♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
koy baat nahii h naina ji, bus joo bi problem h 12th may tak hi h, uske baad shubham bhay ne kaha h kee vo regular update denge,
yes i agree unke ghrr men shadi h or 12 k baad hi vo free honge .yeh too unhone saaf saaf kaha khaa h ab achchi chizzj k liye intejar too krna hi padata h
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 42 》
अब तक,,,,,,,,
"ओह दोस्त यह तोँ बहुत लम्बा चक्कर लगरहा हैं। " आदित्य बोला___"वैसे गुनगुन स्टेशन सें क्याँ हम् किसीकैब द्वारा तुम्हारे गाॅव तक नहि जा सकते?"
आदित्य कि बात सुनकर मेरे दिमाग़ कि बत्ती जली। कैब सें जाने मे बहुत सुरक्षा वालीबात रहेगी। क्योंकि एक् लम्हा केँ लिएअगर यहमान लियाजाए कि मेरे बड़े बापू अपने आदमियों कों यहाॅलगा रखा होगा तोँ वोँ सभी मुझेबस मे हि खोजेंगे औऱ कैब मे मेरे मौजूद होने कि वोँ कल्पना भि न् करेंगे। मुझे आदित्य कि यहबात बहोत जॅची।
"क्याँ हुआ दोस्त?" मुझे सोचों मे गुमदेख कर आदित्य कह उठा___"कहाॅ खोगए तुम्?"
"मे यहसोच रहाहूॅ कि हम् गुनगुन स्टेशन पर्र ट्रेन सें उतरकर किसीकैब केँ द्वारा हि हल्दीपुर चलें। " मैने कहा___"तुम्हारी इसबात सें मुझे भि यहीलग रहा हैं कि कैब मे हम् ज़्यादा सेफ रहेंगे। "
"अगरऐसा हैं तौ हम् कैब मे हि चलेंगे तुम्हारे गाॅव। " आदित्य नें कहा___"हर स्थान गाड़ी बदलने कां चक्कर भि नहि रहेगा। "
"सहीकहा तुमने। " मैने कहा___"मे पवन कों भि बता देताहूॅ कि मे कैब सें डायरेक्ट हल्दीपुर आऊॅगा। "
मैने अपना मोबाइल निकाल करपवन कों सभीबता दिया। उसकेबाद मे औऱ आदित्य वक़्त गुज़ारने केँ लिएफिन सें किसी नं किसी चीज़ केँ बारे मे बातें करनेलगे। उधर ट्रेन अपनी रफ्तार सें दौड़ी जारही थि। मुझे नहि पता थां कि आने वाला टाइम मुझे क्याँ दिखाने वाला थां याँ फिनकिस तरह कां झटका देने वाला थां?
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अबआगे,,,,,,,,
"आप् एक् बारफिन सें इस बारे मे अच्छी तरहसोच लीजिए चौधरी साहब। " अवधेश श्रीवास्तव नें समझाने वाले अंदाज़ मे कहरहा थां___"आपका इस मामले मे पुलिस कों सूचित करनाकतई ठीक नहि रहेगा। संभव हैं कि आपके द्वारा इस मामले कों पुलिस कों सूचित कर देने सें वोँ ब्लैकमेलर हमारे लिएकोई गंभीर मुसीबत खड़ीकर दे। यहबात तोँ वोँ भि अच्छी तरह जानता औऱ समझता हि होगा कि आप् पुलिस कों उसके बारे मे बताने कि सोचेंगे जोँ कि निहायत हि ग़लत होगा। उस सूरत मे वोँ हमारे खिलाफ़ कुछ भि कर सकता हैं औऱ हम् उसकाकुछ भि नहि बिगाड़ पाएॅगे। क्योंकि अभि तक हम् यही नहि जानते हें कि हमेंऐसी वीडियोज़ भेजने वाला वोँ आदमी आख़िर हैं कौन? उसनेअब तक कोई मोबाइल याँ मैसेज नहि कियामगर उसके न् करने सें भि वोँ हमेंयही समझारहा हैं कि इस मामले मे पुलिस कों सूचित करने कि मूर्खता हम् लोग हर्गिज़ भि न् करें। "
"तोँ आख़िर हम् क्याँ करें अवधेश?" चौधरी नें खीझते हुए कहा___"आज दोदिन हौ गएमगर उसकीतरफ सें हमारे पासकोई मैसेज तक नहि आया। हम् तौ चाहते हें कि वोँ हमसे संबंध बनाए औऱ बताए कि आख़िर वोँ यहसभी करके हमसे चाहता क्याँ हैं? सालादो दिन सें हमारे सुख सुकून कि माॅ बेहन करकेरखा हुआ हैं। "
"आप् ज़रा धीरज सें काम लीजिए चौधरी साहब। " अशोक मेहरा नें कहा___"आपकी तरह हम् सभी भि इसबात सें बहोत परेशान औऱ बेचैन हें। हमारी जान भि हलक मे फंस पड़ी हैं। मगर जैसा कि अवधेश भइया नें कहा कि इस बारे मे पुलिस कों सूचित करनाठीक नहि हैं तोँ बात हमारे हित मे हि हैं। आप् तोँ जानते हें कि साले पुलिस वालेबाल कि खाल निकालने वाले होते हें। संभव हैं कि वोँ हमसेऐसे प्रश्न करने लगेंजिन सवालों केँ जवाब देना हमारे लिए ख़तरे सें खाली नहि होगा। ऐसे मे हम् स्वयं हि उल्टा फॅस जाएॅगे। रहीबात उस ब्लैकमेलर कि कि उसनेअब तक हमसे कांटैक्ट नहि किया तोँ यहकोई समस्या नहि हैं। कहने कां मतलबयह कि वोँ देर सवेर हि सहीमगर हमसे कांटैक्ट अवश्य करेगा, क्योंकि इन वीडियोज़ कों हमारे पास भेजने कां कोई नं कोई मकसद उसका अवश्य होगा। अपनेउस मकसद कों पूरा करने केँ लिए वोँ हमसे कांटैक्ट अवश्य करेगा। बस आप् धैर्य रखें चौधरी साहब। "
"बस एक् बार। " दिवाकर चौधरी गुस्से सें दाॅत किटकिटाते हुए बोला___"केवल एक् वोँ हरामज़ादा हमारे हाॅथलग जाए उसकेबाद हम् बताएॅगे उसे कि हमारे संगऐसी वाहियात हरकत करने कां क्याँ अंजाम होता हैं। उस हराम केँ पिल्ले कों ऐसीमौत मारेंगे कि उसे अपने पैदा होने पर्र अफसोस होगा। "
"इसका उल्टा भि तौ हौ सकता हैं चौधरी साहब। " सहसाइस बीच सहमी सि बैठी सुनीता नें अजीबभाव सें कहा___"आप् यह क्यूं नहि सोचते हें कि जिसने भि आपके याँ हमारे संगऐसे दुस्साहस सें भरेकाम कों अंजाम दिया हैं वोँ कोईऐरा गैरा ब्यक्ति नहि होँ सकता?यह बात तोँ वोँ भि जानता होगा कि आप् क्याँ चीज़ हें, इसके बावजूद उसनेऐसा किया। इसका मतलबसाफ हैं कि वोँ हमसे ज़रा भि ख़ौफ नहि खाता हैं बल्कि अपने किसी मकसद कों पूरा करने केँ लिए वोँ मौत केँ मुह मे हि आँ पहुॅचा हैं। दूसरी बातउसे हमसे डरने कि ज़रूरत भि कहाॅ हैं जबकि उसकेपास हमारे ख़िलाफ ऐसा सामान मौजूद हैं जिसके बल पर्र वोँ जब चाहे हमेंबीच चौराहे पऱ नंगा दौड़ा सकता हैं। इसलिए यहबात तोँ आप् भूल हि जाइये कि आप् उसेऐसी कोईमौत देंगे जिससे उसे अपने पैदा होने पर्र अफसोस होगा। "
"साली रंडी कि दुम हमेंडरा रही हैं?" चौधरी खिसियानी बिल्ली कि तरह सुनीता पऱ चढ़ दौड़ा थां, बोला___"तुम्हे पता नहि हैं कि हम् क्याँ चीज़ हें। हम् चाहें तौ यहाॅ बैठे बैठे दिल्ली तक कों हिलाकर रखदें। वोँ हराम कां जना सालातभी तक सलामत हैं जब तक वोँ हमसेदूर कहीं छुपा बैठा हैं। जिसदिन हमारे हाथलग गय़ा न् उसदिन हम् बताएॅगे कि दिवाकर चौधरी केँ संगऐसी हिमाकत करने कां हस्र क्याँ होता हैं?"
दिवाकर चौधरी कां तमतमाया हुआ चेहरा देखकर औऱ उसकी खतरनाक बातें सुनकर सुनीता कि सिट्टी पिट्टी गुम होँ गई। ड्राइंगरूम पिन ड्राप सन्नाटा छा गय़ा थां। किसी कि बोलने कि हिम्मत नं पड़ी। मगर तभीइस सन्नाटे कों तोड़ने कि हिमाकत स्वयं दिवाकर चौधरी केँ फोन मोबाइल कि घंटी नें कर दि। दो लम्हा केँ लिए तौ दिवाकर चौधरी हड़बड़ाहट मे हि रहा। फिन जल्द सें खादी केँ कुर्ते कि जेब सें फोन मोबाइल निकाल कर उसने स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे नंबर कों देखा। स्क्रीन पऱ वही नंबर फ्लैश होँ रहा थां जिस नंबर सें चौधरी केँ इसी मोबाइल पर्र वोँ वीडियोज़ भेजा थां उस ब्लैकमेलर नें।
"क्याँ हुआ चौधरी साहब?" अवधेश श्रीवास्तव नें शशंकभाव सें कहा___"क्याँ देखरहे हें? काल कों रिसीव कीजिए। "
"यह तोँ वही नंबर हैं अवधेश। " चौधरी नें बड़े उत्साहित भाव सें कहा___"जिस नंबर सें हमारे मोबाइल पर्र वोँ वीडियो भेजेगए थें। "
"तोँ फिन जल्द सें काल कों रिसीव कीजिए चौधरी साहब। " अशोह मेहरा कह उठा__"औऱ मोबाइल कां स्पीकर भि ऑनकर दीजिए। हम् सभी भि सुनेंगे कि वोँ क्याँ कहता हैं?"
चौधरी नें काल रिसीव करकेफोन कां स्पीकर ऑनकर दिया।
"बोलो चौधरी केसे हौ?" उधर सें मर्दाना स्वर मे आवाज़ उभरी___"काल रिसीव करने मे इतना वक्त केसेलगा दिया तुमने? ओह शायद मेराकाल देखकर तुम्हें समझ मे हि नं आया होगा कि क्याँ करें औऱ क्याँ नं करें? होता हैं चौधरी, ऐसा तोँ यकीनन होता हैं। औऱ हाॅयह बहोत अच्छा किया जौ अपने मोबाइल कां स्पीकर ऑनकर दिया तुमने। आख़िर तुम्हारे उन साथियों कों भि तौ मेरी मधुर आवाज़ सुनने कां हक़ हैं। "
"हमसेऐसे लहजे मे बात करने कां अंजाम नहि जानते होँ तुम्। " चौधरी नें दाॅत पीसते हुए कठोरभाव सें कहा___"अगर जानते तोँ ऐसी हिमाकत नहि करते। औऱ अब हमारी बातकान खोलकर सुनो तुम्। यह जोँ कुछ तुमने किया हैं न् उसकी सज़ा तोँ तुम्हें अवश्य मिलेगी। यहमत समझना कि वोडियो भेजकर तुमने हमे चूहाबना दिया होगा। "
"यह गीदड़ भभकियाॅ किसी औऱ कों देना चौधरी। " उधर सें ठंडे लहजे मे कहा गय़ा___"मे तुम्हारी किसीबात सें बाल बराबर भि डरने वाला नहि हूॅ। मे चाहूॅ तौ समयभर मे तुम्हारी ताकत औऱ तुम्हारी शान कों मिट्टी मे मिलादूॅ। इसलिए बेहतर होगा कि मुझसे ज़्यादा उड़ने कि कोशिश मत करना औऱ नां हि मुझ पऱ अपनारौब झाड़ना। "
"क्याँ चाहते हौ तुम्?" चौधरी कों समझ आँ गय़ा थां कि सामने वाला उससे डरने वाला नहि हैं इसलिए मुद्दे कि बात करना हि चित समझा उसने, बोला___"अगर तुमने यहसभी हमसे पैसा रुपया ऐंठने केँ लिए किया हैं तोँ मुह फाड़ो अपना औऱ बताओ कि कितना पैसा चाहिए तुम्हें? मगर ख़बरदार, डील मात्र एक् हि बार होगी। तुम्हें जितना भि पैसा चाहिए वोँ बोलदो, हम् तुम्हें मुहमागा पैसादे देंगे मगर बदले मे तुम् हमें वोँ सारे वीडियोज़ लौटा दोगे। "
"यह तुमने केसेसोच लिया चौधरी कि यहसभी मैने तुमसे पैसे ऐंठने केँ लिए किया हैं?" उधर सें हॅसकर कहा गय़ा___"अरे बुड़बक, रुपया तोँ मेरेपास इतना हैं कि मे खड़े खड़े तुम्हें औऱ तुम्हारे पूरे खानदान कों ख़रीद लूॅ। ख़ैर, तुम् जैसेदो कौड़ी केँ भड़वों कों खरीदेगा भि कौन? मैने तौ यहसभी केवलइस लिए किया कि तुम्हें बता सकूॅअब तुम्हारा औऱ तुम्हारे साथियों कां खेल समाप्त हौ चुका हैं। अब यहाॅ सें तुम् लोगों केँ बुरे कर्मों कां हिसाब शुरुआत होगा। "
"हरामज़ादे तुँ हैं कौन साले?" चौधरी बुरीतरह गुस्से मे चीख पड़ा थां___"एक् बार हमारे सामने आँ फिन हम् बताएॅगे कि हमसेऐसी ज़ुर्रत करने कां क्याँ अंजाम होता हैं?"
"हरामज़ादा किसे बोलता हैं रे मादरचोद साले रंडी कि औलाद। "उधर सें मानोशेर कि गुर्राहट उभरी___"चिंता मतकर साले बहोत जल्द तेरी हेकड़ी निकालूॅगा मे। साले बकरे कि तरह मिमियाएगा मेरे सामने। "
"ज़ुबान सम्हाल करबात कर हमसे। " चौधरी चीखा तोँ अवश्य मगर उसने स्वयं महसूस किया कि उसके स्वर मे कोईदम नहि थां, फिन भि बोला___"हम् तुम्हारे इस अपराध कों क्षमा कर देंगे। बस तुम् हमें वोँ सभी वीडियोज़ लौटादो। "
"भीख माॅगता हैं क्याँ रे चौधरी?" उधर सें ठहाके कि आवाज़ आई___"अच्छा हैं माॅगना शुरुआत हि करदेअब। ख़ैर जानेदे, मे यहकहरहा हूॅ कि बहोत जल्द तुझेही ऐसा मंज़र देखने कों मिलेगा कि तुँ उसेदेख नहि पाएगा औऱ तेरे हि संगबस क्यूं तेरेसब साथियों केँ संग भि वहीसभी होगा। अपनी बरबादी कों रोंक सकता हैं तोँ रोंक लेँ तुँ। "
अभि चौधरी कुछ कहना हि चाहता थां कि उधर सें मोबाइल कट गय़ा। चौधरी नें जल्द सें उसी नंबर पऱ काल कियामगर नंबर स्विच ऑफ बताने लगा थां। लम्हा भर मे चौधरी कि हालत किसी लुटेहुए जुआॅरी जैसी नज़रआने लगी थि। चौधरी जैसाहाल बाॅकी उन सबका भि थां जोँ वहाॅ पर्र बैठे मोबाइल कि हरबात सुनरहे थें। सुनीता कि हालत तोँ ऐसी हौ गई थि जैसेउसे लकवामार गय़ा हौ। बड़े सें ड्राइंगरूम मे गहन सन्नाटे केँ सिवाकुछ नं रह गय़ा थां।
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उधर हवेली मे।
गहरीसोच मे डूबी हुईँ नैना रितू केँ कमरे मे पहुॅची। कमरे मे पहुॅच कर उसने देखा कि रितू पुलिस कि वर्दी पहने आईने केँ सामने खड़ी होकरसिर पऱ पीकैप कों ठीक सें लगाते हुए स्वयं कों देखरही थि।
"क्याँ बात हैं रितू तूने मुझेइस तरह रहस्यमय तरीके सें किसलिए बुलाया हैं?" नैना नें रितू कि तरफ देखते हुएकहा थां। उसकीबात सुनकर रितू आईने कि तरफ सें पलटकर अपनी नैना फूफी कि तरफ देखा।
"क्याँ आपने अपनासभी सामान लेँ लिया हैं फूफी जी?" रितू नें पूछा।
"आख़िर बात क्याँ हैं मेरी बच्ची?" नैना हैरान परेशान सि बोलीं___"मुझे अपना सारा सामान लेने केँ लिए क्यूं कहरही हैं तूँ? क्याँ तुँ मुझे कहीं लेकरजा रही हैं?"
"हाॅ फूफी। " रितू नें तनिक गंभीरता सें कहा___"मगर इस वक़्त आप् मुझसे यह नं पूछिए कि ऐसा मे क्यूं कहरही हूॅ। बस आप् वोँ कीजिए जोँ मे कहरही हूॅ। यकीन मानिये फूफी मे आपको आपकेसब सवालों कां जवाब दूॅगी मगर अभि नहि। अभि आप् वही कीजिए जोँ मैनेकहा हैं प्लीज़। "
"ठीक हैं रितू। " नैना नें बेचैनी सें कहा__"पर्र मे भाई भाभी सें क्याँ कहूॅगी कि अपना सामान लेकर मे कहाजा रहीहूॅ?"
"उनकोबता दीजिएगा कि आप् वापस अपने ससुराल जारही हें क्योंकि आपकेपास आपके ससुराल सें मोबाइल आया थां जोँ आपकोआने केँ लिएकह रहे थें।। " रितू नें जैसे तरीका बताया।
"वोँ तौ ठीक हैं। " नैना नें कहा___"मगर अगर भाई नें मेरी ससुराल मे मोबाइल करकेइस बारे मे पूछा तौ क्याँ होगा? उन्हें तौ पताचल हि जाएगा कि मे उनसे झूॅठबोल रहीहूॅ। "
"वोँ ऐसाकुछ नहि करेंगे फूफी। " रितू नें कहा___"आप् बस जल्द सें सामान लेकर हवेली सें बाहर् आइये। मे आपको बाहर् हि मिलूॅगी। "
"अरे नास्ता तोँ कर लें। " नैना नें कहा___"भाभी डायनिंग टेबल मे तेरा इन्तज़ार कररही हें। "
"नहि फूफी मुझे ज़रा भि भूॅख नहि हैं। " रितू नें कहा___"औऱ आप् भि मत खाइयेगा। क्योंकि उससे हमें जाने मे देर हौ जाएगी। "
"बड़ी हैरानी कि बात हैं रितू। " नैना नें चकितभाव सें कहा___"ख़ैर, तुँ चल मे आतीहूॅ। "
"ठीक हैं फूफी। " रितू दरवाजे कि तरफ बढ़ते हुए बोलि___"जल्द आइयेगा। "
कहने केँ संग हि रितू लम्बे लम्बे डग भरतेहुए दरवाजे केँ बाहर् निकल गई। उसके पीछे पीछे हि नैना भि चल दि। यहअलग बात हैं कि इस टाइम उसकेमन मे गहन विचारों कां आवागमन शुरुआत थां।
"रितू बेटा, बड़ीदेर कर दि आने मे। " प्रतिमा नें रितू कों देखते हि कहा__"चल आजा, नास्ता ठंडा होँ रहा हैं। "
"नहि माॅम, मुझे अर्जेंट थाने पहुॅचना हैं। " रितू नें एक् एक् नज़र वहीं कुर्सियों पऱ बैठे अपने भइया शिवा औऱ अपने पिता अजय सिंह पऱ डालते हुए कहा___"मे बाहर् हि नास्ता कर लूॅगी। "
"ओह तेरीयह जॉब भि न्। " प्रतिमा नें बुरा सां मुह बनाते हुए कहा___"सुकून सें तुम्हे नास्ता भि नहि करने देती हैं। छोंड़ दे न् यहजॉब बेटा। आख़िर क्याँ कमी हैं हमारे पास औऱ क्याँ कमी कि हैं हमने तेरी इच्छाओं कों पूरा करने मे?"
"बात किसी भि चीज़ कि कमी कि नहि हैं माॅम। " रितू नें कहा___"बात हैं शौक कि औऱ यह पुलिस कि जॉब मेराशौक हि हैं। पाप औऱ ज़ुर्म कों ख़त्म करना मेरा शुरुआत सें सिद्धांत रहा हैं। ख़ैर, आप् नहि समझेंगी मेरी भावनाओं कों। "
"माॅमठीक हि तोँ कहरही हें दिदी। " सहसा शिवा नें कहा___"आपको पुलिस कि जॉब करने कि क्याँ ज़रूरत हैं? इसतरह कां शौक रखना निहायत हि बेकार कि बात हैं। "
"तूँ अपनामुह बंद हि रख समझे। " रितू नें कठोरभाव सें कहा___"मेरा शौक तेरेशौक सें कहीं अधिक ऊॅचा औऱ पाक़ हैं। पढ़लिख कर अपने पैरों पऱ खड़ी होँ गई हूॅ औऱ स्वयं कमाकर खा सकतीहूॅ। तेरीतरह डैड केँ पैसों पऱ ऐश करना मुझे हर्गिज़ पसन्द नहि हैं। "
"आप् ज़रूरत सें अधिक हि भाषणदे रही हें दिदी। " शिवा नें कहा___"बेहतर होगा कि आप् अपनायह भाषण किसी औऱ कों सुनाएॅ। "
"सचकहा तूने। " रितू नें कड़वा ज़हर मानो स्वयं हि निगलते हुए कहा___"यह भाषण तुझेही रास नहि आँ सकता। यह भाषण तौ उसे हि रास आएगा जौ इसके लायक होगा। "
"यह क्याँ बेहूदा बातें कररही होँ बेटी?" सहसाअजय सिंहकह उठा___"अपने इकलौते भइया सें इसतरह रुखाई सें कौन बेहनबात करती हैं? तुमने अपनी मर्ज़ी सें पुलिस कि जॉबकर ली हमेंकोई प्राब्लेम नहि हुइ। मगरइस बात कां भि ख़याल रखना बच्चों कां फर्ज़ हैं कि वोँ अपने माता पिता केँ अरमानों केँ बारे मे सोचें। "
"वाउडैड। " रितू कि ऑखों मे ऑसू आँ गए___"इस टाइमकौन सही हैं कौन ग़लतयह तोँ आपने बिलकुल हि नज़रअंदाज़ कर दिया। मुझेयाद नहि कि मैनेकब अपने माॅमडैड कि इज्ज़त याँ सम्मान कों चोंट पहुॅचाई हैं। बल्कि बचपन सें लेकरअब तक वहीं किया जौ आपनेकहा। आज कि दुनियाॅ मे अगर बेटियाॅ अपने पैरों पर्र खड़े होकर कामयाबी कां कोई आसमान छूती हें तौ माॅ बाप कों अपनीउस बेटी पऱ गर्व होता हैं मगर मेरे माॅमडैड कों मेरी पुलिस कि जॉब करना ज़रा भि मनपसंद नहि आया। ख़ैर, जाने दीजिए डैड। अगर आप् नहि चाहते हें कि मे यह पुलिस कि जॉब करूॅ तोँ ठीक हैं छोंड़ दूॅगी इसे। "
"तुम् बेवजह बातों कां पतंगड़ बनारही हौ रितू बेटा। " प्रतिमा नें कहा___"अपने डैड सें इस लहजे मे बात करना तुम्हें ज़रा भि शोभा नहि देता। "
"साॅरी माॅम। " रितू नें अपने अंदर केँ जज़्बातों कों बड़ी मुश्किल सें दबाते हुए कहा___"साॅरी डैड, एण्ड साॅरी भइया। "
रितू नें कहा औऱ झटके सें बाहर् कि तरफ निकल गई। दिल एकदम सें छलनी सां होँ गय़ा थां उसका। कहना तौ बहोत कुछ चाहती थि वोँ मगरयह वक़्त सही नहि थां। अपने अंदर केँ सुलगते हुए जज़्बातों कों शख्ती सें दबा लिया थां उसने। दिल मे अपनेमाॅ बाप औऱ भइया केँ लिए उसकी नफ़रत मे जैसे औऱ भि इज़ाफा होँ गय़ा थां।
हवेली केँ बाहर् आकर वो एक् तरफ खड़ी अपनी पुलिस जिप्सी कि तरफ बढ़ती चली गई। जिप्सी मे बैठकर उसनेउसे स्टार्ट किया औऱ आगे बढ़ाकर मुख्य दरवाजे तक आँ कररुक गई। कदाचित नैना फूफी केँ आने कां इन्तज़ार करनेलगी थि वो। करीब पन्द्रह मिनट केँ इन्तज़ार केँ बाद नैना बाहर् आती दिखीउसे। नैना केँ बाएॅहाथ मे उसकाबैग देखकर रितू नें मन हि मन राहत कि मीलों लम्बी साॅसली। जिप्सी केँ पासआकर नैना नें पिछली सीट पर्र बैगरखा औऱ फिनघूम कर रितू केँ बगल वालीसीट पर्र आकरबैठ गई। नैना केँ बैठते हि रितू नें जिप्सी कों झटके सें आगे बढ़ा दिया।
"हवेली सें बाहर् आने मे बहुतदेर लगा दि आपने। "मेन मार्ग पऱ पहुॅचते हि रितू नें कहा नैना सें।
"हाॅ वोँ भाई भाभी पूछने लगे थें न् कि मे अपनायह सामान लेकर कहाॅजा रहीहूॅ?" नैना नें बताया___"बड़ी मुश्किल सें उन्हें कन्विंस कियातब जाकर बाहर् आँ पाई मे। मगर मुझेयह समझ मे नहि आँ रहा कि तुम् मुझेइस तरह कहाॅ लेकरजा रही होँ?"
"बसयहसमझ लीजिए फूफी कि मे आपकोऐसी स्थान लेकरजा रहीहूॅ। " रितू नें अजीबभाव सें कहा___"जहाॅ पर्र आप् पूरीतरह सुरक्षित रहेंगी। "
"क्याँ मतलब??" नैना बुरीतरह चौंकी थि।
"मतलब किसी स्वीमिंग पुल मे भरे पानी कि तरहसाफ हैं फूफी। " रितू नें कहा___"बस समझने कि बात हैं। "
"देख तूँ मुझसे ऐसे पुलिसिये लहजे मे बातमत कियाकर। " नैना नें कहा___"मुझे बिलकुल समझ मे नहि आता कि तुँ क्याँ बोलरही हैं?"
"अच्छा यह बताइये। " रितू नें कहा__"कि डैड नें आपके ससुराल वालों कों मोबाइल तौ नहि किया नं वोँ सभी पूछने केँ लिए?"
"नहि मोबाइल तौ नहि किया। " नैना नें कहा__"बस यहीकहा कि यह अच्छी बात हैं अगर मेरी ससुराल वाले मुझेफिन सें बुलारहे हें तोँ। मगर, ऐसा भि तोँ हौ सकता हैं रितू कि वोँ मेरे यहाॅआने केँ बाद मेरी ससुराल मे मोबाइल लगाएॅ। यह जानने केँ लिए कि मे वहाॅ पर्र टाइम पर्र औऱ ठीक सें पहुॅच गई हूॅ कि नहि औऱ जब उन्हें यहपता चलेगा कि मे वहाॅ गई हि नहि तोँ क्याँ सोचेंगे वोँ मेरे बारे मे?"
"अब उनकेकुछ भि सोचने सें कोई फर्क नहि पड़ने वाला फूफी। " रितू नें कहा__"क्यूं कि अब आप् हवेली सें बाहर् आँ चुकी हें। मे तौ बस आपकोउस हवेली सें बाहर् निकालना चाहती थि। "
"क्याँ मतलब हैं तेरा?" नैना बुरीतरह उछल पड़ी। हैरत सें उसकी ऑखेंफैल गईं थि।
"अभि नहि फूफी। " रितू नें कहा___"बाद मे आपकोसभी कुछ बताऊॅगी औऱ तसल्ली सें बताऊॅगी। "
"पता नहि क्याँ अनाप शनाप बोलेजा रही हैं तुँ?" नैना कां दिमाग़ मानो चकरघिन्नी बन गय़ा थां, बोलीं___"मुझे तोँ कुछ पल्ले हि नहि पड़रही तेरी बातें। "
नैना कि इसबात पर्र रितूकुछ नं बोलीं। बल्कि जिप्सी कों टाॅप गियर मे डालकर उसे तूफान कि तरह भगाती हुई वो नियत वक़्त सें बहोत कम वक्त मे अपने फार्महाउस पहुॅच गई। फार्महाउस केँ अंदर दाखिल होकर रितू नें पोर्च केँ नीचे जाकर जिप्सी कों रोंक दिया।
"यह कौन सि स्थान हैं रितू?" नैना नें हैरानी सें इधरउधर देखते हुए कहा___"यह तुँ कहाॅ लेँ आई हैं मुझे?"
"अपने एक् अलगघऱ मे फूफी। " रितू नें कहा___"जहाॅ पर्र अपनाअलग एक् नया संसार बसता हैं। "
"एक् नया संसार?" नैना चकरा सि गई, बोलि___"इसका क्याँ मतलबहुआ भला?"
"आईये अंदर चलते हें। " जिप्सी सें उतरते हुए रितू नें कहा___"अब सें आप् यहीं रहेंगी। "
"यह तुम् क्याँ कहरही होँ बेटा?" नैना चकित स्वर मे बोलीं___"मे यहीं रहूॅगी? मगर क्यूं रितू?ऐसा क्याँ होँ गय़ा हैं जिसकी वजह सें तुम् मुझे यहाॅ लेकरआई होँ। आख़िर बात क्याँ हैं? क्याँ छुपारही हैं तूँ मुझसे? देख रितू मुझे सारीबात सचसचबता, मेरादिल बहोत घबरारहा हैं। "
"अब आपको किसी भि बात केँ लिए घबराने कि ज़रूरत नहि हैं फूफी। " रितू नें पिछली सीट सें नैना कां बैग निकालते हुए कहा__"यह अपना हि घऱ हैं। यहाॅ पऱ आपको किसीबात कां कोई ख़तरा नहि हैं। "
"खतरा???" नैना कां दिमाग़ मानो कुंद सां पड़ता चला गय़ा, बोलि___"आख़िर तुँ किस खतरे कि बातकर रही हैं रितू? मुझेभला किससे खतरा हैं औऱ किसबात कां खतरा हैं? मुझेबता बेटा, वरना तेरीइन बातों सें मे पागल हौ जाऊॅगी। "
"सभी बताऊॅगी फूफी। " रितू नें कहा__"अंदर तोँ चलिए। "
रितू कि इसबात सें हैरान परेशान नैना किसी यंत्र चालित सि होकर रितू केँ पीछे पीछे अंदर कि तरफचल पड़ी।
अंदर पहुॅचते हि उन्हें हरिया काका कि पत्नि बिंदिया मिल गई।
"अरे बिटिया आँ गई तुम्?" बिंदिया नें बड़े प्रेम औऱ सम्मान सें कहा___"औऱ यह तुम्हारे संग मे पत्नि जीकौन हें?"
"काकीयह मेरी छोटी फूफी हें। " रितू नें कहा___"औऱ आज सें यह यहीं रहेंगी। इनकाहर तरह सें ख़याल रखना। "
"इसमें कहने वालीकौन सि बात हैं बिटिया?" बिंदिया नें कहा___"मेरे लिए तौ यह भि तुम्हारी तरह हि हें। "
"इनकेलिए मेरेबगल वाले कमरे कों अच्छी तरहसाफ कर दीजिए। " रितू नें कहा__"तब तक मे इन्हें अपने कमरे मे लियेजा रहीहूॅ। औऱ हाॅ जल्द सें गरमा गर्म नास्ता भि रेडीकर दीजिए। "
"सभी हौ जाएगा बिटिया। " बिंदिया नें कहा___"तुम् बसकुछ देर कां टाइमदो मुझे। "
"ठीक हैं काकी। " रितू नें कहने केँ संग हि नैना कि तरफदेख कर कहा___"आइये फूफी ऊपर कमरे मे चलते हें। "
रितू नें कहा तौ नैना उसके पीछे चुपचाप चल दि। उसकेमन मे हज़ारों प्रश्न औऱ हज़ारों ख़याल पैदा होँ चुके थें। कमरे मे पहुॅच कर रितू नें नैना कों बेड पऱ बैठाया औऱ स्वयं भि उसकेबगल मे बैठ गई।
"अब तौ बता बेटा कि बात क्याँ हैं?" नैना नें ब्याकुलता सें पूछा___"इस तरह तुँ मुझे यहाॅ लेकर क्यूं आई हैं?"
"मुझेसमझ नहि आँ रहा फूफी। " रितू नें सहसा गंभीर होकर कहा___"कि आपको वोँ सभी बातें केसे बताऊॅ औऱ कहाॅ सें बताऊॅ?"
"देख रितू तूँ अबकोई बच्ची नहि रही। " नैना नें कहा___"बल्कि तुँ अब बड़ी हौ गई हैं। जौ भि बात हैं तूँ मुझे बेझिझक बता सकती हैं। मुझे तुँ अपनी मित्र याँ राज़दार समझ सकती हैं। मे जातनी हूॅ कि तुँ कभीकोई ग़लतकाम नहि कर सकती हैं। मुझेतुझ पऱ हमेशा सें गर्वरहा हैं। ख़ैर, तूँ बेझिझक बता कि ऐसी क्याँ बात हैं जिसकी वजह सें तूँ मुझेइस तरह यहाॅ लेकरआई हैं?"
"मुझे किसीबात कि भूमिका बनाना नहि आता फूफी। " रितू नें गंभीरता सें कहा__"मे तौ साफसाफ कहना जानती हूॅ। आप् जानना चाहती हें नं कि मे आपकोइस तरह यहाॅ क्यूं लेकरआई हूॅयो सुनिए___हवेली मे रहने वाले आपके भाई भाभी औऱ आपका भतीजा यह तीनो हि वासना औऱ हवस केँ चलतेइस क़दर अंधे हौ चुके हें कि इन्हें अबयह भि नहि दिखता कि यहलोग जिनके संग कुकर्म करने कां मंसूबा बनाएहुए हें वोँ रिश्ते मे इनके क्याँ लगते हें। "
"यह तूँ क्याँ कहरही हैं रितू?" नैना कि ऑखें हैरत सें फैलगईं, बोलि___"तुझे हीकुछ होश भि हैं कि तूँ किनके बारे मे क्याँ बोलरही हैं?"
"होश तोँ अबआया हैं फूफी। " रितू नें भारी लहजे मे कहा___"बचपन सें लेकरअब तक तौ मे बेहोश हि थि। अपनेउन माता पिता कों देवता समझती रही जिनके हाॅथ अपने हि घऱ केँ लोगों केँ खून सें सनेहुए हें। आपको नहि पता फूफी, आपका भइया औऱ मेरा बाप अपने हि भइया विजय सिंह कां क़ातिल हैं। आज तक हम् सभीयही जानते रहे हें कि विजय चाचा कि मौत सर्प केँ काटने सें हुई थि जब वोँ खेत मे पानीलगा रहे थें। जबकि यहबात सरासर झूॅठ हैं फूफी। सच्चाई यह हैं कि मेरे बाप नें उनकी जानबूझ करजान ली थि। "
"यहयह क्याँ कहरही हैं तूँ?" नैना केँ पैरों तले सें ज़मीन गायब होँ गई___"नहि नहि अजय भाई ऐसा नहि कर सकते हें। यहसभी झूठ हैं रितू, कह दे कि यहसभी झूठ हैं। "
"केसेकह दूॅ फूफी?" रितू कि ऑखेंछलक पड़ी____"मैंने अपनी ऑखों सें देखा हैं औऱ कानों सें सुना हैं। "
"कब देखा सुना तुमने?" नैनाकह उठी।
"कल रात कों। " रितू नें कहा___"औऱ यह अच्छा हि हुआ फूफी कि मुझे अपने माता पिता कि यह सच्चाई स्वयं उनके हि मुख सें सुनने कों मिल गई। कलरात मुझे नींद नहि आँ रही थि। अपनेबेड पर्र पड़ी मे करवॅटें बदलरही थि। फिन मुझे प्यास लगी तोँ मे अपने कमरे सें निकलकर नीचे किचेन मे पानी पीने केँ लिएआई। पानी पीकरजब मे वापस अपने कमरे कि तरफ जानेलगी तौ देखा कि गौरी चाची कि तरफ जाने वाला पार्टीशन कां दरवाजा खुलाहुआ थां। मैने सोचायह खुलाहुआ क्यूं हैं आज। बसयही पता करने केँ लिए मे उसतरफ चली गई। मगर मुझे क्याँ पता थां कि उसतरफ मुझेकुछ ऐसा देखने सुनने कों मिलेगा जिसेदेख सुनकर मेरे पैरों तले सें धरती गायब हौ जाएगी। "
"ऐसा क्याँ देखा सुना तुमने?" नैना बेयकीनी भरेभाव सें पूछा थां। उसकीबात सुनकर रितूउसे वोँ सभीकुछ बताती चली गई जोँ कुछ उसनेउस तरफ कमरे केँ अंदर देखा औऱ सुना थां। उसने एक् एक् बात नैना कों बताई। सारी बातें सुनने केँ बाद नैना कि हालत काटो तोँ खून नहि जैसी हौ गई थि। फिन जैसेउसे स्वयं हि होशआया। उसका चेहरा पलक झपकते हि दुख औऱ पीड़ा मे डूबता चला गय़ा। ऑखों सें झरझर करकेऑसू बहनेलगे।
"इतना बड़ापाप। " फिन वो बिलखते हुए बोलि___"औऱ इतना बड़ा गुनाह कियाइन लोगों नें मेरे देवता जैसे भइया केँ संग। अरे उसकेसंग हि क्यूं रे, इन लोगों नें तौ किसी कों भि नहि बक्शा। अपनेपाप औऱ गुनाह कों छुपाने केँ लिए मेरे भइया कि सर्प सें कटवाकर जान लें ली। मेरी देवी समान भाभी गौरी पर्र इतने संगीन इल्ज़ाम लगाए औऱ उन्हें हवेली सें निकाल दिया। इन लोगों नें तौ हवेली कों नर्कबना कररख दिया हैं रितू। अच्छा हुआ तूँ मुझे यहाॅ लें आई। वरनाइन लोगों कां कोई भरोसा नहि थां कि यहलोग कब मेरी याँ तुम्हारी इज्ज़त केँ संग अपनीहवस कि भूख कों शान्त करते। "
"मुझे नफ़रत होँ गई हैं फूफी अपनेमाॅ बाप औऱ भइया सें। " रितू नें कहा___"मे तौ कल हि अपने रिवाल्वर सें इन तीनो कों जान सें मार देना चाहती थि मगर मेरे ज़मीर नें रोंक दिया मुझे। यह कहकर कि इनकोजान सें मारने कां अधिकार मुझको नहि बल्कि उसे हैं जिनके संगइन लोगों नें ग़लत किया हैं। शपथ सें फूफी, मुझेऐसे माॅ बाप औऱ भइया केँ मर जाने कां लेश केवल भि दुख नहि होगा। "
"मुझे तोँ अभि भि यकीन नहि होँ रहा रितू कि यहसभी इन लोगों नें किया हैं। " नैना नें दुखीभाव सें कहा___"पता नहि मेरी देवी समान गौरी भाभी औऱ उनके दोनो बच्चे किसहाल मे होंगे? जिसतरह सें इन लोगों उन पऱ अत्याचार किया हैं न् उसकी इन्हें सज़ा अवश्य मिलेगी। भगवान केँ पास सबका हिसाब हैं। उसका क़हरजब इन पर्र बरपेगा नं तौ इनके जिस्मों पऱ कीड़े पड़ जाएॅगे। "
"वोँ लोग मुम्बई मे जहाॅ भि होंगे यहाॅ सें बहोत अच्छे होंगे फूफी। " रितू नें कहा___"औऱ आपकोपता हैं आज मेरा वोँ भइया आँ रहा हैं जिसे मैनेकभी अपना भइया नहि समझा थां। मगर वोँ पगला हमेशा मुझे इज्ज़त सें दिदी हि कहा करता थां। मेरा सच्चा भइया आँ रहा हैं फूफी। मेराराज आँ रहा हैं मुम्बई सें। "
"क्याँ?????" नैनाउछल पड़ी___"मगर तेरी केसेपता?"
"पता तौ होगा हि फूफी। " रितू नें फीकी सि मुस्कान केँ संग कहा___"आख़िर बुलवाया तौ मैने हि हैं उसे। "
"यह क्याँ कहरही हैं तुँ?" नैना नें बुरीतरह चौंकते हुए कहा___"तूने उसे बुलवाया हैं? यह जानते हुए भि कि तुम्हारे बाप सें उसकीजान कों खतरा हैं?"
"उसेकुछ नहि होगा फूफी। " रितू नें दृढ़ता सें कहा___"उसकी तरफआने वालीहर बाधाहर मौत कों सबसे पहले मुझसे मिलना होगा। शपथ सें फूफी अगर स्वयं मेरा बाप उसकीमौत बन उसकेपास आया तोँ मौत रूपीउस बाप कों भि मे जीवित नहि छोंड़ूॅगी। "
"मगर तूनेउसे बुलवाया किसलिए हैं रितू?" नैना नें कहा___"आख़िर बात क्याँ हैं?"
"उसकी भि अजब स्टोरी हैं फूफी। " रितू नें अजीबभाव सें कहा___"पगले कां नसीब तौ देखो। कहीं पर्र भि उसे प्रेम औऱ खुशियाॅ नसीब नहि हुईं। दुख दर्द नें तोँ जैसे उसका दामन हि थामरखा हैं। "
"क्याँ कहरही तूँ?" नैना नें नाँ समझने वालेभाव सें कहा___"साफ साफबता कि बात क्याँ हैं?"
"फूफी, मेरा भइया विराज एक् हसीन लड़की सें प्रेम करता थां। " रितू दुखी लहजे मे बोलीं___"मगर बाद मे उस लड़की नें उसे छोंड़ दिया। औऱ अब वहीं लड़कीउसे आखिरी बार देख्ना चाहती हैं। "
"आखिरी बार???" नैना कां दिमाग़ चकरा गय़ा___"इसका क्याँ मतलबहुआ?"
रितू नें नैना कों सारी बातें बताई। यह भि बताया कि उस लड़की कां कुछ दिनों पहले गैंगरेप होँ चुका हैं। रितू नें बताया कि केसेउस लड़की नें विराज कों छोंड़ा थां औऱ अब लास्ट स्टेज केँ कैंसर सें आखिरी साॅसें लें रही हैं। वोँ चाहती हैं कि अंत टाइम मे वोँ अपने महबूब कों देख लें औऱ उसी कि बाहों मे उसकादम निकले। सारी बातें सुनने केँ बाद नैना एकदम अवाक् रह गई। उसकी ऑखों मे फिन सें ऑसुओं कां सैलाब सां आँ गय़ा।
"हे ईश्वर यहसभी क्याँ कररहा हैं तूँ?" नैना नें ऊपर कि तरफदेख कर दुखीभाव सें कहा___"मेरे बच्चे कों कितना दुख संताप देगा तुँ। रितू, वोँ विधी कों उसहाल मे देख नहि पाएगा। ईश्वर हि जाने क्याँ गुज़रेगी उस टाइम उसकेदिल पर्र। यह प्रेम इश्क होती हि ऐसी चीज़ हैं बेटा कि इंसान कों कमज़ोर दिल कां बना देती हैं। स्वयं पर्र चाहे हज़ार चोंटखा लेँ इंसान मगर अपने प्रियतम केँ लिए वोँ छोटी सें छोटी चोंट भि बरदास्त नहि कर पाता। तुँ उसकेपास हि रहना बेटा। नहि तोँ तुँ मुझे लें चल उसकेपास। मे अपने भतीजे कों उस वक़्त सम्हालूॅगी। मे उसे किसी भि कीमत पर्र बिखरने नहि दूॅगी रे। "
"बस परमेश्वर सें दुवा कीजिए फूफी कि सभीठीक हि रहे। " रितू नें भारी स्वर मे कहा__"मे अपने भइया केँ पास हि रहूॅगी। मे उसे अपने सीने सें लगा लूॅगी फूफी मगरउसे बिखरने नहि दूॅगी। "
"मुझेतुझ पर्र पूरा भरोसा हैं रितू। " नैना नें रितू केँ चेहरे कों अपनी दोनो हथेलियों केँ बीच लेकर कहा____"आज तुम्हे अपनेउस भइया केँ लिए इतना प्रेम औऱ इतनी तड़पदेख कर मुझे खुशी हुइ, जिस भइया कों तूनेकभी अपना नहि समझा थां। "
"वोँ मेरी सबसे बड़ीभूल थि औऱ नादानी थि फूफी। " रितू कि ऑखों मे ऑसूभर आए, बोलीं___"जोँ मैने अपने पारस जैसे भइया कों कभी अपना नहि समझा थां। मगर इसमें भि मेराकोई कसूर नहि हैं फूफी। यहसभी तौ मेरे उन्हीं माॅ बाप कि वजह सें हुआ हैं जिन्होंने बचपन सें हम् बेहन भइया कों यही सिखाते रहे कि यह हमारे अपने नहि हें बल्कि यह बुरेलोग हें। मगर कहते हें नं फूफी कि सच्चाई हमेशा केँ लिए पर्दे केँ पीछे छुपी नहि रह सकती। वोँ एक् दिनउस पर्दे सें निकलकर हमारे सामने आँ हि जाती हैं। आज मुझेपता चल चुका हैं कि अच्छा कौन हैं औऱ बुराकौन हैं? जिंदगी भर दूसरों कों बुरा बताने वालाआज स्वयं मेरे सामने कितना बुरा औऱ पापी निकला जिसकी कोई सीमा नहि हैं। जौ बाप अपनी हि बेटी बहू औऱ बेहन कों अपने नीचे सुलाने कि बातकरे वोँ अच्छा केसे हौ सकता हैं फूफी। वोँ तौ सबसे ऊॅचे दर्ज़े कां पापी हैं, कुकर्मी हैं। ऐसे लोगों कों इस धरती पर्र जीने कां कोई अधिकार नहि हैं। "
"बड़े बड़े पापी औऱ कुकर्मियों कां इस धरती सें सर्वनाश हुआ हैं बेटी। " नैना नें कहा__"फिन यह केसे जीवित बच जाएॅगे। इनका भि वही हस्र होगा जौ कंस औऱ रावण कां हुआ थां। ख़ैर, तुँ यहबता कि विराज कब पहुॅच रहा हैं यहाॅ? औऱ तूने उसकी सुरक्षा केँ लिए क्याँ इंतजाम किया हैं?"
"मैने उसकी सुरक्षा केँ लिए इंतजाम कर दिया हैं फूफी। " रितू नें कहा___"रेलवे स्टेशन पऱ सिविल वेश मे पुलिस केँ व्यक्ति मौजूद हें। मुझेपवन नें मोबाइल पर्र बताया थां कि वोँ ट्रेन सें उतरने केँ बाद किसीकैब मे हल्दीपुर आएगा। उसने ऐसा शायदइस लिए किया हैं कि डैड केँ व्यक्ति अगर वहाॅ कहींहों भि तौ वोँ सभीउसे बस मे ढूॅढ़ेंगे, जबकि उसकेकैब सें आने कि वोँ लोग उम्मीद भि न् करेंगे। "
"मेरा भतीजा होशियार हैं। " नैना नें खुश होकर कहा___"बहोत अच्छा सोचा हैं उसने। ख़ैर, अब तूँ क्याँ करने वाली हैं?"
"मे पवन केँ मोबाइल कां इन्तज़ार करूॅगी। " रितू नें कहा___"क्योंकि विराज सीधापवन केँ घऱ हि जाएगा। इधर मे हास्पिटल विधी केँ पास जाऊॅगी। उधर सें सभीकुछ ठीक करनेबाद मे पवन कों मोबाइल कर दूॅगी कि अब वोँ विराज कों लेकर हास्पिटल आँ जाए। मैने हास्पिटल केँ चारोतरफ भि सिविल ड्रेस मे पुलिस वालों कों मौजूद रहने केँ लिएकह दिया हैं। "
"यह बहोत अच्छा किया तुमने। " नैना नें कहा___"औऱ मुझे यकीन हैं कि तेरे रहते विराज कों कुछ नहि होगा। "
"मे अपनीजान दे दूॅगी फूफी। " रितू नें दृढ़ता सें कहा___"मगर अपने भइया कों खरोंच तक आने नहि दूॅगी। "
"क्याँ इतना प्रेम करती हैं तुँ अपनेउस भइया सें?" नैना कि ऑखेंभर आईं थि।
"ऐसे भइया कों तोँ केवल प्रेम हि किया जाता हैं न् फूफी?" रितू केँ जज़्बात बेकाबू सें हौ गए, स्वयं कों बड़ी मुश्किल सें सम्हाल करकहा उसने___"अगर कहीं ईश्वर मिले मुझे तौ उससेयही कहूॅगी कि मुझेहर जन्म मे विराज जैसा हि भइयादे औऱ शिवा केँ जैसा भइया किसी बैरी कों भि नं दे। "
नैना नें तड़पकर रितू कों अपने सीने सें लगा लिया। दोनो कि ऑखों सें ऑसुओं केँ वोँ बाॅधफूट पड़े जौ भावनाओं औऱ जज़्बातों केँ मचल उठने सें बेकाबू सें हौ गए थें। अभि यह दोनो एक् दूसरे केँ गले हि लगे थें कि तभी कमरे मे बिंदिया नें प्रवेश किया।
"बिटिया, नास्ता सजधजकर कर दिया हैं मैनेचलो नास्ता करलो। " बिंदिया नें कहा___"औऱ हाॅ इनकारूम भि साफकर दिया हैं मैने। "
बिंदिया कि बातसुन कर दोनोअलग हुईं औऱ बड़ी सफाई सें अपनी अपनी ऑखों सें दोनो नें ऑसुओं कों साफकर लिया।
"आप् चलिए काकी। " रितू नें कहा___"हम् बसदो मिनट मे आते हें। "
"ठीक हैं बिटिया। " बिंदिया नें कहा औऱ दरवाजे सें वापसपलट गई।
बिंदिया केँ जाने केँ बाद नैना औऱ रितू दोनो हि बाथरूम कि तरफबढ़ गईं। बाथरूम मे पानी सें अपने अपने चेहरों कों धोने केँ बाद वोँ दोनो वापस कमरे मे आईं औऱ हुलिया सही करने केँ बाद नास्ते केँ लिए कमरे सें बाहर् चलीगईं।
"काकी, आज काका कहीं दिखाई नहि दियेअब तक। " नास्ते कि टेबल पर्र बैठी रितू नें बिंदिया सें कहा___"बाहर् गेट पऱ मात्र शंकर काका हि दिखे थें। "
"अरे बिटिया अब क्याँ बताऊॅ तुमसे। " बिंदिया नें बुरा सां मुह बनाते हुए कहा__"वोँ तोँ जब देखोउन चारों कि खातिरदारी मे हि लगा रहता हैं। तुमने काम जोँ सौंपा हुआ हैं उसे। "
"कौन चारो?" नैना कों समझ न् आया थां इसलिए पूछ बैठी थि, बोलि___"औऱ किनकी खातिरदारी?"
"उन्हीं चारों कि फूफी जिन्होंने विधी केँ संग कुकर्म किया थां। " रितू नें कहा___"वोँ सभी बड़े बाप कि बिगड़ी हुई औलादें हें। जैसे कुकर्मी बाप वैसे हि कुकर्मी बेटे हें। विधी केँ संगइन लोगों जोँ कुकर्म किया उसकेलिए उन चारों कों कानूनी तौर पर्र मे कोई सज़ा नहि दिला सकती थि, क्योंकि वोँ सभी अपने बाप कि ऊॅची पहुॅच औऱ ताकत केँ बल पऱ बड़ी आसानी सें कानून कि गिरफ्त सें निकल जाते। ऐसे मे विधी केँ संग इंसाफ नहि हौ पाता फूफी इसलिए कानून कि रखवाली करने वाली आपकीइस बेटी नें कानून कों अपने हाॅथ मे लेकर स्वयं उन चारों कों सज़ा देने कां फैंसला किया। यह इसी फैंसले कां नतीजा हैं कि वोँ चारोआज यहाॅ पिछले कई दिनों सें रोज़ाना सज़ा केँ रूप मे यातनाएॅ झेलरहे हें। औऱ मज़े कि बातयह हैं फूफी कि किसी कों इसबात कि भनक तक नहि हैं कि यहाॅ पर्र किसी कों ऐसी सज़ा दि जारही हैं। इनके बाप लोगों कों यही लगता हैं कि उनके बेटे कहीं बाहर् गएहुए हें औऱ मज़े मे होंगे। "
"यह तौ तुमने बहोत अच्छा काम किया हैं रितू। " नैना नें कहा___"मगर अगरइन लोगों केँ बापों कों पताचल गय़ा कि उनके बेटों केँ संग तुम् यहाॅ क्याँ कररही होँ तब क्याँ होगा?"
"उसका भि पुख्ता इंतजाम कररखा हैं मैने। " रितू नें कहा___"बहोत जल्दइन लोगों केँ बापों कों भि ऐसी हि सज़ा देने वालीहूॅ मे। किसी कों पता भि नहि चलेगा कि इन नामों केँ लोगों केँ संग किसने क्याँ किया हैं। "
नैना, रितू केँ चेहरे कों देखती रह गई अचरजभरी नज़रों सें। सें यकीन हि नहि हौ रहा थां कि उसकीफूल जैसी नाज़ुक सि भतीजी ऐसे खतरनाक काम भि करती हैं। ख़ैर, नास्ता करने केँ बाद रितू नें नैना सें जाने कि इजाज़त ली औऱ बाहर् कि तरफ निकल गई जबकि नैनामन हि मन परमेश्वर कों यादकर रितू औऱ विराज कि सलामती कि दुवाएं करनेलगी थि।
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उधर ट्रेन अपने निर्धारित वक्त पऱ हि गुनगुन स्टेशन पऱ पहुॅची थि। ट्रेन सें उतरने सें पहले मैने अपने चेहरे कों रुमाल सें ढॅक लिया थां। मेरेसंग मेरानया यार आदित्य थां। उसको अपना चेहरा ढॅकने कि कोई ज़रूरत नहि थि। क्योंकि उसे यहाॅ पर्र कोई पहचानता हि नहि थां। हम् दोनो ट्रेन सें उतरकर स्टेशन सें बाहर् कि तरफबढ़ चले।
प्लेटफार्म पर्र इधरउधर मैने सरसरी तौर पर्र अपनी नज़रें दौड़ाई तोँ सहसा एक् ऐसे चेहरे पऱ मेरी नज़र पड़ी जौ यकीनन बड़े पिताजी कां व्यक्ति थां। वोँ एग्जिट गेट केँ दाएॅतरफ खड़ाहर आने वालों कों बड़े ध्यान सें देखरहा थां। मैने उसकीतरफ सें अपनी निगाह हटाली औऱ बेफिक्र होकर एग्जिट गेट कि तरफबढ़ चला। एग्जिट गेट केँ पासजब मे औऱ आदित्य पहुॅचे तौ सहसा टीटी नें हमें रोंक लिया औऱ हमसे टिकट दिखाने कों कहनेलगा। मैने जल्द सें अपने पाॅकेट सें अपना पर्स निकाला औऱ उससे टिकट निकाल कर टीटी कों पकड़ा दिया। मैने लम्हा भर केँ लिए दाएॅतरफ कुछ हि दूरी पर्र खड़े बड़े पिताजी केँ उस व्यक्ति कि तरफ देखा। वोँ आने वाले आदमियों कि तरफ बड़े ध्यान सें देखरहा थां। मे यह नहि जानता कि उसने मेरीतरफ देखा थां याँ नहि मगरइस समय उसकी नज़र सामने सें आने वाले अन्य यात्रियों कि तरफ हि थि। इधर टीटी नें मेरी टिकटचेक करनेबाद मुझे वापस लौटा दि तौ मेरे पीछे आदित्य नें भि टीटी कों अपनी टिकटथमा दि। टीटी आदित्य कि टिकट देखने बाद आदित्य कों वापसकर दिया। मैने इशारे सें आदित्य कों चलने कां इशारा किया। तभी उस ब्यक्ति कि नज़रमुझ पऱ पड़ी। वोँ मुझे ध्यान सें देखने लगा। मे उसके देखने पऱ एकदम सें घबरा सां गय़ा मगरफिन जल्द हि मैने स्वयं कों सम्हाला औऱ आदित्य कों लेकर बाहर् कि तरफबढ़ गय़ा। मे पीछे नहि देख्ना चाहता क्योंकि मुझे अंदेशा थां कि वोँ शायद मुझे हि देखरहा होगा औऱ गर मैनेपलट कर उसकीतरफ देखा तोँ उसे अवश्य मुझ पऱ शक होँ सकता हैं।
बाहर् आकर मे औऱ आदित्य कैब कि तरफ तेज़ी सें बढ़चले। हलाॅकि वहाॅ पर्र बहोत सें लोगों कि भीड़ थि इसलिए मुझे यकीन थां कि वोँ व्यक्ति इतना जल्द मुझे ढूॅढ़ नहि पाएगा। कैब केँ पास पहुॅचा हि थां एक् व्यक्ति हमारे पासआया औऱ हमसेकैब कां पूॅछा तौ हमने जल्दी उस व्यक्ति कों हाॅकह दिया। व्यक्ति हमारी हाॅ सुनते हि हमे लेकर अपनीकैब केँ पास पहुॅचा औऱ कैब कां गेटखोल कर हमें अंदर बैठने कां इशारा किया। हम् दोनो उसमेबैठ गए तौ वोँ कैब ड्राइवर भि स्टेयरिंग सीट पऱ बैठ गय़ा।
"कहाॅ चलना हैं साहब?" ड्राइवर नें कैब कों स्टार्ट करतेहुए पूछा।
"हल्दीपुर। " मैनेकहा तोँ ड्राइवर नें कैब कों आगे बढ़ा दिया। मैनेपलट कर स्टेशन कि तरफ देखा तौ मुझे बड़े पिताजी कां वोँ व्यक्ति कहीं नज़र नं आया। अभि मे यहसभी देख हि रहा थां कि तभी मेराफोन मोबाइल बजउठा। मैने हड़बड़ा करफोन कों निकाल कर स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे नाम कों देखा। पवन कां मोबाइल थां। मैनेकाल रिसीव कि तोँ वोँ मुझसे पूछने लगा कि मे इस वक़्त कहाॅहूॅ तोँ मैनेउसे बता दिया कि कैब मे बैठकर हल्दीपुर केँ लिए निकल लियाहूॅ। मेरीबात सुनकर उसनेकहा कि ठीक हैं वोँ मुझे हल्दीपुर केँ बस स्टैण्ड पऱ मिलेगा जहाॅ पर्र उसकी दुकान हैं। उसकेबाद मैनेकाल कटकर दि।
"यहाॅ सें कितना टाइम लगेगा तुम्हारे गाॅव पहुॅचने मे?" आदित्य नें मुझसे पूछा।
"अधिक सें अधिकआधे घंटे कां वक्त लगेगा। " मैने कहा___"हल्दीपुर केँ बस स्टैण्ड सें पवन कों संग मे लेकर हि उसकेघऱ चलेंगे। "
मेरीबात सुनकर आदित्य कुछ न् बोला। मैने एक् बार पीछे मुड़कर कैब केँ पिछले शीशे केँ उसपार देखा। एक् जीप हमारी इसकैब केँ पीछे आँ रही थि। मैने सोचा होगाकोई। मगर मुझेकोई उम्मीद नहि थि कि इसतरह कोईजीप वाला एक् रिदम पऱ कैब केँ पीछेचल रहा थां। मैनेकई बारनोट कि वोँ जीप हमादे पीछे उतनी हि रफ्तार सें चलती हुइ आँ रही थि। मुझेसमझ न् आया कि ऐसाकौन होँ सकता हैं उसजीप मे जौ हमारे पीछे पीछे उतनी हि गति सें आँ रहा थां जितनी गति सें हमारी टेक्सी मार्ग पऱ दौड़ी जारही थि। मेरा माथा ठनका कि कौन हौ सकता हैं उसजीप मे?????
दोस्तो, आपके सामने भाग हाज़िर कर दियाहूॅ,,,,,,,
यहदोदिन सें थोडा थोडा लिखरहा थां मे। आज मे तिलक मे हूॅ अभि। बाॅकी कां थोडा एपसोड यहीं बैठे बैठे लिखा हैं। मुझे लगता हैं कि इतना बहुत हैं।
अगलेभाग मे आगे कां विवरण होगा, जौ शायदकुछ अधिक इमोशनल होगा,,,,,,,,,,
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बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं,,,,,,
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♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
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