पड़ोसी किरायेदार की ख्वाहिश completee - Padosi Kirayedaar – New Episode
अब मुझे भि क्रोध आँ गय़ा। रात कों मैंने तोँ सभी अनजाने मे किया, मगर इसे तौ सभीपता थां। फिन भि मुझ पर्र रौब दिखारही हैं।
गुस्से मे मैंने उसे पकड़ा औऱ घसीटकर कमरे मे बेड पर्र डाल दिया। उसकोबेड पर्र डालकर, मे कमरे कां द्वार (दरवाज़ा) बन्द करनेलगा।
काजल बोलीं- यह क्याँ कररहे हौ तुम्। दरवाजा क्यूं बन्दकर रहे हौ।
मैंने उसकीकोई बात नहि सुनी, मे मुड़कर फिन सें उसकीतरफ बढ़ने लगाइस पऱ वोँ औऱ अधिक घबरा गई,।
काजल- मेरेपास मतआयो वरना मे चिल्ला दूंगी। फिन तुम्हारा क्याँ हाल होगा सोचलो।
मे बोला- चिल्लाओ जितना चिल्लाना हैं। मे भि देखता हूं। किसकी विवाह टूटेगी, किसकी बदनामी होगी।
यह सुनकर वोँ शांत हौ गयीँ,। मे जाकर उसकेऊपर लेट गय़ा, मगर वोँ अब भि नाटककर रही थि। मैंने अपनीजेब सें फोन निकाला औऱ उसे दिखाने लगा।
फोटोदेख कर वोँ एक् दम रोने कों हौ गयीँ,। मैंने उसका औऱ उस लड़के कां फोटो खींच लिया थां, जिसमें वोँ किसकर रहे थें। जब वोँ जारहा थां।
वोँ बोलने लगी- प्लीज यह फोटो किसीको मत दिखाना। मेरी विवाह टूट जायेगी। मे उस लड़के सें आज केँ बादकभी भि नहि मिलूंगी। आप् भि तौ चारु दिदी केँ संगऐसा करते हें।
मे बोला- तुम् सें सीधा आप्, चारु केँ संग करता हूं। तौ इससे तुम्हे क्याँ, अगर तुमने किसीको भि यह बताया तोँ तुम्हारे पति कों मे सभीबता दूंगा।
मे उस सें बात करतेहुए उसकी जांघो पऱ हाथ फिरारहा थां। मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे हाथ कों बुर कि तरफ लें गय़ा। सलवार केँ ऊपर सें हि मे उसकी बुर कों रगड़ने लगा। अब उसकेमुह सें भि सिसकी फुटरही थि।
उसकेऐसे लाजवाब बदन कों देखकर मेरामन उसे चोदने कां कररहा थां। औऱ इस वक्त काजल भि गर्म थि। मगर मुझे भाभी केँ आने कां डर थां।
मैंने उससे पूछा- भाभी कहां गयीँ, हें, कब तक आएंगी।
वोँ हल्की चीख लेतेहुए बोलि- दिदी तौ साम तक आएंगी। वोँ अपनी फूफी कि लड़की सें मिलने गयीँ, हें।
मैंने कहा- अभि तोँ तुम् उस लड़के कों कहरही थि कि दिदी आती होगीं, अब तुम् जाओ।
तोँ वोँ बोलि- वोँ सभी छोड़ो नां। आप् प्लीज यह करतेरहो, बहोत मजा आँ रहा हैं। रात भि आप् जबऐसे कररहे थें, तौ मुझे बहोत मजा आँ रहा थां। मगर चारु दिदी नें सभीखेल बिगाड़ दिया।
मैंने उसकीबात सुनी तोँ दंगरह गय़ा, कहां तोँ अभि यह इतने नाटककर रही थि। औऱ अब इतनी उतावली होँ रही हैं। खैर मुझे क्याँ करना, मेरेलिए तोँ अच्छा हि थां।
मे उसके कपड़े उतारने लगा। उसकी सहायता सें उसकी सलवार औऱ कुर्ती मैंने उतार दि। औऱ संग हि ब्रा भि। अब वोँ बस पैंटी मे थि।
उसका नंगा जिस्म एक् दमकहर ढ़ारहा थां। मैंने उसके होंठो सें अपने होंठलगा दिए, औऱ चूसने लगा। फिन नीचेआकर उसका एक् निप्पल मुंह मे भर लिया। औऱ दूसरे पर्र उंगलिया फिराने लगा।
कुछ देर केँ बाद स्थान बदली। अब दूसरा निप्पल मुंह मे आँ गय़ा। पेट सें होतेहुए मे बुर तक जा पहुंचा। काजल इतनीजोर सें सिसकियाँ भररही थि।
मैंने उसकी पैंटी भि उतार दि, औऱ दो उंगलियां उसकी बुर मे डालदीं। मे उंगलियां आगे पीछे करनेलगा। औऱ काजल कि सिसकियाँ भि औऱ तेज होँ गयीं। मुझेलगा कि अब ज़्यादा देर नहि करनी चाहिए वरनासभी मेहनत पर्र पानीफिन जायेगा।
मैंने अपने कपड़े उतारे औऱ उसकी टांगों केँ बीच आँ गय़ा। अपना लन्ड उसकी बुर पर्र सेट करके मे उसेफिन सें चूमने लगा। मगर शायद काजलअब इंतेज़ार नहि कर सकती थि।
वोँ स्वयं कमर उठाने लगी। मैंने भि देर नं करतेहुए एक् स्ट्रोक लगाया, एक् बार मे हि आधा लन्ड उसकी बुर मे चला गय़ा। काजल केँ मुंह सें एक् बहोत तेज सिसकी निकली। अगले स्ट्रोक मे पूरा लन्ड बुर केँ अंदरपेल दिया।
काजल पहले भि सेक्स कर चुकी थि, मगरफिन भि उसकी बुर टाइट थि। उसकी भि हल्की सि चीख निकली जब मैने पूरा लन्ड अंदरडाल दिया।
मुझे बड़ामजा आँ रहा थां। मे स्ट्रोक लगाने लगा। काजलअहह अहह कि आवाजें निकाल रही थि। कमरे मे चपचप औऱ अहह.अहह.सि.सि कि आवाजें गूंजरही थीं।
कुछ देर कि चुदाई केँ बाद काजल झड़ने लगी। उसकी बुर एक् दमकस गयीँ,। उसकेरस छोड़ने केँ संग हि बुर कि गर्मी सें मे भि झड़ गय़ा।
मे उसी केँ ऊपर लेटाहुआ थां। उसने मुझे बाहों मे जकड़रखा थां। कुछदेर तक मे ऐसे हि लेटारहा। फिन उठकर बाथरूम चला गय़ा। मे बाथरूम सें आया औऱ कपड़े पहनने लगा। अपने कपड़े लेकर काजल बाथरूम मे चली गई,। थोड़ी देरबाद वोँ कपड़े पहनकर बाहर् आई।
काजल बोलि- मैंने कईबार सेक्स किया हैं, मगर मुझेऐसा मजाकभी नहि आया। आज आप् अगर मुझसे कुछ भि मांगलो, मे आपको खुशी खुशीदे दूंगी।
मैंने कहा- अच्छा ऐसीबात हैं अगर तौ हमने सुना हैं लड़कियां अपनी गांड मरवाने मे बहोत डरती हें। गांड मारने दोगी अपनी, मुझे तुम्हारी गांड बहोत मनपसंद हैं।
काजलयह सुनकर मुस्कुराने लगी, औऱ मुझसे वादा कियामगर फिनकभी केँ लिए। अब बहुतसमय हौ गय़ा थां तोँ मे ऊपरचला गय़ा।
ऊपर चारु बाहर् हि थि।
पड़ोसी किरायेदार की ख्वाहिश completee - Padosi Kirayedaar – New Episode
चारु नें मेरीतरफ देखा, मैंने उसे कमरे मे आने कां इशारा किया। मे कमरे मे चला गय़ा। थोड़ी देरबाद वोँ काम ख़त्म करकेआई। मे कपड़े बदलकर बेड पऱ लेटाहुआ थां।
वोँ मेरेपास आकरबैठ गई,। मैंने उसे अपनी बाहों मे लेकर अपनेऊपर झुका लिया, औऱ उसके होंठ चुसने लगा। लगभग पांच मिनट तक मे उसके होंठ चूसता रहा।
तभी नीचे सें भाभी नें उसे आवाज़ दि। वोँ उठकरचली गई,, मे वहीं लेटारहा। कुछदेर बाद भाभी नें मुझे भि आवाज़ दि। मे नीचे पहुंचा, तोँ आँगन मे नीरा भाभी, अशोक भइया साहब औऱ दोलोग औऱ बैठे थें।
मे जाकर सोफे पऱ बैठ गय़ा। तौ भइया साहब नें मुझे उनसे मिलाया।
अशोक नें कहा- राहुल जी, यह मेरे छोटे भइया हें। काजल केँ पिताजी औऱ यह उनका बेटा हैं सोनू।
मैंने उन्हें नमस्कार कहा। फिन काजलसब केँ लिएगरम चाय लेकरआई। वोँ नहा चुकी थि, इससमय उसने एक् गुलाबी सूट पहनाहुआ थां।
भाभी नें बताया कि वोँ लोग काजल कों लेनेआये हें। अगले महीने कि विवाह तय हुई हैं। इसलिये इन्विटेशन भि देनेआये हें। यहांशहर मे, चूंकि विवाह हमारे देहात मे होगी।
सोनू नें कहा- भैया, आँटीकह रही थि कि आप् फॅमिली कि तरह हि हें। तोँ आपको जरूर आनां होगा।
मैंने कहा-जी ठीक हैं। अब आप् लोगकह रहे हें तोँ आँ जाएंगे।
भाभी नें चारु कों भि इन्विटेशन दिया थां। उस वक्त कोमल वहां नहि थि, तौ भाभी नें उसका इन्विटेशन कार्ड लेँ लिया थां। वर्ना उन लोगों कों देर होँ जाती। कुछ देर बातें करने केँ बाद वोँ लोगचले गए। भइया साहब भि उन्हें छोड़ने गए थें।
मे औऱ भाभीबैठ कर बातें कररहे थें। तभी कोमल आँ गई,, उसदिन केँ बाद मेरीउस सें अधिकबात नहि हुई थि। जिसदिन भाभी नें संतरे वाला मज़ाक किया थां।
मेरे औऱ कोमल केँ बीच नमस्कार होतीरही मगरकभी ज़्यादा बात नहि हुइ।
रात कों रोज कां नियम सां बन गय़ा थां। रोज़रात कों 10-11 बजे चारु मेरे कमरे मे आँ जाती औऱ पूरी नंगी होकर मेरीगोद मे बैठ जाती। मुझसे अपनी बुर मे क्रीम लगवाती औऱ जाने सें पहले मेरा लंड कम सें कम एक् बार जरूर चूसती।
मेरी रातें चारु केँ संग मजेदार कटरही थीं। 10 दिन मे उसकी खुजली गायब होँ गई थि। इसबीच मैंने उसकी बुर मे लंड एक् भि दिन नहि डाला थां। चारु नें मुझसे बहोत कहा थां कि मे उसकी बुर चोदूँ, उसके पति तौ हर दूसरे दिनउसे चोद हि रहे थें मगर मैंने एसा नहि किया।
शनिवार कों मैंने वादा किया कि सोमवार कों उसकी बुर चोदूंगा।
सोमवार सें उसके पति कि रात कि 10-6 शिफ्ट आँ गई थि। रात कि शिफ्ट मे 8 बजे वोँ जाते थें औऱ सुभह 8 बजेआते थें।
सोमवार रात कों 10 बजे खानां खाने केँ बाद मे आराम करनेलगा। चारु औऱ दिन कि तरह 11 बजेआकर मेरीगोद मे नंगीबैठ गई।
मुझसे चिपकते हुए बोलि- आज तौ चोदोगे नं? आजमना मत करना, तुम्हारे संगअगर सेक्स करती हूं तोँ लगता हैं कि यहकभी ख़त्म न् होँ।
मैंने निप्पल उमेठते हुएकहा- क्यूं नहि।
चारु सें मैंने पूछा- तुम्हारी गांड मे भि डालदूँ? तुम् बतारही थीं कि आकाशजब ज़्यादा नशे मे होते हें तब वोँ तुम्हारी गांड भि चोद देते हें।
चारु बोलीं- आप् कां मन हैं तोँ मेरी गांड मे भि डालदो ! आकाश तोँ गांड अधिक चोदते हें बुर कम।
चारु कि बुर गीली होँ रही थि, मैंने उसे तकिये केँ ऊपर लेटाया औऱ उसकी बुर मे पीछे सें लन्ड डाल दिया।
उसकी दोनों चूचियाँ अपने हाथों मे दबालीं औऱ चोदने लगा।
उह अहह कि आवाज़ों सें रूम गूँजरहा थां, चारु कि बुर मे लन्ड सरपट दौड़रहा थां। चारु कों चोदने मे मुझे बड़ामजा आँ रहा थां। कुछदेर बाद मैंने लन्ड बाहर् निकाल लिया औऱ चारु केँ चूतड़ों कों सहलाते हुए बोला- रानी, ऐसे हि लेटीरहो।
उसकेबाद मैंने कंडोम लन्ड पऱ चढ़ा लिया, चारु कि गांड मे उंगली घुमाते हुए बोला- रानी, जरा अच्छी तरह टांगें फ़ैला कर चूतड़ ऊपर उठाओ।
चारुसमझ गई कि मे उसकी गांड चोदना चाहता हूं, उसने अच्छी तरह सें अपनी टांगें फ़ैला लीं। मैंने चारु कि गांड पर्र लन्ड छुला दिया। उह उइ कि एक् सिसकी सि उसनेभरी, थोड़ी देर मे लन्ड उसकी गांड मे घुसने लगा।
“ऊओइ ऊओऊमर गई !” कि आवाज़ों सें चारु मचलने लगी। थोड़ी देर मे हि 7 इंची लंड उसकी गांड मे थां।
चारु कि गांड चुदनी शुरुआत हौ गई, कभी धीरे-धीरे, कभीतेज झटकों सें उसकी गांडचुद रही थि। 10 मिनटबाद मेरे लन्ड नें जवाबदे दिया।
चारुउठ गई, उसकी गांडफट चुकी थि औऱ वोँ मुझसे चिपककर सो गई। सुभह 6 बजे मेरी नींद खुली तौ चारु मेरे पलंग पर्र नहि थि।
बाहर् सें नहाने कि आवाज़ सि आँ रही थि। मैंने छुपकर देख्ना शुरुआत कर दिया।
चारु अपनी जांघें धोरही थि, उसके बूब्ज़ मस्तहिल रहे थें, मे उसके नग्न स्नान दर्शन कां मजा लेनेलगा।
चारु नहाकर अंदरचली गई,, मे फिन सें बैड पऱ लेट गय़ा।
मे जब दफ़्तर केँ लिए निकलने वाला थां तभी नीरा भाभी कां फ़ोन मेरेपास आया।
वोँ बोलीं- कोमल कों होटल मे धंधा करने केँ आरोप मे पुलिस नें पकड़ लिया हैं। तुम्हारे पासकोई जुगाड़ होँ तोँ उसेबचा लो।
पड़ोसी किरायेदार की ख्वाहिश completee - Padosi Kirayedaar – New Episode
मेरा दिमाग़ घूम गय़ा। तभी मेरे दिमाग़ मे लड़कियों केँ दलाल संजीव कां नामआया, मैंने दफ़्तर पहुंच करउसे फ़ोन किया औऱ उसे पूरीबात बताई।
संजीव नें कहा- चिंता नं करो मे छुड़वाता हूं। आधे घंटेबाद फ़ोनकरो।
20 मिनट केँ बाद संजीव कां फ़ोनआया।
वोँ बोला- कोमलछूट गई हैं, आधा घंटेबाद वोँ मेरे होटल मे आँ जाएगी। तुम् भि इधर आँ जाओ।
मेरे दफ़्तर सें होटलदूर थां, मे एक् घंटे मे वहां पहुँच गय़ा, संजीव मुझे एक् कमरे मे लेँ गय़ा, वहा कोमल बैठी हुईँ थि।
संजीव बोला- घबरा गई थि, अबठीक हैं।
मैंने पूछा- क्याँ बात हौ गई थि?
कोमल बोलि- होटल मे पुलिस नें मुझे गलती सें पकड़ लिया।
संजीव बोला- कोमल, अब तुम् झूठमत कहो, मे लड़कियाँ सप्लाई करता हूं औऱ इस धंधे मे मुझेसच केँ आगे कां भि पता हैं। इसलिये तुम् अपने मुँह सें सभीसच सच बताओ।
राहुल हमारे बहोत बड़े क्लाइंट हैं हर महीने 30-40 लड़कियां इनकी कम्पनी कों सप्लाई होती हें। आज तुम् इनके हि कारणबची हौ।
कोमल बोलीं- मे हफ्ते मे 1-2 बार धंधाकर लेती थि। मेरे होटल मे 8-10 लड़कियाँ रोज़ सेक्स केँ लिए सप्लाई होती हें, होटल मालिक जब बाहर् होता थां तौ मे भि 5000 -7000 रु मे ग्राहक पटा लेती थि औऱ उसकेसंग सो जाती थि।
आज केवलदो लड़कियाँ धंधे पर्र आइथीं औऱ आज मालिक भि नहि थां। मे बाबूनाम केँ ग्राहक केँ संग सेक्स कररही थि, पुलिस नें रेड डाली औऱ दो लड़कियों केँ संगसंग मुझे भि पकड़ लिया।
संजीव बोला- पुलिस नें जबइसे पकड़ा तबयह पूरी नंगी थि औऱ बाबू कां लन्ड इसकी बुर चोदरहा थां।
तभीकप कॉफ़ी लेकर वेटर आँ गय़ा, उसने हम् तीनों कों कप कॉफ़ी दे दि औऱ वोँ चला गय़ा। कोमल झेंपी सि बैठी हुई थि।
संजीव बोला- इसकेआगे कां सच मे बताता हूं। कोमल 6 महीने सें इस होटल मे फ़ूड मैनेजर कां कामकर रही हैं। होटल मे एक् फोन गर्ल कम्पनी कां कॉन्ट्रैक्ट हैं, वोँ रोज़ 8-10 लड़कियाँ सप्लाई करती हैं।
पहले महीने मे हि इसकीकॉल आई गर्ल्स सें दोस्ती होँ गई। उसकेबाद कोमल भि अपनी मर्जी सें महीने मे 2-3 दिन धंधे पर्र जानेलगी, एक् रात केँ 5000 -7000 रु मिलने लगे। 3 महीने तक कोई दिक्कत नहि थि।
3 महीने केँ बादहर शनिवार औऱ इतवार कों ये धंधे पर्र बैठने लगी औऱ महीने मे 12-15 बार चुदने लगी। कॉल आई गर्ल्स कम्पनी केँ सुपरवाइजर नें इससेकहा कि हमारी कम्पनी ज्वाइन करलो। महीने केँ 50000 रु मिलेंगे मगर महीने मे 20 दिन कम्पनी जहाँ कहेगी वहा जानां पड़ेगा, इसनेमना कर दिया औऱ उसकेबाद भि ये धंधे पर्र लगीरही।
कोमल बोलीं- मुझसे तौ येबात राजू वेटर नें कही थि, उसकी तोँ कोईजरा भि इज्ज़त नहि करता हैं सभीउसे पागल कहते हें।
संजीव हँसते हुए बोला- धंधे करने वाली लड़कियों कों यहबात पता नहि होती औऱ जिसे तुम् होटल मालिक कहरही होँ वोँ होटल मैनेजर हैं, उसे केवल होटल कां काम देख्ना हैं, वोँ 10 सें 5 अपनीजॉब करता हैं औऱ शनिवार, रविवार कों छुट्टी रखता हैं।
आज होटल मे कम्पनी नें जानबूझ कर मात्र दो लड़कियाँ भेजीथीं, कम्पनी कों उन्हें फ़साना थां, दोनों नें निजी ग्राहक बनालिए थें संग हि संग तुम्हें भि फंसवाना थां। संजय नें जब तुम्हें 10000 रुपएऑफर किएतब तुम् आसानी सें फंसगईं। दोनों अब सर्टिफाइड रंडियां होँ जाएंगी, उसकेबाद कम्पनी उनकी जमानत लेगी औऱ उन्हें दुबारा धंधे पर्र लगा देगी।
संजीव नें बताया कि कम्पनी अगलेदिन सुभह-सुभह हि इन लड़कियों कि जमानत लें लेगी किसी कों पता भि नहि चलेगा कि यह धंधा करते पकड़ी गईं हें। उसकेबाद कम्पनी इन्हें अपनी शर्तों पऱ ज़बरदस्ती धंधे पे लगा देगी औऱ शुरुआत शुरुआत मे यह रोज़ 3 सें 4 बार चुदवाई जाएँगी इसतरह फंसी हुई लड़कियों कों 1000 सें 3000 रुपए एक् चुदाई केँ मिलते हें जबकि ग्राहकों सें 5 सें 20 हज़ार तक लिए जाते हें।
संजय भि कम्पनी कां गुंडा हैं। गनीमत हैं तुम् बचगईं। अगर धंधा करना हैं तोँ कोईफोन गर्ल कम्पनी ज्वाइन करलो नहि तौ आहिस्ता जॉबकरो औऱ बॉय फ्रेंड बनाकर उनसे चुदो।
कोमल नें अपनेकान पकड़े औऱ बोलीं- मे तोबा करती हूं।
इसकेबाद मैंने कोमल सें कहा-आओ चलते हें। भाभी सें बसये कहना कि पुलिस कों ग़लतफहमी हौ गई थि, उसने मुझे छोड़ दिया।
बाइक पर्र कोमल चिपककर बैठ गई उसने मुझसे अपने पुराने व्यवहार कि माफ़ी मांगी औऱ बोलि- अगरआज मे जेलचली जाती तौ सर्टिफाइड रंडीबन जाती। मेरे जीजाजी मुझे चोदते थें इसलिये मुझे चुदने कि आदतपड़ गई थि यहा चुदाई देखकर मे चुदवाने लगी थि। महीने मे मुझे 60-70 हज़ार कि कमाई हौ रही थि। बालबाल बच गई नहि तौ परमानेंट रंडीबन जाती।
आधे घंटे मे हम् घऱ पहुँच गए। भाभी हम् दोनों कों देखकर बोलीं- कोमल क्याँ होँ गय़ा थां? तेरे होटल सें मोबाइल आया थां, तीन लड़कियाँ धंधा करतेहुए पकड़ी गई हें, उनमें तुँ भि हैं।
मे बीच मे बोल पड़ा-एसा कुछ नहि थां, होटल मे दो लड़कियाँ पकड़ी गईं थि, ये बहोत घबरा गई थि इसलिये वहा सें भाग गई थि औऱ मोबाइल ऑफकर दिया थां। हम् दोनों कप कॉफ़ी पीतेहुए आँ रहे हें, सभीठीक हैं।
अंदरआकर कोमल अपने कमरे मे चली गई औऱ मे अपने कमरे मे चला गय़ा।
चारु सें मेरा प्रेम बढ़ता जारहा थां, आजरात वोँ फिन मेरीगोद मे नंगी बैठी थि। जब भि आकाश 2-10 औऱ 10-6 कि शिफ्ट मे होते थें तोँ चारु अक्सर रात कों नंगी होकर मेरी गोदी मे बैठ जाती थि औऱ अपनी बुर चुदवाती थि।
मैंने उसे बताया कि एक् विद्यालय मे लाइब्रेरी अस्सिस्टेंट कि जरूरत हैं, उसे एक् फॉर्म उसेदे दिया औऱ बोला- तुम् इसेभरो, 10000 रुपए वेतन हैं, तुम् बीलिब होँ, सलेक्ट हौ जाओगी।
चारु बोलि- आकाश कों पताचल गय़ा तोँ बहोत मारेगा।
मैंने कहा-इसे यहींभरो, किसी कों नहि पता चलेगा। जब सलेक्ट होगीतब आगे देखेंगे।
चारु नें मेरीगोद मे बैठकर फॉर्म भर दिया। इसकेबाद रोज़ कि तरह मे चारु कि जवानी कां रस पीनेलगा।
कोमल नें जॉबबदल ली थि। अब उसने एक् मल्टीप्लेक्स मे स्टोर इंचार्ज कि जॉब ज्वाइन करली थि, उसकी एक् हफ्ते 8 सें 4 औऱ दूसरे हफ्ते 4 सें 10 रात तक ड्यूटी रहती थि।
दिनबीत रहे थें, मे चारु केँ संग मस्ती सें दिनकाट रहा थां। एक् बार शनिवार कां दिन थां नीरा भाभी कि ननदी केँ यहाकोई प्रोग्राम थां, तौ सपरिवार नीरावहा चली गई थि। चारु कों भि संग लेँ गई थि। आजरात पहलीबार मे अकेला थां।
रोज़ चारु कि बुर मारने सें मेरे लन्ड कि आदत खराब होँ रही थि, 10 बजेरात सें हि टनकने लगा। बिना चड्डी केँ पतला नेकर औऱ लंबा कुरता मैंने डालरखा थां। मे सोने कि कोशिश करनेलगा तभी मोबाइल बजा 11 बजने वाले थें।
नीरा भाभी कां थां।
वोँ बोलि- कोमल 11 बजेआती हैं, द्वार (दरवाज़ा) खोल देना।
मेरेमन केँ किसी कोने मे कोमल कों चोदने कां विचार आनेलगा। मैने सोचाआज चारु नं सही तोँ कोमल हि सही, दस मिनटबाद घंटीबजी द्वार (दरवाज़ा) खोला तौ सामने कोमल थि।
मुझे देखकर वोँ बोलीं- भाभी नहि हें क्याँ आज?
मैंने हँसते हुएकहा- आज मेरे सिवाकोई नहि हैं, डरलगरहा होँ तौ मे भि चला जाऊँ।
कोमल बोलीं- अब तोँ तुम् फंसगए आज तौ मे तुम्हें जाने नहि दूँगी। मजा आँ गय़ा आज पहलीबार खुलकर बातें हौ पाएंगी, आओ मेरे कमरे मे बैठते हें।
मे कोमल केँ छोटे सें कमरे मे आँ गय़ा जमीन पर्र मोटा गद्दा औऱ चद्दर पड़ी थि। पास मे हि छोटी सि किचन थि। कोमलदो कपकप कॉफ़ी बनालाई, हम् लोगकप कॉफ़ी पीनेलगे।
पड़ोसी किरायेदार की ख्वाहिश completee - Padosi Kirayedaar - Kahani ab aur interesting hogi
Relavant source : click here