खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
".मैने अपना ध्यान राजपुरा पऱ लगा दिया। मुझेपता चला कि कुंवर आदिवासियों केँ गाव महुआ कि शराब लेने जाते थें। औऱ यही क़िस्मत सें मेरेहाथ एक् बड़ा सुराग लग गय़ा। आदिवासियों नें बताया कि कुंवर केँ अलावा भि एक् शहरी व्यक्ति थां जोँ कि उनसे महुआ लें जाता थां। उन्होने एक् बारउसे वाहन मे बैठे कुंवर सें कुछ बाते करतेहुए भि देखा थां। जब मैने उसका हुलिया, नाम आदि पूचछा तोँ कुछखास नहींपता चला। "
अबआगे.
".फिन एक् दिन मे इसी सुराग केँ फॉलो-उप केँ लएउन आदिवासियों केँ पास गय़ा। वहा एक् आदिवासी जौ शहर मे जॉब करता थां, बैठा हुआ थां औऱ अपने कॅमरा फोन सें फोटोखिच रहा थां। मोबाइल मे कुछ प्राब्लम आई तोँ उसने मुझे दिखाया। देखा तोँ पाया कि मेमोरी फुल हैं। मैनेउसे कहा कि कुछ फोटोस डेलीट करनी पड़ेगी। "
".उसनेकहा कि वोँ बताता जाएगा औऱ मे फोटोस डेलीट करता जाऊं। फोटोस डेलीट करतेहुए मेरी नज़र एक् फोटो पर्र पड़ी। उसमे एक् गोरा-चट्टा शहरी थां। बाकी सारे फोटोउन आदिवासीयो केँ थें तोँ फिनयह शहरीकौन थां?" राजासाहब गौर सें मनीष कों सुनरहे थें।
".उस आदिवासी नें बताया कि यही वोँ व्यक्ति थां। औऱ यही वोँ फोटो हैं, सर। " मनीष नें अपना लॅपटॉप ऑनकर स्क्रीन राजासाहब कि तरफकर दि। फोटो मे 3 आदिवासी बैठेहंस रहे थें औऱ पीछे फोटो केँ कोने मे वोँ शहरी थां। राजासाहब केँ दिमाग़ मे उस इंसान कां चेहरा छप गय़ा।
"क्याँ गॅरेंटी हैं मनीष कि यही चुतिया इंसान ड्रग डीलर हैं?"
"यह राजासाहब। " मनीष नें एक् छोटा सां पॅकेट आगे बढ़ाया जिसमे एक् कॅप्सुल थां।
"यह एक् बार इसकीजेब सें गिर गय़ा थां औऱ महुआ बेचने वाले आदिवासी नें दवासमझ कर अपनेपास रख लिया थां औऱ फिनभूल गय़ा थां। इस व्यक्ति कि बात चलने पर्र उसेयाद आया तोँ मुझ सें इस'दवा' केँ बारे मे पुच्छने लगा। "
"वेल डन, मनीष। आइ एम प्राउड ऑफयू। " दुष्यंत वर्मा नें उसकीपीठ ठनकी। फनलव कि प्रस्तुति।
"मनीष, आपने कमाल कां काम किया हैं। हम् चाहते हें कि इस इंसान कों ढूँढने मे आप् हमारी सहायता करें। " राजासाहब नें उस सें हाथ मिलाया।
"सर, यह भि कोई कहने कि बात हैं। जब तक पता नां चलजाए मे भि सुकून सें नहीं बैठूँगा। "
".पर्र यशयह डोफाकौन हौ सकता हैं? वही जाबर कां मित्र?"
"पता नहीं, दुष्यंत समझ नहीं आँ रहा। जब्बार कां कहने कों तौ धंधा प्रॉपर्टी डीलिंग कां हैं पर्र असल मे डिस्प्यूटेड प्रॉपर्टीस कों बिकवाना, किसी कि प्रॉपर्टी पऱ ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा करउस सें पैसे ऐंठना यह उसकाअसल काम हैं, मशहूर हैं कि उसकीजेब मे एक् चाबियों कां गुच्छा हैं जिस सें कि दुनिया कां कोई भि तालाखुल सकता हैं। " राजासाहब नें ग्लास उठाकर पानी पिया। "
.पर्र भेन्चोद यह ड्रग्स.यह मेरी भि समझ मे नहीं आँ रहा। इस तस्वीर वाले व्यक्ति कों भि पहलीबार देखा हैं। पर्र मेरामन कहता हैं कि इस केँ तार जब्बार सें हि जुड़े हें। पऱ केसे?"
"यह मनीषपता लगा हि लेगा। तुम् चिंता छोडो। चलो कुछ खाते हें। "
रात केँ 1:30 बजरहे थें पऱ राजासाहब अभि तक नहींआए थें। साम 7 बजे मोबाइल आया थां कि वोँ खानां खाकर आएँगे पर्र किसी भि हाल मे एक् बजे तक आँ जाएँगे। मेनका एक् छ्होटा-सां वाइट केमिसोल जोँ कि बस उसकी पेंटी कों ढकेहुए थें, पहने बेचैनी सें अपने कमरे मे चहलकदमी कररही थि। अपनेफोन सें वोँ लगातार अपने ससुरजी कां फोन ट्राइ कररही थि पऱ बार-बार स्विच्ड ऑफ कां संदेश आँ रहा थां। क्लॉज़ेट कां मार्ग उसनेखोल दिया थां औऱ उसकी नज़रे बार-बार वहाजा रही थि।
तभी वाहन कि आवाज़ आई, राजासाहब लौटआए थें। नीचे सें नौकरों कों बाहर् कर द्वार (दरवाज़ा) बंद करने कि आवाज़ आई तोँ मेनका अपनेबैड पऱ चादरओढ़ करलेट गयीँ,। अपनीपीठ उसने क्लॉज़ेट कि तरफकर ली। वोँ गुस्से मे पागल हौ रही थि।
थोड़ी देरबाद राजासाहब क्लॉज़ेट केँ रास्ते उसके कमरे मे दाखिल हुए, वोँ पूरे नंगे थें। राजासाहब नें चादर उठाई औऱ लेटकर मेनका कों पीछे सें अपनी बाहों मे जाकड़ लिए।,
"जाओ, मुझे सोने दो। "मेनका नें उनकाहाथ हटा दिया।
"क्याँ हौ गय़ा?"
"कुछ नहीं। हमे नींद आँ रही हैं। "
"नहीं तुम् नाराज़ होँ। क्याँ ग़लती हौ गई, भइया?"उन्होने फिनउसे जाकड़ लिया औऱ पीछे सें अपना नंगा शरीर उसकीपीठ औऱ गांड सें चिपका दिया।
"एक् तोँ इतनीदेर कर दि, उपर सें मोबाइल भि नहींउठा रहे थें औऱ पूछते होँ क्याँ ग़लती कि!"
"मोबाइल डिसचार्ज हौ गय़ा थां औऱ कहा थां नाँ कि ज़रूरी काम थां, उसी मे देर हौ गई,। अब क्रोध छोडो औऱ प्रेम करो। " उनका दायाहाथ उसकी पेंटी मे घुस गय़ा औऱ बाया उसकी गर्दन केँ नीचे आँ गय़ा औऱ वही सें उसकी चूचिया दबाने लगा।
अपनी गांड पे अपने ससुरजी कां लन्ड महसूस करते हि मेनका नें अपनाहाथ पीछे लें जाकरउसे पकड़ लिया औऱ हिलाने लगी। "क्याँ प्रीकम थां.आन्न.न्न्न्ह्ह्ह्ह्ह?" राजासाहब कि उंगलिया उसके बुर केँ दाने कों रगड़रही थि।
"वक्त आएगा तौ सभी बताएँगे, मेनका। अभि बसहमे प्रेम करो। " राजासाहब नें उसका चेहरा अपनीतरफ घुमाया औऱ दोनो एक्-दूसरे कों जमकर चूमने लगे। मेनका एक् बारझड़ चुकी थि। राजासाहब नें उसका केमिसोल औऱ पेंटी उसके शरीर सें अलगकिए औऱ पीछे सें करवटलिए हुए हि अपना लन्ड उसकी बुर मे डाल दिया औऱ उसकीपीठ सें चिपककर धक्के मारने लगे। उनका लन्ड मेनका केँ जी- स्पॉट सें रगड़खा रहा थां औऱ वोँ दुबारा झड़ गई,, इसबार उसकी बुर नें बहुत चुतरस छोड़ा।
राजासाहब नें बिना उसकी बुर सें लन्ड निकाले उसे घुटनो केँ बल उल्टा खड़ाकर दिया। मेनका कां सर तकिये मे धंसाहुआ थां औऱ गांडहवा मे उठी हुइ थि। उसके ससुरजी कां लन्ड जड़ तक उसकी बुर मे डूबाहुआ थां औऱ उनकेहाथ उसकी गांड औऱ चूचियो कों मसलरहे थें। राजासाहब नें उसेइसी पोज़िशन मे चोदना शुरुआत कर दिया, मेनका मस्ती मे झूमरही थि।
डॉगी स्टाइल मे चोद्ते-चोदते राजासाहब नें ऐसे ज़ोरदार धक्के मारे कि मेनका खाट पऱ पेट केँ बलगिर पड़ी। राजासाहब भि धक्के रोके बिना उसकेउपर लेटगये, अपनेहाथ उसके नीचे लेँ जाकर उसकी चूचियाँ दबाने लगे औऱ लगे अपनीबहू कि चुदाई करने। मेनका नें अपनासर उठाकर पीछे घुमाया तोँ राजासाहब नें अपनेहोठ उसके होठों सें लगादिए।
दोनो एक्-दूसरे कों चूमते हुए चुदाई कररहे थें। मेनका नें अपनीकमर हिलाना शुरुआत कर दिया औऱ अपने ससुरजी केँ होठों कों कस लिया, वोँ झड़ गई, थि औऱ तभी राजासाहब नें भि उसकी चूचियो पे अपनी पकड़ बहोत मज़बूत कर दि औऱ एक्-एक् धक्के लगाकर उसकी बुर मे अपना पानीछोड़ दिया।
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इस एपिसोड केँ बारे मे आपकीराय देना नाँ भूले.प्लीज़.
मिलते हैं अगलेभाग केँ संगतब तक केँ लिए विदा
।। जय भारत।।
haan haan haan. Yah baat sab jaante h phir bi loug paagal bante hi h ya ban ne k liye taiyaar bi hote h. Vaise malika kaisi h vah pilot ko ptaa nahee, ap jaante h woh nahee. aabhar friend. Jude rahiye.
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
"एक्सक्यूस मी.मेराड्रिंक। " वोँ छोटा-सां ब्लॅक ड्रेस पहने लड़की बारटेंडर कों अपना ऑर्डर देने कि कोशिश कररही थि पर्र इस भीड़ औऱ हंगामा मे उसका ध्यान उस लड़की कि तरफजा हि नहींरहा थां। माजिद सुलेमान कि नज़रे उस लड़की केँ ड्रेस सें झाँकती गोरी टाँगों औऱ जांघों केँ हिस्से कों ताड़रही थि।
"यह लीजिए अपनी ड्रिंक। " उसने भीड़ मे सें हाथ बढ़ाकर बारटेंडर सें एक् ग्लास लिया औऱ उस लड़की कों पकड़ाया।
"थेंकयु। " माजिद नें डिस्को लाइट्स मे उस लड़की कां चेहरा देखा-बला कि सुंदर थि औऱ ड्रेस केँ गले मे सें झाँकता उसका क्लीवेज.ओह!
"मुझे माजिद कहते हें। "
"हाई!आइ'म रोमा। " उसने माजिद सें हाथ मिलाया।
"आप् अकेली आईयहा?"
"नहीं। अपनी सहेली औऱ उसके बॉयफ्रेंड केँ संगआई थि। पता नहीं दोनोकहा गायब होँ गये। "
"आप् अपने बॉयफ्रेंड केँ संग नहींआई?"
"मेरा ब्रेक-अप हौ गय़ा हैं। "
"ओह्हआइ'म सॉरी। "
"नो यू शुडन’ट बी। आइ'म नोट। उसने मुझे किसीओर केँ लिएछोड़ दिया। "
"ओह। वोँ शर्तिया बेवकूफ़ इंसान होगा जिसने आपके जैसी हसीन लड़की कों छोड़ दिया। तोँ आप् फिन सें सिंगल हें?"
"तारीफ केँ लिए धन्यवाद। जी हा, मे सिंगल हू। औऱ आप्?"
""मे भि। "
"आप् क्याँ करते हें?"
"मे टॅक्सी-ड्राइवर हू। "
"जी?!"
"जी। मे एक् चार्टर एरक्रॅफ्ट कंपनी मे पाइलट हू। जोँ लोग प्लेन्स हाइयर करते हें उन्हे उनकी मंज़िल तक पहुचाता हू। "
"ओह्ह। " दोनो हँसने लगे। “आप् बहोत मज़किया हें, मिस्टर माजिद?"
"प्लीज़ नो मिस्टर औऱ नो आप्। "
"ओक। तोँ तुम् पाइलट हौ। कितना एग्ज़ाइटिंग काम हैं। बहोत मजाआता होगा नां प्लेन उड़ाने मे। “
औऱ ऐसी हि बातों सें रोमा उर्फ मलिका नें उस पाइलट कों शीशे मे उतारना शुरुआत कर दिया।
थोड़ी देरबाद होटेल केँ एक् कमरे मे माजिद नंगा लेटा थां औऱ उसका लन्ड उसकेउपर बैठी मलिका कि बुर मे थां। मलिका उसकेउपर झुककर अपनेबाए हाथ सें पकड़कर अपनीबाई मम्मों माजिद केँ मुँह मे देरही थि औऱ माजिद केँ हाथ उसकीपीठ पर्र फिसलरहे थें। थोड़ी देरबाद उसनेबाई निकाली औऱ दाई मम्मों उसके मुँह मे डाल दि। माजिद नें ऐसी सुंदर लड़की पहलेकभी नहीं चोदि थि औऱ उसकेलिए अब अपना पानी रोकना मुश्किल हौ रहा थां। उसने अपनीकमर हिलाकर धक्के मारना शुरुआत किया तोँ मलिका उठकरबैठ गयीँ, औऱ कमर हिला-हिला करउसे चोदने लगी।
मलिका नें अपनेहाथ अपने बालों मे फिराने शुरुआत करदिए, माजिद कि तोँ हालत बुरी हौ गई,। उसने अपने हाथों सें उसकी चूचिया मसलनी चालूकर दि औऱ ज़ोर-जोर सें कमर हिलाते हुए उसकी बुर मे झड़ गय़ा। मलिका नहीं झड़ी थि पर्र जैसे हि उसने माजिद कां पानी अपनी बुर मे महसूस किया वोँ झुककर उस सें चिपक गई, औऱ झड़ने कि एक्टिंग करनेलगी।
मलिका उसकेउपर सें उतरकर उसकीबगल मे लेट गयीँ,। माजिद उसे बाँह मे घेरकर उसकापेट सहलाने लगा।
"माजिद!"
"ह्म्म!"
"तुम्हारे प्लेन मे काफ़ी माशूर लोग भि आते होंगे नाँ?"
"हुउँ। " माजिद झुककर उसकी चूचिया चूसने लगा।
"कौन-कौन बैठा हैं तुम्हारे प्लेन मे?"
"राहुल द्रविड़, जॉन अब्राहम, प्रिटी ज़िंटा, सानिया मिर्ज़ा। " उसने चूसना छोड़उन चूचियो कों फिन सें दबाना चालूकर दिया।
"रियली! औऱ?" मलिका नें उसका लन्ड अपनेहाथ मे लें लिया।
"औऱ.कुछ पॉलिटिशियन्स। "
"औऱ बिज़नेसमॅन?" वोँ अब लन्ड हिलाकर उसे दुबारा खड़ाकर रही थि।
"हा.जिंदल स्टील कां मालिक आया थां एक् बार। औऱ अपने राजकुल केँ राजासाहब कों तौ मे हमेशा लें जाताहू। "
"सच मे? राजासाहब कों भि! अरेवाह! कही तुम् मुझेबना तोँ नहींरहे माजिद?"
"अरे नहीं, मेरी जान, तुम्हे पता हैं मे हरबार उनकी फ्लाइट पाइलट करताहू। " वोँ इस लड़की कों इंप्रेस करने कां मौका नहीं छोड़ना चाहता थां। "औऱ तुम्हे पता हैं कि उनका बेटा.-"
"-वोँ जोँ ड्रग अडिक्ट होँ गय़ा हैं?"
"हा, औऱ जिसके बारे मे कोई नहीं जानता कि वोँ कहा गय़ा हैं। " उसने मलिका कों लिटा दिया औऱ अपनी उंगली उसकी बुर मे डाल दि।, "पर्र मे जानता हू। "
"!!अच्छा!!", मलिका नें आँखेबंद करऐसे जताया जैसेउसे बहोत मजा आँ रहा थां जबकि हक़ीक़त मे उसका पूरा ध्यान माजिद कि बातों पर्र थां। उसने ड्रीम्स मे भि नहीं सोचा थां कि बिना राजा कां नामलिए वोँ उसेयह सभी बताने लगेगा।
"हा। राजासाहब कां बेटा बॅंगलुर मे हैं किसी डॉक्टर पूरी नहीं पूर्वे.हा यादआया डॉक्टर पुरन्दारे केँ क्लिनिक मे। "
मलिका कां काम होँ गय़ा थां। उसने माजिद कों अपनेउपर खीच लिया जोकि अपना लन्ड उसकी बुर मे घुसाने लगा।
थोड़ी देरबाद माजिद कों गहरी नींद मे सोताछोड़ मलिका लिफ्ट सें नीचे होटेल केँ एग्ज़िट कि तरफजा रही थि। माजिद बेचारे कों पता भि नहीं थां कि उसने कितनी बड़ी ग़लती कर दि थि।
मलिका कि बुर मे आगलगी थि। माजिद उसे ज़रा भि शांत नहींकर पाया थां। घऱ पहुँच कर जैसे हि उसने जब्बार कों सारीबात बताई वोँ खुशी सें पागल हौ गय़ा औऱ उसे खींचकर अपनी बाहों मे भर चूमने लगा। यही तोँ मलिका चाहती थि। उसने भि एक् हाथ सें उसका लन्ड पकड़ लिया औऱ दूसरे सें अपने कपड़े उतारने लगी।
जब्बार अपने दोनो साथियों केँ संग बॅंगलुर जाने कि तैयारी करनेलगा,
"हम् तीनो अलग-अलग बॅंगलुर पहुँचेंगे औऱ इस होटेल केँ रेस्टोरेंट मे मिलेंगे। " उसने मिलने कां दिन औऱ वक़्त भि दोनो कों बताया।
"यहा सें हम् मे सें कोई भि सीधे बॅंगलुर नहीं जाएगा। हम् सभीयहा सें 3 अलग-अलग शहरों कों जाएँगे औऱ वहा सें बॅंगलुर जाएँगे औऱ कोई भि अपनासही नाम इस्तेमाल नहीं करेगा। "
"वहा पहुँच तोँ जाएँगे पऱ विश्वजीत कों रिहेब सेंटर सें केसे निकालेंगे?" यह प्रश्न कल्लन नें पूछा।
"वहा पहुँच कर हम् सेंटर केँ बारे मे सारी जानकारी जुटाएँगे औऱ फिन मे आगे कां प्लान बनाऊंगा। फिलहाल तोँ मे हम् सभी केँ ट्रॅवेल प्लॅन्स अरेंज करताहू। " जब्बार फ्लॅट सें बाहर् निकल गय़ा।
उसके निकलते हि मलिका दौड़कर खड़ेहुए कल्लन कि गोद मे चढ़ गयीँ,, अपनी टांगो सें उसने उसकीकमर जकड़ली औऱ उसे चूमने लगी। कल्लन केँ हाथों नें उसकी गांड कों थाम लिया। मलिका मात्र एक् टी-शर्ट पहने थि। कल्लन नें उसे एक् दीवार सें चिपका दिया औऱ एक् हाथ सें उसकोथाम कर दूसरे सें अपनी पॅंटखोल अपना लन्ड निकाल लिया।
उसने खड़े-खड़े हि अपना लन्ड मलिका कि बुर मे उतार दिया औऱ उसे दीवार सें लगाकर धक्के मारने लगा। मलिका अपनीजीभ सें उसकेकान कों चाटने लगी औऱ उसके बड़े लन्ड कां मजा उठाने लगी।
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अभि तक केँ लिए इतना हि फिन मिलेंगे एक् नए एपिसोड केँ संग.
आप् सें गुजारिश हैं कि आप् कोमेंट मे अपनीराय दे.
Funlove.
जय भारत.
14.
choot k chakkar mai insan pagal hu jata h. jaesa kee yeh pilot. itni chudi huyi choot ke chakkar mai poll khol di raja ke ladke kee.
खेल ससुरजी बहु कां | incest indian sex story – New Episode
उसके निकलते हि मलिका दौड़कर खड़ेहुए कल्लन कि गोद मे चढ़ गयीँ,, अपनी टांगो सें उसने उसकीकमर जकड़ली औऱ उसे चूमने लगी। कल्लन केँ हाथों नें उसकी गांड कों थाम लिया। मलिका सिर्फ एक् टी-शर्ट पहने थि। कल्लन नें उसे एक् दीवार सें चिपका दिया औऱ एक् हाथ सें उसकोथाम कर दूसरे सें अपनी पॅंटखोल अपना लन्ड निकाल लिया।
उसने खड़े-खड़े हि अपना लन्ड मलिका कि बुर मे उतार दिया औऱ उसे दीवार सें लगाकर धक्के मारने लगा। मलिका अपनीजीभ सें उसकेकान कों चाटने लगी औऱ उसके बड़े लन्ड कां मजा उठाने लगी।
अब आगे.
सवेरे थोड़ी देर सें मेनका कि आँख खुली। कल राजासाहब नें उसेकुछ ज्यादा हि जमकर चोदा थां। उसेमजा तौ बहोत आया थां पर्र उतनी हि थकान भि हौ गई, थि। उसकी बुर आजकुछ अधिक हि दर्दकर रही थि। वो थोड़ी मुस्कुराई औऱ अपने आप् सें कहनेलगी कि ये तौ होना हि थां जब तुम्हे चुदने कां इतनाशौक हैं औऱ वोँ भि मुसल लन्ड सें।
उसने सोचा कि आज ऑफीस नां जाए पऱ फिनलगा कि कल हि तौ उसे वी-पी बनाया गय़ा हैं औऱ आज पहलेदिन हि ग़ैरहाज़िर रहे, यह अच्छा नहीं लगेगा। फिनआज सॅटर्डे थां, तोँ ऑफीसआधे दिन मे हि ख़तम होँ जानां थां।
मेनका तैयार होकर नीचेआई तोँ पताचला कि राजासाहब पहले हि ऑफीसजा चुके हें तौ वोँ भि फटाफट ब्रेकफास्ट कर ऑफीस पहुँच गयीँ,। आज राजासाहब नें ऑफीस मे कल वाली हरकत नहीं दोहराई तौ उसने राहत कि साँसली पर्र संग हि संग थोडा उदास भि हुई। पर्र फिनआने वालीरात कां ख़याल आते हि उसके होठों पर्र मुस्कान औऱ बुर मे गीलापन आँ गय़ा।
साम 4 बजे राजासाहब नें उस सें ऑफीस सें चलने कों कहा। दोनो गाड़ी मे बैठगये औऱ राजासाहब नें ड्राइविंग शुरुआत कर दि।
"अरे, यह किधरजा रहे होँ? यह मार्ग तोँ घऱ नहीं जाता। "
"हा, हम् घऱजा भि नहींरहे। "
"तौ फिनकहा जारहे हें?" मेनका खिसककर अपने ससुरजी सें सॅटकर बैठ गयीँ,।
"वोँ तौ पहुँच कर हि पता चलेगा। " उन्होने भि उसे अपनी बाँह मे समेट लिया।
"हम् रात तक वापस तोँ आँ जाएँगे नां?"
"अब तोँ हम् कलसाम कों हि लौटेंगे। "
"ओह। पऱ हमे कपड़े तोँ लें लेने लेतेघऱ सें। "
"जहा हम् जा रहें हैं वाहा कपड़ों कि कोई ज़रूरत नहीं हैं मेरीजान। " राजासाहब नें उसकेगाल पर्र चूम लिया।
"हटो। मे बिना कपड़ों केँ नहीं रहूंगी। " मेनका बनावटी गुस्से सें बोलि।
"वोँ तौ हम् पहुँच कर देखेंगे। " उन्होने इसबार उसकेहोठ चूमलिए।
लगभग 3 घंटे केँ बाद वोँ शहर कों पार करतेहुए अपनी मंज़िल पऱ पहुँच गये। वोँ एक् बड़ा-सां फार्महाउस थां जिसके अगल-बगल औऱ कोई बिल्डिंग नहीं थि। सबसेपास वाला फार्म हाउस भि 1/2 किलोमीटर दूर थां। राजासाहब नें वाहन सें उतरकर गेट पे लटकरहा ताला खोला, गाड़ी अंदर कि औऱ गेट वापसलॉक कर दिया।
मेनका उतरकर अपने ससुरजी कां हाथ थामे फार्महाउस कों घूमकर देखने लगी। पीछे एक् बड़ा स्विमिंग पूल थां औऱ चारोतरफ हरीघास बिछि थि। फार्म हाउस कि बिल्डिंग बहोत आलीशान थि। रसोई मे खाने कां सारा समान मौजूद थां।
"यह सारा इंतेज़ाम, यहा कि देख-रेख कौन करता हैं?"
"केअरटेकर हैं। पर्र हमनेउसे 2 दिन कि छुट्टी दे दि हैं। अभि यहा हम् दोनो केँ अलावा कोई भि नहीं हैं। " राजासाहब उसे बाहों मे पकड़ने केँ लिएआगे बढ़े तोँ मेनका छितककर दूर होँ गयीँ,।
"पहलेकुछ खा लें। "
मेनका नें खानां निकाला तोँ राजासाहब नें उसे खींचकर अपनीगोद मे बिठा लिया औऱ दोनो वैसे हि खानेलगे। मेनका कि बड़ी गांड कां दबाव पड़ते हि राजासाहब कां लन्ड खड़ा हौ गय़ा औऱ मेनका उसकी चुभन अपनी गांड पे महसूस करनेलगी। खानां ख़तम होते-होते दोनो गर्म होँ चुके थें।
राजासाहब नें गोद मे बैठी अपनीबहू कों चूमना शुरुआत कर दिया। उनकेहाथ उसकीकमर औऱ गांड कों सहलारहे थें। मेनका भि उनकीकिस कां पूरा जवाब देतेहुए अपनी गांड सें उनके लन्ड कों रगड़रही थि। राजासाहब नें अपनाहाथ कमर सें हटा उसके ब्लाउस मे डाल दिया तोँ मेनका भि उनके शर्ट केँ बटन खोलने लगी। दोनो जल्द सें उठ खड़ेहुए औऱ एक् दूसरे केँ कपड़े उतारने लगे।
नंगे होते हि दोनो एक् दूसरे केँ गलेलग गये औऱ चूमने लगे। राजासाहब नें अपनीबहू कि भारी-भरी गांड कों जम केँ सहलाया औऱ मसला। फिन मेनका उनके होठों कों छोड़ उनके सीने कों चूमते हुए नीचे उनके लन्ड तक आँ गई, औऱ अपने घुटनो पे बैठउसे चूसने लगी। उनके अंडो कों अपने कोमल हाथों मे दबाकर जब लन्ड कों उसने ज़ोर सें चूसा तोँ राजासाहब कि अहह निकल गई,।
उन्हों नें उसे अपनीगोद मे उठा लिया औऱ ड्रॉयिंग रूम मे आँ गये। वहा उन्होने मेनका कों सोफे पे लिटा दिया औऱ उसकेपेट कों चूमने लगे। अपनी उंगली सें उन्होने उसकी बुर कों कुरेदना चालूकर दिया।
"ऊहह!", मेनका कि मस्त आंहे सें फार्महाउस कां वीराना भि गुलज़ार हौ गय़ा। राजासाहब कां चेहरा उसकी बुर पे झुक गय़ा औऱ वोँ उसके बुर केँ दाने कों अपनीजीभ सें चाटने लगे। मेनका पागलों कि तरह अपनीकमर उचकाने लगी औऱ झड़ गई,। राजासाहब नें उसकी बुर सें छूटेहुए सारे पानी कों पी लिया।
फिन राजासाहब उठकर उसकेसर केँ पीछे खड़े हौ गये, मेनका नें उनके लन्ड कों अपनी आँखों केँ सामने देखा तौ हाथ पीछे लेँ जा केँ उसने उनकी गांड कों पकड़ लिया औऱ अपनासर पीछेकर केँ उनका लन्ड एक् बारफिन अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी। राजासाहब नें हाथ नीचे लेँ जाकर उसके बोबले कों दबाना औऱ निपल्स कों मसलना शुरुआत कर दिया।
तभी राजासाहब कों कुछ ख़याल आया, उन्होने अपने लन्ड कों मेनका केँ मुँह सें निकाल लिया औऱ भागते हुए रसोई कि तरफचले गये। मेनका कों हैरत हुई पर्र जब तक वोँ उठती राजासाहब वापस आँ गये थें। उनकेहाथ मे एक् बोल थां। राजासाहब उसकेपास बैठगये औऱ बोल मे रखी चीज़ चम्चे सें उसकी चूचियो पे डालने लगे।
"ऊओ!", सीने पे ठंडा गीलापन महसूस हुआ तोँ मेनका कि आँ निकल गई,। उसने देखा राजासाहब उसकी चूचियों कों आइसक्रीम सें ढँकरहे थें। राजासाहब नें बोल किनारे रखा औऱ टूट पड़े अपनीबहू कि आइसक्रीम सें सराबोर चूचियों पर्र। मेनका तोँ पागल होँ गई,। राजासाहब नें चाट-चाट कर उसके सीने कों साफ़ किया औऱ फिन पहले उसकी नाभि कों आइसक्रीम सें भरा औऱ फिन अपनीजीभ सें साफ़ किया।
अब उसकी बुर कि बारी थि। राजासाहब नें वहा भि आइसक्रीम लगाई औऱ फिन चाट-चाट करसाफ़ किया। अपने ससुरजी कि आइसक्रीम चाटती जीभ सें मेनका दोबार झड़ गयीँ,। अब उसकी बारी थि, वोँ उठी औऱ पकड़कर अपने ससुरजी कों सोफे पे बिठा दिया औऱ बोल सें आइसक्रीम निकाल कर उनके लन्ड औऱ अंडो पे लगा दिया। फिन लगी अपनीजीभ सें वहा पे चाटने। सोफे पे टांगे लटकाए बैठे राजासाहब केँ मज़े कां ठिकाना नहीं थां। जैसे हि मेनका नें आइस-क्रीम कि आखरी बूँद कों चाटकर साफ़ किया, उन्होने उसेउठा कर सोफे पे बैठे-बैठे अपनीगोद मे अपने लन्ड पे बिठा लिया।
अब दोनो एक् दूसरे कि आँखो मे झाँकरहे थें, मेनका कि बुर राजासाहब केँ लन्ड सें लोंक हौ गई थि औऱ उसके हाथों मे उनका चेहरा थां जिसे वोँ चूमरही थि। राजासाहब भि उसके शरीर कों अपनी बाहों मे कसेहुए उसकीपीठ औऱ गांड सें खेलरहे थें।
मेनका नें अपने ससुरजी कों चूमते हुए अपनीकमर हिलाकर उन्हे चोदना शुरुआत कर दिया। राजासाहब कां लन्ड उसकीकोख पऱ चोटकर रहा थां औऱ उसकी बुर मे तोँ जैसे सैलाब आँ गय़ा थां-पानी थां कि छूटे हि जारहा थां।
उसने अपने ससुरजी केँ सर कों पकड़कर अपनी चूचियो पऱ झुका दिया। राजासाहब भि उसकी चूचियो कों चूसने लगे। उसकी चूचिया तौ अब पूरीतरह सें उनके होंठो केँ निशान सें भर गयीँ, थि। राजासाहब केँ भि अंडो मे अब मीठा दर्द होनेलगा थां। उन्होने अपनीबहू कि गांड कों दबोच लिया औऱ उसके निपल कों चूस्ते हुए नीचे सें बैठे-बैठे ऐसे धक्के मार केँ अपना पानी छोड़ा कि मेनका एक् बारफिन उनकेसंग झड़ गई,।
झड़ने केँ बाद दोनो वैसे हि बैठे एक् दूसरे कों चूमते रहे, "यह फार्महाउस तुम्हारा हैं?"
"नहीं, हमारा हैं। "उनका इशारा मेनका औऱ अपनीतरफ थां। मेनका नें नीचे देखा तौ लन्ड झड़ने केँ बाद सिकुड़ने केँ बावजूद उसकी बुर मे ऐसे पड़ा थां जैसे कि अभि भि खड़ा हौ। उसने अपनी बुर कों हल्के सें हिलाना शुरुआत किया।
"यह उन्ही प्रॉपर्टीस मे सें एक् हैं जिनके पेपर्स स्टडी मे हें। "
"तुम् तौ यहसभी दान करने वाले हौ नाँ। "
"हा, बिल्कुल। पर्र सोचते हें कि इस फार्म हाउस कों अपनेनाम कर लेँ औऱ इसे अपने प्रेम कां आशियाना बना लेँ। क्याँ कहती हौ?"
जवाब मे मेनका नें मुस्करा कर उनकेहोठ चूमलिए। उसकी बुर कि हरकतों सें राजासाहब कां लन्ड फिन सें गर्म हौ गय़ा। वोँ वैसे हि उसकी बुर मे लन्ड डालेहुए खड़े हौ गये औऱ फार्महाउस केँ बेडरूम कि तरफबढ़ गये।
बेडरूम मे दाखिल होते हि मेनका चौंक गयीँ,। पूरारूम जैसे सुहागरात केँ लिए सज़ाहुआ थां। कमरे मे चारोतरफ फूल हि फूलभरे थें औऱ बीचोबीच रखे बड़े सें बिस्तर पर्र लाल गुलाब कि पंखुड़िया बिखरी हुइ थि।
उसने राजासाहब कि तरफ सवालिया नज़रो सें देखा।, "हमने केर टेकर कों कहा कि हमारा कोई जान-पहचान वाला अपनीनयी दुल्हन कों लेकरयहा आएगा औऱ एक् रात ठहरेगा तौ उनकेलिए उसनेयह सजावट कि औऱ इसी बहाने हमनेउसे छुट्टी भि दे दि कि वोँ जोड़ा नहीं चाहता कि कोई उन्हे डिस्टर्ब करे। "
मेनका कों लिएदिए राजासाहब खाट पर्र लेटगये औऱ लगेफिन सें उसे चोदने लगे। थोड़ी देर तक मेनका उनके नीचे पड़ी चुदती रही, फिन उसने उन्हे पकड़े हुए करवट लें उन्हे अपने नीचे किया औऱ उपर सें कमर हिला-हिला कर चोदने लगी। उसकी भारी चूचिया उसके ससुरजी केँ बालों भरे सीने पे रगड़खा रही थि औऱ होठ उनके होठों सें सटे थें।
थोड़ी देर दोनोऐसे हि चुदाई करतेरहे कि फिन राजासाहब उसेपलट करउस पर्र सवार होँ गये औऱ उसे चोदने लगे। दोनो कि इस उठा-पटक सें गुलाब कि पंखुड़ीयान मसलरही थि औऱ कमरे मे मदहोश करने वाली खुश्बू फैलारही थि। मेनका फिन सें हवा मे उड़रही थि। उसने अपनी टांगे अपने ससुरजी कि कमर पे कस दि औऱ नीचे सें झटके मारने लगी। राजासाहब नें अपना लन्ड पूरा बाहर् निकाला औऱ फिन एक् हि झटके मे जड़ तक अंदरडाल दिया।
"ऊओ.ऊव्वववव.!", मेनका चिल्लाई। राजासाहब नें फिन सें यही हरकत दुहराते हुएउसे औऱ ज़ोर सें चोदना शुरुआत कर दिया। मेनका अब बिल्कुल आपे सें बाहर् होँ गई,। उस नें अपने नाख़ून अपने ससुरजी कि गांड मे गड़ादिए औऱ उसकी बुर पानी छोड़ने लगी। नाखूनओ कि चुभन नें राजासाहब कि कमर केँ हिलाने कों औऱ तेज़कर दिया औऱ वोँ एक् बारफिन अपनीबहू कि बुर केँ अंदर अपना पानी छोड़ने लगे।
क्रमशः.
आज केँ लिएबस यही तक, अगर आपके कोमेंट जल्दआते हैं तौ नया एपसोड भि जल्द हि पेश करुँगी।
आपके मंतव्यो कि इंतज़ार रहेगी।
तब तक केँ लिए फनलव कि तरफ सें
जय भारत.
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