♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 08 》
अब तक.
"क्याँ बड़बड़ा रही हैं तूँ?" गौरी नें आखें दिखाते हुएकहा।
"कुछ नहींमाॅ। " निधि नें जल्द सें कहा__"वोँ भाई कों हनुमान चालीसा कां रोजाना पाठ करने कों कहरही थि। "
"वोँ क्यूं भला?" गौरी केँ माॅथे पर्र बल पड़ता चला गय़ा। जबकि निधि कि इसबात सें विराज कि हॅसीछूट गई। वोँ ठहाके लगाकर जोरजोर सें हॅसेजा रहा थां। निधि अपनी हॅसी कों बड़ी मुश्किल सें रोंके इसतरह मुह बनाए खड़ी थि जैसे वोँ महामूर्ख हौ। इधर विराज केँ इस प्रकार हॅसने सें गौरी कों कुछसमझ न् आया कि उसका बेटा किसबात इतना हॅसेजा रहा हैं?
अबआगे,,,,,,
इसीतरह एक् हप्ता गुज़र गय़ा। इसबीच विराज अपनीमाॅ औऱ बेहन कों लेकर जगदीश ओबराय केँ बॅगले मे आकर रहनेलगा थां। जगदीश ओबराय इन लोगों केँ आने सें बहोत खुशहुआ थां। गौरी कों अपनी छोटी बेहन केँ रूप मे पाकरउसे बेहद खुशी हुईँ, गौरी भि उसे अपने बड़े भइया केँ रूप मे पाकरखुश हौ गई थि। निधि तोँ सबकी लाडली थि हि, अब जगदीश केँ लिए भि वो एक् गुड़िया हि थि।
निधि कां स्वभाव चंचल थां। उसमें बचपना थां तथा वो शरारती भि बहोत थि लेकिन पढ़ाई लिखाई मे उसकामन बहोत तेज़ थां। उसने दसवीं क्लास 90% मार्क्स केँ संगपास किया थां। इसकेआगे वो पढ़ न् सकी थि क्योकि तब तक हालात बहोत खराब होँ चुके थें। गाॅव मे दसवीं तक हि विद्यालय थां। आगे पढ़ने केँ लिएउसे पास केँ शहर जानां पड़ता, हलाॅकि शहर जाने मे उसकोकोई समस्या नहि थि लेकिन हालात ऐसे थें कि उनमाॅ बेटी कां घऱ सें निकलना मुश्किल होँ गय़ा थां। आएदिन अजय सिंह कां बेटा शिवागलत इरादों सें उसे छेंड़ता थां। यह दोनो बाप बेटे एक् हि थाली मे खाने वाले थें। अजय सिंह कि नीयत गौरी पर्र खराब थि। जबकि गौरी उसके मझले स्वर्गीय भइया विजय सिंह कि बेवा थि तथा निधि उसकी बेटी समान थि। यह दोनो बाप बेटे अपने हि घऱ कि इज्जत सें खेलना चाहते थें। पैसे औऱ ताकत केँ घमंड मे दोनो बाप बेटे रिश्तों कि मान मर्यादा भूल चुके थें।
जगदीश ओबराय नें निधि कि पढ़ाई कों ध्यान मे रखतेहुए उसका एडमीशन सबसे अच्छे विद्यालय मे करवा दिया थां। अभि वक़्त थां इसलिए विद्यालय मे दाखिला बड़ी आसानी सें होँ गय़ा थां। अब निधि रोजाना विद्यालय जाती थि। अपनी पढ़ाई केँ पुनः प्रारम्भ होँ जाने सें निधि बहोत खुश थि।
विराज अब चूॅकि स्वयं हि जगदीश ओबराय कि सारी सम्पत्ति कां इकलौता मालिक थां इसलिए अब वो कंपनी मे मैनेजर केँ रूप मे नहि बल्कि कंपनी केँ एमडी केँ रूप मे जाता थां। कंपनी मे काम करने वालाहर ब्यक्ति यहजान कर आश्चर्य चकित थां कि कंपनी मे काम करने वाला एक् मैनेजर आजइस कंपनी कां मालिक हैं, यानीउन सबका मालिक। किसी कों यहबात हजम हि नहि होँ रही थि। हर ब्यक्ति विराज औऱ विराज कि क़िस्मत सें रक़्श कररहा थां। विराज केँ उच्च अधिकारी जौ पहले विराज कों हुक्म देते थें तथाउसे तुच्छ समझते थें वोँ अब विराज केँ सामने उसकेमहज एक् इशारे सें किसी गुलाम कि तरहसर झुकाए खड़े होँ जाते थें। कोई भि उच्च अधिकारी विराज केँ सामने किसी गुलाम कि तरह झुकना नहीं चाहता थां औऱ न् हि उसको अपना बाॅस मानना चाहता थां लेकिन अबयह संभव नहीं थां। सच्चाई सबके सामने थि औऱ उस सच्चाई कों स्वीकार करके उसको अपनाना सब केँ लिएअब अनिवार्य थां। विराज यहसभी बातें अच्छी तरह जानता थां। इसलिए उसने सबसे पहले एक् मीटिंग रखी जिसमें कंपनी केँ सब उच्च अधिकारी शामिल थें। मीटिंग मे विराज नें बड़ी शालीनता सें सबके सामने यहबात रखी कि अगर किसी केँ दिलो दिमाग़ मे कोईबात हैं तोँ वोँ खुलकर जाहिर करे। वोँ अब ओबराय कंपनीज कां मालिक हैं इससेअगर किसी कों कोई तकलीफ हौ तोँ वोँ बतादे अन्यथा बाद मे किसी कां भि गलत ब्यौहार याँ किसी भि तरह कि गलतबात कां पता चलते हि उसे कंपनी सें आउटकर दिया जाएगा।
विराज नें यह भि कहा कि आज वो भले हि ओबराय कंपनीज़ कां मालिक बन गय़ा हैं मगर वो कंपनी मे काम करने वालेसब कर्मचारियों कों हमेशा अपना मित्र याँ भइया हि समझेगा।
विराज कि इन बातों सें मीटिंग रूम मे बैठे बहुत उच्च अधिकारी प्रभावित हुए औऱ कुछों केँ चेहरे पर्र अब भि अजीब सें भाव थें। सबके चेहरों केँ भावों कों बारीकी सें जाॅचने केँ बाद विराज नें अंत मे यह भि कहा कि अगर किसी केँ दिलोमन मे ऐसीबात हैं कि वोँ इस सच्चाई कों स्वीकार नहि कररहे हें तोँ वोँ शौक सें अपना अपना स्तीफा देकरजा सकते हें।
कुछलोग हालातों सें बड़ा जल्द समझौता करकेआगे बढ़ जाते हें लेकिन कुछऐसे भि होते हें जोँ बिना मतलब कां खोखला सम्मान औऱ गुरूर लेकर खाली हाॅथ बैठेरह जाते हें। कहने कां मतलबयह कि मीटिंग केँ बाद एक् हप्ते केँ अंदर अंदर कंपनी केँ बहुत उच्च अधिकारियों नें स्तीफा दे दिया। विराज जैसे जानता थां कि यही होगा। इस लिए उसने पहले सें हि ऐसे लोगों कों उनकी स्थान स्लिम किया जोँ उसकी नज़र मे इमानदार व वफादार होने केँ संगसंग उसके अपने साथी भि थें।
ऐसे हि पन्द्रह बीसदिन गुज़र गए। विराज अब कुशलतापूर्वक कंपनी कां सारा कारोबार सम्हालने लगा थां। जगदीश ओबराय उसकीहर तरह सें सहायता भि कररहा थां। उसने एक् ग्राण्ड जश्नरखी जिसमें शहर केँ सब बड़े बड़ेलोग आमंत्रित थें। यहाॅ तक कि मंत्री मिनिस्टर तथा पुलिस महकमें केँ उच्च अधिकारी वगैरा सभी। इस बर्थडे पार्टी कों रखने कां एक् खास मकसद थां औऱ वोँ थां विराज कों सबके सामने प्रमोट करना। जगदीश नें स्टेज मे जाकरतथा एनाउंसमेन्ट कर सबको बताया कि उसकी सारी मिल्कियत कां अब सें विराज हि अकेला वारिस तथा मालिक हैं। सभीयह सुनकर हैरान भि थें औऱ खुश भि। सब बड़े बड़े लोगों सें विराज कों मिलवाया गय़ा।
कथा जारी रहेगी,,,,,,,
WAAH SUBHAM bhay KYA SHAANDAAR kahani START kee h BHAHUT HI MAST h yeh kahani.or AAO kee LEKHAN SHAILY. TAAREEF KYA KARU TAAREEF k LIYE SHABD nahee MERE pas.bhut HI UMDA story h h.
धन्यवाद भइया,,,,, आपकेऐसे फीडबैक सें प्रसन्नता हुइ। अपनीराय औऱ सुझाव भि देते रहें,,,,,
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अब विराज कोईआम इंसान नहि रह गय़ा थां बल्कि अबउसे साराशहर जानता थां। प्रेस औऱ मीडिया वालों कों कुछ सोचकर जगदीश नें जश्न मे आने नहि दिया थां। अब उसका सम्मान औऱ रुतबा वैसा हि होँ गय़ा थां जैसे स्वयं जगदीश ओबराय कां थां। गौरीव निधिइस सबसे बहोत हि खुशथीं। उनकेमन मे जगदीश केँ प्रति बड़ाआदर औऱ सम्मान हौ गय़ा थां। अबयहसभी जगदीश कों पूरीतरह अपना मानने लगे थें। उन्होंने यह सपने मे भि नहि सोचा थां कि ऐसा असंभव कार्य भि कभी होगामगर सच्चाई अब उनके सामने थि। आज गौरी कां बेटा हज़ारों करोड़ों रूपये कि सम्पत्ति कां मालिक थां। गौरीइस बात केँ लिए ईश्वर कां लाखलाख धन्यवाद अदाकर रही थि।
जगदीश ओबराय हार्ट कां मरीज़ थां। उसने अपने जिंदगी मे एक् हि झटके मे अपनों कों खोया थां। उसके एक् हि बेटा थां, अमरीश ओबराय। अमरीश कि नईनई विवाह हुइ थि औऱ वोँ अपनी पत्नि केँ संग हनीमून केँ लिए इटलीजा रहा थां। लेकिन इटलीजा रहा विमान क्रैस होँ गय़ा औऱ एक् हि झटके मे विमान मे बैठेसब पैसेंजर मौत कों प्राप्त हौ गए थें। उस हादसे सें जगदीश कि मुकम्मल दुनिया हि तबाह होँ गई। उसका अपनाकोई नहि बचा थां। उसकी इतनी बड़ी दौलत औऱ इतने बड़े कारोबार कों सम्हालने वालाकोई नहि बचा थां। उसकी पत्नि तौ पहले हि गुज़र गई थि जिससे वो बेहद प्रेम करता थां। इस सबसे जगदीश दिल कां मरीज़ बन गय़ा थां, उसेदो बारदिल कां दौरापड़ चुका थां जिसमें वो बड़ी मुश्किल सें बचा थां। वो रातदिन इसीसोच मे मराजा रहा थां कि उसकेबाद उसकी मिल्कियत कां अब क्याँ होगा? उसके कम्पटीटर कहीं नं कहींइस बात सें खुश थें औऱ जोँ उसके घनिष्ठ दोस्त थें वोँ जगदीश कि इस हालत सें दुखी थें। वो चाहता तौ इसउमर मे भि दूसरी विवाह कर सकता थां जिसके लिए उसकेखास चाहने वाले मित्रों नें सुझाव भि दिया थां। लेकिन जगदीश नें दूसरी विवाह करने सें साफमना कर दिया थां। उसका कहना थां कि इसउमर मे वो किसी सें विवाह नहि करेगा, लोग उसके बारे मे क्याँ सोचेंगे कि उसने अपनी बेटी कि उमर वाली लड़की सें विवाह कि।
अपनों केँ खोने कां दुख औऱ उसके द्वारा रातदिन सोचते रहने कि वजह सें वो दिल कां मरीज़ बन गय़ा थां। इतने बड़े बॅगले मे वो अकेला रहता थां, यह अकेलापन उसे किसी सर्प कि भाॅति रातदिन डसता रहता थां। नौकर चाकर तौ बहोत थें मगर जिनसे उसकेमन कों तथा आत्मा कों चैनव त्रप्ति मिलती वोँ उसके अपने नहि थें। विराज केँ आने सें उसेऐसा लगा जैसेउसे उसका खोयाहुआ बेटा अमरीश मिल गय़ा थां। उसने विराज केँ बारे मे गुप्त रूप सें सारी मालुमात कि थि। विराज केँ अपनों नें उसके औऱ उसकीमाॅ बेहन केँ संग क्याँ अत्याचार कियायह उसकोपता चला थां। विराज कां नेचरउसे बहोत अच्छा लगा। विराज एक् होनहार तथा मेहनती लड़का थां। जगदीश नें फैसला कर लिया थां कि विराज हि अब उसका 'अपना' होगा। उसने विराज कों अपने बॅगले मे बुलवाया औऱ तसल्ली सें उससेबात कि। उसने विराज सें उसके बारे मे सभी बातें पूछी औऱ स्वयं भि अपनेमन कि बात विराज कों बताई कि वो क्याँ चाहता हैं। अपने बाॅसव मालिक कि यह बातें सुनकर विराज चकित थां, उसे यकीन हि नहि होँ रहा थां कि कोईऐसा भि कर सकता हैं।
विराज नें जगदीश कि बातें सुनकर यहकहा कि उसे सोचने केँ लिएसमय चाहिए। जगदीश नें उसे टाइम दिया औऱ विराज वहाॅ सें चलाआया थां। उसने अकेले मे इस बारे मे बहोत सोचा। उसे जगदीश केँ प्रति ऐसाकुछ भि नहि लगा कि इस सबके पीछे जगदीश कां कोईगलत इरादा याँ मकसद हौ। कंपनी मे काम करने वालेसब कर्मचारियों कि तरह वो भि यहबात जानता थां कि उसके मालिक जगदीश ओबराय निहायत हि एक् सच्चे व नेकदिल इंसान हें। उनकी नेकनीयती व नरमदिली कां कंपनी केँ कुछ उच्च अधिकारी लोग ग़लत फायदा उठारहे थें। जिनका उसने बड़ी सफाई सें पर्दाफाश किया थां। किसी कों इसबात कां पता तक न् चला थां। विराज नें पक्के सबूत इकट्ठा करके सीधा जगदीश ओबराय केँ सामने रख दिया थां। जगदीश ओबराय विराज केँ इस कार्य औऱ उसकीइस इमानदारी सें बेहद प्रभावित हुए थें। उन्होंने विराज कों अपनीसब कंपनियों कि गुप्तरूप सें जाॅच पड़ताल कां काम सौंप दिया लेकिन प्रत्यक्ष रूप मे वो कंपनी कां एक् मैनेजर हि रहा।
जगदीश ओबराय केँ द्वारा सौंपे गएइस गुप्त कार्य कों उसने बड़ी हि कुशलता तथा सफाई सें अंजाम दिया। एक् महीने केँ अंदर अंदर हि उन सबको तगड़े नोटिश केँ संग कंपनी सें तत्काल निकाल दिया गय़ा। किसी कों कुछ सोचने समझने कां मौका तक नहि मिला औऱ नं हि किसी कों यहसमझ आया कि यह अचानक उनकेसंग क्याँ औऱ केसे हौ गय़ा? सबूत क्योंकि पक्के थें इसलिए उन सबको वोँ सभी भारी हरजाने केँ संग देना पड़ा जोँ उन सबने कंपनी सें खाया थां। एक् झटके मे हि सबकेसभी भीख माॅगने कि हालत मे आँ गए थें। बातअगर इतनी हि बस होती तौ भि ठीक थां लेकिन उनके द्वारा कियेगए इन कार्यों केँ लिएउन सबकोजेल कां दाना पानी भि मिलना नसीब होँ गय़ा थां।
विराज द्वारा कियेगए इस अविश्वसनीय कार्य सें जगदीश ओबराय बहोत खुशहुए। उनकेमन मे विचार आया कि विराज केँ बारे मे उन्होंने जौ फैसला लिया हैं वोँ हर्गिज भि ग़लत नहीं हैं।
दोस्तो आप् सभीसमझ सकते हें कि यहसभी बताने केँ पीछे मेरा क्याँ मकसद हौ सकता हैं? औऱ अगर नहि समझे हें तौ बता देताहूॅ,,, दरअसल बातयह हैं कि किन परिस्थितियों कि वजह सें विराज कों आजयहसभी प्राप्त हुआ ? आखिर विराज मे जगदीश कों ऐसा क्याँ नज़रआया कि उसनेउसे अपनासभी कुछमान भि लिया औऱ सभीकुछ दे भि दिया? हलाॅकि आज केँ युग कि सच्चाई यह हैं कि आप् भले हि किसी केँ लिए अपनासभी कुछ निसार कर दीजिए लेकिन बदले मे आपकोकुछ मिलने कि तौ बातदूर आपके द्वारा कियेगए इस बलिदान कां कोई एहसान तक नहि मानता। ख़ैर, जाने दीजिए.हम् स्टोरी पऱ चलते हें।
स्टोरी जारी रहेगी,,,,,,,,
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"डैड मुझे इसकेआगे कि पढ़ाई मुम्बई सें करना हैं। "नीलम नें बड़ी मासूमियत सें कहा थां__"मेरी सभी साथी भि वहींजा रही हें। "
"अरे बेटा। " अजय सिंह चौंका थां__"मगर यहाॅ क्याँ तकलीफ़ हैं भला? यहाॅ भि तौ पास केँ शहर मे बहोत अच्छा काॅलेज हैं?"
"यहाॅ केँ काॅलेजों मे कितनी अच्छी शिक्षा मिलती हैं यह तोँ आप् भि अच्छी तरह जानते हें डैड। " नीलम नें कहा__"मुझे अपनी डाक्टरी कि बेहतर पढ़ाई केँ लिए बेहतर शिक्षा कि आवश्यकता हैं। "
"अच्छी बात हैं बेटी। " अजय सिंह नें कहा__"मगर मुम्बई सें अच्छा तोँ तुम्हारे लिए दिल्ली रहेगा। क्योकि दिल्ली मे तुम्हारी बड़ी फूफी भि हैं। तुम् अपनी सौम्या फूफी केँ संगरह कर वहाॅ बेहतर पढ़ाई कर सकती हौ। "
"नहि डैड। " नीलम नें बुरा सां मुह बनाया__"मे मुम्बई मे अपनी मौसी केँ यहाॅरह कर पढ़ाई करूॅगी। आप् तौ जानते हें कि मौसी कि बड़ी बेटी अंजली दिदी आजकल मुम्बई मे हि एक् बड़े हास्पिटल मे एजअ डाक्टर काम करती हें। उनकेपास रहूॅगी तोँ उनसे मुझे बहोत कुछ सीखने कों भि मिलेगा। "
"यहसही कहरही हैं डैड। " रितु नें कहा__"अंजली दिदी केँ पासरह करइसे अपनी पढ़ाई केँ लिए बहुतकुछ जानने समझने कों भि मिल जाएगा। आप् इसे बड़ी मौसी केँ पास हि जाने दीजिए। "
"ठीक हैं बेटी। " अजय सिंह नें कहा__"तुम्हारी भि यहीराय हैं तोँ नीलमअब मुम्बई हि जाएगी। "
"ओह थैंक्यू सोमचडैड एण्ड। " नीलम नें खुश होँ करअजय सिंह सें कहने केँ बाद रितू कि तरफपलट कर कहा__"एण्ड थैंक्स यूटू दिदी। "
"कौन कहाॅजा रहा हैं डैड?" बाहर् सें ड्राइंग रूम मे आतेहुए शिवा नें कहा।
"तुम्हारी नीलम दिदी मुम्बई जारही हैं अपनी बड़ी मौसी पूनम केँ पास। "अजय सिंह नें कहा__"यह वहींरह कर अपनी डाक्टरी कि पढ़ाई करेगी। "
"क क्याँ.???" शिवाउछल पड़ा__"नीलम दिदी मुम्बई जाएंगी? नहि डैड आप् इन्हें मुम्बई केसेभेज सकते हें? जबकि आप् जानते हें कि हमारा सबसे बड़ा दुश्मन विराज मुम्बई मे हि हैं। "
"अरे उससेकोई फर्क नहि पड़ता बेटे। "अजय सिंह नें कहा__"औऱ उससे डरने कि भि कोई जरूरत नहि हैं। औऱ वैसे भि उसे क्याँ पता चलेगा कि नीलम कहाॅ हैं? वोँ तौ किसी होटल याँ ढाबे मे कप प्लेट धोरहा होगा। उसे इसकाम सें फुर्सत हि कहाॅ मिलेगी कि वोँ नीलम कों खोजेगा?"
"हाहाहा आप् सच कहते हें डैड। " शिवा ठहाका लगाकर जोरों सें हॅसते हुए कहा__"वोँ यकीनन किसी होटल याँ ढाबे मे कप प्लेट हि धोरहा होगा। "
"ख़ैर छोंड़ो। " अजय सिंह नें नीलम कि तरफदेख कर कहा__"तोँ तुम्हें कब जानां हैं मुम्बई?"
"मे तौ कल हि जाने कां सोचरही हूॅडैड। " नीलम नें कहा__"मैंने सारी तैयारी भि करली हैं। "
"चलोठीक हैं। " अजय सिंह नें कहा__"मे तुम्हारे लिए ट्रेन कि टिकट कां बोल देताहूॅ। "
"जीडैड। " नीलम नें कहा औऱ ऊपर अपने कमरे कि तरफपलट करचली गई।
"तूँ भि कुछ करेगा कि ऐसे हि आवारागर्दी करताइधर उधर घूमता रहेगा?" सहसा किचेन सें आती हुई प्रतिमा नें कहा__"सीख कुछ इनसे। ऐसे कब तक चलेगा?"
"इतना अधिकपढ़ लिखकर क्याँ करना हैं माॅम?" शिवा नें बेशर्मी सें खीसें निपोरते हुए कहा__"डैड कि दौलत बहुत हैं मेरे उज्वल भविष्य केँ लिए। मैंने सहीकहा न् डैड?" आखिरी वाक्य उसनेअजय सिंह कि तरफ देखते हुएकहा थां।
"बात तौ तुम्हारी ठीक हैं शहज़ादे। " अजय सिंह पहले मुस्कुराया फिन थोडा गंभीर होँ कर बोला__"मगर जिंदगी मे उच्च शिक्षा कां होना भि बहोत जरूरी होता हैं। माना कि मैने तुम्हारे लिए बहोत सारी दौलतबना कर जोड़ दि हैं मगरयह दौलतकब तक तुम्हारे लिएबची रहेगी? दौलतकभी किसी केँ पास टिकी नहि रहती। उसको बनाए रखने केँ लिएकाम करकेउसे कमाना भि जरूरी हैं। आज जितना हम् उसे खर्च करते हें उससे कहीं ज़्यादा उसे प्राप्त करना भि जरूरी हैं। "
"ओहडैड आप् तोँ बेकार कां लेक्चर देनेलगे मुझे। " शिवा नें बुरा सां मुह बनाते हुए कहा__"इतना तोँ मुझे भि पता हैं कि दौलत कों पाने केँ लिएकाम करना भि जरूरी हैं औऱ अच्छे काम केँ लिए अच्छी शिक्षा कां होना जरूरी हैं। तोँ डैड, मे पढ़ तौ रहाहूॅ नं?"
"जिसतरह कि तुम् पढ़ाई कररहे हौ नं। " प्रतिमा नें तीखे लहजे मे कहा__"उसका पता हैं मुझे। "
"ओह माॅमअब आप् भि डैड कि तरह लेक्चर मत देनेलग जानां। " शिवा नें कहा।
"यह लेक्चर तुम्हारे भले केँ लिए हि दियाजा रहा हैं बेटे। "अजय सिंह नें कहा__"इस पऱ ग़ौरकरो औऱ अमल भि करो। "
"जी डैडकर तौ रहाहूॅ न्?" शिवा नें कहा औऱ सोफे सें उठकर अपने कमरे कि तरफचला गय़ा। लेकिन वो यह न् देखसका कि उसके पैन्ट कि बाॅई पाॅकेट सें उसकीकौन सि चीज़गिर कर सोफे पऱ रह गई थि।
अजय सिंह औऱ प्रतिमा कि नज़रें एक् संगउस चीज़ पऱ पड़ीं। औऱ उस चीज़ कों पहचानते हि दोनो अपनी अपनी स्थान बैठेउछल पड़े। प्रतिमा नें अपना हाॅथआगे बढ़ाकर उसचीज कों उठा लिया। वोँ कण्डोम कां पैकिट थां। पैकिट खुलाहुआ थां मतलब उसमे मौजूद कण्डोमों मे सें कुछ कां इस्तेमाल हौ चुका थां। प्रतिमा नें अपने पति अजय सिंह कि तरफ अजीबभाव सें देखा।
"यह हैं आपके शहजादे कि पढ़ाई। " प्रतिमा केँ लहजे मे कठोरता थि बोलीं__"औऱ यहसभी मात्र आपकेलाड प्रेम कां नतीजा हैं। "
"इसउमर मे यह नेचुरल बात हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें कहा__"क्याँ तुम् भूल गई कि हम् दोनों नें स्वयं विवाह केँ पहले इसका कितना इस्तेमाल किया थां?"
"हाॅमगर तब आप् जॉब पेशा थें। " प्रतिमा केँ चेहरे पर्र कुछ लम्हा केँ लिए लज्जा कि लालीछाई थि लेकिन उसने जल्दी हि स्वयं कों नाॅर्मल करतेहुए कहा थां__"मगर शिवा अभि पढ़रहा हैं। अगरइसी तरह चलतारहा तोँ वोँ क्याँ कर पाएगा भविश्य मे?"
"तुम् बेवजह छोटी सि बात कों इतनातूल देरही हौ दोस्त। " अजय सिंह नें कहा__"मुझे तुमसे अधिक चिंता हैं उसके भविश्य कि, अगर नहि होती तौ यहसभी नहि करता। औऱ अबइस बारे मे कोईबात नहीं होगी समझी नं?"
प्रतिमा कुछ नं बोलि। इसकेसंग हि ड्राइंग रूम मे सन्नाटा छा गय़ा। कुछदेर कि ख़ामोशी केँ बादअजय सिंह नें कहा__"अब यूॅमुह न् फुलाओ मेरीजान, आजरात तुम्हें खुशकर दूॅगा चिन्ता मतकरो। "
"क्याँ सच मे?" प्रतिमा केँ चेहरे पऱ खुशीछलक पड़ी__"मगर दो राउण्ड सें पहले नहि सोने दूॅगी मे आपकोयह सोच लेना। "
"ठीक हैं मेरीजान। " अजय सिंह मुस्कुराया__"एक् एक् राउण्ड तुम्हारे आगे पीछे सें अच्छे सें लूॅगा। "
"अच्छा जी?" प्रतिमा मुस्कुराई__"आप् तौ जब देखो मेरे पिछवाड़े केँ पीछे हि पड़े रहते होँ। "
"स्त्री कों पीछे सें रगड़ रगड़कर हि ठोंकने मे हम् मर्दों कों मजाआता हैं डियर। "अजय सिंह नें कहा__"औऱ तुम्हारे पिछवाड़े कि तोँ बात हि अलग हैं दोस्त। "
"औऱ किसके किसके पिछवाड़े कि बातअलग हैं?" प्रतिमा नें अर्थपूर्ण ढंग सें मुस्कुराते हुए कहा__"ज़रा यह भि तौ बताइए। "
"तुम् अच्छी तरह जानती होँ मेरीजान। " अजय सिंह केँ चेहरे पर्र अजीब सें भाव थें__"फिन क्यूं पूॅछरही हौ?"
"बताने मे हर्ज़ हि क्याँ हैं?" प्रतिमा हॅसी__"बता हि दीजिए। "
"तुम्हारे बादअगर किसी औऱ केँ पिछवाड़े मे अलगबात हैं तौ वोँ हैं हमारी बड़ी बेटी रितू। हाय रे क्याँ पिछवाड़ा हैं ज़ालिम कां बिलकुल तुम्हारी तरह हि हैं उसका पिछवाड़ा। "
"अपनी हि बेटी पर्र नीयत बुरी हैं आपकी?" प्रतिमा नें कहने केँ संग हि मैक्सी केँ ऊपर सें अपने एक् हाॅथ सें अपनी चूॅत कों बुरीतरह मसलाफिन बोलीं__"मगर यहजान लीजिए कि रितू कां पिछवाड़ा इतनी आसानी सें मिलने वाला नहीं हैं आपको। "
"यही तोँ रोना हैं दोस्त। " अजय सिंहअहह सि भरतेहुए बोला__"तुमको मेरी ख्वाहिश कां पता हैं फिन भि अब तक कुछ नहि किया। "
"चिंता मत कीजिए। " प्रतिमा नें कहा__"आपके लिए एक् नई चूॅत औऱ एक् नए पिछवाड़े कां इंतजाम कर दिया हैं मैंने। "
"क् क्याँ सच मे.???"अजय सिंह खुशी सें झूम उठा__"ओह डियर आखिर तुमने कर हि दिया। मगर, यह तौ बताओ किसकी बुर औऱ पिछवाड़े कां इंतजाम किया हैं तुमने?"
"अभि थोड़ी कसर बाॅकी हैं जनाब। " प्रतिमा नें कहा__"मगर मुझे यकीन हैं कि एक् दोदिन मे काम हौ जाएगा आपका। "
"काश! गौरी कों हासिल कर पाता मे। " अजय सिंह बोला__"उस पऱ तोँ मेरीतब सें नज़र थि जब वो ब्याह करइसघऱ मे आई थि। एक् झलक उसके शरीर कि देखी थि मैंने। एक् दमदूध सां सफ़ेद रंग थां उसका औऱ बनावट ऐसी कि उसके सामने कुदरत कि हर कृति फीकीपड़ जाए। "
"कम सें कम मेरे सामने उसकी हुस्न कां बखानमत किया कीजिए आप्। " प्रतिमा नें तीखेभाव सें कहा__"आपको कितनी बारयह कहा हैं मैने। फिन भि आप् उस हरामजादी कि तारीफ करके मेराखून जलाने सें बाज नहि आते हें। "
"क्याँ करूॅ मेरीजान?" अजय सिंहकह उठा__"तुम्हारे बाद मुझेअगर किसी सें प्रेम हुआ हैं तोँ वोँ थि गौरी। मे चाहता तौ कब कां उसकी हुस्न कां रसपान कर लेता लेकिन मैनेऐसा नहीं किया। मे उसे प्रेम सें हासिल करना चाहता थां। तभी तोँ मैंने यहसभी किया, उसको इतनेदुख दिए औऱ उसकेलिए सारे रास्ते बंदकर दिए। मगर फिन भि कुछ हासिल नहि हुआ औऱ अब होगा भि कि नहि क्याँ कहाजा सकता हैं?"
"आपने तोँ उन लोगों कि खोज मे अपने व्यक्ति लगाए थें न्?" प्रतिमा नें कहा__"उन लोगों नें क्याँ रिपोर्ट दि उनके बारे मे?"
"मेरे व्यक्ति खाली हाॅथ वापस आँ गए थें। " अजय सिंह केँ चेहरे पर्र कठोरता केँ भाव उजागर हुए__"वोँ हरामी कि औलाद विराज बड़ा हि चतुरव चालाक निकला। उसने अपनीमाॅ औऱ बेहन कों किसी दूसरे शहर केँ रूट सें उन्हें मुम्बई लेँ जाने मे कामयाब होँ गय़ा थां। "
"शायदउसे अंदेशा थां कि आप् उन्हें पकड़ने केँ लिए अपने आदमियों कों भेजेंगे। " प्रतिमा नें सोचपूर्ण भाव सें कहा।
"हाॅ यहीबात रही होगी। "अजय सिंह बोला__"वर्ना वोँ ऐसाकाम क्यूं करता?मगर कब तक मुझसे छिपाकर रखेगा वोँ अपनीमाॅ औऱ बेहन कों? मे सुकून सें बैठा नहि हूॅ प्रतिमा, बल्कि आज भि मेरे व्यक्ति उनकीखोज मे मुम्बई कि खाक़छान रहे हें। "
"यह आपने अच्छा किया हैं। " प्रतिमा नें सहसा आवेशयुक्त स्वर मे कहा थां__"जब आपके व्यक्ति उन सबको पकड़कर यहा लाएंगे तोँ मे अपने हाॅथों सें उस कुत्ते कों गोली मारूंगी जिसने उसदिन मेरे बेटे कां वोँ हाल किया थां। "
"तुम्हारी यह ख़्वाहिश जरूर पूरी होगी डियर। "अजय सिंह नें भभकते लहजे मे कहा__"औऱ अब मे भि गौरी कों बीच चौराहे पर्र रगड़ रगड़कर ठोंकूॅगा। अबबात प्रेम कि नहि रह गई बल्कि अब प्रतिशोध कि हैं। मेरेउस प्रण कि हैं जोँ मैंने वर्षों पहले लिया थां। "
"किस प्रण कि बातकर रहे हें डैड?" रितूऊपर सें सीढ़िया उतरते हुए पूछी।
"कुछ नहि बेटी बसऐसे हि बातकर रहे थें हम् लोग। " प्रतिमा नें जल्द सें बात कों टालने कि गरज सें कहा। जबकि अजय सिंह अपनी बड़ी बेटी कों एकटक देखेजा रहा थां।
रितूनहा धोकरतथा एक् दम फ्रेस होकरआई थि। इस टाइम उसके गोरे लेकिन मादकता सें भरेबदन पऱ एक् दम टाइट फिटिंग वाले कपड़े थें। जिसमें उसकी भरपूर जवानी साफ उभरी हुईँ नजर आँ रही थि। अजय सिंह मंत्रमुग्ध सां उसे देखेजा रहा थां। उसकी आखों मे हवस औऱ वासना केँ कीड़े गिजबिजाने लगे थें। अपने पति कों अपनी हि बेटी कि तरफयूं हवसभरी नज़रों सें देखते देख प्रतिमा नें जल्दी हि उसे स्वयं कि हालत कों सम्हाल लेने कि गरज सें कहा__"आपको आज पिता जी औऱ माता जी सें मिलने जानां थां न्?"
अजय सिंह प्रतिमा केँ इस वाक्य कों सुनकर चौंका तथा जल्दी हि वास्तविक माहौल मे लौटते हुए कहा__"हाॅ जानां तोँ हैं। क्याँ तुम् संग नहि चलोगी?"
"नहि आप् हौ आइए। " प्रतिमा नें कहा__"पिछली बार गई थि उनसे मिलने आपकेसंग। उनसे मिलने कां कोई फायदा तौ हैं नहि। न् वोँ कुछ बोलते हें औऱ न् हि हिलते डुलते हें फिन क्याँ फायदा उनसे मिलने कां?"
"डैड क्याँ कुछ संभावना हैं कि कब तक दादाजी दादीमा ठीक होंगे?" रितू नें पूछा।
"बेटा डाॅ। कि तरफ सें यही कहना हैं कि कुछकहा नहि जा सकताइस बारे मे। " अजय सिंह बोला__"याददास्त कां मामला होता हि ऐसा हैं। "
"डैड आपके साथी कमिश्नर अंकल तोँ अब तक पता नहि लगापाए कि दादाजी दादीमा कि गाड़ी कों किसने औऱ क्यूं टक्कर मारी थि?" रितू नें सहसा तीखेभाव सें कहा__"आज दोसाल होँ गएइसबात कों औऱ पुलिस केँ हाॅथकोई छोटा सां सुराग तक नहि लगा। बड़ा क्रोध आता हैं मुझे अपनेदेश कि इस निकम्मी पुलिस पर्र। आजअगर मे होती पुलिस डिपार्टमेन्ट मे तोँ इसकेस कों कब कां क्लियर करके मुजरिमों कों जेल कि सलाखों केँ पीछे पहुॅचा दिया होता। मगर कोईबात नहि डैड.जल्द हि इस निकम्मी पुलिस केँ बीचमुझ जैसी एक् तेज़ तर्रार पुलिस आफिसर इन्ट्री करेगी। फिन मे स्वयं इसकेस पऱ काम करूॅगी, औऱ केस कों पूरा साल्व करूॅगी। "
रितू कि यह बातें सुनकर अजय सिंह औऱ प्रतिमा कों साॅप सां सूॅघ गय़ा। चेहरे पऱ घबराहट केँ भाव गर्दिश करते नज़रआने लगे थें। लेकिन जल्द हि उन दोनों नें स्वयं कों सम्हाला।
"मतलब मेरेलाख मना करने औऱ समझाने पऱ भि तुमने पुलिस फोर्स ज्वाइन करने कां अपना इरादा नहि बदला?"अजय सिंह नें नाराज़गी भरे स्वर मे कहा__"तुम् जानती हौ बेटी कि मुझे तुम्हारा पुलिस फोर्स ज्वाइन करने कां फैसला बिलकुल भि पसन्द नहि हैं। तुम्हें कोई ज़रूरत नहि थि कोईजॉब करने कि, भला क्याँ कमी कि हैं हमने तुम्हें कुछ देने मे?"
"यहजॉब मे किसी चीज़ केँ अभाव मे नहि कररही हूॅडैड। " रितू नें शान्त भाव सें कहा__"आप् जानते हें कि पुलिस आफिसर बनना मेरा एक् सपने थां। पुलिस आफिसर बनकर मे उन लोगों कां वजूद मिटाना चाहती हूं जोँ इसदेश औऱ समाज केँ लिए अभिशाप हें। "
"तुम् यहभूल रही होँ बेटी कि तुम् एक् लड़की हौ, एक् स्त्री ज़ात जिसे स्वयं कदमकदम पऱ किसी मर्द केँ द्वारा मजबूत सुरक्षा कि आवश्यकता होती हैं। " प्रतिमा नें समझाने वालेभाव सें कहा__"औऱ पुलिस फोर्स तोँ ऐसी हैं कि इसमें रोज़ एक् सें बढ़कर एक् खतरनाक अपराधियों कां सामना करना पड़ता हैं जिसका मुकाबला करना तुम्हारे लिए बेहद मुश्किल हैं। "
"आप् मुझे एक् आम लड़की समझकर कमजोर समझती हें माॅम जबकि रितू सिंह बघेलकोई आम लड़की नहि हैं। " रितू केँ चेहरे पर्र कठोरता थि__"बल्कि मे मिस्टर अजय सिंह बघेल कि शेरनी बेटी हूॅ। औऱ मुझसे टकराने मे किसी अपराधी कों हजारबार सोचना पड़ेगा। आप् जानती हें नं माॅम कि मैंने मासल आर्ट्स मे ब्लैक बैल्ट हासिल किया हैं। क्योंकि मुझेपता हैं कि एक् आम लड़की पुलिस मे किसी अपराधी कां सामना नहि कर सकती। इसी लिए मैंने किसी भि तरह केँ अपराधियों सें डॅटकर कर मुकाबला करने केँ लिए मासल आर्ट्स कि ट्रेनिंग ली थि। "
अजय सिंह औऱ प्रतिमा दोनों जानते थें कि रितू अपनेकदम अब वापस नहि करेगी। इसलिए चुपरह गए लेकिन अंदर सें यहसोच सोचकर घबरा भि रहे थें कि अगर रितू नें पुलिस आफिसर केँ रूप मे अपने दादाजी दादीमा केँ एक्सीडेंट वालाकेस अपने हाॅथ मे लिया तौ क्याँ होगा?????"
दोस्तो आपके सामने एपसोड हाज़िर हैं.आपकी प्रतिक्रिया कां इन्तज़ार रहेगा,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
bhay vah kya jabardast update diye hu. majaa aagya. Ab or kya likhu mast update he. Isase aage ek or update tak too maine desibees pr bi pad liye he. too waiting 4 next new update.
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