Rajsi parampara - Rishton Ki Agni - Real Kahani Part 1
Introduction
दादा- राजा भानुप्रकाश उम्र- 70 ये हमारे राजपरिवार केँ राजा हैं पूरी रियासत मे इनका हि रौशनी भले हि आज राजशाही समाप्त होँ गई हैं मगर इनका रूतवा वही हैं
दिदी- महारानी सुमित्रा देवी उम्र- 65 बहोत हि सुन्दर हैं महल मे इनकी हि चलता हैं इनकेदो बेटे औऱ एक् बेटी हैं यह अपने बच्चों सें बहोत प्रेम करती हैं
चाचा- अरुणोदय उम्र- 42 हमारे परिवार केँ सबकाम औऱ बिजनेस यही संभालते हैं
चाची - निशा उम्र- 40 बहोत सुंदर औऱ समझदार महिला हैं इनकेदो बेटे हें
सूरज- चाची कां बडा बेटा उम्र 21 बहोत स्मार्ट पऱ उतना हि अच्छा हैं
हर्षवर्धन- छोटा बेटा उम्र 18 बहुत अच्छा औऱ सरल स्वभाव कां हैं
फूफी- सुलोचना उम्र 38 इनके पति नहीं हैं इनकी एक् बेटी हैं ये बहोत सुन्दर मगर थोडी भोली हैं ये दादा दादीमा केँ संग हि रहती हैं
बापू- अमरेन्द्र उम्र 46 शहर मे रहते हैं औऱ बहोत कामयाब बिजनेसमेन हैं पर्र दादा सें बहोत डरते हें
मां- अंजलि उम्र 42 बहुत सुन्दर हैं पढी लिखीमगर उतनी हि संस्कारी औऱ रीति रिवाज कों मानने वाली हैं अपने बच्चों सें बहोत प्रेम करती हैं हैं
दिदी- दिया उम्र 22 बापू केँ संग बिजनेस संभालती हैं
मालती काकी- उम्र40 हमारे घऱ मे काम करती हैं विधवा हैं इनकीएच बेटी हैं
मीनू - उम्र 17 मालती काकी कि बेटी
मै - श्रेयांश उम्र 18 अभि 12 मे हूठीक ठाकहू अपनी मां बापू दिदी सें बहोत प्रेम करताहू
Rajsi parampara - Rishton Ki Agni – New Episode
Update 1
ये स्टोरी मेरे परिवार कि हैं जिसमे मै मेरी माँ पिताजी औऱ मेरी दिदी रहती हैं हम् शहर मे एक् पाॅश इलाके मे रहते हें बापू एक् कामयाब बिजनेसमेन हैं मां हाऊसबाइफ हैं पढी लिखीमगर उतनी हि संस्कारी औऱ रीति रिवाज कों मानने वाली हैं मै अभि विद्यालय मे हू 12 वी मे मैशहर केँ सबसेबड़े विद्यालय मे पढताहू वैसे तौ हम् बहोत मार्डन हैं पऱ हमारा बाकी परिवार देहात मे रहता हैं वहा दादाजी दादीमा चाचा चाची फूफी औऱ उनके बच्चे रहते हें मेरे दादा गाव केँ जमींदार हैं तथा हमारे गाँव मे हमारे परिवार कि बहोत साख हैं, शहर मे हमारी जीवन बहोत अच्छी चलरही थि
माँ सुभहरोज कि तरह ब्रेकफास्ट बनारही थि औऱ मालती काकी उनकी सहायता कररही थि
मालती काकी हमारे घऱ मे काम करती हैं
बापू- अंजलि ब्रेकफास्ट लाओ मेरी बहोत जरूरी मीटिंग हैं
मां- बसलाई औऱ मालती काकी केँ हाथो ब्रेकफास्ट बाहर् भेज दिया
दिदी - पिताजी वोँ सक्सेना जी सें डील हौ गई हैं
पिताजी- बेरीगुड
मां- मालती श्रेयांश उठा कि नहीं
मालती काकी- नहीं दिदी मै जाकरउठा देतीहू
माँ- तेरे सें नहीं उठेगा मुझे हि उठाना पडेगा
फिन मां मेरे कमरे मे आई
मां- श्रेय चलउठ9बज गए हैं संडे हैं तोँ क्याँ दिनभर सोऐगा
मै - माँ बस पांच मिनट
मां- बोला न् उठ
फिन मैउठा औऱ नहाने केँ लिए बाथरूम मे गय़ा औऱ सजधजकर होकर बाहर् आकर ब्रेकफास्ट करनेलगा
पिताजी- पढाई कैसीचल रही हैं
मै - बहोत अच्छी पिताजी
पिताजी- बढिया सालटाप करफिन अगलेसाल आगे कि पढाई केँ लिए लंडन जानां हैं
दिदी- हा श्रेय फिन तूँ भि बिजनेस कों संभाल लेगा
फिन ब्रेकफास्ट करके पिताजी औऱ दिदी चलेगए
मै - मां मुझे1000रू चाहिए
मां- किसलिए
मै - साथी कां बर्थडे हैं तौ उसे उपहार देना हैं
फिन मां नें मुझेरू दिए
तभी मेरा मित्र कुशआया औऱ माँ केँ पैर छूकर नमस्कार आंटीकहा
माँ- केसे होँ बेटा तुम्हारी मां कैसी हैं उनको कहना मैने बुलाया हैं
कुश कि माँ सुधा आंटी औऱ मेरी माँ बहोत अच्छी मित्र हें बहनों कि तरह
फिन मै औऱ कुशचले गए औऱ हमारे साथीरवि कां बर्थडे थां हमनेउसे उपहार दियाफिन हम् बता करनेलगे
कुश - भइयाफिन क्याँ सोचा हैं आगे केँ लिए
रवि - कालेज फिन पिताजी कां बिजनेस औऱ तूँ
कुश- कालेज औऱ फिन देखते हैं औऱ श्रेयांश तेरा
मै - बापूकह रहे हैं आगे कि पढाई लंदन मे करू औऱ फिन बिजनेस संभालू
रवि-हा तेरे बापू कां तौ बहोत बडा बिजनेस हैं।
कुश- भइया इसके दादा तौ बहोत ज़्यादा अमीर हैं उनके मुकाबले तौ इसके पिताजी कि दौलतकुछ भि नहीं हैं
रवि- भइया सुना वोँ राहुल हैं नं
कुश - वोँ शर्मा अंकल कां बेटा
रवि-हा वही उसने अपनीकाम वालीबाई सें विवाह करली
मै - सरला आंटी सें मगर वोँ तोँ उनकीमा कि उम्र कि हैं औऱ उनकी तौ एक् बेटी भि हैं शायद राहुल केँ संग हि तौ पडती थि
रवि-हा भइया
कुश- तौ उसके माँ पिताजी नें कुछ नहि कहा
रवि- करते भि क्याँ एकलौता बेटा हैं मानना हि पडा बरनामर जाता
कुश- मतलब जोँ मित्र थि वोँ अब बेटी बन गई औऱ नौकरानी मालिक बन गई
मै - उसेलगा नहीं जिसकी गोद मे खेलकर बडाहुआ उसी केँ संग
रवि- भइयासभी होता हैं इस दुनिया मे प्रेम उम्र नहीं देखता औऱ एक् देश मे तोँ ऐसा रिवाज हैं कि लडके लडकी कों अपनेघऱ मे हि विवाह करनी पडती हैं जैसे भइया कि विवाह बेहन सें औऱ अगर भइया नहीं हैं तौ लडकी कों बापू सें औऱ अगर बेहन नहीं हैं तोँ लडके कों अपनीमा सें विवाह करनी पडती हैं जीवनभर पति पत्नि बनकर रहना पडता हैं
मै - क्याँ बकवास हैं भइया
कुश- हा दोस्त
रवि-अरे भइया अपनेदेश मे भि कुछ गाँव मे इसतरह कि प्रथा हैं
मै - भइया अच्छा हैं हम् शहर मे रहते औऱ हमेइस तरह कि गलत चीजों सें दूर हम् तोँ अपनी माँ केँ बारे मे ऐसासोच भि नहीं सकते
फिन हम् अपने अपनेघऱ चलेगए फिन एक् दिन दादा कां मोबाइल आया
दादा- अभय जल्द सें गाँव आँ जाओ
पिताजी- बाबूजी क्याँ हुआ इतनी जल्द नहि आँ सकते
दादा- बाहर् मेरे व्यक्ति गाडी केँ संगखडे हैं तुम् सभी उसमेबैठ कर आँ जाओ तुम्हारा समान आँ जाएगा
बापू- पऱ
दादा- यह हमारा हुक्म हैं
फिन हम् सभी गाडी मे बैठगए
माँ- क्याँ हुआ श्रेय केँ बापूऐसे अचानक क्यू बुलाए वोँ वोँ भि इसतरह सें
दिदी- हा बापूऐसा लगरहा हैं हमे किडनैप किया गय़ा हैं
मै - हा दिदी
पिताजी- तुम्हारे दादा बहोत बडे जमींदार हैं सारा प्रदेश मे उनकी चलती हैं बहोत नाम हैं उनका औऱ उतने हि खतरनाक हैं
फिन हम् कुछ घंटेबाद गाँव पहुंच गए
वहा दादीमा बापू कों देखकर बहोत खुश होँ गई औऱ उनकी औऱ हमारी आरती उतारि फिन चाची चाचा औऱ सभी हमारा स्वागत कियाफिन बापू नें दादा केँ पेरछुए औऱ मां नें भि उनकेपेर छुए
दादा- मेरा पोता आँ गय़ा मेरा वारिश तुम् लो जाकर आरामकर लोथकगए होगे हम् साम कों बात करेगे
फिन हम् अपने अपने कमरे मे जाकर आराम करनेलगे दादा कि हवेली महल जैसी थि औऱ मेरारूम बहोत बडा थां औऱ हसीन भि पऱ समझ नहि आँ रहा थां कि आखिर दादा नें हमे अचानक इसतरह सें केसे बुला लिया
वही मां पिताजी अपने कमरे मे
माँ- क्याँ बात हैं हमे अचानक इसतरह सें यहा क्यू लाया गय़ा हैं
बापू - पता नहींमै मा सें पूछकर आताहू
फिन पिताजी दादीमा केँ पासगए औऱ पूछा कि क्याँ बात हैं
दादीमा- तुम्हें याद हैं जब तूँ 18 साल कां हुआ थां तब एक् प्रथा करना थां जिसमे तुम्हे मुझसे विवाह करकेइस जायदाद औऱ गद्दी कां उत्तराधिकारी बनना थां
औऱ तूने औऱ मैनेमना करदिए थें औऱ तेरीजान बचाने केँ लिए मैनेकहा थां कि तेरा बेटा उत्तराधिकारी बनेगा औऱ ये प्रथा करेगा
बापू- क्याँ मा वोँ प्रथा अब भि हैं मै तौ सोचासभी ख़त्म हौ गय़ा होगा
मा - येइस राजपरिवार कि सत्ता रोपड कि प्रथा हैं जौ सदियों सें चली आँ रही हैं औऱ इसेहर तीन पीढ़ियों मे एक् बार करना अनिवार्य हैं बरनाये राजपरिवार औऱ गाँव नष्ट हौ जाएगा
पिताजी- औऱ अगर नहींकरो तौ
दादीमा- तोँ फिन उसकीबलि दि जाती हैं जोँ इंकार करता हैं औऱ अगर तेरे बेटा ये नहीं करता तौ उसकेसंग तेरी भि बलि होगी क्योंकि तूनेउसे उत्तराधिकारी बनाया थां
पिताजी- मतलब आपकी विवाह श्रेय सें होगी
दिदी- नहींमै उसकी दादीमा हू वोँ तेरा बेटा हैं तौ उसकी विवाह तेरी पत्नि मतलब उसकीमा सें करनी होगी
बापू- क्याँ पऱ मा वोँ दोनों मा बेटे हैं औऱ येगलत हैं औऱ वोँ दोनों कभी नहीं मानेगे
दिदी- देख बेटा मैसभी जानती हू पर्र उस टाइम तौ मैने तेरीबचा लिया थां पर्र अब मेरेहाथ मे कुछ नहि हैं अगरऐसा नहींहुआ तौ वोँ तुम् दोनों कों मार देंगे
बापू- पऱ मा
दादीमा- बेटा- अंजलि कों समझा औऱ सजधजकर कर तेरी औऱ अपने बेटे कि जीवन केँ लिएउसे ये करना हि होगा
पिताजी- माकुछ उपाय नहीं हैं इससे निकलने कां
दिदी- जोँ उपाय थां वोँ 28 साल पहलेकर चुके हें अबइसे कोई नहींरोक सकताहा अगर तेरा बेटा राजाबन जाएगा तौ वोँ आगेइस प्रथा कों समाप्त कर सकता ताकिआगे कि पीढी कों ये न् करनापडे
फिन बापू दुःखी होकर अपने कमरे मे आँ गए औऱ बिस्तर मे सर झुकाकर बैठगए
माँ- क्याँ हुआजी क्याँ बात हैं आप् माजी सें बात करनेगए थें नें क्याँ कहा उन्होंने औऱ आप् इतना परेशान क्यू हैं
पिताजी कुछ नहि बोले उन्हें कुछसमझ नहीं आँ रहा थां औऱ आए भि केसे अपनी पत्नि औऱ बेटे कि विवाह कि बात औऱ दोनोमा बेटे कों केसे बताए
फिन माँ भि फिक्र मे आँ गई
मां- क्याँ बात हैं जी बोलिए नं आखिर क्याँ बात हैं मुझे बहोत डरलगरहा हैं आखिरबात क्याँ हैं
पिताजी- अंजलि केसे बताऊँ मै तोँ बोल भि नहींपा रहेहू ( रोतेहुए )
मां- (रोतेहुए) बोलिए न् क्याँ बात हैं आपको मेरीशपथ
फिन पिताजी नें सारीबात माँ कों बता दि
मां- ये क्याँ कहरहे हैं आप् यह केसे होँ सकता हैं औऱ यह कैसी प्रथा हैं एक् मा बेटे कि विवाह औऱ बोलदो हमेकुछ नहि चाहिए हम् चले जायेंगे
पिताजी- नहींकर सकते मेरीमा नें मुझेइस प्रथा सें बचाने केँ लिएये मेरेआगे कि संतान मे डाल दि थि औऱ अगर मेरे बेटे नें ये नहीं किया औऱ उत्तराधिकारी नहींबना तोँ पिता नियम केँ मुताबिक श्रेय औऱ मुझे दोनो कि बलिदे देंगे
मां- क्याँ केसे आप् उनके बेटे औऱ श्रेय उनका पोता हैं वोँ ऐसा नहींकर सकते
बापू-कर सकते हें उनके पापा नें अपनेबडे बेटे कि बलि दि थि पापा केँ बडे भइया नें भि ये प्रथा करने सें मना किया थां तोँ वोँ भि अपनी परम्परा केँ लिए हमारी कुर्बानी दे देंगे
माँ- -(रोतेहुए) पर्र श्रेय केँ बापूमै ऐसा केसेकर सकतीहू वोँ मेरा एकलौता बेटा हैं इससे अच्छा तोँ मे अपनीजान दे देतीहू कम सें कम मेरा पति औऱ बेटा तोँ बच जाऐंगे
पिताजी- तब भि हमेमार देंगे मेरी दादीमा भि यहीकरी थि कि मेरा बेटा बच जाएगा मगर उन्होंने तब ताऊ जी कि बलिदे दि थि
माँ- हैं ईश्वर मेरीमौत सें भि मेरे बेटे औऱ पति कि जान नहींबच सकती क्याँ करूमै
बापू-अब एक् हि मार्ग हैं कि तुम् श्रेय सें विवाह करके उसकी पत्नि बनजाओ औऱ बाकी कां जिंदगी उसकेसंग रहो
मां-आप् क्याँ बोलरहे हौ पागल तोँ नहीं होँ गए वोँ मेरा बेटा हैं औऱ मै आपसे बहोत प्रेम करती हूं औऱ वोँ बच्चा हैं अभि वोँ भि कभी रेडी नहीं होगा वोँ मुझे पूछता हैं
बापू-सभी जानते हू औऱ मै भि तुमसे बहोत प्रेम करताहू पर्र अपने बेटे कि मौत नहींदेख सकता औऱ अगर सिर्फ़ मेरीमौत होती तौ खुशी खुशीमर जाता पऱ क्याँ करू औऱ तुम्हे भि अपने बेटे कि जीवन केँ लिएउसे अपनाने होगा औऱ उससे विवाह करनी होगी
माँ- पर्र मै केसे अपने हि बेटे कि बीबीबन सकतीहू औऱ उसकेसंग जिंदगी जीना
पिताजी- जानता हूये बहोत मुश्किल हैं पूरी जीवन कि सजा औऱ अपने हि बेटे केँ संग गृहस्थी गृहस्थी बसाना पर्र तुम्हे ये त्याग करना हि पडेगा
मां- पर्र केसे श्रेय केँ पिताजी मै अपने बेटे केँ हि संग औऱ वोँ अभि छोटा हैं औऱ आपका क्याँ होगा औऱ वोँ भि कभी नहीं मानेगे
पिताजी- देखो अंजू तुम्हे ये करना हि होगा अपने बेटे कि जीवन केँ लिएअब तुम्हे मा केँ संग एक् पत्नि बनकर उसकी रक्षा करनी होगी औऱ मै भि येसजा सह लूगा अपने बेटे केँ लिए औऱ श्रेय हमसे बहोत प्रेम करता हैं मै अपनीशपथ देकरउसे मना लूगा औऱ तुम् एक् पतिव्रता संस्कारी स्त्री हौ मुझे यकीन हैं तुम् अपना पत्नि धर्म पूरी निष्ठा सें निभाओगी
मां- ठीक हैं जी अपने बेटे केँ जिंदगी कि रक्षा केँ लिएमै येजहर पी लेंगी
फिनइस तरहसाम होँ गई औऱ सभी आँ गए मेरे नानाजी नानीमा औऱ उनका परिवार भि थां
मां पिताजी कां चेहरा उतराहुआ औऱ दुःखी थां दिदी औऱ सोचरहे थें कि आखिर क्याँ बात हैं माँ नें देखा कि नानीमा नानाजी भि आए हैं
दादा- तौ जैसा कि सबकोपता हैं हम् यहा क्यू इक्कठे हुए हैं इस राजपरिवार कि सत्ता केँ नए उत्तराधिकारी केँ लिए जोँ कि मेरेबडे बेटे कां बेटा श्रेयांश हैं
मैचौक गय़ा कि मै औऱ उत्तराधिकारी केसेसभी तालीबजा रहे थें
दादा- जैसा कि सबको जानते हें कि इस राजपरिवार मे हरतीन पीढ़ियों मे एक् बार करनाऐसा करना अनिवार्य होता हैं जिसमे एक् प्रथा हैं वोँ करनी होती हैं अमरेन्द्र तुम्हारी मे नें तुम्हें सभीपता दिया हैं न् तुम् दोनों रेडी हौ न् बहु तुम् तै हौ नं
बापू- पापा कों औऱ मार्ग नहीं हैं अगर हम् सिर्फ़ उत्तराधिकारी बस कि रस्मकरे औऱ ये प्रथा नं करे
दादा- ( चिल्लाते हुए) अमरेन्द्र चुप होँ जा 28 साल पहले तूनेये नहीं किया औऱ तेरीमा नें तुम्हें बचा लिया पऱ अब नहीं तेरे बेटे कों ये करना हि पडेगा बरना दूसरा मार्ग तुँ जानता हैं
मैडर गय़ा दादा कां येरूप देखकर मै औऱ दिदी सोचरहे थें कि आखिरऐसी कौन सि प्रथा हैं जिसके लिए पिताजी नहींकर रहे हैं
माँ धीरे-धीरे सें अपने पापा सें - बापू आप् कुछ करिए नं ऐसापाप मत होने दीजिए
नानाजी - बेटी ये प्रथा हैं जोँ अनिवार्य हैं औऱ राजा साहब केँ आगे हम् क्याँ कह सकते हैं
दादा- बहु तुम् सजधजकर हौ कि नहीं बरना अंजाम तुम्हे पता हैं
मां- धीरे-धीरे सें सर हिला दि
शाबाश मै जानता थां तुम् एक् संस्कारी औऱ रीति रिवाज कों मानने वाली स्त्री होँ वकील पेपरलाओ येलो अमरेन्द्र औऱ इसमे साइनकर दो औऱ बहु तुम् भि
पिताजी- ये क्याँ हैं
दादा- तुम् दोनों कः तलाक केँ पेपर ताकि तुम् दोनों कानूनी रूप सें अलग हौ जाओ औऱ श्रेयांश औऱ बहु कि विवाह हौ सके
मै औऱ दिदी ये सुनकर चौकगए हमेकुछ समझ नहीं आँ रहा थां कि ये क्याँ हैं मै तोँ सन्नरह गय़ा मगर दिदी नें बोला
दिदी- ये क्याँ कहरहे हैं आप् दादा मां औऱ श्रेय कि विवाह ये केसे होँ सकता हैं वोँ दोनों मा बेटे हैं आपकोपता हैं आप् क्याँ कहरहै हैं येपाप हैं औऱ मां बापू आप् चुप क्यू हैं औऱ मान केसेगए
फिन पिताजी नें दिदी कों चुप कराया औऱ बोला बेटी चुप होँ जा
दादा- अमरेन्द्र समझा अपनी बेटी कों बरना तूँ जानता हैं हम् दादाजी बाद मे हैं पहले राजा हैं
पिताजी नें अपनीशपथ देकर उनकोचुप करा दिया
मै - पर्र दादा येगलत हैं मै अपनी मां केँ संग केसे वोँ मेरेलिए पूजनीय हैं मै उनके बारे मे ऐसासोच भि नहीं सकतामै ऐसा नहीं करूगा
दादा- तौ तुम् औऱ तुम्हारे बापू कों मरना होगा
मां- डरकर नहींऐसा मत कीजिये वोँ मान जाएगा श्रेय तुम्हारी तरफ मेरीशपथ हैं
फिनमै चुप हौ गय़ा फिन मां औऱ बापू नें तलाक केँ पेपर पऱ साइनकर दिया
वकील- राजा साहबसाम तक इनका आधिकारिक रूप सें तलाक होँ जाएगा
दादा- ठीक हैं बहुअब तुम् अमरेन्द्र कि पत्नि नहीं होँ तौ ये मंगल सूत्र उतारकर अमरेन्द्र कों देदो औऱ विवाह तक तुम् अलग कमरे मे रहोगी
मंत्री जी सारी रियासत मे ऐलान करवादो कि इस महीने कि 21 कों हमारे उत्तराधिकारी कि विवाह हैं
फिन मां नें रोतेहुए मंगल सूत्र उतारकर बापू कों दे दियामै औऱ दिदी भि रोरहे थें
दादा- अबसभी रोना धोनाबंद करो औऱ आगे कि तैयारी करोसभी अभि जाओबहु तुम् अमरेन्द्र औऱ सुमित्रा औऱ बहु केँ माता पिता यहीरहे
Rajsi parampara - Rishton Ki Agni – New Episode
Update 2
दादा- देखोबहु मै जानता हू कि ये तुम्हारे लिए बहोत मुश्किल हैं मगर तुम् बहोत संस्कारी औऱ एक् पतिव्रता स्त्री होँ औऱ अब तुम् हमारे राजपरिवार कि नई महारानी बनने वाली हौ तौ अबइस राजपरिवार कि जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर हैं तुम्हे अपनाहर धर्म पूरी निष्ठा औऱ ईमानदारी सें निभाना होगामै जानता हूं कि तुम् खुश नहीं हौ मगर हम् भि मजबूर हैं तोँ जौ हौ रहा हैं उसे स्वीकार करलो औऱ श्रेयांश केँ लिए भि सोचोमै उम्मीद करताहू कि तुम् उसकी खुशी कां ख्याल रखोगी औऱ जिसतरह तुमने अमरेन्द्र केँ संग पत्नि धर्म निभाया हैं उसीतरह श्रेयांश केँ संग भि तनमनधन सें पत्नि धर्म कां पालन करोगी
माँ- पापा वोँ अभि बच्चा हैं ये हम् बाद मे नहींकर सकतेउसे थोडा समझदार तौ हौ जानेदो
दादा- वोँ 18 कां हौ गय़ा हैं औऱ बडा होँ गय़ा हैं हमारे टाइम तोँ औऱ कम उम्र मे विवाह हौ जाती थि औऱ तुम् तोँ समझदार होँ इस रिश्ते मे तुम् हि मुख्य रहोगी हमेशा औऱ तुम्हे सोचना हैं कि तुम् अपने बेटे कि जीवन मे विवाह केँ बादकमी छोडोगी कि नहीं औऱ अपना जौ फर्ज हैं निभाओगी कि नहीं
फिन माँ धीरे-धीरे सें बस अपनी गर्दन कों हिला दिया
दादीमा- देखोये बहोत कठिन हैं मगर तुम को हि अपने बेटे कों सम्भालना हैं
दादा- अमरेन्द्र अब सें तुम्हे बहु कों अपने बेटे कि बीबी औऱ अपनीबहु कि तरह देख्ना हैं औऱ वैसा हि बर्ताव करना हैं तुम् दोनों केँ कारण तुम्हारे आज कि रिश्ते नहीं खराब होने चाहिए औऱ बहु तुम्हे भि अमरेन्द्र कों अपने ससुरजी कि तरह देख्ना हैं औऱ अमरेन्द्र तुम् चाहो तोँ दूसरी विवाह कर सकते होँ
पिताजी- मुझे दूसरी विवाह नहीं करनी औऱ मै अपनाहर फर्ज औऱ धर्म निभाऊगा पापा
नानाजी- देख बेटी अब श्रेयांश हमारा दामाद बनने वाला हैं औऱ तुम्हारी तरफ जौ संस्कार दिए उसके मुताबिक तुझेही अपना पत्नि धर्म पूरी निष्ठा निभाना हैं
नानीमा- हा बेटी वोँ तेरा बेटा हैं येसच हैं मगरअब तेरा पति भि बनने वाला हैं तोँ उसहर खुशी देना
माँ- वोँ मेरा बेटा पहले हैं मैनेउसे पैदा किया हैं तौ हमेशा वोँ पहले मेरा बेटा हि रहेगा औऱ ये विवाह मै उसके जिंदगी कि रक्षा केँ लिएकर रहीहू मगरहा विवाह केँ बाद वोँ मेरा पति भि हौ जाएगा इसलिये मै अपनाहर फर्ज पूरा करूंगी जोँ एक् पत्नि कां होता हैं मगर वोँ हमेशा मेरा बेटा हि रहेगा
दादा- वोँ तुम्हारी मर्जी हैं मगरअब इस राजपरिवार कि जिम्मेदारी तुम्हारी हैं तौ इसेआगे बढाने भि तुम्हे हि हैं समझरही हैं न्
फिनसभी अपने अपने कमरे मे चलेगए माँ पिताजी अपने कमरे मे मे गए औऱ कमरे मे आकर मां रोने
पिताजी- देखो अंजूअब जौ होना हैं होगा होँ उसे हम् नहींबदल सकतेमगर अगर तुम् हि टूट जाओगी तौ हम् अपने बच्चों कों केसे समझाएगे
माँ- तोँ क्याँ करू मुझेकुछ समझ नहीं आँ रहा आपसे मेरा तलाक होँ गय़ा औऱ दसदिन बाद मेरी विवाह मेरे हि बेटे सें होने वाली हैं औऱ मैकिस मुंह सें अपने बेटे सें येकहू
पिताजी- हमदोनों मिलकर समझाएगे
फिन मां थोडा शांत हुइ औऱ अपना समानपैक करनेली
फिन थोडीदेर मे मै औऱ दिदी उनके कमरे मे गए
पिताजी- आओ बैठो तुम् दोनों हमे तुम् दोनों सें बहोत जरूरी बात करनी हैं
फिन हम् बैठगए
बापू- तुम् दोनों हमे कितना प्रेम करते हौ?
दिदी औऱ, मै - येकोई पूछने कि बात हैं हम् आप् दोनों कों बहोत प्रेम करते हैं औऱ आपकाहर हुक्म हमारे लिए पत्थर कि लकीर हैं
दिदी- पर्र पिताजी आखिरये चल क्याँ रहा हैं दादा श्रेय औऱ माँ कि विवाह कि बातकर रहे हैं औऱ आप् दोनों भि मानगए
पिताजी- देखो पहले तुम् दोनों हमारी शपथखाओ कि हम् जोँ भि कहेंगे उसे तुम् बिना सबालकिए मानेगे
औऱ, हमारे फैसले पर्र कोई उंगली नहीं उठाओगे
मै - पऱ पिताजी ऐसी क्याँ बात हैं
दिदी- हा पिताजी हम् तोँ अमान दोनों कि हरबात मानते हैं औऱ मुझे तौ यहाकुछ समझ नहीं आँ रहा हैं हम् यहा सें अपनेघऱ चलते हैं
पिताजी- तुम् दोनों शपथखा रहे हौ याँ नहीं
फिन हम् दोनों नें शपथखा ली कि हम् आपकाहर फैसला मानेगे
बापू- देखो बच्चों बाहर् जोँ हुआ वोँ सच हैं औऱ अगर हमनेये नहीं किया तोँ वोँ हमेमार देंगे
दिदी- बापूऐसे केसेमार देंगे हम् पुलिस केँ पास जाएंगे
बापू- दिया तुम्हारे दादा राजा हैं यहा उनकी हि चलती हैं औऱ परम्परा केँ लिए वोँ कुछ भि कर सकते हैं
मे- हम् यहा सें भाग जाते हैं औऱ लंदनचले जाते हें
पिताजी- तुम्हारे दादा हमेकही भि नहीं छोडेंगे वोँ कितने पावरफुल हैं ये तुम् नहीं जानते
दिदी- तौ क्याँ माँ औऱ श्रेय कि विवाह करा देंगे
पिताजी- हा बेटी हमारे पास औऱ कोई मार्ग नहि हैं
मै - मैये नहींकर सकता इससे अच्छा मै अपनीजान दे दूंगा
ये सुनते हि मां मुझे एक् चाटा मारा
माँ- ऐसा दोवारा मत कहना तेरी जीवन केँ लिए हम् येकररहे हैं तूँ हमारी जान हैं अगर मरने सें हि सभीठीक होँ जाता तोँ मैमर जातीमगर उससे भि कुछ नहीं होगा
मै- पऱ माँ आप् मेरी माँ होँ आपकेसंग विवाह केसेये पाप हैं
माँ- बेटा ये करना हि पडेगा मै जानती हूये बहोत मुश्किल हैं
मै - पऱ माँ मै आपकेसंग केसे
पिताजी- तुम् दोनों नें शपथखाई हैं बरना हमारा मरा मुंहमै औऱ दिदी अपने कमरे मे चलेगए औऱ मां भि अपना समान लेकर दूसरे कमरे मे चली गई
फिन हम् चुप होँ गए आखिरअब क्याँ कह सकते थें
मै अपने कमरे मे परेशान होकरसोच रहा थां ये क्याँ हौ रहा हैं माँ सें विवाह मतलबमै औऱ मां पति पत्नि ये केसे होँ सकता हैं क्याँ करूकुछ समझ नहीं आँ रहाऐसे हि सोचते रचतेमै सो गय़ा
अगली सुभहमहल मे तैयारी शुरुआत हौ गई थि महल मे सजावट होँ रही थि मै परेशान थां मुझेकुछ समझ नहीं आँ रहा थां मैचुप चाप अपने कमरे मे बैठा दिदी भि परेशान थि मां बापू तौ दुखी थें हि सभी अपनेकाम मे लगे थें बापू अपने आफिस कां काम करके अपने दर्द कों छिपारहे थें औऱ मां चुपचाप बैठीबस सोंचरही थि
फिन दिदी मेरे कमरे मे आई
दिदी- क्याँ कररहा हैं श्रेय
मै - क्याँ करूगा दिदी कुछसमझ नहीं आँ रहा हैं पता नहीं क्याँ हौ रहा हैं
दिदी- देखअब जौ हौ रहा हैं वोँ तौ हम् रोक नहीं सकते औऱ मां पिताजी नें कुछ फैसला लिया हैं तौ हमारे बारे मे सोचकर हि लिया होगा
मै - आप् क्याँ कहरही हौ दिदी मतलब माँ सें विवाह करलू
दिदी- हा औऱ कोई मार्ग भि तोँ नहीं हैं औऱ कभी न् कभी तौ तुम्हारी तरफ विवाह करनी पड़ेगी औऱ वोँ लडकी अंजान होगीमगर मां तौ हमारी मां हैं वोँ तुम्हारी तरफ तुझसे अच्छा जानती हैं औऱ उनके जैसी संस्कारी औऱ अच्छी महिला नहीं हैं वोँ एक् पतिव्रता औऱ बहोत अच्छी हैं औऱ वोँ कितनी सुंदर बी हैं
मै - पऱ दिदी वोँ मां हैं औऱ, उनके संग विवाह
दिदी - देख तुँ चाहे याँ नं चाहेअब होगावही जौ हौ रहा हैं औऱ अब हम् कुछ नहींकर सकतेअब एक् हि मार्ग हैं जोँ हौ रहा हैं उसेमान लें औऱ अपनी विवाह कों एंजाय कर विवाह एक् बार हि होती हैं
मैकुछ नहि बोला औऱ चुपचाप रहा दिदी चली गई
वही दूसरी ओर नानीमा मां केँ पास गई
नानीमा - बेटी देखमै जानती हू जोँ होँ रहा हैं उससे तुम् खुश नहीं हौ मगर क्याँ कर सकते हें जौ हौ रहा हैं उसे स्वीकार कर लेँ औऱ इसनये रिश्ते कों पूरा सम्मान दे औऱ श्रेयांश कों भि तूँ समझा ताकी वोँ भि कोई गिल्ट न् रखे नहीं तौ बेचारा टूट जाएगा आखिर उसकी उम्र हि क्याँ हैं अगर तूसमझाएगी तौ मान जाएगा
मां- ठीककह रही होँ मा आप् अगरमै हि टूट गई तोँ उसेकौन सम्हालेगा मै तौ अपने आप् कों समझा लूंगी औऱ उसे भि
नानीमा- शाबाश साम कों दरबार मे तुम् दोनों कि विवाह कि घोषणा होगी औऱ बाकी चीजें भि बताई जाएगी तौ तुम् दोनों रेडी रहना
फिन नानीमा चली गई औऱ माँ मेरे कमरे मे आई
मां-श्रेय क्याँ कररहा हैं
मै - हा मां बस बैठाहू
मां- देखमै जानती हू जौ कुछ हौ रहा हैं वोँ नहीं होना चाहिए मगरये हमारे राजपरिवार कि परम्परा हैं औऱ मैने तुम्हारी तरफ सिखाया हैं कि परम्परा निभाना चाहिए
मै - मां मगरये गलत परम्परा हैं।
माँ- अगर तेरी लगता हैं कि येगलत हैं तोँ तुम्हे इसे रोकने केँ लिए अपने दादा कि स्थान आनां होगा औऱ फिन तूँ इसेबदल सकता हैं मगर उसकेलिए हमेये करना हि पडेगा ताकिआगे किसी कों भि ये न् करनापडे
मै - पर्र माँ आपकेसंग केसे
माँ- देखमै तुझेही जानती हू तूँ मुझे समझता हैं औऱ क्याँ चाहिए औऱ तेरेसंग मै हमेशा खुश रहूंगी औऱ तूँ भि मुझे बेटे औऱ पति दोनों तरह कां सम्मान देगा औऱ मेरा बेटा हि मेरा पति होगाहा मै थोडी उम्र वालीहू
मै - माँ आप् ठीक होँ औऱ आपसी अच्छी कोई नहीं हैं मगर आपकेसंग यह गलती हैं
मां- मैकहरही हंसने न् गलत नहीं हैं औऱ तुँ औऱ मै हमेशा पहलेमा बेटा हि रहेंगे बाद मे पति पत्नि
मै- आप् कहरही हौ तौ ठीक हैं माँ मगरसच मैयेठीक हैं नं औऱ बापू कां क्याँ वोँ आपसे बहोत प्रेम करते हैं औऱ आप् भि उनसे
मां- ये हम् दोनों कां फैसला हैं औऱ तेरी सबसे अधिक प्रेम करते हें क्यू कि तुँ हम् दोनों कि निशानी हैं
फिन मेरेमन सें ओढाबोझ हल्का हुआ औऱ माँ वहा सें चली गई
फिनसाम हौ गई औऱ सभी इक्कठे हौ गए पूरा रियासत सें बहोत सें लोगआए थें सबबडे बडेलोग यहा तक कि मेरे विद्यालय केँ प्रिंसिपल भि मैचौक गय़ा
दादा- जैसा आप् सबकोपता हैं हमारे राजपरिवार कों उसका अगला उत्तराधिकारी मिलरहा हैं मेरेबडे बेटे कां बेटा श्रेयांश हमारा अगला उत्तराधिकारी हैं परम्परा केँ मुताबिक उसकी विवाह अंजलि सें होँ रही हैं औऱ विवाह 21 कों हैं औऱ अब वोँ हमारी जौ 10 हजार करोड़ कि संपत्ति हैं उसमे सें 8000 करोड़ कि संपत्ति अंजलि औऱ श्रेयांश कि होगी औऱ बाकी हमारे छोटे बेटे औऱ उनकी पत्नि औऱ बच्चों कि
ये सुनकर मैचौक गय़ा कि दादा कि इतनी संपत्ति हैं औऱ अब वोँ मां औऱ मेरी हैं पिताजी कि संपत्ति तौ बस 100 करोड़ कि हैं दिदी भि चौक गई मगर बापू कों कोई फर्कनं। ई पडा क्याकी उन्हें पता थां
सबने ताली बजाई औऱ दादीमा नें शाही कंगन मां कों देदिए
फिन सबको दादा नें आमंत्रित किया औऱ फिनसभी चलेगए
दिदी - बापू क्याँ सच मे इतनी संपत्ति हैं औऱ अब वोँ श्रेय औऱ माँ कि होँ गई हैं
पिताजी- हा बेटा येसच हैं
दिदी- इतनी दौलतअब हमेकोई फिक्र नहि हैं कम सें कमकुछ तौ अच्छा हुआइस सभीमै
दिदी- अब तुम् राजा बनने वाले हौ श्रेय औऱ मां रानी
मै - क्याँ दिदी
दिदी- तुँ ठीकलग रहा हैं क्याँ तूँ रेडी होँ गय़ा।
मै - हा मां नें मुझे समझाया कि अबहमे एकसाथ दो रिश्ते निभाना हैं औऱ हम् हमेशा पहलेमा बेटा हि रहेंगे
दिदी- अच्छा हुआ तूँ मान गय़ा अब अपनी विवाह कों एंजॉय कर औऱ नये जीवन कि तैयारी कर
औऱ मां आप् भि दुख कों भूलजाओ औऱ एक् नई शुरुआत करो
फिन सारे परिवार केँ लोग बैठे औऱ बात शुरुआत हुई
दादा- देखोअब मै बूढे हौ गय़ा हू तौ मेरा पोता मेरा उत्तराधिकारी हैं औऱ अब सें सबको श्रेयांश औऱ अंजलि कों सम्मान देना औऱ उनका हुक्म मानना हैं हमारे बाद औऱ जैसे कि विवाह हौ रहै तौ कुछ रिश्ते बदल जाएंगे हा अंजलि औऱ श्रेयांश अपने दोनों रिश्ते मान सकते हैं मगर बाकीलोग अब उन्हें नए रिश्ते सें हि मानेंगे
मै - क्याँ
दादीमा- हा बेटा ऐसा हि हैं
दादा- तोँ अब सें अंजलि बहु हमारे पोते कि बीबी होगी औऱ हम् उसके ससुरजी नहीं दादाजी ससुरजी होगे औऱ वोँ बीहमे दादा कहेंगीले औऱ सुमित्रा कों दादीमा
माँ- पऱ पापा ये जरूरी हैं
दादा - पापा नहीं दादा औऱ तुम् औऱ श्रेयांश चाहो वोँ पहले कि तरह बुला सकते होँ मगर बाकी रिश्ते बदलगए हें जैसे तुम्हारे माता पिता अब श्रेयांश केँ नानाजी नानीमा नहीं हैं बल्कि सासू ससुरजी हैं औऱ श्रेयांश अब तुम् उन्हें मा पापा कहोगे औऱ अमरेन्द्र कां छोटा भइया औऱ उसकी पत्नि तुम्हारे भि चाची चाचा हैं औऱ श्रेयांश कि फूफी तुम्हारी फूफी औऱ अमरेन्द्र अब तुम्हारे ससुरजी हैं तोँ उन्हे अब तुम् भि श्रेयांश कि तरह पापाजी कहोगी औऱ दियाअब तुम्हारी बेटी केँ संग नन्द भि हैं तोँ तुम् सें दिदी कहोगी क्योकिं वोँ श्रेयांश कि बडी बेहन हैं औऱ दिया तुम् अब अंजलि कों भाभी कहोगी
दिदी- क्याँ वोँ मां हैं मेरी औऱ मै केसे
दादा- देखोये करना हि होगा हुक्म हैं हमारा बाकीसभी बाद मे वकील प्रॉपर्टी केँ पेपर तैयार होँ गए
वकील-जी राजा साहब
फिन दादा नें मां कों जायदाद केँ पेपरदे दिए औऱ उसमे हमारे नाम पऱ सभीकुछ हौ गय़ा थां
फिनसभी चलेगए औऱ हम् चारो बापू केँ कमरे मे आँ गए
Rajsi parampara - Rishton Ki Agni - Aage kya hua? Next part padhiye
Relavant source : click here


