♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
jaberdast update bhaii
ritu के questions ne too ajay की halat karab krr di
police andaj m questions karke halat karab krr di
sabke transfer ekdam kaise huee क्या ismein hero kaa role hain
ajay fasna चाहिए aur ritu hakikat pta lagna चाहिए
partima kaa कुछ kah nhii sakte baddi hii chalak lomdi hain
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
भाग.《 17 》
अब तक.
"देखरही हूॅ कि आपके चेहरे पर्र उभरते हुए अनगिनत भावकिस बात कि गवाही देरहे हें?" रितू नें अजीब सें भाव सें कहा।
"क क्याँ मतलब??"अजय सिंह बुरीतरह चौंका थां।
"जाने दीजिए। " रितू नें कहा__"देखिए फारेंसिक डिपार्टमेंट वाले भि आँ गए। आइए फैक्टरी केँ अंदर चलते हें। "
अजय सिंह एकाएक अंदर हि अंदर बुरीतरह घबरा सां गय़ा। उसे तौ लगनेलगा थां कि बातें अब तक उसके पक्ष मे हि हें औऱ इतनी पूछताॅछ केँ बाद कार्यवाही बंदकर दि जाएगी। मगरउसे अब महसूस हुआ कि यहसभी तौ महज एक् औपचारिक पूछताॅछ थि असली छानबीन तोँ अब शुरुआत होगी।
फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट कि टीम आँ चुकी थि तथा खोजी दस्ता भि। गाड़ियों सें निकलकर सभी बाहर् आँ गए। अजय सिंहउस समय औऱ बुरीतरह चौंका जब गाड़ियों केँ अंदर सें कुछ कुत्ते बाहर् निकले। अजय सिंह कों समझते देर नं लगी कि यह कुत्ते इस सबकी छानबीन मे उन सबकीमदद केँ लिए हि हें।
समयभर मे हि अजय सिंह कि हालत ख़राब होँ गई। इस सबके बारे मे उसने सपने तक मे न् सोचा थां। आज पहलीबार उसेलगा कि अपनी बेटी रितू कों पैदा करके उसने बहोत बड़ीभूल कि थि।
अबआगे.
इंस्पेक्टर रितू केँ निर्देशानुसार पुलिस औऱ बाॅकी विभाग कि टीम्स फैक्टरी कि तरफबढ़ चली, औऱ संग हि बढ़चली थि अजय सिंह कि हृदयगति। हलाॅकि उसकेसंग आए बाॅकी सभी नार्मल थें। प्रतिमा औऱ अभय केँ चेहरे पर्र गंभीरता केँ भाव अवश्य थें लेकिन यह दोनोअजय सिंह कि तरह अपनी हालत सें लाचार याँ परेशान नहि थें।
छानबीन करनेआई बाॅकी सभी टीमों केँ पीछे पीछेअजय, प्रतिमा वअभय भि चलरहे थें लेकिन अजय सिंह केँ कदम बड़ी मुश्किल सें उठरहे थें।
"सभीठीक होँ जाएगा अजय। " सहसा प्रतिमा नें अजय कि हालतदेख उसे दिलाशा देने कि गरज सें कहा__"अब तोँ हमारी बेटी नें स्वयं हि इसकेस कों अपने हाॅथ मे लें लिया हैं। मुझे पूरा यकीन हैं कि वोँ सभीकुछ पताकर लेगी। हमारी फैक्टरी मे आग लगाने केँ पीछेतथा हमें बरबाद करने केँ पीछेजिस किसी कां भि हाॅथ होगा वो उसे अवश्य पकड़ लेगी। तुम् बस स्वयं कों सम्हालो औऱ अपनीऐसी शकल नं बनाएरखो। "
"भाभी बिलकुल ठीककह रही हें बड़े भाई। " अभय नें कहा__"आपको अबइसतरह परेशान होने कि कोई ज़रूरत नहि हैं। यकीनन रितू बेटी केँ चलतेसभी कुछठीक हौ जाएगा। मुझे अपनी भतीजी पर्र गर्व हैं कि उसने पुलिस फोर्स ज्वाइन किया औऱ ज्वाइन करते हि उसे अपनी हि फैक्टरी मे लगीआग कां यहकेस मिल गय़ा। मुझे उसकी काबिलियत पर्र पूरा भरोसा हैं। आप् बेफिक्र होँ जाइए भाई.इवरीथिंग विलवी आलराइट। "
अजय सिंहइन दोनो कों भला क्याँ कहता??? वो भला क्याँ कहता कि वो किसबात सें परेशान हैं? वो भला क्याँ कहता कि जिस भतीजी पऱ वो गर्वकर रहा हैं उसकीउसी भतीजी कि वजह सें आज वो लम्हा लम्हा इस हालत सें मराजा रहा हैं। हालात नें कितना बेबसव लाचार बना दिया थां उसे कि सक्षम होने केँ बावजूद भि वो कुछ नहि कर सकता थां। हिन्दू धर्म केँ जितने भि देवी देवताओं कां उसेपता थां उसनेउन सबकोमन हि मनयाद करके उनसेयह फरियाद कर डाली थि कि यहकेस तथायह छानबीन बस यहीं पऱ रुकजाए मगरऐसा होताउसे अब तक नज़र नहि आया थां। इतना बेबसतथा इतना परेशान आज सें पहले वो अपनी ज़िन्दगी मे कभी नं हुआ थां। उसने तोँ यह तक सोच लिया थां कि अगरयह छानबीन रुकजाए तथायह केसबंद हौ जाए तौ वो अब सें इसगैर कानूनी काम कों करने सें हमेशा केँ लिए तौबाकर लेगा। मगर यह भि सच हैं नं दोस्तो कि जब हम् किसी चीज़ केँ बीजबो चुके होते हें तोँ फिनबाद मे हमेंउस बीज केँ द्वारा उत्पन्न हुई फसल कों काटना भि पड़ता हैं याँ उसबीज सें उगआएफल कों खानां भि पड़ता हैं। यही नियति बन गई थि अजय सिंह कि, मगरअब वो अपने हि द्वारा बोयेहुए बीज सें उत्पन्न हुएफल कों खानां नहि चाहता थां।
उधर फैक्टरी केँ इंट्री गेट पऱ लगे ताले कों पुलिस केँ एक् हवलदार नें अपनीजेब सें चाभी निकाल कर खोला। ताला खोलने केँ बाद भारी भरकम लोहे केँ गेट कों दो व्यक्ति कि सहायता सें खोला गय़ा। गेट केँ खुलते हि सभी अंदर कि तरफबढ़ गए। पुलिस केँ संगआए खोजी कुत्ते भि एक् पुलिस वाले केँ हाथ मे थमी जंजीर केँ सहारे फैक्टरी केँ अंदरचले गए। यह लिखने कि आवश्यकता नहि कि इन सबके पीछेअजय, प्रतिमा वअभय भि अंदरचले गए।
यह एक् बहोत बड़ा फार्म हाउसहुआ करता थां पहले। अजय सिंह नें जबइस बिजनेस कि शुरुआत कि थि तौ किसी दूसरे सेठ कि वर्षों सें बंद कपड़ा फैक्टरी कों सस्ते दामों मे खरीदा थां। (यहसभी बातें कथा केँ पहले याँ दूसरे भाग मे बताईजा चुकी हें) उस वक्तयह कपड़ा फैक्टरी शहर केँ बीच हि बनी हुइ थि। कुछ सालों बादजब अजय सिंह कि इस बिजनेस सें अच्छे खासे मुनाफे केँ रूप मे तरक्की हुइ तोँ उसनेइस फैक्टरी कों नये सिरे सें तथानई मशीनों केँ संग शुरुआत करने कां विचार किया। अजय सिंह क्योंकि बहोत हि लालची व महत्वाकांक्षी व्यक्ति थां, औऱ बढ़ती आय केँ संग उसकी बुरी आदतों मे भि इज़ाफा हुआइस लिए पैसे केँ लिए वो उन रास्तों कों भि अपना लिया जिसेगैर कानूनी कहा जाता हैं। इस रास्ते मे उसकेकई अपनेगैर कानूनी लोग भि थें। लेकिन गैर कानूनी काम मे रिश्क बहोत थां तथाशहर केँ बीचउस छोटी सि फैक्टरी मे इसकाम कों अंजाम देने मे आसानी नहि होती थि। कभी भि लोगों केँ बीच स्वयं कि असलियत सामने आँ जाने कां खतराबना रहता थां। इसलिए उसने बहोत सोचसमझ करशहर सें बाहर् एक् बहोत बड़ी ज़मीन ख़रीदी तथा वहाॅ पर्र इसनेनये तरीके सें फैक्टरी कां निर्माण किया। फैक्टरी बहुत बड़ी थि तथा उसके नीचे एक् बड़ा बेसमेंट भि बनवाया गय़ा थां जौ मात्र गैर कानूनी चीज़ों केँ उपयोग मे हि आता थां। यहाॅ पऱ उसे किसी चीज़ कां खतरा नहि थां। फैक्टरी मे मजदूरों कों हप्ते मे एक् दिन अवकाश देने केँ पीछे भि उसका एक् मकसद थां। वोँ मकसदयह थां कि अवकाश वालेदिन हि वो स्वतंत्र रूप सें अपनेगैर कानूनी धंधे कों चलाता थां। जिसके बारे मे कभी किसी कों भनक तक न् लगी थि। फैक्टरी कों बहोत सोचसमझ कर हि बनवाया गय़ा थां। फैक्टरी केँ अंदर मात्र मशीनें थि जहाॅ पर्र मजदूर काम करते थें, जबकि फैक्टरी केँ आला अफसर याँ बाॅकी स्टाफ फैक्टरी सें दूरकुछ फाॅसले पऱ बने एक् बड़े सें आफिस मे होते थें।
अजय सिंह नें कदाचित ख़्वाब मे भि न् सोचा थां कि कभीऐसा भि वक़्त उसके जिंदगी मे आँ जाएगा जब उसकीइस विसाल फैक्टरी मे आगलग जाएगी औऱ इस सबकी छानबीन स्वयं उसकी हि बेटी पुलिस इंस्पेक्टर बनकर करेगी। कानून कां डरउसे कभी नहि थां क्योंकि उसने कानून केँ नुमाइंदों कों अपनेवश मे कर लिया थां। हर महीने वो अच्छी खासीरकम पुलिस केँ आला अफसरों तक पहुॅचवा देता थां। उसके मंत्री तक सें अच्छे संबंध थें इसलिए उसेइस धंधे मे किसी कां कोईडर नहि थां। मगर होनी कों कौनटाल सकता थां भला? होनी तौ अटल होती हैं, बिना बताएतथा बिना किसी सूचना केँ वोँ अपनाकाम कर डालती हैं। यहीअजय सिंह केँ संगहुआ थां।
ख़ैरयह सभी तौ बीती बातें हें दोस्तो, आइए हम् सभी वर्तमान कि तरफ चलते हें औऱ देखते हें कि आगे क्याँ होँ रहा हैं?
फैक्टरी केँ अंदर कां नज़ारा हि कुछअलग थां। जैसा कि आप् सभी जानते हें कि फैक्टरी मे भीषणआग लगी हुईँ थि जिसमें सभीकुछ जलकर खाक़ मे मिल चुका थां। अंदरहर चीज़ कोयला बन चुकी थि। हर स्थान पानी मे सनी हुईँ राखतथा टूटेहुए बहोत सें टुकड़े पड़े थें। कुछसमय केँ लिए तौ रितू कों भि समझ नं आया कि इसराख मे वो क्याँ तलाशकरे? लेकिन कुछ तोँ करना हि थां, केस रिओपेन हुआ थां। इसलिए बिना किसी नतीजे केँ वो बंद नहि हौ सकता थां। ऊपर सें आदेश थां कि छानबीन अच्छे सें होनी चाहिए।
पुलिस केँ खोजी कुत्ते तथा फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट केँ लोग अपने अपनेकाम मे लगगए। स्वयं रितू भि वहाॅ कि हर चीज़ कों बारीकी सें देखदेख कर जाॅच करनेलगी। जबकि इधरअजय, प्रतिमा वअभय चुपचाप उन सबकी कार्यप्रणाली कों देखते रहे।
बड़ी बड़ी मशीनों पऱ जलेहुए कपड़ों कि राखतथा टुकड़े लिपटे हुए थें। कहीं कहीं पर्र पिघले हुए शीशेएवं प्लास्टिक नज़र आँ रहे थें। अजय सिंहयह सभी होने केँ बाद पहलीबार यहसभी ध्यान सें देखरहा थां तथासंग हि अंदर हि अंदर दुखी भि हौ रहा थां। कुछ भि हौ आखिर उसकी मेहनत कां रुपया थां वो, फिन चाहेगैर कानूनी वाला हौ याँ फिन सच्चाई वाला।
"मैडम, यहाॅ पऱ कुछ हैं। " सहसा एक् हवलदार रितू कों दूर सें हि चिल्लाते हुएकहा।
रितु केँ संगसंग सबकेकान खड़े हौ गए। अजय सिंह कि बढ़ी हुइ धड़कन मानों उसे रुकती हुइ प्रतीत हुइ। चेहरे पऱ जल्दी हि ढेर सारा पसीना उभरआया, तथा चेहरा भयव घबराहट कि वजह सें पीला पड़ता चला गय़ा। उसने जल्द सें स्वयं कों सम्हाला। अपने दाहिने हाॅथ मे लिए रुमाल सें उसने जल्दी हि अपने चेहरे कां पसीना पोंछा औऱ सरसरी तौर पर्र इधरउधर देखा। प्रतिमा उसेदेख कर जल्दी हि उसके लगभग गई तथा हौले सें पूछा__"क्याँ बात हैं अजय, तुम् इतना परेशान औऱ घबराए हुए क्यूं लगरहे होँ?"
"म मे क कहाॅ परेशान हूॅ?"अजय सिंह हकलाते हुए बोला__"मे ठीकहूॅ? ऐसा क्यूं लगता हैं तुम्हें कि मे परेशान व घबराया हुआहूॅ?"
प्रतिमा नें उसे बड़े ग़ौर सें देखा, फिन कहा__"मुझे ऐसा क्यूं लगता हैं अजय कि जैसे तुम् मुझसे कुछ छुपारहे हौ? याँ फिनऐसा कि तुम् किसीबात सें इसलिए घबरारहे हौ कि किसी कों वोँ बातपता न् चलजाए। "
अजय सिंह हड़बड़ा गय़ा, आॅखें फाड़े प्रतिमा कों देखने लगा। मन मे विचार उभरा 'बेटी क्याँ कम थि जौ अब उसकीमाॅ भि मेरीजान लेने पर्र उतारू होँ गई हैं'।
"ऐसे क्यूं देखरहे हौ मुझे?" प्रतिमा नें कहा__"क्याँ मैंने कुछ ग़लतकह दिया हैं?"
"देखो प्रतिमा। " अजय सिंह नें स्वयं कों सम्हाल कर कहा__"मे इस टाइम किसी सें कुछ नहि कहना चाहता, इसलिए बेहतर होगा कि तुम् भि मुझसे कोई प्रश्न जवाब नं करो। "
"मे तुम्हारी पत्नि हूॅअजय। " प्रतिमा नें एकाएक अधीरता सें कहा__"तुम्हें इसतरह तकलीफ़ कि हालत मे नहि देख सकती। तुम् जानते होँ कि हरकाम मे मे तुम्हारे संगहूॅ, फिन चाहे वोँ काम कैसा भि क्यूं न् हौ। तुम्हारी खुशी केँ लिएहर वोँ कामकर जातीहूॅ जिसे करने कां तुम् मुझसे कहते होँ। मे यह भि जानती हूॅ कि तुम् मुझसे कोई भि बात नहि छुपाते फिनऐसी क्याँ बात हौ गई हैं जिसे तुम् मुझसे छुपाकर स्वयं अंदर हि अंदर घुटेजा रहे होँ?"
"ऐसीकोई बात नहि हैं। " अजय सिंहयह सोचकर घबराया जारहा थां कि कहींकोई यहसभी बातें सुन नं लें, इसलिए वो बोला__"अब चुप हौ जाओ प्लीज। "
"अगरऐसी कोईबात नहि हैं तौ यहीबात तुम् मेरेसिर पर्र हाॅथरख कर बोलो। " प्रतिमा नें कहनेसंग हि अजय सिंह कां एक् हाॅथ पकड़कर अपनेसिर पर्र रख लिया।
"यह क्याँ पागलपन हैं दोस्त?" अजय सिंह नें जल्दी हि प्रतिमा केँ सिर सें अपना हाॅथ एक् झटके मे खींचकर थोड़ी ऊॅची आवाज़ मे कहा थां। उसकी आवाज़ सुनकर अभय कां ध्यान उनकीतरफ गय़ा तौ वो सीघ्र हि उनकेपास आकर ब्याकुलता सें बोला__"क्याँ हुआ भाई? कुछ तकलीफ़ हैं क्याँ?"
"न् नहि छोटे। "अजय सिंहमन हि मन झुंझला उठा थां लेकिन प्रत्यक्ष मे उसनेयही कहा__"ऐसी कोईबात नहि हैं। "
अभय नें उसके चेहरे कि तरफकुछ लम्हा देखाफिन वो वापस अपनी स्थान पऱ आकर खड़ा होँ गय़ा। जबकि अभय केँ जाते हि अजय सिंह नें प्रतिमा कि तरफदेख कर कहा__"फार गाड शेक.अब कुछमत केहना। "
"यह तुम् बिलकुल भि अच्छा नहि कररहे होँ अजय। " प्रतिमा नें कहा__"अगर कोईबात हैं तौ तुम्हें मुझसे बेझिझक बता देना चाहिए, होँ सकता हैं कि मे तुम्हारी कोई सहायता कर सकूॅ। "
"अगर कोईबात हैं भि तौ। " अजय सिंह नें गहरी साॅस ली__"तोँ इससमय नहि बता सकता, बट बिलीव मी तुम्हें सभीकुछ अवश्य बताऊॅगा। अबजाओ यहाॅ सें औऱ मुझे अकेला मेरेहाल पऱ छोंड़ दो। "
प्रतिमा नें कुछदेर अजय कि आंखों मे देखा औऱ फिनपलट करअभय केँ पास आँ गई। उसकेमन मे हज़ारों विचार किसी बिच्छू कि तरहडंक मारमार करउछल कूदकर रहे थें।
उधर हवलदार केँ चिल्लाने पर्र रितू तेज़ी सें उसके लगभग पहुॅची। रितू केँ आते हि हवलदार नें सामने कि तरफ इशारा किया। रितू नें हवलदार कि बताई हुइ स्थान कों देखा तोँ चौंक गई। दरअसल पिघले हुए प्लास्टिक केँ नीचेकोई चीज़ थि लालरंग कि। रितू फर्स पर्र बैठकर उसे ध्यान सें देखने लगी। अपने हाॅथों मे ग्लव्स पहनकर उसनेउस लालरंग कि चीज़ कों उठा लिया। अभि वो उसे ध्यान सें देख हि रही थि कि फाॅरेंसिक टीम कां एक् ब्यक्ति उसके नज़दीक आकर बोला__"मैडम, यहाॅ पर्र एक् बेसमेंट भि हैं। "
"क्याँ??" रितू चौंकी।
"यस मैडम। "उस ब्यक्ति नें कहा__"खोजी कुत्ते केँ द्वारा पताचला हैं। "
" चलो दिखाओ। " रितू जल्दी हि उठकरचल दि। कुछदेर मे हि वोँ ब्यक्ति रितू कों लेकरउस स्थान पहुॅचा। रितू नें देखा सचमुच वोँ तहखाना हि थां। लेकिन वो यहदेख कर चौंकी कि वो अस्त ब्यस्त हुआलग रहा थां जैसे किसी चीज़ सें उसे उड़ाया गय़ा हौ। उसे जल्दी हि अपने हाॅथ मे ली हुइ चीज़ कां खयालआया। उसने अपने हाॅथ मे ली हुइ चीज़ कों उस ब्यक्ति कों दिखाकर पूछा__"इस चीज़ कों देखो औऱ बताओयह क्याँ हैं?"
"अजयययययय। " अचानक हि एक् ज़ोरदार चीख फिज़ा कों चीरती हुई सबके कानों सें टकराई।
चीख बाहर् सें आई थि, रितू केँ संगसंग सबने सुना लेकिन रितू बाहर् कि तरफयह कहकर दौड़ पड़ी कि__"माॅम। "
यकीनन यहचीख प्रतिमा कि हि थि। रितू नें बाहर् आकर देखा उसकीमाॅ औऱ अभय चाचा उसकेडैड केँ पास अजीब हालत मे बैठे थें। अजय सिंह जमीन मे पड़ा थां। अभय नें जल्दी हि उसे अपनी गोंद मे लिटा लिया थां।
"माॅम। " रितू लगभग पहुॅचते हि बोलीं__"यह क्याँ हुआ?डैड इसतरह जमीन मे केसे?"
"पता नहि बेटा अचानक हि खड़े खड़े धड़ाम सें गिरगए। " प्रतिमा नें रोतेहुए कहा__"शायद फैक्टरी कि यह हालतदेख इन्हें गहरा सदमालगा हैं जिसके चलतेयह चक्कर खाकरगिर गए हें। "
अजय सिंह पानी सें सनीराख पऱ गिरा थां। जमीन मे हरतरफ छोटे बड़े पत्थर भि पड़े थें जोँ अजय सिंह केँ सिर पऱ लगे थें औऱ उसकेसिर सें खून बहनेलगा थां।
"इन्हें हास्पिटल लेकर जानां पड़ेगा रितू बेटा। " अभय नें कहने केँ संग हि अजय सिंह कों दोनो हाथों सें पकड़कर उठा लिया औऱ तेज़ कदमों केँ संग लोहें वालेगेट सें बाहर् निकल गय़ा।
"मे भि उनकेसंग हास्पिटल जारही हूं बेटी। " प्रतिमा नें कहा__"तुम्हारी तरफ अपनी ड्यूटी करना हैं तौ कर याँ तुँ भि अपनेडैड केँ संगचल। "
"साॅरी माॅम। " रितू कि आॅख मे आॅसू आँ गए__"इस वक़्त मे आनड्यूटी पर्र हूॅ औऱ केस केँ सिलसिले मे यहाॅ अपनी टीम्स केँ संगहूॅ इसलिए मे डैड केँ संग नहि जा सकती। मगर डैड सें कहना कि मुझे उनकीइस हालत सें बहोत तकलीफ होँ रही हैं। "
"अच्छी बात हैं। " प्रतिमा नें कहा औऱ बाहर् कि तरफदौड पड़ी। जबकि अपने आॅसू पोंछते हुए रितू पलटी औऱ फैक्टरी केँ अंदर कि तरफबढ़ गई।
"मैडमयह तौ किसीसमय बम्ब केँ टुकड़े जैसा लगता हैं। " रितू केँ आते हि फारेंसिक टीम केँ उस व्यक्ति नें कहा।
"क्याँ???" रितूउछल पड़ी__"यह क्याँ कहरहे हें आप्??"
"जी पक्के तौर पर्र तौ नहि कह सकतामगर अधिकतर संभावना यही हैं। " उस व्यक्ति नें कहा__"औऱ अगरइस संभावना कों सचमान लियाजाय तोँ ऐसा भि लगता हैं कि किसीसमय बम्ब द्वारा हि इस बेसमेंट कों उड़ाया गय़ा हैं। बेसमेंट कि हालतइस बात कां सबूत हैं मैडम। "
रितू कों उस व्यक्ति कि बात मे सच्चाई केँ ढेर सारेअंश महसूस हुए। क्योकि बेसमेंट कि हालत सचमुच ऐसी थि जैसेउसे बम्ब केँ द्वारा उड़ाया गय़ा हौ।
"अगरऐसा हैं तौ। " रितू नें कहा__"यह साबित हौ गय़ा कि फैक्टरी मे लगीआग महज सार्ट शर्टिक सें नहि बल्कि किसी केँ द्वारा बम्ब सें लगाई गई। "
"बिलकुल। " उस व्यक्ति नें कहा।
"मतलबसाफ हैं कि किसी नें वक्त बम्ब कों तहखाने मे स्लिम किया। " रितूकह रही थि__"औऱ वोँ बम्ब अपने निर्धारित वक्त पर्र फट गय़ा। बम्ब केँ फटते हि बेसमेंट उड़ गय़ा औऱ इसकेसंग हि उसके अंदर सें तेज़ी सें आग कां झोंका बाहर् आकर यहाॅ चारोतरफ फैले कपड़ों औऱ मशीनों सें टकराया। कपड़ों पर्र लगीआग नें तेज़ी सें अपनाकाम किया औऱ देखते देखते सारी फैक्टरी मे आग नें अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया। "
"निःसंदेह। " व्यक्ति नें कहा__"औऱ क्योंकि फैक्टरी बाहर् सें अवकाश केँ चलतेबंद थि इसलिए जब तक किसी कों पता चलतातब तक आग नें उग्ररूप धारणकर सबकुछ बरबाद कर दिया। "
"बेसमेंट केँ अंदर कि क्याँ पोजीशन हैं?" रितू नें कहा__"अगर अंदर जाने लायक हैं तोँ चलकर जाॅच शुरुआत करते हें। देखते हें औऱ क्याँ पता चलता हैं?"
कहने केँ संग हि रितू औऱ वोँ व्यक्ति बेसमेंट केँ अंदर कि तरफ देखने लगे। बेसमेंट केँ अंदर पुलिस औऱ फाॅरेंसिक केँ कुछलोग थें। रितू भि उनकेबीच पहुॅच गई।
उधरअजय सिंह कों आनन फानन मे अभय नें गाड़ी मे पिछली सीट पऱ प्रतिमा कि गोंद मे लिटाया औऱ स्वयं ड्राइविंग सीट पर्र बैठकर गाड़ी स्टार्ट कि। करीबबीस मिनटबाद वोँ सभी हास्पिटल मे थें।
अजय सिंह कों जल्दी हि एक् रूम मे लें जाया गय़ा औऱ डाक्टर नें उसका चेकअप शुरुआत कर दिया।
एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो.
मुआफ़ करना, एक् बारफिन सें कुछसोच कर एपसोड कों यहीं पऱ विराम दे दिया हैं मैंने।
आप् सबके सामने कुछ प्रश्न भि तौ छोंड़ना हैं यारो.
क्याँ हुआ थां अजय सिंह कों???
अजय सिंहसच मे सदमें कि वजह सें चक्कर खाकर गिरा थां याँ इसमें भि उसकीकोई चाल थि???
इंस्पेक्टर रितू कों बेसमेंट मे क्याँ क्याँ मिला होगा???
क्याँ रितू केँ सामने उसके बाप कां गैर कानूनी कालासच आँ पाया याँ नहि?????
इसकेस मे क्याँ नतीजा निकलेगा????
क्याँ फैक्टरी मे आग लगने कि सच्चाई सामने आई औऱ अगरआई तोँ क्याँ यहपता चला कि किसने यहसभी किया????
अजय सिंहअब क्याँ करेगा????
आप् लोगों सें शिकायत हैं कि आप् लोग अपनीराय याँ अपनीबात खुलकर तथादिल सें नहि देते हें। जबकि हर एपसोड मे मे बसयही उम्मीद करके बैठा होताहूॅ। ख़ैर जाने दीजिए, हाॅ नहि तोँ.!!
Nice Update bhaiio Ritu ko yeh too pta lag gya kee yha bomb lga huaa thaa halanki Abii bhii suspens bna huaa hain kee ritu pta lagega kee nhii
Excellent kahani. Superbly written. Padhne say aisa lag raha h jaesa samne koy movie chl raha hu. Keep it up. for such a fabulous kahani. Waiting for more
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Waah bro speechless update.
Aapne abi tak ajay singh की jan ko उसके halak mai atka krr rakkha hua h hahahaha
Ritu ko factory के andar chhanbeen mai bomb kaa tukda मिला और yeh ptaa chala की kisi के dwara bomb laga krr factory mai agni lagaayi gai
Basement mai bi pahuch gaye ritu अब dekhe waha क्या milta h use.
Ajay singh ko achanak क्या hua jiski vajah से woh hospital pahuch गया h??
Bro aapke diye gaye questions kaa क्या jawaab du kuchh samajh नहीं aa raha.बहुत suspence h abi.kuchh bi hu sakta h
So waiting for the next :biggboss:
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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