शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
उदयगढ़ मे आपातकालीन सभालगा हुई थि औऱ राज्य केँ सब छोटे बड़े अधिकारी मौजूद थें!
विक्रम:" राजमाता कां राज्य सें अचानक गायब होँ जानां किसी बड़े खतरे कां संकेत हैं! हमे किसी भि हालत मे उन्हे ढूंढकर वापिस लाना हि होगा! मुख्य दरवाज़ा केँ पहरे पऱ कौन होता हें ?
एक् सिपाही आगेआता हें औऱ सिर झुकाकर बोला:" महाराज मे हि थां मगरऐसा कुछ नहींहुआ तौ संदेह वाला होँ!
विक्रम नें उसे घूरकर देखा औऱ जाने कां इशारा किया औऱ सब सें बोला:" जाइए औऱ पूरा राज्य ढूंढ निकालिए! आधे घण्टे केँ अंदरहमे राजमाता वापिस चाहिए!
अजय सावधानी सें इधरउधर देखरहा थां औऱ उसकेमन मे एक् विचार आया औऱ सबलोग जारहे थें तोँ अजय नें धीरे-धीरे सें विक्रम कों कहा:"
" युवराज सारे मंत्री औऱ अधिकारी यहां हें मगर शक्ति सिंह नहीं हें!
अजय कि बात सुनकर विक्रम नें नजर उठाकर देखा औऱ उसे भि शक्ति सिंह कहींनजर नहि आया तौ उसनेउस सिपाही कों वापिस बुलाया औऱ पूछा:"
" कलजब तुम् पहरे पऱ थें क्याँ शक्ति सिंह वहां सें गय़ा थां ?
सिपाही:" हान महाराज गय़ा थां औऱ देररात तक भि वापिस नहीं लौटा थां!
विक्रम:" क्याँ तुमने उसके बग्गी कों चेक किया थां?
सिपाही कि नजरे लज्जा सें झुक गई औऱ इधरउधर देखते हुएथूक गटकने लगा तोँ विक्रम नें एक् थप्पड़ उसेजड़ दिया तोँ सिपाही चींखता हुआदूर गिरा औऱ उसके मुंह सें खूनआने लगा!
विक्रम नें अपनासिर पकड़ लिया क्योंकि वोँ समझ गय़ा थां कि राजमाता किसी बहोत बड़ी मुश्किल मे फंस गई हैं!अजय नें उसके कंधे पऱ हाथरखा औऱ बोला:" आप् फिक्र नं करें युवराज सभीठीक होगा! राजमाता भि कुशलता पूर्वक वापिस आयेगी औऱ शक्ति सिंह कों उसकी गद्दारी कि सजा भि मिलेगी!
विक्रम कि आंखे सुलगरही थि औऱ जबड़े भींचते चलेगए औऱ बोला:" हम् शक्ति सिंह कों जिंदा नहीं छोड़ेंगे !! जाओसब औऱ ढूंढो उस गद्दार कों!
सबलोग सारे राज्य, जंगल औऱ उसकेआस पास केँ इलाके मे ढूंढते रहेमगर कोई सुराग नहीं मिला पाया तोँ किसीतरह रातकटी औऱ अगलेदिन सुभहफिन सें ढूंढमच गई मगर नतीजा वहीढाक केँ तीनपात!
जैसे जैसे वक़्त बीतता जारहा थां युवराज कां दिल बैठता जारहा थां! तभी एक् सैनिक दौड़ते हुएआया जिसके हाथ मे एक् लिफाफा थां औऱ बोला:"
" युवराज एक् अजनबी घुड़सवार आपकेलिए छोड़कर भाग गय़ा!
विक्रम नें बेताबी सें उसे फाड़ा औऱ पढ़ने लगा:"
" राजमाता हमारे कब्जे मे हैं औऱ औऱ उनकी जीवन चाहते हौ तौ चुपचाप काली पहाड़ी पऱ बने पुराने किले पर्र अजय केँ संग आँ जाओरात 9 बजे!
विक्रम नें गुस्से सें खत कों बंद किया तोँ अजय जौ कि पत्रपढ़ चुका थां कठोर लहजे मे बोला:"
" आप् फिक्र नहि करे युवराज! चलने कि तैयारी कीजिए! हम् दोनोजी पूरी सेना पर्र भारी हैं!
दोनो नें अपने आपको हथियारों सें सुसज्जित किया औऱ उसकेबाद बिनादेर किए दोनो घोड़ों पर्र सवार होकर काली पहाड़ी कि तरफ निकलगए! अजय पूरीतरह सें आश्वस्त थां कि वोँ धीरे-धीरे राजमाता कों बचाकर वापिस लेँ आयेंगे क्योंकि जब तक उसकेपास वोँ खानदानी तलवार हें दुनिया मे कों उसकाकुछ बिगाड़ सकता!
लगभग 9 बजे दोनो काली पहाड़ी पर्र पहुंच गए औऱ देखते हि देखते दोनो कि चारो सें हथियार बंद सैनिकों नें घेर लिया औऱ सामने हि राजमाता किले कि दीवार पर्र बंधीनजर आई औऱ नजरआया शक्ति सिंह जोँ कुटिल मुस्कान केँ संग बोला:"
" आओ युवराज आओ!सच मे आपकी मूर्खता कि दाद देनी पड़ेगी जौ दोनो यहां मरने केँ लिएचले आए!
अजय:" किसकी मौतआई हैं यह तौ तेरी थोड़ी देरबाद पताचल हि जाएगा गद्दार! मगर तेरी अंदर इतनी हिम्मत कहां सें आँ गई जोँ तुँ राजमाता कों उठा लाया!
तभी दीवार केँ पीछे सें जब्बार औऱ पिंडाला निकाल आए औऱ देखते हि देखते लगभग 100 सें अधिक पिंडारियो नें उन्हे घेर लिया औऱ जब्बार बोला:"
"आओ युवराज औऱ अजय तुम् दोनो कां मौत केँ मुंह मे स्वागत हैं आज!
युवराज नें अपनी तलवार कों बाहर् निकाला औऱ बोला:"
" किसकी मौत आयेगी यह तौ तेरी गर्दन कटने केँ बाद हि तेरीसमझ आएगा जब्बार!!
राजमाता सामने दीवार पऱ बंधी हुइ थि औऱ उसके मुंह मे कपड़े ठूंसा हुआ थां जिस कारणकुछ बोल नहि पारही थि! विक्रम औऱ अजय दोनो राजमाता कि यह दुर्दशा देखकर गुस्से सें दुश्मनों पऱ टूट पड़े औऱ देखते हि देखते जंग कां मैदान बन गई काली पहाड़ी! तलवारों केँ टकराने कि आवाजे गूंजरही थि औऱ मरतेहुए सैनिक चींखरहे थें! मगरअजय मानोआज सारी दुनिया कि ताकत अपने अंदर समेटे हुए थां औऱ उसकी तलवार बिजली कि तरहचमक रही थि औऱ पिंडारियो कों गाजर मूली कि तरहकाट रही थि! यह देखकर जब्बार बौखला गय़ा औऱ बोला:"
" जल्द सें अपनी योजना कों अंजाम दो नहीं तौ हम् सबकी लाशे पड़ी होगी यहां!
पिंडाला नें भि खतरे कों महसूस किया औऱ देखते हि देखते पिंडाला, शक्ति सिंह औऱ जब्बार तीनों नें एक् संग विक्रम पऱ वार करना शुरुआत कर दिया औऱ विक्रम बेहद बहादुरी सें सबका मुकाबला कररहा थां! अजय नें एक् नजर युवराज कों देखा जौ चारोतरफ सें घिराहुआ थां औऱ उसने लड़ते हुए युवराज कि तरफ बढ़ना शुरुआत किया ! युवराज लगातार चारोतरफ सें हौ रहे हमलों कां जवाब देतेहुए थोडा पीछे हटता गय़ा औऱ जब्बार कि आंखो मे चमकआने लगी!अजय पूरी ताकत सें अपनी तलवार चलारहा थां औऱ दुश्मनों केँ सिर कटकरगिर रहे थें मगर युवराज अभि भि उससे बहोत दूर थां!
पिंडाला नें तेजी सें तलवार केँ वारकिए औऱ विक्रम बचाव करतेहुए जैसे हि पीछेहटा तौ पहले सें बनाएहुए गड्ढे मे उसकापेर आया औऱ जैसे हि वोँ लड़खड़ाया तोँ जब्बार केँ एक् शक्तिशाली वार पीछे सें किया औऱ युवराज केँ हाथ सें तलवार छूटकर गिर पड़ी औऱ शक्ति सिंह नें बिनादेर किए अगलावार किया औऱ युवराज केँ कंधे सें खून निकलआया! पिंडाला नें अगलावार किया औऱ युवराज नें उसकी तलवार कों पकड़ लिया औऱ दोनो एक् दूसरे सें उलझ पड़े!इसी बीचअजय जौ सैनिकों सें घिराहुआ थां चाहकर भि कुछ सहायता नहींकर पारहा थां औऱ शक्ति सिंह औऱ जब्बार कभी युवराज केँ पेर पर्र तोँ कभी उसके हाथो पर्र वारकर रहे थें औऱ युवराज उनकीचाल कों समझ गय़ा थां कि वोँ क्यूं उसेमार नहींरहे तौ वोँ दर्द सें कराहते हुए चिल्लाया:"
" अजय अपनी तलवार मत छोड़ना, यह मुझे नहींमार सकते!
मगर युद्ध मे टकराती हुइ तलवारों केँ हंगामा केँ आगे उसकी आवाज़ सभी सि गई औऱ युवराज केँ शरीर सें बहतेखून कों देखकर अजय अंधे कि तरह तलवार चलाते हुए उसकीतरफ बढ़ा औऱ अब अपने जिंदगी कि भि कोई परवाह नहीं थि क्योंकि युवराज कां जिंदगी हि उसकेलिए सर्वोपरि थां!
देखते हि कईघाव अजय केँ शरीर पऱ हौ गए थें मगर वोँ पीछे हटने केँ बजायआगे हि बढ़ता जारहा थां औऱ तभी शक्ति सिंह नें अपनी तलवार सें पूरी फुर्ती सें युवराज विक्रम कि गर्दन पऱ वार किया औऱ यहीअजय सें चूक होँ गई क्योंकि उसने अपनी तलवार सें निशाना बनाते हुए शक्ति सिंह केँ हाथ पर्र वार करतेहुए अपनी तलवार कों हवा मे फेंक दिया औऱ तलवार शक्ति केँ हाथ पऱ लगी औऱ उसकाहाथ कटकरदूर जा गिरा औऱ अगले हि कई सारी तलवार निहत्थे अजय पर्र टूट पड़ी औऱ अजय कां शरीरकई स्थान सें कट गय़ा औऱ अजय तड़पते हुएआगे बढ़ा औऱ पिंडारी कों गले सें पकड़ लिया औऱ देखते हि देखते उस पिंडारी कां दम घुटने लगा औऱ पीछे सें एक् केँ बाद एक् ताबड़तोड़ वारअजय पऱ होनेलगे मगर उसकी पकड़ ढीली नहीं हुईँ औऱ अंत मे दोनो एक् संग जमीन पर्र गिर पड़े!
वहीं दूसरी तरफ विक्रम यहसभी देखकर पागल सां होँ गय़ा औऱ एक् तेज झटकाहवा मे खातेहुए गड्ढे सें बाहर् निकलकर अजय कि तरफ लपकामगर तब तक अजय विक्रम कि तरफ देखते हुएदम तोड चुका थां!
अजय कि मौत सें विक्रम अपना मानसिक संतुलन खो बैठा औऱ विक्रम नें अब बिनाखौफ केँ पिंडारियो पर्र हमलाकर दिया औऱ इसीबीच कईघाव विक्रम केँ शरीर पर्र हुए औऱ बहुतखून बहनेलगा!
पीछे सें पिंडाला नें एक् वार उसकीकमर पऱ किया औऱ दर्द सें बेचैनी कर युवराज जमीन पऱ गिर पड़ा औऱ उसे चारो औऱ सें घेर लिया! जब्बार नें उसे एक् जोरदार लात मारी औऱ बोला:"
" आखिरकार तुम् हमारे जाल हि फंस हि गए युवराज!
पिंडाला हंसते हुए बोला:" फंसता केसे बाजी नहीं क्योंकि हमनेइसी चाल केँ दम पर्र तोँ इन दोनो केँ पिता कों ख़त्म किया थां!
जब्बार:" बस हमेंउस जादुई तलवार सें खतरा थां तौ अजय केँ मरने केँ बादउस उसकी कि भि किस्सा समाप्त!
विक्रम दर्द सें कराहरहा थां औऱ चारो औऱ सें उसकेऊपर लात घूंसे बरसरहे थें औऱ विक्रम दर्द सें बेहाल होकर बोला:"
" राजमाता कों आजादकर दो जब्बार, चाहे तौ मेरीजान लेँ लो!
पिंडाला जोरजोर सें हंसने लगा औऱ बोला:" राजमाता तोँ कब कि आजाद होँ गई हैं युवराज मगर हमारी कैद सें नहीं बल्कि जीवन कि कैद सें मुक्त हौ गई हैं वोँ!
विक्रम कों लगा मानो उसकेबदन सें जान निकल गई हौ औऱ उसने खड़े होने कि कोशिश करी तोँ पिंडाला नें उसे एक् जोरदार धक्का दिया औऱ विक्रम दूर जाकर गिरा औऱ जब्बार अपने सैनिकों सें बोला:"
" समाप्त करदोइसे भि जाओ! मेरा मुंह क्याँ देखते हौ !!
सब सैनिक एक् सातआगे बढ़े औऱ विक्रम नें सहायता केँ लिएउधर इधर देखामगर कोई मौजूद नहीं थां! तभी उसकीनजर एक् तलवार पर्र पड़ीमगर अगले हि समय उसकी आंखो मे निराशा छा गई क्योंकि यह तोँ अजय कि वही खानदानी तलवार थि जिसे केवल उसके परिवार केँ लोग हि उठा सकते थें औऱ बाकीकोई उठाए तौ हाथ लगाते हि मौत निश्चित थि! एक् सैनिक नें विक्रम पऱ तलवार कां वार किया औऱ मरता क्याँ नं करता वालीबात विक्रम पर्र पऱ लागू हुइ औऱ उसने तेजी सें हाथआगे बढाया औऱ अजय कि तलवार कों हाथ मे उठा लिया औऱ अगले हि तलवार चली औऱ सैनिक कि गर्दन दूरजा गिरी! विक्रम कों यकीन नहीं हौ रहा थां कि उसकेहाथ मे अजय कि खानदानी तलवार हें मगरयह वक्त यकीन करने कां नहीं बल्कि युद्ध करने कां थां औऱ वही विक्रम नें किया औऱ देखते हि देखते सैनिकों केँ सिरकट कर जमीन पर्र गिरने लगे औऱ काली पहाड़ी पर्र आतंकमच गय़ा क्योंकि सैनिकों केँ पैर उखड़ने लगा! विक्रम कों छूना तोँ दूर कि बातकोई उस पऱ वार भि नहींकर रहा थां औऱ देखते हि देखते सैनिक जान बचाकर भाग खड़े औऱ पिंडाला, जब्बार औऱ शक्ति सिंह हैरानी सें यहसभी देखरहे थें मानो उन्हे अपनी आंखो पऱ यकीन नहीं हौ रहा थां!
जब्बार थोडा घबराते हुए बोला:" भागोअगर अपनीजान बचानी हें तोँ यहां सें!
इतना कहकर जब्बार भाग खड़ाहुआ औऱ उसके पीछे हि देखते देखते पिंडाला भि भाग खड़ाहुआ औऱ शक्ति सिंह भि भागने लगामगर उसकीगति घायल होने केँ कारण उतनी नहीं थि औऱ विक्रम नें शेर कि तरह उछलते हुएउसे पकड़ लिया औऱ शक्ति सिंह विक्रम केँ पैरो मे गिर पड़ा औऱ माफी मांगने लगा
" मुझेमाफ कर दीजिए युवराज!
विक्रम नें शक्ति सिंह केँ दूसरे हाथ कों भि काट दिया औऱ उसकेबाद विक्रम नें अजय औऱ राजमाता केँ शव उठाए औऱ शक्ति सिंह कों घोड़े केँ पीछे पैरो सें बांधकर खींचते हुए राज्य कि तरफबढ़ गय़ा!
विक्रम केँ मन मे तूफान मचाहुआ थां औऱ उसकी आंखो सें आंसूबह रहे थें! उसने ड्रीम्स मे भि नहीं सोचा थां कि अजयउसे ऐसे छोड़कर जायेगा! विक्रम उनकी सारीचाल समझ गय़ा थां औऱ उसनेअजय कों समझाया भि मगरअजय नें उसकीजान बचाने केँ लिए अपनीजान कुर्बान कर दि यहसभी सोचसोच विक्रम कां दिलरो रहा थां औऱ संग हि संगउसे एक् बात औऱ हैरान कररही थीं कि वोँ अजय केँ परिवार कि जादुई तलवार केसेउठा सकता हें जबकि वोँ परिवार तोँ मात्र उसके हि परिवार केँ लोगउठा सकते हें! उनके अलावा कोई औऱ छुए तोँ मौत निश्चित हें! इन्ही सभी दुविधाओ मे घिराहुआ वोँ उदयगढ़ कि सीमा मे घुस गय़ा औऱ थोड़ी हि देर मे पूरे राज्य मे राजमाता गायत्री देवी औऱ अजय कि मौत कि खबरफैल गई औऱ जनता बाहर् महल केँ चारोतरफ इकट्ठा हौ गई औऱ सब गायत्री देवी औऱ अजय कि मौत कां शोक मानने लगे औऱ जनताबार बार चिल्लाकर चिल्ला कर शक्ति सिंह कों उसके हवाले करने कि बातकर रही थि!
मेनका केँ जैसे हि अजय केँ शहीद होने कि खबर मिली तोँ वोँ बेहोश होँ गई औऱ बहुत कोशिश केँ बादउसे होशआया तोँ दहाड़े मारमार कर रोनेलगी औऱ विक्रम उसेबार बार दिलाशा देतारहा मगर माँ कि ममताभला केसे अपने आपकोरोक पाती औऱ मेनका बारबार बेहोश होतीरही! अगलेदिन सुभह तक यहबात आसपास केँ राज्य मे पहुंच गई औऱ जैसे हि सीमा औऱ सलमा कों पताचला तौ दोनोरो पड़ी औऱ जैसे तैसे करके सलमा नें सीमा कों संभाला औऱ सीमा केँ लिए उदयगढ़ जाने कां प्रबंध किया! सलमा कां भि बड़ामन थां मगर जब्बार केँ पहले औऱ बंदिशों केँ चलते वोँ मजबूर थि मगर सीमा उदयगढ़ पहुंच गई थि! लगभग 11 बजे केँ आसपास अजय औऱ गायत्री देवी कि लाश कों अग्नि दि गई औऱ अग्नि सें अधिक लोगो कि आंखे गुस्से सें जलरही थि औऱ उनमें सें हि दो आंखे सीमा कि भि थि जिनके आंसूअब सूखगए थें औऱ उनमें सें सुर्ख चिंगारी निकलरही थि! उसनेशपथ खाई कि जब तक वोँ अजय केँ हत्यारों कों मौत कि नींद नहीं सुला देगी सुकून सें नहि बैठेगी!!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
ये क्याँ किया यूनिक स्टार भइया आपने ! अजय कों शहीद करवा दिया ! ऐसा नहीं होना चाहिए थां।
कम सें कम उसकी माँ मेनका केँ बारे मे तौ सोचा होता ! उसकी प्रेयसी सीमा केँ बारे मे तोँ सोचा होता ! उसकीकम उम्र केँ बारे मे तौ सोचा होता !
ऐसा बिल्कुल हि नहीं होना चाहिए थां।
राजमाता कि मौत कां उतना अफसोस नहीं जितना अजय कि शहादत कां हैं।
विक्रम कां तलवार धारण करनाये संकेत देरहा हैं कि वो अजय कां सगा भइया थां। अगरये सचहुआ तब इसका मतलब मेनका कां अब भि एक् पुत्र जिंदा हैं।
शायद मेनका केँ संगसंग सीमा भि विक्रम कि जिम्मेदारी होँ गई।
बेहतरीन भाग यूनिक स्टार भइया।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग एपसोड।
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
राजमाता औऱ अजय कि मौत केँ दुख मे उदयगढ़ मे चूल्हे नहीं चढ़े औऱ प्रजा गुस्से सें भरी हुइ थि औऱ शक्ति सिंह कों नगर केँ बीचों बीच फांसी देने कि मांगकर रही थि औऱ विक्रम नें उनकी मांग कों पूरा किया औऱ अगले हि दिन शक्ति सिंह कों नगर केँ बीच चौराहे पऱ फांसी दे दि गई! शक्ति सिंह कि विधवा पत्नि औऱ बच्चो नें उसकाशव लेने सें मनाकर दिया औऱ उसकीलाश कों पहाड़ी पऱ सें लावारिश कि तरह हि फेंक दिया गय़ा!
लगभग एक् हफ्ते तक राजकीय शोक चलतारहा औऱ आखिर मे उदयगढ़ केँ सलाहकार नें विक्रम कों सलाह दि :"
" युवराज माफ़ करनामगर यहशोक कां वक्त नहीं हें! राजमाता औऱ अजय कि मौत कां सारे राज्य कि बेहददुख हें मगरहमे हरहाल मे स्वयं कों संभाल कर उनकीमौत कां बदला लेना हि होगा!
विक्रम नें अपने आंसूसाफ किए औऱ बोला:" मैने तौ अपनासभी कुछ हि खो दिया हैं औऱ मुझेअब मौत कि कोई परवाह नहीं हैं! जब तक मे राजमाता औऱ अजय कि मौत कां बदला नहीं लूंगा सुकून सें नहीं बैठने वाला!
सलाहकार:" ठीक हें महाराज! आप् कल सें राज्य सभा औऱ मंत्री दल कि बैठक मे सारी योजना बनायेगें!
इतना कहकर सलाहकार चला गय़ा औऱ विक्रम नें अजय केँ घऱ जाने कां फैसला किया ताकि वोँ उसकी माता मेनका कों हिम्मत देसके! विक्रम मेनका केँ घऱ पऱ आया तोँ घऱ कां दरवाजा खुलाहुआ मिला औऱ मेनका वहीपास मे हि फर्श पर्र पड़ी हुइ मिली जिसकी आंखे आंसुओं सें भीगी हुइ थि! विक्रम केँ कदमों कि आहत सुनकर वोँ खड़ी हौ गई औऱ उसकी आंखो सें आंसू बहतेरहे तोँ विक्रम कों उस पऱ दयाआई औऱ बोला:"
" देखिए मे आपकादुख समझ सकताहु मगर आपको फख्र होना चाहिए कि आप् एक् वीर औऱ बहादुर बेटे कि मम्मी हौ जिस पर्र पूरा राज्य अभिमान कररहा हें!
मेनका कि रुलाई फुट गई औऱ दोनो हाथों सें अपना चेहरा ढककर रोनेलगी तौ विक्रम नें हिम्मत करके उसके कंधे पऱ अपनाहाथ रख दिया औऱ बोला:"
" एक् वीर योद्धा कि माता कि आंखो मे आंसू शोभा नहीं देते! हमने भि तौ अपनी माता गायत्री देवी कों खोया हें मगर हमारी आंखों मे आंसू नहि बल्कि दिल मे प्रतिशोध कि ज्वाला धधकरही हैं औऱ यह ज्वाला उसीदिन ठंडी शांतजब हम् अजय कि हत्या कां बदला लें लेंगे! आप् एक् वीरांगना हें औऱ वीरांगना केँ हाथो मे तलवार होती हें आंखो मे आंसू तौ बिलकुल भि नहि !
विक्रम कि बात सुनकर मेनका कों यादआया कि उसने भि तोँ अपनी माँ कों खो दिया हैं तोँ उसकेदिल मे सहानुभूति उमड़आई औऱ अपने आंसूसाफ करतेहुए बोलीं:" हम् आपकादुख समझ सकते हें युवराज क्योंकि आप् औऱ मे दोनो एक् जैसी हि स्थिति कां सामना कररहे हें! मगर मुझे एक् बातसमझ नहीं आँ रही हैं कि तलवार होने केँ बाद भि अजय कों केसेमार दिया गय़ा ?
विक्रम नें लंबीअहह भरी औऱ दुखी स्वर केँ संग बोला:" हम् लोग एक् षडयंत्र कां शिकार हुए! राजमाता बचाने केँ लिए हम् लड़े औऱ जान बूझकर जब्बार औऱ पिंडारियो नें मुझ पऱ हमला किया औऱ पहले सें हि बनाएगए गड्डे मे मेरा पैरा फंसा औऱ मेरेहाथ सें तलवार गिर पड़ी तोँ मे ढाल सें लड़ता रहा औऱ उनकी सारीचाल समझ गय़ा औऱ अजय कों बताए कि तलवार अपनेहाथ मे रखेमगर मुझे मुश्किल मे जानकर अजय मेरीतरफ मुझे बचाने केँ लिए बढ़ा औऱ अंत मे उसने मेरीमौत निश्चित जानकर मेरीतरफ तलवार कां वार करने वाले कों अपनी तलवार फेंककर मार डाला औऱ उसकेबाद सभी नें निहत्थे अजय पर्र वार किया औऱ मे लाख कोशिश करने केँ बाद भि उसे नहींबचा सका!
इतना कहकर विक्रम कि आंखो मे आंसू आँ गए औऱ मेनका भि रुंधे गले केँ संग बोलीं:"
" मेरे बेटे नें भि अपने अपने पिता कि तरह अपनेराज धर्म कां पालन करतेहुए अपने प्राणों कां बलिदान कर दिया!
थोड़ी देर चुप्पी छाईरही औऱ दोनो हि अपने अपने आंसू रोकने कां प्रयास करतेरहे औऱ मेरी विक्रम बोला:"
" मैने तोँ मान हि लिया थां कि आज मेरी भि मृत्यु निश्चित हें औऱ मेराबदन जख्मी हौ गय़ा थां मगरफिन जोँ हुआ वोँ अविश्वसनीय थां!
मेनका नें उसकीतरफ देखा औऱ बोलि:" ऐसा क्याँ हुआ युवराज?
विक्रम:" मृत्यु कों निश्चित जानकर मैने अपनेपास पड़ी हुई अजय कि तलवार कों हाथ मे उठा लिया औऱ सभी दुश्मनों पर्र टूट पड़ा!
मेनका कां मुंह खुला कां खुलारह गय़ा औऱ उसकी आंखे आश्चर्य सें फैल गई औऱ बोलीं:" असंभव, ऐसा होना नामुकिन हें क्योंकि हाथ लगाते हि मौत निश्चित हैं!
विक्रम नें अपनेहाथ कों अपनीकमर केँ पीछे किया औऱ अब उसकेहाथ मे वहीअजय कि जादुई तलवार थि औऱ मेनका कों दिखाते हुए बोला:"
" यह देखिए आप्! यही वोँ आपकी तलवार हें औऱ मुझे स्वयं यकीन नहीं हौ रहा हैं कि मे इसे केसेउठा सकता हूं ?
मेनका नें उसकीहाथ मे थमी हुई तलवार कों देखा औऱ उसकी आंखो मे सारी दुनिया कां आश्चर्य थां औऱ ध्यान सें तलवार कों देखती हुईँ बोलि:"
" सचमुच यह तोँ हमारी हि तलवार हें मगर आपकेहाथ मे केसे आँ सकती हें मुझे स्वयं समझ नहीं आँ रहा हैं!
विक्रम नें तलवार कों चूम लिया औऱ बोला:"आज इसी तलवार कि वजह सें मे जिंदा हु क्योंकि अगरयह तलवार नहीं होती तोँ मेरी मृत्यु निश्चित थि!
" भगवान कां शुक्रिया जौ आप् जिंदा हैं नहीं तौ प्रजा बेचारी अनाथ होँ जाती! परमेश्वर आपको हमेशा खुशरखे!
मेनका केँ स्वर मे अब थोड़ी बैचैनी आँ गई थि औऱ उसेपता नहीं क्यूं विक्रम बिलकुल अपने जैसा हि लगरहा थां औऱ उसकेदिल सें उसकेलिए करोड़ों दुआएं निकलरही थि!
विक्रम:" आप् अपना ध्यान रखिए औऱ किसी भि चीज कि जरूरत होँ तोँ मुझे बताएगा!
मेनका कुछ नहीं बोलीं औऱ चुपचाप अपनासिर हिला दिया तोँ विक्रम बोला:"
" अच्छा यह अपनी अमानत आप् रख लीजिए!
इतना कहकर विक्रम नें तलवार कों मेनका कि तरफ बढ़ाया तोँ मेनका नें तलवार कों हाथ मे लिया औऱ फिन सें उसे वापिस विक्रम कों देती हुइ हुई:"
" आज सें आप् हि इसके वारिस हें युवराज! आपका कर्तव्य होगा कि आप् पूरे राज्य औऱ नागरिकों कि रक्षा करे!
इतना कहकरपता नहि किस भवावेश मे आकर मेनका नें विक्रम कां माथाचूम लिया औऱ विक्रम नें तलवार कों हाथ मे लिया औऱ बोला:"
" आपकी सौगंध खाताहु बहोत जल्द हि जब्बार औऱ पिंडाला कि लाशे आपके कदमों मे पड़ी हुइ मिलेगी याँ फिन मेरीलाश!
विक्रम कि बात सुनकर मेनका कां दिलभर आया औऱ उसके होंठो पऱ हाथ रखकर बोलीं:
" ऐसे अशुभ बाते मुंह सें नहीं निकालते युवराज! भगवान आपको मेरी भि उम्र प्रदान करे!
विक्रम केँ दिल मे भि मेनका केँ लिए हमदर्दी आँ गई थि औऱ बोला:" अच्छा मे अब चलताहु मुझेकुछ दूसरे काम भि पूरे करने हें! मे बीचबीच मे आता रहूंगा! किसी भि चीज कि जरूरत हौ तौ आप् निसंकोच मुझे कहिएगा!
इतना कहकर विक्रम चला गय़ा औऱ मेनका उसे जातेहुए देखती रही! मेनका कों अभि तक यकीन नहि हौ रहा थां कि विक्रम उनकी तलवार कों केसेउठा सकता थां! क्याँ यहकोई करिश्मा हैं याँ कुछऐसी घटना जोँ उससे छुपाई गई होँ! मेनका नें सोच लिया थां कि वोँ जरूरइस सच्चाई कां पता लगाकर रहेगी!
दूसरी तरफ मेनका सें मिलने केँ बाद विक्रम सुलतान केँ हालचाल पूछने उनकेपास गय़ा औऱ जैसे हि अजय औऱ राजमाता कि मौत कि खबर मिली तोँ उन्हे बेहक अफसोस हुआ औऱ बोले:"
" यहसभी शायद मेरीवजह सें हुआ हैं विक्रम! नां आप् मुझे बचाकर लाते औऱ नाँ हि वोँ आपसे बदला लेने केँ लिएऐसा करते!
विक्रम नें सुलतान कां हाथ अपनेहाथ मे लिया औऱ बोला:" आप् इसके स्वयं कों दोषमत दीजिए! परमेश्वर कि ख़्वाहिश केँ आगे किसी कि नहीं चलती! एक् पूरीखबर हैं कि पूरीतरह सें सुल्तानपुर पर्र जब्बार कां कब्जा होँ गय़ा हैं!
सुलतान थोडा चिंतित दिखाए दिए औऱ बोले:" जब्बार कों तोँ मे ऐसीमौत मारूंगा कि उसकीरूह भि कांप उठेगी बस एक् बार मे पूरीतरह सें ठीक हौ जाऊ!
विक्रम कि आंखे होँ गई औऱ गुस्से सें बोला:" आप् मुझेवचन दीजिए कि आप् जब्बार कों नहीं मारेंगे! वोँ अब मेरा शिकार हें !
सुलतान नें सहमति मे सिर हिलाया औऱ बोला:" सल्तनत मे अभि भि मेरेकई सारे वफादार हैं औऱ मेरे जिंदा होने कि खबर सें हि सारी प्रजा मेरेसंग आँ जायेगी! किसीतरह हम् सलीम कों सही दिशा मे लाना होगा!
विक्रम: आप् फिक्र मत कीजिए! मे जल्द हि स्वयं सुल्तानपुर जाऊंगा औऱ एक् फिन हालात कां अच्छे सें जायजा लूंगा औऱ आपकोसभी बाते बताऊंगा! तब तक आप् आराम कीजिए औऱ अपना ख्याल रखिएगा! मे फिन सें आऊंगा!
इतना कहकर विक्रम बाहर् निकलआया औऱ वैद्य जी सें मिला औऱ बोला:"
" वैद्य जी सुलतान आपकेघऱ मे हें यहबात आप् औऱ मे जानते हें! किसी तीसरे व्यक्ति कों पताचला तोँ आप् इसका परिणाम स्वयं सोच लेना!
वैद्य:" आप् निश्चित रहे युवराज! मरने केँ बाद भि मेरी जुबान बंद हि रहेगी!
विक्रम नें वैद्य कां कंधा थपथपाया औऱ फिन बाहर् निकल गय़ा औऱ महल मे पहुंच कर देखा कि कबूतर शहजादी सलमा कां खतलिए हुए थां औऱ युवराज नें उसे पढ़ा"
" मेरे प्रियतम विक्रम"
अजय औऱ राजमाता कि मौत नें मुझे बुरीतरह सें अंदर सें झकझोर दिया हैं औऱ मे अंदाजा लगा सकतीहू कि आप् पऱ इस वक्त क्याँ बीतरही होगी! यहां सुल्तानपुर मे भि हालत बेहद खराब हें औऱ जब्बार नें पूरीतरह सें मेरे औऱ अम्मी केँ बाहर् निकलने पऱ रोकलगा दि हैं तौ मे चाहकर भि आपसे नहींमिल पारही हूं! आप् इस मुश्किल वक्त मे स्वयं कों संभालिए! मेरे अब्बा सुलतान कां भि ख्याल रखिएगा!
मे कल सें रोजरात मे 12 बजे गुप्त दरवाज़ा केँ आखिरी छोर पर्र 5 मिनट आपकी इंतजार किया करूंगी! आशा हैं आप् जल्द हि मौका देखकर मुझसे मिलने आयेंगे!
" आपकी शहजादी सलमा"
खत पढ़कर विक्रम कों एहसास हुआ कि पिछले कुछ दिनो मे वोँ शहजादी कों तोँ पूरीतरह सें भूल हि गय़ा थां! विक्रम नें मन हि मन फैसला किया कि वोँ जल्द हि अच्छा देखकर एक् बार सुलतानपुर जायेगा!
वहीं दूसरी तरफ पिंडाला औऱ जब्बार दोनो बैठेहुए थें औऱ जब्बार बोला:"
" हमारी सारीबनी बनाई योजना पऱ पानीफिन गय़ा! साला एक् बातसमझ नहींआई कि अजय केँ परिवार कि तलवार विक्रम नें केसेउठा ली?
पिंडाला उसे घूरते हुए बोला:" तुम् चुप हि रहो!सभी तुम्हारी योजना थि औऱ मेरेकई व्यक्ति मारेगए उसका क्याँ!
जब्बार:" मुझे भि बेहद अफसोस हें औऱ सबसे बड़ीबात हमारा सबसे बड़ा मोहरा शक्ति सिंह भि मारा गय़ा!
पिंडाला:" उसकीमौत तोँ वैसे भि निश्चित थि क्योंकि वोँ बच भि जाता तौ मेरेहाथ मारा जाता क्योंकि गद्दार कभी विश्वास केँ लायक नहीं होते!
जब्बार:" यहबात भि ठीक हैं क्योंकि हमनेउसे राजा बनाने कां मात्र लालच दिया थां कोईसच मे थोड़े हि बनाने वाले थें! मगर मुझेवही बात हैरान कररही हैं कि विक्रम नें तलवार केसेउठा ली नहीं तोँ उसदिन हि सभीकाम एक् संग समाप्त हौ जाते!
पिंडाला:" अबे सीधी सि बात हैं कि जरूर उसकाअजय केँ परिवार सें कोई नातारहा होगा!यह बातअगर सच हैं तौ खतरा निश्चित रूप सें बड़ारूप लेगा!
जब्बार:" मे भि वहीसोच रहा हूं औऱ जल्द हि हमे इससे मुक्ति पानी होगी क्योंकि सुलतान कभी भि सामने आँ सकता हैं औऱ उसे देखकर प्रजा बगावत कर सकती हें जोँ हमारे लिएठीक नहि होगा!
पिंडाला:" चल वोँ सभीबाद मे देखेंगे! रात केँ लिए लड़की कां इंतजाम कब तक होगा! मुझेअब सब्र नहि होँ रहा हैं!
जब्बार:" सैनिक गएहुए हें औऱ आने हि वाले होंगे!
दोनो कि बाते चलतीरही औऱ लगभग 15 मिनटबाद पिंडाला केँ कमरे मे एक् लड़की कों भेज दिया औऱ पिंडाला नें बड़ी बेदर्दी सें उसे पूरीरात जानवर कि तरह रौंदा औऱ बेचारी मासूम लड़की नें प्यास बेचैनी करदमतोड दिया!
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