ठरकी अंकल - Desi sex story - Complete Kahani All Parts
इस लिखने कां उद्देश्य किसी पाठक कि यौनेच्छा कों जागृत करना नहि बल्कि उन्हें इस समाज कि घिनौने सच्चाई कों बेनक़ाब करना हैं, उन्हें ये बतलाना हैं कि आजइस समाज मे किसतरह सें लोग अपने दोस्तों कि भोली-भाली, कमसिन बेटियों कों फुसलाकर, उसके यौनेच्छा कों जगाकर उसकेसंग यौन दुराचार करते हें
अब मे अपनी दास्तां सुनाती हूं।
मेरानाम रितुझा हैं औऱ मे 18 वर्ष कि हूं औऱ येबात पहले कि हैं।
मेरे पड़ोस मे मेरे बापू केँ यार रमेश गुप्ता रहते थें, उनकी बेटी पूजा मेरी सहेली भि थि।
मे रोजसाम कों उनकेघऱ पऱ पूजा केँ संग खेलने औऱ अंकल सें कम्प्यूटर पढ़ने जाती थि।
पूजा केँ संग खेलने बाद मे उनकेघऱ केँ थर्ड फ्लोर पर्र अंकल सें कम्प्यूटर पढ़ने चली जाती थि।
अपने घुटनों मे गठिया होने केँ कारण आंटी सीढ़ियों पऱ चढ़ नहि पाती थि इसलिये वोँ ग्राउंड फ्लोर पर्र हि रहती थि।
अंकल मुझे बहोत हि मानते थें, मुझे अक्सर अपनीगोद मे बिठाकर मुझे चॉकलेट खिलाते थें।
उनकीगोद मे बैठने केँ थोड़ी देर केँ बाद मुझे अपनी नितम्ब मे कुछ कड़ापन महसूस होने लगता थां, शुरुआत मे तोँ मैंने इसबात पर्र अधिक नोटिस नहि किया पऱ बाद मे मे समझ गई थि कि अंकलजी केँ गोद मे बैठने केँ बाद उनके लिंग मे तनाव आँ जाता हैं।
मुझेगोद मे बिठाने केँ पहले वोँ अपना पायजामा उतारकर लुंगी पहन लेते थें।
मुझेगोद मे बिठाने केँ पहले अंकल मुझे बोलते थें कि तुम् अपनी स्कर्ट कों उठाकर मेरीगोद मे बैठो, इससे तुम्हें ज़्यादा गर्मी नहि लगेगी।
अंकल मुझेगोद मे इसतरह सें बिठाते थें कि उनका मोटा लिंग मेरे नितम्ब केँ दरार मे फँस जाता थां।
मुझेगोद मे बिठाने केँ बाद अंकल मुझे आरामसे आगे-पीछे हिलाते थें, हिलाने केँ थोड़ी देर केँ बाद मेरी जाँघ मे कुछ चिपचिपा सां लग जाता थां।
मुझेये समझ मे नहि आया कि अंकलऐसा क्यूं करते हें।
एक् दिन मे जब अंकल केँ गोद मे बैठरही थि तौ अंकल नें मेरी स्कर्ट कों ऊपर उठाने केँ बादकहा कि रितु तुम्हारी पैंटी सिकुड़ गई हैं, इसे मे ठीककर देता हूं।
ऐसा कहतेहुए अंकल नें बहाने सें मेरी पैंटी केँ कपड़े कों थोडा हटा केँ उसमें अपने लिंग कि मात्र सुपारी कों घुसाते हुए मुझे बोला कि पूजाअब तुम् बैठजाओ।
मेरे बैठने सें लिंग मेरी बुर सें रगड़ाते हुए मेरी पूरी पैंटी मे घुस गय़ा थां।
मुझेकुछ अजीब सां लगा तोँ मैंने अपनी पैंटी कों छूकर देखा तौ मुझेवहा पर्र बहोत फुलाहुआ मोटा सां कुछ महसूस हुआ, हाथ कों थोडा औऱ ऊपर किया तौ मेरेहाथ कों अंकल कां सुपारी टचकर गय़ा।
उनका अत्यन्त बड़ा लिंग होने केँ कारण सुपारी पैंटी केँ ऊपर सें बाहर् निकल गय़ा थां।
मैंने अंकल सें पूछा- अंकलजी, लगता हैं कि मेरी पैंटी मे आपका वोँ घुस गय़ा हैं।
ये सुनकर अंकल नें कहा- बेटी, वोँ गलती सें तुम्हारे पैंटी मे घुस गय़ा हैं, तुम् कोई टेंशन मतकरो, वोँ घुसा रहने सें कोई हर्ज़ नहि हैं।
ये सुनकर मे चुप हौ गई।
उस वक्त मुझे इतनीसमझ नहि थि कि मे गलत औऱ सही कां अन्तर समझ सकती।
उस वक़्त मेरी बुर मे एकदमबाल नहि निकले थें, एकदम चिकनी बुर होने केँ कारण सें मे अपनी बुर मे अंकल केँ मोटे लिंग कां स्पर्श अच्छी तरह सें महसूस कररही थि।
मेरी छोटी सि बुर अंकल केँ मोटे लिंग सें पूरीतरह ढक चुकी थि।
मेरे बैठने केँ बाद अंकल नें आरामसे मुझे आगे-पीछे हिलाना शुरुआत कर दिया।
हिलाने केँ कारण मेरी बुर कि फाँक अंकल केँ लिंग सें पूरा रगड़खा रही थि।
फिन अंकल नें मेरी टांग कों थोडा फैला दिया जिससे मेरी बुर कि फाँक औऱ खुल गयीँ, औऱ उसकेबाद अंकल नें मुझे आगे-पीछे करना शुरुआत कर दिया।
बीच-बीच मे अंकल अपनी हाथों सें मुझे चॉकलेट भि खिला देते थें।
ठरकी अंकल - Desi sex story – New Episode
थोड़ी देर केँ बाद मेरे बुर औऱ अंकल केँ लिंग सें कुछ चिकना सां निकलने लगा, इस चिकनेपन केँ कारण अंकल कां लिंग अधिक तेजी सें ऊपर-नीचे होनेलगा।
अंकल जानते थें कि मेरी बुर छोटी हैं औऱ उसमें उनका लिंग नहि घुस पायेगा इसलिये वोँ मेरी बुर पऱ अपना लिंग सटाकर उसे रगड़कर हि मज़ा लेँ रहे थें।
अंकल लम्बे चौड़े व्यक्ति थें, लगभगछह फीट लम्बे होंगे औऱ मे उनके सामने दुबली-पतली सि लगरही थि। मेरी छोटी सि पैंटी मे उनका लिंग बहोत हि भारी-भरकम लगरहा थां।
अंकल केँ लिंग कां मेरी बुर मे रगड़ा जानां थोड़ी देर केँ बाद मुझे अच्छा लगनेलगा थां।
अपने लिंग कों रगड़ते हुए अंकल नें पूछा- बेटी, तुम्हारी पैंटी मे घुसाहुआ मेरे सुस्सू सें तुम्हें कोई दिक्कत नहि नं हौ रही हैं?
मैंने कहा- नहि अंकलजी।
अंकलखुश होतेहुए बोले- रितु बेटा, तुम्हारी सुस्सु मे मेरी सुस्सु सटने सें कैसालग रहा हैं?
मे- अच्छा लगरहा हैं अंकलजी पऱ आपका सुस्सु बहोत बड़ा हैं, वोँ मेरी पैंटी केँ ऊपर सें बाहर् निकलकर मेरेपेट मे सटरहा हैं औऱ उसमें सें कुछ चिकना सां निकलकर मेरेपेट मे लग गय़ा हैं।
अंकल-जरा अपनी स्कर्ट ऊपर उठाकर दिखाओ तोँ, मे देखूं कि चिकना सां क्याँ बाहर् निकला हैं?
मैंने जब अपना स्कर्ट ऊपर उठाया तोँ अंकल कां मोटा सां, फुलहुआ सुपारी दिखरहा थां। अंकल नें आगे झुककर मेरी पैंटी कों देखकर बोला- बेटी, जरा सुपारी कों अलगाकर दिखाओ।
तोँ मैंने अपनेहाथ सें पकड़कर अलगाया तोँ अंकल नें कहा- इसमें घबराने कि कोईबात नहि हैं बेटी, इसे तुम् बाद मे धो लेना।
अंकल कां सुपारी पकड़ने केँ कारण मेरी बुर एकदम सिहरउठी थि।
पूजा केँ आने कि आवाज़ सुनकर अंकल नें मुझेझट सें अपने सें अलगकर कर दिया।
अगलेदिन जब मेरे पिताजी, मां केँ संग अपने गाँव अपने अपने बीमार पापा कों देखने चलेगए औऱ मुझे अंकल केँ घऱ पर्र हि छोड़ दिया क्योंकि वोँ अगलेदिन वाले थें।
मुझे देखकर अंकल एकदमखुश होँ गये औऱ बोले- तुम् रात मे मेरे कमरे मे हि सो जानां, वहा एक् औऱ खाट हैं।
सुनकर आंटी नें अपनीमूक सहमति जता दि।
रात लगभग 11 बजे मे अंकल केँ रूम मे सोने गई तोँ पहले उन्होंने मुझे डेयरी मिल्क चॉकलेट खिलाया औऱ फिन मुझे अपनीगोद मे बैठने कों बोला। अंकल नें मुझे अपनीगोद मे बिठाने केँ पहले मुझसे पूछा- बेटी, मेरीगोद मे वैसे हि बैठोगी याँ कल कि तरह अपनी पैन्टी मे मेरा सुस्सु घुसवा कर बैठोगी?
मैंने कहा- अंकल, मे कल केँ तरह हि बैठूँगी।
ये सुनकर अंकल नें मुस्कुराते हुएकहा- कलउसउस तरह सें बैठने मे तुम्हें अच्छा लगा थां न्?
मैंने कहा-हाँ, अच्छा लगा थां अंकलजी।
अंकल नें पूछा- बेटी, तुम् येसभी किसी सें नहि नं बोलोगी? मे तुम्हें बहोत सारे चॉकलेट खिलाऊँगा।
मैंने कहा- नहि अंकलजी, येबात मे किसी सें नहि बोलूँगी।
ये सुनकर लगरहा थां कि अंकल कां हौंसला कुछबढ़ गय़ा थां औऱ उन्होंने कहा-ठीक हैं बेटी, अब मे तुम्हारे पैन्टी मे अपना वोँ घुसाते हुए बैठाता हूं।
ऐसा कहकर अंकल नें कुर्सी पऱ बैठकर अपनी लूँगी खोल दि, अंकल बहोत बड़ा, बहुत मोटा लिंग देखकर मे थोड़ी देर केँ लिएडर गई, फिनउसे बहोत गौर सें देखने लगी।
अंकलजब देखा कि मे उनके लिंग कों बहोत गौरदेख रही हूं तौ उन्होंने कहा- बेटी, डरोमत… इसे अपनेहाथ मे पकड़कर देखो।
तोँ मैंने झिझकते हुए हौले सें अपनी छोटे हाथों सें अंकल कां लिंग पकड़ लिया, मेरे नाजुक हाथों मे अंकल कां मोटा लिंग औऱ भि बड़ादिख रहा थां।
फिन अंकल नें कहा- बेटी, इसकी टोपी भि खोलकर इसकी सुपारी कों देखलो।
तोँ मैंने धीरे-धीरे सें टोपी कों खोल दिया।
मुझेयाद हैं उस वक्त मुझे अंकल कां मोटा, फ़ूला हुइ सुपारी देखने मे बहोत अच्छा लगी थि।
फिन अंकल नें पूछा-ॠतु, मेरी सुपारी तुम्हें देखने मे कैसीलगी?
तौ मैंने कहा – बहोत सुन्दर औऱ प्यारा लगरहा हैं।
अंकल- थैंकयू बेटी, तुम्हें ये पसन्द आया?
मैंने कहा- बहोत पसन्द आया अंकलजी!
तोँ अंकल नें कहा- तुम्हें बहोत पसन्द हैं तौ इस पऱ किस लें लो।
फिन मैंने अपने नाजुक होंठों सें उस पर्र चुम्बन लेँ लिया।
चुम्बन लेने सें मेरी होंठों पर्र कुछ चिपचिपा सां लग गय़ा तौ मैंने पूछा- अंकलजी, यह चिपचिपा सां क्याँ लग गय़ा हैं?
अंकल- बेटी, ये मेरे लिंग कि जूस हैं, इसेचाट कर देखो, बहोत टेस्टी हैं।
ऐसा सुनकर मे अंकल केँ भयंकर सुपारे कों चाटने लगी।
फिन अंकल नें कहा- बेटी, इसे थोडा अपने मुँह केँ अन्दर लेकर चूसो।
तौ मे उतने बड़े सुपारे कों बहोत दिक्कत सें अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी।
फिन अंकल नें अपना लिंग औऱ मेरे मुँह मे घुसा दिया औऱ सिर पीछे सें पकड़कर अपना लिंग अन्दर-बाहर् करनेलगे।
ऐसा करने पर्र मेरे छोटे सें मुँह मे दर्द होनेलगा तोँ मैंने लिंग सें अपना मुँह बाहर् निकाल लिया औऱ अंकल सें बोला- दर्द हौ रहा हैं।
तौ अंकल नें अपना लिंग बाहर् निकल दिया।
ठरकी अंकल - Desi sex story – New Episode
फिन अंकल नें मुझेकहा- ॠतु बेटी, अब मे तुम्हें अपनीगोद मे बिठाता हूं।
मे उनकेगोद मे बैठने लगी तोँ अंकल नें बोला- बेटी, आज गर्मी बहोत हैं, तुम्हारी पैन्टी उतार देता हूं।
ऐसा बोलकर अंकल नें मेरी पैन्टी कों उतार दिया, मेरी पैंटी उतारते हि मेरी बिना बालों वाली, गोरी-गोरी, एकदम चिकनी बुर कों देखकर अंकल कां लिंग एकदम फनफना कर खड़ा हौ गय़ा थां।
मेरी पैंटी कों उतारने केँ बाद बोला-चलो तुम्हारा स्कर्ट भि उतार देता हूं।
ऐसा बोलकर उन्होंने मेरी स्कर्ट कों भि उतार दिया, फिन उन्होंने मेरी टी-शर्ट कों भि उतार दिया।
उस वक्त मे ब्रा नहि पहनती थि क्योंकि मेरी उभार सिर्फ नींबू इतनी बड़ी थि।
मुझे एकदम नंगी करने केँ बाद अंकल नें कहा-ॠतु, तुम्हारे मम्मे तोँ अभि बहोत हि छोटे हें।
ऐसा बोलकर अंकल मेरी छाती कि उभार कों सहलाने लगे, उसे अपनी चुटकियों मे मसलने लगे।
मुझे भि मज़ाआने लगा।
मेरी छातीकुछ देर तक दबाने केँ बाद अंकल नें मुझेखाट पऱ लेटाकर मेरी टांगों कों फैला दिया औऱ मेरी कोमल, चिकनी बुर कों सहलाने लगे।
फिन मेरी बुर कों चीरकर उसे चाटने लगे।
कुछ देर चाटने केँ बाद उन्होंने मेरी छोटी सि बुर कि अत्यन्त संकरी छेद मे ऊँगली घुसकर उसे अंदर-बाहर् करनेलगे।
थोड़ी देर केँ बाद मेरी बुर सें पानी निकलने लगा, मुझे ऊँगली कां अन्दर-बाहर् होना बहोत अच्छा लगरहा थां, आनन्द केँ कारण मेरे मुँह सें सि-सि कि मादक आवाज़ भि निकलरही थि।
थोड़ी देर तक ऐसा करने केँ बाद अंकल नें अपने लिंग कां सुपारी खोलकर उसे मेरी बुर पऱ रगड़ने लगे।
अंकल केँ लिंग कि सुपारी इतनी बड़ी थि कि उससे मेरी पूरी बुर हि ढक गई थि।
अंकल बीच-बीच मे अपने सुपारी कों मेरी बुर पऱ हौले-हौले सें पटकते भि थें।
मे समझ गई थि कि अंकल मेरी बुर पर्र सिर्फ अपना लिंग क्यूं रगड़रहे हें, बुर केँ छेद मे उसे क्यूं नहि घुसारहे हें।
क्योंकि अंकल कि जितनी बड़ी सुपारी हैं, उतनी बड़ी तौ मेरी बुर हि थि तौ फिन कहां सें उनका मोटा लिंग मेरी छोटी सि बुर मे घुसता।
अंकल कां लिंग बहोत हि मोटा थां औऱ लगभगसात इंच लम्बा तोँ थां हि।
मेरी बुर पऱ अपना लिंगकुछ देर तक रगड़ने केँ बाद अंकल नें मेरी बुर कों फैलाकर उसमें अपनी सुपारी कों घुसाने कां प्रयास किया पऱ वोँ घुस नहि पाया तौ अंकल नें अलमारी सें एक् बोतल निकाली जिस पर्र ke-Y Jelly लिखा थां।
उस बोतल केँ लम्बे नॉजल कों अंकल नें मेरी बुर मे घुसकर ढेर सारा जेली मेरी बुर मे उड़ेल दि औऱ अपने लिंग पर्र भि खूब सारी जेलीथोप ली औऱ उसकेबाद अंकल कुर्सी पर्र बैठगए औऱ मुझसे बोले- बेटी ॠतु, अगर तुम् मेरे सुस्सु पर्र अपने सुस्सु कां छेदरख कर बैठोगी तोँ मे तुम्हें Sony कां PlayStation दिला दूँगा।
तोँ मैंने कहा- पऱ अंकलजी, आपके सुस्सु केँ सुपारी इतनी बड़ी तोँ मेरी पूरी सुस्सु हैं, इसमें ये कहां घुस पायेगा।
ये सुनकर अंकल नें कहा-धत पगली, तुम् नहि जानती हौ कि लड़कियों कां सुस्सु कितना लचीला होता हैं, इसमें सें तौ बच्चा तक निकल जाता हैं।
ये सुनकर मैंने कहा-ठीक हैं अंकलजी, आप् ट्राई कर लीजिये, मुझे PlayStation दिला दोगे न्?
अंकल-ॠतु बेटा, तुम् इसकी चिंता बिल्कुल मतकरो, वोँ मे तुम्हें पक्का दिला दूँगा।
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