शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
सीमा कों अब राधिका एक् आंख भि नहीं सुहारही थि औऱ वोँ अब प्रतीक्षा कररही थि कि कबउसे रंगे हाथों पकड़ा जासके क्योंकि वोँ उसेकोई मौका नहि देना चाहती थीं!
सीमा कां मन सलमा सें भि खिन हौ गय़ा थां औऱ उसेअब सलमा सें पहले जैसामोह नहींरह गय़ा थां क्योंकि वोँ सलमा कां दूसरा पहलू भि देख चुकी थि! सीमा कों अब आबिद कि बातयाद आँ रहीथीं कि जब्बार केँ घऱ केँ घऱ केँ पीछे सारे हथियार छुपाए गए हें ताकि राज्य केँ सैनिकों केँ युद्ध केँ वक्त जरूरत पड़ने पऱ हथियार हि नहीं मिले औऱ जब्बार धीरे-धीरे बगावत कि स्थिति मे भि राज्य पर्र कब्जा कर सकता थां!!
रात केँ लगभग 11 बजगए थें तोँ उसे बाहर् कदमों कि हल्की सि आहत सुनाई पड़ी तोँ उसकेकान सतर्क हौ गए औऱ धीरे-धीरे सें पर्दा डालकर देखा तोँ पाया कि राधिका दबेपैर घऱ सें निकलरही थि! सीमा भि आज सच्चाई देख्ना चाहती थीं इसलिये वोँ भि उसके पीछे पीछे हि निकल पड़ी!घऱ सें बाहर् निकलते हि एक् दीवार कि ओट मे राधिका नें अपने मुंह कों ढक लिया ताकिकोई उसे पहचान न् सके औऱ वोँ उत्तर दिशा मे आगेबढ़ गई तौ अंधेरे कां फायदा उठाते हुए सीमा भि उसके पीछेचल पड़ी! राधिका चोर नजरो सें इधरउधर देखती हुइ दांईतरफ मुड़ गई औऱ थोड़ी देरबाद हि वोँ जब्बार केँ घऱ केँ सामने खड़ी हुइ थि! सीमा कां शकअब यकीन मे बदल गय़ा थां कि राधिका जब्बार केँ जाल मे फंसी हुईँ हैं! राधिका नें अपनीजेब सें एक् कार्ड निकाला औऱ राधिका नें धीरे-धीरे सें दरवाजा कों खोला औऱ अंदर प्रवेश कर गई औऱ सीमा नें देखा कि जब्बार केँ घऱ केँ बाहर् मौजूद सैनिकों नें राधिका कों रोका नहि क्योंकि वोँ उसे पहले सें जानते थें औऱ कार्ड उसके अंदर जाने केँ लिए प्रमाण थां!
सीमा नें इधरउधर ध्यान सें देखा औऱ उसेकोई उम्मीद नजर नहींआई तोँ वोँ वापिस अपनेघऱ कि तरफलौट आई! सीमासोच रही थि कि वोँ सलमा कों बताए कि जब्बार नें केसे असली हथियारों कों छुपा लिया हैं मगर उसकादिल नहीं माना औऱ वोँ पलंग पर्र पड़े पड़े नींद केँ आगोश मे चली गई!!!
अगलेदिन सीमा पूरीतरह सें रेडी थि! रात कों खानां बनाने केँ बाद उसने सीमा केँ खाने मे नींद कि गोलियां मिला दि औऱ खानां खाने केँ थोड़ी देरबाद हि राधिका गहरी नींद मे चली गई तोँ सीमा नें उसके कमरे सें वोँ कार्ड निकाला जिसके बल पऱ राधिका जब्बार केँ घऱ मे घुस गई थि! रात कों ठीक 11 बजे सीमाघऱ सें बाहर् निकली! उसने राधिका केँ कपड़े पहलेहुए थें औऱ मुंह कों पूरीतरह सें ढकाहुआ थां! जब्बार केँ घऱ केँ सामने पहुंच गई! सीमा कां दिल ज़ोर ज़ोर सें धड़करहा थां औऱ उसके पूरे जिस्म मे डर केँ मारे कंपकपी दौड़रही थि!
सीमा नें दरवाजे पऱ दस्तक दि तोँ पहरेदार बोला:*
" सुबूत दिखाए अपना!!
सीमा नें कार्ड आगे किया औऱ दरवाजा खुल गय़ा तौ सीमा जल्द सें अन्दर घुस गई औऱ उसने देखा कि अंदर लगभग 20 सैनिक पहरादे रहे थें! सीमा कों अबलगरहा थां कि यहांआकर उसने अपने आपको खतरे मे डाल दिया हैं तोँ उसने धीरे-धीरे सें अपनेसूट मे छुपेहुए अपने खंजर कों टटोला औऱ थोडा चैन कि सांसली औऱ आगेबढ़ गई! जब्बार कां घऱ बहुत भव्यबना हुआ थां औऱ उसके अंदर बहुत अधिक स्थान भि थि!
सीमा चलती हुईँ अंदर पहुंच गई औऱ सीढियां चढ़ती हुइ पहली मंजिल पऱ आँ गई औऱ देखा कि यहां भि बहुत सारे सैनिक पहरेदे रहे थें औऱ सीमा केँ सामने सबसे बड़ी चुनौती थि कि अब कहां जाए क्योंकि वोँ जब्बार केँ सामने नहीं पड़ना चाहती थीं! हथियारों तक केसे पहुँचा जाएयह सोचती हुईँ वोँ उत्तर दिशा मे बढ़ी औऱ थोडा चलने केँ बाद गैलरी मे मूड गई! सामने हि दो आलीशान कक्षबने हुए थें तौ सीमासमझ गई कि यह जरूर जब्बार कां हि कक्ष हें औऱ सीमा कां दिल धड़कउठा! सीमा नें इधरउधर देखा औऱ पाया कि सैनिक अपनी बातो मे मशगूल थें तोँ मौके कां फायदा उठाते हुए सामने कि तरफबढ़ गई जिधर थोडा अंधेरा थां! सीमा हिम्मत करकेउस दिशा मे आगेबढ़ गई तौ उसे नीचे कि तरफ जाती हुईँ सीढियां नजरआई जौ किसी तहखाने मे जाने कां मार्ग थि!
सीमा डरती हुइ नीचे उतरने लगी औऱ जल्द हि वोँ तहखाने मे पहुंच गई तोँ देखा कि सामने कि चार सैनिक पहरादे रहे थें औऱ बहुत मुस्तैद नजर आँ रहे थें तौ सीमा नें प्रतीक्षा करने कां फैसला किया! लगभगदो बजे केँ आसपास उसने देखा कि सैनिक सोगए थें तौ वोँ धीरे-धीरे सें आगेबढ़ गई औऱ एक् चौड़े रास्ते सें होतेहुए बांईतरफ मुड़ गई औऱ सामने हि एक् बेहद बड़ारूम बनाहुआ थां तोँ सीमा उसमेघुस गई औऱ उसकी आंखे खुली कि खुलीरह गई क्योंकि वोँ पूरारूम भयंकर हथियारों सें भराहुआ थां! सीमा कों यकीन होँ गय़ा कि आबिदसच बोलरहा थां औऱ सभी हथियार तोँ यहां छुपे हें तोँ फिन शस्त्रागार तोँ खाली होना चाहिए!
सीमा कों आबिद कि बातयाद आँ रहीथीं कि वोँ जब्बार सें उसकेघऱ सें पीछे मिलता थां! मतलब जरूरकुछ न् कुछबात हैं जोँ वोँ समझ नहि पारही हैं! सीमा नें उधरइधर देखा तौ उसे एक् खिड़की नजरआई औऱ वोँ दीवार केँ सहारे उस पर्र चढ़ गई तौ देखा कि यह जब्बार केँ घऱ कां आखिरी हिस्सा थां औऱ बाहर् मार्ग नजर आँ रहीथीं! मेनका कों आबिद कि बात कां मतलबसमझ मे आँ गय़ा औऱ उसनेअब वापिस जाने कां फैसला किया क्योंकि सुभह केँ चार बजने वाले थें! सीमा मौका देखती हुइ बचती बचाती हुइ जैसे तैसे मुख्य दरवाजे तक पहुंची औऱ देखा कि पहरेदार गहरी नींद मे हें तौ बाहर् निकल गई औऱ अपनेघऱ पहुंच गई!!
अगलेदिन सुभह राजदरबार लगाहुआ थां औऱ आबिद कि पत्नि रजिया सें इंसाफ कि गुहार लगारही थि
" राजमाता मेरे शौहर कों घऱ सें गायबहुए आजचार दिन हौ गई हैं औऱ पता भि नहीं हें वोँ जिंदे भि हैं याँ नहि! मेरे शौहर कों ढूंढ दीजिए आप्!!
रजिया सभीकुछ जानती थि मगर दिखावे केँ लिए बोलि:"
" जब्बार हमे किसी भि कीमत पऱ आबिद चाहिए! सारा राज्य छान मारो! चाहेकुछ भि करोमगर वोँ हमे चाहिए!
जब्बार आबिद केँ गायब होने सें स्वयं हि परेशान थां क्योंकि वोँ उसका विश्वास पात्र व्यक्ति थां! पहले भि कईबार वोँ गायब हौ जाता औऱ दूसरे राज्यों मे मुजरा देखने जाता थां जिस कारण जब्बार कों चिंता नहि थि मगरआज उसेलग रहा थां कि कुछ तोँ गलतहुआ हैं!!
जब्बार:" आप् निश्चित रहे राजमाता! कल तक हम् आबिद कों ढूंढकर आपके सामने लें आयेंगे!
इतना कहकर जब्बार नें सलमा कि तरफ देखा तोँ सलमामंद मंद मुस्कुरा उठी औऱ जब्बार खुशी केँ मारेझूम उठा!
कुछ औऱ आवश्यक निर्णय लेने केँ बादसभा भंग हुई औऱ रजिया चली गई तोँ सलमा भि पीछे पीछे जानेलगी तोँ जब्बार उसके लगभग पहुंच गय़ा औऱ बोला
" केसे होँ आप् शहजादी ?
सलमा उसकीतरफ देखकर हल्की सि मुस्कान केँ संग बोलि:" हम् ठीक हैं जब्बार! आप् केसे होँ?
जब्बार:" बस सांसे चलरही हैं किसी कों यादकर करके! औऱ एक् वोँ इतने मशरूफ हैं कि हमारी परवाह नहि करते!
सलमा:"ऐसा नहि बोलो जब्बार! हम् आपकी फिक्र करते हें!
जब्बार:" फिन हमसे मिलते क्यूं नहि होँ? आजतीन दिन होँ गई हैं जब आप् हमसे अंतिम बार मिली थि!
सलमा:" हम् जानते हें जब्बार! कल संध्या कों हम् शाही बगीचे मे आपका प्रतीक्षा करेंगे!
इतना कहकर सलमा पलटी औऱ चल पड़ी! जब्बार कि खुशी कां कोई ठिकाना नहीं थां क्योंकि वोँ जानता थां कि शाही बगीचे मे राजपरिवार केँ अलावा कोई नहि जाता औऱ उसकेपास अच्छा मौका होगा सलमा केँ संग मस्ती करने केँ लिए!
सलमा नें एक् दासी कों भेजकर सीमा कों महल बुलवाया क्योंकि सीमाकई दिनों सें महल नहीं आँ रहीथीं! सीमा कों देखते हि शहजादी कों एहसास हौ गय़ा कि जरूरकुछ नं कुछबात हैं जोँ सीमा कां चेहरा बदलाहुआ लगरहा थां!
सलमा:"चार दिन सें महल नहींआई होँ सीमा! हमारे संग परछाई कि तरह रहने वाली सीमाहमे केसेभूल गई ?
सीमा उससे नजरे चुराती हुईँ बोलि:" ऐसाकुछ भि नहि हैं शहजादी! बस तबियत ठीक नहि थि तोँ आराम कियाघऱ पर्र!
सलमा:" देखो सीमा हमसेझूठ तौ नहीं छुपा सकती!ऐसी क्याँ बात हौ गई जौ सीमा हमसेझूठ बोलने लगी हैं!!
सीमा केँ चेहरे कां रंगउड़ गय़ा औऱ बोलि:" ऐसाकुछ भि तौ नहि हैं शहजादी!
सलमा नें उसे ज़्यादा परेशान करना उचित नहि समझा! वोँ जानती थीं कि सीमाझूठ बोलरही हैं मगर वोँ इतना भि जानती थि कि सीमा उसकी सच्ची औऱ वफादार सहेली हें औऱ उसकाकभी गलत नहींकर सकती तोँ बोलि:"
" हम् बड़े गहरे संकट मे हैं सीमा! जब्बार नें पूरीतरह सें राज्य पर्र कब्जा कर लिया हैं! बस दिखावे केँ लिए हि हम् शहजादी हें !!
सीमा:" आप् क्यूं चिंता करती हैं शहजादी! युवराज विक्रम तोँ आपकेसंग हैं हि औऱ अब तौ उन्हे तलवार भि मिल गई हैं!
सलमा:"बात वोँ नहीं हैं सीमा! युवराज सहायता करेंगे अच्छी बात हैं मगर आप् औऱ मे दोनो कां कर्तव्य हैं कि युद्ध सें पहले दुश्मन कि योजना कां पता करकेउसे कमजोर कियाजाए!! अच्छा सुन हम् आजरात उदयगढ़ जाएंगे! तुम् भि हमारे संग चलना!
सीमा:"मगर इतना सख्त पहरा होने केँ बाद केसेजा सकती हैं आप् ?
सलमा:" वोँ सभीकुछ तुम् हम् पऱ छोड़दो सीमा!आज हम् तुम्हे महल कां एक् ऐसा रहस्य बताएंगे तोँ मात्र राज परिवार कों उसी मालूम होता हें तब जाकर आपको एहसास होगा कि हम् आपको अपनी बेहन मानते हें सीमा!!
सीमा हैरानी सें सलमा कि तरफ देखने लगी कि क्योंकि उसेअब सलमा अपनी सि लगरही थीं!यही तोँ वोँ सलमा थि जिसे वोँ पसन्द करती थि! सीमा धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" ठीक हें अगर आप् मुझ पर्र इतना यकीन करती हें तोँ मे आपकेसंग जरूर चलूंगी!
सलमा:" यकीन कि क्याँ बात सीमा! एक् तुम् हि तोँ हौ जिस पर्र मे भरोसा करतीहू मगर तौ यहां तौ सारेलोग गद्दार भरेहुए हें राज्य मे!
सीमा:"किस वक्त जानां होगाहमे ? आप् वक़्त बता दीजिए मे आँ जाऊंगी!
सलमा:" लगभगनौ बजे हम् निकल जायेंगे! मे यहीं अपने कक्ष मे आपका प्रतीक्षा करूंगी!
सीमा उसकेबाद थोड़ी देर औऱ रुकने केँ बाद अपनेघऱ कि तरफलौट आई तौ देखा कि राधिका घऱ पऱ हि ठीकथीं तौ सीमा बोलि:"
" अरेआज अभि तक घऱ पऱ होँ राधिका ?
राधिका:" हान तबियत ठीक नहि लगरही थि! चक्कर सें आँ रहे थें तोँ बस आरामकर रही थि! आप् बताएमहल सें आँ रही होँ क्याँ ? कैसी हें शहजादी ?
सीमा:" शहजादी कि तोँ क्याँ हि बातकरे ! बड़े पैसे वालेलोग हें उनकी तोँ हरबात अलग हि होती हें राधिका!!
राधिका:" आप् परेशान मत होइए!कुछ दिन कि औऱ बात हें फिन देख्ना आप् हमारे पास भि इतना रुपया होगा कि आपकी जीवन सलमा सें बेहतर होगी दिदी!!
सीमा हैरानी सें उसकीतरफ देखती हुईँ बोलीं:"
" अच्छा तुम्हारे हाथ क्याँ कोई खजाना लगने वाला हें ? जराहमे भि तोँ बताओ!
राधिका:" बसकुछ दिन औऱ सब्रकरो दिदी! फिन आपकोसभी कुछपता चल हि जायेगा!
सीमाकुछ नहि बोलि औऱ अपने कमरे मे चली गई! रात कों लगभग साढ़े आठबजे केँ आसपास सीमा राधिका केँ बोलकर निकल गई कि वोँ महलजा रही हैं औऱ रात कों वहीं रुकेगी! राधिका केँ लिए अच्छा थां क्योंकि उसेरात मे जब्बार केँ पास जाने सें कोई नहींरोक सकता थां!
सीमा औऱ सलमा दोनो लगभगनौ बजेमहल मे बनी हुइ सुरंगे केँ पास खड़े थें औऱ जैसे हि सलमा नें दरवाजा खोला तोँ दोनो उसमेघुस गए औऱ सीमामहल मे सुरंग देखकर हैरानी कां नाटक करनेलगी तौ सलाम नें उसेसभी कुछ बताया औऱ आगे चलकर दोनो कों आबिद कि लाश मिली जौ सड़ना शुरुआत होँ गई थि तोँ सीमा केँ होंठो पऱ मुस्कान आँ गई औऱ बोलीं:"
" यह तौ यहांमरा पड़ाहुआ हैं औऱ जब्बार इसे राज्य मे ढूंढरहा होगा बेचारा!
सलमा:"इसे सलीम नें मार डाला! हम् बड़े परेशान हें उसकी हरकतों सें सीमा!
सीमा अंदर हि अंदरखुश हुई कि कम सें कम आबिद कि मौत कां शक उसकेऊपर तोँ नहींआया! दोनो सुरंग सें निकलकर उदयपुर पहुंच गए औऱ वैद्य जी केँ यहां जाकर सलमा अपने अब्बू सें मिली औऱ विक्रम कों मेसेज भिजवा दिया तौ विक्रम दौड़ा चलाआया औऱ सलाम उससे मिलकर बड़ीखुश हुईँ औऱ फिन उसने विक्रम कों सारीबात बताई कि किसतरह सें जब्बार नें सारे हथियार बदलकर लकड़ी सें बनी हुइ तलवारे रख दि हें ताकि वोँ धीरे-धीरे युद्ध जीतसके!
विक्रम:" यह तोँ सभी मे बेहद बड़ी समस्या हैं! असली हथियारों कां पताकरो औऱ युद्ध सें पहले उन्हे आपस मे बदलना हि होगा!
सीमाजब जानती थि तौ तपाक सें बोलीं:"
" असली हथियार जब्बार नें अपनेघऱ केँ अंदर छुपाए हुए हें ऐसीहमे जानकारी मिली हें!
सलमा औऱ विक्रम दोनो नें सीमा कि तरफ देखा औऱ सलमा बोलि:" यह तोँ बड़ेकाम कि खबर हैं सीमा!अब प्रश्न यह हैं कि केसे हथियार बदलने हैं!
सीमा:" आप् निश्चित रहे शहजादी! हम् स्वयं इस कार्य कों अंजाम देंगे!
विक्रम नें सीमा कां कंधा थपथपाया औऱ बोला:"
" जब तक तुम् जैसे वफादार लोग सुल्तानपुर मे हें जब्बार कभी कामयाब नहीं हौ सकता!
उसकेबाद सलमा अपने अब्बू सें बात करतीरही औऱ सीमा बोलि:" युवराज हमे थोड़ी भूखलगी हैं कुछ खाने कां इंतजाम होँ जायेगा क्याँ?
विक्रम बाहर् जानेलगा तोँ सीमा बोलीं:" हम् भि आपकेसंग हि चलते हें ! थोडा महल भि देख आयेंगे!
इतना कहकर सीमा भि उसकेसंग हि चल पड़ी औऱ जैसे हि दोनो वैद्य जी केँ घऱ मे बाहरी हिस्से मे आए तोँ सीमा नें इधरउधर देखा औऱ बोलि:"
" युवराज हमे आपको बेहद जरूरी सूचना देनी थि! सलमा पऱ ज़्यादा भरोसा मत कीजिए क्योंकि वोँ औऱ उसकी माता आपको जब्बार केँ खिलाफ प्रयोग करके अपना राज्य वापिस पाना चाहती हैं औऱ आजकल सलमा कि जब्बार सें कुछ अधिक हि नजदीकियां बढ़रही हैं!!
विक्रम नें जैसे हि यहसभी सुना तोँ उसे मानो यकीन सां नहींहुआ औऱ फिन बोला:"
" सलमा बेचारी मजबूर हें! आखिर एक् महिला करे तोँ क्याँ करे!मगर हमनेउसे वादा किया हैं कि जब्बार केँ चंगुल सें उसके राज्य कों हरहाल मे आजाद कराकर हि दम लेंगे! फिन जब्बार सें हमे अपने हि तौ बदले पूरे करने हें !
सीमा:" मानना पड़ेगा युवराज आपके प्यार कों! आप् सलमा कों एक् मजबूर नारी बताकर उसकी धोखेबाजी कों छुपारहे होँ!!
विक्रम:" प्रेम करना औऱ निभाना दोनो एक् हि सिक्के केँ अलगअलग पहलू हैं! बस इंसान कों हालात कों ठीक सें समझना आनां चाहिए!
सीमाआगे कुछ नहि बोलीं औऱ थोड़ी देरबाद दोनो वापिस वैद्य जी केँ घऱ आँ गए औऱ विक्रम नें कुछ फलों कां इंतजाम किया थां तौ सबने थोड़े थोड़े फलखाए औऱ उसकेबाद वापस सलमा सीमा कों संगलिए अपने राज्य लौट पड़ी!
जैसे हि दोनो सुरंग मे घुसे तौ सलमा बोलि:"
" क्याँ क्याँ जानकारियां दि हैं आपके युवराज कों वैद्य जी केँ घऱ केँ बाहर् जाकर?
सीमा केँ मुंह कां रंगउतर गय़ा औऱ नजरे चुराती हुईँ बोलि:"
" कु.कु.कुछ खास नहि! बसवही हथियारों केँ बारे मे बताया!
सलमा:" सीमा हम् इतने भि बेवकूफ नहि हैं जितना तुम् समझरही हौ! तुम्हारी लड़खड़ाती हुईँ आवाज़ सभी बयानकर रही हैं!!
सीमाकुछ नहीं बोलि औऱ मुंह नीचे करके खड़ी होँ गई! सलमा नें उसके कंधे पर्र हाथरखा औऱ बोलीं:"
" हमने एक् एक् शब्दठीक सें सुना हैं! हमे तुमसे यह उम्मीद कभी नहीं थि! विक्रम केँ रूप मे जोँ एक् उम्मीद हमे मिली थि वोँ भि आपने समाप्त कर दि हैं! एक् बार हमारी स्थान स्वयं कों रखकर देखिए तोँ आपको हमारी मुश्किलों कां एहसास होगा!
हमारा राज्य पूरीतरह सें जब्बार केँ कब्जे मे हें औऱ बचाएगा कौन! मेरे भइया कों तौ मदिरा औऱ अपनेभोग विलास सें वक्त नहीं! लड़कियों सें अधिक कमजोर हौ गय़ा हैं वोँ! मेरे अब्बा पिछले पंद्रह साल सें पिंडाला कि कैद मे बंदरहे औऱ फिन मेरी अम्मी कि अंतिम उम्मीद मे हि हु!
मे भि उनकी उम्मीदों पर्र पानीफिन कर उनसे आंखे चुरालूं क्याँ !! उनसेकह दि उनके बेटे कि तरह उनकी बेटी भि नकारा हें!! मे चाहूं तोँ जब्बार सें विवाह करके धीरे-धीरे जी सकतीहू मगर अपने दुश्मन केँ खाट कां खिलौना बनना मुझेकभी कुबूल नहीं हें! बेशक मैने जब्बार सें थोड़ी नजदीकियां बढ़ाई हें तौ तोँ मात्र राज्य केँ हालात समझने औऱ जब्बार कों गुमराह करने केँ लिएमगर इसकायह मतलब नहि हें कि मे अपनी मर्यादा कों भूल गई हु याँ मे विक्रम सें प्रेम नहीं करती! मेरी अंतिम सांस तक मे विक्रम सें प्रेम करती रहूंगी!! मगरआज जौ हुआ हें उसकेबाद अब विक्रम मुझेकभी माफ नहि करेंगे!!
इतना कहकर सलमा दुःखी हौ गई औऱ सीमा केँ मुंह सें एक् शब्द नहीं निकलरहा थां क्योंकि वोँ जानती थि कि उसने जाने अनजाने मे हि सहीमगर बहोत अधिक बड़ी गलती हें जिसका खामियाजा अब सलमा कों भुगतना हि होगा!
सीमा नें सलमा केँ सामने दोनोहाथ जोड़दिए औऱ बोलीं:"
" माफी केँ लायक तोँ नहींहु मगर मुझेमाफ कर दीजिए आप्! मैंने जिस गलतफहमी कों पैदा किया हैं अपनीजान देकर भि उसेदूर करूंगी!
इतना कहकर सीमा उसके पैरो मे गिर पड़ी तोँ सलमा नें उसे उठाकर गले सें लगाया औऱ बोलीं:"
" गलती इंसान सें हि होती हें! मुझे तुमसे कोई शिकायत नहि हैं औऱ सभीकुछ भूलकर हमे जब्बार केँ खिलाफ योजना बनानी चाहिए ताकि हम् मिलकर दुश्मन कां सामना करसके!
सीमा नें उसकेबाद सलमा कों सभीकुछ बताया केसे उसने आबिद कों मारा औऱ उसे जब्बार केँ घऱ मे हथियारों कां पताचला औऱ वोँ जब्बार केँ घऱ पहुंची औऱ उसकी बेहन राधिका जब्बार सें मिली हुई हें औऱ उसके इशारों पऱ नाचरही हैं तौ सलमा बोलीं:
" हमे राधिका सें ऐसी उम्मीद नहीं थि मगर सच्चाई कों हमे स्वीकर करना हि पड़ेगा! देशद्रोह किसी भि हालत मे माफ नहीं होता सीमा!
सीमा कि आंखेलाल सुर्ख हौ उठी औऱ गुस्से सें बोलि:
" गद्दार कि सजा मे आपसे बेहतर जानती हु शहजादी! मगर मे सही मौके कां प्रतीक्षा कररही हूं ताकि एक् हि झटके मे सारे दुश्मन समाप्त किएजा सके एक् संग!!
सलमाकुछ नहीं बोलीं औऱ उसकेबाद दोनो सावधानी सें
सुरंग सें बाहर् निकलकर महल मे आँ गए औऱ सलमा धीरे-धीरे सो गई औऱ सीमा भि आजमहल मे सो गई!
वहीं दूसरी तरफ सलमा केँ जाने केँ बादरात केँ लगभग 11 बजे विक्रम मेनका केँ कक्ष केँ पास पहुँचा औऱ दरवाजे कों धक्का दिया तौ वोँ खुल गय़ा औऱ विक्रम खुशी खुशी
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अंदरघुस गय़ा तोँ देखा कि मेनका एक् गुलाबी रंग कां शानदार रात्रि वस्त्र पहनेहुए उसी कां प्रतीक्षा कररही थि औऱ बेहद आकर्षक लगरही थीं! विक्रम कों देखते हि उसके होंठो पर्र मुस्कान आँ गई!!
विक्रम आगे बढ़ा तोँ मेनका अदा केँ संगबेड पऱ चढ़ गई तौ विक्रम नें बिनादेर उसे दबोच लिया औऱ देखते हि देखते दोनो केँ प्यासे होंठ एक् दूसरे सें चिपकगए औऱ विक्रम नें बिनादेर किए मेनका केँ वस्त्र मे हाथ घुसाकर उसकी बुर कों अपनी मुट्ठी मे भर लिया औऱ बोला:"
" आह्ह्ह्ह्ह्ह मेनका !!! फिन सें इतनीगरम केसे हौ हुई!!
जैसे हि विक्रम केँ होठअलग हुए तोँ मेनका नें बेशर्म होकर उसके लन्ड कों पकड़कर औऱ बोलीं:"
" आआह्ह मेरेवीर पुत्र!! ठंडीकर दीजिए नाँ इसेमार मारकर!!
विक्रम नें एक् झटके केँ संग मेनका केँ वस्त्र पकड़े औऱ सीधेदो टुकड़े करतेहुए मेनका कों मादरजात नंगीकर दिया तोँ मेनका सिसकउठी
" अअह्ह्ह्ह्ह महाराज!! बड़ेजोश मे लगते हौ आज!
विक्रम स्वयं भि नंगा होँ गय़ा औऱ सीधे बिनादेर किए मेनका केँ ऊपरचढ़ गय़ा औऱ लन्ड अपने आप् बुर सें चिपक गय़ा औऱ जैसे हि मेनका नें अपनी टांगे खोली तौ विक्रम नें उसकी एक् मम्मों कों मुंह मे भरतेहुए जोरदार धक्का लगाया औऱ एक् हि धक्के मे लन्ड जड़ तक घुस गय़ा औऱ मेनका दर्द औऱ मस्ती सें कराहउठी
" आह्ह्ह्ह्ह पुत्र!! शीiiiieeee क्या बात है मर गईयूईईईईई!!
विक्रम नें बिनादेर किए उसकी बुर मे ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरुकर दिए तोँ मेनका कां बदन उछलने लगा औऱ उसकाहाथ मस्ती सें खुल गय़ा
" अह्ह्ह्ह्ह पुत्र!!! उफ्फमर जायेंगे हम् !!
इतना कहकर मेनका नें उसकाहाथ अपनी दुसरी मम्मों पऱ रख दिया विक्रम नें उसकी दूसरी मम्मों कों हाथ मे भरा औऱ जोर सें मसलते हुए बोला
" अअह्ह्ह्ह माता!! आपकीयह बुर हमे बहोत पसन्द आई!!
मेनका भि मस्ती सें गांड़ उठाकर लन्ड लेनेलगी तोँ विक्रम बेकाबू हौ गय़ा औऱ मेनका कि बुर मे अपने लन्ड सें धक्कों कि बरसात सि करनेलगा! मेनका उसके नीचे पड़ी हुई सिसकरही थि मचलरही थि औऱ हर धक्के पऱ उसकी गांड़ एक् एक् फूट सें ज़्यादा उछलरही थि!!
दोनो कि गति बढ़ती हि चली गई औऱ अंत मे विक्रम नें एक् बारफिन सें उसकी बुर मे अपने वीर्य कि जोरदार बौछार कर डाली औऱ मेनका भि अपनी झड़ती हुइ बुर कों उसके लन्ड पर्र कसकर उससेजोर सें लिपटकर!
पूरीरात विक्रम नें मेनका कों तीनबार औऱ चोदा औऱ मेनका भि मस्ती सें चुदाती रही!!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
सलमा बेवकूफी कररही हैं। जब्बार औऱ पिंडालों कां सामना वो अकेले नहींकर सकती। अगर वो जब्बार कों डबल क्रास करना हि चाहती हैं तौ उसे विक्रम कों विश्वास मे लेकर करना चाहिए।
उसेये भि समझना चाहिए कि उसके पिता कों जब्बार औऱ पिंडारा केँ कैद सें विक्रम नें हि छुड़ाया थां। पन्द्रह साल तक नं हि सलमाकुछ करसकी थि औऱ न् हि उसकी सेना।
उसे अपनी बुद्धिमत्ता कां ज़रूर प्रयोग करना चाहिए मगरसही मौके पर्र, सही लोगों पर्र।
सीमादेश कि वफादार सेविका हैं। वो बुद्धिमान केँ संगसंग हिम्मत वाली भि हैं। शेर केँ पिंजरे मे जाकर सकुशल वापस आँ जानां कोई मजाक नहीं हैं। जब्बार केँ आवास जाकर हथियारों कां पता लगाना बहोत मुश्किल काम थां खासकर एक् सामान्य सेविका केँ लिए।
मुझे लगता हैं उसकी बेहन राधिका लालच कि वजह सें भटक गई हैं। अच्छा होता राधिका कों सही रास्ते पर्र लाया जाता।
इधर विक्रम औऱ मेनका कां रास - रंग, रास - लीला पुरे उफान पर्र हैं। ये होना हि थां, जब एक् स्त्री पन्द्रह साल कि प्यासी होँ औऱ एक् मर्द पहलीबार गरम गोश्त कां सेवनकर रहा हौ।
मदर - सन इन्सेस्ट पऱ आप् कि लेखनी इरोटिक औऱ हाॅट नं हौ ये होँ हि नहीं सकता।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग एंड हाॅट एपसोड यूनिक स्टार भइया।
बहोत हि कामुक गरमागरम एपसोड हैं धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगेबढ़ रहे हें मेनका अभि तक शर्मा रही हें
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
संध्या केँ वक्त जब्बार शाहीमहल मे घुसआया औऱ बगीचे जाने वाले रास्ते पऱ सलमा कि इंतज़ार कररहा थां क्योंकि उसे बगीचे मे जाने कि इजाजत नहि थि! धीरे-धीरे धीरे-धीरे अंधेरा होनेलगा औऱ सूर्य पूरीतरह सें अस्त होँ गय़ा तौ सलमामहल सें अकेली निकली औऱ बगीचे जाने वाले रास्ते पऱ चल पड़ी!!
जैसे हि रास्ते मे पहुंची तोँ उसे जब्बार दिखाई दिया औऱ सलमा कों देखते हि उसके होंठ पऱ मुस्कान आँ गई क्योंकि उसे यकीन नहीं थां सलमा जरूर आएगी हि!!
मगर सलमा केँ आने सें उसे यकीन हौ गय़ा थां कि सलमाउसे सच मे मनपसंद करनेलगी हें तौ जैसे हि दोनो कि नजरे मिली तोँ दोनो केँ होंठ मुस्कुरा उठे औऱ जब्बार उसके लगभगआया औऱ बोला:"
" मानना पड़ेगा आप् वादे कि पक्की होँ शहजादी!
सलमा जब्बार केँ संग शाही बगीचे कि तरफ चलती हुई बोलि:" सलमा अपने वादेहर हाल मे पूरा करती हैं जब्बार! मे इतनी भि खराब नहींहु जितना आप् सोचते हौ!
जब्बार:" तौबा तौबा, मेरी कहां इतनी हिम्मत कि आपके जैसीहूर कि परी कों खराब सोचूं! वैसे भि आपनेइस गरीब पऱ रहम करकेआज शाही बगीचे मे घूमने कां मौका दिया हें मुझे!
सलमा उसकीबात सुनकर हंस पड़ी औऱ बोलि:" इतनी भि गरीब नहीं हौ जब्बार! घऱ देखा हैं मैंने आपका!
जब्बार उसकीबात सुनकर मुस्कुरा दिया औऱ बोला:"
" मगर आपकेमहल केँ सामने कुछ भि नहि हैं! आप् कहां औऱ हम् कहां!
सलमा:" हम् दोनो शाही बगीचे केँ दरवाजे पऱ हें जनाब!! वोँ देखिए उधर!
जब्बार हंस पड़ा औऱ बोला:" मेरा वोँ मतलब नहि थां शहजादी!
सलमा अंदर आँ गई औऱ जब्बार भि उसकेसंग संग आँ गय़ा तोँ जब्बार शाही बगीचे कि हुस्न देखते हि मंत्र मुग्ध हौ गय़ा औऱ बोला:"
" सच मे बेहद हसीन हें बगीचा बिलकुल आपकीतरह!
सलमा उसकीबात सुनकर अदा केँ संग मटकते हुएआगे बढ़ी औऱ जब्बार उसकेसंग संगचल दिया औऱ बोला:"
" वैसेइस वक़्त कोई आएगा तौ नहीं न् बगीचे मे शहजादी!!
सलमा उसकी आंखों मे देखते हुए मुस्कुराई औऱ एक् अदा केँ संगआगे बढ़ गई तौ जब्बार भि तेजी सें उसके पीछेआया औऱ उससे करीब-करीब सटतेहुए बोला:"
" बताए नां शहजादी! कोईइस टाइम आएगा तोँ नहीं नाँ?
सलमा उससे एक् झटके केँ संगदूर हुई औऱ नखरे करती हुई बोलीं:"
" हम् जानते हें आप् ऐसा क्यूं पूछरहे होँ!!
जब्बार नें हिम्मत करके उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ दूसरे हाथ सें उसके कंधे कों थामकर बोला:"
" हमे तौ भि तौ बताओ क्याँ जानती हैं शहजादी ?
सलमा नें आगे मुंह बढ़ाकर जब्बार कां गालचूम लिया औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" यही कि बगीचे मे कोई नहीं आयेगा!!!
इतना कहकर सलमा उसकी पकड़ सें छूटी औऱ भागचली तौ जब्बार उसके पीछे भागा औऱ सलमाजान बूझकर दीवार कि तरफ भागी औऱ सामने दीवार आँ गई तौ सलमा कों रुकना पड़ा तोँ जब्बार उसके लगभगआते हुए बोला:"
" अब कहां भागेगी हमसे बचकर सलमा!!
सलमा:" हम् तौ बसऐसे हि मजाककर रहे थें जब्बार!! हमे जाने दीजिए नं !!
सलमा दीवार सें अड़ गई तोँ जब्बार नें उसके दोनोतरफ अपनेहाथ बांधदिए औऱ बोला:"
" सलमा आप् सच मे बेहद हसीन हौ!!
इतना कहकर उसने अपने होंठो कों सलमा केँ होंठो कि तरफ बढ़ा दिया तौ सलमा नें लज्जा सें दूसरी तरफ मुंह घुमा दिया जिससे जब्बार केँ होंठ उसकेगाल पर्र पड़े औऱ जब्बार नें बिनादेर किए सलमा कों अपनी बांहों मे कस लिया औऱ उसकेगाल कों चूम मे भरकर चूसने लगा!!
सलमा भि उससे कसकर लिपट गई औऱ जब्बार सीने सें लग गई! दोनोऐसे हि खड़ेरहे औऱ जब्बार मस्ती सें सलमा केँ गाल कों चूसता रहा तौ सलमा उससे छूटने कि कोशिश करतेहुए बोलि:" अहहबस भि कीजिए जब्बार! छोड़िए हमे नहीं तोँ
निशान पड़ जायेगा!
जब्बार:" छोड़ दिया तौ आप् भाग जायेगी सलमा !!
सलमा:"हान भाग जाऊंगी!! एक् बार छोड़कर देखोबस!
जब्बार:" अच्छा बताओ तोँ जरा कहां भाग जाओगी आप्! हम् भि तोँ जाने
सलमा नें मुंहआगे करके जब्बार केँ एक् गाल कों चूम लिया औऱ बोलीं:" अपने कक्ष मे भाग जाऊंगी!!
जब्बार:" ओह औऱ मुझ गरीब कों आपके कक्ष मे घुसने कि इजाजत नहि हैं!!
सलमा जब्बार सें कसकर लिपट गई औऱ बोलि:" ऐसे नां कहो! निकाह केँ बाद मेरा कक्ष मात्र आपका हि होगा जब्बार!!
जब्बार खुशी सें पागल होँ गय़ा औऱ औऱ दोनो हाथों मे भरकर सलमा कि चुचियों कों मसल दिया औऱ बोला:"
" अह्ह्ह्ह सलमा!! दिखाओ नां मुझे अपना कक्ष मेरीजान!!
सलमा मम्मों पकड़े जाने सें सिसकउठी औऱ धीरे-धीरे सें बोलि:"
" आह्ह्ह्ह्ह जब्बार नाही!!रात कों 12 बजेमहल मे आनां! मे दिखा दूंगी आपको कक्ष!!अब मुझे जाने दीजिए नां!!
जब्बार उसकीबात सुनकर खुशी सें झूमउठा औऱ उसकी भारी भरकम गांड़ कों सहलाते हुए बोला:" अह्ह्ह्ह्ह सलमा आपका जवाब नहि मेरी शहजादी!!
उसकेबाद जब्बार नें उसे छोड़ दिया औऱ सलमा वापिस महल मे आँ गई जबकि जब्बार अपनेघऱ गय़ा औऱ रात होने कां प्रतीक्षा करनेलगा! सलमा केँ कक्ष मे जानां उसकेलिए ख्वाब साकार होने जैसा थां!!
रात केँ जैसे हि बारहबजे तौ सलमा कां दिल धड़कउठा औऱ उसके होंठो पऱ मुस्कान आँ गई क्योंकि जब्बार उसकेजाल मे फसने आँ रहा थां!
सलमा कक्ष सें बाहर् निकलआई तौ उसे थोड़ी देरबाद हि जब्बार नीचे दिखाई दिया तोँ सलमा नें उसेऊपर आने कां इशारा किया औऱ जब्बार सलमा केँ पीछे पीछे उसके कक्ष मे आँ गय़ा तौ उसने सलमा कों अपनी बांहों मे भर लिया औऱ सलमा बोलीं:"
" सुल्तानपुर केँ होने वाले सुलतान कां उनकी बेगम केँ कक्ष मे स्वागत हैं!!
जब्बार नें सलमा केँ गाल कों चूम लिया औऱ बोला:"
" सलमा आपका प्रेम पाकर मे दुनिया कां सबसेखुश नसीब व्यक्ति बन गय़ा हू!
सलमा:" मे भि जब्बार! आपके जैसे मजबूत मर्द कि बांहों मे कौन नहीं पिघलना चाहेगा!!
जब्बार नें सलमा कि बात सुनकर उसकी चुचियों कों पकड़कर लिया औऱ सहलाते हुए बोला:" तौ पिघलिए नाँ शहजादी!! हम् भि तोँ यही चाहते हें!
सलमा:" आह्ह्ह्ह जब्बार!! बेचैनी तोँ हम् भि रही हैं मगर एक् बारबस निकाह होने दीजिए नाँ आप्!!
जब्बार नें एक् झटके सें सलमा कों अपनीगोद मे उठा लिया औऱ बेड कि तरफ बढ़ते हुए बोला:" आपकोअगर पहले हि दिनपेट सें नं कर दिया तौ मेरानाम जब्बार नाही!!
जब्बार नें सलमा कों बेड पऱ लिटा लिया औऱ उसकेउपर चढ़ गय़ा तौ सलमा सिसकउठी औऱ बोलीं:" आआह्हह्ह जब्बार!! क्या बात है एक् हि रात मे केसेकर दोगे आप् !!
जब्बार नें अपने खड़े लन्ड कों सलमा कि बुर पर्र कपड़ो केँ उपर सें हि टिका दिया औऱ धक्के लगाते हुए बोला:
" आह्ह्ह्ह्ह मेरी सलमा!! आपकोचोद चोदकर बेहाल नं कर दिया तौ कहना! इतना वीर्य भर दूंगा आपकी बुर मे कि आपको लगेगा बाढ़ आँ गई हैं!!
सलमा नें अपनी टांगो कों खोल दिया औऱ उससे लिपटती हुईँ सिसकी:" अह्ह्ह्ह्ह जब्बार!!! ओह आप् सच्चे मर्द हौ!!
जब्बार सलमा कि बात सुनकर जोश मे आँ गय़ा औऱ उसकेसूट केँ अंदर दोनोहाथ डालने लगा तोँ सलमाउसे रोकने लगीमगर जब्बार नें हाथ घुसाकर उसकी नंगी चुचियों कों पकड़ लिया तौ सलमा नें लज्जा सें दोनो हाथो सें अपना मुंह छुपा लिया औऱ जब्बार सलमा कि मस्त कठोर चुचियों कों दबादबा कर पागल सां होँ गय़ा औऱ उसके लन्ड मे उबालआने लगा तौ जब्बार सें बर्दाश्त नहि हुआ औऱ उसने एक् जोरदार धक्के केँ संग लन्ड कों सलमा कि टांगे मे घुसा दिया औऱ वीर्य कि पिचकारी मारने लगा! जब्बार सलमा सें कसकर लिपट गय़ा औऱ सलमा नें झड़ते हुए जब्बार कां गालचूम कर अपने प्रेम कां इजहार किया!
जैसे हि जब्बार कि सांसे सामान्य हुइ तौ सलमा सें बोला:"
" हमेगलत मत समझना शहजादी! आपको देखते हें तौ होशखो देते हें बस!!
सलमा उसके सीने मे हाथ फेरती हुईँ बोलीं:" इतना तोँ आपकाहक हैं मुझ पर्र जब्बार आखिर मे आपकी महबूबा हु!! अच्छा मेरा कक्ष तोँ देख लियाहमे कब अपनाघऱ दिखारहे होँ!!
जब्बार:" जब आप् चाहो शहजादी!!
सलमामन हि मन मुस्कुरा उठी औऱ बोलि:" मन तोँ करता हैं कि कल हि चलूमगर किसी नें हमे वहांदेख लिया तोँ हम् किसी कों मुंह दिखाने केँ लायक नहीं रहेंगे!
जब्बार:" आप् फिक्र नं करे! आपके औऱ मेरे सिवाकोई नहीं होगा देखने वाला!!
सलमा:" हम् समझती हैं मगरफिन भि डर लगता हि हैं!! जब हम् ठीक लगेगा तौ आपकोकह देंगे! अच्छा अभि आप् जाइए औऱ कल दरबार मे मुलाकात होगी आपसे!!
जब्बार नें उसे ताकत सें कस लिया औऱ बोला:"मन तोँ करता नहीं हें आपको छोड़ने केँ लिएमगर मजबूरी हें !! सलीम नहींदिख रहा हैं आजकल ?
सलमा:" उसकीबात हमसेमत हि करो! कहीं अय्याशी कररहा होँ शहाबजादा!!
जब्बार समझ गय़ा कि सलमा अपने भइया कों अधिक मनपसंद नहि करती हैं तौ उसने सलमा केँ गाल कों चूमा औऱ उसकेबाद उसके कक्ष सें बाहर् निकलआया!!
धीरे-धीरे धीरे-धीरे कब एक् महीना गुजर गय़ा पता हि नहींचला! इसीबीच विक्रम नें युद्ध केँ लिए अपनी सारी सेना रेडीकर ली थि औऱ जब्बार भि अब सलमा केँ इशारों पर्र नाचउठा थां!
वहीं दूसरी तरफयह पिंडाला नें जब्बार कों पिंडालगढ बुलाया तौ जब्बार आँ गय़ा औऱ दोनो बैठेहुए बातेकर रहे थें
पिंडाला:" क्याँ रे जब्बार सुनने मे आया हैं कि आजकल शहजादी सलमा तेरेऊपर बड़े डोरेडाल रही हें !!
जब्बार हल्का सां मुस्कुराया औऱ बोला:"हान वोँ आजकल मुझसे प्यार होने कां दावा करती हें!
पिंडाला:" ऐसा क्याँ कमालकर दिया तूने जोँ वोँ तेरे प्रेम मे इतनी पागल होँ गई हैं!
जब्बार:" वहीं तोँ मुझे स्वयं भि समझ नहीं आँ रहा हैं!
पिंडाला:" अबे औरते नां एक् नंबर कि चालबाज होती हें! हम् पिंडारी अपने राज्य मे एक् भि महिला नहीं रखते हें! उठाते हें सेक्स करते हें औऱ मार देते हैं! बच्चा पैदा करने केँ लिए गर्भवती करते हें औऱ बच्चा पैदा होते हि उसकी स्टोरी समाप्त! सलमा सें जरा सावधान हि रहना भइया!
जब्बार:" मे समझ गय़ा सभी! आप् निश्चित रहो! मे भि उससेबस मजेकर रहा हूं औऱ उससे अधिककुछ नहीं हें! वैसे भि वोँ विक्रम सें मोहब्बत करती थि तोँ अभि दिल टूटाहुआ हें इसलिये मुझ पर्र डोरेडाल रही हें ताकि वोँ अपने अपमान कां बदला लें सके क्योंकि वोँ जानती हें कि उसे मारने कि हिम्मत मात्र मेरे हि अंदर हें!
पिंडाला केँ होंठो पऱ मुस्कान आँ गई औऱ बोला:" पागलबना रही हें वोँ तेरा! तुझसे अधिक ताकतवर तौ मे हूमगर मे स्वयं विक्रम सें नहींलड़ सकता क्योंकि जब तक उसकेपास वोँ जादुई तलवार हें उसेकोई नहींहरा सकता! चक्कर मे पड़कर कहीं उसके सामने चला गय़ा तोँ मौत भि मिलेगी!
जब्बार समझ गय़ा कि पिंडाला ठीक हि कहरहा हैं तोँ बोला:"
" भइया आप् निश्चित रहो! मे ऐसाकोई कदम नहि उठाऊंगा कि बना बनाया सभीखेल खराब हौ जाए एक् हि झटके मे!
पिंडाला:" अरेवही तोँ मुझे समझारहा हु भइया!देख सुल्तानपुर कां राजा तोँ तुम् वैसे भि बन हि जाओगे औऱ प्रजा बगावत करे तौ ताकत सें कुचल देनासभी ठीक हौ जायेगा!
जब्बार:" समझ गय़ा हूमगर अगर सलमा मुझसे विवाह कर हि लेती हें तौ इसमें कोई दिक्कत भि नहीं हें!
पिंडाला:" मेराकाम तुम्हे समझाना तौ समझा दिया!अब जोँ भि करेगा सोचसमझ कर करना क्योंकि हर टाइम मे तेरी सहायता नहींकर सकता! औऱ सुन मुझेपता चला हें कि सलमाशमा सें भि अधिक सुंदर हें तौ ध्यान रखनाअगर तेरी विवाह हुई भि तोँ निकाह मात्र तेरा होगा औऱ सुहागरात मे हि मनाऊंगा!
जब्बार कां मुंहउतर गय़ा पिंडाला कि बात सुनकर मगरकुछ नहीं बोला औऱ चुपचाप अपनी गर्दन झुकाकर वापिस अपने राज्य लौटआया!
अगलेदिन जब जब्बार औऱ सलमा कि मुलाकात हुइ तोँ जब्बार नें अपनीचाल चलतेहुए बोला:"
" शहजादी हम् सोचरहे थें कि आपसे हमारी सगाई होँ जाए तोँ अच्छा रहेगा!
सलमा केँ दिमाग़ मे धमाका सां हुआमगर वोँ जानती थि कि जब्बार कों काबू मे रखने केँ लिएउसे कुछ बड़ा करना हि होगा तौ सलमा बोलीं:"
" यह बाते हमसे नहीं बल्कि हमारी अम्मी जान सें कीजिए! हमेकोई आपत्ति नहि हें!
जब्बार: हमेमगर आपकी सहायता तौ चाहिए न् सलमा! मे इतनी हिम्मत नहीं हें कि रजिया सुल्तान सें आपकाहाथ मांगसकू सीधे सीधे!
सलमा:"ठीक हें हम् आप् हमारे संगआइए!
सलमा जब्बार कों अपनेसंग लें गई औऱ उसनेयह सारी बातें रजिया कों बताई तौ रजिया कों मानो विश्वास हि नहि हुआमगर सलमा केँ चेहरे कि खुशीबता रही थि कि वोँ कुछ बड़ासोच रही हैं तौ रजिया नें भि अपनी सहमति दे दि!
अगले हि दिन पूरेराज दरबार मे रजिया नें सलमा औऱ जब्बार कि सगाई कां ऐलानकर दिया तोँ लोगो नें दांतो तले उंगली दबाली क्योंकि किसी कों यकीन नहीं थां कि राज परिवार जब्बार केँ सामने इतनी झल्दी झुक जायेगा औऱ सबसे बड़ी हैरान तोँ सीमा थि क्योंकि वोँ इसेसाफ तौर पऱ विक्रम केँ संग धोखासमझ रही थि मगरबाद मे सलमा नें उसेसभी कुछसाफ कर दिया तौ सीमा नें राहत कि सांसली! सगाई कां नतीजा यहहुआ कि जब्बार अब पूरीतरह सें सलमा केँ इशारों पर्र नचाने लगा औऱ सलमायही तोँ चाहरही थि!
सगाई कि खबर विक्रम तक भि पहुंची औऱ उसे यकीन नहींहुआ ! सलमा नें सीमा कों सुरंग केँ रास्ते उदयगढ़ भेजाकर सभीकुछ उसे समझाया!
सीमा:"यह सगाई केवल एक् दिखावा हें युवराज! आप् सुलतान केँ संग सजधजकर रखिए क्योंकि ठीकदो दिनबाद सलमा अपनी अंतिम चाल चलेगी औऱ उसकेबाद अपने सैनिकों केँ संग सुरंग केँ रास्ते सें आकर हमलाकर देंगे! सुलतान औऱ सलीम दोनो एक् युद्ध मे आपकासंग देंगे तौ वहीं रजिया सुल्तान नें भि महल केँ कुछ वफादार लोगो कों अपने पक्ष मे कियाहुआ हैं!
विक्रम:" मे इस मौके कों हाथ सें नहीं जाने दूंगा! सबसे पहलेहमे पिंडारियो कां कुछ सोचना पड़ेगा क्योंकि सुल्तानपुर पर्र कब्जा होते हि वोँ हम् पर्र हमलाकर देंगे औऱ उन्हे हरा पाना मुश्किल होगा!
सीमा:" उसकेलिए आप् योजन बनाए युवराज! मेरी जरूर होने पऱ मे पूरीतरह सें आपकासंग दूंगी!
विक्रम:" ठीक हें मे कुछ करताहु मगर बिना मेरी मर्जी केँ सलमा अपनी अंतिम चाल नहीं चलेगी!! यहउसे समझा देना!!
उसकेबाद सीमा वापिस आँ गई औऱ सलाम कों सभीकुछ बताया तौ सलमा नें उसकीबात खुशी खुशीमान ली क्योंकि वोँ स्वयं भि जानती थीं कि असली खतरा पिंडारी हि हें!
आधीरात केँ वक़्त सलमा केँ दरवाजे पऱ दस्तक हुइ तौ उसने देखा कि सामने उसका भइया सलीम खड़ाहुआ थां औऱ सलमा कों मानो यकीन नहि हुआ क्योंकि सलीम बहुत तंदुरुस्त लगरहा थां औऱ उसकानशे केँ कारण सूखाहुआ कमजोर जिस्म अब पूरीतरह सें भर गय़ा थां तोँ सलमा बोलि:"
" अरे सलीम!!आओ आओ अंदरआओ!
सलीम केँ संगसंग रजिया भि अंदर आँ गई औऱ सलमा बोलीं:"
" तुमने तौ कमालकर दिया सलीम!अब जाकर तुम् युवराज बने हौ मेरे भइया!
सलीम:"यह सभीकुछ विक्रम कि वजह सें हि संभव होँ सका हें उनके बिनायह मुमिकन नहीं थां!
सलमा:" मे सभी जानती हूं विक्रम केँ बहोत सारे एहसान हैं हम् पऱ!
सलीम:"मगर एक् बात मुझेसमझ नहि आई हें कि आप् जब्बार सें विवाह क्यूं कररही हौ जबकि वही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन हें!
सीमा नें उसे सारी योजना बताई तौ सलीम उसकेमन कि दाददिए बिना नं रहसका औऱ बोला:"अगर ऐसा होँ गय़ा तोँ यकीनन हमारी फतेह निश्चित होगीआपी!!
सलमा:" यकीनन होगीबस एक् तुम् एक् काम करना कि अभि जब्बार याँ उसके किसी व्यक्ति केँ सामने मत आनां नहीं तोँ उन्हें शक होँ जायेगा!!
सलीम:" आप् निश्चित रहे! मे आपके औऱ राजमाता केँ कक्ष सें बाहर् हि नहीं जाऊंगा कुछदिन!
रजिया:" हानयह हि ठीक रहेगा! चलो सलीमअब सोने चलते हें रात भि बहुत हौ गई हैं!
सलीम:" अम्मी आप् जाइए न् मुझेअब आपी भि ढेर सारी बाते करनी हें!
रजिया:" ठीक हें तुम् दोनो बातेकरो मे चलतीहु अब!
उसकेबाद रजिया चली गई तौ सलीम बोला:"आपी देखिए हम् कितनी मेहनत किए हें औऱ अपने आपको बिलकुल बदल दिया हें हमने!
सलमा:"सच मे भइया मे स्वयं यकीन नहि करपारही हूं कि आप् हि सलीम होँ! सच मे अब जाकर एक् मर्दबने होँ आप्!
सलीम:"यह सभी आपका हि कमाल हें आपी! नं आप् उसदिन हमे धिक्कारती औऱ नं हमारा आत्म सम्मान जागता!
सलमा:" नहीं भइयायह सभी आपकी मेहनत कां हि नतीजा हैं क्योंकि मे समझ सकतीहू कि कितनी मेहनत आपकोलगी होगीयह सभी करने केँ लिए!!
सलीम:" अच्छा अच्छा ठीक हें! हमे बड़ीजोर सें प्यास लगी हैं क्याँ आप् थोडा पानी पिलाने कि मेहरबानी करेगी ??
सलमा:"यह तोँ कोईबात हुई भइया! रुकिए मे लेकरआती हु!
इतना कहकर सलमाबेड सें नीचेउतर आई औऱ जैसे हि आगे बढ़ी तौ पीछे सें सलीम नें उसे अपनीगोद मे उठा लिया तौ सलमा बोलीं:"
" अरेअरे रुको सलीमयह क्याँ कररहे हौ भइया !!
सलीम नें उसे अपनीगोद मे उठाया हुआ थां औऱ उसके कंधे पर्र अपनेसिर कों रखतेहुए बोला:" आपने हमारा मजाक उड़ाया थां न् कि हम् आपको नहीं संभाल सकते हैं तोँ देखिए आपी हमने आपको पूरीतरह सें संभाला हुआ हैं औऱ जैसे आप् चाहो वैसे संभालने केँ लिए रेडी हैं चाहो तोँ पूरीरात आपको संभाल सकते हें!!
सलीम नें साफ साफ़ शब्दों मे सलमा कि इशारा कर दिया कि वोँ बेड पर्र पूरीरात चोद सकता हैं तौ सलमा केँ शरीर मे सिहरन सि दौड़ गई औऱ बोलि:"
" अरे आप् जीतगए भइया!हमे नीचे तोँ उतारिए! आपको प्यास लगी हैं न् भइया!
सलीम नें मुंहआगे करके सलमा कां गालचूम लिया औऱ बोला:"
" आपीहमे कोई प्यास भि नहि लगी हुई हैं! हम् तोँ बसयह साबित करना चाहते हें कि हम् आपकोअब पूरीतरह सें संभाल सकते हें बस! जैसे आप् चाहो बिलकुल वैसे!सच पूछिए तोँ पिछले एक् महीने मे हमारी आंखों केँ आगे आपका हि हसीन चेहरा रहाबस औऱ आपकेलिए हि हमने स्वयं कों बदला हैं!
सलीम कि बात सलमा केँ दिल पऱ असरकर रही थि औऱ वोँ प्रेम सें बोलीं:"
" सलीम मेरी प्यारे भइया!यह युद्ध कां वक्त हैं औऱ एक् योद्धा होने केँ नाते आपकापरम कर्त्तव्य हें कि अपने दुश्मन पऱ पहले विजय हासिल करो!
सलीम नें सलमा कों धीरे-धीरे सें नीचे उतार दिया औऱ बोला:" वोँ तौ हम् करके हि रहेंगे आपी!मगर सच पूछिए तोँ हमे आपसेऐसी बेरुखी हि उम्मीद नहीं थि!!
सलीम नें दुःखी मन सें बोला तोँ उसकी बातो नें सीधे सलमा केँ दिल पर्र असर किया औऱ बोलि:" अच्छा फिन क्याँ उम्मीद थि हमसे आपको ?
सलीम नें अपना मुंह लटका दिया औऱ बोला:" रहने दीजिए नां आपी! आपसे न् होँ पाएगा!
सलमा नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोलि:"
" अच्छा पहले बताओ तोँ हमेजरा! केवल बाते हि बनाते रहोगे क्याँ अब बोलोगे भि कुछ ?
सलीम नें सलमा केँ हाथ कों पकड़ लिया औऱ बोला:"हमे लगा थां कि जब हम् आपकोगोद मे उठाएंगे तोँ आप् हमारी ताकत सें खुश होकर हमारे सीने सें लिपट जायेगी!
सलमा केँ होंठो पर्र मुस्कान आँ गई औऱ वोँ सलीम केँ लगभग होतेहुए धीरे-धीरे सें मुस्कुरा कर बोलि:"
" पीछे सें पकड़कर उठाओगे तौ सीने सें केसे सकतीहू इतनी भि बुद्धि नहीं हैं क्याँ!!
सलमा कि बाते सुनते हि सलीम कां दिलजोर सें धड़कउठा औऱ उसने बिनादेर किए सलमा कि गांड़ कों थामते हुएउसे अपनीगोद मे उठा लिया तौ सलमा भि खुशी खुशी अपनी बांहे उसकेगले मे डालकर उससे लिपट गई औऱ औऱ अपनी चुचियों कां भार उसके सीने पर्र डाल दिया! दोनो कि आंखे एक् दूसरे सें मिली औऱ दोनो केँ होंठ अपने आप् एक् संगखुल गए औऱ सलीम नें अपनीआपी केँ होंठो कों चूसना शुरुआत कर दिया तोँ सलमा नें मस्ती सें अपनी आंखेबंद करली औऱ सलीम कां संग देनेलगी! सलीम केँ हाथ नीचे उसकी गांड़ पऱ फिसलरहे थें जिससे सलमा कि सांसे तेज हौ गई थि औऱ सलीम नें अपनीजीभ कों बाहर् निकाला तोँ सलमा नें अपना मुंहखोल दिया औऱ सलीम कि जीभ उसके मुंह मे घुस गई तौ दोनो हि बेकाबू होकर एक् दूसरे सें अपनीजीभ लड़ाते हुए एक् दूसरे केँ होंठो कों चूसने लगे! जैसे हि दोनो कि सांसे उखड़ी तोँ उनके होंठअलग हुए औऱ दोनो एक् संग मुस्कुरा दिए तौ सलीम नें सलमा कों बेड पर्र लिटा लिया औऱ जैसे हि उसकेऊपर लेटने लगा तौ सलमा नें इंकार मे सिर हिलाया औऱ बोलीं:"
" भइया हम् चाहते हें कि आप् पहले युद्ध पर्र ध्यान केंद्रित करें!फिन हमे आपकीकर ख़्वाहिश कुबूल होगी! युद्ध विजेता कि बहादुरी पर्र हर महिला अपनासभी कुछ कुर्बान कर देती हें! वैसे भि हमे उम्मीद हें कि कल हि विक्रम कां संदेशा आँ जायेगा औऱ कलरात हि जब्बार कों उसके गुनाहों कि सजा मिलेगी!
सलमा नें अपना पक्ष मजबूती सें रखा तौ सलीम इंकार नहि करसका औऱ उसकेबाद सलीमवही आहिस्ता सलमा केँ कक्ष मे हि सो गय़ा!!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Kahani ab aur interesting hogi
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