क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son – New Episode
३।
मेरी आँखें खुली, औऱ मे जगाने लगा, औऱ मैंने अपनाआँख चारोतरफ दौड़ाया, मे स्वयं भूल गय़ा थां कि, मे हूं कहां औऱ मुझेयाद आयादिन कां सारा घटना, मगर मुझे अम्मी कहीं नहि दिखी, जहा अम्मी रो रहीं थि उस स्थान पे कोई नहि थां, मे वहां सें ामणि अम्मी कों ढूंढने कों निकला, पूराघऱ मे सन्नाटा थां, औऱ मुझे अम्मी कहीं नहि थि, औऱ नं हि अम्मी केँ परिवार वालेलोग, मे ऐसे हि सरे कमरेछान लिए, औऱ मेरे अंदरफिन डरबैठ गय़ा कि मेरी अम्मी कुछगलत नं कर लेँ, औऱ मे ढूंढते हुएघऱ सें निकल जाता हूं, सामने घऱ केँ एक् स्त्री घऱ केँ बहार पानीपता रही थि, औऱ मे जाली सें उसकेपास जाता हूं,
'आंटी अपने मेरी अम्मी कों देखा हैं, क्याँ उनकानाम आयशा हैं, यहीं सामने रहती हें, ' वोँ मेरीतरफ घूमती हैं, औऱ उसेदेख मेरासर चकरा जाता हैं, यहवही खातून थि जिसे मैंने गलती सें अम्मी समझ केँ पीछा किया थां, जिसे मैंने गाड़ी मे किसी कां लुंड चूसते हुए देखा थां,
'बाबू आप् कौन हौ औऱ आयेशा कों केसे जानते होँ '
'आंटी मे उनका बेटा हूं ' वोँ मुझे ताड़ केँ देखने लगाती हैं,
'तुम् रेहान होँ क्याँ। हैं कितना बड़ा होँ गए हौ, मुझे भूलगए न्, मैंने तुम्हे गोस मे खिलाया हैं ' औऱ मेरासर सहलाने लगाती हैं, मे उन्हें हुए केँ देखता हूं, मगर मुझे उनके बारे मे कुछयाद नहि थां औऱ मे बातबदल देता हूं,
'आंटी आप् मेरी अम्मी केँ बारे मे कुछ जानती होँ तौ बतादो, मे बहुत जल्द मे हूं ' वोँ मुझे चिंतित देख स्वयं चिंतित होँ जाती हैं,
'बेटा मे तौ मात्र इतना जानती हूं कि पूरा परिवार आज वाहन सें निकले थें, बहार सें भि कुछ गाड़ी आये थें, मगर मेरी किसी सें बात नहि हुईँ '
'अच्छा आंटी ' औऱ मे वहां सें निकल गय़ा, औऱ मुझेऐसा लगरहा थां कि बात केँ सिलसिले मे वोँ वापस मेरे अब्बू सें सायद मिलाने गए हें, औऱ मे यही सोंचते सोचते मे घऱ केँ फ़ोन सें अपनेधार कां फ़ोन मिलाने लगता हूं, उधर पठान बाबाफ़ोन उठाते हें, औऱ फ़ोन केँ स्पीकर सें बहोत तेज झगड़ा कां आवाज़ आँ रहा थां, औऱ मेरी आंखें नाम होनेलगी, मेरी जलती हुईँ संसार कों देखकर,
'बाबा अम्मी हें वहां, आप् उन्हें फ़ोन दीजिये '
'नहि बाबा, आपकी अम्मी तौ नहि आयी हैं, बस आपके ननिहाल वालेआये हें, '
'क्याँ केवल परिवार वाले, तोँ अम्मी कहां हैं, '
'मुझे नहि पता बाबा, मे बाद मे बात करूँगा अभि बहोत तना तानीचल रही हैं ' औऱ पठान काकाफ़ोन काट देता हैं, औऱ मे दुविधा मे पद जाता हूं, आखिर मेरी अम्मी गयीँ, कहां, औऱ वहीहॉल मे बैठ जाता हूं, कुछदेर बाद चिंता मे बहार अपने अम्मी कों खोजने निकल जाता हूं, मगर मे लोगो कों बताना नहि चाहता थां कि मेरेघऱ केँ हालत केसे हें, औऱ इसीवजह सें मे अम्मी केँ पड़ओसिओ सें पूछटाच नहि किया, औऱ बाजार घूमने लगा, कुछ हि देर मे डर उदासी मेरेऊपर हावी होँ गई, औऱ मे बाज़ार मे एक् कुड़सी पे बैठ गय़ा, औऱ मेरी आंखें नाम होनेलगी, पिछले २४ घंटे मे मेरा पूरा संसार रख बनाने केँ कगार पे थां, मेरागम बहोत बढ़ गय़ा थां, औऱ मुझेअब यहडरलग रहा थि कि कहीं मे नं कुछकर लूँ, औऱ मे उस बाजार सें अपने अम्मी केँ घऱचला जाता हूं, औऱ अपनेसर झुका केँ बैठ जाता हूं, तभी बिजली कि तेज करकराहट होती हैं, औऱ देखते हि देखते बारिश विकराल रूप लें लेती हैं, औऱ मेरेदिल केँ संग आसमान भि रोने लगता हैं,
-
उसी स्थान पे बैठे बैठेरात केँ दसबजगए थें, बारिश कि वजह सें बिजली चली गयीँ, थि औऱ पूरीतरह सें अँधेरा तह, औऱ बारिश औऱ तेज़ हौ गई, थि औऱ पुरेघऱ मे सन्नाटा फैलाहुआ थां, औऱ मे किसीभुत कि तरहघऱ मे बैठाहुआ थां, औऱ मुझे दरवाजा खुलने कि आवाज़आयी, औऱ मे बहार जानेलगा औऱ वो पे कोई बाउंडरी केँ गेट कों खोलने कि कोसिस कररहा थां, बारिश अभि भि बहुततेज़ होँ रही थि, औऱ जैसे हि मे बारिश मे आगेबढ़ा गेट खोलने केँ लिए मुझे एक् आवाज़आय औऱ मे इस आवाज़ कों पहचानता थां, औऱ मे चौंक गय़ा,
'साला कसिए मर्द हैं, गेट भि नहि खुलरहा ' औऱ उसका जवाबआता हैं,
'साली तुँ कितनी बड़ी रंडी हैं, जौ घऱ केँ दरवाजे पे भि लुंड नहि छोड़रही हैं ' मे वही पे किसी लकड़ी कि तरहखड़ा होँ गय़ा, मुझेऐसा लगा जैसे मेरेऊपर बिजली गिर गई, होँ, औऱ उसी वक़्तखर खर करतेहुए गेटखुल जाता हैं, औऱ बारिश केँ पानी मे गिरने कि आवाज़आती हैं, रात केँ अंधेरे मे कुछदिख तौ नहि रहा थां मगर मुझे एक् चीज़ कां साया आँ गय़ा थां, अम्मी किसी केँ कंधे पे थि,
'हय मुझेचोट लगा दिया ' धम सें गिरने कि आवाज़आई, औऱ मेरी अम्मी चिक्खी, मे वहीखड़ा अंधेरे मे देखने कि कोसिस कररहा थां कि वो हौ क्याँ रहा हैं,
'कहालगा हैं मेरी रंडी '
'यहा'
'यहा कहां मेरी रांड '
'यहा मेरे गांड पे '
'हाहाहाहाहा सालीगज़ब हैं तूँ, साली तुम्हें पूरा यकीं हैं न् कि तेरेघऱ पे कोई नहि, कोई लफड़ा न् हौ जाये ममममममममम ' औऱ बारिश केँ आवाज़ मे भि मे चूमने कहते कि आवाज़सुन पारहा थां, औऱ मेरा हालत बिलकुल ख़राब हौ गय़ा, मेरे अंदर कां जानवर मुझेबोल रहा थां कि मे इस व्यक्ति कों मर डालूं, मगर मे चुपचाप वहीखड़ा रहा, औऱ मेरे सामने मेरी अम्मी बारिश मे किसीगैर मर्द केँ संग चुम्मा चाटीकर रही थि, पनि कि आवाज़ चालकरही थि, औऱ वोँ दोनों ज़मीन पे पनि मे एक् दूसरे सें जैसे कुसती कररहे हौ,
'खाजा मेरे मम्मे कों, अहह हैं अल्लाह औऱ जोड़ सें'
'अहह क्याँ मुँह हैं तेरा, एकदम किसी जलेबी जैसा मीठा ' औऱ वो पानी केँ उछलने कि आवाज़े आनेलगी औऱ मेरे आंखें नम होनेलगी, औऱ मे भि बारिश मे आँ गय़ा मगर बारिश नें मेरे एक् कदम केँ आवाज़ कों दबा दिया, मेरे सामने अँधेरे मे मेरी अम्मी किसीगैर मर्द केँ बाँहों मे थि, करीब-करीब २० मीटर कां फैसला पे मेरी अम्मी अपना मुँह काला करवारही थि, औऱ थाआआअआप थाआआअआप थाआआअआप छाआआआप छाआआआप कां आवाज़ वो बारिश मे भि मेरे कानों मे आनेलगी,
'औऱ जोड़ सें आआआआह, सालाउसे क्याँ लगा कि अगर वोँ कर सकता हैं तोँ मे नहि कर सकती ' थाआआअआप थाआआअआप
'तुँ फिन अपने सौहार कों सोचने लगी, अरे मेरी जानू मेरा लुंडखा औऱ भूलजा उस गांडू कों' औऱ मेरे आखों मे आशुआने लगे, औऱ मुझे मेरे सामने मेरी अम्मी कों रोने कि आवाज़आटी हैं,
'केसेभूल जाऊ मादरचोद, कितना प्रेम किया मैंने उन्हें कितना उनकेलिए उनके वालिदा कों झेला ' थाआआअआप थाआआअआप
'पिछले १९ सालो सें उनकी इबादत कि, औऱ उन्होंने मुझे किसी माखी कि तरहमसल दिया मेरादिल कों चूरकर दिया ' मेरी अम्मी कि रोने कि आवाज़ मेरे कानों तक आँ रही थि, औऱ मे एक् चीज़समझ गय़ा कि यहकदम अम्मी नें गुस्से मे लिया हैं, औऱ मैने अपने आप् कों मजबूत किया, औऱ अपने अंशु पोछे,
'अरे तूँ तौ सेंटी कर दि, साली मेरा लण्ड झुका दि, साली मे जारहा हूं, '
'शाले मादरचोद अगर तूँ मुझे मेरे सौहार कि तरहछोड़ केँ गय़ा तौ जान लें लुंगी, छोड़ तुँ मुझे'
'पागल हैं तुँ, वैसे भि साली तुँ स्वयं छलकेआई हैं हमारे पास, साली रांड' मैंने जबयह सुना कि वोँ हमारे बोला मे औऱ क्रोध होँ गय़ा, मेरी अम्मी केँ कमजोरी कां फायदा उठाया जारहा थां औऱ मेरामन खराब होँ रहा थां,
'खाजा मेरेछूट कों पूरा, मदरचोद अपना लौरादे, मदरचोद मेरा सौहर मेरे सामने महजब कां ढोग करता हैं, औऱ अपने हि चाचा कि बेटी कों पेट सें कर देता हैं, साले तुँ ला अपना लौरा'
'हाई मेरी रांड, क्याँ गजबचीज़ हैं तुँ '
'पागल मुझेबना दिया हैं किसी नें, तुँ अपना लण्ड मेरेकोख़ मे दुबारा डाल' मैंने अपने आप् कों संभल लिया थां, औऱ मे दरवाजे केँ लटके एक् दंडाउठा लिया थां, औऱ मे वापसवही जानेलगा जहा मेरे अम्मी कां बलात्कार हौ रहा थां, औऱ उसी वक़्त बिजली कड़की औऱ अम्मी कां पूरा सरीर वोँ व्यक्ति औऱ वोँ दृस्य मेरे सामने थां, औऱ उस व्यक्ति कां नजर भि मेरेऊपर पड़ा,
'अरे बाप रेभूत' औऱ मुझेउस व्यक्ति केँ वो सें भागने कि आवाज़आयी, मेरी अम्मी वही पानी मे पड़ी हुई थि, औऱ मे चारि लेके अम्मी केँ पासआया, अँधेरे कि वजह सें कुछदिख नहि पारहा थां, मगर मे जबआगे दरवाजा बंद करने गय़ा तौ मेरी अम्मी कां बुरका वहीफसा हुआ थां,
'सालाकोई बहोत नहि हा ' मे वही दरवाजे सें अपने अम्मी कों देखने लगा, कुछ दिख नहि रहा थां, मगर मुझे एक् बातपता चल गई, कि उन्होंने बहोत पिरखी थि, औऱ वोँ बहोत मुश्किल सें अपनासर जमीं सें थोड़ाऊपर कि हुई थि, औऱ जब मे लगभग गय़ा तौ मुझे अहसास हुआ वोँ पूरीतरह सें नग्न अवस्था मे थि, मैंने अपनासर दूसरी तरफकर उन्हें उठा लिया, औऱ उन्होंने अपने हाँथ मेरेगले मे दाल दिया,
'क्याँ कररहा हैं, थक गय़ा क्याँ, ला अभि लन्ड खड़ाकर देती हूं, ' यह सनते हि मेरे अंदरहवस आँ गय़ा जिसे मैंने बहोत मुश्किल सें दबा अपने अम्मी कों उनके कमरे मे पहुँचा दिया, वोँ नशे मे खाट पे आते हि सो जाती हें, औऱ मे अल्लाह कां नाम लेतेहुए वहां सें भाग केँ अपने मामाँ केँ कमरे मे चला जाता हूं,
मुझेरात भरनीं नहि आती हें, औऱ मे सबेरे अपने ननिहाल सें निकल जाता हूं, औऱ सीधे अपनेसहर कां बसपकड़ लेता हूं, क्युकी मुझमे हिम्मत नहि थि होने अम्मी कां चेहरा देखने कि,
-
मे अपने करीबी यार आकाश केँ घऱचला जाता हूं, आकाश मेरा अच्छा मित्र तोँ थां हि, वोँ मेरे जैसे हि अपनेकाम मे काम रखने वाला थां, मगर वोँ मुझसे पढ़ने मे बहुत अधिकतेज थां, औऱ हमारी दोस्ती विद्यालय मे हुइ थि, मगर आकाश मे लोगो कों पढ़ लेने कि खास ताकत थि, औऱ जब मे उसकेघऱ गय़ा तौ वोँ मुझेदेख समझ गय़ा कि कोई दिक्कत हैं, औऱ मुझसे बात निकलवाने केँ लिएतरह तरह केँ उपाए लगाने लगा, मगर मे अपने अम्मी औऱ अब्बू कि बातें उसे नहि बताना चाहता थां, औऱ किसीयार कां गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड कां तकलीफ़ बना केँ बताने लगा,
'सालेयह दोनों चूतिए हें, दूररहा करो इनसे ' आकाशयह बोल अपनेकाम मे लग गय़ा, औऱ मे भि उसी केँ कमरे मे लेट केँ सोचने लगा,
'मेरे अम्मी अब्बू चूतिए हें'
'अब्बू केँ चाचा कि बेटी, उज़्मा, ' औऱ अब मुझे एक् बातसमझ मे आँ गय़ा कि अम्मी क्यूं बोलि थि, निकाह होकर रहेगा।
क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son – New Episode
४।
मुझे अपने अम्मी सें बात करनी चाहिए थि, औऱ मे वहां सें डरकरभाग गय़ा, मगर मे उनसे क्याँ बोलता, अम्मी आप् ऐसे रंडी कि तरहरात कों क्यूं औऱ किस सें चुदवा रही थि, आप् अब्बू कों ऐसे धोखा क्यूं देरही हैं, औऱ मे अपनासर जोड़जोड़ सें हिलारहा थां, क्युकी मेरेमन मे कलरात कि वोँ तस्वीर आँ गयीँ,, जब वोँ बिजली चमकी थि औऱ मेरी अम्मी कां संगमरमर जैसा सरीर किसी काले व्यक्ति केँ संग लिपटा हुआ थां, औऱ बारिश सें ऐसे प्रतीत हौ रहा थां, औऱ वोँ बारिश जोँ उन्दोनो कों भिंगो रही थि, मेरी कां नशे मे झूमता हुआ ऊपारी बदन जैसेकोई नाग केँ सामने बिनबजा रहा होँ, याँ उनकाबड़ा गांड जोँ किसी तकिये कि तरहउस व्यक्ति केँ जांघ पे गिररहा थां, उनके लम्बे बाल,
'आआआआआह कितना खुशकिस्मत हैं साला वोँ '
'रेहान कुछ बोलै तूने '
'नहि बसकुछ सोचरहा थां, आकाश मे घऱ निकालता हूं ' आकाश मेरेतरफ देखता हैं, औऱ खड़ा हौ मुझे बहार छोड़ने चल देता हैं,
'बाई, फिन मिलते हें '
मे अपनेयार केँ घऱ सें निकल अपने अब्बू केँ यहा गय़ा, यहा पे अभि भि एक् अजीब सां मनहूस सां माहौल बनाहुआ थां, मे घऱ केँ अंदरजा अपनेलिए खाने केँ लिए ब्रेड पे बटर लगाने लगा,
'रेहान कल कहां चलेगए थें तुम् ' मे चंक जाता हूं, यहा मेरे अब्बू खड़े थें, उनकाआंख बिलकुल कला थां, औऱ लगरहा थां जैसे इन्होने भि नशा किया हौ, वोँ अपनेसर कों जोड़जोड़ सें दबारहे थें,
'अब्बू आकाश केँ घऱ थां, ' मेरे अब्बू मेरेयार कां नामसुन उनका चेहरा थोड़ा सामान्य होता हैं, औऱ वोँ पानी कां गिलास मे पानी लेने लगते हें,
'अच्छा ' औऱ मेरे अब्बू वापस जाने लगते हें, उन्हें देखलग रहा थां जैसे उनके अंदरकोई जान हि नहि हौ, मेरे अब्बू रसोई सें निकलने हि वाले थें कि मे पूछता हूं,
'अब्बू आप् दूसरा निकाह करोगे अम्मी केँ होतेहुए' मेरे अब्बू घूम मुझे घूरने लगते हें,
'हाँ ' मेरे अब्बू इतनाबोल केँ वापस बहारचले जाते हें औऱ मे वहीँ पे बैठ जाता हूं, मेरी अम्मी सभी जानती थि, मेरामन किया अम्मी कां कारस्तानी अब्बू कों बताने कों मगर मे रुक गय़ा, मुझे नहि मम्मी कि ऐसा मैंने क्यूं किया, सायद मेरे अंदर अब्बू केँ प्रति क्रोध भर गय़ा थां, औऱ मुझेऐसा लगरहा थां जैसे अम्मी केँ संग धोकाहुआ हैं, जौ भि वजह हौ, मैंने अब्बू कों कुछ नहि बताया औऱ वापस अपने कमरे मे चला गय़ा.
-----------------------------
मगरउस रात नें मेरेऊपर बहोत गहराअसर डाला, मेरी अम्मी जिन्हे आजतक मैंने हमेशा कपड़ो मे लिपटा देखा थां, उन्हें मैंने नाँ केवल नंगा देखा बल्कि किसी पागल रांड कि तरह, किसी अय्याश कि तरह दारू केँ नशे मे, किसीगैर मर्द केँ गोद मे देखा, मेरी आंखें जब भि बंद होती मेरी अम्मी कां तन शरीर मेरे सामने आँ जाता,
औऱ मेरा लण्ड न् चाहते हुए भि खड़ा होने लगता, मेरी हालत बहोत ख़राब हौ गयीँ, थि, औऱ मे उसरात अपने अम्मी कों सोचसोच रातभर अपने लुंड पे हाँथ चलाया, मेरीइस बर्बरता सें मेरा लुंड बुरीतरह सें चील गय़ा मगर मेराहवस ख़तम होने कां नाम नहि लें रहा थां, मुझे वोँ याँ आते हि मेरा लुंड तनने लगता, औऱ ऐसे हि मैंने वोँ रात बितादिए|
मेरी अम्मी अभि भि वापसघऱ नहि आयी थि, औऱ हमारा घऱ सुना सुना लगाने लगा थां, मुझे मालूम थां मेरी अम्मी अभि तौ बिलकुल नहि आएगी, औऱ खासकर मेरे अब्बू कां दूसरा निकाह कां तारीख नज़दीक आँ रहा थां, औऱ वोँ अभि अपने गरूर पे लत मरनेकतई नहि आती, औऱ मेरी अम्मी वहा मेरे अब्बू केँ पीठ पीछे क्याँ गुल खिलरहि होगी, उसका मे मात्र अंदाज़ा हि लगा सकता थां, मगररात भर मेरी कल्पना मेरे पे हावी हौ जाती औऱ मे अपने अम्मी कों सोचसोच अपने लुंड कों मसलमसल केँ घायलकर देता थां,
मैंने अपने अंदरमान लिया थां कि मेरी अम्मी एक् बहोत गन्दी खातून हैं, मगर मेरेदिन मे यह ख्याल आया कि क्याँ मेरी अम्मी सही मे एक् अपनेमन सें यहकररही हैं, याँ अब्बू केँ दिया धोखे सें बहक गयीँ, हैं, मेरे अंदरयह ख्याल मंडराते रहता, औऱ मेरे अंदर उनके प्रति बहोत गन्दगी भर गय़ा थां, औऱ मे अपने अम्मी पे हि फ़िदा हौ गय़ा थां, मेरी कल्पना पागल होतेजा रही थि, औऱ मे सचाई जानना चाहता थां,
--------------------------------
मुझे उज़्मा सें नफरतउस सें मिलाने सें पहले सें हि होँ गय़ा थां, औऱ वोँ मेरीनयी अम्मी बनकरआने वाली थि, उसकी उम्र स्वयं मात्र २३-२४ थि औऱ वोँ मेरीनयी अम्मी बनाने वाली थि, एक् १७साल केँ लडके कि, वोँ स्वयं मेरे अब्बू सें २१साल छोटी थि, मे यहसोच सोचकर हि अपनासर पकड़ेहुआ थां, मेरे अब्बू केसे इतनीकाम उम्र कि लड़की कों पेट सें कर सकता हैं, क्याँ उन्हें समझ कां कोई फ़िक्र नहि, क्याँ उन्हें मेरी अम्मी कां कोई फर्क नहि|
औऱ इसीतरह निकाह कां दिन आँ गय़ा औऱ चारो औऱ दुनिया सें बच्चा केँ एक् छोटे सें मस्जिद मे यह निकाह हौ रहा थां, जिस मे जाने कां कोई इरादा नहि थां, मे बहुत दुखी थां, औऱ मेरी जीवन जहन्नुम बन गई, थि, मेरे औऱ मेरे अम्मी औऱ मेरे अब्बू मे अब बातें भि नहि होती थि, मे अपने अम्मी कों फोन करतामगर हमेशा मामाजी उठा केँ फ़ोनपटक देता, ऊपर सें मेरे अपनी अम्मी केँ लिएहवस, यही सोचते मे फैसला करता हूं कि मे यहा अपनेनयी 'अम्मी' कि स्वागत तोँ नहि करूँगा, औऱ मे एक् छोटाबैग बना केँ अपने अम्मी केँ पास जाने लगता हूं|
मे घऱ सें निकल जाता हूं औऱ बस स्टैंड पहुँच अपने अम्मी केँ सहर कां बस कां प्रतीक्षा करने लगता हूं, मेरीनजर थोड़ीदूर जाता हैं, जहा एक् व्यक्ति एक् बड़े सें गाड़ी कां चक्का बदलने कि कोसिस कररहा थां, मे लोगो कि सहायता करने मे सरमाता नहि थां, इसलिये मे आगेबढ़ जाता हूं,
'क्याँ हुआ बाबाइधर मुझे दीजिये मे चक्का ढीलाकर देता हूं ' वोँ बूढ़ा व्यक्ति थक गय़ा थां, औऱ मुझेदे देता हैं,
'भला हौ आपका बेटा ' औऱ मे सजधजकर केँ पेच ढीला करने लगता हूं,
'कहाजा रही हैं यह गाड़ी बाबा, कखघ सहरजा रहे जौ तौ मुझे भि छोड़ते चलो, '
'बाबू हम् उधर हि जायेंगे, मगर पहले हमें एक् निकाह मे मैडम कों पहुँचाना हैं '
'वाउ बाबा, इसमें दुल्हन हैं '
'हैं बाबू, कोई बहोत अमीर ख़ानदान कि हैं, मे यहसुन थोड़ा रूचिलने लगा, औऱ चुपकर गाड़ी केँ अंदर झाँका मगर परदेलगे होने केँ कारन मुझेकुछ नहि दिखा | मगरतभी दरवाजा खुलता हैं, औऱ मेरीनज़र एक् निहायती भोली औऱ दिलकस दुल्हन पे जाती हैं औऱ उसेदेख मेरादिल मरोरखा जाता हैं,,
'चाचा औऱ कितना देर लगेगा '
'दो मिनट औऱ बिटिया, आप् अंदर बैठी, आपको गरमी लगेगी, ' मे उसेतब तक घूरता रहाजब तक गेटबंद करते वक़्त हम् दोनों कि ऑंखें एक् नहि हुईँ, औऱ वोँ ऐसे सरमाइये जैसे वोँ किसी फिल्म कि हेरोइन हौ मेरादिल बागबान हौ गय़ा,
'सुक्रिया बाबू ' मैंने उस चाचा कों शुक्रिया किया औऱ वो सें वापसबस स्टैंड पे खड़ा होँ गय़ा,
'इसका सौहार बहोत खुशकिस्मत होगा, खुदाकरे इसे मेरे अब्बू जैसे धोकेबाज़ सौहार न् मिले'
bhay kahani setup krr raha hoon, bhut readers ko intro say lag raha h kee ismein incest h, I wanted them too know this kahani will not have blood related incest, and kahani focuses on ammie's adulterous adventures.
क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son – New Episode
५.
'आपको मुझसे दिकत हैं याँ उनसे आप् पहलेयह फैसला कर लीजिये' मे अपने ममजान कों चीख केँ पूछा, औऱ मेरी अम्मी हमारे इस झगड़े मे बिच बचाओकर रही थि,
'बेटा तेरा मामाजी कुछ अधिक हि गुस्से वाला हैं, जानेदे नाँ, अब तौ तुँ यहा आँ गय़ा हैं, अबसभी ठीक हैं ' मेरा मामाजी कां गुस्से सें सरलाल हौ गय़ा थां,
'क्याँ ठीक हैं दिदी, पहले तोँ.' मेरी अम्मी इसपेजोड़ सें चीखती हैं,
'रहीम जानेदो, बाबूआया हैं, तुम् उसका स्वागत करोबस, अभि तुम् बहोत छोटे होँ'
'पऱ दिदी जोँ मे बोलरहा हूं वोँ सभीसच हैं, तुम्हारा सौहार एक् धोकेबाज़ हैं, औऱ फिन भि तुम् उसकेसंग वापस जाने केँ लिएमन गयीँ, ' मे यहसुन खुस हौ गय़ा, औऱ फिन दुखी भि, एक् तैतरफ मेरे परिवार कां दुबारा एक् होने कां खुसी थां, औऱ मुझेयह भि मालूम थां अबकुछ भि पहले जैसा नहि होगा, मेरी अम्मी वहा सें अपने कमरे मे चली जाती हैं, औऱ मे भि उनकेसंग उनके कमरे मे जा उनसेहाल चाल पूछने लगता हूं, मे अम्मी सें बातकर रहा थां औऱ वोँ मुझसे मुस्का केँ बाटेकर रही थि, मगर मे देख सकता थां कि यह मुस्कान झूटी थि, मेरी अम्मी कां दुःख उनके आँखों मे साफ़साफ़ दिखरहा थां,
'बेटा जा केँ कुछखा लो'
'अच्छा अम्मी' मे वहा सें निकल खाने केँ लिए रसोई मे घुस गय़ा वो पे सुभह कां कुछ खानां बचाहुआ थां, मे उसे खानेलगा, खानां ठंडा थां औऱ उस ठन्डे खाने नें मुझेयाद दिलाया कि, अभि इसी वक़्त मेरे अब्बू दूसरे निकाह पे बैठेहुए हें, औऱ मेरे अंदर क्रोध भरआया औऱ मे खानां घऱ सें बहारफेक दिया, औऱ मे अपने अम्मी केँ कमरे मे चला गय़ा, मेरी अम्मी सोरही थि,
औऱ मेरीनज़र सीधे अम्मी केँ बड़ेबड़े गोलाकार गांड पे फंस गई,, इतने तकलीफ़ केँ टाइम मे, मेरे अंदर केँ गुस्से केँ बावजूद, मेरीनज़र अम्मी केँ तरबूजे जैसे तसरीफ पे रुक गई,, औऱ मेरेआंख केँ सामने एक् लम्हा केँ लिएउस रात कि तस्वीर आयी, औऱ मे जैसे सम्मोहित होँ गय़ा औऱ अपनी हि अम्मी केँ पास किसी जिन्न केँ जैसे जानेलगा, मेरे आँखों केँ सामने मात्र मेरी अम्मी केँ बड़ेगोल गांड थि, औऱ मे हरचीज़ अपनेहवस मे भुला चूका थां, मे अम्मी केँ बिलकुल नज़दीक आँ गय़ा औऱ मेरी अम्मी कां रसदार गांड मेरे सें एक् हाथ कि दूरी पे थां, मे अम्मी केँ सरीर कि खुसबू कों सूंघपा रहा थां, औऱ मे अपनाहाथ अपने अम्मी केँ गांड केँ तरफ बढ़नेलगा,
'रेहान कहा हैं तुँ, इधर आँ मेरा बाबू ' मेरीकान मे मेरे नानाजान कां आवाज़आया औऱ मेरा सम्मोहन टुटा, मे अपनी अम्मी केँ एक् हाथ कि दूरी पे थां, मे वहां सें झट सें अपने नानाजान सें मिलाने चला जाता हूं,
मेरी अम्मी हर वक़्त दुखी हि दिखती थि, मगर मुझे मेरी अम्मी कां रंडी वालारूप मालूम थां, उनके गांड कि वोँ लचक, उनकेकमर कि धलए, मे उनके पागलपन कों अपने आँखोने सें देखा थां, औऱ जिसतरफ मेरी अम्मी उसरात चुदवा रही थि, मुझेयह तौ समझ मे आँ गय़ा थां कि यह उनका पहलाबार नहि थां, क्युकी ऐसी तौ मैंने केवल ब्लू फिल्म मे देखि थि, जैसे अम्मी कररही थि, उस फिल्म कि हेरोइन कई मर्दो सें पागलो कि तरह चुदवा रही थि, उस हेरोइन कां पागलपन औऱ मेरी अम्मी कां करीब एक् जैसा हि थां,
------------------------------------------------------
अब्बू कां निकाह कां एक् महीने होने कों थां, औऱ मेरीहवस मेरे अपने अम्मी केँ लिए किसी सैतान कि तरह भढनेलगा थां, मेरी गन्दी नज़र हमेशा उनपे रहती, औऱ मेरी अम्मी हमेशा दुखी हि रहती, मेरी अम्मी नें अब्बू कां दूसरा निकाह तोँ मान लिया थां, मगर उनकेलिए अब्बू कां दियाहुआ धोखा पचाना बहोत मुश्किल होँ रहा थां, औऱ मे अम्मी केँ घऱ पे हि रहनेलगा थां, औऱ वो पे अब्बू औऱ उनकीनयी बेगमरह रही थि, मगर उससे अधिक मुझे अम्मी कां वोँ हूरीरूप देख्ना थां, मे अपने अम्मी कों नंगे हातों कांड करतेहुए पकड़ना चाहता थां, ताकि मे स्वयं हि उनकी ब्लैकमेल करसकू, मेरेहवस नें मुझे बहुत झुका दिया थां, मे हमेशा उनके सपनो मे खोया रहता थां, औऱ मे कोई मौका ढूंढरहा थां,
क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son - Next part mein bada twist
भइया कामदेव भइया नें सहीकहा हैं कोई भि एपसोड मुझे कंप्लीट नहि लगा So plz brother post a complete update And thanks for this Nice kahani ??
Relavant source : click here