♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 41 》
अब तक,,,,,,,,,
रितू नें दरवाजे कों थोडा औऱ अंदर कि तरफ धकेला। अपनेसिर कों दरवाजे केँ अंदर कि तरफ लेँ जाकर उसने अंदर आवाज़ कि दिशा मे देखा तोँ उसकेहोश उड़गए। आश्चर्य औऱ अविश्वास सें उसकी ऑखेंफटी कि फटीरह गई थि। अंदरबेड पऱ उसके माॅमडैड व भइया पूरीतरह नंगी हालत मे थें। सबसे नीचे उसकेडैड थें फिन उसकी माॅम उनकेऊपर पीठ केँ बल लेटी हुईँ थि। उसकी दोनो टाॅगें शिवा केँ दोनो हाॅथों केँ सहारे ऊपरउठी हुई थि। शिवा उसकेऊपर थां जोँ कि माॅम कि दोनो टाॅगों कों पकड़े तेज़ तेज़ धक्के लगारहा थां। नीचे सें उसकेडैड अपने दोनो हाथों सें प्रतिमा कि कमर कों थामे धक्का लगेरहे थें। यह हैरतअंगेज नज़ारा देखकर रितू पत्थर बन गई थि। होशतब आयाजब उसकी माॅम कि ज़ोरदार अहह कि आवाज़ उसके कानों मे पड़ी। रितू नें जल्दी हि अपनासिर अंदर सें बाहर् कर लिया। दरवाजे कों उसीतरह बंदकर वो पलटी औऱ ऑसुओं सें तर चेहरा लिए वो दरवाजे सें हट गई।
कुछ हि देर मे वो अपने कमरे मे पहुॅच गई। वो यहाॅ तक केसेआई थि यहवही जानती थि। उसकेपेर इतने भारी होँ गए थें कि उससे उठाए नहि जारहे थें। बेड पऱ औंधेमुह गिरकर वो ज़ार ज़ार रोयेजा रही थि। उसेलग रहा थां कि वोँ क्याँ कर डाले। उसके दिलो दिमाग़ मे अपने माता पिता औऱ भइया केँ लिए नफ़रत व घृणाभर गई थि। वो एक् बहादुर लड़की थि। उसने अपने आपको सम्हाला औऱ जल्दी बेड सें उठ बैठी। चेहरा पत्थर कि तरह कठोर हौ गय़ा उसका। बेड सें उतरकर वो आलमारी कि तरफ बढ़ी। आलमारी खोलकर उसने अपना सर्विस रिवाल्वर निकाला। लाॅकखोल कर उसने चैम्बर कों देखा तौ खाली थां। उसने जल्दी हि अंदर लाॅकर सें गोलियाॅ निकाली औऱ उसमें पूरीछहो गोलियाॅ भर दि। उसकेबाद वो चेहरे पर्र ज़लज़ला लिए दरवाजे कि तरफ बढ़ी हि थि कि किसी कि आवाज़ सुनकर चौंक पड़ी।
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अबआगे,,,,,,,,
आवाज़ कि दिशा मे रितू नें पलटकर देखा तोँ बगल सें दीवार सें सटकररखे ड्रेसिंग टेबल केँ आदमकद आईने मे स्वयं कों एक् अलग हि रूप मे खड़े पाया। यह देखकर रितू केँ चेहरे पऱ हैरतव अविश्वास केँ मिले जुलेभाव उभरे। आदमकद आईने मे रितू कां अक्श एक् अलग हि रूप औऱ अंदाज़ मे खड़ा थां।
"यह तुम् क्याँ करनेजा रही होँ रितू?"आदम हाइट आईने मे दिखरहे रितू केँ अक्श नें रितू सें कहा___"क्याँ तुम् इस रिवाल्वर सें अपनेमाॅ बाप औऱ भइया कां खून करनेजा रही हौ?"
"हाॅहाॅ मे उनहवस केँ पुजारियों कां खून करने हि जारही हूॅ। " रितू केँ मुख सें मानो दहकते अंगारे निकले___"ऐसे नीच औऱ घृणित कर्म करने वालों कों जीने कां कोई अधिकार नहि हैं। आज मे उन सबको अपने हाॅथों सें मौत केँ घाट उतारूॅगी। मगर तुम् कौन होँ? औऱ मुझे रोंका क्यूं?"
"मे तुम्हारा अक्शहूॅ। मुझे तुम् अपना ज़मीर भि समझ सकती होँ। औऱ हाॅ, मौत केँ घाट उतरना तौ अबउन सबकी नियति बन चुकी हैं रितू। " अक्श नें कहा___"मगर यहनेक काम तुम्हारे हाॅथों नहि होगा। "
"क्यूं नहि होगा?" रितू गुर्राई___"मे अभि जाकरउन तीनों कों गोलियों सें भूनकर रख दूॅगी। आज मेरे हाॅथों उन्हें मरने सें कोई नहि बचा सकता। स्वयं ईश्वर भि नहि। "
"क्याँ तुम् भि अपने बाप कि तरह दूसरों कां हक़ छीनोगी रितू?" अक्श नें कहा___"अगर ऐसा हैं तौ तुममें औऱ तुम्हारे बाप मे क्याँ अंतररह गय़ा?"
"यह तुम् क्याँ बकवास कररही हौ?" रितू केँ गले सें गुस्से मे डूबा स्वर निकला___"मे कहाॅ किसी कां हक़छीन रहीहूॅ?"
"तुम् जिन्हें जान सें मारने जारही हौ नं उन सबकोजान सें मारने कां अधिकार तुम्हारा नहि हैं रितू। " अक्श नें कहा___"बल्कि उसका हैं जिसके संग तुम्हारे बाप नें हद सें कहीं अधिक अत्याचार किया हैं। हाॅ रितू, यह सभी विराज औऱ उसकीमाॅ बेहन केँ दोषी हें। इसलिए इन लोगों सज़ा याँ मौत देने कां अधिकार उनको हि हैं तुम्हें नहि। अबयह तुम् पऱ हैं कि तुम् उनकायह हक़ छीनती होँ याँ फिन उनका अधिकार उन्हें देती हौ। "
आदमकद आईने मे दिखरहे अपने अक्श कि बातें सुनकर रितू केँ मनो मस्तिष्क मे झनाका सां हुआ। उसे अपने अक्श कि कहीहर बातसमझ मे आँ गई औऱ समझ मे आते हि उसका गुस्स औऱ क्रोध साबुन केँ झाग कि तरह बैठता चला गय़ा।
"तुम् यकीनन सचकहरही हौ। " रितू नें गहरी साॅसे लेतेहुए कहा___"ऐसे पापियों कों सज़ा याँ मौत देने कां अधिकार केवल औऱ केवल मेरे भइया विराज कों हैं। मे दुवा करतीहूॅ कि बहोत जल्दइन पापियों कों इनके पापों कि सज़ादे मेरा भइया। जिन माॅ बाप कों मे इतना अच्छा समझती थि आजउन लोगों कां इतना गंदा चेहरा देखकर मुझे नफ़रत होँ गई हैं उनसे। मुझे लज्जा आती हैं कि मे ऐसेपाप कर्म करने वालेमाॅ बाप कि औलादहूॅ। मगरअब मे क्याँ करूॅ?"
"वक्त कां इन्तज़ार करो रितू। " अक्श नें कहा___"औऱ इससमय तुम् फिन सें उन लोगों केँ पासजाओ। दरवाजे केँ पासकान लगाकर सुनो। हौ सकता हैं कि कुछऐसा जानने कों मिलजाए तुम्हें जिन चीज़ों सें आज भि बेख़बर होगी तुम्। "
"हर्गिज़ नहि। " रितू केँ जबड़े शख्ती सें कस गए___"मेउन लोगों केँ पास उनकी गंदी रासलीला देखने सुनने नहि जाऊॅगी। "
"मे तुम्हें उनकी रासलीला देखने सुनने कों नहि कहरही रितू। " अक्श नें कहा__"मे तोँ बसयहकह रहीहूॅ कि ऐसे माहौल मे इंसान केँ मुख सें कभीकभी ऐसाकुछ निकल जाता हैं जिससे उसकाकोई रहस्य याँ राज़पता चल जाता हैं। ऐसा राज़ जिसेआम हालत मे कोई भि इंसान अपनेमुख सें नहि निकालता। "
"यकीनन, तुम्हारी बात मे सच्चाई हैं। " रितू नें कहा___"ऐसा होँ भि सकता हैं। इसलिए मे जारही हूॅफिन सें उन लोगों केँ पास। "
"यह हुईँ न् बात। " अक्श नें मुस्कुराते हुए कहा___"चलो अब मे भि वापस तुम्हारे अंदरचली जातीहूॅ। तुम्हें सही मार्ग दिखारही थि सो दिखा दिया औऱ अब तुम् भि ज़रा सतर्क रहना। "
रितू केँ देखते हि देखते आदमकद आईने मे दिखरहा उसका अक्श आईने पर्र सें गायब होँ गय़ा। अक्श केँ गायब होते हि रितू नें पहले एक् गहरी साॅसली फिनपलट करवापस आलमारी कि तरफ बढ़ी। रिवाल्बर सें गोलियाॅ निकाल कर उसने रिवाल्वर औऱ रिवाल्वर कि गोलियाॅ अंदर लाॅकर मे रखकर आलमारी बंदकर दि।
इसकेबाद पलटकर वो कमरे सें बाहर् निकलकर थोड़ी देर मे फिन वहीं पहुॅच गई जहाॅ पर्र उसकेमाॅ बाप औऱ भइया तीनो एक् संग संभोग क्रिया कररहे थें। रितूदबे पाॅव कमरे केँ दरवाजे केँ पास पहुॅच गई थि। अंदर सें अभि भि सिसकारियों कि आवाज़ें आँ रही थि। रितू नें दरवाजे कों हल्का सां खोल दिया थां ताकि उसके कानों मे उन लोगों केँ बोलने कि आवाज़ स्पष्ट सुनाई देसके।
"एक् बात तोँ हैं डैड कि न् आप् औऱ नां हि मे परिवार कि किसी भि स्त्री याँ लड़की कों अपने नीचे लिटा नहि सकेअब तक। " शिवा कि आवाज़ आई____"इसे हमारा दुर्भाग्य कहें याँ उन लोगों कि अच्छी क़िस्मत?"
"यहउन रंडियों कि क़िस्मत हि हैं बेटे। "अजय सिंह नें कहा___"जोँ अब तक हम् बाप बेटों केँ लन्ड कि सवारी नं करसकी हें। दूसरी बात तुम्हारी इस रंडीमाॅ नें भि अपनाकाम सही सें नहि किया। वरना हम् दोनो बाप बेटे गौरी औऱ करुणा कि जवानी कां मजा अवश्य लूटते। "
"ओये भड़वे कि औलाद साले कुत्ते। " प्रतिमा बीच मे सैण्डविच बनीबोल उठी___"मैने क्याँ नहि कियाइन सबकोजाल मे फाॅसने केँ लिए। आआआहहहह मादरचोद धीरे-धीरे सें मसल नं मेरी मम्मों कों दर्द भि होता हैं मुझे। हाॅ तौ मे यहकहरही थि कि क्याँ नहि किया मैने। तुम्हारे हि कहने पऱ उस रंडी केँ जने विजय कों अपने खूबसूरती केँ जाल मे फाॅसने कि कोशिश कि, यहाॅ तक कि एक् दिन सोते वक़्त उसके घोड़े जैसे लन्ड कों अपनेमुह मे भि भर लिया थां। मगर वोँ कुत्ता तौ हरिश्चन्द्र थां। कलियुग कां हरिश्चन्द्र। उसने मुझेउस सबकेलिए कितना बुराभला कहा औऱ जलील किया थां यह मे हि जानती हूॅ। उसनेमुझ जैसीहूर कि परी महिला कों उस कुलमुही गौरी केँ लिए ठुकरा दिया थां। तभी तौ अपनेउस अपमान कां बदला लेने केँ लिए मैने तुमसे कहा थां कि अब इसको जीवित रहने कां कोई अधिकार नहि हैं। "
"ओह माँ गाडयह तुम् क्याँ कहरही हौ माॅम?" धक्के लगाता हुआ शिवा हैरान होकरबोल पड़ा थां____"इसका मतलब विजय चाचा कि वोँ मौत नेचुरल नहि थि?"
"हाॅ बेटेयह सच हैं। " नीचे सें ज़ोर कां शाॅट मारते हुएअजय नें कहा___"उस हादसे केँ बाद हम् डरगए थें कि विजय वोँ सभीकही माॅ बाबूजी सें न् बतादे। इसलिए दूसरे दिन हि हम् सभीशहर चलेगए थें। शहर आँ तोँ गए थें मगर एक् समय केँ लिएचैन कि साॅस नहि लें पारहे थें। हर लम्हा यहीडर सतारहा थां कि विजय वोँ सभीमाॅ बाबूजी सें बता देगा। उस सूरत मे हमारी इज्ज़त कां कचरा होँ जाता। माॅ बाबूजी केँ सामने खड़ा होने कि भि हम् मे हिम्मत नं रहती। इस लिए हमनेतय किया कि इस मुसीबत सें जल्द सें जल्द छुटकारा पा लेना चाहिए। यहसोच कर मे दूसरे दिन हि गुप्त तरीके सें शहर सें वापस गाॅव आँ गय़ा। प्रतिमा कों तुम् बच्चे लोगों केँ पास हि रहने दिया। मगर अपनेसंग मे यहाॅ सें एक् ज़हरीला सर्प भि लें गय़ा मे। मुझेपता थां कि आजकल खेतों मे फलों कां सीजन थां इसलिए मंडी लेँ जाने केँ लिए फलों कि तुड़ाई चालू थि। विजय सिंहरात मे वहीं रुकता थां। मे जब गाॅव पहुॅचा तौ हवेली नं जाकर सीधा खेतों पर्र हि पहुॅच गय़ा। खेतों पर्र विजय केँ संग एक् दो मजदूर रहरहे थें उस वक्त। उस रातजब मे वहाॅ पहुॅचा तौ रात बहुत हौ चुकी थि। विजय औऱ दोनो मजदूर सोरहे थें। मे सीधा विजय केँ कमरे मे गय़ा औऱ उसे पहले बेहोशी कि दवा सुॅघाई। वोँ सोतेहुए हि बेहोश होँ गय़ा। उसकेबाद मैने अपने थैले सें वोँ बंद पुॅगड़ी निकाली जिसमें मे शहर सें ज़हरीले सर्प कों भरकर लाया थां। विजय केँ पैरों केँ पास जाकर मैने पुॅगड़ी कां ढक्कन खोल दिया। ढक्कन खुलते हि उसमे सें जीभ लपलपाता हुआउस ज़हरीले सर्प नें अपनासिर निकाला फिन वोँ विजय केँ पैरों औऱ टाॅगों कि तरफ देखने लगा। मैने पुॅगड़ी कों विजय केँ पैरों केँ औऱ पासकर दि। मगर हैरानी कि बात थि कि वोँ ज़हरीला विजय केँ पैरों कों देखने केँ सिवाकुछ कर हि नहि रहा थां। यहदेख कर मैने पुॅगड़ी कों हल्का झटका दिया तौ वोँ सर्पडर गय़ा औऱ डर कि वजह सें हि उसने विजय केँ घुटने केँ नीचे दाहिनी टाॅग पऱ काट लिया। सर्प केँ काटते हि मैने जल्द सें पुॅगड़ी कां ढक्कन बंदकर दिया। उधर विजय कि टाॅग मे जिस स्थान सर्प नें काटा थां उस स्थान दो बिंदू बनगए थें जोँ कि विजय केँ लाल सुर्ख खून मे डूबे नज़रआने लगे थें। देखते हि देखते विजय कां बेहोश बदन हिलने लगा। उसका पूराबदन नीला पड़ने लगा। मुझ सें सफेदझाग निकलना शुरुआत होँ गय़ा औऱ कुछ हि देर मे विजय कां शरीर शान्त पड़ गय़ा। मे समझ गय़ा कि मेरे छोटे भइया कि जिंदगी लीला खत्म हौ चुकी हैं। उसकेबाद मैनेमृत विजय केँ बदन कों किसीतरह उठाया औऱ कमरे सें बाहर् लें आया। बाहर् आकर मे विछय कों उठाये उसतरफ बढ़ता चला गय़ा जिस स्थान पऱ खेतों पऱ उस टाइम पानी लगाया जारहा थां। मे विजय कों लिएउस पानीलगे खेत केँ अंदर दाखिल होँ गय़ा औऱ एक् स्थान विजय केँ मृतबदन कों उतारकर उसी पानीलगे खेत मे ऐसी पोजीशन मे चित्त लेटाया कि उसकेमुख पर्र दिखरहा झागसाफ नज़रआए। खेत केँ कीचड़ मे लेटाने केँ बाद मैने विजय केँ दोनो हाॅथों औऱ पैरों मे खेत कां वही कीचड़ लगा दिया। ताकि लोगों कों यहीलगे कि विजयखेत मे पानीलगा रहा थां औऱ उसी दौरान किसी ज़हरीले सर्प नें उसेकाट लिया थां जिसकी वजह सें उसकीमौत होँ गई हैं। यहसभी करने केँ बाद मे जिसतरह गुप्त तरीके सें शहर सें आया थां उसीतरह वापसशहर लौट भि गय़ा। किसी कों इस सबकीभनक तक नहि लगी थि। "
दरवाजे सें कान लगाए खड़ी रितू कां चेहरा ऑसुओं सें तर थां। उसके चेहरे पऱ दुख औऱ पीड़ा केँ बहोत हि गहरेभाव थें। आजउसे पताचला कि उसकेमाॅ बाप कितने बड़े पापी हें। अपनी खुशी औऱ अपनेपाप कों छुपाने केँ लिए उसके बाप नें अपने सीधे सादे औऱ देवता समान भइया कों सर्प सें कटवाकर उसकीजान लेँ ली थि। इतना बड़ा कुकर्म औऱ इतना बड़ा घृणित काम किया थां उसकेमाॅ बाप नें। रितू कों लगरहा थां कि वोँ क्याँ कर डाले अपनेमाॅ बाप केँ संग। उसे लगरहा थां कि यह ज़मीन फटे औऱ वो उसमेसमा जाए। आज अपनेमाॅ बाप कि वजह सें वोँ अपने भइया विराज औऱ उसकीमाॅ बेहन कि नज़रों मे बहोत हि छोटा औऱ तुच्छ समझरही थि। अभि वोँ यहसोच हि रही थि कि उसके कानों मे फिन सें आवाज़ पड़ी।
"ओह तोँ यहबात हैं डैड। " शिवा केँ चकितभाव सें कहा___"उसके बाद क्याँ हुआ?"
"होना क्याँ थां?" अजय सिंह नें कहा__"वही हुआ जिसकी मुझे उम्मीद थि। अपने इतने प्यारे औऱ इतने अच्छे बेटे कि मौत पर्र माॅ बाबूजी कि हालत बहोत हि ज़्यादा खराब हौ गई थि। अभय नें शहर मे हमे भि विजय कि मौत कि सूचना भेजवाई। उसकी सूचना पाकर हम् सभी जल्दी हि गाव आँ गए औऱ फिन वैसा हि आचरण औऱ ब्यौहार करनेलगे जैसाउस सिचुएशन पऱ होना चाहिए थां। ख़ैर, जाने वालाचला गय़ा थां। किसी केँ जाने केँ दुख मे जिंदगी भरभला कौन शोग़ मनाता हैं? कहने कां मतलबयह कि धीरे-धीरे धीरे-धीरे यह हादसा भि पुरानां हौ गय़ा औऱ सबका जिंदगी फिन सें सामान्य हौ गय़ा। मगरमाॅ बाबूॅ जी सामान्य नहि थें। बेटे कि मौत नें उन दोनो कों गहरे सदमें डाल दिया थां। "
"तुम् लोगों कि यह महाभारत अगर समाप्त होँ गई होँ तौ आगे कां काम भि करेंअब?" तभी प्रतिमा नें खीझते हुए कहा___"सारे मज़े कां सत्यानाश कर दिया तुम् दोनो बाप बेटों नें। "
"अरे मेरीजान सारीरात अपनी हैं। " अजय सिंह नें नीचे सें अपने दोनोहाथ बढ़ाकर प्रतिमा कि भारी चूचियों कों धर दबोचा थां, फिन बोला___"बेटे कों सच्चाई जानना हैं तौ जान लेनेदो न्। आख़िर हर चीज़ जानने कां हक़ हैं उसे। मेरेबाद इस हवेली कां अकेला वही तौ वारिश हैं। इसघऱ कि सब औरतों औऱ लड़कियों कों हमारा बेटा भोगेगा प्रेम सें याँ फिन ज़बरदस्ती। "
"डैड मुझे सबसे पहलेउस रंडी करुणा कों पेलना हैं। " शिवा नें कहा___"उसकी वजह सें हि उस मादरचोद अभय नें मुझे कुत्ते कि तरह मारा थां। इसलिए जब तक मे उसकीउस राॅड पत्नि औऱ बेटी कों आगे पीछे सें ठोंक नहि लेतातब तक मुझे सुकून नहि आएगा। "
"तेरीयह ख्वाहिश अवश्य पूरी होगी मेरे जिगर केँ टुकड़े। " अजय सिंह नें कहा___"औऱ तेरेसंग संग मेरी भि ख्वाहिश पूरी होगी। तेरीमाॅ नें तौ कोई जुगाड़ नहि कियामगर अब मे स्वयं अपने तरीके सें वोँ सभी करूॅगा। अरे मेरी बड़ी बेटी रितू कि वोँ फूली हुईँ मदमस्त गाॅड औऱ उसकी बड़ी बड़ी चूचियाॅ। शपथ सें बेटेजब भि उसे देखता हूॅ तोँ ऐसा लगता हैं कि साली कों वहीं पऱ पटककर उसे उसकेआगे पीछे सें पेलाई शुरुआत करदूॅ। "
"यसडैड यूआर राइट। " शिवा नें मुस्कुराते हुए कहा___"रितू दिदी कों पेलने मे बहोत मजा आएगा। आप् जल्द सें कुछ कीजिए नं डैड। "
"करूॅगा बेटे। "अजय सिंह नें कहा___"मगर सोचरहा हूॅ कि उससे पहले अपनी बेहन नैना कों पेलदूॅ। बेचारी लन्ड केँ लिए प्यास रही होगी। उसके पति औऱ उसके ससुराल वालों नें उसे बाॅझ समझकर घऱ सें निकाल दिया हैं। इसलिए मे सोचरहा हूॅ कि उसे अपने बच्चे कि माॅबना दूॅ औऱ फिन सें उसे उसके ससुराल भिजवा दूॅ। "
"यह तौ आपने बहोत अच्छा सोचा हैं डैड। मगर आप् अपनेइस बेटे कों भूलमत जाइयेगा। " शिवा नें कहा___"फूफी कों पेलने कां सुख मुझे भि मिलना चाहिए। "
"अरे तेरेलिए तोँ इसघऱ कि हर लड़की औऱ स्त्री हें बेटे। "अजय सिंह नें कहा___"सबकी चूतों पऱ मात्र तेरे हि लन्ड कि मुहर लगेगी। "
"ओहडैड थैक्यू सोमच। " शिवा खुशी सें झूम उठा___"यू आर रियली दि ग्रेट पर्सन। "
"म्म्म अबबस भि करो तुम् लोग। " प्रतिमा नें कुढ़ते हुए कहा___"इस तरहबीच मे लटके लटके मेरा जिस्म दुखने लगा हैं अब। "
"चल बेटा अब ज़राइस राॅड कां भि ख़याल कर लियाजाए। " अजय सिंह नें कहा__"तूँ ऊपर सें हट तौ ज़रा मुझे भि पोजीशन चेंज करना हैं। "
अजय सिंह सें कहने पर्र शिवा प्रतिमा केँ ऊपर सें हट गय़ा। अजय सिंह नें प्रतिमा कों पलटकर अपनीतरफ मुह करके अपनेऊपर हि लेटने कों कहा। प्रतिमा नें वैसा हि किया। नीचे सें अजय नें अपने लन्ड कों पकड़कर प्रतिमा कि बुर मे डाल दिया।
"बेटेअब तुँ भि आजा औऱ अपनी राॅडमाॅ कि गाॅड मे लन्ड डालदे। " अजय सिंह नें कहा तोँ शिवा जल्दी अपना लन्ड पकड़कर अपनीमाॅ कि गोरी चिट्टी गाॅड केँ गुलाबी छेंद पर्र डाल दिया। शिवा नें हाॅथ बढ़ाकर अपनीमाॅ केँ बालों कों मुट्ठी मे पकड़ लिया थां। अब दोनो बाप बेटेऊपर नीचे सें प्रतिमा कि पेलाई शुरुआत कर दिये थें। कमरे मे प्रतिमा कि आहें औऱ मदमस्त करने वाली सिसकारियाॅ फिन सें गूॅजने लगी थि।
दरवाजे सें अंदरसिर करके रितू नें एक् नज़रउन तीनों कों देखाफिन अपना चेहरा वापस बाहर् खींच लिया। उसकी ऑखों मे आग थि औऱ आग केँ शोले थें जौ धधकने लगे थें। चेहरे पर्र क्रोध औऱ नफ़रत केँ भाव ताण्डव सां करनेलगे थें।
"तुम् लोग अपने मंसूबों पर्र कभी कामयाब नहि होगे कुत्तो। " रितू नें मन हि मनउन लोगों कों गालियाॅ देतेहुए कहा___"बल्कि अब मे दिखाऊॅगी कि प्रेम औऱ नफ़रत कां अंजाम किसतरह सें होता हैं?"
रितूमन हि मन कहतेहुए उस स्थान सें पलटकर वापसचल दि। कुछ हि देर मे वो अपने कमरे मे पहुॅच चुकी थि। दरवाजे कि कुण्डी लगाकर वो बेड पर्र लेट गई। दिलो दिमाग़ मे एक् ऐसा तूफान उठ चुका थां जोँ हर चीज़ उड़ाकर लें जाने वाला थां।
बहुतदेर तक रितूबेड पऱ पड़ीइस सबके बारे मे सोचसोच करकभी रो पड़ती तोँ कभी उसका चेहरा गुस्से सें भभकने लगता। फिन सहसा उसके अंदर सें आवाज़ आई कि इस सबसे बाहर् निकलो औऱ शान्ती सें किसी चीज़ केँ बारे मे सोचकर फैंसला लो।
रितू नें ऑखेंबंद करकेदो तीनबार गहरी गहरी साॅसें लीतब कहीं जाकरउसे कुछचैन मिला औऱ उसकामन शान्त हुआ। उसे ख़याल आया कि कल उसका सबसे अच्छा भइया विराज आँ रहा हैं। विराज कां ख़याल ज़हन मे आते हि रितू कां मन एक् बारफिन दुखी होँ गय़ा।
"मेरे भइया, जितने भि दुख मैने तुम्हें दिये हें नं उससे कहीं अधिकअब प्रेम दूॅगी तुम को। " रितू नें छलकआए ऑसुओं केँ संग कहा__"मे जानती हूॅ कि तुँ इतने बड़ेदिल कां हैं कि तुँ एक् लम्हा मे अपनीइस दिदी कों क्षमा कर देगा औऱ मेरी सारी ख़ताएॅ भुला देगा। तेरे हिस्से केँ दुख दर्द बहोत जल्द तुझसे दूरचले जाएॅगे भइया। बस विधि कों देखकर तूँ अपनाआपा मतखो बैठना। अपने आपको सम्हाल लेना मेरे भइया। वैसे मे तुम्हे फिन सें बिखरने नहि दूॅगी। तेराहर तरह सें ख़याल रखूॅगी मे। "
बेड पर्र पड़ी रितू अपनेमन मे यहसभी कहेजा रही थि। उसकी ऑखों केँ सामने बारबार विराज कां वोँ मासूम औऱ खूबसूरत चेहरा घूम जाता थां। जिसकी वजह सें पता नहि क्यूं मगर रितू केँ होठों पऱ हल्की सि मुस्कान उभरआती थि।
"तूँ जल्द सें आजा मेरे भइया। " रितू नें मन मे हि कहा___"तुम्हारी तरफ देखने केँ लिए मेरीयह ऑखेंतरस रही हें। वैसे कैसा होगा तूँ? मेरा मतलब कि आज भि वैसा हि मासूम व खूबसूरत हैं याँ फिन बेरहम टाइम नें तुम को इसके विपरीत कठोरव बेरहम बना दिया हैं? नहि नहि मेरे भइया, तूँ ऐसामत होना। तुँ पहले कि तरह हि मासूम व हसीन रहना। तुँ वैसा हि अच्छा लगता हैं मेरे भइया। मे तुम्हे उसीरूप मे देख्ना चाहती हूॅ। तुझेही अपने सीने सें लगाकर फूटफूट कर रोना चाहती हूॅ। अब मुझेइन पापियों केँ संग नहि रहना हैं भइया। यह तोँ अपनी हि बेहन बेटी कों लूटना चाहते हें। मुझे इनकेपास नहि रहनाअब। मुझे भि अपनेसंग लें चल मुम्बई। मे यहजॉब छोंड़ दूॅगी औऱ तेरेसंग हि हर वक़्त रहूॅगी। अपने प्यारे सें भइया केँ संग। बस तुँ जल्द सें आजा यहाॅ। "
जाने क्याँ क्याँ मन मे कहती हुई रितू आख़िर कुछदेर मे अपने आप् हि सो गई। समय औऱ हालात बड़ी तेज़ी सें बदलरहे थें। आने वाला वक्त किसकी झोली मे कौन सि सौगात डालने वाला थां यहभला किसेपता होँ सकता थां।
ख़ैर, रात गुज़र गई औऱ सुभह कां आगाज़ हुआ। बेड पऱ गहरी नींद मे सोई हुई रितू कों ऐसालगा जैसेकुछ बजरहा हैं। नींद केँ संग हि स्थिर औऱ सोयाहुआ मन मस्तिष्क जल्दी हि सक्रिय अवस्था मे आँ गय़ा। जिसकी वजह सें रितू कि ऑखखुल गई। ऑख खुलते हि उसके कानों मे उसकेआई मोबाइल कि रिंगटोन उसे स्पष्ट सुनाई दि। रितू नें बाईतरफ करवॅट लेकर मोबाईल कों उठाया औऱ जब तक उस पऱ आँ रही किसी कि काल कों उठाई करने केँ लिए अपने अॅगूठे कों हरकत दि तब तक काल अपने निश्चित वक्त सीमा केँ चलतेकट गई।
रितू नें रिसीव काल कि लिस्ट कों ओपेन किया तौ उसमें उसेपवन सिंह लिखा नज़रआया। यहदेख कर रितू केँ दिमाग़ कि बत्ती जली। उसे ध्यान आया कि आज उसका भइया विराज मुम्बई सें यहाॅ आँ रहा हैं। यहबात दिमाग़ मे आते हि रितू नें जल्दी पवन सिंह कों मोबाइल लगा दिया। पहली हि घंटी पर्र पवन नें काल रिसीव की करली।
"ओफ्फो दि, आप् मोबाइल क्यूं नहि उठारही थि?" उधर सें पवन नें कहा___"चार बार आपकोकाल कर चुकाहूॅ मे। "
"ओहआईएम सो स्वारी भइया। " रितू नें खेदभरे भाव सें कहा___"वोँ मे गहरी नींद मे सोरही थि न्। कलरात नीद हि नहि आँ रही थि। इसलिए देर सें सोई थि मे। ख़ैर छोड़ो, तुम् बताओकिस लिए मोबाइल कररहे थें मुझे?"
"वोँ मेरी विराज सें मोबाइल पर्र बात हुइ हैं वोँ बतारहा थां कि वोँ सही वक्त पर्र गुनगुन रेलवेस्टेशन पहुॅच जाएगा। " उधर सें पवनकह रहा थां___"मैने सोचा आपकोइस बारे मे बतादूॅ। मगर,.। "
"मगर क्याँ भइया?" रितू केँ माथे पर्र बल पड़ा।
"मगर यही कि मैने आपके कहने पर्र अपनेजां सें भि ज़्यादा अज़ीज़ मित्र कों यहाॅ बुला तौ लिया हैं। " पवन कि आवाज़ मे गंभीरता औऱ अधीरता दोनो थि, बोला____"मगर, यदि उसकीजान कों याँ उस पऱ लेश सिर्फ कां भि संकटआया तौ सोच लीजिएगा। उस सूरत मे मुझसे बुराकोई नहि होगा। आप् मेरीबात समझरही हें न्?"
"मुझे बेहद खुशी हैं कि मेरे भइया कों तुम् जैसा चाहने वाला मित्र मिला हैं। " रितू कि ऑखों मे ऑसू आँ गए, बोलि___"मे तुम्हारी बातों कां मतलबसमझ गई हूॅ भइया। तुमको कदाचित अभि भि अपनीइस बेहन पऱ यकीन नहि हैं, औऱ सच कहूॅ तौ होना भि नहि चाहिए। आख़िर यकीन करने लायक मैनेअब तक कीईकाम किया हि कहाॅ हैं? मगर इतना अवश्य कहूॅगी मेरे भइया कि तेरीयह बेहन पहले सें बहोत ज़्यादा बदल गई हैं। तेरीइस बेहन कों समझ आँ गय़ा हैं कि कौनसही हैं औऱ कौन ग़लत?आज मेरेदिल मे अगर किसी केँ लिए बेपनाह प्रेम हैं तौ केवल औऱ केवल अपनेउस भइया केँ लिए जिसको मैनेकभी अपना भइया नहि माना थां। "
"अगरऐसी बात हैं तौ मुझे खुशी हैं दिदी कि अब मेरे दोस्त कों आप् केँ रहतेकोई ख़तरा नहि हौ सकता। "पवन नें उधर सें खुश हौ कर कहा___"अच्छा अब मोबाइल रखताहूॅ दिदी। विराज जब हल्दीपुर पहुॅचेगा तोँ मे उसे लेनेबस स्टैण्ड पऱ पहुॅच जाऊॅगा। आप् तौ जानती हि हें कि मेरी दुकान बस स्टैण्ड पऱ हि हैं। विराज कों लेकर मे अपनेघऱ चला जाऊॅगा। फिनजब आपका मोबाइल आएगातब मे उसे लेकर विधी केँ पास हास्पिटल आँ जाऊॅगा। "
"ठीक हैं भइया। " रितू नें कहा___"तब तक मे भि उसकी सुरक्षा केँ लिएकोई इंतजाम करतीहूॅ। " यह कहने केँ बाद रितू नें कालकट कर दि। इस टाइम उसके चेहरे पर्र बहोत हि अधिक खुशीझलक रही थि। उसके गोरे औऱ हसीन सें चेहरे पऱ ग़जब कां नूरउतर आया थां। कुछदेर बेड पऱ वो जाने क्याँ क्याँ सोचकर मुस्कुराती रहीफिन बेड सें उठकर बाथरूम कि तरफबढ़ गई।
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उधर मुम्बई सें ट्रेन मे बैठने केँ बाद मे औऱ मेरेसंग जगदीश अंकल केँ द्वारा भेजेहुए बाॅडीगार्ड आदित्य चोपड़ा दोनोचल दिये थें। कुछदूर तक कां सफ़र तोँ हम् दोनो केँ बीच कि ख़ामोशी केँ संग हि कटतारहा। उसकेबाद हम् दोनो केँ बीच बातें शुरुआत हौ गई थि। यहअलग बात हैं कि बात करने कि पहल मैने हि कि थि। आदित्य चोपड़ा कुछ ख़ामोश तबीयत कां इंसान थां। वोँ अधिक किसी सें बोलता नहि थां। अबयह ख़ामोशी उसकी फितरत कां हिस्सा थि याँ फिन उसके ख़ामोश रहने कि कोईऐसी वजह जिसके बारे मे फिलहाल मुझेकुछ पता नहि थां।
मगरजब हमारे बीच कान्टीन्यू बातें होतीरही तोँ आदित्य कां स्वभाव थोडा बदल गय़ा थां। हलाॅकि शुरुआत शुरुआत मे वो मेरी किसी भि बात कां जवाबहाॅ याँ नाँ मे संक्षिप्त रूप सें हि देता थां। किसी किसीसमय वो मेरी बातों सें परेशान भि नज़रआया मगर मैनेउसे बड़े प्रेम व इज्ज़त सें समझाया कि ख़ामोश रहने सें किसी भि समस्या सें छुटकारा नहि मिलता। फिन मैनेउसे संक्षेप मे अपनी औऱ अपने परिवार कि किस्सा सुनाई। मेरी स्टोरी सुनकर आदित्य चोपड़ा बेहद संजीदा सां हौ गय़ा थां। उसने मुझसे कहा कि अभि तक तोँ वोँ मेरे बाॅडीगार्ड कि हैंसियत सें संग थां मगरअब वोँ मेरेसंग मेरा सच्चा मित्र बनकर रहेगा औऱ मुझेहर संकट सें बचाएगा।
उसकेबाद हम् दोनो हॅसी खुशी ट्रेन मे बातें करतेरहे। मेरे पूछने पर्र हि उसने अपने बारे मे बताया। आदित्य चौपड़ा केँ पास किसी चीज़ कि कोई कमीं नहि थि। जब वोँ पच्चीस साल कां थां तबउसे किसी लड़की सें प्रेम होँ गय़ा थां। मगरबाद मे पताचला कि वोँ लड़कीहर समय मात्र उसका स्तेमाल कररही थि। दरअसल उस लड़की कां पहले सें हि किसी विदेशी लड़के सें चक्कर थां। लड़की कां बाप अपनी बेटी कों बग़ैर किसी सिक्योरिटी केँ कहीं जाने नहि देता थां। आदित्य चोपड़ा उस लड़की कां ब्वाडीगार्ड थां। उस चक्कर मे वोँ लड़की अपनेउस विदेशी ब्वायफ्रैण्ड सें मिल नहि पाती थि। लड़की नें किसी योजना केँ तहत आदित्य कों अपने प्रेम केँ जाल मे फॅसाया। औऱ फिनउस लड़की नें आदित्य कों अपने प्रेम मे इसहद तक पागलकर दिया कि उसके कहने पऱ आदित्य उसे लेकर विदेश तक जाने कों रेडी होँ गय़ा। विदेश जाने केँ लिए सारी तैयारियाॅ करने केँ बाद एक् दिन आदित्य औऱ वोँ लड़की जिसका नाम कोमल सिंहानिया थां दोनो हि सिंहानिया विला सें फुर्र होँ गए। एयरपोर्ट केँ रास्ते पऱ हि एक् स्थान कोमल नें कैब रुकवाई। आदित्य कों समझ न् याँ कि कोमल नें कैब क्यूं रुकवाई थि। कैब केँ उतरते हि कोमलकैब सें उतर गई औऱ कैब ड्राइवर सें अपना सामान भि टेक्सी सें निकालने कों कह दिया। हैरान परेशान आदित्य नें उससे पूछा कि यहसभी क्याँ हैं? हम् बीच रास्ते मे कैब सें इसतरह क्यूं उतररहे हें?
आदित्य केँ प्रश्न कां जवाब देने सें पहले हि उस स्थान पऱ एक् औऱ कैबआकर रुकी। उस कैब कां दरवाजा खोलकर कोमल कां विदेशी ब्वायफ्रैण्ड बाहर् आँ गय़ा। कोमल केँ पासआकर उस विदेशी नें कोमल कों अपनेगले सें लगाया औऱ फिन आदित्य केँ सामने हि उसने कोमल केँ रसभरे होठों कों ज़ोर सें चूॅमा। यहदेख कर आदित्य केँ पैरों तले सें ज़मीन गायब हौ गई। उसके दिलो दिमाग़ कों ज़बरदस्त झटकालगा थां। उसकी हालत गहरे सदमे मे डूब जाने जैसी होँ गई थि।
"ओह रिलैक्स आदित्य। " कोमल नें खनकती हुईँ आवाज़ सें कहा___"इस तरह रिऐक्ट करने कि कोई ज़रूरत नहि हैं। एण्ड साॅरी फारआल दिस। बट यूनो व्हाट, इसमें मेरीकोई ग़लती नहि हैं। मुझेउस कैदखाने सें हमेशा केँ लिए आज़ाद होना थां औऱ अपनेइस ब्वायफ्रैण्ड केँ संग विदेश मे अपनी सेटल हौ कर लाइफ एंज्वाय करना थां। मगरयह तभी हौ सकता थां जब मे उस कैदखाने सें औऱ इस सिक्योरिटी सें बाहर् निकलती। इसलिए मैने मजबूरी मे तुम्हें अपने प्रेम मे पागल किया औऱ इसहद तक किया कि तुम् मेरे एक् इशारे पऱ मुझे कहीं भि लें चलने कों सजधजकर हौ जाओ। वही तुमने किया, मगर जोँ मैने किया वोँ मात्र अपने प्रेम औऱ अपनी खुशी कों पाने केँ लिए किया हैं। इसलिए प्लीज आदित्य इस सबकेलिए मुझे क्षमा कर देना। "
कोमल कि बातें आदित्य केँ कानों मे ज़हर सां घोलरही थि औऱ उसकेदिल कों चकनाचूर कररही थि। मगर आदित्य मजबूत तबीयत कां मार्शल आर्टिस्ट थां। उसने स्वयं कों सम्हाला औऱ फिन मुस्कुरा कर कोमल सें मात्र इतना हि कहा कि जहाॅ भि रहनाखुश रहना।
उसकेबाद आदित्य अपने ऑसुओं कों छुपाते हुए पुनःउसी कैब मे बैठ गय़ा औऱ कैब ड्राइवर सें वापस चलने कों कहा। सिंहानियाॅ कों आदित्य नें सभीकुछ सचसचबता दिया औऱ उससेयह भि कहा कि अगर वोँ यह समझते हें कि उसनेकोई अपराध किया हैं तौ वोँ उसे जौ चाहे सज़ादे सकते हें। आदित्य कि बातें सुनकर सिंहानियाॅ कों क्रोध तोँ बहोत आयामगर फिन उसने स्वयं कों शान्त किया औऱ आदित्य सें कहा कि तुम् ईमानदार हौ, सच्चे हौ। कोमल कि खुशी केँ लिए तुमने उसे उसकेउस विदेशी ब्वायफ्रैण्ड केँ संग जाने दिया। यह भि नहि सोचा कि इसकाम केँ लिए तुम्हारे संग क्याँ सुलूक होँ सकता हैं। ख़ैर, हम् तुम्हें कोई सज़ा नहि देंगे। क्योंकि जब अपना हि खूनइस तरह कां धोखेबाज़ थां तोँ दूसरों कों क्याँ कहें? हम् समझ सकते हें कि तुम्हारे दिल पर्र इस सबसे क्याँ गुज़र रही हैं। मगर यंगमैन, तुम् हमारी उस लड़की केँ पीछे अपनी ज़िंदगी बरबाद मत करना। बल्कि खुशी खुशी किसी अच्छी लड़की सें विवाह कर लेना।
बस उसकेबाद आदित्य कभी सिंहानिया केँ घऱ नहि गय़ा औऱ कोमल केँ द्वारा मिले झटके नें उसे हमेशा केँ लिए ख़ामोश कर दिया थां। तौ यह थि आदित्य चोपड़ा केँ ख़ामोश रहने कि वजहमगर अब वोँ ख़ामोश नहि थां। बल्कि मेरायार बन चुका थां औऱ हम् दोनो हॅसी खुशी बातें करतेहुए आँ रहे थें। रात मे हम् दोनो नें थोडा बहोत खानां खाया औऱ धीरे-धीरे लेटकर सोगए थें।
सुभह आदित्य नें हि मुझे उठाया। उसके दोनो हाथों मे गरमा गर्मगरम चाय केँ दो छोटे छोटे ग्लास देखकर मे भि उठ बैठा।
"गुड मार्निंग डियर फ्रैण्ड। " आदित्य नें मुस्कुराते हुए अपने एक् हाथ मे पकड़े हुएगरम चाय केँ उस छोटे सें ग्लास कों मेरीतरफ बढ़ा दिया, ___"हाज़िर हें गरमा गर्मगरम चाय। "
"एक् मिनट भइया मे ज़राहाथ मुह धोकरआता हूॅ। " मैनेकहा औऱ उठकर बाथरूम कि तरफचला गय़ा।
थोड़ी देरबाद मे बाथरूम सें वापसआया औऱ आदित्य केँ सामने वालीसीट पर्र बैठ गय़ा। आदित्य नें मुझेगरम चाय पकड़ाई तौ मे उसके हाॅथ सें गरमचाय लेकर पीनेलगा।
"वैसे कितने बजे तक हम् तुम्हारे गाव पहुॅचेंगे?" आदित्य नें कहा अपने बाएॅहाथ पऱ बॅधी रिस्टवाच पर्र समय देखते हुए कहा___"अभि तोँ सुभह केँ सात हि बजे हें। "
"अगर ट्रेन अपने राइट वक्त पर्र चलरही हैं तोँ हम् करीब-करीब ग्यारह बजे गुनगुन स्टेशन पहुॅच जाएॅगे। " मैने बताया उसे।
"ओह इसका मतलब अभि बहुत वक्त बाॅकी हैं पहुॅचने मे। " आदित्य नें ठंडी साॅसली।
"हाॅ, मेरा साथीपवन हल्दीपुर केँ बस स्टैण्ड पऱ मिलेगा। " मैने कहा___"ट्रेन सें हम् गुनगुन स्टेशन पऱ उतरेंगे उसकेबाद वहाॅ सें ऑटो करके हम् बस स्टैण्ड जाएॅगे। बस सें हम् हल्दीपुर पहुॅचेंगे। जहाॅ पऱ हमेंपवन मिलेगा। "
"ओह दोस्त यह तोँ बहुत लम्बा चक्कर लगरहा हैं। " आदित्य बोला___"वैसे गुनगुन स्टेशन सें क्याँ हम् किसीकैब द्वारा तुम्हारे गाॅव तक नहि जा सकते?"
आदित्य कि बात सुनकर मेरे दिमाग़ कि बत्ती जली। कैब सें जाने मे बहुत सुरक्षा वालीबात रहेगी। क्योंकि एक् लम्हा केँ लिएअगर यहमान लियाजाए कि मेरे बड़े बापू अपने आदमियों कि यहाॅलगा रखा होगा तोँ वोँ सभी मुझेबस मे हि खोजेंगे औऱ कैब मे मेरे मौजूद होने कि वोँ कल्पना भि नं करेंगे। मुझे आदित्य कि यहबात बहोत जॅची।
"क्याँ हुआ दोस्त?" मुझे सोचों मे गुमदेख कर आदित्य कह उठा___"कहाॅ खोगए तुम्?"
"मे यहसोच रहाहूॅ कि हम् गुनगुन स्टेशन पर्र ट्रेन सें उतरकर किसीकैब केँ द्वारा हि हल्दीपुर चलें। " मैने कहा___"तुम्हारी इसबात सें मुझेयही लगरहा हैं कि कैब मे हम् ज़्यादा सेफ रहेंगे। "
"अगरऐसा हैं तौ हम् कैब मे हि चलेंगे तुम्हारे गाॅव। " आदित्य नें कहा___"हर स्थान कार बदलने कां चक्कर भि नहि रहेगा। "
"सहीकहा तुमने। " मैने कहा___"मे पवन कों भि बता देताहूॅ कि मे कैब सें डायरेक्ट हल्दीपुर आऊॅगा। "
मैने अपना मोबाइल निकाल करपवन कों सभीबता दिया। उसकेबाद मे औऱ आदित्य टाइम गुज़ारने केँ लिएफिन सें किसी न् किसी चीज़ केँ बारे मे बातें करनेलगे। उधर ट्रेन अपनी रफ्तार सें दोड़ी जारही थि। मुझे नहि पता थां कि आने वाला वक़्त मुझे क्याँ दिखाने वाला थां याँ फिनकिस तरह कां झटका देने वाला थां?
दोस्तो, आख़िर टाइम निकाल कर एपसोड रेडीकर हि लिया। तौ हाज़िर हैं आपकी अदालत मे मेरा प्रयोग,,,,,,,,,,,,,,
दोस्तो, मुझेपता हैं कि हिन्दी फोन्ट मे हौ याँ अंग्रेजी फोन्ट मे टाइपिंग करते वक़्त शब्दइधर उधर होँ जाते हें। मेरीआदत हैं कि मे एपसोड कों एडिट भि नहि करता।
Thenks bhay humare bareme sochne k liye halanki bhay sehat kaa bi thora dyan rakhna sadi kaa kaam upr say garmi bi bhot jyada he saam hote hote insan pure chuse huve aam kee prakaar hojata he plees apna dyan rakiyega
bhay aapka hum readers k prati joo samarpan kaa bhav h vo chamatkari h, aapka bohot bohot aabhar bhay kee itna zyaada thakan or busy hone k baad bi ap update likh rahe h, ab too update kaa or zyaada besabri say intazar h bhay
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं,,,,,, पेज नंबर220पर,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं,,,,,, पेज नंबर220पर,
awesome fabulous update bhay ap tension na liya Karo chhoti galti too waise hi maff krr deta ho bus ap likhte rho keep posting jabardast like it
Uffff yeh kya krr diya wirtter sahab. Bechari ritu ko, kin, kin paristhio say gujarni paregi.app na ritu ko dabangg bnaa dijiye. Like salman khan. OK. Btw Brilliant update sir ji. Apki iss kahani kee koy jabab nahee,, kyonki kahani lajabab h. Awesome writing skill
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Awesome update shubham bhay,
behad hi shandaar, lajawab और amazing update h bhay,
apne antaratma की बात ko sunkar ritu ne bohot hi achchha काम किया h,
और iski vajah से use apne pariwar walo के kartuto और mansha के baare mai bi ptaa chl गया h,
Sachchai jankar too ritu के pairo के नीचे से jamin hi khisak gai h,
और अब usne faisla krr लिया h की vo viraj ko world jahan kaa pyaar degi,
wahi dusri tarf raj की aditya से achchhi dosti hu gai h,
Aditya की kahani bi kaafi sad thi, इसलिए dono tute hue dill ❤️ एक doosre kaa sahara ban gaye h,
अब dekhte h की gaon pahunchne के बाद क्या hotha h,
waiting for next update
And thank you so much bhay joo aapne itne busy schedule mai से waqt nikal krr update दिया h
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
Fentastic update mujhe ritu kee aiyna wala seen bhut achaa laga thank you jb bhi waqt mile update thora likhe rakhna aur jb waqt mile de dena thank you
Shandar update hain bro and ek request hain k update thora juldi de na woh Kya hain na k intezar nahee hotha ek bar thanks update k liye
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