भाभियों के साथ मस्ती completee - भाभी - Episode 1
भाभियों केँ संग मस्ती
मेरानाम किशोर हैं औऱ मे बिहार केँ पटना मे रहता हूं। मेरा गाँव पटना सें 40 कि॰मी॰ दूर थां। जहां पे यह अनोखी घटना घाटी। मे अपना परिचय देता हूं, मेरी उम्र 22 साल, कद 5’9”, वजन 60 किलो, अथलेटिक बाडी, लण्ड कां साइज 6” हैं। तोँ अब मे किस्सा पे आता हूं।
बातआज सें एक् साल पहले कि हैं। उससमय मेरीउमर 21 साल थि। उन दिनों मे अपने पुराने गाँव मे गय़ा हुआ थां। जिसकी आबादी लगभग 3000 लोगों कि थि। गाँव मे मेरे चाचा-चाची, उनकेतीन बेटे औऱ उन तीनों कि बीवियां रहते हें।
यह स्टोरी उन भाभियों सें हि जुड़ी हैं। मेरी बड़ी भाभी कां नाम राशि, उम्र 30 साल, रंग गोरा, फिग साइज 35-29-36; दूसरी भाभी प्रीति, उम्र 26 साल, रंग मीडियम सांवला सां, फिग 34-26-34; तीसरी औऱ छोटी भाभी कां नाम सोनिया, उम्र केवल 24 साल, एकदम गोरी-गोरी औऱ सेक्सी, फिग 36-26-36, औऱ एकदम भारी चूतड़।
मुझेयह मालूम नहि थां कि वोँ सभी बहोत सेक्सी हें। क्योंकी गाँव मे दर्शल इतनी आजादी नहि होती हैं। लोग बहोत संकुचित रहते थें। औरतों कों बाहर् जानां कम रहता थां, केवल सब्ज़ी हि लाने जाते थें याँ कभी तालाब पे पानी भरने याँ कपड़े धोने।
हमारे अंकल केँ घऱ केँ पीछे हि एक् तालाब थां जौ कि मात्र 100 फुट हि दूर थां। बीच मे औऱ किसी कां घऱ नहि थां। केवलकुछ पेड़ पौधे थें। हमारी भाभीरोज उधर हि कपड़े धोने जाती थि। सब भाभियां कम बाँट लेती थि। कोई किचन, तौ कोई कपड़े धोने कां, तोँ कोई बर्तन औऱ सफाई कां।
जैसे हि मे गय़ा उनसब लोगों नें मुझे बड़े प्रेम सें आमंत्रित किया।
मेरी भाभियां मजाक भि करने लगीं कि बहोत बड़ा होँ गय़ा हैं, विवाह केँ लायक। तोँ मे जाकरसब सें मिलने केँ बाद सोचा थोडा फ्रेश होता हूं। मैंने अपनी बड़ी भाभी सें बोला- मुझे नहाना हैं।
उसने बोला-इधर नहाना हैं याँ तालाब पे जानां हैं?
मे- अभि इधर हि नहा लेता हूं तालाब कल जाऊँगा।
वोँ बोलीं- “ठीक हैं…” औऱ उसने पानीदे दिया।
मे सब भाभियों कों देखकर उतेजित हौ गय़ा थां तोँ मैंने बड़ी भाभी कों याद करतेहुए मूठ मारी औऱ स्नान करके जैसे हि वापसआया, बड़ी भाभी बोलीं- क्यूं देवरजी इतनीदेर क्यूं लगा दि? कहीकोई प्राब्लम तौ नहि? अगर हौ तौ बता देना, शायद हम् आपकीकोई सहायता कर सकें?ऐसा बोलकर सब भाभियां हँसने लगीं। मुझे बहोत आश्चर्य हुआ औऱ खुशी भि।
दूसरे दिन सुभह मे 7:00 बजेउठा। ब्रश करके ब्रेकफास्ट किया।
तभी बड़ी भाभी कपड़े कि पोटली बना केँ तालाब पे धोने कों जारही थि। वोँ बोलीं- “चलो देवरजी, तालाब आनां हैं क्याँ?”
मे तौ वहीराह देखरहा थां कि कब मुझे वोँ बुलाएं। मैंने हाँकहा औऱ उपने कपड़े औऱ तौलिया लेकर उनकेसंग चल पड़ा। रास्ते मे भाभीखुश दिखरही थि। उसने थोड़ी इधर-उधर कि बातें कि। जब हम् तालाब पहुँचे। ओह्ह… माँ गोड… मे क्याँ देखरहा हूं? मेरी तौ आँखें फटी कि फटीरह गईं। वहां पे 10-15 औरतें थि औऱ उनसभी मे सें 6-7 नें तोँ ऊपर ब्लाउज़ नहि पहना थां, मेरेकदम रुक हि गये थें।
तौ भाभी नें पीछे मुड़ केँ देखा औऱ बोलीं- क्यूं देवरजी क्याँ हुआ, रुक क्यूं गये?
मुझे मालूम थां कि वोँ मेरे रुकने कि वजह जानती थि, मगर जानबूझ कर मुझेऐसा पूछरही थि। मे बोला- “भाभीयहा पर्र तोँ…” बोलकर मे रुक गय़ा।
भाभी नें पूछा- क्याँ? यहा पऱ तौ क्याँ?
मैंने बोला-सभी औरतें नंगीनहा रही हें, मे केसेआऊँ?
वोँ बोलीं- तोँ उसमें शर्माने कि क्याँ बात हैं? तुम् अभि इतने बड़े कहां हौ गये हौ, चलोअब, जल्दकरो।
मे तोँ चौंककर रह गय़ा। वहां जाते हि सब औरतें मुझे देखने लगी औऱ भाभी कों पूछने लगी-कौन हैं यह लड़का? बड़ा शर्मिला हैं क्याँ?
भाभी नें बोला-यह मेरा देवर जी हैं औऱ शहर सें आया हैं। अभि-अभि हि जवानहुआ हैं इसलिये शर्मा रहा थां, तौ मैंने उससे बोला कि शर्माओ मत, यहसभी बाद मे देख्ना हि हैं नां। औऱ सभी औरतें हँसने लगीं।
मुझेअब पताचला कि गाँव मे भि औरतें माडर्न हौ गई हें, औऱ गंदी-गंदी बातें करती हें।
उनमें सें एक् नें मेरी भाभी कों बोला- क्यूं रे, देवरु सें हमारा परिचय नहि कराएगी क्याँ?
फिन भाभी नें उनसब सें मेरा परिचय करवाया। मेरा ध्यान बार-बार उन नंगी औरतों केँ चूचे पे हि चला जाता थां। तौ वोँ भि समझने लगीथीं कि मे क्याँ देखरहा हूं?
उनमें सें एक् मीडियम क़द कि 26 साल कि स्त्री नें मुझे बोला- क्यूं रे तूनेआज तक कभी मम्मों नहि देखा जौ ताड़रहा हैं?
मेरी भाभी औऱ दूसरी सब औरतें हँसने लगी। मेरी भाभी नें बोला-“हाँ शायद, क्योंकी घऱ पे भि वोँ मेरे चूचे कों ताड़रहा थां। इसलिये तौ उसेयहा पे लाई ताकी खुल्लम खुल्ला देखसके।
औऱ मुझसे बोला- देवरजी, देख लेनाजी भर केँ, बाद मे शहर मे ऐसा मोका नहि मिलेगा…”
औऱ सभी औरतें हँसने लगी। अभि ऐसी बातों सें मेरे लण्ड कि हालत खराब होँ गई थि।
तभी मेरी भाभी नें कहा- देवरजी कब तक देखोगे? आप् यहा पे नहाने आए हें नहि कि चूचे देखने।
मेरी हिम्मत थोड़ी खुल गई- “भाभी, अभि ऐसा दिखेगा तोँ कोईभला नहाने मे वक्त बरबाद क्यूं करेगा?”
भाभी-ठीक हैं फिन देखो। मगर वोँ तोँ नहाते हुए भि तौ देख सकते हौ तुम्।
यह आइडिया मुझे अच्छा लगा। मगर तकलीफ यह थि कि पानी मे केसे जाऊँ। क्योंकी मेरा लण्ड बैठने कां नाम नहि लेँ रहा थां।
तभी भाभी नें बोला-सोच क्याँ रहे हौ कपड़े निकालो औऱ कूद पड़ोपनी मे।
मे- “ठीक हैं भाभी…” कहकर मैंने भि लज्जा छोड़ दि, जोँ होगा देखा जाएगा। सोचकर मैंने अपना शर्ट औऱ पैंट उतार दिया। अब मे मात्र फ्रेंच कट निक्कर मे हि थां। उसमें सें मेरा 6 इंच कां लण्डसाफ दिखरहा थां। वोँ भि उठाहुआ। लण्ड कां टोपा निक्कर कि किनारी सें थोडा ऊपर आँ गय़ा थां तोँ वोँ सब औरतों कों भि दिखा, तोँ भाभी औऱ सब औरतें मुझे घूरने लगी।
भाभी- देवरजी, यह क्याँ तंबूबना रखा हैं अपनी निक्कर मे?
मे- क्याँ करूं भाभी, आप् सब नें तोँ मेरी हालत खराबकर दि हैं।
भाभी- भइया साहब, आप् मेरानाम क्यूं लेँ रहे होँ, मैंने तौ अभि कपड़े उतरे भि नहि।
मे- “हाँ, वही तोँ अफसोस हैं…” औऱ मे हँसने लगा।
भाभी- लगता हैं आपकी विवाह जल्द हि करनी पड़ेगी।
सब औरतें हँसने लगी। औऱ मे पानी मे चला गय़ा। मुझेवहा पे बड़ा आनंद आँ रहा थां। सोचरहा थां कि हमेशा हि मेरेदिन ऐसे हि कटें, इतने सारे बोबों केँ बीच। मुझेमूठ मारने कि ख़्वाहिश होँ रही थि, मगर मे सब केँ सामने नहि मार सकता थां, वोँ भि पानी मे।
सब औरतें हँसने लगी। औऱ मे पानी मे चला गय़ा। मुझेवहा पे बड़ा आनंद आँ रहा थां। सोचरहा थां कि हमेशा हि मेरेदिन ऐसे हि कटें, इतने सारे बोबों केँ बीच। मुझेमूठ मारने कि ख़्वाहिश होँ रही थि, मगर मे सब केँ सामने नहि मार सकता थां, वोँ भि पानी मे।
शायद मेरी तकलीफ़ भाभीसमझ रही थि औऱ उन्होंने मुझसे मजाक मे कहा- “देवरजी, आपकाजोश कमकरो वरना निक्कर फट जाएगी…”
उधरऐसी गंदी मजाक सें मेरी हालत औऱ खराब होँ रही थि, मगरउन लोगों कों मस्ती हि सूझरही थि। भाभी नें नीचे बैठकर कपड़े धोना चालू किया।
उसकी बैठने कि पोजीशन ऐसी थि कि उसके घुटने सें दबके उसके चूचे ब्लाउज़ सें बाहर् आँ रहे थें। औऱ दोनों चूचों केँ बीच कि बड़ीखाई दिखाई देरही थि। ब्लाउज़ उसके चूचों कों समाने केँ लिए बहुत नहि थां। उसकागला भि बहोत बड़ा थां, जिससे उनकीआधी चूचियां बाहर् दिखरही थीम। चूचियां क्याँ गजब थि, मानोदो हवा केँ गुब्बारे, वोँ भि एकदम सफेद जिसे देखकर बस पूरा खाने कों दिलकर जाए। मे लगातार उनके चूचे देखेजा रहा थां तबपता नहि कब भाभी नें मेरे सामने देखा औऱ हमारी नजरें मिली।
जिससे भाभी बोलीं- “मुझेपता हैं देवरजी आप् मेरी भि चूचियां देख्ना चाहते हें। तभी तोँ बार-बार देखरहे हें…” बोलकर हँस पड़ी, औऱ बोलि- “लो आपकीयह ख़्वाहिश मे अभि पुरीकर देती हूं…”
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वैसा बोलकर उन्होंने अपने पैरों कों सीधा किया औऱ मेरीतरफ देखकर हि मेरे सामने अपने ब्लाउज़ केँ हुक खोलने लगी। ब्लाउज़ क्याँ तंग थां कि उनको शायदहुक खोलने मे मुश्किल हौ रही थि। औऱ वोँ मेरीतरफ देखकर बार-बार मुश्कुरा रहीथीं। फाइनली उसकाटाप कां हुकखुल गय़ा, उसकेबाद दूसरा, तीसरा, करके चारों हुकखोल दिए। औऱ उसने ब्लाउज़ वैसे हि रहने दिया।
उनके चूचे कपड़ों सें ढँके थें, मगर उनकी लम्बी लकीरदिख रही थि, जोँ किसी केँ भि लण्ड कां पानी छोड़ने केँ लिए बहुत थि। उसने मेरीतरफ मुश्कुराकर स्वयं हि उपने चूचे कों दोनो हाथों सें सहलाया औऱ दो साइड सें ब्लाउज़ अलगकर दिया। बाद मे उसने अपने कंधेऊपर करके ब्लाउज़ उतार फेंका। अब उसकेहाथ पीछे कि औऱ गये औऱ उसने अपनी ब्रा कां हुक भि खोल दिया। अरे वाह… ब्रा उसके हाथों मे थि औऱ उनके दूधिया चूचियां हवा मे लहराने लगीं। चूचियां भि जैसेहवा मे आजाद होकर फ्री महसूस कररही हों, वैसे हिलने लगीं। उनके निपल मीडियम साइज केँ औऱ एकदम काले थें, औऱ दोनों चूचों केँ बीच मे कोई स्थान नहि थि, औऱ एक् दूसरे सें अपनी स्थान लेने केँ लिए जैसे लड़ाई कररहे हों। वोँ नजारा देखने लायक थां। मेरी आँखें वहां सें नजरें हटाने कां नाम नहि लें रहीथीं।
उन्होंने वोँ देख लिया औऱ बोलीं- क्यूं देवरजी अब बराबर हैं नाँ? हुई तसल्ली?
मे बस हैरान होकर देखे हि जारहा थां। बाकी औरतें उनकीयह हरकत सें हँसने लगी। मेरा लण्डअब मेरे काबू मे नहि थां।
तभी एक् चाची जौ कि लगभग 35 साल कि थि उसने भाभी कों कहा- “क्यूं बिचारे कों तड़पा रही होँ? ऐसा देखकर तोँ बिचारे केँ लण्ड सें पानी निकलरहा होगा…”
बात भि सही थि उनकी, शायद वोँ ज़्यादा अनुभवी थि, इसलिये व्यक्ति कि हालत समझती थि। वैसे मेरी भाभी भि कोईकम अनुभवी नहि थीं, मगर वोँ मज़ा लें रही थि।
मैंने भाभी कों बोला- भाभी, आप् मत तड़पाओ मुझे, मुझसे अबरहा नहि जारहा हैं।
वोँ बोलीं- क्यूं रहा नहि जारहा हैं? मतलब, क्याँ हौ रहा हैं?
मे भि बेशरम होकर बोला- भाभी मेरा लण्ड बैठने कां नाम हि नहि लेँ रहा हैं।
वोँ हँसती हुइ बोलीं- “सबरकरो देवरजी, उसका इलाज भि मेरेपास हैं, देखते हैं कि केसे नहि बैठता हैं आपका वोँ… लण्ड…” औऱ वोँ फिन कपड़े धोनेलगी।
मे फिन उसकी औऱ दूसरी औरतों केँ चूचे देखते हुएफिन सें नहाने मे ध्यान लगाने लगा, मगर मेरा ध्यान बार-बार उनसब केँ चूचों औऱ जांघों केँ बीच मे हि फंस जाता थां। कई औरतों कां पेटीकोट तौ घुटने तक ऊपरउठे होने कि वजह सें उनकी जांघें साफ-साफ दिखरही थीं औऱ चूचे घुटनों मे दबने सें इधर-उधर हौ रहे थें। तभी मे नहाने कां छोड़कर मूठ मारना चाहता थां कहीं पेड़ केँ पीछे।
मैंने भाभी कों बोला- “भाभी, मे अबथक गय़ा हूं औऱ मुझेभूख भि लगी हैं तौ मे घऱजारहा हूं…”
भाभी बोलीं- “अभि सें क्यूं थकगए तुम्? औऱ भूखलगी हैं तौ तुम्हें कहीं औऱ जाने कि जरूरत नहि हैं। इधर हि तुम् अपनीभूख मिटालो…” ऐसा बोलकर उसने बाजूवाली कों बोला- “क्यूं रे रसीला, तेरे चूचे मे अभि दूध आँ रहा हैं कि नहि?”
रसीला नें जवाब दिया-हाँ, राशि भाभी, आँ रहा हैं।
भाभी बोलीं- जरा इसका तोँ पेटभर दे, अपनी गोदी मे लेकर।
तोँ बाकीसभी औरतें हँस पड़ीं। मे तोँ हैरान रह गय़ा।
तभी रसीला कि आवाज़ आई-“आऊ भैया इधर…”
मे शर्मा रहा थां।
तौ रसीला मुझसे बोलीं- “शर्माने कि क्याँ बात हैं? तुम्हारे भैया भि तोँ रोज हि पीते हें। अगर एक् दिन तूनेपी लिया तोँ कोईखतम थोड़े हि होगा, बहोत आता हैं इसमें…”
मे धीरे धीरेआगे बढ़कर उसकेपास गय़ा, वोँ पैरों कों मोड़कर बैठ गई औऱ अपनीगोद मे मेरासिर रखने कों बोला। मैंने वैसा किया। क्योंकी अब मेरेपास कोई औऱ चारा नहि थां। मेरे निक्कर मे सें वोँ बार-बार मेरा टोपादिख रहा थां। मे जैसे हि गोद मे लेटा, उसने अपने ब्लाउज़ केँ बटन खोलना चालू किया, एक्, दो, तीन, करकेसब बटनखोल दिए औऱ ब्लाउज़ कों दूर हटाके अपने एक् हाथ मे चूचे कों पकड़ा। उसका निपल स्वयं दबाया तौ जैसे एक् फुव्वारे कीतीतरह दूध कि धार मेरे पूरे चेहरे कों भिगो गई।
मुझे बहोत हि आनंदआया तौ मैंने भि निपल कों दो उंगली मे लेकर दबाया तोँ फिन सें वैसे हि दूध कि पिचकारी उड़ती हुईँ मेरे चेहरे कों भिगोने लगी। अब मैंने मेरा मुँह निपल केँ सामने रख दिया औऱ उसेफिन सें दबाने लगा, तौ मेरे मुँह मे उसकेबदन कां अमृत जानेलगा। औऱ उसका स्वाद… अरेवाह… क्याँ मीठा थां, एकदम मीठा। मे वैसे हि निपल कों दबाने लगा पर्र दूध पीनेलगा।
फिनबाद मे रसीला नें अपना निपल धीरे-धीरे सें मेरे मुँह मे दे दिया औऱ बोला-“अब चूसोइसे…”
मे तौ उसे चूसने लगा। सोचा कि ऐसे हि पूरी जीवनदूध हि पीता रहूं। मेरे मुँह मे दूध कि धाराबह रही थि। जैसे हि चूसता, पूरीधार मेरे मुँह मे आँ जाती। मुझे उसकादूध पीने मे बहोत हि आनंद आँ रहा थां। औऱ वोँ भि अपनीदो उंगलियों मे निपल लेकर दबाती ताकि औऱ दूध मेरे मुँह मे आँ जाये। थोड़ी देर पीने केँ बादजब उस मम्मों मे दूधखतम हौ गय़ा, तौ मैंने भाभी कों वोँ बताया।
रसीला नें दूसरी तरफ सोने कां बोला औऱ दूसरा मम्मों मेरे मुँह मे दे दिया। दूसरे चूचे सें दूध पीते टाइम मेरी हिम्मत बढ़ी तोँ मे अपनेहाथ सें दूसरे चूचे कि निपल अपनीदो उंगलियों मे लेकरदबा देता थां। जिससे रसीला कि एक् मादक आवाज़ आती थि- “उफ्फ…आऽऽ…”
यह देखकर भाभी भि उधर बैठे-बैठे अपनी चूचियां दबा देती थि। शायदउसे भि सेक्स करने कां मनकररह थां।
दूसरी सब औरतें अपनेकाम मे सें समय निकाल केँ हमेंदेख लिया करतीथीं। तभी रसीला कि दूसरे चूचे मे भि दूधखतम हौ गय़ा।
जब मैंने बताया तोँ, वोँ बोलीं- “अभि आधा लीटरपी गये, अब तौ खतम होगा हि नां…”
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उनकेऐसे बोलने सें सब औरतें हँस पड़ीं। उसकीबात भि सही थि। मे आधा लिटर तौ पी हि गय़ा होऊँगा, औऱ मेरापेट भि भर गय़ा थां, लगता थां शायदसाम तक मुझे खानां हि नहि पड़ेगा।
तभी राशि भाभी बोलि- देवरजी, भूखे तोँ नहि नाँ अब? वरना औऱ भि हैं। चाहो तोँ औऱ दूध कां इंतेजाम कर देती हूं…”
मैंने बोला- “नहि भाभी, मेरापेट बिल्कुल भर गय़ा हैं…”
अभि भि मे रसीला कि मम्मों चूसरहा थां, तोँ रसीला भाभी सें बोलि- “राशि, लगता हैं यह मेरे चूचेऐसे नहि छोड़ेगा, तुम् इसे मेरेघऱ लेकर आनां, इसको पूरा भोजन औऱ चोदनकरा दूँगी…”
राशि भाभी हँसकर बोलीं- हाँ वोँ ठीक रहेगा, मगर अभि तोँ हमारा मेहमान हैं।
फिन मे दूध पीते-पीते रसीला केँ पेटीकोट केँ नारे पे अपनाहाथ लें जानेलगा, जिसे देखकर रसीला बोलीं- “अभि नहि, घऱ आनां धीरे-धीरे करेंगे…”
मैंने बोला- मात्र एक् बार मुझे तुम्हारी वोँ देखनी हैं।
रसीला बोलीं- वोँ मतलब?
मे- मतलब आपकी बुर।
रसीला- “देखकर भि क्याँ करोगे? इधर तौ कुछ होने वाला नहि…”
मे- “होँ भले नाँ, मगरपता तोँ चलेगा कि पूरी दुनियां जिसमें समा चुकी हैं वोँ चीज कैसी होती हैं?”
रसीला यह सुनकर हँस-हँस केँ पागल हौ गई औऱ मेरी भाभी कों बोलि- “देखो राशि, यह क्याँ बोलरहा हैं? उसे मेरी बुर देखनी हैं, औऱ बोलता हैं कि मुझे वोँ देख्ना हैं जिसमें पूरी दुनियां समा चुकी हैं…”
यह सुनकर रसीला औऱ दूसरी सभी औरतें हँसने लगी।
राशि-“हाँ, तोँ बतादे नां, वोँ भि क्याँ याद करेगा, औऱ रोज तेरेनाम कि मूठ मारता रहेगा…”
रसीला- अरे… मेरे होतेहुए क्यूं मूठ मारेगा बिचारा, कल लेँ आनां मेरेघऱ, धक्के हि लगवा दूँगी।
राशि-ठीक हैं, मगर अभि कां तोँ कुछकर।
रसीला- “हाँ… अभि तौ मे उसे मेरी मुनिया केँ दर्शन करा देती हूं। ताकि उसके मुन्ने कों पताचले कि कलउसे कौन सें ठिकाने जानां हैं, औऱ अभि मे उसका केलाचूस केँ रसपी लेती हूं, गुफा मे कल प्रवेश कराऊँगी…” ऐसा बोलकर उसने अपना पेटीकोट कमर तक ऊंचाकर दिया औऱ अपनीरेड कलर कि जलीदार पैंटी उतारने हि वाली थि।
तभी मैंने कहा- रहनेदो मे उतारूँगा।
रसीला- हाँ भइया, तूँ उतार लेँ।
उसकेऐसा बोलते हि मैंने अपनाहाथ उसकी बुर पे रख दिया औऱ उसकी बुर कां उभार महसूस करनेलगा। पहलीबार मे किसी स्त्री कि बुर छूरहा थां, उसका उभार भि क्याँ गजब थां जैसे वड़ापाओ जैसा, औऱ बीच मे एक् लकीर जैसी थि औऱ दोनों साइड एकदम चिकना-चिकना गोल थां। मुझे तौ स्वर्ग जैसा अनुभव लगरहा थां। मैंने साइड मे सें उंगली डालकर उसकी पैंटी कों घसीटकर उसकी लकीर कों महसूस किया। वोँ तौ बस मेरे सामने हि देखरही थि, औऱ मे उसकी बुर कि दुनियां मे जैसेडूब गय़ा थां।
रसीला बोलि- ऐसे हि चड्डी केँ ऊपर सें हि देखोगे, याँ उतारकर भि देख्ना हैं?
मे जैसेहोश मे आता हूं- “हाँ भाभीजी…” औऱ ऐसा बोलकर मैंने उनकी पैंटी नीचे सरकाई, औऱ उतार फेंकी,
ओह्ह…माई गोड… भगवान्… अबसमझ मे आया कि सब मर्द बुर केँ पीछे क्यूं भागते हैं, शायद मे भि उन लोगों कि दुनियां मे आँ गय़ा थां।
उसकी बुर एकदमसाफ थि, मुझे मालूम थां कि औरतों कों भि झांटें होती हें, मगरफिन भि मैंने भोला बनकर रसीला कों पूछि- “भाभीजी, मैंने तोँ सुना थां कि औरतों कि भि झांटें होती हें, मगर आपको तौ नहि हैं…”
रसीला हँसकर बोलि- “हाँ होती हैं नाँ… मगर मैंने आज हि साफ कि थि, शायद मेरे पति सें ज़्यादा लकी तुम् होँ जोँ उससे पहले तुमने मेरी बिना झांटों वाली बुर देखली…”
बस मे तौ उसकी बुर पे हाथ फेरने लगा औऱ देखने लगा। हर एक् कोना देख्ना चाहता थां मे, तौ मैंने उनकीटाप सें लेकर बाटम तक बुर कों महसूस किया, जैसे मैंने बुर कि दोनों गोलाईया खोली, बीच मे दो होंठ जैसालगा। मैंने अंजान बनकर रसीला कों पूछा- भाभीजी, यहबीच मे लटकता हुआ क्याँ हैं?
रसीला- उसे बुर केँ होंठ कहते हें।
मे आश्चर्य सें- क्याँ इसे भि होंठ कहते हें?
रसीला- हाँ मेरे राजा, इसको चूसने सें स्त्री कों इस होंठ सें भि ज़्यादा आनंदआता हैं।
मे- तोँ क्याँ मे इसे अभि चूसलूँ?
रसीला- नहि, अभि मात्र देखो। कल घऱआकर जौ करना हैं करना, मे मना नहि करूँगी, इधरसभी आते-जाते रहते हें।
मे- ठीक हैं, मगर मेरेइस केले कां तोँ कुछकर दो।
रसीला- ठीक हैं, मे अभि हि इसकारस निकाल देती हूं।
मे- “तोँ देरकिस बात कि हैं, लेँ लो तुम् मेरा केला…”
ऐसा बोलते हि उसने मेरी निक्कर नीचे उतार दि औऱ मेरा फड़फड़ाता हुआ लण्डहाथ मे पकड़ लिया। यह मेरा पहलीबार थां इसलिये बहोत गुदगुदी होँ रही थि। उसने मेरे टोपे कि चमड़ी कों ऊपर-नीचे किया। पहलीबार मे किसी औऱ सें मूठ मरवारहा थां, वोँ भि किसी महिला सें, मेरा लण्ड काबू मे नहि थां।
मैंने उसे बोला- “जल्दकरो, मुझसे रहा नहि जाता हैं…”
रसीला बोलीं- रुको, इतनी भि क्याँ जल्द हैं? अभि तोँ केवलहाथ हि लगाया हैं, जब मुँह लगाऊँगी तौ क्याँ होगा?
मे अंजान बनतेहुए- क्याँ इसे भि मुँह मे लिया जाता हैं?
रसीला- “हाँ…” औऱ ऐसा बोलकर वोँ मेरे लण्ड कि चमड़ी ऊपर-नीचे करनेलगी औऱ मूठ मारने लगी।
मुझे बहोत अच्छा लगरहा थां। उधर राशि भाभीयह सभीदेख रही थि। जब मेरा ध्यान उसपे पड़ा तौ मेरा लज्जा सें मुँहलाल हौ गय़ा। मे रसीला केँ हर एक् स्ट्रोक कां खुशीउठा रहा थां। रसीला केँ मूठ मारने सें मेरी उत्तेजना औऱ बढ़ गई थि, औऱ वीर्य कि एक् बूँद टोपे पे आँ गई। यह देखते हि रसीला नें मेरामूठ मारना छोड़ दिया।
एक् बार तोँ मुझेलगा कि वोँ ऐसे मुझे क्यूं आधे रास्ते पे छोड़रही हैं। मगर जल्दी हि वोँ मेरे लण्ड पे झुक गई, औऱ मेरा टोपा अपने मुँह मे लेँ लिया।
मेरे तौ जैसेहोश उड़गये, औऱ इतना आनंदआने लगा कि अब मे सातवें आसमान पे थां। आहिस्ता उसने मेरा पूरा लण्ड मुँह मे भर लिया औऱ चप-चप चूसने लगी। मेरी तोँ हालत खराब होतीजा रही थि। रसीला कभी मुँह मे जीभ फेरती, तोँ कभी छाप-छाप करके चाटती थि। जीभ सें मेरे गोटे भि चूसने लगी। फिन सें उसने मेरे लण्ड कों मुँह मे भर लिया औऱ जड़ तक चूसने लगी।
अब मेरा सब्र कां बाँध टूटने वाला थां, मुझेलगा कि मेरा वीर्य निकले वाला हैं, मैंने रसीला कों बोला- “भाभीजी छोड़ो अब, मेरा निकलने वाला हैं…”
मगर, मुझे आश्चर्य हुआ, क्योंकी रसीला सुना अनसुना करके मेरा लण्ड चूसती रही। अब मुझे क्याँ थां, मे तौ बिंदास होकरमजा लेनेलगा। अब मेरा पूरा जिस्म सिकुड़ने लगा। भाभीजी कों मालूम होँ गय़ा औऱ वोँ औऱ जोर सें चूसने लगी। तभी मेरे लण्ड नें पिचकारी छोड़ दि। वीर्य सीधा उसकेगले मे जानेलगा। मेरा लण्डऐसे 7-6 झटके मरतारहा, मगर उसने मेरा लण्ड छोड़ा नहि औऱ पूरा वीर्य पीनेलगी। बाद मे मेरे लण्ड कों पूरा चाट-चाट केँ साफ किया।
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