♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
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keep it up and as always waiting for
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
भाग.《 18 》
अब तक.
"निःसंदेह। " व्यक्ति नें कहा__"औऱ क्योंकि फैक्टरी बाहर् सें अवकाश केँ चलतेबंद थि इसलिए जब तक किसी कों पता चलतातब तक आग नें उग्ररूप धारणकर सबकुछ बरबाद कर दिया। "
"बेसमेंट केँ अंदर कि क्याँ पोजीशन हैं?" रितू नें कहा__"अगर अंदर जाने लायक हैं तोँ चलकर जाॅच शुरुआत करते हें। देखते हें औऱ क्याँ पता चलता हैं?"
कहने केँ संग हि रितू औऱ वोँ व्यक्ति बेसमेंट केँ अंदर कि तरफ देखने लगे। बेसमेंट केँ अंदर पुलिस औऱ फाॅरेंसिक केँ कुछलोग थें। रितू भि उनकेबीच पहुॅच गई।
उधरअजय सिंह कों आनन फानन मे अभय नें वाहन मे पिछली सीट पर्र प्रतिमा कि गोंद मे लिटाया औऱ स्वयं ड्राइविंग सीट पऱ बैठकर वाहन स्टार्ट कि। करीब-करीब बीस मिनटबाद वोँ सभी हास्पिटल मे थें।
अजय सिंह कों जल्दी हि एक् रूम मे लेँ जाया गय़ा औऱ डाक्टर नें उसका चेकअप शुरुआत कर दिया।
अब आगे.
साम होने सें पहले पहलेअजय सिंह कों हास्पिटल सें डिस्चार्ज कर दिया गय़ा थां। डाॅक्टर नें बताया थां कि अजय सिंह कों किसीगहन चिन्ता तथा किसी सदमे कि वजह सें चक्कर आया थां। बाॅकी उन्हें कोई बीमारी नहि हैं। हास्पिटल सें डिस्चार्ज होने केँ बादअजय सिंह अपनी पत्नि प्रतिमा तथा छोटे भइयाअभय केँ संग सीधा हवेली हि आँ गय़ा थां। फैक्टरी मे हौ रही छानबीन कां क्याँ नतीजा निकला यहउसे पता नहि थां। हलाॅकि उसकापीए औऱ बाॅकी स्टाफ फैक्टरी मे हि थें। हास्पिटल सें हवेली लौटते वक़्त सारे रास्ते अजय सिंह ख़ामोश रहा। अभय सिंह गाड़ी कों ड्राइव कररहा थां जबकि अजय सिंहव प्रतिमा वाहन कि पिछली सीट पर्र बैठे थें।
प्रतिमा नें इस टाइमअभय कि मौजूदगी मे अजय सिंह सें कुछ भि पूॅछना उचित नहि समझा थां इसलिए वो भि चुप हि रही। यह अलगबात हैं कि उसके दिलो दिमाग़ मे विचारों कां बवंडर चलरहा थां।
हवेली पहुॅच कर वोँ सभीकुछ देर ड्राइंग रूम मे बैठेरहे। अभय सिंह थोड़ी देरबाद अपनेघऱ कि तरफचला गय़ा। अजय सिंहव प्रतिमा कां बेटा शिवाइस वक़्त हवेली मे नहि थां।
सोफे पऱ बैठाअजय सिंह खामोश थां लेकिन अब उसके चेहरे पर्र गहनसोच औऱ चिन्ता केँ भावफिन सें नुमायाॅ होनेलगे थें। उसका ध्यान फैक्टरी मे हौ रही छानबीन पऱ हि लगाहुआ थां।
"इसतरह चिन्ता करने सें कुछ नहि होगाअजय। " प्रतिमा अपने सोफे सें उठकरअजय वाले सोफे पर्र उसके लगभग हि बैठकर बोलि__"अब जौ होना हैं वोँ तौ होकर हि रहेगा। हलाॅकि मे यह नहि जानती कि ऐसीकौन सि बात हैं जिसकी वजह सें तुमने अपनीयह हालतबना ली हैं लेकिन इतना अवश्य समझ गई हूॅ कि यह चिन्ता याँ यह सदमा केवल फैक्टरी मे आग लगने सें हुए नुकसान बस कां नहि हैं, बल्कि इसकीवजह कुछ औऱ हि हैं। "
अजय सिंहकुछ न् बोला, बल्कि ऐसालगा जैसे उसने प्रतिमा कि बात सुनी हि नं हौ। वो पूर्वत उसीतरह सोफे पर्र बैठारहा। जबकि उसके चेहरे कि तरफ ग़ौर सें देखते हुएतथा उसके दोनो कंधों कों पकड़कर झिंझोड़ते हुए प्रतिमा नें ज़रा ऊॅचे स्वर मे कहा__"होश मे आओअजय, क्याँ होँ गय़ा हैं तुम्हें? प्लीज मुझे बताओ कि ऐसीकौन सि बात हैं जिसकी चिन्ता सें तुमने स्वयं कि ऐसी हालतबना ली हैं?"
प्रतिमा केँ इस प्रकार झिंझोड़ने पर्र अजय सिंह चौंकते हुएगहन सोच औऱ चिन्ता सें बाहर् आया। उसने अजीबभाव सें अपनी पत्नि कि तरफ देखाफिन एकाएक हि उसके चेहरे केँ भाव बदले।
"इस छानबीन कों होने सें रोंकलो प्रतिमा। " अजय सिंह भर्राए सें स्वर मे कहताचला गय़ा__"अपनी बेटी सें बोलो कि वो फैक्टरी कि छानबीन न् करे, वर्ना सभीकुछ बरबाद हौ जाएगा। यहसभी रोंकलो प्रतिमा, मे तुम्हारे पेर पड़ता हूॅ। प्लीज रोंकलो अपनी बेटी कों। "
प्रतिमा हैरान रह गई अपने पति कां यहरूप देखकर। किसी केँ सामने नं झुकने वालातथा किसी सें नं डरने वाला औऱ नं हि किसी सें हार मानने वाला इंसान इस वक़्त दुनिया कां सबसे कमज़ोर वदीनहीन नज़र आँ रहा थां। प्रतिमा कों कुछसमय तौ समझ हि नं आया कि वो क्याँ करे लेकिन फिन जल्दी हि जैसेउसे वस्तुस्थित कां आभासहुआ।
"केसेइस सबको रोंकूॅ अजय?" प्रतिमा नें अधीरता सें कहा__"तुमने तौ मुझेकुछ बताया भि नहि कि बात क्याँ हैं? आज तक अपनीहर बात मुझसे शेयर करतेरहे मगरऐसी क्याँ बात थि जिसे तुमने मुझसे कभी शेयर करने केँ बारे मे सोचा तक नहि? क्याँ तुम् यह समझते थें कि तुम्हारी किसीबात सें मुझेकोई ऐतराज़ होता? याँ फिन तुम् यह समझते थें कि मे तुम्हें किसीकाम कों करने सें रोंक देती?? तुम् जानते होँ अजय कि मे तुमसे कितना प्रेम करतीहूॅ तथायह भि जानते हौ कि तुम्हारे कहने पऱ दुनियाॅ कां हर नामुमकिन व असंभव काम करने कों जल्दी सजधजकर होँ जातीहूॅ, फिन वोँ काम चाहे जैसा भि होँ। मगर इसके बावजूद तुमने मुझसे कोईबात छुपाई अजय। क्यूं किया तुमने ऐसा?"
"मुझेमाफ करदो प्रतिमा। " अजय सिंह नें प्रतिमा केँ दोनो हाॅथों कों थामकर कहा__"मुझसे बहोत बड़ी ग़लती हौ गई। तुम् चाहो तौ इस सबकेलिए मुझे जोँ चाहे सज़ादे दोमगर इस सबको रोंकलो प्रतिमा.वर्ना बहोत बड़ा अनर्थ होँ जाएगा। मे अपनी हि बेटी कि नज़रों मे गिर जाऊॅगा, उसका औऱ उसके कानून कां मुजरिम बन जाऊॅगा। "
"ऐसी क्याँ बात हैं अजय?" प्रतिमा नें झुॅझलाकर कहा__"आखिर तुम् कुछ बताते क्यूं नहि? जब तक मुझे बताओगे नहि तोँ केसे मुझेसमझ आएगा कि आगे क्याँ करना होगा मुझे?"
"क्याँ बताऊॅ प्रतिमा। " अजय सिंह नें हताशभाव सें कहा__"औऱ किन शब्दों सें बताऊॅ? मुझेकुछ समझ मे नहि आँ रहा हैं। "
"भलायह क्याँ बात हुइ अजय?" प्रतिमा नें उलझकर कहा__"जौ जैसा हैं उसे वैसा हि बताओ नं। "
अजय सिंह नें एक् गहरी साॅसली। अंदाज़ ऐसा थां उसका जैसे किसीजंग केँ लिए स्वयं कों रेडीकर रहा होँ।
"मुझसे वादाकरो प्रतिमा। " सहसाअजय सिंह नें प्रतिमा कां हाॅथ अपने हाॅथ मे लेकर कहा__"कि मेरे द्वारा सभीकुछ जानने केँ बाद तुम् मुझसे न् तोँ नाराज़ होओगी औऱ नां हि मुझे ग़लत समझोगी। "
"ठीक हैं मे वादा करतीहूॅ। " प्रतिमा नें कहा__"अब बताओ क्याँ बात हैं??"
"म मे अपनेइस बिजनेस केँ संगसंग हि। " अजय सिंह नें धड़कते दिल केँ संग कहा__"एक् औऱ बिजनेस करताहूॅ प्रतिमा मगर वोँ बिजनेस गैर कानूनी हैं। "
"क क्याँ????" प्रतिमा बुरीतरह उछल पड़ी__"य.यह तुम् क्याँ कहरहे हौ अजय? तुम् गैर कानूनी बिजनेस भि करते हौ??"
"मुझेमाफ करदो प्रतिमा। " अजय सिंह नें भारी स्वर मे कहा__"पर्र यहीसच हैं। मे शुरुआत सें हि इस धंधे मे थां। "
प्रतिमा आश्चर्यचकित अवस्था मे मुह औऱ आॅखें फाड़े अजय सिंह कों देखेजा रही थि। उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि अजय सिंहगैर कानूनी काम भि करता हैं। कुछदेर तक वो अवाक् सि देखती रहीउसे फिन एक् गहरी साॅस लेतेहुए गंभीरता सें बोलि__"क्यूं अजय क्यूं.आख़िर क्याँ ज़रूरत थि तुम्हें ऐसाकाम करने कि? तुम्हें तौ पता थां कि ऐसेकाम कां एक् दिन बुरा हि नतीजा निकलता हैं। फिन क्यूं कियाऐसा?? आखिरकिस चीज़ कि कमीरह गई थि अजय जिसके लिए तुम्हें गैर कानूनी काम भि करनापड़ गय़ा??"
"यहसभी मेरी हि ग़लती सें हुआ हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा__"मेरी हि महत्वाकांछाओं केँ चलतेहुआ हैं। मे हमेशा इसी ख्वाहिश मे रहा कि मेरे औऱ मेरे बच्चों केँ पासधन दौलतव ऐश्वर्य कि कोईकमी नं होँ। मेरा एक् बहोत बड़ानाम होँ औऱ सारी दुनियाॅ मुझे पहचाने। इसकेलिए मे कुछ भि करने कों सजधजकर थां, इस बारे मे कभी नहि सोचा कि मेरीइन चाहतों सें कभी मुझेऐसा भि दिन देख्ना पड़ सकता हैं। "
"अब क्याँ होगाअजय?" प्रतिमा नें कहा__"तुम्हारी ख्वाहिशों नें आज क्याँ सिला दिया हैं तुम्हें औऱ तुम्हारे संगसंग हम् सबको भि। क्याँ होगाजब सबकोयह मालूम होगा कि तुम् गैर कानूनी धंधा भि करते होँ?"
"मुझे औऱ किसी कि परवाह नहि हैं प्रतिमा। " अजय सिंह बोला__"मुझे तोँ बसइसबात कि चिन्ता हैं कि इस सबकेबाद मे अपनी हि बेटी कि नज़रों मे गिर जाऊॅगा। कानून केँ प्रति उसकी ईमानदारी औऱ आस्था देखकर यही लगता हैं कि वो मुझेइस काम कि वजह सें जेल कि सलाखों केँ पीछे भि डाल सकती हैं। "
"यह केसेकह सकते हौ तुम्?" प्रतिमा नें चौंकते हुए कहा__"हमारी बेटी भलाऐसा केसेकर सकती हैं?"
"वोँ यकीनन ऐसा हि कर सकती हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा__"क्यूं कि फैक्टरी मे हौ रही छानबीन मे उसे वोँ सभीमिल जाएगा जौ यह साबित करेगा कि मे गैर कानूनी धंधा करताहूॅ। "
"तुम्हारे कहने कां मतलब हैं कि फैक्टरी मे हि तुमने अपनेगैर कानूनी धंधों केँ सबूत छोंड़ रखे हें?" प्रतिमा कि धड़कनें रुकती सि प्रतीत हुईँ उसे__"औऱ वोँ सभी सबूतअब रितू केँ हाॅथलग जाएंगे?"
"बिलकुल। " अजय सिंह केँ चेहरे पऱ चिंता केँ भाव थें__"यही सच हैं प्रतिमा। फैक्टरी मे हि मैंने एक् गुप्त तहखाना बनवाया हुआ थां, औऱ उसी तहखाने मे मे गुप्तरूप सें अपनायह गैर कानूनी धंधा करता थां। इस धंधे मे कानून केँ द्वारा पकड़े जाने कां मुझेकोई डर नहि थां क्योंकि मेरे संबंध कानून तथा मंत्रियों सें थें। यहसभी मेरेइस धंधे सें होने वाले मुनाफे सें हिस्सा पाते थें। अगरयह कहूॅ तौ ग़लत न् होगा कि इन्हीं लोगों कि कृपा सें मेरायह धंधाचल रहा थां। "
"अगरऐसी बात हैं तौ तुम्हें इतना परेशान औऱ चिन्ता करने कि क्याँ ज़रूरत हैं?" प्रतिमा नें कहा__"यह सभी तुम् रोंकवा भि तौ सकते होँ। कानून औऱ मंत्रियों मे तौ सभी तुम्हारे हि व्यक्ति हें, तौ उनसेकह करइस छानबीन कों रुकवाया भि तोँ जा सकता हैं?"
"अबऐसा नहि हौ सकता प्रतिमा। " अजय सिंह बोला__"क्योंकि इसके पहले जोँ छानबीन हुई थि वोँ मेरे अनुरूप हुई थि। उसमें सभी मेरे हि आदमीं थें मगरअब जोँ छानबीन होँ रही हैं उसमें मे कुछ नहि कर सकता। "
"क्यूं?" प्रतिमा चौंकी__"क्यूं नहि कर सकते?अब क्याँ होँ गय़ा हैं ऐसा?"
"अब वोँ हुआ हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें गहरी साॅस छोंड़ी__"जिसके बारे मे मे कभीसोच भि नहि सकता थां। "
"क्याँ मतलब??" प्रतिमा हैरान।
"मतलब कि रातों रात सारे पुलिस डिपार्टमेंट कों बदल दिया गय़ा। " अजय सिंहकह रहा थां__"पुलिस मे कमिश्नर तक जौ भि मेरे व्यक्ति थें उन सबका तबादला कर दिया गय़ा हैं। अब तुम् समझ सकती होँ कि इन हालात मे मे क्याँ कर सकताहूॅ। मंत्री सें सहायता माॅगी मगर उसने भि अपने हाॅथ खड़ेकर लिए। मंत्री नें कहा कि वोँ कुछ नहि कर सकता क्योंकि यहसभी ऊपरहाई कमान केँ आदेश पऱ होँ रहा हैं। "
"हे ईश्वर!" प्रतिमा चकितभाव सें बोलि__"यह तौ बहोत हि सीरियस मामला हौ गय़ा हैं। "
"वही तोँ। " अजय सिंह नें कहा__"मुझे समझ मे नहि आँ रहा कि ऐसा क्यूं हौ रहा हैं? आखिर क्याँ वजह हैं जोँ इस सबकेलिए हाई कमान सें आदेश दिया गय़ा? आखिरकिस वजह सें रातों रातइस शहर केँ सारे पुलिस विभाग कां तबादला कर दिया गय़ा?"
"यकीनन अजय। " प्रतिमा नें कुछ सोचते हुए कहा__"यह तौ बड़ा हि पेंचीदा मामला हौ गय़ा हैं। मगर रितु नें तोँ कहा थां कि इसकेस कों उसने रिओपेन करवाया हैं, उस सूरत मे मामले कों इतना सीरियस नहि होना चाहिए थां। कहींऐसा तोँ नहि कि हमारी बेटी नें हि हाई कमान कों किसी ज़रिये इस सबकेलिए सूचित किया हौ?"
"होँ भि सकता हैं औऱ नहि भि?" अजय सिंह नें सोचने वाले अंदाज़ सें कहा।
"क्याँ मतलब?" प्रतिमा केँ माथे पर्र सिलवटें उभरी।
"साधारण रूप सें अगर हम् यहसोच कर चलें। "अजय सिंह बोला__"कि रितू नें केवल अपने पिता कि फैक्टरी मे आग लगने सें हुए भारी नुकसान केँ चलतेयह सोचकर इसकेस कों रिओपेन करवाया हैं कि कदाचित यहसभी हमारे किसी दुश्मन केँ द्वारा हि किया गय़ा होँ सकता हैं तोँ इस मामले कि छानबीन साधारण तरीके सें हि होती। मगर अगर हम् यह सोचें कि हौ सकता हैं रितू कों किसीवजह सें यहपता चला होँ कि उसका बाप इस बिजनेस कि आड़ मे गैर कानूनी धंधा भि करता हैं तौ यकीनन इसकेस कि छानबीन कां यह मामला संगीन हैं। "
"बात तौ तुम्हारी बिलकुल दुरुस्त हैं अजय। " प्रतिमा नें कहा__"मगर प्रश्न यह उठता हैं कि रितू कों यह केसेपता चल सकता हैं कि उसका बाप यहसभी भि करता हैं??"
"संभव हैं कि पुलिस मे आते हि थाने मे उसने बारीकी सें सब फाइलों कां अध्ययन किया होँ?" अजय सिंह नें कहा__"उन्हीं फाइलों मे कहींउसे कोईऐसा सबूत मिला हौ जिससे उसेइस सबकापता चल गय़ा हौ। कानून मे आस्था रखने वाली हमारी बेटी नें इस सबकेपता चलते हि यहसोच लिया होँ कि उसे अपने बाप कों गैर कानूनी धंधा करने केँ जुर्म मे गिरफ्तार करकेजेल कि सलाखों केँ पीछेडाल देना चाहिए। "
"यहसभी तौ ठीक हैं अजय। " प्रतिमा नें कहा__"मगर क्याँ यह संभव हैं कि किसी थाने मे तुम्हारे खिलाफ कोईऐसा सबूत फाइल केँ रूप मे कहींदबा होँ सकता हैं? जैसा कि तुमने कहा थां कि इसके पहलेइस शहर मे पुलिस महकमें मे कमिश्नर तक कि रैंक कां कानूनी नुमाइंदा तुम्हारा हि व्यक्ति थां, तौ क्याँ यह संभव हैं कि पुलिस केँ तुम्हारे हि आदमियों नें अपने थाने मे कहीं तुम्हारे हि खिलाफ़ कोई सबूतबना कररखा हुआ होँ सकता थां?"
"इस बारे मे कुछ भि नहि कहाजा सकता। "अजय सिंह नें कहा__"ऐसा होँ भि सकता हैं। संभव हैं किसी पुलिस केँ नुमाइंदे नें गुप्त रूप सें मेरे खिलाफ़ किसी प्रकार कां सबूतबना कररखा रहा हौ। आखिरकार पुलिस तोँ पुलिस हि होती हैं, वोँ नं तोँ किसी कि मित्र हौ सकती हैं औऱ न् हि दुश्मन। "
"इनसभी बातों केँ बाद तोँ यही निष्कर्स निकलता हैं। " प्रतिमा नें गंभीरता सें कहा__"कि हमारी बेटी कों किसीवजह सें अपने पिता केँ खिलाफ कोई सबूत मिला औऱ अब वो पक्के तौर पर्र बारीकी सें छानबीन करकेकुछ औऱ ठोस सबूत हासिल करना चाहती हैं जिससे उसे तुमको जेल कि सलाखों केँ पीछे डालने मे कोई अड़चन न् होँ सके। "
"होँ सकता हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कुछ सोचते हुए कहा__"मगर एक् बातसमझ मे नहि आँ रही। "
"कौन सि बातअजय?" प्रतिमा नें नाँ समझने वालेभाव सें अजय सिंह कि तरफ देखते हुएकहा थां।
"यही कि रातों रात सारे पुलिस डिपार्टमेंट कां तबादला क्यूं कर दिया गय़ा?" अजय सिंह बोला__"यह छानबीन तोँ वैसे भि होँ जाती। कोई भि पुलिस कां अफसरइस छानबीन मे किसी भि प्रकार कां हस्ताक्षेप नहि करता। फिन क्यूं तबादला कर दिया गय़ा सबका?"
"अगर इसबात कों हम् अपनी इंस्पेक्टर बेटी केँ हिसाब सें सोचें तोँ संभव हैं उसी नें इस सबकेलिए ऊपरहाई कमान कों अर्जी लिखकर गुज़ारिश कि होँ याँ फिन इसकी माॅग कि हौ?" प्रतिमा नें संभावना ब्यक्त कि__"क्योकि शायदउसे इसबात कि खबर होँ कि इसशहर कां सारा पुलिस विभाग तुम्हारे हाॅथों मे हैं। "
"नहि प्रतिमा। " अजय सिंह नें मजबूती सें अपनेसिर कों इंकार केँ भाव सें हिलाते हुए कहा__"रातों रातशहर केँ सारे पुलिस विभाग कां तबादला कर देनाकोई मामूली बात नहि हैं, औऱ उस सूरत मे तौ बिलकुल भि नहि जबकि हमारी बेटी नें अभि अभि पुलिस फोर्स ज्वाइन किया हौ। किसी भि नये पुलिस वाले केँ लिए इतनीदूर तक पहुॅच रखना नामुमकिन हैं प्रतिमा। पुलिस मे रहकर बहोत दिन तक पहले पुलिस केँ दाॅव पेंचसीख कर उसका अनुभव करना पड़ता हैं। मे यहबात मानता हूॅ कि हमारी बेटी नें पुलिस मे आते हि किसी मॅझेहुए पुलिस अफसर कि भाति पुलिसिया तौर तरीका अपना लिया हैं औऱ उसका अंदाज़ भि अनुभवी लगता हैं मगरफिन भि इसबात कों हजम करना मुश्किल हैं कि उसने हि शहर केँ सारे पुलिस विभाग कों बदल देने कि अपील कि हौ सकती हैं। "
"तोँ फिन। " प्रतिमा नें कहा__"तुम्हारे ख़याल सें यहसभी किसने किया होँ सकता हैं?"
"यही तोँ समझ नहि आँ रहा। "अजय सिंह नें कहा__"दिमाग़ कि नशें दर्द करनेलगी हें इस सबके बारे मे सोचते सोचते। "
"तुम् एक् व्यक्ति कों तोँ भूल हि गए होँ अजय। " प्रतिमा नें मानो धमाका करने वालेभाव सें कहा__"यह सभी उसने भि तौ किया हौ सकता हैं?"
"किसकी बातकर रही होँ तुम्?" अजय सिंह चौंका थां।
"तुम्हारे भतीजे विराज कि बातकर रहीहूॅ मे। " प्रतिमा नें कहा।
"वोँ सालाइस मामले मे कहाॅ सें स्लिम होता हैं प्रतिमा?" अजय सिंह नें अजीबभाव सें कहा।
"बात इस मामले मे उसके स्लिम होने कि नहि हैं अजय। " प्रतिमा नें गहरी साॅस लेकर कहा__"बल्कि बात हैं ऐसे मामले मे हरतरह कि संभावना कि। हमेंभले हि लगता हैं कि विराज कां इस मामले मे कोई हाॅथ नहि होँ सकता लेकिन प्रश्न हैं कि क्यूं नहि हौ सकता उसका हाॅथ?"
"बेवकूफों कि तरहबात मतकरो प्रतिमा। " अजय सिंह नें झुंझलाते हुए कहा__"मामले कि गंभीरता औऱ उसकी पेंचीदगियों कों समझो। उसकीकोई औकात नहि हौ सकतीइस सबमें शहर केँ सारे पुलिस विभाग कां तबादला करवा देने कि औऱ न् हि यह औकात होँ सकती हैं कि वो सीधाहाई कमान सें इस सबकेलिए बातकर सके। तुम्हारा दिमाग़ फिन गय़ा लगता हैं। "
"चलोमान लिया कि उसकीकोई औकात नहि हौ सकतीइन सभी कामों कों करवाने कि। " प्रतिमा नें ज़ोर देकर कहा__"मगर क्याँ यह नहि हौ सकता कि उसने हि हमारी फैक्टरी मे बम्बलगा करसभी कुछआग केँ हवाले कर दिया होँ? तुम् हरबार उसकी औकात कि बात करकेउसे तुच्छ समझ लेते होँ अजय जबकि उसे तुच्छ समझ लेने कां भि तुम्हारे पासकोई सबूत नहि हैं। जबकि कम सें कम उसकी इतनी तौ औकात हौ हि सकती हैं कि वो फैक्टरी मे किसी भि तरह हि सहीमगर आगलगा सके। "
अजय सिंह खामोश रह गय़ा। प्रतिमा कि बातों मे उसेसौ मन कि सच्चाई नज़रआई। औऱ इस एहसास नें हि उसे हिलाकर रख दिया कि यहसभी उसके भतीजे विराज नें किया होँ सकता हैं।
"यह तोँ तुम् भि अच्छी तरह समझते हौ अजय कि वोँ हमें अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता हैं। " प्रतिमा कहरही थि__"उसे लगता हैं कि हमनेउसे औऱ उसके परिवार कों बरबाद कर दिया हैं। इसलिए इस सबका प्रतिशोध लेने केँ लिए वो क्याँ नहि कर सकता? वो हरउसकाम कों कर गुज़रने पर्र अमादा होँ सकता हैं जिसकाम सें वो हमारा बाल भि बाॅका करसके। "
अजय सिंहकुछ कह न् सका। किसी गहरीसोच मे डूबा नज़रआने लगा थां वो।
"तुमने कहा थां कि तुम्हारे व्यक्ति उन्हें ढूॅढ़ने केँ लिए मुम्बई कि खाक़छान रहे हैं। " प्रतिमा मजबूत लहजे मे कहतीजा रही थि__"जबकि आज तक तुम्हारे आदमियों केँ हाॅथ मे उनसे संबंधित कोई छोटा सां सुराग़ भि नहि लगसका। इस बारे मे क्याँ कहोगे तुम्, बताओ?"
"क्याँ कहूॅ दोस्त?" अजय सिंह केँ चेहरे पऱ कठोरभाव उभरे__"जाने कहाॅगुम हौ गए हें वोँ सभी?उन सुअर कि औलादों कों यह ज़मीन खा गई हैं याँ आसमान निगल गय़ा हैं। एक् बार.मात्र एक् बार मेरे हाॅथलग जाएॅफिन देख्ना क्याँ हस्र करताहूॅ मे उन सबका। "
"मुझे नहि लगताअजय कि तुम् उन लोगों कां कुछकर लोगे। " प्रतिमा नें अजीबभाव सें कहा__"जबकि लगयहरहा हैं कि वोँ कमीना रंडी कि औलाद विराज हमारा हि बेड़ा गर्क़ कररहा हैं। "
अभि यहसभी बातें हि कररहे थें कि बाहर् सें किसी केँ आने कि आहट सुनाई दि। कुछ हि समय मे इंस्पेक्टर रितू ड्राइंग रूम मे दाखिल हुई। उसके चेहरे पऱ थकान केँ भाव गर्दिश करते नज़र आँ रहे थें। अजय सिंह अपनी बेटी कों देखकर घबरा सां गय़ा। उसेलगा फैक्टरी कि छानबीन मे रितू कों उसके काले कारनामों कां सारा काला चिट्ठा मिल गय़ा हैं औऱ अब वो उसे गिरफ्तार करनेआई हैं।
"आईएम साॅरी डैड। " रितू नें आते हि अजय सिंह कां हाॅथ पकड़कर तथाखेद भरे लहजे मे कहा__"मे आपकेसंग हास्पिटल नहि जासकी। आप् तोँ मेरी मजबूरी समझ सकते हें डैड, उस वक़्त मे अपनी ड्यूटी कों छोंड़ कर नहि जा सकती थि आपकेसंग। उस सूरत मे तौ हर्गिज़ नहि जब किसीकेस कि छानबीन चलरही हौ। एनीवे, अब आपकी तबियत कैसी हैं?"
अजय सिंह कों समझ नहि आँ रहा थां कि रितू कों देखकर अब वो कैसा रिऐक्ट करे? मनो-मस्तिष्क मे हज़ारों ख़याल मानो ताण्डव सां करनेलगे थें। समयभर मे ढेर सारा पसीना उसके सफेदपड़ चुके चेहरे पर्र उभरआया थां। दोनो कानों मे दिल पऱ धम्म धम्म करके पड़ने वाली किसी भारी हथौड़े कि चोंट उसकी हृदय कि गति कों रोंक देने केँ लिए बहुत थि जोँ सुनाई देरही थि। जबकि उसके अंदर कि हालत सें अनभिज्ञ रितु नें अपने पिता कों खामोश देखकर पुनः कहा__"प्लीज डैड, अब माफ भि कर दीजिए न् अपनीइस बेटी कों। आपकोपता हैं आपकीउस हालत सें मे कितना परेशान औऱ दुखी हौ गई थि। मगर घटना स्थल पऱ मौजूद रहना मेरी मजबूरी थि, आप् तौ समझ सकते हें नं डैड?मगर इस सबसे फुर्सत होकर मे सीघ्र हि पुलिस स्टेशन सें भागी भागी आपसे मिलने आईहूॅ। "
अजय सिंह केँ मन मस्तिष्क मे एकाएक मानो झनाका सां हुआ। दिमाग़ कि सारी बत्तियाॅ जल उठीं। दिमाग़ नें सही तरीके सें काम करना शुरुआत कर दिया। मन मे बिजली कि सि तेज़ी सें यह ख़याल उभरा कि 'उसकी बेटी इसतरह बिहैव क्यूं कररही हैं जैसे कहींकुछ हुआ हि न् हौ? इसके मासूम व्यवहार सें तौ यहीलग रहा हैं जैसे छानबीन करतेहुए तहखाने मे इसेकुछ नहि मिला वर्ना उसकेहाथ अगरकोई गैर कानूनी चीज़लग गई होती तोँ यह यहाॅ अपने पीछे पुलिस फोर्स लेकरतथा अपने हाॅथ मे हॅथकड़ी लेकरउसे गिरफ्तार करनेआती। मगरऐसा तौ दूरदूर तक होताहुआ दिखाई नहि देता। इसका क्याँ मतलब हौ सकता हैं?'
अजय सिंह केँ दिमाग़ मे एकाएक जैसे हज़ार तरह केँ प्रश्न खड़े होँ गए थें मगर जवाब किसी कां नहि थां उसकेपास। मन मे यह ख़याल बारबार किसी हथौड़े कि भाॅति चोंटमार रहे थें कि आख़िर क्याँ हुआ फैक्टरी कि छानबीन मे? उसकी बेटी कों तहकीकात मे उसके खिलाफ क्याँ कोईगैर कानूनी चीज़ मिली?
"क्याँ बात हैं डैड?" अपने पिता कों गहरे समुद्र मे डूबेदेख रितू नें इसबार अपने दोनों हाॅथों कि सहायता सें झिंझोड़ते हुएकहा थां__"आप् कुछ बोलते क्यूं नहि हैं? कहाॅखोए हुए हें आप्?"
"आॅ.हाॅ.तु.तुमने कुछकहा क्याँ बेटी?" अजय सिंह बुरीतरह चौंकते हुएकहा थां। एकाएक हि उसकेमन मे यह ख़याल उभरा कि 'यह क्याँ बेवकूफी कररहा हैं अजय सिंह, अपने आपको सम्हाल वर्ना तेरी हालत औऱ तेरे चेहरे कि यह हालतदेख कर तेरी बेटी कों कहीं सचमुच कुछपता नं चलजाए। ' इस ख़याल केँ द्वारा स्वयं कों समझाए जाने पऱ अजय सिंह नें जल्दी हि अपने आपको सम्हाला। औऱ फिन मुस्कुरा कर उसने अपनी बेटी कि तरफ देखा।
"मे यहकहरही हूॅडैड कि आप् कुछबोल क्यूं नहि रहे थें?" रितूकह रही थि__"पता नहि कहाॅखोए हुए थें आप्?"
"कुछ नहि बेटा। " अजय सिंह नें एक् नज़र अपनी पत्नि कि तरफ डालने केँ बाद कहा__"तुम् सुनाओ, कैसारहा पुलिस केँ रूप मे आज कां तुम्हारा पहलादिन?"
अजय सिंहयह पूॅछने सें हिचकिचाने केँ संगसंग डर भि रहा कि 'आज तहकीकात मे क्याँ हुआ?'इस लिएयह न् पूछकर कुछ औऱ हि पूॅछ बेठा थां।
"बहोत अच्छा थां डैड। " रितू नें मुस्कुरा कर कहा__"बस थोडा थक गई हूॅ। "
"अभि आदत नहि हैं नं। " सहसाइस बीच प्रतिमा कह उठी__"जब इस सबकीआदत हौ जाएगी तोँ सभीठीक होँ जाएगा। "
"आप् ठीक कहती हें माॅम। " रितू नें कहा__"धीरे-धीरे धीरे-धीरे सभीठीक हौ जाएगा। मगर अभि तौ आप् मुझे मस्त गरमा गर्म काॅफी पिलाइए प्लीज। "
"अभि बनाकर लातीहूॅ बेटी। " प्रतिमा नें हॅसकर कहा औऱ सोफे सें उठकर अंदर किचेन कि तरफचली गई।
इधरअजय सिंहसोच रहा थां कि आज कि छानबीन केँ संबंध मे उसकी बेटी नें अभि तक कोईबात क्यूं नहि कि?? वो स्वयं इस बारे मे पूॅछने सें हिचकिचा भि रहा थां औऱ डर भि रहा थां। मगरयह भि सच थां कि उसकेलिए इस सबके बारे मे जानना निहायत हि ज़रूरी थां। मगर सबसे बड़ा प्रश्न थां कि वो अपनी बेटी सें पूॅछें केसे???
"डैड, आपने अभि तक मुझसे पूछा नहि। " सहसा रितू नें अजीब सें अंदाज़ मे कहा__"कि आज फैक्टरी मे हुइ छानबीन मे क्याँ नतीजा निकला??"
अजय सिंहमन हि मन बुरीतरह चौंका भि औऱ घबरा भि गय़ा, लेकिन अपने किसी भि भाव कों चेहरे पर्र उभरने नहि दिया। स्वयं कों मजबूती सें सम्हाल कर संतुलित लहजे सें कहा__"पूॅछ कर क्याँ करूॅगा बेटी? इस सबसेकुछ होने वाला तोँ हैं नहि। क्याँ इस सबसे वोँ सभीकुछ वापसमिल जाएगा जौ जलकर खाक़ मे मिल चुका हैं?"
"बातसभी कुछमिल जाने कि नहि हैं डैड। " रितू नें कहा__"बल्कि इसबात कि हैं कि यहसभी किसने औऱ किसवजह सें किया? आपकोयह जानकर हैरानी केँ संगसंग शायद खुशी भि होगी कि फैक्टरी मे आग किसी सार्ट शर्किट कि वजह सें नहि बल्कि फैक्टरी केँ तहखाने मे किसी केँ द्वारा लगाएगए वक्त बम्ब केँ भीषण धमाके सें उत्पन्न हुइ आग सें लगी थि। "
"क् क्याँ????" अजय सिंह बुरीतरह चौंकने कां बेहतरीन नाटक किया थां फिन बोला__"यह यह क्याँ कहरही होँ तुम्?"
"यहसच हैं डैड। " रितू नें कहा__"मगर मे इसबात सें हैरान हूॅ कि इसके पहले हुइ छानबीन मे यहसभी क्यूं नहि बताया पुलिस नें अपनी रिपोर्ट मे? जबकि यहसभी बातें कोई भि साधारण ब्यक्ति जाॅच करकेबता सकता थां। यह अपने आप् मे एक् बहोत बड़ा प्रश्न हैं डैड। ख़ैर पुलिस इंक्वायरी मे इस सबका जवाबउन पुलिस आफिसर्स कों हि देना पड़ेगा जिन्होंने इसके पहले फैक्टरी कि छानबीन कि थि। मगरइस सबका जवाब आपको भि देना पड़ेगा डैड। मुझे पक्का यकीन हैं कि पुलिस द्वारा इस प्रकार कि छानबीन करके रिपोर्ट आपके कहने पर्र हि बनाई गई थि। "
अजय सिंह अवाक् सां देखता रह गय़ा अपनी बेटी कों। फिन जल्दी हि स्वयं कों सम्हालते हुए कहा__"यह सभी झूॅठ हैं बेटी। हमनेऐसी कोई रिपोर्ट बनाने केँ लिए नहि कहा। "
"आप् अपनीइस बात कों साबित नहि कर पाएंगे डैड। " रितू नें कहा__"सारे हालात इसबात कि चीखचीख कर गवाही देरहे हें कि इसके पहले कि गई छानबीन महज एक् औपचारिकता बस थि। वर्ना कोई भि पुलिस वाले अंधे नहि थें जौ उन्हें यह नं दिखता कि फैक्टरी मे लगीआग किसी केँ द्वारा लगाएगए वक्त बम्ब कि मेहरबानी थि। इसके बावजूद उन्होंने अपनी रिपोर्ट मे यही दिखाया कि फैक्टरी मे आग मात्र शार्ट शर्किट कि वजह सें लगी थि। यहाॅ पर्र कोई भि प्रश्न खड़ाकर सकता हैं डैड कि सभीकुछ स्पष्ट नज़रआते हुए भि पुलिस नें ऐसी रिपोर्ट क्यूं बनाई? इसमें पुलिस कां क्याँ मकसद थां? याँ फिन एक् हि बात होँ सकती हैं कि पुलिस कों ऐसी हि रिपोर्ट बनाने केँ लिए स्वयं आपनेकहा होँ। अगरयही सच हैं तोँ फिन यहाॅ पर्र प्रश्न खड़ा होँ जाता हैं कि आपने पुलिस कों ऐसी रिपोर्ट बनाने केँ लिए क्यूं कहा???बात यहीं पऱ ख़त्म नहि हौ जातीडैड, बल्कि ऐसी स्थिति मे फिन औऱ भि प्रश्न खड़े होने लगते हें जिनका जवाब मिलना ज़रूरी हौ जाता हैं। "
अजय सिंह कों लगा कि अभि ज़मीन फटे औऱ वो उसमें पाताल तक समाता चलाजाए। हलाॅकि रितू नें कोईतीर नहि मार लिया थां यहसभी करके क्योंकि फैक्टरी कि छानबीन अगर पहले हि पूरी ईमानदारी सें कि गई होती तौ पहले हि पुलिस कों यहसभी पताचल जाता। मगर क्योंकि ऐसाहुआ नहि थां। बल्कि अजय सिंह अपने तरीके सें रिपोर्ट बनवाकर सुकून सें बैठ गय़ा थां। वोँ भला केसेइस बात कि कल्पना कर लेता कि अगले हि दिन उसकी अपनी बेटी इन गड़े मुर्दों कों निकाल कर उसकी हालत कों खराब करना शुरुआत कर देगी।
"आपकी ख़ामोशी इसबात कां सबूत हैं डैड कि आप् हि नें पुलिस कों ऐसी रिपोर्ट बनाने कों कहा थां। " रितू नें कहा__"क्याँ आप् बताने कां कष्ट करेंगे कि आपनेऐसा क्यूं किया?"
अजय सिंह क्योंकि जानता थां कि इस संबंध मे अब झूॅठ बोलने कां कोई मतलब नहि हैं इसलिए सच बताना हि बेहतर समझा उसने।
"यह सच हैं बेटी कि मेरे हि कहने पर्र पुलिस नें वैसी रिपोर्ट बनाई थि। " अजय सिंह नें गंभीरता सें कहा__"मगर यहसभी करना मेरी मजबूरी थि बेटी क्योंकि मे इस सबको औऱ ज़्यादा उछालना नहि चाहता थां। मे नहि चाहता थां बेटी कि मेरी इज्जत कां अब औऱ कचरा होँ। सभीकुछ तोँ जल हि गय़ा थां, कुछ मिलना तोँ थां नहि, इसलिए कम सें कम अपनी इज्जत कों तोँ नीलाम होने सें बचा लेता। इसी वजह सें बेटी.मात्र इसीवजह सें मैंने पुलिस अधिकारियों सें मिन्नतें कर करकेऐसी रिपोर्ट बनाने कों कहा थां। "
रितू देखती रही अपने पिता केँ चेहरे कि तरफ। अंदाज़ ऐसा थां जैसेपरख रही हौ कि उसके बाप कि बातों मे कितनी सच्चाई हैं? जबकि अपनी बेटी कों इसतरह अपनीतरफ देखते हुएदेख अजय सिंह केँ दिल कि धड़कनें तेज़ होँ गईं थि।
"वाउडैड वाउ!" रितू नें अजीबभाव सें कहा__"आपने तौ यहसभी करके कमाल हि कर दिया। मतलब आपनेयह भि नहि सोचा कि अगरइस सबकी पुलिस द्वारा बारीकी सें तहकीकात करवाई जाए तोँ इससे आपकोकुछ हासिल भि हौ सकता हैं?"
तभी प्रतिमा हाॅथ मे ट्रेलिए ड्राइंगरूम मे दाखिल हुइ। उसने एक् एक् कप सबको पकड़ाया औऱ स्वयं भि एक् कप लेकर वहीं सोफे पर्र बैठ गई।
"इससेभला क्याँ हासिल होता बेटी?" अजय सिंह नें कहा थां।
"छानबीन सें यह तोँ पताचल हि गय़ा हैं डैड कि फैक्टरी मे आगसमय बम्ब केँ फटने सें लगी थि। " रितू नें कप मे भरी काॅफी कां एक् सिप लेकर कहा__"अब यहपता लगाना पुलिस कां काम हैं कि फैक्टरी मे समय बम्ब किसने स्लिम किया थां? आपके अनुसार उसदिन औऱ रात अवकाश केँ चलते फैक्टरी बंद थि तथा बाहर् सें फैक्टरी मे ताला भि लगा थां। अब सोचने वालीबात हैं कि कोई बाहरी व्यक्ति केसेयह सभीकर सकता हैं? क्योंकि सबसे पहले तौ उसे फैक्टरी केँ अंदर पहुॅच पाना हि नामुमकिन थां, कारण फैक्टरी मे जौ तालालगा थां वोँ कोई साधारण झूलने वाला ताला नहि थां जिसे धीरे-धीरे तोड़कर फैक्टरी अंदर जायाजा सके, बल्कि गेट पर्र जोँ ताला थां वोँ लोहे वालेगेट केँ अंदर फिक्स थां। "
"ताला खोलना कोई बड़ीबात याँ कोई समस्या नहि हैं बेटी। " सहसा प्रतिमा नें हस्ताक्षेप किया__"आज केँ वक्त मे एक् सें बढ़कर एक् खलीफा हें जौ पलक झपकते हि कोई भि तालाखोल भि सकते हें औऱ उसे तोड़ भि सकते हें। "
"यूआर अब्सोल्यूटली राइट माॅम। " रितू नें मुस्कुरा कर कहा__"पऱ उस स्थिति मे यह संभव नहि हैं जबकि फैक्टरी केँ गेट पर्र दरबान मौजूद हों। मैंने इसकी जाॅच कि हैं औऱ पताचला हैं कि गेट पर्र दरबान मौजूद थां। अब प्रश्न यह हैं कि दरबान कि मौजूदगी मे कोई बाहरी व्यक्ति अंदर केसेजा सकता हैं?"
"इसका मतलब तोँ यहीहुआ कि गेट पऱ तैनात दरबान झूॅठबोल रहा हैं। " प्रतिमा नें कहा__"याँ फिनऐसा भि हौ सकता हैं कि फैक्टरी कां हि कोई स्टाफ मेंबर फैक्टरी केँ अंदर गय़ा हौ। स्टाफ केँ अंदर जाने पऱ गेट मे मौजूद दरबान कों कोई ऐतराज़ नहि हौ सकता थां। "
"अगरकोई स्टाफ कां हि व्यक्ति फैक्टरी केँ अंदर गय़ा थां। " रितू नें कहा__"तौ दरबान कों इसबात कि जानकारी पुलिस केँ पूछने पऱ देनी चाहिए थि। मगरइस संबंध मे दरबान कां हरबार यही कहना हैं कि रातकोई भि ब्यक्ति फैक्टरी केँ अंदर नहि गय़ा। "
"बड़ी हैरत कि बात हैं यह। " प्रतिमा कह उठी__"जब फैक्टरी केँ अंदरकोई गय़ा हि नहि तोँ फैक्टरी केँ अंदर, वोँ भि तहखाने मे समय बम्ब क्याँ कोईभूत लगाकर चला गय़ा थां???"
"यही तौ सोचने वालीबात हैं माॅम। " रितू नें हॅसकर कहा__"खैर, पताचल हि जाएगा देर सवेर हि सही। मे तौ डैड सें यहकहरही थि कि उन्होंने इस सबके बारे मे जानना ज़रूरी क्यूं नहि समझा? आखिरयह जानना तौ ज़रूरी हि थां कि किसने यहसभी किया?"
अजय सिंह केँ मन मे केवलयही प्रश्न चकरारहे थें, औऱ वोँ यह थें कि 'तहखाने मे उसकी बेटी कों औऱ क्याँ मिला? क्याँ उसके हाॅथकोई ऐसी चीज़लगी जिससे उसकी असलियत रितू कों पताचल सके?इस बारे मे रितू नें अभि तक कोईबात नहि कि, इसका मतलबउसे कुछ भि नहि मिला। मगर ऐसा केसे हौ सकता हैं???? तहखाने मे तौ गैर काननी वस्तुओं कां अच्छा खासा स्टाक थां। क्याँ वो सभी भि आग मे जल गय़ा हैं??? कहींऐसा तौ नहि कि रितु कों सभीपता चल गय़ा हौ लेकिन इससमय वो अंजान बनी होने कां नाटककर रही हौ? हे ईश्वर! केसेपता चलेइस सबके बारे मे??? मेरेगले मे तौ अभि भि जैसेकोई तलवार लटकरही हैं।
भाग हाज़िर हैं दोस्तो.
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,,,,,
Nice update. Ritu too ek bahut anubhabi police officer k prakaar baat krr rahi h. Uss factory say Ritu ko koy aisa saboot mila kee nehi joo uski baap k khilaf hu wo abi bi suspense haen. Keep going. for the update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Waaah bro speechless update i have no words.
Ritu ne apne baap की haalat kharaab की huyi h.
Ritu ko yeh bi ptaa chl chuka h pehle की chhaanbeen mai उसके baap ne hi report banwaayi thi.
Tahkhane mai ritu ko क्या मिला yeh abi suspence mai h.
Factory mai bomb Viraj ne lagaya hu sakta h.और usne hi yeh case ritu के hatho mai dilwaya hoga.अब woh ritu के hatho hi apne dushmani की hawa tight krr raha h.khud araam से baith krr tamasha dekh raha hoga.waaah
Ajay singh sala chutiya h joo yeh samajh raha h की viraj की कोई aukaat hi नहीं hu sakti.us bahen के laude ko क्या ptaa की उसकी gand उसका hi bhateeja tel laga krr baja raha h.hahaha
Writing skill jabardast h bro aapka.padhne से aesa lagta h जैसे mein कोई film dekh raha ho
And now waiting for the next
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