किस्मत का फेर (New Updates ) - kismat ka fer – New Episode
Update 3
“अहह। तुम्हारा लन्ड तौ बहोत मस्त हैं, मेरी टाइट बुर कों बहोत मजा आएगा “
काम्या मुंहऊपर करके समीर कि तरफ देखकर शरारती मुस्कान सें बोलीं
औऱ फिन अपनेहाथ सें उसके लन्ड मे ऊपर नीचे करकेमुठ मारने लगी। उसका दूसरा हाथ समीर कि गोलियों कों सहलाने लगा।
फिन काम्या नें समीर केँ लन्ड मे मुंह लगाकर सुपाडे कों किस किया औऱ अपनीजीभ निकालकर उसको चाटने लगी।
फिन मूतने केँ छेद कों जीभ सें कुरेदने लगी औऱ फिन अपने मुंह कों खोलकर जितना हौ सके लन्ड कों मुंह मे भर लेती हैं
औऱ मुंह मे लन्ड कों अंदर बाहर् करनेलगी। समीर पूरीतरह सें खुशी केँ सागर मे डूब गय़ा औऱ काम्या केँ सर कों अपने हाथों सें
पकड़कर अपनी आँखेबंद करकेकमर उचकाते हुए उसका मुंह चोदने लगा।
“ चूस काम्या चूस मेरे लन्ड कों “ उसकेगले तक लन्ड घुसाते हुए बोला।
“छोड़ इसकोयह मेरामाल हैं “ कोई लड़का समीर केँ पासआके चिल्लाया।
फिनउस लड़के नें काम्या केँ बाल पकड़कर उसका मुंह समीर केँ लन्ड सें हटा दिया।
“रंडी छिनाल ! थोडा देर मेरा इंतजार नहि कर सकती थि “ वोँ लड़का काम्या कों हाथ पकड़कर झटके सें फर्श सें उठाते हुए बोला।
उसकी तमीज देखकर समीरसमझ गय़ा कि यह चूतिया उन लोगों मे सें हैं जोँ लड़कियों कि क़द्र नहि करते
औऱ उन्हें केवल अपनामाल समझते हें।
समीर नें अपना लन्ड अंडरवियर मे डालकर पैंटपहन ली। समीर कां मूडहुआ कि उस चूतिये कां थोबड़ा बिगाड़ दे,
उसके मजबूत बदन केँ सामने वोँ चूतिया कुछ भि नहि थां।
मगर उसने सब्र सें काम लिया औऱ गुस्से मे उसको घूरता रहा।
अपने बॉयफ्रेंड कों अचानक सामने देखकर पहले तोँ काम्या हड़बड़ा गई,। फिन मुस्कुराते हुए फटाफट अपने कपडे पहनने लगी।
उसकेलिए यहकोई नयीबात नहि थि।
आसपास कि कुछ जोड़ियां भि यह तमाशा देखकर मुस्कुरा रहीथीं।
“समीरयह हैं मेरा बॉयफ्रेंड मुकुल औऱ यह समीर हैं “ काम्या भांप लेती हैं कि समीर कों क्रोध आँ गय़ा हैं, झगड़ा टालने केँ लिये,
वोँ दोनों कां परिचय करा देती हैं।
मुकुल समीर सें हाथ मिलाता हैं औऱ हंसकर कहता हैं “ मे तुमसे नाराज़ नहि हूं मित्र, यह छिनाल हैं हि ऐसी। ”
काम्या समीर कि तरफ हताश नज़रों सें देखती हैं औऱ कहती हैं “सॉरी समीर। “
मुकुल अपनी पैंट कि ज़िप खोलकर लन्ड बाहर् निकाल लेता हैं औऱ काम्या कों धक्का देकर घुटनो केँ बल बिठा देता हैं
औऱ उसके मुंहमेँ अपना लन्ड ठूंस देता हैं।
“छिनाल अबचूस मेरे लन्ड कों औऱ दिखा मुझको कि तुँ कितना अच्छा लन्ड चूसती हैं। “
काम्या अब मुकुल कां लन्ड चूसने लगती हैं।
इस तमाशे सें समीर कां मूड ख़राब होँ जाता हैं। उसकी KLPD होँ गयीँ, थि।
वोँ अपनासर हिलाते हुए सीढ़ियों सें नीचे उतरने लगा, घऱ जाने केँ लिये।
अब बर्थडे पार्टी सें उसकामन उखड़ गय़ा थां।
उधर रिया बहुतदेर तक बर्थडे पार्टी मे कोई अच्छा सां लड़का ढूंढती हैं। मगरकोई सही सां लड़का नहि मिलरहा।
अधिकतर लड़के अपनी गर्लफ्रेंड केँ संग थें। जौ अकेले थें वोँ उच्छृंखल याँ बेहूदे टाइप केँ हि दिखरहे थें।
कोई रिया केँ मन मुताबिक मिल हि नहि रहा थां।
रिया थोड़ी देर औऱ इंतजार करने कां फैसला करती हैं शायदकोई मिल जाये।
अगर नहि मिलेगा तोँ कोईबात नहि, पऱ लड़का अच्छा हि होना चाहिए।
वरना रिस्क लेने कि कोई जरुरत नहि, इससे बेहतर तौ प्रोग्राम कैंसिल हि कर दिया जाये।
तभी उसकी नज़र सीढ़ियों सें नीचे उतरते समीर पऱ पड़ती हैं। उसकी आँखों मे चमक आँ गयीँ,।
यह बिलकुल सहीलग रहा हैं। उसनेमन हि मन सोचा, ऐसा हि तोँ चाहिए थां।
स्मार्ट भि हैं औऱ सौम्य भि लगरहा हैं, ऐसा लड़काहाथ सें जाने नहि दूंगी।
“hi, मे रिया “ वोँ लपक केँ उसकेपास पहुँचती हैं।
" hi, मे समीर “
जब समीर नें अच्छे सें रिया कों देखा तोँ देखता हि रह गय़ा, लम्बा हाइट औऱ लम्बी चिकनी टाँगे,
बड़े क्लीवेज वालेटॉप औऱ छोटी स्कर्ट मेँ रिया क़यामत लगरही थि।
बड़े क्लीवेज सें उसकी बड़ी बड़ी चूचियों कां बहुत हिस्सा दिखाई देरहा थां।
रिया नें उसकी आँखों केँ आगेहाथ हिलाया औऱ हँसते हुए सेक्सी आवाज़ मेँ बोलीं
“ देख लिया मुझे अच्छी तरह सें ? केसेलगी मे तुम्हें ? “
समीर पहले तौ झेंप गय़ा फिन मुस्कुराते हुए बोला “ तुम् बहोत हसीनलग रही हौ, सच्ची … बहोत सेक्सी। “
रिया मुस्कुरायी औऱ फिन उससे कॉलेज कि बातें करनेलगी। जब उसको समीर केँ बर्ताव औऱ बातों सें
तसल्ली होँ गयीँ, कि समीर एक् शरीफ लड़का हैं तौ उसने अपने पत्ते खोलने शरू किये।
“ शायदफिन कभी हम् मस्ती कर पायें पऱ अभि तौ तुम् मेरा एक् कामकर दो “
एक् मादक मुस्कान सें समीर कों रिझाते हुए बोलीं।
“ बताओ, मे क्याँ कर सकता हूं तुम्हारे लिए रिया। “
“ वोँ.वोँ.” रिया हिचकिचाई।
समीर कां मूड अभि भि काम्या कि वजह सें ख़राब हि थां पऱ वोँ धैर्य सें रिया केँ बात कहने कां इंतजार करनेलगा।
“ मेरी एक् प्यारी यार हैं, … …… उसेकोई संग चाहिए थोड़ी देर केँ लिए …… मे केसे कहूं ……मतलब।.
बहुत वक्त सें उसने सेक्स नहि किया हैं। उसको सेक्स कि ख़्वाहिश होँ रही हैं ………
औऱ अगर मे खरीखरी बात कहूं तोँ she needs a hard fucking। समझे मेरीबात कों ?
पता नहि मे अपनीबात ढंग सें समझा भि पायी याँ नहि तुमको। "
“ मे क्याँ कहुँ रिया, स्वयं मे मजाकर रहा थां एक् लड़की केँ संग। पऱ ठीकसमय पऱ उसका बॉयफ्रेंड आँ धमका
औऱ मेरा सारामजा किरकिरा कर दिया। औऱ अब मेरामूड ऑफ हौ गय़ा हैं। ”
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Update 4
"ओह, यह तोँ तुम्हारे संग बहोत बुराहुआ, समीर। मगर मेरीयार केँ मामले मे तुम्हारे संगऐसा नहि होगा।
जहाँ तक मुझे मालूम हैं वोँ आजकल सिंगल हि हैं औऱ अभि तौ वोँ सेक्स केँ लिए उतावली भि हैं।
तुम्हें भि बहोत मजा आएगा उसकेसंग, सच मे, मेरा यकीन मानो तुम्। ”
यह सुनकर समीरहंस दिया। रिया केँ संगअब उसकामूड भि थोडा ठीक होँ गय़ा थां।
“ वोँ बहोत अच्छी लड़की हैं औऱ हसीन भि। बल्कि मुझसे भि कहीं अधिक सुन्दर।
मुझे उसको अपने सें सुन्दर बताने मे जलन हौ रही हैं। मगर वोँ वास्तव मे बहोत सुन्दर हैं तुम् मेरा विश्वास करो। “
मूड थोडा ठीक होने सें समीर कों रिया कां यह प्रस्ताव भा जाता हैं।
जब लड़की कि इतनी तारीफ यहकररही हैं तौ मौकाहाथ सें क्यूं जानेदूँ।
काम्या केँ संग वैसे भि उसकी KLPD हौ गयीँ, थि।
अब अपनी अधूरी रह गयीँ, उत्तेजना कों शांत करने कां यह सुनहरा मौका थां।
" ठीक हैं, मे सजधजकर हूं। "
“एक् बात औऱ हैं समीर, मेरीयार फर्स्ट फ्लोर मे एक् अँधेरे कमरे मे हैं।
औऱ वोँ अपनी पहचान उजागर करना नहि चाहती। वोँ तुमसे कुछ भि नहि बोलेगी औऱ तुम् भि उसेकुछ नहि बोलोगे।
अजनबियों कि तरह सेक्स करोगे औऱ बिनाकुछ बोले हि कमरे सें बाहर् आँ जाओगे।
मंजूर हैं तुम्हें ? “
“ यह हैं तोँ कुछ अजीब सि बातमगर चलेगा। तुम् चाहती होँ कि मे अभि जाऊं उसकेपास याँ ….”
समीर नें अपनीबात अधूरी छोड़ दि ताकियह नं लगे कि वोँ सेक्स केँ लिए उतावला हौ रहा हैं।
“तुम्हारी मर्ज़ी जब भि तुम् जानां चाहो। मे तुम्हें वोँ रूम दिखा देती हूं।
मे फिन सें तुम्हें बतारही हूं कि अगर तुम्हें कुछ केहना पड़ हि जाये तौ अपनी आवाज़ चेंजकर केँ धीमे सें केहना
औऱ जितना होँ सकेकम सें कम शब्द हि बोल्ना, ठीक हैं ? ”
“ ठीक हैं। "
रिया समीर कों कमरे कि तरफ लेँ जाती हैं।
कमरे केँ पास पहुंचकर दोनों रुकगये।
“ द्वार (दरवाज़ा) खोलने सें पहले मुझसे वादाकरो कि तुम् मेरी प्यारी यार कों कोई भि कष्ट नहि दोगे।
मे नहि चाहती कि उसेकुछ भि तकलीफ़ होँ। “
समीर सहमति मे सर हिला देता हैं औऱ कमरे केँ अंदर जाकर द्वार (दरवाज़ा) बंदकर देता हैं।
आँचलबेड पर्र दरवाज़े कि तरफपीठ करके बैठी थि अँधेरे औऱ सुनसानी कि वजह सें वो अपनेदिल कि तेज धड़कनो कों साफ़ महसूस करपारही थि। घबराहट सें वोँ हांफरही थि औऱ उसकी छातीऊपर नीचे होँ रही थि।
तभी द्वार (दरवाज़ा) खुलने औऱ बंद होने कि आवाज़ कमरे मे गूँजउठी औऱ उसके पीछे सें क़दमों कि आहट नज़दीक आते गई,। आँचल नर्वस होकर अपनेहाथ आपस मे मलनेलगी। उसकी घबराहट औऱ बढ़ गयीँ,। एक् अनजाने डर सें उसके जिस्म मे एक् कंपकंपी सि दौड़ गयीँ,। तभी उसने अपने कन्धों पर्र किसी केँ हाथ कां स्पर्श महसूस किया। उसका जिस्म बुरीतरह सें काँपउठा।
रिया केँ कहे अनुसार बिनाकुछ बोले अजनबी नें आँचल केँ कन्धों कों सहलाना शरू किया। आँचल नें उसके मज़बूत हाथ अपनी बांहों औऱ कन्धों पर्र घूमते महसूस किये। एक् ऐसा व्यक्ति उसके जिस्म पऱ हाथ फिरारहा हैं जिसको उसने पहलेकभी नहि देखा। इस ख्याल सें उसके शरीर मे झुरझुरी सि दौड़ गई, औऱ उसकादिल औऱ ज़ोर सें धड़कने लगा।
अजनबी केँ हाथ उसकी बांहों कि रसीले त्वचा पर्र रेंगने लगे। फिन अजनबी केँ होठों नें उसकी गरदन पर्र चुम्बन लिया औऱ उसके कानो केँ निचले हिस्से कों अपने होठों मे दबाया। फिन उसके कन्धों औऱ गरदन केँ जोड़ कों हल्का जीभ सें चाटा। आँचल केँ मुंह सें हलकीआह निकल गयीँ,। अब उसकी घबराहट कि स्थान बढ़ती उत्तेजना नें लेँ ली थि।
फिन अचानक सें उसने आँचल केँ दोनों हाथों कों पकड़कर उसको खड़ाकर दिया औऱ अपनीतरफ घुमा लिया। उसने आँचल कों अपने आलिंगन मे भर लिया औऱ अपने चेहरे कों झुकाकर धीरे-धीरे सें उसका चुम्बन लिया। आँचल नें अपने कांपते हाथ उसकी छाती पर्र रख दिये। उसने अपने एक् हाथ सें आँचल केँ चेहरे कों थोडा ऊपर उठाकर अपनेहोठ आँचल केँ नरम औऱ मुलायम होठों पऱ रखदिए फिन
अपनाहाथ पीछे लेँ जाकर उसकी गर्दन पऱ रख दिया। आँचल नें अपने होठों केँ बीच उसकीजीभ महसूस कि औऱ अपने होंठ थोडा खोलदिए। अब उसने अपनीजीभ आँचल केँ मुंह मे डाल दि औऱ आँचल नें अपनी बांहे उसकेगले मे डालदीं। उसकी मज़बूत बाँहों मे आँचल नें अपने कों बहोत नाजुक सां महसूस किया।
उसने अपने होंठअलग किये औऱ एक् झटके मे अपनी कमीजसर केँ ऊपर सें उतार दि। फिन उसने आँचल कों अपनीओर खींचा औऱ चुम्बन लेतेहुए फिन सें आँचल केँ मुंह मे अपनीजीभ डाल दि। आँचल नें भि चुम्बन मे उसका पूरासंग दिया औऱ उसकी नग्न छाती सें जालगी। उसकेहाथ आँचल कि पीठ सहलाते हुए नीचे कों बढ़ेओर उसके नितम्बों कों पकड़कर उसको अपने औऱ नज़दीक खींचा। आँचल कों उसके लन्ड कां बढ़ता कड़ापन अपनेपेट पऱ महसूस हुआ। उसके चुम्बन प्रगाड़ होतेगए औऱ आँचल कों साँस लेने मे दिक्कत होनेलगी।
आँचल नें अपने होंठअलग किये औऱ उसके गालों कों चूमा, फिनगले औऱ कन्धों कों चूमा। उसने अजनबी केँ शरीर सें आतीकुछ पहचानी सि मरदाना महक कों लम्बी सांस लेकर अपने मे भर लिया। वो आँचल केँ पूरे जिस्म पर्र अंगुलियां फिरारहा थां औऱ उसकीतेज होती सांसे आँचल कों साफ़ सुनाई देरही थि। आँचल उसके सीने कों चूमते हुए धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे कों बढ़ी। उसकेपेट पर्र चुम्बन लिया औऱ घुटनों केँ बल बैठके अजनबी केँ पैंट कि बेल्ट खोलने लगी
। फिन पैंट केँ संग अंडरवियर नीचे उतारकर उसका खड़ा लन्ड आज़ाद कर दिया।
आँचल नें एक् हाथ सें लन्ड कों पकड़कर सुपाड़े कों जीभ सें हल्का सां चाटा, अजनबी केँ मुंह सें हलकी सिसकी निकली। आँचल नें फिन सें सुपाड़े कों चाटा औऱ फिन अपने मुंह मे भर लिया।
वोँ आँचल केँ बालों मे अपनी उँगलियाँ फिराने लगा।
आँचल लन्ड कों चूमती औऱ चाटती हैं औऱ अपने मुंह मे लन्ड कों अंदर बाहर् करती हैं। वोँ जितना हौ सके उतनाउस बड़े औऱ मोटे लन्ड कों मुंह मे भरने कि कोशिश करती हैं। कुछदेर बाद वोँ आँचल कां सर अपने हाथों मे पकड़ लेता हैं औऱ उसके मुंह मे लन्ड कों अंदर बाहर् करने लगता हैं।
थोड़ी देरऐसे हि उसका मुंह चोदने केँ बाद वोँ आँचल कों खड़ाकर लेता हैं औऱ फिनउसे बेड पऱ लिटा देता हैं। उसके होंठ आँचल कि गर्दन औऱ गले कों चूमने लगते हें। अपनेगले मे उसकीजीभ केँ स्पर्श सें आँचल कि सांसे औऱ तेज हौ गयीं। आँचल अपने बांहे उसके चौड़े कन्धों पऱ डाल देती हैं औऱ अपनी कोमल उँगलियों सें उसकी मांसपेशियों कों महसूस करती हैं। अजनबी उसकी ड्रेस कों ऊपर करने कि कोशिश करता हैं। आँचलबेड पर्र बैठ जाती हैं औऱ ड्रेस कों अपनेसर केँ ऊपर सें निकाल देती हैं। फिनहाथ पीछे लें जाकर अपनी ब्रा केँ हुक खोलकर, ड्रेस औऱ ब्रा कों फर्श पर्र डाल देती हैं। औऱ फिन सें लेट जाती हैं।
वोँ आँचल केँ ऊपर झुककर उसके होठों कां चुम्बन लेता हैं औऱ फिन उसके मुंह मे जीभ डालकर उसकीजीभ चाटने लगता हैं। आँचल उसके चेहरे पऱ अपनी उँगलियाँ फिराती हैं। अजनबी अपनेहाथ उसके चिकने सपाटपेट पर्र फिरते हुएऊपर कों बढ़ाता हें। उसकीनरम चूचियों कि गोलाई कों महसूस करता हें औऱ चूचियों कों अपने हाथों सें हल्का सां दबाता हैं। फिन एक् ऊँगली औऱ अंगूठे केँ बीच निप्पल कों दबाकर थोडा घुमाने लगता हैं। आँचल केँ निप्पल उत्तेजना सें तन जाते हें। उसके हाथों केँ अपने नग्न जिस्म पऱ स्पर्श सें उसकी उत्तेजना बहोत बाद जाती हैं। उसकी हलकी सिसकारियां निकलने लगी औऱ उसे अपनी टांगों केँ बीच गीलापन मह्सूस हुआ। अबउसे औऱ देर बर्दाश्त नहि होँ रही थि। उसकी बुर लन्ड कों लेने केँ लिए बेताब हौ रही थि। वोँ अपनाहाथ बढ़ाकर उसका लन्ड पकड़ लेती हैं औऱ आगे पीछे हिलाने लगती हैं।
अजनबी समझ जाता हैं औऱ उसकी गीली हौ चुकी पैंटी कों उतारकर फर्श पर्र फ़ेंक देता हैं। आँचलपीठ केँ बल लेती हुई घुटने मोड़कर अपनी टाँगें थोडा फैला लेती हैं औऱ उसका इंतजार करती हैं। वोँ महसूस करती हैं कि यहकुछ अलग मिज़ाज़ कां व्यक्ति हैं औऱ बिलकुल भि चोदने कि जल्दबाज़ी नहि कररहा हैं। जैसा वोँ समझरही थि कि औरों कि तरहझट सें बुर पर्र टूट पड़ेगा औऱ चुदाई हौ जाएगी वैसाकुछ भि नहि हौ रहा थां। उसेसमझ आँ गय़ा कि इस अजनबी केँ संग सेक्स लम्बा खिंचने वाला हैं।
वोँ अजनबी उसके घुटनो केँ अंदर वाले हिस्से कों चूमता हैं। फिन चिकनी मांसल जांघों कों चूमते हुए औऱ अपनेहाथ उसकीनरम टांगों पर्र फिराते हुएऊपर कों बढ़ता हैं। औऱ फिन अपनी उँगलियों सें उसकी प्यासी बुर कां स्पर्श करता हैं। अपनी एक् ऊँगली बुर केँ अंदर डालकर अंदर कि गर्मी औऱ गीलेपन कों महसूस करता हैं। आँचल केँ जिस्म मे कंपकंपी दौड़ जाती हैं औऱ उसकी बुर सिकुड़कर उस ऊँगली कों जकड लेती हैं। वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे ऊँगली बुर मे अंदर बाहर् करने लगता हैं।
उत्तेजना सें आँचल भि अपने नितम्बों कों उसीलय मे ऊपर कों उछालती हैं। आँचल कों महसूस होता हैं कि वोँ अब झड़ने हि वाली हैं। तभी वोँ अपनी ऊँगली बाहर् निकल लेता हैं औऱ अपने गर्म होठों कों आँचल केँ नाजुक अंग पर्र रख देता हैं। आँचल कों अपनी बुर पऱ उसकी गर्म सांसो कां स्पर्श मह्सूस हुआ। तभी उसकीजीभ clitoris कों छेड़ने लगती हैं। आँचल केँ मुंह सें एक् लम्बी कराह निकल गई,। वोँ clitoris कों जीभ सें बारबार चाटने लगा औऱ फिनजीभ बुर केँ अंदर डालकर अंदर बाहर् करनेलगा।
आँचल कि उत्तेजना बर्दाश्त सें बाहर् होँ गई, औऱ वोँ अपने नितम्बों कों हिलाते हुए छटपटाने लगी।
फिन उसके मुंह सें एक् चीख निकली औऱ वोँ कामतृप्त होँ गई,। अहह …। कितना मजा …। कितना सुख।
अब वोँ अजनबी उसके शरीर कों चूमता हुआऊपर कों बढ़ने लगा। उसकीनरम गोल चूचियों कों चूमते हुए उनकेऊपर केँ निप्पल कों अपनीजीभ सें छेड़ दिया। फिन उसकेगाल, होठ औऱ उसकी पलकों कां चुम्बन लिया औऱ एक् हाथ सें उसके बालों कों सहलाने लगा। आँचल नें अपने घुटने थोड़े ऊपर कों मोड़लिए। उसने अपने लन्ड कों बुर केँ छेद पऱ लगाया। औऱ एक् धक्का देकर सुपाड़ा अंदर घुसा दिया। आँचल नें अपनी फूली हुइ बुर कि फांकों केँ बीचछेद मे उसके मोटे लन्ड कों अपनीकसी बुर कों फैलाते हुए अपनेलिए स्थान बनाकर अंदर घुसते हुए महसूस किया औऱ उसके मुंह सें फिन सिसकारियां निकलने लगी। वोँ अजनबी आँचल कां चुम्बन लेतेहुए हि अपना लन्ड उसकी बुर मे तेजी सें अंदर बाहर् करनेलगा।
उसके धक्के इतनीतेज होतेगये कि आँचल कां पूरा शरीर बुरीतरह सें हिलजा रहा थां औऱ उसकी चीखें निकलने लगी। अब वोँ एक् औऱ कामतृप्ति कि ओरबढ़ रही थि। बुर कि गहराईयों तक घुसते लन्ड केँ धक्कों सें उसेलगा कि वोँ अब किसी भि टाइमझड़ जाएगी।
कुछ वक्त तक ऐसे हि चुदाई चलतीरही। जब आँचल कों लगा कि बसअब उसका पानी निकलने हि वाला हैं। तभीउसे अपनी बुर मे निकलता उसका वीर्य महसूस हुआ वोँ झड़ चुका थां।
कुछसमय आँचल केँ जिस्म पऱ ऐसे हि पड़े रहने केँ बाद उसने अपना लन्ड बुर केँ बाहर् निकाल लिया। आँचल नें अपने हाथों सें उसकीकमर कों पकड़कर फिन सें अपने सें चिपकाना चाहा वो उससेअलग नहि होना चाहती थि उसकी कामतृप्ति अधूरी रह गयीँ, थि। वोँ समझ गय़ा, हल्का सां हँसते हुए उसने उसकी उत्तेजना सें काँपती चिकनी जांघों पऱ एक् चपत लगायी ओर उसको घुमाकर घुटनो केँ बल बिठाने लगा। आँचलसमझ गयीँ, वोँ अब डौगी पोज़ मे चोदना चाहरहा हैं वोँ झटपट कुतिया बन गई,।
वोँ एक् हाथ उसके नितम्ब पऱ रखकर दूसरा हाथ उसकीपीठ मे स्पाइन केँ ऊपर फिराता हैं। फिन दोनों हाथों कों उसकेहवा मे उठेहुए बड़े बड़ेगोल नितम्बों पऱ फिराने लगता हैं। फिन उसके नितम्बों कों चूमकर, चूतरस सें भीगेहुए लन्ड कों आँचल कि बुर मे डाल देता हैं। फिन उसने आँचल केँ बालों मे अपनी अंगुलियां फंसाकर उसकेसर कों पीछे खींचा औऱ बुर मे धक्के लगाने लगा।
आँचल दर्द औऱ खुशी केँ मिले जुले सागर मे गोते लगाने लगी। उसने एक् हाथ सें आँचल कां नितम्ब पकड़ा औऱ दूसरे हाथ सें उसकेसर केँ बाल पकड़कर आँचल कों पूरीतरह सें अपने काबू मे करके बुर पऱ तेजतेज धक्के लगाने लगा। आँचल कों महसूस हुआ कि अब वोँ उसकेसंग पहले जैसी नरमी सें पेश नहि आँ रहा हैं। वोँ अजनबी अब उसकेसंग सख्ती सें रफ़ सेक्स कररहा थां। तेजतेज धक्कों सें उसकी जाँघे आँचल कि जांघों सें टकरारही थीं। आँचलफिन सें उत्तेजना कि चरम सीमा कि ओर बढ़ने लगी औऱ फिन दूसरी बार कामतृप्त होँ गई,। जबरदस्त ओर्गास्म सें उसके घुटने कमज़ोर पड़गए। उसका शरीर काँपउठा ओर उसकी बुर कि मसल्स नें लन्ड कों बुरीतरह जकड लिया।
उसने आँचल केँ ओर्गास्म कों महसूस कियाओर अपने धक्के धीमेकर दिए।
फिनजब वोँ शांत हौ गयीँ, तौ उसने अपने अंगूठे कों थूक सें भिगोकर आँचल कि गांड केँ छेद पऱ दबाया। आँचल केँ शरीर मे एक् झटका सां लगा। सिकुड़े हुएछेद पर्र अंगूठा अंदरघुस गय़ा ओर गांड कि टाइट मसल्स नें उसके अंगूठे कों जकड लिया। आँचल केँ जिस्म मे सिहरन सि दौड़ गई,। उसनेजोर सें एक् गहरी सांसली। अब वोँ अपने अंगूठे कों घुमाते हुए गांड मे अंदर बाहर् करनेलगा। आँचल केँ होठों सें एक् दर्दभरी हल्की चीख निकल गई,। उसने आँचल कि गीली बुर सें थोडा रस लेकर गांड केँ छेद कों थोडा औऱ गीला किया। फिन चुतरस सें भीगेहुए लन्ड कों बुर सें निकलकर गांड केँ टाइटछेद पऱ लगा दिया। आँचल नें अपनी गांड केँ छेद पर्र उसका सुपाड़ा महसूस किया वोँ काँपउठी। उसने अपनी गांड कों हटाने कि कोशिश कि मगर अजनबी केँ मजबूत हाथों नें उसको साइड्स पर्र दबाये रखा औऱ उठने नहि दिया। वोँ डरी हुई थि पर्र उसकी मजबूत पकड़ केँ कारणकुछ कर नहि पारही थि इसलिये वोँ जल्द हि शांतपड़ गयीँ, ओर जोँ वोँ चाहता थां उसको करने दिया।
उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने लन्ड केँ सुपाडे कों उस गहरेरंग केँ टाइटछेद मे घुसा दियामगर लन्ड मोटा होने केँ कारण आँचल दर्द सें कसमसाने लगी।
आँचल कां ध्यान दर्द सें हटाने केँ लिए वोँ एक् हाथ कि उँगलियों सें उसके clitoris कों सहलाने लगा।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसने अपने लन्ड कों आँचल कि टाइट गांड कि गहराइयों मे जड़ तक घुसा दिया। बीचबीच मे आँचल दर्द सें कराहती रही। मगर उसनेउसे नज़रअंदाज़ करतेहुए धीरे-धीरे धीरे-धीरे पूरा लन्ड अंदर घुसाकर हि दम लिया। थोड़ी देर तक उसने अपना लन्ड ऐसे हि रखाओर उसकी clitoris कों सहलाते रहा। जब आँचल कां दर्द सें कसमसाना बंद होँ गय़ा। तब उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे लन्ड कों अंदर बाहर् करना शुरुआत किया। अचानक उसने सुपाड़े कि टिप छोड़कर पूरा लन्ड बाहर् निकाल लिया औऱ फिन तेजी सें अंदर धांस दिया। आँचल कि चीख निकल गई,। वोँ ऐसे हि तेजतेज धक्के लगाता रहा। आँचल दर्द औऱ मजा सें सिसकारियां लेतीरही। फिन दोनों नितम्बों कों हाथ सें कसके पकड़कर वोँ बुरीतरह सें आँचल कि गांड मारने लगा। आँचल केँ पूरे नंगे शरीर मे दर्द कि लहरें सि उठनेलगी। आँचल कि टाइट गांड नें उसके मोटे लन्ड कों ऐसे जकड़रखा थां कि उसे इतना अच्छा पहलेकभी भि महसूस नहि हुआ थां, जितना मजाउसे आँचल कि गांड मारने मे मिलरहा थां।
वोँ इतनीजोर सें औऱ तेजी सें धक्के लगाने लगा कि आँचल अपने घुटनो केँ बलटिक नहि पायी औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनेपेट केँ बलगिर पड़ी। वोँ भि उसी केँ संगआगे झुक गय़ा औऱ उसकी गांड मारते रहा। उत्तेजना मे भरकर वोँ आँचल कि टाइट गांड कों चोदते रहा। आँचलबेड पर्र पड़ीरही, उसकी चीखें निकलती रही। उसे ऐसालग रहा थां जैसे किसी नें उसको पीछे सें चीर दिया हौ। पहले किसी नें भि उसकेसंग इतनारफ़ सेक्स नहि किया थां, जितना इस वक़्त यह अजनबी कररहा थां। उसे अजनबी नें किसी रंडी कि तरह मनमर्जी सें रगड़ केँ चोद दिया थां।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकी कराहें सिसकारियों मे बदलते गयीं औऱ फिन उसका जिस्म अकड़ गय़ा। उसको तीसरी बार जबरदस्त ओर्गास्म हुआ। तभीउस अजनबी कों भि लगा कि वोँ झड़ने वाला हैं उसने अपना लन्ड गांड सें बाहर् निकाल लियाफिन उसने आँचल कों पलटकर उसके मुंह मे वीर्य कि धार पर्र धार छोड़ दि। आँचल कां मुंहउस गाड़े सफ़ेद वीर्य सें भर गय़ा औऱ उसकी साँसगले मे हि फंस गयीँ,।
किस्मत का फेर (New Updates ) - kismat ka fer – New Episode
Update 5
झड़ने केँ बाद निढाल होकर वोँ आँचल केँ शरीर पर्र लेट गय़ा। आँचल अपनी जबरदस्त चुदाई सें थककर गहरी गहरी सांसे लें रही थि। वोँ थकान सें चूर होँ चुकी थि। ऐसा जबरदस्त सेक्स उसकेसंग पहलेकभी किसी नें नहि किया थां। उसको इतनी कामतृप्ति पहलीबार मिली थि।
थोड़ी देरबाद अजनबी उठा औऱ अपने कपडे ढूंढकर पहनने लगा।
“थैंक्स " आँचल नें धीरे-धीरे सें कहा, वोँ मुस्कुराया औऱ कमरे सें बाहर् चला गय़ा।
थकान सें आँचल नें अपनी आँखें बंदकर ली औऱ बेड पऱ लेटीरही। आँचल कां हिलने कां मन हि नहि हौ रहा थां, उसका पूरा शरीर दर्दकर रहा थां। उसके जिस्म सें पसीने औऱ चूतरस कि मिली जुलीमहक आँ रही थि। मगर वोँ अधिकदेर वहां नहि रुकना चाहती थि क्योंकि किसी भि टाइम रिया वहां आँ सकती थि। वोँ नहि चाहती थि कि रिया उसकोऐसी हालत मे देखे औऱ परेशान हौ।
पूरीजान लगाकर वोँ बेड सें उठी औऱ अपने कपडे ढूंढने लगी। उसको अपनी ब्रा औऱ ड्रेस, बेड केँ पास हि पड़ेमिल गए पर्र पैंटी नहि मिली। ब्रा औऱ ड्रेस पहनकर उसने अँधेरे मे हि हाथों सें फर्श पऱ टटोला औऱ थोडा आगेउसे अपनी पैंटी भि पड़ीमिल गई, जिसे अजनबी नें उतारकर फ़ेंक दिया थां। अपनी बुरीतरह सें थक चुकी टांगों पऱ उसने पैंटी ऊपर खींची औऱ बिना लाइटऑन कियेहुए हि लड़खड़ाते पैरों सें उस अँधेरे कमरे सें बाहर् आँ गई,।
कमरे सें थोड़ी दूरी पर्र रिया एक् लड़के सें बातों मे मशगूल थि।
आँचल नें रिया कि तरफ देखा औऱ एक् कमज़ोर मुस्कराहट उसकेथके हुए चेहरे पऱ आयी।
रिया उसकीतरफ देखकर मुस्कुरायी “ अरे मेरी प्यारी छिनाल, मे तोँ इंतजार करते करतेथक गई,।
मैंने तौ सोचा तुम् उसको छोड़नेवाली हि नहि होँ रातभर। ”
आँचल हंसी औऱ उस लड़के कि तरफ देखकर रिया सें आँखों हि आँखों मे पूछा।
“ अरेयह मेरा साथी हैं अबमजा करने कि मेरी बारी हैं " औऱ जोर सें हँसते हुए रियाउस लड़के कों कमरे मे धकेलने लगी,
फिन आँचल कों आँख मारते हुए बोलि “ तुम् मेरा इंतजार मत करना, मुझे थोडा वक्त लगेगा यहा। "
सीढ़ियों सें नीचे उतरते वक्त आँचलसोच रही थि कि क्याँ कभीफिन सें उस अजनबी सें उसका सामना होगा
औऱ अगरऐसा हुआ भि तोँ क्याँ वोँ फिन सें उसकेसंग सेक्स करना चाहेगी ?
उधर समीर अनजान लड़की केँ संग अच्छी चुदाई सें खुश होकर बियर पीने केँ लिएरुक जाता हैं
औऱ फिनघऱ कि तरफ जाने केँ लिए निकल पड़ता हैं।
वहीँगेट पऱ उसको आँचल दिखाई दे जाती हैं, उसकोपता नहि थां कि आँचल भि बर्थडे पार्टी मे आयी हैं।
" आँचल " उसने पीछे सें आवाज़ दि।
आँचल चौंककर पीछे मुड़ी औऱ अपने छोटे भइया समीर कों वहां खड़े देखकर हैरान हौ गयीँ,।
समीर औऱ आँचल कि उम्र मे केवल डेढ़साल कां अंतर थां, इसलिये समीर उसको दिदी न् कहकर आँचल हि कहता थां।
वैसे भि लम्बा चौड़ा गठीला बदन होने सें समीर उससे बड़ा लगता थां।
दोनों भइया बेहन किराये केँ फ्लैट मे रहते थें। समीर कों आँचल केँ पासआये हुए ज़्यादा टाइम नहि हुआ थां।
आँचल नें अभि अपने फ्रेंड्स कों समीर सें नहि मिलवाया थां, इसलिये इसशहर मे उन्हें भइया बेहन केँ रूप मे कोई नहि जानता थां।
अपने बॉयफ्रेंड सें ब्रेकअप केँ बाद आँचल नें अपने दूसरे फ्रेंड्स सें भि मिलना जुलना कमकर दिया थां औऱ अधिकतर वक्त
वोँ अपने कमरे मे हि गुजारती थि। समीर केँ आँ जाने सें उसका अकेलापन भि थोडा कम होँ गय़ा थां।
बर्थडे पार्टी मे आने सें पहलेजब समीरघऱ गय़ा थां तोँ वहां उसको आँचल नहि मिली थि।
मगर आँचल कां लिखाहुआ एक् नोट मिला थां। जिसमें उसने लिखा थां कि वोँ आजदेर सें घऱ आएगी इसलिये समीर डिनर पर्र
उसका इंतजार न् करे। आँचल कों मालूम नहि थां कि किसी नें समीर कों भि उसी जश्न मे invite किया हैं। समीर भि बाद मे उसी बर्थडे पार्टी मे चलाआया।
“अरे समीर तुम् ! तुम् यहा !!! ” आँचल कों मालूम थां कि समीर कों यहा ज़्यादा लोग नहि जानते तौ फिन वोँ जश्न मे केसेआया ?
उसे किसने बुलाया ? ऐसे हि प्रश्न उसकेमन मे आये।
“अरे मुझे एक् मित्र नें invite किया थां यहा, पऱ वोँ मुझे कहीं दिखा हि नहि ” उसने अपनीथकी हुइ सि लगरही बेहन कि तरफ देखकर कहा।
“मे अपनी मित्र कि कार मे आयी थि, मगर वोँ अभि नहि आँ रही हैं। मे घऱजारही हूं, तुम् लो जश्न केँ मज़े। "
“ बहोत हौ गयीँ, जश्न, अब मे भि घऱ हि जारहा हूं ” समीर बोला औऱ उसके चेहरे कि तरफ ध्यान सें देखने लगा।
आँचल नें उसको घूरते हुए पाया तोँ भौंहें चढ़ाते हुए बोलि “क्याँ हुआ ? क्याँ देखरहे होँ ? ”
“ कुछ नहि “ समीर मुस्कुराया औऱ वाहन पार्किंग कि तरफबढ़ गय़ा।
“तौ तुमने जश्न कां मजा लिया ? ” गाड़ी मे बैठकर आँचल बोलीं।
“हाँमजा तोँ आया मुझे जश्न मे, औऱ तुम्हें ?” व्हीकल स्टार्ट करतेहुए समीर बोला।
“ मुझे भि ” आँचल बोलि औऱ फिन मुस्कुराते हुएउन मादक पलों कि याद मे खो गई,।
लम्बे वक्तबाद अपनी बेहन कों खुश देखकर समीर भि मन हि मनखुश हुआ, उसने महसूस किया थां कि ब्रेकअप केँ बाद सें आँचल थोडा दुःखी रहती थि। पऱ वोँ उसकी उदासी दूर करने केँ लिएकुछ नहि कर सकता थां, क्योंकि वोँ उसका भइया थां, उसके बॉयफ्रेंड कि स्थान वोँ केसेभर सकता थां।
“हाँ, तुम्हारा चेहरा बतारहा हैं। किसी लड़के केँ संगथीं नाँ तुम् ?”
समीर मुस्कुराते हुए आँचल कि तरफ देखकर बोला।
आँचलकुछ नहि बोलि औऱ सामने कि तरफ देखते रहकर केवलमंद मंद मुस्कुरा दि।
“ लाओ मे तुम्हारा चेहरा साफ़कर दूँ “ समीर एक् टिश्यू पेपर निकालकर आँचल कि ओर झुककर उसके चेहरे केँ एक् कोने पऱ लगाहुआ
सफ़ेद चिपचिपा सां कुछ, पोंछ देता हैं।
आँचल भौंचक्की सि, कभी समीर केँ हाथ कों, कभी टिश्यू पेपर कों देखती रह गयीँ,।
“ shit …” आँचल नें धीरे-धीरे सें कहा।
अजनबी नें उसके मुंह मे अपना वीर्य भर दिया थां। जौ मुंह सें बाहर् निकलकर उसके चेहरे पऱ इधरउधर लग गय़ा थां।
मुंह साफ़ करने केँ बावजूद शायद कहीं पऱ थोडा सां चिपका रह गय़ा थां।
आँचल बुरीतरह झेंप गई,। उसने समीर कि तरफ सें नज़रें मोड़ली औऱ वाहन सें बाहर् कि तरफ देखने लगी।
हालाँकि दोनों हि बहोत आधुनिक ओर खुले विचारों केँ थें औऱ हम् उम्र होने कि वजह सें दोनों कि आपस मे बहोत पटती थि।
दोनों केँ अपने अपने बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड रह चुके थें। दोनों कि अपनी अपनी सेक्स लाइफ थि औऱ दोनों एक् दूसरे कि प्राइवेसी कि रेस्पेक्ट करते थें ….मगरफिन भि। यह वाक़्या तौ आँचल कों शर्मिंदा कर गय़ा।
घऱ पहुँचने तक दोनों मे सें कोईकुछ नहि बोला।
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