शिघ्रपत्नी - Suhagin Ki Zindagi - Latest Update 1
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कहते हें कि जबमौत सामने होँ तौ पूरी जीवन आंखों केँ सामने सें दौड़ जाती हैं। पर्र ये जरूरी नहि कि देखने वाला मरने वाला हि हौ। मारने वाले कों भि यही एहसास होगाऐसे सोच प्रतीक नें अपनी आंखें बंद करके अपनी जीवन देखी।
एक् हमले मे जख्मी हौ कर नवयुवक प्रतीक कां लौड़ा खड़ा होनाबंद होँ गय़ा। अपनी पत्नि कों खुशी देने केँ लिए प्रतीक नें जुआरी औऱ शराबी होने कां ढोंग करतेहुए मासूम लक्ष्मी कों दोसेठ कि ओर धकेल दिया। सेठ तोँ शरीफ निकले पऱ उनके नौजवान बेटों केँ पांव फिसले। विक्की औऱ सन्नी नें लक्ष्मी आंटी कां बलात्कार कर केँ लक्ष्मी कों सुहागन कि जीवन दि। आगे मौका मिला तौ प्रतीक नें लक्ष्मी कों दोनों लड़कों कों सौंप दिया औऱ गल्फचला गय़ा। वहां मोहम्मद बिन सलीम MBS कों मिलकर प्रतीक कि जीवनबदल गई।
MBS नें प्रतीक कां ऑपरेशन कराया जिससे प्रतीक कां लौड़ा अब हमेशा खड़ा रहता थां औऱ अब प्रतीक बाप भि बन सकता थां। MBS केँ संगकिए सौदे केँ तेहत प्रतीक नें 3 साल तक MBS केँ हरम कों खुशरखा क्योंकि MBS कों लड़के मनपसंद थें। 3 सालबाद जब प्रतीक लौटातब MBS नें उसे पैसों केँ संगकई फायदेमंद सौदे भि दिलाए।
ऐसा हि एक् सौदा थां "मूलचंदानी बिल्डर्स"। मूलचंदानी सेठ कां धंधाडूब रहा थां औऱ उसेवजह समझ नहि आँ रही थि। मूलचंदानी नें अपना धंधाऔने पौनेदाम मे बेच दिया औऱ अलग होँ गय़ा।
नए धंधे कि पूजा करनेआए प्रतीक सेठ औऱ उसकी 9 महीने पेट सें लक्ष्मी सेठानी कों देखसभी नें सोचा कि डूबता धंधा खरीदने वाले शक्ल सें हि बेवकूफ हैं। पूजा केँ लिए लक्ष्मी नें सारी चाबियां मांगली। जबसभी प्रतीक नें दिए बर्थडे पार्टी कां लुफ्त उठारहे थें तब लक्ष्मी अकाउंट्स चेक करनेलगी। जौ बात मूलचंदानी सेठ 3 साल मे नहि करसका वो काम लक्ष्मी आंटी नें 3 घंटों मे कर दिया।
साम ढलतेहुए पुलिस नें 4 लोगों कों चोरी औऱ धोका करने केँ लिए गिरफ्तार किया तौ बाकी अकाउंट्स केँ लोगसोच रहे थें कि घऱ मे जॉब जाने कि खबरकिस तरह बताएं। जल्द हि लक्ष्मी मैडम केँ नाम कां खौफबन गय़ा औऱ प्रतीक नें अपने बच्चे कां स्वागत मूलचंदानी बिल्डर्स कों फायदे मे लाकर किया। बच्चा 2 महीने कां होँ गय़ा तौ लक्ष्मी मैडमउसे लेँ कर दफ़्तर आती औऱ पूरादिन काम करती।
कुछ महीनों मे प्रतीक औऱ लक्ष्मी नें अपनेकोर ग्रुप बनालिए जिन पर्र वो दोनो भरोसा कर सकते थें। मूलचंदानी बिल्डर्स जल्द हि मूलचंदानी इंफ्रा बन गय़ा औऱ बड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट लेने औऱ पूरे करनेलगा।
प्रतीक सीधे मालिक बना थां औऱ नीचे केँ लोगों कों उस सें घुलना मिलना थोडा मुश्किल लगरहा थां। पर्र एक् नामरह रहकर प्रतीक तक आँ जाता, शिघ्रपत्नी। फिरभी येकौन हैं येपता नहि चला पर्र अगर किसी केँ संगकुछ बुरा हौ जाए तौ बाकीलोग उसे कहते कि शिघ्रपत्नी सें तोँ तूँ बेहतर हैं।
शिघ्रपत्नी - Suhagin Ki Zindagi – New Episode
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एक् दिन सुभह प्रतीक सें मिलने विशाल आया। विशाल 36 साल कां इंजीनियर थां जौ प्रतीक कां बायां हाथ थां (लक्ष्मी दाहिना हाथ थि) औऱ प्रतीक विशाल केँ भरोसे कंपनी हि नहि अपने बेटे कों भि छोड़ने कों रेडी थां।
विशाल कि पिछले साल हि विवाह हुई थि पर्र फिन भि वो आज बहोत परेशान लगरहा थां। प्रतीक नें विशाल सें मिलने कां कारण पूछा तोँ जवाबसुन कर प्रतीक केँ होशउड़ गए। विशाल Syria मे जाकरकाम करना चाहता थां।
प्रतीक, "विशाल तुम् मुझसे बड़े होँ, अधिक पढ़े होँ औऱ काबिल भि होँ। तुम् अगर चाहो तौ मे तुम्हारी तनख्वा बढ़ा देता हूं। सीरिया मे जाते हि मारे जाओगे। सचसच बताओ, बात क्याँ हैं?"
विशाल अपनासर पकड़कर बैठ गय़ा। एक् गहरी सांस लेकर बोला,
"आप् कों पता हैं, शीघ्रपत्नी कौन हैं?"
प्रतीक, "नहि, पऱ इतनासमझ चुका हूं कि वो बेचारा कोई अभागा हैं जिसका कोईकाम नहि बनता। "
विशाल, "मे शीघ्रपत्नी हूं। मेरे माँ बाप बहोत बचपन मे अपना देहात छोड़ मुंबई भागआए थें। एक् वक़्त कां मुश्किल सें खाकर गंदगी मे बढ़े। आपस मे सहारा, फिन दोस्ती औऱ फिन प्रेम हुआ। दोनों नें बहोत मेहनत कर अपनेलिए एक् घऱ एक् जिंदगी बनाया। बचपन कि भुखमरी औऱ बीमारी केँ कारण उन्हें डॉक्टर नें बताया कि उनकीकोई औलाद नहि होगी। दो यार अपनी क़िस्मत कों कोंसकर अपनी जीवन जीनेलगे जब मम्मी कों 40 वेसाल मे गर्भरह गय़ा। मे पैदाहुआ तोँ दोनों केँ लिए मे एक् आशीर्वाद थां। "
विशाल नें दूर देखते हुए अतीत कों खोला, "बड़ी मुश्किल सें दोनों नें औऱ मेहनत कि। मुझे इंजीनियर बनाते हुए दोनों थक चुके थें। मैंने जौ पहलीजॉब मिली वो पकड़ली औऱ उन्हें आराम करने कों कहा। यही मेरी मूलचंदानी बिल्डर्स सें वफादारी हैं। माँ मेरे हाथों मे बच्चा देख्ना चाहती थि सो उसने एक् हसीन औऱ पढ़ी लिखी लड़की सें मेरी विवाह करा दि। उसदिन दोनों बहोत खुश थें। पर्र वो दिन दोनों केँ खुशी कां आखरीदिन थां। "
प्रतीक नें विशाल केँ कंधों पऱ हाथ रखकर विशाल कों अपनामन हल्का करने दिया।
विशाल, "सुहागरात कि सेज पर्र अपनीनई नवेली दुल्हन कों फूटफूट कर रोतेदेख मैंने उसेवजह पूछी। वो किसी औऱ सें प्रेम करती थि औऱ डर केँ मारेमुझ सें विवाह कि थि। मैने उसकी उसके आशिक सें बात करवा दि। दोनों तयार थें तौ मैंने लड़की केँ पिता सें बात कि औऱ अगले हि दिन अपनी पत्नि कि विवाह उसके प्रेमी सें करवा दि। मेरी शराफत केँ गीत गातेहुए सारे मुझे अकेला छोड़चले गए। लोग शरीफों पर्र हि उंगली उठाते हें। "
"मेरी मम्मी नें मेरी दूसरी विवाह करवा दि। मेरी दूसरी पत्नि नं हसीन थि नां पढ़ी लिखी। पऱ उसे लगता थां कि क्योंकि मेरी पहली विवाह टूट गई हैं तोँ घऱ केँ सारेलोग उसके गुलाम बने। वो दिनभर बाहर् जाकर मेरी पूरीजमा पूंजी उड़ाते हुए अय्याशी करती औऱ फिन मेरे माँ बाप कों आँ कर गालियां देती। माँ बाप नें मेरेलिए उसे संभालने कि कोशिश कि तोँ वो औऱ परेशान करनेलगी। एक् दिन उसका भांडा फूटा औऱ मैनेउसे डांटा। "
विशाल नें कड़वे घूंट पीतेहुए कहा, "उसने बाहर् जाकर तमाशा खड़ाकर दिया। सभी कों चिल्ला चिल्ला करकहा कि मैंने उसे अपने बाप केँ संग सोने कों कहा हैं। मेरी मम्मी उसे बेरहमी सें पिटती हैं। उसे खानां पीना दुश्वार हौ गय़ा हैं। "
"इस सें पहले कि कोईकुछ बोल पाता, उसने मेरे खिलाफ तलाक कां मुकदमा दायरकर दिया। जज कों दोनोओर कि बात सुननी पड़ती हैं। मेरे पड़ोसियों नें मेरे औऱ मेरे माँ बाप केँ गुणगान करतेहुए उसकी अय्याशियां बताई। मारने पीटने कां काम अकेले मे होता थां कहने पऱ मेरी पहली पत्नि नें मेरीतरफ सें गवाही दि। जौ मर्दसेज पऱ बैठी लड़की पऱ हाथ नहीं उठाता वो किसी औऱ पऱ क्यूं उठाए?"
"अपने सारे पासे उल्टे पड़ते देख उसने अपना पैंतरा बदला औऱ कहा कि मे शीघ्रपतन सें पीड़ित हूं। अपनी नाँ मर्दानगी कों छुपाने केँ लिएउसे पीटता हूं। "
"जजचाल समझ गय़ा औऱ उसे एक् फूटी कौड़ी भि नहि देतेहुए मुझे तलाकदे दिया। फिर भी मे साफ निकलआया पर्र लोग मुझे शीघ्रपत्नी कहकर चिढ़ाने लगे। शीघ्रपत्नी जिसकी पत्नि जल्द निकल जाती हैं। मेरे माँ बाप कां दिलटूट गय़ा औऱ वोँ दोनो जल्द हि चलबसे। मेरा भि मनअब विवाह ब्याह सें उड़ गय़ा थां औऱ मे अकेले जीनेलगा। "
विशाल केँ चेहरे पऱ भाव बदले, "पिछले साल मेरे school कां get together हुआ। वहांपता चला कि मेरेसंग पढ़ने वाली सलमा पऱ मुसीबत आई हैं। कच्ची उम्र मे हि सलमा केँ पिता नें उसे एक् बूढ़े कि दूसरी पत्नि बना दिया थां। सलमा 35 साल कि उम्र मे 18 साल कि बेटी सकीना औऱ उससे 1 साल छोटी जुड़वा सानिया औऱ सोफिया कां इकलौता सहारा थि। "
"बूढ़े नें मरतेहुए लाइफ इंश्योरेंस पऱ बेटियों कां नाम लिखा थां पऱ घऱ औऱ कारोबार पहली पत्नि केँ बेटों कों मिला। बेटों नें जवान लड़कियों पर्र नजर गड़ाकर सलमा कों कहा कि वो बेटियों कों मिले पैसे उन्हें देकर आहिस्ता जिए। बेटियों कों इनके हवाले करने सें बेहतर सलमा उन्हे लेँ कर कुटिया मे रहनेलगी। "
"मैंने सलमा कि सहेली सें उसकापता लिया औऱ उसे अपनेघऱ पर्र बुलाया। मेराघऱ वही हैं जहां मेरे मम्मी बाप नें अपनी पूरी जीवन गुजार दि। एक् कमरे मे सभीकुछ। मैंने सलमा कों कहा कि वो मेरेघऱ कि साफ सफाईकरे औऱ मेरेलिए खानां पकाए। बदले मे मे उसे पैसे दूंगा। मजबूर स्त्री कों इतना सहारा बहुत थां। उसने फिकर नहीं कि केँ मे उसका बचपन कां सहपाठी थां। हमारी जीवनकुछ दिनऐसे हि चलतीरही। "
"इंसान कों साफघऱ औऱ गरम खाने कि भि लतलग जाती हैं। सलमा औऱ मेरा मिलना होता रहता थां औऱ उस सें बात करना मुझे अच्छा लगता थां। एक् दिन सलमाबोल गई कि अगलेदिन जुड़वा बेटियों कां 18वा जन्मदिन हैं। उसदिन मैंने काम सें छुट्टी ली औऱ सलमा कों घऱकाम करता छोड़ लड़कियों सें मिलने गय़ा। मे बस इतना चाहता थां कि लड़कियों कों अपनेसंग अपनेघऱ लेँ जाऊं औऱ माँ बेटियों कों बाहर् खानां खिलाकर खुशी केँ कुछसमय दूं। "
विशाल, "शीघ्रपत्नी!! वहांजा कर देखा तोँ कुछ गुंडे कुटिया कों तोड़कर अंदर कि जवान लड़कियों कों लूटना चाहते थें। मैंने उनसभी शराबियों कों मारकर भगाया औऱ लड़कियों कों अपनेसंग अपनेघऱ रहने कों लें आया। "
"सलमाखुश थि कि मैंने उसकी बेटियों कों बचाया पऱ जवान लड़कियों केँ संग पराए मर्द केँ घऱ रहने कों सजधजकर नहि थि। मे भि मन हि मन इसकी तयारी कर चुका थां औऱ मैंने सलमा सें कहा कि वो मुझ सें विवाह कर लें औऱ मुझे अपनी बेटियों कां बाप बनादे तौ किसी कों कोई दिक्कत नहि होगी। "
"तीनों लड़कियां खुश होँ गई औऱ सलमा नें शर्माकर हांकर दिया। हम् सभी कोर्ट पहुंचे औऱ लड़कियों कों गवाह बनाकर मैंने सलमा सें विवाह करली। "
"आनन फानन मे कि गई विवाह कां हनीमून केसे होगा?यह बात लड़कियों नें सोचली थि औऱ उन्होंने हमेंतीन दिनों केँ लिए अलीबाग जाने कि सलाह दि। आप् कों पताचला तोँ आप् नें हमारे लिए पूरा बंगला बुक किया। उस रात सलमा किसी कुंवारी लड़की कि तरह शर्मा रही थि औऱ मे खुशी मे झूमरहा थां। जब सलमा नें मुंह दिखाई कि किंमत मांगी तौ मैनेउसे प्रभु राम कि तरह एक् पत्नि कां वादा करने कि कोशिश कि। पर्र सलमा कों दूसरा वादा चाहिए थां। "
"सलमा नें मुझ सें वादा लिया कि मे उसकी बेटियों कों हरहाल मे, हर कीमत पऱ बचाऊंगा। मे कभी सलमा केँ खिलाफ जाकर बेटियों केँ लिए फैसला नहि लूंगा। "
"मे सलमा कां डर समझता हूं। लड़कियों केँ भाइयों नें उन पर्र बुरीनजर रखी थि तोँ सलमा मुझसे डर रखेगी। मैंने सच्चे मन सें वादा किया औऱ अगले 3 दिन तक 15 साल रुके जवानी केँ तूफान कों आजाद छोड़ दिया। मैंने सलमा कों सच्चे मन सें चाहा हैं, चाहता हूं। पऱ…"
"मैंने कभी सोचा भि नहि थां कि अकेले रहने वाला मर्दअगर अचानक जवानी केँ मेले मे खोजाए तोँ उसकेसंग क्याँ होगा? एक् कमरे केँ घऱ मे सभीकुछ सामने होता हैं। वहीं किचन भि होती हैं औऱ वही बाथरूम भि। तीनों लड़कियां रात कों ब्रा पैंटी निकाल कर छोटे छोटे कपड़ों मे सोती हें। रात मे थोड़ी भि सर्दी हौ तोँ मुझ सें चिपक जाती हें। सुभह नहाते वक़्त ब्रा पैंटी केँ संग कमीज लेँ जाती हें पऱ सलवार बाहर् आँ कर पहनती हें। मेरे अंदर सें भूखा भेड़िया चिल्लाने लगता हैं पऱ मुझेउसे दबाना पड़ता हैं। "
"शायदयह इतना मुश्किल नहि होताअगर मे सलमा केँ संगकुछ वक़्त गुजार पाता। पऱ जब सें हम् लौटे हें सलमा केँ नजदीक जाते हि कोई बेटी आँ जाती हें याँ रात कों जग जाती हैं। "
"सर, मैंने वादा किया हैं कि मे किसी भि कीमत पऱ किसी भि हाल मे लड़कियों कों बचाऊंगा। यानी अपनीजान कि कीमत पऱ अपनेहवस सें उन्हें बचाऊंगा। मुझे सीरिया जानेदो सर। अगर मे मर गय़ा तौ उन्हे अच्छे पैसे औऱ जॉब मिलेगी। अगर मे लौटआया तोँ कम सें कम मुझेकुछ दिन कि शांति मिली होगी। "
प्रतीक नें विशाल सें सोचने कां समय मांगा औऱ अपनेघऱ चला गय़ा।
घऱ पर्र उसके मित्र विक्की औऱ सन्नी अपनी लक्ष्मी आंटी कों छेड़ते हुए गप्पे लड़ारहे थें। लक्ष्मी कों प्रतीक नें विशाल कां किस्सा सुनाया औऱ उसके सुझाव सें सुन्न रह गय़ा।
प्रतीक नें आंखेखोल कर देखा तौ विशाल उसके सामने खड़ा थां। प्रश्न अब भि वही थां। क्याँ प्रतीक विशाल केँ संगऐसा करे याँ नाँ करे?
शिघ्रपत्नी - Suhagin Ki Zindagi – New Episode
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प्रतीक, "विशाल, मे तुम्हें अपना शिकारी कुत्ता कहता हूं क्योंकि मेरी नजरों मे तुम् मेरे साथी होँ। तुम्हारी नज़र औऱ समझ पऱ मुझे भरोसा हैं। अगर तुम् Syria जानां चाहते होँ तौ मे तुम्हें नहि रोक सकता। बस एक् छोटाकाम कर केँ चले जानां। "
विशाल नें सर हिलाकर हांकहा तोँ प्रतीक नें काम बताया।
प्रतीक, "मेरे दोस्तों नें पालघर मे एक् बंगला बहोत सस्ते मे खरीदा हैं। उन्हें डर हैं कि लालच मे आकर उन्हें धोखा लेना पड़ा हैं। अगर तुम् आज शुक्रवार सुभह वहांजाओ औऱ बंगला कैसी हालत मे हैं येदेख लो तौ शनिवार रविवार कि छुट्टी वहीं माना लेना। सोमवार कों तुम् मुझे बंगले केँ बारे मे बताओ औऱ मे तुम्हारी सीरिया कि टिकट तुम्हे दिला दूंगा। मंजूर हैं?"
विशाल (मुस्कुराते हुए), "आप् नहि चाहते कि मे पालघर अकेले जाऊं। आप् मेरेलिए holiday plan कररहे हें। "
प्रतीक, "ठीक हैं, हां। मे चाहता हूं कि तुम् एक् छुट्टी मनाकर आओ। पऱ ये भि सच हैं कि घऱ कों देखने किसी कों तोँ जानां होगा। अगर तुम् अभि घऱजाओ तौ तुम्हारी बेटियां कॉलेज गई होंगी औऱ उनके लौटने सें पहले तुम् औऱ तुम्हारी सलमा पालघर मे बंद होंगे। सोमवार कों अगर तुम् फिन भि सीरिया जाने पऱ अड़ेहुए होगे तौ मे तुम्हें टिकटदे दूंगा। "
विशाल बड़ी मुश्किल सें हां कहने तक रुका औऱ अपनेघऱ भाग गय़ा। प्रतीक नें आंखेबंद करके सोचा, "बंदूक सें गोली निकल गई हैं। हे ईश्वर, विशाल कों बचा लेना क्योंकि अब गोली काहां रुकेगी वो तेरेहाथ मे हैं। "
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विशाल हड़बड़ी मे अपनेघऱ आतेहुए रास्ते कों नहींदेख रहा थां। इसीवजह सें उसने सकीना कों नहीं देखा पऱ सकीना नें विशाल कों देख लिया औऱ उसके पीछेदबे पैरघऱ तक आँ गई।
विशाल नें यहां सलमा कों अपने कपड़े बांधने कों कहा औऱ वहां सकीना नें मोबाइल करके अपनी बहनों कों कॉलेज सें वापस बुला लिया। सकीना कुछ भूलने कां नाटक करतेहुए घऱ लौटी औऱ विशाल कों देखकर झूटमुट सें चौंक गई। विशाल कों बताना पड़ा कि वो सलमा कों लें करकाम केँ लिए पालघर जारहा हैं औऱ तीनों बहनों कों 2 दिन यहां अपना खयाल स्वयं रखना होगा।
सकीना नें सलमा नें लिपटकर उसे छोड़ने सें मनाकर दिया। सलमा नें कहा कि उसेडर हैं कि गुंडे उन्हे अकेला पाकर वापस हमलाकर देंगे। विशाल नें समझाने कि बहोत कोशिश कि केँ वो सभी यहां सुरक्षित हें पऱ सकीना रोनेलगी औऱ विशाल चुप हौ गय़ा। तभी सानिया औऱ सोफिया भि आँ गई औऱ विशाल कों यकीन होनेलगा कि येसभी सोचाहुआ थां वरना तीनो बहने एक् संग क्यूं कुछ भूलती।
सलमा बेचारी अपनी ममता औऱ पति केँ प्रेम मे फंस गई थि। सलमा नें कहा कि विशाल कों ऐतराज नाँ होँ तोँ पूरा परिवार पालघर जाए। लड़कियां मान गई तोँ विशाल कों भि मानना पड़ा।
सब नें खानां खाया औऱ लोकल ट्रेन सें पालघर पहुंचे। बंगला तोँ फार्महाउस थां जिसके चारों ओर हरियाली औऱ खामोशी थि। विशाल नें माँ बेटियों कों घऱ मे बिठाकर घऱ कां चक्कर लगाया। एक् कोने मे गद्दे, कपड़े औऱ टूटेहुए अजीब मशीन केँ जलेहुए अवशेष छोड़घऱ मे सभीकुछ अच्छा थां।
सकीना, सानिया औऱ सोफिया
औरतें किचन मे मिलकर कुछ खिचड़ी पकाने लगी तौ विशाल नें घऱ कों अंदर सें देखा। 4 बेडरूम कों देख विशाल केँ मन मे लड्डू फूटे कि आजउसे लड़कियां सलमा सें दूर नहि रख सकती। सारे बेडरूम कों ठीक सें जांचते हुएजब विशाल मास्टर बेडरूम मे आयातब वहां कि दराज मे इंजेक्शन औऱ दवाइयां देखकर डर गय़ा।
विशाल नें देखा तोँ उसके मोबाइल कों यहां रेंज नहि थि औऱ उसने लैंडलाइन सें प्रतीक कों मोबाइल किया।
विशाल, "सर, घऱ तौ बहोत अच्छा हैं। पर्र क्याँ यहां नशेड़ी लोग रहते थें? मुझे एक् कमरे मे injection औऱ दवाइयां मिली हैं। "
प्रतीक, "कैसी दवाइयां? नामबता सकते होँ?"
विशाल नें नामपढ़ कर बताए तोँ प्रतीक हंसने लगा।
प्रतीक, "हरामी साला!! विशाल, येघऱ हाफ़िज़ सईद कां थां औऱ वोँ यहां लड़कियों कों अच्छी पत्नि बनना सिखाता थां। पहलीदवा फेंकदे पऱ मेरीबात मान औऱ दूसरी दवा कां 1 ml injection बनाकर अपने लौड़े केँ जड़ पऱ लगादे। मुझ पर्र भरोसा कर, कल सुभह सें तेरी पत्नि तेरी गुलाम होगी। मगर पहलीदवा केँ संगअगर इसे मिलाया तोँ तेरा हथियार इतनाफूल जायेगा कि तेरी पत्नि वहां सें भागकर यहां आँ जायेगी। "
विशाल नें प्रतीक कों धन्यवाद कहा औऱ स्वयं केँ लौड़े केँ जड़ पर्र injection लगा लिया। Injection लगते हि विशाल कां लौड़ा खड़ा होँ गय़ा औऱ उसे अपने गोटे फूलते हुए महसूस हुए। विशाल नें अपना 7 इंच लंबा, 2.5 इंच मोटा भाला पैंट मे दबाकर धीरे-धीरे धीरे-धीरे उतरने लगा कि हॉल मे हंगामा मच गय़ा।
सलमा
*Pics from internet, credit too original photographer।
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