शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम नें सुल्तानपुर जाने कां विचार किया औऱ अपनी योजना बनाने लगा! वोँ जानता थां कि इस वक्त सुल्तानपुर जानां मौत केँ खेलने केँ समान हैं मगर सुल्तानपुर केँ वर्तमान हालात कां जायजा लेना औऱ सीमा कों सांत्वना देने केँ संगसंग सलमा सें मिलना भि उसकेलिए बेहदअहम थां! विक्रम नें अपने राज्य केँ विश्वास पात्र एक् व्यापारी कों बुलाया जोँ कि एक् कुशल योद्धा भि थां जिसका नाम अब्दुल रशीद थां! अब्दुल विक्रम केँ सामने हाजिर हुआ औऱ बोला:"
" मेरा सौभाग्य युवराज आपने मुझेयाद किया!
विक्रम:" अब्दुल आप् औऱ आपका परिवार हमेशा सें राज परिवार केँ वफादार रहे हें औऱ आजहमे आपकीमदद कि सख्त जरूरत आन पड़ी हैं!
अब्दुल कि आंखेचमक उठी औऱ बोलि:" आप् हुक्म कीजिए आपके एक् इशारे पऱ जान भि हाजिर हैं!
विक्रम:" आप् एक् व्यापारी केँ रूप मे सुल्तानपुर जायेंगे औऱ मे आपकेसंग आपके नौकर केँ रूप मे जाऊंगा! मुझे वहांकुछ बेहद जरूरी काम हैं!
अब्दुल:" बिलकुल जाऊंगा युवराज! मगर माफ़ कीजिए आप् मेरेसंग नौकर नहीं बल्कि एक् व्यापारी केँ हि रूप मे चलिए!
विक्रम:" नहीं अब्दुल, नौकर पऱ कोई आसानी सें शक भि नहि करता हैं औऱ दूसरी बात मे अंदर जाने तक मात्र आपकेसंग रहूंगा औऱ उसकेबाद सुभह हि आपकेपास आऊंगा तौ इसकेलिए नौकर हि ठीक हें!
अब्दुल:" जैसे आप् ठीक समझे!मगर मेरी एक् सलाह हें कि हम् अपनेसंग राज्य केँ कुछ चुनिंदा योद्धा लेकर जाएंगे ताकि मुश्किल वक्त मे सामना करसके!
विक्रम कों उसकीबात ठीकलगी औऱ सहमति मे सिर हिलाते हुए बोला:" मे आपकीबात सें सहमतहु मगर ध्यान देना कि यहबात अगरखुल गई तोँ हम् सबका जिंदा आनां मुश्किल होगा!
अब्दुल:" आप् मेरीतरफ सें निश्चित रहे क्योंकि मे अंतिम सांस तक आपका औऱ इस महान राज्य कां वफादार रहूंगा!
विक्रम:" ठीक हें फिन आप् जाने कि तैयारी कीजिए! आजसाम कों हि हम् प्रस्थान करेंगे!
उसकेबाद अब्दुल चला गय़ा औऱ कुछ जरूरी सामान लेकर जाने कों तैयारी मे जुट गय़ा! दूसरी तरफ विक्रम नें आज मंत्री दल कि बैठक बुलाई हुई थि औऱ आगे कि रणनीति पर्र विचार चलरहा थां कि केसे सुलतान औऱ पिंडारियो कों समाप्त कियाजाए!
विक्रम:" सबसे पहलेहमे आधुकिन हथियार औऱ तकनीकी रूप सें सक्षम सैनिक चाहिए जिनके दिल मे अंतिम सांस तक लड़ने औऱ मरने कां जज्बा हौ!
मंत्री वीर बहादुर:" आप् सत्य कहते हौ युवराज! हमे अपने प्राणों कि आहुति देकर भि खून कां बदलाखून सें लेना हि होगा!
सतपाल सिंह:" युवराज हमे सबसे पहले सैना मे नव युवकों कि भर्ती करनी होगी ताकिकुछ दिनो मे युवा सेना रेडीकर सके!
विक्रम:" वीर बहादुर जी आपकेहाथ मे अभि अजय जाने केँ बाद सेना कि जिम्मेदारी होगी औऱ मुझेऐसा एक् युवक चाहिए जिसे मे अजय कि स्थान रखसकू औऱ मेरेलिए हर कठिन स्थिति मे कंधे सें कंधा मिलाकर खड़ारहे!
एक् मिनट केँ लिए शांति छाईरही तोँ एक् नवयुवक खड़ाहुआ जिसकी उम्र लगभग 22 साल थि औऱ सेना मे अभि टुकड़ी दल कां नेतृत्व करता थां बोला:"
" युवराज मे अकरमखान आपकेलिए मरने मिटने केँ लिए हमेशा सजधजकर रहूंगा मेरी आपसे गुजारिश हैं कि मुझेयह मौका प्रदान करे ताकि मे अपने प्राणों कि आहुति देकर भि अपनी मातृभूमि कां कर्ज उतारसकू!
विक्रम उसकी बहादुरी औऱ जज़्बात सें बहुतहुए औऱ बोले:"
" मुझे आप् पऱ फख्र हें अकरम! क्याँ सब मंत्री दलइसबात केँ लिए सहमत हें कि अकरम कों मे यहअहम जिम्मेदारी देसकू!
वीर बहादुर सिंह:" युवराज सच कहूं तौ आज हमेंऐसे हि युवाओं कि जरूरत हें जौ स्वयं आगेआकर अपना कर्तव्य समझे औऱ मेरे हिसाब सें अकरम कों यह मौका देना चाहिए
सतपाल:" मेरी भि सहमति हें युवराज! हमेअब युवाओं पर्र भि भरोसा करना होगा!
सब मंत्री दल नें सहमति मे अपनासिर हिलाया औऱ विक्रम बोला:"ठीक हें आज सें अकरम हमारी रक्षक सेना टुकड़ी कां सरदार होगा!
मुख्य सलाहकार:" युवराज राजमाता केँ जाने केँ बादअब पूरे राज्य कि जिम्मेदारी आपके मजबूत कंधो पऱ आँ गई हैं औऱ उम्मीद हें कि आप् हमेशा उदयपुर कि जनता केँ विश्वास पर्र खरे उतरेंगे ! मगर हमारे राज्य कि एक् परंपरा हैं कि राज्य कि बागडोर पूरीतरह सें हाथ मे लेने केँ लिए पूजा होनी चाहिए!
सब मंत्री नें सलाहकार कि बात कां पुरजोर समर्थन किया तोँ विक्रम बोला:"
" जैसे आप् सबको उचितलगे! आप् सभी मेरे बड़े औऱ राज्य केँ शुभ चिंतक हें तोँ आपकीबात मे केसेटाल सकताहु!
सलाहाकर:" ठीक हें फिन परसो आपकेहाथ मे विधिवत पूरे राज्य कि बागडोर दे दि जायेगी! वैसे तौ पूजा मे माता पिता कां अहमजगह होता हैं मगर विशेष परिस्थिति मे माँ केँ न् होने पऱ जन्म दिलाने वालेदाई माँ कों मम्मी कां जगह पूजा केँ दिन ग्रहण करके विधियां संपन्न कराई जाती हैं युवराज !
राजमाता केँ नं होने कि बात पऱ विक्रम कि आंखेभर आई औऱ बोला:" जैसे आप् उचित समझे ! पूजा कि सब जिम्मेदारी आप् अपनेहाथ मे लीजिए ताकिसभी कुछसही सें विधि संपन्न पूरा होँ सके !
मुख्य सलाहकार:" जैसी आपकी आज्ञा युवराज!
उसकेबाद राज्य सब ख़त्म हुई औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे साम होनेलगी तौ विक्रम नें सुल्तानपुर जाने कि तैयारी करनी शुरुआत कर दि औऱ अकरम उसकेसंग हि थां!
विक्रम:" अकरम आप् हम् तुम्हे एक् ऐसेकाम केँ लिएचुन रहे हें जहांमौत भि होँ सकती हें!
अकरम:" आपकेलिए मरना भि मेरेलिए सौभाग्य कि बात होगी! आप् हुक्म कीजिए !
विक्रम" आजरात आप् मेरेसंग सुल्तानपुर जायेंगे!
अकरम कि आंखे खुशी सें चमकउठी औऱ बोला:" सुल्तानपुर वालो सें बदला लेने केँ लिए तोँ मेरे सीने मे ज्वाला भड़करही हें युवराज!
विक्रम:" इस ज्वाला कों अभि औऱ भड़काओ! आज मे मात्र हालत कां जायजा लेने केँ लिए जायेंगे !
अकरम:" जैसी आपकी आज्ञा युवराज!
उसकेबाद विक्रम नें उसे सारी योजना बनाई औऱ अब्दुल केँ आने केँ बादसब लोग एक् व्यापारी केँ रूप मे सुल्तानपुर कि तरफ निकल पड़े! विक्रम एक् बेहद कुरूप काला नौकरबना हुआ थां बिलकुल किसी हबशी गुलाम केँ जैसा!
जैसे हि विक्रम कां काफिला सुल्तानपुर केँ दरवाजे पर्र आया तौ दरबानों नें उसेघेर लिया औऱ बोले:"
" ऐकौन होँ तुम् ? क्यूं राज्य मे घुसे आँ रहे होँ?
अब्दुल:" मे एक् बाहरी व्यापारी हु औऱ व्यापार केँ सिलसिले मे सुल्तानपुर आयाहू!
सैनिक जोर सें चिल्लाया:" क्याँ तुम्हे पता नहीं हें कि राज्य मे बाहर् सें किसी केँ भि आने पऱ सख्त पाबंदी लगी हुईँ हें!
अब्दुल:" मुझे केसेपता होगा मे तौ मीलों कां मार्ग चलकरआया हू! बड़ानाम सुना थां सुल्तानपुर कां औऱ जब्बार साहब कां ?
सैनिक अपने राज्य कि तारीफ सुनकर खुशहुआ औऱ बोला:"
" अच्छा क्याँ सुना थां जरा हम् भि तोँ जाने!
अब्दुल:" यही कि सुल्तानपुर मे व्यापारियों कां बेहद सम्मान होता हें औऱ पूरीतरह सें संपन्न राज्य हें! जब्बार साहब एक् नेकदिल औऱ व्यापार मनपसंद हैं!
सैनिक: बिलकुल सही सुना हें! मगर आजकल सुरक्षा कि वजह सें ऐसा हौ गय़ा हें कि किसी केँ भि अंदरआने कि सख्त पाबंदी हौ गई हैं!
अब्दुल:" मुझेपता होता तोँ नहींआता खैरअब जानां हि पड़ेगा मगर जाने सें पहले आपको अपनीतरफ सें खुश तोहफा देकर जानां चाहता हूं!
इतना कहकर उसनेकुछ सोने कि मोहरे देकर एक् नौकर कों आगे भेजा औऱ उसने वोँ मोहरे सैनिक केँ हाथ मे रख दि तोँ सैनिक उनकीचमक देखकर पिघल गय़ा औऱ बोला:"
" ठीकठीक हें! मे सबको जाने दूंगा मगर पूरीतरह सें तलाशी लेने केँ बाद!मगर जब तक आप् लोग राज्य मे रहोगे मेरे सैनिक आपकेसंग हर वक़्त रहेंगे!
अब्दुल:" बेशक आप् महान होँ! जितना मैने सुना थां आप् उससे कहीं ज़्यादा रहमदिल होँ! सच मे सुल्तानपुर केँ सबलोग अपने आप् मे सुलतान हें!
सैनिक:" बसबस बहोत होँ गय़ा! आओ औऱ सबसे पहलेहमे तलाशी लेनेदो!
उसकेबाद सैनिकों नें पूरे काफिले कि तलाशी ली औऱ अंदर जाने दिया! विक्रम कि आंखो मे चमक थि क्योंकि वोँ जानता थां कि सबसे मुश्किल काम हौ गय़ा थां औऱ आगे उसकेलिए आसानी थि! काफिला अंदरघुस गय़ा औऱ एक् घऱ मे उन्हे रहने केँ लिए स्थान दे दि गई औऱ व्यापार प्रमुख कों सूचना दे दि औऱ वोँ आया औऱ अब्दुल सें मिलकर बेहदखुश हुआ औऱ बोला:"
" आप् बिलकुल सही वक्त पर्र आए हें! हमेकुछ चीजों कि जरूरत हें!
उसने एक् सूची अब्दुल केँ हाथ मे थमा दि औऱ अब्दुल नें वोँ देखा औऱ बोला:"
" एक् महीने केँ अंदरयह सारा सामान मे आपको दूंगा! अभि तोँ मेरेपास बेहतरीन रेशम हें जोँ बेहद कीमती औऱ आकर्षक हें!
प्रमुख:" ठीक हें! अभि रात होँ गई हैं! आप् आराम कीजिए! कलदिन मे बात होगी!
इतना कहकर वोँ चला गय़ा तोँ सारे लोगो नें संग मे खानां खाया औऱ रात कों लगभग 11:30 केँ आजपास निकला औऱ उसनेअब अपने चेहरे कों साफकर दिया थां मगरभेष कों पूरीतरह सें बदलाहुआ थां ताकिकोई पहचान नं सके! अकरम नें सैनिकों कों बातो मे उलझाया औऱ विक्रम धीरे-धीरे सें पीछे सें निकलआया औऱ आते हि मार्ग पर्र धीरे-धीरे धीरे-धीरे राजमहल कि तरफबढ़ गय़ा! रात केँ अंधेरे मे वोँ सैनिकों सें बचतेहुए महल केँ पीछे कि तरफ पहुंच गय़ा औऱ दलदल कों पऱ करने केँ बाद वोँ महल केँ गुप्त दरवाजे पर्र पहुंच गय़ा औऱ अंदर दाखिल होँ गय़ा!
अंदर जाकर कों गुफा केँ आखिरी छोर पऱ खड़ा होँ गय़ा औऱ बाहर् सें किसी प्रतिक्रिया कां प्रतीक्षा करनेलगा! थोड़ी देरबाद हि बाहर् सें किसी केँ गुनगुनाने कि आवाज़ आई तौ विक्रम समझ गय़ा कि सलमा बाहर् आँ गई औऱ विक्रम नें धीरे-धीरे सें गुफा पऱ हाथ मारा तोँ सलमा नें भि खुशी खुशी मे हाथमार कर जवाब दिया औऱ विक्रम नें ताकत सें गुफा कां दरवाजा खोल दिया तौ सलमा तेजी सें अंदर गुफा मे घुस गई औऱ विक्रम सें किसी अमरबेल कि तरह लिपटती हुई चली गई औऱ विक्रम नें भि उसे अपनी बांहों मे कस लिया! बिनाकुछ बोले दोनो एक् दूसरे कों अपने सीने सें लगाएहुए एक् दूसरे कि धड़कन सुनते रहे औऱ कुछसमय ऐसे हि बीतगए तोँ सलमा धीरे-धीरे सें बोलि:"
" केसे हौ युवराज आप्? मे तोँ आपके बिना लम्हा लम्हा बेचैनी रही थि! यकीन मानो आप् मिले तोँ मुझे जैसेनया जिंदगी मिल गय़ा हैं आज!
विक्रम: मे भि आपसे मिलने केँ लिए बेकरार थां शहजादी!
सलमा नें अब सीना उसकी छाती मे छुपा लिया औऱ दुःखी स्वर मे बोलि:" युवराज हमेअजय कां बेहददुख हें! आपके होतेयह सभी केसे हौ गय़ा!
विक्रम कां भि दिल दुःखी हौ गय़ा औऱ अपनी पकड़ सलमा पऱ ढीले करतेहुए बोला:"
" मेरेवश मे होता तौ उसेकभी मरने नहीं देता!मगर अजय उनकीचाल कों समझ नहीं पाया!
सलमा:"अरे मे भि कितनी बुद्धू हौ गई हु! यहीं सारीबात कर लेना चाहती हूं! आप् मेरेसंग मेरे कक्ष मे चलिए युवराज!
इतना कहकर सलमा उसकाहाथ पकड़कर इधरउधर देखती हुई सावधानी पूर्वक आगेबढ़ गई औऱ जैसा हि कक्ष खोला तौ अंदर दोनो घुसे तोँ सामने हि बेड पर्र पड़ी हुइ सीमामिल गई जौ विक्रम कों देखते हि रोती हुईँ दौड़कर उसकेगले लग गई औऱ बोलि:" यहसभी क्याँ होँ गय़ा हैं युवराज! काशअजय कि अजय मे मर गई होती!
विक्रम नें बड़े भइया कि तरह प्रेम सें उसकीपीठ पऱ हाथ फिराया औऱ बोला:"
" अपने आपको संभालो सीमा!यह वक़्त रोने कां नहीं बल्कि बदला लेने कां हें!
सलमा:मगर अजय कि तलवार केँ होते भि ऐसा कैसा हौ सकता हैं आखिर?
उसकेबाद विक्रम नें उन्हें शुरुआत सें लेकरअंत तक सारी बातें बताई औऱ जब्बार कां नामआते हि सीमा औऱ सलमाचौक पड़ी औऱ बोलि:" मुझेलग रहा थां जरूर इसमें जब्बार कां हि हाथरखा होगा क्योंकि वोँ कमीना किसी भि हद तक गिर सकता हें! भला जिसने अभि पत्नि तक कों पिंडाला केँ हवाले कर दिया हौ उससे औऱ उम्मीद हि क्याँ कि जा सकती हैं!
सीमा:" मे जब्बार कों अपने इन्ही हाथो सें मारूंगी! खूनपी जाऊंगी उसका!
सलमा:"मगर एक् बातसमझ नहीं आँ रही हैं कि आखिर जब्बार नें आप् औऱ अजय पऱ हमला क्यूं किया ?
विक्रम:" यही तौ मुझेपता करना हैं कि आखिर उसनेकिस बात कां बदला हमसे लिया हैं?
सलमा:" कहीं मेरे पिता कों आजाद करने कां बदला तोँ नहीं लिया! हौ सकता हें कि उसेपता चल गय़ा हौ कि आप् दोनो नें हि पिंडलगढ़ सें सुलतान कों आजाद किया हें!
विक्रम केँ मन मे धमाका सां हुआ औऱ बोला:"
" इसबात तोँ मेरा ध्यान कभी गय़ा हि नहि! अब प्रश्न यह कि उसे आखिर केसेपता चला होगा?
सीमा दोनो कां मुंहदेख रही थि औऱ उनकी बातेसुन रही थि औऱ बोलि:" मे जरूरी पता लगाकर रहूंगी क्योंकि मेरी जीवन कां मकसद हि अब जब्बार कि बरबादी हैं!
विक्रम:" जब तक आपका भइया जिंदा हैं तब तक तुम् कुछमत करो! मे हू न् सभीकुछ ठीक करने केँ लिए!मुझ पर्र भरोसा रखो!
सीमाकुछ नहि बोलीं! थोड़ी देर चुप्पी छाईरही तोँ सलमा बोलीं:"
" मेरे पिता केसे हें युवराज ?
विक्रम:" पहले सें बहोत बेहतर हैं औऱ जल्द हि पूरीतरह सें स्वस्थ हौ जायेंगे!
सलमा:"अरे मे तौ भूल हि गई आप् पहलेयह तौ बताओ कि आप् इतने सख्त पहरे केँ बाद अंदर केसेआए ?
विक्रम नें उसे सारीबात बताई तोँ सलमा बोलीं:"
" फिन तौ आपको बहोत अधिकभूख लगी होगी! आप् बैठकर सीमा सें बातकरो, मे कुछ खाने कां इंतजाम करतीहू आपकेलिए!
सलमा जानेलगी तौ सीमा नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोलि:" आप् युवराज सें बैठकर बात कीजिए! मे खाने कां इंतजाम स्वयं कर लूंगी!
इतना कहकर सीमा बाहर् निकल गई औऱ दरवाजे कों बंदकर दिया तौ उसके जाते हि सलमाफिन सें दौड़कर युवराज केँ गलेलग गई औऱ उसके मुंह कों चूमने लगी तौ विक्रम नें भि उसे अपनी बांहों मे कस लिया औऱ बोला:"
" सलमा मुझे किसी भि कीमत पर्र अजय कि मौत कां बदला लेना हैं चाहे इसकेलिए मेरीजान हि क्यूं न् चलीजाए!
सलमा नें उसके होंठो पर्र उंगली रख दि औऱ बोलि:" मरे आपके दुश्मन युवराज! जब्बार कों मारने मे मे आपकासंग दूंगी!
विक्रम नें सलमा कों गोद मे उठाया औऱ बेड पऱ लेकर आँ गय़ा तोँ सलमा उसके मजबूत कंधे पऱ अपनासिर टिकाकर लेट गई औऱ बोलीं:"
" आप् बड़े परेशान लगरहे हें युवराज! आखिर क्याँ बात हें जौ आप् इतनेसोच मे गुम होँ?
विक्रम:" आपकोपता हें शहजादी कि मे युद्ध मे उसदिन बच गय़ा क्योंकि मैंने अजय कि तलवार कों उठा लिया औऱ दुश्मनों पऱ हमला किया!
सलमा नें उसकीबात कों गौर सें सुना औऱ समझा तौ बोलि:"
" मगर आप् अजय कि तलवार केसेउठा सकते हौ ? उसे तोँ उसके परिवार केँ सिवाकोई औऱ नहि उठा सकता!
विक्रम:" यही तौ बात तोँ मुझे भि समझ नहीं आँ रही हैं यह देखो!
इतना कहकर विक्रम नें अपनीकमर मे छुपी हुईँ तलवार कों बाहर् निकाल लिया औऱ शहजादी कों दिखाया तौ सलमा हैरान सें बोलि:"
" याँ मेरेरब यह कैसा अजीब करिश्मा हें! क्याँ मे सपनादेख रही हूं याँ हकीकत ?
विक्रम:" यही हकीकत हें सलमा! मुझेसमझ नहींआया कि आखिर मे यह तलवार केसेउठा सकता हूं? आखिर क्याँ मेराअजय केँ परिवार सें कुछ नाता हें ? हें तोँ केसे औऱ क्याँ? मे उलझन मे फंस गय़ा हूं शहजादी!
सलमा नें उसकेसिर पर्र प्रेम सें हाथ फेरा औऱ बोलीं:"
" आप् सभीकुछ टाइम पऱ छोड़दो! औऱ हांअगर आप् सच मे युवराज नहींहुए तौ भि मे आपकी हि अमानत रहूंगी!
विक्रम नें उसका माथाचूम लिया औऱ बोला:" मेरेलिए अभि सबसे ज़्यादा जरूरी अपनी स्वयं कि सच्चाई जानना हें!
इसीबीच सीमा खानां लेकर आँ गई औऱ सब नें संग मे खानां खाया औऱ उसकेबाद सीमा सोने केँ लिएअलग कक्ष मे जानेलगी तोँ विक्रम नें उसकाहाथ पकड़कर अपनेपास हि बैठा लिया औऱ तीनों सुल्तानपुर केँ हालात पऱ चर्चा करतेरहे!
अगलेकुछ सुभह होने सें पहले हि विक्रम निकल गय़ा औऱ अब्दुल नें सुल्तानपुर केँ व्यापारियों सें कुछ सामान खरीदा औऱ आखिर मे साम केँ टाइमसब लोग सुरक्षित अपने राज्य पहुंच गए!
राज्य मे आने केँ बाद विक्रम नें सबसे पहले मेनका सें मिलने कां निश्चय किया औऱ उसकेघऱ जाआया! मेनका पूरीतरह सें दुःखी थि आज भि औऱ सोफे पऱ पड़ी हुई थि! विक्रम कों देखकर वोँ खड़ी होँ गईं औऱ बोलि:"
" युवराज आपनेआने कां कष्ट क्यूं किया ? मुझे बुला लिया होता !
विक्रम उसकीबात सुनकर दुखीहुआ औऱ बोला:" मे सारी दुनिया केँ लिए युवराज हुमगर आपकेलिए बिल्कुल आपके बेटे जैसाहु इसलिये आप् मुझे युवराज नं कहे!
मेनका:" बेशक आप् मेरे बेटे जैसे हौ मगरराज परंपरा मे केसेभूल सकतीहू ?
विक्रम थोड़ी देरचुप रहा औऱ बोला:" कैसी होँ आप् ?
मेनका थोड़ी देर शून्य मे घूरती हुईँ खड़ी औऱ फिन बोलीं:"
" बस जिंदा हु!
विक्रम उसकी हालत देखकर मन हि मन तड़पउठा औऱ सोचने लगा कि क्याँ वोँ सच मे यही मेनका हें जिसे मैंने उसरात अजय कि बांहों मे देखा थां! मेनका कां चेहरा हल्का पीलापड़ गय़ा थां औऱ उसकी आंखे रोने केँ कारणलाल हौ गई थि!
विक्रम नें हिम्मत करके उसके कंधे पऱ हाथरखा औऱ बोला:"
" संभालिए आप् अपने आपको!जब आपका दुःखी चेहरा देखता हु तोँ मेरादिल फट पड़ने कों होता हें! ऐसा लगता हें कि जैसे मे किसी अपने कों दर्द मे तड़पते हुएदेख रहा हूं! पता नहीं क्याँ नाता हैं मेरा आपसे कि आपकी उदासी मेरीजान निकलरही हें!
इतना कहकर विक्रम कि आंखेछलक पड़ी औऱ उसने अपनेसिर कों मेनका केँ कंधे पर्र टिका दिया औऱ उसकी आंखो सें निकलते हुए आंसू मेनका कां दामन भिगोने लगी तोँ मेनका नें अपने आंचल सें उसके आंसूसाफ किए औऱ प्रेम सें उसके आंसूसाफ करती हुइ बोलि:"
" बहादुर योद्धाओं कि आंखो मे आंसू शोभा नहीं देते युवराज!
विक्रम मेनका कां अपनत्व देखकर किसी छोटे बच्चे कि तरह बिलख पड़ा औऱ बोला:"
" आपकी उदासी मुझे पागलकर रही हैं! मन करता हैं कि सारी दुनिया कि खुशियां लाकर आपके दामन मे डालदू! आप् बताए नाँ मे क्याँ करू कि आपकी हंसीफिन सें वापिस लासकू?
मेनका थोड़ी देरचुप रही औऱ रोतेहुए विक्रम कों तसल्ली देतीरही औऱ फिन बोलि:"
" मुझेअजय केँ हत्यारे मेरे कदमों मे चाहिए युवराज! उससे पहले नं मेरीबदन कों शांति मिलगी औऱ न् हि मेरी आत्मा कों चैन!
विक्रम मेनका केँ चरणों मे बैठ गय़ा औऱ उसके पैरो कों हाथ लगाते हुए बोला:" आपके इन्ही चरणों कि सौगंध मे जब तक अजय केँ हत्यारों कों आपके कदमों मे नहींडाल दूंगा राज गद्दी पर्र नहीं बैठूंगा!
मेनका नें उसेऊपर उठाया औऱ उसके आंसुओं सें भीगगए चेहरे कों साफ करती हुईँ बोलीं:"
" आज केँ बाद मुझे आपको आंखो मे आंसू नहि बल्कि ज्वाला दिखनी चाहिए! ऐसी ज्वाला जिसमे सभी शत्रु जलकर भस्म हौ जाए!
मेनका नें विक्रम कां पूरा चेहरा साफकर दिया तोँ विक्रम कि आंखेअब लाल सुर्ख होकरदहक रहीथीं औऱ बोला:"
" ठीक हें मगर आपको भि एक् वादा करना होगा कि आज केँ बाद आप् अपना ख्याल रखेगी! रोएंगी बिलकुल नहीं क्योंकि आपकी आंखों केँ आंसू मुझे कमजोर करते हें! पता नहीं आपसे मेरा क्याँ नाता हें मगर आपकादुख मे नहींदेख सकता!
मेनका भि उसकी बाते सुनकर थोडा भावुक हौ गईं औऱ विक्रम सें उसे अपनापन महसूस होँ रहा थां इसलिये नं चाहते हुए भि उसकी आंखो सें आंसूछलक पड़ा तोँ विक्रम नें मेनका केँ चेहरे कों अपने हाथों मे लेतेहुए उसके आंसू कों साफ किया तौ मेनका उसका प्रेम अपनत्व देखकर पिघल गई औऱ पहलीबार नं चाहते हुए भि उसकेगले लग गई! विक्रम नें भि उसे अपनेगले सें लगा लिया औऱ दोनोऐसे हि चिपके हुए खड़ेरहे! बिलकुल शुद्ध औऱ निश्चल प्यार!
विक्रम प्रेम सें उसकीपीठ थपथपाते हुए बोला:"
" आपने खानां खाया याँ नहि!!
मेनका कुछ नहीं बोलीं तौ विक्रम समझ गय़ा कि आज भि उसने खानां नहीं खाया हैं तोँ विक्रम उससेअलग होतेहुए बोला:"
" मुझे भि बहोत जोर कि भूखलगी हैं! आज आपके हाथो सें खानां खाकर हि जाऊंगा!
मेनका यह सुनकर दौड़ी दौड़ी किचन मे गई औऱ आनन फानन मे हि मज़ेदार भोजन सजधजकर किया औऱ दोनो नें एक् संग खानां खाया औऱ उसकेबाद विक्रम जानेलगा तोँ पता नहि क्यूं मगर मेनका कां दिलभर आया औऱ बोलीं:"
" युवराज आप् आते हें तौ अच्छा लगता हैं! पता नहि क्याँ नाता हैं आपसे कि आपको देखकर दुख दर्दसभी दूर होँ जाते हैं!
विक्रम:" मुझे भि आपसे बिलकुल अपनापन हि लगता हें! आप् अपना ध्यान रखिए औऱ हानकल मे आपको लेने केँ लिए आऊंगा! कल पूजा हैं तोँ कल विधिपूर्वक सारे राज्य कि सब जिम्मेदारी मुझेदे दि जायेगी! आप् रहेंगी तौ मुझे अच्छा लगेगा!
मेनका:" मे जरूर आऊंगी युवराज!
विक्रम:" अच्छा मे अब चलताहु! आप् अपना ध्यान रखिए औऱ किसी भि चीज कि जरूरत होँ तोँ मुझे अपना बेटा समझकर बोल दीजिए आप्!
बेटा शब्द सुनकर मेनका केँ अंदर ममता कां सागर उमड़ औऱ एक् बारफिन सें भावुक होकर विक्रम केँ गलेलग गई औऱ बोलीं:"
" बिलकुल मेरेलिए तोँ आप् बिल्कुल मेरे बेटे जैसे हि होँ युवराज! भगवान आपकोहर बुरीनजर सें बचाए!
उसकेबाद विक्रम मेनका केँ घऱ सें निकलकर राजमहल मे आँ गय़ा औऱ उसकेदिल कां बोझ थोडा हल्का होँ गय़ा थां! अजय केँ मरने केँ बाद वोँ अभि तक अपने आपको दोषीमान रहा थां औऱ उसे स्वयं कां तलवार उठा लेनाइस बात कां सुबूत थां कि जरूर उसका मेनका केँ परिवार सें कुछ गहरा नाता तौ हें!
रात केँ लगभग 12 बज चुके थें औऱ मेनका पलंग पऱ पड़ी हुइ सोने कां प्रयास कररही थि मगर नींद उसकी आंखो सें कोसोदूर थि! उसकेदिल कां दर्द पीड़ा बनकर चेहरे सें उमड़रहा थां कि तभी दरवाजे पर्र दस्तक हुइ तौ मेनका नें भारी कदमों सें उठकर दरवाजा खोला तोँ सामने दाई माता कों देखकर उसकी आंखे हैरानी सें फैल गई औऱ बोलि:" दाई माता आप् इतनीरात गए केसे?आइए अंदरआइए आप्!
दाई माता एक् लगभग 75 साल कि कमजोर सि दिखने वाली वृद्ध औरत थि जिसकी कमरअब बुढापे केँ कारणबीच मे सें मूड गई थीं औऱ वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलती हुईँ अंदरआई औऱ पलंग पर्र बैठ गई तोँ मेनका उसकेपास हि जमीन मे बैठ गई!
मेनका:" दाई माता आपनेइस उम्र मे आने कां कष्ट क्यूं किया मुझे हि बुला लिया होता!
दाई माता धीरे-धीरे सें कमजोर शब्दो मे बोलि:" मेनका बेटी अगरआज भि नहीं आँ पाती तोँ शायदकभी सच बोलने कि हिम्मत नहि जुटा पाती मे!
मेनका कां दिल तेजी सें धड़कउठा औऱ मेनका बेचैन होतेहुए बोलीं:" सच कैसासच दाई माता? मे कुछसमझ नहि पाई!
दाई माता:" एक् ऐसापाप जौ मैंने आज सें 22 साल पहले किया थां ईनाम केँ लालच मे आज उसके प्रायश्चित करने कां वक्त आँ गय़ा हैं!
मेनका अब पूरी सें बेचैन होतेहुए बोलि:" साफसाफ बताए नाँ दाई माता? मुझे सब्र नहि होँ पारहा ?
दाई माता:" सचयह हैं कि युवराज विक्रम आपका बेटा हैं मेनका!
दाई माता कि बात सुनकर मेनका कों लगा कि उसकादिल उछलकर उसकी छाती सें बाहर् निकल आयेगा औऱ उसके होंठ खुशी सें कंपकपा उठे
" कक क्याँ दाई माता!!
दाई माता नें उसकेसिर पऱ हाथरखा औऱ बोलि:" हान बेटी विक्रम आपका हि बेटा हें! सबसे बड़ा बेटा! दरअसल आपको औऱ महारानी कों एक् हि दिन प्रसव पीड़ा हुई थि तौ महारानी कों मरेहुए बच्चे पैदा होते थें! मगर महराज नें घोषणा करी थि कि अगर मैने उनके बच्चे कों जीवित पैदाकरा दिया तौ वोँ मुझे सोने हीरे जवाहरात देंगे औऱ अगरमरा हुआ बच्चा हुआ तौ मुझेमार डालेंगे क्योंकि महाराज कों लगता थां कि दाई कि वजह सें इनके बच्चे मरते हें इसलिये वोँ कईदाई कों मरवा चुके थें! मेरेहर कोशिश करने केँ बाद भि उनकोमरा हुआ हि बच्चा पैदाहुआ! आप् दो बेटे पैदाहुए आप् उस वक्त दर्द कि अधिकता सें पूरीतरह सें बेहोश थि! बसइसी कां फायदा उठाकर मैने एक् बच्चे कों महारानी केँ बच्चे सें बदल दिया औऱ बाद मे सबको बताया कि आपका एक् बेटा मर गय़ा हैं!
मेनका कि आंखो सें आंसूबह चले औऱ वोँ दाई माता एक् दामन झिंझोड़ते हुए बोलीं:"
" क्यूं किया आपने मेरेसंग ऐसा!चंद गहनों केँ लालच केँ चलते आपने मेरी ममता कां गलाघोट दिया! बोलिए दाई माता
दाई माता थोड़ी देरचुप रही औऱ फिन मेनका केँ सामने हाथ जोड़कर बोलीं:" मुझे माफ़कर दो मेनका, मे सचमुच लालच मे अंधी होँ गई थि औऱ फिन अपनीजान बचाने कां मेरेपास कोई उपाय भि नहीं थां!
मेनका थोडा शांत हुई औऱ बोलीं:" आज आखिर इतने दिनों केँ बाद आपकोयह राज बताने कि क्याँ जरुआत आन पड़ी?
दाई माता:" कल युवराज विक्रम कों पूजा केँ बाद राज्य कि सब जिम्मेदारी दे दि जायेगी औऱ यह पूजा कराने कि जिम्मेदारी मुझे मिली हें जबकि असली मम्मी केँ जिंदा रहतेऐसा करना अपशकुन होगा! एक् गलती मे पहले हि कर चुकी हूं तौ अब दूसरी गलती करने कि मेरे अंदर हिम्मत नहि बची हें!
मेनका:" मगर आप् सबके सामने यहबात रखेंगी तौ जनता आपको बुराभला कहेगी औऱ आपको फांसी भि हौ सकती हें! बेहतर होगा कि यहराज आप् राज हि रहनेदो !
दाई माता:" मुझे मेरे अंजाम कि अबकोई परवाह नहीं हें! मरना तौ वैसे भि हें हि मगर प्रायश्चित करके मरूंगी तोँ आत्मा कों थोड़ी शांति तोँ रहेगी! अच्छा मे चलतीहु! बेटी मे माफ़ केँ लायक तौ नहींहु मगर हौ सके तौ मुझे माफ़कर देना!
इतना कहकर वोँ मेनका केँ पैरो मे गिर पड़ी तौ मेनका नें उसेऊपर उठाया औऱ बोलीं:"
" बड़े छोटे सें माफ़ मांगते हुए अच्छे नहीं लगते!भले हि देर सें हि सहीमगर आपने मुझेआज फिन सें जीने कि एक् नईवजह दे दि हैं!
दाई माता वहां सें चली तोँ मेनका कि आंखे एक् बारफिन खुशी सें उछलउठी औऱ यहअब एहसास हुआ कि आखिर क्यूं विक्रम नें उसकी खानदानी तलवार उठाली थि क्योंकि वोँ उसका हि अपनाखून हें औऱ इसीवजह सें उसे विक्रम सें इतना अधिक अपनापन महसूस होँ रहा थां!
थोड़ी देर तक मेनका खुशी सें पलंग पर्र करवट बदलती रही औऱ आखिर मे उसे नींद आँ गई! आजकई दिनों केँ बाद वोँ चैन कि नींद मे सोई थि!
मेनका कों जीने कि नईवजह मिल गई हैं! सबसे बड़ी देखने वालीबात होगी कि अब राजाकौन बनेगा ?
Raja Vikram ko hi banana chahiye ab joo hu gyaa wo badla tow ja nahee Sakta aur dekh jaye tow Vikram k alawa doosra kon is kabile hain jise raja banaya jaye
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम मेनका कां हि संतान हैं, इसका आभास विक्रम केँ तलवार धारण करते हि लग गय़ा थां।
मेनका केँ लिएये बहुत खुशीभरा लम्हात हैं। अजय केँ बिछड़ने केँ बाद उसकी पीड़ा वास्तव मे बहुत असहनीय हौ गई थि। मगरइस असलियत सें विक्रम कों भि वाकिफ कराना बहोत जरूरी हैं। औऱ विक्रम कों चाहिए कि वो मेनका कों अब अपनेसंग, अपनेमहल मे रखे।
केवल मेनका हि नहीं बल्कि सीमा पर्र भि उसकी नजरे इनायत होनी चाहिए। आखिर उसकादुख भि कोई छोटा मोटादुख नहीं हैं।
बेहतरीन भाग यूनिक स्टार भइया।
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
आप् सब कां मेरीकथा पऱ फिन सें स्वागत हैं! आप् सबका प्रेम मुझेफिन सें आप् सबकेबीच लेँ आया हें औऱ जरूरी बदलाव केँ बादकथा फिन सें आप् सबकेबीच वापिस लौटआई हें!! सब लेखकों औऱ पाठको कों नियमो कां सम्मान करना चाहिए क्योंकि नियम साइट कों बेहतर बनाने केँ लिए हि बनाएगए हें! मेरे द्वारा कुछ शब्दों कां इस्तेमाल किया गय़ा थां जोँ कि साइट केँ अनुसार सही नहि हैं! फिरभी मैंने किसी जाति याँ धर्म कों नीचा दिखाने केँ लिए नहीं बल्कि किस्सा कि मांग केँ अनुसार किया थां मगर नियमो केँ अनुसार ऐसा करनासही नहि थां!
खैरयह सभी बाते छोड़िए औऱ फिन सें आप् स्टोरी कां मजा लेने केँ लिए रेडी हौ जाए!!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Next part mein bada twist
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