ कोईकेस फाइल होने कि संभावना नहि हैं। दरअसल पुलिस डिपार्टमेंट अभि मंत्री कि गिरफ्तारी पऱ ज़्यादा ज़ोरदे रहा हैं। पुलिसिये नें बताया कि एसीपी रमाकान्त शुक्ला कों केन्द्र सें भेजा गय़ा थां मंत्री औऱ उसके साथियों केँ खिलाफ़ गुप्तरूप सें सबूत इकट्ठा कर उन्हें गिरफ्तार करने केँ लिए। ताकिइस प्रदेश सें गंदगी दूर हौ सके। "
"वोँ सभी तौ ठीक हैं ठाकुर साहब। " अभिजीत सहायनाम कां व्यक्ति बोल पड़ा___"मगर इससेयह तौ साबित नहि होता कि मंत्री कि वजह सें पुलिस हमारे आदमियों पऱ कोईकेस फाइल नहि करेगी। बल्कि पुलिस कां तौ काम हि यही हैं मुजरिमों कों सज़ा दिलाना। अतःदेर सवेर पुलिस अपनाकाम अवश्य करेगी। "
"पूरीबात तोँ सुनो भइया। "अजय सिंह बोला___"एसीपी मंत्री तथा मंत्री केँ साथियों कों लेकर यहाॅ सें जा चुका हैं। उनका फैसला अब अदालत मे होगा औऱ ज़ाहिर हैं कि प्राप्त सबूतों केँ आधार पर्र उन सबको संगीन सें संगीन सज़ा होगी। एसीपी कां काम केवल इतना हि थां यानीअब यहाॅ पऱ वोँ नहि आएगा। उसी पुलिसिये नें बताया थां कि पुलिस कमिश्नर कि उसने बातें सुनी थि जौ वोँ मेरी बेटी सें कररहे थें। मामला यह हैं कि यह सारा फसाद रितू औऱ विराज नें पुलिस कमिश्नर कि सहमति सें हि किया थां। दूसरी महत्वपूर्ण बातयह हैं कि कमिश्नर कि बातों सें यहपता चला हैं कि उसेइस बात कि जानकारी विराज याँ रितू द्वारा नहि दि गई हैं कि उनकेपास हमारे खिलाफ ऐसा डायनामाइट सबूत हैं जिसके बेस पर्र वोँ हमेजब चाहे कानून कि चपेट मे ला सकते हें। कहने कां मतलबयह कि कमिश्नर कि समझ मे मामला यही हैं कि यहमहज एक् पारिवारिक मामला हैं जिसमें हमने विराज व उसकी फैमिली केँ संग ग़लत किया हैं, जिसके लिए वो हमसे अपनेहक़ कि लड़ाई लड़रहा हैं। विराज कां संग रितूदे रही हैं जोँ कि कमिश्नर कि सहमति पर्र हि हैं। अब सोचने वालीबात यह हैं कि जब कमिश्नर कों इस बारे मे पता हि नहि हैं कि हम् क्याँ धंधा करते हें तौ फिनभला वोँ हमारे आदमियों किस बारे मे पूछताॅछ करेगा? औऱ अगर करेगा भि तोँ वोँ यही कहेंगे कि उन लोगों कों हमने किराए पर्र हायर किया थां। यानी उनमे सें कोई आप् लोगों कां नाम नहि लेगा। रही बातउस हादसे कि जिसके कारण वोँ गिरफ्तार कियेगए थें तौ वोँ भि रितू कि हि वजह सें हुआ थां। उस हादसे मे ग़ैर कानूनी तरीके सें हमारा संग देने केँ लिएउन लोगों कों सज़ा केँ तौर पऱ थोड़ी बहोत सज़ामिल सकती हैं अथवा ज़ुर्माना भरवाकर उन्हें छोंड दियाजा सकता हैं। "
"अगरऐसा हैं। " कमलकान्त बोला___"तब तौ ठीक हैं ठाकुर साहब। हम् किसीतरह सें अपने आदमियों कों छुड़ाने कि कोशिश कर लेंगे। लेकिन आपसे गुजारिश हैं ऐसाफिन न् होँ। "
"ऐसा भि इसीलिए होँ गय़ा कमलकान्त। " अजय सिंह नें पुरज़ोर लहजे मे कहा___"क्योंकि हमेंउस सबकी ज़रा भि उम्मीद नहि थि। हलाॅकि वोँ हमारी ग़लती थि। हमेंइस बात कि तरफ भि ध्यान देना चाहिए थां कि दुश्मन कि तरफ हमारी बेटी हैं जौ एक् पुलिस वाली हैं औऱ वोँ इस सबकेलिए अपने पुलिस महकमे कां सहारा लेँ सकती हैं। ख़ैर, छोंड़िये इसबात कों। हमने वकील सें बातकर ली हैं वोँ सभी व्यक्ति बहोत जल्दछूट जाएॅगे। "
"अबआगे कां क्याँ प्रोग्राम हैं आपका?" अभिजीत सहाय नें कहा___"उस हादसे कि वजह सें जीती हुईँ बाज़ी आप् हारगए थें। इसलिए इसकेआगे क्याँ करने कां सोचा हैं आपने?"
"कहते हें कि टाइम हमेशा एक् जैसा नहि रहता। "अजय सिंह नें दार्शनिकों वाले अंदाज़ सें कहा___"हार जीतजंग करने वालेहर ब्यक्ति केँ हिस्से मे आती हैं। कभी वो हारता हैं तौ कभी जीतता भि हैं। कहने कां मतलबयह कि दुर्भाग्य कि वजह सें अब तक हम् हारते हि आए थें मगरअब ऐसा नहि होगा। "
"क्याँ मतलब हैं आपका?" कमलकान्त केँ माॅथे पर्र शिकन उभरी, बोला___"आप् तोँ ऐसेकह रहे हें जैसे कि आपकेपास अपने दुश्मन केँ खिलाफ कोई बहोत बड़ा सबूतलग गय़ा हैं जिसके तहत आप् अपने दुश्मन कों बड़ी आसानी सें अपने पंजे पर्र दबोच लेंगे। "
"बिलकुल सहीकहा कमलकान्त। " अजय सिंह केँ चेहरे पर्र चमक थि, बोला___"ऐसा हि हुआ हैं। उसने हमारे संग बहोत खेल खेलाअब एक् खेल हम् भि दिखाएॅगे उसे। एक् ऐसाखेल जिसके बारे मे उसने ख़्वाब मे नहि सोचा होगा। सबकेसभी एक् हि झटके मे हमारे क़दमों तले पालतू कुत्तों कि तरहदुम हिलाते नज़र आएॅगे। "
"ऐसी क्याँ बात हौ गई हैं ठाकुर साहब?" अभिजीत केँ चेहरे पर्र हैरानी थि___"जिसके तहत आप् इतनी दृढ़ता व इतने विश्वास केँ संगकह रहे कि सबकेसभी आपके पैरों तले आँ जाएॅगे?"
"बस देखते जाओ सहाय। "अजय सिंह नें प्रभावशाली लहजे मे कहा___"सभी कुछ बहोत जल्दसमझ आँ जाएगा। ख़ैर, हम् यहकहरहे हें कि हमेंइसी वक़्त वैसे हि कुछ व्यक्ति चाहिए जैसे आप् लोगों नें हमारी सहायता केँ लिए भेजे थें। "
अजय सिंह कि इसबात पर्र वहाॅ बैठेसब लोगकुछ देर तक तौ चकितभाव सें उसे देखते रहेफिन उन लोगों सहमति मे सिर हिलाया। कुछदेर बाद हि मीटिंग ख़त्म होँ गई। अजय सिंह केँ उठते हि बाॅकी सभी भि अपने अपने रास्तों पर्र चलेगए।
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दोस्तो, आप् सबके सामने मेगाभाग हाज़िर हैं। आशा करताहूॅ कि आप् सबको मनपसंद आएगा।
हमेशा कि तरह आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा।
बहोत बहोत धन्यवाद जीतू भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया औऱ शानदार रिव्यू केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
hammesha की prakaar behtareen update,
bhut Achchha laga aapko wapis yaha dekh krr।
jb viraj और ritu ko ptaa chalega के Unke aadami ko Ajay ne chakma de दिया h too woh bi kuchh hoshiyar too honge hi.
Jaisa की viraj और ritu ne कहा की Ajay और moorti jarur kuchh na kuchh karenge.
Dekhate h Ajay के nahale pe viraj dahala kese chalta h.
or jaha tak pyaar की बात h too bahen kaa pyaar bi premika के pyaar से कम नहीं hotha Sab kuchh same hi hotha h sirf physical relationship नहीं hoty.
Kya farak padhata h pyaar mai Saath rahana और Saath nibhana jaruri hotha h, joo viraj की bahane usaka Saath nibhayengi
or viraj bi nibhayega.
muze Asha sabse jyada achchhi lagti h heroine के liye, jisase viraj kaa character pe bi कोई ungali नहीं utha sakayga और woh Nidhi dwara accept bi krr li Jaayegi.
Khair yeh saari baate sayad agle part के liye chhod Dena चाहिए।
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
yaar yeh kya nvaa suspance aa gyaa, kahin viraj ke family ke bare me kuch ptaa too nahii chl gyaa. muze lagta h iss ladai ke ant me viraj k kisi karibi kee kurbani likhi h
Lagta h abhay ko Ajay ke admiyo mai dekh liya h Mumbai m joo abhay ke piche lag gaye honge . takii viraj kee family kaa ptaa laga sake aur ab age yeh dekhna h kee Mumbai m viraj apni family ko kese bachata h . waiting for next update bhay.
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