खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
मेनका नें वैसे हि मुँह छुपाए हुएसर हिलाकर मनाकर दिया।
"प्लीज़, तुम्हे हमारी शपथ। " उन्होने उसकेहाथ उसके चेहरे सें हटादिए।
मेनका नें बहोत धीरे-धीरे सें कहा, ".यश। " फनलवर कि पेशकश।
"एक् बार औऱ, मेरी जान, प्लीज़। " राजासाहब नें बेताबी सें उसकेगाल चूमलिए।
इसबार मेनका नें अपनी आँखें खोल अपने प्रेमी कि आँखों मे देखा, "आइ लव यू,,,, यश। "
इस बात नें तौ राजासाहब कों खुशी सें पागलकर दिया औऱ वोँ उसकेबदन पर्र टूट पड़े। उसके गुलाबी निपल्स अब उनकीजीभ औऱ होठों कि रहम पऱ थें।
"एयेए.ह.ह्ह्म्म" मेनका कां शरीर कमान कि तरहमूड गय़ा औऱ छातीखाट सें उपरउठ गई,।
उसने अपने ससुरजी केँ सर कों अपने सीने पर्र कस केँ भींच लिया। राजासाहब नें एक् मम्मों मुँह मे ली औऱ दूसरी कों हाथ मे औऱ लगे उन्हे चूसने औऱ दबाने। मेनका कां शरीर पूरीतरह सें जोश मे डूब गय़ा थां औऱ अब तौ वोँ झड़ने हि वाली थि। राजासाहब नें चूचियो कि पोज़िशन बदल दि, पहलेबाई मुँह मे थि, अबदाई आँ गई,, पऱ उनका चूसा जानां औऱ दबाया जानां वैसे हि जारीरहा। मेनका नें हाथ नीचे लें जाकर पायजामा केँ उपर सें हि अपने ससुरजी केँ खड़े लन्ड कों पकड़ लिया औऱ मसलने लगी। थोड़ी हि देरबाद मेनका कां बदन अकड़ा औऱ उसने अपनीजीभ दांतो तलेदबा ली, उसकी बुर नें पानीछोड़ दिया थां।
राजासाहब बिस्तर पऱ खड़े हौ गये औऱ अपना पायजामा भि उतार दिया औऱ अपनीबहू केँ सामने पूरे नंगे हौ गये। वोँ झुककर घुटनो पऱ खड़ेहुए- उनका इरादा फिन सें अपनीबहू केँ उपर चढ़ने कां थां, पर्र तभी मेनका कि नज़र अपने ससुरजी केँ लन्ड पऱ पड़ी जिसने उसे पागलकर दिया थां।
वोँ झट सें उठी औऱ अपने ससुरजी केँ लन्ड कों अपने मुँह मे लें लिया औऱ चूसने लगी। अब राजासाहब खाट पर्र अपने घुटनो पे खड़े थें औऱ मेनका बैठकर उनके लन्ड कों चूसरही थि, संग-संग उसकेहाथ लन्ड औऱ नीचेलटक रहे अंडो कों सहला औऱ हिलारहे थें। राजासाहब नें अपनेहाथ उसकेसर पऱ रखदिए औऱ स्वयं भि हौले-हौले कमर हिलाकर उसके मुँह कों चोदने लगे।
मेनका नें अपनेहाथ उनके लन्ड पऱ सें हटालिए औऱ पिछे लें जाकर उनकी गांड कों पकड़ लिया। अपने नाखूनओ सें वोँ हल्के-हलके उनकी गांड सहलाने लगी। राजासाहब कों बहोत मजा आँ रहा थां। उनकी पकड़ अपनीबहू केँ सर पऱ औऱ मज़बूत होँ गयीँ, औऱ वोँ थोड़ी औऱ तेज़ी केँ संग उसके मुँह कों चोदने लगे। मेनका कों तौ यह लन्ड वैसे हि बहोत प्यारा लगता थां। उसका तोँ दिल करता थां कि बसहरसमय वोँ इस सें खेलती रहे। उसने भि राजासाहब कि गांड औऱ मज़बूती सें पकड़ अपना मुँह उनकी जाँघो केँ बीच थोडा औऱ घुसा दिया। राजासाहब झड़ने हि वाले थें पऱ उनका इरादा आज मेनका केँ मुँह मे अपना पानी छोड़ने कां नहीं थां।
उन्होने अपना लन्ड मेनका केँ मुँह सें बाहर् खींच लिया तौ मेनका नें सवालिया नज़रो सें उन्हे देखा। राजासाहब नें उसकी बाँहे पकड़उसे उपरउठा लिया, अब वोँ भि अपने ससुरजी जैसे उनके सामने घुटनो पे खड़े थि। राजासाहब नें अपनेहाथ उसकीकमर पे लपेटदिए औऱ उसे चूमने लगे। जवाब मे मेनका नें भि अपने ससुरजी कि कमर केँ गिर्द अपनेहाथ कसदिए। राजासाहब कां प्री-कम सें गीला लन्ड, दोनो केँ जिस्मो केँ बीच उसकेपेट पे दबाहुआ थां। चूमते हुए दोनो केँ हाथ एक्-दूसरे कि कमर सें फिसलकर नीचे एक्-दूसरे कि गांडो सें खेलने लगे। जहा राजासाहब अपनीबहू कि गांड केँ फांको कों जम केँ मसलरहे थें वही मेनका उनकी गांड पे अपने नाखूनओ केँ निशान छोड़रही थि। फनलवर कि लेखनी।
राजासाहब वैसे हि घुटनो पे खड़ी मेनका केँ होठों कों छोड़ नीचे आँ उसकी चुचियों कों चूसने लगे। थोड़ी देर चूसने केँ बाद वोँ औऱ नीचेआए, उसकेपेट कों चूमा औऱ फिनउस सें भि नीचे उसकी बुर पे एक् किसठोक दि। मेनका नीचे होँ कर बैठने हि वाली थि कि राजासाहब झट सें उसके घुटनो केँ बीचलेट गये औऱ उसकीकमर पकड़उसे अपने मुँह पऱ बिठा लिया।
अब राजासाहब चित लेते थें औऱ मेनका उनके मुँह पऱ बैठी थि। राजासाहब नें आँखेउठा कर अपनीबहू कों देखा, उसके चेहरे पऱ हैरत औऱ जोश कि मिलीजुली मुस्कान थि। हाथ आयेजला उन्होने उसकीचुत कि फांको कों फैलाया औऱ अपनीजीभ उसके अंदरडाल दि औऱ चाटने लगे।
".ऊओ.ऊओह.। ", मेनका कि आँखेबंद होँ गयीँ,, उसने अपने ससुरजी केँ सर कों सहारे केँ लिए पकड़ लिया औऱ अपनीकमर हिलाने लगी।
राजासाहब उसकी बुर चाटते हुए अपनेहाथ उसकीकमर सें हटाउपर लें जा उसकी चुचियाँ दबाने लगे। मेनका केँ लिएयह बहोत अधिक थां औऱ वोँ दुबारा झड़ गई, पऱ राजासाहब नें उसकी बुर चाटना नहीं छोड़ा। वोँ उसीतरह अपने हाथों सें उसकी चूचिया दबाते रहे, उसके निपल्स मसलते रहे। उन्होने अपनीबहू कि बुर मे सें जीभतब तक नहीं निकाली जब तक कि वोँ दोबार औऱ नहींझड़ गई,।
आखरीबार झड़ते हि मेनका निढाल हौ आगेगिर गयीँ, तोँ राजासाहब उसकी जांघों मे सें सर निकाल उठ बैठे। मेनका पेट केँ बललेट गहरी साँसे लेँ रही थि। राजासाहब अपने हाथों सें उसकीपीठ औऱ गांड सहलाने लगे। थोड़ी देर सहलाने केँ बाद उन्होने अपनेहोठ उसकी गांड पर्र रखदिए औऱ वहा पऱ जमकर चूमा, चटा औऱ चूसा। चूसकर उसकी गांड कि फांको औऱ जांघों केँ पिछले हिस्से पर्र उन्होने लव बाइट्स छोड़दिए।
फिन उन्होने नें उसेकमर सें पलटकर सीधा किया औऱ उसकी जांघों पे चूमने औऱ चूसने लगे। मेनका केँ जिस्म पर्र कल कि लव बाइट्स केँ निशान अभि भि ताज़ा थें, राजासाहब नें उन मे कुछ औऱ निशान जोड़दिए। उसकी जांघों सें उनकेहोठ उसकी बुर पर्र आए औऱ जितना भि पानी अभि उसकी बुर नें छोड़ा थां, उसेपी गये। राजासाहब कां अगला निशाना मेनका कि नाभि थि। उनकीजीभ उसकी नहीं कि गहराई नापने कागी तौ मेनका फिन सें गर्म होनेलगी। उसकादिल कररहा थां कि बसअब उसके ससुरजी उसकी बुर मे अपना लन्ड डालदे। उसनेहाथ बढ़ाकर अपने ससुरजी केँ बाल पकड़कर खींचे,
"इधरआइए नां."।
राजासाहब उपरआकर उस पर्र लेटगये औऱ उसकी चूचिया चूसने लगे। थोड़ी देरबाद उठेकर मेनका कि जांघों पे हाथरखा तोँ उसने स्वयं हि उन्हे फैला दिया। राजासाहब नें अपना लन्ड एक् झटके मे हि उसकी बुर मे दाखिल कर दिया।
"ऊओ.ऊव्ववव!। " मेनका कां सर पीछेमूड गय़ा, छाती हवा मे उठ गई, औऱ कमर स्वयं बा स्वयं झटके खानेलगी। राजासाहब नें भि बहोत देर तक अपनेउपर काबूरखा थां। अब उन्होने भि जमकर उसकी चुदाई शुरुआत कर दि।
"आँ.न्न्ह.आँ.आन्न्न्नह! कमरे मे मेनका कि आनहें गूंजने लगी तौ राजासाहब केँ धक्कों कि रफ़्तार औऱ भि बढ़ गई,।
उन्होने अपनेहोठ उसकी छाती पे औऱ कसदिए औऱ ज़ोर सें चूसने लगे, फिन अपना लन्ड पूरा बाहर् निकाल कर ज़ोर केँ धक्कों केँ संगफिन अंदर पेलने लगे। फनलवर कि रचना।
हर धक्के केँ संग मेनका उनके लन्ड केँ टोपे कों अपनीकोख पे लगता महसूस कररही थि औऱ उसे इतनामजा आँ रहा थां कि पुछोमत। तभी राजासाहब नें वैसे हि उसकी मम्मों चूस्ते हुएफिन सें एक् ज़ोर कां धक्का मारा तोँ उसकी बुर नें पानीछोड़ दिया, वोँ उचककर अपने ससुरजी सें चिपक गयीँ, उनकाबदन भि झटके खानेलगा औऱ उसने उनके लन्ड सें च्छूटता पानी अपनी बुर मे भरता महसूस किया।
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दोस्तों आज केँ लिएबस यही तक फिन मिलेंगे एक् नए एपिसोड केँ संग।
तब तक केँ लिए Funlover कि ओर सें जय भारत.
9.
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
थोड़ी देर दोनो वैसे हि पड़ेरहे, फिन राजासाहब उसकेउपर सें उतरकर उसकीबगल मे लेटगये। मेनका भि करवट लेँ उनकी बाहों मे आँ गई, औऱ उनके सीने पऱ सररख दिया। राजासाहब उसकेबाल सहलारहे थें औऱ बीच-2 मे उसकेसर पर्र चूमरहे थें। मेनका उनके सीने केँ बालों मे उंगलिया फिरारही थि।
थोड़ी देरबाद मनेका उठकरबैठ गई,, उसका ध्यान अपनी मम्मों पर्र गय़ा जहाँ राजासाहब नें थोड़ी देर पहलेजम कर चूसा थां। अबवहा पऱ एक् बड़ा सां निशान पड़ गय़ा थां।
"क्याँ देखरही हौ?" राजासाहब नें लेते-2 हि पूछा।
"आपकी कारस्तानी। " मेनका बनावटी गुस्से सें बोलि।
"अबयहऐसी हसीन होंगी तोँ कारस्तानी तौ ऐसी हि होगी। " राजासाहब उठकरउस स्थान पऱ हाथ फिराते हुए बोले।
"आप् भि नाँ!", मेनका नें उनकाहाथ एक् तरफकर दिया।
"यह क्याँ आप्-आप् लगारखा हैं। आज सें तुम् हमे सिर्फ़ तुम् कहकर पुकरोगी। " राजासाहब नें उसेफिन अपनी बाहों मे भर लिया।
"आज क्याँ हौ गय़ा हैं आपको, यह।। "
"-.फिन आप्! तुम् बोलो। "
मेनका केँ गाललाल होँ गये, "प्लीज़ क्यूसता रहे हें?"
"क्यूसता रहे हौ? तुम्हे हमारी शपथचलो ऐसेबोल कर दिखाओ। "
"यह बात-बात पे अपनीशपथ क्यू देते हैं?"
"फिन आप्। "
"अच्छा बाबा! तुम्.क्याँ तुम् बात-2 पर्र शपथ देने लगते होँ?"
"होँ गय़ा। अब नहीं देंगे। "
दोनोहंस पड़े।,
"यह कारस्तानी पसन्द आई?", उन्होने उस निशान कों सहलाते हुए पूछा। जवाब नें मेनका नें मुस्कुराते हुएहां मे सर हिला दिया।
"तब हम् आपको एक् औऱ कारस्तानी दिखाते हें। ", राजासाहब उठे औऱ मेनका केँ कुछ बोलने सें पहले अपने वॉक-इन क्लॉज़ेट खोल उसके अंदरचले गये। थोड़ी देरबाद बाहर् आए तोँ उनकेहाथ मे 2 डब्बे थें।
वोँ मेनका केँ पासआकर बैठ गये। एक् डब्बा उसको दिया, "खोलो। "
मेनका नें डब्बा खोला तोँ उसकी आँखें चौंधिया गई,, अंदर हीरो कां एक् बहोत बेशक़ीमती जड़औहार जगमगा रहा थां।
"यह मेनकासिंग केँ लिए हैं जिसके इनवॅल्युवबल कॉंट्रिब्यूशन केँ बदौलत राजकुल ग्रूप डीलकर पाया। "
"पऱ इतने कीमती तोहफे कि क्याँ ज़रूरत थि?"
"यह तुमसे किमती नहीं हैं। ", राजासाहब नें हारउठा कर उसकेगले मे पहना दिया।,
"अब यह दूसरा डिब्बा खोलो। "
उसको खोलते हि अंदर सें एक् गोल्ड सुकून निकली जिसमे एक् हीरे कां पेंडेंट लटका थां। पेंडेंट मे हीरे सें 'एम'बना थां औऱ 'एम' केँ बीच केँ 'वी' सें एक् सीधी लाइन नीचे निकलकर 'Y' बनारही थि। जब तक कोई बहोत गौर सें नहीं देखता तोँ उसेकभी नहींपता चलता कि पेंडेंट मे दोनो लेटर्स एम औऱ Y हें। दूर सें तौ बस लगता थां जैसे कि एमबना हैं।
"औऱ यह हमारी जान केँ लिएउसे हमारे प्रेम कां पहला तोहफा। ", औऱ वोँ सुकून भि उसकेगले मे डाल दि।
मेनका कि आँखो मे खुशी केँ आँसूभर आए औऱ वोँ आगेबढ़ कर अपने ससुरजी केँ गलेलग गयीँ, औऱ सुबकने लगी।
"अरे क्याँ हुआ?"
"घबराईए मत। -आइमीन घबराव मत, यह खुशी केँ आँसू हें। ", राजासाहब हंसते हुए उसकीपीठ पऱ प्रेम सें हाथ फेरने लगे।
"हमने भि तुम्हारे लिएकुछ लिया हैं। हमारे कमरे मे रखा हैं। बस अभि लेकरआते हें। "
"बाद मे लेँ आईएगा। पहले आपकोकुछ औऱ भि दिखना हैं-कुछ बहोत ज़रूरी बातें बतानी हें। आइए। ", राजासाहब खड़े होँ गये औऱ अपनाहाथ उसकीओर बढ़ा दिया। मेनका उनकाहाथ पकड़ खड़ी हौ गई, औऱ राजासाहब अपने कमरे केँ एक् कोने मे बनेउस दरवाज़े कि तरफ बढ़ने लगे जिसके पीछे उनकी स्टडी थि।
आपको राजासाहब कि स्टडी केँ बारे मे कुछबता दू। यू तौ महल केँ कर्मचारी साफ़-सफाई औऱ बाकी कामो केँ लिए कहीं भि आते जाते हें पर्र राजपारियर केँ लोगों केँ कमरो मे बस उनकेखास नौकर-नौकरानी हि आँ-जा सकते थें।
पऱ यह स्टडी जौ कि राजासाहब केँ बेडरूम केँ अंदर हि बनी हुई थि, उसमे उनके अलावा किसी कों भि जाने कि इजाज़त नहीं थि। यहा तक कि उनके अपने बेटे भि उन्हे वहा डिस्टर्ब नहीं करते थें। कोईकाम पड़ता औऱ राजासाहब स्टडी केँ अंदर हौ तौ बस इंटरकम पे उनकोखबर कि जाती।
जब राजासाहब बाहर् होते तौ स्टडी मे तालालगा होता औऱ एकमात्र चाभी राजासाहब केँ पास होती। मेनका कों भि इन नियमो केँ बारे मे पता थां औऱ इसीलिए उसेआज बड़ी हैरत होँ रही थि कि राजासाहब उसेवहा लेँ जारहे हें।
जानां नहीं अभि औऱ भि हैं आगे.
।। जय भारत।।
11.
bahut shandaar tarike say raja sahab ne menka ko choda. gajab chudai hu rahi h menka kee. lage hath menka kee gaand kaa bi opening karwa hi de raja sahab ke land say.
Raj Rajasahab ko malum h stri ko kese वश मे कर सकते हें. पहले जबरदस्त chudai औऱ फिन मंहगे gifts . यही कमज़ोरी होती हैं करीब-करीब हर महिला कि. चाहे वोँ राजकुमारी याँ महारानी हि Q नहि होँ
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
गतान्क सें आगे।।।।।।।।।।।।।।।।
राजासाहब नें चाभी सें द्वार (दरवाज़ा) खोला औऱ दोनो वैसे हि नंगे स्टडी केँ अंदर आँ गये। राजासाहब नें लाइट जलाई तोँ मेनका पूरी स्टडी कों ध्यान सें देखने लगी। चारों तरफ शेल्व्स मे ज़मीन सें छत तक किताबें भरी थि। बीच-बिच मे राजासाहब केँ पुरखों केँ पोरट्रेट्स लगे थें। कमरे केँ बीच मे एक् बड़ा स्टडी डेस्क थां औऱ उसके पीछे एक् लेदर-बॅक चेर।
राजासाहब कमरे केँ एक् कोने मे चलेगये। उस कोने मे बुक-शेल्फ मे सें वोँ किताबें निकालने लगे। मेनका हैरत सें देखरही थि औऱ समझने कि नाकाम कोशिश कररही थि। राजासाहब नें दस किताबें खिच-खीच कर निकाल दि। फिन मेनका कों इशारे सें बुलाया, मेनका वहा पहुँची तौ देखा कि उस खाली स्थान मे शेल्फ केँ पीछे कां लकड़ी कां हिस्सा दिखरहा थां। उसने सवालिया नज़रो सें अपने ससुरजी कि तरफ देखा। राजासाहब नें मुस्कुराते हुए अपनी स्टडी सें एक् पेन-नाइफ उठाई औऱ शेल्फ केँ उस पिछले हिस्से कि लकड़ी केँ दोनो सिरों पऱ जहा किताबें थि उपर सें नीचे तक फिराया औऱ वोँ लकड़ी कां बोर्ड गिर पड़ा। फनलवर कि रचना।
मेनका चौंक पड़ी तौ राजासाहब हंस पड़े, "यह लूज बोर्ड हैं औऱ यह देखो इसके पीछे क्याँ हैं। "
पीछे एक् छोटी-सि तिजोरी नज़र आँ रही थि। राजासाहब नें उसका कॉंबिनेशन लॉक खोला औऱ उसके अंदर सें एक् काग़ज़ों कां पुलिंदा निकाला। उस पुलिंदे कों लें कर राजासाहब मेनका कां हाथ पकड़कर डेस्क केँ पीचे लेदरबॅक चेर कि तरफचले गये। उस पर्र बैठकर उन्होने मेनका कि कमर मे अपना बायाहाथ डाला औऱ उसे अपनीगोद मे बिठा लिया। उसने भि अपनीदाई बाँह अपने ससुरजी केँ गले मे डाल दि।
"हम् जोँ आपको बताने जारहे हें उसेजान नें कां हक़ मात्र महल केँ राजा कों होता हैं। यह राजा कि मर्ज़ी हैं कि इसबात कों कब वोँ अपने सबसे बड़े बेटे, यानी कि भावी राजकुमार कों बताता हैं। हमने तौ सोचा थां कि डील फाइनल होते हि विश्वा कों बताएँगे पर्र हमारी बदक़िस्मती कि वोँ कमज़ोर निकला औऱ.यूधवीर तोँ हमे पहले हि छोड़कर जा चुका हैं। ", राजासाहब खामोश होँ गये।
मेनका नें भि बिनाकुछ बोलेबस उनके बालों मे हाथ फिराने लगी।
राजासाहब नें फिन कहना शुरुआत किया, "यह उससमय कि बात हैं जब रजवाड़े ख़तम हौ रहे थें औऱ सारी रियासतें हिन्दुस्तान मे मिलाई जाने वाली थि। हमारे पापा कों इसबात कि भनक काफ़ी पहलेलग गयीँ, औऱ वोँ समझगये कि अब हमारा वक्त सचमुच ख़तम होने वाला हैं। इस पूरे राज्य मे हमारी काफ़ी ज़मीन औऱ प्रॉपर्टी थि। इतनी जितनी कि कोईकभी सोच भि नहीं सकता। उन्होने आहिस्ता सारी प्रॉपर्टी कों इसतरह बेचा कि किसी कों ज़रा भि शक़ नहींहुआ। जब भारत सरकार नें उन्हे हिन्दुस्तान मे मिलने कों कहा तोँ वोँ झट सें राज़ी होँ गये। ", मेनका गौर सें उनकीबात सुनरही थि।
"पापा नें कुछ ज़मीन छोड़ दि थि औऱ उन्होने वोँ सारी ज़मीन औऱ प्रॉपर्टी सरकार कों दे दि। साराकुछ बेचने केँ बाद हुमारे पास जौ भि रकमआई वोँ सभी स्विस बॅंक मे जमाकरा दि गयीँ,। ", उन्होने एक् पेपर मेनका कि तरफ बढ़ाया, "इसमे वोँ अकाउंट नंबर औऱ उनके कोड्स हें जिन्हे बताने पर्र तुम्हे बॅंक अकाउंट ऑपरेट करने कि इजाज़त देता हैं। ", मेनका नें पेपर लेँ लिया पर्र वोँ अभि भि हैरत सें अपने ससुरजी कों देखरही थि।
"राजकुल ग्रूप केँ हरसाल केँ प्रॉफिट सें कुछ रुपया निकाल लिया जाता हैं जिसे कि अकाउंट्स बुक मे नहीं दिखाया जाता। अभि भि जोँ डील हुइ हैं उसमे भि 30 करोड़ हमेअलग सें मिले हें। यह सारा रुपया भि इन बाँक्स मे जमा हैं। ", उन्होने बाकी पेपर्स भि उसके हाथों मे देदिए, "यहउन प्रॉपर्टीस केँ पेपर्स हें जोँ हमनेबाद मे खरीदी हें। इनमे सें कोई भि हमारे नाम सें नहीं हैं। "
"इससमय तुम्हारे हाथों मे जौ काग़ज़ात हें, मेनका, उनकी कीमत जानती होँ कितनी हैं?", मेनका नें बस नां मे सर हिला दिया।
" 350 करोड़। " फनलवर कि रचनापढ़ रहे हैं।
"क्याँ?!!", मेनका कां मुँह हैरत सें खुल गय़ा।
"राजासाहब, आपने अपनेदेश सें पैसे चुराकर यहजमा किया हैं। ", उसने काग़ज़ अपने ससुरजी केँ हाथों मे रखदिए। "क्याँ फायदा हैं इस दौलत कां औऱ क्याँ करेंगे आप् इतनी दौलत कां? साडी बाहर् बॅंक मे पड़ी हैं याँ आपकेनाम सें नहीं हैं.औऱ अपनेदिल पे हाथरख केँ कहिए क्याँ आपकोसच मे इन पैसों कि ज़रूरत हैं?"
"मेनका, यह पैसे किसी बुरेदिन हमारे काम आँ सकते हें। "
"अगर बुरेदिन आएँगे तौ क्याँ गॅरेंटी हैं कि आपकेयह पैसे भि सलामत रहेंगे?"
"राजासाहब, हमारे पास वैसे हि बहोत दौलत हैं। इन पैसों कों तौ आपकोदान कर देना चाहिए थां। कम सें कम लोगों कि दुआ तोँ मिलती। ", मेनका चुप हौ गई,। राजासाहब नें सोचा नहीं थां कि वोँ इसतरह सें नाराज़ होँ जाएगी, पर्र क्याँ ग़लतकह रही थि। आज इतनी दौलत हैं पऱ उसे भोगने वालाकौन हैं। एक् बेटा मर चुका हैं औऱ दूसरा पता नहींकब वापस आएगा। राजासाहब सर झुकाए बैठेरहे औऱ मेनका भि वैसे हि खामोश उनकीगोद मे बैठीरही।
उन्होने उसकाहाथ अपने हाथों मे थाम लिया, "। हमनेयह सारीबात आपको इसलिये बताई थि क्योंकि हमे आप् पे जितना भरोसा होँ गय़ा हैं उतनाकभी किसी पे नहींहुआ। हमे नहींपता कि उपर वाले नें हमारी कितनी उम्र लिखी हैं। ", मेनका कुछ कहने कों हुईँ पऱ उन्होने अपनी उंगली उसके होठों पे रख दि, "। हमारे बादअगर कोई राजकुल कां ध्यान रख सकता हैं तौ वोँ मात्र आप् हें। "
"पऱ हम् आज आपको एक् वचन देते हें। अपने जीतेजी हम् यह सारा काला रुपया दानकर देंगे। " नीता औऱ मैत्री कि रचना।
"हमारा दिल दुखाने कां इरादा नहीं थां। ", मेनका कि आवाज़ थोड़ी भर्रा गई,।
"हमारा दिल पैसे कि बात सें दुखा भि नहीं। तुमने तोँ हमारी आँखेखोल दि। सच मे, क्याँ फ़ायदा हैं ऐसी दौलत कां जोँ किसीकाम हि नाँ आँ पाए। इसीलिए तौ आपकोवचन दिया हैं कि इसेदान कर देंगे। दिल तोँ हमारा दूसरी बात सें दुखा हैं। ", मेनका केँ चेहरे पर्र तकलीफ़ छा गई,, "क्याँ कह दिया हमने?प्लीज़ बताइए।। ", उसने उनके चेहरे कों हाथों मे लें लिया।
इस एपिसोड केँ बारे मे आपकीराय देना नाँ भूले.प्लीज़.
मिलते हैं अगलेभाग केँ संगतब तक केँ लिए विदा
Funlover.
।। जय भारत।।
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story - Next part miss mat karna
haan haan haan Vaise mto mere khayal say woh itne paisewali h kee use VP kee post utna attract nahee karegi. pr yah jurur h kee vah din mai bi raajasab k aaspaas rha sakegi. aabhar friend. Jude rahiye
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