शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
अगलेदिन सुभह एक् तरफ विक्रम कों राज्य कां सर्वेसर्वा बनाने कि तैयारी जोर हंगामा सें चलरही थि वहीं दूसरी तरफ मेनका विक्रम सें मिलने केँ लिएमहल पहुंच गई! दरबान नें विक्रम केँ सूचना दि तोँ मेनका अंदरचली गई औऱ मेनका कों देखते हि विक्रम खुशी सें बोला:"
" आइए अच्छा किया आपने जोँ आज सुभह सुभह हि आप् राजमहल चलीआई! अब आप् पूरे कार्यक्रम तक यही रहना!
मेनका बड़े प्रेम सें उसका चेहरा देखरही थि मानोआज उसजी भरकर देख्ना चाहती हौ! मेनका केँ मुंह सें शब्द नहीं निकलपा रहे थें औऱ विक्रम हैरान थां कि आखिर मेनका कों हौ गय़ा हें औऱ बोला:"
" आपकी तबियत तौ ठीक हैं? ऐसे मुझे क्यूं देखरही होँ आप्?
मेनका केँ होंठकुछ बोलते हुए भि कांपरहे थें औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" विक्रम मे ठीकहु!
मेनका नें बड़ी मुश्किल सें कहा औऱ विक्रम नें उसकाहाथ पकड़कर प्रेम सें बेड पर्र बिठाया औऱ बोला:" आप् शायदकुछ कहना चाहती हैं मगरबोल नहींपा रही हैं! आप् बिलकुल निश्चित होकर बोलिए!
मेनका कि आंखो मे आंसू आँ गए औऱ भरेगले केँ संग विक्रम कां हाथ पकड़कर बोलि:"
" आँ अ आप् जानना चाहते थें कि हमारी खानदानी तलवार आपने केसेउठा ली थि !
विक्रम कि आंखो मे चमक आँ गई औऱ बोला:" बिलकुल जानना चाहता हूं क्योंकि मे स्वयं उसदिन केँ बाद सें सुकून सें नहींसो पारहा हु एक् लम्हा केँ लिए भि!
मेनका केँ बोलने सें पहले हि उसकी आंखेभर आई औऱ आंसूछलक पड़े औऱ रुंधे हुएगले सें बड़ी मुश्किल सें कहपाई
" आप् आप् मेरे पुत्र होँ ! मेरा अपनाखून हौ!
मेनका नें बड़ी मुश्किल सें अपनीबात कही औऱ विक्रम सें लिपटकर रोनेलगी औऱ उसका मुंह चूमने लगी! विक्रम केँ दिमाग़ मे धमाका सां हुआ औऱ रोती हुईँ मेनका कों संभालते हुए उसके आंसूसाफ करतेहुए बोला:"
" क्याँ क्याँ आप् मेरी मम्मी माता हें ? हे ईश्वर!! आपको केसेपता चला ?
मेनका जोर सें सुबक पड़ी औऱ बोलि:" हान पुत्र! कलरात दाई माता आई थि औऱ उन्होंने मुझे सारी बाते बताई!
उसकेबाद मेनका नें सभीकुछ विक्रम कों बताया तोँ विक्रम कि भि आंखेछलक उठी औऱ वोँ भि कसकर मेनका सें लिपट गय़ा! दोनो माँ बेटे एक् दूसरे सें लिपटकर रोतेरहे औऱ एक् दूसरे कों संभालते रहे! आखिरकार विक्रम नें जैसे तैसे स्वयं कों संभाला औऱ अपनी माता मेनका केँ आंसुओं कों साफ करतेहुए बोला:"
" मुझे आप् मिल गई तौ सभीकुछ मिल गय़ा! थोड़ी देरबाद राज्य सभा लगेगी तोँ मे सबकेबीच मे सारी सच्चाई बता दूंगा!
मेनका कों भला क्याँ आपत्ति होती तोँ वोँ बोलीं:"
" मुझे आप् मिलगए पुत्र तोँ मुझेअब इससे ज़्यादा कुछ नहीं चाहिए!
थोड़ी देरबाद जैसे हि राज्य सभालगा औऱ सब मंत्री दल कि बैठक शुरुआत हुईँ तौ विक्रम केँ कुछ बोलने सें पहले हि दाई माता आँ गई औऱ उन्होंने सभा कों सभीकुछ बताया तोँ हरकोई हैरान होँ गय़ा औऱ विक्रम नें दाई माता कों बात कों बल देने केँ लिए सबकेबीच मे मेनका कि खानदानी तलवार उठाकर दाई माता कि बात कों सही साबित किया औऱ बोला:"
" चूंकि सबके सामने साबित हौ हि गय़ा हैं कि मे राज पुत्र नहीं बल्कि मेनका पुत्र हु तोँ ऐसे हालत मे मेरे राज्याभिषेक कां कोई औचित्य हि नहींरहा! मे अब आप् सबकीतरह उदयगढ़ कां एक् आम सेवकहु औऱ मेरेलिए यह बेहद फख्र कि बात हें कि मे राज्य केँ सबसे ईमानदार औऱ ऐसे बलिदानी परिवार सें हु जिसने उदयगढ़ कि तरह उठने वालेहर तीर कों अपने सीने पर्र खाया हें!
विक्रम इतना बोलकर राजगद्दी सें उतरा औऱ नीचेआकर सभा मे बैठ गय़ा तौ सारे मंत्री गण अपनी सीटों सें खड़े हौ गए क्योंकि उन्हे समझ नहीं आँ रहा थां कि आखिरयह सभी क्याँ हौ रहा हैं!
आखिर मे हिम्मत करके मानसिंह बोला:"
" बेशक आप् राज परिवार सें नहीं होँ मगर राज्य केँ लिए राजमाता नें आपको हि चुना थां औऱ उस हिसाब सें आपकोराज माता कि आज्ञा कां पालन करतेहुए गद्दी कों ग्रहण करना चाहिए!
विक्रम:" जब राजमाता नें यह निर्णय लिया थां तौ उस टाइम उन्हें सच्चाई कां ज्ञान नहि थां मगर चूंकि अब सच्चाई सामने आँ गई हैं तौ उस निर्णय कां कोई मतलब हि नहींरह जाता !
मंगल सिंह:"मगर युवराज राजमाता कां आखिरी निर्णय यही थां औऱ हमे इसका सम्मान करना चाहिए!
विक्रम:" राजमाता मेरेलिए हमेशा सें पूजनीय रही हें मगर किसी औऱ केँ अधिकार कों सभी सच्चाई जानते हुए अपनाने केँ लिए मेरा स्वाभिमान मुझेरोक रहा हैं!
भीमा सिंह:" मेरे ख्याल सें हमेंसभी कों आपस मे मिलकर इसका समाधान निकालना चाहिए!
विक्रम:" मे आप् कि बात सें सहमतहु! आप् जैसे आदेश करेंगे मेरेकिए सर्वोपरी होगा!
भीमा सिंह:"ठीक हें फिन आप् अपने कक्ष मे जाकर आराम कीजिए औऱ मंत्री दल कि आज कि बैठक मे फैसला लिया जाएगा कि आगे राज्य कि बागडौर किसके हाथ मे देनी चाहिए!
विक्रम बिनाकुछ कहे अपनीसीट सें उठा औऱ चला गय़ा औऱ उसकेसंग हि मेनका भि चली गई! विक्रम राज कक्ष मे न् जाकर सीधे अपनेघऱ मेनका केँ संग आँ गय़ा!
घऱआकर विक्रम औऱ मेनका आपस मे बात करनेलगे औऱ मेनका बोलि:"
" आपनेसही किया पुत्र जोँ महाराज कां पद ठुकरा दिया! हमारे पूर्वजों नें तौ राज्य कि सेवा करने केँ लिएवचन दिया थां न् कि राज करने केँ लिए !
विक्रम:" सत्यवचन माता! मुझे किसीराज पाठ कि अभिलाषा नहीं हैं! सच कहूं तोँ पहलीबार आपकेगले सें लगकर एहसास हुआ कि माता कां प्यार क्याँ हें ! जीवन मे पहलीबार ऐसा अद्भुत एहसास हुआ हें!
मेनका उसकीबात सुनकर प्यार भाव सें भर गई औऱ फिन सें अपनी बांहे फैलाई औऱ बोलि:"
" सच मे विक्रम तोँ फिन सें आओ औऱ अपनी माता केँ गलेलग जाओ मेरे पुत्र!
विक्रम एक् बारफिन सें मेनका कि बांहों मे समा गय़ा औऱ मेनका नें भि उसे अपने आगोश मे लें लिया औऱ भावुक होतेहुए बोलि:"
" बस पुत्र अब मुझे छोड़कर मत जानां! आपके सिवाअब मेराकोई औऱ नहि हें इस दुनिया मे! मे अपनी सारी ममता आप् पर्र लूटा दूंगी!
विक्रम भि उससे कसकर लिपट गय़ा औऱ बोला:"कभी नहि कभी नहीं माता! आपका भि तौ मेरे सिवाकोई नहीं हें! मे हमेशा आपकी परछाई बनकर आपकेसंग रहूंगा!
मेनका नें खुशी खुशी विक्रम कां मुंहचूम लिया औऱ बोलीं:"
" आप् बैठो मे आपकेलिए कुछ खाने कों लाती हूं!
इतना कहकर मेनका अंदरचली गई औऱ वहीं दूसरी तरफराज दरबार लगाहुआ थां औऱ ऐसा पहलीबार होँ रहा थां कि राज गद्दी पऱ कोई नहीं बैठाहुआ थां!
भीमा सिंह:"राज गद्दी कां खाली रहना अपशकुन माना जाता हें! मेरे विचार सें हमे जल्द हि राज गद्दी केँ लिए राजा देख्ना चाहिए!
मानसिंह:" बिलकुल सहीबात मगर प्रश्न यही हें कि राज गद्दी किसे दि जाए? राजमाता नें तौ विक्रम कों राजा बनाने कां फैसला किया थां मगर विक्रम तोँ साफमना करकेचले गए!
सतपाल सिंह:" मेरे विचार सें तोँ विक्रम हि इस गद्दी केँ लिए उपयुक्त हें क्यूंकि राजमहल मे बड़े होने केँ कारण वोँ राजपाठ चलाने केँ सारे तरीके आते हें औऱ फिन दूसरी बात उन्हे राजा बनाना भि तोँ राजमाता कां हि फैसला थां!
भीमा:*मगर उस टाइम पऱ राजमाता कों सच्चाई नहींपता थि औऱ दूसरी सबसे बड़ीबात विक्रम स्वयं राजा बनने सें मनाकर चुके हें!
सतपाल:" विक्रम एक् ऐसे परिवार परिवार सें हें जिसमे आत्म सम्मान कूटकूट करभरा हुआ हैं फिनऐसी हालत मे जब उन्हें पता हें कि वोँ राज परिवार सें नहीं हें तौ वोँ किसी भि दशा मे राज गद्दी स्वीकार नहीं करेंगे!
मानसिंह:" विक्रम नहीं तौ फिन किसे राजा बनाया जाए ? किसी केँ पासकोई नाम हौ तौ बताए?
जसवंत सिंह:" मेरे खयाल सें राज्य मे अभि विक्रम सें बड़ा योद्धा कि नहीं हें औऱ फिन राजमाता भि यही चाहती थि कि विक्रम कों हि राजा बनाए तोँ मुझे विक्रम केँ नाम पर्र कोई आपत्ति नहीं हें! अगर नहीं तौ विक्रम सें बहादुर औऱ शक्तिशाली कौन हैं उसकानाम बताया जाए ?
थोड़ी देर शांति रही औऱ सभी एक् दूसरे कां मुंह देखते रहे! किसी कों कोईनाम समझ नहीं आँ रहा थां तौ अंततः भीमा सिंह बोला:"
" मेरे ख्याल सें हमें विक्रम कों हि राजगद्दी देनी चाहिए! जब हम् सभी मिलकर फैसला लेंगे तौ विक्रम कों वोँ मानना हि पड़ेगा क्योंकि विक्रम कभी भि राज्य केँ अहित केँ बारे मे नहींसोच सकते!
भीमा कि बात कां सबने समर्थन किया औऱ अंत मे फैसला लिया गय़ा कि विक्रम कों हि राजा बनाया जायेगा!
भीमा:"जब हम् सबनेतय कर लिया हैं तोँ फिनआज हि विक्रम कों राजा बनाना चाहिए क्योंकि आज कां शुभ मुहूर्त राजमाता नें निकलवाया थां!
भीमा कि इसबात सें सब सहमत थें औऱ थोड़ी देरबाद हि भीमा अपनेसंग सतपाल औऱ मानसिंह केँ लेकर विक्रम केँ घऱ पहुंचे औऱ बोले:"
" विक्रम बेटा हमने सबकी सहमति सें यह फैसला किया हें कि आपको हि राजा बनाया जाए क्योंकि आपमें एक् राजा केँ सारेगुण हें!
विक्रम :" मगर मे तोँ आप् सबको अपना फैसला बता चुकाहु कि मे ऐसे खानदान सें हु जोँ राज्य कि सेवा केँ लिए वचनबद्ध हें नाँ कि राज करने केँ लिए!
भीमा:" हम् आपकी भावनाओं कि कद्र करते हें युवराज! मगर आपको समझना चाहिए कि आपके पिता श्री नें हि आपको महाराज कि गोद मे दिया थां ताकि आप् बड़े होकर उदयगढ़ कों सही दिशा मे लें सके!अब आप् अपने पिता औऱ स्वर्गीय महराज केँ फैसले केँ खिलाफ तौ नहींजा सकते औऱ फिन राजमाता कां आखिरी फैसला हि यही थां!
विक्रम:* ठीक हैं मगरफिन भि मे.
विक्रम कि बात ख़त्म होने सें पहले हि सतपाल बोला:" राजा बनकर आप् अपने पिता औऱ महाराज केँ वचन कों पूरा करेंगे तोँ निश्चित रूप सें उनकी आत्मा आपको आशीर्वाद देंगी!
विक्रम नें हैरानी भरी नजरो सें मेनका कि तरफ देखा तौ मेनका नें हालात कों समझते हुए स्वीकृति मे आपनी गर्दन कों झुका दिया औऱ विक्रम नें भि अपनी माता कि आज्ञा कां पालन किया!साम होते होते विक्रम कां राज तिलक किया गय़ा औऱ पूरे राज्य कि बागडोर उसकेहाथ मे दे दि गई!
Bada emotional scene ban gyaa mummy beta k Milan kaa hon bi chahiye thaa Vikram ko raja bnaa sai faisla hain usi ko banana chahiye thaa halat ab chahiye joo hu gaye hu Baherhal dekhte hain ab aage kiya hotha hain Behtareen shaandar update
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम केँ राजतिलक मे राज दरबार खचाखच भराहुआ थां औऱ चारो औऱ विक्रम कि जय जयकार केँ नारे गूंजरहे थें! महल कों चारोओर सें लोगो कि भीड़ नें घेररखा थां औऱ सब केँ चेहरे पऱ खुशीसाफ दिखाई देरही थि जौ इसबात कां सुबूत थि कि मंत्री गण नें विक्रम कों राजा बनाकर कोई गलती नहीं कि थि!
राज गद्दी पर्र बैठेहुए विक्रम केँ माथे पर्र एक् तेज थां औऱ उसकी आंखो मे आत्म विश्वास साफतौर पऱ झलकरहा थां औऱ जैसे हि प्रजा जोरजोर सें उसकीजय जयकार करनेलगी तोँ विक्रम खड़ाहुआ औऱ हाथ सें सब कों शांत रहने कां इशारा किया तौ पूराराज दरबार मे बिलकुल शांति होँ गई औऱ विक्रम बोला:"
" आज आप् सबने मुझे राजा नहीं बल्कि अपना गुलाम बना लिया हें! मुझे सौगंध हें खून कि हरउस बूंद कि जोँ उदयगढ़ वालो केँ बदन सें बही हें मे जब तक जब्बार औऱ पिंडारियो कों शमशान नहींआया दूंगा तब तक सुकून कि सांस नहीं लूंगा!
सब नें एक् बारफिन सें विक्रम कि जय जयकार करी औऱ उसकेबाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे प्रजा महल सें बाहर् निकलने लगी! मेनका केँ चेहरे पर्र भि आज एक् अलग हि खुशीदमक रही थि क्योंकि अजय केँ जाने केँ बाद उसकी खुशियां हि उखड़ गई थि औऱ अब विक्रम केँ आँ जाने सें उसकी दुनिया फिन सें न् मात्र आबाद हौ गई थि बल्कि उसका पुत्र अब उदयगढ़ केँ सर्वोच्च सिंहासन पऱ विराजमान थां!
मेनका अपनीसीट सें खड़ी हुईँ औऱ बोलीं:" अच्छा महराज मुझेअब जाने कि आज्ञा दीजिए!
विक्रम नें हैरानी सें अपनी माता कों देखा औऱ बोला:" नहीं महाराज नहीं आपकेलिए तौ मे सदैव आपका पुत्र हि रहूंगा माता!
मेनका:" बेशक आप् मेरे पुत्र होँ मगर आप् अभि महराज केँ पद पऱ विराजमान हौ तौ पूरी प्रजा केँ संगसंग मेरा भि कर्तव्य बनता हें कि मे भि राज धर्म कां पालनकरू!
विक्रम कुछ नहीं बोला औऱ मेनका इतना कहकर बाहर् कि तरफचल पड़ी औऱ विक्रम उसको जातेहुए देखता रहा!तभी मंत्री गण केँ बीचआपस मे आंखो हि आंखो मे कुछबात हुईँ औऱ भीमा सिंह बोले:"
" वैसे तौ महाराज आप् हें मगरअगर आपकी इजाजत होँ तोँ हम् सब मंत्री दल केँ लोग आपके बड़े बुजुर्ग होने केँ नाते एक् निर्णय औऱ लेना चाहते हें!
विक्रम:" आप् सभी मुझे उम्र मे बड़े हें औऱ निसंदेह आप् सब उदयगढ़ केँ शुभ चिंतक हें तौ मेरीतरफ सें आपको पूरी आजाद हें औऱ आपकायह फैसला भि मेरेलिए मान्य होगा!
भीमा सिंह:"ठीक हें महाराज फिन हम् सभी लोगो नें मिलकर यह फैसला किया हैं कि आपका माताश्री मेनका देवी कि राजमाता कां पद दियाजाए!
विक्रम नें हैरानी सें सबकीतरफ देखा औऱ दरवाजे कां पास पहुंच चुकी मेनका केँ भि बढ़ते कदमरुक गए औऱ विक्रम बोला:"
" मगर क्याँ ऐसा करना उचित होगा क्योंकि मेरे बारे मे तोँ राजमाता नें भि फैसला लिया थां मगर मेरी माता कों राजमाता कां पद देना क्याँ नियमो कां उल्लंघन नहीं हें ?
सतपाल सिंह:"कोई उल्लंघन नहीं हें महराज क्योंकि महराज कि माता हि राजमाता होती हें औऱ इस वक्त महराज आप् हें औऱ यही उदयगढ़ कां विधान हें! इसमें कुछ भि गलत नहीं हैं!
मेनका: मगर मे स्वयं कों इसपद केँ लायक नहीं समझती हु औऱ मेरी महराज सें विनती हैं कि इस आदेश कों जल्दी निरस्त करने कां कष्टकरे!
विक्रम केँ समझ नहीं आँ रहा थां तोँ क्याँ फैसला करे तौ भीमा सिंहबीच मे हि बोला:"
" महाराज तौ अब अपनेवचन सें बंधेहुए हें औऱ चाहकर भि इस फैसले कों चुनौती नहींदे सकते! हम् सब उदयगढ़ केँ शुभ चिंतक औऱ आपके बुजुर्ग हें! आप् हमारे फैसले केँ विरुद्ध जाकर हम् सबके अपमान कां दोषीबन रही हें !
मेनका केँ चेहरे पऱ उदासी दिखी औऱ बोलीं:" ऐसा न् कहे क्योंकि मे ख्वाब मे ऐसा नहि सोच सकती! आप् सब मेरेलिए आदरणीय हें मगर राजमाता कां पद स्वीकार नं करना मेरी अपनी मजबूरी हें!
सतपाल सिंह:" क्याँ आप् उदयगढ़ केँ विधान मे विश्वास रखती हैं औऱ एक् सच्ची औऱ वफादार हें ?
मेनका:" निश्चित रूप सें मे विधान मे विश्वास रखती हूं औऱ अपनी आखिरी सांस तक उदयगढ़ कि नीतियों औऱ परंपरा केँ लिए दृढ़ संकल्प रखतीहु!
भीमा सिंह:"फिन महाराज कि माता कों राजमाता कां दर्जा जानां भि तौ उदयगढ़ कां विधान औऱ परंपरा हैं तोँ आप् इससे केसे इनकार कर सकती होँ ?
मेनका कुछ नहीं बोलि औऱ विक्रम कि तरफ नजरे खड़ाकर देखा मानो महाराज कि अनुमति मांगरही होँ औऱ विक्रम बोला:"
" मेरी ख़्वाहिश तोँ यही थि कि मेरे माता कों राजमाता कां पद नं मिलेमगर आप् सबके विरुद्ध औऱ विधान औऱ परंपरा केँ खिलाफ जानां भि अनुचित होगा इसलिये आप् सबकी सहमति मे हि मेरी भि सहमति हें!
देखते हि देखते भीमा नें मेनका कों राजमाता कि गद्दी ग्रहण कराई औऱ मेनका कि आंखो सें आंसूछलक पड़े जिन्हे बड़ी मुश्किल सें वोँ रोकपाई! दोहपर कां वक्त होने केँ कारणसब लोग निकलगए औऱ विक्रम केँ संगसंग मेनका भि विश्राम गृह कि औऱ प्रवेश कर गई औऱ उसके पीछे दासियों कि एक् लंबी कतारलग गई थि औऱ मेनका हैरानी सें चलती हुईँ विश्राम कक्ष मे आँ गई तौ एक् दासी जिसका नाम बिंदिया थां बोलीं:"
" राजमाता आपके स्नान केँ लिएसभी रेडी हें! आप् चाहे तौ स्नान कर सकती हें!
मेनका कों भला क्याँ आपत्ति होती तोँ दासिया उसे लेकर स्नानगृह कि औऱ चल पड़ी औऱ देखते हि देखते वोँ स्नानगृह पहुंच गए औऱ एक् एक् करकेसब दासिया रुक गई औऱ बिंदिया बोलीं:"
" आप् स्नान कीजिए! तब तक मे बाहर् आपकी इंतजार करूंगी!
इतना कहकर बिंदिया भि बाहर् निकल गई औऱ मेनका धीरे-धीरे धीरे-धीरे अन्दर आँ गई औऱ देखा कि अब उसकेआस पासकोई नहीं थां तौ मेनका नें स्नानग्रह पऱ एक् भरपूर नजर डाली औऱ उसकी आंखो मे चमकउभर आई क्योंकि स्नानगढ केँ जल सें उठती हुइ सुगंध उसकेतन मन कों तरंगित कर गई थि औऱ स्नानगृह केँ पानी मे हल्दी दूध औऱ चंदन केँ संग केसर कां मिश्रण थां! पानी मे तैरती हुईँ गुलाब कि पत्तियां उसकी शोभा कों औऱ बढ़ारही थि जिसे देखकर मेनका कां मन मयूरनाच उठा! मेनका धीरे-धीरे सें चलती हुइ इठलाती हुइ जैसे हि पानी केँ अंदरपैर डाली तौ उसकेतन जिस्म मे सिरहन सि दौड़ गई औऱ देखते हि देखते मेनका पानी केँ अंदरखुश गई औऱ पानीअब उसकेपेट आँ रहा थां औऱ मेनका उसमे खुशी खुशी अठखेलियां कररही थि! कभी वोँ पानी कों हाथ मे भरती तोँ कभी गुलाब कि पत्तियों कि सुगंध कां मजा लेती! खुशी औऱ उत्तेजना केँ मारे मेनका कि सांसे तेज होँ गई थि औऱ मेनका नें गुलाब केँ एक् फूल कों हाथ मे लें लिया औऱ उसकी अद्भुत सुगंध कां मजा लेनेलगी! जैसे हि केसर औऱ चंदन सें युक्त गुलाब कि पत्तियों कि मादक सुगंध मेनका कि सांसों मे घुली तौ मेनका नें अपने होंठो सें जीभ कों बाहर् निकाला औऱ उसकीजीभ गुलाब कि पत्तियों कों चूमने लगी औऱ मेनका कि आंखेउस अद्भुत एहसास सें बंद होँ गई औऱ मेनका नें गुलाब कि पत्तियों कों अपने मुंह मे भर लिया औऱ चूसचूस कर खानेलगी! मेनका अब पूरीतरह सें मदहोश होँ गई थि औऱ अब वोँ बिल्कुल स्नानगृह केँ बीच मे आँ गई थि जिससे पानीअब उसकी गर्दन तक आँ रहा थां औऱ मेनका दोनोगोल मटोल भारी भरकम चूंचियां पानी मे समा गई थि! मेनका नें जब गुलाब कां पूराफूल खा लियातब हि उसेचैन मिला औऱ उसकी सांसे अब सुगंधित होकरगंध उठी थि!
मेनका चूंकि आज पहली हि बार स्नानगृह मे नहारही थि तौ उसने अपने कपड़े उतारना सही नहीं समझा औऱ मेनका नें अब पानी केँ अंदर एक् डुबकी लगाई तोँ मन मे खुशी हि लहर दौड़ गई औऱ देखते हि वोँ पानी मे किसी छोटी बच्ची कि तरह डुबकियां लगाने लगी जिससे उसकी सांसे अब बहुततेज हौ गई थि औऱ उसकी चुचियों मे अब उछाल आँ रहा थां औऱ मेनका नें अबइधर उधर देखा औऱ जब थोडा निश्चित हुइ कि आसपास कोई नहीं देखारहा हें तोँ उसने अपनी ब्रा मे हाथ डालकर दोनो चुचियों कों अच्छे सें पानी सें रगड़ रगड़कर साफ किया जिससे उसकी चुचियों केँ चुचुक अकड़कर तनगए औऱ मेनका केँ जिस्म मे अब उत्तेजना नें अपनाअसर दिखाना शुरुआत कर दिया थां औऱ उसकी आंखे सुर्ख लाल हौ गई थि! मेनका नें पानी मे लगभगआधे घंटे तक स्नान किया औऱ उसकेबाद उसने बिंदिया कों आवाज़ लगाई तोँ बिंदिया उसकेलिए वस्त्र लिए आँ गई औऱ फिन वापसी चली गई! मेनका नें देखा कि यह एक् सफेद साड़ी थि जौ उसे विधवा होने कारण दि गई थि औऱ राजमाता भि स्वयं ऐसे हि कपड़े पहनती थि!
मेनका नें साड़ी कों अपने शरीर पर्र लपेट लिया औऱ उसकेबाद वोँ अपने कक्ष कि औऱ चल पड़ी! मेनका नें कक्ष मे जाकर कक्ष कां निरीक्षण किया औऱ कक्ष कि सुंदरता देखकर वोँ मंदमंद मुस्कुरा उठी! मेनका नें कक्ष कि एक् दीवार पऱ टंगेहुए परदे। कों हटाया तोँ उसे हैरानी हुईँ कि कक्ष कि एक् दीवार कां पर्दा हटाते हि पूरी शीशे कि दीवार आँ गई औऱ जिसमे मेनका सिर सें लेकरपैर तक अपना अक्शदेख सकती थि! मेनका अभि देख हि रही थि तभी बिंदिया कि आवाज़ आई
" राजमाता महाराज भोजन केँ लिए आपकी इंतज़ार कररहे हें!
मेनका बिनासमय गंवाए बाहर् आँ गई औऱ देखा कि एक् बड़ी सि हसीन टेबल औऱ एक् सें बढ़कर एक् पकवान औऱ मेवे केँ संगसंग ताजे जूसीफल रखेहुए थें औऱ मेनका नें देखा कि विक्रम बैठेहुए थें औऱ बोले:"
" बड़ा टाइम लगाया आपने राजमाता आने मे ? हम् कबसे आपकी इंतज़ार कररहे थें?
मेनका नें अपने बेटे केँ मुंह सें राजमाता सुना तौ वोँ स्वयं भि सम्मानपूर्वक बोलि:"
" हम् नहाने केँ लिएचले गए थें! चूंकि हमारा राजमहल मे आज पहला हि दिन हें तोँ इसलिये देर हौ गई इसलिये हम् आपसे माफ़ चाहते हें!
विक्रम:" नहीं राजमाता माफ़ मांगकर आप् हमे लज्जित मत कीजिए! धीरे-धीरे धीरे-धीरे आप् राजमहल केँ बारे मे सभीकुछ जान जायेगी!
मेनका:" जी महराज ! निसंदेह जल्द हि महलदेख लेंगे औऱ सारेतौर तरीके भि सीख लेंगे!
विक्रम नें देखा कि मेनका केँ चेहरे पऱ एक् तेज थां औऱ उसकी आंखो कि चमक उसकी खुशी केँ संगसंग आत्म विश्वास कों भि बयानकर रहीथीं औऱ बोला:"
" हमे आप् पऱ पूरा विश्वास हैं राजमाता! चलिएअब भोजन ग्रहण करते हें क्योंकि हमें बहोत जोरो सें भूखलगी हैं!
उसकेबाद दोनोमा बेटे नें भोजन ग्रहण किया औऱ मेनका नें एक् फल उठाया औऱ बोलीं:"
" यहकौन सां फल हैं महाराज ? हमने पहलेकभी नहि देखा!
विक्रम:" यह मालभोग हैं औऱ इसे पहाड़ी इलाकों सें मात्र राज परिवार केँ लिए हि मंगाया जाता हें! इसकेसंग संग आप् औऱ भि कुछ अद्भुत फलों केँ संग मेवे कां भि मजा लेंगी!
मेनका:" यह तोँ सचमुच बड़े हि सौभाग्य कि बात हैं महराज जोँ हमे आपकेसंग रहकरऐसे अद्भुत फलों औऱ मेंवो कां मजा लेने कां सौभाग्य प्राप्त होगा!
इतना कहकर मेनका नें उसफल कों आधा मुंह मे लिया औऱ जैसे हि दांतो सें हल्का सां दबाया तोँ मधुर मीठेरस कि धारबह निकली औऱ सीधे विक्रम केँ मुंह पर्र पड़ी तोँ मेनका लज्जा सें दोहरी होँ गई तौ विक्रम अपनी स्थान सें खड़ेहुए औऱ मेनका केँ पासआकर बोले:"
" रुकिए राजमाता यहमाल भोग कों खाने कां सही तरीका नहीं हें क्योंकि अत्यधिक रसीला होने केँ कारणयह आपकेसब कपड़े खराबकर देगा!
इतना सुनकर मेनका नें मालभोग कों मुंह सें बाहर् निकाला औऱ विक्रम कि तरफ बढ़ा दिया! विक्रम नें मालभोग कों हाथ मे लिया औऱ फिनतेज धारदार चाकू सें उसके छोटे छोटे टुकड़े किए औऱ टुकड़े कों अपने मुंह सें रखा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे खातेहुए बोला:"ऐसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे चबाते हुएइस फल कां मजा लिया जाता हें राजमाता!
मेनका नें भि धीरे-धीरे सें एक् टुकड़ा उठाया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे खानेलगी तौ सच मे उसे बेहद लजीजलगा औऱ बोलीं:" महराज यह तौ सच मे बेहद मज़ेदार हें!
विक्रम:" बिलकुल राजमाता! इसे खाने केँ बाद आप् अच्छे सें पल्लू धककर जानां औऱ अपने कपड़े बदल लेना नहीं तोँ दासिया पता नहीं क्याँ क्याँ बाते करेंगी!
मेनका:" सच मे आप् हमारा कितना ध्यान रखरहे हें! मे तोँ आपके जैसा पुत्र पाकर धन्य होँ गई महाराज! मन करता हैं कि अपनी सारा ममता आप् पर्र लूटादू मे !
इतना कहकर मेनका नें अपनी बांहों कों फैलाया तोँ विक्रम भि उसके सीने सें आँ लगा औऱ मेनका नें अपने महाराज पुत्र कों अपने आगोश मे समेट लिया तोँ विक्रम बोला:"
" मे तौ आपकी ममता केँ लिए तरसाहू माता! सच मे आपके आंचल मे कितना चैन हें!
मेनका नें उसे औऱ ज़ोर सें कस लिया औऱ उसके माथे कों चूमते हुए बोलीं:" अब औऱ नहीं तरसने दूंगी आपको पुत्र ! मेरेयह जिंदगी आज सें आपको समर्पित हैं!
मेनका केँ गले सें लगेहुए विक्रम कों मेनका केँ शरीर सें उठती हुई चंदन केसर औऱ गुलाब कि सुगंध बेहद लुभावनी लगरही थि औऱ औऱ विक्रम नें अपनी मजबूत शक्तिशाली भुजाओं कां दबाव डाला तौ मेनका कसमसाते हुए बोलि:" ओहो महाराज मेरे पुत्र मुझ पर्र इतनीजोर आजमाइश मत कीजिए! मेरी इतनी हिम्मत नहि कि आपकी शक्तिशाली भुजाओं कां दबावसह सकू!
विक्रम कों अब अपनी गलती कां एहसास हुआ औऱ अपनी बांहों कां दबावकम करतेहुए बोला:"
" माफ़ कीजिए माताश्री! दरअसल हम् आपकी ममतामई भावनाओ मे बहगए थें!
मेनका:" माफ़ मांगकर हमें शर्मिंदा न् करे महराज! बस इतने भि भावनाओ मे मतबह जानां कि हमारे नाजुक जिस्म कि हड्डियां हि तोड़ डालो आप्!
विक्रम:" ऐसाकभी नहीं होगा राजमाता क्योंकि आपकी सुरक्षा हमारा फर्ज हैं एक् महराज होने केँ नाते भि औऱ एक् पुत्र होने केँ नाते भि!
मेनका नें एक् बारफिन सें उसका माथाचूम लिया औऱ बोलीं:"
" हमे आप् पऱ पूर्ण विश्वास हैं महाराज मेरेवीर पुत्र! अच्छा मे अब चलतीहु!
इतना कहकर मेनका नें अपने पल्लू कों ठीक किया औऱ अपने कक्ष कि औऱ बढ़ गई तौ वही विक्रम भि अपने कक्ष कि औऱ बढ़ गय़ा!
साम धीरे-धीरे धीरे-धीरे गहराने लगी औऱ विश्राम केँ बाद मेनका लगभगछह बजेउठ गई औऱ फिन सें कक्ष कि सुंदरता कों निहारने लगी जोँ अपने आप् मे अदभुत थि! उसके कदमों कि आहत सुनकर बिंदिया नें दरवाजे पर्र दस्तक दि तौ मेनका नें उसे अंदरआने केँ लिएकहा तोँ बिंदिया गेट पर्र सें हि बोलीं:"
" राजमाता हम् दासियों कों कक्ष केँ अंदरआने कि इजाजत नहीं होती! इसलिये मुझे माफ़ कीजिए मगर आप् जोँ भि आदेश करेगी मे बाहर् सें हि उसे पूर्ण करूंगी!
मेनका कों आश्चर्य हुआ कि साए कि संग रहने वाली औऱ हर एक् सुविधा कां ध्यान रखने वाली बिंदिया कों अंदरआने कि इजाजत क्यूं नहीं हें तौ वोँ बोलीं:"
" बिंदिया यहराज आदेश हें कि आप् अभि अंदरआइए!
इतना सुनकर घबराती हुइ बिंदिया दरवाजे पर्र आँ खड़ी हुईँ मगर अंदरआने कि हिम्मत नहीं हुईँ औऱ बोलीं
" माफ़ चाहती हू राजमाता मगर मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहीं हें कि अंदर आँ सकू औऱ दुख भि हें कि आपका आदेश नहींमान पारही हूं!
मेनका स्वयं चलती हुइ दरवाजे पऱ आई औऱ परदे कों हटाकर बिंदिया कां हाथ पकड़कर उसे अंदरखीच लिया औऱ बिंदिया बिनाकुछ बोले अंदर आँ गई औऱ मेनका बोलीं:"
" बिंदिया तुम् मेरेलिए छोटी बेहन जैसी होँ इसलिये मेरीबात मान लियाकरो! समझीकुछ ?
बिंदिया नें बसहां मे गर्दन कों हिला दिया औऱ बोलि:" जैसी आपकी आज्ञा राजमाता! आपकेलिए खाने मे क्याँ बनाऊं आज ?
मेनका कों समझ नहि आया कि क्याँ जवाबदे इसलिये कुछ सोचते हुए बोलि:"
" इसकेलिए एक् बार महराज सें बातकर लीजिए! जौ उन्हे मनपसंद हौ वही आप् बना लीजिए!
बिंदिया नें सहमति मे सिर हिलाया औऱ नजरे नीचेरखे हुए हि बाहर् निकल गई! बिंदिया केँ अंदर कक्ष कां निरीक्षण करने कि भि हिम्मत नहि थि औऱ उसकी नजरे नीचे हि झुकीरही मगर नीचे सें कक्ष कि सुंदरता देखकर वोँ समझ गई थि सच मे बेहद हसीन कक्ष थां!
विक्रम कों अब सलमा कि याद आँ रहीथीं औऱ उसने सुल्तानपुर जाने कां फैसला कियामगर उसके सामने समस्या थि कि अंदर केसे प्रवेश कियाजाए! कुछ योजनाएं थि मगर बहुत कठिन थि औऱ खतरो सें भरी हुईँ औऱ महाराज नहीं चाहते थें कि वोँ अपनेसंग संग सैनिकों कों खतरे मे डाले! विक्रम नें इसलिये अकेले हि जाने कां निश्चय किया क्योंकि वोँ सलमा सें प्रेम करते हैं यहबात अभि सें सबकोपता चलजाए यह भि सही नहीं थां!
विक्रम नें जाने सें पहले एक् बात सुलतान सें मिलने कां निश्चय किया औऱ सुलतान सें मिलने पहुंचे तौ सुलतान उन्हे देखते हुएखुश हुए औऱ बोले:"
" राजतिलक मुबारक होँ महाराज आपको! मेरी दुवाएं आपकेसंग हमेशा रहेगी!
विक्रम नें सुलतान कां हाथ पकड़ लिया औऱ अपनेसिर पर्र रखतेहुए बोले:" आप् बड़ो कां प्रेम औऱ आशीर्वाद हमेशा संग रहना हि चाहिए! अभि आप् बहुत बेहतर होँ गए हें पहले सें!
सुलतान:" हान महाराज, अबअब तौ मेरेहाथ तलवार उठाने केँ लिएमचल रहे हें !
विक्रम:" बस थोडा सां औऱ धीरज रखिए! अच्छा मे कुछ जरूरी काम केँ लिए सुल्तानपुर जानां चाहता हु! क्याँ कोई सहायता कर सकते हें आप् क्योंकि पहरा आजकल बहोत अधिकबढ़ गय़ा हें सीमा पऱ !
सुलतान नें थोड़ी देर सोचा औऱ बोले:" सीनीनदी केँ किनारे मार्ग गई हें! उस मार्ग पऱ आगे जाकर एक् खंडहर मिलेगा जिसमे एक् कुआं हें जौ ढकाहुआ हैं, पत्थर हटाकर उसमे धीरे-धीरे सें उतर जानां औऱ गुफा सें होतेहुए सीधे आप् राजमहल केँ अंदर हि निकलोगे ! मगर ध्यान रहे मेरेलिए इस रास्ते कां मात्र आपकोपता होगा! मेरे परिवार केँ लोग भि इस रास्ते कों नहीं जानते हें! आप् सलमा औऱ रजिया दोनो कों भि इस रास्ते केँ बारे मे बता देना ताकि जरूरत पड़ने पर्र वोँ बचसके!
विक्रम:" आप् मुझे पर्र भरोसा रखिए! मे इसकाकभी गलत इस्तेमाल नहीं करूंगा! अच्छा आप् अपना ध्यान रखिए औऱ मुझे अभि राजमहल मे कुछकाम होगा!
इतना कहकर विक्रम आँ गय़ा औऱ खाने केँ लिएआया तौ देखा कि मेनका पहले सें हि बैठी हुईँ थि औऱ बोलीं:"
" हम् आपकी हि इंतज़ार कररहे थें पुत्र! बड़ीजोर सें भूख भि लगी हैं हमे!
विक्रम:" माफ़ कीजिए थोडा कार्य थां जिसके चलते विलंब हुआ! चलिएअब भोजन शुरुआत करते हें!
दोनो केँ उसकेबाद पेटभर कर खानां खाया औऱ उसकेबाद मेनका बोलीं:"
" पुत्र कभीकभी लगता हें कि ऐसे हम् जिस ऐश्वर्य मे जीरहे हें उसकेलिए उपयुक्त नहीं हें औऱ हमेयह सभी त्याग देना चाहिए!
विक्रम:" माता आप् ठीक कहते हें मगर एक् बातहमे ध्यान रखना चाहिए कि यहहमे जिम्मेदारी मिली हें औऱ इसे निभाना हमारा कर्तव्य हैं! बसइसी बात कों ध्यान मे रखतेहुए हमेआगे बढ़ना होगा!
मेनका:" आपकीबात सें सहमतहु मगरफिन भि मेरादिल नहीं मानता हें पुत्र!
विक्रम:" आप् सोचिए कि पूरे राज्य मे सें केवल हमको हि क्यूं चुना गय़ा क्योंकि हमने राज्य केँ लिएढेर सारे बलिदान दिए हें! इतनाकुछ खोने केँ बाद किसी वारिस केँ नां होने केँ बादहमे जोँ मिला हें उसका उपयोग करना चाहिए! क्याँ आपको लगता हैं कि हमारे परिवार सें अधिक किसी नें बलिदान दिया हें आज तक ?
मेनका:" नहीं किसी नें नहीं दिया हें ! मे आपकीबात सें सहमतहु!
विक्रम:" फिन हौ कुछ हौ रहा हैं वोँ सभी क़िस्मत केँ भरोसे छोड़ दीजिए औऱ जौ मिला हें उसकाभोग कीजिए! मे थोड़ी देर आपकोमहल केँ बगीचे मे घुमाकर लाऊंगा!
इतना कहकर विक्रम निकल गय़ा औऱ मेनका नें एक् हसीन सफेदरंग कि साड़ी पहनी औऱ ऊपर सें पल्लू कों ठीक करने केँ बाद विक्रम केँ पास आँ गई औऱ दोनो धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलतेहुए बगीचे मे आँ गए औऱ मेनका बगीचे कि हुस्न देखते हि खुशी सें झूमउठी औऱ बोलि:"
" सच मे शाही बगीचा तौ बेहद सुंदर हें औऱ रंग बिरंगे फूल इसकी शोभा बढ़ारहे हें!
विक्रम:" सच मे यह सुंदर हें माता! आप् चाहे तौ सुभहसाम दोनो टाइमइस घूमने केँ लिए आँ सकती हें!
मेनका:" मुझेफूल बेहद मनपसंद हें महाराज औऱ खासतौर सें गुलाब केँ लाल सुर्ख फूलो मे तौ मेरीजान बसती हें!
विक्रम:" यह तोँ आपने बड़ी अच्छी बात बताई! मे कल माली कों बोलकर पूरे बगीचे कों गुलाब केँ लाल सुर्ख पौधो केँ भरवा दूंगा! औऱ क्याँ क्याँ पसन्द हें आपको ?
मेनका उसकीबात सुनकर मुस्कुराई औऱ बोलीं:" फूलो पऱ मंडराती हुइ सुंदर तितलियां औऱ उड़ते हुए आजाद पंछीयह सभी मुझे बेहद आकर्षक लगते हें महाराज!
विक्रम:" आप् जौ भि कहेगी आपकीवही ख़्वाहिश आपका पुत्र पूरी करेगा! बस आप् बोलती रहिए!
मेनका धीरे-धीरे धीरे-धीरे पार्क मे घूमरही थि औऱ बोलीं:"
" शुक्रिया पुत्र आपका! वैसे आपको क्याँ क्याँ मनपसंद हें ?
विक्रम:" मुझे तोँ सभीकुछ अच्छा लगता हें! बस आप् खुशरहे इसमें हि मेरी खुशी हें!
मेनका उसकीबात सुनकर मुस्कुरा दि औऱ आगेबढ़ गई औऱ देखा कि बेहद सुंदर गुलाब केँ लाल सुर्ख फूल खिलकर गंधरहे थें तोँ मेनका स्वयं कों नहींरोक पाई औऱ फूल तोड़ने केँ लिएझुक गई मगर जैसे हि आगे झुकी तौ उसकी साड़ी कां पल्लू कांटो मे फंस गय़ा औऱ जैसे वोँ फूल तोड़कर पीछे हुई तोँ उसका पल्लू खीच गय़ा औऱ पूरीतरह सें कांटो मे फंस गय़ा औऱ मेनका भि छातियां कि गहरी रेखा खुलकर विक्रम केँ सामने आँ गई औऱ मेनका लज्जा सें दोहरी हौ उठी औऱ जल्द सें अपने पल्लू कों खींचा मगर पल्लू जैसेफंस सां गय़ा थां औऱ मेनका नें जैसे हि जोर लगाया तोँ उसका पल्लू बीच मे सें फट गय़ा औऱ मेनका कां मुंह लज्जा सें लाल होकरझुक गय़ा !
मेनका केँ गोरे गोरे कंधे नुमाया होँ उठे औऱ उसकी भारी भरकम चूंचियां अपना आकारसाफ दिखारही थि जिन्हे देखकर विक्रम कि आंखे खुली कि खुलीरह गई! विक्रम नें अब सें पहले सलमा कि चुचियों कों देखा थां औऱ उनका खुशी लिया थां मगरउसे मेनका कि चुचियों कि गहरीखाई इसबात कां प्रमाण थि कि उसकी चूचियां सलमा सें कई गुना बेहतर हैं! विक्रम थोडा सां आगे बढ़ा औऱ बोला:"अगर आपकोफूल हि चाहिए थां तोँ मुझेबोल देती ! चलिए अभि तोँ जोँ होना थां होँ गय़ा!
मेनका लज्जा सें पानी पानी हौ रही थि औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं:" मुझेपता नहि थां कि यह पल्लू फंसकर फट जायेगा!
विक्रम:" शाही बगीचे मे गुलाब केँ पौधो मे कांटे अधिक बड़े होते हें इस कारण आपकी साड़ी फटी हैं! आप् फिक्र मत कीजिए यहांकोई नहीं आएगा!
मेनका नें मन हि मन सोचा कि क्यूं नहीं आयेगा तौ ठीक हें मगर आप् भि तौ एक् मर्द हैं औऱ आपके सामने ऐसी हालत मे रखना मुझे शर्मशार कररहा हें! विक्रम मेनका कि हालतसमझ गय़ा औऱ सोचने लगा कि क्याँ यह हि वो मेनका हें जिसे मैंने उसेदिन अजय केँ संग देखा थां! फिन विक्रम नें अपनी पगड़ी कों खोला औऱ उसमे सें कपड़ा निकाल कर मेनका कों दिया तौ मेनका नें उसे अपनी छाती पऱ ढक लिया औऱ बिनाकुछ बोले तेजी सें अपने विश्राम कक्ष कि औऱ बढ़ गई! मेनका केँ कदमों कि गतिबता रही थि कि उसकी क्याँ हालत हें औऱ कितनी अधिक वोँ पानी पानी होँ गई थि!
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शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
मेनका अपने कक्ष मे पहुंच गई औऱ अपनी सांसों कों ठीक करनेलगी! मेनका कों समझा नहीं आँ रहा थां कि उसे अचानक सें क्याँ हुआ जोँ वोँ इतनी अधिक घबरा गई थि औऱ लज्जा सें लाल हौ गई थि! एक् मम्मी कां बेटे केँ सामने ऐसा हौ जानां इतनी अधिक बड़ीबात भि नहि थि मगरफिन भि मर्यादा केँ लिहाज सें यह बिलकुल भि सही नहीं थां! अजय केँ संग इतनासभी कुछ होने केँ बादअब विक्रम सें इतना अधिक शर्माना उसे अजीबलग रहा थां मगर मेनका नें सोच लिया कि अब वोँ ऐसाकुछ भि नहीं होने देगी!
अजय केँ संगअब अपनी मर्यादा सें गिरी जरूर थि मगर अभि तक पूरीतरह सें पवित्र थि! मेनका नें अपनेमन मे आखिरी निर्णय किया कि अब वोँ हरहाल मे अपनी मर्यादा कों बरकरार रखेगी औऱ महाराज विक्रम सें उचित दूरी बनाकर रखेगी ताकिफिन सें ऐसी किसी अनचाही स्थिति कां सामना नं करना पड़े!
वही दूसरी तरफ विक्रम भि महल मे आँ गय़ा थां औऱ अपने कक्ष मे लेटाहुआ रात होने कां प्रतीक्षा कररहा थां ताकि वोँ सुल्तानपुर जासके! सलमा केँ लिए उसनेकोई मेसेज नहीं भेजा थां क्योंकि वोँ आज सलमा कों बिना बताए जाकरउसे आश्चर्य चकितकर देना चाहता थां! विक्रम कों आज पार्क मे हुई घटनायाद आँ गई तोँ उसे ध्यान आया कि उसकी माता मेनका आज कितना अधिक शर्मा गई थि! आमतौर पऱ देखाजाए तोँ इतनी बड़ीबात नहि थि मगर मेनका कां शर्माना इसबात कां सुबूत थां कि यह उसकेलिए बहोत बड़ीबात थि! विक्रम समझ नहींपा रहा थां कि इतनी ज़्यादा सरम करने वालीऔरत अपने पुत्र केँ संगउस हद तक केसेजा सकती थि! क्याँ अजय नें उसकेसंग जबरदस्ती कि थि याँ फिनकोई औऱ वजहरही होगी!यह सोचकर विक्रम कि आंखो केँ आगेउस रात कां दृश्य आँ गय़ा जब मेनका ऊपर सें पूरी नंगी हुईँ अजय कि गोद मे बैठी हुईँ थि तौ विक्रम कों यकीन हौ गय़ा कि जबरदस्ती तौ ऐसेकोई किसी कि गोद मे नहींबैठ सकती तोँ निश्चित रूप सें दोनो कि हि इसमें ख़्वाहिश रही होगी! विक्रम नें एक् बारफिन सें अपनी आंखेबंद करली तौ उसकी आंखो केँ आगेफिन सें अजय कि गोद मे बैठी हुईँ मेनका आँ गई औऱ विक्रम कों यादआया कि सच मे मेनका कि कमर कितनी अधिकभरी हुइ औऱ मजबूत हैं थि! हल्की भारी जरूर थि मगर किसी भि तरह सें लटकी हुई याँ ठुलथुल नहीं थि! विक्रम नें आज तक केवलदो हि औरतों कि नंगीकमर कों देखा थां औऱ विक्रम मन हि मन सलमा केँ अपनी माता कि कमर कि तुलना करनेलगा तोँ जीत उसकी माता कि हि हुईँ! विक्रम कों लगा कि शायदयह उसकामन कां वहम हें औऱ मातृभाव केँ कारण वोँ अपनी माता कि तरफझुक रहा हें! विक्रम नें एक् बारफिन सें अपनी आंखो कों बंद किया औऱ फिन सें सलमा औऱ मेनका कि तुलना करनेलगा! इसबार वोँ मेनका कों मात्र कों एक् औरत केँ तौर पऱ हि सोचरहा थां औऱ दोनो कि कमर केँ उभार, कटाव हुस्न औऱ मजबूती कों देखने केँ बाद उसकी आंखो केँ आगे दोनो कि छातियां भि आँ गई! हालाकि सलमा कि चुचियों कों उसने पूरीतरह सें नंगा देखा थां, मसला थां औऱ मुंह सें मजा भि लिया थां जबकि मेनका कि छातियों कि सिर्फ उसने एक् झलक देखी थि वोँ केवलजब वोँ उसकी माता केँ ब्लाउस मे कैद थि! मगर विक्रम नें जौ गहराई औऱ कसाव मेनका केँ ब्लाउस मे महसूस किया थां उससे वोँ निश्चित थां कि उसकी माता कि छातियां सलमा सें बढ़कर हैं! विक्रम कों सलमा कि बुर यादआई तौ उसके माथे पऱ पसीना छलकउठा क्योंकि उसकेमन मे अगला विचार आया कि क्याँ मेनका कि बुर भि सलमा सें बेहतर होगी औऱ यह सोचते हि विक्रम कों लगा कि नहीं नहींयह सभीपाप हैं! मुझे अपनी माता कि बुर केँ बारे मे ऐसा नहि सोचना चाहिए! अगले हि लम्हा उसकेमन मे दूसरा विचार आया कि जबकमर औऱ चुचियों केँ बारे मे सोच सकता हें तौ बुर औऱ गांड़ केँ बारे मे क्यूं नहींसोच सकता!
विक्रम कां पापीमन अब मेनका कि बुर केँ संगसंग उसकी गांड़ तक पहुंच गय़ा थां जिससे उसकी सांसे तेज होँ गई थि ओ लन्ड मे तनाव आँ गय़ा थां! विक्रम नें सोचा कि सलमा कों बुर औऱ गांड़ कों तोँ मैने देखा हैं औऱ मेनका कि बुर औऱ गांड़ देखे बिनासही तुलना केसे होँ सकती हैं! यह सोचते हि विक्रम कां लन्ड जोरदार झटका लगाया कि तुलना केँ लिए मुझे पहले मेनका कि बुर औऱ गांड़ कों देख्ना होगा! विक्रम नें अपना आखिरी निर्णय लिया कि एक् औरत केँ तौर निश्चित रूप सें कमर औऱ चुचियों केँ आधार पर्र उसकी माता मेनका सलमा सें कहीं ज़्यादा हसीन औऱ आकर्षक स्त्री हैं!
रात केँ 10 बज चुके थें औऱ विक्रम धीरे-धीरे सें राजमहल सें निकला औऱ उसकेबाद अपने घोड़े पऱ सवार होकरनदी मे किनारे मार्ग पर्र जातेहुए खंडहर केँ अंदरघुस गय़ा! अपने घोड़े कों उसनेकुछ समझाया औऱ उसकेबाद वोँ कुंवे मे उतर गय़ा औऱ गुफा केँ अंदर सें होतेहुए सुल्तानपुर कि तरफचल पड़ा! अंदर गुफा ज़्यादा चौड़ी नहीं थि मगर एक् संगतीन चार व्यक्ति धीरे-धीरे चल सकते थें! लगभग एक् घंटा पैदल चलने केँ संग गुफाउपर कि तरफ बढ़ने लगी औऱ देखते हि देखते विक्रम सुल्तानपुर केँ अंदर पहुंच गय़ा औऱ थोडा सां चलने केँ बाद गुफातीन रास्तों मे बंट गई औऱ विक्रम जानता थां कि उसेकिस रास्ते कां चुनाव करना हें औऱ विक्रम नें दाई दिशा मे बढ़ने कां फैसला किया औऱ लगभग पांच मिनट चलने केँ बाद वोँ राजमहल केँ अंदर पहुंच गय़ा थां औऱ ताकत सें उसने दरवाजे कों हटाया औऱ महल केँ अंदर दाखिल होकरफिन सें दरवाजे कों लगा दिया! सावधानी सें इधरउधर देखने केँ बाद वोँ आगे बढ़ा औऱ रजिया केँ कक्ष केँ सामने सें होताहुआ वोँ दाईतरफ मुड़ गय़ा औऱ अब वोँ सलमा केँ कक्ष केँ सामने आया औऱ धीरे-धीरे सें दरवाजे पर्र दस्तक दि तोँ अंदर जागी हुईँ सलमा कों लगा कि उसकी अम्मी रजिया आई हैं तौ उसने जैसे हि दरवाजा खोला तोँ एक् चौड़े औऱ मजबूत हाथ नें उसके मुंह औऱ आंखो कों ढकतेहुए दूसरे हाथ सें उसेगोद मे उठा लिया औऱ अंदर जेडकक्ष मे घुस गय़ा! सलमा दर्द औऱ डर सें घबरा गई औऱ छूटने कि कोशिश करनेलगी मगर जैसे हि उस व्यक्ति नें उसेबेड पऱ लिटाया औऱ उसे आजाद किया तोँ सलमाउसे पहचानते हि स्वयं हि उससे लिपट गई औऱ उसका चूमते हुए बोलीं:"
" ओहो मेरे युवराज! यह तोँ आपने मुझे पूरीतरह सें आश्चर्य चकित हि कर दिया!बता तौ सकते थें आने सें पहले आप्!
विक्रम नें भि सलमा कों अपनी बांहों मे समेट लिया औऱ उसका माथा चूमते हुए बोले:"
" बता देता तौ यह खुशी जौ आपके चेहरे पर्र अभि हें यह देखने केँ लिए नहीं मिलती मुझे!
सलमा उससे औऱ ज़्यादा कसकर लिपट गई औऱ उसकागाल जोर सें चूमते हुए बोलि:"
" सच मे मुझे बेहद मनपसंद आया आपकायह अंदाज! मगर आप् अंदरआए केसे ?
विक्रम नें दोनो हाथो मे भरकर सलमा कि गांड़ कों जोर सें मसल दिया औऱ बोले:"
" मत भूलो कि मेरेपास आपके बाप हें जिन्हे राजमहल केँ बारे मे आपसे भि ज़्यादा पता हैं!
सलमा गांड़ मसले जाने सें जोर सें सिसकउठी औऱ उसकी बांहों मे मचलते हुए बोलीं:"
" अह्ह्ह्ह्ह मार हि डालोगे क्याँ मुझे युवराज! ओह इसका मतलब एक् औऱ गुप्त मार्ग!
विक्रम नें सलमा कों गोद मे उठाया औऱ बेड पऱ चढ़ते हुए उसकेऊपर चढ़ गय़ा आई औऱ उसके होंठो कों अपने मुंह मे भरकर चूसने लगा! सलमा नें भि अपनी मखमली बांहों कां हार उसकेगले मे डाल दिया औऱ वोँ भि उसके होंठो कों चूसने लगी! सलमा कों अपनी जांघो केँ बीच मे फंसेहुए विक्रम केँ लन्ड कां तनावआज किसी कठोर पत्थर कि तरह महसूस हुआ तोँ सलमा कों यकीन हौ गय़ा कि युवराज आज बहोत अधिक उत्तेजित हें औऱ अगर थोडा सां भि आगे बढ़ी तोँ आज विक्रम उसेकली सें फूल बनाकर हि दम लेंगे तौ विक्रम नें जैसे हि उसके मुंह मे अपनीजीभ घुसानी चाही तौ सलमा नें अपने होंठो कों खोल दिया औऱ विक्रम कि जीभ सलमा केँ मुंह मे घुस गई औऱ दोनो कि जीभ एक् दूसरे कों चूमने चाटने लगी!
जैसे हि दोनो कि सांसे उखड़ी तोँ विक्रम नें होठों कों अलग करतेहुए लन्ड कां दबाव उसकी बुर पऱ दिया तौ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ उसके लन्ड कों अपनी बुर पऱ महसूस करतेहुए बोलीं:"
" आहह-आहह युवराज! आज क्याँ हुआ हैं आपको ? पूरे पत्थर बनेहुए हौ! इतना ज़्यादा जोश औऱ जुनून?
विक्रम कि आंखो केँ आगेसमय भर केँ लिए मेनका कां चेहरा नाचउठा मगर अगले हि समय वोँ मेनका केँ होंठ चूसते हुए बोला:"
" ओह मेरीजान शहजादी सलमा!आज मे आपको पूरीतरह सें हासिल करना चाहता हूं!
सलमा नें अपनी बांहों कां हार उसकेगले मे पूरीतरह सें कस दिया औऱ उसके होंठो कों चूमकर बोलीं:"
" मे तौ पूरीतरह सें मात्र आपकी हि हू युवराज वोँ भि मरतेदम तक! मगर अपनी मर्यादा सें बाहर् जाने सें बेहतर मे मर जानां मनपसंद करूंगी!
विक्रम नें उसके मुंह पर्र हाथरख दिया औऱ बोले:"ऐसे अशुभ बाते नहीं करते सलमा! मुझे माफ़ करनाअगर मेरीबात बुरीलगी होँ तौ!
सलमा:" नहीं युवराज बुरा नहींलगा! मे स्वयं भि पूरीतरह सें आपकी होना चाहती हू!मगर रीति रिवाज केँ अनुसार! आप् भि यह जानते हें कि मेरे अब्बा औऱ अम्मी आपको विवाह केँ लिएकभी इनकार नहीं करेंगे!
विक्रम:" वोँ तौ मे भि जानता हूं बसआज अपने जज्बात काबू नहींकर पाया मे!
सलमा:" जज़बातो कों काबू मे रखिए महराज! मत भूलिए कि अजय औऱ आपके पिता केँ कातिल अभि जिंदा हें! आपको जब्बार औऱ पिंडाला सें बदला लेना हें! एक् योद्धा होने केँ नातेवही आपका सबसे बड़ा कर्तव्य हैं नं कि महबूबा कि बांहों मे चैन तलाश करना!
विक्रम कों अपनीगलत कां एहसास हुआ औऱ वोँ स्वयं हि सलमा केँ ऊपर सें हट गय़ा औऱ उसका माथाचूम कर बोला:"
" मुझेसही राह दिखाने केँ लिए आपका बेहद शुक्रिया शहजादी! मे भि शपथ खाता हूं कि जब तक जब्बार औऱ पिंडाला कों मौत केँ घाट नहीं उतार दूंगा आपकोहाथ तक नहि लगाऊंगा! यह एक् महराज कां वचन हें आपसे!
सलमा नें आगे बढ़कर उसकाहाथ चूम लिया औऱ बोलीं:"
" वादारहा महराज जिसदिन आप् सब दुश्मनों कों मौत कि नींद सुलाकर वापिस आओगेउसी दिन सलमा आपको अपनी बांहों मे सुलायेगी!
दोनो केँ वादे केँ तौर पऱ एक् दूसरे सें हाथ मिलाया औऱ उसकेबाद विक्रम नें सलमा कों बताया थां कि अब वोँ महराज हें! अजय उसकासगा भइया थां औऱ उसकेबाद विक्रम सलमा कों यह गुप्त मार्ग बताकर महल सें बाहर् निकल गय़ा! सलमाउसे दूर तक जातेहुए देखती रही औऱ जैसे हि विक्रम गुफा केँ अंदर दाखिल हुआ तौ सलमा केँ होंठो पऱ विजयी मुस्कुराहट नाचउठी मानो वोँ अपने मकसद कि ओरबढ़ रही थि!
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