महँगी चूत सस्ता पानी complete - Choot Ki Pani – New Episode
mein jhannatedaar thappad कि सोच मे ankhein बंद kiye Didi कि hatheli kaa apne gal पऱ intezaar krr raha thaa.unki hatheli मेरे gal पऱ padi too jaroor.पर्र yeh jhannatedar thappad naheen thaa। एक् pyar bhari halki si chapat thi। mein फिन सें हैरान thaa Didi केँ iss rawaiyye सें.
mein एक् tak उन्हें dekh raha thaa। unki ankhon मे mene voi देखा। joo मेरी ankhon मे thaa.एक् bhukh.
Hum donon एक् dusre ko usi bhookhi nigahon सें dekh rahe the.kintu एक् jhijhak.एक् sankoch। abi bi thaa joo हमें roke thaa। bhay bahen kaa rishte abi bi haavi thaa.हम् iss rishta सें bi kaphi aagey nikalna chah rahe the.iss rishta ko औऱ bi vistrit krna chah rahe the.bhay bahen कि simaon ko langh krr एक् stri औऱ mard kaa rishte.aesa rishte jahan कोई zanjeer naheen। nari औऱ purush kaa rishte.
mene saaf saaf देखा Didi kanp rahi thi, unke हाथ जैसे tadap rahe the muze thamne ko.mein bus choopchap उन्हें bina palak jhapkaye dekhe jaa raha thaa.जैसे mein उन्हें apni ankhon मे sama लेना chahta hun.
or तभी एक् jhannatedar thappad pada मेरे gaal पर्र.jiski apeksha muze pehle thi.पर्र abi iss time ??.जब mein कुछ औऱ hi सोच raha thaa.मेरा sara madhosh kaphoor hu गय़ा.yeh क्याँ hu गय़ा.Didi केँ bi andaaz nirale hi hote the.
" Are bewaqoof। sirf muze takta rahega yah कुछ karega bi.?? mene कहा thaa na joo kehna h joo krna h krr le.?? to क्याँ chahta h mein nangi hu krr tere samne khadi hu jaoon.???? " Didi jhallate hue chikh padin.
mein जैसे sote सें jaag utha.unke thappad ne मेरी jhijhak दूर krr di.unke thappad ne bhay bahen केँ bich kaa parda chir dala.
mene उन्हें apni bahon मे jakad लिया.apne सें chipka लिया.unki chaati औऱ मेरा sina जैसे एक् hu gaye hon.unke stan मेरे sine सें ayese chipke.laga जैसे sapaat hu gaye hon.aaaahhh muze aesa ehsaas हुआ जैसे kunkune paani सें bhara gubbara मेरे sine मे phat jayega.thodi der isi prakaar chipkaya raha, unkah sar मेरे kandhe पऱ iss prakaar pada thaa mano Didi ne apne ap ko मेरे hawale krr दिया hu। kisi stri kaa iss prakaar atmasamarpan.मेरे liye एक् ajeeb hi tajurba thaa, मेरी samajh मे naheen aa raha thaa yeh sab क्याँ hu raha h, पर्र joo hu raha thaa apne ap hu raha thaa.bus hotha jaa raha thaa.फिन mene उन्हें apne sine सें alag किया.unke kandhon ko thame unkah चेहरा apne samne krr लिया.औऱ toot pada unke galon पऱ.unki gardan, unkah sina choom raha thaa, chaat raha thaa.muze too yeh bi naheen maloom thaa pyar kese किया jata h.Didi कि saari ast vyast hu gai thi.anchal bistar सें नीचे latak raha thaa.unki sansein fast thin.vo hanf rahi thi.
Hanfte hue unhone dabi juban मे chikhte hue कहा " Are bewaqoof darwaaza too बंद krr le."
mein fauran utha, bhagte hue darwaze सें pehle jhanka.kahi कोई h too naheen.फिनबंद krr दिया.wapis palang कि tarf badha.Didi leti thin.unkah anchal abi bi नीचे latak raha thaa.baal ast vyast the.saari ghutnon tak uthi hoyi thi.uff unki gori gori mansal pindliyan। mein unki pindliyan choomne laga.chatne laga.vo sihar uthin। muze apne ऊपर lita लिया औऱ muze apni chaati सें lagaya boori prakaar chipka लिया.औऱ lagin मेरे honth choosne। ufff aesa laga जैसे मेरे donon honth unke munh केँ andar अब गय़ा तब गय़ा.हम् donon pagalon कि prakaar bus choome jaa rahe the.
Thodi der बाद choomne chatne kaa silsila कमहुआ.एक् shuruati aandhi aayi thi.जैसे bandh toot ta h.paani कि dhara
एक् dam सें phoot padti h.waise hi हम् donon केँ andaar सें bhawnaon कि dhara phoot padi thi.अबकुछ shant hoyi thi.
mein unke bagal leta thaa.donon कि sansein fast thi। हम् donon tangein phailaye agal bagal lete the.
koy कुछ bol naheen raha thaa। kamre मे sirf sanson कि awaaz thi.
fir unhone chuppi todi " Kishu.tumhein durd हुआ क्याँ.??" or मेरा gal jahan thappad laga thaa.sehlane lagi." "mein bi kaisi pagal hun."
" ap bi na Didi.chalo कुछ naheen। ap kaa thappad bi kitna sai time pe thaa.वरनाकुछ bi mein naheen krr ptaa."
" ha re mein janti thi na.to h na bhole baba "
" pr Didi एक् बात मेरी samajh मे naheen aa rahai.iss एक् दिन मे hi achanak क्याँ hu गय़ा हम् donon ko.??? "
" mein apne baare too bata sakti hun.पर्र tumhein क्याँ हुआ.???"
" pehle ap bataiye Didi.फिन mein bataoonga."
"naheen pehle tu bata."
" Didi जब mene aapki shadi कि बात sooni.muze aapka doosra roop, kisi कि bibi kaa roop bi dikha.औऱ जब us roop मे mene aapko देखा.ap muze kitni achhi lagin.kitni sunder.औऱ usi time मेरा dill ❤️ किया ap ko pyar karoon."
" Hmmmm.मेरा क्याँ अच्छा laga re.??''
" sab कुछ.Didi ap कि har chiz itni achhi h। chaliye अब ap bataiye na."
" Thik h too soon.Kishu.जब Maan ne muze shadi pakki hone कि बात batayi.मेरे dimaag मे pehli बात yeh aayi केँ mein tm सें दूर chali jaoongi.muze एक् ajeeb dhakka sa laga। औऱ mein phoot phoot केँ rone lagi.तभी mene socha केँ जब tak यहा rahoongi tuze कोई abhav naheen hone doongi। औऱ जब tuze rote time sine सें chipkaya thaa na.muze bi बहोत अच्छा laga thaa। "
" Hmmmm.too Didi ap ko mein अच्छा laga.?? Kya अच्छा laga.??'
" Are kyoon maraa jaa raha h sun ne ko। dhire dhire, sab ptaa chl jayega। " or unhone apni tang मेरी janghon पऱ रख दिया, apne hath मेरे sine पऱ rakhe halke halke sehlana shuru krr दिया
Kisi bi stri kaa मेरे itna nazdik आनां, मेरी sharir सें khelna.yeh sab itna nashila, itna pyaara hoga mene कभी naheen socha thaa.मेरा pura badan kanp raha thaa.mein ankhein बंद kiye aanewaale sukh औऱ masti केँ sapnon मे khoya thaaa.
kramashah……………………………….
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महँगी बुर सस्ता पानी--4
गतान्क सें आगे…………………………….
उफफफफ्फ़ उनकी हथेली औऱ उंलगलियों मे मानों चमत्कार थां.
.मे आँखें बंदकिए अपने सीने पर्र उनकी हथेली औऱ उंगलियों केँ खेल सें मस्ती केँ एक् ऐसेलहर मे थां.मानों मे हवा मे उड़रहा हूं.मे सीधा लेटा थां.पीठ केँ बल.दिदी नें अपनी एक् टाँग अपनी साड़ी उपरकर मेरे जांघों पऱ रखाहुआ थां.घूटने सें मेरे पॅंट केँ उपर हल्के हल्के घिसरही थि.औऱ हथेली औऱ उंलगियों सें मेरे सीने पऱ हाथ घूमा घूमाकर सहलाए जारही थि। उनकासर मेरेउपर थां इसतरह कि हम् दोनों कां चेहरा आमने सामने थां.
"कैसालग रहा हैं। किशू.?" उन्होने भर्राई आवाज़ मे पूछा
"मत पूछो दिदी। मे तोँ मानो स्वर्ग मे हूं." मेरी आवाज़ भि भर्राई हुईँ थि.
मेरे पॅंट केँ अंदर उनके घूटने नें हलचलमचा रखी थि। पॅंट केँ उपर हल्की हल्की घिसाई सें मे सिहररहा थां.मेरा लन्ड मानों पॅंट फाड़कर बाहर् आने कों उतावला हौ रहा थां.
मे अपनी हथेलिओं सें उनके दोनों गालों कों सहलाने लगा.दिदी कि भि आँखें बंद होँ गयीं थि मस्ती मे,.
आँखें बंदकिए किए हि उन्होने अपनी भर्राई आवाज़ मे कहा
"किशू.??"
"हां दिदी."
"तूँ जानता हैं मे यहसभी तेरेसंग क्यूं कररही हूं.???"
"क्यूं दिदी.?"
"देख किशू मे चाहती हूं नां केँ विवाह सें पहले अपने आप् कों भि इसखेल मे रेडीकर लूँ.मे अपने पति कों खुशकर देना चाहती हूं.इतना केँ वोँ मेरेलिए पागल होँ जाए.औऱ दूसरी बाततुझ सें जुड़ी हैं."
वोँ बोलती भि जारही थि औऱ अपने नंगे घूटने सें मेरे लन्ड कि घिसाई औऱ हथेली औऱ उंगलियों सें सीने कां कुरेदना भि जारी थां.अपने नाख़ून भि हल्के हल्के मेरे सीने पऱ गढ़ा देती
मैने अपनी उंलगियों सें उनके रसीले होंठों कों दबाते हुएकहा
" अरे दिदी मेरे होनेवाले जीजू औऱ आप् केँ बीच मे कहां सें आँ गय़ा.???"
उन्होने मुझे अपने सीने सें चिपका लिया औऱ अपने मम्मों सें मेरे सीने कों सहलाते हुएकहा
" हैं नां किशू.यह सभीखेल मे तुझ पर्र आजमाऊंगी.मैनेसाम कों देखा नां तूँ हाथ सें कामचला रहा हैं।.जब मे तेरे सामने हूं.फिन इसकी क्याँ ज़रूरत.लें नाँ किशू.कर लें जीभर केँ मुझे प्रेम.तूँ संतुष्ट रहेगा तभी तौ तेरी पढ़ाई भि ठीक सें होगी.मे नहि चाहती तेरी पढ़ाई मे कुछ मेरे कारण प्राब्लम हौ."
दिदी मुझेचूम रही थि.कभी होंठों कों, कभी गालों कों.औऱ अब उनकाहाथ मेरे पॅंट कि बटन कि तरफ पहूच गय़ा थां औऱ उसे उतारने कि कोशिश मे थि.
मे बिल्कुल सन्न थां.पऱ मैनेकुछ नहि किया.मैने अपने आप् कों दिदी केँ हवाले कर दिया थां.
" दिदी आप् कितनी अच्छी हें.मे आप् कि हरबात मानूँगा, आप् जैसा कहेंगी मे करूँगा."
" हां किशू." अब तक उन्होने मेरे पॅंट कों मेरे घूटनों सें नीचेकर दिया थां.औऱ मेरा लन्ड बिल्कुल आज़ाद, खूलीहवा मे सांस लेताहुआ कड़क लहरारहा थां.
उन्होने अपनी रसीले हथेली सें उसेथाम लिया औऱ अपने गालों सें लगाया.होंठों सें मेरे सुपाडे कों चूम लिया
"देख तोँ बेचारा कितना बेचैनी रहा हैं.मेला लाजा.मेला भोलू.अब इसका भि ख़याल मे रखूँगी.तुम्हें हाथ हिलाने कां मूडकरे नाँ.मुझेबोल देना.अब यह मेरा हैं.
उन्होने मेरी पॅंट घूटनों सें भि उतार दि, नीचे मे पूरा नंगा थां.औऱ मेरी जाँघ पऱ बैठ गयीँ,.इसतरह केँ मेरा लन्ड उनकी जांघों केँ बीच थां औऱ अपनी जांघों सें बड़े प्रेम सें हल्के हल्के दबारही थि.उफ़फ्फ़ मेरीजान निकलने वाली थि.मुझेलगा जैसे मेरे पूरे जिस्म सें सभीकुछ निकलता हुआ मेरे लन्ड मे जमा होताजा रहा हैं.अब फूटा तौ तब.मे सिहररहा थां.
फिन उन्होने उसी पोज़िशन मे बैठे मेरी शर्टउपर कर दि औऱ उसे भि उतार दिया। मे बससभी कुछचूप चाप देखेजा रहा थां.अपनीफटी फटी आँखों सें.
मुझे पूरा विश्वास थां नां उन पऱ.
फिन मेरे दोनों जांघों कों अपने पैरों केँ बीच करती हुइ खड़ी होँ गयीँ,.मेरीओर एक् तक बड़े हि शरारती ढंग सें फिन जौ उन्होने किया.मेरी तोँ सिट्टी पिटीगुम होँ गई,.
एक् झटके मे हि अपनी साड़ी औऱ पेटिकोट खोल दिया उन्होने.नीचे सें बिल्कुल नँगीं थि.मे तोँ उन्हें देखता हि रहा.एक् दम सन्न थां मे.मेरे सामने वोँ पहली स्त्री थि जिन्हें मे नंगीदेख रहा थां.मेरी आँखें चौंधिया गयीं.फटी कि फटीरह गई,.दिदी केँ अंदाज़ सच मे निराले थें.
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फिन उन्होने उसी झटके मे अपनी ब्लाउस औऱ ब्रा भि खोल दि.उफफफफफफफफफफफ्फ़ मे पागल हौ गय़ा थां.अब वोँ बिल्कुल नंगी, दोनों पेर फैलाए.उनके पैरों केँ बीच मे नंगा.औऱ मेरे सामने वोँ नंगी.उनके चेहरे पर्र ज़रा भि हिचकिचाहट नहि.एक् दम बे-बाक.
" देख लें.अच्छे सें अपनी दिदी कों."उनके चेहरे पे शरतभरी मुस्कान थि
मेरी नज़रें दिदी कि सुंदर जवानी कों जैसेपिए जारही थि.सुडौल बूब्ज़.भारी भारी.एक् दम दूधिया रंग औऱ उसकेबीच थोड़े थोड़े गुलाबी रंगलिए निपल्स। घूंदियाँ कड़ी औऱ उठीउठी.
पेट भारी भारी पर्र सपाट.नाभि कि गोलाई ऐसी कि उनमें जीभडाल चाट जाऊं.भारी भारी सुडौल जंघें। औऱ जांघों केँ बीच काले काले बालों कों चीरती हुईँ एक् पतली सि फाँक.दिदी कि योनि मे भि पानी जैसारस थां.योनि केँ बालों मे मोटी जैसेरस केँ बूँदचमक रही थि.जांघों पर्र भि रसलगा थां।.मुझ सें अबरहा नहि गय़ा.मे उठा औऱ दिदी कों हाथों सें थामते हुए अपनेउपर लें लिया औऱ बूरीतरह चिपका लिया.किसी नंगी महिला कां मेरे नंगे शरीर सें चिपकना.एक् ऐसा अनुुभाव.बताया जा नहि सकता.मे थोड़ी देर तक उन्हें चिपकाए राहा.उनके जिस्म कि गर्मी, उनके मांसल बदन कि नर्मी औऱ उनके आँखों कि हुस्न अपने अंदरलिए जारहा थां.
मे कुछकर पता उसके पहले हि दिदी नें अपना कमाल दिखा दिया.मेरे खड़े लन्ड पर्र अपनी गीली सि योनि घिसना शुरुआत कर दिया.मेरा पूरा जिस्म सिहरउठा.
हे ईश्वर इस एक् दिन मे हि क्याँ सें क्याँ होँ गय़ा हैं.मेरे लिए अपने आप् कों संभाल पाना मुश्किल हौ रहा थां.मेरा लन्ड उनकी योनि केँ दबाब सें औऱ भि कड़ा होताजा रहा थां.पूरे जिस्म मे सनसनी सि होँ रही थि.दिदी अपने मम्मों भि मेरे सीने सें लगाए थि.उनके कड़े कड़े निपल्स मेरे सीने कों कुरेद रहे थें.जिसतरह मुझेमूठ मारते वक्तलगा थां.अभि बिल्कुल वैसे हि मेरे लन्ड केँ अंदर मेरेबदन सें मानो बिजली जैसीकुछ सन सन्नाते हुएजमा होतीजा रही थि औऱ मे अपने आप् कों रोक नहि पारहा थां.दिदी भि कराहती जारही थि। सिसकियाँ भरेजा रही थि औऱ मेरे लन्ड कों घिसेजा रही थि.उफफफफफफफफफफ्फ़ डीडीिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई.मे चिल्ला उठा, उन्हें जाकड़ लिया औऱ अपने आप् मेरे लन्ड नें पिचकारी छ्चोड़ दि.मेरे चूतड़ उछलरहे थें। मे झटके पे झटकादिए जारहा थां, बारबार डिड़िद्द्द्दडिईईईई डीडीिईईईईईई मेरे मुँह सें निकले जारहा थां.औऱ मे सुस्त पड़ गय़ा.
"हां हाआँ किशू.हाआँ मेला बच्चा.हां हाआँ." दिदी प्रेम सें पूचकारे जारही थि औऱ उनका घिसना भि जारी थां.औऱ फिन मैने उनके चूतडो केँ झटकों कों अपने लन्ड पे महसूस किया.".किशुउऊुुुुुुुुुुउउ.मेला बच्छाआआआअ.ऊऊऊऊओ लें रे मे भि गाइिईईईए."
मैनेफिन सें अपने लन्ड पऱ कुछ गीला सां महसूस किया.
औऱ दिदी मेरेउपर ढीली होँ करढेर हौ गयीं.
शायदयह उनका भि पहला अनुभव थां। दोनों एक् दूसरे सें चिपके थें। गरम साँसें टकरारही थि.दिदी औऱ उनका किशू एक् होँ कर पड़े थें.
मे तोँ जैसे किसी स्वप्न लोक मे खोया थां.यहसभी इतनी जल्द हौ गय़ा.मुझे विश्वास नहीं हौ रहा थां। यह सपना हैं याँ सच.??? उफफफफ्फ़ दिदी कां इसतरह मुझ सें लिपटना.उनकेबदन कि गर्मी, उनके रसीले स्तनों कां मेरे सीने पऱ दाबना.अभि तक मे उन्हें अपनी जिस्म मे अनुभव कररहा थां। मे आँखें बंदकिए उस मस्ती भरेआलम कां मजा लें रहा थां.
थोड़ी देरबाद आँखें खोली.देखा तौ दिदी अपने हाथों कों सर केँ पीछेरखे अपने हथेलियों पर्र सररखे सीधी लेटी थि, इसतरह केँ उनकी आर्म्पाइट्स बिलककुल मेरी आँखों केँ सामने थि.उनमें बालउगे थें.पर्र अगालबगल उनकी त्वचा कितनी सफेद थि। औऱ पसीने कि बूंदे चमकरही थि.
किसी स्त्री कि आर्म्पाइट भि इतनी कामुक होँ सकती हैं.मैने अपना मुँहउधर घूमाया। अपने हाथों सें दिदी कों सीधे लेतेहुए हि जाकड़ लिया, उन्हें अपनीतरफ खींचा औऱ उनके आर्म्पाइट मे मुँहलगा उसे चूसने लगा.जीभ फिराने लगा.उफफफफ्फ़ क्याँ स्वाद थां दिदी केँ पसीने कां.
मेरे अचानक इस हमले सें दिदी चौंक पड़ीं.पर्र फिनचूप चापउसी तरहहाथ सर केँ पीछेरखी रही औऱ मुझे अपनीहवस पूरी करने मे किसी भि तरहकोई रुकावट नहि कि.सिर्फ़ इतनाकहा
" अरे भोलूराम ज़रा धीरे-धीरे धीरे-धीरे जीभ फिरा.मुझे बहोत गुद गुदि होँ रहे हैं.औऱ यह भि कोई चूसने कि जागेह हैं। ??'
"उम्म्म्मम दिदी बहोत अच्छा लगरहा हैं.आप् कां पसीना भि इतना टेस्टी हैं.औऱ यहा आपकी जागेह कितनी रसीले हैं " औऱ मैने अपने दाँतों सें वहा उनकी आर्म्पाइट पर्र हल्के सें काट लिया." मन तौ किया केँ पूरे कां पूराखा जाऊं.
" अरे। वहा गंदा हैं किशू.ठीक हैं अगर तुम्हें इतना हि पसन्द हैं.मे कल सें वहा केँ बालसाफ कर दूँगी.फिन चाटना वहा.अब हटजा."
" नहि दिदी.कल कि कल देखी जाएगी अभि तौ चाटने दो नां प्ल्ज़्ज़.अभि तौ दूसरी तरफ वाली तोँ बाकी हैं."
औऱ मे झट उनके दूसरी तरफउठ करचला गय़ा, औऱ फिनलेट करवहा मुँहलगा दिया
" तूँ भि नां किशू.ठीक हैं बाबाकर लें मन मानी." औऱ अपनेहाथ औऱ भि उपरकर लिए.उनकी आर्म्पाइट अब औऱ भि खूलगये थें
मैने आर्म्पाइट चाटते हुए पूछा, "पर्र दिदी.एक् बात बताइए ज़रा.आप् कों इतनीसभी बातें मालूम केसे हुई.??"
दिदी हँसने लगी."तूँ आमखा नां.पेड़गिन नें सें क्याँ मतलब.?? "
"दिदी बताइए नां। आप् हि नें कहा थां नां हमें एक् दूसरे सें कुछ छुपाना नहि चाहिए.????"
औऱ अब मेरा मुँह उनकी आर्म्पाइट मे थां, औऱ एक् हाथ जौ उनके सीने पऱ थां.जानेकब उपर आँ गय़ा उनके स्तनों पर्र.उनके स्तनों केँ स्पर्श कां आज पहला मौका थां.इतना सॉफ्ट औऱ संग मे कुछभरा भरा भि.मैनेउसे हल्के सें दबाया.उफफफफफफफ्फ़ मेरेहाथ मे जैसेकोई स्पंज जिसमें गर्मी होँ.नर्मी हौ.एक् अजीब सि मस्ती मेरी हाथेलि मे थि.दिदी कि मुँह सें " अया." निकल गयीँ,.उनकी आँखें बंद होँ गई,.
" ओओओओओह्ह्ह्ह दिदी आप् केँ बूब्ज़.मन करता हैं इन्हें भि खा जाऊं."
मेरी बातों पऱ दिदी जोरों सें हंस पड़ीं। कहां तोँ इतना रोमॅंटिक मूड थां मेरा.औऱ दिदी हंसरही थीं.सारामूड किर कीरा हौ गय़ा.
"क्याँ दिदी.आप् भि नां.क्याँ मेरा आप् केँ स्तनों कों सहलाना अच्छा नहि लगा.???"
" अरे नहि नहि.बहोत अच्छा लगरहा हैं.सही मे.औऱ ज़ोर सें दबाओ नां.उफफफफफ्फ़.तुँ बहोत अच्छे सें दबारहा हैं."
"फिन आप् हँसी क्यूं."" मैने औऱ जोरों सें उनके मम्मों दबाते हुएकहा.
"उईईईईईईईईईईईईईईईईईई,, माअं, अरे इतने ज़ोर सें नहि रे.मे हँसी तुम्हारी बातों सें.अरे किताबी शब्दों कों ऐसे टाइममत बोलाकर। एक् दम चालू वर्ड्स यूज़कर.तुम् नें इसे, ( अपने स्तनों कों अपने हाथों सें पकड़ उन्न्होने मेरे सामने कर दिया )। बूब्ज़ कहा.मजा नहि आता दोस्त.इसे मम्मों बोल.क्याँ बोलेगा इसेअब.???"
" चू--ची." मैने धीरे-धीरे सें कहा.पहलीबार ऐसे शब्द मेरे मुँह सें इतने फ़र्राटे सें नहि निकलपा रहे थें
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"हाआँअब ठीक हैं.पर्र ज़रागला खोल केँ बोल, लेँ मेरी चूचियाँ चूस.आर्म्पाइट्स बहोत चूस लिया."
औऱ एक् मम्मों मेरे मुँह मे ठूंस दि उन्होने."जैसेआम चूस्ता हैं नां.बस वैसे हि चूस".
मे एक् अग्यकारी शिष्या कि तरहझट छापड़ छापड़ उनकी मम्मों चूसरहा थां.जीभ नीचे औऱ होंठउपर लगाए.मानो उसका सारारस अंदर लें लूँ.उन्होने मेरा एक् हाथ पकड़ा औऱ अपनी दूसरी मम्मों पर्र रख दिया.
" लेँ इसेदबा.एक् कों चूस औऱ दूसरे कों दबा.हां हां रे.उउफफफफफफफफफ्फ़.बड़ी जल्दसीख लियारे तुँ.बड़ा होशियार हैं.आआआआआआआ.उईईईईईईई हांबस ऐसे हि.मजा आँ रहा हैं रे."
"आआप जैसी गुरुहों तौ सीखना हि पड़ता हैं नाँ दिदी." औऱ मे फिन सें लग गय़ा अपनेकाम मे.
क्रमशः……………………
महँगी चूत सस्ता पानी complete - Choot Ki Pani - Kahani ab aur interesting hogi
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