क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son – New Episode
७।
'अहह, आयेजा, मेरीजान, काश तूँ मुझेमिल जाये'
'आआआहहाई, आखिर तुम को मेरे बुड्ढे अब्बू मे ऐसा क्याँ दिख गय़ा आआह, आयेजा' मे अपने अब्बू केँ नयी बीबी कों देखछिप करमुठ माररहा थां, मेरी अम्मी कि यहसौत एक् अलग हि बला थि, औऱ जब सें मैंने इस्पे अपनाआँख टिकाया थां, मे तौ जैसे पागल सां होँ गय़ा थां, क्याँ काया थि, परदे मे भि इसकेकमर कां जलवा चालक जाता, इसकेबड़े तसरीफ जैसेकोई गुलाबजामून स्लिम करालिए हौ, औऱ इसके मां वल्लाह वल्लाह सुभानअल्लाह, मे इस्पे वैसे हि पागल थां जैसे मेरा बाप, सायद बाप बेटे कि स्वाद एक् जैसा हि थां,
'आआआआआह, आयेजा' औऱ मे झड़नेलगा, मेरामल निचे जमीन पे गिराने लगा, औऱ मे धरासाई बाथरूम केँ छत केँ रोशन्दानी केँ बगल मे बैठ केँ अपनासर हिलने लगा,
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मेरे कानो मे यह आवाज़ आँ रहा थां, औऱ मे खिड़की सें निचे जानका, निचे अब्बू खड़े थें नयी अम्मी केँ संग, मेरा तोँ उन दोनों कों संगदेख केँ खूनखौल गय़ा, मगरजब उनलोगो नें मेरी अम्मी केँ बारे मे बातें करना सुरु कि तौ मे उनकी बातों पे ध्यान देनेलगा,
'अरे आप् तौ समझदार हें, वोँ हें तोँ मेरे बेटे कि अम्मी हि न्'
'अरे इसका मतलब आप् हर वक़्त उसका हि पक्ष लेंगे, आपके बच्चे कि अम्मी तौ मे भि बननेजा रही हूं, आपको तोँ मेरीकोई चिंता हि नहि'
'अरे बेगमजान' औऱ मेरा अब्बा अपनीनयी बेगम कों गले सें लगा लेता हैं, औऱ मे ऊपर गुस्से सें उठ बाहर् घऱ केँ निकल जाता हूं, मुझे अपने बाप सें बहोत िष्य हौ रही थि, एक् मेरी अम्मी जोँ कि क़यामत थि, औऱ फिनयह छिपकिली,
'साला आखिरउस बुड्ढे मे इन दोनों कों क्याँ दिख गय़ा' औऱ मे एक् पान वाला केँ दुकान पे सें सिगरेट लें पिने लगता हूं, मेरायह नयी पटाखा नें जान काबूकर लिया थां, मे हर वक़्तनज़र छिपा घूरता रहता थां औऱ सायदउसे भि मेरी गन्दी नज़र कां एहसास कही न् कही थां, क्याँ गांड मटका केँ चलती हैं साली, पहले मेरे नानीहाल मे वोँ रांड पडोसी सें मेराकाम चल जाता थां, मगरयहा न् तौ मेरीकोई सेटिंग थि, औऱ न् मेरेपास वक़्त थां, मुझेकुछ लड़कियां पसन्द जरूरथीं, मगर मुझेपता नहि क्यूं बड़ी उम्र कि मस्त सरीर वाली औरतें बहोत क़यामत लगाने लगीं थि, सायद मेरे अम्मी कां असर मेरेऊपर बहोत गहरापड़ा थां।
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मे घऱ पहुँच गय़ा, औऱ मेरे अब्बू केँ कमरे सें एक् बहोत हि धीमी कराहने कि आवाज़ आँ रही थि, औऱ मेरा दिलो दिमाग़ जल गय़ा औऱ मेरे अब्बू औऱ उनकीनयी बीबी कि छवि मेरे दिमाग़ मे आयी, औऱ मेरा दिमाग़ ख़राब होनेलगा.
'हट मादरचोद'
औऱ मे वहां सें दौड़ केँ निकल गय़ा, मेरा पूरा सरीरउस आयेजा कां सोंच कैम्प रहा थां, मेरामन काम करने सें मनकररहा थां, औऱ मेरा लण्ड किसी तलवार कि तरह मेरे पैजामा मे अकड़ाहुआ थां,
'कास आयेजा मुझेमिल जाये, हैं अल्लाह'
'रेहान क्याँ हलचल हैं भइया, बड़ी दिनों बाद दिखे होँ' मे सरउठा केँ देखता हूं, वहां मेरा क्रिकेट खेलने वाला अच्छा मित्र खड़ा थां,
'क्याँ हाल हैं भइया, मे किसीकाम सें दूसरे सहर गय़ा हुआ थां'
'अच्छा, औऱ सभी कैसाचल रहा हैं, सुने कि तेरे बाप नें तेरेलिए नया मां लेकेआये हें, हआहाहा, वोँ यहबोल केँ मुझपे हंसाने लगा, औऱ इस सें मुझे थोड़ा क्रोध आँ गय़ा,
'क्याँ बकता हैं बे, वोँ मेरीकोई मां छम्मी नहि हैं' मे उसपे भड़कते हुए कहता हूं,
'अरे तुँ तौ क्रोध हौ गय़ा, वैसे हें वोँ बहुत दिलकश, औऱ अच्छे मिजाज कि, भइया जौ हुआसो हुआ, तूँ उनपे क्रोध मतकर'
'तुँ कब सें उसका वकील हौ गय़ा, वैसे भि तूँ उसे जनता हि क्याँ हैं, सेल उसने मेरे अम्मी कि जीवन मे आगलगा दि' मे थोड़ा औऱ क्रोध हौ गय़ा औऱ यह देखते हुए वोँ मुझे सांत करनेलगा,
'अरे भइया, अभि मे उनसे उनसे औऱ तेरे अब्बू सें मिला बाजार मे इसलिये बातउठा दि, चल भइया सॉरी' औऱ वोँ जानेलगा, पहले पहले उसकाकहा हुआबात मुझेसमझ मे नहि आया, मेरे अब्बू औऱ उनकीनयी बेगम तौ घऱ मे देह केँ खेल मे व्यस्त थें, तोँ फिन इसने किसेदेख लिया,
'अरेरुक भइया तुझेही मेरे अब्बू कहां मिले, मुझे जारा उनसेकाम हैं'
'वोँ चांदीमल हलवाई केँ दुकान पे कुछखा रहे थें', मे वहां सें दौड़ केँ निकला, उस हलवाई केँ दुकान पे, औऱ मेरे साथी केँ कहेहुए बातसही निजकल औऱ मेरे अब्बू औऱ उनकीनयी बेगम, चाट ख़तम करने केँ कगार पे थें, औऱ हंसहंस केँ बातें कररहे थें, मे कुछदेर स्तब्ध रहा, आखिरघऱ मे कौन थां,
'अम्मी' औऱ मे घऱ केँ तरफदौड़ निकाला, क्याँ मेरी अम्मी घऱ मे अपने सौहार केँ पलंग पे किसी औऱ केँ संग, मे अपनासर झकझोर लिए, मैंने बहुतइन अपनी अम्मी पे नज़ररखा थां, मगरफिन बहुतदिन तक कुछ नहि हुआ औऱ मेरे अब्बू केँ नयी बीबी केँ लिएहवस नें लापरवाह कर दिया,
'क्याँ मेरी अम्मी इतनी हिम्मती हैं, हैं अल्लाह' औऱ मे अपनेघऱ पहुँच गय़ा,
'अम्मी अम्मी अम्मी अम्मी, कहां हें आप्, मुझेकोई जरुरी काम हैं', अंदर सें मेरी अम्मी बहार निकलती हें, औऱ उनका चेहरा पसीने सें बुरीतरह सें लथपथ थि, औऱ उन्होंने पूरा आबयाकर रखा थां, जोकि वोँ घऱ मे कभी नहि पहनती थि, मगर उनके आबया मे भि मे देख सकता थां, उनकेबाल बुरीतरह सें बिखरे हुए थें, मेरा सरीर कैम्प रहा थां,
'क्याँ हुआ बेटा, कुछ चाहिए आपको'
'हां अम्मी मेरेलिए पानी कां एक् गिलास लेँ आओ नं'
'बस इतनी सि बात केँ लिए इतनासोर, चल मे लेकेआयी ' मे अपने जातेहुए अम्मी पे नज़र डाला, उनकेकमर मे गज़बलचक थि, औऱ वोँ थोड़ा लंगड़ा रही थि, औऱ मेरेसर सें पसीना आनेलगा, औऱ यह मेरे सामने साफ़ होनेलगा कि मेरी अम्मी नें फिन अपना मुँहकला करवाया हैं,
'यह लें बेटा' मेरी अम्मी झुक केँ मुझे पानी कां गिलास पकड़ने केँ लिए देती हैं, वोँ मुझसे बहुत लगभग थि, औऱ मेरानज़र उनके चेहरे पे जाता हैं, औऱ मेराआँख फैट जाता हैं, मेरी अम्मी केँ एक् गाल पे गहरा दांत केँ निशान थें, मेरा सरीर कंपनी लगता हैं, औऱ मे मन मे कहता हूं,
'हैं अल्लाह'
'बेटा औऱ कुछ चाहिए' मे बस अपना चेहरा नाँ मे घूमता हूं,
'अच्छा मे नहाने जारही हूं' औऱ मेरी अम्मी अपने विशाल गांड लेके नहाने कों चली जाती हैं, औऱ मे वोँ गिलास उठा अपने आप् कों ठंडा करने केँ लिए अपनेसर पे दाल देता हूं,
bhay rehan chutiya h,uski mummy itne logo say chudwa li or woh kuch nahii kr pa rah h. Yrr uski mummy kaa sacch too rehan k samne lete aao
क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son – New Episode
-अम्मी अम्मी अम्मी, मेरी प्यारी रंडी अम्मी, मैंने अपनेमन मे सोचा मेरे दिमाग़ मे मेरे अम्मी केँ गाल पे उसकटे निशान कि छविचढ़ गयीँ, थि, औऱ मे दूर सें अपने अम्मी कों लगातार घऱरहा थां, मेरी अम्मी घऱ कां खानां बनारही थि, औऱ मेरीनज़र उनकीबड़े हि गोलदार गांड पे टिकाहुआ थां,, मे मंत्र मुग्धा हौ खड़ा हौ गय़ा, औऱ अम्मी केँ तरफ जानेलगा, मेरीनज़र मेरी अम्मी केँ गांड पे तिकी हुई थि, औऱ मेरे अंदर कां जैसेकोई जीनघुस गय़ा थां, औऱ मे चलतेहुए अपने अम्मी केँ बिलकुल लगभग आँ गय़ा, मेरी अम्मी कों मेरा अभि तक कोई आभास नहि थां, औऱ मे अपने अम्मी केँ बिलकुल पीछे उनकी गांड कों घऱरहा थां,
इन्सर्ट इमेज
मेरे अंदरऐसा क्याँ जानवर चढ़ गय़ा मेराहाथ आगेबढ़ मेरी अपनी अम्मी केँ कमर मे मेरा हाँथचला गय़ा, यहसभी मुझे धीमे रफ़्तार मे दिखरहा थां,
-आआआआह कौन हैं, मेरी अम्मी जोड़ सें चीख दि, मेरा हाँथ मेरी अम्मी केँ कमर पे थां, औऱ मे अम्मी कि चीखसुन डर गय़ा मगर मे छोड़ने केँ बजाये अपनी अम्मी कों कसकरपकड़ लिया,
-रेहान रहा हैं, छोड़ मुझे, देख नहि रहा मे खानां बनारही हूं, मगर मे अपनी अम्मी कों छोड़ने केँ बजाये उसकेकमर कों औऱ जकड अपना चेहरा अपनी अम्मी केँ पीठ पे लगा देता हूं, मेरी अम्मी मेरेइस हारकर सें बिलकुल सकपका जाती हैं, मे अपनेहाथ सें अपने हि अम्मी कां कमर औऱ जकड केँ उनके गांड पे अपना सख्त लन्ड लगा देता हूं, मेरी अम्मी यह महसूस कराती हैं, औऱ मुझेजोड़ सें धक्का दे गिरा देती हैं,
-रेहान, पागल हैं क्याँ - क्याँ कररहा हैं, औऱ अम्मी झट सें अपने कमरे मे चली जाती हैं, मे वही पे रसोई मे अपनापीठ फ्रिज पे लगा केँ अपने अम्मी केँ गांड कां आकर अपने हाँथ मे बनाने लगता हूं, मुझे अभि भि अपने पागलपन कां दौड़ा सें नहि उतरा थां, औऱ इसी बदहवासी मे अपना पयजामा खोल रसोई मे अपने लुंड सें अपने अम्मी कों सोंच केँ मुठ मरने लगता हूं, मेरी खयालो मे मेरी अम्मी मेरे सामने झुकी हुई गांड पीछेफेक रही थि, औऱ मे धुंआधार उन्हें चोदरहा थां, मेरी हालत ख़राब होनेलगी औऱ मे चरम सीमा पे पहुँचाने हि वाला थां,
-हाई अल्लाह, मेरे कानो पे एक् धीमी सि आवाज़पड़ी औऱ मेरेउसी वक़्त झड़नेलगा, मेरा पूरा सरीरअकड़,
-आआआआह आआआआह अहह, कर मे नग्न हि फ्रिज केँ बगल मे फिसलता हुआ जमीं पे आँ गिरा, मेरामन अपनेसही स्थिति मे मे आनेलगा, औऱ डर कां काया साया मेरे सरीर कों कणकण कॅम्प रहा थां, दरवाज़े पे वोँ आवाज़ वोँ साया अभि भि थां, औऱ यह याँ तौ मेरी अम्मी अम्मी याँ मेरे अब्बू कि नयी बेगम थि, जिसने मेरेइस हरकत कों देख लिया थां, औऱ मेरी अम्मी जिसपे मैंने किसी जंगली भेड़िया कि तरह धावा बोलै थां, मे अपनानज़र उठता हूं, वो दरवाज़े पे मेरे अब्बू कि नयी बेगमखड़ी थि, औऱ मे यहदेख डर गय़ा, मगर वोँ वो चुपचाप किसी रोशनी मे फंसे हिरन कि तरहआंख टिकाये हुए थि, मे उसकानज़र कों तोलता हूं, उनकानज़र सीधे मे लैंड पे गाड़ी हुईँ थि, औऱ मे अपने अन्नू कि नयी बेगम कों घऱरहा थां, तभीऊपर सें किसी औऱ केँ आने कि आवाज़आयी, तौ मे झट सें कपड़ासही कर किचन केँ दूसरे दरवाज़े सें निकल गय़ा, अब मुझे बहुतडर लगरहा थां, अपनी अम्मी सें औऱ अपने अब्बू कि नयी बेगम सें, औऱ इसीडर केँ स्थिति मे दारू केँ ठेके पे पहुँच गय़ा |
bahut jabardast update h bhay, Ab ammie ko rehan say chudwa dijiye,jisse kee woh kisi or say sex nahii kr paye. or rehan k abbu kee dusri patni ko bi rehan k sath sex krwa dijiye friend
क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son – New Episode
रात केँ अँधेरे मे नशे केँ हालत मे घऱ पहुँचा, मेरे अंदर कां डर मेरेऊपर हावी हौ गय़ा थां, मेरे अब्बू कि नयी बेगम कां देख लेना, औऱ जोँ हरकत मैंने अपनीसगी अम्मी केँ संग किया, मे घऱ केँ चौखट पे खड़ा थां, मुझे अंदरघऱ मे जाने कि हिम्मत नहि हौ रही थि, अंदर मेरा जनाजा निकलना थां, मे वही दरवाज़े पे बैठ गय़ा, नशे कि वजह सें मेरा सरीर धीमापद गय़ा थां, मुझेमन नें ऐसा महसूस होँ रहा थां कि सभीसही हें, मगर असलियत मे अपने सरीर सें काबूखो बैठा थां, औऱ इसीवजह सें मुझे मेरे अम्मी कि सौत कां आने कां पता नहि चला,
'आँ गए रेहान'
'कौन'
'मे हूं, तुम्हारी अम्मी'
मेरीनज़र केंद्रित होती हें, यहकोई औऱ नहि मेरे अब्बू कि नयी बेगम थि, इसकी हिम्मत केसे हौ गयीँ, मुझे अपना बेटा बताने कि हिम्मत केसे हुईँ, मे गुस्से सें खड़ा होँ अपने अब्बू केँ नयी बेगम कों धक्का देके गिरा देता हूं,
'हट साली, आइंदा मुझे चुने कि याँ बात करने कि कोसिस कि तोँ मुझसे बुराकोई नहि होगा'
'धआम धक्'
मेरे अब्बू कि नई बेगम बहोत तेज़ ज़मीं पे जा गिरी
'हाई अल्लाह'
औऱ वोँ संतपद गई,, मे ऊपर सें कुछदेर उन्हें देखता रहा, मुझेनशे मे कुछसमझ तौ नहि आँ रहा थां, मगरतभी उनकेसर केँ पास सें खून कां एक् कतरा बेहटा हुआ मुझे दिखाई पड़ा, मेरा सरीरइस दृस्य कों देख ठंडापद गय़ा, मेरे अब्बू कि नयी अम्मी हल्का भि नहि हिलरही थि, औऱ यहखून, मे डर गय़ा, औऱ नशे केँ हालत मे मे वहां सें भाग गय़ा|
मुझेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि मे करूँ, नशे केँ हालत मे मैंने क्याँ कियायह मुझे नहि मालूम थां, मुझेबस इतना मालूम थां कि कुछ बहोत बुरा मेरे हाटों सें हौ गय़ा हैं, औऱ मे उस सें बचाना चाहता थां, ऐसे हि मे भागते भागते, नशे केँ हालत मे रात केँ अँधेरे मे सरक पे चलनेलगा, मेरा ध्यान इसकदर हटाहुआ थां कि मेरे सामने एक् गाड़ीआयी, औऱ इस सें प्रतिक्रिया देता मे गाड़ी केँ सीसेस सें बड़ीतरह सें टकरा गय़ा, औऱ नशे केँ हालत मे बेहोशी केँ आगोश मे चला गय़ा |
क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son - Kahani ab aur interesting hogi
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