♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Awesome update shubham bhay,
behad hi shandaar, lajawab और amazing update h bhay,
ritu ne vidhi और उसकी mummy ko ashvashan दिया h की vo un ladko ko har dasha mai saja dilwayegi,
Doctor ne ritu ko bataya h की vidhi ko last stage kaa blood cancer h,
और isi vajah से vidhi ne viraj ko dhokha dene kaa natak किया thaa, और अब vidhi chahti h की vo marne से pehle एक baar viraj से mil le,
wahi flashback mai vijay ne gauri ko sab kuchh bata दिया h और gauri ne bi ajay के baare mai use bata दिया h,
और gauri ne Raj की kasam देकर use rok लिया h की vo kisi ko kuchh na bataye,
dekhte h अब aage क्या hotha h,
Waiting for next update
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Wow superb emotional update bro. (without flashback back) Kya vidhi suraj से apni marji से sex karwai thi ya Kuchh और Baat thaa.
Bro chota update दो manjur h faltu के flashback likh krr kyo समय barbad krr rahe hu। me too नहीं padh raha ho। Baki aapka marji। Waise Kuchh लोग ko flashback bi अच्छा lag raha h mene comments mai देखा। is liye मेरे Baat pe dhayan mat देना। And present kaa kahani itna mast likh rahe hu फिर ptaa na flashback kyo।
Anyways intejar rahega next update kaa
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 35 》
अब तक,,,,,,,,,,,,
सुभहजब गौरी कि नीद खुली तोँ बगल मे विजय सिंह कों न् पाया उसने। वो समझ गई कि हरदिन कि तरह विजय सिंह खेतों पर्र चलेगए हें। मगर जल्दी हि उसेरात कि बायों कां ख़याल आया। वो एकदम सें हड़बड़ा गई। उसे आशंका हुइ कि विजय सिंह कहीं अपनीशपथ तोड़कर माॅ बाबूजी सें वोँ सभी बताने तौ नहि चलेगए? यहसोच कर गौरीझट सें बेड सें उठी। अपनी सारी कों दुरुस्त करके वो बिना हाॅथ मुॅहधोए हि कमरे सें बाहर् निकल गई।
नीचेआकर देखा तोँ सभीकुछ सामान्य थां। उसे कहीं पर्र भि कुछ महसूस नं हुआ कि जैसेकुछ बात हुईँ होँ। यहदेख कर उसने राहत कि साॅसली। मन मे खुशी केँ भाव भि जागृत होँ गए, यहसोच कर कि विजयजी नें बेटे कि शपथ नहि तोड़ी।
हवेली केँ मुख्य दरवाज़ा कि तरफ जाकर उसने बाहर् लान मे देखा तौ चौंक पड़ी। बाहर् अजय सिंह प्रतिमा व उसके बच्चे सभी वाहन मे बैठरहे थें। ऐसालग रहा थां जैसे वोँ लोगशहर जारहे हों। गौरी कों समझते देर न् लगी कि वोँ लोग इतना जल्द क्यूं यहाॅ सें शहरजा रहे हें। हरबार तौ ऐसा होता थां कि जब भि उसके जेठ व जेठानी शहर जाते थें तब वो उनके पाॅव छूकर आशीर्वाद लेती थि। मगरआज उसनेऐसा नहि किया। बल्कि दरवाजे सें जल्दी हि पलट गई वो, ताकि किसी कि नज़र नं पड़ेउस पऱ। जेठ जेठानी केँ लिए उसकेमन मे नफरतव घृणा सि भर गई थि अचानक। वो पलटी औऱ वापस अपने कमरे कि तरफबढ़ गई।
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अबआगे,,,,,,,,,,,
वर्तमान अबआगे________
रितू विधी सें मिलने केँ बादसाम कों अपनेघऱ हवेली पहुॅची। विधी कि कथा औऱ उसकी बातों नें उसेसच मे अंदर तक हिला दिया थां। वो प्रेम इश्क जैसी चीज़ों कों बकवास हि मानती थि। लेकिन विधी सें मिलने केँ बादउसे इस प्रेम मुहब्बत कि अहमियत समझआई थि। उसेसमझ आया कि केसेलोग किसी केँ प्रेम मे इस क़दर पागल सें हौ जाते हें कि अपने महबूब कि खुशी केँ लिए वोँ कोई भि कामकिस हद सें बाहर् तक कर सकते हें। विधी सें मिलकर औऱ उसके प्रेम कि सच्चाई व गहराई कों जानकर उसे एहसास हुआ कि आज केँ युग मे भि अभि ऐसेलोग हें जौ प्रेम केँ लिए क्याँ नहि कर डालते?
विधी कि हालत औऱ उसके प्रेम कि दास्तां नें रितू केँ अंतर्मन कों झकझोर कररख दिया थां। एक् तेज़ तर्रार लड़की जौ स्वयं कों किसी भि मामले मे लड़कों सें कम नहि समझती थि आज विधी कि असलियत नें उसकेदिल कों छू लिया थां। उसके हृदय मे विधी केँ प्रति पीड़ा जाग गई थि औऱ जिस पीड़ा नें उसकी ऑखों सें ऑसू छलका दिये थें।
वो आज तक नहि समझपाई औऱ नां हि कभी समझने कि कोशिश कि कि क्यूं वो अपने चाचा चाची केँ लड़के विराज सें नफ़रत करती थि? क्यूं उसनेकभी उससेबात करना ज़रूरी नहि समझा? क्यूं उसने हमेशा विराज कों अपना भइया नहि समझा? आख़िर क्याँ अपराध किया थां उसने उसकेसंग? जहाॅ तक उसेयाद थां जबकभी भि विराज उससेबात किया थां तौ बड़ी इज्ज़त सें किया थां। हमेशा उसे दिदी औऱ आप् कहकर संबोधित करता थां।
विधी सें मिलने केँ बाद रितू हवेली मे जाकर सीधा अपने कमरे मे बेड पऱ लेट गई थि। उसकीमाॅ नें तथा उसकी छोटी फूफी नैना नें उससेबात करना चाहा थां मगर उसने सबकोयह कहकर अपनेपास सें वापस लौटा दिया थां कि वो कुछदेर अकेले रहना चाहती हैं।
बेड पऱ पड़ी हुई रितूऊपर छत केँ कुंडे पर्र लगेहुए पंखे कों ताड़रही थि अपलक। उसकी ऑखों केँ सामने विधी कां वोँ रोता बिलखता हुआ चेहरा औऱ उसकी वोँ करुण बातें घूमरही थि।
"मेरी आपसे एक् विनती हैं दिदी। " फिन विधी नें अलग होकरतथा ऑसूभरी ऑखों सें कहा।
"विनती क्यूं करती हैं पागल?" रितू कां गलाभर आया___"तूँ बसबोल। क्याँ कहना हैं तुम्हे?"
"मु मुझे एक् बार। " विधी कि रुलाई फूट गई, लड़खड़ाती आवाज़ मे कहा___"मुझे बसए एक् बार वि.विरा.ज सें मिलवा दीजिए। मुझे मेरे महबूब सें मिलवा दीजिए दिदी। मे उसकी गुनहगार हूॅ। मुझे उससे अपने किये कि माफ़ी माॅगनी हैं। मे उसे बताना चाहती हूॅ कि मे बेवफा नहि हूॅ। मे तोँ आज भि उससेटूट टूटकर प्रेम करतीहूॅ। उसे बुलवा दीजिए दिदी। मेरीइछा हैं कि मेराअगर दम निकले तोँ उसकी हि बाहों मे निकले। मेरे महबूब कि बाॅहों मे दिदी। आप् बुलवाएॅगी न् दिदी? मुझे एक् बार देख्ना हैं उसे। अपनी ऑखों मे उसकी तस्वीर बसाकर मरना चाहती हूॅ मे। अपने महबूब कि खूबसूरत व मासूम सि तस्वीर। "
"बसकररे। " रितू कां हृदय हाहाकार कर उठा___"मुझमें इतनी हिम्मत नहि हैं कि मे तेरीऐसी करुण बातें सुन सकूॅ। मे तुझसे वादा करतीहूॅ कि तेरे महबूब कों मे तेरेपास अवश्य लाऊॅगी। मे धरती आसमान एक् कर दूॅगी विधि औऱ उसे ढूॅढ़ कर तेरे सामने हाज़िर कर दूॅगी। मे अभि सें उसकापता लगाती हूॅ। तुँ बस मेरेआने कां इंतजार करना। "
यह सभी बातें रितू कि ऑखों केँ सामने मानो किसी चलचित्र कि तरहबार बार चलने लगती थि। जितनी बारयह दृष्य उसकी ऑखों केँ सामने सें गुज़रता उतनीबार रितू केँ अंदर एक् हूक सि उठती औऱ उसके समूचे अस्तित्व कों हिलाकर रख देती।
"क्याँ सचमुच प्रेम ऐसा होता हैं विधी?" रितू नें सहसा करवॅट बदलकर मन हि मन मे कहा___"क्याँ सचमुच प्रेम मे लोग अपने महबूब कि खुशी केँ लिएइस हद सें बाहर् तक गुज़र जाते हें? तुम्हें देखकर औऱ तुम्हारी बातें सुनकर तौ ऐसा हि लगता हैं विधी। तुम् सच मे बहोत महान होँ विधी। मेरेउस भइया सें तुमने इसहद तक प्रेम कियाजिस भइया सें मे बात तक करना अपनीशान केँ खिलाफ़ समझती थि। औऱ एक् वोँ थां कि हमेशा मुझे इज्ज़त देता थां, मुझे दिदी कहतेहुए उसकामुह नहि थकता थां। जब भि वोँ मुझसे बात करने कि कोशिश करता तोँ हरबार मे उसे दुत्कार देती थि। मुझेयाद हैं विधी, जब मे उसे दुत्कार करभगा देती थि तब उसकी ऑखों मे ऑसू होते थें। जिन्हें वो ऑखों सें छलकते नहि देता थां बल्कि उन्हें ऑखों मे हि जज़्ब कर लेता थां। मैने तेरे विराज कों बहोत दुख दिये हें विधी। होँ सके तोँ मुझे क्षमा कर देना। "
एकाएक हि रितू कि ऑखों सें ऑसूछलक कर उसके कपोलों कों भिगोने लगे। सहसा जैसेउसे कुछयाद आया। वो जल्दी हि बेड सें उठी औऱ तेज़ी सें बगल मे दीवार सें सटी हुई आलमारी केँ पास पहुॅची। उसने आलमारी कां हैण्डल घुमाया मगर वोँ नं घूमा। मतलबसाफ थां कि आलमारी लाॅक थि।
रितू दूसरी साइडरखे एक् टेबल कि तरफ बढ़ी औऱ उसकीकबड कों खोलकर उसमें सें एक् चाभी कां गुच्छा निकाला। गुच्छा लेकर वो जल्दी आलमारी केँ पास वापस पहुॅची औऱ गुच्छे सें एक् चाभी कों चुनकर उसने आलमारी केँ कि-होल पर्र डालकर घुमाया। आलमारी एकदम सें अनलाॅक हौ गई। रितू नें हैण्डल पकड़कर घुमाया औऱ फिन आलमारी केँ दोनो फटकों कों दोनो साइडखोल दिया।
आलमारी केँ अंदरकई सारे पार्ट्स थें जिनमें कुछ पर्र कपड़े वकुछ पऱ कुछ किताबें व फाइलें रखी हुईँ थि। लेकिन रितू कि नज़रउन सभी पर्र नहि बल्कि आलमारी केँ अंदर मौजूद एक् औऱ लाॅकर पर्र थि। उसने एक् दूसरी चाभी सें उस लाकर कों खोला। उसके अंदर भि कुछ काग़जात जैसे हि थें। एक् प्लास्टिक कां डिब्बा थां। रितू नें उन काग़जातों कों एक् हि बार मे सारा कां सारा बाहर् निकाल लिया।
उन सबको निकाल कर वो पलटी औऱ बेड पर्र उनसब काग़जातों कों फैला दिया। उनमें कुछ रसीदें थि, कुछ एग्रीमेंट जैसे काग़जात थें औऱ कुछ लिफाफे थें। रितू नें झट सें एक् लिफाफा उठा लिया। उसे खोलकर देखा तौ उसमें कुछ फोटोग्राफ्स थें। रितू नें लिफाफे सें सारे फोटोग्राफ्स निकाल लिये औऱ फिन एक् एक् कर देखने लगी। पाॅचछः फोटोग्राफ्स कों देखने केँ बाद रितू एक् दम सें रुक गई। एक् फोटोग्राफ्स पर्र उसकी नज़र जैसेगड़ सि गई थि। कुछदेर देखने केँ बाद उसने बाॅकी सारे फोटोग्राफ्स कों बेड पर्र गिरा दिया औऱ बस एक् फोटोग्राफ्स कों लिए वो बेड पर्र एक् साइडबैठ गई।
फोटोग्राफ्स मे उसके माॅमडैड, नीलम, शिवाएवं वो स्वयं भि थि। लेकिन रितू कि नज़रउन सबके पीछेकुछ दूरी पऱ खड़े विराज पर्र टिकी हुईँ थि। यह फोटोग्राफ्स कुछसाल पहले कां थां। हवेली मे कोई कार्यक्रम थां तब हि शहर सें किसी फोटोग्राफर कों बुलवाया गय़ा थां औऱ यह तस्वीरें खींची गई थि। अन्य तस्वीरों मे बाॅकी सबकी तस्वीरें थि मगर विजय सिंह गौरीव उनके बच्चों कि कोई तस्वीरें नहि थि। इस तस्वीर मे भि ग़लती सें हि विराज कि फोटो आँ गई थि। रितू कों यादआया कि शिवाबार बार विराज सें इसबात पऱ लड़ पड़ता थां कि वोँ उसकेसंग फोटो न् खिंचवाए। मगर उत्सुकतावश वोँ आँ हि जाता थां।
"वि.राज मेरे भइया। " रितू नें अपने एक् हाॅथ सें तस्वीर मे विराज केँ चेहरे पर्र हाॅथ फेरा। उसकी ऑखों सें ऑसूबह चले, बोलि__"मे जानती हूॅ कि तुम्हे भइया कहने कां भि मुझेकोई अधिकार नहि होना चाहिए। मगरबस एक् बार मुझेमिल जा भइया। अपनीइस दिदी केँ लिए नहि बल्कि अपनीउस विधी केँ लिए जिसे तुँ आज भि उतना हि प्रेम करता होगा मे जानती हूॅ। मुझेपता हैं कि आज भि अगर तूँ मुझेमिल जाए तोँ तूँ मुझे उतनी हि इज्ज़त सें केँ संग दिदी कहेगा जैसे पहलेकहा करता थां। औऱ सच कहूॅ तोँ मुझे नाज़ हैं तुझ पऱ कि मेरा भइया हैं। एक् मेरा हैं जिसने मुझे इज्ज़त तोँ दि मगर उसकीउस इज्ज़त मे भि कितनी इज्ज़त होती हैं यह मुझसे बेहतर भला औऱ कौन जानता होगा भइया। पऱ यह तोँ मेरीसोच औऱ मेरे नसीब कि बात हैं मेरे भइया कि जिसने मुझेसच मे इज्ज़त दि उसे मैने हमेशा दुत्कारा औऱ जिसकी इज्ज़त मे भि गंदगी भरी थि उसे अपने सीने सें लगाकर भइयाकहा। ख़ैर, यह सभी छोड़ भइया। यह बता कि कहाॅ हैं तूँ? मुम्बई मे ऐसीकौन सि स्थान पर्र हैं जहाॅ सें मुझे तेरापता मिलजाए? मैने तेरी विधी सें वादा किया हैं भइया कि मे उसके सामने तुम्हें लेँ आऊॅगी। इसलिए भइया मुझे किसीतरह सें मिलजा। "
रितूउस तस्वीर सें जाने क्याँ क्याँ कहेजा रही थि मगरभला वोँ तस्वीर उसको विराज कां पता केसे बताती?
"मैनेकभी इसबात पऱ ग़ौर नहि किया भइया कि क्यूं मेरे अंदर तेरेलिए यह नफ़रत थि? क्यूं मे तुझसे हमेशा मुह मोड़ लेती थि?" रितू करुणभाव सें कहरही थि___"इसकी वजह शायदयह हौ सकती हैं कि बचपन सें हि मेरे माॅमडैड नें मुझे औऱ मेरे भइया बहनों कों तुझसे औऱ तेरे माता पिता व बेहन सें दूर हि रहने कि शिक्षा दि। वोँ हमेशा हमेंयही बताते थें कि तुम् लोग अच्छे लोग नहि हौ। बचपन सें हमेंयही सभी सिखाया पढ़ाया गय़ा थां भइया, इस लिए हम् भि उनकेकहे अनुसार तुम् लोगो सें दूर हि रहे। औऱ जब चाची पऱ वोँ सभी इल्जाम लगा औऱ उन्हें हवेली सें निकाल दिया गय़ा तोँ हम् बच्चों केँ मन मे औऱ भि यहबात बैठ गई कि तुम् लोग वाकई मे अच्छे लोग नहि हौ। मगरआज जब मैंने विधी सें उसके औऱ तुम्हारे प्रेम केँ बारे मे जानां तोँ जाने क्यूं ऐसालगा कि तुम् उतने बुरे तौ नहि हौ सकते मेरे भइया जितना कि आज तक हम् तुम्हें समझते आँ रहे थें। अगर होते तौ कोई भि लड़की तुम्हारे लिए प्रेम मे इसहद तक अपनी कुर्बानी नहि देती। इंसान कि बुराई कभी किसी सें नहि छिपती भइया। अगर तुम् वास्तव मे बुरे होते तोँ क्याँ यहबात विधी कों कभीपता न् चलती? अवश्य चलती भइया, मगर ऐसा नहि थां। वोँ पागल तोँ कहरही हैं कि वोँ तुम्हारी हि बाॅहों मे अपनी आख़िरी साॅस लेना चाहती हैं। आख़िर कुछ तोँ खूबी होगी हि नं तुझमें भइया। मैनेकभी तेरी समझा हि नहि भइया.मुझे क्षमा करदे विराज। "
रितूउस तस्वीर कों अपने सीने सें लगाकर रोएजा रही थि। इस टाइमउसे इस हालत मे देखकर कोई नहि कह सकता थां कि यहवही तेज़ तर्रार रितू हैं जौ अकेले चारचार हट्टे कट्टे लड़कों धूलचटा देती हैं। हौंसले ऐसे बुलंद कि आसमान कि बुलंदी भि क्याँ चीज़ हैं।
तभी उसकाफोन बजा। उसने देखाबेड केँ एक् साइड पऱ रखे आईफोन कि स्क्रीन पर्र कोई नम्बर फ्लैश कररहा थां। रितू नें मोबाइल उठाया औऱ काल रिसीव करउसे कनपटी सें सटाकर कहा___"हैलो। "
"." उधर सें कुछकहा गय़ा।
"यह क्याँ कहरहे होँ तुम्?" रितू केँ चेहरे पऱ चेहरे पऱ चौंकने वालेभाव थें।
"." उधर सें फिनकुछ कहा गय़ा।
"पूरीबात बताओसाफ साफ। " रितू नें कहा।
"." उधर सें कुछदेर तक बताया गय़ा।
"ओहचलो ठीक हैं। " रितू नें कहा__"तुमने बहोत अच्छा काम किया हैं। अब एक् काम औऱ तुम्हें देरही हूॅ। औऱ वोँ काम क्याँ हैं यह तुम्हें तुम्हारे मोबाइल पऱ मेरे द्वारा भेजेगए मैसेज सें पताचल जाएगा। सारेकाम छोंड़ कर तुम्हें यहकाम करना हैं। तुम्हारे पास मात्र औऱ केवलआज रातबस कां वक़्त हैं। कल मार्निंग मे मेरीऑख तुम्हारे मोबाइल करने पर्र हि खुले। यह बात भूलना मत। "
रितू नें कहा औऱ मोबाइल काट दिया। उसनेबेड पऱ बिखरे हुए काग़जातों कि तरफ देखा औऱ फिन उसकी नज़र विराज वाली तस्वीर पर्र पड़ी। उस तस्वीर कों एक् तरफरख कर बाॅकी सारी चीज़ें उसनेउठा कर वापसउसी लाॅकर केँ अंदररख दि औऱ आलमारी बंदकर दि। विराज वाली तस्वीर कों तकिये केँ नीचे सरका वो बेड सें नीचे उतरी औऱ अपने कपड़े उतारने लगी। कुछ हि देर मे वो मात्र पैन्टी औऱ ब्रा मे थि। कपड़े उतारने मे उसे थोड़ी तक़लीफ हुइ थि। क्योंकि पीठ पऱ चाकू कां लछा चीराआज हि कां तोँ थां। वो ब्रा पैन्टी मे किसी हालीवुड कि सुपर माॅडल सें कम नहि लगरही थि। उसने जल्दी हि बाथरूम कि तरफ रुख़ किया। बाथरूम सें फ्रेश होने केँ बाद वो पुनः कमरे मे आई औऱ दूसरे कपड़े पहनकर वो कमरे सें बाहर् निकल गई। बेड सें फोन मोबाइल उठाना नहि भूली थि वो। पीछे साइडकमर मे सर्विस रिवाल्वर छुपाहुआ थां उसके।
कुछ हि देर मे वो डायनिंग हाल मे पहुॅच कर एक् कुर्सी पऱ बैठ गई।
"माॅमअगर खानां तैयार हौ तोँ जल्द सें दे दीजिए मुझे। " उसने किचेन कि तरफमुह करके ज़रा ऊॅची आवाज़ मे कहा थां।
"बसदो मिनट बेटी। " किचेन सें प्रतिमा कि आवाज़ आई।
ठीक दो मिनटबाद हि रितू केँ सामने बड़ी सि टेबल पऱ एक् थालीरख दि गई। थाली लाने वाली नैना थि।
"तौ अकेले रहने सें उकता गई हमारी पुलिस वाली रितू बेटी?" नैना नें ज़रा मुस्कुराते हुएकहा थां।
"कुछ चीज़ों केँ लिए तन्हाॅई सबसे अच्छी होती हैं फूफी। " रितू नें रोटी कां एक् निवाला तोड़ते हुए कहा___"अगर यही तन्हाई हमें काटती हैं तौ यही तन्हाई कभीकभी हमें बड़ाचैन भि देती हैं। "
"ओहो क्याँ बातकही हैं तुमने। " नैना नें हैरानी सें कहा___"इतनी गहरीबात यूॅ हि तौ तुम्हारे दिमाग़ मे नहि आई होगी?आई नोकुछ तौ वजह हैं इसकी। इस लिएअगर उचित समझो तोँ अपनीइस फूफी कों बताओफिन। "
"अवश्य बताऊॅगी फूफी। " रितू नें अजीबभाव सें कहा___"पऱ आज नहि। पहले मे स्वयं भि तौ इसकीवजह समझलूॅ। आख़िर मुझे भि तोँ समझआए कि इतनी गहरीबात मेरे दिमाग़ मे आई केसे? क्योंकि यहसभी बातें तौ उनके हि दिमाग़ मे आती हें जोँ ज़रा गंभीर तबीयत कां होता हैं फिन सबसेअलग रहना पसन्द करता हैं। "
"ओहो अनादर वन। " नैना मुस्कुराई___"सच सचबता किसी लड़के सें कोई चक्कर वक्कर तौ नहि चल गय़ा? वैसे जहाॅ तक मे तुम्हारी तरफ समझती हूॅ तौ ऐसा प्वासिबल हैं नहि। कोई पागल हि होगा जौ तुमसे प्रेम कां राग अलापेगा। वरना अपने हाॅथपेर कि हड्डियाॅ तोँ सबको प्यारी हि होती हें। "
"व्हाट डूयूमीन फूफी?" रितू कि ऑखेंफैल गई___"मतलब आप् यह समझती हें कि मे कोई बैंडिड क्वीन हूॅ जौ किसी कि भि हड्डियाॅ तोड़ दूॅगी?"
"अरे तुम् तौ नाराज़ होँ गई मेरीडाल। " नैना नें हॅसकर कहा___"मेरा वोँ मतलब नहि थां रे। आईवाज जस्ट किडिंग डियर। "
"कोई बात बेवजह हि मुख सें नहि निकला करती फूफी। " रितू सहसा गंभीर हौ गई__"हरबात केँ पीछे उसकाकोई नं कोई मतलब भि छिपा होता हैं। औऱ यहबात भि आपने मेरे कैरेक्टर कों देखकर हि कही हैं। मे मानती हूॅ फूफी कि मुझे लड़के लड़कियों केँ बीच कि यह चोंचलेबाज़ी शुरुआत सें हि मनपसंद नहि थि मगरयह भि सच हैं फूफी कि मेरे सीने मे भि एक् दिल हैं। जौ धड़कना जानता हैं। उसको भि यह एहसास होता हैं कि प्रेम क्याँ हैं औऱ नफ़रत क्याँ हैं?"
नैनाकुछ बोल नं सकी बल्कि आश्चर्य सें रितू कों देखती रह गई। उसे अहसास हुआ कि उसकी बड़ी भतीजी आज गंभीर हैं। औऱ शायद बहोत ज़्यादा गंभीर हैं। पर्र किसलिए यहउसे समझ नं आया।
"क्याँ बातें हौ रही हें फूफी भतीजी केँ बीच ज़रा मुझे भि बताओ?" प्रतिमा नें किचेन सें आतेहुए कहा थां।
"कुछ नहि माॅम। " रितू नें सहसा सामान्य होकर कहा___"फूफी पूछरही थि कि अबरात मे मे कहाॅजा रहीहूॅ?"
"क्याँ???" प्रतिमा तोँ चौंकी हि मगर नैना उससे अधिक चौंकी थि, जबकि प्रतिमा नें कहा___"तुम् इस टाइमअब कहाॅजा रही होँ?"
"कुछ ज़रूरी काम हैं माॅम। " रितू नें सामान्य भाव सें कहा___"आप् तौ जानती हें कि पुलिस कि जॉब मे किसी भि वक़्त कहीं भि जानां पड़ जाता हैं। "
"मुझे तौ तुम्हारा यह पुलिस कि जॉब करना शुरुआत सें हि नापसंद थां बेटी। " प्रतिमा नें बुरा सां मुहबना कर कहा__"मगर मेरीबात मानता हि कौन हैं यहाॅ? जिसे जोँ करना हैं करे। "
"शुरुआत सें आपकी औऱ डैड कि बात मानते हि तौ आँ रहे हें माॅम। " रितू केँ मुह सें जानेयह केसे निकल गय़ा__"अब अगर एक् काम मैने अपनी खुशी सें कर लिया तोँ क्यूं ऐतराज़ होँ गय़ा आपको?"
"क्याँ मतलब हैं तुम्हारा?" प्रतिमा नें हैरानी सें ऑखें फैलाकर कहा___"औऱ यहकिस लहजे मे बातकर रही होँ तुम्? दिमाग़ तौ सही हैं नां तुम्हारा?"
"पता नहि माॅम। " रितू नें हाॅथ धोतेहुए अजीबभाव सें कहा___"कभी कभी सोचती हूॅ कि इसी हवेली केँ अंदरकभी परिवार केँ सारेलोग कितना हॅसी खुशी सें रहा करते थें। मगर जानेऐसा क्याँ होँ गय़ा कि आजइस हवेली मे केवल हम् रहगए। बाॅकियों कों यह ज़मीन खा गई याँ फिन आसमान निगल गय़ा कुछसमझ हि नहि आया आजतक?"
"आज यह क्याँ होँ गय़ा हैं तुझेही?" प्रतिमा कि हवा निकल गई थि अंदर हि अंदर, बोलि__"यह कैसी फालतू कि बातें कररही हैं तूँ?"
"कमाल हैं नं माॅम?" रितू नें फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा___"आज आपको अपनी हि बेटी कि बात फालतू लगरही हैं। सुना हैं कि कोईअगर ग़लती करदे तौ उसे आख़िर मे क्षमा हि कर दिया जाता हैं। मगरकुछ ऐसे भि बेचारे बदनसीब होते हें जिनको कोई क्षमा भि नहि करता। सुना तौ यह भि हैं माॅम कि परिवार अगर किसी कारण सें एक् दूसरे सें अलग हौ जाता हैं याँ बिखर जाता हैं तोँ परिवार केँ सरदार हर संभवयही प्रयास करता हैं कि उसका बिखरा हुआ परिवार फिन सें जुड़जाए। कदाचित तभी एक् सच्चे सरदार केँ दिल कों चैन मिलता हैं। कहते हें कि हर परिवार केँ बीचकभी न् कभीकोई नं कोई अनबन होँ हि जाती हैं मगर उसका मतलबयह तोँ नहि होता नं कि फिन उनसेहर नाता हि तोड़ लियाजाए? याँ फिनउस अनबन कों दूर हि न् कियाजाए। "
"तूँ आख़िर कहना क्याँ चाहती हैं?" प्रतिमा नें तीखेभाव सें कहा___"क्याँ चलरहा हैं तेरेमन मे? अगरकोई बात हैं तौ उसेसाफ साफकह। यूॅ घुमा फिराकर कहने कां क्याँ मतलब हैं तेरा?"
"जाने दीजिए माॅम। " रितू कुर्सी सें उठतेहुए बोलि___"मे क्याँ कहरही हूॅ वोँ आप् समझ तौ गई हि हें नं? फिनसाफ साफ कहने कि क्याँ ज़रूरत हैं? ख़ैर चलतीहूॅ माॅम। बाय डियर फूफी जी। "
"बाय बेटा। " नैना नें रुॅधे हुएगले सें कहा। उसकी ऑखों मे ऑसूतैर रहे थें।
"पुलिस कि जॉब क्याँ करनेलगी इसका सारा दिमाग़ हि ख़राब होँ गय़ा हैं। " प्रतिमा भुनभुनाते हुए टेबल सें थाली उठाते हुए कहा___"पता नहि कहाॅ सें ऐसी बेकार कि बातें सीखकर आती हैं यह?"
"सच हि तोँ कहरही थि वोँ। " नैना नें गंभीरता सें कहा___"भला ऐसाकिस परिवार मे होता हैं भाभी कि अगर परिवार मे किसी सें कोई ग़लती हौ जाए तौ उसेकभी क्षमा हि न् कियाजाए? कितनी खुशियाॅ थि इसघऱ मे। हम् सभी कितना हॅसी खुशी सें रहते थें सबकेसंग। परिवार मे सबकी एकता कों देखकर माॅ बाबूजी कितना खुश थें। मगरआज इसघऱ मे नं वोँ खुशियाॅ हें औऱ न् हि खुशियाॅ फैलाने वाला परिवार कां कोई बाॅकी सदस्य। विजय भाई कि मौत क्याँ हुई मानोइस घऱ सें खुशियाॅ हि चली गई। माॅ बाबूजी आज भि कोमा सें बाहर् नहि आए। अगर कोई पूछे कि इस सबका जिम्मेदार कौन हैं तोँ किसका नाम लियाजाए?"
"अभि एक् यहीराग अलापकर गई हैं औऱ अब तुम् भि यहीराग अलापने लगी नैना?" प्रतिमा कि भृकुटी तन गई__"औऱयह क्याँ कहरही होँ तुम् कि इस सबका जिम्मेदार कौन हैं औऱ किसका नाम लियाजाए? इसबात कां क्याँ मतलबहुआ? क्याँ तुम् यह कहना चाहती हौ कि इस सबके जिम्मेदार हम् हें?"
"मैनेऐसा तौ नहि कहा भाभी। " नैना नें अधीरता सें कहा___"पर्र एक् बात तौ सही हैं न् कि जौ परिवार कां बड़ा सदस्य होता हैं उसे सबको एक् संग मे लेकर चलना चाहिए? घऱ केँ सरदार तौ अजय भाई औऱ आप् हि हें। गाॅव समाज केँ लोग तौ यही कहेंगे न् कि छोटेअगर नासमझ थें याँ कोई ग़लती कररहे थें तोँ यह बड़े कां फर्ज़ थां कि छोटे कों उसकी ग़लती पऱ एक् बार क्षमा हि कर देना चाहिये थां। लोग तोँ कहेंगे नं भाभी कि किसी ग़लती कि इतनी बड़ी सज़ा नहि देना चाहिए कि छोटे सें हर नाता तोड़कर उसेघऱ सें बेदखल हि कर दियाजाए। "
"कुछ ग़लतियाॅ ऐसी होती हें नैना जिनके लिएकोई मुआफ़ी नहि होती। " प्रतिमा नें ठोस लहजे मे कहा___"बल्कि अगरउन ग़लतियों कों नज़रअंदाज़ कर दियाजाए तोँ उससेसभी कुछ बरबाद हौ जाता हैं। तुम्हारे भाई नें क्याँ नहि कियाइस परिवार केँ लोगों कों एक् करने केँ लिएमगर हुआ क्याँ? नैना, हमारी अच्छाईयाॅ औऱ कुर्बानियाॅ कोई नहि देखेगा बल्कि केवलयही देखेगा कि हम् परिवार कों एक् नहि करपाए। "
"कल पड़ोस कि वोँ कमला भाभी मुझे मिली थि आते टाइम। " नैना नें कहा___"मुझे देखकर उसने आवाज़ दि मुझे। उससे थोड़ी देर बातें हुई। उसकी बातों कां असल मुद्दा हमारे परिवार सें हि थां। "
"क्याँ कहरही थि वोँ?" प्रतिमा केँ कान खड़े होँ गए।
"कहरही थि कि मझली ठकुराईन(गौरी) तोँ ऐसी थि हि नहि। " नैना नें कहा___"वोँ दोनो मियां पत्नि तौ बड़े धर्मात्मा इंसान थें। दूरदूर तक उनकी अच्छाई औऱ उनके उच्च आचरण कि चर्चा होती थि। आज भि कोई यकीन नहि करता कि मझली ठकुराइन नें ऐसाकोई नीचकाम अपने जेठ केँ संग किया होगा। "
"उस कलमुही कों क्याँ पता?" प्रतिमा नें सहसा गुस्से मे कहा___"वोँ क्याँ यहाॅ देखने आई थि कुतिया? जबकि मैने अपनी ऑखों सें देखा हैं। पहले भि कईबार मैने गौरी कों ऐसे हि चोरी चोरीअजय केँ कमरे मे जाते देखा थां। मैनेइस बारे मे अजय सें भि बताया थां औऱ अजय सें यह भि कहा थां कि उससेदूर रहना। पति मर गय़ा हैं तोँ अब उससे अपनेबदन कि गरमी बर्दास्त हि नहि होँ रही हैं। इसीलिए अब वोँ मेरे पति पऱ डोरेडाल रही हैं। एक् दिन तोँ मैने अपने कमरे हि उसे सारी उतारे हुए अपने भोसड़े मे उॅगली करतेहुए पकड़ लिया थां। वोँ तोँ अच्छा थां कि मे कमरे मे पहुॅच गई थि वरनाअगर कहीं तुम्हारे भाई पहुॅच गए होते तोँ क्लेश हि होँ जानां थां उसदिन। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि गौरी कों उसकीइस नीच हरकत करने सें केसे रोंकूॅ? किसी सें कह भि नहि सकती थि। क्योंकि कोई मेरी बातों कां यकीन हि नहि करता। उल्टा मुझ पऱ हि दोषारोपण लग जाता। इस लिए मैने सोचा कि इसबार जब गौरीऐसी कोई हरकत करेगी तोँ मे उसकीइस नीचता कां सबूत सजधजकर करूॅगी। अजय शिवा केँ लिए एक् कैमरा लाए थें। कुछदिन बाद हि मुझेफिन सें गौरी कि हरकत कां पताचल गय़ा। मे जब कमरे मे गई तौ अंदर सें आवाजें आँ रही थि। मैने कमरे कों हल्का अंदर कि तरफ धकेलकर देखा तौ गौरीअजय केँ ऊपर चढ़ी हुई थि। जबकि अजयउसे डाॅटे जारहे थें औऱ उसे अपने सें दूरकर रहे थें। मैने सोचा इससे बड़ा सबूत औऱ क्याँ होगा। मे जल्दी शिवा केँ कमरे मे गई औऱ उसका कैमरा उठालाई। अपने कमरे केँ दरवाजे केँ पास पहुॅच कर मैने अंदरचल रहे काण्ड कि फोटो खींची। मे औऱ भि फोटो खींचना चाहती थि। मगर कैमरे मे रील ख़त्म हौ चुकी थि। शायद शिवा नें पहले हि सारीरील समाप्त कर दि थि। शुकर थां लास्ट कि एक् बची थि। उसमें एक् हि फोटो खींची मैने। उसकेबाद फिन मे अंदर गई औऱ उस गौरी कि चुटिया पकड़कर उसेअजय केँ ऊपर सें खींचकर नीचेलाई। मे बहोत गुस्से मे थि इसलिए पहले मैनेउसे वहीं पर्र पीटाफिन बाहर् लेकरआई। साली कितनी कमीनी औऱ निर्लज्ज थि कि वैसानीच काम करने केँ बाद भि उल्टा यही बोलेजा रही थि कि मैनेकुछ नहि किया मुझे फॅसारहे हें यहसभी मिलकर। तौ यह थि उस जलील औऱ कुलटा स्त्री कि करतूत। "
नैना प्रतिमा कि यह लम्बी चौड़ी बातसुन कर हैरान नहि हुइ क्योंकि यहबात प्रतिमा पहले भि सबसेबता चुकी थि। पर्र उसे नं पहले उसकीबात पर्र यकीन थां औऱ नाँ हि आज यकीन हौ रहा थां। मगर वोँ इसके खिलाफ़ कुछकह नहि सकती थि। क्योंकि उसके खिलाफ़ कुछ बोलने केँ लिए भि कोई नं कोई आधार केँ रूप मे सबूत चाहिए थां जोँ कि उसकेपास भला केसे हौ सकता थां। नैना औऱ सौम्या दोनो बहनों कों तौ यहसभी बाद मे बताया गय़ा थां।
"यहबात तौ वोँ कमला भाभी भि कहरही थि कि मझली ठकुराईन कों जानबूझ कर फॅसाया गय़ा थां। " नैना नें कहा___"वोँ कहरही थि गाॅव कां हर ब्यक्ति यही कहता हैं कि उन्हें फॅसाया गय़ा थां। "
"भलाउसे कोई क्यूं फॅसाएगा नैना?" प्रतिमा नें झुॅझला कर कहा___"वोँ हमारी कोई दुश्मन तोँ नहि थि औऱ नाँ हि हमारा उससेकोई बैर थां। फिनभला उसे क्यूं कोईजान बूझकर फॅसाएगा? गाॅव केँ लोगों कों तोँ बस बातें बनाना आता हैं नैना। यह किसी केँ भि बारे मे अच्छा नहि सोच सकते। "
"ख़ैर जाने दीजिए भाभी। " नैनाभला अब क्याँ कहती___"सभी कुछ टाइम पर्र छोड़ दीजिए। जोँ जैसा करेगा वोँ उसकाफल तौ पाएगा हि। "
"यहअजय अब तक नहि आए। " प्रतिमा नें पहलू बदला___"वोँ भि आँ जाते तौ हम् सभीमिल कर डिनरकर लेते। "
"आते हि होंगे भाभी। " नैना नें कहा___"फैक्टरी कों रिन्यू कराने मे बहुत ब्यस्त हें वोँ आजकल। "
इनकेबीच बसऐसी हि थोड़ी देर बातें होतीरही। कुछदेर बाद हि अजय सिंह आँ गय़ा थां।
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उससमय रात केँ नौबजे थें जब रितू पुनः अपने फार्महाउस पऱ पहुॅची थि। लोहे वालेगेट पऱ दो बंदूखधारी ब्यक्ति खड़े। रितू कि वाहन कों देखते हि दोनो नें गेट कों खोल दिया। गेट केँ खुलते हि रितू नें वाहन कों गेट केँ अंदर कि तरफ बढ़ा दिया औऱ फिन वोँ सीधा पोर्च मे हि रुकी। वाहन सें बाहर् आँ कर रितू नें वाहन कों लाॅक किया। तब तक वोँ दोनो बंदूखधारी भि आँ गए।
"क्याँ समाचार हैं काका?" रितू नें एक् सें पूछा।
"समाचार बढ़िया हैं बिटिया। " काका नें कहा___"जैसा तुमने कहा थां वैसा हि कर दिया हैं हमने। वोँ सभी वहीं तहखाने मा रस्सी सें बॅधेहुए हें। कुछदेर पहले हि हम् जाकर देखे थें तोँ सभीहोश मे आँ गए थें। सबनेजब स्वयं कों अजनबी स्थान पर्र इसतरह रस्सियों सें बॅधाहुआ पाया तोँ सभी केँ सभी रोनेलगे बिटिया। हमकादेख केँ पूछनलगे कि यह हमें कहाॅ लें आयागवा हैं औऱ ईतरह रस्सी सें काहे बाॅथा गवा हैं?"
"अच्छा, चलोफिन उनको जवाब भि दे देते हें न् काका। " रितू नें ज़हरीली मुस्कान केँ संग कहा___"क्याँ विचार हैं आपका?"
"हम् तौ एक् हि बात जानत हें बिटिया कि ऐसे ससुरजी केँ नातियों कों बीच चौराहे पऱ नंगा करके गोलीमार दैं। " काका नें गर्मजोशी सें कहा___"ऐसे लोगन कां जीयै कां कौनव अधिकार नहि हैं। "
"बात तौ आपकी बिलकुल दुरुस्त हैं काका। " रितू नें कहा___"मगर यह तोँ बहोत आसानमौत होगी नं उन सबकेलिए?"
"हाॅईबात तोँ हैं बिटिया। " शंकर काका नें कहा___"तौ फिनऐसा करत हें कि ससुरों कों तड़पा तड़पा केँ मारते हें। "
"शंकर काकायह तोँ आपने बिलकुल ठीककहा। " रितू मुस्कुराई___"हरिया काका तोँ एक् हि बार मे गोलीमार देने कों कहरहे थें। "
"अरेऊता हम् जल्दबाज़ी माअउर एकदम सें गुस्से माकह दियेरहे बिटिया। " हरिया काका नें झेंपते हुए कहा___"वरना ईबातता हम् ई सरवा शंकर सें पहले हि कह देते। "
"चलो कोईबात नहि काका। " रितू नें कहा__"अब तौ कह दिये न् आप्? अबचलो उनको देखे ज़रा। "
"अउर कुछूसंग मा लेके चलैं कां हैं कां बिटिया?" हरिया काकाझट बोल पड़ा थां।
"औऱ क्याँ लेँ चलना हैं भला?" रितू चकराई।
"अरे बाल्टी मा पानी लेँ चलत हें नाँ बिटिया। " हरिया नें कहा__"ऊ कां हैं नाँ, हमका अइसन लागत हैं कि उहाॅ जाइके तुम् उन सबको बहुतै धुनाई करोगी। ता थुनाई मा कउनौ सारे बेहोश होईगै तौ? उनकाहोश मा लाने कि खातिर पानीता चाहिए नां बिटिया। "
"क्याँ बात हैं काका। " रितूहॅस पड़ी___"क्याँ दिमाग़ लगाया हैं आपने। मानना पड़ेगा आपको। दिमाग़ बहोत तेज़ हैं आपका। "
रितू कि प्रसंसा पाने सें हरिया काकातन कर चलनेलगा। वो शंकर कों इसतरह देखने लगा थां जैसेअब उसके सामने उसकीकोई औकात हि नहि हैं। शंकरउसे इसतरह अकड़ते हुए चलतेदेख बुरा सां मुहबना कररह गय़ा।
"पऱ काका। " रितू नें कहा___"मुझे लगता हैं कि आपकायह दिमाग़ काकी कि वजह सें तेज़हुआ हैं। "
"अरे कां बात करती होँ बिटिया?" हरिया काका नें नागवारी भरेभाव सें कहा___"ऊ ससुरी तोँ शुरुआत सें हि दिमाग़ सें पैदल हैं। हमरेसंग रहरह केँ हि तौ थोडा बहोत दिमाग़ आँ गवा हैं उसमे। "
"ओए तूने भाभीजी कों ससुरी बोला?" शंकर नें झड़पकर कहा हरिया सें___"रुक अभि जा केँ बताता हूॅ उनसे। "
"अबे रुकजा बे खबीस। " हरिया काका कि सारी अकड़तेल लेनेचली गई___"सरवा मरवाएगा कां हमका?"
"हाॅ तोँ भाभीजी कों ससुरी क्यूं बोला?" शंकर अभि भि उसे घुड़कता बोला__"औऱ क्याँ बोला कि तेरेसंग रहरहकर हि उनमें थोडा बहोत अकलआई हैं। साला झूॅठा कहीं कां। "
"तूँ नां अबमुह बंद हि कर लेँ समझा। " हरिया भि तावखा गय़ा___"वरना उल्टा तुम्हें हि पिटवा दूॅगा मे उस ससुरी सें। "
"वोँ केसेभला?" शंकर बुरीतरह हैरान।
"अरे हम् कह देंगे कि यह शंकरवा तुम्हें कहतरहा कि अब भौजी ससुरी बुड्ढी होई गई हैं। " हरिया नें कहा___"अउर यह भि कह देंगे कि मोटीभैस जइसनहोई गई हैं। "
"ओयेयह मैनेकब कहा?" शंकर परेशान।
"नहि कहाता कां हुआ?" हरिया बोला__"हम् ताकह देंगे नं कि ई शंकरवा अइसनै कहतरहा। "
"देखा रितू बिटिया। " शंकर नें मानो रितू सें गुहार लगाई___"यह जबरदस्ती मुझे अपनी जोरू सें पिटवाना चाहता हैं। "
"चिन्ता मत कीजिए काका। " रितू नें कहा___"केवल आप् हि बस नहि पिटेंगे बल्कि आपकेसंग संग हरिया काका भि काकी सें पिटेंगे। "
"अरेई कां कहत होँ बिटिया?" हरिया काका नें हड़बड़ा कर कहा___"हम् भला काहे पिटेंगे ऊ ससुरी सें?"
"वोँ इसलिए कि मे काकी सें बताऊॅगी कि काका आपकोजब देखोतब दिमाग़ सें पैदल औऱ ससुरी ससुरी कहते रहते हें। " रितू नें कहा___"आपकी तोँ कोई इज्ज़त हि नहि करतेयह दोनो। फिन देख्ना काका, केसे आप् दोनो कां हाल बनाएॅगी काकी। "
"अरे हमका क्षमा करदो बिटिया। " काका नें दोनो हाॅथ जोड़लिए बोला___"ई सभी नां ई शंकरवा कि कारणहोई जात हैं। वरना हम् ता बिंदिया कि बहोत इज्जत करत हें। ऊता हमरीजान हैं, प्राण प्यारी हैं बिटिया। "
"अच्छा छोड़ो यहसभी। " रितू नें कहा__"अब चलिये उन सबकाहाल चाल भि तौ देख्ना हैं। "
"ठीक हैं बिटिया चलो। " हरिया नें कहा औऱ फिन वोँ रितू केँ पीछेचल दिया। जबकि शंकर लोहे वालेगेट कि तरफबढ़ गय़ा।
कुछ हि देर मे रितू औऱ हरिया काका तहखाने मे पहुॅचे। तहखाना बहुत बड़ा थां। वहाॅ पऱ सामान तोँ कुछ नहि थां बस ज़मीन पऱ सीलन जैसा प्रतीत होता थां। दीवार केँ चारोतरफ बल्बलगे हुए थें। एक् तरफ कि दीवार सें सटे वोँ चारो रस्सी मे बॅधे खड़े थें। सब केँ हाॅथों कों ऊपर करके बाॅधा गय़ा थां औऱ पैरों कों नीचे विश्राम कि पोजीशन मे चारों लड़कों केँ पैरों सें जोड़ते हुए बाॅधा गय़ा थां। मगर उनमें सें कोई भि अपने पैरों कों हिला नहि सकता थां। दोनोतरफ कि दीवारों पर्र एक् एक् तरफ सें पैरों मे बॅधी रस्सी कों खींचकर बाॅधा गय़ा थां।
उन चारों कि हालत बहोत हि अजीब हौ गई थि। डर औऱ दहशत सें उनसब कां बुराहाल थां। पहले सें हि रितू कि मार सें लहू लुहान थें वोँ चारो औऱ अबइसडर वभय नें उनकी हालत खराबकर दि थि जाने वोँ यहाॅ केसे औऱ क्यूं लाएगए हें। यह तोँ वोँ भि समझ चुके थें कि उनकेसंग कुछ बहोत हि बुरा होने वाला हैं।
तहखाने मे दोतरफ केँ बल्बजल रहे थें। इसलिए तहखाने मे बहुत रोशनी थि। पसीने तथपथउन चारों केँ चेहरों कों बखूबी देखाजा सकता थां। रितू औऱ हरिया काका जैसे हि तहखाने मे पहुॅचे तोँ उन चारो नें उनकीआहट सें अपनी अपनी गर्दन उठाकर सामने देखा। रितू पर्र नज़र पड़ते हि सबकी घिग्घी बॅध गई। चेहरे पर्र डर केँ मारे हल्दी सि पुत गई। जूड़ी केँ मरीज़ कि तरफ एकदम सें काॅपने लगे थें वोँ चारो।
"काकाइन लोगों कि खातिरदारी नहि कि क्याँ आपने?" रितू नें उन चारों कों एक् एक् नज़र देखने केँ बाद हरिया सें कहा थां।
"अरे हमरामन ता बहोत रहा बिटिया। " हरिया नें कहा___"मगर ऊ कां हैं न् हमका परमीशॅनवा हि मिला थां। वरना हम् ताइन ससुरन कि अइसन पेलाई करते कि ई ससुरे यहींपषर टट्टी कर देते। "
"चलो अच्छा हुआ काका जौ मैने आपको परमीशन नहि दि थि। " रितू नें कहा___"वर्ना अगरयह टट्टी कर देते तौ साफ भि तोँ आपको हि करना पड़ता न्?"
"अरेहाॅ बिटिया। " हरिया नें हैरानी सें कहा___"ईता हम् सोचे हि नहि। पऱ कउनवबात नहि बिटिया। हम् तासाफ न् करतेमगर ईसभी ससुरे लोग जरूरसाफ करते। अउर नाँ करते तोँ हम् ई ससुरन कां अउर अच्छे सें पेलते। "
रितू नें हरिया कि बात पऱ ज़्यादा ध्यान नहि दिया बल्कि वो ऑखों मे आगलिए उन चारो कि तरफ बढ़ी। उन सबकी हालत बड़ी हि दयनीय होँ गई। उन सबकी टाॅगें इसतरह काॅपने लगी थि जैसेउन पर्र अब उनकाकोई ज़ोर हि न् रह गय़ा हौ।
"क्याँ सोचा थां तुम् सबने? रितू केँ मुख सें शेरनी कि सि गुर्राहट निकली___"इतने सारे गुनाह करके तुम् सभी बड़े मज़े मे रहोगे?? कोई तुम्हारा बाल बाॅका कर हि नहि सकता?"
"ह हमें क्षमा करदो। " सूरज चौधरी नें गिड़गिड़ाते हुए कहा___"हम् किसी केँ संगकोई भि ग़लतकाम नहि करेंगे अब। "
"करोगे तोँ तबजब करने केँ लिए ज़िंदा बचोगे। " रितू नें बर्फ कि मानिन्द ठंडे स्वर मे कहा___"अब तोँ तुम् चारों कां रिज़र्वेशन हौ गय़ा हैं नरक मे जाने कां। मगर चिन्ता मतकरो क्योंकि नरक मे यहाॅ सें ज़्यादा तुम् लोगों कों यातनाएॅ नहि सहनी पड़ेगी। "
"नहि नहि। " रोहित बुरीतरह रो पड़ा__"हमें कुछमत करो प्लीज़। हम् मरना नहि चाहते। आँ आख़िर किसवजह सें तुम् हमारे संगयह सभीकर रही होँ? हमें यहाॅ सें जानेदो इंस्पेक्टर वरना तुम् नहि जानती कि हमेंइस तरह यहाॅ बंधकबना कर रखने सें तुम्हारा क्याँ अंजाम होँ सकता हैं?"
"औऱ तुम्हें भि यह अंदाज़ा नहि हैं लड़के कि मे तुम् सबके बापों केँ संग क्याँ कर सकतीहूॅ?" रितू नें सहसा रोहित केँ सिर केँ बाल कों मुट्ठी मे पकड़कर खींचते हुए कहा___"अगर मे चाहूॅ तौ इसी वक़्त तुम्हारे बापों बीच चौराहे पर्र नंगा करके दौड़ाऊॅ। मगर फिलहाल यहबाद मे अभि तोँ तुम् सबकेसंग हि हिसाब पुस्तक करना हैं। "
"हरामज़ादी कुतिया साली हमारे बाप कों बीच चौराहे पऱ नंगा दौड़ाएगी तुँ। " सहसा सूरज चौधरी गुर्रा उठा___"एक् बार मेरे हाॅथपेर खोलदे फिनदेख तेरा क्याँ हस्र करताहूॅ मे?"
"देखा थां सुअर कि औलाद। " रितू नोंकदार बूट कि ठोकर ज़ोर सें सूरज केँ पेट मे मारते हुएकहा। सूरज केँ मुख सें हलाल होते बकरे कि सि चीखें निकली जबकि रितू बोलीं__"उस दिन तेरी मर्दानगी भि देखी थि। तुम् सबकी देखी थि। उसी कां नतीजा हैं कि आज यहाॅ बॅधे पड़े होँ। "
"हमें छोड़दो इंस्पेक्टर। " किशन नें गुहार लगाते हुए कहा___"आख़िर हमने किया क्याँ हैं? किसलिए हमें यहाॅ लाकर हमारे संगयह सभीकर रही होँ तुम्?"
"काका, इसे पता हि नहि हैं कि इसने किया क्याँ हैं?" रितू नें कहा___"यह सालाऐसा शरीफबन रहा हैं बहनचोद जैसे इसनेकभी किसी चींटी तक कों चोंट न् पहुॅचाई हौ। "
"ज़ुबान सम्हाल करबात करो इंस्पेक्टर। " सहसा सूरजकह उठा___"औऱ यादरखो कि अगर हममें सें किसी कों भि कुछहुआ तोँ उसका खामियाजा तुम्हें औऱ तुम्हारे पूरे खानदान कों भुगतना होगा। "
"मेरे खानदान कि तूँ फिक्र मतकर। " रितू नें कहा___"मेरे खानदान तक जाने कि ज़रूरत नहि हैं। क्योंकि तेरे औऱ तेरे बाप कों कुत्ते कि मौतमार देने केँ लिए मे हि बहुतहूॅ। तुम् चारों कों ऐसा तड़पा तड़पा कर मारूॅगी कि मौत कि भीख माॅगोगे मगरमौत दूॅगी नहि आसानी सें। "
"पऱ यह तोँ बताओ इंस्पेक्टर। " अलोक वर्मा केँ तिरपन काॅपगए, बोला___"हमने ऐसा किया क्याँ हैं जिसके कारण तुम् हमारे संगऐसा ब्यौहार कररही हौ?"
"हाॅहाॅ बताती क्यूं नहि हमें?" किशन नें अलोक कि बात मे कहा___"हमें भि तौ पताचले कि हमनेऐसा किया क्याँ हैं?"
"विधी चौहान याद हैं???" रितू नें अलोक कां गिरहबान पकड़कर झिंझोड़ा___"वही विधी चौहान जोँ तुम् लोगों केँ संग हि काॅलेज मे पढ़ती थि, औऱ जिसके संग तुम् चारों नें मिलकर गैंगरेप किया थां? कुछयाद आया याँ फिन इतना जल्दभूल गएसभी?"
चारों केँ दिलो दिमाग़ मे जैसे विष्फोट हुआ। दिमाग़ कि बत्ती एक् संग सबकीजल उठी। अब समझआया थां उन्हें कि यहसभी उनकेसंग क्यूं हौ रहा थां। सभीकुछ समझ मे आते हि चारों केँ चेहरे पीलेपड़ गए। किसी केँ भि मुख सें बोल न् फूटा।
"किसी कि बेहन बेटियों कि इज्ज़त सें इसतरह खेलने कां बहोत शौक हैं न्?" रितू नें गुर्राते हुए कहा___"कितनी लड़कियों कि ज़िंदगियाॅ बरबाद कर दि हैं तुम् सभी हराम केँ पिल्लों नें। उनसभी लड़कियों कि बरबादी कां हिसाब देना होगा तुम् लोगों कों। "
"यहसभी झूठ हैं। " सूरज पूरी शक्ति सें चीखा थां, बोला___"सरासर झूॅठ हैं इंस्पेक्टर। हम् मे सें किसी नें भि उसकेसंग कुछ नहि किया। तुम् बेवजह हि हमेंइस तरह यहाॅ पकड़कर लें आई हौ। हमनेकुछ नहि किया। हमें छोड़ वरना बहोत पछताओगी तुम् देख लेना। "
"तूँ साले रंडी कि औलाद मुझे पछताने कां बोलरहा हैं बहनचोद। " रितू नें सूरज केँ पेट मे दोचार घूॅसे एक् संग हि जड़ दिये। सूरज बुरीतरह दर्द सें बिलबिलाया थां, जबकि रितू नें कहा___"तेरी भि एक् बेहन हैं न्। मुझेसभी पता हैं। तेरी बेहन कां नाम रचना चौधरी हैं नं। सुना हैं वोँ बहोत हि जवान हैं। तूँ चिन्ता मतकर बहोत जल्द वोँ तेरे सामने यहीं पऱ होगी औऱ तुम् चारो स्वयं एक् एक् करके उसकारेप करोगे। "
"इंस्पेक्टर। " सूरज गीदड़ कि तरह चीखा___"अगर तूने मेरी बेहन कों हाॅथ भि लगाया तौ देख लेना। "
"क्यूं पिछवाड़े मे आगलगी क्याँ तेरे?" रितू नें एक् झन्नाटेदार थप्पड़ सूरज केँ गाल पर्र रसीद करतेहुए कहा___"औऱ जब तुँ दूसरों कि बेहन बेटियों कों बरबाद करतातब क्याँ मजाआता हैं मादरचोद?"
"बिटिया हम् कां कहत हें कि यह बाल्टी कां पानी जौ हम् लेकेआए हें। " सहसा हरिया काका नें कहा___"ऊ कां बेकार मा लेकेआए हें? हम् ता सोचतरहे कि तुम् इन ससुरों कों मारमार कर बेहोश करती जाओगी अउर हम् इन ससुरन कां ई पानी सें होशमा लें आते रहेंगे। "
"चिन्ता मतकरो काका। " रितू गुर्राई__"बहोत जल्दऐसा भि होने वाला हैं।
"फेरता ठीक हैं बिटिया। " काका नें कहा___"अगर कहौता हमहूइन ससुरन कां जीभरकै धुनदेई? ऊ कां हैं नां हमरा हाॅथमा बहुतै खुजली होईरही हैं। "
"तोँ ठीक हैं काका आप् हि अपने हाॅथ कि खुजली मिटालो। " रितू नें कहा___"मे इन कुत्तों सें कल मिलूॅगी। तब तक आप् इनकी अच्छे सें खातिरदारी करना। बस इतनायाद रहे कि इनमें कोई भि मरने नं पाए। "
"अइसनै होई बिटिया। " काका नें खुश होतेहुए कहा___"हम् ई ससुरन केर अम्मा चोददेब। तुम् फिकर नाँ करो बिटिया। अबजाओ तुम् इहाॅ सें। अब ई.डि.अरे बिटिया ऊ कां कहत हें एखा.?अरे हाॅयाद आईगा। अब ई डिपारटमेंट हमरा हैं। हाॅ डिपारटमेंट। "
"डिपारटमेंट नहि काकाउसे डिपार्टमेन्ट कहते हें। " रितू नें मुस्कुराकर कहा।
"अरे हाॅ बिटिया उहै। " काका नें कहा___"तुम् समझ गई हौ नां। ई हैं बहोत हैं। "
"अच्छा काका मे चलतीहूॅ। " रितू नें कहा__"आप् सम्हाल लेनाओके?"
"अरे तुम् कउनव चिन्ता न् करा बिटिया ईता हमरे बाएंहाथ कां चीज हैं। " काका नें गर्व सें कहा___"ई ससुरन कां मारमार केँ हम् इनकर टट्टी निकाल देब। अउर कां। "
रितू हरिया काका कि बात पर्र मुस्कुराती हुई तहखाने सें बाहर् निकल गई। जबकि रितू केँ जाते हि काका नें तहखाने कां गेटबंद किया औऱ फिन अपने दोनो हाॅथ मलतेहुए रोहित मेहरा केँ पास पहुॅचा।
"कां रे मादरचोद। " काका नें कहा___"तोरे केतनी अम्मा हैं अउर केतने बाप हें?"
"तमीज़ सें बातकरो ओके। " रोहित डर तौ गय़ा थां मगर फितरत केँ चलतेबोल हि गय़ा थां।
"तोरीमाॅ कि बुर मारूॅ ससुरे केँ। " काका केँ हाॅथ मे जोँ मोटा सां लट्ठ थां उसने घुमाकर रोहित कि टाॅग मे ज़ोर सें धमक दिया। रोहित दर्द सें बुरीतरह चीखने चिल्लाने लगा। काका तोँ बहोत देर सें सब्र किये बैठा थां। उसेइस बात कां बेहद क्रोध भि थां कि इन लोगों नें रितू उल्टा सीधा भि बोला थां।
हरिया काकाउन चारों पर्र पिल पड़ा। फिन तौ तहखाने मे बस रोने औऱ चीखने कि आवाज़ें हि आँ रही थि। हरिया काकातब तक उन सबकी धुनाई करतारहा जब तक कि उसकापेट नं भर गय़ा थां। धुनाई करने केँ बाद वो उन चारों कों अधमरी हालत मे छोंड़ कर तहखाने सें बाहर् चला गय़ा औऱ बाहर् सें तहखाने कों लाॅककर दिया।
एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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