माँ बनी पहले दादी फिर बिवी - Ghar Ka Chudai - Real Story Continue Part 1
मेरानाम राजू हैं मेरेघऱ मे हम् चारलोग रहते हें|
दादा - जतिन उम्र 60 साल पैसे सें किसान हैं आज भि खेती करते हें जिसके कारण इनका जिस्म आज भि तंदुरुस्त हैं|
बापू - रमेश उम्र 40 सालये भि खेती करते हें बहुत मेहनती व्यक्ति हैं दिन कों खेत मे पसीना बहाते हें औऱ रात मे पत्नि कां। चुदाई कां शौकीन.
मम्मी - कुसुम उम्र 38 साल एक् पतिव्रता पत्नि जौ अपने पति कि सारीबात मानती हैं चाहे वो सही हौ याँ गलत। कुसुम देहात कि सबसे खूबसूरत औऱ आकर्षक औरत हैं जिसके पीछे देहात कां सारा मर्द चाहे बूढ़ा होँ याँ बच्चा सभीकोई पागल हैं दूसरों कि बात तोँ छोड़ो स्वयं इसका बेटा औऱ ससुरजी भि सें चोदना चाहता हैं मगरअब तक चोद नहि पाया।
मे - राजू उम्र 19 साल दिखने मे ठीक-ठाक हु। चुदाई करने कां बहुतमन करता हैं मगरकभी किया नहि बस अपनी मम्मी कों देखमुठ मारता रहता हूं.
माँ बनी पहले दादी फिर बिवी - Ghar Ka Chudai – New Episode
Update 1
हमारा देहात बहुत खूबसूरत हैं जहां पर्र एक् बहोत बड़ा पहाड़ हैं। औऱ एक् बड़ी सि नदी गुजरती हैं जिसके किनारे हमारे कई साराखेत हैं जिस पर्र हम् खेती करके अपना जिंदगी चलाते हें।
हमारे यहां अधिकतर खेतीजून जुलाई केँ महीने मे हि होता हैं क्योंकि इससमय भरपूर मात्रा मे बारिश होता हैं जिससे हम् खेत कों जोत केँ उस मे धान कि खेती करते हें।
जब मे 15 साल कां हुआतब तक मुझेचुत लन्ड औऱ चुदाई केँ बारे मे सभीपता चला गय़ा थां। तब सें हि मे अपनी माँ कों चोदना चाहता हूं। मगरकभी चोद नहि पाया चोदना तोँ दूरकभी पटाने कि भि कोशिश नहि कर पाया.
बस मे मां सें कुछदेर बातकर लेता, मगर चुदाई केँ बारे मे बात करने कि कभी हिम्मत नहि हुआ.जब भि मे मम्मी सें बात करता तौ वो केवल देहात केँ औरतों कि चुगली करती मे भि उसकेपास बैठा घंटों बकवास करता औऱ उसके मादकबदन कों देख अपनाआंख सकता.
काम करते टाइम मे मम्मी कां सहायता कर दिया करताजिस बहाने मे कभी कबार उसकेबदन कों छू लिया करता.
माँ कि सहायता करतादेख पिताजी बहुतखुश होते थें मगर उन्हें क्याँ पता थां कि मे किस फिराक मे हूं.
मम्मी जब भि कपड़े बदलती याँ नहाती तोँ मे उसे चुपके सें देखता औऱ मुठ मारता.
जब सें मैंने मम्मी केँ ऊपरनजर रखना शुरुआत कियातब सें मुझे मम्मी कों लेकरकुछ बातें पताचला
1- माँ केँ पीछे सारे देहात कां मर्द पागल हैं जब भि वो बाहर् जाती हें तौ देहात कां सारा मर्दउसे देखने केँ लिएघऱ केँ बाहर् आँ जाता.
2- मम्मी हमेशा साड़ी पहनती हैं केवलरात कों नाइटी पहनती हैं वो भि बापू केँ सामने.
3- रोजरात कों बापू मम्मी कों जमके चोदता हैं वो माँ कों चोदना कभी नहि भूलता। जिसेदेख नाँ जाने मैंने कितनी हि बारमुठ मारा होगा.
4- जिसबात सें मे सबसे अधिक हैरान हुआ थां वोँ थां दादाजी जी, दादा भि मेरी हि तरह माँ कों चोदना चाहता थां वोँ भि मम्मी कों नहाते वक़्त छुपकर देखता औऱ मुठ मारता थां.
मम्मी नें मेरे औऱ दादाजी जी केँ अंदर जोँ आग लगाया थां वोँ बुझने कि स्थान दिन-ब-दिन औऱ बढ़ता जारहा थां। कभी कबार तोँ मन करता कि माँ कों पटककर चोददूं बाद मे जौ होगा देखा जाएगा.
इतनेसाल तड़पने केँ बाद आखिरकार वोँ दिन आँ हि जाता हैं जब मे माँ कों चोद सकता थां.
मेरी दादीमा जब जिंदा थि तब अचानक एक् दिन उनके सीने मे दर्द होने लगता हैं जिसके बाद हम् उसेशहर केँ अस्पताल मे भर्ती करा देते हें मगर 2 दिन केँ बाद दादीमा कि मृत्यु होँ जाती हैं.
दादीमा कि मौत सें मुझेदुख तौ होता हैं मगरदुख सें ज़्यादा खुशी होता हैं क्योंकि दादीमा केँ मरने केँ बाद मुझे मम्मी कों चोदने कां एक् मार्ग मिल चुका थां.
आप् लोगसोच रहे होंगे कि आखिरकार मे अपनी दादीमा केँ मरने सें माँ कों केसेचोद सकता हूं तौ मे बतादूं कि हमारे देहात मे एक् नियम हैं। जिसकी सहायता सें मे मम्मी कों चोद सकता थां.
नियम - देहात कि किसीघऱ मे अगरदो याँ दो सें ज्यादा मर्दों कि पत्नि नां होँ तौ। उसके चुदाई कि ख़्वाहिश कों पूरा करने केँ लिएघऱ कि किसी एक् स्त्री कों साल मे एक् बार, 1 सप्ताह केँ लिएउन मर्दों सें विवाह करना पड़ता हैं। औऱ उसकी चुदाई कि ख़्वाहिश कों पूरा करना पड़ता हैं चाहे वो मर्दउस महिला कां कोई भि क्यूं नाँ होँ.
इस नियम कों इसलिये बनाया गय़ा हैं ताकिकोई मर्द अपनी ख़्वाहिश कों पूरा करने केँ लिए देहात कि किसीऔरत कों नाँ चोददे औऱ किसी कां घऱ नां बर्बाद होँ इसीलिए ये विवाह कों करना अनिवार्य हैं। विवाह कों मात्र जुलाई केँ महीने मे हि किया जाता हैं।
दादीमा कि मौत केँ बाद मेरेघऱ मे मे औऱ दादाजी जीदोऐसे मर्द होँ गए थें जिनका कोई पत्नि नहि थां। जिसका मतलबसाफ थां कि माँ कों हमारे संग एक्-एक् सप्ताह केँ लिए विवाह करना हि पड़ता औऱ उस दौरान हम् जीभर केँ माँ कों चोद सकते थें.
अब सीधा स्टोरी मे आगे बढ़ते हें :-
29 जून कि रात कों मे दादा औऱ पिताजी संग मे बैठकर खानां खारहे थें हमारे संग माँ भि बैठी थि मगर वो खानां नहि खारही थि। वो सबके खानां खाने केँ बाद हि खानां खाती हैं.
सभीकोई चुपचाप खानां खारहा थां कोईकुछ नहि बोलरहा थां तभी दादाजी जी खामोशी कों तोड़ते हुए कहते हें - राजेश तुम्हें पता हैं नाँ परसो सें सावन (जुलाई) शुरुआत होने वाला हैं.
पिताजी खानां खातेहुए हि कहते हें - हांपता हैं पापा.
दादा - तोँ तुम्हें ये भि पता होगा कि इससाल बहू कों मेरे औऱ राजू केँ संग। इतनाकह दादाजी जीचुप होँ जाते हें
पिताजी - हां पापा मे इसकेलिए सजधजकर हूं मगर आपको, कुसुम औऱ राजू कों आगे जौ ठीकलगे.
दादा दुखी सां चेहरा बनाते हुए - मुझेमाफ करनाबहू हमें तुम्हारे संग विवाह करना हि पड़ेगा अगर हमने नहि किया तोँ हमारी सारी जमीन कों देहात वालेजपत कर हमें देहात सें निकाल देंगे.
मम्मी - मैंने भि स्वयं कों इन सबकेलिए सजधजकर कर लिया हैं आगे जोँ भि होगा देखा जाएगा.
इसकेबाद कोईकुछ नहि बोलता औऱ सभीकोई अपना खानां खाने लगता हैं खानां खाने केँ बाद मे अपने कमरे मे सोनेचला जाता हूं औऱ बाकीसभी भि अपने कमरे मे चला जाता हैं।
अपने कमरे मे आँ जाने केँ बाद मे अपनेआने वालेकल केँ बारे मे सोचने लगताहु। कुछदिन बाद मे अपनी मम्मी कां चुत चोदने वाला थां जिसेआज तक मात्र मैंने अपने पिता कों चोदते देखा हैं औऱ मे केवलचुप केँ देखा करता थां।
1 घंटे तक मे यहीसभी सोचते हुए अपने लन्ड कों मसालने लगता हूं जब मुझसे रहा नहि जाता.तब मे अपनेबैड पर्र सें उठता हूं औऱ अपने कमरे कि खिड़की कों खोल बाहर् चला जाता हूं। औऱ मम्मी केँ कमरे कि तरफ देखने लगता हूं उनके कमरे कां भि खिड़की खुला थां जहां सें रोशनी बाहर् कि ओर आँ रहा थां.
दबेपैर मे खिड़की केँ पासचला जाता हूं औऱ कमरे केँ अंदर झांकने लगता हूं। जैसा मैंने सोचा थां अंदरठीक वैसा हि सीनचल रहा थां। बापू नंगे होकरबैड पर्र लेटाहुआ थां औऱ मम्मी भि नंगी होकर पिताजी कां लन्ड चूसरही थि.
मम्मी बहुत अच्छे सें लन्ड चूसरही थि जिसका गवाह बापू कां चेहरा देरहा थां उनके मुंह सें सिसकारियां निकलरहा थां.
बहुतदेर तक बापू बिनाकोई हरकतकिए लन्ड चूसवाते रहते हें जिसके बाद बापू अपना एक् हाथ लें जाकर मम्मी केँ सिर पऱ रख देता हैं औऱ बाल पकड़कर मम्मी कों पलंग पऱ लेटा देता हैं.
क़िस्मत कि बात तौ ये थां कि पिताजी नें माँ कों जिसतरह खाट पऱ लेटाया थां, उससे मुझे माँ कां चुतसाफ दिखाई देरहा थां.
पिताजी माँ कि टांगों कों मोड़ केँ ऊपरकर देते हें जिससे मुझे माँ कि चुत औऱ भि अच्छे सें दिखाई देने लगता हैं
उफ्फ्फ उनकी गुलाबी चुतजिस पऱ एक् भि बाल नहि थां, पाव कों मोड़ केँ ऊपरउठा देने केँ कारण मम्मी केँ दो बड़े नितंब अलग हौ गय़ा थां जिससे गांड कां छेदसाफ दिखाई देरहा थां, कालेरंग कां वो छेद जैसे चोदने केँ लिए मे मराजा रहा थां मगर अफसोस अभि मे उससे बहोत दूर थां.
चुत केँ आसपास कुछ पानी थां जौ कि शायद मम्मी कि चुत सें हि निकला होगा, जिसे पिताजी अपनी उंगलियों सें चुत पऱ अच्छे सें लगाने लगता हैं.
अब मम्मी कां चुत लन्ड लेने केँ लिए सजधजकर हौ गय़ा थां, बापूचुत कों सेहलाना छोड़ जाकेचुत केँ पासबैठ जाता हैं औऱ अपने लन्ड कों एक् हाथ सें पकड़चुत केँ अंदर घुसा देता हैं, जिससे माँ केँ मुंह सें एक् ओह्ह नीकलआता हैं.
बापू अपने लन्ड कों धीरे धीरेचुत केँ अंदर बाहर् करतेहुए मम्मी कों चोदने लगता हैं, मुझे मम्मी केँ चुत मे लन्ड अंदर बाहर् होतें हुएसाफ दिखाई देरहा थां, लन्ड चुत केँ बाहर् होकर जैसे हि अंदर जाता मम्मी केँ मुंह सें अह्ह्ह निकला आता.
बापूअब अपने चोदने कि रफ्तार कों धीरे धीरे बढ़ाने लगता हैं, माँ भि अपने शिकारियों कों बड़ा देती हैं.
माँ - अह्ह्ह औऱ जोर सें चोदो मज़ा आँ रहा हैं औऱ जोर सें.
पिताजी किसी आज्ञाकारी पति कि तरह माँ कि बातों कों मान मम्मी कों चोदने कां रफ्तार बड़ा देता हैं.
जिसके बादरूम मम्मी कि आहें औऱ थपथप कि आवाज़ सें भर जाता हैं, 5 मिनट कि चुदाई केँ बाद पिताजी चुत केँ अंदर हि झड़ जाता हैं.
बापू जैसे हि अपने लन्ड कों बाहर् निकालता हैं संग हि उनकामाल भि चुत सें बहार आँ जाता हैं.
जिसके बाद मे भि अपने कमरे मे वापस आँ जाता हूं औऱ माँ कि चुदाई कों यादकर मुठ मारने लगता हूं.
माँ बनी पहले दादी फिर बिवी - Ghar Ka Chudai – New Episode
अगलेदिन सुभह माँ आंगन मे झाड़ू लगारही थि औऱ मे उसके मादकबदन कों भूखे भेड़िए कि तरहदेख रहा थां। वो मेरी औऱ अपनी गांड झुका केँ झाड़ू लगारही थि। अभि आधे आंगन मे हि झाड़ू लगा थां कि तभी वहां बापू औऱ दादा आँ जाते हें जिसेदेख मम्मी झाड़ू लगाना छोड़ देती हैं औऱ अपनेसिर पऱ पल्लू लें लेती हैं.
पिताजी औऱ दादाजी जी आंगन मे रखे बिस्तर पऱ जाकरबैठ जाते हें औऱ हमें भि अपनेपास बुला लेते हें। जब हम् वहां जाते हें तोँ मे देखता हूं कि दादाजी जी कां मुंह लटकाहुआ थां जिसेदेख मुझेकुछ समझ नहि आता हैं। औऱ मे पिताजी सें पूछ लेता हूं - क्याँ हुआ.
बापू - अरे बेटा जौ विवाह होने वाला थां नाँ उसके नियमों कों बदल दिया गय़ा हैं.
बापू केँ बात कों सुन मुझे भि जोर कां झटका लगता हैं दिल तेजी सें धड़कने लगता हैं औऱ चेहरा सिकुड़ने जैसा लगने लगता हैं। मुझे मेरे ख्वाब टूटते हुएनजर आँ रहा थां मे आगेकुछ औऱ सोचता उससे पहले हि मम्मी बापू सें कहती हैं - बदलाव कैसा बदलाव किया गय़ा हैं.
बापू - तुम्हें तौ पता हि हैं कि ये विवाह केवल 30 जून सें 31 जुलाई तक हि होता हैं मगरइस साल विवाह 5 बार होगा। इसीलिए नियमों मे कुछ बदलाव किया गय़ा हैं.
दरअसल 30 जून सें 31 जुलाई केँ बीच देहात मे हर एक् सप्ताह सामूहिक विवाह कराया जाता हैं जिसमें सभीलोग बारी-बारी विवाह करता हैं। जिसमें घऱ कां सबसे बड़ा मर्द सबसे पहले विवाह करता हैं औऱ उसकेबाद उससे छोटा मर्द अगले सप्ताह विवाह करता हैं। इससे पहले देहात मे ज्यादातर 1 महीने मे चार हि बार विवाह हुआ हैं मगरइस साल 5 बार विवाह होने वाला थां.
मे सदमे मे हि रहतेहुए बापू सें कहता हूं - 5 बार विवाह होगा तोँ इसमें नियम बदलने कि क्याँ जरूरत आन पड़ा.
पिताजी - अरे पागल 1 महीने मे 4 हि सप्ताह होता हैं औऱ विवाह 5 कराना हैं तौ नियम बदलना हि थां जुलाई केँ बाद तोँ विवाह हम् लोग नहि करा सकते थें नाँ। जोँ कराना हैं इसी 1 महीने मे कराना हैं.
मे - तोँ नियम मे क्याँ बदलाव किया गय़ा हैं.
बापू - अगर किसी नें इससे पहलेये 1 सप्ताह वाला विवाह किया हैं तौ वो दोबारा 1 सप्ताह केँ लिए विवाह नहि कर सकता केवलतीन हि दिन केँ लिएकर सकता हैं औऱ जिसका पहलीबार हैं वो 1 सप्ताह केँ लिएकर सकता हैं।
पिताजी केँ बात कों सुन मेरेजान मे जानआता हैं औऱ मे खुश होँ जाता हूं क्योंकि अब मुझे माँ केँ लिए 1 सप्ताह तक रुकने कां जरूरत नहि थां वो मुझे 3 दिनबाद हि मिल जातीमगर दादाजी जी कां चेहरा देखने लायक थां उसके तोँ सारे ड्रीम्स हि टूटगए बेचारा.
पिताजी - औऱ एक् बातआज हि पहला विवाह होने वाला हैं तोँ कुसुम तुम् साम तक सजधजकर हौ जानां औऱ राजू तुम् सरदार जी केँ घऱचले जाओ वहां पर्र विवाह कि तैयारियां करना हैं तुम्हें।
मे - ठीक हैं बापू मे दोपहर तक चला जाऊंगा.
इतनीदेर तक दादाजी जी नें कुछ भि नहि बोला थां बस अपना चेहरा लटकाए बैठे थें, जिसके बादसभी कोई अपने अपनेकाम मे लग जाता हैं क्योंकि साम कों विवाह थां तैयारियां भि करना थां.
बापूखेत चले जाते हें दादाजी जी वैसे हि अपना चेहरा लटकाए बिस्तर पऱ बैठे रहते हें औऱ मे मम्मी केँ संग किचनघऱ मे चला जाता हूं। जहां मुझेहर रोज कि तरह मम्मी प्याज काटने दे देती हैं औऱ मे उसे वहीं पर्र नीचेबैठ केँ काटने लगता हूं मम्मी भि वहीं पर्र कामकर रही थि.
मे माँ केँ संग खुलने केँ लिए बड़े हिम्मत जुटा केँ कहता हूं - विवाह सें पहले हि मुझसे इतनाकाम करारही हैं विवाह केँ बादपता नहि कितना कराओगी.
मेरेबात कों सुन माँ कों हंसी आँ जाता हैं औऱ वो हंसते हुए हि मुझसे कहती हैं - वोँ तौ तुम्हें विवाह केँ बाद हि पता चलेगा.
माँ कों हंसता देख मेरा हिम्मत बढ़ जाता हैं औऱ मे उनसे कहता हूं - माँ तुम् इस विवाह सें खुश तोँ हौ नाँ.
मे मम्मी सें ये प्रश्न इसलिये पूछता हूं क्योंकि माँ इस विवाह केँ लिए नाँ हि मना किया थां औऱ नां हि घऱ मे इसे लेकरकोई खासबात हुआ थां। मे माँ केँ मन कों जानने केँ लिएइस प्रश्न कों पूछा थां.
माँ मेरे प्रश्न कां जवाब देने कि स्थान उल्टा मुझे सें प्रश्न कर लेती हैं - तुम्हें क्याँ लगता हैं मे खुश हूं याँ नहि।
मे कुछदेर सोचने केँ बाद मम्मी सें कहता हूं - आप् बापू सें बहोत प्रेम करती हौ वोँ जोँ कह देते हें आप् उसके बातों कों मान लेती हौ कोई प्रश्न नहि करती हमेशा उसकाआदर करती किसी देवता कि तरह, औऱ आज तुम् दादाजी जी केँ संग विवाह करोगी औऱ इसके 3 दिनबाद अपने स्वयं केँ बेटे सें इसीलिए पूछा.
माँ कुछदेर तौ चुप रहती हैं मगरफिन केहती हैं - मे तुम्हारे पिताजी केँ सारेबात कों इसलिये मानती हूं क्योंकि वो मेरे पति हैं मगरआज जब वो मुझे तलाकदे देगातब वो मेरा पति नहि रहेगा औऱ फिन तुम्हारे दादाजी जी मुझसे विवाह करो मेरा पति बन जाएगा तोँ इसमें बुरा क्याँ हैं इसीलिए मुझेकोई दुख नहि.
मे - विवाह केँ बादजब दादाजी जी तुम्हारे संग वोँ सभी करेगा तब तुम्हें बुरा नहि लगेगा.
माँ - एक् पत्नि होने केँ नाते अपने पति केँ संग सोनाकोई गलतबात नहि हैं मे किसी पराए केँ संग थोड़ी सोरही हूं।
इसकेबाद मे माँ सें कोई औऱ प्रश्न जवाब नहि करता क्योंकि उन्होंने कुछ हि बातों मे सभीकुछ क्लियर कर दिया थां.
खानां बनाने केँ बाद हम् सभी खानां खाते हें औऱ मम्मी मुझेखेत मे पिताजी कों खानां देनेआने कों कहती हैं। जिसके बाद मे खानां लेकर बापू कों देनेचला जाता हूं औऱ जब मे वापसघऱ आता हूं तोँ मुझे मम्मी कहीं भि दिखाई नहि देती औऱ नां हि दादा दिखाई देते हें। मे मम्मी कों इधरउधर खोज हि रहा थां कि तभी मुझेकुछ आवाज़ सुनाई देता हैं.
आखिर कहां हैं दादा ओर मम्मी औऱ मुझेकौन सां आवाज़ सुनाई देता हैं ये जानने केँ लिए अगलेभाग कां प्रतीक्षा करें.
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