खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
"हमारा दिल पैसे कि बात सें दुखा भि नहीं। तुमने तौ हमारी आँखेखोल दि। सच मे, क्याँ फ़ायदा हैं ऐसी दौलत कां जौ किसीकाम हि नाँ आँ पाए। इसीलिए तौ आपकोवचन दिया हैं कि इसेदान कर देंगे। दिल तौ हमारा दूसरी बात सें दुखा हैं। ", मेनका केँ चेहरे पऱ तकलीफ़ छा गयीँ,, "क्याँ कह दिया हमने?प्लीज़ बताइए।। ", उसने उनके चेहरे कों हाथों मे लेँ लिया।
अबआगे.
राजासाहब केँ चेहरे पे गंभीरता आँ गई, थि, "। तुम् गुस्से मे हमेफिन सें आप् बुलाने लगी थि। "
सुनते हि दोनो खिलखिला केँ हन्स पड़े। थोड़ी देर पहले जोँ तनाव पैदाहुआ थां वोँ साराअब हवा हौ गय़ा। हंसते हुए मेनका झुककर अपने ससुरजी केँ होंठ चूमने लगी। राजासाहब नें उसकीकमर कस केँ पकड़ली औऱ लगे उसकारस पीने। चूमते हुए मेनका नें अपनी जाँघ पे कुछ गर्म सां महसूस किया तोँ नीचे देखा। उसने पाया कि राजासाहब कां लन्ड खड़ा होकर उसकी जाँघ सें रगड़रहा थां। उसनेहाथ बढ़ाकर उसेथाम लिया औऱ थोडा रगड़ दिया।
उसके दिमाग़ मे एक् ख़याल आया, वोँ खड़ी हुई औऱ फिन कुर्सी पे राजासाहब केँ दोनोतरफ अपने घुटने रख एक् हाथ सें उनके लन्ड कों पकड़ा औऱ उस पर्र बैठने लगी। जब आधा लन्ड अंदरचला गय़ा तोँ उसनेउसे छोड़ अपने ससुरजी केँ कंधों पऱ बाहें रख उनकेसर कों हाथों मे थाम लिया औऱ उन्हे प्रेम सें चूमने लगी।
राजासाहब नें उसकीकमर पकड़कर नीचे झुकना शुरुआत किया औऱ उसकी बुर मे अपना पूरा लन्ड घुसाने लगे। मेनका कों थोडा दर्द महसूस हुआ, पर्र संग हि संगमजा भि बहोत आँ रहा थां। थोड़ी हि देर मे लन्ड जड़ तक बुर मे थां। राजासाहब केँ हाथों नें उसकी चौड़ी गांड कों थाम लिया औऱ उसे प्रेम सें मसलने लगे। मेनका नें अपनीजीभ उनके मुँह मे डाल दि औऱ जम केँ चूमने लगी। जोश मे वोँ अपने ससुरजी सें चिपक गई,, "ओह्ह।। ", राजासाहब कों सीने मे कुछ चुबा। दोनो नें अपनेहोठ जुड़ा किए तौ पाया कि वोँ हीरो कां नेकलेस उनके प्रेम मे अड़चन बनरहा थां। मेनका हाथ पीछे लेँ जाकर नेकलेस खोलने लगी, ऐसा करने सें उसकी चूचिया औऱ अधिकउभर कर उसके ससुरजी केँ चेहरे केँ सामने चमकने लगी। राजासाहब नें अपना मुँहउन काम कलशो सें लगा दिया औऱ लूगे चूसने औऱ चूमने।
"आँ.अनन्नह.", मेनका नें नेकलेस कों उतार डेस्क पर्र रखा, सुकून उसनेगले मे हि रहने दि औऱ अपने हाथों मे अपने ससुरजी कां सर जाकड़ लिया औऱ अपनीकमर उचका-उचका कर उन्हे चोदने लगी। राजासाहब केँ हाथ उसके बालों सें होतेहुए उसकीपीठ औऱ गांड पे आके फिसलने लगे।
मेनका कों इस पोज़िशन मे चुदाई करने मे बहोत मजा आँ रहा थां। इस मे वोँ पूरे कंट्रोल मे थि। आज तक जब भि वोँ अपने पति याँ ससुरजी सें चुदी थि, तौ वोँ उसकेउपर रहकर धक्के मारते थें। पऱ आज उसकी मर्ज़ी थि कि वोँ केसे धक्के लगती हैं। वोँ जी भरके अपने ससुरजी केँ लन्ड पे कभी तेज़ी सें तोँ कभी हौले-होले तोँ कभी अपनी गांड घुमा-घुमा कर, उच्छल रही थि।
राजासाहब केँ मजा कां तौ ठिकाना हि नहीं थां। मेनका कि कसी बुर उनके लन्ड पे रगड़खा कर उन्हे जोश सें भरेजा रहे थि। दोनोअब अपनी मंज़िल कि ओर पहुँच रहे थें। मेनका नें उन्हे अपने आगोश मे औऱ ज़ोर सें जाकड़ लिए औऱ अपनी गांड भि तेज़ी सें उच्छलने लगी, राजासाहब नें अपनेहोठ उसकी छाती पे लगा केँ थोड़ी देर पहले बनाए निशान कों औऱ गहरा करना चालूकर दिया, उनकी कमर भि नीचे सें हिलने लगी।
मेनका कि बुर नें पानीछोड़ दिया औऱ वोँ अपने ससुरजी सें चिपक गयीँ,। झड़ती हुई उसकी बुर नें राजासाहब केँ लन्ड कों कस केँ जाकड़ लिया तौ उनके लन्ड सें भि बर्दाश्त नहींहुआ औऱ उसने भि अपनी पिचकारी सें बुर कों नहला दिया।
दोनो थोड़ी देर तक वैसे हि बैठे रहे, "तुम् हमेकुछ देने वाली थि?", राजासाहब मेनका केँ कान मे फुसफुसाए।
"हा, हमारे रूम मे हैं। जाकर लाते हें। ", मेनका उतरने लगी तोँ राजासाहब उसेलिए हुएउठ गये औऱ घूमकर उसेचेर पे बिठा दिया औऱ अपना लन्ड उसकी बुर सें निकाल लिया। मेनका टांगे फैलाए कुर्सी पर्र बैठी थि, राजासाहब केँ लन्ड कां पानी उसकी बुर सें टपकरहा थां।
"थोड़ी देरयही बैठो। ", राजासाहब नें सारे कागज़ात उठाकर वापस तिजोरी मे डालकर शेल्फ मे वापस किताबें लगा दि।
"हम् अभि आते हें। ", वोँ स्टडी सें बाहर् चलेगये।
मेनका नें हाथसर सें उपर लेँ जातेहुए एक् कातिल अंगड़ाई ली। उसने अपनी बुर पे हाथ फिराया तोँ उसके हाथों मे वहा कां पानीलग गय़ा। उसने डेस्क पर्र सें नॅपकिन उठाकर उसेसाफ़ किया। तभी राजासाहब वापस आँ गये।
"आओ, " उन्होने उसकाहाथ पकड़कर उठाया तोँ मेनका लड़खड़ा गयीँ,। चुदाई नें तौ उसे पस्तकर दिया थां। राजासाहब नें हाथ बढ़ाकर उसेथाम कर अपने कंधे सें लगा लिया औऱ चलनेलगे। बाहर् आकर स्टडी कों लॉक किया औऱ उसे लें अपने वॉक-इन क्लॉज़ेट मे आँ गये।
क्लॉज़ेट क्याँ, छोटा-मोटा रूम हि थां। अंदर राजासाहब केँ कपड़े जूते औऱ बाकी सामान करीने सें लगा थां। क्लॉज़ेट केँ एक् तरफ एक् ड्रेसिंग टेबलरखा थां जिसके बगल मे उसी केँ साइज़ कि एक् पैंटिंग लगी थि। पैंटिंग मे एक् लड़की अपना शृंगार कररही थि। राजासाहब नें आगेबढ़ करउस पैंटिंग कों उतार दिया तौ पीछे एक् द्वार (दरवाज़ा) नज़रआया। उन्होने मेनका कों लिया औऱ उस दरवाज़े कों खोल अंदर दाखिल होँ गये।
मेनका कों एक् करीब 6 फीट लंबा गलियारा नज़रआया जिसके आख़िर मे भि एक् द्वार (दरवाज़ा) खुला थां औऱ वाहा सें रोशनी आँ रही थि। दोनो गलियारा पारकर उस दरवाज़े कों भि पारकर गये।
"अरे!!", मेनका कि सारी थकान काफूर होँ गई,। वोँ अपने बेडरूम केँ वॉक-इन क्लॉज़ेट मे खड़ी थि, उसने देखा कि उसके क्लॉज़ेट कि वोँ पैंटिंग उतारकर एक् तरफरखी थि।
"यह क्याँ हैं?", राजासाहब केँ संग वोँ अपने कमरे मे आँ गयीँ,।
राजासाहब उसकेबैड पर्र लेटगये औऱ अपनी बाँहे खोल दि। मेनका थोड़ी हैरान सि उनमेसमा गई,। राजासाहब नें उसे बाँहों मे भर अपने सें चिपका लिया औऱ एक् लंबीकिस दि।
"हमारे पुरखों कि बगल केँ राज्य वाले राजाओं सें हमेशा जंग होती रहती थि। राजपरिवार कि सुरक्षा केँ लिए उपरी मंज़िल केँ राजपरिवार केँ रूम कों इसतरह सें जोड़ा गय़ा ताकि मुसीबत केँ समय दुश्मन सें बचकर भागाजा सके। इस महल मे ऐसे औऱ भि रास्ते हें। "
"पऱ हम् इस रास्ते कां इस्तेमाल मात्र आपको प्रेम करने केँ लिए करेंगे। "
"मेरा तौ सरघूम रहा हैं, पहले वोँ तिजोरी औऱ अबयह रास्ते। ", उसने अपनेसर पऱ हाथ रखा, "पऱ एक् बात बताओ क्याँ नौकरों कों भि पता हैं इन रास्तों केँ बारे मे?"
"2-3 पुराने खास नौकरों कों जोँ कि इसका ज़िकरा किसी सें भि नहीं करते। ", राजासाहब उसकी एक् बोबले केँ निपल कों मसलने लगे
"उउंम.म्म्मह.अच्छा, औऱ जब आप् अपने कमरे मे चले जाएँगे तोँ हम् यह भारी-भरकम पैंटिंग केसे लगाएँगे?"
"वोँ सिर्फ देखने मे भारी हैं। उठाकर देख्ना बिल्कुल हल्की हैं। ", औऱ अपने मुँह मे वोँ पूरी निपल केँ संग मम्मों भरली।
"एयेए.आहह-आहह.इयश.!", उसने अपनी एक् टाँग अपने ससुरजी कि टाँग पर्र चढ़ा दि औऱ दोनोफिन सें प्रेम केँ समुंदर मे गोते लगाने लगे।
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ठीकउसी वक्तशहर मे उनका दुश्मन भि अपनी रखैल कि बुर चोदने केँ बाद उसकी गांडमार रहा थां।
".एक् बातबता साली.ऊओवव्व!", जब्बार नें मलिका कि गांड मे ज़ोर कां धक्का मारा, वोँ घोड़ी बनी थि औऱ जब्बार पीछे सें उसकी गांडमार रहा थां।
"बोल, छिनाल। "
"जबउसदिन कि एंट्री फाइल मे हैं हि नहीं तौ तुम को केसे यकीन हैं कि वही पाइलट उसदिन राजा कों लें गय़ा होगा?"
"यकीन नहीं हैं, बस अंदाज़ा हैं। यकीन तोँ तुँ दिलाएगी जबउसे शीशे मे उतारेगी। ", जब्बार नें अपनी उंगली उसली बुर मे डाल दि औऱ दूसरे हाथ सें उसकी स्तनों कों मसलने लगा।
"कल रात वोँ "बिज़्ज़रे" डिस्को मे जाएगा। वही तूँ उसे अपनेजाल मे फँसाएगी। वैसे भि तेरेयह छेदकिस काम मे आयेगे डार्लिंग। मई चाहता हु कि यहछेद मेरे लन्ड औएकाम आये औऱ दुसरे केवलदेख केँ अपने लन्ड कां माल गिरादे। " उसके धक्कों कि स्पीड बढ़ गयीँ, थि।
"आँ.अनन्न.वाहह., ठीक हैं कुत्ते.आँ.इयैयियैआइयीययी.ऐसे हि मार.फा.आड दे मेरी गा.आँड.ऊऊओ.ऊओह.! पता नहि कुत्ते तूँ मेरी गांड क्यूं माररहा हैं अधिकतर आगे कां मार्ग भूल गय़ा हैं क्याँ.वैसे मेरीयह गांड भि मेरे काबू मे नहि, सभी सें ज़्यादा आनंदवही देरही हैं। कब तक तुँ मेरे छेदों सें जंग जीतेगा पता नहि!", औऱ वोँ झड़ गयीँ,। जब्बार नें भि 3-4 बेरहम धक्के औऱ लगाए औऱ उसकी गांड मे पानीछोड़ दिया।
थोड़ी हि देर मे वोँ खर्राटे भररहा थां, पर्र मलिका कि आँखों मे अभि भि नींद नहीं थि। उसे कल्लन कां लंबा लन्ड याद आँ रहा थां। उसने जब्बार कि तरफ देखा, जब उसे यकीन होँ गय़ा कि वोँ सोरहा हैं तौ वोँ उठी औऱ दबे पाँव कल्लन केँ कमरे मे चली गई,।
कल्लन चादरओढ़ सोरहा थां। मलिका उसकी चादर मे घुस गई, तौ पाया कि वोँ नंगा हैं। उसनेझट सें उसके लन्ड कों पकड़ लिया औऱ हिलाने लगी। कल्लन कि नींदखुल गयीँ,, उसने मलिका कों चित किया औऱ टांगे फैलाकर अपना लन्ड उसकी बुर मे पेल दिया। मलिका नें उसके कंधे मे दाँत गढ़ा अपनेहलक सें निकलती हुइ चीख ज़ब्त कि औऱ अपनी टांगे उसकीकमर मे लपेटउस सें चुदने लगी।
इस एपिसोड केँ बारे मे आपकीराय देना नां भूले.प्लीज़.
मिलते हैं अगले एपसोड केँ संगतब तक केँ लिए विदा
।। जय भारत।।
12.
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
सुभह केँ 5 बजरहे थें। मेनका पूरीतरह सें नंगी बेख़बर सोरही थि। बगल मे राजासाहब अदलेते सें जागेहुए थें औऱ उसकी जवानी कों निहार रहे थें, वोँ भि पूरीतरह नंगे थें बस उनकी कलाई पर्र एक् सोने कां ब्रेस्लेट चमकरहा थां। ब्रेस्लेट केँ बीच मे चमकता सूरजबना थां जोकि उनका राजचिन्ह भि थां। यही वोँ चीज़ थि जोँ कि मेनका नें मुम्बई मे उनसे छिपाकर खरीदी थि ताकि उन्हे सर्प्राइज़ देसके। कलरात आख़िरी बार कि चुदाई केँ बाद उसने अपने हाथों सें यह उन्हे पहनाया थां।
राजासाहब मेनका कों देखने लगे। सोते वक्त कितनी मासूम लगरही थि। उसकी बड़ी-बड़ी छातियो केँ बीच उनकी दि हुइ सुकून चमकरही थि। साँसों केँ कारण उसकी स्तनों केँ उभारउपर नीचे हौ रही थि। यह नज़ारा देखकर राजासाहब कां सोया लन्ड फिन जागने लगा औऱ उनकादिल किया कि अपनेहोठ अपनीबहू केँ निपल्स सें लगादें। पर्र तभी उन्हे वक्त कां ध्यान आया, थोड़ी देरबाद दोनो कों ऑफीस भि जानां थां। अगर अभि वोँ मेनका कों चोद्ते तोँ आज वोँ अवश्य ऑफीसमिस कर देती जोँ कि वोँ बिल्कुल नहीं चाहते थें।
उन्होने एक् लंबी साँसभरी औऱ उठकर क्लॉज़ेट केँ रास्ते अपने कमरे मे चलेगये। फिनवहा सें मेनका कि नाइटी औऱ नेकलेस लाकर उसकेबेड पे रख दिया औऱ इसबार फाइनली अपने बेडरूम मे चलेगये औऱ क्लॉज़ेट केँ उस सीक्रेट रास्ते कों बंदकर दिया।
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राजकुल ग्रूप केँ ऑफीस केँ कान्फरेन्स हॉल मे राजासाहब अपने एंप्लायीस कों डील केँ बारे मे औऱ डील केँ पैसों सें उन्हे मिलने वाले बोनस केँ बारे मे बतारहे थें, " औऱ अब एक् आखरी अनाउन्स्मेंट, अभि तक कंपनी कां मात्र एक् वाइस-प्रेसीडेंट थां कुंवर विश्वजीत सिंग पऱ आज सें दो वी.पी होंगे औऱ दूसरी वी.पी होंगी कुँवारानी मेनका सिंग। "
तालियों कि गड़गढ़त सें हॉल गूँजउठा, “आज केँ बादअगर हम् ऑफीस मे नां हौ तौ हमारी स्थान आप् कुँवारानी कों हि अपना सबसे बड़ाबॉस समझिए यह सारी बातें थि जौ कि आपका जानना ज़रूरी थां। अगले 2-3 दीनो मे बोनस कि रकम आपके सॅलरी अकाउंट्स मे जमाकरा दि जाएगी। थॅंकयू। "
मीटिंग केँ बाद मेनका राजासाहब केँ ऑफीस चेंबर मे बैठी थि, "क्याँ ज़रूरत हैं हमे वी.पी बनाने कि?" फनलव औऱ मैत्री कि पेशकश।
"अरे भइया, वैसे हि तुम् एक् वी.पी कि सारी ज़िम्मेदारियाँ उठाती हौ तोँ बना भि दिया। ", पास आकरउसे चेर सें उठाया औऱ बाहों मे कस लिया।
"क्याँ कररहे होँ? कोई आँ जाएगा। ", मेनका छूटने कि कोशिश करनेलगी। चेहरे पऱ घबराहट औऱ लज्जा केँ मिले-जुले भाव थें।
"हमारे ऑफीस मे बिना हमारी इजाज़त केँ कोई नहीं आँ सकता। ", राजासाहब नें उसकेहोठ चूमलिए।
"प्लीज़, यश मुझेडर लगरहा हैं। पागलमत बनो, ऑफीस हैं किसी कों पताचल गय़ा तोँ ग़ज़ब हौ जाएगा। "
"हम् पर्र भरोसा रखो, तुमसे ज्यादा तुम्हारी फ़िक्र हम् करते हें। " औऱ एक् बारफिन उसके होंठ चूमने लगे। उन्होने अपने हाथों सें नीचे सें उसकी साड़ी उठानी शुरुआत कर दि। मेनका फिन कसमसाई, "प्लीज़", पऱ राजासाहब नें उसे अनसुना करतेहुए साड़ी कमर तक उठा दि औऱ अपने हाथों सें उसकी पेंटी मे कसी गांड कि फांको कों मसलने लगे।
वैसे हि उसकी गांड पकड़कर चूमते हुए उन्होने उसे डेस्क पऱ बैठा दिया औऱ स्वयं उसके सामने चेर पर्र बैठगये औऱ एक् झटके मे उसकी पेंटी उतार दि। मेनका कुछकह पातीइस सें पहले हि उसकी जांगे उसके ससुरजी केँ कंधे पे थि औऱ उनकेहोठ उसकी बुर पे जालगे।
"ऊओ.ऊ.", मेनका कि आह निकल गई,। उसने अपनी जांघों मे अपने ससुरजी कों भीच लिया औऱ अपने हाथों सें उनकेसर कों अपनी बुर पर्र दबाने लगी। राजासाहब केँ मुँह नें उसकी बुर कों चाटना, चूमना औरचूसना चालूकर दिया औऱ हाथ उसकी ब्लाउस मे कसी धाये कों दबाने लगे।
मेनका कों औऱ क्याँ चाहिए थां, मेनका मस्त हौ गयीँ, पर्र मन केँ किसी कोने मे पकड़े जाने कां डर भि थां। वोँ जल्द सें जल्द झड़ना चाहती थि औऱ राजासाहब इसमे उसकी पूरी सहायता कररहे थें। थोड़ी हि देर मे मेनका नें अपनी गांड डेस्क सें उठा दि औऱ अपनेहोठ काट अपनी सिसकारियों कों ज़ब्त करतेहुए अपने ससुरजी कां मुँह अपने हाथों सें अपनी बुर पे औऱ दबा दिया औऱ उसकी बुर नें ससुरजी केँ मुह मे अपने चुतरस कां प्रसाद दे दिया।
राजासाहब उठे, अपनी पॅंट खोली औऱ अपना लन्ड निकाल कर डेस्क पऱ बैठी मेनका कि गीली बुर मे डाल दिया। लन्ड घुसते हि मेनका उनसे लिपट गयीँ, औरउनके धक्कों कां मजा उठाने लगी, थोड़ी हि देर मे उसकी गांडफिन हिलने लगी। उसकेहोठ अपने ससुरजी केँ होठों सें लगे थें औऱ हाथ उनके पूरे जिस्म पर्र फिनरहे थें। राजासाहब नें अपनेहाथ नीचे सें उसकी गांड पर्र कसदिए थें। दोनो चुदाई मे पूरीतरह डूबगये औऱ थोड़ी हि देर मे दोनो केँ जिस्म झटकेखा करझड़ गये।
दोनो वैसे हि लिपटे एक् दूसरे कों चूमरहे थें कि राजासाहब कां फोनबजा। फनलवऔर मैत्री कि प्रस्तुति।
"हेलो। "
"दुष्यंत बोलरहा हू, यशवीर। तुम्हारे केस केँ बारे मे कुछबात करनी थि। "
"हा, भइया। कहो, क्याँ पताचला?" राजासाहब नें अपना लन्ड अपनीबहू कि बुर सें खीच लिया पऱ उनका खालीहाथ अभि भि उसकासर सहलारहा थां।
"भइया तुम् शहर आँ जाओ तौ तुम्हे अच्छी तरह सारीबात समझादू। " मेनका नें डेस्क सें उतरकर अपने ससुरजी कि एडी पे गिरी पॅंट कों उठाकर उन्हे वापस पहना दिया।
"ठीक हैं, दुष्यंत, हम् बस अभि निकलते हें। " मोबाइल काटकर उन्होने मेनका कों अपनेपास खींचकर चूमा औऱ उसकी आँखों मे उठे प्रश्न कां जवाब दिया।
"एक् बहोत ज़रूरी काम सें शहर जानां पड़रहा हैं। रात तक लौट आएँगे। घबराईए मत। चिंता कि कोईबात नहीं हैं। औऱ इस नाजुक पारी कों रेडीरखे। " उन्होने ज़मीन पऱ पड़ी पेंटी उसे थमाई।
मेनका उसे लेँ बाथरूम चली गयीँ,। जब बाहर् आई तौ राजासाहब नें उसे गुडबाइ किस दि औऱ चलेगये।
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शहर केँ 5-स्टार होटेल केँ उस कमरे मे राजासाहब अपने जिगरी मित्र केँ संग बैठे थें पऱ कमरे मे उनके अलावा एक् नौजवान भि थां।
"यश, यह मनीष हैं। तुम्हारा केसयही इन्वेस्टिगेट कररहा हैं। औऱ यह राजा यशवीरसिंग हें, मनीष। "
मनीष नें उन्हे प्रणाम किया तौ राजासाहब नें जवाब मे सर हिलाके उस नौजवान कों ठीक सें देखा।
"इसकी उम्र पऱ मत जानां, यश। मेरे सबसे काबिल बन्दो मे सें हैं यह। ", दुष्यंत वर्मा फिन मनीष सें मुखातिब हुए, "मनीष अब तुम् सारी रिपोर्ट हम् दोनो कों दो। "
"जीसर। "
मनीष नें बोल्ना शुरुआत किया,
"सर, मैने राजपुरा औऱ शहर कि उनसब जगहो पर्र जाकर तहकीकात कि जहा कुंवर साहब कां आन-जानां थां। शुरुआत मे मुझे कहींकोई सुराग नहीं मिला कि आख़िर उन्हे ड्रगकौन देता थां। शहर केँ अपने मुखबिरो केँ ज़रिए मैनेपता लगाया तोँ पाया कि यहा कां किसी डीलर नें तोँ कभी उनसेकोई सौदा नहीं किया थां। फिन राजपुरा जैसी छोटी स्थान यह डीलर्स तोँ जाने सें रहे। एक् व्यक्ति केँ बिज़नेस केँ लिएयहा कां अपना हज़ारों कां नुकसान-यह कोई सेन्स नहीं थां। " थोडा रुककर मनीष नें पानी कां एक् घूँट लिया।
".मैने अपना ध्यान राजपुरा पर्र लगा दिया। मुझेपता चला कि कुंवर आदिवासियों केँ गाव महुआ कि शराब लेने जाते थें। औऱ यही भाग्य सें मेरेहाथ एक् बड़ा सुराग लग गय़ा। आदिवासियों नें बताया कि कुंवर केँ अलावा भि एक् शहरी व्यक्ति थां जोँ कि उनसे महुआ लेँ जाता थां। उन्होने एक् बारउसे गाड़ी मे बैठे कुंवर सें कुछ बाते करतेहुए भि देखा थां। जब मैने उसका हुलिया, नाम आदि पूचछा तौ कुछखास नहींपता चला। "
इस एपिसोड केँ बारे मे आपकीराय देना नाँ भूले.प्लीज़.
मिलते हैं अगले एपसोड केँ संगतब तक केँ लिए विदा.
Funlover.
।। जय भारत।।
13.
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