♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
iss faisle के liye mai apka abhari ho bhay dill ❤️ chota mat karo bhay pls kahani continue kare aur ha अगर मेरे बात से बुरा lage honge क्योंकि mene बात hi ayese की ti की kisi ko bhi बुरा lagta hi h उसके liye हाथ jodke aapse maafi mangta ho iam realy very sorry
आप् सबका प्रेम हि ऐसा हैं भइया कि मुझेइस प्रेम सें हारना हि थां,,, औऱ धन्यवाद आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Superb awesome mind blowing update bhay, bahut achcha chl cala hey Viraj ney, yaar bich mey bahut emotional kardiya, और yeh sala ajay charo tarf sey nakami milraha hey phir bi hawas mey dubkar aapni beti की pichey para hey। dekhtey hey अब Ruchi kaa क्या hotha hey और Avay ke sath बात chit karkey Viraj kaa क्या reaction hotha hey। mujhe lagta hey chachi ko bi mumbai ley ana chaiye, dekhtey hey agey क्या hotha hey
keep it up and as always waiting for
The best thing iss that you are back and above all negatives. The second best thing iss this update. lekin the worst thing iss that we have too wait for so long for updates of such a fantastic kahani. Keep rocking bro.
awesome faadu update bhay mushje lagta hi sale ko ek or jatka Dena chaiye drugs Wala sab buddhi joo sex mein lag rah hi woh khojne mein lagega or yeh vidhi kaa character kaha see aagaya hero too bdla lene k bare mein sochna rah thaa
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 27 》
अब तक,,,,,,,
"अच्छी बात हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें ठंडे स्वर मे कहा__"अब तुम् कुछ नहि करोगी। जोँ भि करुॅगा अब मे हि करूॅगा। "
"नं नहि नहि अजय। " प्रतिमा बुरीतरह घबरा गई, बोलीं__"तुम् स्वयं सें कुछ नहि करोगे। मे अतिसीघ्र हि अपनी बेटी कों तुम्हारे नीचे सुलाने केँ लिए सजधजकर कर लूॅगी। "
"अब तुम्हारी इन बातों पर्र ज़रा भि यकीन नहि हैं मुझे। "अजय नें कहा__"बहोत देखली तुम्हारी कोशिशें। तुमने करुणा केँ बारे मे भि यहीकहा थां औऱ अब अपनी बेटी केँ लिए भि यहीकह रही होँ। तुम्हारी कोशिशों कां क्याँ नतीजा निकलता हैं यह मे देख चुकाहूॅ। इसलिए अब मे स्वयं यहकाम करूॅगा औऱ तुम् मुझे रोंकने कि कोशिश नहि करोगी। "
"पर्र अजययह तुम् ठीक.। " प्रतिमा कां वाक्य बीच मे हि रह गय़ा।
"बस प्रतिमा, अबकुछ नहि सुनना चाहता हूॅ मे। " अजय सिंहकह उठा__"अब तुम् मात्र देखो औऱ उसकामजा लो। "
प्रतिमा देखती रह गई अजय कों। उसकादिल बुरीतरह घबराहट केँ कारण धड़कने लगा थां। चेहरा अनायास हि किसीभय केँ कारण पीलापड़ गय़ा थां उसका। मन हि मन परमेश्वर कों यादकर उसने अपनी बेटी कि सलामती कि दुवा कि।
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अबआगे,,,,,,,,
अभय कों अपनेसंग लिए गौरी ड्राइंग रूम मे दाखिल हुइ, उसके पीछे पीछे विराज औऱ निधि भि थें। गौरी नें अभय कों सोफे पऱ बैठाया औऱ स्वयं भि उसी सोफे पर्र उसकेपास बैठ गई। विराज औऱ निधि सामने वाले सोफे पऱ एक् संग हि बैठगये।
अभय सिंह कां मन बहोत भारी थां। उसकासिर अभि भि अपराध बोझ सें झुकाहुआ थां। गौरीइस बात कों बखूबी समझती थि, कदाचित इसीलिए उसने बड़े प्रेम सें अपने एक् हाथ सें अभय कां चेहरा ठुड्डी सें पकड़कर अपनीतरफ किया।
"यह क्याँ हैं अभय?"फिन गौरी नें अधीरता सें कहा__"इस तरहसिर झुकाकर बैठने कि कोई आवश्यकता नहि हैं। तुम् अपने दिलो दिमाग़ सें ऐसे विचार निकाल दो जिसकी वजह सें तुम्हें ऐसा लगता हैं कि तुमने कोई अपराध किया हैं। तुम्हारी स्थान कोई दूसरा होता तौ वो भि वही करता जौ उन हालातों मे तुमने किया। इस लिए मे यह समझती हि नहि कि तुमने कोई ग़लती कि हैं याँ कोई अपराध किया हैं। इसलिए अपनेमन सें यह ख़याल निकाल दोअभय औऱ अपनेदिल कां यहबोझ हल्का करो, जौ बोझ अपराध बोझबन कर तुम्हें शान्ति औऱ चैन नहि देपारहा हैं। "
"भाभी आप् तोँ महान हें इसलिए इस सबसे आप् पऱ कोई प्रभाव नहि पड़ता। " अभय नें भारी स्वर मे कहा__"लेकिन मे आप् जैसा महान नहि हूॅ औऱ नां हि मेरा हृदय इतना विशाल हैं कि उसमें किसीतरह केँ दुख सहजता सें जज़्ब होँ सकें। मे तौ बहोत हि छोटी बुद्धि औऱ विचारों वालाहूॅ जिसेकोई भि ब्यक्ति जब चाहे औऱ जैसे भि चाहे अपनी उॅगलियों पऱ नचा देता हैं। शायदइसी लिए तौ.इसी लिए तोँ मे समझ हि नहि पाया कि कभीकभी जोँ दिखता हैं याँ जौ सुनाई देता हैं वो सिरे सें ग़लत भि होँ सकता हैं। "
"यह तुम् कैसी बातें कररहे होँ अभय?" गौरी नें दुखीभाव सें कहा__"ईश्वर केँ लिएऐसा कुछमत बोलो। अपने अंदरऐसी ग्लानी मत पैदाकरो औऱ नाँ हि इन सबसे स्वयं कों इसतरह दुखीकरो। "
"मुझे कहने दीजिए भाभी। "अभय नें करुणभाव सें कहा__"शायद यहसभी कहने सें मेरे अंदर कि पीड़ा मे कुछ इज़ाफा हौ। आप् तोँ मुझे सज़ा नहि देरही हें तोँ कम सें कम मे स्वयं तौ अपने आपको सज़ा औऱ परेशानी देलूॅ। मुझे भि तौ इसका एहसास होना चाहिए नं भाभी कि जब हृदय कों पीड़ा मिलती हैं तौ कैसा लगता हैं? हमारे अपनेजब अपनों कों हि ऐसी तक़लीफ़ देते हें तोँ उससे हमारी अंतर्आत्मा किसहद तक तड़पती हैं?"
"नहि अभय नहि। " गौरी नें रोतेहुए अभय कों एक् बारफिन सें खींचकर स्वयं सें छुपका लिया, बोलि__"ऐसी बातें मतकरो। मे नहि सुन सकती तुम्हारी यह करुण बातें। मैंने तुम्हें अपने बेटे कि तरह हमेशा स्नेह दिया हैं। भला, मे अपने बेटे कों केसेइस तरह तड़पते हुएदेख सकतीहूॅ? हर्गिज़ नहि.। "
देवर जी भाभी कां यह प्रेम यह स्नेह यह अपनापन आज ढूॅढ़ने सें भि शायद कहीं न् मिले। विराज औऱ निधि आॅखों मे नीरभरे उन्हें देखेजा रहे थें। कितनी हि देर तक गौरीअभय कों स्वयं सें छुपकाए रही। सचमुच इस टाइमऐसा लगरहा थां जैसेअभय दोदो बच्चों कां बाप नहि बल्कि कोई छोटा सां अबोध बालक होँ।
"राज। " सहसा गौरी नें विराज कि तरफदेख कर कहा__"तुम् अपने चाचा जी कों उनकेरूम मे लेँ जाओ। लम्बे सफर कि थकान बहोत होगी। नहा धोकर फ्रेस हौ जाएॅगे तोँ मन हल्का होँ जाएगा। "
"जीमाॅ। " विराज जल्दी हि सोफे सें उठकरअभय केँ पास पहुॅच गय़ा। गौरी केँ ज़ोर देने पर्र अभय कों विराज केँ संग कमरे मे जानां हि पड़ा। जबकि अभय औऱ विराज केँ जाने केँ बाद गौरीउठी औऱ अपनी आॅखों सें बहतेहुए आॅसुओं कों पोंछते हुए किचेन कि तरफबढ़ गई।
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हवेली मे डोरबेल कि आवाज़ सुनकर प्रतिमा नें जाकर दरवाजा खोला। दरवाजे केँ बाहर् खड़ेजिस चेहरे पऱ उसकी नज़र पड़ीउसे देखकर वो बुरीतरह चौंकी।
"अरे नैना तुम्??" प्रतिमा कां हैरत मे डूबाहुआ स्वर__"आओ आओ अंदरआओ। आज इतने महीनों बाद तुम्हें देखकर मुझे बेहद खुशी हुई। "
दोस्तो यह नैना हैं.आप् सबको तोँ बताया हि जा चुका हैं परिवार केँ सब सदस्यों केँ बारे मे। फिन भि अगर आप् भूलगए हें तौ आप् एक् बारइस कथा कां पहलाभाग चेककर सकते हें। पहलेभाग मे आपकोपता चल जाएगा कि नैनाकौन हैं?
नैना जैसे हि दरवाजे केँ अंदरआई प्रतिमा नें उसे अपनेगले सें लगा लिया। प्रतिमा नें महसूस किया कि नैना केँ हावभाव बदलेहुए हें। प्रतिमा कि बात कां उसनेमुख सें कोई जवाब नहि दिया थां बल्कि वो मात्र हल्का सां मुस्कुराई थि। उसकी मुस्कान भि शायद बनावटी हि थि। क्योंकि चेहरे केँ भाव उसकी मुस्कान सें बिलकुल अलग थें।
"दामाद जी कहाॅ हें?" नैना सें अलग होकर प्रतिमा नें दरवाजे केँ बाहर् झाॅकने केँ बाद पूछा थां।
"मे अकेली हि आईहूॅ भाभी। " नैना नें अजीबभाव सें कहा__"सभी कुछ छोंड़ कर। "
"क्याऽऽ???" नैना कि बात सुनकर प्रतिमा नें चौंकते हुए कहा__"सभी कुछ छोंड़ कर सें क्याँ मतलब हैं तुम्हारा??
"मैंने आदित्य कों तलाकदे दिया हैं। " नैना नें कठोरता सें कहा__"अब उससे औऱ उसकेघऱ वालों सें मेराकोई नाता नहि रहा। "
"त तलाऽऽक????" प्रतिमा बुरीतरह उछल पड़ी__"यह क्याँ कहरही हौ तुम्?"
"हाॅ भाभी। " नैना नें कहा__"मैने उस बेवफा कों तलाकदे दिया हैं, औऱ उससे सारे रिश्ते नाते तोड़कर वापस अपनेमाॅ बाप व भाई भाभी केँ पास आँ गई हूॅ। "
प्रतिमा कि अजीब हालत होँ गई उसकी बातें सुनकर। हैरतव अविश्वास सें मुह फाड़े वो अपनी छोटी ननदी नैना कों अपलक देखेजा रही थि। फिन सहसा उसकी तंद्रा तबभंग हुई जब उसके कानों मे अंदर सें आई उसके पति अजय कि आवाज़ गूॅजी। अंदर सें अजय सिंह नें आवाज़ लगाकर पूछा थां कि कौनआया हैं बाहर्?
अजय सिंह कि आवाज़ सें प्रतिमा कों होशआया जबकि नैना अपने हाॅथ मे पकड़ा हुआ बड़ा सां बैग वहीं छोंड़ कर अंदर कि तरफ भागी। नैना कों इसतरह भागते देख प्रतिमा चौंकी फिनपलट कर पहले दरवाजे कों बंद किया उसकेबाद नैना केँ बैग कों उठा अंदर कि तरफबढ़ गई।
उधर भागते हुए नैना ड्राइंग रूम मे पहुॅची। उसी वक़्त अजय सिंह भि अपने कमरे सें इधर हि आता दिखा। नैना अपने बड़े भइया कों देख एक् लम्हा कों ठिठकी फिन तेज़ी सें दौड़ती हुई जाकरअजय सिंह सें लिपट गई।
"भइयाऽऽ। " नैनाअजय सें लिपटकर बुरीतरह रोनेलगी थि। अजय सिंहउसे इसतरह देख पहले तौ चौंका फिनउसे अपनी बाॅहों मे लेँ प्रेम व स्नेह सें उसकेसिर वपीठ पऱ हाॅथ फेरने लगा।
"अरे क्याँ हुआ तुझेही?" अजय सिंह उसकीपीठ कों सहलाते हुए बोला__"इस तरह क्यूं रोयेजा रही हैं तूँ?"
अजय सिंह केँ इस प्रश्न कां नैना नें कोई जवाब नहि दिया, बल्कि वो ज़ार ज़ार वैसी हि रोतीरही। नैना अपने भइया केँ सीने सें कस केँ लगी हुइ थि। ऐसा लगता थां जैसेउसे इसबात कां अंदेशा थां कि अगर वो अपने भइया सें अलग हौ जाएगी तौ कयामत आँ जाएगी।
प्रतिमा भि तब तक पहुॅच गई थि। अपने भइया सें लिपटी अपनी ननदी कों इसतरह रोतेदेख उसकी आॅखों मे भि पानी आँ गय़ा। बहुतदेर तक यहीआलम रहा। अजय सिंह नें उसे बड़ी मुश्किल सें चुप कराया। फिनउसे उसके कंधे सें पकड़कर चलतेहुए आया औऱ उसे सोफे पर्र आहिस्ता बैठाकर स्वयं भि उसकेपास हि बैठ गय़ा।
"प्रतिमा दामाद जी कहाॅ हें?" फिनअजय नें प्रतिमा कि तरफ देखते हुए पूछा__"उन्हें अपनेसंग अंदर क्यूं नहि लाई तुम्?"
"दामाद जी नहि आएअजय। " प्रतिमा नें गंभीरता सें कहा__"नैना अकेली हि आई हैं। "
"क्याँ???" अजय चौंका__"मगर क्यूं? दामाद जीसंग क्यूं नहि आए? मेरीफूल जैसी बेहन कों अकेली केसेआने दिया उन्होंने? रुको मे अभि बात करताहू उनसे। "
"अब मोबाइल करने कि कोई ज़रूरत नहि हैं अजय। " प्रतिमा नें कहा__"नैना अब हमारे पास हि रहेगी.। "
"हमारे पास हि रहेगी??" अजय चकराया, बोला__"इसका क्याँ मतलबहुआ भला?"
"वोँ.वोँ नैना नें दामाद जी कों तलाकदे दिया हैं। " प्रतिमा नें धड़कते दिल केँ संग कहा__"इस लिएअब यह यहीं रहेंगी। "
"व्हाऽऽट???" अजय सिंह सोफे पऱ बैठाहुआ इसतरह उछल पड़ा थां जैसे उसके पिछवाड़े केँ नीचे सोफे कां वो हिस्सा अचानक हि किसी बड़ी सि नोंकदार सुई मे बदल गय़ा हौ, बोला__"यह सभी क्याँ.यह तुम् क्याँ कहरही होँ प्रतिमा? नैना नें दामाद जी कों तलाकदे दिया हैं? अरेमगर क्यूं??"
प्रतिमा केँ कुछ बोलने सें पहले हि नैना एक् झटके सें उठी औऱ रोतेहुए अंदर कि तरफभाग गई। अजय सिंह मूर्खों कि तरहउसे जाते देखता रहा।
"प्रतिमा सचसच बताओ। "फिन अजय नें उद्दिग्नता सें कहा__"आख़िर ऐसी क्याँ बात होँ गई हैं जिसकी वजह सें नैना नें दामाद जी कों तलाकदे दिया हैं?"
"सारी बातें मुझे भि नहि पताअजय। " प्रतिमा नें कहा__"नैना नें अभि कुछ भि नहि बताया हैं इस बारे मे। "
"उससे पूछो प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा__"उससे पूछो कि क्याँ मैटर हैं? उसने अपने पति कों किसबात पऱ तलाकदे दिया हैं?"
"ठीक हैं मे बात करतीहूॅ उससे। " प्रतिमा कहने केँ संग हि उठकरउस दिशा कि तरफबढ़ गई जिधर नैना गई थि। जबकि अजय सिंह किसी गहरीसोच मे डूबा नज़रआने लगा थां।
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"मिस्टर चौहान। " हास्पिटल कि गैलरी पर्र दीवार सें सटी बेंच पर्र बैठे एक् ऐसे आदमी केँ कानों सें यह वाक्य टकराया जिसके चेहरे पऱ इस टाइमगहन तकलीफ़ वदुख केँ भाव थें। उसनेसिर उठाकर देखा। उसके सामने एक् डाक्टर खड़ाउसी कि तरफ संजीदगी सें देखरहा थां।
"मिस्टर चौहान। " डाक्टर नें कहा__"प्लीज आप् मेरेसंग आइए। मुझे आपसेकुछ ज़रूरी बातें करनी हैं। "
"डाक्टर मेरी बेटी कैसी हैं अब?" बेन्च सें एक् हि झटके मे उठतेहुए उस व्यक्ति नें हड़बड़ाहट सें पूछा थां__"वोँ अबठीक तौ हैं नां?"
"अब वोँ बिलकुल ठीक हैं मिस्टर चौहान मगर। " डाक्टर कां वाक्य अधूरा रह गय़ा।
"लमगर क्याँ डाक्टर?" आदमी नें असमंजस सें पूछा।
"आप् प्लीज़ मेरेसंग आइए। " डाक्टर नें ज़ोर देकर कहा__"मुझे आपसे अकेले मे बात करनी हैं। प्लीज़ कम हेयर.। "
कहने केँ संग हि डाक्टर एक् तरफबढ़ गय़ा। उसे जातेदेख वोँ व्यक्ति भि तेज़ी सें उसके पीछे लपका। चेहरे पऱ हज़ारों तरह केँ भाव एक् लम्हा मे हि गर्दिश करते नज़रआने लगे थें उसके। कुछ हि देर मे डाक्टर केँ पीछे पीछे वो उसके केबिन मे पहुॅचा।
"मिस्टर चौहान। " डाक्टर अपनी चेयर केँ पास पहुॅच करतथा अपने सामने बड़ी सि टेबल केँ पार रखीं चेयर कि तरफहाथ केँ इशारे केँ संग कहा__"हैव एसीट प्लीज़। "
डाक्टर केँ कहने पर्र वोँ आदमी जिसे डाक्टर उसकेसर नेम सें संबोधित कररहा थां किसी यंत्रचालित सां आगे बढ़ा औऱ एक् हाथ सें चेयर कों पीछेकर उसमें बैठ गय़ा। उसकेबैठ जाने केँ बाद केबिन मे दोनो केँ बीचकुछ देर केँ लिए ख़ामोशी छाईरही।
"बोलो डाक्टर। " फिन खामोशी कों चीरते हुएउस व्यक्ति नें भारी स्वर मे कहा__"क्याँ ज़रूरी बातें करनी थि आपको?"
"मिस्टर चौहान। " डाक्टर नें भूमिका बनाते हुए लेकिन संतुलित लहजे मे कहा__"मे चाहता हूॅ कि आप् मेरी बातों कों शान्ती औऱ बड़े धैर्य केँ संग सुनें। "
"आख़िर बात क्याँ हैं डाक्टर?" व्यक्ति नें सहसा अंजाने भय सें घबराकर कहा थां, बोला__"मुझे पता हैं कि मेरी बेटी केँ संग किसी नें रेप किया हैं जिसकी वजह सें उसकीआज यह हालत हैं। मे धरती आसमान एक् कर दूॅगा उस हरामज़ादे कों ढूढ़ने मे जिसने मेरी बेटी कों आजइस हालत मे पहुॅचाया हैं। उसेऐसी मौत दूॅगा कि फरिश्ते भि देखकर थरथर काॅपेंगे। "
"प्लीज़ कंट्रोल योरसेल्फ मिस्टर चौहान प्लीज। " डाक्टर नें कहा__"आपको इसकेआगे जोँ भि करना हौ आप् करते रहियेगा, मगर उसके पहले शान्ती औऱ धैर्य केँ संग आप् मेरी बातें सुन लीजिए। "
"ठीक हैं कहिए। "उस आदमी नें गहरी साॅसली।
"यह तौ आप् जानते हि हें कि आपकी बेटी केँ संग क्याँ हुआ हैं। " डाक्टर नें कहा__"पऱ यहआधा सच हैं। "
"क्याँ मतलब?" चौहान चौंका।
"आपकी बेटी केँ संग एक् सें ज़्यादा लोगों नें रेप कि वारदात कों अंजाम दिया हैं?" डाक्टर नें संजीदगी सें कहा__"उसने स्वयं शराबपी थि याँ फिनउसे पिलाई गई थि। ऐसी शराब जिसमें ड्रग्स मिलाहुआ थां। इससेयही साबित होता हैं कि यहसभी जिन लोगों नें भि किया हैं पहले सें हि सोच समझकर किया हैं। "
"यह आप् क्याँ कहरहे हें डाक्टर?" चौहान कि हालत खराब थि, बोला__"मेरी बेटी केँ संग इतनाकुछ कियाउन हरामज़ादों नें। "
"यहसभी तौ कुछ भि नहि हैं। " डाक्टर नें गंभीरता सें कहा__"बल्कि अब जोँ बात मे आपको बताना चाहता हूॅ वोँ बहोत हि गंभीर बात हैं। मे चाहता हूॅ कि आप् मेरीउस बात कों सुनकर अपना धैर्य नहि खोएंगे। "
"आख़िर ऐसी क्याँ बात हैं डाक्टर?" चौहान हतोत्साहित सां बोला__"क्याँ कहना चाहते हें आप्? साफसाफ बताओ क्याँ बात हैं?"
"आपकी बेटी प्रेग्नेन्ट हैं। " डाक्टर नें मानो धमाका सां किया थां__"वो भि दो महीने कि। "
"क्याऽऽ????" चेयर पऱ बैठा चौहान यहसुन करउछल पड़ा थां, बोला__"यह आप् क्याँ कहरहे हें डाक्टर? ऐसा केसे होँ सकता हैं?"
"इस बारे मे भला मे केसेबता सकताहूॅ मिस्टर चौहान?" डाक्टर नें कहा__"यह तौ आपकी बेटी कों हि पता होगा। मैंने तौ आपकोवही बताया हैं जोँ आपकी बेटी कि जाॅच सें हमेंपता चला हैं। "
चौहान भौचक्का सां डाक्टर कों देखता रह गय़ा थां। उसके दिलो दिमाग़ मे अभि तक धमाके हौ रहे थें। असहाय अवस्था मे बैठारह गय़ा थां वो।
तभी केबिन कां गेट खुला औऱ एक् नर्स अंदर दाखिल हुईँ।
"सर वोँ पुलिस बाहर् आपका इन्तज़ार कररही हैं। " नर्स नें डाक्टर कि तरफदेख करकहा थां।
"ठीक हैं हम् आते हें। " डाक्टर नें उससेकहा फिन चौहान कि तरफदेख कर कहा__"मिस्टर चौहान आइए चलते हें। "
उसकेबाद दोनो केबिन केँ बाहर् आँ गए। चौहान केँ चेहरे सें हि लगरहा थां कि वो दुखी हैं, लेकिन अपनेइस दुख कों वो जज़्ब करने कि कोशिश कररहा थां।
बाहर् गैलरी मे आते हि डाक्टर कों पुलिस केँ कुछ शिपाही दिखाई दिये। वो चौहान केँ संग चलताहुआ रिसेशन पऱ पहुॅचा। जहाॅ पऱ इंस्पेक्टर कि वर्दी मे रितू खड़ी थि। सिर पऱ पी-कैप व दाहिने हाॅथ मे पुलिसिया रुल थां जिसे वो कुछ पलों केँ अन्तराल मे अपनी बाॅई हथेली पऱ हल्के सें माररही थि।
"हैलो इंस्पेक्टर। " डाक्टर रितू केँ पास पहुॅचते हि बोला थां।
"क्याँ उस लड़की कों होश आँ गय़ा डाक्टर?" रितू नें पुलिसिया अंदाज़ मे पूछा__"मुझे उसका स्टेटमेन्ट लेना हैं। "
"मिस रितू। " डाक्टर नें कहा__"बस कुछ हि वक्त मे उसेहोश आँ जाएगा फिन आप् उसका बयान लेँ सकती हें। " डाक्टर नें कहने केँ संग हि चौहान कि तरफ इशारा करतेहुए कहा__"यह उस लड़की केँ पिता हें। मिस्टर शैलेन्द्र चौहान। "
"ओहआई सि। " रितू नें चौहान कि तरफ देखते हुए कहा__"मुझे दुख हैं अंकल कि आपकी बेटी केँ संगऐसा हादसा हुआ?"
"सभी क़िस्मत कि बातें हें बेटा। " चौहान नें हारेहुए खिलाड़ी कि तरह बोला__"हम् चाहे सारी ऊम्र सबकेसंग अच्छा करते रहें औऱ सबका अच्छा भला सोचते रहेंमगर हमें हमारे किस्मत सें जौ मिलना होता हैं वोँ मिल हि जाता हैं। "
"हाॅयह तौ हैं अंकल। " रितू नें कहा__"ख़ैर, आपकी बेटी कां यहकेस फाइल होँ चुका हैं, बस आपके साइन कि ज़रूरत हैं। लड़की केँ बयान केँ बाद पुलिस इसकेस कों अच्छी तरहदेख लेगी। जिसने भि इस घिनौने काम कों अंजाम दिया हैं उसको बहोत जल्दजेल कि सलाखों केँ पीछे अधमरी अवस्था मे पाएंगे आप्। "
"उससे क्याँ होगा बेटी?" चौहान नें गंभीरता सें कहा__"क्याँ वोँ सभी वापस होँ जाएगा जौ लुट गय़ा याँ बरबाद होँ गय़ा हैं?"
"आप् यह कैसी बातें कररहे हें अंकल?" रितू नें हैरत सें कहा__"क्याँ आप् नहि चाहते कि जिसने भि आपकी बेटी केँ संगयह किया हैं उसे कानून केँ द्वारा शख्त सें शख्त सज़ा मिले?"
"उसे कानून नहि। " चौहान केँ चेहरे पऱ अचानक हि हाहाकारी भाव उभरे__"उसे मे स्वयं अपने हाथों सें सज़ा दूॅगा। तभी मेरी औऱ मेरी बेटी कि आत्मा कों शान्ती मिलेगी। "
"तौ क्याँ आप् कानून कों हाथ मे लेंगे?" रितू नें कहा__"नहि अंकल, यह पुलिस केस हैं औऱ उसे कानूनन हि सज़ा प्राप्त होगी। "
"तुम् अपनाकाम करो बेटी। " चौहान नें कहा__"औऱ मुझे मेराकाम अपने तरीके सें करना हैं। "
तभी वहाॅ पऱ एक् नर्सआई। उसने बताया कि उस लड़की कों होश आँ गय़ा हैं औऱ उसे दूसरे रूम मे शिफ्ट कर दिया गय़ा हैं। नर्स कि बात सुनकर डाक्टर नें रितू कों उससे बयान लेने कि परमीशन दि लेकिन यह भि कहा कि पेशेन्ट कों ज़्यादा किसीबात केँ लिए मजबूर नं करें। चौहान संग मे जानां चाहता थां लेकिन रितू नें यहकहकर उसे रोंक लिया कि यह पुलिस केस हैं इसलिए पहले पुलिस उससे मिलेगी औऱ उसका बयान लेगी।
इंस्पेक्टर रितू अपनेसंग एक् औरत शिपाही कों लिएउस कमरे मे पहुॅची जिस कमरे मे उस लड़की कों शिफ्ट किया गय़ा थां। डाक्टर स्वयं भि संगआया थां। लेकिन फिन एक् नर्स कों कमरे मे छोंड़ कर वो बाहर् चला गय़ा थां।
हास्पिटल वालेबेड पऱ लेटी वो लड़की आॅखें बंद किये लेटी थि। यहअलग बात हैं कि उसकीबंद आॅखों कि कोरों सें आॅसूॅ कि धार सि बहतीदिख रही थि। उसके जिस्म कां गले सें नीचे कां सारा हिस्सा एक् चादर सें ढ्काहुआ थां। कमरे मे कुछ लोगों केँ आने कि आहट सें भि उसने अपनी आॅखें नहि खोली थि। बल्कि उसीतरह पुर्वत् लेटीरही थि वो।
"अब कैसी तबियत हैं तुम्हारी?" रितू उसके लगभग हि एक् स्टूल पऱ बैठती हुइ बोलीं थि। उसकेइस प्रकार पूॅछने पऱ लड़की नें अपनी आॅखें खोली औऱ रितू कि तरफ चेहरा मोड़कर देखाउसे। रितू पऱ नज़र पड़ते हि उसकी आॅखों मे हैरत केँ भाव उभरे। यह बात रितू नें भि महसूस कि थि।
"अब कैसाफील कररही होँ?" रितु नें पुनः उसकीतरफ देखकर लेकिन इसबार हल्के सें मुस्कुराते हुए पूछा__"अगर अच्छा फीलकर रही हौ तौ अच्छी बात हैं। मुझे तुमसे इस वारदात केँ बारे मे कुछ पूछताॅछ करनी हैं। मगर उससे पहले मे तुम्हें यहबता दूॅ कि तुम्हें मुझसे भयभीत होने कि कोई ज़रूरत नहि हैं। मे भि तुम्हारी तरह एक् लड़की हि हूॅ औऱ हाॅ तुम् मुझे अपनी साथीसमझ सकती होँ, ठीक हैं नाँ?"
लड़की केँ चेहरे पऱ कई सारेभाव आए औऱ चले भि गए। उसने रितू कि बातों कां अपनी पलकों कों झपकाकर जवाब दिया।
"ओके, तोँ अब तुम् मुझे सबसे पहले अपनानाम बताओ। " रितू नें मुस्कुरा करकहा।
"वि वि.विधी। " उस लड़की केँ थरथराते होठों सें आवाज़ आई।
उसकानाम सुनकर रितू कों झटका सां लगा। मस्तिष्क मे जैसे बम्ब सां फटा थां। चेहरे पऱ एक् हि समय मे कईतरह केँ भावआए औऱ फिन लुप्त हौ गए। रितू नें सीघ्र हि स्वयं कों नार्मल कर लिया।
"ओह.कितना हसीन सां नाम हैं तुम्हारा। " रितू नें कहा। उसके दिमाग़ मे कुछ औऱ हि ख़याल थां, बोलि__"विधी.विधी चौहान, राइट?"
लड़की कि आॅखों मे एक् बार पुनः चौंकने केँ भावआए थें। एकाएक हि उसका चेहरा सफेद फक्क सां पड़ गय़ा थां। चेहरे पर्र घबराहट केँ चिन्ह नज़रआए। उसने अपनी गर्दन कों दूसरी तरफ मोड़ लिया।
"तौ विधी। " रितू नें कहा__"अब तुम् मुझे बेझिझक बताओ कि क्याँ हुआ थां तुम्हारे संग?"
रितू कि बात पर्र विधी नें कोई प्रतिक्रिया नहि दि। वो दूसरी तरफमुह किये लेटीरही। जबकि उसकी ख़ामोशी कों देखकर रितू नें कहा__"देखो यह ग़लतबात हैं विधी। अगर तुम् कुछ बताओगी नहि तोँ मे केसेउस अपराधी कों सज़ा दिला पाऊॅगी जिसने तुम्हारी यानी मेरी मित्र कि ऐसी हालत कि हैं? इसलिए बताओ मुझे.सारी बातें विस्तार सें बताओ कि क्याँ औऱ केसेहुआ थां?"
"मु मुझेकुछ नहि पता। " विधी नें दूसरी तरफमुह कियेहुए हि कहा__"मे नहि जानती कि किसने कब केसे मेरेसंग यहसभी किया?"
"तुम् झूॅठबोल रही विधी। " रितू कि आवाज़ सहसा तेज़ हौ गई__"भला ऐसा केसे हौ सकता हैं कि तुम्हारे संग इतनाकुछ हुआ औऱ तुम्हें इस सबके बारे मे थोडा सां भि पता न् हुआ होँ?"
"भला मे झूॅठ क्यूं बोलूॅगी आपसे?" विधी नें इसबार रितू कि तरफपलट करकहा थां।
"हाॅमगर सच भि तौ नहि बोलरही हौ तुम्?" रितू नें कहा__"आख़िर वोँ सभी बताने मे तकलीफ़ क्याँ हैं? देखोअगर तुम् नहि बताओगी तौ सच जानने केँ लिए पुलिस केँ पास औऱ भि तरीके हें। कहने कां मतलबयह कि, हम् यहपता लगा हि लेंगे कि तुम्हारे संगयह सभी किसने किया हैं?"
बेड पर्र लेटी विधी केँ चेहरे पऱ असमंजस व बेचैनी केँ भाव उभरे। कदाचित् समझ नहि पारही थि कि वो रितू कि बातों कां क्याँ औऱ केसे जवाबदे?
"तुम्हारे चेहरे केँ भावबता रहे हें विधी कि तुम् मेरे सवालों सें बेचैन हौ गई होँ। " रितू नें कहा__"तुम् जानती होँ कि तुम्हारे संगयह सभी किसने किया हैं। मगर बताने मे शायदडर रही होँ याँ फिन हिचकिचा रही होँ। "
विधी नें कमरे मे मौजूद लेडी शिपाही व नर्स कि तरफ एक् एक् दृष्टि डालीफिन वापस रितू कि तरफ दयनीय भाव सें देखने लगी। रितू कों उसकाआशय समझते देर न् लगी। उसने जल्दी हि लेडी शिपाही व नर्स कों बाहर् जाने कां इशारा किया। नर्स नें बाहर् जातेहुए इतना हि कहा कि पेशेन्ट कों किसीबात केँ लिए अधिक मजबूर मत कीजिएगा क्योंकि इससे उसके दिलो दिमाग़ पर्र बुराअसर पड़ सकता हैं। नर्सतथा लेडी शिपाही केँ बाहर् जाने केँ बाद रितू नें पलटकर विधी कि तरफ देखा।
"देखो विधी, अब इस कमरे मे हम् दोनो केँ सिवा दूसरा कोई नहि हैं। " रितू नें प्रेम भरे लहजे सें कहा__"अब तुम् मुझे यानी अपनी मित्र कों बता सकती हौ कि यहसभी तुम्हारे संगकब औऱ किसने किया हैं?"
"क.ककल मे अपने एक् मित्र कि बर्थडे बर्थडे पार्टी मे गई थि। " विधी नें मानो कहना शुरुआत किया, उसकी आवाज़ मे लड़खड़ाहट थि__"वहाॅ पर्र हमारे काॅलेज कि कुछ औऱ लड़कियाॅ थि जौ हमारे हि ग्रुप कि फ्रैण्ड्स थि औऱ संग मे कुछ लड़के भि। जश्न मे सभी एंज्वाय कररहे थें। मेरी मित्र परिधि नें मनोरंजन कां सारा एरेन्जमेन्ट कियाहुआ थां। जिसमें बियर औऱ शराब भि थि। साथी केँ ज़ोर देने पर्र मैंने थोडा बहोत बियर पिया थां। मगर मुझेयाद हैं कि उस बियर सें मैने अपनाहोश नहि खोया थां। हम् सभी डान्स कररहे थें, तभी मेरी एक् फ्रैण्ड नें मेरे हाॅथ मे काॅच कां प्याला पकड़ाया औऱ मस्ती केँ हि मूड मे मुझे पीने कां इशारा किया। मैंने भि मुस्कुरा कर उसके दियेहुए प्याले कों अपनेमुह सें लगा लिया औऱ उसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे करके पीनेलगी। लेकिन इसबार इसका टेस्ट पहले वाले सें अलग थां। फिन भि मैंने उसेपी लिया। कुछ हि देरबाद मेरासर भारी होनेलगा। वहाॅ कि हर चीज़ मुझे धुंधली सि दिखने लगी थि। उसकेबाद मुझे नहि पता कि किसने मेरेसंग क्याँ किया?हाॅ बेहोशी मे मुझेअसह पीड़ा कां एहसास अवश्य हौ रहा थां, इसके सिवाकुछ नहि। जब मुझेहोश आया तोँ मैंने अपने आपको यहाॅ हास्पिटल मे पाया। मुझे नहि पता कि यहाॅ पर्र मे केसेआई? मगर इतनाजान चुकीहूॅ कि मेरा सबकुछ लुट चुका हैं, मे किसी कों मुह दिखाने केँ काबिल नहि रही। "
इतनासभी कहने केँ संग हि विधीबेड पऱ पड़े हि ज़ार ज़ार रोनेलगी थि। उसकी आॅखों सें आॅसू थमने कां नाम नहि लेँ रहे थें। इंस्पेक्टर रितू उसकीबात सुनकर पहले तोँ हैरान रहीफिन उसनेउसे बड़ी मुश्किल सें शान्त कराया।
"तुम्हें यहाॅ पऱ मे लेकरआई थि विधी। " रितू नें गंभीरता सें कहा__"पुलिस थाने मे किसी अंजान ब्यक्ति नें मोबाइल करके हमें सूचित कर बताया कि शहर सें बाहर् मेन मार्ग केँ नीचेकुछ दूरी पर्र एक् लड़की बहोत हि गंभीर हालत मे पड़ी हैं। वोँ स्थान हल्दीपुर कि आखिरी सीमा केँ पास थि, जहाॅ सें हम् तुम्हें उठाकर यहाॅ हास्पिटल लाए थें। "
"यह आपने अच्छा नहि किया। " विधी नें सिसकते हुए कहा__"उस हालत मे मुझे वहीं पऱ मर जाने दिया होता। कम सें कमउस सूरत मे मुझे किसी केँ सामने अपनामुह तोँ न् दिखाना पड़ता। मेरेघऱ वाले, मेरे माता पिता कों मुझेदेख कर लज्जा सें अपना चेहरा तोँ नं झुका लेना पड़ता। "
"देखो विधी। " रितू नें समझाने वालेभाव सें कहा__"इस सबमें तुम्हारी कोई ग़लती नहि हैं औऱ यहबात तुम्हारे पैरेन्ट्स भि जानते औऱ समझते हें। ग़लती जिनकी हैं उन्हें इस सबकी शख्त सें शख्त सज़ा मिलेगी। तुम्हारे संगयह अत्याचार करने वालों कों मे कानून कि सलाखों केँ पीछे जल्द हि पहुचाऊॅगी। "
विधीकुछ न् बोलीं। वो बस अपनी आॅखों मे नीरभरे देखती रही रितू कों। जबकि,,
"अच्छा यह बताओ कि तुम्हारी मित्र कि बर्थडे पार्टी मे उस वक़्त कौनकौन मौजूद थां जिनके बारे मे तुम् जानती होँ?" रितू नें पूछा__"संग हि यह भि बताओ कि तुम्हें उनमें सें किन पर्र यहशक़ हैं कि उन्होने तुम्हारे संगऐसा किया हौ सकता हैं? तुम् बेझिझक होकर मुझेउन सबकानाम पता बताओ। "
विधीकुछ देर सोचती रहीफिन उसने जश्न मे मौजूद कुछ लड़के लड़कियों केँ बारे मे रितू कों बता दिया। रितू नें एक् काग़ज पर्र उन सबकानाम पतालिख लिया। उसकेबाद कुछ औऱ पूछताछ करने केँ बाद रितू कमरे सें बाहर् आँ गई।
रितू कों डाक्टर नें बताया कि वोँ लड़कीदो महीने कि प्रैग्नेन्ट हैं। यहसुन कर रितू बुरीतरह चौंकी थि। हलाॅकि मिस्टर चौहान नें डाक्टर कों मना किया थां कि यहबात वो किसी कों न् बताए। लेकिन डाक्टर नें अपना फर्ज़ समझकर पुलिस केँ रूप मे रितू कों बता दिया थां।
रितू नें मिस्टर चौहान कों एक् बार थाने मे आने कां कहकर हास्पिटल सें निकल गई थि। उसके मस्तिष्क मे एक् हि ख़याल उछलकूद मचारहा थां कि 'क्याँ यहवही विधी हैं जिसे विराज प्रेम करता थां'???? रितू नें कभी विधी कों देखा नहि थां, औऱ नाही उसके बारे मे उसके भइया विराज नें कभी बताया थां। उसे तोँ बस कहीं सें यहपता चला थां कि उसका भइया विराज किसी विधीनाम कि लड़की सें प्रेम करता हैं। इसलिए आजजब उसनेउस लड़की केँ मुख सें उसकानाम विधी सुना तौ उसके दिमाग़ मे जल्दी हि उस विधी कां ख़याल आँ गय़ा जिस विधीनाम कि लड़की सें उसका भइया प्रेम करता हैं। रितु केँ मन मे पहलेयह विचार अवश्य आया कि वो एक् बार उससेयह जानने कि कोशिश करे कि क्याँ वो विराज कों जानती हैं? मगरफिन उसने जल्दी हि अपनेमन मे आएइस विचार केँ तहत उससेइस बारे मे पूछने कां ख़याल निकाल दिया। उसे लगायह टाइम अभि इसकेलिए सही नहि हैं।
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रात मे डिनर करने केँ बाद एक् बारफिन सें सभी ड्राइंग रूम मे एकत्रित हुए। अभय किसीसोच मे डूबाहुआ थां। गौरी नें उसेसोच मे डूबादेख कर कहा__"करुणा औऱ बच्चे केसे हें अभय?"
"आं.हाॅ सभीठीक हें भाभी। "अभय नें चौंकते हुएकहा थां।
"शगुन कैसा हैं?" गौरी नें पूछा__"क्याँ अभि भि वैसी हि शरारतें करता हैं वो? करुणा तोँ उसकी शरारतों सें परेशान हौ जाती होगी नं? औऱ.औऱ मेरी बेटी दिव्या कैसी हैं.उसकी पढ़ाई कैसीचल रही हैं?"
"सभी अच्छे हें भाभी। "अभय नें नज़रें चुराते हुए कहा__"दिव्या कि पढ़ाई भि अच्छी चलरही हैं। "
"क्याँ बात हैं?" गौरीउसे नज़रें चुराते देख चौंकी__"तुम् मुझसे क्याँ छुपारहे होँ अभय?घऱ मे सभीठीक तौ हें नाँ? मुझे बताओ अभय.मेरा दिल घबराने लगा हैं। "
"कोईठीक नहि हैं भाभीकोई भि। " अभय केँ अंदर सें मानो गुबार फट पड़ा__"हवेली मे कोई भि ठीक नहि हें। करुणा औऱ बच्चों कों मे करुणा केँ मायके भेजकर हि यहाॅआया हूॅ। इस वक़्त घऱ केँ हालात बहोत ख़राब हें भाभी। किसी पऱ भरोसा करने लायक नहि रहाअब। "
"आख़िर हुआ क्याँ हैं अभय?" गौरी केँ चेहरे पऱ चिन्ता केँ भावउभर आए__"साफ साफ बताते क्यूं नहि?"
सामने सोफे पऱ बैठे विराज औऱ निधि भि परेशान हौ उठे थें। दिल किसी अंजानी आशंकाओं सें धड़कने लगा थां उनका।
"क्याँ बताऊॅ भाभी?"अभय नें असहजभाव सें कहा__"मुझे तोँ बताने मे भि आपसेशरम आती हैं। "
"क्याँ मतलब?" गौरी हि नहि बल्कि अभय कि इसबात सें विराज औऱ निधि भि बुरीतरह चौंके थें।
"एक् दिन कि बात हैं। " फिनअभय कहताचला गय़ा। उसने वोँ सारी बातें बताई जोँ शिवा नें किया थां। उसने बताया कि केसे शिवा उसके नं रहने पर्र उसकेघऱ आया थां औऱ अपनी चाची कों बाथरूम मे नहाते देखने कि कोशिश कररहा थां। इस सबकेबाद केसे करुणा नें आत्म हत्या करने कि कोशिश कि थि। अभययह सभी बताएजा रहा थां औऱ बाॅकी सभी आश्चर्य सें मुह फाड़े सुनते जारहे थें।
"हे ईश्वर। " गौरी नें रोतेहुए कहा__"यह सभी क्याँ होँ गय़ा? मेरीफूल सि बेहन कों भि नहि बक्शा उस नासपीटे नें। "
"यह तौ कुछ भि नहि हैं भाभी। "अभय नें भारी स्वर मे कहा__"उस हरामज़ादे नें तोँ आपकी बेटी दिव्या पर्र भि अपनी गंदी नज़रें डालने मे कोई संकोच नहि किया। "
"क्याँ?????" गौरीउछल पड़ी।
"हाॅ भाभी। "अभय नें कहा__"यह बात स्वयं दिव्या नें मुझे बताई थि। "
"जैसेमाॅ बाप हें वैसा हि तौ बेटा होगा। " गौरी नें कहा__"माॅ बाप स्वयं हि अपने बेटे कों इसराह पर्र चलने कि शहदेरहे हें अभय। "
"क्याँ मतलब?"इस बार बुरीतरह उछलने कि बारीअभय कि थि, बोला__"यह आप् क्याँ कहरही हें?"
"यहीसच हैं अभय। " गौरी नें गंभीरता सें कहा__"आपके बड़े भइया साहब औऱ भाभी बहोत हि शातिर औऱ घटिया किस्म केँ हें। तुम् उनके बारे मे कुछ नहि जानते। मगर मे औऱ माॅ बाबूजी उनके बारे मे अच्छी तरह जानते हें। तुम्हें तोँ वही बताया औऱ दिखाया गय़ा जोँ उन्होंने गढ़कर तुम्हें दिखाना थां। ताकि तुम् उनके खिलाफ न् जासको। "
"उस हादसे केँ बाद सें मुझे भि ऐसा हि कुछ लगनेलगा हैं भाभी। "अभय नें बुझे स्वर मे कहा__"उस हादसे नें मेरी आॅखें खोल दि। तथा मुझेइस सबके बारे मे सोचने पर्र मजबूर कर दिया। इसी लिए तोँ मे सारी बातों कों जानने केँ लिए आप् सबकेपास आयाहूॅ। मुझेदुख हैं कि मैंने सारी बातें पहले हि आप् सबसे जानने कि कोशिश क्यूं नहि कि? अगरयह सभी मैने पहले हि पताकर लिया होता तौ आप् सबको इतनी तक़लीफ़ें नहि सहनी पड़ती। मे आप् सबकेलिए बड़े भाई भाभी सें लड़ता औऱ उन्हें उनकेइस कृत्य कि सज़ा भि देता। "
"तुम् उनकाकुछ भि नं कर पातेअभय। " गौरी नें कहा__"बल्कि अगर तुम् उनके रास्ते कां काॅटा बनने कि कोशिश करते तौ वोँ तुम्हें भि उसीतरह अपने रास्ते सें हमेशा हमेशा केँ लिएहटा देते जैसे उन्होंने राज केँ पिता कों हटा दिया थां। "
"क्याँ???????" अभय बुरीतरह उछला थां, बोला__"मॅझले भाई कों.???"
"हाॅअभय। " गौरी कि आॅखें छलक पड़ी__"तुम् सभीयही समझते हौ कि तुम्हारे मॅझले भाई कि मौत खेतों मे सर्प केँ काटने सें हुई थि। यहसच हैं मगरयह सभीसोच समझकर किया गय़ा थां। वरनायह बताओ कि खेत पर्र बने घर-मकान केँ कमरे मे कोई सर्प कहाॅ सें आँ जाता औऱ उन्हें डसकरमौत दे देता?सच तौ यह हैं कि कमरे मे लेटे तुम्हारे भाई कों सर्प सें कटाया गय़ा औऱ जब वोँ मृत्यु कों प्राप्त हौ गए तौ उन्हें कमरे सें उठाकर खेतों केँ बीचउस स्थान डाल दिया गय़ा जिस स्थान खेत मे पानी लगाया जारहा थां। यहसभी इसलिए किया गय़ा ताकि सबकोयही लगे कि खेतों मे पानी लगाते टाइम हि तुम्हारे भाई कों किसी ज़हरीले सर्प नें काटा औऱ वहीं पऱ उनकी मृत्यु होँ गई। "
"हे ईश्वर। " अभय अपने दोनो हाथों कों सिर पऱ रखकररो पड़ा__"मेरे देवता जैसे भइया कों इन अधर्मियों नें इसतरह मार दिया थां। नहि छोंड़ूॅगा.ज़िंदा नहि छोड़ूॅगा उन लोगों कों मे। "
"नहि अभय। " गौरी नें कहा__"उन्हें उनके कुकर्मों कि सज़ा अवश्य मिलेगी। "
"पऱ यहसभी आपको केसेपता भाभी कि मॅझले भाई कों इन लोगों नें हि सर्प सें कटवाकर मारा थां?" अभय नें पूछा__"औऱ वोँ सभी भि बताइए भाभी जौ इन लोगों नें आपकेसंग किया हैं? मे जानना चाहता हूॅ कि इन लोगों नें मेरे देवी देवता जैसे भाई भाभी पऱ क्याँ क्याँ अनाचार किये हें? मे जानना चाहता हूॅ कि शेर कि खाल ओढ़ेइन भेड़ियों कां सच क्याँ हैं?"
"मे जानती हूॅ कि तुम् जाने बग़ैर रहोगे नहि अभय। " गौरी नें गहरी साॅस ली__"औऱ तुम्हें जानना भि चाहिए। आख़िर हक़ हैं तुम्हारा। "
"तौ फिन बताइए भाभी। "अभय नें उत्सुकता सें कहा__"मुझे इन लोगों कां घिनौना सच सुनना हैं। "
अभय कि बातसुन कर गौरी नें एक् गहरी साॅसली। उसके चेहरे पर्र अनायास हि ऐसेभाव उभरआए थें जैसे अपने आपकोइस परिस्थिति केँ लिए सजधजकर कररही होँ।
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प्रतिमा हवेली मे ऊपरी हिस्से पर्र बनेउस कमरे मे पहुॅची जिस कमरे केँ बेड पऱ इससमय नैना औंधी पड़ी सिसकियाॅ लें लेकर रोयेजा रही थि। प्रतिमा उसेइस तरह रोतेदेख उसकेपास पहुॅची औऱ बेड केँ एक् साइडबैठ करउसे उसके कंधों सें पकड़ अपनीतरफ खींचकर पलटाया। नैना नें पलटने केँ बाद जैसे हि अपनी भाभी कों देखा तोँ झटके सें उठकर उससे लिपटकर रोनेलगी। प्रतिमा नें किसीतरह उसेचुप कराया।
"शान्त होँ जाओ नैना। " प्रतिमा नें गंभीरता सें कहा__"औऱ मुझे बताओ कि आख़िर ऐसा क्याँ हुआ हैं जिसकी वजह सें तुमने दामाद जी कों तलाकदे दिया हैं? देखो पति पत्नि केँ बीच थोड़ी बहोत अनबन तौ होती हि रहती हैं। इसलिए इसमें तलाकदे देनाकोई समझदारी नहि हैं। बल्कि हरबात कों तसल्ली सें औऱ समझदारी सें सुलझाना चाहिए। "
"भाभी इसमे मेरी कहीं भि कोई ग़लती नहि हैं। " नैना नें दुखीभाव सें कहा__"मे तौ हमेशा हि आदित्य कों दिलोजान सें प्रेम करतीरही थि। सभीकुछ ठीकठाक हि थां मगर पिछले छः महीने सें हमारे बीच संबंध ठीक नहि थें। इसकीवजह यह थि आदित्य किसी दूसरी लड़की सें संबंध रखनेलगे थें। जब मुझेइस बात कां पताचला औऱ मैंने उनसेइस बारे मे बात कि तौ वोँ मुझ पऱ भड़कगए। कहनेलगे कि मे बाॅझहूॅ इसलिए अब वोँ मुझसे कोई मतलब नहि रखना चाहते हें। मैने उनसे हज़ारो बारकहा कि अगर मे बाॅझहूॅ तौ मुझे एक् बार डाक्टर कों दिखा दीजिए। पऱ वोँ मेरी सुनने कों रेडी हि नहि थें। तब मैने स्वयं एक् दिन डाक्टर सें चेकअप करवाया। बाद मे डाक्टर नें कहा कि मे बिलकुल ठीकहूॅ यानी बाॅझ नहि हूॅ। मैंने डाक्टर कि वोँ रिपोर्ट लाकर उन्हें दिखाया औऱ कहा कि मे बाॅझ नहि हूॅ। बल्कि बच्चे पैदाकर सकतीहूॅ। इसलिए एक् बार आप् भि अपनाचेक अप करवा लीजिए। मेरीइस बात सें वोँ क्रोध होँ गए औऱ मुझे गालियाॅ देनेलगे। कहनेलगे कि तुँ क्याँ कहना चाहती हैं कि मे हि नामर्द हूॅ?बस भाभी इसकेबाद तौ पिछले छः महीने सें यही झगड़ा चलतारहा हमारे बीच। इस सबकापता जब मेरे सासू ससुरजी कों चला तौ वोँ भि अपने बेटे केँ पक्ष मे हि बोलने लगे औऱ मुझे उल्टा सीधा बोलने लगे। अब आप् हि बताइए भाभी मे क्याँ करती?ऐसे पति औऱ ससुराल वालों केँ पास मे केसेरह सकती थि? इसलिए जब मुझमें ज़ुल्म सहने कि सहन शक्ति न् रही तौ तंगआकर एक् दिन मैने उन्हें तलाकदे दिया। "
नैना कि सारी बातें सुनने केँ बाद प्रतिमा भौचक्की सि उसे देखती रह गई। बहुतदेर तक कोईकुछ न् बोला।
"यह तोँ सच मे बहोत हि गंभीर बात हौ गई नैना। "फिन प्रतिमा नें गहरी साॅस लेकर कहा__"तोँ क्याँ आदित्य नें तलाक केँ पेपर्स पऱ अपने साइनकर दिये?"
"पहले तोँ नहि कररहा थां। " नैना नें अधीरता सें कहा__"फिन जब मैंने यहकहा कि मेरे भाई भाभी स्वयं भि एक् वकील हें औऱ वोँ जब आपको कोर्ट मे घसीटकर लें जाएॅगे तबपता चलेगा उन्हें। कोर्ट मे सबके सामने मे चीखचीख कर बताऊॅगी कि आदित्य सिंह नामर्द हैं औऱ बच्चा पैदा नहि कर सकतातब तुम्हारी इज्जत दो कौड़ी कि भि नहि रह जाएगी। बस मेरेइस तरह धमकाने सें उसनेफिन तलाक केँ पेपर्स पर्र अपने साइन किये थें। "
"मगर मुझेयह समझ मे नहि आँ रहा कि तुम्हें इसबात कां पता पहले क्यूं नहि चला कि आदित्य नामर्द हैं?" प्रतिमा नें उलझन मे कहा__"बल्कि यहसभी अब क्यूं हुआ? क्याँ आदित्य कां पेनिस बहोत छोटा हैं याँ फिन उसके पेनिस मे इरेक्शन नहि होता? आख़िर प्राब्लेम क्याँ हैं उसमें?"
"औऱ सबकुछ ठीक हैं भाभी। " नैना नें सिर झुकाते हुए कहा__"मगर मुझे लगता हैं कि उसके स्पर्म मे कमी हैं। जिसकी वजह सें बच्चा नहि होँ पारहा हैं। मैंने बहोत कहा कि एक् बार वोँ डाक्टर सें चेकअप करवा लें मगर वोँ इसबात कों मानने केँ लिए सजधजकर हि नहि हें। "
"ओह, चलो कोईबात नहि। " प्रतिमा नें उसके चेहरे कों सहलाते हुए कहा__"अब तुम् फ्रेश हौ जाओतब तक मे तुम्हारे लिए गरमा गर्म खानां रेडीकर देतीहूॅ। "
नैना नें सिर कों हिलाकर हामीभरी। जबकि प्रतिमा उठकर कमरे सें बाहर् निकल गई। बाहर् आते हि वो चौंकी क्योंकि अजय सिंह दरवाजे कि बाहरी साइड दीवार सें चिपका हुआ खड़ा थां। प्रतिमा कों देखकर वो अजीबढंग सें मुस्कुराया औऱ फिन प्रतिमा केँ संग हि नीचेचला गय़ा।
भाग हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Aage kya hua? Next part padhiye
Kamaal kamaal kamaal bhay or sab too bhut achaa laga bhay halanki muze iss kahani mai sabse jyada ghatiya kisam k characters teen loug lage Ajay Singh. moorti. Shiva. yeh teeno maha madar**** type k haen
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