♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
bhay last update was amazing and imotional, aesa lagta h की kuchh तो hone wala h wo aesa की sayad kisi ne expect नहीं किया hu bus एक बात thodi khatak rahi h की अगर ritu by mauka apne baap aur bhay के chungal mai red handed fas gai तो इस kaa क्या hoga aur moorti kaa character itna gir chuka h की sali ko apni beti tak pe tarash नहीं aa rah h yeh sali pehle paise की bhuki thi phir laudon aur अब khud की beti ko इस fuddi की agni mai jala krr रख krr देना chahti h viraj kis kis ko Sambalega। is kahani mai अगर कोई sabse बड़ा kasoorwar h too woh h moorti jisne bi kahani shuru से aur dhyaan से padi h wo samajh jayega bus एक request h की moorti की moth अब tak के sabhi Dushmanon से badtar honi चाहिए Kyuki sare fasad की jad yahi stri h। Thanks for update
Waiting for next update
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
दोस्तो, दोदिन अभि बहोत ज़्यादा ब्यस्त हूॅ, इस लिएभाग लिखने कां माकूल टाइम हि नहि मिल पाएगा। कल एपसोड कां केवल 10% हिस्सा हि लिख पायाहूॅ।
आप् सबसे गुज़ारिश हैं कि कृपया धैर्य रखें औऱ मुझे वक़्त दें। मे कोशिश करूॅगा कि आप् सबके सामने बहोत जल्द एक् मेगाभाग दे सकूॅ।
!! शुक्रिया !!
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 49 》
अब तक,,,,,,,
मार्केट केँ पासआते हि उसे दूसरी वाहन पऱ वोँ पुलिस वाले दिखे। उनमें सें एक् पुलिस वाले नें रितू कों बताया कि उसनेउस अधेड़ व्यक्ति कों दूसरी दवाइयाॅ खरीदकर दे दि हें। उसकीबात सुनकर रितूआगे बढ़ गई। उसके पीछे दूसरे पुलिस वाले भि अपनी व्हीकल मे चल पड़े। उनकी नज़र रितू कि जिप्सी पऱ थोडा सां फैली हुई उस ब्लैक कलर कि प्लास्टिक कि पन्नी पर्र पड़ी जिसके नीचे रितू नें उस लड़की कों छुपा दिया थां। लेकिन उन लोगों नें इस पर्र ज़्यादा ध्यान न् दिया। उनको अपनेआला अफसर कां आदेश थां कि इंस्पेक्टर रितू केँ आसपास हि रहना हैं औऱ उसकी किसी भि गतिविधी पर्र कोई प्रश्न जवाब नहि करना हैं।
रितू कि जिप्सी ऑधी तूफान बनी हल्दीपुर कि तरफ बढ़ीचली जारही थि। उसके पीछे हि दूसरी कार पर्र वोँ पुलिस वाले भि थें। रितू कों अंदेशा थां कि हल्दीपुर केँ पास वाले रास्तों पर्र कहीं उसका बाप याँ उसके व्यक्ति मिल न् जाएॅमगर हल्दीपुर केँ उसपुल तक तोँ कोई नहि मिला थां। पुल सें दाहिने साइड जिप्सी कों मोड़कर रितू फार्महाउस कि तरफबढ़ चली। कुछ दूरी पर्र आकर रितू नें जिप्सी कों रोंक दिया। कुछ हि पलों मे उसके पीछे वालीकार भि उसकेपास आकररुक गई।
"अब आप् सभी यहाॅ सें वापसलौट जाइये। " रितू नें एक् पुलिस वाले कि तरफदेख कर कहा___"आज कां काम इतना हि थां। अगर ज़रूरत पड़ी तोँ वायरलेस याँ मोबाइल द्वारा सूचित कर दिया जाएगा। "
"ओके मैडम। " एक् पुलिस वाले नें कहा___"जैसा आप् कहें। जय हिन्द। "
उन सबने रितू कों सैल्यूट किया औऱ फिन अपनीकार कों वापस मोड़कर वहाॅ सें चलेगए। उनके जाते हि रितू नें भि अपनी जिप्सी कों फार्महाउस कि तरफ बढ़ा दिया। आने वाला वक्त अपनी आस्तीन मे क्याँ छुपाकर लाने वाला थां यह किसी कों पता न् थां। "
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अबआगे,,,,,,,
उधर एक् तरफ!
एक् लम्बे चौड़े हाल केँ बीचोबीच एक् बड़ी सि टेबल केँ चारोतरफ कुर्सियाॅ लगी हुई थि। उनसब कुर्सियों पऱ इससमय कई सारे अजनबी चेहरे बैठेदिख रहे थें। सामने फ्रंट कि मुख्य कुर्सी खाली थि। हर आदमी केँ सामने मिनरल वाटर सें भरेहुए काॅच केँ ग्लास रखेहुए थें। लम्बे चौड़े हाल मे इससमय ब्लेड कि धार कि मानिन्द पैना सन्नाटा फैलाहुआ थां। वोँ सभी अजनबी चेहरे ऐसे थें जिन्हें देखकर हि प्रतीत हौ रहा थां कि यहसभी किसी न् किसी अपराध कि दुनियाॅ ताल्लुक अवश्य रखते हें। उन अजनबी चेहरों केँ बीच हि कुछऐसे भि चेहरे थें जौ शक्ल सूरत सें विदेशी नज़र आँ रहे थें।
"औऱ तौ सभीठीक हि हैं। " उनमें सें एक् नें हाल मे फैलेहुए सन्नाटे कों भेदते हुए कहा___"मगर ठाकुर साहब कां हमसेइस तरह इन्तज़ार करवाना बिलकुल भि पसन्द नहि आता। हर बारयही होता हैं कि हम् सभीसमय सें कान्फ्रेन्स हाल मे मीटिंग केँ लिए आँ जाते हें मगर ठाकुर साहब तोँ ठाकुर साहब हें। हरबार निर्धारित वक्त सें आधा घंटेलेट हि आते हें। "
"अब इसमें हम् क्याँ कर सकते हें कमलनाथ जी?" एक् अन्य ब्यक्ति नें मानो असहाय भाव सें कहा___"वोँ ठाकुर साहब हें। शायद हमसेइस तरह इन्तज़ार करवाने मे वोँ अपनीशान समझते हें। हलाॅकि ऐसा होना नहि चाहिए, क्योंकि यहाॅ पर्र कोई भि किसी सें कम नहि हैं। हम् सबको एक् दूसरे कां बराबर आदरव सम्मान करना चाहिए। मगरयह बात ठाकुर साहब सें कौनकहे?"
"यसयूआर अब्सोल्यूटली राइट मिस्टर पाटिल। " सहसा एक् विदेशी कह उठा___"हमको भि ठाकुर कां इसतरह वेट करवाना पसन्द नहि आता क्या बात है। वोँ क्याँ समझता हाय कि हम् लोगों कि कोई औकात नहि हायरे? अरे हम् चाहूॅ तौ अभि इसी वक़्त ठाकुर कों खरीद सकताहाय। बट हम् भि इसीलिए चुप रहताअरे कि तुम् सभी भि चुप रहताहाय राम। "
"इट्सओके मिस्टर लारेन। " पाटिल नें कहा___"यह आख़िरी बार हैं। आज ठाकुर सें हम् सभीइस बारे मे एक् संग चर्चा करेंगे औऱ उनसे कहेंगे कि हम् सबकीतरह वोँ भि वक्त पऱ मीटिंग हाल मे आया करें। इस तरह हमसेवेट करवाकर हमारी तौहीन करने कां उन्हें कोईहक़ नहि हैं। अगर आप् मेरीइस बात सें सहमत हें तौ प्लीज जवाब दीजिए। "
पाटिल कि इसबात पर्र सबने अपनी प्रतिक्रिया दि। जौ कि पाटिल कि बातों पर्र सहमति केँ रूप मे हि थि। कुछदेर औऱ वक़्त बीतने केँ बादतभी हाल मे अजय सिंह दाखिल हुआ औऱ मुख्य कुर्सी पर्र आकरबैठ गय़ा। उसने सबकीतरफ देखकर बड़े रौबीले अंदाज़ सें हैलो किया। उसकीइस हैलो कां जवाब सबनेइस तरह दिया जैसे बग़ैर मन केँ रहेहों। इसबात कों स्वयं अजय सिंह नें भि महसूस किया।
"साॅरी फ्रैण्ड्स हमेंआने मे ज़रादेर हौ गई। " अजय सिंह नें बनावटी खेद प्रकट करतेहुए कहा___"आई होप आप् सभीइस बात सें डिस्टर्ब नहि हुए होंगे। एनीवेज़.
"ठाकुर साहबदिस इजटूमच। " एक् अन्य ब्यक्ति कह उठा___"आप् हरबार ऐसा हि करते हें औऱ फिनबाद मे यहकह देते हें कि साॅरी फ्रैण्ड्स हमेंआने मे ज़रादेर होँ गई। आप् हरबार लेटआकर हम् सबकी तौहीन करते हें। हम् सभीआधा घंटे तक आपकेआने कां वेट करते रहते हें। आपको क्याँ लगता हैं कि हम् लोगों केँ पास दूसरा कोईकाम हि नहि हैं? हम् सभी भि अपने अपने कामों मे ब्यस्त रहते हें मगरसमय सें कहीं भि पहुॅचने केँ लिए वक्त पहले सें हि निकाल लेते हें। इस बिजनेस मे हम् सभी बराबर हें। यहाॅकोई छोटा बड़ा नहि हैं। हम् सबने आपकोमेन कुर्सी पऱ बैठने कां अधिकार अपनी खुशी सें दिया थां। मगर इसका मतलबयह नहि कि आप् उसका नाजायज़ मतलब निकाल लें। हम् सबने डिसाइड कर लिया हैं कि अगर आपका रवैया ऐसा हि रहा तोँ हम् सभी आपसे बिजनेस कां अपना अपना हिस्सा वापस लें लेंगे। दैट्स आल। "
उस ब्यक्ति कि यह सारी बातें सुनकर अजय सिंह अंदर हि अंदर बुरीतरह तिलमिला कररह गय़ा थां। यहसच थां कि हरबार वोँ इन सबसे इन्तज़ार करवाकर यही जताता थां कि उसके सामने इन लोगों कि कोई अहमियत नहि हैं। बल्कि वोँ इन सबसे अधिक अहमियत रखता हैं। आज तक इस बिजनेस सें जुड़े यहसभी लोग उसकीइस आदत पर्र कोई प्रश्न नहि खड़ा किये थें जिसकी वजह सें उसेयही लगतारहा थां कि यूसभी उसे बहोत अधिक इज्ज़त व अहमियत देते हें औऱ इसीलिए वोँ ऐसा करतारहा थां। मगरआज जैसेइन सबके धैर्य कां बाॅधटूट गय़ा थां। जिसका नतीजा इसरूप मे उसके सामने आया थां। उस व्यक्ति कि बातों सें उसकेअहं कों ज़बरदस्त चोंट पहुॅची मगर वोँ यहबात अच्छी तरह जानता थां कि इस बारे मे अगर उसनेकुछ उल्टा सीधा बोला तौ काम बिगड़ जाने मे लम्हा भर कि भि देर नहि लगेगी। इसलिए वोँ उस आदमी कि उनसब कड़वी बातों कों जज़्ब कर गय़ा थां।
"आईनो मिस्टर तेवतिया। " अजय सिंह नें कहा__"बट इस सबसे हमारा यह मतलब हर्गिज़ भि नहि हैं कि हम् आप् सबको अपने सें छोटा समझते हें। हम् सभी फ्रैण्ड्स हें औऱ हम् मे सें कोई छोटा बड़ा नहि हैं। हरबार हम् मीटिंग मे देर सें पहुॅचते हें इसका हमें यकीनन बेहद अफसोस होता हैं। मगर क्याँ करें होँ जाता हैं। मगर हमेंयह भि पता होता हैं कि आप् सभी हमारी इस ग़लती कों नज़रअंदाज़ कर देंगे। "
"इट्सओके ठाकुर साहब। " कमलनाथ नें कहा__"बट ध्यान रखियेगा कि अगलीबार सें ऐसा नं होँ। कभी कभार कि बात हौ तोँ समझ मे आता हैं मगरहर बारऐसा हौ तोँ मूड ख़राब होना स्वाभाविक बात हैं। "
"यस ऑफकोर्स मिस्टर कमलनाथ। " अजय सिंह एक् बारफिन गुस्से औऱ अपमान कां घूॅट पीकर बोला__"अब अगर आप् सबकी इजाज़त होँ तोँ काम कि बात करें?"
"जी बिलकुल। " पाटिल नें कहा___"
उसके पहले हम् यह जानना चाहते हें कि वक़्त सें पहलेइस तरह अचानक मीटिंग रखने कि क्याँ वजह थि?"
"आप् सबको तौ इसबात कां पता हि हैं कि मौजूदा समय मे हमारे हालात बिलकुल भि ठीक नहि हें। " अजय सिंह नें बेबसभाव सें कहा___"पिछले कुछ वक़्त सें हमारे संग बेहद गंभीर औऱ बेहद नुकसानदाई घटनाएॅ घटरही हें। उन घटनाओं केँ पीछेकौन हैं यह भि हम् पतालगा चुके हें। इसलिए अब हम् चाहते हें कि आप् सभी हमारे इस बुरे टाइम मे हमारा संगदें। "
"वैसे तोँ आप् स्वयं हि सक्षम हें ठाकुर साहब। " पाटिल नें कहा___"लेकिन इसकेबाद भि आप् हम् सबसे सहायता कि आशा रखते हें तौ मे रेडीहूॅ। आख़िर हम् सभी एक् हि तौ हें। हरतरह कि मसीबत व तकलीफ़ कां एक् संगमिल कर मुकाबला करेंगे तोँ हरजंग मे हमारी फतह होगी। "
"हमें भि आपकेइन मौजूदा हालातों कां पता हैं ठाकुर साहब। " एक् अन्य ब्यक्ति नें कहा___"इस लिए हम् सभी आपकेसंग हें। आप् हुकुम दें कि हमें क्याँ करना होगा?"
"आप् सभी हमारा संग देने केँ लिए सजधजकर हें इससे बड़ीबात व खुशी औऱ क्याँ होगीभला? रहीबात आपकेकुछ करने कि तौ आप् बस हमारे संग हि बने रहेंकुछ वक़्त केँ लिए याँ फिन अपनेकुछ ऐसे व्यक्ति हमें दीजिए जोँ हरतरह केँ फन मे माहिर हों। "
"जैसी आपकी ख़्वाहिश ठाकुर साहब। " कमलनाथ नें कहा___"हम् सभी आपकेसंग हें औऱ हमारे ऐसे व्यक्ति भि आपकेपास आँ जाएॅगे जौ हरतरह केँ फन मे माहिर हें। अब सें आपकी तकलीफ़ हमारी तकलीफ़ हैं। क्यूं फ्रैण्ड्स आप् सभी क्याँ कहते हें??"
कमलनाथ केँ आखिरी वाक्य पऱ सबने अपनी प्रतिक्रिया सहमति केँ रूप मे दि। यहसभी देखकर अजय सिंह अंदर हि अंदर बेहदखुश हौ गय़ा थां।
"मिस्टर सिंह। " सहसाइस बीच एक् विदेशी नें कहा___"पिछली डील अभि तक कम्प्लीट नहि हुआ। क्याँ हम् जान सकताओह कि इतना डिले करने कां तुम्हारा क्याँ मतलबओह? बात थोड़ी बहोत कि होती तौ हम् उसकोभूल भि सकता थां बटएजयू नो वोँ सारी चीज़ें लाखों करोड़ों मे ओह। सोहाउ कैनआई फारगेट?"
"हम् जानते हें मिस्टर लाॅरेन। " अजय सिंह नें बेचैनी सें पहलू बदला___"कि वोँ सभी करोड़ों कां सामान हैं। मगर मौजूदा वक़्त मे हम् ऐसी स्थित मे नहि हें कि आपका रुपया आपकोदे सकें। इसकेलिए आपकोतब तक रुकना पड़ेगा जब तक कि हमारे सिर पऱ सें यह मुसीबत औऱ यह तकलीफ़ न् हटजाए। प्लीज़ ट्राई टू अण्डरस्टैण्ड मिस्टर लाॅरेन। "
"ओखे। " लाॅरेन नें कहा___"नो प्राब्लेम हम् तुम्हारी हरतरह सें सहायता करेगा। बट सारी प्राब्लेम फिनिश होने केँ बाद तुम् हमारा पूरा रुपया देगा। इस बात कां प्रामिस करना पड़ेगा तुमको। "
"मिस्टर लाॅरेन। " सहसा कमलनाथ नें कहा___"यह आप् कैसीबात कररहे हें? आप् जानते हें कि ठाकुर साहब केँ पासइस टाइम कितनी गंभीर समस्याएॅ हें इसकेबाद भि आप् केवल अपने मतलब कि बातकर रहे हें। जबकि आपको करना तौ यह चाहिए थां कि आप् सभीकुछ भूलकर केवल ठाकुर साहब कों उनकी समस्याओं सें बाहर् निकालें। "
"तोँ हमनेकब मना कियाइस बात सें मिस्टर कमलनाथ?" लाॅरेन नें कहा___"हम् कहओरहा हैं कि हम् हरतरह सें इनकी सहायता करेगा। "
"हाॅमगर यहाॅ पऱ आपको अपने पैसों कि बात करना उचित नहि हैं न्। " कमलनाथ नें कहा___"आपको यह भि तोँ सोचना चाहिए कि रुपया केवल आपका हि बस बकाया नहि हैं ठाकुर साहब केँ पास, हम् सबका भि हैं। मगर हमने तौ इनसे पैसों केँ बारे मे कोईबात नहि कि। "
"ओखेआयम साॅरी। " लाॅरेन नें बेचैनी सें पहलू बदलते हुए कहा___"सो अब बताइये क्याँ करना हैं हम् लोगो कों?"
"यह तोँ ठाकुर साहब हि बताएॅगे। " कमलनाथ नें कहा__"कि हम् सबको क्याँ करना होगा?"
"हमने आप् सबको पहले हि बता दिया हैं कि आप् सभी अपनेकुछ ऐसे व्यक्ति हमें दीजिए जोँ हरतरह केँ काम मे माहिर हों। "अजय सिंह नें कहा___"उसके बाद हम् स्वयं हि तय करेंगे कि हमेंउन आदमियों सें क्याँ औऱ केसेकाम लेना हैं?"
"ठीक हैं ठाकुर साहब। " पाटिल नें कहा___"हमारे पास जौ भि ऐसे व्यक्ति हें। उन सबको आपकेपास भेज देंगे। "
"ओह थैक्यू सोमचटू आलऑफयू डियर फ्रैण्ड्स। " अजय सिंह नें खुश होकर कहा___"औऱ हाॅ, हम् आप् सबसे वादा करते हें कि इस सबसे निपट लेने केँ बाद हम् बहोत जल्द आप् सबके पैसों कां हिसाब पुस्तक कर देंगे। "
अजय सिंह कि इसबात केँ संग हि मीटिंग समाप्त हौ गई। सबनेअजय सिंह कों अपने व्यक्ति भेजने कां कहा औऱ फिनसभी एक् एक् करके मीटिंग हाल सें बाहर् कि तरफचले गए। सबके जाने केँ बादअजय सिंह भि बाहर् कि तरफ निकल गय़ा। बाहर् पार्किंग मे खड़ी अपनी वाहन मे बैठकर अजय सिंहघऱ कि तरफ निकल गय़ा।
कुछ हि वक्त मे अजय सिंह हवेली पहुॅच गय़ा। अंदर ड्राइंगरूम मे रखे सोफों पर्र प्रतिमा औऱ शिवा बैठे थें। अजय सिंह भि वहींरखे एक् सोफे पऱ बैठ गय़ा। उसने प्रतिमा कों गरमचाय बनाने कां कहा तौ प्रतिमा किचन कि तरफबढ़ गई। जबकि अजय सिंह नें गले पर्र कसीटाई कों ढीलाकर धीरे-धीरे सोफे कि पिछली पुश्त सें पीठ टिकाकर करीब-करीब लेट सां गय़ा।
शिवा कों समझ नं आया कि अपने बाप सें बातों कां सिलसिला केसे औऱ कहाॅ सें शुरुआत करे?ऐसा कदाचित इसलिए थां क्योंकि आज सारादिन उसने अपनीमाॅ केँ संगमौज मस्ती कि थि। इसबात केँ कारण कहीं न् कहीं हल्की सि झिझक उसके अंदर मौजूद थि।
"आप् इतनालेट केसे होँ गएडैड?" आख़िर शिवा नें बात शुरुआत कर हि दि, बोला___"आपने तौ कहा थां कि जल्द आँ रहाहूॅ?"
"एक् ज़रूरी मीटिंग मे ब्यस्त हौ गय़ा थां बेटे। "अजय सिंह नें उसी हालत मे कहा___"कल सें हमारे पासकुछ ऐसे व्यक्ति होंगे जोँ हरतरह केँ काम मे माहिर होंगे। अब मे भि देखूॅगा कि वोँ हरामज़ादा विराज औऱ रितू केसेउन आदमियों कों ठिकाने लगाते हें?"
"ऐसे वोँ कौन सें व्यक्ति हें डैड?" शिवा नें नाँ समझने वालेभाव सें कहा___"क्याँ आप् अभि भि ऐसे किन्हीं आदमियों पर्र हि भरोसा करेंगे? जबकि पालतू आदमियों कां क्याँ हस्रहुआ हैं यह आपको बताने कि ज़रूरत नहि हैं। "
"हमारे व्यक्ति दिमाग़ सें पूरीतरह पैदल थें बेटे। "अजय सिंह नें कहा___"वोँ सभी अपने शारीरिक बल कों महत्व देते थें तभी तौ मातखा गए। उन्होंने यहकभी सोचा हि नहि कि शरीरिक बल सें कहीं अधिक दिमाग़ी बल कारगर होता हैं। ख़ैर, अब जौ व्यक्ति यहाॅ आएॅगे वोँ सभी खलीफ़ा लोग होंगे। जोँ हरसमय हरतरह केँ ख़तरे वाले कामों कों हि अंजाम देते हें। दूसरी बातयह हैं कि रितू एक् आम लड़की नहि हैं जिसेकोई भि ऐरा गैरा ब्यक्ति आसानी सें पकड़ लेगा, बल्कि वोँ एक् पुलिस वाली भि हैं। जिसके पास सारा पुलिस डिपार्टमेन्ट भि हैं। ऐसे मे अगर हम् स्वयं उस पऱ हाॅथ डालेंगे तोँ वोँ हमें कानून कि चपेट मे डाल सकती हैं। इसलिए हमने सोचा हैं कि हम् पहलेऐसे आदमियों केँ द्वारा उसे पकड़ लें कि जिनसे वोँ आसानी सें मुकाबला भि न् करसके। मुकाबले सें मेरा मतलबयह हैं कि मेरे वोँ व्यक्ति उसेऐसा घेराबना कर पकड़ेंगे जिसके बारे मे उसे अंदेशा तक न् होँ पाएगा। "
"ओहआई सि। " शिवा कों सारीबात जैसेसमझ आँ गई थि, बोला___"यह सही रणनीत हैं डैड। अगर वोँ सभी व्यक्ति वैसे हि हरकाम मे माहिर हें जैसा कि आप् बतारहे हें तौ फिन यकीनन यहसही क़दम हैं। "
अभि अजय सिंहकुछ बोलने हि वाला थां कि तभी किचेन सें आती हुईँ प्रतिमा हाॅथ मे गरमचाय कां ट्रेलिए वहाॅ पऱ आँ गई। उसने दोनो बाप बेटे कों एक् एक् कपगरम चाय पकड़ाई औऱ एक् कप स्वयं लेकर वहीं एक् सोफे पर्र बैठ गई।
"कौन सें आदमियों कि बातचल रही हैं अजय?" प्रतिमा नें सोफे पऱ बैठने केँ संग हि पूछा थां। उसके पूछने पर्र अजय सिंह नें उसे भि वहीसभी बता दिया जोँ अभि उसने शिवा कों बताया थां। सारीबात सुनने केँ बाद प्रतिमा कुछदेर गंभीरता सें सोचती रही।
"तौ अब तुमने बाहर् सें व्यक्ति मॅगवाए हें। " फिन प्रतिमा नें तिरछी नज़र सें देखते हुए कहा___"औऱ उन पऱ भरोसा भि हैं तुम्हें कि वोँ तुम्हें इसबार नाकामी कां नहि बल्कि फतह कां स्वाद चखाएॅगे?"
"बिलकुल। " अजय सिंह नें स्पष्ट भाव सें कहा___"यह सभीऐसे व्यक्ति हें जिनका वास्ता अपराध कि हक़ीक़त दुनियाॅ सें हैं औऱ यहसभी उस अपराध कि दुनियाॅ केँ सफल खिलाड़ी हें। "
"चलो इनका कारनामा भि देख लेते हें। " प्रतिमा नें सहसा गहरी साॅस ली___"वैसे इसबात पर्र भि ध्यान देना कि वक़्त हर वक़्त इसीबस केँ लिए नहि रहता। "
"क्य मतलब??"अजय सिंह चकराया।
"मतलबयह कि हरबार एक् जैसी हि चाल चलना एक् सफल खिलाड़ी कि पहचान नहि होती। " प्रतिमा नें समझाने वालेभाव सें कहा__"ऐसे मे सामने वाले खिलाड़ी केँ दिमाग़ मे यह मैसेज जाता हैं कि उसका प्रतिद्वंदी कमज़ोर हैं जोँ मात्र एक् हि तरह कि चाल चलना जानता हैं औऱ उसकीयह बेवकूफी भि कि उसी एक् तरह कि चाल सें वो खेल कों जीत लेने कि उम्मीद भि करता हैं। इसलिए एक् अच्छे खिलाड़ी कों चाहिए कि बीचबीच मे अपनीचाल कों बदल भि लेना चाहिए। "
"बात तौ तुम्हारी ठीक हैं डियर। "अजय सिंह नें गरमचाय कां खालीकप सामने काॅच कि टेबल पर्र रखतेहुए बोला___"मगर इसकोइस एंगल सें भि तौ सोचकर देखो ज़रा। मतलबयह कि सामने वाले खिलाड़ी केँ दिमाग़ मे हम् जानबूझ करयह मैसेज डालरहे हें कि हमारे पास केवल एक् हि तरह कि चाल हैं। उसेऐसा समझने दो। जबकि हम् सही टाइमआने पर्र अपनीचाल कों बदलकर उसेऐसे मात देंगे कि उसे इसकी उम्मीद भि न् होगी हमसे। जिसे वोँ हमारी कमज़ोरी समझेगा वोँ दरअसल हमारी चाल कां हि एक् हिस्सा होगा। "
"ओहो क्याँ बात हैं डियर हस्बैण्ड। " प्रतिमा नें सहसा मुस्कुराते हुए कहा___"क्याँ तर्क निकाला हैं। यह भि ठीक हैं। चल जाएगा। मगर सबसे ज़्यादा ध्यान देने वालीबात यह हैं कि हमारे पास वक़्त नहि हैं टाइम बर्बाद करने केँ लिए भि। सोचने वालीबात हैं कि हम् अब भि वहीं हें जहाॅ पऱ थें जबकि हमारा दुश्मन बहोत कुछ करके यहाॅ निकल भि चुका हैं। हाॅअजय, वोँ रंडी कां जना विराज अब यहाॅ नहि होगा। बल्कि जिसकाम सें वोँ यहाॅआया थां उसकाम कों करके वोँ वापस मुम्बई चला गय़ा होगा। आख़िर इसबात कां एहसास तौ उसे भि हैं कि उसने हमारे इतने सारे आदमियों कां क्रियाकर्म करके गायब किया हैं जिसका अंजाम किसी भि सूरत मे उसकेहित मे नहि होगा। इस लिए अपनाकाम पूरा करने केँ बाद वोँ यहाॅ पर्र एक् समय भि रुकना गवाॅरा नहि करेगा। "
"माॅमठीक कहरही हें डैड। " सहसाइस बीच शिवा नें भि अपना पक्ष रखा___"वोँ यकीनन यहाॅ सें चला गय़ा होगा। भला ऐसे ख़तरे केँ बीच रुकने कि कहाॅ कि समझदारी। होगी?अब यह भि स्पष्ट हौ गय़ा हैं कि उसकेबाद यहाॅ मात्र रितू दिदी हि रह गई हें। "
"रितू हि बस नहि हैं बेटे। "अजय सिंह नें कहा___"बल्कि उसकेसंग तुम्हारी नैना फूफी भि हैं। "
"क्याऽऽ???" अजय सिंह कि इसबात सें शिवा औऱ प्रतिमा दोनो हि बुरीतरह चौंके थें, जबकि प्रतिमा नें कहा___"तुम् यह केसेकह सकते हौ अजय? नैना तोँ वापस अपने ससुराल चली गई थि न् उसदिन?"
"वोँ ससुराल नहि। " अजय सिंह नें कहा___"बल्कि रितू केँ संग कहीं औऱ गई थि। नैना नें तोँ ससुराल जाने कां मात्र बहाने बनाया थां जबकि हक़ीक़त यह थि कि रितूउसे स्वयं यहाॅ सें निकाल कर लें गई थि। यहसभी रितू कां हि कियाधरा थां। "
"मगरयह सभी तुम्हें केसेपता अजय?" प्रतिमा नें चकितभाव सें कहा___"औऱ रितू नें भलाऐसा क्यूं किया होगा?"
"उस दिन नैनाजब रितू केँ संग गई तोँ यहसच हैं कि एक् भइया होने केँ नाते मुझे खुशी हुई थि कि चलो अच्छा हुआ कि नैना कों उसके ससुराल वालों नें बुलाया हैं। " अजय सिंहकह रहा थां___"मगर जबदोदिन बाद भि नैना कां कोई मोबाइल नहि आया तौ मैने सोचा कि मे हि मोबाइल करकेपता करलूॅ कि वहाॅसभी ठीक तौ हैं न्? इसलिए मैने नैना केँ ससुराल मे नैना कों मोबाइल लगाया मगर नैना कां मोबाइल बंदबता रहा थां। कईबार केँ लगाने पऱ भि जब नैना कां मोबाइल बंद हि बताता रहा तौ मैने नैना केँ हस्बैण्ड कों मोबाइल लगाया औऱ उनसे पूछा नैना केँ बारे मे तौ उसनेसाफ साफ कठोरता सें मनाकर दिया कि उसके यहाॅ नैना नहि आई औऱ नां हि उसका नैना सें कोई लेना देना हैं अब। नैना केँ पति कि यहबात सुनकर मेरा दिमाग़ घूम गय़ा। मुझे समझते देर न् लगी कि नैना कों हवेली सें निकाल कर रितू हि लेँ गई हैं। उसे शायदयह बात कहीं सें पताचल गई होगी कि हम् दोनो बाप बेटे कि गंदी नज़र नैना पर्र हैं। इसलिए रितू नें उसेइस हवेली सें बड़ी चालाकी सें निकाल लिया औऱ अपनी फूफी कों किसीऐसी स्थान पर्र सुरक्षित रखने कां सोचा होगा जहाॅ पऱ हम् आसानी सें पहुॅच भि न् सकें। "
"हे ईश्वर! इतना बड़ाखेल खेल गई रितू। " प्रतिमा नें हैरानी सें कहा___"अगर यहबात सच हैं तोँ यकीनन हमारी बेटी नें हमें उल्लू बना दिया हैं। उसने बड़ी सफाई औऱ चतुराई सें आपकेमुह सें आपकामन पसन्द निवाला छीन लिया हैं जिसका हमें एहसास तक नहि हौ सका। "
"जब हमारी बेटी नें हि हमें धोखादे दिया तौ कोई क्याँ कर सकता हैं?" अजय सिंह नें कहा___"मगर अब जौ हम् उसकेसंग करेंगे उसकी उसने कल्पना भि न् कि होगी। हम् उसकेमाॅ बाप हें, हमनेउसे बचपन सें लेकरअब तक क्याँ कुछ नहि दिया। उसनेजिस चीज़ कि आरज़ू कि हमनेसमय भर मे उस चीज़ कों लाकर उसके क़दमों मे डाल दिया। मगर उसने हमारे लाड प्रेम कां यह सिला दिया हमें। इतने सालों कां लाड प्रेम उसकेलिए कोई मायने नहि रखता। देख लो प्रतिमा, यह हैं तुम्हारी बेटी कां अपनेमाॅ बाप केँ प्रति प्यार औऱ लगाव। जौ अपने बाप केँ दुश्मन केँ संगमिल कर स्वयं अपने हि पैरेंट्स केँ लिएमौत कां सामान जुटाने पऱ तुली हुइ हैं। इसहाल मे अगर तुम् मुझसे यह बोलो कि मे उसकीइस धृष्टता कों क्षमा करदूॅ तोँ ऐसा हर्गिज़ नहि होँ सकताअब। तुम्हारी बेटी नें अपने हि बाप केँ हाथों अबऐसी मौत कों चुन लिया हैं जिसके दर्द कां किसी कों एहसास नहि हौ सकता। "
"पहले मुझे भि लगता थां अजय कि वोँ आख़िर हमारी बेटी हैं। " प्रतिमा नें कठोरता सें कहा___"मगर उसकेइस कृत्य सें मुझे भि उस पऱ अब बेहद क्रोध आयाहुआ हैं। मे जानती हूॅ कि वोँ अबदूध पीती बच्ची नहि रही हैं जिसके कारणउसे हर चीज़ कां पाठ पढ़ाना पड़ेगा। बल्कि अब वोँ बड़ी होँ गई हैं। जिसे अपने औऱ अपनों केँ अच्छे बुरे कां बखूबी ख़याल हैं। इसकेबाद भि वोँ अपने हि पैरेंट्स कां बुरा चाहने वालाकाम किया हैं तोँ अब मे भि यही कहूॅगी कि उसे उसकेइस अपराध कि शख्त सें शख्त सज़ा मिले। दैट्स आल। "
कुछ देर औऱ तीनो केँ बीच बातें होती रहीं उसकेबाद तीनों नें रात कां खानां खाया औऱ सोने केँ लिएरूम मे चलेगए। इसबात सें अंजान कि आने वाली सुभह उनकेलिए क्याँ धमाका करने वाली हैं????
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रितू कि जिप्सी फार्महाउस पहुॅची।
लोहे वालेगेट केँ पास हि शंकर औऱ हरिया काका बंदूख लिए खड़े थें। रितू कि जिप्सी कों देखते हि दोनो नें गेटखोल दिया। गेट खुलते हि रितू नें जिप्सी कि गेट केँ अंदर बढ़ा दिया। कुछ हि समय मे रितू कि जिप्सी पोर्च मे जाकर रुकी। जिप्सी सें उतरकर रितू नें हरिया काका कों आवाज़ देकर बुलाया। हरिया केँ आते हि रितू नें उससे जिप्सी केँ पीछे बड़ी सि प्वालीथिन केँ नीचे ढॅकी मंत्री कि बेटी कों उठाकर तहखाने मे लें जाने कों कहा। उससेयह भि कहा कि तहखाने मे उसे अच्छी तरह बाॅधकर हि रखे।
रितू केँ कहने पऱ हरिया नें वैसा हि किया। आज एक् लड़की कों इसतरह तहखाने मे लेँ आतेदेख हरिया काका अंदर हि अंदर बेहदखुश होँ गय़ा थां। लड़की कों देखकर उसकेमन मे ढेर सारे लड्डू फूटरहे थें। बहुतदिन सें लड़की गाॅडमार मारकर वोँ अब उकता सां गय़ा थां। अबउसे एक् फ्रेश माल कि ज़रूरत महसूस हौ रही थि। बिंदिया कों अधिक सेक्स करना मनपसंद नहि थां इसलिए हरिया कों वो रोजरोज अपनेपास नहि आने देती थि। जिसकी वजह सें हरिया उससेखूब नाराज़ होँ जाया करता थां। मगरकर भि क्याँ सकता थां??
मन मे ढेर सारे खुशी केँ लड्डू फोड़े वो लड़की कों तहखाने मे लेँ जाकरउसे वहीं तहखाने केँ फर्स पऱ लेटा दिया। लड़की अभि भि बेहोश हि थि। तहखाने मे रस्सियों सें बॅधे वोँ चारो असहाय अवस्था मे करीबझूल सें रहे थें। उन चारों कि हालतऐसी होँ गई थि कि पहचान मे नहि आँ रहे थें। बदन पऱ एक् एक् कच्छा थां उन चारों केँ औऱ कुछ नहि। इस वक़्त चारो केँ सिर नीचे कि तरफ झुकेहुए थें। उनमें इतनी भि हिम्मत नहि थि कि सिरउठा कर सामने कि तरफदेख भि सकें कि कौन किसे लेकरआया हैं? हरिया काका नें एक् नज़रउन चारों पर्र डाली उसकेबाद वोँ लड़की कि तरफ एक् बार देखने केँ बाद तहखाने सें बाहर् कि तरफचला गय़ा। कुछदेर मे जब वोँ आया तौ उसके दोनो हाॅथ मे एक् लकड़ी कि कुर्सी थि।
लकड़ी कि कुर्सी कों तहखाने मे एक् तरफरख कर वोँ पलटा औऱ फिन लड़कीउठा करउस कुर्सी पर्र बैठा दिया। उसने लड़की केँ दोनो हाथों कों कुर्सी केँ दोनो साइड एक् एक् करके रस्सी सें बाॅध दिया। उसकेबाद उसके पैरों कों भि नीचे कुर्सी केँ दोनो पावों पर्र एक् एक् कर बाॅध दिया। लड़की केँ झुकेहुए सिर कों ऊपरउठा कर उसने कुर्सी कि पिछली पुश्त सें टिका दिया। कुछ देर तक हरिया काकाउस लड़की कों ललचाई नज़रों सें देखता रहा उसकेबाद वोँ तहखाने सें बाहर् आँ गय़ा। तहखाने कां गेटबंद कर वोँ बाहर् गेट केँ पास खड़े शंकर केँ लगभग आँ गय़ा।
उधर, मंत्री कि बेटी कों हरिया केँ हवाले करने केँ बाद रितू अंदर अपने कमरे कि तरफबढ़ गई। कमरे मे आकर उसने अपनी वर्दी कों उतारा औऱ बाथरूम मे घुस गई। जब वो फ्रेश होकर बाहर् आई तोँ कमरे मे नैना फूफी कों देखकर वो चौंकी। दरअसल इस वक़्त वो केवल एक् हल्के पिंककलर केँ टाॅवेल मे थि।
बाॅथरूम कां दरवाजा खुलने कि आवाज़ सें बेड पर्र बैठी नैना कां ध्यान उसतरफ गय़ा तोँ रितू कों केवल टाॅवेल मे देखकर वो हौले सें मुस्कुराई। उसकेयूॅ मुस्कुराने सें रितू केँ चेहरे पऱ अनायास हि लाज औऱ हया कि सुर्खी फैल गई। होठों पर्र हल्की मुस्कान केँ संग हि उसकी नज़रें झुकती चलीगईं। रितू कां इसतरह शरमाना नैना कों बहुत अच्छा लगा। उसे पता थां कि उसकीयह भतीजी भले हि ऊपर सें कितनी हि कठोर हौ लेकिन अंदर सें वो एक् शुद्ध भारतीय लड़की हैं जौ ऐसी परिस्थिति मे शरमाना भि जानती हैं।
"चल मुझसे शरमाने कि ज़रूरत नहि हैं रितू। " नैना नें मुस्कुराते हुए कहा___"तूँ आहिस्ता अपने कपड़े पहन लेँ। फिन हम् बातें करेंगे। "
"लज्जा तौ आएगी हि फूफी। " रितू नें इजीफील करने केँ बाद हि हौले सें मुस्कुराते हुए कहा___"मे इसतरह पहलेकभी भि किसी केँ सामने नहि आई। भले हि वोँ मेरेघऱ कां हि कोई सदस्य होँ। "
"हाॅ जानती हूॅ मे। " नैना नें कहा___"पऱ इतना तौ आजकलआम बात हैं मेरी बच्ची। सोफील इजी एण्ड कम्फर्टेबल। "
नैना कि इसबात सें रितूबस मुस्कुराई औऱ फिनपास हि एक् साइडरखी आलमारी सें उसने अपने कपड़े निकाले औऱ फिन वापस बाथरूम मे घुस गई। यहदेख कर नैना एक् बार पुनः मुस्कुरा उठी।
थोड़ी देरबाद रितूजब बाथरूम सें बाहर् आई तौ इसबार उसके हसीन सें जिस्म पऱ भारतीय लड़कियों कां शुद्ध सलवार सूट थां औऱ सीने पऱ दुपट्टा। वोँ इन कपड़ों मे बहोत हि हसीनलग रही थि। नैना नें उसे गहरी नज़र सें एक् बारऊपर सें नीचे तक देखाफिन बेड सें उठकर रितू केँ पासआई औऱ रितू कां सिर पकड़कर अपनीतरफ किया औऱ उसके माथे पर्र हल्के चूम लिया।
"बहोत हसीनलग रही हैं मेरी बच्ची। " फिन नैना नें मुस्कुरा कर कहा___"किसी कि नज़र नं लगे। भगवान हरबला सें दूररखे तुम्हें। "
"आप् भि नं फूफी। " रितू नें हॅसते हुए कहा___"ख़ैर छोड़िये यह बताइये आपको यहाॅ अच्छा तौ लगता हैं नं? कहींऐसा तोँ नहि कि आप् यहाॅ पऱ इजीफील नहि करती हें औऱ स्वयं कों यहाॅ मजबूरीवश रहने कां सोचती हें?"
"अरे नहि रितू। " नैना नें रितू कां हाॅथ पकड़कर उसेबेड पऱ बैठाने केँ बाद स्वयं भि बैठते हुए कहा___"यहाॅ मुझे बहोत अच्छा लगता हैं। हर मुसीबत हर तकलीफ़ सें दूरहूॅ यहाॅ। यहाॅ शान्त वसाफ वातावरण मन कों बेहदचैन देता हैं। यहाॅ बिंदिया भौजी हें औऱ तुँ हैं बस इससे अधिक औऱ क्याँ चाहिए? पिछले कुछ दिनों मे अपनेकुछ अज़ीज़ों सें भि मिल लिया, ऐसा लगा जैसेफिन सें इसघऱ मे वही पुरानां वालादौर लौटआया हैं। "
"चिन्ता मत कीजिए फूफी। " रितू नें कहा___"पुरानां वाला वक़्त फिन सें आएगा। फिन सें पहले जैसी हि खुशियाॅ हमारे बीच रक्श करेंगी। बसइन खुशियों कों बरबाद करने वालों कां एक् बार किस्सा ख़त्म होँ जाए। उसकेबाद फिन सें वही हमारा वही संसार होगामगर एक् नये संसार केँ रूप मे। जिसमें सबकेबीच मात्र बेपनाह प्रेम होगा। जहाॅ किसी घृणा अथवा किसी प्रकार कि नफ़रत केँ लिएकोई जगहहीं नहि होगा। "
"क्याँ सच मे तूने अपने माता पिता केँ लिए उनका अंजाम बुरा हि सोचाहुआ हैं?" नैना नें पूछा___"क्याँ ऐसा नहि हौ सकता कि उन्हें उनके कर्मों कि सज़ा भि मिलजाए औऱ वोँ हमारे संग भि रहें एक् अच्छे इंसानों कि तरह?"
"यह असंभव हैं फूफी। " रितू नें कठोरता सें कहा__"जौ इंसान इतना अधिक अपनेसोच औऱ विचार सें गिरजाए कि वोँ अपनी हि औलाद केँ बारे मे इतना गंदा करने कां सोच डाले उससे भविष्य मे अच्छाई कि उम्मीद हर्गिज़ नहि करनी चाहिए। दूसरी बात, भले हि भगवान उनके अपराधों केँ लिए उन्हें क्षमा करदेमगर मे किसी सूरत पर्र उन्हें क्षमा नहि कर सकती। उन्होंने माफ़ी केँ लिए कहीं पऱ भि कोई मार्ग नहि छोंड़ा हैं। उन्होंने हर रिश्ते केँ लिए मात्र गंदा सोचा हैं औऱ गंदा किया हैं। उन्होने अपने स्वार्थ केँ लिए अपने देवता जैसे भइया कि हत्या कि। अपनी बेहन सामान छोटे भइया कि पत्नि पर्र बुरी नज़र डाली। सबसे बड़ीबात तौ उन्होंने यह कि कि अपने हि बेटे केँ संग अपनी पत्नि कों उसकाम मे शामिल कियाजिस काम कों किसी भि जाति धर्म मे उचित नहि माना जाता बल्कि सबसे ऊॅचे दर्ज़े कां पाप माना जाता हैं। ऐसे इंसानों कों माफ़ी केसेमिल सकती हैं फूफी? नहि हर्गिज़ नहि। नां तोँ मे क्षमा करने वालीहूॅ औऱ नाँ हि मेरा भइयाराज उन घटिया लोगों कों क्षमा करेगा। एक् लम्हा केँ लिएअगर ऐसा हौ जाए कि राज उन्हें क्षमा भि करदेमगर मे.मे नहि क्षमा कर सकती। हाॅ फूफी.मेरे अंदर उनके प्रति इतना ज़हर औऱ इतनी नफ़रत भर चुकी हैं कि अबयह उनकीमौ सें हि दूर होगी। मुझेदुख इसबात कां नहि होगा कि मेरेमाॅ बाप दुनियाॅ सें चलेगए बल्कि मरतेदम तक इसबात कां मलाल रहेगा कि ऐसे गंदे इंसानों कि औलादबना कर भगवान नें मुझेइस धरती पऱ भेज दिया थां। "
रितू कि इन बातों सें नैना चकितभाव सें देखती रह गई उसे। उसे एहसास थां कि रितू केँ अंदरइस टाइमकिस तरह कि भावनाओं कां चक्रवात चालू थां जिसके तहत वोँ इसतरह अपने हि माॅ बाप केँ लिएऐसा बोलरही थि। नैना स्वयं भि यही समझती थि कि रितू अपनी स्थान परीतरह सही हैं। ऐसे इंसान केँ मर जाने कां कोईदुख याँ संताप नहि होँ सकता।
"माॅ बाप तौ वोँ होते हें फूफी जौ अपने बच्चों कों अच्छी शिक्षा देते हें। " रितू दुखीभाव सें कहेजा रही थि__"बाल्य अवस्था सें हि अपने बच्चों केँ अंदर अच्छे संस्कार डालते हें। सबके प्रति आदरव सम्मान करने कि भावना केँ बीज बोते हें। सबकेलिए अच्छा सोचने कि सीख देते हें। कभी किसी केँ बारे मे बुरा नं सोचने कां ज्ञान देते हें। मगर मेरेमाॅ बाप नें तौ अपने तीनों बच्चों कों बचपन सें मात्र यहीपाठ पढ़ाया थां कि हवेली केँ अंदर रहने वालाहर ब्यक्ति बुरा हैं। इनसे ज़्यादा बातमत करना औऱ नां हि इन्हें अपनेपास आने देना। कहते हें इंसान वही देता हैं जौ उसकेपास होता हैं। सच हि तोँ हैं फूफी, मेरेमाॅ बाप केँ पासयही सभी तोँ थां अपने बच्चों कों देने केँ लिए। वोँ स्वयं ऊॅचे दर्ज़े केँ बुरे इंसान थें, उनके अंदरपाप औऱ बुराईयों कां भण्डार थां। वहीसभी उन्होंने अपने बच्चों कों भि दिया। यह तौ टाइम कि बात हैं फूफी कि वोँ हमेशा एक् जैसा नहि रहता। हर चीज़ कि हकीक़त कैसी होती हैं यह बताने केँ लिए वक्त अवश्य आपकोऐसे मोड़ पऱ लें आता हैं जहाॅ आपकोहर चीज़ कि असलियत कां पताचल जाता हैं। इसलिए यह अच्छा हि हुआ कि वक़्त मुझेऐसे मोड़ पऱ लेँ आया। वरना मे जिंदगी भरइसबात सें बेख़बर रहती कि जिन लोगों केँ बारे मे मुझे बचपन सें यहपाठ पढ़ाया गय़ा थां कि यहसभी बुरेलोग हें वोँ वास्तव मे कितने अच्छे थें औऱ गंगा कि तरह पवित्र थें। "
"हर इंसान कि सोचअलग होती हैं रितू। " नैना नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"औऱ हर इंसान कि इच्छाएॅ भि अलग होती हें। कुछलोग अपनी ख़्वाहिश औऱ खुशी केँ लिए अनैतिकता कि सीमा लाॅघ जाते हें औऱ कुछलोग दूसरों कि खुशी औऱ भलाई केँ लिए अपनीहर खुशी औऱ इच्छाओं कां गला घोंट देते हें। अनैतिकता कि राह पऱ चलने वालेयह सोचना गवाॅरा नहि करते कि जोँ कर्म वोँ कररहे हें उससे जाति समाज औऱ स्वयं केँ घऱ परिवार पऱ कितना बुरा प्रभाव पड़ेगा? उन्हें तौ बस अपनी खुशियों सें मतलब होता हैं। जबकि इसके विपरीत अच्छे इंसान अपने अच्छे कर्मों सें आदर्श केँ नयेनये कीर्तिमान स्थापित करते हें। ख़ैर छोंड़ इन बातों कों औऱ यहबता कि आगे कां क्याँ सोचा हैं?"
"सोचना क्याँ हैं फूफी?" रितू नें कहा___"मेरा भइया मुझसे कह गय़ा हैं कि मे उसके वापसआने कां इन्तज़ार करूॅ। उसकेबाद हम् दोनो बेहन भइयाइस किस्से कां खात्मा करेंगे। "
"पऱ यहसभी होगा केसे?" नैना नें कहा___"तुम् दोनोइस काम कों अकेले केसे अंजाम तक पहुॅचाओगे?"
"मुझे स्वयं पर्र औऱ अपने भइयाराज पर्र पूरा भरोसा हैं फूफी। " रितू नें गर्व सें कहा___"आप् देख्ना हम् दोनो केसेइस सबको फिनिश करते हें? अब तौ रितूराज स्पेशल गेम होगा फूफी। मे बसराज केँ आने कां बेसब्री सें इन्तज़ार कररही हूॅ। "
"तुम् तोँ ऐसेकह रही हौ जैसेयह सभी बहोत सहज हैं। " नैना नें हैरानी सें कहा___"जबकि मेरा तौ सोचसोच कर हि दिल बुरीतरह सें घबराया जारहा हैं। "
"इसमें घबराने वाली क्याँ बात हैं फूफी?" रितू नें स्पष्ट भाव सें कहा___"सीधी औऱ साफबात हैं कि जौ लोगसिर पर्र मौत कां कफ़न बाॅधकर चलते हें वोँ फिन किसी चीज़ सें घबराते नहि हें। बल्कि मौत सें भि डॅटकर मुकाबला करते हें। जहाॅ तक मेरीबात हैं तौ अबअगर मेरीजान भि मेरे भइया कि सुरक्षा मे चलीजाए तौ कोईग़म नहि हैं। बल्कि मुझे बेहद खुशी होगी कि मेरीजान मेरेऐसे भइया कि सलामती केँ लिएफना होँ गई जिसने वास्तव मे मुझे हमेशा अपनी दिदी माना औऱ हमेशा मुझे इज्ज़त व सम्मान दिया। "
"ऐसा मतकह रितू। " नैना कि ऑखों सें ऑसूछलक पड़े, बोलीं____"तुम्हारी तरफकुछ नहि होगा औऱ ख़बरदार अगर दुबारा सें ऐसी फालतू कि बात कि तोँ। तुँ मेरीजान हैं मेरी बच्ची। तुम्हारी तरफकुछ नहि होगा क्योंकि तुँ सच्चाई कि राह पर्र चलरही हैं, धर्म कि राह पर्र मुकीम हैं तूँ। अगर किसी कों कुछ होगा तोँ वोँ उन्हें होगा जौ इसदेश समाज औऱ परिवार केँ लिए कलंक हें। "
"ख़ैर जाने दीजिए फूफी। " रितू नें मानो पहलू बदला__"इन सभी बातों मे क्याँ रखा हैं? होना तोँ वही हैं जोँ हर किसी कि नियति मे लिखाहुआ हैं। आइये खानां खाने चलते हें। बिंदिया काकी नें खानां रेडीकर दिया होगा। "
रितू कि यहबात सुनकर नैनाउसे कुछदेर अजीबभाव सें देखती रही, फिन रितू केँ उठते हि वोँ भि बेड सें उठ बैठी। कमरे सें बाहर् आकर दोनो डायनिंग हाल कि तरफबढ़ चलीं। जहाॅ पऱ करुणा कां भइया औऱ अभय सिंह कां साला बैठा इन्हीं कां इन्तज़ार कररहा थां। यह दोनो भि वहींरखी एक् एक् कुर्सियों पर्र बैठ गई। कुछ हि देर मे बिंदिया नें सबको खानां परोसा। खानां खाने केँ बादसभी अपने अपनेरूम कि तरफ सोने केँ लिएचले गए।
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सुभह हुइ!
उससमय सुभह केँ करीब साढ़े आठबजरहे थें जब रास्तों पर्र धूल उड़ाती हुईँ कई सारी गाड़ियाॅ आकर हवेली केँ बाहर् एक् एक् करके रुकीं। वोँ तीन गाड़ियाॅ थि। एक् सफारी, एक् इनोवा, औऱ एक् आई20 थि। तीनों गाड़ियों केँ रुकते हि सब गाड़ियों केँ दरवाजे एक् संग खुले औऱ खुल चुके दरवाजे सें एक् एक् दोदो करकेकई सारे व्यक्ति गाड़ियों सें बाहर् निकले।
बाहर् आते हि वोँ सभी एक् संग हवेली केँ उस हिस्से केँ मुख्य दरवाजे कि तरफ बढ़े जौ हिस्सा अजय सिंह कां थां। इस टाइम दरवाजा बंद थां। आसपास कुछऐसे व्यक्ति भि बाहर् मौजूद थें जिनके हाॅथों मे बंदूख, रिवाल्वर आदि हथियार थें। गाड़ियों सें आने वालेसब लोग मुख्य दरवाजे कि तरफ मुड़चले। आसपास खड़ेअजय सिंह केँ बंदूखधारी आदमियों केँ चेहरों पऱ अजीब सें भाव उभरे। अजीब सें इसलिए क्यूं कि गाड़ियों सें आने वालेसब व्यक्ति एकदम दनदनाते हुए मुख्य दरवाजे कि तरफबढ़ चले थें।
आसपास खड़े बंदूखधारी व्यक्ति उन लोगों कि इस धृष्टता कों देख उन्हें रोंकने केँ लिएउन लोगों केँ सामने आँ गए औऱ उन्हें रोंककर उनसे पूछने लगे कि वोँ कौनलोग हें औऱ इसतरह केसे बिनाकुछ पूछे अंदर कि तरफ बढ़ेचले जारहे हें? लेकिन बंदूखधारियों केँ पूछने पऱ उन लोगों नें कोई जवाब नहि दिया बल्कि अपने अपनेकोट कि सामने वाली पाॅकेट सें अपना अपनाआई कार्ड निकाल कर बंदूखधारियों कों दिखा दिया। बंदूखधारी यहदेख कर बुरीतरह चौंके कि वोँ सभी सि बीआई कि स्पेशल ऑफीसर थें। बंदूखधारियों कों बिलीउल भि समझ नं आया कि वोँ लोग यहाॅ क्यूं आए हें औऱ वोँ स्वयं अब क्याँ करें?उधर आई कार्ड दिखाने केँ बाद वोँ लोग मुख्य दरवाजे केँ पास पहुॅच गए औऱ दरवाजे पर्र लगी कुण्डी कों ज़ोर सें बजा दिया।
कुछ हि देर मे दरवाजा खुला। दरवाजे पऱ नाइट गाउन पहने प्रतिमा नज़रआई। अपने सामने इतने सारे अजनबी आदमियों कों देखकर वोँ चौंकी। उसके चेहरे पर्र नां समझने वालेभाव उभरे।
"जी कहिए। "फिन उसने अजीबभाव सें कहा___"आप् लोगकौन हें? औऱ यहाॅकिस काम सें आए हें?"
"हमें अंदर तोँ आने दीजिए मैडम। " एक् व्यक्ति नें ज़रा शालीन भाव सें कहा___"मिस्टर अजय सिंह सें मिलना हैं। "
"पऱ आप् लोग हें कौन?" प्रतिमा नें दरवाजे पर्र खड़े खड़े हि पूछा___"यह तोँ बताया नहि आपने। "
"सभी पताचल जाएगा मैडम। "उस व्यक्ति नें कहा__"हम् सभी मिस्टर अजय सिंह केँ गहरेयार दोस्त हें। प्लीज, उन्हें कहिए कि हम् उनसे मिलने आए हें। "
प्रतिमा उस व्यक्ति कि बातसुन कर देखती रह गई उसे। उसके चेहरे पऱ ऐसेभाव थें जैसेउसे यकीन न् आँ रहा होँ कि यहलोग अछय सिंह केँ मित्र होँ सकते हें। कुछदेर उस व्यक्ति कों देखते रहने केँ बाद जाने क्याँ सोचकर प्रतिमा दरवाजे सें हटकर पलटी औऱ अंदर कि तरफ बढ़ती चली गई। उसके पीचे पीछेयह सभी भि ओल दिये।
कुछ हि देर मे प्रतिमा केँ पीछे पीछेयह सभी ड्राइंग रूम मे पहुॅच गए। प्रतिमा नें सोफों कि तरफ हाॅथ कां इशारा करउन लोगों कों बैठने केँ लिएकहा। प्रतिमा केँ इस प्रकार कहने पर्र वोँ सभीलोग सोफों पर्र बैठगए जबकि प्रतिमा अंदर कमरे कि तरफबढ़ गई।
थोड़ी हि देर मे अजय सिंह ड्राइंग रूम मे दाखिल हुआ। ड्राइंग रूम मे सोफों पर्र बैठे इतने सारे लोगों पर्र नज़र पड़ते हि उसके चेहरे पर्र अजनबीयत केँ भाव उभरे। जैसे पहचानने कि कोशिश कररहा हौ कि यहसभी लोगकौन हें?
"क्षमा करनामगर हमने आप् लोगों कों पहचाना नहि। " फिन उसने एक् अलग सोफे पऱ बैठते हुएकहा।
"इसके पहलेकभी हम् लोग आपसे मिले हि कहाॅ थें जौ आप् हमें पहचान लेते। " एक् कोटधारी नें अजीबभाव सें कहा___"ख़ैर, आपकी जानकारी केँ लिए हम् बतादें कि हम् सभी सि बीआई सें हें औऱ यहाॅ आपकोचरस, अफीम, औऱ ड्रग्स कां धंधा करने केँ जुर्म मे गिरफ्तार करनेआए हें। हमारे पास आपके खिलाफ़ स्पेशल वारंट भि हैं। इसलिए आप् बिनाकुछ प्रश्न जवाब किये हमारे संग चलने कां कस्ट करें। "
सि बीआई केँ उस व्यक्ति केँ मुख सें यहबात सुनकर अजय सिंह केँ पैरों केँ नीचे सें ज़मीन खिसक गई। बुत सां बनगय थां वो। मुख सें कोईबोल न् फूटा। शरीर केँ सब मसामों नें समयभर मे ढेर सारा पसीना उगल दिया। चेहरा इसतरह नज़रआने लगा थां जैसे धमनियों मे दौड़ते हुएलहू कि एक् बूॅद भि शेष न् बची होँ। एकदम फक्कपड़ गय़ा थां।
"यह.यह.क्.क्याँ बकवास कररहे हें आप्?" फिन सहसा बदहवाश सें अजय सिंह नें जैसे स्वयं कों सम्हाला थां औऱ फिन वापस ठाकुरों वालेरौब मे आतेहुए बोला थां। यहअलग बात हैं कि उसकेउस रौब मे रत्ती भर भि रौब दिखाई न् दिया, बोला___"आप् होश मे तोँ हें नं? आप् जानते हें कि आप् किसके सामने क्याँ बकवास कररहे हें?"
"हम् तोँ पूरीतरह होशो हवाश मे हि हें मिस्टर अजय सिंह। " सीबीआई ऑफिसर नें कहा___"लेकिन आपके होशो हवाश अवश्य कहींखो गए सें नज़रआने लगे हें। रहीबात आपकी कि आप् कौन हें औऱ हम् आपसे क्याँ कहरहे हें तोँ इससेकोई फर्क़ नहि पड़ता। क्योंकि हम् कानून केँ नुमाइंदे हें। हमारे लिए छोटे बड़ेसभी एक् जैसे हि होते हें। ख़ैर, हमने आपकेशहर वाले घर-मकान सें भारी मात्रा मे ग़ैर कानूनी ज़खीरा बरामद किया हैं। सारी जाॅच पड़ताल केँ बादजब हमेंयह पताचला कि वोँ सभी आपकी संमत्ति हैं तौ हम् कोर्ट सें स्पेशल वारंट लेकर आपको यहाॅ गिरफ्तार करनेचले आए। इसलिए अब आपकेपास हमारे संग चलने केँ सिवा दूसरा कोई चारा नहि हैं। "
ऑफीसर कि यहबात सुनकर एक् बारफिन सें अजय सिंह कि हालत ख़राब होँ गई। वोँ सोच भि नहि सकता थां कि उसकेसंग ऐसा भि कभी होँ सकता हैं। उसे जल्दी हि फैक्ट्री मे लगीआग कां वाक्या यादआया जब तहखाने सें उसका ग़ैर कानूनी सामान गायब होने कां पताचला थां उसे। वोँ यह भि समझ गय़ा थां कि यहसभी विराज नें हि किया थां। प्रतिमा नें इसबात कां अंदेशा भि ब्यक्त किया थां कि किसीऐसे मौके पऱ वोँ यहसभी कानून केँ हवाले कर सकता हैं जबकि हम् कुछ भि करने कि स्थिति मे हि नं रह जाएॅगे। मतलबसाफ थां कि प्रतिमा कि कहीबात आजसच हौ गई थि। यानी विराज नें उस सारे सामान कों उसकेशहर वाले घर-मकान मे रखा औऱ फिन इसकी सूचना सीबीआई कों दे दि औऱ अब सीबीआई वालेअजय सिंह केँ पास स्पेशल वारंट लेकर आँ गए थें। अजय सिंह स्वयं भि सरकारी वकीलरह चुका थां इसलिए जानता थां कि ऐसे मौके पर्र वो कुछ भि नहि कर सकता थां। कोई दूसरा जुर्म होता तौ कदाचित वोँ कोई जुगाड़ लगाकर अपनी ज़मानत करवा भि लेतामगर यहाॅ तौ जुर्म हि संगीन थां।
"किससोच मे डूबगए मिस्टर अजय सिंह?"तभी उसे सोचो मे गुमदेख ऑफीसर नें कहा___"आप् अपनी मर्ज़ी सें हमारे संग चलेंगे तौ बेहतर होगा, वरना आप् जानते हैं कि हमारे पास बहोत सें तरीके हें आपको यहाॅ सें लें चलने केँ लिए। "
"ऑफीसर। " सहसाअजय सिंह नें अजीबभाव सें कहा___"यह सभी झूॅठ हें। हम् ऐसाकोई काम नहि करते जिसे कानून कि नज़र मे जुर्म कहाजाए। यह यकीनन किसी कि साजिश हैं हमें फसाने कि। हाॅ ऑफीसर, यह साजिश हि हैं। बहुत वक़्त सें हमारा शहर वाला घर-मकान खाली पड़ा हैं इसलिये संभव हैं कि किसी नें यहसभी गैर कानूनी चीज़ें वहाॅ पऱ छुपाकर रखीरही होंगी। हमारा इस सबसेकीई लेना देना नहि हैं। "
"सच औऱ झूठ कां फैसला तौ अब अदालत हि करेगी मिस्टर अजय सिंह। " ऑफिसर नें कहा___"हमारा काम तौ बस इतना हैं कि प्राप्त सबूतों केँ आधार पऱ आपको गिरफ्तार कर अदालत केँ समक्ष खड़ाकर दें। इस लिएअब आपकीकोई दलील हमारे सामने चलने वाली हैं। "
अभि अजय सिंहकुछ कहने हि वाला थां कि तभी अंदर सें प्रतिमा औऱ शिवाआकर वहीं पऱ खड़े हौ गए। दोनो केँ चेहरों पऱ हल्दी पुती हुइ थि। मतलबसाफ थां कि यहाॅ कि सारी वार्तालाप उन दोनो नें सुनली थि।
"यहसभी क्याँ हैं डैड?" शिवा नें अंजान बनतेहुए पूछा___"यह कौनलोग हें औऱ यहाॅकिस लिएआए हें?"
"यहसभी सीबीआई सें हें बेटे। "अजय सिंह नें बुझेमन सें कहा___"औऱ यहहमे गिरफ्तार करनेआए हें। इनका कहना हैं कि हमारे शहर वाले घर-मकान सें इन्होंने भारी मात्रा मे चरस अफीम ड्रग्स आदि चीज़ें बरामद कि हें। "
"व्हाऽऽट??" शिवा नें चौंकते हुए कहा___"यह आप् क्याँ कहरहे हें डैड?भला ऐसा केसे होँ सकता हैं? हमारे शहर वाले घर-मकान मे वोँ सभी चीज़ें कहाॅ सें आँ गई?"
"मे तोँ पहले हि कहती थि कि तुम् शहर वालेउस घर-मकान कों बेंचदो। " प्रतिमा नें जाने क्याँ सोचकर यहबात कही थि, बोलि___"मगर मेरी सुनते कहाॅ होँ तुम्? अबदेख लो इसका अंजाम। जानेकब सें खाली पड़ा थां वो। आजकल किसी कां क्याँ भरोसा कि वोँ घर-मकान केँ अंदरआकर क्याँ क्याँ खुराफात करनेलग जाएॅ। "
"अरे तौ भला हमें क्याँ पता थां प्रतिमा कि ऐसा भि कोईकर सकता हैं?" अजय सिंह नें प्रतिमा कि चाल कों बखूबी समझते हुए कहा___"अगर पता होता तोँ हम् उस घर-मकान कि देखरेख केँ लिएकोई व्यक्ति रख देते नं। "
"किसने किया होगायह सभी?" प्रतिमा नें कहा___"भला हमसे किसी कि ऐसी क्याँ दुश्मनी होँ सकती हैं जिसके तहत उसने हमारे संग इतना बड़ा काण्ड कर दिया?"
"मिस्टर अजय सिंह। " सहसा ऑफिसर नें हस्ताक्षेप करतेहुए कहा___"यह सभी बातें आप् बाद मे सोचिएगा। इससमय आप् हमारे संग चलने कां कस्ट करें प्लीज़। "
"अरेऐसे केसे लेँ जाएॅगे आप् डैड कों?" सहसा शिवा आवेशयुक्त भाव सें बोल पड़ा___"मेरे डैड बिलकुल बेगुनाह हें। आप् इन्हें ऐसे कहीं नहि लें जा सकते। यह तोँ हद हि होँ गई कि करेकोई औऱ भरेकोई औऱ। "
"तुम् शान्त हौ जाओ बेटे। "अजय सिंह नें अपने कूढ़मगज बेटे कि बातों पर्र मन हि मन कुढ़ते हुए बोला___"बात चाहे जोँ भि होँ मगर हमें इनकेसंग जानां हि पड़ेगा। यहसभी कानून केँ रखवाले हें। दूसरी बात इन्हें हमारे घर-मकान सें वोँ सभी चीज़ें मिली हें इसलिए पहली नज़र मे हरकोई यही समझेगा औऱ कहेगा कि वोँ सभी चीज़ें हमारी हें। यानी हम् ग़ैर कानूनी धंधा भि करते हें। दूसरा ब्यक्ति यह नहि सोचेगा कि कोई अन्य ब्यक्ति यहसभी चीज़ें हमारे घर-मकान मे रखकर हमें फॅसा भि सकता हैं। अतः मौजूदा हालात मे हमें कानून कां हरकहा मानना पड़ेगा औऱ उसकासंग देना पड़ेगा। तुम् फिक्र मतकरो बेटे, यह हमें लेँ जाकर हमसेइस सबके बारे मे पूॅछताछ करेंगे। इस सबकेलिए हमेंतभी सज़ा मिलेगी जबयह साबित हौ जाएगा कि वोँ सभी चीज़ें वास्तव मे हमारी हि हें याँ हम् कोई ग़ैर कानूनी धंधा भि करते हें। "
अजय सिंह कि बातसुन कर शिवाकुछ बोल न् सका। प्रतिमा नें भि कुछ न् कहा। कदाचित वोँ स्वयं भि अजय सिंह कि इसबात सें सहमत थि। दूसरी बात, वोँ तोँ जानती हि थि कि वोँ सभी चीज़ें सच मे अजय सिंह कि हि हें। इसलिए यहसभी सोचकर औऱ इसके अंजाम कां सोचकर वोँ अंदर हि अंदर बुरीतरह घबराए भि जारही थि। वोँ अच्छी तरह जानती थि कि ऐसे मामले मे कानून कि गिरफ्त सें बचना असंभव नहि तोँ नामुमकिन अवश्य थां।
इधरअजय सिंह केँ मन मे भि यहीसभी चलरहा थां। उसे भि एहसास थां कि इससे बचना बहोत मुश्किल काम हैं। इसलिए वोँ कोई न् कोई जुगाड़ लगाने भि सोचरहा थां। मगर चूॅकि उसके पुराने कानूनी कनेक्शन पहले हि ख़त्म होँ चुके थें इसलिए वोँ कुछकर पाने कि हालत मे नहि थां। दूसरी सबसे बड़ीबात यह थि कि उसेइस बात कां एहसास होँ चुका थां कि अगर किसीतरह वोँ पुलिस कमिश्नर अथवा प्रदेश केँ मंत्री कों अपनेहक़ मे कर भि लें तोँ तब भि बात अपने पक्ष मे नहि होनी थि। क्योंकि उसने देखा थां कि उसकेसंग घटी पिछली सब घटनाओं मे ऐसाहुआ थां कि ऊपर सें हि शख्त आदेश मिला थां।
अजय सिंह केँ पसीने छूटरहे थें मगर उसके दिमाग़ मे कोई बेहतर जुगाड़ आँ नहि रहा थां। वक़्त औऱ हालात नें अचानक हि इसतरह सें अपनारंग बदल लिया थां कि उसकोकुछ करने लायक छोंड़ा हि नहि थां। उसने कल्पना तक नं कि थि कि वोँ इतना बेबसव लाचार होँ जाएगा औऱ इतनी आसानी सें कानून कि चपेट मे आँ जाएगा।
"तोँ चलें मिस्टर अजय सिंह?" सहसा ड्राइंग रूम मे छाए सन्नाटे कों भेदते हुएउस ऑफिसर नें कहा__"अगर आपकोयह लगता हैं कि यहसभी किसी नें आपको फॅसाने केँ उद्देश्य सें किया हैं औऱ इस सबमें आपकाकोई हाॅथ नहि हैं तौ फिक्र मत कीजिए। हम् सच्चाई कां पतालगा लेंगे। लेकिन उससे पहले आपको हमारे संग चलना हि पड़ेगा औऱ तहकीक़ात मे हमारा सहयोग करना पड़ेगा। "
उस ऑफिसर केँ इतना कहते हि अजय सिंह नें गहरी साॅसली औऱ फिन सोफे सें उठ खड़ाहुआ। इस टाइम उसके शरीर पऱ नाइट ड्रेस हि थां इसलिए उसने ऑफिसर सें ड्रेस बदल लेने कि परमीशन माॅगी। ऑफिसर नें परमीशन दे दि। परमीशन मिलते हि अजय सिंह कमरे कि तरफबढ़ गय़ा। उसके जाते हि ऑफिसर नें एक् अन्य ऑफिसर कि तरफदेख कर ऑखों सें कुछ इशारा किया। ऑफिसर कां इशारा समझकर दूसरा ऑफिसर जल्दी हि अजय सिंह केँ पीछे कमरे कि तरफबढ़ गय़ा। मतलबसाफ थां कि ऑफिसर कों इसबात कां अंदेशा थां कि अंदर कमरेअजय सिंह कहीं मोबाइल पऱ किसी सें कोईबात वगैरा नं करनेलगे। जबकि मौजूदा हालात मे ऐसा करना हर्गिज़ भि जायज़ बात न् थि।
कुछ हि देर मे ऑफिसर केँ संग हि अजय सिंह कमरे सें आता दिखाई दिया। उसकेआते हि सबलोग सोफों पर्र सें उठे औऱ अजय सिंह केँ संग हि बाहर् आँ गए। जबकि पीछेबुत बनेअजय सिंह कि पत्नि औऱ बेटा खड़ेरह गए थें। फिन जैसे प्रतिमा कों होशआया। वोँ एकदम सें तेज़ क़दमों केँ संग बाहर् कि तरफ भागते हुए गई। जब वोँ बाहर् आई तोँ उसने देखा कि सीबीआई केँ सब ऑफिसर अपनी अपनी गाड़ियों मे बैठरहे थें। एक् अन्य वाहन कि पिछली शीट पऱ अजय सिंह कों बिठाया जारहा थां, औऱ उसकेबाद उसकेबगल सें हि एक् अन्य ऑफिसर बैठ गय़ा थां।
प्रतिमा केँ देखते हि देखते सीबीआई वालों कां वोँ क़ाफिला अजय सिंह कों संगलिए हवेली सें दूरचला गय़ा। प्रतिमा कों ऐसा महसूस हुआ जैसे उसकी मुकम्मल दुनियाॅ हि नेस्तनाबूत होँ गई होँ। इस एहसास केँ संग हि प्रतिमा कि ऑखेंछलक पड़ीं औऱ फिन जैसे उसके जज़्बात उसके काबू मे रहसके। वोँ दरवाजे पर्र खड़ी खड़ी हि फूटफूट कररो पड़ी। तभी उसके पीछे शिवा नमूदार हुआ औऱ अपनी रोती हुईँ माॅ कों उसके कंधे सें पकड़कर अपनीतरफ घुमाया औऱ फिनउसे अपने सीने सें लगा लिया।
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उधर रितू केँ फार्महाउस पऱ भि सुभह हौ गई थि। अपने कमरे केँ अटैच बाथरूम मे नहाने केँ बाद रितू कपड़े पहनरही थि जब उसके कमरे कां दरवाजा बाहर् सें कुण्डी केँ दवारा बजाया गय़ा थां। रितू नें पूछाकौन हैं तौ बाहर् सें नैना कि आवाज़ आई थि कि मे हूॅ बेटा जल्द सें द्वार (दरवाज़ा) खोलो। बस, उसकेबाद रितू नें आनन फानन मे अपने कपड़े पहने औऱ फिन जाकर कमरे कां द्वार (दरवाज़ा) खोला। द्वार (दरवाज़ा) खुलते हि नैना बुवा पऱ नज़र पड़ी तोँ वो हल्के सें चौंकी।
"क्याँ बात हैं फूफी?" रितू नें शशंकभाव सें पूछा__"आप् इसतरह? सभीठीक तोँ हैं नं?"
"यह लें। " नैना नें जल्द सें अपना दाहिना हाथ रितू कि तरफ बढ़ाया___"यह अख़बार पढ़। इसमें ऐसी ख़बरछपी हैं छिसेपढ़ कर तेरेहोश नं उड़ जाएॅ तोँ कहना। "
"अच्छा। " रितू नें अख़बार अपने हाॅथ मे लेतेहुए कहा___"भला ऐसी क्याँ ख़बरछपी हैं इस अख़बार मे जिसे पढ़ने पर्र मेरेहोश हि उड़ जाएॅगे?"
"तूँ पढ़ तौ सही। " नैना कहने केँ संग हि दरवाजे केँ अंदर रितू कों खींचते हुए लें आई, बोलि___"बताने मे वोँ बात नहि होगी जितना कि स्वयं ख़बर पढ़ने सें होगी। "
नैना, रितू कों खींचते हुएबेड केँ क़रीब आई औऱ उसमें रितू कों बैठाकर स्वयं भि बैठ गई औऱ रितू केँ चेहरे केँ भावों कों बारीकी सें देखने लगी। रितू नें अख़बार कि फ्रंट पेज़ पऱ छपी ख़बर पऱ अपनी दृष्टि डाली औऱ ख़बर कि हेड लाईन पढ़ते हि वोँ बुरीतरह उछल पड़ी। अख़बार मे छपी ख़बरकुछ इस प्रकार थि।
*शहर केँ मशहूर कपड़ा ब्यापारी अजय सिंह केँ घर-मकान सें करोड़ों कां ग़ैर कानूनी सामान बरामद*
(गुनगुन): हल्दीपुर केँ रहने वाले ठाकुर अजय सिंह बघेल वल्द गजेन्द्र सिंह बघेल जोँ कि एक् मशहूर कपड़ा ब्यापारी हें उनके गुनगुन स्थित घर-मकान पऱ कलसाम कों सीबीआई वालों नें छापा मारा। घर-मकान केँ अंदर सें भारी मात्रा मे चरस अफीम ड्रग्स आदि जानलेवा चीज़ें सीबीआई केँ हाथलगी। ग़ौरतलब बातयह हैं कि गुनगुन स्थित ठाकुर अजय सिंह कां वोँ घर-मकान कुछ टाइम सें खाली पड़ा थां, इसलिए यह स्पष्ट रूप सें नहि कहाजा सकता कि ग़ैर कानूनी चीज़ों कां इतना बड़ा ज़खीरा उनके घर-मकान मे कहाॅ सें आँ गय़ा? ऐसाइस लिए क्योंकि ठाकुर अजय सिंह जैसे मशहूर कारोबारी सें ऐसे संगीन धंधे कि बात सोची नहि जा सकती जौ कि जुर्म कहलाता हैं। इसलिए संभव हैं कि यहसभी उनके किसी दुश्मन कि सोची समझी साजिश कां हि नतीजा होँ। ख़ैर, अब देख्ना यह होगा कि सीबीआई वालों कि जाॅच पड़ताड़ सें क्याँ सच्चाई सामने आती हैं? अबयह तोँ निश्चित बात हैं कि ठाकुर अजय सिंह केँ घर-मकान सें मिले इतने सारेग़र कानूनी सामान केँ तहत सीबीआई वाले बहोत जल्द ठाकुर अजय सिंह कों अपनी हिरासत मे लेकरइस बारे मे पूछताॅछ करेंगे। लेकिन अगर सीबीआई कि जाॅच मे यहबात सामने आई कि वोँ सभी ग़ैर कानूनी सामान ठाकुर अजय सिंह कां हि हैं तोँ यकीनन ठाकुर अजय सिंह कों इस संगीन जुर्म मे कानून केँ द्वारा शख्तसे शख्त सज़ा मिलेगी।
अख़बार मे छपीइस ख़बर कों पढ़कर यकीनन रितू केँ होशउड़ हि गए थें। उसके दिमाग़ कि बत्ती बड़ी तेज़ी सें जली थि औऱ संग हि उसे विराज कि वोँ बातयाद आईजब उसने गुनगुन रेलवे स्टेशन पर्र रितू सें कहा थां कि बहोत जल्दअजय सिंह कों एक् झटका लगने वाला हैं। यह भि कि उसकी सेफ्टी केँ लिए वो भि ऐसा करेगा कि अजय सिंह याँ उसकाकोई व्यक्ति उस तक पहुॅच हि नहि पाएगा।
"इसका मतलब तौ यहीहुआ फूफी कि अब तक डैड कों सीबीआई वाले गिरफ्तार करलिए होंगे। " रितू नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"औऱ अगरऐसा हौ गय़ा होगा तौ यकीनन डैड लम्बे सें नप जाएॅगे। एक् हि झटके मे वोँ कानून कि ऐसी चपेट मे आँ जाएॅगे जहाॅ सें निकल पाना असंभव नहि तोँ नामुमकिन अवश्य हैं। "
"यह तौ अच्छा हि हुआ न् रितू। " नैना नें कहा___"बुरे काम करने कां यह अंजाम तौ होना हि थां। मगर सबसे बड़ा प्रश्न यह हैं कि यहसभी हुआ केसे?
"यह सभीराज कि वजह सें हुआ हैं फूफी। " रितू नें बताया___"उसने कल रेलवे स्टेशन मे मुझसे कहा थां कि वोँ कुछऐसा करेगा जिससे डैडमुझ तक पहुॅच हि नहि पाएॅगे। यह तोँ सच हैं फूफी कि डैड ग़ैर कानूनी धंधा करते थें औऱ फैक्ट्री मे मौजूद तहखाने मे उनकायह सभी ग़ैर कानूनी सामान भि थां जिसेराज नें हि गायब किया थां। ऐसा उसनेइस लिए किया थां ताकि वो उस सामान केँ आधार पऱ जब चाहेडैड कों कानून कि गिरफ्त मे डलवासके। इसलिए उसनेऐसा हि किया हैं फूफी मगर मुझे लगता हैं कि यहसभी महजडैड कों डराने औऱ मौजूदा हालात सें निपटने केँ लिएराज नें किया हैं। क्योंकि राज उन्हें अपने हाॅथों सें उनके अपराधों कि सज़ा देगा, नाकि कानून द्वारा उन्हें किसीतरह कि सज़ा दिलवाएगा। "
"मगर बेटा। " नैना नें तर्क सां दिया___"कानून कि चपेट मे आने केँ बाद बड़े भाई भला कानून कि गिरफ्त सें केसे बाहर् आएॅगे औऱ फिन केसेराज उन्हें अपने हाॅथों सें सज़ा देगा?"
"उसका भि इंतजाम राज नें किया हि होगा फूफी। " रितू नें कहा___"आज केँ इस अख़बार मे छपी ख़बर केँ अनुसार ग़ैर कानूनी सामान डैड केँ घर-मकान सें बरामद अवश्य हुआ हैं मगरयह भि बताया गय़ा हैं कि चूॅकि गुनगुन स्थित घर-मकान बहुत टाइम सें खाली थां इसलिए संभव हैं कि डैड कों फॅसाने केँ लिए उनके किसी दुश्मन नें ऐसा किया होगा। इस लिए सीबीआई वालेइस बारे मे केवल पूॅछताछ करेंगे। अब आप् स्वयं समझ सकती हें फूफी कि राज नें केस कों इतना कमज़ोर क्यूं बनाया हुआ हैं कि डैड कानून कि गिरफ्त सें मामूली पूछताछ केँ बादछूट जाएॅ?। "
"मगर यह प्रश्न तौ अपनी स्थान खड़ा हि रहेगा न् रितू कि बड़े भाई केँ घर-मकान मे वोँ ग़ैर कानूनी सामान केसे पाया गय़ा?" नैना नें कहा___"इस लिएइस प्रश्न केँ साल्व हुए बिना बड़े भाई इसकेस सें केसेछूट जाएॅगे भला?"
"बहोत आसान हैं फूफी। " रितू नें कहा___"पैसों केँ लिए आजकललोग बहोत कुछकर जाते हें। कहने कां मतलबयह कि वोँ किसीऐसे ब्यक्ति कों ढूॅढ़ लेंगे जौ पैसों केँ लिएकुछ भि करने कों सजधजकर होँ जाए। वोँ ब्यक्ति इसबात कों स्वयं स्वीकार करेगा कि वोँ सारा ग़ैर कानूनी सामान उसका स्वयं कां हैं औऱ उसनेडैड केँ घर-मकान मे उसेइस लिये छुपाया हुआ थां क्योंकि वोँ घर-मकान बहुत वक्त सें खाली थां तथा उसकेलिए एक् सुरक्षित स्थान कि तरह थां। "
"चलोयह तौ मान लिया कि ऐसा हौ सकता हैं। " नैना नें मानो तर्क किया___"लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यहयह हैं कि तुम्हारे डैडऐसे किसी ब्यक्ति कों लाएॅगे कहाॅ सें? जबकि वोँ स्वयं हि सीबीआई वालों कि निगरानी मे रहेंगे औऱ उनकेपास किसी सें संपर्क स्थापित करने केँ लिएकीई ज़रिया हि नहि होगा। "
"प्रश्न बहोत अच्छा हैं फूफी। " रितू नें कुछ सोचते हुए कहा__"लेकिन अगर हम् यहसोच कर देखें कि यहसभी राज कां हि कियाधरा हैं तोँ यह भि निश्चित बात हैं कि वोँ स्वयं हि ऐसाकुछ करेगा जिससे डैड सीबीआई याँ कानून केँ चंगुल सें बाहर् आँ जाएॅ। "
"ऐसे मामलों मे कानून केँ चंगुल सें किसी कां बाहर् आँ जानां नामुमकिन तौ नहि होता रितू। " नैना नें गहरी साॅस लेतेहुए कहा___"लेकिन अगर तुँ यहकहरही हैं कि राज तेरेडैड कों किसी हैरतअंगेज कारनामे कि वजह सें बाहर् निकाल हि लेगा तौ प्रश्न यह उठता हैं कि ऐसा क्याँ करेगा राज? दूसरी बात, जब उसे कानून कि गिरफ्त सें निकाल हि लेना हैं तौ फिन तेरेडैड कि कानून कि चपेट मे लाने कां मतलब हि क्याँ थां?"
"खजूर पर्र चढ़े इंसान कों ज़मीन पर्र पटकने कां मकसद थां उसका। " रितू नें कहा___"वोँ कहते हें नं कि जब तक ऊॅट पहाड़ केँ सामने नहि आतातब तक उसेयही लगता हैं कि उससे ऊॅचाकोई हैं हि नहि। यहीहाल मेरेडैड कां थां फूफी। राज कां मकसद कदाचित यही हैं कि वोँ डैड कों एहसास दिलाना चाहता हैं कि इस दुनियाॅ मे उनसे भि बड़े बड़े ख़लीफा मौजूद हें। वोँ चाहे तोँ उन्हें एक् समय मे चुटकियों मे मसल सकता हैं। आज केँ इस वाक्ये केँ बाद संभव हैं कि डैड कि विचारधारा मे कुछ तोँ परिवर्तन अवश्य आया होगा। "
"यह तोँ सचकहा तूने। " नैना नें कहा___"अगर सीबीआई वाले बड़े भाई कों अपनेसंग लेँ गए होंगे तोँ यहसच हैं कि बड़े भाई कों आजआटे दाल केँ भाव कां पताचल जाएगा। "
"हाॅ फूफी। " रितू नें कहा___"राज कों मौजूदा हालातों कां बखूबी एहसास थां। कदाचित उसेयह अंदेशा थां कि इतनी नाकामियों केँ बादडैड अब स्वयं मैदान मे उतरेंगे औऱ हमेंखोज कर हमारा क्रिया कर्म करेंगे। इसीलिए राज नें यह क़दम उठाया कि जबडैड हि कानून कि गिरफ़्त मे रहेंगे तोँ भला हम् पऱ किसीतरह कां उनकीतरफ सें कोई संकट आएगा हि केसे?"
"तौ इसका मतलबयह हुआ कि बड़े भाई कों राज नें कानून कि गिरफ्त मे फॅसाया। " नैना कों जैसे सारीबात समझ मे आँ गई थि, बोलीं___"मात्र इसलिए कि वोँ तेरेडैड कों एहसास दिलासके कि वोँ जिसे पिद्दी कां शोरबा समझते हें वोँ दरअसल ऐसा हैं कि उनकोछठी कां दूधयाद दिला सकता हैं। ख़ैर, इन बातों सें यह भि एक् बातसमझ मे आती हैं कि राज नें तुझको सेफ करने केँ लिए भि तेरेडैड कों कुछ दिनों केँ लिए कानून कि गिरफ्त मे फॅसाया हैं। दोदिन बाद तौ वोँ स्वयं हि यहाॅ आँ जाएगा औऱ संभव हैं ऐसाकुछ करदे जिससे उसका शिकार कानून कि चपेट सें बाहर् आँ जाए। "
"यू आर अब्सोल्यूटली राइट फूफी। " रितू नें कहा___"राज कां यकीनन यही प्लान होँ सकता हैं। ख़ैर, अब तौ इसबात कि फिक्र करने कि कोई ज़रूरत नहि हैं कि डैड याँ उनके किसी व्यक्ति सें हमेंकोई ख़तरा हैं। "
"मगर एक् बात सोचने वाली हैं रितू। " नैना नें सोचने वालेभाव सें चहा___"तेरे डैड कि इस गिरफ्तारी सें तेरीमाॅ औऱ तेरे भइया पर्र इसका गहरा प्रभाव पड़ा होगा। प्रतिमा भाभी नें स्वयं भि वकालत कि पढ़ाई कि हैं इसलिए संभव हैं कि वोँ तेरेडैड कों कानून कि गिरफ्त सें निकालने कां कोई जुगाड़ लगाएॅ। "
"कोई फायदा नहि होने वाला फूफी। " रितू नें कहा__"जिसे जितना ज़ोर लगाना हैं लगा लें मगर हाॅथकुछ नहि आएगा। क्योंकि एक् तोँ मामला हि इतना संगीन हैं दूसरे इस सबमें राज कां हाॅथ हैं। उसकी पहुॅच बहुत लम्बी हैं, इसलिए उसकी पहुॅच केँ आगेइन लोगों कां कोई भि पैंतरा काम नहि करने वाला। यह तौ पक्की बात हैं कि होगा वहीं जौ राज चाहेगा। "
"हाॅयह तौ हैं। " नैना नें कहा___"ख़ैर देखते हें क्याँ होता हैं? वैसेइस बारे मे क्याँ अभि तक तुमने राज सें बात नहि कि??"
"अभि तोँ नहि कि फूफी। " रितू नें कहा___"पऱ अब जल्द हि उससेबात करूॅगी। वास्तव मे उसने बड़ा हैरतअंगेज काम किया हैं। मुझे तोँ उससेयह उम्मीद हि नहि थि। "
"समय औऱ हालात एक् इंसान कों कहाॅ सें कहाॅ पहुॅचा देते हें औऱ उससे क्याँ क्याँ करवा देते हें यहसभी उसतरह कां वक्तआने पऱ हि पता चलता हैं। " नैना नें जाने क्याँ सोचकर कहा___"सोचने वालीबात हैं कि राज जोँ एक् बेहद हि सीधा सादा लड़काहुआ करता थां आज वोँ इतना जहीनतथा इतना शातिर दिमाग़ कां भि होँ गय़ा हैं। "
"इसमें उसकीकोई ग़लती नहि हैं फूफी। " रितू नें भारीमन सें कहा___"उसे इसतरह कां बनाने वाले भि मेरे हि पैरेंट्स हें। इंसान अपनों कां हरकहा मानता हैं औऱ उसका जुल्म भि सह लेता हैं मगर उसकी भि एक् वक्त सीमा होती हैं। इतनाकुछ जिसके संगहुआ होँ वोँ ऐसा भि नं बनसके तौ फिन कैसा इंसान हैं वोँ?"
नैना, रितू कि बातसुन करउसे देखती रह गई। कुछदेर औऱ ऐसी हि बातों केँ बाद वोँ दोनो हि कमरे सें बाहर् आँ गईं औऱ नीचे नास्ते कि टेबल पर्र आकरबैठ गईं। जहाॅ पऱ करुणा कां भइया हेमराज पहले सें हि मौजूद थां। रितू अपनी नैना फूफी केँ संगअलग अलग कुर्सियों पर्र बैठी हि थि कि उसकाआई मोबाइल बजउठा। उसनेफोन कि स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे "माॅम"नाम कों देखा तौ उसके होठों पऱ अनायास हि नफ़रत व घृणा सें भरी मुस्कान फैल गई। कुछ सेकण्ड तक वोँ फोन कि स्क्रीन कों देखती रहीफिन उसने आँ रहीकाल कों कटकर दिया। काल कट करते टाइम उसके चेहरे पर्र बेहद कठोरता केँ भाव थें।
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उधर मुम्बई मे!
सुभह हुइ!
अजय सिंहव प्रतिमा कि दूसरी बेटी नीलम कि ऑखें गहरी नींद सें खुल तोँ गईं थि मगर वोँ स्वयं बेड सें नं उठी थि अभि तक। हॅसती मुस्कुराती हुइ रहने वाली मासूम सि नीलम एकाएक हि जैसे बेहद गुमसुम सि रहनेलगी थि। काॅलेज मे हुईँ उस घटना कों आज हप्ता सें ज़्यादा दिन गुज़र गय़ा थां लेकिन उस घटना कि ताज़गी आज भि उसके ज़हन मे बनी हुई थि। उसे अपनी इज्ज़त केँ तारतार हौ जाने कां इतनादुख न् होता जितना आजउसे इसबात पऱ हौ रहा थां कि उसका चचेरा भइयाउसे नफ़रत औऱ घृणा कि दृष्टि सें देखकर इसतरह उसके सामने सें मुहफेर करचला गय़ा थां जैसे वोँ उसे पहचानता हि न् थां। नीलम औऱ विराज दोनो हि हमउमर थें लेकिन नीलम कां बिहैवियर भि रितू कि तरहरहा थां विराज केँ संग।
उस दिन कि घटना नें नीलम केँ मुकम्मल वजूद कों हिलाकर रख दिया थां। उसनेइस घटना केँ बारे मे अपने स्वयं केँ पैरेंट्स कों बिलकुल भि नहि बताया थां। मौसी कि लड़की कों बस बताया थां लेकिन उसने उससे भि वादा लें लिया थां कि वोँ उसके घरवालों कों यहबात नं बताएकभी।
उसदिन कि घटना केँ बाद पहले तोँ दोदिन नीलम काॅलेज नहि गई थि लेकिन फिन तीसरे दिन सें जानेलगी थि। काॅलेज मे हर स्थान उसकी नज़रें बस अपने चचेरे भइया विराज कों हि ढूॅढ़तीं मगर पिछले कई दिनों सें उसे अपना वोँ चचेरा भइया काॅलेज मे कहीं नं दिखा थां। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि आख़िर विराज काॅलेज क्यूं नहि आँ रहा? कहींऐसा तौ नहि कि उसकीवजह सें उसनेयह काॅलेज हि छोंड़ दिया हौ। यहसोच कर हि नीलम कि जान उसकेहलक मे आकरफॅस जाती। वोँ सोचती कि अगर विराज नें सच मे उसकी हि वजह सें काॅलेज छोंड़ दिया होगा तोँ यह कितनी बड़ीबात हैं। मतलब कि आज केँ वक़्त मे विराज उससे इतनी नफ़रत करता हैं कि वोँ उसे देख्ना तक गवाॅरा नहि करता। यह सभी बातें नीलम कों रातदिन किसी ज़हरीले सर्प कि भाॅति डसती रहती थि।
"बस एक् बार। " नीलम केँ मुख सें हरबार बसयही बात निकलती____"केवल एक् बारफिन सें मुझेमिल जाओ मेरे भइया। तुमसे मिलकर मे अपने किये कि माफ़ी माॅगना चाहती हूॅ। मुझे एहसास हैं कि मेरे भइया कि मैने बचपन सें लेकरअब तक तुम्हें मात्र दुख दिया हैं। तुम्हें तरहतरह कि बातों सें जलील किया थां। मगर एक् तुम् थें कि मेरीउन कड़वी बातों कां कभी भि बुरा नहि मानते थें। जबकि कोई औऱ होता तोँ जिंदगी भर मुझे देख्ना तक पसन्द नं करता। मुझेसभी कुछ अच्छी तरह सें याद हैं भइया। मेरे माॅमडैड नें हमेशा हम् भइया बहनों कों यही सिखाया थां कि तुम् सभी बुरेलोग होँ इसलिए हम् तुमसे दूर रहें औऱ कभी भि किसीतरह कां कोईमेल मिलाप नं रखें। हम् बच्चे हि तौ थें भइया, जैसामाॅ बाप सिखाते थें उसी कों सचमान लेते थें औऱ फिनइस सबकीआदत हि पड़ गई थि। मगरउस दिन तुमने मेरी इज्ज़त बचाकर यहजता दिया कि तुम् बुरे नहि होँ सकते। जिस तरह सें तुम् मुझेदेख कर नफ़रत व घृणा सें अपनामुह मोड़कर चलेगए थें, उससे मुझे एहसास होँ चुका थां कि तुमने जोँ किया वोँ एक् ऊॅचे दर्ज़े कां कर्म थां औऱ जौ मैंने अब तक किया थां वोँ हद सें भि अधिक निचले दर्ज़े कां कर्म थां। मुझेबस एक् बारमिल जाओराज। मे तुमसे अपने गुनाहों कि माफ़ी माॅगना चाहती हूॅ। तुम् जौ भि सज़ा दोगेउस सज़ा कों मे खुशी खुशी कुबूल कर लूॅगी। प्लीज़ राज, बस एक् बार मुझेमिल जाओ। तुम् काॅलेज क्यूं नहि आँ रहे होँ? क्याँ इतनी नफ़रत करते होँ तुम् अपनीइस बेहन सें कि जिस काॅलेज मे मे हूॅ वहाॅ तुम् पढ़ हि नहि सकते?ऐसा मत करना मेरे भइया। वरना मे अपनी हि नज़रों मे इस क़दरगिर जाऊॅगी कि फिनउठ पाना मेरेलिए असंभव हौ जाएगा। "
यहसभी बातें अपने आप् सें हि करना जैसे नीलम कि दिनचर्या मे शामिल हौ गय़ा थां। उसके मौसी कि लड़कीउसे इस बारे मे बहोत समझाती मगर नीलम पऱ उसकी बातों कां कोईअसर न् होता। काॅलेज मे हुई घटना सें नीलम थोडा गुमसुम सि रहनेलगी थि। मगर इसका कारणयही थां कि विराज काॅलेज नहि आँ रहा थां। वोँ हर रोज़ वक़्त पऱ काॅलेज पहुॅच जाती औऱ सारादिन काॅलेज मे रुकती। उसकी नज़रें हरदिन अपने भइया कों तलाश करतीमगर अंत मे उन ऑखों मे मायूसी केँ संगसंग ऑसूभर आते औऱ फिन वोँ दुखीभाव सें घऱलौट जाती। कालेज केँ बाॅकी स्टूडेंट्स नार्मल हि थें। उस घटना केँ बाद किसी नें कभीकोई टीका टिप्पणी न् कि थि।
कुछदेर ऐसे हि सोचो मे गुम वो बेड पऱ पड़ीरही उसकेबाद वोँ उठी औऱ बाथरूम कि तरफबढ़ गई। बाथरूम मे फ्रेश होने केँ बाद वोँ वापस कमरे मे आई औऱ काॅलेज केँ यूनीफार्म पहनकर तथा कंधे पऱ एक् मध्यम साइज़ कां बैग लेकर वोँ कमरे सें बाहर् कि तरफ बढ़ी हि थि कि उसकाफोन बजउठा। उसनेबैग केँ ऊपरी हिस्से कि सुकून खोला औऱ अपनाफोन निकाल कर स्क्रीन पऱ नज़र आँ रहे "माॅम"नाम कों देखा तोँ उसनेकाल रिसीव करफोन कानों सें लगा लिया।
".। " उधर सें प्रतिमा नें कुछकहा।
"क्याऽऽऽ????" नीलम केँ हाॅथ सें फोन छूटते छूटते बचा थां। उसकेहलक सें जैसेचीख सि निकल गई थि, बोलीं___"यह यह आप् क्याँ कहरही हें माॅम?डैड कों सीबीआई वाले लें गए?मगर क्यूं??? आख़िर ऐसा क्याँ किया हैं डैड नें?"
".। " उधर सें प्रतिमा नें फिनकुछ कहा।
"ओह अब क्याँ होगा माॅम?" प्रतिमा कि बात सुनने केँ बाद नीलम नें संजीदगी सें कहा___"क्याँ रितू दिदी नें कुछ नहि किया? वोँ भि तौ एक् पुलिस ऑफिसर हें?"
".। " उधर सें प्रतिमा नें कुछदेर तक कुछबात कि।
"क्याऽऽ???" नीलम बुरीतरह उछल पड़ी____"यह आप् क्याँ कहरही हें? दिदी भलाऐसा केसेकर सकती हें माॅम? नहि नहि, आपको औऱ डैड कों अवश्य कोई ग़लतफहमी हुइ हैं। रितू दिदी यहसभी कर हि नहि सकती हें। आप् तौ जानती हें कि दिदी नें कभी उसकीतरफ देख्ना तक मनपसंद नहि किया थां। फिनभला आज वोँ केसे उसकासंग देने लगीं?यह तौ इम्पाॅसिबल हैं माॅम। "
".। " उधर सें प्रतिमा नें फिनकुछ कहा।
"मे इस बारे मे दिदी सें बात करूॅगी माॅम। " नीलम नें गंभीरता सें कहा___"उनसे पूछूॅगी कि आख़िर वोँ यहसभी क्यूं कररही हें?"
".। " उधर सें प्रतिमा नें झट सें कुछकहा।
"क्यूं नहि पूॅछ सकती माॅम?" नीलम नें ज़रा चौंकते हुए कहा___"आख़िर पता तौ चलना हि चाहिए कि उनकेमन मे क्याँ हैं अपने पैरेंट्स केँ प्रति? इसलिए मे उनसे मोबाइल लगाकर अवश्य इस बारे मे बात करूॅगी। "
".। " उधर सें प्रतिभा नें फिनकुछ कहा।
"मे भि आँ रहीहूॅ माॅम। " नीलम नें कहा___"ऐसे टाइम मे मे मुझे अपनेमाॅ डैड केँ पास हि रहना हैं। दूसरी बात मे देख्ना चाहती हूॅ कि रितू दिदी यहसभी केसे करती हें अपने हि माॅ बाप औऱ भइया केँ खिलाफ़?"
".। " उधर सें प्रतिमा नें कुछकहा।
"ओके माॅम। " नीलम नें कहा औऱ कालकट कर दिया।
इस समय उसके दिलो दिमाग़ मे एकाएक हि तूफान सां चालू होँ गय़ा थां। मन मे तरहतरह केँ प्रश्न उभरने लगे थें। जिनका जवाब फिलहाल उसकेपास न् थां लेकिन जानना आवश्यक थां उसकेलिए। दरवाजे कि तरफ न् जाकर वो वापसपलट करबेड पऱ बैठ गई औऱ गहनसोच मे डूब गई।
"डैड कों सीबीआई वाले अपनेसंग लेँ गए। " नीलममन हि मनसोच रही थि___"वजह यह कि उनकेशहर वाले घर-मकान सें भारी मात्रा मे चरस अफीमव ड्रग्स जैसीगैर कानूनी चीज़ें सीबीआई वालो कों बरामद हुइ। प्रश्न यह उठता हैं कि क्याँ सच मे डैडइस तरह कां कोई ग़ैर कानूनी धंधा करते हें? वहीं दूसरी तरफ रितू दिदी आजकल अपने हि पैरेंट्स केँ खिलाफ़ जाकरराज कां संगदे रही हें। भलायह असंभव काम संभव केसे होँ सकता हैं? आख़िर ऐसा क्याँ हुआ हैं कि दिदी माॅमडैड केँ सबसे बड़े दुश्मन कां संग देनेलगी हें? माॅम नें बताया कि राज गाॅवआया थां, इसका मतलबइसी लिए वोँ काॅलेज नहि आँ रहा थां। मगर वोँ गाॅव गय़ा किसलिए थां? औऱ गाॅव मे ऐसा क्याँ हुआ हैं कि दिदी अपनेउस चचेरे भइया कां संग देने लगीं जिसे वोँ कभी देख्ना भि पसन्द नहि करतीथीं?"
नीलम केँ ज़हन मे हज़ारों तरह केँ प्रश्न इधरउधर घूमने लगे थें मगर नीलम कों यहसभी बातें हजम नहि होँ रही थि। सोचते सोचते सहसा नीलम केँ दिमाग़ कि बत्ती जली। उसकेमन मे विचार आया कि वोँ स्वयं भि तौ कभीराज कों अपना भइया नहि समझती थि जबकि आज हालात यह हें कि वोँ अपनेउसी भइया सें मिलकर अपनेउन गुनाहों कि उससे माफ़ी माॅगना चाहती हैं। कहीं नं कहीं उसका अपनेइस भइया केँ प्रति हृदय परिवर्तन हुआ थां तभी तोँ उसकेदिल मे ऐसे भावनात्मक भावआए थें। दूसरी तरफ रितू दिदी भि राज कां संगदे रही हें। इसका मतलबकुछ तोँ ऐसाहुआ हैं जिसके चलते दिदी कां भि राज केँ प्रति हृदय परिवर्तन हुआ हैं औऱ वोँ आज उसकासंग भि देरही हें। इतना हि नहि अपने हि पैरेंट्स केँ खिलाफ़ राज केँ संग लड़ाई लड़रही हें।
नीलम कों अपनायह विचार जॅचा। उसको एहसास हुआ कि कुछ तोँ ऐसीबात हुइ जिसका उसेइस वक़्त कोईपता नहि हैं। यहसभी सोचने केँ बाद उसनेफोन पर्र रितू दिदी कां नंबर ढूॅढ़ा औऱ काललगा करफोन कान सें लगा लिया। काल जाने कि रिंग बजती सुनाई दि उसे। कुछ हि देर मे उधर सें रितू नें काल रिसीव किया।
".। " उधर सें रितू नें कुछकहा।
"मे तौ बिलकुल ठीकहूॅ दिदी। " नीलम नें कहा___"आप् बताइये आप् कैसी हें?"
".। " उधर सें रितू नें फिनकुछ कहा।
"हाॅ दिदी काॅलेज अच्छा चलरहा हैं औऱ संग मे पढ़ाई भि अच्छी चलरही हैं। " नीलम नें कहने केँ संग हि पहलू बदला___"दिदी, अभि अभि माॅम कां मोबाइल आया थां मेरेपास। उन्होंने कुछऐसा बताया जिसेसुन कर मेरेहोश हि उड़गए हें। वोँ कहरही थि कि डैड कों सीबीआई वाले ग़ैर कानूनी सामान केँ चलते अपनेसंग लेँ गए हें। यह भि कि आप् विराज कां संगदे रही हें। यहसभी क्याँ चक्कर हैं दिदी? प्लीज़ बताइये न् कि ऐसा क्याँ हौ गय़ा हैं कि आप् अपने हि पैरेंट्स केँ खिलाफ़ हें? माॅमकह रही थि कि आपने उनकाकाल भि रिसीव नहि किया। वोँ आपको भि डैड केँ बारे मे सूचित करना चाहती थि। "
".। " उधर सें रितू नें बहुतदेर तक कुछकहा।
"बातों कों गोलगोल मत घुमाइये दिदी। " नीलम नें बुरा सां मुह बनाया____"साफ साफ बताइये नं कि आख़िर क्याँ बात होँ गई हैं जिसकी वजह सें आप् माॅमडैड केँ खिलाफ़ हौ करउस विराज कां साददे रही हें?"
".। " उधर सें रितू नें फिनकुछ कहा।
"इसका मतलब आप् स्वयं मुझेकुछ भि बताना नहि चाहती हें। " नीलम नें कहा___"औऱ यहकहरही हें कि सच्चाई कां पता मे स्वयं लगाऊॅ। ठीक हैं दिदी, मे आँ रहीहूॅ। क्याँ आपसेमिल भि नहि सकती मे?"
".। " उधर सें रितू नें कुछकहा।
"ठीक हैं दिदी। " नीलम नें कहा___"मगर मे इतना अवश्य जानती हूॅ कि बातभले हि चाहे जोँ कुछ भि हुई होँ मगरऐसा नहि होना चाहिए कि बच्चे अपनेमाॅ बाप सें इसतरह खिलाफ़ हौ जाएॅ। "
इतना कहने केँ बाद नीलम नें कालकट कर दिया औऱ फिन दुखीभाव सें बेड पऱ कुछदेर बैठी जाने क्याँ सोचती रही। उसकेबाद जैसे उसनेकोई फैसला किया औऱ फिनउठ कर काॅलेज कि यूनिफार्म कों उतारने लगी। कुछ हि देर मे उसने दूसरे कपड़े पहनलिए औऱ फिन कमरे सें बाहर् निकल गई।
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इधर विराज एण्ड जश्न कि ट्रेन अपने निर्धारित टाइम सें कुछ हि टाइम कि देरी सें आख़िर मुम्बई पहुॅच हि गई थि। सभीलोग ट्रेन सें बाहर् आए औऱ फिन प्लेटफार्म सें बाहर् कि तरफ निकलगए। विराज नें मुम्बई पहुॅचने सें पहले हि जगदीश ओबराय कों मोबाइल कर दिया थां। इसलिए जैसे हि यहलोग स्टेशन सें बाहर् आए वैसे हि जगदीश ओबराय बाहर् मिल गय़ा। उसकेसंग एक् गाड़ी औऱ थि। सभीलोग वाहन मे बैठकर घऱ केँ लिए निकलगए।
रास्ते मे जगदीश अंकल नें मुझे बताया कि उन्होंने माॅ सें बातकर ली हैं। पहले तोँ माॅ मेरी वापसी कि बातसुन कर नाराज़ हुईं। मगर जगदीश अंकल नें उन्हें सारीबात तरीके सें बताई औऱ यह यकीन दिलाया कि मुझेकुछ नहि होगातब जाकर वोँ राज़ी हुई थि। मगर उन्होंने यह भि कहा कि वोँ एक् बार मुझे देख्ना चाहती हें। अतःअब मे इन लोगों केँ संग हि घऱ तक जारहा थां। वरना मेरा प्लान यह थां कि मे यहाॅ सें वापसउसी ट्रेन सें लौट जाता।
मुम्बई सें वापसी केँ लिएइसी ट्रेन कों करीब-करीब कुछ घण्टे बाद जानां थां इसलिए मे बड़े धीरे-धीरे गर जाकरमाॅ सें मिल सकता थां। ख़ैर, कुछ हि वक्तबाद हम् सभीघऱ पहुॅच गए। घऱ पऱ सभी एक् दूसरे सें मिले। करुणा चाची जबमाॅ सें मिली तौ बहोत रोरही थि औऱ बारबार माॅ सें माफ़ियाॅ माॅगरही थि। माॅ नें उन्हें अपने सीने सें लगा लिया थां। करुणा चाची कों वोँ हमेशा अपनी छोटी बेहन कि तरह मानती थि औऱ प्रेम करती थि। आशा दिदी औऱ उनकीमाॅ सें भि मेल मिलाप हुआ। मिलने मिलाने मे हि बहुत वक्त ब्यतीत हौ गय़ा थां।
मे अपने कमरे मे जाकर फ्रेश होँ गय़ा थां। आदित्य भि फ्रेश हौ गय़ा थां। उसे मेरेसंग हि वापस गाॅव जानां थां। निधी भि सबसे मिली। करुणा चाची नें उसेढेर सारा प्रेम व स्नेह दिया थां। दिव्या औऱ शगुन कों माॅ नें अपने सीने सें हि छुपकाया हुआ थां। अभय चाचा खुश थें कि उनके पत्नि बच्चे सही सलामत यहाॅ आँ गए थें। अब उन्हें उनकेलिए कोई फिक्र नहि थि। शायदयही वजह थि कि वोँ स्वयं भि मेरेसंग चलने कि बात करनेलगे थें। उनका कहना थां कि वोँ स्वयं भि इसजंग मे हिस्सा लेंगे औऱ अपने बड़े भइया सें इस सबका बदला लेंगे। मगर मैने औऱ जगदीश अंकल नें उन्हें समझा बुझाकर मनाकर दिया थां।
मैने एक् बात महसूस कि थि कि निधी कां बिहैवियर मेरे प्रति कुछअलग हि थां। इसके पहले वो हमेशा मेरे पषास मे हि रहने कि कोशिश करती थि जबकि अब वोँ मुझसे दूरदूर हि रहरही थि। यहाॅ तक कि मेरीतरफ देख भि नहि थि वोँ। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि वोँ ऐसा क्यूं कररही थि। मैने एक् दोबार स्वयं उससेबात करने कि कोशिश कि मगर वोँ किसी नं किसी बहाने सें मेरेपास सें चली हि जाती थि। मुझे उसकेइस रूखे ब्यवहार सें तक़लीफ़ भि होँ रही थि। वोँ मेरीजान थि, मे उसकी बेरुखी समयभर केँ लिए भि सह नहि सकता थां मगर सबके सामने भला मे उससेइस बारे केसेबात कर सकता थां? मेरेपास टाइम नहि थां, इसलिए मैनेमन मे सोच लिया थां कि सभीकुछ ठीक करने केँ बाद मे उससेबात करूॅगा औऱ उसकी किसी भि प्रकार कि नाराज़गी कों दूर करूॅगा।
मे माॅ सें मिला तौ माॅ मेरी वापसी कि बात सें भावुक हौ गईं। उन्हें पता थां कि मे वापसकिस लिएजा रहाहूॅ इसलिए वोँ मुझेबार बार अपना ख़याल रखने केँ लिएकह रही थि। ख़ैर मैने उन्हें आश्वस्त कराया कि मे स्वयं कां ख़याल करूॅगा औऱ मुझेकुछ नहि होगा।
चलने सें पहले मैने सबसे आशीर्वाद लिया औऱ फिन आदित्य केँ संग वापसी केँ लिएचल दिया। मेरेसंग जगदीश अंकल भि थें। पवन औऱ आशा दिदी मुझे अपना ख़याल रखने कां कहा औऱ खुशी खुशी मुझे विदा किया। हलाॅकि मे जानता थां कि वोँ अंदर सें मेरे जाने सें दुखी हें। उन्हें मेरी फिक्र थि। अभय चाचा नें मुझे सम्हल कर रहने कों कहा। करुणा चाची नें मुझे प्रेम दिया औऱ विजयी होने कां आशीर्वाद दिया। मे दिव्या औऱ शगुन कों प्रेम व स्नेह देकर निधी कि तरफ देखा तोँ वोँ कहीं नज़र नं आई। मे समझ गय़ा कि वोँ मुझसे मिलना नहि चाहती हैं। इसबात सें मुझे तक़लीफ़ तोँ हुइ लेकिन फिन मैंने उस तक़लीफ़ कों जज़्ब किया औऱ जगदीश अंकल केँ संग वाहन मे बैठकर वापस रेलवे स्टेशन कि तरफचल दिया।
रेलवे स्टेशन पहुॅच कर मे औऱ आदित्य वाहन सें उतरे। जगदीश अंकल नें मुझे एक् पैकिट दिया औऱ कहा कि मे उसे अपनेबैग मे चुपचाप डाललूॅ। मैनेऐसा हि किया। उसकेबाद जगदीश अंकल सें मेरीकुछ ज़रूरी बातें हुईं औऱ फिन मे औऱ आदित्य प्लेटफार्म कि तरफबढ़ गए। ट्रेन वापसी केँ लिएबस चलने हि वाली थि। हम् दोनो ट्रेन मे अपनी अपनीशीट पर्र बैठगए। मैनेफोन सें रितू दिदी कों मोबाइल किया औऱ उन्हें बताया कि सभी लोगों कों मैने सुरक्षित पहुॅचा दिया हैं औऱ अब मे वापस आँ रहाहूॅ। रितू दिदी इसबात सें खुश हौ गईं। फिन उन्होंने मुझे अख़बार मे छपी ख़बर केँ बारे मे बताया औऱ पूॅछा कि यहसभी क्याँ हैं तोँ मैनेकहा कि मिलकर बताऊॅगा।
रितू दिदी सें बात करने केँ बाद मे आदित्य सें बातें करनेलगा। तभी मेरी नज़र एक् ऐसे चेहरे पऱ पड़ी जिसेदेख कर मे चौंक पड़ा औऱ हैरान भि हुआ। मेरेमन मे प्रश्न उठा कि क्याँ उसने मुझेदेख लिया होगा????? मैने अपनी पैंट कि जेब सें रुमाल निकाल कर अपनेमुख पऱ बाॅध लिया औऱ फिन धीरे-धीरे आदित्य सें बातें करनेलगा। लेकिन मेरी नज़रबार बारउस चेहरे पर्र चली हि जाती थि। जिस चेहरे पर्र मे एक् अजीब सि उदासी देखरहा थां।
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एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,
देरी केँ लिए मे तहेदिल सें माफ़ी चाहता हूॅ दोस्तो। बीच मे मे काम कि वजह सें बहोत ज़्यादा ब्यस्त होँ गय़ा थां। एपसोड कल हि सजधजकर होँ गय़ा थां औऱ मे एपसोड कों आप् सबके सामने हाज़िर भि करना चाहता थां, मगरइस फोरम कि साइट मेरेफोन पर्र खुल हि नहि रही थि। अभि सुभह मैनेफिन सें ओपेन किया तौ खुल गई, तौ मैने आपके सामने भाग हाज़िर कर दिया।
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