घर का रसीला तरबूज। (Completed) - माँ बेटा - Full Story Part 1
लें बेटा अब इक्का मार दिया औऱ इसबार भि जीत मेरी होँ गई चलअब वापस सें पत्ते फेटना शुरुआत करदे, ये कहतेहुए हरिया नें ताश कि गद्दी अपने सामने बैठेहुए किशणा कि तरफ बढ़ा दि औऱ आहिस्ता पीछे कि ओर दीवार सें टिककर अपने दोनो पैरो कों मोड़कर अपनी दोनो जाँघो सें अपनी लूँगी मे खड़े मूसल लन्ड कों दबाकर वापस बाहर् दरवाजे कि ओर अपनेघऱ केँ आँगन मे देखने लगाजहा उसकी मां बैठी-बैठी चावलसाफ कररही थि, हरिया कां मुँह दरवाजे कि ओर थां जहा सें उसे उसकीभरे शरीर कि 46 साल कि गदराई मां कमला नज़र आँ रही थि,
औऱ किशणा कां मुँह अपने मित्र हरिया कि ओर थां जोँ बैठा-बैठा ताशफेट रहा थां, हरिया बैठा-बैठा अपने खड़े मोटे लन्ड कों अपनी दोनो जाँघो केँ बीच मसल्ते हुए अपनी भरपूर जवानी सें भरी हुइ मा कों देखते हुए किशणा सें बातेकर रहा थां, हरिया कां येरोज कां काम थां वो अपनी मां केँ गथिले जिस्म जिसका कि वो दीवाना थां, जब भि मोका मिलता देखने सें चुकता नहीं थां। कुछदेर बाद किशणा उठकर अपनेघऱ कि ओरचला जाता हैं औऱ हरिया वही बैठा-बैठा अपनी मां कि मस्तउठी हुईँ जवानी कां रास्पान अपनी आँखो सें करतेहुए अपने मोटे लन्ड कों मसल्ने लगता हैं, तभी कमलाउठ कर खड़ी होँ जाती हैं औऱ उसकाउठा हुआ गदराया पेट उसकी साडी औऱ ब्लौज केँ बीच सें साफ नज़रआने लगता हैं औऱ हरिया कां मोटा लन्ड झटके मारने लगता हैं, अपनी मां कां नंगाउठा हुआपेट औऱ उस पऱ गहरी बड़ी सि नाभि औऱ ब्लौज मे कसेहुए उसके बड़े-बड़े पपितो केँ जैसी चुचियाँ देखकर वो अपने लन्ड कों तेज़ी सें हिलाते हुए देखने लगता हैं,
तभी कमलापास मे रखी झाड़ू उठाने केँ लिए जैसे हि झुकती हैं अपनी माँ कि बड़े-बड़े तरबूज सि उठी औऱ फैली हुइ मोटी गान्ड कों देखकर हरिया केँ लन्ड सें चिपचिपा पानीआने लग जाता हैं, कमलावही झुककर झाड़ू मारने लगती हैं औऱ हरिया कां मन करता हैं कि अपनी मदमस्त जवानमा कि मोटी गान्ड मे जाकर अपना मुँहमार दे औऱ उसकी गदराई उठी हुइ जवानी कों खूब कस-कस अपने हाथो सें मसले, उसे कभी अपनी मां केँ मोटी-मोटी चुचियाँ औऱ कभी भारी-भारी फैलेहुए चूतड़ औऱ उठाहुआ सफ़ेद-सफ़ेद पेट नज़रआता हैं औऱ उसका मोटा लन्ड अपनी माँ कों खूब कस-कसकर चोदने केँ लिए तड़पने लगता हैं.
ये हरिया कां रोज कां काम थां उसका मोटा लन्ड अपनी माँ कि उफान खाती गदराई जवानी कों देख-देख कर हि खड़ा होना शुरुआत हुआ थां औऱ तब सें हि वो अपनी स्वयं कि मां कों नां जाने कितनी बार अपने ख्यालो मे खूब कस-कसकर चोद चुका थां औऱ अपना मोटा लन्ड हिला चुका थां, ऐसा नहीं थां कि उसका लन्ड अपनी मां केँ भारी औऱ गदराए बदन कों देखकर ऐसे हि खड़ा होनेलगा थां, उसके पीछे भि कुछ बाते थि, जिन्होने उसे अपनी मस्तानी मां केँ गदराए बदन कां दीवाना बना दिया थां,
हरिया स्वाभाव सें सीधाउस टाइम उसकी उम्र लगभग 18 सालरही होगी, जब वो अपने गाँव गाँव कि एक् चोपाल पऱ कुछ लड़को केँ संग बैठा थां, सब लड़के चलेगये औऱ जीतूनाम कां लड़का हरिया सें बाते करनेलगा, साम होँ चुकी थि औऱ दोनो केँ बीच बातेचल रही थि, तभी जीतू नें सेक्स कि बाते करनेलगा जीतू- दोस्त हरिया आज तौ बहोत चोदने कां मनकररहा हैं
हरिया- उसे देखते हुए, मन करने सें क्याँ होता हैं
जीतू- हरिया एक् बातकहु, मुझे तौ तेरी माँ कि मोटी गान्ड बहोत अच्छी लगती हैं, जब वो चलती हैं तोँ उसकी गोरी-गोरी उठी हुइ चौड़ी गान्ड इतनी मस्त लगती हैं कि मेरादिल करता हैं कि अपना मुँह तेरी मां कि गान्ड मे मारदू, तेरी मां कों तोँ अपनीगोद मे पूरी नंगी बैठाकर खूब प्रेम करने कां मन करता हैं, औऱ पता हैं सभी सें अधिक हसीन तोँ मुझे तेरी मां कां चेहरा लगता हैं, मेरादिल तेरी माँ कों बहोत प्रेम करने कां करता हैं दोस्त
हरिया- एक् दम सें क्रोध होकर खड़ा होँ जाता हैं औऱ, जीतू मुँह संभाल करबात कर कामीने, तेरी माँ भि तौ बहोत मस्त हैं उसे जाकर क्यो नहीं चोदता,
जीतू उम्र मे हरिया सें 2 साल बड़ा थां वो समझ गय़ा कि हरिया कों बुरालगा हैं उसने हरिया कां हाथ पकड़कर वापस बैठते हुएकहा
जीतू-अच्छा भइयाअब नहीं कहूँगा तूँ तौ नाराज़ हौ गय़ा। मुझे तौ मेरी मां भि नंगी होकर अपनी बुर मुझे दे-दे तोँ मे रातभर उसे चोदु, तूँ तौ बेकार हि नाराज़ हौ रहा हैं, देख तेरी मां कां जिस्म पूरे गाँव कि औरतो मे सबसे मस्त औऱ खूबसूरत हैं इसलिये मैनेऐसी बातकह दि, देख हरिया मे खुलेदिल कां हू इसलिये तुझसे मुँह पर्र कह दिया औऱ तुँ मुझ पऱ नाराज़ हौ गय़ा, औऱ बाकी पूरे गाँव केँ लोग तेरी माँ केँ बारे मे बाते करते हैं औऱ उसे चोदने केँ लिए मरते हैं तौ तुँ उन्हे तोँ कुछ नहीं कहता क्यो कि वो तेरे सामने बात नहीं करते हैं इसलिये नाँ, खेर तुम्हारी तरफ मनपसंद नहीं हैं तौ मे तुझसे नहीं कहूँगा, पऱ एक् बात तुँ हि सच-सचबता, चोदने केँ हिसाब सें पूरे गाँव मे सबसे गथिला औऱ भराहुआ जिस्म तेरी माँ कां हैं कि नहीं,
जीतू कि बातसुन कर हरिया कुछ नाँ कहसका क्यो कि जीतूसच हि कहरहा थां हरिया कि मां कि गदराई उठी हुई जवानी जोँ कि 40 पऱ होने पर्र भि लोगो पऱ कहरढा रही थि, औऱ येबात हरिया भि जानता थां कि उसकी स्वयं कि माँ बहोत खूबसूरत औऱ खूब कस-कसकर चोदने लायक महिला हैं,
जीतू-बता हरिया क्याँ मे ग़लतकह रहाहू, तुम्हे भि पूरे गाँव मे तेरी माँ कां जिस्म हि सबसे खूबसूरत औऱ भराहुआ लगता होगा नाँ
हरिया- अपने सूखे होंठो कों अपनीजीभ सें गीला करताहुआ, हा जीतू तूँ कहता तोँ ठीक हैं पर्र मुझेये सभी बाते अच्छी नहीं लगती हैं, आज केँ बाद मुझसे येसभी बातमत करना
जीतू- अच्छा नहीं करूँगा पर्र प्यारे एक् बार अपनी माँ कों पूरी नंगीदेख लेगा नाँ तौ तूँ भि पागल हौ जाएगा, मेरी मां ऐसी होती तौ मे तोँ दिनरात अपनी मां कों पूरी नंगी करके अपने मोटे लन्ड पर्र चढ़ाए-चढ़ाए घूमता, पर्र एक् बातकहु तेरी माँ कि गदराई उठी हुईँ गान्ड कों सोचकर जब मे लन्ड हिलाता हू तौ बहोत मजाआता हैं, तूँ तोँ अपनी माँ केँ संगदिन भरघऱ मे रहता हैं उसका हसीन चेहरा देखकर तुझेही उसे प्रेम करने कां मन नहीं होता हैं क्याँ, मेरा तौ दिल करता हैं कि तेरी मां कों खूब प्रेम करू, इतनी अच्छी लगती हैं मुझे पऱ अपनेऐसे नसीबकहा, हाँ मे तेरी स्थान होता औऱ मेरी मां ऐसी मस्तानी होती तोँ मे अब तक उसकी हज़ारो बार बुर औऱ गान्ड दोनोमार चुका होता,
गाँव मे औऱ कोई तोँ नहीं पऱ अक्सर कुछ लड़के जौ हरिया सें बड़ीउमर केँ थें हरिया सें उसकी मां कि बातेकर जाते थें, हरिया मन हि मन जीतू सें बहोत चिडता थां औऱ उससे बचने कि कोशिश करता थां किंतु जीतू कि बातो नें उसे अपनी माँ कि मसलउठी हुईँ जवानी कि ओर देखने पऱ मजबूर कर दिया थां औऱ जब वो अपनी माँ कों उपर सें नीचे तक देखता थां। तबजब उसकी नज़र अपनी मां केँ मटकते हुए भारी चुतडो पऱ पड़ती तौ उसकेमन सें आवाज़ आती थि कि वाकई जीतू कहता तोँ सही हैं मेरी मां जैसी मोटी औऱ चौड़ी गान्ड पूरे गाँव मे किसी महिला कि नहीं हैं,
घर का रसीला तरबूज। (Completed) - माँ बेटा – New Episode
एक् दिन हरिया अपने कमरे मे बैठाहुआ थां औऱ तभी उसकेघऱ केँ आँगन मे उसके चाचा जौ कि 38 कि उमर केँ होंगे लूँगी पहनेहुए आए औऱ उसकी माँ कमला सें आँगन मे खड़े होकर बाते करनेलगे, कमलाउस टाइम पानीभर करआई थि उसने साडी कों उपरउठा कर अपनी नाभि केँ नीचेदबा रखा थां उसकाउठा हुआपेट औऱ गहरी नाभि बिल्कुल नंगी नज़र आँ रही थि औऱ उसके मोटी-मोटी चुचियाँ भि ब्लौज केँ उपर केँ दोबटन खुले होने कि वजह सें नज़र आँ रही थि,
हरिया चुपचाप कमरे केँ अंदर सें अपनीमा कि उठी हुईँ कातिल जवानी कों देखरहा थां औऱ उसकी नज़र चाचा कि ओर गई तोँ उसका चाचा चोर नज़रो सें उसकी माँ कमला कां कभीउठा हुआपेट औऱ गहरी नाभि औऱ कभी उसके मोटी-मोटी चुचियाँ कों बड़ी हसरतभरी नज़रो सें निहार रहा थां औऱ कमला बिल्कुल लापरवाह होकर हस्ती हुईँ अपने देवेर सें बातेकर रही थि, उसके जाने केँ बाद हरिया कां मनबदल गय़ा औऱ वो सोचने लगा सालेसभी मेरी माँ कों चोदने कि नज़र सें देखते हैं तौ मे क्यो नाँ देखु, वैसे भि मेरी माँ उस टाइम खड़ी-खड़ी ऐसीलग रही थि जैसे खड़े-खड़े हि उसकी फूली हुइ बुर मे अपना लन्ड पेलदू, बसतभी सें हरिया अबरोज हि अपनी माँ कि गदराई जवानी कां रास्पान करने सें नहीं चुकता थां.
कमला झाड़ू मारकर जैसे हि सीधी होती हैं उसेघऱ केँ बाहर् केँ दरवाजे सें चंदा अंदरआते हुए नज़रआती हैं, चंदा 40 साल कि महिला थि जोँ कि कमला केँ खेतो मे कम करती थि,
कमला-आजा चंदाआजा, सच पूंछ तोँ मे तेरी हि राहदेख रही थि, आज मेरे पैरो मे खासकर इन घुटनो मे बड़ा दर्द महसूस होँ रहा हैं, उठने बैठने मे बड़ा दर्द होता हैं, अच्छा हैं तूँ आँ गई चल ज़रा मेरे पैरो कि मालिश तोँ करदे, वैसे भि कितने दिनो सें तूने मालिश नहीं कि हैं,
कमला कि बातसुन कर हरिया मन हि मनचहक उठता हैं औऱ धीरे-धीरे सें दरवाजा अंदर सें हल्का सां लगाकर उसकी दरार मे अपनी आँखेलगा देता हैं, वो अक्सर कमरे केँ अंदरघुस कर दरवाजे कि दरार सें अपनी माँ कि मालिश होतेहुए देखता रहता थां,
चंदा- मुस्कुराते हुए, अरे मालकिन तुम् तौ कहती हि नहीं होँ नहीं तौ मे रोज हि तुम्हरी मालिश कर दियाकरू,
कमला-जा पहले बाहर् कां दरवाजा बंदकर दे मे यही आँगन मे चटाई बिछा देतीहू,
चंदा बाहर् कां दरवाजा लगाकर आँ जाती हैं औऱ कमला एक् चटाई बिछाकर दीवार सें अपनीपीठ टीकाकर बैठा जाती हैं औऱ अपने दोनो पैरो कों घुटने सें मोड़कर बैठ जाती हैं, उसका मुँह सीधे हरिया केँ 20 मीटरदूर केँ दरवाजे कि ओर रहता हैं
औऱ चंदा उसकी दूसरी तरफ कमला कां पैर पकड़कर बैठ जाती हैं,
चंदातेल कटोरी मे लेकर कमला कि साडी कों उसकी जाँघो तक चढ़ा देती हैं औऱ फिन कमला कि लंबी-लंबी गोरी टाँगो पऱ तेललगा कर उसकी गोरी-गोरी पिंदलियो पऱ तेल सें मालिश शुरुआत कर देती हैं औऱ हरिया जब अपनी मां कि गोरी-गोरी नंगी पिंदलियो कों देखता हैं तौ उसका लन्ड उसकी लूँगी मे तनकर खड़ा होँ जाता हैं औऱ वो अपनी माँ कि रसीली जवानी कोदरवाजे कि दरार मे अपनी आँखे लगाए देखने लगता हैं,
चंदा धीरे धीरे कमला कि साडी कों उसकी जाँघो तक चढ़ा देती हैं औऱ उसकी मोटी-मोटी गदराई गोरी जाँघो मे तेललगा कर उन्हे खूबकर कर दबोचती हैं औऱ कमला केँ मुँह सें आँ कि एक् गहरी हल्की चीख निकल जाती हैं,
चंदा-अपने दोनो हाथो सें कमला कि गदराई मोटी जाँघो कों दबोचते हुए, मुस्कुरा कर, क्याँ बात हैं मालकिन तुम्हारी उमर जितनी बढ़ती जारही हैं तुम्हारी जंघे उतनी हि मोटी होतीजा रही हैं, तुम्हारी इन मखमली जाँघो कों अगरकोई 70 साल कां बुढ्ढा भि देख लें तोँ उसका लोला खड़ाहुए बिना नहीं रहेगा,
कमला-सीसियते हुए, चुप कर बेशरम तूँ भि तौ बूढ़ी होनेचली हैं पऱ इसउमर मे भि लन्ड-लन्ड कहते तेरा मुँह नहीं थकता हैं,
चंदा- हस्ते हुए, सच कहरही हू मालकिन इसउमर मे लन्ड सें चुदवाने मे जौ मजाआता हैं वो तोँ भरी जवानी मे भि नहींआता थां, औऱ फिन तुम्हारा बदन तौ इतना भारी भरकम हैं औऱ उपर सें इतनी मोटी-मोटी जंघे औऱ तरबूज सें फैलेहुए भारी चूतड़ देख-देख कर तोँ सारा गाँव पागल रहता हैं,
कमला- अपनी दोनो जाँघो कों फैलाकर हल्के सें मुस्कुराती हुईँ, क्याँ बकती रहती हैं चंदा तुँ
चंदा-अपने हाथो कों कमला कि जाँघो कि जड़ो तक फेरते हुए, नहीं मालकिन मे सचकहरही हू मैने तोँ 18 साल केँ लड़को कों भि तुम्हारे भारी-भारी चुतडो कों घूरते हुए देखा हैं, जैसे वो लड़के तुम्हारे चुतडो कों खा जानां चाहते होँ, तभी चंदा अपनेहाथ सें कमला कि जाँघो कि जड़ो मे फूली हुईँ बुर कों एक् दम सें सहलाते हुए उसकी फूली बुर कों अपने हाथो मे भरकर दबोच लेती हैं,
चंदा-हाय मालकिन तुम्हारी बुर कितनी फूली हुइ हैं, मलिक तौ तुम्हे रोजखूब कस-कसकर चोदते होंगे,
कमला-अहह करके सीसियते हुए, यह क्याँ कररही हैं चंदा, अहह थोडा धीरे-धीरे कर, अहह
चंदा-मुस्कुराते हुए उसकी बुर कों सहलाते हुए, सच बताओ मालकिन, मालिक तुम्हे रोज चोदते हैं नां
कमला-अरे मेराऐसा नसीब कहां हैं चंदा, औऱ तुँ तोँ ऐसे पुंछरही हैं जैसे तूँ जानती हि नां हौ, तेरे मालिक 1 महीने मे कभी एक् बार चढ़ते हैं औऱ उसमे भि 2 मिनिट मे पानी छोड़कर सो जाते हैं,
चंदा-सच मालकिन तुम्हे तौ किसी मोटी जवान लन्ड सें चुदवाने पर्र हि शांति मिल पाएगी, तुम्हे जब तक खूबकस कर नाँ ठोकाजाए तुम्हे मजा हि नहींआता होगा
कमला- तुँ राज सें खूब अपनी बुर मरवाती होगी, तेराबदन भि तौ अच्छा गदराया हुआ हैं, राज तौ खूब कस-कसकर चोदता होगा तुम को
चंदा-हाँ मालकिन चोदते तोँ अच्छा हैं मगर उनकी शराब पीने कि आदात कि वजह सें हमेशा अच्छी चुदाई नहीं होती हैं,
शराब पीकर वो जल्द झाड़ जाते हैं, मे तौ बहोत तड़पने लगीहू मालकिन पऱ क्याँ करूये बुर कि आग होती हि ऐसी हैं कि फिनकोई भि मोटा लन्ड मिलजाए,
कमला-चल अबबसकर, मुझेनहा कर खानां भि बनाना हैं वैसे भि बहोत देर होँ चुकी हैं, कलआकर औऱ मालिश कर देना,
चंदा खड़ी होकरये कहकरचली जाती हैं कि वो खेतो कि ओरजारही हैं, कमला खड़ी होकरवही अपनी साडी औऱ ब्लौज खोल देती हैं औऱ हरिया अपनी माँ कों सिर्फ पेटिकोट मे देखकर पागल हौ जाता हैं औऱ अपने मोटे लन्ड कों खूब कस-कसकर मसल्ने लगता हैं, वो समझ गय़ा थां कि अब उसकी मां वही आँगन मे बने कच्चे बाथरूम मे जाकर नहाने वाली कमला बाहर् कां दरवाजा लगाना भूल जाती हैं औऱ उसी बाथरूम जोँ कि पत्थर औऱ इंटो सें बना थां मे घुसकर अपनेहाथ पाँव रगड़ने लगती हैं हरिया दबे पाँव बाथरूम केँ पासआकर एक् सुराग सें अपनी आँखेलगा देता हैं औऱ चुपचाप अपनीमम्मी कि गदराई नंगी जवानी कों देखने लगता हैं, कमलाहाथ पाँव रगड़ने केँ बादवही खड़ी हौ जाती हैं औऱ उसके भारी-भारी फैलेहुए चूतड़ उसके बेटे केँ मुँह कि ओर हौ जाते हैं औऱ कमला अपना पेटिकोट उतारकर पूरी नंगी हौ जाती हैं,
हरिया अपनी मां कि गोरी-गोरी मोटी औऱ गदराई गान्ड कों देखकर पागल हौ जाता हैं औऱ अपने मोटे 9 इंच लंबे लन्ड कों बाहर् निकाल करखूब कस-कसकर अपनी माँ कि मोटी गान्ड कों देखते हुए मसल्ने लगता हैं, कमला जैसे हि आगे कों झुकती हैं उसकी मोटी गान्ड कां बड़ा सां छेद औऱ उसकीखूब मोटी-मोटी फांको वाली फूली हुइ बुर औऱ उसकी बुर कि गुलाबी दरार उसके बेटे कि आँखो केँ सामने आँ जाती हैं औऱ हरिया कां अपनी मां कि ऐसी फूली औऱ गुलाबी फटी हुइ बुर औऱ गान्ड कां भूरा औऱ बड़ा सां छेददेख कर लन्ड झटके मारने लगता हैं औऱ उसके लन्ड कि मोटाई औऱ लंबाई कुछ अधिक हि बढ़ जाती हैं,
क्रमशः।
घर का रसीला तरबूज। (Completed) - माँ बेटा – New Episode
गतान्क सें आगे.
तभी अचानक उसकेघऱ केँ दरवाजे केँ अंदर घुसते हि चंदा केँ पैरवही केँ वहीरुक जाते हैं औऱ वो एक् दम सें अपनेपैर धीरे-धीरे सें पीछे करकेछुप कर हरिया कों देखने लगती हैं औऱ उसे समझते देर नहीं लगती कि हरिया अपनी माँ कों बाथरूम मे नंगी नहाते हुएदेख रहा हैं, चंदा केँ होंठो पर्र एक् हल्की सि मुस्कान फैल जाती हैं पर्र तभी उसकी
मुस्कान एक् दम सें गायब होँ जाती हैं जब उसकी नज़र हरिया केँ भयानक मोटे लन्ड पऱ पड़ती हैं औऱ उसका मोटा लन्ड देखकर चंदा कां गला सूखने लगता हैं, हरिया 22 साल कां एक् हत्ते कत्ते जिस्म कां मालिक थां औऱ उसका लन्ड काफ़ी लंबा औऱ मोटा थां, उसके मोटी लन्ड कों देखकर चंदा कां हलकसुख जाता हैं औऱ वो चुपचाप दबे पाँव वापस आँ जाती हैं औऱ
खेतो कि ओरचल देती हैं,
हरिया अपनी मां कि नंगी जवानी देखकर अपने लन्ड कों खूब कस-कसकर मसल्ने लगता हैं, कुछदेर बादजब कमला नाहकार पेटिकोट पहन लेती हैं तौ हरिया दबे पाँव अपने कमरे मे आकरलेट जाता हैं औऱ लेटे-लेटे हि अपने लन्ड कों हिलाते हुए अपनी आँखेबंद कर लेता हैं औऱ कल्पना करने लगता हैं कि वो अपनी माँ कि मोटी गान्ड औऱ फूली बुर कों खूब कस-कसकर चोदरहा हैं। वो कल्पना मे आँखेबंद कर अपनी मां कों अलग-अलग तरीके सें कभी चोदता हैं कभी उसकी फूली हुईँ बुर औऱ गान्ड कों चाटता हैं जब उसकी आँखो केँ सामने उसकी मां कि मोटी गान्ड औऱ फूली हुई बड़ी-बड़ीफांको वाली बुर आती हैं तौ उसके लन्ड कां जोश पूरीतरह बढ़ जाता हैं औऱ उसे लगता हैं जैसे उसका पानीछुट जाएगा, तभी बाहर् सें आवाज़ आती हैं
कमला- हरिया ओ हरिया, बेटा कितना सोएगा, चलउठजा औऱ जा ज़रा खेतो कि ओरघूम फिन आँ औऱ फिन कमला उसके कमरे मे जाती हैं औऱ हरिया अपनी आँखेबंद कर केँ चुपचाप लेटा रहता हैं, कमलाउसे पकड़कर हिलाते हुए उठती हैं औऱ हरिया कसमसाते हुएउठ करबैठ जाता हैं
हरिया- क्याँ हैं मां, सोनेदो नाँ
कमला-अरे बेटा जा खेतो मे कामचल रहा हैं औऱ तुँ हैं कि घऱ पऱ पड़ा रहता हैं औऱ तेरे पिताजी नें दूसरी तरफ केँ एक् खेत कों ऐसा पकड़ा हैं कि बसवही कुटिया मे दिनरत ताश खेलता पड़ा रहता हैं, जा जाकरदेख, चंदा भि गई हैं,
हरिया- माँ मे अकेले क्याँ करूँगा वहा
कमला- तूँ चल तौ सही पीछे सें मे पहले तेरे पिताजी कां खानां देकरफिन तेरा खानां लेकरआती हूतब तक कुछ तौ काम निपटा दे.
हरिया- अच्छा मां जाताहू औऱ फिन हरिया अपने खेतो कि ओरचल देता हैं,
खेतो केँ बीचोबीच चंदाकाम कररही थि जब उसकी नज़र हरिया पऱ पड़ती हैं तोँ वो उठकरकुए कि ओरचल देती हैं जहा हरिया खड़ाहुआ थां, वाहाआकर पेड़ कि छाया मे बैठकर, क्याँ बात हैं हरिया बेटा आज सुभह-सुभह खेतो मे आए होँ, लगता हैं कुछकाम करने केँ इरादे सें आए हौ
हरिया- अरे नहीं चंदा काकी, मेरामन इन खेतो मे काम करने मे ज़रा भि नहीं लगता हैं
चंदा- मुस्कुराते हुए तौ फिन तेरामन काहे मे लगता हैं बेटा चंदा नें घाघरा औऱ चोली पहनाहुआ थां 40 कि उमर मे भि उसकाबदन बहोत गदराया औऱ भराहुआ लगता थां, औऱ जब सें उसने हरिया कां मोटा लन्ड देख लिया थां उसकामन बार-बार उसके मोटे लन्ड कि कल्पना मे डूबने लगा थां औऱ वो भि शांत बैठने वाली नहीं थि औऱ अपनेमन मे सोचती हैं आज इसका पानी छुड़वा हि देतीहू,
चंदा- उठतेहुए, बेटा तूँ बैठ मे कुटिया केँ पीछे सें पेशाब करकेआती हू बहोत जोरो कि लगी हैं औऱ चंदा जनभुज कर अपने घाघरे केँ उपर सें अपनी बुर कों मसल्ते हुएपास हि बनी कुटिया केँ पीछे जाने लगती हैं, वो जानती थि कि उसके कुटिया केँ पीछे जाते हि हरिया कुटिया केँ अंदर पहुच जाएगा औऱ कुटिया कि झाड़ियो कों हटाकर उसकी बुर देखने कि कोशिश करेगा,
औऱ फिनऐसा हि हुआ चंदा केँ जाते हि हरिया जल्द सें कुटिया केँ अंदर जाकर पीछे कि तरफ कि घास कि झाड़ियो कों हटाकर अपनी आँखेलगा देता हैं
खेत पूरा सुनसान थां चारो औऱ दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आँ रहा थां, चंदा पहले हि मस्ती मे भरी हुइ थि औऱ वो जानती थि कि हरिया उसेदेख रहा हैं इसलिये उसने जानबूझ कर अपना घाघरा कमर तक चढ़ा लिया औऱ खड़ी-खड़ी अपनी फूली हुई बुर कों मसल्ते हुए अपने बुर केँ दाने कों रगड़ने लगी, हरिया चंदा काकी कि फूली हुइ गदराई फांको वाली बुर औऱ मोटी-मोटी जाँघो कों देखकर पागल हौ गय़ा औऱ उसका लन्ड खूब झटके मारने लगा, उसने चंदा काकी कि पूरी नंगी बुर औऱ कसी हुइ गोटी जाँघो कों देखकर अपना लन्ड हिलाना शुरुआत कर दिया इतने मे चंदा नें अपनी बुर कों खूब रगड़ते हुए खड़ी-खड़ी हि अपनी बुर कि मोटी-मोटी फांको कों फैलाकर मुतना शुरुआत कर दिया औऱ उसकी बुर सें निकलती मोटीधार देखकर हरिया कां लन्ड पानी छोड़ते-छोड़ते रह गय़ा,
कुछदेर बाद चंदा अपने घाघरे सें अपनी बुर कां पानी पोछते हुए वापसआने लगती हैं तब हरिया जल्द सें कुटिया केँ बाहर् निकलकर बाहर् खड़ा होँ जाता हैं, चंदा मुस्कुराते हुए उसकीओर आने लगती हैं तभी चंदाजान बुझकर अहह करती हुईँ अपनेपैर पकड़कर पेड़ केँ नीचेबैठ जाती हैं,
हरिया- जल्द सें चंदा केँ पास जाकर, क्याँ हुआ काकीकुछ लग गय़ा क्याँ पैरो मे,
चंदा- अपने घाघरे कों घुटनो तक चढ़ाकर अपनेपैर केँ तलवो कि तरफ इशारा करतेहुए, देख बेटा क्याँ काँटा चुभकर टूट गय़ा हैं
हरिया- उसके पैरो केँ पासबैठ कर अपनासर झुकाकर उसकी नंगी गोरी टाँगो कों पकड़कर उसके पैरो केँ तलवो कि ओर देखने लगता हैं, तभी चंदा अपनी दोनो जाँघो कों थोडा फैला देती हैं औऱ जैसे हि हरिया उसकी एक् टांग कों पकड़कर थोडा उपरउठा कर देखता हैं उसकी नज़र चंदा कि फूली औऱ मोटी फांको वाली बुर पऱ पहुच जाती हैं औऱ उसका अधसोया लन्ड फिन सें खड़ा हौ जाता हैं,
घर का रसीला तरबूज। (Completed) - माँ बेटा - Next part miss mat karna
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