बाप बेटी कां अनोखा प्रेम | incest indian sex story – New Episode
इसीतरह हम् बाप बेटी शरारत करतेमजे करतेरहे। थोड़ीदेर मे माँ भि आँ गई,.
मां केँ आने सें हम् दोनों बाप बेटी सावधान होँ गए।
बापू केँ सामने पड़ने पऱ वे औऱ मे दोनों एकदम नॉर्मल रहे।
फिर भी मैंने महसूस किया कि पिताजी चोरी सें कईबार मुझेदेख रहे थें, संग हि मुझसे किसी नाँ किसी बहाने ज़्यादा बात भि कररहे थें।
खैर … फिनरात हुईँ, सबने खानां-पीना खाया औऱ फिनरोज कि तरह हम् सभी कमरे मे आँ गए।
मैंने कपड़े पहने औऱ नाइट बल्बजला करबैड पऱ आँ गई.
ये सिलसिला दोदिन तक चला.
इस बीच बापू मुझसे अब पहले सें बहुत अधिकबात करने कि कोशिश करनेलगे।
यहां तक कि मेरे पिताजी अबकोई नाँ कोई बहाने मुझसे मजाक भि करनेलगे।
उनको भि अब शायदलग रहा थां कि घऱ मे हि एक् मस्तमाल चोदने केँ लिए हैं तौ उसका फायदा उठाया जाए।
उन्हें क्याँ पता कि यहां स्वयं उनकी बेटी कब सें चुदने कों सजधजकर बैठी हैं।
अब मे भि पिताजी केँ पास किसी नां किसी बहाने सें जानेलगी।
अगलेदिन साम कों मां कों थोड़ा बुखार आँ गय़ा थां। तोँ बापू नें मां कों दवाई दि औऱ एक् नींद कि गोली भि दे दि ताकि उनको आराममिल सके.
रात मे हम् सभी अपने कमरे मे चले गय़ा।
मैंने अपने कमरे कि लाइटबंद कर दि औऱ बैड पर्र आकरलेट गई।
मे अँधेरे मे हि पलंग पऱ लेटीरही।
मेरी आँखों मे नींद नहि आँ रही थि। कितने दिनों सें चुदाई नहि हुई थि तौ बुर मे खूब खुजली जौ होँ रही थि।
काफ़ी देर तक करवट बदल-बदल कर सोने कि कोशिश करनेलगी मगर नींद बिल्कुल नहि आँ रही थि।
आंखबंद कर सोने कि कोशिश कि तोँ पिछले 3-4 दिनों मे मेरेसंग जौ भि हुआ थां, यहसभी सोचकर मुझे थोड़ी उत्तेजना भि होनेलगी।
फिन मे फोन पोर्न मूवी देखते हुए अपनी बुर सहलाने लगी।
मूवी देखते हुए मेरी एक्साइटमेंट बढ़ने लगी तोँ मैंने अपनी पैंटी उतार दि।
अब मे केवल स्कर्ट औऱ टी-शर्ट मे थि।
जब सें मैंने बापू कों पटाने केँ बारे मे सोचा थां तब सें मे डैड-डॉटर वाली पॉर्न मूवी ज़्यादा देखने लगी थि।
तभी मैंने फोन मे समय देखा तोँ रात केँ 11.45 हौ गए।
मूवी देखते हुए मे अपनी नंगी बुर भि सहलाती जारही थि।
अभि मूवी देखते हुए थोड़ी देर बीता थां कि मुझेकुछ आवाज़ आयी।
मैंने वक्त देखा तोँ 12.15 बजरहे थें।
तोँ मैंने जल्दी फोनबंद किया औऱ आवाज़ सुनने कि कोशिश करनेलगी।
जैसे हि मेरी निगाह दरवाजे केँ नीचे सें गई तोँ परछाई सें समझ गई कि कोई खड़ा हैं।
मैंने जल्दी हाथ सें अपनी आंखों कों ढककर सोने कां नाटक करनेलगी।
मेरादिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़कने लगा।
मे समझ गई थि कि माँ केँ सो जाने केँ बाद मेरे बापू धीरे-धीरे सें मुझे सोती हुईँ देखने आए हें। बापू नें मां कों बुखार कि दवाई केँ संगसंग नींद कि भि तौ दवा दि थि। तौ शायद बापू हिम्मत करके मेरे कमरे मे आँ रहे थें.
अभि मेरीयह सोच हि रही थि कि कमरे कां दरवाजा धीरे-धीरे सें बहोत थोडा सां खुला।
बापू कों लगा होगा कि शायद अंदर नाइट बल्बजल रहा होगा।
मगर अंदर एकदम अंधेरा थां।
कुछदेर रुकने केँ बाद बापू नें दोबार धीरे-धीरे सें मेरानाम लेकर बुलाया- नीलम।। नीलम !
पिताजी शायद कन्फर्म करना चाहते हें कि मे जागी हूं याँ सोरही हूं।
जब मैंने कोई जवाब नहि दिया तौ उनको भरोसा हौ गय़ा कि मे गहरी नींद मे हूं।
इसकेबाद उन्होंने दरवाजे कों थोडा औऱ खोला औऱ धीरे-धीरे सें हाथ अंदरडाल कर स्विच कि तरफ लेँ जानेलगे।
मे हाथ सें आंखों कों ढके चोरी सें बापू कि हरकतदेख रही थि।
जैसे हि बापू कां हाथ स्विच कि तरफ बढ़ा मे समझ गई कि वे नाइट बल्बजला कर मुझे देख्ना चाहरहे हें।
ये सोचकर हि मेरादिल तेज़-तेज़ सें धड़कने लगा।
सच कहूं तोँ मुझे पसीना आनेलगा थां … पऱ मे चुपचाप उसीतरह लेटीरही।
बापू नें हाथ बढ़ाकर नाइट बल्बजला दिया। आज पिताजी स्वयं कुछ करनेजा रहे थें। वरना अभि तक तोँ मे हि बापू कों उत्तेजित कररही थि।
उन्होंने बनियान औऱ अंडरवियर पहनाहुआ थां।
1 मिनट तक वे दरवाज़े सें हि देखते रहे।
वहीं मेरीतरफ सें कोई हरकत नां होने पऱ उनकी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई थि औऱ वे दरवाज़े सें कमरे केँ अंदर मेरेबैड केँ पास आँ गए।
अब मे अपने बापू केँ सामने लेटी थि।
मेरी छोटी सि स्कर्ट मेरी जांघों कों पूराढक नहि पारही थि औऱ बापू पलंग केँ बगल खड़े होकर मेरी चिकनी नंगी जांघों कों निहार रहे थें।
तभी बापू नें धीरे-धीरे सें अपनाहाथ बढ़ाकर मेरी स्कर्ट कों ऊपरकर दिया।
मैंने अपनी पैंटी पहले हि उतारली थि जिससे मेरी नंगी बुर उन केँ सामने थि।
मेरी सांस तेज़-तेज़ सें चलरही थि।
बापू कों शायद उम्मीद नहि थि कि मैंने पैंटी नहि पहनी होगी।
इसलिये उनकी आंखें एकटक मेरी बुर पऱ टिकगईं।
अभि मे कुछ सोचती कि तभी अचानक पिताजी नें अपने दोनों हाथ सें अपने अंडरवियर कों पकड़कर नीचे खिसका दिया।
चड्डी नीचे खिसकते हि उनका लन्ड झटके सें बाहर् आँ गय़ा।
इसकेबाद वे अपने लन्ड कों आहिस्ता एक् हाथ सें हिलाने लगे।
पिताजी कों इसतरह अपनी बुर कों देखते हुएमुठ मारते देख एक्साइटमेंट औऱ अजीब सि फीलिंग सें मेरा जिस्म औऱ चेहरा गरम होनेलगा थां।
उधर पिताजी खिसककर बेड केँ बगल आँ गए औऱ मेरी बुर केँ पासआकर खड़े हौ गए।
मे बेड केँ किनारे कि तरफ हि थि इसलिये अब पिताजी केँ लन्ड औऱ मेरी जांघ केँ बीच मुश्किल सें 6 इंच कि दूरी थि।
चुपचाप मे उसीतरह लेटीरही।
मेरीतरफ सें कोई हरकत नां होतेदेख पिताजी कि हिम्मत बढ़ती जारही थि औऱ वे इतने एक्साइट हौ गए थें कि पिताजी झुककर अपने एक् हाथ सें धीरे-धीरे सें मेरी बुर केँ ऊपर मेरी झांटों कों सहलाने लगे।
बापू नें जैसे हि मेरी बुर कों छुआ, वैसे हि मेरी शरीर मे करंट सां दौड़ गय़ा।
मेरा उत्तेजना केँ मारे जिस्म हल्का सां हिल गय़ा.
येदेख बापूरुक गये औऱ जल्द सें उन्होंने अपना अंडरवियर ऊपरकर लिया।
वे डरगये थें कि कहीं मेरी नींद न् खुलजाए।
मगर लगभगआधा मिनट तक रुककर पिताजी नें रुककर चेक किया कि मे जग तोँ नहि गयीँ,।
मे भि सांस रोकेउसी तरह पड़ीरही।
मुझेलगा ऐसा नाँ होँ कि बापू घबराकर लौट जाएं।
खैर जब पिताजी नें सुनिश्चित कर लिया कि मे गहरी नींद मे हूं तोँ उन्होंने फिन सें अपने अंडरवियर कों थोडा नीचे खिसका कर लन्ड कों बाहर् निकाल लिया।
इस बार शायद पिताजी कोई रिस्क लेने केँ मूड मे नहि थें तोँ उन्होंने मुझेहाथ सें छुआ तोँ नहि मगरवे मेरी बुर कों देखते हुएमुठ मारने लगे।
अभि मुठ मारते हुए लगभग 2-3 मिनटहुए थें कि पिताजी केँ मुंह सें हल्की सि कराह निकली औऱ अचानक उनके लन्ड सें धार केँ संग वीर्य निकल गय़ा।
जैसे हि वीर्य निकला तौ पिताजी नें तेजी सें अपने लन्ड कों दोनों हाथ सें ढकनेलगे।
शायदवे नहि चाहरहे थें कि उनका वीर्य मेरेऊपर गिरे याँ कमरे मे इधर-उधर गिरे।
मगर उन्हें शायद अंदाजा नहि थां कि वे इतनी जल्द औऱ तेजी सें झड़ जाएंगे।
पिताजी केँ लन्ड कां गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी बुर, जाँघ औऱ चादर पर्र फैल गय़ा।
पहले पिताजी नें अपने लन्ड कों लुंगी सें पौंछा, फिन मेरी जांघ औऱ बुर पऱ फैल लन्ड केँ पानी कों धीरे-धीरे सें पौंछने कि कोशिश करनेलगे।
मगर मेरी नींद खुलने केँ डर सें बस हल्का सां हि पौंछकर वोँ तेजी सें कमरे सें बाहर् निकले औऱ फिन धीरे-धीरे सें दरवाजे कों बंदकर चलेगए।
अभि भि मेरी झांगों औऱ बुर पर्र पिताजी केँ वीर्य कां ढेरपड़ा थां।
कमरे सें बाहर् निकलते समय बापू नें घबराहट औऱ जल्दबाजी मे नाइट बल्बबंद नहि किया।
मे थोड़ी देरउसी तरह लेटीरही।
जब पिताजी केँ सीढ़ी सें नीचे उतरने कि आवाज़ सुनली, उसकेबाद मे धीरे-धीरे सें उठकर बैठी।
नीचे देखा तोँ फर्श पर्र भि वीर्य फैलाहुआ थां।
मैंने बाथरूम मे जाकर पहले अपनी जांघ औऱ बुर पर्र फैले वीर्य कों उंगली पऱ लेकर सूंघा। मुझे उसकी खुशबू अच्छी लगी.
फिन मैंने अपनी वोँ ऊँगली अपने मुंह मे डालली औऱ पहलीबार अपने प्यारे बाप कां वीर्य चखा।
पिताजी कां वीर्य बहोत हि मज़ेदार थां। मैंने पहलीबार अपने बापू कां माल कां स्वाद लिया थां। फिन तोँ मैंने अपने सारे जिस्म पऱ सें वीर्य चाटचाट करसाफ किया।
फिन कमरे मे आकरबेड कि चादर उठाई औऱ उसी चादर सें फर्श कों भि साफकर रख दिया औऱ फिन दूसरी चादर बिछाई औऱ फिन कपड़े पहनकर सो गई।
बाप बेटी कां अनोखा प्रेम | incest indian sex story – New Episode
अगलेदिन सुभह 8 बजे मेरी नींद खुली।
मे उठी औऱ हाथ-मुंह धोकर गंदी वाली चादर कों लेकर नीचे आँ गई।
नीचेआई तौ देखा कि पिताजी गरमचाय पीतेहुए पेपरपढ़ रहे थें।
मां भि उनकेसंग बैठकर गरमचाय पीरही थि।
मेरेहाथ मे चादरदेख कर पिताजी थोड़े सकपका गए.
अभि मे कुछ कहती, तभी मां बोलि- नीलम बेटी, यह चादर क्यूं लेकरआई हौ?
मैंने पिताजी कि ओर देखा तोँ वे अखबार पर्र आंख गड़ाये हुए थें मगर ध्यान मेरीतरफ हि थां।
उन्हें देखकर साफपता चलरहा थां कि वे घबराए हुए हें।
उन कि हालतदेख कर मुझेमन हि मन हंसी आँ रही थि, फिन भि मे संभलती हुईँ बोलि- अरेये गंदी हौ गई थि मां!
इतनाकह कर मे जानबूझ करचुप होँ गई।
मे सोचरही थि कि अब माँ पूछेंगी जरूर कि केसे गंदी होँ गई।
मां बोलीं- अभि तौ कल सुभह हि बिछाई थि इतनी जल्द केसे गंदी होँ गई?
मैंने जानबूझ कर थोडा हड़बड़ाते हुएकहा- अरे … कल सोनेजा रही थि तभी गिलास कां पानीगिर गय़ा थां इसलिये इसेहटा दिया थां औऱ दूसरी चादर बिछाकर सो गई थि।
दरअसल मे पिताजी कों यह जताना चाहरही थि कि मे भि माँ सें झूठ बोलकर कुछ छुपारही हूं।
मैंने पिताजी कि ओर देखा तोँ वे अभि भि पेपर पर्र नज़र गड़ाये बैठे थें।
मेरा जवाबसुन करवे शायद थोड़े नॉर्मल होँ गए।
फिरभी वे अभि भि मुझसे नज़रबचा रहे थें।
मुझेलगा कि कहींऐसा नां होँ कि बापू अधिक घबरा जाएं औऱ फिनबात आगे हि नां बढ़े औऱ यहीं पऱ ख़त्म होँ जाए।
इसलिये मैंने पिताजी कि घबराहट दूर करने केँ लिए स्वयं हि उनसेबात करनेलगी औऱ कहा-
"पिताजी! आज बड़ीदेर तक गरमचाय पीरहे हें बापू … आपको दफ़्तर नहि जानां क्याँ?"
औऱ फिन मे जाकर उनकेबगल बैठ गई औऱ गरमचाय पीनेलगी।
बापू थोड़े नॉर्मल होतेहुए बोले-अरे अभि 8 बजे हें
फिन मैंने औऱ भि थोड़ी इधर-उधर कि बातें कर उनकी घबराहट एकदमदूर करने कि कोशिश कि।
उसकेबाद पिताजी रेडी होकर दफ़्तर चलेगए।
मे भि अपने कमरे मे आँ गयीँ,.
मेरा तोँ दिन हि नहि कटरहा थां।
बससोच रही थि कि जल्द सें रात हौ जाए ताकिपता चले कि आजफिन पिताजी आते हें याँ नहि।
किसीतरह रात हुईँ औऱ खानां खाकर बापू-मां भि अपने कमरे मे चलेगए औऱ मे भि ऊपर अपने कमरे मे आँ गई।
मैंने कपड़े बदले औऱ छोटी स्कर्ट औऱ टी शर्टपहन ली।
टी शर्ट औऱ स्कर्ट केँ नीचे मैंने ब्रा औऱ पैंटी नहि पहनी क्योंकि कल जौ हुआ थां वोँ तोँ अचानक हुआ थां मगरआज मैने जानबूझकर इसलिये नहि पहना कि बापू कों लगे कि मे रोज बिना पैंटी केँ सोती हूं।
फिन नाइट बल्ब जलाकर कर लाइट कों ऑफकर दिया।
अँधेरा रहेगा तोँ बापू कों नाइट बल्बऑन करना पड़ेगा इसलिये मैंने पहले हि नाइट बल्बऑन कर दिया थां।
संग हि मैने चादर केँ ऊपर एक् तौलिया बिछाकर लेटी थि ताकिअगर आजफिन बापू केँ लन्ड सें पानी निकले तोँ बैड पऱ नाँ पड़े।
कुल मिलाकर मे बापू कों ये अहसास दिलाना चाहरही थि कि क्याँ होने वाला हैं, यह मे जानरही हूं।
आज क्याँ होगा, यह सोचकर मेरादिल जोरजोर सें धड़करहा थां।
अपनी बुर सहलाते हुए बेसब्री सें पिताजी कां इंतजार करनेलगी।
रात केँ लगभग पौने एक् बजे मुझे सीढ़ियों सें हल्की सि आवाज़ आयी.
मे समझ गयीँ, कि बापू आँ रहे हें।
फिनकल रात कि तरह मैंने पीठ केँ बललेट गयीँ, औऱ अपनेहाथ कों मोड़कर आँखों कों ढक लिया कि चोरी सें उनकी हरकतों कों देख सकूं। बापू नें धीरे-धीरे सें कमरे कां दरवाजा खोला, फिन 10-15 सेकेण्ड तक दरवाजे पर्र हि रुकेरहे।
शायद उन्हें उम्मीद नहि थि कि नाइट बल्ब पहले सें जलरहा होगा।
खैर 10-15 सेकेण्ड रुकने केँ बादवे धीरे-धीरे सें दबे पाँव कमरे मे आये औऱ बेड केँ पासआकर खड़े होँ गये।
आज पिताजी नें हाफ पैंट औऱ बनियान पहनाहुआ थां।
पिताजी बेड केँ पास बिलकुल मेरेबगल खड़े थें।
आंखों कों मैंने हाथों सें ढकरखा थां, इसवजह सें मुझे उनका चेहरा तोँ नहि दिखरहा थां मगरपेट सें नीचे कां पूरा हिस्सा दिखरहा थां।
मैंने स्कर्ट औऱ टी शर्ट पहनी थि … बापू लगभग 15-20 सेकेण्ड तक ऐसे हि खड़ेरहे।
फिन धीरे-धीरे सें झुककर उन्होंने मेरी स्कर्ट केँ निचले हिस्से कों पकड़ा औऱ धीरे धीरेऊपर कि तरफ खिसकाने लगे।
मेरादिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़करहा थां।
फिन पिताजी नें स्कर्ट कों पूराऊपर कि तरफ खिसका कर मेरेपेट पऱ कर दिया।
अब आज एक् बारफिन मेरी नंगी बुर पिताजी कि आँखों केँ सामने थि।
पिताजी नें कल कि तरह बुर याँ झांटों कों छूने कि हिम्मत नहि दिखाई।
उसकेबाद बापू सीधे खड़े होँ गये औऱ फिनवही हुआ जोँ मे सोचरही थि।
उन्होंने अपनीहाफ पैंट कों पकड़कर नीचे खिसका दिया।
जैसे हि उन्होंने पैंट नीचे खिसकाया उनका लण्ड एक् झटके सें बाहर् आँ गय़ा।
उनका लण्ड लगभग-लगभग खड़ा थां।
बापू धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने लण्ड कि चमड़ी कों आगे पीछेकर मुठ मारने लगे।
तभी अचानक पिताजी नें लण्ड कों हिलाना छोड़ दिया औऱ अपने दोनों हाथ कों धीरे-धीरे सें बेड केँ किनारे रखा औऱ फिन नीचे झुकने लगे।
मे समझ नहि पायी कि वे क्याँ करनेजा रहे हें।
तभी मैंने देखा कि पिताजी अपना मुंह मेरी बुर केँ पास लाकरनाक सें मेरी बुर कों सूंघने लगे।
मेरी सांस धौंकनी कि तरहचल रही थि।
मे बिना हिले डुलेसो रही थि।
लगभग 15 सेकेण्ड तक मेरी बुर कों सूँघने केँ बादवे वापस खड़े हौ गये।
इस बारजब खड़ेहुए तोँ उनका लण्ड एकदम टाइट खड़ा थां।
अब बापू थोडा आगे खिसकर बेड सें एकदमसट कर खड़े होँ गये।
उनका लण्ड लगभग-लगभग मेरी बुर केँ ठीकऊपर थां।
अबवे तेजी सें अपने लण्ड कों हिलाकर मुठ मारने लगे।
लगभग 5 मिनट तक बीते होंगे कि उन्होंने अपनीकमर कों तेजी सें हिलाना शुरुआत किया औऱ अचानक तेज झटके औऱ धार केँ संग रुक-रुक कर उनके लण्ड सें पानी निकलने लगा जौ मेरी बुर, जाँघ, स्कर्ट औऱ तौलिये पऱ फैल गय़ा।
झड़ने केँ बाद भि लगभग 4-5 सेकेण्ड तक बापूउसी तरह लण्ड कों पकड़े खड़ेरहे औऱ फिन अपने पैंट सें कों ऊपर खिसका करउसी सें लण्ड कों साफकर पूरापहन लिया।
औऱ फिन मेरेऊपर बुर औऱ जांघ पऱ फैले लण्ड केँ पानी कों बिनासाफ किये कमरे सें बाहर् निकले औऱ धीरे-धीरे सें दरवाजा बंदकर चलेगये।
इसकेबाद मे धीरे-धीरे सें खाट सें उठी औऱ दरवाजे कों अंदर सें लॉक करके लाइट जलाई।
मैंने देखा कि बापू केँ वीर्य कि कुछ बूंद नीचे जमीन पऱ भि गिरी थि।
चूंकि मैंने चादर केँ ऊपर तौलिया डाल लिया थां इसलिये चादरबच गई थि।
मगर तौलिये औऱ स्कर्ट पऱ बापू केँ लन्ड कां पानी पड़ा थां।
मैंने बाथरूम मे पानी सें अपनी बुर औऱ जांघ कों साफ किया औऱ फिन फर्श पऱ पड़े वीर्य कों तौलिये सें साफ किया औऱ दूसरे कपड़े पहने।
फिन फोन मे सुभह 8 बजे कां अलार्म लगाकर मे सो गई।
मैंने 8 बजे कां अलार्म इसलिये लगाया थां क्योंकि यही वक्त थां जब बापू औऱ माँ गरमचाय पीते हें। सुभह 8 बजे अलार्म बजने पऱ नींदखुल गई।
मे उठी औऱ धीरे-धीरे सें कमरे कां दरवाजा खोला औऱ चोरी सें नीचे झांककर देखा तौ पिताजी औऱ माँ डाइनिंग टेबल पऱ गरमचाय पीरहे थें।
मेरी योजना थि कि जैसे मे कल चादरकर नीचे गई थि, उसीतरह आज स्कर्ट औऱ तौलिया लेकर जाऊंगी औऱ मां सें धोने कों कहूंगी।
मे वापस कमरे मे आई औऱ स्कर्ट औऱ तौलिया लेकर नीचे पहुंची।
बापू मेरेहाथ मे स्कर्ट औऱ तौलिया देखकर फिन थोड़े परेशान हुए.
मगर मैंने बिना उनकीतरफ देखे मां सें कहा- माँ, यह स्कर्ट औऱ तौलिया मशीन मे धोने केँ लिएडाल देना।
मां बोलीं- यह तौ साफकर केँ रखी थि गंदी कैसी हौ गई?
मैंने कहा-अरे अभि बाथरूम मे लेकर गई थि तोँ नीचेगिर गय़ा थां।
पिताजी फिनसमझ रहे थें कि मे झूठबोल रही हूं।
मे पिताजी कों यही जताना भि चाहरही थि कि मे जानबूझ करझूठ बोलरही हूं।
फिन मे एकदम नॉर्मल होकर पिताजी सें बात करने लगती जैसेकुछ हुआ हि न् हौ।
अब मे बिना पैंटी केँ सोती … कभी केवल कुर्ती मे तौ कभी केवल लांग टी-शर्ट मे!
औऱ रोजरात मे बापू मेरे कमरे मे आते औऱ मुझे नंगी देखकर मुठ मारकर चले जाते।
खैरइस बीच पिताजी कां डर बहुतकम हौ गय़ा थां क्योंकि वोँ अपना वीर्य मेरी बुर औऱ जांघ केँ संग हि जौ कुछ भि मे पहनी रहती चाहे स्कर्ट, कुर्ती, टीशर्ट उस पऱ गिराकर चले जाते थें.
उन्हें डर नहि लगता थां कि मे जगूंगी औऱ अपनेऊपर लन्ड कां पानी देखूंगी तौ क्याँ सोचूंगी।
फिरभी वे अभि भि मुझे छूने कि हिम्मत नहि करपारहे थें.
बसआते थें औऱ मुझे नंगी देखकर मुठ मारकर चले जाते थें।
औऱ मे रोज उठकर अपने जिस्म पर्र औऱ जमीन पऱ फैले वीर्य कों साफ करती।
सुभह वीर्य वाले कपड़े लेकर बापू कों सुनाती हुईँ मां कों धोने केँ लिए देती औऱ हमेशा कोई नं कोईझूठ बोलती।
ऐसा लगभग 5-6 दिन तक चलतारहा।
मगर मे अब थोडा औऱ बातआगे बढ़ाने केँ मूड मे थि।
मगरसमझ मे नहि आँ रहा थां कि क्याँ करूं।
बाप बेटी कां अनोखा प्रेम | incest indian sex story – New Episode
पिताजी कों कन्फर्म हौ गय़ा थां कि उनकायह साराखेल मे जानती हूं औऱ मे भि मजे लेँ रही हूं उनकीइस हरकतों कां।
फिन अगली सुभहजब मे नीचे गयीँ, तोँ रोज कि तरह माँ-पिताजी बैठकर गरमचाय पीरहे थें।
तभी मां बोलीं- आज दोपहर तक अम्मा (मेरी नानीमा) आँ रही हें,
गुडडू (मेरे छोटे वाले मामाजी) उन्हें लेकर आएंगे। तोँ पिताजी दफ़्तर रेलवे स्टेशन जाएंगे उन्हें लेने!
मैंने हैरानी सें पूछा- अचानक केसे नानीमा केँ आने कां प्लान बन गय़ा?
मां बोलीं- अरेकल रात 12 बजे केँ लगभग गुड्डू कां मोबाइल आया थां कि अम्मा कि तबीयत थोड़ी खराबलग रही हैं तोँ आजवे उन्हें लेकर डॉक्टर कों दिखाने आएंगे।
मे किचन मे माँ कि सहायता करनेचली गई।
नानीमा औऱ मामाजी केँ आने कि बात सुनकर मेरामूड थोडा ख़राब होँ गय़ा थां क्योंकि जब भि मामाजी औऱ नानीमा आते थें तौ मां औऱ नानीमा बेडरूम मे बापू नीचे लॉबी मे दीवान पर्र औऱ मामाजी कमरे मे ऊपर सोते थें।
मुझेलग रहा थां कि जब तक नानीमा औऱ मामाजी रहेंगे तब तक रात वाला प्लान नहि हौ पाएगा.
क्योंकि अभि तोँ माँ केँ सो जाने केँ बाद पिताजी रात मे ऊपर आँ जाते थें.
मगरअब ऊपर मामाजी सोएंगे तोँ पिताजी डर सें नहि आएंगे क्योंकि मामाजी अक्सर रात मे पानी पीने याँ बाथरूम जाने केँ लिए अवश्य उठते हें।
लगभग 3 बजे पिताजी, नानीमा औऱ मम्मी कों लेकरघऱ आँ गए।
थोड़ी देरगरम चाय वगैरह पीने केँ बादफिन पिताजी, मम्मी औऱ नानीमा डॉक्टर केँ यहाचले गए दिखाने।
साम कों लगभग 6 बजेवे लोग लौटे तौ बताया कि डॉक्टर नें दवा दि हैं औऱ एक् हफ्ते बादफिन बुलाया हैं। कोई घबराने वालीबात नहि हैं।
फिन मामाजी जल्दी वापस जाने केँ लिए रेडी हौ गए बोले कि 8 बजे वाली ट्रेन पकड़कर वे वापसचले जाएंगे।
नानीमा कों यहीं रुकना थां.
एक् हफ़्ते बादवे वापसआकर डॉक्टर कों दिखा कां नानीमा कों वापस लें जायेंगे।
मामाजी केँ जाने केँ बाद मां जल्दी खाने कि तैयारी मे लग गई क्योंकि नानीमा ज़्यादा देर सें नहि खाती थि।
रात मे हम् सबसंग खानां खारहे थें.
तभी पिताजी नें मां सें कहा-ऐसा हैं, अम्मा जी औऱ तुम् यहां नीचेसो जानां। मे ऊपर सोनू वाले कमरे मे सो जाऊंगा।
मां बोलीं- ठीक हैं।
मेरी तौ ख़ुशी कां ठिकाना हि नहि रहा, मे तोँ समझरही थि कि बापूऊपर सोने केँ लिए प्लान क्यूं कररहे हें।
रात 9.30 बजे तक हम् सबने खानां खा लिया।
फिन मे माँ केँ संग किचन मे काम करनेलगी।
बापू टेलीविज़न देखने लगे औऱ नानीमा कमरे मे चली गई।
लगभग 10 बजे बापूऊपर जातेहुए माँ सें बोले- मे सोनेजा रहा हूं।
औऱ फिन मुझसे बोले- बेटा ऊपर आनां तोँ मेरेलिए पानी लेती आनां।
मैंने कहा-ठीक हैं बापू!
औऱ फिन पिताजी सोनेचले गए।
मे थोड़ी देर किचन कां काम ख़त्म कर नानीमा केँ पास कमरे मे आँ गई औऱ उनसेबात करनेलगी।
थोड़ी देर मे मां भि कमरे मे आँ गई।
फिन हम् तीनों बैठकर बात करनेलगी।
लगभग 11 बजे मे माँ सें बोलीं- मे सोनेजा रही हूं अब!
मां बोलीं- अपने बापू केँ लिए पानी लेती जानां!
मे ‘ठीक हैं’ बोलकर कमरे सें निकलकर किचन मे पानी लेनेचली गई।
पानी लेकर मे जैसे हि सीढ़ी केँ पासआई तौ ऊपर मैंने पिताजी कों तेजी सें पीछे हटतेहुए देखा।
फिर भी बापू नहि जान पाये कि मैंने उन्हें देख लिया हैं।
मुझेलगा कि शायदवे पानी केँ लिए बुलाने आँ रहे होंगे मगर मुझे पानी लेकेआती देखकर वापसचले गये होंगे।
मे ऊपरआयी तोँ देखा कि लॉबी कि लाइटबंद थि औऱ बापू केँ कमरे कां दरवाजा भि बंद थां।
तब मे सोचने लगी कि अभि तोँ पिताजी यहीं खड़े थें मगर मुझे देखने केँ बावजूद कमरे मे जाकर दरवाजा क्यूं बंदकर लिया हैं।
मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि पिताजी नें ऐसा क्यूं किया हैं।
मगर दिमाग़ मे यह भि चलरहा थां कि कहींऐसा तोँ नहि कि बापूकुछ प्लान बनाकर बैठेहों।
मेरादिल धड़कने लगा.
मे दरवाजे केँ पास गई औऱ धीरे-धीरे सें डोर हैंडल घुमाकर दरवाजे कों थोडा सां खोला तौ देखा कि कमरे मे नाइट बल्बजल रहा हैं औऱ पिताजी पलंग पऱ सोरहे हें।
तब मे दरवाजा पूराखोल कर अंदर आँ गई औऱ धीरे-धीरे सें 2 बार पिताजी कों आवाज़ दि.
मगरवे जगे नहि।
मे समझ गई कि बापूजगे हें मगर सोने कां नाटककर रहे हें।
मगर मे अभि भि समझ नहि पारही थि कि वे आखिरऐसा क्यूं कररहे हें।
फिन मे उनकेबैड केँ पास गई, बगल कि टेबल पर्र पानी कां गिलास रख दिया औऱ उनकीतरफ देखा तौ वेउसी तरहआंख बंदकर पीठ केँ बल लेटेहुए थें।
उन्हें अपने एक् हाथ कों अपने माथे पर्र इसतरह रखना थां कि उनकीआंख छुप गई थि।
वेये दिखाने कि कोशिश कररहे हें कि वे गहरी नींद मे हें।
अचानक मेरी निगाह नीचे उनकीकमर कि तरफगईं तोँ मेरादिल धक्क सें रह गय़ा।
दरअसल पिताजी लुंगी पहनकर सोरहे थें औऱ उनकी लुंगी आगे सें खुलकर अगल-बगल हटी थि औऱ उसमें सें उनका लन्ड आधा बाहर् निकला हुआ थां।
पिताजी नें अंडरवियर भि नहि पहना थां.
अब मे सारा माजरा समझ गई।
पिताजी वहीकर रहे थें जौ मे रात मे उनकेसंग करती थि।
थोड़ी देर तक मे ऐसी हि खड़ीरही।
मे समझ नहि पारही थि कि क्याँ करूं।
एक् तरीके सें पिताजी मुझे अपना लन्ड देखने कां खुला निमंत्रण देरहे थें।
मेरादिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़करहा थां।
मेरी नज़र उनके लन्ड पर्र गई तौ देखा कि इसबार वे लुंगी सें लगभग-लगभग पूरा बाहर् आँ गय़ा थां औऱ उसमें हल्का सां तनाव भि थां।
मे कमरे केँ अंदर आँ गई औऱ दरवाजा धीरे-धीरे सें बंदकर दिया औऱ फिन धीरे-धीरे सें बापू कों आवाज़ दि- बापू … पिताजी!
बापू बिनाकुछ बोले लेटेरहे.
वेये जताना चाहरहे थें कि वे बेहद गहरी नींद मे हें।
मे बेड केँ पास गई औऱ थोड़ी देर खड़ीरही।
मेरी नज़रकभी पिताजी केँ लन्ड पऱ तोँ कभी उनके मुँह कि तरफजा रही थि।
मे समझ नहि पारही थि कि क्याँ करूं औऱ केसे करूं।
फिन मैंने हाथ बढ़ाकर बापू केँ घुटनों केँ पासरखा औऱ धीरे-धीरे सें हिलाए एक् बारफिन उन्हें जगाने कि कोशिश कि औऱ आवाज़ दि- बापू … पिताजी!
मगर पिताजी कुछ नहि बोले औऱ उसीतरह लेटेरहे।
जब बापूकुछ नहि बोले तौ मे पलंग केँ ठीकबगल मे उनके लन्ड केँ पास जाकर घुटनों केँ बलबैठ गई,।
अब पिताजी कां लन्ड ठीक मेरे चेहरे केँ सामने थां।
मेरी निगाह बापू केँ लन्ड पर्र थि जिसमें अब तनावबढ़ रहा थां।
मेरादिल जोर-शोर सें धड़करहा थां औऱ सांस धौंकनी कि तरहचल रही थि।
फिरभी इतनीदेर मे मेरी उत्तेजना औऱ हिम्मत दोनों बढ़ गई थि।
मैंने एक् हाथ सें पिताजी केँ लन्ड कों धीरे-धीरे सें पकड़ा।
जैसा हि मैंने लन्ड कों पकड़ा, लन्ड हल्के सें झटके केँ संग औऱ टाइट होँ गय़ा।
थोड़ी देरइसी तरह लन्ड कों पकड़े रहने केँ बाद मैंने लन्ड कों पूरा मुट्ठी मे भर लिया औऱ आहिस्ता लन्ड कों हिलाने लगी।
अब तक पिताजी कां लन्ड एकदमगरम औऱ पत्थर कि तरह हौ चुका थां।
मेरामन कररहा थां कि लन्ड कों मुँह मे भरकरचूस लूँ।
मुझसे अब बर्दाश्त भि नहि हौ रहा थां।
मैंने लन्ड कों हिलाना बंदकर दिय औऱ उसकी त्वचा कों पूरा नीचे खींच दिया।
नाइट बल्ब कि रोशनी मे लन्ड कां मोटा सां गुलाबी सुपारा फूलकर चमकरहा थां, जिसेदेख कर मेरे मुँह मे पानी आँ गय़ा।
मे झुकी औऱ जीभ निकलकर लन्ड केँ सुपारे कों हल्का सां चाट लिया।
मैंने जैसे हि बदन सें पिताजी केँ लन्ड कों चाटा मेरे जिस्म मे हल्की सि झुरझुरी दौड़ गई.
वहीं पिताजी केँ जिस्म मे हल्का झटकालगा।
ऐसालग रहा थां कि शायद पिताजी कों भि उम्मीद नहि थि कि मे उनके लन्ड कों चाटूंगी भि!
दो-तीन बार लन्ड केँ सुपारे कों जीभ सें आइसक्रीम कि तरह चाटने केँ बाद मेरी हिम्मत औऱ एक्साइटमेंट दोनों बढ़ गई, थि।
वैसे भि बापू औऱ मे दोनों एक् दूसरे सें खेलरहे थें, यह पिताजी औऱ हम् दोनों जानरहे थें।
इसवजह सें अंदर कां डर समाप्त होँ गय़ा थां।
लगभग 20-25 सेकेण्ड तक बापू केँ लण्ड कों आइसक्रीम कि तरह चाटने केँ बादथूक सें चिकने हौ चुके उनके सुपारे कों पूरा मुंह मे भरकर लॉलीपॉप कि तरह चूसने लगी।
शायद पिताजी केँ लन्ड सें थोडा-थोडा पानी निकलरहा थां क्योंकि लन्ड चूसते हुए मुझे हल्का-हल्का नमकीन कां स्वाद भि आँ रहा थां।
मेरी तोँ जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई थि।
मे अब तेजी सें मुंह कों आगे पीछेकर लन्ड चूसरही थि.
अभि लन्ड चूसते हुए 2 मिनट क्या बात है हुए कि बापू हल्का-हल्का अपनीकमर कों हिलाने लगे।
मे समझ गई कि वे झड़ने वाले हें.
इसलिये मे औऱ तेज-तेज उनके लन्ड कों हाथ सें हिलाते हुए चूसने लगी।
तभी बापू कां बदन एकदम अकड़ गय़ा औऱ वे तेजी सें अपनेकमर कों हिलाने लगे औऱ मेरे मुंह मे झड़गए।
उनके लन्ड सें तेजधार निकली औऱ सीधा मेरेगले मे चली गई,, जिसे मे गटक गई।
उसकेबाद पिताजी नें हल्का-हल्का झटका लेतेहुए अपने लन्ड कां पूरा पानी मेरे मुंह मे निकाल दिया।
लन्ड केँ गाढ़े नमकीन पानी सें मेरा मुंह पूराभर गय़ा.
थोडा पानी मेरे मुंह सें निकलकर बाहर् मेरेहाथ औऱ लन्ड पर्र भि फ़ैल गय़ा.
बाकी जौ मुंह मे बचा थां, वोँ सारा नमकीन पानी बिना लन्ड कों मुंह सें निकले, एक् हि झटके मे पी गई।
पूरा पानी निकल जाने केँ बाद भि मेरे लन्ड कों मुंह मे लेकरकुछ देर चूसती रही।
उसकेबाद मैंने लन्ड कों मुंह सें निकाला औऱ बापू कि लुंगी पर्र हि अपनेहाथ कां साफ किया औऱ उनके लन्ड कों भि हल्का सां पौंछकर साफकर दिया।
फिन मे धीरे-धीरे सें खड़ी हुइ औऱ दरवाजा खोलकर बाहर् आँ गई औऱ वापसबंद कर अपने कमरे मे आँ गई औऱ दरवाजा बंदकर सीधाखाट पऱ लेट गई।
मुझे तोँ विश्वास हि नहि होँ रहा थां कि मे अभि-अभि अपने बापू कां लन्ड चूसकर आई हूं।
मेरे मुँह मे अभि भि लन्ड केँ पानी कां थोडा नमकीन स्वाद थां.
अभि तक मैंने यहसभी पिताजी बेटी सेक्स मूवी देखी थि औऱ मे आज स्वयं हि अपने बापू कां लन्ड चूस केँ आँ रही थि … ऐसालग रहा थां जैसा मेराकोई सपनादेख रही हूं।
वैसे मुझेलग रहा थां कि शायद पहलीबार मैंने बापू कां लन्ड चूसा थां इसलिये एक्साइटमेंट मे बापू जल्दझड़ गए थें।
वहीं मेरी बुर पूरीतरह पनिया गई थि.
मे पिताजी केँ लन्ड कों चूसने केँ बारे मे मुझेयाद कर अपनी बुर कों सहलाने लगी.
मेरामन कररहा थां कि एक् बारफिन वापस कमरे मे जाऊं औऱ लन्ड कों दोबारा मुंह मे लेकर चूसते हुए अपनी बुर सहलाऊं।
यहीं सोचते-सोचते मे उत्तेजित होनेलगी औऱ तेजी सें हाथ सें अपनी बुर रगड़ने लगी.
औऱ फिन मेरी बुर नें भि पानी छोड़ दिया।
बुर कां पानी निकलने केँ बाद मे आंखबंद करलेट गयीँ, औऱ मुझेकब नींद आँ गई पता हि नहि चला।
बाप बेटी कां अनोखा प्रेम | incest indian sex story - Aage kya hua? Next part padhiye
बहोत हि कामुक औऱ मजेदार भाग हैं ! आख़िर शुरुआत होँ हि गई दोनों कि तरफ़ सें !
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