♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड। 《 06 》
अब तक,,,,,,
"ऐसा नहि हैं। " अजय नें कहा__"क्योकि विराज नें तत्काल रिज़र्वेशन कि तीन टिकटें लीथीं। रेलवे कर्मचारियों केँ पास इसका सबूत हैं कि उन्होने तत्काल रिजर्वेशन कि तीन टिकटें ली थि मुम्बई केँ लिए। "
"तोँ फिन वोँ कहाॅ गायब होँ गए?" शिवा नें कहा__"उन्हे यह जमीनखा गई याँ आसमान निगल गय़ा?
"चिंता मतकरो। " अजय सिंह नें कहा__"हम् उन्हें जरूर ढूंढ् लेंगे। "
अबआगे,,,,,,,
उधर विराज अपनीमाॅ औऱ बेहन कों ट्रेन सें उतारकर अबबस पकड़ चुका थां। उसका खयाल थां कि बस सें वो किसी अन्यशहर जाएगा औऱ फिन वहाॅ सें किसी दूसरी ट्रेन सें मुम्बई जाएगा।
"तुम् हमें ट्रेन सें उतारकर बस मे क्यूं लाए बेटा?" माॅ गौरी नें सबसे पहलेयही प्रश्न पूछा थां।
"ट्रेन मे जाने सें खतरा थां माॅ। " विराज नें कहा__"बड़े पिताजी नें हमें पकड़ने केँ लिए अपने व्यक्ति भेजे थें जौ सब स्थान चेककर रहे थें। "
"क् क्याँ.???" गौरी बुरीतरह चौंकी___"पर्र तुम्हें केसेपता?"
"मुझेइस बात कां पहले सें अंदेशा थां माॅ। " विराज नें कहा__"इस लिए मैंने अपने एक् मित्र कों बड़े बापू कि हर गतिविधि कि खबर रखने केँ लिएकह दिया थां मोबाइल केँ जरिए। जब हम् लोग ट्रेन मे बैठकर चले थें तब तक ठीक थां। आप् जानती हैं ट्रेन वहा सें निकलने केँ बाद एक् स्थान रुक गई थि औऱ फिनछ: घंटे रुकीरही। क्योंकि उसमें कोई तकनीकी खराबी थि। मेरे साथी कां मोबाइल साम कों आया थां उसने बताया कि बड़े पिताजी नें हमे ढूढ़ने केँ लिएहर स्थान अपने व्यक्ति भेज दिये हें। मुझेपता थां ट्रेन मे उनके व्यक्ति हमे बड़ी आसानी सें ढूढ़ लेंगे क्योकि उन्हे रेल कर्मचारियो सें हमारे बारे मे पताचल जाता औऱ हम् पकड़े जाते। इस लिए मैंने आप् सबको ट्रेन सें उतारकर किसी अन्य तरीके सें मुम्बई लेँ जाने कां सोचा। "
"आपने बहोत अच्छा किया भाई। "निधि नें कहा__"अब वोँ हमें नहीं ढूढ़ पाएंगे। "
"इतना लम्बा चक्कर लगाने कां यही मतलब हैं कि वोँ हमेंउस रूट पऱ ढूढ़ेगे जबकि हम् यहा हें। " विराज नें कहा__"मे अकेला होता तोँ यहसभी नहीं करता बल्कि खुलकर उन सबका मुकाबला करतामगर आप् लोगों कि सुरक्षा जरूरी थि। "
"अभि मुकाबला करने कां टाइम नहीं हैं बेटा। " गौरी नें कहा__"जब सही वक़्त होगातब मे स्वयं तुझेही नहीं रोकूॅगी। "
"आप् बस देखती जाओमाॅ। " विराज नें कहा__"कि अब क्याँ करताहूॅ मे?"
"हाॅ भाई आप् उन्हें छोंड़ना नहि। " निधि नें कहा__"बहोत गंदेलोग हें वोँ सभी। हमे बहोत दुख दिया हैं उन्होने। "
"फिक्र मतकर मेरी गुड़िया। " विराज नें कहा__"मे उन सबसेचुन चुनकर हिसाब लूॅगा। "
ऐसी हि बातें करतेहुए यहलोग दूसरे दिन मुम्बई पहुॅच गए। विराज उन दोनो कों सुरक्षित अपने फ्लैट पर्र लेँ गय़ा। यह फ्लैट उसे कम्पनी द्वारा मिला थां जिसमें दो कमरे एक् ड्राइंग रूम एक् डायनिंग रूम एक् लेट्रिन बाथरूम तथा एक् किचेन थां। पीछे कि तरफ बड़ी सि बालकनी थि। कुल मिलाकर इन सबकेलिए इतना पर्याप्त थां रहने केँ लिए।
विराज चूॅकि यहाॅ अकेला हि रहता थां इसलिए वोँ साफ सफाई सें अधिक मतलब नहीं रखता थां। हलाॅकि सफाई वालीआती थि मगर वोँ सफाई नहीं करवाता थां ऐसे हि रहता थां। फ्लैट कि गंदी हालतदेख कर दोनोमाॅ बेटी नें पहले फ्लैट कि साफ सफाई कि। विराज नें कहा भि कि सफर कि थकान हैं तोँ पहले आराम कीजिए, सफाई कां काम वो कल करवा देगाजब सफाई वालीबाई आएगी तौ मगरमाॅ बेटी नं मानी औऱ स्वयं हि साफ सफाई मे लगगईं।
इसबीच विराज मार्केट निकल गय़ा थां किराना कां सामान लाने केँ लिए। हलाकि कंपनी सें रहने खाने कां सभी मिलता थां मगर विराज बाहर् हि होटल मे खानां खाता थां। फ्लैट मे गैस सिलेंडर औऱ चूल्हा वगैरा सभी थां लेकिन राशन-पानी नहीं थां। दोरूम मे सें एक् कमरे मे हि एक् बेड थां। किचेन बड़ा थां जिसमें एक् फ्रिज़ भि थां। ड्राइंग रूम मे एक् बड़ा सां एल सि डी टेलीविज़न भि थां।
करीबदो घंटेबाद विराज मार्केट सें लौटा। उसने देखा कि फ्लैट कि काया हि पलट गई हैं। हरचीज अपनी स्थान ब्यवस्थित तरीके सें रखी गई थि। विराज कों इसतरह हर स्थान आॅखें फाड़े देखता देख निधि नें कहा__"नं आप् स्वयं कां खयाल रखते हें औऱ नं हि किसी औऱ चीज कां। मगरअब ऐसा नहीं होगा, अब हम् आँ गए हें तौ आपका अच्छे सें खयाल रखेंगे। "
"ओहो क्याँ बात हैं। "विराज मुस्कुराया__"हमारी गुड़िया तौ बड़ी होँ गई लगती हैं। "
"हाॅ तोँ?" निधि विराज केँ बगल सें सटकर खड़ी हौ गई__"देखिए आपके कंधे तक बड़ी होँ गई हूॅ। "
"हाॅ हाॅ तूँ तोँ मेरी भि अम्मा होँ गई हैं न्। " गौरी नें कहा__"धेले भर कि तौ अकल हैं नहि औऱ बड़ी बड़ी बाते करनेलगी हैं। "
"देखिए भाई जब देखोमाॅ मुझे डाॅटती हि रहती हें। "निधी नें बुरा सां मुह बनाते हुएकहा।
"मत डाॅटा कीजिए माॅ गुड़िया कों। " विराज नें निधि कों अपने सीने सें लगाते हुए कहा__"यह जैसी भि हैं मेरीजान हैं यह। "
"सुन लिया नं माॅ आपने?" निधि नें विराज केँ सीने सें सिरउठा कर अपनीमाॅ गौरी कि तरफदेख कर कहा__"मे भाई कि जानहूॅ औऱ हाॅ.भाई भि मेरीजान हें.हाॅ नहि तौ। "
"अच्छा ठीक हैं बाबा। " गौरी नें हॅसकर कहा__"अब भइया कों छोंड़ औऱ जा जाकरनहा लेँ, फिन मुझे भि नहाना हैं औऱ खानां भि बनाना हैं। "
"मे खानां बाहर् सें हि लेँ आयाहूॅ माॅ। " विराज नें कहा__"आप् लोगखा पीकर आराम कीजिए कल सें यहीं खानां पीना बनाना। "
"अब लेँ आया हैं तौ चलकोई बात नहि। " गौरी नें कहा__"मगर आज केँ बाद बाहर् कां खानां पीनाबंद। ठीक हैं न्??"
"जैसा आप् कहेंमाॅ। " विराज नें कहा औऱ सारा सामान अंदर रसोई मे रख दिया।
गौरी केँ कहने पऱ निधि नहाने चली गई। जबकि विराज वहीं ड्राइंग रूम मे रखे सोफे पर्र बैठ गय़ा। अचानक हि उसके चेहरे पऱ गंभीरता केँ भाव गर्दिश करनेलगे थें। गौरी किचेन मे सामान सेटकर रही थि।
विराज केँ फोन पर्र किसी कां काॅलआया। उसने मोबाईल कि स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे नाम कों देखा तौ होठों पर्र एक् अजीब सि मुस्कान उभरआई।
"मे आँ गय़ा हूॅ। " विराज नें कहा__"औऱ अब मे रेडीहूॅ उसकाम केँ लिए, कहो कहाॅ मिलना हैं?""
"__________________"
"ठीक हैं फिन। " विराज नें कहा औऱ मोबाइल काट दिया। 'अजय सिंह बघेलअब अपनी बरबादी केँ दिन गिनने शुरुआत करदे क्योकि अब विराज दि ग्रेट कां क़हर तुम् पऱ औऱ तुमसे जुड़ी हर चीज़ पऱ टूटेगा'
एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
भाग.《 07 》
अब तक,,,,,
विराज केँ फोन पऱ किसी कां काॅलआया। उसने मोबाईल कि स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे नाम कों देखा तोँ होठों पऱ एक् अजीब सि मुस्कान उभरआई।
"मे आँ गय़ा हूॅ। " विराज नें कहा__"औऱ अब मे सजधजकर हूॅउस काम केँ लिए, कहो कहाॅ मिलना हैं?""
"__________________"
"ठीक हैं फिन। " विराज नें कहा औऱ मोबाइल काट दिया। 'अजय सिंह बघेलअब अपनी बरबादी केँ दिन गिनने शुरुआत करदे क्योकि अब विराज दि ग्रेट कां क़हर तुम् पर्र औऱ तुमसे जुड़ी हर चीज़ पऱ टूटेगा'
अबआगे.
उस ब्यक्ति कां नाम जगदीश ओबराय थां। ऊम्रयही कोई पचपन(55) केँ आसपास कि। सिर केँ नब्बे प्रतिशत बालसिर सें गायब थें। बदन भारी भरकम थां उसका लेकिन उसे मोटा नहींकह सकते थें क्योकि हाइट कि लम्बाई केँ हिसाब सें उसकाबदन औसतनठीक नजरआता थां। भारी भरकमबदन पर्र कीमती कपड़े थें। गले मे सोने कि मोटी सि सुकून तथा दाएं हाॅथ कि चार उॅगलियों मे कीमती नगों सें जड़ी हुईँ सोने कि अॅगूठियाॅ। इसी सें उसकी आर्थिक स्थित कां अंदाजा लगाया जा सकता थां कि वो निहायत हि कोई रुपये पैसे वालारईश ब्यक्ति थां।
"तौ तुम् सजधजकर होँ बरखुर्दार?" जगदीश ओबराय नें कीमती मेज केँ उसपार कीमती सोफे पर्र बैठे विराज कि तरफ एक् गहरी साॅस लेतेहुए पूछा।
"जी बिलकुल सर। " विराज नें सपाट स्वर मे कहा।
"तुम् हमेंसर कि स्थान अंकलकह सकते होँ विराज बेटे। " जगदीश नें अपनेपन सें कहा__"वैसे भि हम् तुम्हें अपने बेटे कि तरह हि मानते हें। बल्कि यह कहें तौ अधिक अच्छा होगा कि तुम् हमारे लिए हमारे बेटे हि हौ। "
"आप् मुझे अपना समझते हें यह बहोत बड़ीबात हैं अंकल। "विराज नें गंभीर होकर कहा__"वर्ना अपने केसे होते हें यह मुझसे बेहतर कौन जानता होगा?"
"इस युग मे कोई किसी कां नहि होता बेटे। " जगदीश नें कहा__"हर इंसान अपने मतलब केँ लिए रिश्ते बनाता हैं औऱ रिश्तों कों तोड़ता हैं। हम् भि इसीयुग मे हें इसलिए हमने भि अपने मतलब केँ लिए तुमसे एक् नाताबना लिया। यह आज केँ युग कि सच्चाई हैं बेटे। "
"आपके मतलबीपन मे एक् अच्छाई हैं अंकल। "विराज नें कहा__"आप् अपने मतलबीपन मे किसी कां अहित नहि करते हें औऱ न् हि किसी कों तकलीफ देकर स्वयं केँ लिएकोई खुशी हासिल करते हें। "
"यह तुम्हारा नज़रिया हैं बेटा। " जगदीश नें कहा__"जोँ तुम् हमारे बारे मे ऐसाबोल रहे होँ। मगर सोचो सच्चाई तौ कुछ औऱ हि हैं, हम् जोँ करते हें उससे भि तौ सामने वाले कों तकलीफ होती हैं फिनभले हि वो स्वयं कोईदेश समाज केँ लिए किसी अभिशाप सें कम नं हौ। "
"बुरे लोगों कों मारकर याँ उन्हें तकलीफ देकर अच्छे लोगों कों खुशिया देनाकोई अपराध तौ नहि हैं। "विराज नें कहा।
"ख़ैर, छोड़ो इन बातों कों। " जगदीश नें पहलू बदला__"हम् अपने मुख्य विषय पऱ बात करते हें। "
"जी अंकल। " विराज नें अदब सें कहा।
"हमने सारे कागजात रेडी करवा दिये हें बेटे। " जगदीश नें बड़ी सि मेज पर्र रखे अपने एक् छोटे सें ब्रीफकेस कों खोलते हुए कहा__"तुम् एक् बार स्वयं देखलो। फिन हम् आगे कि बात करेंगे। "
"इसकी क्याँ जरूरत थि अंकल। " विराज नें कहा।
"जरूरत थि बेटे। " जगदीश नें कहा__"इतने बड़े बिजनेस एम्पायर कों हमारे बाद सम्हालने वाला हमारा अपनाकोई नहि हैं। तुम् तोँ सभी जानते होँ कि एक् हादसे नें हमारा सभीकुछ तबाहकर दिया थां। हम् नहि जानते कि हमारे संग भगवान नें ऐसा क्यूं किया? हमने तोँ कभी किसी कां बुरा नहि चाहा.हाॅ शायदयह होँ सकता हैं कि हमारे पिछले जन्मों मे कियेगए किन्हीं पापों कां यहफल मिला हैं हमें। "
विराज कुछ न् बोला, बस देखता रह गय़ा उस आदमी कों जिसके चेहरे पर्र इस टाइम ज़माने भर कां ग़म छलकने लगा थां।
"तुम् हमारी कंपनी मे दोसाल पहलेआए थें। " जगदीश ओबराय कहरहा थां__"तुम्हारे काम सें हरकोई प्रभावित थां जिसमे हम् भि शामिल थें। कंपनी कि जौ ब्राॅच अत्यधिक नुकसान मे चलरही थि वोँ तुम्हारी मेहनत औऱ लगन सें बहुत मुनाफे केँ संगआगे बढ़ गई। तुमने उनसब कां पर्दाफाश किया जोँ कंपनी कों नुकसान पहुॅचा रहे थें औऱ मज़े कि बातयह कि किसी कों पता भि नहि चल पाया कि किसने उनका भंडाफोड़ कर दिया। " जगदीश नें कुछ लम्हा रुककर एक् गहरी साॅसली फिन बोला__"हम् तुमसे बहोत प्रभावित थें बेटे औऱ बहोत खुश भि। हमने तुम्हारे बारे मे अपने तरीके सें पता लगाया औऱ जोँ जानकारी हमें मिली उससे हमें बहोत दुख भि हुआ। हमें तुम्हारे बारे मे सभीकुछ पताचल चुका थां। हम् जान चुके थें कि सबके सामने खुश रहने वालायह लड़का अंदर सें कितना औऱ क्यूं दुखी हैं? हमारा हमेशा सें हि यह ध्येय रहा थां कि हम् हरउस सच्चे ब्यक्ति कि सहायता करेंगे जौ अपनोतथा समय केँ द्वारा सताया गय़ा हौ। हमने फैसला किया कि हम् तुम्हारे लिएकुछ करेंगे। हम् एक् ऐसे इंसान कि तलाश मे भि थें जिसे हम् स्वयं अपनाबना सकें औऱ जोँ हमारे इतने बड़े बिजनेस एम्पायर कों हमारे बाद सम्हाल सके। "
"आज केँ वक्त मे किसी ग़ैर केँ लिए इतनाकुछ कौन सोचता औऱ करता हैं अंकल?" विराज गंभीर थां बोला__"जबकि आज केँ युग मे अपने हि अपने अपनों कां बुरा करने मे ज़रा भि नहि सोचते याँ हिचकिचाते हें। मेरेसंग मेरे अपनों नें जौ कुछ किया हैं उसका हिसाब मे मात्र अपनेदम पर्र करना चाहता थां अंकल। "
"हम् तुम्हारी हिम्मत औऱ बहादुरी कि कद्र करते हें बेटे। " जगदीश नें कहा__"मगर यह हिम्मत औऱ बहादुरी बिना किसी मजबूत आधार केँ केवलहवा मे लाठियाॅ घुमाने सें ज़्यादा कुछ नहि होता। तुम् जिनसे टकराना चाहते हौ वोँ आज केँ वक़्त मे तुमसे कहीं अधिक ताकतवर हें। उनकेपास ऊॅची पहुॅच तथा किसी भि काम कों करा लेने केँ लिए पैसा रुपया हैं। जबकि तुम् इन दोनो चीज़ों सें विहीन हौ बेटे। किसी सें जब भि जंगकरो तोँ सबसे पहले अपनेपास एक् ठोस औऱ मजबूत बैकपबना केँ रखो जिससे तुम्हारे आगे बढ़ते हुए कदमों पर्र कोई रुकावट नं आँ सके। "
विराज कुछ नं बोला जबकि जगदीश नें उसके चेहरे पर्र उभररहे सैकड़ों भावों कों देखते हुए कहा__"हम् जानते हें कि तुम् खुलकर पूरी निडरता सें उनका मुकाबला करना चाहते हौ वोँ भि उनके हि तरीके सें। कुछ चीज़ें अनैतिक तथापाप सें परिपूर्ण तौ हें मगरचलो कोईबात नहि। तुम् सभीकुछ अपने तरीके सें करना चाहते होँ मतलब 'जैसे कों तैसा' वाली तर्ज पर्र। "
"मे आपके कहने कां मतलब समझता हूॅ अंकल। " विराज नें अजीबभाव सें कहा___"औऱ यकीन मानिये यहसभी करने मे मुझेकोई खुशी नहि होगी पऱ फिन भि वही करूॅगा जिसे आप् अनैतिक औऱ पाप सें परिपूर्ण कहरहे हें। आज केँ वक़्त मे जैसे कों तैसा वाली तर्ज पर्र अमल करना पड़ता हैं अंकलतभी सामने वाले कों ठीक सें समझ औऱ एहसास हौ पाता हैं कि वास्तव मे उसने क्याँ किया थां। "
"खैर छोड़ो इन बातों कों। " जगदीश नें पहलू बदला__"यह बताओ कि उनके खिलाफ तुम्हारा पहलाकदम क्याँ होगा?"
"मेरा पहलाकदम उनकेउस ताकत औऱ पहुॅच कां मर्दन करना होगा जिसके बल पऱ वोँ यहसभी कररहे हें। "विराज नें कठोर स्वर मे कहा।
"तुम्हारी सोचठीक हैं। " जगदीश नें कहा__"मगर हम् यह चाहते थें कि तुम् वैसाकरो जिससे उन्हें यहपता हि नं चलसके कि यह क्याँ औऱ केसेहुआ?"
"पता तौ ऐसे भि न् चलेगा अंकल। " विराज नें कहा__"आप् बस वोँ कीजिएगा जौ करने कां मे आपको इशारा करूॅ। "
"ठीक हैं बेटे। " जगदीश नें कहा__"वही होगा जौ तुम् कहोगे। हम् तुम्हारे संग हें। " कहने केँ संग हि जगदीश नें विराज कि तरफ एक् कागज बढ़ाया__"इस कागज पर्र साइनकर दो बेटे औऱ अपनेपास हि रखोइसे। "
"इस सबकी क्याँ जरूरत हैं अंचल?" विराज नें कागज कों एक् हाॅथ सें पकड़ते हुएकहा।
"हमारे जिंदगी कां कोई भरोसा नहि हैं बेटे। " जगदीश नें कहा__"दो बार हमें हर्ट अटैक आँ चुका हैं, अबकौन जानेकब अटैक आँ जाए औऱ हम् इस दुनियाॅ सें."
"नं नहि अंकल नहि। " विराज जल्दी हि जगदीश कि बात काटते हुएबोल पड़ा__"आपको कुछ नहि होगा। भगवान करे आपको मेरीउमर लगजाए। आप् हमेशा मेरे सामने रहें औऱ मेरा मार्गदर्शन करते रहें। "
"हा हाहा बेटे तुम्हारी इन बातों नें हमेंयह बता दिया हैं कि तुम्हारे दिल मे हमारे लिए क्याँ हैं?" जगदीश केँ चेहरे पऱ खुशी केँ भाव थें__"तुम् हमें यकीनन अब अपना मानने लगे हौ औऱ हमेंयह जानकर बेहद खुशी भि हुईँ हैं। एक् मुद्दत होँ गई थि अपने किसी अज़ीज़ केँ ऐसे अपनेपन कां एहसास कियेहुए। तुम् मिलगए तोँ अबऐसा लगनेलगा हैं कि हम् अब अकेले नहि हें वर्ना इतने बड़े बॅगले मे तन्हाईयों केँ सिवाकुछ नं थां। सारी दुनिया धन दौलत केँ पीछेरात दिन भागती हैं बेटे वोँ भूल जाती हैं कि इंसान कि सबसे बड़ी दौलत तौ उसके अपने होते हें। "
"यह बातें कोई नहि समझता अंकल। " विराज नें कहा__"समझ तथा एहसास तब होता हैं जब हमें किसी चीज़ कि कमी कां पता चलता हैं। जिनके पास अपने होते हें उन्हें अपनों कि अहमियत कां एहसास नहि होता औऱ जिनके पास अपने नहि होते उन्हें संसार कि सारी दौलतमहज बेमतलब लगती हैं, वोँ चाहते हें कि इस दौलत केँ बदलेकाश कोई अपनामिल जाए। "
"संसार मे हमारे पास किसी चीज़ कां जब अभाव होता हैं तभी हमें उसकी अहमियत कां एहसास होता हैं बेटे। " जगदीश नें कहा__"हलाॅकि दुनियाॅ मे ऐसे भि लोग हें जिनके पाससभी कुछ होता हैं मगर वोँ सबसे ज़्यादा अपनों कों अहमियत देते हें, धन दौलत तौ महज हमारी आर्थिक जरूरतों कों पूरा करने कां जरिया केवल होती हैं। "
विराज कुछ नं बोलायह अलगबात हैं कि उसके चेहरे पर्र कईतरह केँ भाव उभरते औऱ लुप्त होते नज़र आँ रहे थें।
"हम् चाहते हें कि। " जबकि जगदीश कहरहा थां__"तुम् अपनीमाॅ औऱ बेहन केँ संगअब हमारे संगइसी घऱ मे रहो बेटे। कम सें कम हमें भि यह एहसास होता रहेगा कि हमारा भि अब एक् भरा पूरा परिवार हैं। "
"मे इसकेलिए माॅ सें बात करूॅगा अंकल। " विराज नें कहा।
"हम् स्वयं चलकर तुम्हारी माॅ सें बात करेंगे बेटे। " जगदीश नें गंभीरता सें कहा__"हम् उससे कहेंगे कि वोँ हमें अपना बड़ा भइयासमझ कर हमारे संग हि रहे। "
"आप् फिक्र नं करें अंकल। " विराज नें कहा__"मे माॅ सें बातकर लूॅगा। वोँ इसकेलिए इंकार नहि करेंगी।
"ठीक हैं बेटे। " जगदीश नें कहा__"हम् तुम् सबके यहाॅआने कां इंतजार करेंगे। "
कुछदेर औऱ ऐसी हि कुछ बातें हुईंफिन विराज वहाॅ सें अपने फ्लैट केँ लिए निकल गय़ा। विराज नें अपनीमाॅ गौरी सें जगदीश सें संबंधित सारी बातें बताई, जिसेसुन कर गौरी केँ दिलोमन मे एक् चैन सां हुआ।
"आज केँ टाइम मे इतनाकुछ कौन करता हैं बेटा?" गौरी नें गंभीरता सें कहा__"मगर हमारे संग हमारे अपनों नें इतनाकुछ किया हैं जिससे अबआलम यह हैं कि किसी पर्र भरोसा नहि होता। "
"जगदीश ओबराय बहोत अच्छे इंसान हें माॅ। " विराज नें कहा__"इस संसार मे उनका अपनाकोई नहि हैं, वोँ मुझे अपने बेटे जैसा मानते हें। अपनी सारी दौलततथा सारा कारोबार वोँ मेरेनाम कर चुके हें, अगर उनकेमन मे कोईखोट होता तोँ वोँ ऐसा क्यूं करतेभला?"
"यह क्याँ कहरहे हौ तुम्?" गौरी बुरीतरह चौंकी__"उसने अपनासभी कुछ तुम्हारे नामकर दिया?"
"हाॅ माॅ। " विराज नें कहा__"यही सच हैं औऱ इस टाइम वोँ सारे कागजात मेरेपास हें जिनसे यह साबित होता हैं कि अब सें मे हि उनके सारे कारोबार तथा सारी दौलत कां मालिक हूॅ। अब आप् हि बताइए माॅ.क्याँ अब भि उनके बारे मे आपकेमन मे कोई शंका हैं?"
"यकीन नहि होता बेटे। " गौरी केँ जेहन मे झनाके सें हौ रहे थें, अविश्वास भरे लहजे मे कहा उसने__"एक् ऐसा व्यक्ति अपनी सारी दौलतव कारोबार तुम्हारे नामकर दिया जिसके बारे मे नं हमेंकुछ पता हैं औऱ नं हि हमारे बारे मे उसे। "
"सभी ऊपर वाले कि माया हैं माॅ। " विराज नें कहा__"ऊपर वाले नें कुछसोच कर हि यह अविश्वसनीय तथा असंभव सां कारनामा किया हैं। जगदीश अंकल इसकेलिए मुझे बहोत पहले सें मनारहे थें लेकिन मे हि इंकार करतारहा थां। फिन उन्होंने मुझे समझाया कि बिना मजबूत आधार केँ हम् कोई लड़ाई नहि लड़ सकते। उन्होंने यह भि कहा कि उनकी सारी दौलत उनकेबाद किसी ट्रस्ट याँ सरकार केँ हाॅथचली जाती। इससे अच्छा तौ यही हैं कि वोँ यहसभी किसीऐसे इंसान कों देदें जिसे वोँ अपना समझते भि हों औऱ जिसे इसकी शख्त जरूरत भि होँ। मे उनकी कंपनी मे ऐजअ मैनेजर काम करता थां, वोँ मुझसे तथा मेरेकाम सें खुश थें। उनकेदिल मे मेरेलिए अपनेपन कां भाव जागा। उन्होंने मेरे बारे मे सभीकुछ पता किया औऱ जब उन्हें मेरी सच्चाई व मेरेसंग मेरे अपनों केँ कियेगए अन्याय कां पताचला तोँ एक् दिन उन्होंने मुझे अपने बॅगले मे बुलाकर मुझसे बात कि। "
"तुमने यहसभी मुझे पहलेकभी बताया क्यूं नहि बेटा?" गौरी नें विराज केँ चेहरे कि तरफ देखते हुए कहा__"इतना कुछ होँ गय़ा औऱ तमने मुझसे छिपाकर रखा। क्याँ यह अच्छी बात हैं?"
"आपने भि तौ मुझसे वोँ सभीकुछ छुपाया माॅ। " विराज नें सहसा गमगीन भाव सें कहा__"जौ बड़े बापू औऱ छोटे चाचा लोगों नें आपके औऱ मेरी बेहन केँ संग किया। मेरे पिता जी कि मौत केसे हुई यह छुपाया गय़ा मुझसे। मगर मे सभी जानता हूॅमाॅ, आपनेभले हि मुझसे छुपाया मगर मे सभी जानता हूॅ। "
"क् क् क्याँ जानते हौ तुम्?" गौरी हड़बड़ा गई।
"जाने दीजिये माॅ। " विराज नें फीकी मुस्कान केँ संग कहा__"अब इनसभी बातों कां वक़्त नहि हैं, अब टाइम हैं उन लोगों सें बदला लेने कां। "
"जाने केसेदूॅ बेटा?" गौरी नें अजीबभाव सें कहा__"मुझे जानना हैं कि तुम्हें यहसभी केसेपता चला?"
"इतनाकुछ होँ गय़ा। " विराज कहरहा थां__"एक् हॅसता खेलता संसार केसेइस तरह तिनका तिनका हौ कर बिखर गय़ा? मे कोई बच्चा नहि थां माॅ जिसेइन सभी बातों कां एहसास नहि थां बल्कि सभी समझता थां मे। "
"हमारे क़िस्मत मे यहीसभी कुछ लिखा थां बेटे। " गौरी कि आॅखें छलक पड़ी__"शायद ऊपरवाला हमसे ख़फा हौ गय़ा थां। "
"कोईबात नहि माॅ। " विराज नें कहा__"अब उन लोगों कां किस्मत मे लिखूॅगा। साॅपों सें खेलने कां बहोत शौक हैं न् तोँ मे उन्हें बताऊगा कि साॅप कों जोँ दूध पिलाते हें एक् दिनवही साॅप उन्हें भि डसकरमौत दे देता हैं। "
"क्याँ कहना चाहते होँ तुम्?" गौरीमुह औऱ आखें फाड़े देखने लगी थि विराज कों।
"हाॅमाॅ। " विराज कहरहा थां__"मुझे सभीपता हैं। मेरे पिता जी कि मौत सर्प केँ काटने सें हुई थि मगर वोँ स्वाभिक रूप सें नहि हुआ थां बल्कि सभीकुछ पहले सें सोचा समझा गय़ा एक् प्लान थां। एक् साजिश थि माॅ, मेरे पिता जी कों अपने रास्ते सें हमेशा केँ लिएहटा देने कि। "
"यह तुम् क्याँ कहरहे होँ बेटे?" गौरीउछल पड़ी, आखों सें झरझर आॅसू बहनेलगे उसके__"यह सभीउन लोगों कि साजिश थि?"
"हाॅयही सच हैं माॅ। " विराज नें कहा__"आपको इसबात कां पता नहि हैं मगर मुझे हैं। मे तौ यह भि जानता हूॅमाॅ कि यहसभी क्यूं हुआ?"
"क् क् क्याँ जानते होँ तुम्?" गौरी केँ चेहरे पऱ अविश्वास केँ भाव थें।
"वही जोँ आप् भि जानती हें। " विराज नें अपनीमाॅ गौरी कि आखों मे झाॅकते हुए कहा__"कहिये तोँ बता भि दूॅ आपको। "
"न् नहि नहि" गौरी केँ चेहरे पर्र घबराहट केँ संगसंग लाज औऱ लज्जा कि लाली छातीचली गई। उसकासिर नीचे कि तरफझुक गय़ा।
"आपको नजरें चुराने कि कोई जरूरत नहि हैं माॅ। " विराज नें अपने दोनों हाथों सें माॅ गौरी कां लज्जा सें लाल लेकिन सुंदर सां बेदाग़ चेहरा थामते हुए कहा__"आपने ऐसाकोई काम नहि किया हैं जिससे आपको मुझसे हि नहि बल्कि किसी सें भि नज़रें चुराना पड़े। आप् तौ गंगा कि तरह पवित्र हें माॅ, जिसकी केवल पूजा कि जा सकती हैं। "
स्टोरी जारी रहेगी,,,,,,,,
जबरदस्त, लाजवाब एवं शानदार भाग भइया आप् अपनी लेखनी कां चमत्कार ऐसे चलाते रहिएआल द बेस्ट
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
"ब बेटे। " गौरी बुरीतरह रोतेहुए अपने बेटे केँ चौड़े सीने सें जालगी। उसनेकस कर विराज कों जकड़ा हुआ थां। विराज नें भि माॅ कों छुपका लियाफिन बोला__"नहि माॅ, अब आप् रोएंगी नहि। रोने धोने वालासमय गुज़र गय़ा। अब तोँ रुलाने वालासमय शुरुआत होगा। "
"कितनी नासमझ थि मे। " गौरी नें विराज केँ सीने सें लगेहुए हि गंभीरता सें कहा__"मे जिस बेटे कों छोटा औऱ अबोधसमझ रही थि तथायह भि कि वोँ बहोत मासूम हैं नासमझ हैं अभि, मगर वोँ तौ अपनी छोटी सि ऊम्र मे भि कहीं ज़्यादा समझदार औऱ जिम्मेदार होँ गय़ा हैं। मैंने सभीकुछ अपने बेटे सें छुपाया, मात्र इसलिए कि मे अपने बेटे कों खो देने सें डरती थि। "
"आप् एक् माॅ हें माॅ। " विराज नें कहा__"औऱ आपने जौ कुछ भि किया अपनी ममता सें मजबूर होँ कर किया। इस लिए इसकेलिए मुझे आपसेकोई शिकायत नहि हैं। मगरहाॅ एक् शिकायत जरूर हैं। "
"अच्छा। " गौरी नें विराज केँ सीने सें अपनासिर अलग कियातथा ऊपर बेटे केँ कि आखों मे प्रेम सें देखते हुए कहा__"ऐसी क्याँ शिकायत हैं मेरे बेटे कों मुझसे, जरा मुझे भि तौ पताचले। "
"शिकायत यही हैं कि। " विराज नें कहा__"आप् हरसमय स्वयं कों दुखी रखती हें औऱ अपनी आॅखों पऱ तरस खाने कि बजाय उन्हें रुलाती रहती हें। यह हर्गिज़ भि अच्छी बात नहि हैं। "
"अब सें ऐसा नहि होगा। " गौरी नें मुस्कुराते हुए कहा__"अब मे न् तोँ स्वयं कों दुखी रखूॅगी औऱ नं हि अपनी आखों कों रुलाऊॅगी। अबठीक हैं न्?"
"यहीबात आप् मेरीशपथ खाकर कहिए। " विराज नें कहने केँ संग हि माॅ गौरी कां दाहिना हाॅथ पकड़कर अपनेसिर पऱ रखा।
"नं नहि नहि। " गौरी नें विराज केँ सिर सें जल्दी हि अपना हाॅथ खींच लिया__"मे इसकेलिए तुम्हारी शपथ नहि खा सकती मेरेलाल। तुम् तौ जानते हौ एक् माॅ अपने बच्चों केँ लिए कितना संवेदनशील होती हैं। उसका ममता सें भराहुआ ह्रदय इतना कोमल औऱ कमजोर होता हैं कि अपने बच्चों केँ लिए एक् लम्हा मे पिघल जाता हैं। सीने मे समयभर मे भावना कां ऐसा तूफान उठ पड़ता हैं कि उसे रोंकना मुश्किल हौ जाता हैं, औऱ आंखें तौ जैसेइस प्रतीक्षा मे हि रहती हें कि कब वोँ छलक पड़ें। "
विराज माॅ कि बातसुन कर मुस्करा उठा। माॅ केँ खूबसूरत चहरे औऱ नील सि झीली आखों मे स्वयं केँ लिए बेशुमार स्नेह व प्रेम देखता रहा औऱ हौले सें झुककर पहलेउन आखों कों फिनमाॅ केँ माॅथे कों प्रेम सें चूॅम लिया।
"क्याँ बात हैं?" गौरी विराज केँ इस कार्य पऱ मुस्कुराई तथा अपनी आखों कि दोनो भौहों कों ऊपर नीचे करके कहा__"आज अपनीइस बूढ़ी माॅ पर्र बड़ा प्रेम आँ रहा हैं मेरे बेटे कों। "
"प्रेम तौ हमेशा सें थां माॅ। " विराज नें कहा__"औऱ हमेशा रहेगा भि। मगर आपने स्वयं कों बूढ़ी क्यूं कहा?"
"अरे पगले!अब मे बूढ़ी हूॅ तौ बूढ़ी हि कहूॅगी न् स्वयं कों। " गौरी नें हॅसकर कहा।
"नहि माॅ। " विराह कह उठा__"आप् बूढ़ी बिलकुल भि नहि हें। आप् तोँ गुड़िया कि बड़ी बेहन लगती हें। आप् स्वयं देख लीजिए। " कहने केँ संग हि विराज नें माॅ गौरी कों कमरे मे एक् तरफ दीवार सें सटे एक् बड़े सें आदम हाइट आईने केँ सामने लाकर खड़ाकर दिया।
"यह यहसभी क्याँ कररहा हैं बेटा?" गौरी हॅसते हुए बोलि, उसने सामने लगे आईने मे स्वयं कों देखा। उसके पीछे हि विराज उसे उसके दोनो कंधों सें पकड़े हुए खड़ा थां।
"अबगौर सें देखिए माॅ। " विराज नें आईने मे अपनीमाॅ कों देखते हुए मुस्कुरा कर कहा__"देखिए अपने आपको। आप् अब भि मेरीमाॅ नहि बल्कि मेरी बड़ी बेहन लगती हें नं?"
"हे ईश्वर!" गौरी नें हॅसते हुए कहा__"तुम्हें मे तुम्हारी बड़ी बेहन लगतीहूॅ? कोई औऱ सुने तौ क्याँ कहे?"
"मुझे किसी सें क्याँ मतलब?" विराज नें कहा__"जौ सच हैं वोँ बोलरहा हूॅ। गुड़िया आपकी हि फोटो काॅपी हैं माॅ। मतलब आप् जब गुड़िया कि उमर मे रहीं होंगी तब आप् बिलकुल गुड़िया जैसी हि दिखती रही होंगी। "
"हाॅ तुम्हारी यहबात तोँ सच हैं बेटे कि गुड़िया मुझ पऱ हि गई हैं। " गौरी नें कहा__"सभी कोईयही कहता थां कि गुड़िया कि शक्लो सूरत मुझसे मिलती जुलती हैं। मगर मे उसके जैसी अल्हड़ औऱ मुहफट नहि थि। "
"वोँ अभि बच्ची हें माॅ। "विराज नें कहा__"उसमें अभि बहोत बचपना हैं। उसेयूॅ हि हॅसने खेलने दीजिए, वोँ ऐसे हि अच्छी लगती हें। "
"उसकीउमर मे मैंने जिम्मेदारी औऱ समझदारी सें रहनासीख लिया थां बेटा। " गौरी नें सहसा गंभीर होकर कहा__"अब वोँ बच्ची नहि रही, भले हि दिल औऱ दिमाग़ सें वो बच्ची बनीरहे। मगर,,,,, "
"वैसेदिख नहि रही वोँ। " विराज नें कहा__"कहाॅ हैं वो?"
"ऊपरछत पर्र गई थि कपड़े डालने। " गौरी नें कहा।
"कोई हमेंयाद करे औऱ हम् जल्दी उसके सामने न् आएंऐसा कभी हौ सकता हैं क्याँ?" सहसा कमरे केँ दरवाजे सें अंदरआते हुए निधि नें कहा__"वैसे किसलिए याद किया गय़ा हैं हमें? जल्द बताया जाए क्योंकि हम् बहोत बिजी हें, हमें अभि कपड़े डालने जानां हैं ऊपरछत पर्र। "
"इस लड़की कां क्याँ करूॅ मे?" गौरी नें अपना माथापीट लिया।
"बस प्रेम कीजिए माॅ प्रेम। " निधि नें अपने दोनो हाॅथों कों इधरउधर घुमाते हुए कहा__"हम् आपके बच्चे हें, हमेंबस प्रेम कीजिए। "
"तूँ रुक अभि तुझेही बताती हूॅ मे। " गौरीउसे मारने केँ लिए निधि कि तरफ लपकी, जबकि निधि जिसे पहले हि पता थां कि क्याँ होगाइस लिए वो जल्दी हि विराज केँ पीछेजा छुपी औऱ बोलीं__"भईया बचाइए मुझे नहि तोँ माॅ मारेंगी मुझे। मे आपकीजान हूॅ न्? अब बचाइये अपनीजान कों, हाॅ नहि तौ। "
"रुक जाइएमाॅ। " विराज नें माॅ कों रोंक लिया__"मत मारिए इसे। आपने देखा न् इसकेआते हि वातावरण कितना खुशनुमा होँ जाता हैं। "
"हाॅमाॅ। " निधि जल्दी बोल पडी__"मेरी बात हि अलग हैं। आप् समझती हि नहि हें जबकि भाई मुझे अच्छे सें समझते हें, हाॅ नहि तौ। "
"तेरे भाई नें हि तुम्हें बिगाड़ रखा हैं। " गौरी नें कहा__"अब जा कपड़े डालकर आँ जल्द। "
"आपकीजान कां इतना बड़ा अपमान। " निधि नें पीछे सें विराज कि तरफ अपनासिर करतेहुए कहा__"बड़े दुख कि बात हैं कि आप् कुछ नहि कर सकतेमगर, हम् चुप नहि रहेंगे एक् दिनइस बात कां बदला जरूर लेंगे, देख लीजियेगा, हाॅ नहि तौ। "
"क्याँ बड़बड़ा रही हैं तुँ?" गौरी नें आखें दिखाते हुएकहा।
"कुछ नहींमाॅ। " निधि नें जल्द सें कहा__"वोँ भाई कों हनुमान चालीसा कां रोजाना पाठ करने कों कहरही थि। "
"वोँ क्यूं भला?" गौरी केँ माॅथे पऱ बल पड़ता चला गय़ा। जबकि निधि कि इसबात सें विराज कि हॅसीछूट गई। वोँ ठहाके लगाकर जोरजोर सें हॅसने लगा थां। निधि अपनी हॅसी कों बड़ी मुश्किल सें रोंके इसतरह मुॅह बनाए खड़ी थि जैसे वोँ महामूर्ख होँ। इधर विराज केँ इस प्रकार हॅसने सें गौरी कों कुछसमझ न् आया कि उसका बेटा किसबात इतना हॅसेजा रहा हैं?
भाग हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,,,,,,,
आशा करताहूॅ कि आप् सबको पसन्द आएगा,,,,,,,,
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