♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 19 》
अब तक.
"बड़ी हैरत कि बात हैं यह। " प्रतिमा कह उठी__"जब फैक्टरी केँ अंदरकोई गय़ा हि नहि तौ फैक्टरी केँ अंदर, वोँ भि तहखाने मे वक्त बम्ब क्याँ कोईभूत लगाकर चला गय़ा थां???"
"यही तौ सोचने वालीबात हैं माॅम। " रितू नें हॅसकर कहा__"खैर, पताचल हि जाएगा देर सवेर हि सही। मे तोँ डैड सें यहकहरही थि कि उन्होंने इस सबके बारे मे जानना ज़रूरी क्यूं नहि समझा? आखिरयह जानना तौ ज़रूरी हि थां कि किसने यहसभी किया?"
अजय सिंह केँ मन मे केवलयही प्रश्न चकरारहे थें, औऱ वोँ यह थें कि 'तहखाने मे उसकी बेटी कों औऱ क्याँ मिला? क्याँ उसके हाॅथकोई ऐसी चीज़लगी जिससे उसकी असलियत रितू कों पताचल सके?इस बारे मे रितू नें अभि तक कोईबात नहि कि, इसका मतलबउसे कुछ भि नहि मिला। मगर ऐसा केसे हौ सकता हैं???? तहखाने मे तोँ गैर काननी वस्तुओं कां अच्छा खासा स्टाक थां। क्याँ वो सभी भि आग मे जल गय़ा हैं??? कहींऐसा तोँ नहि कि रितु कों सभीपता चल गय़ा होँ लेकिन इस वक़्त वो अंजान बनी होने कां नाटककर रही हौ? हे ईश्वर! केसेपता चलेइस सबके बारे मे??? मेरेगले मे तोँ अभि भि जैसेकोई तलवार लटकरही हैं।
अबआगे.
अभि यहसभी बातें हि कररहे थें कि बाहर् सें किसी केँ आने कि आहट सुनाई दि उन्हें। पलटकर देखा तौ अभय औऱ शिवा केँ संग नीलम अपनेहाथ मे एक् हैण्डबैग लिए आँ रही थि।
"डैड.। " अपने पिता कों देखते हि नीलम दौड़कर आई औऱ अजय सिंह सें लिपट गई। अजय सिंह नें उसकेसिर पर्र प्रेम सें हाॅथफेर कर कहा__"कैसी हैं मेरी बेटी??"
"मे बिलकुल अच्छी हूॅडैड। " नीलम नें कहा__"आपकी याद बहोत आती थि वहाॅ। "
"ओह अच्छा जी। "अजय सिंह नें मुस्कुरा करकहा औऱ फिन नीलम कों साइड सें छुपका लिया।
अभय व शिवा भि आकर वहाॅ पऱ रखे सोफों पर्र बैठगए। अपनेडैड सें अलग होने केँ बाद नीलम अपनीमाॅ औऱ बेहन सें गले मिली।
"कन्ग्रैट्स दि। " नीलम नें रितू केँ गले मिलते हुए कहा__"आख़िर आपकी इच्छा पूरी हौ हि गई। आप् अब एक् पुलिस इंस्पेक्टर बन गई हें। "
"थैंक्यू छोटी। " रितू नें मुस्कुरा कर कहा__"औऱ बता, मुम्बई मे तेरी पढ़ाई कैसीचल रही हैं? काॅलेज अच्छा हैं न्? औऱ माॅसी लोगसभी केसे हें?"
"सभी अच्छे हें दि। " नीलम नें मुस्कुराते हुए कहा__"औऱ काॅलेज भि अच्छा हि होगा?"
"अच्छा होगा?" रितू नें नाँ समझने वालेभाव सें कहा__"इस बात सें क्याँ मतलब हैं तेरा?"
"मतलबयह कि काॅलेज जानां अभि शुरुआत नहि किया हैं मैने। " नीलम नें कहा__"क्योंकि काॅलेज खुलने मे अभि पाॅचदिन कां वक्तशेष हैं। "
"ओह। " रितू नें कहा__"चल कोईबात नहि। तूँ बैठ, मे ज़रा कपड़े चेन्ज करलूॅ। अभि भि पुलिस कि यूनीफार्म हि पहनरखी हूॅ मे। "
"ओके दि। " नीलम नें कहा औऱ एक् बारफिन अपने पिता कि तरफ पलटते हुए कहा__"डैड, यहसभी केसेहुआ?"
"बस हौ गय़ा बेटी। " अजय सिंहभला अबउसे क्याँ बताता__"सभी नसीब कि बातें हें। "
"ऐसा क्यूं कहते हें डैड?" नीलम नें अजय सिंह कां हाॅथ अपने हाॅथ मे लेकर कहा__"बिना वजह केँ केसे हमारी फैक्टरी मे आगलग सकती हैं? अवश्य कोईवजह रही होगी। आप् पुलिस केँ द्वारा पता लगवाइए डैड। "
"पुलिस पतालगा रही हैं दि। " सहसा शिवाकह उठा__"औऱ आपकोपता हैं, रितू दिदी हि इस सबकापता लगारही हें? देख्ना सभीकुछ पतालग जाएगा जल्द हि। जिसने भि यहसभी किया होगा नं मे उसे छोंड़ूॅगा नहि। "
"अधिक सूरमा बनने कि ज़रूरत नहि हैं तुम्हें। " नीलम नें कहा__"अपनी पढ़ाई पऱ ध्यान दो। औऱ यह तोँ अच्छी बात हैं कि इस सबकी जाॅच दिदी कररही हें, हैं न् डैड?" आखिरी वाक्य उसने अपने पिता कि तरफदेख करकहा थां।
"हहाॅ बेटी। " अजय सिंह चौंकते हुए बोला थां__"यकीनन इस सबकापता चल हि जाएगा। "
"क्याँ अभि तक कुछपता नहि चला भाई?" अभय नें कहा__"मेरा मतलब हैं कि रितू नें इस बारे मे अभि तक क्याँ कुछ नहि बताया कि उसकी छानबीन मे क्याँ नतीजा निकला?"
"नतीजा केवल इतना हि निकला हैं चाचा जी कि हमारी फैक्टरी मे आग किसी केँ द्वारा फैक्टरी केँ तहखाने मे लगाएगए वक्त बम्ब सें लगी थि। " अंदर कि तरफ सें आतेहुए रितू नें कहा__"औऱ आपकोयह जानकर हैरानी होगी कि फैक्टरी केँ तहखाने मे करीबदो सें तीनसमय बम्ब लगाएगए थें। "
"क्याँ??????" करीब-करीब वहाॅ मौजूद हरकोई बुरीतरह चौंका थां, फिनअभय नें पूॅछा__"मगर फैक्टरी केँ अंदर तहखाना कहाॅ सें आँ गय़ा औऱ तोँ औऱ उस तहखाने केँ अंदर जाकर किसने समय बम्ब लगाया हौ सकता हैं??"
"यह प्रश्न तोँ मेरेपास भि हैं चाचा जी कि फैक्टरी मे कोई तहखाना केसे थां?" रितू नें अभय सें कहने केँ बाद अपने पिता कि तरफ देखा__"क्याँ आप् बताएॅगे डैड कि फैक्टरी मे तहखाने कां क्याँ काम थां?"
अजय सिंह बुरीतरह घबरा गय़ा, मगर जल्दी हि सहलकर बोला__"फैक्टरी केँ अंदरअगर कोई तहखाना थां तोँ इसमें कौन सि बड़ीबात हैं बेटी? मैंने तोँ बसशौक केँ लिए बनवाया थां। क्याँ तहखाना बनवाना भि कोई कानूनन जुर्म हैं?"
"जुर्म तौ नहि हैं डैड। " रितू नें सपाट लहजे मे कहा__"मगर तहखाने कां निर्माण आमतौर पर्र लोग अपनी किसी प्राइवेसी केँ चलते बनवाते हें। ख़ैर, क्योंकि तहखाने मे तीनतीन समय बम्ब लगाएगए थें औऱ जब वोँ फटे तोँ सभीकुछ जलकर खाक़ मे मिल गय़ा। हलाॅकि तहखाने मे शायदकुछ नहि थां क्योंकि अगर होता तोँ हमारे हाॅथकुछ नं कुछ अवश्य लगता। वहाॅ तौ बस फैक्टरी केँ जलेहुए कुछ अवशेष हि पड़े थें। "
रितू कि यहबात सुनकर कि 'तहखाने मे कुछ नहि थां' अजय सिंह बुरीतरह मन हि मन चौंका थां। उसके दिमाग़ कां फ्यूज उड़ गय़ा। फिनजब दिमाग़ नें काम करना शुरुआत किया तोँ सबसे पहले उसके दिमाग़ मे यही प्रश्न उभरा कि ऐसा केसे होँ सकता हैं? तहखाने मे मौजूद उसकी गैरकानूनी चीज़ें कहाॅगईं? क्याँ सभीकुछ जल गय़ा??? मगर प्रश्न यह हैं कि अगरजल गय़ा होता तौ रितू कों कुछ तोँ उसके अवशेष सबूत केँ तौर पर्र मिलते?
अजय सिंहकुछ समझ नहि पारहा थां कि यहसभी क्याँ हैं? कहींऐसा तौ नहि कि उसकी बेटी इस बारे मे झूॅठबोल रही हौ कि तहखाने मे उसेकुछ नहि मिला हैं? मगर रितू उससे झूॅठ क्यूं बोलेगी? बल्कि होना तौ यह चाहिए थां कि अगर उसके खिलाफ कोई सबूतउसे मिल जाता तोँ अब तक रितू कों उसे हॅथकड़ी लगाकर गिरफ्तार कर लेना चाहिए थां। मगर उसनेऐसा कुछ भि नहि किया, क्यूं? आख़िर क्याँ चक्कर हैं यह?अजय सिंह जितना सोचता उतना हि उलझता जारहा थां। यहाॅ तक कि सोचते सोचते उसका दिमाग़ हैंग सां होनेलगा थां।
"यह तौ बहोत हि गंभीर बात हैं रितू बेटी। " अभय नें कहा__"फैक्टरी मे बम्ब लगाया किसी नें औऱ सभीकुछ जलाकर खाक़कर दिया। भला यहसभी किसने किया होगा? क्याँ यह किसी दुश्मन कां कियाधरा हैं?"
"यह तोँ डैड हि बता सकते हें। " रितू नें कहा__"डैड कों यह अच्छी तरहपता होगा कि इस बिजनेस मे उनकाकौन दुश्मन हैं? जिसने इतने बड़ेकाम कों अंजाम दिया हैं। "
"मे स्वयं इसबात सें हैरान व परेशान हूॅ बेटी। " अजय सिंह बोला__"क्योंकि मेरीसमझ मे मेराऐसा कोई भि शत्रू नहि हैं जिसने यहसभी किया होँ। मेरे सबसे बहोत अच्छे संबंध थें औऱ हें बेटी। भला मे बिनावजह औऱ बिना सबूत केँ किसका नामलूॅ कि हाॅइसी नें मेरी फैक्टरी मे आग लगाई हैं?"
"मगर बिनावजह केँ यह भि तोँ संभव नहि हैं भाई कि कोई भि आदमी हमारे संग इतना बड़ा कारनामा करे?"अभय नें कहा__"मे समझ सकताहूॅ औऱ जानता हूॅ कि यकीनन आपकाकोई दुश्मन नहि हैं मगर आप् स्वयं सोचिए कि बिना किसीवजह केँ यहसभी कोई क्यूं करेगा?"
"मे नहि जानता छोटे। "अजय सिंह हताशभाव सें बोला__"मे नहि जानता कि किसने यहसभी करके मुझसे अपनी दुश्मनी निकाली हैं? अगर जानता तोँ क्याँ मे इसतरह चुपचाप बैठा होता? बल्कि अगर जानता कि यहसभी किसने किया हैं तौ अपने हाथों सें उसे गोलीमार देता। यह भि नं पूॅछता गोली मारने सें पहले उससे कि यहसभी उसने क्यूं किया थां?"
"आप् परेशान मत होइएडैड। " रितू नें कहा__"मे इस सबकापता लगाकर हि रहूॅगी कि किसने यहसभी किया हैं?"
इसकेसंग हि ड्राइंग रूम मे सन्नाटा छा गय़ा। कुछदेर बादसभी वहाॅ सें चलेगए। अजय सिंह अपने कमरे मे चला गय़ा, उसकासिर बड़ा ज़ोरों सें दर्दकर रहा थां। कमरे मे आकर वो बेड पऱ आखेंबंद करकेलेट गय़ा।
"क्याँ हुआअजय?" कमरे केँ अंदरआते हि प्रतिमा नें कमरे कां द्वार (दरवाज़ा) बंद करने केँ बाद कहा__"तबीयत तोँ ठीक हैं न् तुम्हारी?"
"सिर मे बड़ा दर्द होँ रहा हैं प्रतिमा ज़राकोई टेबलेट तोँ दो। "अजय सिंह नें कहा__"ऐसा लगता हैं जैसेसिर फट जाएगा। "
प्रतिमा नें पास हि रखी आलमारी सें एक् बाक्स मे रखीकुछ दवाइयों सें एक् गोली निकाली औऱ अजय सिंह कि तरफ बढ़ा दिया।
"अरे क्याँ गोलीऐसे हि खाऊॅगा?" अजय सिंह बोला__"पानी भि दो नं। "
"पानीबगल सें टेबल मे रखा हैं। " प्रतिमा नें कहा__"मे पहले पानी हि लाई थि यहाॅ, जानती थि कि तुम्हारा सिर दर्दकर रहा हैं औऱ तुम्हें इसकेलिए गोली खानी पड़ेगी। "
अजय सिंहकुछ न् बोला। बगल मे टेबल पऱ रखे पानी केँ ग्लास कों एक् हाॅथ सें उठाया औऱ गोली कों मुह मे डालने केँ बादउसे पानी केँ संग निगल गय़ा। जबकि प्रतिमा बेड पऱ उसके समीप हि बैठ गई।
"अब तौ तुम्हें इतना परेशान नहि होना चाहिए अजय। " प्रतिमा नें हल्के स्वर मे कहा__"क्योंकि तुम् जिसबात सें डररहे थें वोँ तौ हुई हि नहि। हमारी बेटी कों फैक्टरी केँ तहखाने मे कुछ भि ऐसा नहि मिला जिससे यह साबित होँ कि तुम् गैर कानूनी धंधा भि करते हौ। इसलिए अबजबऐसा कुछउसे मिला हि नहि तौ किसीबात सें डरने याँ परेशान होने कि अबकोई ज़रूरत नहि हैं तुम्हें। बस शुकर मनाओ कि फैक्टरी केँ संगसंग वोँ सभी भि जल गय़ा। "
"तुम् सबसे बड़ीबात पर्र ग़ौर हि नहि कररही हौ प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा__"तुम् इसबात कि तरफ ध्यान क्यूं नहि देरही होँ कि फैक्टरी केँ तहखाने मे बम्ब स्लिम किया थां किसी नें?"
"हाॅ तौ?" प्रतिमा नें लापरवाही सें कहा।
"तोँ यह कि जिसने भि तहखाने मे बम्ब लगाया। " अजय सिंह बोला__"क्याँ उसने नं देखा होगा कि तहखाने मे क्याँ क्याँ चीज़ें मौजूद हें? बल्कि यकीनन देखा होगा उसने। अब अगर हमारी बेटी यहकहरही हैं कि उसे तहखाने मे कुछ नहि मिला तौ इसका क्याँ मतलब होँ सकता हैं? इसके तौ दो हि मतलब हौ सकते हें, औऱ वोँ यह कि याँ तोँ हमारी बेटी हमसे झूॅठबोल रही हैं कि उसे तहखाने मे कुछ नहि मिला याँ फिनऐसा हौ सकता हैं कि जिसने तहखाने मे बम्ब लगाया उसने हि तहखाने मे मौजूद सारीगैर कानूनी चीज़ों कों गायबकर दिया। "
प्रतिमा चकित सि देखती रह गई अजय सिंह कों। कुछदेर यूॅ हि देखने केँ बाद उसने कहा__"ओह माँ गाडअजय, यह तोँ मैंने सोचा हि नहि थां। हद हौ गई, भलाइस बात पऱ मेरा ध्यान क्यूं नहि गय़ा?"
"क्योंकि औरतों कां दिमाग़ उसके घुटनों मे होता हैं न्। " अजय सिंहहॅस पड़ा।
"अधिक शुभम कुमार बनने कि कोशिश मतकरो। " प्रतिमा नें बुरा सां मुह बनाया थां।
"शु शुभम कुमार???" अजय सिंह चकरा गय़ा__"यह किस चिड़ीमार कां नाम हैं?"
"तुम् शुभम कुमार कों नहि जानते?" प्रतिमा नें हैरत सें कहा__"अरे यह बहोत बड़ा डिटेक्टिव हैं। जासूसी टाइप केँ उपन्यास भि लिखता हैं यह। इसकेआगे जेम्स बाॅण्ड वगैरा सभीफेल हें। ऐसा इसका मानना हैं, हलाॅकि मे इसे ज़्यादा भाव नहि देती"
"हाहाहाहा अधिकभाव देना भि नहि मेरीजान। " अजय सिंह हॅसा__"वर्ना उसका जासूसी दिमाग़ तुम्हारे पिछवाड़े मे घुस जाएगा। "
"उसके बारे मे ऐसामत कहो डियर। " प्रतिमा नें कहा__"वोँ बड़ा शरीफ लड़का हैं। "
"लड़का हैं???????" अजय सिंह चौंका__"यह क्याँ कहरही होँ?"
"अरे अभि वोँ लड़का हि हैं। " प्रतिमा नें कहा__"बेचारा अभि कुवाॅरा हैं नं इसलिए। "
"हाहाहाहा अच्छा अब छोड़ो इस लड़के कि बात कों। " अजय सिंह नें एकाएक गंभीर होकर कहा__"मे यहकहरहा थां कि हमारी बेटी कों अगर तहखाने सें कुछ नहि मिला तौ इसकीयही दोवजह हौ सकती हें। "
"मगर रितूइस बात कों क्यूं छुपाएगी भला?" प्रतिमा नें कहा__"बल्कि अगर उसकेपास कोईऐसा सबूत होता तोँ वो किसी भि वक़्त तुम्हारे हाॅथ मे हॅथकड़ी डाल देती। मुझे तोँ लगता हैं कि रितू कों सचमुच तहखाने सें कुछ नहि मिला हैं। बल्कि तुम्हारा यह ख़याल ज़्यादा सही लगता हैं कि तहखाने मे समय बम्ब लगाने वाले नें हि उनसभी चीज़ों कों गायब किया हैं। "
"मगरयह हैरत केँ संगसंग अविश्वास वालीबात भि हैं कि बंद फैक्टरी केँ अंदरतथा तहखाने कां भि लाॅक तोड़कर वोँ व्यक्ति अंदर पहुॅच केसे गय़ा?" अजय सिंह नें कहा__"औऱ तहखाने सें सारी चीज़ें गायब केसे किया उसने? क्याँ वोँ सभी चीज़ें वो अपनेसंग लें गय़ा? जबकि फैक्टरी केँ गेट पर्र तैनात दरबान केँ अनुसार गेट पर्र बाहर् सें ताला हि लगा थां। कहने कां मतलबयह कि यहसभी अगर उसने हि किया हैं तौ केसे कियायह?"
"यकीनन अजय। " प्रतिमा नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा__"यह बड़े हि आश्चर्य कि बात हैं। कोईबंद फैक्टरी केँ तहखाने मे आसानी सें पहुॅच गय़ा औऱ अपना साराकाम बड़ी आसानी सें हि करके उड़नछू हौ गय़ा। किसी कों इस सबकी कानों कानभनक तक न् लगी। यकीन नहि होता। "
"अगर ऐसा हि हैं। " अजय सिंहकह रहा थां__"तौ सबसे बड़ी तकलीफ़ कि बात तोँ अब हुई हैं प्रतिमा। ज़रा सोचो जिसने भि यहसभी किया हैं वोँ कभी भि हमारे खिलाफ वोँ सभी चीजें पुलिस तक पहुॅचा सकता हैं, याँ फिनउन सभी चीज़ों केँ आधार पऱ वो कभी भि हमें ब्लैकमेल कर सकता हैं। हमारा जीना हरामकर सकता हैं प्रतिमा.समझ मे नहि आता कि अब क्याँ करूॅ मे??"
"अब तोँ यहीकर सकते हें कि हम् उस आदमी केँ ब्लैकमेल करने कां इंतजार करें। " प्रतिमा नें कहा__"इसके सिवा दूसरा कोई मार्ग भि नहि हैं। "
अजय सिंह चिंता व परेशान सां बैठारह गय़ा। उसे क्याँ पता थां कि यहसभी चक्कर चलाने वालावही हैं जिसे वो होटल याँ ढाबे मे कप प्लेट धोने वाला समझता हैं।
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"यह क्याँ कहरहे हौ तुम्?" जगदीश नें चौंकते हुए सामने सोफे पऱ बैठे विराज कि तरफदेख कर कहा__"अजय सिंह कि फैक्टरी केँ तहखाने सें वोँ सारी चीज़ें तुमने गायब करवाई थि???"
"यहीसच हैं अंकल। " विराज नें अजीबभाव सें कहा__"औऱ यहसभी करने केँ पीछे भि मेरा एक् मकसद थां। "
"कैसा मकसदराज?" गौरी नें हैरानी सें अपने बेटे कि तरफ देखते हुएकहा।
"मे नहि चाहता थां कि अजय सिंह अपनी हि बेटी कि वजह सें इतना जल्द कानून केँ हाॅथलग जाए। " विराज नें कहा__"अगर ऐसा हौ जाता तौ खेल कां मजा हि ख़राब होँ जाता अंकल। जेल मे पहुॅच करअजय सिंह कों वोँ मजा नहि मिल पाता जोँ मजाआने वाले वक़्त मे मेरे द्वारा उसे मिलने वाला हैं। उसकी स्थान जेल मे नहि हैं अंकल बल्कि जेल केँ बाहर् हि हैं। मे उसेकभी भि कोई शिकायत कां मौका नहि देना चाहता, वर्ना जेल मे बंद होने पर्र वोँ यह कहेगा कि मुझे तोँ अपने हाॅथ पांव चलाने कां मौका हि नहि दिया गय़ा। अब आप् हि बताइए अंकल, क्याँ ऐसा करनासही होगा? नहि नं.इसी लिए मैंने उसे उसकी बेटी द्वारा जेल जाने सें बचा लिया। "
"वोँ सभी तोँ ठीक हैं बेटे। " जगदीश नें कहा__"मगर मुझेयह समझ नहि आँ रहा कि तहखाने सें वोँ सभी चीज़ें तुमने केसे औऱ कब गायब करवाई?"
"आपकेसब सवालों कां जवाब आपको दूॅगा अंकल। " विराज नें हॅसकर कहा__"मगर उससे पहले मे गरमा गर्मगरम चाय पीना चाहता हूॅ। फिन तसल्ली सें आपको समझा समझाकर सभीकुछ बताऊॅगा। "
"यह तौ चीटिंग हैं भाई। " निधि नें बुरा सां मुॅहबना कर कहा__"कितना अच्छा मजा आँ रहा थां मुझे औऱ आपने इंटरवल करके सारामजा हि ख़राब कर दिया मेरा। जाइए मुझेबात हि नहि करना आपसे, हाॅ नहीं तौ। "
"तुमने बिलकुल ठीककहा बेटी इसने सारामजा ख़राब कर दिया। " जगदीश नें हॅसकर कहा__"मे भि अब इससेबात नहि करूॅगा। अपने आपको बड़ा सूरमा समझने लगा हैं यह। हैं न् बेटी?"
"बिलकुल। " रितू नें मुॅह फुलाकर कहा__"हाॅ नहि तोँ। "
"चुपकर। " सोफे सें उठतेहुए गौरी नें निधी कों झिड़का__"हाॅ नहि तौ कि बच्ची, वर्ना लगाऊॅगी एक्। "
"भाई। " निधी नें विराज कि तरफ मासूमियत सें देखकर कहा__"देख लीजिए आपकीजान कों माॅ एक् लगाने कों कहरही हें। आप् ऐसे केसेचुप बैठ सकते हें? हाॅ नहि तौ। "
गौरीतब तक अंदर किचेन कि तरफजा चुकी थि। जबकि निधि कि इसबात सें विराज बोला__"मे चुप नहि बैठाहूॅ मगरमाॅ कों कुछकह भि तोँ नहि सकता न् गुड़िया। समझाकर न्। "
"हांएॅ। " निधि एक् दम सें विराज सें दूर हटतेहुए बोलीं__"अब तोँ पक्का आपसेबात नहि करूॅगी। देख लेना, हाॅ नहि तौ। " इतना कहने केँ बाद वो उठी औऱ जगदीश वाले सोफे पऱ जाकर जगदीश केँ बिलकुल पासबैठ गई मुॅह फुलाकर।
"आपकोपता हैं अंकल। " विराज नें निधि कि तरफ देखते हुए कहा__"आज साम कों मे शिप द्वारा समंदर मे घूमने कां मजा लेने कि सोचरहा थां गुड़िया केँ संग, मगर कोईबात नहि मे माॅ कों लेकरचला जाऊॅगा। ठीक रहेगा न् अंकल.माॅ भि समंदर मे घूमने कां मजा लें लेंगी। "
"वाॅव, समंदर मे बहोत मजा आएगा नं भाई?" निधि बिजली कि स्पीड सें जगदीश वाले सोफे सें उठकर विराज केँ पास उससे चिपककर बैठते हुए बोलि__"मे न् शिप केँ ऊपर बैठूॅगी जैसे फिल्मों मे हीरो हिरोईन बैठते हें, हाॅ नहि तोँ। "
"तूँ केसेबैठ जाएगी भला?" विराज नें कहा__"तूँ तौ मेरेसंग जाएगी हि नहि। मे माॅ कों लेकर जाऊॅगा। "
"ऐसा नहि हौ सकता। " निधि नें अकड़कर कहा__"मे जाऊॅगी औऱ आपके हि संग जाऊगी, औऱ अगर आप् मुझे अपनेसंग नहि जाएॅगे तौ यह आपकेलिए अच्छा नहि होगा। देख लेना, हाॅ नहि तौ। "
"नहि वोँ माॅकह रहीथीं कि गुड़िया यहींरह कर अपनी पढ़ाई करेगी। " विराज नें कहा__"औऱ वोँ मेरेसंग शिप मे घूमने जाएंगी। इसलिए तुम् मेरेसंग नहि जा पाओगी। "
"मे कुछ नहि जानती। " निधि नें सहसा रुआॅसे होकर कहा__"मे आपकेसंग हि जाऊॅगी। क्याँ आप् मुझे नहि लेँ चलेंगे अपने संग.मे आपकीजान हूॅ नां?" कहते कहते निधि कि आॅखों सें आॅसूछलक गए, यहदेख विराज कां कलेजा हाहाकार करउठा। उसे स्वयं पऱ बेहद क्रोध आया कि वोँ अपनी गुड़िया कों इसतरह भला केसे रुला सकता हैं?
विराज नें उसे अपने सीने सें छुपका लिया, निधि स्वयं भि उससे किसी फेवीकोल कि तरह चिपक गई थि।
"मुझेमाफ करदे मेरी गुड़िया। " फिन विराज नें भर्राए गले सें कहा__"मे तौ बस मज़ाक कररहा थां। तुम्हें चिढ़ा रहा थां औऱ कुछ नहि। चलअब रोना नहि.तुँ जानती हैं नं कि मे अपनीजान कि आॅखों मे आॅसू नहि देख सकता। औऱ हाॅ.शिप मे जाने कां कोई प्रोग्राम नहि थां वोँ तौ बसऐसे हि कहरहा थां मे मगरअब अवश्य हम् दोनो संडे कों शिप मे बैठकर समंदर मे घूमेंगे औऱ खूबमजा करेंगे ठीक हैं न्?"
"हाॅ नहि तोँ। " निधि नें हल्का सां सिरउठा कर विराज कि तरफ मुस्कुरा करकहा औऱ फिन सें उसके सीने मे अपना चेहरा छुपा लिया। सामने बैठा जगदीश ओबराय यहसभी देखकर मुस्कुरा रहा थां। उसकी आॅखों मे भि आॅसू थें।
"कहाॅ घूमने जाने औऱ मजा करने कि बातकर रहे होँ तुम् दोनो?" हाॅथ मे ट्रेलिए आतेहुए गौरी नें कहा।
"पता हैं माॅ। " निधि नें विराज केँ सीने सें सिरउठा करतथा मारे खुशी केँ कहा__"संडे कों मे औऱ भाई समुंदर मे शिप मे बैठकर घूमेंगे औऱ खूब मस्ती करेंगे। हाॅ नहि तोँ। " निधि कि इसबात सें विराज नें अपनासिर पीट लिया जबकि.
"क्याँ???" गौरी नें हैरानी सें निधि औऱ विराज कि तरफदेख कर कहा__"नहि तुम् लोग कहीं नहि जाओगे। समुंदर मे तौ बिलकुल भि नहि। "
गौरी नें सबकोगरम चाय दि औऱ स्वयं भि एक् कप लेकर वहीं सोफे पर्र बैठ गई। जबकि उसकीइस बात सें निधि कां चेहरा उतर गय़ा। उसने कातरभाव सें विराज कि तरफ देखा। विराज नें इशारे सें कहा कि 'तुँ चिन्ता मतकर हम् अवश्य चलेंगे'। विराज केँ इस इशारे सें निधि कां चेहरा फिन सें खिलउठा। औऱ अब वो मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे गरमचाय पीनेलगी। उसेयूॅ मुस्कुराता देख गौरी कां माथा ठनका, बोलि__"अब इसतरह मुस्कुरा क्यूं रही हैं? चुपचाप गरमचाय पी। "
"अब क्याँ मे मुस्कुरा भि नहि सकतीमाॅ?" रितू नें हॅसकर कहा__"आप् भि कमाल करती हें। " इतना कहने केँ बाद एकाएक हि उसने विराज कि तरफ देखा औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं__"हाॅ नहि तोँ। "
उसकीइस क्रिया सें गरमचाय पीरहे विराज कों ज़ोर कां ठस्का लग गय़ा औऱ वो खाॅसने लगा। खाॅसने केँ संगसंग वो हॅस भि रहा थां। जबकि उसकेइस प्रकार एकाएक खाॅसने सें निधि हड़बड़ा गई। जानती तोँ वो भि थि कि उसके भइया कों अचानक ठस्का क्यूं लगा थां जिसकी वजह सें उसे खाॅसी आनेलगी थि इसलिए पकड़े जाने केँ डर सें हड़बड़ा गई थि वो।
"क्याँ हुआ बेटा?" गौरी नें चौंकते हुए पूछा।
"यह दोनो एक् नम्बर केँ शैतान हें गौरी बेहन। " जगदीश ठहाका लगाकर हॅसते हुए बोला थां__"तुम् नहि समझपाई कि इन दोनो नें आपस मे क्याँ खिचड़ी पकाली हैं?"
"मे सभी जानती हूॅ भाई। " गौरी नें भि हॅसकर कहा__"यह दोनो सोचते हें कि यह मुझे बेवकूफ बना लेते हें। यह दोनोयह भूल जाते हें कि इन्होंने मुझे नहि बल्कि मैंने इन दोनो कों पैदा किया हैं। "
विराज औऱ निधि नें एक् दूसरे कि तरफ अजीबभाव सें इसतरह देखा जैसे चोरी पकड़ी गई हौ।
"ख़ैर, अब बताओराज। " जगदीश नें कहा__"कि फैक्टरी केँ तहखाने सें वोँ सभी चीज़ें तुमने कब औऱ केसे गायब करवाई थि औऱ यह भि कि किसके द्वारा?"
"आपकोयाद होगा अंकल। " विराज नें कहना शुरुआत किया__"मैंने आपसेकहा थां कि 'अजय सिंह तोँ यहसोच भि नहि सकता कि मे अरविंद सक्सेना केँ द्वारा अभि औऱ क्याँ खेल खलने वालाहूॅ'। जैसा कि मैने आपको बताया थां कि सक्सेना कि कमज़ोरी फोटोग्राफ्स केँ रूप मे मेरेपास थि। इसलिए वो मेरे कहने पऱ कुछ भि करने कों मजबूर थां, औऱ बदले मे मे उसे उसके परिवार सहित सुरक्षित विदेश भेजवा दूॅगा। अजय सिंह कि नज़र मे सक्सेना पहले हि उससे अपना हिसाब पुस्तक करके विदेश जा चुका थां जबकि सच्चाई कुछ औऱ हि थि। सक्सेना तौ उसदिन विदेश जाने वाली फ्लाइट पर्र बैठा थां जिसरात अजय सिंह कि फैक्टरी मे आगलगी थि। मुझे सक्सेना केँ द्वारा यहपता थां कि हप्ते मे एक् दिनवरात फैक्टरी मे मजदूरों कां अवकाश रहता हैं, यानी फैक्टरी बंद रहती हैं। इसीबात कां ख़याल रखकर हि प्लान बनाया गय़ा थां। सक्सेना केँ अनुसार फैक्टरी कां मेनगेट जौ कि लोहे सें बनाहुआ हैं, उसकी चाभी मैनेजर याँ अजय सिंह केँ पीए केँ पास रहती हैं। सक्सेना नें उस चाभी कि डुप्लीकेट चाभी पहले हि बनवाली थि। इसलिए फैक्टरी केँ अंदर जाने कि समस्या नहि रह गई थि। समस्या थि तहखाने केँ अंदर पहुॅचने कि। क्योंकि तहखाने केँ गेट पऱ पिनकोड सिस्टम वाला लाॅक थां, जिसका पिनकोड मात्र अजय सिंह हि जानता थां। इसलिए पिनकोड हासिल करने केँ लिए दिमाग़ कां प्रयोग किया गय़ा। सक्सेना कों यह तौ पता हि थां कि अजय सिंह अवकाश वालेदिन याँ रात हि अपनेगैर कानूनी धंधे वालाकाम करता थां। मैने सक्सेना केँ द्वारा पिनकोड हासिल करने केँ लिएउस रात तहखाने केँ पिनकोड लाॅक सिस्टम पर्र एक् पाॅलिथिन नम्बरों केँ ऊपरइस प्रकार चिपकवा दि कि अजय सिंह ग़ौर सें देखने पऱ भि घूर न् पाए कि सिस्टम केँ ऊपर पाॅलिथिन चढ़ी हुई हैं। अजय सिंहजब तहखाने केँ अंदर जाने केँ लिए सिस्टम पऱ पिन नम्बर डालता तौ वोँ सभीपिन नंबर्स उस पाॅलिथिन मे अजय सिंह केँ फिंगर प्रिंट्स केँ रूप मे छप जाते। यहाॅ पऱ एक् प्रश्न यह भि थां कि अगरपिन कां कोई नम्बर यानी संख्या एक् सें दो याँ तीनबार अजय सिंह केँ द्वारा डाल दि जाती तौ केसेपता चलता कि उस संख्या केँ कितने नंबर थें? एक्सपर्ट नें बताया थां कि जौ नंबर एक् बार डाला जाएगा वोँ पाॅलिथिन पर्र कम दबाव केँ संग छपेगा जबकि अगरकोई नंबरदो याँ तीनबार दबाया जाएगा वोँ ज़्यादा दबाव केँ संग छपेगा। इसकेबाद उन नंबरों कों चेककर लिया जाएगा। मे एक्सपर्ट कि इसबात सें मुतमईन नं थां क्योंकि इससे नंबरइधर उधर भि हौ सकते थें। इसलिए पाॅलिथिन केँ संगसंग मैने वहाॅ पऱ एक् मिनी कैमरा इस प्रकार लगवाया कि उसमें अजय सिंह कां पिनकोड डालना स्पष्ट दिखाई दे। बसफिन क्याँ थां.अजय सिंहजब वहाॅआया तोँ सभीकुछ रिकार्ड होँ गय़ा। अजय सिंहकभी सोच भि नहि सकता थां कि कोई उसकेलिए कितना बड़ाखेल रचरहा हैं। यहसभी कामतब हुआ थां जब सक्सेना नें पार्टनरशिप नहि तोड़ी थि अजय सिंह सें। "
"तुम्हारे कहने कां मतलब हैं। " जगदीश नें बीच मे हि विराज कि बात काटते हुए कहा__"कि यहसभी तुम् सक्सेना सें पहले हि करा चुके थें? मगरइस बीचअगर अजय सिंह पिनकोड बदल देता तोँ क्याँ करते तुम्?"
"मेरे दिमाग़ मे भि यही प्रश्न थां अंकल। " विराज नें कहा__"इस लिएजब दूसरा अवकाश हुआ फैक्टरी मे तौ सक्सेना नें मेरे कहने पऱ फिन सें वहाॅ पऱ मिनी कैमरा लगा दिया थां, कारणयही जानना थां कि अजय सिंह नें पिनकोड बदल दिया हैं याँ पहले वाला हि हैं। मगरबाद मे पताचला कि पिनकोड पहले वाला हि थां। "
"चलोयह तौ ठीक हैं। " जगदीश नें कहा__"मगर इतनाकुछ पता करने केँ बाद तुमने यहसभी पहले हि क्यूं नहि कर दिया थां? मेरा मतलब हैं कि पहले हि फैक्टरी मे आग क्यूं नहि लगवाई थि, इतनेदिन बाद हि क्यूं कियाऐसा?"
"इसमें भि एक् मज़ेदार खेल छुपा थां अंकल। " विराज नें मुस्कुरा करकहा थां__"मुझे पता थां कि अजय सिंह कि बेटी पुलिस कि ट्रेनिंग कररही हैं, उसकी ट्रेनिंग केँ बाद सीधाउसे किसी थाने मे चार्ज सम्हाल लेना थां। मैंने सोचा क्यूं न् अजय सिंह कि बेटी कों उसके थाना इंचार्ज बनते हि उसके बाप कि फैक्टरी कां केस सौंपकर उसे एक् तोहफा दियाजाए। बसयही सोचकर कुछदिन रुकारहा थां मे। आपसेकहा थां कि मंत्री जी सें बात करके रितू सिंह बघेल कों वहीं कां थाना उसकी पहली पोस्टिंग मे मिले। बस सभीकुछ सेट करने केँ बाद प्लान केँ अनुसार काम शुरुआत हौ गय़ा। फैक्टरी केँ बाहर् गेट पऱ एक् हि दरबान थां उसरात, दूसरा दरबान नहि थां। पताचला थां कि उसरात उसकी पत्नि कों बच्चा होने वाला थां इसलिए वो छुट्टी लेकरचला गय़ा थां। उसकी स्थान दूसरा कोई दरबान थां हि नहि। एक् दरबान बचा थां वो भि डबल ड्यूटी कि वजह सें उसरात आधीरात केँ वक्त कुर्सी मे बैठाबार बार जम्हाई लें रहा थां। उसेइस तरह जम्हाई लेतादेख सक्सेना नें उसे क्लोरोफाॅम डालाहुआ रुमाल सुॅघा दिया। कुछ हि समय मे बेचारा अंटा गाफिल होँ गय़ा। उसकेबाद कोई समस्या हि नहि थि। सक्सेना डुप्लीकेट चाभी कि मदद सें फैक्टरी कां गेटखोल कर अंदर गय़ा उसकेसंग चार व्यक्ति औऱ थें उसकीमदद केँ लिए। सबके अंदरआते हि सक्सेना नें अंदर सें गेट भि बंदकर लिया। तहखाने केँ पास पहुॅच कर उसने तहखाने केँ गेट पऱ लगेपिन सिस्टम पर्र कोड नंबर डाला औऱ दरवाजा खोलकर तहखाने केँ अंदर पहुॅच गय़ा। सब नें तहखाने मे मौजूद गैर कानूनी सामान कों अपनेसंग लाई हुइ बोरियों मे भरना शुरुआत कर दिया। एक् घंटेबाद वोँ सभीलोग तहखाने मे रखीहर गैर कानूनी चीज़ कों बोरियों मे भर लिया थां। उसकेबाद वहाॅतीन वक्त बम्बलगा कर वोँ सभी सुरक्षित बाहर् आँ गए। फैक्टरी कां बाहर् वालागेट उसीतरह बाहर् सें लाॅक करके वोँ सभी वहाॅ सें लौटआए। अपने पीछेकोई सबूत नहि छोंड़ा थां उन्होने। हलाॅकि बम्ब केँ फटने पऱ कोई सबूतरह हि नहि जानां थां मगर बाहर् गेट पऱ सबूत होँ सकते थें इसकेलिए उन लोगों नें पहले सें हि अपने हाथों मे दस्ताने पहनरखे थें। इतनी बड़ीबात कों अंजाम दिया गय़ा मगर किसी कों उसरात कोईभनक तक नं हुई। कारण एक् तोँ रात कां टाइम, दूसरे बाॅकी स्टाफ फैक्टरी सें दूरबने आफिसों मे थां औऱ सबसे बड़ीबात किसी कों गुमान हि नहि थां कि कोईइस सबकेलिए शहर सें दूर यहाॅ आएगा। "
"तौ आख़िर इसतरह तुमने सक्सेना औऱ कुछ आदमियों केँ द्वारा यहसभी करवाया थां?" जगदीश ओबराय नें कहा__"सक्सेना तोँ उसीरात अपने परिवार केँ संग बम्ब फटने केँ तीन घंटे पहले हि विदेश जाने केँ लिए फ्लाइट मे बैठ चुका थां, लेकिन वोँ व्यक्ति कौन थें? उन सबकोइस बारे मे पता हैं, हौ सकता हैं वोँ इस सबकाकभी भाॅडा फोड़दें तोँ क्याँ करोगे तुम्?"
"पहलीबात तोँ वोँ यहसभी करेंगे नहि क्योंकि वोँ यही जानते हें कि यहसभी उन्होने किसी माफिया गैंग केँ लिए किया हैं। " विराज नें कहा__"सक्सेना भि उन सबकीतरह हि उसरात अपने चेहरे पऱ नकाब पहनाहुआ थां। सक्सेना नें उनसेयही कहा थां कि वोँ माफिया कां व्यक्ति हैं। इस सबकाकोई डर नहि हैं। दूसरी बातयह हैं कि मे स्वयं भि ज़्यादा दिनों तक इस सबकोअजय सिंह सें छुपाकर नहि रखूॅगा। बल्कि डंके कि चोंट पऱ उसके सामने जाकरउसे बताऊॅगा कि उसकेसंग जौ कुछ भि अब तक हुआ हैं वोँ सभी मैंने किया हैं। "
"वोँ सभी तौ ठीक हैं राज। " जगदीश नें कहा__"मगर इंस्पेक्टर रितू तोँ छानबीन कर हि रही हैं न्? संभव हैं कि वो किसीतरह इस सबकापता लगा लेँ कि यहसभी तुमने किया हैं तौ??"
"उससेकुछ भि फर्क नहि पड़ता अंकल। " विराज नें कहा__"क्योंकि आगेचल कर मे स्वयं हि यहसभी उन लोगों कों बताऊॅगा कि मैंने हि यहसभी किया हैं। औऱ यकीन मानिए अंकल उनमें सें कोई भि मेराबाल भि बाॅका नहि कर सकेगा। रहीबात उस पुलिस वाली कि तोँ वोँ भि मेराकुछ नहि बिगाड़ सकती, क्योंकि सभीकुछ जान लेने सें याँ पताकर लेने सें कुछ नहि होता। बल्कि किसी भि चीज़ कों साबित करने केँ लिएउस कानून वाली केँ पास सबूत औऱ गवाह होने चाहिए, बिना सबूत केँ वोँ मेराकुछ नहि बिगाड़ सकती। औऱ सबूतउसे इसजनम मे तौ क्याँ किसी भि जनम मे नहि मिलेंगे। "
"जुर्म चाहे जितनी सफाई सें कियाजाए राज। " जगदीश नें कहा__"वोँ अपने पीछेकोई नं कोईऐसा सबूत अवश्य छोंड़ जाता हैं जिसकी वजह सें वोँ एक् दिन कानून कि गिरफ्त मे आँ जाता हैं। "
"आप् बताइए अंकल। " विराज नें मुस्कुराते हुए कहा__"मैंने इस सबके पीछे क्याँ सबूत छोड़ा हैं? जबकि मैंने अभि तक जौ कुछ भि किया वोँ भि यहीं बैठे बैठे किया हैं। इस सबको अंजाम देने वाले तोँ कोई औऱ हि थें। "
"अरविंद सक्सेना तुम्हारे लिए एक् कमज़ोर प्वाइंट हैं बेटे। " जगदीश नें कहा__"मान लो तहकीकात मे रितू कों यहपता चलजाए कि इस सबमें सक्सेना कां हाॅथ हैं तौ? वो सक्सेना कों शक कि बिना पऱ धर लेगी औऱ फिन उससे सारासच उगलवा लेगी। सक्सेना कों पुलिस केँ सामने यह कबूल करना हि पड़ेगा कि यहसभी उसने तुम्हारे कहने पऱ किया थां। "
"इतनीदूर तक जाने कि ज़रूरत हि नहि पड़ेगी अंकल। " विराज नें कहा__"क्यूं कि उससे पहले मे हि मैदान मे आँ जाऊॅगा। मे स्वयं उन लोगों केँ सामने इस सबका इकबाले जुर्म करूॅगा। औऱ पता हैं अंकल, अजय सिंह कों यह भि एहसास दिलाऊॅगा कि उसकागैर कानूनी सामान अभि भि मेरेपास हि हैं, तथा उसके खिलाफ ऐसेऐसे सबूत भि हें मेरेपास जिससे उसको कानून केँ लपेटे मे आने केँ लिए ज़रा भि देर नहि लगेगी। बेचारा स्वयं हि इस सबकेडर सें अपनी इंस्पेक्टर बेटी सें मेरी पैरवी करने लगेगा। "
"बात तौ तुम्हारी ठीक हैं। " जगदीश हॅस पड़ा__"संभावनाओं पऱ कुछ नहि होता, कानून कों तौ सबूत चाहिए। औऱ सबूतकोई हैं नहि। वाउ.यह तौ कमाल हौ गय़ा बेटे। "
"अभि तोँ दिमाग़ सें हि उनकी हालत खराबकर रखी हैं अंकल। " विराज नें कहा__"जबकि मैदान मे खुलकर आनां अभि बाॅकी हैं। जिसदिन आमने सामने कां खेल होगा न् उसदिन सें अजय सिंहहर लम्हा रोएगा, गिड़गिड़ाएगा, रहम कि भीख माॅगेगा मुझसे औऱ मेरीमाॅ सें। "
"उसकेसंग यही होना चाहिए राज बेटे। " जगदीश नें कहा__"जोँ अपनेमाॅ बाप औऱ भइया कां नं हुआ बल्कि उनकेसंग इतना घिनौना कर्म कियाऐसे गंदे इंसान केँ संग किसी भि कीमत पर्र रहम नहि होना चाहिए। "
"उनकेलिए रहम शब्द मैंने अपनी डिक्शनरी सें निकाल कर फेंक दिया हैं अंकल। " विराज नें एकाएक ठंडे स्वर मे कहा__"एक् एक् चीज़ कां हिसाब लूॅगा मे। "
"मे तोँ उस कमीने शिवा कों अपने हाथों सें कुत्ते कि तरह मारूॅगी। " सहसा निधि नें तपाक सें कहा__"मुझे उसकीशकल सें भि नफरत हैं। हाॅ नहि तोँ। "
निधि केँ इस तकिया कलाम कों सुनकर सभी मुस्कुरा कररहगए।
भाग हाज़िर हैं दोस्तो.
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,,,,
धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,, प्रेम औऱ सहयोग देते रहिए,,,,
Bhot accha update muze lagta h viraj or ritu kaa kuch purana chakar h ya ajay kee kisi or beti say koy love wala chakar h hu sakta h na bi hu Apne mooh say apni hi tarif krr rahe hu story mai
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Vaise majaa aayega me एक बात के bare mai सोच raha ho के shiva ne बोला thaa ajay ko के vo chacha chachi ko कब iss game mai shamil karege अब vo game kon sa h और ajay के घर mai kon kon उसके iss game mai shamil h क्या yeh game sex wala h kyu iski possibility jyada lag rahi h kyu कुछ updates mai देखा के shiva itna shatir too नहीं lag raha के vo कोई game game sake joo demaag से khela jaa sakta h
Kya ajay की niyat kaa ritu ko ptaa chalega और क्या उसकी कोई और beti उसके sath pehle से shamil h lagta too नहीं lekin ajay अगर ritu के bare mai essa sochta h too hu sakta h के yeh possible hu
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vah mast update thaa bhay। halanki mijhe yaha viraj थोड़ा sa overconfidence laga joo की usake aage के plan के liye jaanleva hu sakta he। Jahdish ne sai कहा he की sakshena viraj की sabse badi kamjor kadi he। Lekinek बात मेरे dimag mai ghum rahi he की yeh joo nidhi kaa takiya kalam he क्या yeh usane जब bi बोला hoga क्या जब woh videshi bankar ajay की company gai thi।
Waiting 4 next update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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