शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
अगले पूरेदिन अजय औऱ विक्रम राज्य केँ कामों मे लगेरहे औऱ थोडा भि आराम नहीं मिला! उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थि कि सुलतान कों केसे सुरक्षित रखाजाए क्योंकि दोनो जानते थें कि अब तोँ पिंडलगढ़ मे शोर होँ गय़ा होगा औऱ जब्बार सुलतान कों ढूंढने केँ ऐड़ी चोटी कां जोरलगा देगा!
लगभगदो दिनअजय अपनेघऱ पहुँचा तोँ उसकी माता मेनका नें मुस्कान केँ संग उसका स्वागत किया औऱ बोलि:"
" केसे होँ पुत्र ?
अजय अपनी माँ कि मुस्कान कां जवाब मुस्कान सें देतेहुए बोला:"
" अच्छा हु मे! आप् कैसी होँ ?
मेनका:" ठीकहु मे भि! बस थोडा मन नहींलग रहा थां मगरअब तुम् आँ गए होँ तौ दिक्कत नहि होगी मुझे! वैसे आप् कहां गायब थें इतनेदिन सें ?
अजय नें मेनका कों सारी बातें बताई तौ मेनका अपने बेटे कि बहादुरी सें बड़ीखुश हुइ औऱ बोलीं:" पुत्र आपने तौ सच मे कमालकर दिया, पिंडालगढ सें जीवित आने वाले आप् पहले इंसान होँ! मुझे पूरा यकीन हैं कि आप् पिंडाला कों मारकर अपने पिता कि मौत कां बदला अवश्य लोगे!
अजय केँ चेहरे पर्र बदले कि भावना साफ दिखाई दि औऱ सख्त लहजे मे बोला
" मेरे जीतेजी पिंडाला जिंदा नहीं रहेगा, मुझे आपकेदूध कि सौगंध हें माता आपके सुहाग उजाड़ने वाले कि मे दुनिया उजाड़ दूंगा! बस आप् मुझे आशीर्वाद दीजिए!
इतना कहकरअजय नें अपने माता केँ पेरछुए तौ मेनका नें उसेगले लगा लिया औऱ कसकर उससे लिपट गई! अजय केँ मजबूत बाजू भि अपनी माता केँ जिस्म पऱ कसगए औऱ दोनो थोड़े देर बिलकुल शांत खड़ेहुए एक् दूसरे कि धड़कने सुनते रहे!अजय धीरे-धीरे सें अपनी माता केँ कान मे बोला
" आपकेलिए लालरंग कि रेशमी साड़ी औऱ चूड़ियां लेकरआया हूं! मुझेआशा हें कि आपको मनपसंद आयेगी!
अजय कि बात सुनकर मेनका कां दिल धड़कउठा औऱ उसके चेहरे पर्र लालिमा छा गई औऱ बोलीं:"
" धत तेरी बेशर्म हौ गए हौ आप् पुत्रदेव!
अजय नें उसकीकमर कों अपनी हथेली सें हल्का सां मसल दिया औऱ बोला:" अपनी माता कों खुश रहना बेशर्मी कब सें हौ गई भला!
मेनका उसकी बांहों मे मचलउठी औऱ बोलि:" बाते बनाना तोँ कोई आपसे सीखे, चलो छोड़ो मुझेघऱ केँ काम तौ निपटा लू पहले!!
अजय नें अपनी बांहों कि गिरफ्त कों थोडा सां ढीला किया औऱ धीरे-धीरे सें बोला:" औऱ काम निपटाने केँ बाद मेरी माता??
मेनका कां पूरा शरीर अपने बेटे कि बात सुनकर कांपउठा क्योंकि वोँ जानती थि कि आजरात जरूरकुछ न् कुछ तोँ होगा इसलिये कसमसाते हुए अपने बेटे कि गिरफ्त सें बाहर् निकली औऱ छूटकर किचन कि तरफ भागती हुइ गई!
वही दूसरी सुल्तानपुर मे जब्बार वापिस आँ गय़ा थां औऱ राधिका नें जैसे हि उसे अंगूठी दिखाई तौ जब्बार कों हैरानी हुईँ औऱ बोला
" राधिका यह अंगूठी आपकेपास कहां सें आई ?
राधिका:" यह मुझे सीमा केँ कपड़ो सें मिली हें बहुत कीमती लगती हें मुझेयह!
जब्बार:" यह उदयगढ़ केँ राजघराने कि अंगूठी हें! उसकेपास यह कीमती अंगूठी केसे होँ सकती हें जरूरकोई नं कोईराज हैं! वोँ तोँ शहजादी सलमा केँ संग रहती हैं न् राधिका?
राधिका:" हान रहती तौ वोँ शहजादी केँ संग हि हैं!
जब्बार:" सीमा कां किसी सें कोई चक्कर तौ नहींचल रहा हें न् ऐसाकोई जोँ उदयगढ़ सें होँ जिसने अंगूठी चुराई हौ औऱ यह भि होँ सकता हैं कि उदयगढ़ राजघराने कां हि होँ!
राधिका थोडा सां सोच मे पड़ते हुए बोलि:" शहजादी औऱ सीमा दोनो गुमसुम रहती हैं मानो किसी केँ प्रेम मे पड़ी हुईँ होँ! दासियों मे भि मैनेकुछ कानाफूसी सुनी तौ हें मगर पक्का कुछ नहीं!
जब्बार कि आंखे मे चमकआई औऱ बोला:" तौ तुमने यहबात मुझेआज तक क्यूं नहि बताई राधिका ? क्याँ कानाफूसी सुनी हें बताओ तोँ जराहमे भि?
राधिका चुपरही तोँ जब्बार बोला:" क्याँ हुआ जल्दकहो? चुप क्यूं हौ ?
राधिका डर सि गई औऱ कांपते हुए बोलि:" राजमहल केँ बारे मे कुछ भि बोलते हुएडर लगता हें मुझे! कहींकुछ उल्टा सीधा होँ गय़ा तोँ मारी जाऊंगी!
जब्बार नें उसके दोनो कंधे पऱ अपने हाथो कों रखा औऱ उसे अपनापन दिखाते हुए बोला:"
" डरोमत राधिका, अब तोँ यह मानकर चलो कि सुल्तानपुर कां सुलतान मे हि हु!सभी कुछ मेरी मर्जी सें हि होगा औऱ मुझसे तुम्हे डरने कि कोई जरूरत नहि हैं!
राधिका केँ अंदर थोडा आत्म विश्वास आया औऱ बोलि:" वोँ सुना हें कि मेले मे शहजादी किसी युवराज सें मिलने गई थि ऐसा मुझे मेरी सहेली नें बताया हें जोँ एक् सैनिक कि प्रेमिका हें जौ शहजादी कि सुरक्षा मे थां!
जब्बार:" क्याँ नाम हें उस सैनिक कां ?
राधिका नें डरतेहुए उसकानाम बताया:" आबिद!!
जब्बार:" ठीक हैं! जब तक हम् नं कहेयह बाते किसी केँ सामने खुलनी नहीं चाहिए!
राधिका नें अपनी गर्दन कों हान मे हिलाया औऱ थोड़ी देरबाद हि उसके सामने आबिदनाम कां सैनिक खड़ेहुए थरथर कांपरहा थां औऱ बोला:"
" हमसे क्याँ खता होँ गई जौ हमे आपके हुजूर मे पेश होना पड़ा ?
जब्बार:" उधर आप् हमारे पास बैठो!कुछ बाते करनी हें! कितने साल सें कामकर रहे हौ ?
आबिद:" मेरी इतनी औकात नहीं जोँ आपकेपास बैठसकू! जी मुझे 12 साल होँ गए!
जब्बार नें उसकाहाथ पकड़कर उसे अपनेपास बैठा लिया औऱ बोला:"अरे डरोमत भइया! सबसे पहले तौ खुश खबरी सुनो कि आज केँ बाद तुम् पांच गांवों केँ मालिक रहोगे औऱ तुम्हे सैनिक सें बढ़ाकर नायब कि पदवी दि जायेगी!
आबिद नें दोनो हाथो कों जोड़ दिया औऱ बोले:"माफ कीजिए मगर मे इसइस काबिल नहींहु
जब्बार:" तुम् इसके काबिल होँ आबिद औऱ ध्यान सें मेरीबात सुनो! मे कों पुछु उसकासच सच जवाब देना नहीं तोँ गर्दन कटते भि देर नहि लगेगी!
आबिद कांपउठा औऱ बोला:" गर्दन आप् काट देना औऱ अगरझूठ बोलूं तौ !!
जब्बार:" शहजादी सलमा औऱ सीमा मेले मे किससे मिलने गई थि? कौन उनसे मिलने केँ लिएआया थां वहां?
आबिद कां मुंहडर केँ मारेलाल हौ गय़ा औऱ गलासूख गय़ा औऱ चुपरहा तोँ जब्बार नें सख्ती सें बोला:" बोलते होँ याँ मे अपनी तलवार निकालू ?
आबिद केँ शरीर सें पसीना निकल गय़ा औऱ बोला:" वोँ मुझेसाफ तोँ नहींपता मगर इतना जरूर हैं कि देखने सें एक् युवराज औऱ दूसरा उसका सारथी लगरहा थां!
जब्बार: कहां केँ थें वोँ दोनो ?
आबिद:"यह तौ नहींकह सकतामगर इतना जरूर हें कि मेले केँ पास हि मंदिर थां औऱ मंदिर मे उदयगढ़ कि राजमाता आई हुईँ थि! वोँ पूरा यकीन हें कि तौ उदयगढ़ कां युवराज हि होगा!
जब्बार:" इतनी बड़ीबात हमसेकोई नहीं बताई ?
आबिद:" गलती होँ गई हमसे, अब नां होगी!हर एक् जानकारी आपको दूंगा बस मेरीजान कि रक्षा कीजिए!
जब्बार:" तुम् फिक्र मतकरो! सभीकुछ राज्य मे मेरेहाथ मे हि हें औऱ मे जल्द हि तेरी बहोत बड़ी गद्दी दूंगा मगर शहजादी सें जुड़ी हरखबर मुझे चाहिए औऱ यहबात भूले सें भि किसी केँ सामने नहीं जानी चाहिए कि मुझेयह सभीपता हैं! आखिरकार राज परिवार कि रक्षा करना मेरा फर्ज होना चाहिए!
आबिद:" आप् फिक्र न् करे! मे शहजादी केँ बारे मे आपकोसभी कुछबता दूंगा!
लगभग एक् घंटे एक् मीटिंग हुए जिसमे जब्बार केँ संग पिंडाला। औऱ उदयगढ़ कां गद्दार सेनापति शक्ति सिंह बैठेहुए थें!
जब्बार:" मुझे किसी भि कीमत पर्र युवराज विक्रम औऱ अजय कि लाश चाहिए आज!
शक्ति सिंह:"मगर यहकाम इतना आसान नहीं होगा क्योंकि अजय केँ पास उसके पूर्वजों कि दि हुई तलवार हें औऱ उसेकोई नहींहरा सकता!
पिंडाला:" तुम् उसकी फिक्र मतकरो औऱ जैसाकहा गय़ा हैं वैसा हि करो! इतना तौ कर हि सकते हौ नां तुम्!
शक्ति:" आप् बेफिक्र रहे! मे आज हि रात मे यहकाम कर दूंगा! आपकी योजना कां दूसरा हिस्सा आपको पूरा करना होगा क्योंकि अगर युवराज औऱ अजयबच गए तौ मेरीमौत तय हैं!
जब्बार:" तुम् चिंता मतकरो! हमसेआज तक कोई नहींबच पाया हें तोँ यहनए बच्चे क्याँ हि कर लेंगे!! जाओ अपनाकाम करो हमारी विजय निश्चित हें क्योंकि हमारे संग महाबली पिंडाला हैं!!
शक्ति:" ठीक हें मगर अपना वादायाद रखना कि मुझे उदयगढ़ कां राज सिंहासन चाहिए!
जब्बार:" जब्बार कां वादा पत्थर कि लकीर होता हें उदयगढ़ केँ होने वाले महाराज शक्ति सिंह!!
शक्ति सिंहखुश हौ गय़ा औऱ चल पड़ा अपनी पहली योजना कों अंजाम देने केँ लिए जिसके तहतआज कि रातअजय औऱ विक्रम कों मौत केँ घाट उतारना थां!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
रात केँ लगभग 9 बजे तक मेनका नें खानां रेडीकर दिया औऱ उसके जिस्म मे अजीब सि गुदगुदी हौ रहीथीं क्योंकि जबसे उसने वोँ लाल सुर्ख रंग कि साड़ी औऱ कांच कि चूड़ियां देखी थि उसकामन मयूरनाच रहा थां कि इनमे मे कितनी हसीन लगूंगी!
अजय भि राज्य केँ सब जरूरी काम निपटा कर औऱ सुलतान कि सुरक्षा व्यवस्था कि सारी तैयारी देखने केँ बाद अपनेघऱ कि तरफ रवाना हौ गय़ा! अजय भि आजघऱ जातेहुए बहुतखुश रहा थां क्योंकि वोँ जानता थां कि आज कि रात उसकी जीवन कि सबसे हसीनरात होगी!
मेनका नें एक् प्यारी सि मुस्कान केँ संगअजय कां स्वागत किया औऱ बोलीं:"
" बड़ीदेर लगा दि आपने ! कहां थें पुत्र ?
अजय नें भि अपनी माँ कि मुस्कान कां जवाब मुस्कान केँ संग दिया औऱ बोला:"
" बस राज्य केँ कामों मे हि लगाहुआ थां औऱ सुलतान कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी देखरहा थां क्योंकि उन कि सुरक्षा अभि सर्वोपरी हें!
मेनका नें खानां टेबल पऱ लगा दिया थां औऱ बोलीं:" सुलतान केँ चक्कर मे अपनी माता कों मतभूल जानां मेरे पुत्र!
अजय भि अपनी माँ केँ पासबैठ गय़ा औऱ दोनो नें खानां खानां शुरुआत किया औऱ बीचबीच मे दोनो एक् दूसरे कों देखकर मुस्कुराते रहे औऱ मेनका केँ मुख मंडल पर्र लज्जा कि लालीछाई हुइ थि!
खानां खाने केँ बाद मेनका नें बर्तन उठाए औऱ धोने केँ लिए रसोई मे जानेलगी तोँ अजय भि उसकेसंग हि कुछ बर्तन उठाकर रसोई मे आँ गई तोँ मेनका हल्की सि हंसते हुए बोलीं
" योद्धाओं केँ हाथ मे बर्तन नहीं तलवार शोभा देती हें!
अजय भि मुस्कान कां जवाब मुस्कान सें देतेहुए बोला:"सहमत हु माताश्री मगर एक् हसीन माता कि घऱ केँ कार्यों मे मदद करना भि तौ पुत्र कां परम कर्त्तव्य होता हें!
मेनका उसकीबात सुनकर अपनेरूप सौंदर्य पऱ अभिमान करतेहुए बोलि:" चलोमान भि लिया मे हसीनमगर आपकी माताश्री हू पुत्र फिन आपका मेरेरूप सौंदर्य कि ऐसी प्रशंसा करना अनुचित होँ सकता हैं!
अजय मेनका केँ रूप सौंदर्य कों निगाहे जमाकर देखते हुए बोला:"आप् परमेश्वर कि बनाई हुईँ अदभुत अकल्पनीय सुंदरता कि काम देवी होँ माता! अबऐसी सुंदरता कि प्रसंशा नं करना तोँ नियति केँ विरुद्ध होगा!
बर्तन धूलगए थें औऱ मेनका उसकीबात सुनकर हल्की सि शर्मा गई औऱ उसकेगाल पकड़कर खींचती हुइ बोलीं:"
" लगता हैं आप् कुछ अधिक हि शरारती होँ गए हौ! आपकेलिए एक् खूबसूरत कन्या देखनी पड़ेगी!
इतना कहकर मेनका रसोई सें बाहर् कि तरफआई तौ अजय भि उसकाहाथ पकड़कर संग मे धीरे-धीरे चलनेलगा औऱ बोला:"
" मगर मुझे बिल्कुल आपके जैसीरूप सौंदर्य वाली कन्या हि चाहिए! बिलकुल आपके जैसी कामदेव कि रति!
मेनका उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल हौ गई औऱ आंखे चुराते हुए चलती हुइ रुक सि गई औऱ बोलि:" बस पुत्र बस, एक् माता कि सुंदरता कि ऐसी प्रसंशा करना पुत्र कों शोभा नहि देता!यह अनैतिक औऱ मर्यादा केँ खिलाफ हें!
अजय:" मेरेलिए तोँ आप् सुंदरता कि अद्वितीय मूर्ति हौ माता! कितना हि रोकूमगर जब आप् रंगीन वस्त्र धारण करके श्रंगार करती हौ तोँ मर्यादा कि लकीरें तारतार करने कों मन करता हैं!
इतना कहकरअजय नें आज पहलीबार हिम्मत करके उसकेगाल कों चूम लिया तौ मेनका कां समूचा वजूद कांपउठा औऱ अपने आप् मे सिमटती चली गई औऱ बोलि:"
" अपनेमन कों वश मे रखने कां प्रयत्न कीजिए नां! किसी नें देख लिया तौ कहीं मुंह दिखाने केँ काबिल नहीं रहूंगी मे!
पहले सें हि काम वासना सें विह्ल होँ रहेअजय पऱ मेनका कि किसी नें देख लिया वालीबात नें उसकीकाम वासना कों औऱ प्रचंड कर दिया क्योंकि वोँ समझ गय़ा कि अगर सुरक्षित रूप सें मिलन हौ तौ मेनका अधिक विरोध नहीं करेंगी औऱ अजय नें अपने दोनो हाथों कों उसकीकमर पऱ पूरी ताकत सें कसतेहुए उसकी गर्दन पर्र अपनीजीभ हल्की सि फेरते हुए धीरे-धीरे सें बुदबुदाया:"
" औऱ अगरकोई नं देखे तौ फिन क्याँ होगा !!
मेनका अजय कि इस हरकत सें उतावलापन उठी औऱ अजय सें अपनाहाथ छुड़ा कर तेजी सें अपने कमरे कि तरफ बढ़ने लगी तौ अजय नें फुर्ती सें उसे पीछे सें अपनी बांहों मे कस लिया औऱ उसकातना मजबूत लन्ड मेनका केँ चौड़े मजबूत पिछवाड़े केँ बीच मे घुस गय़ा तोँ मेनका केँ मुंह सें अहह निकल गई औऱ बोलि
" आह्ह्ह्ह्ह पुत्र छोड़ दीजिए मुझे!
मेनका केँ मुंह सें निकली कामुक अहह सें अजयसमझ गय़ा कि आज कि रात मेनका कों आपत्ति नहीं हें बस नखरेकर रही हैं तौ उसकेपेट पर्र एक् हाथ रखकरउसे जोर सें अपनीतरफ खींच लिया औऱ उसकी गर्दन चूमते हुए बोला:" बताए नाँ मेरी अद्भुत कामुक माताश्री कोई नां देखे तौ क्याँ होगी!
मेनका अब पूरीतरह सें सुलगउठी थि औऱ उसकी बांहों मे कसमसाते हुए सिसकी:"
" अह्ह्ह्ह पुत्र! ऐसीकोई स्थान नहीं जहांकोई न् देखे!
अजय नें अपनीजीभ सें उसकी गर्दन पऱ चाट लिया औऱ एक् हाथ कों उसकी कम्पन कररही छातियों पर्र रख दिया औऱ अपने लन्ड कां जोर उसकी गांड़ कि गोलाईयों पऱ देतेहुए कामुक अंदाज मे फुसफुसाया:"
" हमारे तहखाने मे कोई नहीं देखेगा! अब बताए नाँ क्याँ होगाअगर कोई नं देखे तौ !
इतना कहकर उसने मेनका कि छातियों कों हल्का सां मसल दिया औऱ मेनका एक् झटके केँ संग पलटी औऱ उसके होंठ चूमकर अपने कक्ष मे मे घुस गई जीभ चिढ़ा कर बोलीं:"
" मुझे नहींपता क्याँ होगाआज रात तहखाने मे!
इतना कहकर उसने दरवाजा बंदकर लिया औऱ अजय तड़पते जोर सें हुए बोला:"
" आजरात तहखाने मे अपनी माता कि अद्भुत रूप सौंदर्य कां पूर्ण नंग दीदार करूंगा, जी भरकर प्रेम करूंगा!
मेनका उसकीबात सुनकर लज्जा सें पानी पानी होँ गई औऱ कुछ नहीं बोलीं औऱ अजय बेचैनी सें उधरउधर घूमता रहा औऱ लगभगआधे घंटे केँ बाद मेनका बाहर् निकली तोँ उसकी आंखेफटी कि फटीरह गई क्योंकि लालरंग कि साड़ी मे लिपटी हुईँ किसी दुल्हन कि तरहलग रही थि औऱ अजय नें आगे बढ़कर उसे बिनाकुछ बोले अपनीगोद मे उठा लिया तोँ मेनका उसकी छाती मे मुक्के बरसाती हुईँ कसमसाई:"
" अह्ह्ह्ह क्याँ करते होँ पुत्र!नीचे उतारिए हमे!
अजय नें उसके जूसी होंठों क्याँ हल्का सां चुम्बन लिया औऱ उसकी आंखो मे देखते हुए बोला:" नीचे हि तोँ उतारूंगा पूरीरात आपकोमगर जमीन पऱ नहीं अपने मजबूत जिस्म केँ नीचे मेरीजान मेनका!
उसकीबात सुनकर मेनका लज्जा केँ मारे उसकी गर्दन मे अपनी दोनो बांहे डालकर उससे लिपट गई औऱ अजय नें जैसे हि तहखाने कां दरवाजा खोला तौ मेनका कि बुर केँ होंठ फड़फड़ा उठे औऱ कसकरअजय सें लिपट गई! अजय नें मेनका कों बेड केँ लगभग अपनीगोद सें उतार दिया तौ औऱ उसकी आंखो मे देखा तौ मेनका लज्जा सें लाल हौ गई औऱ अजय नें आगे बढ़कर उसके होंठो पऱ अपने होंठो कों रखा दिया औऱ दोनो मदहोश होकर एक् दूसरे केँ होंठो कों चूसने लगे!अजय कां एक् हाथ उसके कंधे पऱ आया औऱ जैसे हि मेनका कि साड़ी कि स्ट्रिप खुली तोँ मेनका कि साड़ी खुलती चली गई औऱ अब वोँ कांपती हुईँ ब्लाउस मे उससे कसकर लिपट गई औऱ अजय नें बेताबी दिखाते हुए उसकी उसकी साड़ी कों पूराखोल दिया तौ मेनका कि साड़ी उसके जिस्म सें पूरीतरह सें अलग हौ गई औऱ मेनका नें काम वासना सें पागल होते अपनीजीभ कों अजय केँ मुंह मे सरका दिया औऱ अजय मस्ती सें उसकीजीभ कों चूसने लगा औऱ दूसरे हाथ सें उसके ब्लाउस कों खोल दिया औऱ मेनका कि पीठ अन्दर ब्रा नाँ होने केँ कारण पूरी नंगी होतीचली गई! मेनका केँ मुंह सें मस्ती भरीअहह निकल पड़ी औऱ अजय नें जैसे हि उसकी नंगीकमर कों छुआ तोँ मेनका मछली कि तरह फुदकती हुइ उसकी बांहों मे पलट गई औऱ जैसे कमरे मे आगलग गई क्योंकि मेनका केँ पलटते हि उसकीगोल मटोल गद्देदार पपीते केँ आकार कि बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियां अजय केँ हाथ मे आँ गई औऱ दोनो कि आंखे एक् संग मस्ती सें बंद होँ गई औऱ तभी एक् एक् जोरदार आवाज़ सें दोनो कि आंखे खुली तोँ आंखेफटी कि फटीरह गई
" वाउअजय वाउ तौ यह हें आपका औऱ आपकी माता कां असली चरित्र!
सामने युवराज विक्रम सिंह कों देखकर दोनो माँ बेटे कि आंखे लज्जा सें झुक गई औऱ अजय नें साड़ी कों उठाकर मेनका केँ बदन पऱ ढक दिया औऱ दोनो एक् संग विक्रम केँ पैरो मे गिर पड़े औऱ बोले:"
" हमेमाफ कर दीजिए युवराज! अगर किसी कों यहबात पताचली तौ हम् जी नहीं पायेंगे!
युवराज बिनाकुछ बोले गुस्से सें वापिस जानेलगा तोँ अजय उसकेपेर पकड़कर बोला:"
" हमेमाफ कर दीजिए युवराज! सच मे हमने न् माफ़ करने वाला अपराध किया हें! मगर इसमें मात्र मेरी गलती हें मेरी माता निर्दोष हें!
युवराज गुस्से सें:" मैने आपको पूरे राज्य औऱ महल कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी दि औऱ आप् वोँ सभी भूलकर यहां अपनी माता केँ संग राते रंगीन कररहे हौ!
अजय कि आंखो सें आंसूछलक पड़े औऱ रोतेहुए बोला:" मुझसे अपराध हुआ हें युवराज! आप् चाहे तोँ सजा दीजिए मुझे स्वीकार होगी!
युवराज दोनो केँ आंसुओं कों देखकर हलका सां पिघला औऱ बोला:" आपकीइस लापरवाही कि वजह सें राजमाता नहींमिल रही हैं! शायद उन्हें कोई उसके कक्ष सें उठाके लेँ गय़ा हें!
अजय एक् झटके केँ संग खड़ाहुआ औऱ बोला:"ऐसा न् कहे युवराज! जिसने भि ऐसी हरकतकरी हैं उसकी गर्दन उसकेसिर सें उड़ा दूंगा मे!
युवराज:" नहींअजय! मुझेअब तुम्हारी कोई जरूरत नहि! मेरी लड़ाई मुझे स्वयं लड़नी पड़ेगी!
मेनका पहलीबार हिम्मत करके बोलि:" युवराज आप् हमे हमारे कर्मो कि जौ चाहेसजा देनामगर अजय कों उसका कर्तव्य निभाने सें मत रोकिए! इतना कहकर मेनका नें उसके सामने हाथ जोड़दिए औऱ मेनका कों युवराज नें ध्यान सें देखा तौ विषम परिस्थितियों मे भि मन हि मन उसकेसजे धजेरूप सौंदर्य कि प्रशंसा किए बिना नं रहसका औऱ बोला:"
" ठीक हें आपके परिवार केँ बलिदान औऱ त्याग कों देखते हुएअजय कों यह मौका देताहू मगरयह मत समझना कि मैने आप् दोनो कों माफकर दिया हैं!
इतना कहकर युवराज बाहर् निकला तौ अजय भि उसकेसंग संग निकल गय़ा औऱ दोनो कि आंखो सें अब गुस्से कि चिंगारिया निकलरही थि!!
bhay menaka kya ab vikram k niche aayegi. or sai bat yahi h kee jitni mein female character h vo sab vikram k niche rahe. or shehzadi premika or sultanpur or udaygarh kee maharani or vikram maharaj bane.
देखोआगे जाकरकथा क्याँ रंग दिखाती हें, एक् बहोत बड़े बदलाव केँ लिए रेडीरहो
मेनका नें अजय कों हि पति मानकर उसकी सुहागन बनी औऱ तलवार देने कां रस्म पूरी कि
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
युवराज विक्रम अचानक सें अजय केँ तहखाने मे केसे प्रकट होँ गय़ा ? जिस स्थान कों थोड़ी देर पहलेअजय औऱ मेनका नें सबसे ज़्यादा सुरक्षित स्थान समझावही एक् पब्लिक प्लेस मे ट्रांसफर होँ गय़ा।
येदो तरफा नुकसान हुआअजय साहब कां। मेनका केँ संग रासलीला खटाई मे पड़ा हि संग मे विक्रम साहब केँ नजरों सें भि गिरा।
शायदये विक्रम केँ लिए भि इन्सेस्ट कां दरवाजा खुलने कां एक् संकेत होँ सकता हैं। खैर देखते हैं आगे चलकर विक्रम कां रवैया अपने फैमिली फीमेल मेम्बर केँ ऊपर कैसा रहता हैं याँ फिन सलमा कि मम्मी रजिया पर्र उसकी दृष्टि कैसी होती हैं !
बेहतरीन एपसोड यूनिक स्टार भइया।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग एपसोड।
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Next part mein bada twist
किस्सा धीरे-धीरे धीरे-धीरे हि आगे बढ़ेगी मगर ख़त्म जरूर होगी! उम्मीद हें अंत आप् सबको पसन्द आयेगा
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