♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 47 》
अब तक,,,,,,,,
"तुम्हें क्याँ लगता हैं अजय?" सहसा प्रतिमा नें उसके चेहरे केँ भावों कों रीड करतेहुए कहा___"रितू कि बातों मे कितनी सच्चाई हैं?"
"मतलब तुम्हें भि इसबात कां शक हैं कि हमारी बेटी हमसे झूॅठबोल रही हैं?" अजय सिंह नें भावहीन स्वर मे कहा___"यह भि कि उसने बड़ी सफाई सें अपनीबात साबित भि कर दि। "
"यहबात तोँ मे तुमसे पूछरही हूॅ डियर। " प्रतिमा नें पहलू बदला___"तुमने हि तोँ उससेकहा थां कि जीप मे वही बैठी थि ऐसा तुम्हारे व्यक्ति नें मोबाइल पऱ तुमसे कहा थां। अब जबकि रितू नें अपनी सफाईदे दि हैं तोँ तुम्हें क्याँ लगता हैं अब?"
"मुझे यकीन तौ नहि होँ रहा प्रतिमा कि रितू नें विराज कों प्रोटेक्ट किया होगा। "अजय सिंह नें कहा___"मगर उसके बदलेहुए बिहैवियर कि वजह सें ऐसा सोचने पऱ मजबूर भि हौ गय़ा हूॅ। उसकी बातों मे कितनी सच्चाई हैं इसकापता लगाना भि ज़रूरी हैं। इसलिए मैनेसोच लिया हैं कि उस पऱ नज़र रखने केँ लिए अपने किसी व्यक्ति कों उसके पीछेलगा दूॅगा। इससेकोई न् कोई सच्चाई तौ पताचल हि जाएगी हमे। "
"हाॅ यहसही सोचा हैं तुमने। " प्रतिमा नें कहा___"इससे दूध कां दूध औऱ पानी कां पानी हौ जाएगा। ख़ैर, छोंड़ो यहसभी। मेरा तौ इस सबसे बहोत सिर दर्दकर रहा हैं अब। इसलिए मे जारही हूॅ अपने कमरे मे। "
"ठीक हैं डियर। "अजय सिंह नें सोफे सें उठतेहुए कहा___"मे भि फैक्ट्री केँ लिए निकलरहा हूॅ। "
यह कहकरअजय सिंह बाहर् कि तरफबढ़ गय़ा। उसके जाते हि प्रतिमा नें शिवा कि तरफ गहरी नज़रों सें देखा औऱ मुस्कुरा दि। शिवा उसकी मुस्कुराहट कां मतलबसमझ कर स्वयं भि मुस्कुरा उठा। प्रतिमा सोफे सें उठकर अपने कमरे कि तरफबढ़ गई। उसके जाने केँ कुछदेर बाद शिवा भि उसी कमरे कि तरफबढ़ गय़ा थां।
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अबआगे,,,,,,,
तहखाने केँ अंदर कां नज़ारा हि कुछअलग थां जिसे मे ऑखें फाड़े अपलक देखेजा रहा थां। कुछदेर केँ लिए तौ जैसे मेरा दिमाग़ हि कुंदपड़ गय़ा थां। तहखाने केँ अंदर चारोतरफ छत पर्र लगे सफेदएल ईडी बल्बों कि तीब्र रोशनी थि। अंदर मौजूद एक् एक् चीज़ स्पष्ट देखीजा सकती थि। लेकिन मेरी ऑखेंजिस नज़ारे कों देखकर हैरत सें फट गई थि वोँ कुछअलग हि किस्म कां थां। राइट साइड कि दीवार सें सटेहुए चार लड़के थें। उन चारों लड़कों केँ दोनो हाॅथ मजबूत रस्सी सें बॅधेहुए जोँ कि ऊपर हि उठेहुए थें। चारों लड़कों बदन पऱ इस टाइम कपड़े कां कोई रेसा तक न् थां बल्कि वोँ चारो जन्मजात नंगे थें। उन चारों कि शक्ल सूरत सें हि पताचल रहा थां कि उन चारों नें यहाॅ कितनी दर्दनाक यातनाएॅ सही होंगी।
बाहर् सें तहखाने मे आयाहुआ वोँ व्यक्ति भि इस वक़्त पूरीतरह नंगा थां औऱ उन चारों मे सें एक् लड़के कों उसकेसिर केँ बालों सें मजबूती सें पकड़कर अपने लन्ड पर्र झुकाया हुआ थां। मे साफदेख रहा थां कि वोँ व्यक्ति उस लड़के केँ मुख मे अपने लन्ड कों ज़बरदस्ती डाले अपनीकमर कों आगे पीछेकर रहा थां। उसकासिर ऊपर कि तरफ थां औऱ उसकी दोनो ऑखें मज़े मे बंद थि।
यहसभी देखकर मेरा दिमाग़ कुछदेर केँ लिए हैंग सां हौ गय़ा थां। फिन जैसे मुझेहोश आया। मेरे अंदर गुस्स औऱ गुस्से कि आग बिजली कि सि तेज़ी सें बढ़ती चली गई। मेरे जबड़े कसगए औऱ मुट्ठिया भिंच गई। मे तेज़ी सें बढ़ते हुएउस व्यक्ति केँ पास पहुॅचा औऱ अपनी पूरी शक्ति सें एक् लात उसके बाजू मे जड़ दि। परिणामस्वरूप वोँ व्यक्ति उछलते हुए पीछे कि दीवार सें टकराया औऱ फिन भरभरा कर नीचे तहखाने केँ पक्के फर्स पर्र गिरा। उसकेहलक सें दर्द मे डूबी हुई चीख़ निकल गई थि।
फर्स पड़ा वोँ व्यक्ति बुरीतरह कराहने लगा थां। उसकी दोनो टाॅगें आपस मे जुड़कर मुड़ गई थि औऱ उसके दोनो हाॅथ उसकी टाॅगों केँ बीच उसके प्राइवेट पार्ट पर्र थें। मुझे समझते देर नहि लगी कि अचानक हुएइस हमले सें उसका जोँ प्राइवेट पार्ट उस लड़के केँ मुख मे थां वोँ झटके सें निकल गय़ा थां औऱ झटके सें निकलने सें शायद उसके प्राइवेट पार्ट मे उस लड़के केँ दाॅतगड़ गए होंगे याँ फिन दाॅतों सें उसका लन्ड छिल गय़ा होगा।
इधर अचानक हुएइस हमले सें वोँ लड़का भि फर्स पऱ लुढ़क करगिर गय़ा थां, औऱ बाॅकी केँ तीन लड़के जोँ दीवार सें सटे रस्सियों मे बॅधे खड़े थें वोँ इस सबसे बुरीतरह घबरागए थें। मेरे अंदर गुस्से कि आगधधक रही थि इसलिए उस व्यक्ति कों एक् लात जड़ने केँ बाद मे उसकीतरफ बढ़ा औऱ झुककर उसकेसिर केँ बालों कों पकड़कर उसे झटके सें उठा लिया। वोँ व्यक्ति फिन सें दर्द मे कराहउठा। अभि वोँ सम्हला भि नहि थां कि मैने एक् पंच उसके चेहरे पर्र जड़ दिया जिससे वोँ फिन सें उछलते हुएदूर जाकर गिरा। मैने इतने पर्र हि बस नहि किया बल्कि मैंने तोँ उसकी धुनाई मे कोईकसर हि नहि छोंड़ी। वोँ स्वयं भि अपनेहाथ पेरचला रहा थां मगर उसकी मेरे सामने एक् नहि चलरही थि। कुछ हि देर मे वोँ अधमरी हालत मे पहुॅच गय़ा थां। जब मैने देखा कि वोँ फर्स पर्र पड़ाअब हिलडुल भि नहि रहा हैं तोँ मैनेउसे मारना बंदकर दिया।
मुझेउस पऱ इसलिए इतना क्रोध आयाहुआ थां कि वोँ उस लड़के केँ संग ज़बरदस्ती इतना घिनौना कामकर रहा थां। मे यह भि समझ चुका थां कि वोँ यहकाम उस लड़के केँ अलावा बाॅकी उन तीनों केँ संग भि करता होगा। बस इसीबात पर्र मुझे उसकेऊपर इतना क्रोध आया थां औऱ मैनेउसे मारते मारते अधमरा कर दिया थां।
उस व्यक्ति केँ शान्त पड़ने केँ बाद मैने अपने गुस्से कों काबू करने कि कोशिश कि औऱ फिन तेज़ी सें पलटा। मेरी नज़र फर्श पऱ गिरेउस लड़के पर्र पड़ी जिसके संग वोँ व्यक्ति वोँ घिनौना कामकर रहा थां। मैने देखा कि वोँ लड़का बुरीतरह डर सें काॅपरहा थां। मुझेउस पर्र बड़ातरस आया औऱ उसकी हालतदेख करउस व्यक्ति पऱ फिन सें क्रोध आँ गय़ा। मगर मैने अपने गुस्से कों काबू किया औऱ उस लड़के केँ पास उकड़ू होकरबैठ गय़ा।
"कौन हैं यह व्यक्ति?" मैनेउस लड़के सें पूॅछा___"औऱ वोँ तुम्हारे संग इतना घिनौना काम क्यूं कररहा थां? मुझेसभी कुछसाफ साफ बताओ। "
वोँ लड़का मेरीयह बातसुन करकुछ नं बोला बल्कि डरी सहमी हुईँ ऑखों सें देखते रहा मुझे। मे समझ गय़ा कि इन चारों कों उस व्यक्ति नें इतनाडरा दिया हैं कि यहलोग अपनी ज़ुबान तक नहि खोलपा रहे हें। इसबात पऱ मुझेउस व्यक्ति पर्र फिन सें बड़ा तेज़ क्रोध आँ गय़ा। मैने अपनी ऑखेंबंद कर अपने गुस्से कों शान्त किया।
"देखोअब तुम्हें किसी सें डरने कि कोई ज़रूरत नहि हैं समझे?" मैने उससे ज़रा अपनापन दिखाते हुए कहा__"तुम् मुझेसभी कुछसाफ साफ बताओ कि यह व्यक्ति तुम् लोगों केँ संगयह सभी क्यूं कररहा थां औऱ तुम् लोगइस तहखाने मे कब सें कैद हौ?"
"प् प्लीज़ हमेंबचा लीजिए। " सहसाउस लड़के कि ऑखों सें ऑसू छलछला आए औऱ वोँ बुरीतरह रोतेहुए बोल पड़ा___"हमें इस नर्क सें निकाल दीजिए। इस व्यक्ति नें हम् चारो कों बहोत बुरीतरह सें टार्चर किया हैं। यहहर रोज़दिन मे चारबार आता हैं औऱ हमारे संगयही सभी घिनौना काम करकेचला जाता हैं। हम् चारो इससे अपने किये कि लाखों दफा मुआफ़ी माॅग चुके हें मगरफिन भि यह व्यक्ति हमारे संगयह सुलूक करता हैं। प्लीज़ हमेइस व्यक्ति सें बचा लीजिए। हमें यहाॅ सें निकाल कर हमें हमारे घऱ जाने दीजिए। हम् आपके पांव पकड़ते हें, प्लीज़ प्लीज़। "
उस लड़के कां यह रुदनदेख कर मे अंदर तक काॅप गय़ा। मे इसबात कि कल्पना कर सकता थां कि इन चारों केँ संगकिस हद तक उस व्यक्ति नें अत्याचार किया होगा। लेकिन सहसा मेरेमन मे प्रश्न उभरा कि वोँ व्यक्ति इन लोगों केँ संगयह सभीकिस वजह सें कररहा हैं? जबकि यह फार्महाउस उसका नहि बल्कि रितू दिदी कां हैं? क्याँ रितू दिदी कों इस सबकापता हैं? याँ फिनयह सभी उनकी जानकारी मे हि हौ रहा हैं? नहि नहि, रितू दिदी ऐसे घिनौने काम कां सोच भि नहि सकती हें। तौ फिन उनके फार्महाउस केँ तहखाने मे यहसभी केसे हौ सकता हैं? मेरेमन मे हज़ारों प्रश्न एक् संगआकर खड़े होँ गए। मगर जवाब किसी कां भि नहि थां मेरेपास।
"मैने तुमसे जौ कुछ पूछा हैं उसकासही सही जवाबदो पहले। " मैनेउस लड़के सें कहा___"आख़िर किसवजह सें यहसभी तुम् लोगों केँ संगकर रहा हैं वोँ व्यक्ति? तुम् सभीकुछ मुझेसाफ साफ बताओ। औऱ हाॅ किसी सें डरने कि कोई ज़रूरत नहि हैं। तुमने देखा हैं नं कि मैने केसेउस व्यक्ति कां दो मिनट मे काम तमामकर दिया हैं? इसलिए तुम् अब बेफिक्र रहो कि कोई तुम् पर्र अब दुबारा ऐसाकर सकेगा। मे तुम्हें यहाॅ सें निकाल कर तुम् लोगों कों घऱ भि भेजवा दूॅगा। मगर उससे पहले तुम् मुझे बताओ कि यहसभी क्यूं हौ रहा हैं तुम् लोगों संग?ऐसा क्याँ अपराध किया हैं तुम् लोगों नें? औऱ अगरयह सभी तुम् लोगों केँ संग बेवजह हि हौ रहा हैं तौ यकीन मानो मे अपने हाॅथों सें इस व्यक्ति कों मौत दूॅगा। चलोअब बताओ सारीबात। "
"यहसच हैं कि हम् चारों नें एक् संग बराबर कां अपराध किया थां। " उस लड़के नें नज़रें झुकाकर कहना शुरुआत किया___"मगर, उस अपराध केँ लिए हमें कानूनी तरीके सें सज़ा भि तोँ दिलवाई जा सकती थि, मगरइन लोगों नें ऐसाकुछ नहि किया। बल्कि हम् चारों कों पकड़कर यहाॅ लेँ आए औऱ फिनहर रोज़ हमारे संगयह घिनौना काम करतेरहे। हमनेइन लोगों सें अपने किये कि लाखों दफा मुआफ़ी माॅगी। यह तक कहा कि आप् हमें गोलीमार कर ख़त्म करदोउस अपराध केँ लिएमगर यहलोग हमारी कोई भि बात नहि माने औऱ हमारे संगयही सभी करतेरहे। "
"ओहआई सि। " मैनेकुछ सोचते हुए कहा___"मगर तुम् लोगों नें आख़िर किसतरह कां अपराध किया थां जिसकी कीमत तुम् लोगों कों इसरूप मे चुकानी पड़रही हैं? औऱ तुमने अभि यहकहा कि "इन लोगों नें" मतलबइस व्यक्ति केँ अलावा भि कोई हैं जौ तुम् लोगों केँ संगयह सभीकर रहा हैं? कौनकौन हें इस व्यक्ति केँ संग बताओ मुझे?"
"एक् लड़की हैं। " उस लड़के नें कहा___"उसका नाम रितू हैं औऱ वोँ पुलिस मे इंस्पेक्टर हैं। वहीं हम् चारों कों पकड़कर यहाॅलाई थि। उसकेबाद उसनेइस व्यक्ति कों हमारी ख़ातिरदारी करने कां कामदे दिया थां। बस उसकेबाद सें हि यह व्यक्ति हमारी ख़ातिरदारी केँ रूप मे हमारे संगयह सभीकर रहा हैं। "
मे उसकेमुख सें रितू दिदी कां नामसुन करमन हि मन बुरीतरह उछल पड़ा थां। मुझेसमझ नं आया कि रितू दिदी नें इन लोगों कों किसलिए पकड़ा होगा औऱ फिन पकड़कर यहाॅ लाया होगा? अपने व्यक्ति कों इन लोगों कि ख़ातिरदारी करने कां काम सौंप दिया। इसका मतलब रितू दिदी कों भि यहपता नहि होगा कि उनकायह व्यक्ति इन लोगों कि कैसी ख़ातिरदारी करता हैं? मुझे यकीन थां कि मुजरिम कों सज़ा देने केँ लिए रितू दिदी भले हि कानून कि थर्ड डिग्री कां स्तेमाल कर लेतीं मगरऐसा घिनौना काम करने कों अपने व्यक्ति सें किसी सूरत मे न् कहती। अरे कहने कि तौ बात हि दूर वोँ तौ इस बारे मे सोचती हि नहि। मतलबसाफ हैं कि ख़ातिरदारी कि आड़ मे यह घिनौना काम दिदी कां यह व्यक्ति अपनी मर्ज़ी सें हि कररहा हैं, जिसका दिदी कों पता हि नहि हैं। अब प्रश्न यह थां कि इन लड़कों नें ऐसाकौन सां जघन्य अपराध किया थां जिसकी वजह सें रितू दिदी इन लोगों कों कानूनन सज़ा दिलाने कि बजाय यहाॅ अपने फार्महाउस केँ तहखाने मे लाकरबंद कर दिया थां?
"यकीनन तुम् लोगों केँ संग बहोत बुराहुआ हैं। " फिन मैने उससे कहा___"उस इंस्पेक्टर कों ऐसा नहि करना चाहिये थां। उसे तोँ तुम् लोगो कों कानून केँ सामने लेकर जानां चाहिए थां। ख़ैर, अब तुम् बेफिक्र हौ जाओ। यह बताओ कि तुम् लोगों एक् संगऐसा कौन सां अपराध किया थां?"
"वोँ वोँ हम् चारों नें एक् संग एक् लड़की कि इज्ज़त लूटी थि। " उस लड़के नें नज़रें चुराते हुए कहा___"औऱ फिनउसे शहर केँ बाहर् ऐसे हि अधमरी हालत मे फेंकआए थें। "
"क्याँ?????" उसकीयह बातसुन कर मे बुरीतरह चौंका___"तुम् लोगों नें किसी लड़की कि इज्ज़त लूटी थि? वोँ भि इस तरीके सें कि उसेबाद मे अधमरी हालत मे कहीं फेंक भि आए?यह तोँ सच मे तुम् लोगों नें बहोत बड़ा अपराध किया हैं। ख़ैर, उसकेबाद क्याँ हुआ थां? मेरा मतलब कि तुम् लोगउस इंस्पेक्टर रितू केँ द्वारा पकड़े केसेगए?"
"तीसरे दिन हम् चारो मित्र अपने फार्महाउस पर्र मौज मस्ती कररहे थें। " उस लड़के नें कहा___"तभी वोँ इंस्पेक्टर हमारे उस फार्महाउस पर्र आँ धमकी थि। उसने हम् चारों कों पहले वहीं पर्र खूब मारा उसकेबाद हम् चारों कों अपनीजीप मे डालकर यहाॅ लें आईतब सें हम् यहीं हें औऱ इस व्यक्ति केँ द्वारा यातनाएं झेलरहे हें। प्लीज़ हमें यहाॅ सें निकाल लो भइया, हम् जिंदगी भर तुम्हारी गुलामी करेंगे। "
"उस लड़की कां क्याँ हुआ?" मैने उसकी आखिरी बात पऱ ध्यान नं दिया___"जिसकी तुम् चारों नें इज्ज़त लूटी थि?"
"इस बारे मे मुझेकुछ पता नहि हैं। " उस लड़के नें असहाय भाव सें कहा___"हमने उसेउस दिन सें देखा हि नहि हैं औऱ नाँ हि किसी नें हमें उसके बारे मे बताया। "
"क्याँ तुम्हें इसबात कां एहसास हैं कि जिस लड़की कि तुम् लोगों नें इज्ज़त लूटी हैं?" मैने ज़रा शख्तभाव सें कहा___"उस पऱ क्याँ गुज़र रही होगी? उसकेमाॅ बाप पर्र क्याँ गुज़र रही होगी? अपनीहवस केँ लिए तुम् लोगों नें किसी कि लड़की कां जिंदगी बरबाद कर दिया। तुम् लोगों कों तौ सीधा फाॅसी पऱ लटका देना चाहिए। "
"हम् सबको फाॅसी कि सज़ा मंज़ूर हैं भइया। "उस लड़के नें कहा___"हमें इसबात कां एहसास होँ चुका हैं कि हमसे बहोत बड़ा गुनाह हुआ हैं। जब सें जवानी कि देहलीज़ पर्र हमने क़दमरखा थां तब सें किसी न् किसी लड़की कां जिंदगी हमने बरबाद हि तोँ किया हैं। इसलिए भइया फाॅसी सें भि बढ़कर अगरकोई सज़ा हैं तोँ हम् चारों कों वोँ सज़ा भि मंजूर हैं। "
"बहोत खूब। " मैने नाटकीय अंदाज़ सें कहा___"ऐसी बातें अपराध करते टाइममन मे क्यूं नहि आती हें? यहतब क्यूं समझ मे आती हें जबमौत सिर पऱ आकर खड़ी हौ जाती हैं याँ फिनजब वैसा हि कुकर्म स्वयं केँ संगहुआ करता हैं? ख़ैर, यह बताओ कि यह एहसास अब क्याँ इस लियेहुआ हैं कि स्वयं पऱ जब वैसा हि गुज़रने लगा याँ फिनसच मे लगता हैं कि हाॅ तुम् लोगों नें ग़लत किया थां उस लड़की केँ संग?"
"यह तौ सचबात हैं भइया कि इंसान कों कोईबात तभीसमझ मे आती हैं जबउसे ठोकर लगती हैं। " उस लड़के नें कहा___"यह बातमुझ पर्र भि लागू होती हैं। मगर मुझेइस बात कां अब गहरादुख होँ रहा हैं भइया कि मैनेउस लड़की केँ संग इतना बड़ानीच काम किया थां। प्रेम इश्क दोस्ती यहसभी कितनी हसीन चीज़ें हें जिनके लिए औऱ जिनके आधार पऱ इंसान कितना कुछकर जाता हैं। अगर विश्वास होँ तौ कोई भि ब्यक्ति किसी केँ भि संग कहीं भि आँ जा सकता हैं याँ फिन वोँ आपके भरोसे आपकेऊपर कितनी हि बड़ी जिम्मेदारी सौंप देता हैं। मगरयह छलकपट औऱ यह धोखा कितनी ख़राब चीज़ें हें जोँ प्रेम मुहब्बत दोस्ती, औऱ भरोसा आदि सबको नस्टकर देता हैं। "
"वाउ तुम् तौ दोस्त किसी बहोत बड़े उपदेशक कि तरह बड़ी बड़ी बातें करनेलगे। " मैने सहसा ब्यंगात्मक भाव सें कहा___"काश! यहसभी बड़ी बड़ी बातें तब भि तुम् करते औऱ समझते जब तुम् किसी लड़की कां जिंदगी नष्टकर रहे थें। कम सें कम इससे तुम् दोनो कां भला तौ होता। वैसे प्रेम मुहब्बत दोस्ती औऱ भरोसा जैसी बातें तुम्हारे मन मे केसे आँ गईं? क्याँ तुमने इन्हीं केँ आधार पर्र उस लड़की कां जिंदगी बरबाद किया हैं?"
"बिलकुल सहीकहा भइया। "उस लड़के नें बेचैनी सें पहलू बदलते हुए कहा___"मेरे जिंदगी मे लड़कियाॅ तोँ बहोत आईं थि जिनके संग मैने अपनेइन तीनों दोस्तों केँ संगमौज मस्ती कि थि। वोँ सभी लड़कियाॅ मेरे पैसों केँ लालच मे अपनासभी कुछखोल कर हमारे सामने बेड पऱ लेट जातीथीं मगरइस लड़की मे बात हि कुछखास थि। यह एक् ऐसे लड़के सें बेपनाह प्रेम करती थि जिसका नाम विराज थां, विराज सिंह बघेल। मे भि इससे प्रेम करता थां पऱ कभीकह नं सका थां इससे। हलाॅकि दोस्ती केँ रिश्ते सें हमारी हैलोहाय हौ जाती थि। एक् दिन जाने क्याँ हुआइसे कि यह मुझे लेकरउस विराज केँ पास गई औऱ उससेदो टूटभाव सें कह दिया कि वोँ उससे प्रेम नहि करती थि बल्कि उसकी दौलत सें प्रेम करती थि। औऱ अब जबकि वोँ कंगाल हौ चुका हैं तोँ उसका उससेकोई नाता नहि। मे उसकीइस बात सें मन हि मन हैरान तोँ थां मगरखुश भि हुआ कि चलोअब तौ यह मेरेपास हि आएगी। वही हुआ भि। वोँ अपने एक्स ब्वायफ्रैण्ड कों छोंड़ कर मेरेसंग हि कालेज मे रहनेलगी। मगर मुझे जल्द हि पताचल गय़ा कि यह मेरेसंग रहतेहुए भि मेरेसंग नहि हैं। मे अक्सर देखता थां कि वोँ अकेले मे बेहद दुःखी औऱ दुखी रहती थि। मुझेलगा कि यह कहींफिन सें नं उस विराज केँ पासलौट जाए, इस लिए मैनेइसे अपनेसंग हमेशा केँ लिए रखने कां सोच लिया। मेरेयह तीनो साथीबार बार मुझसे कहते कि प्रेम व्यार कां चक्कर छोंड़ बस मज़े लेँ औऱ हमें भि मजा करवा। मैने भि सोचा कि दोस्त ऐसे प्रेम कां क्याँ मतलब जोँ अपना हैं हि नहि। बस उसकेबाद मैनेवही किया जौ अब तक दूसरी अन्य लड़कियों केँ संग किया थां। अपनी बर्थडे वालीसाम मैनेइसे भि इन्वाइट किया थां। जबयहउस साम मेरे फार्महाउस पऱ आई तोँ मैने इसको कोल्ड ड्रिंक कां वोँ ग्लास प्रेम हे दियाजिस ग्लास मे मैने नींद कि दवा मिलाई हुईँ थि। कोल्ड ड्रिंक पीने केँ कुछदेर बाद हि वोँ नीद केँ नशे मे झूमने लगी। मैने सबकी नज़रबचा करउसे अपने कमरे मे लेँ गय़ा औऱ उस कमरे मे मैने उसके सारे कपड़े उतारकर उसकी इज्ज़त सें खूब खेला। मेरा एक् यारइस सबकी वीडियो भि बनारहा थां। बस उसकेबाद तोँ उसे अपनी हि बने रहना थां, इसलिए वोँ बनीरही औऱ हम् जब भि उसे बुलाते तौ उसे आनां पड़ता औऱ हम् सबकोखुश रखना पड़ता उसे। यही सभी चलतारहा मगरकुछ दिन पहले कि बात हैं। मैनेउसे फिन सें अपने बर्थडे पऱ इन्वाइट कियामगर उसनेआने सें इंकार कर दिया। कहनेलगी कि उसकी तबीयत ख़राब हैं। मे समझ गय़ा कि वोँ बहाने बनारही हैं न् आने कां। इसलिए मैनेउसे फिन सें वीडियो कों उसकेडैड केँ पासभेज देने कि धमकी दि। मेरीइस धमकी सें उसे मेरे फार्महाउस पर्र आनां पड़ा। उस दिन भि मैंने अपनेइन तीनो दोस्तों केँ संगमिल कर उसकेसंग सेक्स किया औऱ औऱ उसी हालत मे सोगए थें। रात केँ करीब-करीब तीन याँ चारबजे केँ लगभग मेरीऑख खुली तौ देखा कि विधी कि हालत बहोत ख़राब थि। उसके प्राइवेट पार्ट सें ब्लड निकला हुआ थां औऱ उसकेमुख सें भि। यहदेख कर मे बहोत ज़्यादा घबरा गय़ा। मुझेलगा कहींयह मर नं जाए। मगर उसेउस हालत मे लेकर हम् भला उतने वक़्त कहाॅ जाते। इस लिए मैने अपनेइन दोस्तो कों जगाया औऱ इन लोगों कों भि विधी कि हालत केँ बारे मे बताया। यह तीनो भि विधी कि वोँ हालतदेख कर घबरागए थें। फिन हम् चारों नें सोच विचार करके फैंसला लिया कि इसे कहीं छोंड़ आते हें। इस फैंसले केँ संग हि हम् चारों नें विधी कों किसीतरह कपड़े पहनाए औऱ उसेउसी हालत मे उठाकर बाहर् खड़ी अपनी वाहन कि डिक्की मे डाल दिया। उसकेबाद हम् चारोउस तरफचल पड़ेजिस तरफ पिछले कुछसाल पहले हि एक् नये हाइवे कां निर्माण हुआ थां। रात केँ उस सन्नाटे मे किसी केँ भि द्वारा देखलिए जाने कां कोई ख़तरा नहि थां। हाइवे मे पहुॅच कर हमनेकुछ दूरी पऱ मार्ग केँ किनारे झाड़ियों केँ पास हि विधी कों डिक्की सें निकाल कर चुपचाप लिटा दिया औऱ फिन हम् चारों वहाॅ सें वापस फार्महाउस आँ गए। उसकेबाद क्याँ हुआ इसका हमेंआज तक कुछ भि पता नहि हैं। "
"क्याँ तुम् जानते होँ कि मे कौनहूॅ?" उसकीबात सुनने केँ बाद मैने सहसा कठोरभाव सें उससे पूछा___"ठीक सें देखो मुझे। मेरा दावा हैं कि तुम् मुझे अवश्य पहचान जाओगे कि मे कौनहूॅ?"
मेरीइस बात कों सुनकर वोँ लड़का जौ कि वास्तव मे सूरज चौधरी हि थां मेरीतरफ बड़े ध्यान सें देखने लगा। उसके चेहरे पऱ पहले तौ उलझन केँ भाव उभरे थें लेकिन जल्द हि उसके चेहरे पऱ चौंकने केँ भाव उभरे औऱ फिन एकाएक हि आश्चर्य सें मेरीतरफ ऑखें फाड़े देखने लगा। समय भर मे उसका चहेरा डर औऱ दहशत सें पीला ज़र्द पड़ता चला गय़ा। वो एकदम सें हि जूड़ी केँ मरीज़ कि तरह काॅपने लगा थां।
"क्याँ हुआ सूरज चौधरी?" मेरेमुख सें एकाएक शेर कि सि गुर्राहट निकली___"पहचाना मुझे याँ मे स्वयं अपने तरीके सें बताऊॅ तुम्हे कि मे कौनहूॅ??"
"वि.वि.विराऽज। " सूरज चौधरी केँ मुख सें दहशत मे डूबा स्वर निकला___"तुम् वि.विराज हौ। वही विराज जिसे वोँ विधी बेपनाह इश्क करती थि। "
"औऱ जिसके संग तूने इतना बड़ा वहशियाना कुकर्म किया हैं। " मैंने गुस्से मे आग बबूला होते हि उसे उसकेसिर केँ बालों सें पकड़कर उठा लिया औऱ फिन पीछे सें उसकी गर्दन मे अपने दोनो हाॅथ जमाते हुए मैने पूरी ताकत सें झटका दिया। सूरज चौधरी केँ हलक सें हृदय विदारक चीख निकल गई। दीवार पऱ कुंडे मे बॅधी रस्सी एक् झटके मे हि टूट गई थि औऱ इधर झटका लगते हि सूरज केँ दोनो हाॅथों मे वोँ रस्सी गड़ सि गई थि।
"हरामज़ादे। " मैंने कहने केँ संग हि सूरज कों अपनेसिर केँ ऊपर तक उठा लिया औऱ पूरी ताकत सें सामने कि दीवार कि तरफ उछाल दिया, फिन बोला___"तूने मेरी विधी केँ संग इतना घिनौना कुकर्म किया। नहि छोंड़ूॅगा तेरी.तुम् चारों कों एक् एक् करकेऐसी भयावह मौत दूॅगा कि उसेदेख करयह ज़मीन औऱ वोँ आसमां तक थर्रा जाएॅगे। "
उधर दीवार सें टकराकर सूरज नीचे फर्श पर्र मुह केँ बल गिरा। गिरते हि उसकेमुख सें दर्दभरी चीख निकल गई। उसके दोनोहाथ अभि भि रस्सी सें बॅधेहुए थें इसलिए वोँ सहारे केँ लिए अपने हाॅथआगे याँ इधरउधर नहि कर सकता थां। इधर सूरज कां यहहाल देखकर बाॅकी तीनों लड़कों केँ देवता कूचकर गए। वोँ मेरीतरफ बुरीतरह घबराए हुए सें देखने लगे थें।
आगेबढ़ कर मैने सूरज केँ सिर केँ बाल पकड़कर उसे उठाया औऱ कहा___"तेरी स्टोरी सुनने सें पहले मुझेलग रहा थां कि तेरेसंग वोँ व्यक्ति बहोत ग़लतकर रहा थां मगरअब समझ मे आया कि वोँ कितना अच्छा कररहा थां। तुँ जिस इंस्पेक्टर रितू कि बातकर रहा थां नं वोँ मेरी बड़ी बेहन हैं। मे सभीकुछ समझ गय़ा अब कि तेरे यहाॅ होने कां असल माज़रा क्याँ थां?"
कहने केँ संग हि मैने सूरज केँ पेट मे अपने घुटने कां ज़बरदस्त वार किया तौ वोँ हलाल होते बकरे कि तरह चिल्लाया। उसके झुकते हि मैने उसकीपीठ पऱ दुहत्थड़ जड़ दिया, जिससे वोँ फर्श पऱ मुह केँ बल गिरा। नीचेझुक कर मैनेफिन उसे उसके बालों सें पकड़कर उठाया, फिन बोला___"अब सारी किस्सा समझ गय़ा हूॅ मे। तुँ अपनेइन कमीने दोस्तों केँ संग विधी कों उसदिन वहाॅ हाइवे केँ किनारे झाड़ियों केँ पास छोंड़ आया। सुभह हुइ तोँ हाइवे सें गुज़र रहे किसीकार मे आँ रहे ब्यक्ति कि नज़र विधी पर्र पड़ी होगी तौ उसने इसकी सूचना पुलिस कों दि होगी। यह मामला चूॅकि हल्दीपुर कां थां इसलिए हल्दीपुर पुलिस थाने मे मेरी बड़ी बेहन रितू दिदी हि थि, उनकोजब इस सबकी सूचना किसी अज्ञात ब्यक्ति द्वारा मिली तौ वोँ उस स्थान पर्र पहुॅच गईं। विधी कि उस गंभीर हालत कों देखकर दिदी नें विधी कों जल्दी हि हल्दीपुर केँ सरकारी हास्पिटल मे एडमिट कर दिया। दिदी कों शायद कहीं सें यहपता थां कि मे किसी विधीनाम कि लड़की सें प्रेम करता थां। इसलिए हास्पिटल मे जब दिदी कों डाक्टर द्वारा विधी केँ बारे मे पताचला होगा तौ उनके दिमाग़ मे जल्दी हि यहबात आई होगी कि किसी विधीनाम कि लड़की सें हि उनका भइया विराज प्रेम करता थां। लेकिन उन्होंने विधी कों देखा तौ थां नहि पहलेइस लिए उन्होंने इस बारे मे कन्फर्म करने केँ लिए विधी सें पूछताॅछ कि होगी। दिदी केँ पूछने पर्र आख़िर विधी नें बता हि दिया होगा कि हाॅ वोँ हि वोँ विधी हैं जिसे उनका भइया विराज प्रेम करता थां। बस उसकेबाद हि दिदी कां मेरे प्रति भि हृदय परिवर्तन हुआ होगा याँ फिन स्वयं विधी नें बताया होगा उन्हें कि सच्चाई क्याँ हैं? ख़ैर, उसकेबाद विधी नें दिदी सें अपनी आखिरी ख़्वाहिश कि बातकही औऱ दिदी नें उससे वादा किया कि वोँ उसके महबूब कों उसकेपास अवश्य लेकर आएॅगी। दिदी नें मेरीखोज करना शुरुआत किया औऱ उन्हें मेरा मित्र पवन मिला। पवन सें दिदी नें सारी बातें बताईं होंगी। तभी तोँ पवन मुझसे वोँ सभीबता नहि रहा थां बल्कि यहीकहे जारहा थां कि मे आँ जाऊॅ। वाउ रितू दिदी! आप् ग्रेट होँ दिदी। आपने मुझे मेरी विधी सें मिलवाया वरना मे तोँ उसे आखिरी वक़्त मे भि देख नं पाता। आपनेयह बहोत बड़ा उपकार किया हैं दिदी। आज आप् मेरी नज़र मे बहोत महान होँ गईं हें। "
मे भावावेश मे जाने क्याँ क्याँ कहेजा रहा थां जबकि मेरे चंगुल मे फॅसा सूरज बड़ी मुश्किल सें अपनी पलकें उठाकर मेरीतरफ हैरत सें देखेजा रहा थां। शायद वोँ मेरीकुछ बातें समझने कि कोशिश कररहा थां मगरसमझ नहि पारहा थां।
"इतनाकुछ मेरी विधी केँ संग हौ गय़ा औऱ मुझे इसका आभास तक न् थां। " मेरी ऑखों सें ऑसूछलक पड़े। मेरेदिल मे हूक सि उठी। विधी केँ संगहुए इस घृणित कुकर्म कां सोचकर हि मेरी आत्मा काॅपउठी, मेरादिल उतावलापन उठा। एकाएक हि मेरे चेहरे पर्र गुस्से कि आगधधक उठी। मैने सूरज कों उसकी गर्दन सें पकड़कर एक् हि हाॅथ सें ऊपरउठा लिया, फिन बोला___"तेरा औऱ तेरे साथियों कां मे वोँ हाल करूॅगा कि दुबारा इस धरती पऱ पैदा होने सें मनाकर दोगे। "
"मुझे क्षमा करदो विराज। " सूरज कि ऑखें बाहर् कों निकली आँ रही थि, फिन भि किसीतरह बोला__"मे मानता हूॅ कि मुझसे बहोत बड़ा अपराध हौ गय़ा हैं जिसके लिएकोई मुआफ़ी होँ हि नहि सकती। मगर.
"हरामज़ादे जब जानता हैं कि कोई मुआफ़ी नहि होँ सकती तोँ क्यूं माॅगरहा हैं मुआफ़ी?" मैनेऊपर सें हि उसे उछाल दिया। वोँ लहराते हुएहुए उस स्थान पऱ गिराजिस स्थान पऱ वोँ व्यक्ति बेहश अवस्था मे पड़ा थां। सूरजजब फर्श सें टकराया तोँ उसकेहलक सें चीख निकल गई औऱ उसका बाजू ज़ोर सें उस व्यक्ति केँ बदन पऱ लगा।
उस व्यक्ति केँ बदन मे हरकत हुइ औऱ वोँ कुछ हि पलों मे होश मे आँ गय़ा। ऑख खुलते हि उसने अपनीतरफ बढ़ते हुए मुझे देखा तौ एकाएक हि उसके चेहरे पऱ घबराहट केँ भावउभर आए। जबकि मेरा ध्यान तौ सूरज कि तरफ थां जोँ उस व्यक्ति केँ हि पास पड़ा कराहरहा थां। उसकेपास पहुॅच कर मैनेउसे फिन सें उसके बालो सें पकड़कर उठाया।
"तूने मेरी विधी केँ संग जौ कुकर्म किया हैं उसकेलिए मे मुआफ़ी केसेदे दूॅगा तुझेही?" मैने गुर्रा करउसे झकझोरते हुए कहा___"तुँ यहसोच भि केसे सकता हैं कि तुम को मुआफ़ी मिल जाएगी। तुम्हारी तरफअगर कुछ मिलेगा तोँ मात्र वोँ जिसे तड़प बेचैनी कर औऱ सड़सड़ कर मरना कहते हें। "
दीवार सें सटे बाॅकी तीनों लड़कों कि यहसभी देखकर हि हालत ख़राब थि। मेरे चेहरे पर्र इस टाइम हिंसक दरिंदे जैसेभाव थें। उधर फर्श पऱ पड़ा वोँ व्यक्ति मेरी बातें सुनकर हैरान रह गय़ा थां। फिन सहसाउसे स्वयं कां ख़याल आया। वोँ सूरज कि तरह हि जन्मजात नंगा थां। यहदेख कर वोँ किसीतरह उठा औऱ एक् तरफरखे अपने कपड़ों कि तरफबढ़ गय़ा। कपड़े उठाकर वोँ जल्द जल्द उन्हें पहनने लगा।
इधर मैने गुस्से मे उबलते हुए सूरज केँ चेहरे पर्र ज़ोर कां घूॅसा मारा तोँ वोँ पीछे कि दीवार मे ज़ोर सें टकराया औऱ फिन फर्श पऱ लुढ़कता चला गय़ा। उसके नाॅक औऱ मुख सें भल्ल भल्ल करकेखून बहनेलगा थां। फर्श पऱ गिरते हि उसकी ऑखेंबंद होतीचली गई। मे समझ गय़ा कि यह बेहोश हौ चुका हैं।
बेहोश होँ चुके सूरज केँ शरीर पऱ मैनेपेर कि एक् ठोकर जमाई औऱ पलटकर बाएॅ साइड दीवार कि तरफ देखा। दीवार सें सटे वोँ तीनो लड़के रस्सियों मे बॅधेऊपर कि तरफ हाॅथ किये खड़े थरथर काॅपरहे थें। ऑखों मे आग औऱ चेहरे पर्र ज़लज़ला लिए मे उनकीतरफ बढ़ा।
मुझे अपनीतरफ आतेदेख उन तीनों कि हालत ख़राब हौ गई। किनारे साइड कि तरफ जोँ बॅधा खड़ाहुआ थां उसकाडर केँ मारे पेशाब छूट गय़ा। उनके क़रीब पहुॅच मैने पहले एक् एक् घूॅसा उन तीनों केँ जबड़ों पर्र रसीद किया। तीनो हि दर्द मे बिलबिला उठे। मुझसे रहम कि भीख माॅगने लगे लेकिन मे इन लोगों कों भला केसे क्षमा कर सकता थां? यह मेरी विधी केँ रेपिस्ट थें, उसके हत्यारे थें यह। इनको तौ अबऐसी मौत मरना थां जिसके बारे मे आज तक किसी नें सुना तक नं होगा।
"तुम् सबकोऐसी मौत मारूॅगा किसके बारे मे किसी कल्पना तक न् कि होगी। " मैने भभकते हुए कहा__"तुम् सभी नें मेरी मासूम विधी केँ संगऐसा घिनौना अपराध किया हैं जिसके लिए मे तुम् लोगों कों अगरकुछ दूॅगा तोँ हैं मात्र दर्दनाक मौत। इसके सिवा औऱ कुछ नहि। रहम केँ बारे मे तौ सोचो हि मत। क्योंकि वोँ मे ब्रम्हा केँ कहने पऱ भि नहि करने वाला। "
मेरीयह बातसुन करउन तीनों केँ चेहरे डर सें पीले ज़र्द पड़गए। समयभर मे ऐसी सूरत नज़रआने लगीउन तीनो कि जैसे लकवामार गय़ा होँ। इधर मे पलटा। मेरी नज़रउस व्यक्ति पऱ पड़ी जोँ सूरज केँ मुख मे अपना लन्ड डालेहुए थां। वोँ मेरीतरफ सकते हि हालत मे देखेजा रहा थां। मे उसकीतरफ बढ़ा तोँ वोँ एकदम सें भयभीत सां होँ गय़ा।
"मुझे क्षमा करदो काका। " उसकेपास पहुॅचते हि मैने विनम्र भाव सें कहा___"मैने बिनाकुछ जाने समझे आप् पर्र हाॅथउठा दिया। उसकेलिए आप् चाहें तौ मुझे सज़ादे सकते हें। "
"अअरे नां नां बेटवा। " हरिया काका हड़बड़ाते हुए एकदम सें बोल पड़ा___"ई कां कहत होँ तुम्? तोहरे सें कउनव ग़लती नाँ हुईँ हैं। एसे माफी मागे केँ कउनव जरूरत नां हैं। हमहू कां कहाॅपता रहे बेटवा कि तुम् असलमा हमरे रितू बिटिया केँ छोट भइया होँ। "
"आप् बहोत अच्छे हें काका। " मैने हरिया काका केँ दाएॅ कंधे पऱ हाथ रखतेहुए कहा___"आपने इन लोगों कि वैसी हि ख़ातिरदारी कि हैं जैसीइन लोगों कि करनी चाहिए थि। "
"अब कां करें बेटवा हमरेमन माएखे अलावा र कउनवबात आईये न् रही। " काका नें कहा___"रितू बिटिया जब हमसेकहा कि ई ससुरन केर अच्छे सें ख़ातिरदारी करै कां हैं ता हमरेमन माइहै बातआई। बसऊखे बाद हम् शुरुआत होईगयन। ई ससुरन केँ पिछवाड़े सें बजावै मा बड़ीमजा आई बेटवा। मगरअब एकैबात केर चिन्ता हैं कि कहींई बात रितू बिटिया कां पता न् चलजाय। ऊ कां हैं नां बेटवा, ई अइसनकाम हैं कि केहू कां पताचल जायता बहुतै शरमकेर बातहोई जाथै न्। अउर हम् ई नाहीं चाही कि ईबात रितू बिटिया कां पताचलै। काहे सें केँ ईबातपता चलेमा सरवा हमरी इज्जत कां बहुतै कचराहोई जाई। "
"चिन्ता मतकरो काका। " मे मन हि मन उसकीबात पर्र औऱ उसकी भाषा पऱ मुस्कुराते हुए बोला___"इस बात कां पता रितू दिदी कों बिलकुल भि नहि चलेगा। मगर एक् बातअब आप् भि सुन लीजिए। वोँ यह कि आपने अपनाकाम कर लियाअब बारी मेरी हैं। मे इन्हें ऐसीमौत दूॅगा कि आपने उसके बारे मे कभी सोचा भि नहि होगा। इस लिएअब आप् केवल तमाशा देखेंगे। "
"ठीक हैं बेटवा। " काका नें सिर हिलाया___"हमहू ईहै चाहिथे कि ई ससुरन कां कुत्तन जइसनमौत हौ। जितना बड़ा अपराध ई लोगन नें किया हैं न् उसकेलिए ई लोगन कां कौनव परकार केर रियाइत ता मिलबै न् करै। "
"ऐसा हि होगा काका। " मैनेउन चारों पर्र एक् एक् नज़र डालते हुए कहा___"मुझे कुछ सामान चाहिए आपसे। औऱ हाॅ बाॅकी किसी औऱ कों मत बताइयेगा कि मे यहाॅहूॅ। "
"ठीक हैं बेटवा। " काका नें कहा___"अउर सामान कां चाहै कां हैं तुमका?"
"एक् रेज़र ब्लेड। " मैने कहा___"औऱ एक् प्लास चाहिए काका। "
"ठीक हैं बेटवा। " हरिया काका नें कहा___"हम् अभि लावथैं दुई मिनटमा। "
कहने केँ संग हि हरिया काका तहखाने केँ दरवाजे सें बाहर् चला गय़ा। जबकि उनके जाते हि मे सूरज केँ पास पहुॅचा औऱ उसेउठा करफिन सें एक् अलग रस्सी जोड़कर उसे वैसे हि बाॅध दिया जैसे बाॅकी तीनो बॅधेहुए थें। सूरज कों बाॅधने केँ बाद मे पलटा औऱ एक् तरफरखी पानी कि बाल्टी सें एक् मग पानी लेकर सूरज केँ चेहरे पर्र ज़ोर सें उलट दिया। पानी कां तेज़ प्रहार पड़ते हि सूरजहोश मे आँ गय़ा। होश मे आते हि वोँ दर्द सें चीखने लगा।
"तुम् हमारे संग क्याँ करने वाले होँ?" बाॅकी तीन मे सें एक् नें घबराते हुए पूछा___"देखो, हम् मानते हें कि हमने बहोत बड़ा गुनाह किया हैं औऱ उसकेलिए अगर तुम् हमे गोलीमार करजान सें मार भि दो तौ हमें मंजूर हैं मगरऐसे तड़पा तड़पा करमत मारो भइया। प्लीज़ कुछ तोँ रहमकरो। उस व्यक्ति नें तोँ वैसे भि हम् लोगों केँ वोँ सभी करके हमेंजान सें हि मार दिया हैं। तुम् क्याँ जानो कि उस हवशी नें हमारे पिछवाड़ों कि क्याँ दुर्गत कि हैं?"
"जब अपने पऱ बीतती हैं तभी एहसास होता हैं कि दर्द औऱ तक़लीफ़ क्याँ होती हैं। " मैने उससे गुर्राते हुए कहा___"तुम् लोगों कों तबइसबात कां एहसास नहि हुआ थां कि जिनजिन लड़कियों केँ संग तुम् सबने कुकर्म किया हैं उन पऱ उस वक़्त क्याँ गुज़री रही होगी?"
"सच कहा भइया। " एक् दूसरे लड़के नें कहा___"मगर अब जौ होँ गय़ा उसे लौटाया तोँ नहि जा सकता नं। हमें हमारे गुनाहों कि इतनी सज़ाएॅ तोँ मिल हि चुकी हें। तुम् हमें एक् हि बार मे जान सें मारदो। मगर वोँ सभी न् करो भइया जौ तुम् अपनेमन सोचे बैठे हौ। प्लीज भइया हम् पऱ रहमकरो। "
"शट-अऽऽऽप। " मे पूरी शक्ति सें दहाड़ा___"यहाॅ तुम् लोगों कि मर्ज़ी सें कुछ नहि होगा, बल्कि वही होगा जोँ मे चाहूॅगा। मे क्याँ चाहता हूॅ इसकापता जल्द हि तुम् चारो कों चल जाएगा। "
मैने इतनाकहा हि थां कि हरिया काका तहखाने मे पुनः दाखिल हुए। उनके हाॅथ मे वोँ सामान थां जोँ मैने उनसे मॅगवाया थां। यानी कि रेज़र ब्लेड औऱ प्लास। मेरे हाॅथ मे सामान पकड़ाने केँ बाद हरिया काका नें तहखाने कां द्वार (दरवाज़ा) बंदकर दिया औऱ फिन एक् तरफ खड़े हौ गए। इधर सामान लिए मे उस सामान कों सरसरी तौर पऱ देख हि रहा थां कि मेराफोन मोबाइल बजउठा।
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हवेली पऱ!
अपने कमरे मे रितू आरामकर रही थि। ऊपरछत केँ कुण्डे पर्र घूमरहे पंखे कों एकटकदेख रही रितू केँ चेहरे पऱ इस टाइमगहन सोचो केँ भाव थें। उसकेमन मे कई सारी बाॅतें चलरही थीं। आज जब वो हवेली मे आई तौ उसका सामना अपनेडैड सें उस हिसाब सें होँ हि गय़ा थां जिसका उसे अंदेशा थां कि देर सवेरऐसा होगा हि।
उसकेडैड नें उससे जोँ कुछकहा थां उससेअब यहबात खुल हि चुकी थि उनकी बेटी उनके पक्ष मे नहि हैं। उनके व्यक्ति नें जौ ख़बर उसके बारे मे उसकेडैड कों दि थि उसका उसकेपास कोई पुख्ता सबूत तौ नहि थां लेकिन ज़हन मे यहबात तोँ पड़ हि गई थि कि रितूकिस तरफ करवॅट लें सकती हैं? हलाॅकि उसने अपनीतरफ सें अपनी सफाई मे अपनेडैड कों समझा बुझा तोँ दिया थां लेकिन उसेयह भि एहसास थां कि मौजूदा हालात मे इस वक़्त भले हि उसका बाप कोई कठोर क़दम उसकेसंग न् उठाये मगरजिस टाइमउसे पक्के तुर पऱ पताचल जाएगा कि उसके व्यक्ति कि वोँ ख़बर यकीनन सच हि थि तौ वक़्त अजय सिंहकोई भि कठोर क़दमउठा सकता हैं।
रितू केँ ज़हन मे यह सारी बातें चलरही थीं। उसे इसबात कां भि अंदेशा होँ चुका थां कि अब उसका बाप सच्चाई कां पता लगाने केँ लिए संभव हैं कि उसके पीछे अपने व्यक्ति लगादे। उस सूरत मे रितू कों क्याँ करना थां यह उसनेभली भाॅति सोच लिया थां। रितू अभि यहसभी सोच हि रही थि कि तभी उसकाफोन बजउठा। फोन केँ बजने सें वोँ सोच केँ गहरे सागर सें हक़ीक़त कि दुनियाॅ मे आई औऱ सिरहाने रखेफोन कों एक् हाॅ सें उठाकर उसनेफोन कि स्क्रीन पर्र फ्लैश कररहे हरिया काकानाम कों देखा तौ उसके चेहरे पर्र सोच केँ भावउभर आए।
"कहिए काका क्याँ बात हैं?" फिन उसनेकाल कों रिसीव करते हि कहा।
".। " उधर सें हरिया काका नें उसे जौ कुछ बताया उसेसुन कर रितू बुरीतरह चौंक पड़ी थि। उसके चेहरे पऱ समयभर मे चिंता व तकलीफ़ केँ भावउभर आए थें।
"यह आपने बहोत अच्छा किया काका। " रितू नें कहा___"जोँ मुझे मोबाइल कर दिया आपने। ख़ैर, आप् बाॅकी सबका ध्यान रखियेगा मे बात करतीहूॅ उससे। "
यह कहकर रितू नें कालकट कर दि। उसके चेहरे पऱ चिंता व तकलीफ़ केँ भावकम नहि हौ रहे थें। हरिया काका नें उसे मोबाइल पऱ सारीबात बता दि थि कि विराज तहखाने मे उन चारों लड़कों केँ संग क्याँ करने वाला हैं। उसनेयह भि बताया कि विराज इस वक़्त गुस्से मे आग बबूला हुआ पड़ा हैं औऱ उससे रेज़र ब्लेड केँ संगसंग एक् प्लास भि मॅगवाया हैं। हरिया काका सें बातें जानने केँ बाद रितूसमझ गई कि विराज कों अबसभी कुछपता चल गय़ा हैं। इसलिए अबउसे डर थां कि कहीं विराज उससेइस बात केँ लिए नाराज़ न् हौ जाए कि विधी केँ संग इतनाकुछ हुआ जिसे उसने विराज सें नहि बताया। इस परिस्थिति मे वोँ क्याँ क़दमउठा लेगा इसका अंदाज़ लगाना मुश्किल थां। यहीबात थि कि रितू एकाएक चिन्तित व परेशान हौ गई थि। बहुतदेर तक वोँ इन्हीं सभी ख़यालों मे खोईरही, उसकेबाद उसनेफोन पर्र विराज कां नंबरदेख करउसे काललगा दिया। उसे अंदर सें डर भि लगरहा थां कि विराज जाने कैसा रियेक्ट करे उससे।
".। " उधर सें काल रिसीव किये जाने पर्र हि रितू केँ कानो मे विराज कि आवाज़ पड़ी। उसनेउधर सें कुछकहा।
"तुम्हें मेरीशपथ हैं मेरे भइया। " रितू नें बहोत हि संतुलित लहजे मे कहा___"तुम् जहाॅ पर्र हौ वहाॅ सें किसी कों भि कुछ किये बग़ैर वापस बाहर् आँ जाओ। मे जब आऊॅगी तोँ तुम्हें सभीकुछ समझा दूॅगी। "
".। " उधर सें विराज नें कुछकहा।
"प्लीज़ भइया। " रितू नें विनती सि कि___"अपनी इस बेहन कि बातमान जाओ। बस एक् बार। उसकेबाद मे स्वयं तुम्हें उस सबकेलिए इजाज़त दे दूॅगी। मगर अभि मेरीबात मानजाओ औऱ वहाॅ सें बाहर् आँ जाओ। "
".। " उधर सें विराज नें फिन सें कुछकहा।
"अभि तुम कोकुछ पता नहि हैं मेरे भइया। " रितू नें सहसा गंभार होकर कहा___"तुँ मेरेआने कां इंतजार कर मे तुम्हे सारी बातें बताऊॅगी औऱ यह भि कि उससे औऱ क्याँ करना चाहती हूॅ मे?"
".। " उधर सें विराज नें कुछकहा।
"हाॅ भइया। " रितू नें कहा___"मे जल्द हि तेरेपास आँ रहीहूॅ। मगर फिलहाल तूँ वहाॅ सें बाहर् आँ जा। "
".। " उधर सें विराज नें फिन सें कुछकहा।
"थैंक्स मेरे स्वीट भइया। " रितू केँ चेहरे पर्र राहत केँ भाव उभरे___"यू आरसो स्वीट। लवयूसो मच। "
यहकह कर रितू नें मुस्कुराते हौएकाल कटकर दि। कुछदेर तक जाने क्याँ सोचती रही वोँ। उसकेबार वो बेड सें उठी औऱ बाथरूम कि तरफबढ़ गई। करीबदस मिनटबाद वो बाथरूम सें बाहर् निकली औऱ फिन पुलिस कि यूनीफार्म पहनकर तथासिर पऱ पीकैप वहाथ मे पुलिसिया रुल लिये वो कमरे सें बाहर् आँ गई।
रितू जैसे हि अपनी जिप्सी मे बैठकर हवेली सें बाहर् गई वैसे हि इधर प्रतिमा केँ कमरे कि खिड़की सें बाहर् देखते हुए शिवा नें होठों पऱ मुस्कान सजाते हुए अपनीजेब सें फोन निकाला औऱ किसी कों मोबाइल लगाया। एक् मिनट सें भि कम वक्त तक उसने किसी सें मोबाइल पऱ बात कि उसनेबाद उसनेकाल कटकर दि।
इधर हवेली सें बाहर् निकलते हि रितू नें भि किसी कों मोबाइल लगाया औऱ उससेकुछ देरबात कि। उसकी जिप्सी गाॅव सें बाहर् कि तरफजा रही थि। गाव सें बाहर् जाने वाले रास्ते सें कुछदूर जाने पऱ हि रितू कों अपनी जिप्सी केँ पीछे एकाएक हि एक् ब्लैक जीपआती बैक मिरर मे दिखी। यह देखकर रितू केँ होठों पऱ मुस्कान फैल गई।
सौ मीटर केँ फाॅसले पऱ पीछे सें आँ रही गाड़ी रितू कों बराबर बैक मिरर मे दिखरही थि। हलाॅकि रितूसमझ गई थि कि पीछे आँ रहीजीप मे यकीनन उसके बाप कां हि कोई व्यक्ति हैं, मगरफिन भि पक्के तौर पऱ जाॅचने केँ लिए रितू नें मन बनाया। नहर पर्र बनेपुल केँ पास पहुॅचते हि रितू नें बाॅए साइड वाले रास्ते कि तरफ अपनी जिप्सी कि मोड़ लिया। जबकि दाएॅ साइड केँ रास्ते मे आगे उसका फार्महाउस पड़ता थां।
सौ मीटरआगे जाने पऱ हि रितू कों मिरर मे वोँ जीपउसी रास्ते कि तरफ मुड़ती दिखी। आगे करीब पाॅच किलो मीटर कि दूरी पऱ मोड़ थां औऱ वहीं सें दूसरे गाॅव कि आबादी शुरुआत होती थि। जिसकी वजह सें मोड़ पर्र मुड़ने केँ बाद पीछे वाले कों आगे वालाकार दिखाई नहि देता थां। आगेकुछ दूरी पर्र एक् चौराहा पड़ता थां। रितू नें जिप्सी कों चौराहे पर्र एक् साइड रोंका औऱ उतरकर बगल मे एक् दुकान थि। वोँ दौकान तरफबढ़ गई। दुकान सें उसने एक् पेप्सी कि बाटली औऱ वहीं पर्र खड़े खड़े पीनेलगी।
कुछ हि देर मे उसे चौराहे कि तरफआती हुईँ वोँ जीप दिखी जिसमें उसके बाप कां एक् व्यक्ति ड्राइविंग शीट पर्र बैठा थां। चौराहे पऱ रितू कि जिप्सी कों देख उसके चेहरे पर्र चौंकने केँ भाव उभरे औऱ फिन वोँ एकदम सें जीप कों तेज़ रफ्तार सें दौड़ाते हुए चौराहे केँ पार निकल गय़ा। उसकीइस हड़बड़ाहट कों देखकर रितू केँ होठों पर्र मुस्कान उभरआई।
पेप्सी कों पीकर रितू नें दुकान वाले कों पैसे दिये औऱ फिन सामने चौराहे केँ उसतरफ एक् बार सरसरी तौर पर्र अपनी नज़र दौड़ाई जिसतरफ उसके बाप केँ व्यक्ति कि वोँ जीप गई थि। उसकेबाद वोँ अपनी जिप्सी कि तरफ बढ़ीतथा उसमें बैठकर जिप्सी कों यू टर्न दिया औऱ फिन वापसउसी रास्ते कि तरफबढ़ चलीजिस तरफ सें वोँ आई थि। इसबार रितू कि जिप्सी कि रफ्तार ज़्यादा थि।
पुल केँ बगल सें सीधा जौ रस्ता थां उसीतरफ उसकी जिप्सी ऑधी तूफान बनीजा रही थि। बैक मिरर मे उसकी नज़र बराबर थि। उसके पीछेलगी वोँ जीपउसे कहीं नज़र नं आई। पुल सें बहुतदूर आकर रितू नें जिप्सी कों एक् ऐसी स्थान पऱ मार्ग सें अलग करके खड़ी कियाजिस स्थान पर्र दाएॅ साइड बहुत सारे पेड़ पौधेव झाड़ियाॅ थि। यहाॅ सें मार्ग पर्र सें चलरहा कीईकार देखा तोँ जा सकता थां लेकिन मार्ग सें इसतरफ कां आसानी सें देखा नहि जा सकता थां।
जिप्सी सें उतरकर रितू नें सबसे पहले होलेस्टर मे दबे अपने सर्विस रिवाल्वर कों निकाला। रिवाल्वर कां चेम्बर खोलकर उसने चेम्बर केँ सब खानों कों देखा। सब खानों मे गोलियाॅ मौजूद थीं। यह देखकर उसने चेम्बर कों वापसबंद कर रिवाल्वर कों होलेस्टर केँ हवाले किया औऱ एक् आगेबढ़ कर मार्ग केँ कुछपास हि एक् पेड़ कि ओट मे खड़ी होँ गई। इस वक़्त उसके चहरे पऱ बेहद कठोरता केँ भाव थें। बहोत हि धीमी आवाज़ मे उसकेमुख सें निकला____"साॅरी डैड, अब आपकाकोई भि व्यक्ति मेरी ख़बर आप् तक नहि पहुॅचा पाएगा। इतना हि नहि आप् वोँ सभी हर्गिज़ भि नहि कर पाएॅगे जिस किही भि चीज़ केँ करने कां आपने मंसूबा बनाया हुआ हैं। मेरे भइया केँ पास पहुॅचने वालेहर व्यक्ति कों सबसे पहले मुझसे टकराना होगा। "
चेहरे पर्र कठोरता औऱ ऑखों मे आगलिए रितू चुपचाप पेड़ केँ ओट मे खड़ीउस जीप केँ आने कां इन्तज़ार करनेलगी थि। इन्तज़ार करते करते करीब पन्द्रह मिनट गुज़र गएमगर अभि तक वोँ जीपइस तरफआती समझ नं आई। रितू कों लगा वोँ जीप मे बैठा व्यक्ति आएगा भि याँ नहि। लेकिन ऐसा नहि थां, क्योंकि तभी रितू केँ कानों मे किसीकार केँ आने कि आवाज़ सुनाई देनेलगी थि।
कुछ हि देर मे मोड़ सें इसतरफ मुड़ती हुईँ वोँ जीप दिखी। रितू नें महसूस किया कि जीप कि रफ़्तार कम थि। शायद वोँ व्यक्ति धीमी रफ़्तार सें इधरउधर कां मुआयना करतेहुए आँ रहा थां। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि जिसका वोँ पीछाकर रहा थां वोँ इतना जल्द कहाॅ गायब होँ गई? इसतरफ मुड़ने केँ बादआगे कां मार्ग बहुतदूर तक सीधा हि थां। उस सीधे रास्ते पर्र दूरदूर तक उसे रितू दिखाई नहि देरही हैं। यह देखते देखते हि उसनेजीप कि रफ़्तार कमकर दि। रितू कों लगा कि कहीं वोँ यहीं पर्र हि नं रुकजाए औऱ वहीहुआ भि। उस व्यक्ति नें सामने कि तरफ देखते हुए हि जीप कों एकदम सें खड़ीकर दिया।
जीप खड़ी करने केँ बाद उसनेइधर उधर देखा औऱ फिन सहसा उसने अपनी शर्ट कि जेब सें फोन निकाला। रितू कों समझते न् लगी कि वोँ शायदइस बात कि सूचना उसके बाप कों देना चाहता हैं कि रितू एकाएक हि उसकी नज़रों सें ओझल होँ गई हैं। रितू केँ मन मे ख़याल आया कि उस व्यक्ति कों इसबात कि सूचना नहि दे पाना चाहिए। इस ख़याल केँ आते हि उसने बिजली कि सि तेज़ी सें ऐक्शन लिया।
जिस स्थान पर्र रितू पेड़ केँ पीछे खड़ी थि वहाॅ सें वोँ व्यक्ति आगे कि तरफ बाएॅ साइड सें जीप मे बैठा थां। जीपऊपर सें पूरीतरह बेपर्दा टाइप कि थि। ड्राइविंग शीट पऱ बैठा वोँ व्यक्ति दाहिने हाॅथ पर्र फोनलिए कुछकर रहा थां। रितूसमझ गई कि वोँ उसके बाप कों मोबाइल लगाने हि वाला हैं। यहदेख कर रितू नें होलेस्टर सें रिवाल्वर निकाल कर निशाना लगाया औऱ फिन.धाॅयऽऽ। "
अचूक निशाना, रिवाल्वर सें निकली गोली सीधाउस व्यक्ति केँ दाहिने हाॅथ मे मौजूद उसकेफोन कि स्क्रीन केँ चिथड़े उड़ाती हुईँ पार होकर सामने जीप केँ शीशे सें टकराई थि। अचानक हुएइस हमले सें वोँ व्यक्ति मानो सकते मे आँ गय़ा थां। दाहिने हाॅथ कों अपने बाएॅ हाॅथ सें थामे वो उसे सहलाने लगा थां। ड्राइविंग शीट पऱ बैठा वोँ इधरउधर देखेजा रहा थां।
इधर रितू फायर करते हि तेज़ी सें जीप कि तरफ बढ़ी। कुछ हि देर मे वोँ जीप केँ पास पहुॅच गई। अपने इतने क़रीब इसतरह अचानक रितू केँ आँ जाने सें वोँ व्यक्ति एकदम सें हक्का बक्का रह गय़ा थां। चेहरे पर्र डर औऱ घबराहट केँ भाव कत्थक करते नज़रआने लगे थें
रितू नें देर नहि कि बल्कि बिना किसी भूमिका केँ उसने दोनो हाॅथो सें उस व्यक्ति कि शर्ट केँ कालर कों पकड़ा औऱ फिन एक् झटके मे हि खींचकर ड्राइविंग शीट सें बाहर् खींच लिया। उस हट्टे कट्टे व्यक्ति कों बाहर् खींचकर रितू नें उसे वहीं मार्ग पर्र करीब-करीब फटक दिया। व्यक्ति केँ हलक सें चीख़ निकल गई। रितू जानती थि कि उस व्यक्ति नें अगर रितू कों अपनी मजबूत बाहों मे पकड़ लिया तोँ फिन उससेछूट पाना आसान नहि होगा। इस लिए रितू नें उसे सम्हलने कां मौका हि नहि दिया। बल्कि लात घूॅसों पऱ रख दियाउसे।
मार्ग पऱ गिरेहुए उस व्यक्ति कि केवल चीखें निकलरही थि। सहसा उसके हाॅथ मे रितू कां पाॅव आँ गय़ा औऱ उसने झटके सें रितू कां वोँ पाॅव पकड़कर उछाल दिया। नतीजा यहहुआ कि रितू लहराते हुएहुए मार्ग पर्र पीठ केँ बल गिरी। रितू केँ मुख दर्द मे डूबी हल्की सि चीख निकली। उधरउस व्यक्ति कों जैसे मौकामिल गय़ा थां। इसलिए वोँ झट सें उठा औऱ सम्हल करउठरही रितू केँ सिर केँ बाल पकड़कर उसेजीप कि तरफ हि झटके सें धकेल दिया। रितू कां सिरजीप केँ किनारे पर्र लगे मोटे लोहे केँ पाइप सें टकराया। रितू कि ऑखों केँ सामने तारे नाचने लगे औऱ सहसाउसे अपनी ऑखों केँ सामने अॅधेरा सां दिखने लगा।
लोहे कां वोँ पाइप रितू केँ सिर पर्र ज़ोर सें लगा थां। जिसके कारण जल्दी हि रितू केँ सिर सें खून रिसने लगा थां। अभि रितू दर्द कों सहतेहुए स्वयं कों सम्हाल हि रही थि कि उस व्यक्ति नें एक् बार सें उसकेसिर कों उसी लोहे केँ पाइप पऱ झटक दिया। रितू कि चीख निकल गई। चोंट पऱ चोंट लगने सें खून कां रिसाव तेज़ होँ गय़ा।
"मैने मालिक सें झूॅठ नहि बोला थां लड़की। "उस व्यक्ति नें दाॅत पीसते हुए गुस्से सें कहा___"उस दिन तुँ हि थि उसजीप मे जोँ उस एम्बूलेन्स केँ आगेआगे चलरही थि। मगर पक्के तौर पऱ चूॅकि किसी कों पता नहि थां इसलिए मुझे भि लगा कि शायदउस जीप मे तेरे सिवाकोई हि न् रहा हौ। दूसरी बात हम् मे सें कोईयह सोच हि नहि सकता थां कि हमारे मालिक सें गद्दारी करने वाली स्वयं मालिक कि हि छोकरी होगी। "
यह सभी कहने केँ संग हि उस व्यक्ति नें पीछे सें एक् मुक्का रितू केँ पेट केँ बगल पर्र रसीदकर दिया। हट्टे कट्टे व्यक्ति कां मुक्का लगते हि रितू कों भयानक दर्दहुआ। उसकी घुटी घुटी सि चीख फिज़ा मे फैल गई।
"तुम्हारी तरफपता हैं आज मालिक नें मुझेसाफ साफकहा हैं कि अगर गद्दार केँ रूप मे तूँ हि निकले तोँ तुम्हारी तरफ मे स्वयं हि इस गद्दारी कि सज़ादूॅ। " उस व्यक्ति नें कहा___"मालिक कों इसबात सें अबकोई मतलब नहि रह गय़ा हैं कि गद्दार कौन हैं। उनकेलिए अपना औऱ पराया सभी बराबर हें। इसलिए ऐ छोकरी, तूँ अब सज़ा पाने केँ लिए सजधजकर हौ जा। मे पहले तेरेइस सुंदर बदन कां मजा लूटूॅगा औऱ फिन तेरी इज्ज़त कि धज्जियाॅ उड़ाऊॅगा। हाहाहाहाहा शपथ सें पहलीबार लगरहा हैं कि मालिक कि सेवा करने कां कुछ अच्छा फलमिल रहा हैं। "
रितू केँ कानों सें उस व्यक्ति कि यहसभी बातें टकराई तौ उसके अंदर गस्से कि ज्वाला धधकउठी। उसने अपने दाहिने हाॅथ कों पीछे लें जाकरउस व्यक्ति केँ सिर कों उसके बालों सें पकड़ा औऱ पूरी ताकत सें ऊपर सें आगे कि तरफ खींचा। वोँ व्यक्ति तौ पीछे सें आगे नं आँ पाया क्योंकि वोँ वजनदार औऱ हट्टा कट्टा थां लेकिन सिर केँ बाल इतनी तेज़ी सें खींचे जाने पऱ उसकेमुख सें दर्दभरी सीत्कार गूॅजउठी। इसकेसंग हि रितू केँ सिर केँ बालों पऱ सें उसकी पकड़ ढीलीपड़ गई।
रितू नें एक् लम्हा कां भि वक्त नहि गवाॅया। उसके हाॅथ केँ नीचे सें निकलकर उसने बिजली कि सि तेज़ी सें उस व्यक्ति केँ बगल सें आकर अपने दाहिने हाॅथ कि कराट ज़ोर सें उसकी गर्दन केँ पिछले भाग पऱ लगाई। नतीजा यहहुआ कि झोंक मे उस व्यक्ति कां माॅथा उसी लोहे केँ पाइप सें टकराया जिस पाइप पर्र अभि कुछदेर पहले रितू कां सिर टकराया थां। माॅथे पऱ लोहे कां पाइप लगते हि वोँ व्यक्ति दर्द सें बिलबिलाया औऱ दोनो हाॅथों सें अपना माॅथा सहलाने लगा। पलक झपकते हि उसके माथे पर्र एक् गोल सां गोलाउभर आया जौ हल्के नीलेरंग कां थां।
रितू कों तेज़ क्रोध आयाहुआ थां। इसबार वोँ रुकी नहि बल्कि जूड़ो कराटे औऱ कुंगफू केँ ऐसे करतब दिखाए कि दो मिनट मे हि उस व्यक्ति कों धरासाई कर दिया। एक् बार पुनः वोँ हट्टा कट्टा व्यक्ति मार्ग पर्र पड़ा थां, लेकिन इसबार वोँ दर्द सें बुरीतरह कराहरहा थां।
"तेरे जैसे पालतू कुत्तों कां इलाज़ बहोत अच्छी तरह सें करनाआता हैं मुझे। " रितू किसी शेरनी कि भाॅति गुर्राई___"चल आज तुम्हे इसका ट्रेलर भि औऱ इसका अंजाम भि दिखाऊॅगी। तेरे जैसे कुत्तों कां औऱ अपनेउस हरामी बाप कां क्याँ हस्र होगायह वक़्त हि बताएगा। "
रितू कि बातउस व्यक्ति नें कोई जवाब नं दिया, बल्कि वोँ जवाब देने कि हालत मे हि नहि रह गय़ा थां। रितू नें नीचेझुक करउस व्यक्ति कि कनपटी केँ पास मौजूद एक् ऐसीखास स्थान पऱ कराट मारी कि समयभर मे वोँ व्यक्ति बेहोश हौ गय़ा। उसके बेहोश होते हि रितू नें उस व्यक्ति केँ एक् हाॅथ कों पकड़कर खींचते हुए मार्ग केँ किनारे पर्र लगाया औऱ फिनपलट करउसतरफ बढ़चली जिसतरफ उसने अपनी जिप्सी कों झाड़ियों औऱ पेड़ों केँ पीछे छुपाया थां।
थोड़ी हि देर मे रितू जिप्सी कों लेकर मार्ग पर्र आँ गई। जिप्सी कों उस व्यक्ति केँ पास खड़ीकर वोँ जिप्सी सें नीचे उतरी औऱ फिनउस व्यक्ति केँ बेहोश बदन कों किसीतरह उठाकर जिप्सी केँ पीछेडाल दिया। उसकेबाद वोँ उसजीप केँ पास गई जिसमें बैठकर वोँ व्यक्ति यहाॅआया थां। उसजीप केँ इग्नीशन सें चाभी निकाल कर रितू नें अपनी पैन्ट कि पाॅकेट मे डाला औऱ वापस जिप्सी केँ पासआकर ड्राइविंग शीट पऱ बैठ गई।
उस व्यक्ति कों वहीं पऱ छोंड़ कर रितू नें अपनी जिप्सी कों फार्महाउस कि तरफ दौड़ा दिया। ऑधी तूफान बनी जिप्सी कुछ हि वक़्त मे फार्महाउस पहुॅच गई। फार्महाउस केँ मेनगेट पर्र हि हरिया औऱ शंकर काका खड़े दिखे रितू कों। रितू कों आतेदेख शंकर नें लोहे वालागेट खोल दिया। गेट खुलते हि रितू नें जिप्सी कों गेट केँ अंदर कि तरफ बढ़ा दिया। हरिया काका केँ पास जिप्सी कों रोंककर रितू नें अपनी पैन्ट कि पाॅकेट सें चाभी निकाली औऱ शंकर कि तरफ देखते हुए कहा___"शंकर काका मेरी व्हीकल सें इस व्यक्ति कों बाहर् निकाल कर वहीं तहखाने मे डालकर फटाफट आइये। "
"अच्छा बिटिया। " शंकर नें कहा औऱ अपनी बंदूख कों हरिया केँ हवाले कर जिप्सी केँ पासआया औऱ उस व्यक्ति कों अपनी मजबूत बाहों सें खींचकर बाहर् निकाला। बाहर् निकाल करउसे उसने अपने कंधे पऱ लादा औऱ अंदर तहखाने वाले हिस्से कि तरफबढ़ गय़ा।
"काका आप् यह चाभी लीजिए। " रितू हरिया कि तरफ चाभी उछालते हुए कहा___"औऱ मेरीइस वाहन सें शंकर काका कों भि संग लेँ जाइये। बीच रास्ते पऱ हि उस व्यक्ति कि जीप खड़ी मिलेगी आपको। उसे वहाॅ सें यहाॅ लेकर आनां हैं। "
"ठीक हैं बिटिया। " हरिया नें कहा___"हम् अभि शंकरवा कां लइके जाथैं। मगर बिटिया ऊ ससुरा व्यक्ति कउन हैं? अउर कहाॅ सें मिलगवा ऊ तुमका?"
"मेरेडैड कां पालतू कुत्ता हैं काका। " रितू नें नफ़रत केँ भाव सें कहा___"मेरे डैड नें उसे मेरे पीछे लगाया हुआ थां मेरी निगरानी केँ लिए। मैनेउस कमीने कों बीच मे हि धर लिया औऱ यहाॅ लें आई। अब आप् इसकी भि ख़ातिरदारी कीजिएगा। "
"अरे बिलकुल बिटिया। " हरिया केँ चेहरे पऱ एकाएक हि खुशी केँ भाव उभरेमगर फिन जैसेउसे कुछयाद आया तोँ उसनेफिन नार्मल भाव सें कहा___"ऊ ससुरे कि ख़ातिरदारी हम् बहोत अच्छे सें करूॅगा। "
तभी शंकर काकाआता हुआ दिखाई दिया। उसकेपास आते हि रितू नें उसे भि समझा दिया औऱ हरिया केँ संग अपनी जिप्सी सें भेज दिया। उन दोनो केँ जाते हि रितू अंदर घर-मकान कि तरफबढ़ चली।
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मे रितू दिदी केँ कमरे मे बड़ी बेचैनी सें इधर सें उधरटहल रहा थां। रहरहकर सूरज कि बातें मेरे ज़हन मे ज़हर सां घोलरही थि। मुझेउन चारों पर्र भयानक क्रोध आँ रहा थां। लेकिन दिदी नें मोबाइल करके मुझे तहखाने सें बाहर् आँ जाने केँ लिएकह दिया थां। मुझेइस बात सें बेहद तक़लीफ़ होँ रही थि कि मेरी विधी केँ संग कितना घिनौना कुकर्म किया गय़ा थां जिसके बारे मे मुझेकुछ पता हि नहि थां औऱ नाँ हि यहसभी किसी नें मुझसे बताया थां। मे सोचरहा थां कि अगर इत्तेफाक़ सें याँ संयोगवश मे हरिया काका केँ पीछेउस तहखाने मे नं जाता तोँ मुझेपता भि नं चलता कि मेरी विधी केँ संग औऱ क्याँ हुआ थां।
मुझेइस सबकेलिए पवन औऱ दिदी दोनो पर्र क्रोध भि आँ रहा थां मगर मे इसबात सें स्वयं कों तसल्ली दियेहुए थां कि इन्हीं कि वजह सें हि तौ मे अपनी विधी कों आखिरी बारमिल सका थां। उसके त्याग औऱ बलिदान कों जानसका थां वरना सारी ज़िंदगी मे उस मासूम व निर्दोष कों कोसता रहता। इस लिएयह सभीसोच कर मे अपने गुस्से कों शान्त कियेहुए थां। मैने स्वयं कों बहोत समझाया थां तब जाकर मुझेकुछ राहत मिली थि औऱ सबसे ज़्यादा रितू दिदी पऱ प्रेम आया कि उन्होंने मेरे औऱ विधी केँ ख़ातिर कितना कुछ किया थां।
मुझे एहसास थां कि रितू दिदी अब पहले जैसी नहि रही थि बल्कि अब वोँ बदल गई थि। बचपन सें लेकरअब तक मेरे प्रति जोँ उनके अंदर द्वेष याँ नफ़रत कां भाव थां वोँ अब बेपनाह प्रेम व स्नेह मे परिवर्तित होँ गय़ा थां। जिस रितू दिदी सें बात करने केँ लिए मे अक्सर तरसता थां आजवही दिदी मुझे अपनीजान सें अधिक प्रेम करनेलगी हें। इसबात सें मे बेहदखुश भि थां। लेकिन हालात केँ मद्दे नज़र मे अपनीइस खुशी कों ज़ाहिर नहि करपारहा थां। इस टाइम मे उनके कमरे मे टहलते हुए उनकेआने कां बेसब्री सें इन्तज़ार कररहा थां।
तभी कमरे कां दरवाजा खुला औऱ पुलिस इन्स्पेक्टर कि वर्दी मे रितू दिदी नें कमरे मे प्रवेश किया। मे उन्हें आज पुलिस कि वर्दी मे देखकर देखता हि रह गय़ा। उनके सुंदर जिस्म पर्र यह पुलिस कि वर्दी बहुतजॅच रही थि। ऐसा लगता थां कि पुलिस कि यह वर्दी मात्र उन्हीं केँ लिए हि बनी थि। मुझे अपनीतरफ अपलक देखता देख दिदी केँ होठों पर्र मुस्कान उभरआई औऱ फिन सहसा उनके चेहरे पऱ हया कि सुर्खी भि नज़रआने लगी।
"ऐसे क्यूं देखरहा हैं राज?" रितू दिदी नें मीठी सि आवाज़ मे नज़रें झुकाते हुएकहा।
"देखरहा हूॅ कि मेरी रितू दिदी इस पुलिस कि वर्दी मे कितनी हसीनलग रही हें। " मैने सहसा मुस्कुराते हुए कहा___"ऐसा लगता हैं कि यह वर्दी दुनियाॅ मे केवल आपकेलिए हि बनी हैं। "
"अच्छा जी। " रितू दिदी हॅस दि, बोलीं___"क्याँ सचकहरहा हैं भइया?"
"हाॅ दिदी। " मैने कहा___"आप् तोँ मेरी वैसे भि दुनियाॅ कि सबसे अच्छी औऱ सुंदर दिदी हें, ऊपर सें इस पुलिस कि यूनीफार्म पहनेहुए। शपथ सें दिदी आप् बहोत हि क्यूट औऱ ब्यूटीफुल लगरही हें। मेरी आपसे गुज़ारिश हैं कि आपनेयह जोँ पुलिस कि जॉब छोंड़ कां सोचाहुआ हैं उससोच कों आप् अपने ज़हन सें निकाल दें। मे आपको हमेशा ऐसे हि पुलिस कि इस वर्दी मे देख्ना चाहता हूॅ। "
"अगर ऐसीबात हैं मेरे प्यारे भइया। " रितू दिदी नें आगेबढ़ कर मेरे गालों पर्र सहलाते हुए कहा___"तोँ फिनअब तेरीयह दिदी पुलिस कि जॉब मरतेदम तक नहि छोंड़ेगी। भले हि चाहे जैसी भि परिस्थिति आँ जाए। तेरीपता हैं राज, मेरीइस जॉब सें मेरे माॅमडैड औऱ वोँ कमीना शिवाकोई भि खुश नहि हें। आज तेरेमुख सें यहबात सुनकर मुझे बहोत खुशी हौ रही हैं। मे खुशहूॅ कि तुम को मेराजॉब करना औऱ पुलिस कि इस वर्दी मे देख्ना अच्छा लगरहा हैं। काश!यह सभी मैने बहोत पहले सोचा होता। मैने सोचा होताकभी तेरे बारे मे तौ कभी भि मे तुझसे दूर नं रहती। भइया क्याँ होता हैं यह मुझेअब पताचला हैं राज। वरना तौ भइया केँ नाम सें हि नफ़रत हौ गई थि मुझे। तुझसे एक् हि विनती हैं अपनीइस दिदी कों कभी स्वयं सें दूर न् करना। मैंने अपनेउन रिश्तों सें रिश्ता तोड़ लिया हैं जिन रिश्तों केँ द्वारा मेरायह वजूद दुनियाॅ मे आया हैं। अबअगर मेराकोई हैं तोँ मात्र तुँ हैं मेरे भइया। जौ गुज़र गय़ा उसे तौ मे लौटा नहि सकतीराज मगरआज जोँ हैं औऱ जौ आने वाला हैं उसे सवाॅरने कि पूरी कोशिश करूॅगी मे। बस तुँ औऱ तेरासंग बनारहे। बोल नं भइया, तुँ मुझे अपनेसंग रखेगा न्?"
यहसभी कहतेहुए रितू दिदी कि ऑखों सें ऑसू बहनेलगे थें। मैने उतावलापन कर उन्हें अपने सीने सें लगा लिया। वोँ मुझसे कस केँ लिपटगईं औऱ स्वयं कों ज़ार ज़ार नं रोने कि नाकाम कोशिश करने लगीं। मे उन्हें इसतरह रोतेहुए नहि देख सकता थां। उनका कैरेक्टर हमेशा सें हि बहादुर लड़की कां रहा थां मगरइस वक़्त कोई देखे तौ किसी कीमत पर्र यकीनकरे कि यह लड़की बहादुर भि सकती हैं। बाहर् सें पत्थर कि तरह कठोर दिखने वालीइस लड़की केँ सीने मे भि एक् नन्हा सां दिल हैं जोँ धड़कना भि जानता हैं अपनों केँ लिए।
"मत रोइये दिदी। " मैने उनकीपीठ कों सहलाते हुए कहा___"आप् रोतेहुए बिलकुल भि अच्छी नहि लगती हें। आप् तौ मेरी सबसे ज़्यादा बहादुर दिदी हें। चलिएअब चुप हौ जाइये। "
"मुझेरो लेनेदे राज। " दिदी मुझसे औऱ भि कस केँ लिपटगईं, बोलीं____"तेरी नहि पता कि जब सें मुझे असलियत कां पताचला हैं तब सें मे कितना अंदर हि अंदरइन वेदनाओं मे झुलसरही हूॅ। वोँ केसेलोग हें मेरे भइया जौ अपनी हि बेहन बेटी केँ बारे मे इतना गंदासोच सकते हें? वोँ केसेलोग हें राज जिनको रिश्तों कि कोई क़दर हि नहि हैं? केवल अपनीहवस केँ लिए वोँ किसी भि हद तक जाने कों सजधजकर बैठे हें। "
"अबकुछ मत कहिए दिदी। " मैने दिदी कों स्वयं सें अलगकर उनके ऑसुओं सें तर चेहरे कों अपनी दोनो हॅथेलियों केँ बीच लेकर कहा___"पाप करने वालों कि उमर बहोत लम्बी नहि होती हैं उनकी नियति मे बहोत जल्दसड़ सड़ केँ मर जानां लिखा होता हैं। जोँ गुनाह जौ पाप उन्होने किया हैं उसकी उन्हें अवश्य सज़ा मिलेगी दिदी। बस टाइम कां इन्तज़ार कीजिए। "
"तूँ उन सबको अपने हाॅथों सें मौत कि सज़ा देगा। " रितू दिदी नें कहा___"मैंने उन सबको केवल तेरेलिए हि छोंड़ दिया थां। मे चाहती थि कि इन्होंने जिनके संगपाप कियावही इन्हें अपने हाॅथों सें सज़ादें। औऱ हाॅ, तूँ अपनेमन मे लम्हा भर केँ लिए भि यह ख़याल मत लाना कि तूँ ऐसा करेगा तौ मे तुम्हारी तरफकुछ कहूॅगी। मे सच कहतीहूॅ राज, मुझेइस बात कां ज़रा सां भि दुख नहि होगा कि तूने मेरे माॅमडैड औऱ शिवा कों मौत दि। "
"आप् शायद दुनियाॅ कि पहलीऐसी लड़की हें दिदी जिसेइस सबसेकोई दुख नहि होगा। " मैने दिदी कि ऑखों मे देखते हुए कहा___"लेकिन आप् ऐसाकह रही हें यह हैरत कि बात हैं मेयेलिए। "
"इसमें हैरत कैसीराज?" रितू दिदी नें कहा___"हर इंसान कों अपने अच्छे बुरे कर्मों कां फल मिलता हैं। मेरेघऱ वालों कों भि मिलेगा। तक़लीफ़ तौ तब होती हैं जब अच्छे कर्मों कां फल बुरा मिलता हैं, मगरइन लोगों नें तोँ केवल बुरा कर्म हि किया हैं अपनी ज़िंदगी मे। इन लोगों केँ मर जाने सें मुझेकोई दुख नहि होगा मेरे भइया, बल्कि इसबात कां मलाल अवश्य रहेगा कि परमेश्वर नें मुझेऐसे माॅ बाप औऱ ऐसा भइया क्यूं दिया थां?"
रितू दिदी कि इन बातों कों सुनकर मे हैरानी सें उनकीतरफ देखता रह गय़ा थां। मुझेउन पर्र बड़ा स्नेह आया। मैनेझुक कर उनके माॅथे पऱ हल्के सें चूॅम लिया। मेरेइस तरह चूमने पर्र वोँ हौले सें मुस्कुराईं।
"तूँ सच मे बड़ा होँ गय़ा हैं राज। " रितू दिदी नें मेरे चेहरे कों एक् हाॅथ सें सहलाते हुए कहा___"इस बात सें मुझे खुशी हैं कि तुँ बड़ा होँ गय़ा हैं औऱ समझदार भि। हलाॅकि यहबात तोँ मे पहले भि जानती थि कि तुँ एक् समझदार लड़का हैं। सबके प्रति तेरेदिल मे प्रेम इज्ज़त व सम्मान कि भावना हैं। ख़ैर छोंड़ इनसभी बातों कों, यहबता कि तुँ तहखाने मे केसे पहुॅच गय़ा थां?"
"वोँ हरिका काका केँ बिहैवियर सें मुझेउन पऱ संदेह हुआ। " मैने गहरी साॅस लेने केँ बाद कहा___"आप् तौ जानती हि हें कि अगर किसी केँ मन मे किसीतरह कां संदेह होँ जाता हैं तौ वोँ हर लम्हा यही प्रयास करता रहता हैं कि उसेजिस चीज़ पर्र संदेह हुआ हैं वोँ उसके सामने साफतौर पर्र खुलजाए याँ उसकी हकीक़त पताचल जाए। बस हरिया काका केँ मामले मे यहीहुआ थां। मुझेउन पऱ संदेह हुआ औऱ जैसे हि वोँ तहखाने वाले रास्ते कि तरफगए तौ मे भि शंकर काका कि नज़रों सें स्वयं कों छुपाकर हरिया काका केँ पीछेचला गय़ा। उनके पीछे जाने सें तहखाने मे जोँ सच्चाई मुझेपता चली उसने मुझे मुकम्मल तौर पर्र हिलाकर रख दिया। मुझेपता चला कि तहखाने मे मौजूद उन चारो हरामज़ादो नें मेरी विधी केँ संग क्याँ किया थां? उसकेबाद फिन मुझेवही करना थां जोँ ऐसी परिस्थिति मे कोई भि करता। मगर ऐन वक़्त पर्र आपका मोबाइल आँ गय़ा औऱ मे उन कमीनों केँ संग वोँ नं कर पाया जोँ करने कां मैने फैंसला कर लिया थां। "
"मुझे क्षमा करदेराज। " दिदी नें गंभीरता सें कहा___"पऱ तेरी नहि पता कि उन लोगों केँ संगसंग मे औऱ किनकिन लोगों केँ संग क्याँ क्याँ करने वालीहूॅ? इन चारों कों आसानमौत मारने कां कोई मतलब नहि हैं मेरे भइया। मैंने ऐसाकुछ करने कां सोचाहुआ हैं जिसके बारे किसी नें सोचा भि नहि होगा। "
"क्याँ करने कां सोचा हैं आपने?" मैने दिदी केँ चेहरे कों ग़ौर सें देखते हुए कहा___"क्याँ मुझे नहि बताएॅगी आप्?"
"बातकुछ ऐसी हैं मेरे भइया। " रितू दिदी नें सहसापलट कर दूसरी तरफ अपना चेहरा करतेहुए कहा___"कि मे तुम्हारी तरफबता नहि सकती। बस इतनासमझ लेँ कि इन लोगों नें अगर नीचता कि हद कों पार किया थां तौ मे इन्हें सज़ा देने मे इनकेसंग नीचता कि इन्तेहां कर दूॅगी। "
"क्याँ मतलब???" मे दिदी कि बातसुन कर बुरीतरह चौंका थां___"ऐसा क्याँ करने वाली हें आप्??"
"मैनेकहा नं राज। " रितू दिदी नें दूसरी तरफ मुॅह कियेहुए हि कहा___"कि मे तुम्हे इस बारे मे कुछबता नहि सकती। "
"मगर दिदी। " मे उनकेपास जातेहुए बोला___"आपने तौ सोच लिया हैं कि आपकोउन चारों कों क्याँ सज़ा देना हैं मगरबात जब नीचता कि होँ तोँ मे यह केसेसह सकताहूॅ कि मेरी बेहनकोई नीचता वालाकाम करे? नहि दिदी आप् ऐसाकुछ भि नहि करेंगी। आप् मुझे बताइये कि उन चारों केँ संगसंग औऱ कौनकौन ऐसे हें जिनको उनके गुनाहों कि सज़ा देनी हैं? मे स्वयं अपने हाॅथों सें उन्हें बद सें बदतर सज़ा दूॅगा। "
"मुझे मजबूर मतकर मेरे भइया। " रितू दिदी सहसा मेरीतरफ पलटकर मेरे चेहरे कि तरफ देखते हुए कहा__"तूँ मेरा भइया हैं, इसलिए मे तुम को वोँ बात केसेबता सकूॅगी जिसे बताने मे मुझे लज्जा आए। दूसरी बात तुँ भि यही सोचेगा कि तेरी दिदी केसे गंदे विचारों कि हैं?"
"ऐसाकुछ नहि हैं दिदी। " मैने उनके चेहरे कों अपनी दोनो हॅथेलियों केँ बीच लेकर कहा___"मुझे पता हैं कि आपकामन औऱ दिल गंगा मइया कि तरहसाफ औऱ निर्मल हैं। आपने अपने जिंदगी कभीकोई ऐसाकाम नहि किया हैं जिसके लिए आपको किसी केँ सामने शर्मिंदा होना पड़े। सच कहूॅ तौ मुझेइस सबसे आप् पर्र नाज़ हैं। इसलिए आप् मुझे बेझिझक होकर बताइये कि इन लोगों केँ संग औऱ कौनकौन हें जिनको आप् ऐसी सज़ा देने कां मन बनाया हुआ हैं?"
"सूरज चौधरी कों तोँ तूँ जानता हि हैं कि वोँ कौन हैं औऱ किसका कपूत हैं?" रितू दिदी नें गहरी साॅस लेने केँ बाद कहा___"इस प्रदेश कां मंत्री हैं वोँ। सूरज केँ संग बाॅकी तीन जोँ लड़के औऱ हें वोँ सभी भि किसी न् किसी बड़े बाप कि औलाद हें। जब विधी वाला हादसा इन लोगों नें अंजाम दिया औऱ मुझेउन सबके बारे मे पताचला तौ मुझेयह समझते देर नं लगी कि इन लड़कों कों कानूनन सज़ा दिलवाने सें भि कुछ नहि होने वाला। क्योंकि इनके सबके बाप बड़े बड़ेलोग हें। सारी कानून ब्यवस्था कों इन लोगों नें अपने हाॅथों पऱ रखाहुआ हैं। अगर मे इन लोगों कों गिरफ्तार करकेजेल कि सलाखों केँ पीछेडाल भि देती तौ पलक झपकते हि मुझेउन लोगों कों छोंड़ना भि पड़ जाता। ऊपर सें यही आर्डर आता कि मंत्री साहब कां बेटा औऱ उसके तीनो साथियों मैने बेवजह हि गिरफ़्तार करजेल मे बंद किया हैं। कहने कां मतलबयह कि कानूनी तौर पऱ मे इन्हें कोई सज़ा दिला हि नहि पाती। इस लिए मैंने कानून कि मुहाफिज़ होतेहुए भि कानून कों अपने हाॅथ मे लेने कां मनबना लिया। लेकिन मे यह भि जानती थि कि यहसभी इतना आसान नहि थां। तब मैने अपनेआला अफसर सें इस संबंध मे बात कि। उन्हें मैंने इसबात कां भि हवाला दिया कि प्रदेश कां मंत्री कहने कों तौ मंत्री हैं मगरऐसा कोई गुनाह याँ अपराध नहि हैं जिसे इसने अपने बाॅकी साथियों केँ संगमिल कर अंजाम नं दिया होँ। मेरीबात सुनकर कमिश्नर साहब राज़ी तोँ हुएमगर मंत्री केँ खिलाफ कोई पुख्ता सबूत न् होने कि वजह सें उस पऱ हाॅथ डालने सें मुझेमना भि करनेलगे। तब मैने उन्हें बताया कि मेरेपास मंत्री केँ खिलाफ़ ऐसेऐसे ठोस सबूत हें जिनकी बिना पऱ मे जब चाहूॅ तबउसे औऱ उसकेसब साथियों कों बीच चौराहे पर्र नंगा दौड़ा देने पर्र मजबूर करदूॅ। मेरी बातें सुनकर कमिश्नर साहब नें मुझे खुलीछूट दे दि औऱ कह दिया कि मेरा जौ दिलकरे वोँ मे कर सकतीहूॅ। "
"ओह तौ इसका मतलबबात केवल इतनी हि नहि हैं जितनी कि मुझे नज़र आँ रही हैं। " मैने चकितभाव सें दिदी कि तरफ देखते हुए कहा___"इस सभी मे प्रदेश कां मंत्री औऱ उसकेकुछ मित्र भि इनवाल्ब हें?"
"इन्वाल्ब नहि हैं राज। " रितू दिदी नें कहा___"बल्कि इसखेल मे उन सबको भि लपेटना पड़ा मुझे। मे चाहती थि कि एक् हि काम मे दोनोकाम होँ जाएॅ। सारा प्रदेश उस मंत्री केँ अत्याचार सें भि दुखी हैं। इसलिए बाप बेटों कों एक् संग लपेटने कां मन बनाया मैने। "
"तोँ इसमें ऐसी क्याँ बात थि दिदी जिसे आप् बताना नहि चाहती थि?" मैने सोचने वालेभाव सें कहा।
"यह तौ मैने किरदारों केँ बारे मे बताया हैं तुम्हे। " रितू दिदी नें कहा___"यह नहि बताया कि इनसभी किरदारों केँ संग क्याँ करूॅगी मे?"
"ओहआई सि। " मैने कहा___"आप् बताना नहि चाहती तौ कोईबात नहि दिदी। मे मात्र यह चाहता हूॅ कि इससभी मे आपकोकुछ न् हौ। आपकी बातों सें मे यहबात समझ गय़ा हूॅ कि जिन लोगों कि आपनेबात कि हैं वोँ निहायत हि खतरनाक लोग हें। इसलिए उन पर्र हाॅथ डालने सें यकीनन बेहद ख़तरा हैं औऱ मे यह हर्गिज़ नहि चाह सकता कि ऐसे ख़तरों केँ बीच मेरी दिदी अकेले फॅस जाएॅ। अच्छा हुआ कि आपने मुझेइस बारे मे बता दिया। अब मे स्वयं आपकोइस ख़तरे केँ बीच अकेला नहि रहने दूॅगा। यह लड़ाई अब हम् दोनो बेहन भइयामिल कर लड़ेंगे औऱ जीतकर दिखाएॅगे दुनियाॅ कों। "
"यह तूँ क्याँ कहरहा हैं मेरे भइया?" रितू दिदी एकाएक हि चौंक पड़ी थि, बोलि___"नहि नहि, तुँ इस सबसेदूर हि रह। मे तेरीऐसे ख़तरे केँ बीच मे आने कि इजाज़त हर्गिज़ नहि दूॅगी। बड़ी मुश्किल सें तौ मेरा भइया मुझे मिला हैं। सारीउमर मैने तुम कोदुख तक़लीफ़ें दि थि अब औऱ नहि मेरे भइया। मे तुझेही किसी भि ख़तरे मे नहि डालूॅगी। तूँ इस सबसेदूर रहेगा औऱ इन सबकोसंग लेकर वापस मुम्बई चला जाएगा। तूँ मेरी फिक्र मतकरराज, तेरी दिदी इतनी कमज़ोर नहि हैं कि कोई भि ऐरा गैराउसे हाथ भि लगासके। "
"मे जानता हूॅ कि मेरी दिदी दुनियाॅ कि सबसे बहादुर लड़की हैं। " मैने दिदी कों उनके दोनो कंधों सें पकड़कर कहा___"मगर, एक् भइया होने केँ नाते मेरा भि कुछ फर्ज़ बनता हैं। मे सक्षम होतेहुए भि आपको अकेले ऐसे ख़तरे मे केसे जानेदूॅ? मेरेदिल मेरा ज़मीर हमेशा इसबात केँ लिए मुझे धिक्कारेगा कि मैंने अकेले आपको इतने बड़े खतरे मे जाने दिया औऱ स्वयं अपनीजान बचाकर मुम्बई चला गय़ा। नहि दिदी, ऐसा कायर औऱ बुजदिल नहि हैं आपका भइया। आप् भि तौ मुझे मुद्दतों बाद मिली हें। आप् जानती हें कि बचपन सें अब तक मे आपसेबात करने केँ लिएतरस रहा थां औऱ आजजब मुझे मेरी सबसे प्यारी दिदी मिल गई हैं तोँ मे केसे आपकोयूॅ अकेला मौत केँ मुह मे छोंड़ करचला जाऊॅगा? कभी नहि दिदी.कभी नहि। मे मर जाऊॅगा मखर आपकोयूॅ अकेला छोंड़ कर यहाॅ सें कहीं नहि जाऊॅगा। "
"नहींऽऽऽ। " मेरेमुख सें मरने कि बातसुन कर जल्दी हि दिदी केँ मुख सें चीख निकल गई। झपटकर मुझे अपनेगले सें लगा लिया उन्होंने, फिन बोलीं___"ख़बरदार अगरऐसी अशुभबात दुबारा कही तोँ। मरेंगे तेरे दुश्मन। तेरीकुछ नहि होने दूॅगी मे। "
"तौ फिन मुझे अपनेपास रहने दीजिए दिदी। " मैने उनकेगले लगेहुए हि कहा___"मुझे अपना फर्ज़ निभाने दीजिए। अपनेइस भइया कों कायर औऱ बुजदिल मत बनाइये। वरना यकीन मानिये मे कभी भि चैन सें जी नहि पाऊॅगा। हम् दोनोसंग मिलकर हर ख़तरे कां मुकाबला करेंगे। सभीकुछ ठीक होने केँ बाद हम् सभीसंग मे हि रहेंगे। मुझे आपसे बहोत सारी बातें भि करनी हें। प्लीज़ दिदी, मुझे अपनेसंग रहने दीजिए नं। "
"हायराज। " दिदी नें मुझेकस केँ पकड़ते हुए कहा___"तुँ इतना अच्छा क्यूं हैं रे? इतना प्रेम क्यूं करता हैं तुँ अपनीइस दिदी सें? क्याँ तूँ भूल गय़ा कि यहवही दिदी हैं जिसने तेरीकभी अपना भइया नहि माना औऱ हमेशा तुम को जलील करके तेरादिल दुखाया हैं। ऐसी दिदी सें क्यूं इतना प्रेम करता हैं पगले?"
"मुझे आपसेकभी कोईदुख नहि मिला दिदी। " मे उनसेअलग होकरतथा उनके हसीन चेहरे कों अपनी हॅथेलियों पर्र लेकर कहा___"औऱ नां हि आपनेकभी मुझेकोई दुख दिया हैं। हर इंसान केँ जिंदगी मे अच्छा बुरा वक़्त आता हैं। इसलिए जौ बीत गय़ा मुझे उसकालेश सिर्फ भि रंज़ नहि हैं, बल्कि आजइसबात कि बेहद खुशी हैं कि मुझे वोँ दिदी मिल गई हैं जिसे मे सबसे ज़्यादा पसन्द करता थां। "
मेरीबात सुनकर रितू दिदी फफककर रो पड़ी। उनकी ऑखों सें झरझर करके ऑसूॅ बहनेलगे। यहदेख कर मे तड़पउठा। मैने अपने दोनो हाॅथों सें उनकी ऑखों सें बहतेहुए ऑसुओं कों पोंछा।
"ऐसी बातें मतकर मेरे भइया। " दिदी नें सिसकते हुए कहा___"मे अपने अंदर केँ जज़्बातों कों सम्हाल नहि पाऊॅगी। मेरादिल धड़कना बंदकर देगा। आज मुझे एहसास हुआ कि सच्चा प्रेम व स्नेह कैसा होता हैं? क्यूं इस प्रेम मे लोग अपने किसी प्रिय केँ लिए स्वयं कों कुर्बान कर देते हें? तूँ प्रेम इश्क औऱ प्यार कां जीता जागता प्रमाण हैं राज। मे अपने भइया केँ इस सच्चे प्यार मे बह जानां चाहती हूॅ। मुझे अपने सें दूरमत करना मेरे भइया। "
"शान्त हौ जाइये दिदी। " मैने दिदी कों अपने सीने सें लगा लियाफिन बोला___"अब बिलकुल भि आप् रोएॅगी नहि। चलिए जाइये फ्रेश होँ जाइये उसकेबाद हम् सभीसंग मे खानां खाएॅगे। "
"हम्म। " दिदी नें बस इतना हि कहा औऱ मुझसे अलग हौ गईं। उनकी ऑखें रोने सें हल्का सूझ गई थि। मेरी स्वयं कि ऑखें भि नम थि।
"वोँ दिदी, करुणा चाची औऱ उनके बच्चे कब तक आएॅगे यहाॅ?" मैने पहलू बदलते हुए पूछा दिदी सें।
"अरेहाॅ मे तोँ भूल हि गई थि राज। " रितू दिदी सहसा चौंकते हुए बोलीं___"उन्होंने कल मोबाइल पऱ बताया थां कि वोँ बच्चों कों लेकर मामाजी जी केँ संगआज यहाॅसाम सें पहले करीबतीन बजे तक हल्दीपुर केँ पहले जौ नहर कां पुल हैं वहाॅ पहुॅच जाएॅगी। "
"ओहठीक हैं दिदी। " मैने अपनी कलाई पऱ बॅधी घड़ी कि तरफ देखते हुए कहा___"अभि तोँ ढाईबज रहे हें। मतलबआधे घण्टे मे वोँ लोगपुल केँ पास पहुॅच जाएॅगे। एक् काम करताहूॅ मे आपकी जिप्सी लेकर उन्हें लेनेजा रहाहूॅ। "
"नहि नहि। " रितू दिदी झट सें बोल पड़ीं___"तूँ कहीं नहि जाएगा। मे हरिया काका कों बोल दूॅगी वोँ लें आएॅगे उनको। "
"आपको नहि लगता दिदी कि उन्हें लेने हमें स्वयं जानां चाहिए?" मैने कहा___"आख़िर वोँ हमारी चाची हें। हरिया काका केँ भरोसे केसेरह सकते हें हम्?"
"तोँ ठीक हैं राज। " दिदी नें कहा___"मे स्वयं जारही हूॅ उन्हें लेने। "
"मे यहकहरहा हूॅ दिदी कि हम् दोनोसंग मे उन्हें लेने चलते हें। " मैने कहा___"प्लीज़ दिदी मान जाइये न्। "
"अच्छा ठीक हैं चल। " दिदी केँ होठों पर्र उनकी हसीन सि मुस्कान उभर आई___"अपनी ज़िद तौ तुझेही छोंड़ना हैं नहि न्। "
"हाॅ तौ। " मैने भि इसबार इठलाते हुए कहा___"आपसे छोटाहूॅ तोँ इतनी ज़िद तौ आपसे करूॅगा हि औऱ आपको मेरी ज़िद माननी हि पड़ेगी। हाॅ नहि तौ। "
"अरे तुँ यह तकिया कलामकब सें करनेलगा?" रितू दिदी नें एकाएक हि चौंकते हुए कहा___"यह तकिया कलाम तौ गुड़िया(निधी) कां हैं नं?"
"हाॅ दिदी। " मेरी ऑखों केँ सामने एकाएक हि निधी कां चेहरा घूम गय़ा___"हर बात मे यह बोल्ना उसकीआदत बन चुकी हैं औऱ पता हैं बहोत लाडली होँ गई हैं। अपनीहर बात मनवा लेती हैं वोँ। "
"हाॅ वोँ ऐसी हि थि। " रितू दिदी कहींखोई हुइ सि नज़रआईं, बोलि___"कैसी हैं अब वोँ?"
"सभीकोई अच्छे सें हें दिदी। " मैने कहा___"माॅ गुड़िया औऱ अभय चाचा सभी। "
"काश मे उन्हें देख पातीराज। " दिदी केँ चेहरे पऱ पीड़ा केँ भावभर आए___"गौरी चाची औऱ गुड़िया सें मुआफ़ी माॅग पाती मे। "
"ओफ्फो दिदी। " मैने बुरा सां मुह बनाते हुए कहा__"यह सभी आप् क्यूं कहरही हें? प्लीज़ यहसभी आप् अपने ज़हन सें निकाल दीजिए। अबइस बारे मे आप् स्वयं कों दुखी नहि करेंगी। अब चलिए वरना हम् लेट हौ जाएॅगे जाने मे। "
मेरीबाय सुनकर दिदी नें कुछ कहना चाहामगर मैने उनके होठों पर्र अपनी उॅगली रखकर उन्हें चुपकरा दिया औऱ उन्हें फ्रेश होने केँ लिएकह कर मे कमरे सें बाहर् आँ गय़ा। बाहर् आया तोँ मेरी नज़र दरवाजे केँ एक् साइड खड़ी नैना फूफी पर्र पड़ी। उनका चेहरा ऑसुओं सें तर थां। शायद उन्होंने हमारी सारी बातें सुनली थि। मुझे देखते हि उन्होंने जल्द सें अपनी साड़ी कां एक् छोर पकड़कर अपने ऑसुओं कों पोंछा। मे उन्हें यह करतेदेख वहीं पर्र खड़ा हौ गय़ा।
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दोस्तो एपसोड हाज़िर हैं,,,,,,,,,
आप् सबकी प्रतिक्रिया औऱ रिव्यू कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद जीतू भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया औऱ शानदार रिव्यू केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद रिशभ भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया औऱ शानदार रिव्यू केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं,,,,,, पेज नंबर314पर,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,, पेज नंबर314पर,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं,,,,,, पेज नंबर314पर,
बहोत बहोत धन्यवाद जी,,,,, आपकायह एहसान मे तौ यकीनन भूल हि जाऊॅगा मगर मेरीआने वाली पीढ़ियाॅ अवश्य याद रखेंगी।
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
दोस्तो, आप् सबके सामने एपसोड हाज़िर होँ चुका हैं। हलाॅकि मे अपनेफोन कि गड़बड़ी केँ कारण निर्धारित टाइम पऱ एपसोड नहि दे पाया थां। उसकेलिए एक् बारफिन सें मुआफ़ी चाहता हूॅ।
मे यहाॅ पर्र यह कहना चाहता हूॅ कि आप् सभी बहोत अच्छे यार हें मेरे। मैने देखा हैं कि वक़्त पर्र एपसोड नं मिलने सें बहोत सें रीडर्स राइटर कों भला बुरा कहने लगते हें याँ फिन वोँ अनाप शनाप बोलने लगते हें। मगर यहाॅ पर्र अभि तक मैनेऐसा कुछ भि नहि देखा। इसकीवजह यकीनन यह हैं कि आप् सभी मेरी मजबूरियों कों भली भाॅति समझते हें औऱ अपनेदिल मे मेरे प्रति प्रेम कि भावना रखते हें। यह मेरेलिए बहोत बड़ीबात हैं।
अंत मे यही कहूॅगा कि आप् सभीऐसे हि संग औऱ सहयोग देते रहें औऱ अपनेइस अदने सें यार पर्र थोडा सां प्रेम व स्नेह बरसाते रहें।
!! शुक्रिया !!
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,, पेज नंबर314पर,
Ab, life mai puch k too problems nahee aate h na.yeh bin bulaye aa jate h. bus ek request thi. plz. iss kahani ko complete jarur kijiega.
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
hmm। too biraj ko ptaa chl gya की bidhi की gunehgaad koun h.un charo की too biraj ne karyakarm krr देना hi thaa, पर तभी ritu ne call karke ushe roka। नहीं too un charo kaa क्या hotha biraj hi jane।
.hmm। ajay के ush admi kaa bi wohi dasha hoga अब, joh un charo हुआ h.joh bi hu, ritu और ush admi kaa fighting scene bohat achhe से dikhaya h apne।
। Oh। अब too dono bhay behen mil के,, suraj और उसके shathio के daddy logo kaa और ajay kaa बंद bajayenge। पर जब bi biraj apni didi से milta h, bus बात, बात पर dono bhay behen bachhe की prakaar rote rehte h। कोई na,, gum bhulane के liye sahara too mil gaye।
waise update mai एक, एक scene की itni badi details।
Btw brilliant update Shubham ji। keep it up।
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
Update was amazing superb fabulous fantastic bhay majaa aa gyaa bhut hi umda writing hain ap kee aur ap kee lekhni kee Jitni bi tarif kee jaye utni kam hai
Waah bhay gajab kaa update likha h apne majaa aa gyaa. Apne ek hi update mai pyaar, action, emotion or bhut kuch dikha diye. Aisi kabiliat bhut kam logo mai hoty h. Thanks a lot for a nice update.
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