♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Waah superbbb update bro.mazaa aa गया
Viraj ajay singh की achhe maarne ne tula hua h.
pehle lag raha thaa bro की ritu अब juldi hi apne baap ko giraftaar karke jail mai daal degi mgr story ne too alag hi rang dikha दिया.matlab ajay singh के tahkhane से saari cheeje gayab krr di.अब na rahega baas और na bajegi baasuri.
Bro mein too yeh chaah raha thaa की ritu apne baap ko jail mai बंद kare और vahi उसकी gand की kutaayi kare hahahaha.
yar nidhi kaa character muze बड़ा पसंद आया.iska haa नहीं too
Baaki क्या bolu bro speechless
Now waiting for the next
bhut hi badhiya kahani h bhay. mene aj hi padhana suru kia h. Abtak too kahani bhut hi badhiya h. Baki k update bi padhke reply karunga. keep writing bhay.
धन्यवाद भइया,,,,,वक्त कि कमी रहती हैं भइयाफिन भि कोशिश करूॅगा कि एपसोड जल्द सें जल्ददे सकूॅ,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 20 》
अब तक.
"बात तोँ तुम्हारी ठीक हैं। " जगदीश हॅस पड़ा__"संभावनाओं पर्र कुछ नहि होता, कानून कों तोँ सबूत चाहिए। औऱ सबूतकोई हैं नहि। वाउ.यह तौ कमाल हौ गय़ा बेटे। "
"अभि तोँ दिमाग़ सें हि उनकी हालत खराबकर रखी हैं अंकल। " विराज नें कहा__"जबकि मैदान मे खुलकर आनां अभि बाॅकी हैं। जिसदिन आमने सामने कां खेल होगा नं उसदिन सें अजय सिंहहर लम्हा रोएगा, गिड़गिड़ाएगा, रहम कि भीख माॅगेगा मुझसे औऱ मेरीमाॅ सें। "
"उसकेसंग यही होना चाहिए राज बेटे। " जगदीश नें कहा__"जौ अपनेमाॅ बाप औऱ भइया कां नं हुआ बल्कि उनकेसंग इतना घिनौना कर्म कियाऐसे गंदे इंसान केँ संग किसी भि कीमत पऱ रहम नहि होना चाहिए। "
"उनकेलिए रहम शब्द मैंने अपनी डिक्शनरी सें निकाल कर फेंक दिया हैं अंकल। " विराज नें एकाएक ठंडे स्वर मे कहा__"एक् एक् चीज़ कां हिसाब लूॅगा मे। "
"मे तौ उस कमीने शिवा कों अपने हाथों सें कुत्ते कि तरह मारूॅगी। " सहसा निधि नें तपाक सें कहा__"मुझे उसकीशकल सें भि नफरत हैं। हाॅ नहि तोँ। "
निधि केँ इस तकिया कलाम कों सुनकर सभी मुस्कुरा कररहगए।
अबआगे.
ऐसे हि कुछदिन गुज़र गए। अजय सिंहअब अपनी हालत पर्र काबूपा चुका थां। बल्कि यह कहिये कि हरबात सें बहुतहद तक बेफिक्र हौ चुका थां। उसकी बेटी रितू द्वारा उसेपता चल चुका थां कि तहखाने मे बाॅकी कुछ नहि मिला थां। हलाॅकि रितू कों इसबात केँ पता होने कां प्रश्न हि नहि थां कि उसका बाप गैर कानूनी काम करता हैं। उसने तौ फाॅरेंसिक रिपोर्ट कों देखकर यही बताया थां कि फैक्टरी मे आग वक्त बम्ब केँ द्वारा हि लगी थि। अब उसकी तहकीकात केवलइसी तरफ थि कि फैक्टरी केँ अंदर जाकर तहखाने मे समय बम्ब किसने लगाया थां??
रितू कों एक् प्रश्न यह भि परेशान कररहा थां कि इसकेस कि बारीकी सें जाॅच पड़ताल कराने केँ पीछेहोम मिनिस्टर कां क्याँ मकसद थां?? उसने तौ मात्र केस कों रिओपेन करने कि अप्लीकेशन बस दि थि। उसका मकसद तौ केवलयह पता करना थां कि इसकेस मे पुलिस नें इस प्रकार कि रिपोर्ट क्यूं बनाई थि?? दूसरी बातयह थि कि उसे लगता थां कि फैक्टरी मे लगीआग महजकोई इत्तेफाक़ कि बात नहि थि। बल्कि उसके पिता केँ किसी दुश्मन द्वारा लगाई गई थि। इसलिए वो इस सबकापता करकेउस ब्यक्ति द्वारा अपने पिता केँ हुए भारी नुकसान कि भरपाई करना चाहती थि। उसे तौ इसबात सें भि हैरानी थि कि रातों रातइस शहर केँ सारे पुलिस डिपार्टमेंट कां तबादला क्यूं कर दिया गय़ा थां??? इसके पीछे क्याँ मात्र यहवजह थि कि इसकेस कि पुलिस नें अपनी पूरी ईमानदारी केँ संग छानबीन नहि कि, बल्कि किसी केँ कहने पऱ ऐसी रिपोर्ट सजधजकर कि?? क्याँ मात्र यहीवजह थि याँ फिन इसके पीछे भि कोईऐसा कारण हैं जौ फिलहाल अभि उसकीसमझ सें बाहर् नज़र आँ रहा हैं??
अजय सिंह बेफिक्र अवश्य हौ गय़ा थां लेकिन इसबात कां उसे एहसास थां कि एक् तलवार अभि भि उसकी गर्दन पऱ लटकी हुईँ हैं, जौ कभी भि उसकागला रेत सकती हैं। वो पक्के तौर पर्र समझ चुका थां कि तहखाने सें वो सभी चीज़ें तहखाने मे वक्त बम्ब लगाने वाले नें हि गायब कि हें। वो नहि जानता थां कि यहसभी किसने किया हैं मगर इतना ज़रूर जानता थां कि देर सवेरउस ब्यक्ति कां इस संबंध मे कोई न् कोई मैसेज अवश्य आएगा। अजय सिंहउसी मैसेज केँ इन्तज़ार मे थां। दूसरी बात अपने बिजनेस कों फिन सें खड़ा करने केँ लिए वो कार्यरत भि होँ गय़ा थां। फैक्टरी भले हि जल गई थि उसकीमगर उसकेपास पैसों कि कमी नहि थि। गैर कानूनी धंधे मे उसने बड़ीधन दौलत इकट्ठी करली थि। उसने फैक्टरी कों फिन सें शुरुआत करने केँ लिए उसकी मरम्मत कां काम शुरुआत करवा दिया थां। इस वक़्त वो रातदिन इसी मे ब्यस्त रहता थां। उसकी छोटी बेटी नीलम वापस मुम्बई जा चुकी थि। अजय सिंह फैक्टरी कों फिन सें शुरुआत करने केँ लिए कार्यरत थां, इसबात सें अंजान कि उसके पीछे उसका बेटा शिवा अपने आचरण सें क्याँ शोर खड़ा करनेजा रहा थां???
शिवा कां अधिकतर वक़्त अपने आवारा दोस्तों केँ संग मस्ती करने औऱ गाॅव कि किसी न् किसी लड़की कों पटाकर उनकेसंग अपने अंदर कि हवस मिटाने मे जाता थां। माॅ बाप कि तरह वोँ भि अपने हि घऱ कि औरतों व लड़कियों कों गंदी नज़रों सें देखता थां औऱ रातदिन अपनी हि माॅ बहनों तथा चाची कों अपने नीचे लेटाने कि सोचता रहता थां।
ऐसे हि एक् दिन उसकी हरकतों कि वजह सें शोर हौ गय़ा। अपने बाप कि तरह हि उसकी नीयय अपनी चाची करुणा पऱ बिगड़ी हुई थि। करुणा कि बेटी दिव्या भि जवान होँ रही थि, हलाॅकि अभि वो विद्यालय मे पढ़ती थि लेकिन आज कि जनरेशन ज़रा एडवाॅस होती हैं, यह अपनी ऊम्र सें पहले हि जवान होँ जाते हें। खेला खाया शिवा चाची कि बेटी दिव्या कों भि हवसभरी नज़रों सें देखता थां। चाची केँ गदराए व सुंदर बदन कां वो शुरुआत सें हि दिवाना थां। लेकिन कुछकर नहि सकता थां क्योंकि वो अपने चाचा अभय केँ गुस्सैल स्वभाव केँ चलते डरता थां, दूसरी बात उसकी चाची करुणा भि ऐसी वैसी महिला नहि थि जिससे वो अपने इरादों मे कामयाब होँ पाता। उससे जितनी होँ सकती थि उतनी कोशिश वो फिन भि किया करता थां। मतलब चाची केँ पास उठना बैठना तथा उनके द्वारा दियेगए हरकाम कों खुशी खुशी करना। उनसे हॅसना बोल्ना, बातों केँ बीचयदा कदा मज़ाक भि कर लेना। करुणा अधिकतर दिन मे अकेली हि होती थि, उसकेसंग उसका बारहसाल कां दिमाग़ सें डिस्टर्ब बेटा शगुन रहता थां। उसका पति औऱ बेटी दिव्या सुभह विद्यालय चले जाते थें, फिनसाम चारबजे केँ आसपास हि आते थें। सुभहदस बजे सें चारबजे तक करुणा अकेली हि घऱ मे रहती थि। हलाॅकि दिनभर वो कोई नं कोईकाम करती हि रहती थि ताकि उसका वक्तपास होँ जाए।
एक् दिन कि बात हैं, उसदिन गुरूवार थां। अभयव दिव्या रोज़ कि तरह विद्यालय गएहुए थें। शिवा कि आदत थि कि वो करुणा केँ घऱतभी जाता थां जब उसका चाचा औऱ चाचा चाची कि बेटी विद्यालय चले जाते थें। उसे अपनी चाची करुणा कि दिनचर्या कां बखूबी पता थां। वो जानता थां कि चाचा औऱ दिव्या केँ विद्यालय जाने केँ बाद हि करुणा नहाने जाती थि बाॅथरूम मे। बाहर् मेनगेट बंद रहता थां लेकिन अंदर सें कुंडी नहि लगी होती थि। करुणा कुंडी नहि लगाती क्योंकि उसेपता होता थां कि शिवा आएगा। ख़ैर, रोज़ कि तरह हि शिवाउस दिन भि अपने निर्धारित वक्त पर्र पहुॅचा। दरवाजे कों हल्के सें खोलकर वो अंदर दाखिल होँ गय़ा। अपनी चाची केँ नहाने केँ वक़्त पऱ वो इसीलिए आता थां कि वो किसीतरह अपनी चाची कों बाथरूम मे नहाते हुएदेख सके। हलाॅकि ऐसाकभी हुआ नहि थां बल्कि वो हमेशा अपने मनसूबों मे नाकामयाब रहा थां। यानी उसकी चाची कमरे सें अटैच बाथरूम मे जाने सें पहले अपनेउस कमरे कां दरवाजा बंद करके अंदर सें कुंडी लगा देती थि। शिवा कों अपनी चाची कों नहाते देखने केँ लिए पहले चाची केँ कमरे मे जानां पड़ता फिन बाथरूम मे। जबकि दरवाजा हि बंद रहता थां इसलिए वो कुछकर हि नहि सकता थां। वो अपनी चाची सें कह भि नहि सकता थां कि आप् अपने कमरे कां दरवाजा अंदर सें बंदमत किया कीजिए।
मगर कहते हें न् कि होनीअटल होती हैं। यानीजिस समय जौ होना होता हैं वोँ होकर हि रहता हैं। कहने कां मतलबयह कि करुणा बाथरूम मे नहाने जाने सें पहलेआज अपने कमरे कां दरवाजा अंदर सें बंद करनाभूल गई, याँ यूॅ कहिए कि नियति केँ चलते उससेयह भूल हौ गई।
शिवाजब भि आता थां तोँ सबसे पहलेयह अवश्य चेक करता थां कि उसकी चाची नें दरवाजा अंदर सें बंद किया हैं याँ नहि। हलाकि वो जानता थां कि चाची दरवाजा खुला रखने कि ग़लती कभी नहि करती हें, फिन भि वो अपनी तसल्ली केँ लिए एक् बार अवश्य चेक करता थां। आज भि उसनेऐसा हि किया, औऱ दरजाजा जब उसकी उम्मीद केँ विपरीत उसके द्वारा दिएगए हल्के सें दबाव मे बेआवाज़ तथा बिना किसी विरोध केँ खुलता चला गय़ा तोँ वो पहले तौ हैरान हुआमगर जल्द हि उसकामन मयूर खूशी सें नाचने भि लगा। वो दबे पाॅव कमरे मे दाखिल हुआ। उसकी धड़कने एकाएक बढ़ गई थीं जिसके धकधक करने कि हरथाप उसे अपनी कनपटियों मे बजती महसूस होँ रही थि।
कमरे मे पहुॅचते हि उसने देखा कि बेड पऱ उसकी चाची केँ वोँ कपड़े रखे हें जिन्हें उसकी चाची नहाने केँ बाद पहनने वाली थि। शिवा नें आगेबढ़ करउन कपड़ों कों ग़ौर सें देखा। साड़ी ब्लाउज पेटीकोट व ब्रा पैन्टी सभी बड़े सलीके सें रखेहुए थें। शिवा कि नज़र ब्रा औऱ पैन्टी पऱ पड़ी। उसने बिनाकुछ सोचे समझेतथा बिना एक् लम्हा गवाॅए अपना हाॅथ बढ़ाकर बेड सें चाची कि लालरंग कि ब्रा कों उठा लिया। ब्रा अच्छी क्वालिटी कि थि, उसकेकप देखकर शिवा कि आॅखों मे अजीब सि चमक आँ गई। उसने ब्रा कों अच्छी तरह सें उलटा पलटाकर देखा। 36D पऱ नज़र पड़ते हि वो अजीबतरह सें मुस्कुराया औऱ फिनउस ब्रा कों अपनी नाॅक केँ पास लाकरउसे सूॅघने लगा। ब्रा कि सुगंध नें अपनाअसर दिखाया औऱ शिवा कि आॅखें एक् अजीब सि खुमारी सें बंद होतीचली गई। उसकारोम रोम रोमाॅच सें भरताचला गय़ा। कुछदेर इसीतरह वो ब्रा कों सूॅघता रहाफिन उसने अपनी आॅखें खोली औऱ ब्रा सें नज़रहटा कर उसनेबेट पऱ पड़ी चाची कि पैन्टी कि तरफ देखा। जल्दी हि उसने पैन्टी कों उठा लिया औऱ उसे भि उलटपलट कर देखने लगा 38 साइज पऱ नज़र पड़ी तोँ एक् बारफिन वो अजीबतरह सें मुस्कुराया औऱ फिन सीघ्र हि पैन्टी केँ उसभाग कों अपनी नाॅक केँ पास लाकर सूॅघने लगाजिस भाग मे उसकी चाची कां योनिभाग होता हैं। पैन्टी केँ योनिभाग कों सूॅघते हि उसकी आॅखें पुनःबंद होतीचली गई। वो अपनी नाॅक सें ज़ोर ज़ोर सें साॅसे खींचने लगा। तभी वो किसीआहट सें बुरीतरह चौंका, उसने जल्दी अपनी आॅखें खोलकर इधरउधर देखा लेकिन कहींकोई नहि थां, बस कानों मे कमरे सें अटैच बाथरूम मे पानी गिरने कि आवाज़ सुनाई देरही थि।
शिवा कों सहसा ख़याल आया कि चाची तौ अंदर बाॅथरूम मे हैं। जिसे नहाते हुए देखने केँ लिए वो न् जानेकब सें बेचैनी रहा थां। आजउसे यह सुनहरा मौका मिला हैं तोँ उसेयह मौका किसी भि कीमत पर्र गवाॅना नहि चाहिए। यह सोचते हि उसने अपने हाॅथ मे ली हुईँ ब्रा पैन्टी कों बेड पऱ उसीतरह सलीके सें रख दिया औऱ फिनपलट करदबे पाॅव बाथरूम केँ दरवाजे कि तरफ बढ़ा।
बाथरूम केँ दरवाजे केँ पास पहुॅच कर उसने देखा कि बाथरूम कां दरवाजा बंद तोँ थां लेकिन अंदर सें कुंडी नहि लगी थि। बल्कि हल्का सां खुला हि नज़र आँ रहा थां। करुणा नें शायदइस लिए बाथरूम कि कुंडी अंदर सें नहि लगाई थि कि उसकीसमझ मे कमरे कां दरवाजा अंदर सें बंद हैं, इसलिए किसी केँ अंदरआने कां कोई प्रश्न हि नहि हैं। जबकि इधर शिवायह देखकर हैरानी केँ संगसंग खुश हौ गय़ा कि उसकी चाची नें आजहरतरफ सें उसका मार्ग खुलारखा हैं।
शिवा नें अपने ज़ोर ज़ोर सें धड़करहे दिल केँ संग बाथरूम केँ दरबाजे मे बाहर् इसतरफ लगे हैण्डल कों आहिस्ता सें पकड़कर दरवाजे कों बाथरूम कि तरफ हल्के सें ढकेला। परिणामस्वरूप दरवाजा बेआवाज़ खुलता चला गय़ा लेकिन शिवा नें दरवाजे कों अधिक खोलना मुनासिब न् समझा बल्कि उतना हि खोला जितने मे वो अंदर नहाती हुई अपनी चाची कों धीरे-धीरे देखसके। शिवा नें धाड़ धाड़ बजती हुई अपनेदिल कि धड़कनों केँ संग बाथरूम केँ अंदर कि तरफ देखा.औऱ यहीं पर्र दो चीज़ें एक् संग हुईं। इधर शिवा नें अंदर नहाती हुइ अपनी चाची केँ बेपर्दा शरीर कों देखा औऱ उधर बाहर् सें कमरे मे दाखिल होकरअभय नें बाथरूम मे अंदर कि तरफ झाॅकते अपने भतीजे शिवा कों देखा। औऱ.औऱ.
"शिवाऽऽऽऽऽऽऽऽ। " अभय नें शेर कि तरह दहाड़ते हुएआकर शिवा कों पीछे सें उसके शर्ट कि कालर सें पकड़कर अपनीतरफ एक् झटके सें खींचा, औऱ खींचते हुए हि कमरे सें बाहर् बड़े सें ड्राइंगरूम मे लेँ गय़ा। औऱ इसकेबाद शुरुआत हुइ शिवा कि लात घूॅसों सें धुनाई।
"तेरी हिम्मत केसे हुईँ हरामखोर अपनी चाची कों बाथरूम मे इसतरह नहाते हुए देखने कि??" अभय नें गुस्से सें कहने केँ संग हि शिवा कों उठाकर पक्के फर्स पऱ पटक दिया। शिवा कि दर्दभरी चीख पूरेघऱ मे गूॅज गई।
"बोल हरामजादे बोल। " फर्स पऱ दर्द सें कराहते शिवा केँ पेट मे अभय नें ज़ोर सें लात जमाते हुए कहा__"तेरी हिम्मत केसे हुइ यहनीच काम करने कि?? बोल वर्ना यहीं पर्र ज़िदा दफनकर दूॅगा। "
"मु मुझेमाफ आहहहह कर दीऽऽजिए चाचा जी। "लात घूॅसों केँ निरंतर पड़ने सें कराहते हुए शिवा नें अपने हाॅथ जोड़ने कां प्रयास करतेहुए कहा__"मुझे माफकर दीजिए, मुझसे ग़लती हौ गई। आहहहहह माफकर दीजिए चाचा जी.अब दुबारा ऐसाकभी नहि करूॅगा चाचा जी। आहहहहह एक् बारमाफ कर दीजिए आहहहह। "
"तुम्हें माफकर दूॅ कुत्ते???" शिवा कों कालर सें पकड़कर उठाते हुएअभय नें गुर्राते हुए कहा__"नहि हर्गिज़ नहि। तुँ माफी केँ लायक नहि हैं। तूने जौ नीचकाम करने कां दुस्साहस किया हैं उसकेलिए तोँ तेरी जिदामार देना चाहिए। "
इधरअभय लात घूॅसों सें शिवा कि कुटाई कियेजा रहा थां उधर करुणा कि हालत भि खराब हौ गई थि। दरअसल अभयजब पहलीबार कमरे मे आकर शिवा कों बाथरूम मे झाॅकते देख दहाड़ा थां तभी करुणा उछल पड़ी थि। अभय केँ मुख सें शिवा कां नाम सुनते हि वो समझ गई थि कि क्याँ माज़रा हैं? उसेइस ख़याल नें हि बुरीतरह हिलाकर रख दिया थां कि उसकी जेठानी कां लड़का शिवा जौ स्वयं भि उसके बेटे केँ समान हि हैं वोँ उसे नंगी हालत मे नहाते हुए बाहर् सें छिपकर देखरहा थां। इतना हि नहि वो अभय केँ द्वारा यहनीच काम करतेहुए रॅगे हाथों पकड़ा भि गय़ा थां।
करुणा मारे लज्जा केँ तथाइस हादसे सें बाथरूम केँ फर्स मे उसीतरह नंगी हालत मे बैठीतथा अपने दोनो घुटनों केँ बीच मुॅह छुपाए बुरीतरह रोएजा रही थि। उसकी मारे लज्जा औऱ अभय केँ डर सें हिम्मत हि नहि होँ रही थि कि वो यहाॅ सें बाहर् कमरे मे जाए। उसे जैसे स्वयं कां होश हि नहि रहा थां कि वो इस टाइमकिस हालत मे हैं। उसके कानों मे बाहर् सें आती आवाज़ें साफ सुनाई देरही थि। जिन आवाज़ों मे शिवा कि दर्दभरी चीखें औऱ अभय कां शेर कि तरह गरजना शामिल थां।
इधरअभय सिंह शिवा कों लात घूॅसों सें मारते मारते अधमरा कर दिया। शिवा इतनी कुटाई केँ बाद बेहोश हौ चुका। उसकेबदन मे कई स्थान नीले निशान पड़ चुके थें। आॅख नाॅक मुॅहसभी फूलगए थें, तथा नाॅकव होंठफट गए थें जहाॅ सें खूनबह रहा थां। शिवा केँ बेहोश होने केँ बाद भि अभय सिंह कां क्रोध शान्त नहि हुआ थां। उसने शिवा कों उठाकर अपने कंधे मे डाला औऱ घऱ सें बाहर् निकल गय़ा।
घऱ सें बाहर् आकरअभय अपने बड़े भइयाअजय सिंह केँ घऱ कि तरफ बढ़ता चलाजा रहा थां। कछ हि देर मे वो अजय सिंह केँ घऱ केँ अंदर ड्राइंगरूम मे पहुॅच गय़ा। ड्राइंग रूम मे इससमय कोई नज़र नं आया।
"भाभीऽऽऽऽ। " अपने कंधे पर्र शिवा कों उसीतरह लिएहुए अभय ड्राइंग रूम मे खड़े होकर पूरी शक्ति सें चिल्लाया थां।
उसकेइस तरह चिल्लाने कां असरयह हुआ कि दोसमय मे हि कमरे सें बाहर् करीब-करीब दौड़ती हुई प्रतिमा ड्राइंगरूम मे दाखिल होती नज़रआई।
"क् क्याँ हुआअभय???" प्रतिमा नें आते हि अभय सें पूछा__"क्याँ बात हैं तुम् इसतरह चिल्लाए क्यूं???"
प्रतिमा कि बातसुन करअभय सिंह नें अपने कंधे सें शिवा कों उतारकर सामने रखे सोफे केँ पास जाकर सोफे पर्र शिवा कों करीबपटक दिया। प्रतिमा कि नज़र जैसे हि अपने बेटे कि अधमरी हालत पऱ पड़ी तौ उसकेहलक सें चीख निकल गई।
"यहयह क्याँ हौ गय़ा मेरे बेटे कों?" प्रतिमा दौड़कर शिवा केँ चेहरे कों अपने हाॅथों मे लेकर रोतेहुए बोलि__"किसने कि मेरे बेटे कि ऐसी हालत???अभय इसे कहाॅ सें लेकरआए हौ तुम्?? प्लीज बताओ क्याँ हुआ हैं इसे?? किसने कियायह सभी??"
"मैंने कि हैं इसकीयह दुर्दसा। " अभय नें बर्फ कि मानिंद ठंडे स्वर मे कहा__"औऱ जी तोँ चाहता हैं कि इसे अभि जान सें मारदूॅ। "
"अभऽऽऽय। " प्रतिमा एक् झटके मे खड़ी होकर चिल्लाते हुए कहा__"तुम् होश मे तोँ हौ? यह क्याँ बोलरहे हौ तुम्??"
"शुकर मनाइए भाभी कि मैंने अपनाहोश नहि खोया थां। " अभय नें पहलीबार अपनी भाभी कि आॅखों मे आॅखें डालकर तथा गुर्राते हुए कहा__"वर्ना जिस बेटे कों बेटा कहतेहुए आपकी ज़ुबान नहि थकती न् उसेआज ज़िन्दा हि ज़मीन केँ अंदरदफन कर दिया होता। "
"तुम्हारी हिम्मत केसे हुइ मुझसे इस लहजे मे बात करने कि?" प्रतिमा नें चीखते हुए कहा__"तुम् भूलगए होँ कि तुम् किससे बातकर रहे हौ? अपने सें बड़ों कि तमीज़ भूलगए हौ तुम्? औऱ.औऱ मेरे बेटे केँ बारे मे ऐसा बोलने कि हिम्मत केसे हुइ तुम्हारी??"
"मुझे तमीज़ औऱ संस्कार न् बताइए भाभी। "अभय नें कठोरभाव सें कहा__"बल्कि इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत आपके बेटे कों हैं, इस हरामज़ादे कों सिखाइए तमीज़ औऱ संस्कार। आज इसने जौ नीच हरकत कि हैं, इसकी स्थान कोई औऱ होता तौ अब तक मेरे हाॅथों जान सें मार दिया गय़ा होता। आपका औऱ बड़े भाई कां ख़याल कर लियाइस लिएइसे ज़िन्दा छोंड़ दिया हैं मैंने। मगर आइंदा अगर इसने मेरेघऱ कि तरफ देखने कि भि ज़ुर्रत कि तौ इसकेलिए अच्छा नहि होगा। "
प्रतिमा कों एकाएक झटका सां लगा। सारा क्रोध सारा चीखना चिल्लाना साबुन केँ झाग कि तरह डण्डा पड़ता चला गय़ा। अभय कि इसबात नें उसे अंदर हि अंदर बुरीतरह चौंका दिया कि उसके बेटे नें कोईनीच हरकत कि हैं। अपने पति व बेटे कि रॅगरॅग सें वाकिफ प्रतिमा समझ गई कि उसके बेटे नें कोई ग़लत हरकत कि हैं, मगर क्याँ??
"आख़िर ऐसा क्याँ किया हैं मेरे बेटे नें अभय??" प्रतिमा नें तनिक हल्के लहजे सें कहा__"जोँ तुम् इसेजान सें मार देने कि बातकर रहे हौ?"
"क्याँ बताऊॅ आपको?"अभय नें अजीबभाव सें कहा__"मुझे तोँ आपसे बताने मे भि लज्जा आती हैं मगरइस हरामज़ादे कों उसनीच काम करने मे ज़रा भि लज्जा नहि आई। "
"अभय प्लीज, बताओ मुझे कि क्याँ किया हैं इसने??" प्रतिमा कां दिल बुरीतरह धड़कने लगा थां किसी आशंकावश।
"यह करुणा कों उसके बाथरूम मे छिपकर नहाते हुएदेख रहा थां। " अभय नें गुर्राते हुए कहा__"आज विद्यालय मे एक् मास्टर कि मृत्यु होँ गई थि इसलिए विद्यालय मे सब बच्चों कि छुट्टी कर दि गई। मे भि घऱलौट आया, मगर मुझे क्याँ पता थां कि घऱआते हि मुझे इसकी गंदी करतूत देखने कों मिलेगी? जैसे हि मे कमरे मे दाखिल हुआ तोँ मेरी नज़र बाथरूम केँ दरवाजे सें छिपकर बाथरूम मे देखते आपकेइस नीच बेटे पऱ पड़ी। यह करुणा कों नहाते हुए जानेकब सें देखरहा थां। इसेइस बात कां भि ख़याल नहि रहा कि करुणा इसकी चाची हैं जौ स्वयं इसकेमाॅ केँ हि समान हैं उसेये इस नीचता सें केसेदेख सकता हैं??"
"सचमुच अभय। " प्रतिमा नें सारीबात सुनते हि दुखीभाव सें कहा__"इसने बहोत बड़ापाप किया हैं। इसेऐसा करने कि तोँ बातदूर बल्कि ऐसा करने कि सोचना भि नहि चाहिए थां। अच्छा किया तुमने जौ इसे इसकी नीचता कि सज़ादे दि। यह माफी केँ लायक नहि हैं अभय.मगर मे तुमसे हाॅथ जोड़कर माफी माॅगती हूॅ इसकीतरफ सें। आइंदा यहऐसा कुछ नहि करेगा। "
"जिसके मन मे इसतरह केँ नीच औऱ बुरे विचार एक् बार पैदा होँ जाते हें वोँ इतना जल्द ज़हन सें नहि जाते। "अभय नें कहा__"इस लिए इससे मेरा भरोसा अबउठ चुका हैं, औऱ अबअगर यह मेरेघऱ केँ आसपास भि नज़रआया तौ मुझसे बुराकोई नहि होगा?"
"अब यहकुछ भि ऐसा वैसा नहि करेगा अभय। " प्रतिमा नें कहा__"मे इसबात कां वचन देतीहूॅ तुम्हें। मे बहोत शर्मिंदा हूॅ कि मेरे बेटे नें ऐसीनीच व घटिया हरकत कि। "
"यहसभी आप् औऱ बड़े भाई केँ लाड़ प्रेम कां नतीजा हैं भाभी। "अभय नें कहा__"आप् लोगों नें हमेशा इसकी ग़लतियों पर्र पर्दा डाला हैं, वर्ना यहऐसा न् बनता। मुझे इसकी करतूतों केँ बारे मे सभीपता हैं, यह गाॅव कि हर लड़की औऱ महिला पर्र गंदी नज़र रखता हैं। मगर मुझेयह नहि पता थां कि इसकी गंदी नज़र अपनी हि माॅ समान चाची पऱ भि हें, औऱ क्याँ पता इसकीयह गंदी नज़रें परिवार कि किनकिन लड़कियों औऱ औरतों पर्र हें??? जिसे अपनीहवस केँ आगे रिश्तों कां कोई ख़याल हि न् होँ वोँ परिवार कि किसी भि महिला केँ बारे मे कुछ भि सोच औऱ कर सकता हैं। "
"ऐसा नहि हैं अभय। " प्रतिमा कि यहसोच करअब हालत ख़राब होनेलगी थि कि अभय उसके बेटे कि करतूतों कों जानता हैं औऱ उसके बारे मे अबऐसा बोलरहा हैं। वोँ तोँ जानती हि थि कि उसका बेटा अपने बाप कि तरह हि परिवार कि हर लड़कीव स्त्री कों अपने नीचे लेटाना चाहता हैं। उसकाबस चले तौ वोँ अपनीमाॅ कों भि अपने नीचे लेटाने मे एक् लम्हा भि जाया नं करे। आज उसी बेटे कि करतूतों सें साराबना बनाया खेल बिगड़ गय़ा थां। अभय केँ सामने यहसभी हौ गय़ा इसलिए हालातों कों सम्हालने कि गरज़ सें उसने कहा__"मेरा बेटा इतनानीच औऱ गिराहुआ नहि हैं कि वोँ परिवार कि औरतों केँ बारे मे ऐसा सोचे। मे मानती हूॅ कि उसने ग़लती कि हैं, औऱ इसउमर मे ऐसा हौ जाता हैं, मगरयह सच हैं कि उसे अपनीमाॅ समान चाची कों ऐसेछिप कर नहाते हुए नहि देख्ना चाहिए थां। मे समझाऊॅगी उसे कि ऐसा सोचना भि पाप हैं। तुम् प्लीज यहसभी बातें अजय सें मत कहना वोँ इस सबकेलिए इसेमाफ नहि करेंगे, बल्कि इसेमार मारकर घऱ सें निकाल देंगे। "
"आप् अब भि इसे बचाने केँ बारे मे सोचरही हें?" अभय नें एकाएक आवेशयुक्त लहजे सें कहा__"इसकी ऐसीनीच हरकतों कों बड़े भाई सें छुपाने कि बातकर रही हें आप्? नहि भाभी नहि.इसने जौ किया हैं उसकापता बड़े भाई कों भि चलना चाहिए। उन्हें भि तौ पताचले कि उनका सपूत कितने बड़े बड़ेकाम करता हैं, ताकि उनकासिर गर्व सें उठजाए। "
प्रतिमा उससे क्याँ कहती??? उससे क्याँ कहती कि जिन बातों कों वो अपने बड़े भइया सें बताने कि बातकर रहा हैं, उनसभी बातों कां उसके भइया कों पहले सें हि सभीपता हैं। बल्कि अगरयह कहाजाए तौ ज़रा भि ग़लत न् होगा कि इस सबका असली कर्ता धर्ता हि वही हैं। मगर प्रतिमा यहसभी अभय सें कह नहि सकती थि बल्कि उसने तोँ प्रत्यक्ष मे बसयही कहा__"मे तुम्हारे आगे हाॅथ जोड़ती हूॅअभय, प्लीज इस सबके बारे मे तुम् अजय सें कुछमत कहना। वोँ इसेघऱ सें निकाल देंगे। मे मानती हूॅ कि इसने जोँ किया हैं वोँ माफी केँ काबिल नहि हैं मगर प्लीज अभयइसे इसकी पहली औऱ आख़िरी ग़लती समझकर क्षमा करदो, औऱ इस सबकोभूल जाओ। मे तुमसे वादा करतीहूॅ कि अब सें यह तुम्हारे घऱ कि तरफकभी देखेगा भि नहि। "
अभय गुस्से सें भरी आॅखों सें प्रतिमा कि तरफ देखता रहा। कुछ बोला नहि उसने जबकि उसकेइस प्रकार गुस्से सें देखने पर्र प्रतिमा नें कहा__"अभय, शान्त हौ जाओ प्लीज। तुम् चाहो तौ इसके कुकर्म कि मुझे जौ चाहे सज़ादे दो। इसने तुम्हारी पत्नि व अपनी चाची कों जिस नीचता सें छिपकर नहाते हुए देखा हैं उसकेलिए तुम् जौ चाहे मुझे सज़ादे दो। तुम्हारी हर सज़ा कों मे बिनाकुछ बोले स्वीकार कर लूॅगी। मगरइस सबकोभूल करइसे माफकर दो प्लीज। "
"ईश्वर जानता हैं कि मैंने कभी अपने परिवार केँ बारे मे ग़लत नहि सोचा, बल्कि हमेशा सबको अपनामान कर उन्हें यथोचित सम्मान दिया हैं। " अभयकह रहा थां__"विजय भाई कि मौततथा माॅ बाबूजी केँ कोमा मे चले जाने केँ बादइस हवेली मे रहने वालों कि सोच कों न् जाने क्याँ होँ गय़ा हैं?? मुझे नहि पता कि गौरी भाभी, तथा उनके बच्चों नें ऐसा क्याँ कर दिया थां कि उन्हें उसकी कीमतइस हवेली सें तथा सबसे नाता तोड़कर चुकानी पड़ी। मुझे यकीन नहि होता कि विजय भाई औऱ गौरी भाभी नें कभीकोई ग़लतकदम उठाया रहा होगा। बल्कि वोँ तौ ऐसे थें कि उन्हें अगर देवी देवता कि तरह पूजा भि जाता तोँ ग़लत न् होता। विजय भाई कि मौत केँ बादऐसा क्याँ हौ गय़ा थां कि गौरी भाभी कों उनके बच्चों सहितइस हवेली सें बाहर् हमारे खेत मे बने घर-मकान केँ केवल एक् हि कमरे मे रहकर अपना जिंदगी यापन करना पड़ा। बात यहीं पर्र ख़त्म नहि हौ जाती बल्कि सोचने वालीबात यह भि हैं उन लोगों नें इस सबकेबाद भि ऐसा क्याँ कर दिया थां कि उन्हें खेत केँ उस कमरे कों भि छोंड़ कर जानां पड़ा??? जहाॅ तक मुझेपता हैं विराज आया थां अपनीमाॅ औऱ बेहन सें मिलने। सुभह शिवा केँ संग उसकीमार पीट हुईँ थि। शायदयही वजहरही होगी कि वोँ लोगइस डर सें वहाॅ सें भि पलायन करगए कि शिवा केँ संगमार पीट करने सें अजय भाई उन पर्र क्रोध करेंगे। मे सोचता थां कि विराज नें शिवा केँ संगमार पीट क्यूं कि थि?? मगरअब समझ गय़ा हूॅ कि शिवा कों मारमार कर अधमरा कर देने कि वजह इसकी हि कोईनीच हरकतरही होगी। इस नीच कि गंदी नज़र गौरी भाभी याँ निधि बिटिया पऱ भि रही होगी। गौरी भाभी नें अपने बेटे कों इसकीइन नीच हरकतों केँ बारे मे बताया होगा औऱ कहा होगा कि बेटा हमें यहाॅ सें लें चल। यकीनन यहीसभी बातें हुईँ रही होंगी। "
अभय सिंह क्याँ क्याँ बोलेजा रहा थां यहसभी अब प्रतिमा केँ सिर केँ ऊपर सें जानेलगा थां। उसके पैरों तले सें ज़मीन कब कि निकल चुकी थि। दिलो दिमाग़ मे भयंकर विस्फोट होँ रहे थें। दिल कि धड़कनें रुकरुक करइसतरह चलरही थीं जैसेउसे ज़िंदा रखने केँ लिएउस पर्र कोई एहसान कररही हों। आॅखों केँ सामने अॅधेरा छानेलगा थां। ज़हन मे एक् हि ख़याल कत्थक कररहा थां कि 'सभीकुछ समाप्त'।
"आज इसनेयह सभी करके मुझेइस सबके बारे मे सोचने पर्र मजबूर कर दिया हैं भाभी। "अभय सिंह नाॅनस्टाप कहेजा रहा थां__"औऱ अब मे स्वयं पता करूॅगा कि सच्चाई क्याँ हैं? मे गौरी भाभी औऱ उनके बच्चों कों खोजूॅगा, औऱ उनसे पूॅछूॅगा कि उन्होंने ऐसा क्याँ किया थां कि उन लोगों कों अपने हि घऱ सें सभीकुछ छोंड़ कर जानां पड़ा??अब सें मेरेपास केवलयही एक् काम होगा भाभी, मे हर कीमत पर्र इस सच्चाई कां पता लगाऊॅगा। "
इतनाकह करअभय सिंह वहाॅ सें चला गय़ा अपनेघऱ कि तरफ, इस बात सें अंजान कि घऱ मे कौन सि आफत उसका इन्तज़ार कररही हैं?? जबकि उसकीइन बातों सें प्रतिमा कों लगा कि उसे चक्कर आँ जाएगा। उसने बड़ी मुश्किल सें स्वयं कों सम्हाला औऱ असहाय अवस्था मे धम्म सें सोफे पऱ करीबगिर सि पड़ी।
इधर करुणा अब अपने कपड़े वगैरा पहन चुकी थि। तथाबेड पर्र गुमसुम सि बैठी थि। उसकेपास हि उसकी बेटी दिव्या बैठी थि। दिव्या उमर मे छोटीभले हि थि लेकिन हमेशा शान्त रहने वालीयह लड़कीसभी बातों कों समझती थि। उसे अपने बड़े बापूव बड़ीमाॅ कां यह बेटा शिवाकभी मनपसंद नहि आया थां। वो इतनी नासमझ नहि थि कि शिवा कि हरकतों तथा उसकी आॅखों मे गिजबिजाते हवस केँ कीड़ों कों पहचान न् पाती। उसने हज़ारों बार अपनी आॅखों सें देखा थां कि शिवा हमेशा उसकीमाॅ औऱ स्वयं उसे भि कभीकभी गंदी नज़र सें देखता थां। वो उसकीहवस सें भरी नज़रों कों हमेशा अपने सीने पर्र मौजूद छोटे छोटे उभारों पऱ महसूस करती थि। लेकिन डरव संकोच कि वजह सें वो कभीइस सबके बारे मे अपनीमाॅ सें नहि बताती थि।
अभय औऱ दिव्या दोनोसंग हि विद्यालय सें घऱआए थें। औऱ आते हि जौ शोरहुआ थां उस सबको दिव्या नें अपनीडरी सहमी आॅखों सें देखा थां। वो समझ गई थि कि उसका बाप शिवा कों किसबात पऱ इतनी बुरीतरह माररहा थां। उसने चुपके सें अपनीमाॅ केँ कमरे मे जाकर बाथरूम मे देखा थां। बाथरूम मे उसकीमाॅ नग्न अवस्था मे फर्स पऱ अपने दोनो घुटनों केँ बीचमुह छुपाए बैठीरो रही थि। अपनीमाॅ कों नग्न अवस्था मे बैठेइस तरह रोतेदेख वो हैरान रह गई थि। पहलीबार अपनी हि माॅ कों नंगी हालत मे देखा थां उसने। जबकि स्वयं केँ बदन कों अपने सामने भि देखने कां कभीउसे ख़याल हि नहि आया थां।
डरी सहमी हालत मे वो कुछदेर अपनीमाॅ कों देखती रहीफिन हिम्मत करके वो पलटी औऱ बेड सें अपनीमाॅ केँ सारे कपड़े उठाकर उसने बाथरूम केँ बाहर् सें हि करुणा कि तरफ उछाल दिया। अपने नंगे शरीर पऱ अचानक कपड़ों केँ पड़ने सें करुणा बुरीतरह हड़बड़ा गई। उसकी नज़र पहले स्वयं केँ ऊपर गिरेहुए कपड़ों पर्र पड़ीफिन बाथरूम केँ गेट पर्र डरी सहमी खड़ी अपनी बेटी पर्र। दिव्या पऱ नज़र पड़ते हि वो चौंकी। एकाएक हि उसे अपनी नग्नता कां एहसास हुआ। उसने हड़बड़ाकर अपने नंगे जिस्म कों छिपाने केँ लिएउन कपड़ों सें अपने जिस्म केँ गुप्तांगों कों ढॅका। जबकि बाथरूम केँ गेट पऱ खड़ी दिव्या सीघ्र हि अपनी नज़रें अपनीमाॅ पऱ सें हटाकर वापसपलट गई। बाहर् शिवा कि धुनाई औऱ उसकी दर्द मे डूबी हुईँ चीखें चालू थि। कुछदेर बाद करुणा अपने कपड़े पहनकर बाथरूम सें बाहर् निकली औऱ बेड पऱ बैठी अपनी बेटी दिव्या कों देखकर उसकेबदन मे एक् अजीब सि झुरझुरी महसूस होतीचली गई। चेहरे पऱ लाज औऱ लज्जा कि लालीफैल गई औऱ उसकासिर झुक गय़ा। अपनी हि बेटी सें नज़र मिलाने कि हिम्मत न् हुइ उसमें।
"मां। " दिव्या बेड सें उठकरतथा दौड़ते हुएआकर अपनीमाॅ सें लिपट गई। उसकी आॅखों सें आॅसू बहनेलगे थें। करुणा कों समझ न् आया कि वो अपने सीने सें लिपटी तथा आॅसू बहाती बेटी सें क्याँ कहे?? उसके दिलो दिमाग़ मे अंधड़ सां मचाहुआ थां। कमरे केँ बाहर् सें अबकोई आवाज़ नहि आँ रही थि। शायदअभय शिवा कों लेकरजा चुका थां।
करुणा कुछ लम्हा बुतबनी खड़ीरही फिन जाने क्याँ सोचकर उसने अपने सीने सें दिव्या कों अलग करके कहा__"जाओ अपने कमरे मे औऱ अपनीइस स्कूली ड्रेस कों चेंजकर लो। "
दिव्या नें अजीबभाव सें अपनीमाॅ केँ चेहरे कि तरफ देखा, औऱ फिनपलट कर कमरे सें बाहर् निकल गई। इधर दिव्या केँ जाते हि करुणा केँ चेहरे पर्र एकाएक पत्थर जैसी कठोरता आँ करठहर गई। ऐसालगा जैसे उसने किसीबात कां बहोत बड़ा फैंसला कर लिया होँ।
एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो.
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,,,,
Excellent update. Siba bahut gira huwa ldka h . Abhaya ne toh than liya h. Suicide iss very negative thought. Plz aisa kuch mat dikhana. for the update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Jabardast update bhay, yeh siva ne too mummy baap की poora wat laga dala, chacha की behavior sey too lagtahey अब usko कोई samjha नहीं sakta, aur chachi ke sath कोई बुरा maat krna bhay kuki acchi logo की sath hamesah बुरा hi hotha hey। dekhtey hey क्या hotha hey agey
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