शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
bhay salma के name से tittle h। too salma ko villain bnaa rahe hu। Ek too vikram ne rajmata khoi jise vo apni mata manata thaa। Uper से Ajay friend jaisa bhay khoya। or Salma bi usse dur hu rahi h। ishq kaa zuta natak krr rahi h। Ager salma dhokhebaaz h too salma ko kahani के ant mai marna hoga। pr usse purv vikram के hatho sultanpur shamshan mai badalana hoga vikram ko और ant mai salma kaa vadh। or pyaar kaa natak karte karte salma ko vikram से sachcha pyaar hu jaye। or jabbar के mrityu bad vikram और salma udaygarh और sultanpur एक बड़ा samrajya khada kare। pr salma vikram के prati vafadar rahe और usse sachche dill ❤️ से ishq karne wali honi चाहिए।
Tumhara yr yeh ky natak hain km say km koy date toh do kee iss date tk update aajaaega at least comment kaa toh reply kro bhay Unique star
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम औऱ मेनका कि अगली मुलाकात रात केँ खाने पऱ हुईँ औऱ बिंदिया बोलीं:"
" राजमाता आज किचन औऱ महल मे कोई नहीं रहेगा क्योंकि सबलोग त्यौहार मानने केँ लिएघऱ चले जायेंगे!
मेनका:" अच्छा हें त्यौहार घऱ हि अच्छे लगते हें!
उसकेबाद बिंदिया चली औऱ विक्रम बोले:" राजमाता आजमहल मे आपके औऱ मेरे सिवाकोई नहीं होगा क्योंकि पहरादे रहेसब सैनिक आज अपनेघऱ चलेगए हें!
मेनका उसकीबात सुनकर अंदर हि अंदरखुश हुइ औऱ बोलीं:"
" वैसे आप् हमारे लिए क्याँ लेकरआए हें गिफ्ट आज ?
विक्रम:" ओहो माफ़ कीजिए माता मे तौ भूल हि गय़ा! अभि जाकर आपकेलिए कुछ लेँ आऊंगा!
मेनका हल्की सि फीकी मुस्कान केँ संग बोलीं:" अभि रहने दीजिए पुत्र! रात मे कहां जाओगे अब ? मे कोई नं कोई वस्त्र धारणकर हि लुंगी!
विक्रम औऱ मेनका खानां खाने केँ बाद दोनो अपने अपने कक्ष मे जानेलगे तौ मेनका बोलि:"
" हमारा कक्षआज रात आपकेलिए पूरीतरह सें खुलाहुआ हें महाराज!
इतना कहकर मेनका अपने कक्ष मे घुस गई औऱ जैसे हि उसनेखाट पर्र पड़ेहुए गिफ्ट कों देखा तोँ वोँ मारे खुशी केँ उछल पड़ी औऱ बोलि
" अच्छा तौ यहबात हैं पुत्र! हमसे अच्छा मज़ा लिया हें आपने! मे भि आज आपको अच्छे सें आनंद चखाऊंगी!
यहसभी सोचते हुए मेनका नें गिफ्ट कों खोला तोँ सोने औऱ हीरे सें जड़ी हुइ शानदार वस्त्र देखकर मेनका खुशी सें झूमउठी औऱ मन हि मन सोचने लगी कि विक्रम सच मे उसका बहोत अधिक ध्यान रखता हैं औऱ मुझे भि अब विक्रम कों दिखाना हि होगा कि मे भि उससे बहोत अधिक प्रेम करतीहू औऱ उसकेलिए कुछ भि कर सकतीहू!
मेनका नें आज अपनेबेड कि चादरबदल डाली औऱ पूरेबेड कों सुगंधित मादकमहक सें भर दिया! उसनेबेड कों ऊपर सें चादर सें ढकतेहुए सजा दिया औऱ ढेर सारे खूबसूरत तकिएउस पऱ रखदिए औऱ उसकेबाद उसने हल्की रोशनी वालीदेर सारी मशाल जलाई जौ उसके कक्ष कों बेहद कामुक बनारही थि! मेनका जानती थि कि विक्रम केँ आने कां टाइम होँ गय़ा हैं तोँ उसनेजान बूझकर अपने आपको पूरीतरह सें नंगा किया औऱ केवल एक् लालरंग कि साड़ी कों अपने शरीर पऱ लपेट लिया औऱ अपने पुत्र केँ आने कि इंतज़ार करनेलगी!
रात केँ लगभग 11 बजे कदमों कि आहत सुनकर मेनका कि सांसे तेज हौ गईं क्योंकि प्रतीक्षा कि घड़ियां ख़त्म होँ गई थि औऱ उसका प्रेमी आँ गय़ा थां! मेनका नें अपनेबैड कि चारोतरफ सें पर्दो सें ढक दिया औऱ बाहर् निकलआई तोँ देखा कि विक्रम दरवाजे केँ पास हि खड़ाहुआ थां औऱ राजसी वस्त्र मे बेहद सुंदर लगरहा थां!
मेनका चलती हुई उसकेपास आई औऱ दरवाजे केँ पास जाकर बोलीं;" बड़े खूबसूरत लगरहे होँ महराज आज आप्! वैसे तौ आजमहल मे कोई नहीं हैं दरवाजा बंदकरू याँ खुला हि रहनेदू पुत्र!!
मेनका नें शुरुआत मे हि विक्रम पऱ ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया औऱ विक्रम उसकी आंखो मे देखते हुए बोलि:"
" हमसे क्याँ पूछती होँ! आपका कक्ष हैं। जैसे आपकामन करे कीजिए!
मेनका बेहद धीरे-धीरे सें औऱ कामुक अंदाज मे बोलि:" बंद हि कर देतीहु पुत्र क्योंकि रात मे बंद दरवाजे हि अच्छे लगते हें!
इतना कहकर मेनका नें दरवाजा बंद किया औऱ बोलीं:
" आप् बैठिए न् पुत्र! हम् जरा स्नान कर लेते हैं!
इतना कहकर मेनका नें अपनेहाथ उठाते हुए एक् जोरदार अंगड़ाई ली औऱ उसकी चूचियां आधे सें अधिक नंगी होती हुइ पूरीतरह सें तन गई!
विक्रम मेनका कि चुचियों कों प्यासी नजरों सें देखने लगा तोँ मेनका बोलीं:"
" ऐसे क्याँ आंखे फाड़ फाड़कर देखरहे हौ मानो इससे पहलेकभी देखा हि नहि हौ!
विक्रम मेनका केँ लगभगआते हुए बोला:" देखी तौ हें मगरआज कुछ अधिक हि रस टपकारहे हें आपके पपीते!
मेनका नें अपनी आंखे नचाई औऱ बोलि:" धत बेशर्म कहीं केँ ! मे चली नहाने केँ लिए!
इतना कहकर मेनका पलट गई औऱ अपनी नंगीकमर कों विक्रम केँ सामने कर दिया
मेनका कि गोरी चिकनी मजबूत कमर नंगी देखकर विक्रम मन हि मन उसकीरूप सौंदर्य पर्र मोहित हौ उठा औऱ मेनका देखते हि देखते बाथरूम मे नहाने केँ लिएघुस गई औऱ पूरीतरह सें नंगी होने केँ बाद अपनी साड़ी कों खुले दरवाजे सें विक्रम केँ मुंह पर्र फेंक दिया औऱ बोलि:"
" यह लीजिए पुत्र! इसकीहमे अबकोई जरूरत नहि!
विक्रम मन हि मनसोच रहा थां कि मेनका मे आज बड़ी हिम्मत आँ गई थि औऱ यहसभी मोहिनी कि वजह सें हौ रहा थां! नहाने केँ बाद मेनका बोलीं:"
" हमे एक् तौलिया देने कां कष्ट कीजिए पुत्र!
विक्रम खड़ाहुआ औऱ तौलिया हाथ मे लिए खुले दरवाजे पऱ आया तौ मेनका नें एक् झटके सें दरवाजा बंदकर दिया औऱ अपना एक् हाथ बाहर् निकाल कर तोलिए कों लिया औऱ उससे बोलि:"
" जाइए आप् पलंग पर्र आराम कीजिए! हम् जरा " मोहिनी" बनकरआते हें!
विक्रम मेनका केँ खाट पऱ आँ गय़ा औऱ जैसे हि उसने परदे कों खींचा तोँ उसकी आंखे खुली कि खुलीरह गई क्योंकि उसने ख्वाब मे भि नहीं सोचा थां कि मेनका उसकाऐसा स्वागत करेगी!
विक्रम जानता थां कि मेनका आजउसे पहले " मोहिनी" बनकरखूब तड़पाएगी औऱ उस पर्र डोरे डालेगी मगर यहां तौ अभि तक मेनका नें मोहिनी रूप धारण भि नहि किया थां औऱ विक्रम कि जान पर्र बनआई थि! मेनका केँ कक्ष सें उठती हुई मादकमहक उसे बेकाबू कररही थि औऱ विक्रम यहसोच सोचकर मदहोश हुएजा रहा थां कि परदे गिरने केँ बाद हल्की रोशनी मे मेनका कां कामुक शरीरआज उसकीजान लेकर रहेगा! वैद्य जी कि दवाई अपनेचरम सीमा पर्र आँ गई थि औऱ खूबअसर दिखारही थि जिससे विक्रम कां लन्ड एकदम किसी लोहे कि रॉड कि तरह सख्त हौ गय़ा थां!
मेनका नें नए वस्त्र धारणकर लिए औऱ शीशे केँ सामने खड़ी होकर श्रृंगार करनेलगी औऱ विक्रम सें बोलि:"
" कैसालगा आपको हमारा पलंगआज महराज ?
विक्रम:" बेहद सुंदर राजमाता! आज आप् हमारी तपस्या भंग करके हि मानेगी!
मेनका अब पूरीतरह सें रेडी होँ गई थि औऱ चलतेहुए अपनेबैड केँ पास पहुंच गई औऱ पर्दा हटाकर विक्रम केँ सामने खड़ी हौ गई औऱ बोलीं:"
" औऱ हम् केसेलग रहे हें महाराज आपको ?
विक्रम नें मेनका कि तरफजी किसीनई नवेली दुल्हन कि तरह सौलह श्रृंगार किएहुए सोने हीरे सें गहनों सि लदी हुइ थि! मेनका केँ लाल सुर्ख लिपिस्टिक सें सजे होंठ बेहद जूसीलग रहे थें! मेनका नें जान बूझकर साड़ी कों बेहद कामुक अंदाज मे पहनाहुआ थां जिससे उसका एक् कंधा पूरा नंगा थां औऱ उसकी चूचियां मात्र एक् सुनहरी ब्रा मे बड़ी मुश्किल सें बंद थि! मेनका कां गोरा चिकना पेट पूरीतरह सें नंगा थां औऱ विक्रम पूरीतरह सें उसका दीवाना होतेहुए बोला
" मेनका सें भि कहीं अधिक कामुक औऱ रसीली!
मेनका उसकीबात सुनकर मुस्कुरा दि औऱ बोलि:"
" आप् बैठिए हम् आपकेलिए मदिरा लेकरआते हें पुत्र!
मेनका आज मानोकोई कसर नहि छोड़ना चाहती थि औऱ अपनी मस्तगोल गोल गांड़ कों मटकाते हुए अलमारी कि तरफबढ़ गई! विक्रम खुले परदे सें उसेदेख रहा थां औऱ मेनका नें हाथआगे लातेहुए जान बूझकर अपनी साड़ी कों ऊपर उठाया औऱ बैठ गई जिससे उसकी गांड़ पूरीतरह सें नंगी होँ गई! विक्रम केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी क्योंकि उसने मेनका कि गांड़ कों खूब मसला जरूर थां मगरदेख पहलीबार रहा थां औऱ उसकेखून मे समयसमय गर्मी बढ़ती हि जारही थि! मेनका नें अलमारी कों खोला औऱ बॉटल निकालने केँ लिएआगे कों झुकी तौ उसकी गांड़ पूरीतरह सें उभरआई औऱ विक्रम नें अपनी आंखो सें दुनिया कां सबसे सुंदर औऱ कामुक दृश्य एक् संग देखा! मेनका कि बुर औऱ गांड़ इसे हल्की सि दिखाई दि औऱ विक्रम नें जोर सें अपने लन्ड कों मसल दिया! मेनका बॉटलहाथ मे लिए खड़ी हुईँ औऱ चलती हुइ विक्रम केँ पास आँ गई औऱ बेड पर्र एक् जोरदार झटके केँ चढ़ गई तौ बेड गद्दे केँ कारणऊपर नीचेहुआ तोँ मेनका विक्रम कि गोद मे गिर पड़ी औऱ विक्रम नें उससे बोला:"
" लगता हें आज आपकाकुछ अधिक हि उछलने कां मनकररहा हें माता! गिर गई तोँ?
मेनका उसकी छाती पर्र हाथ टिकाते हुएबैठ गई औऱ बोलीं:"
" आपके जैसे शक्तिशाली भुजाओं वाले पुत्र केँ होतेहुए भि गिरी तौ धिक्कार होगा आप् पर्र!
इतना कहकर मेनका नें दो ग्लास मे मदिरा डाली औऱ विक्रम कि तरस एक् ग्लास बढ़ाते हुए बोलि:"
" लीजिए महराज मदिरा कां सेवन कीजिए!
विक्रम नें ग्लास केँ संगसंग मेनका कां हाथ भि थाम लिया औऱ अपनीगोद मे उसे खींच लिया औऱ उसके होंठो सें ग्लास लगाते हुए बोला:"
" अपने मुलायम होंठों सें छू दीजिए नाँ एक् बार माता!
मेनका समझ गई कि विक्रम पूरीतरह सें उसके काबू मे आँ गय़ा हैं तोँ मेनका नें उसकी आंखो मे देखते हुए ग्लास कों अपने होंठों सें लगा लिया औऱ एक् घूंट भरतेहुए उसकी वापिस उसके होंठो सें जोड़ दिया तौ विक्रम नें एक् हि सांसली ग्लास खालीकर दिया औऱ मेनका केँ हाथ सें उसका ग्लास भि लिया औऱ उसे भि पीनेलगा तौ मेनका बोलीं:
" बड़े बेसब्र प्रतीत होँ रहे होँ पुत्र आज आप्!
विक्रम नें ग्लास कों मेनका केँ मुंह सें मुंह सें लगा दिया तौ मेनका नें भि एक् जोरदार घूंटभरी औऱ विक्रम बोला:"
" आपकी कामुक अदाएं हमे पागलकर रही हैं माता!
मेनका नें एक् हाथ कों उठाया औऱ अपने एक् मम्मों केँ उपर सें लाती हुई अपने कंधे तक लें गई जिससे उसकी चूचियां उछल पड़ी औऱ विक्रम कि आंखे पूरी कि पूरीखुल गई! मेनका उसकी आंखो मे देखते हुए मुस्कुराई औऱ बोलीं
" आखिर हमनेऐसा क्याँ कर दिया जौ आप् हमे दोषी ठहरारहे हों पुत्र!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम नें उसके एक् कंधे कों सहला दिया औऱ बोला:"
" लगता हें आज आप् हमारी जान लेकर हि रहेगी माता!
विक्रम नें खाली ग्लास मेनका कि तरफ बढ़ा दिया तौ मेनका बॉटल लेने केँ लिएआगे कों हुई औऱ उसकी साड़ी उसकी गांड़ पर्र सें उतर गई औऱ विक्रम नें पहलीबार मेनका कि नंगी गांड़ कों पास सें देखा औऱ उसे एहसास हुआ कि मेनका सचमुच कि मेनका हैं! बड़ी बड़ी गांड़ केँ दोनो उभारों केँ बीच मे छोटा सां कसाहुआ गुलाबी छेद बेहद आकर्षक लगरहा थां! विक्रम नें किसीतरह स्वयं पर्र काबू किया औऱ मेनका नें फिन सें ग्लास कों भर लिया औऱ इसबार स्वयं हि उसकीगोद मे बैठ गई औऱ उसके होंठो सें ग्लास कों चिपका दिया औऱ बोलीं:" पुत्र आपको आपकी " मोहिनी " कैसीलगी?
विक्रम नें एक् हाथ कों उसकेपेट पर्र बांध दिया औऱ बोला:"
" मेरी "मोहिनी" नें हमे पूरी सें मोह लिया हैं मेनका! हम् आपकेरूप सौंदर्य केँ आगेहार गए हें!
मेनका अपनीजीत सें उत्साहित होँ गई औऱ बोलीं:"
" बिंदिया केँ सामने तौ आप् बड़ी बड़ी बातेकर रहे थें पुत्र!
विक्रम नें मेनका कां एक् गालचूम लिया औऱ बोला:"
" हम् केवल आपकेरूप सौंदर्य सें हारे हें माता! असली इम्तिहान तौ अभि बाकी हें आपका!
मेनका नें एक् जोरदार घूंटभरी औऱ विक्रम कि आंखो मे देखते हुए बोलीं:" कैसा इम्तिहान पुत्र? जीत तौ गए हि हें हम्!
विक्रम नें मेनका कों अपनीगोद मे ऊपर किया औऱ लन्ड कों उसकी जांघो केँ बीच मे घुसाकर जोर सें धक्का लगाया औऱ उसकी गर्दन कों अपनीजीभ सें चाटते हुए बोले:"
" यह वाला इम्तिहान राजमाता!
मेनका केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ एक् झटके केँ संग उसकीगोद सें निकलकर बेड पर्र बैठ गई औऱ हल्की हल्की मुस्कुराते हुए विक्रम कि आंखो मे देखने लगी औऱ मेनका कि मुस्कान गहरी होतीचली गई
विक्रम उसकीइस अदा पऱ मस्ती सें झूमउठा औऱ बोला:"
" क्याँ हुआ माता बड़ी मुस्कुरा रही हौ आप् ?
मेनका अब पूरीतरह सें मस्ती सें आँ गई थि क्योंकि मदिरा कां रंग उसकेउपर पूरीतरह सें असर दिखारहा थां औऱ मेनका विक्रम कों जीभ निकाल कर बोलि:"
" हम् अबकोई इम्तिहान नहीं देंगे पुत्र क्योंकि हम् जीतगए हें तोँ इम्तिहान कैसा!
विक्रम नें मेनका कि जांघ पर्र हाथरख दिया औऱ बोला:"
" मगर आपकीयह कामुक मुस्कुराहट औऱ बहकता बदन तौ कुछ औऱ हि बयांकर रहा हैं राजमाता!
मेनका कि सांसे अब तेजी सें चलरही थि जिससे उसकी चूचियां आधे सें अधिक बाहर् उछलउछल पड़रही थि औऱ मेनका अपनी चुचियों कों देखकर लम्हा समय उत्तेजित होतीजा रहींथीं औऱ बोलीं:"
" बताओ तोँ जरा हम् भि जाने!
विक्रम नें एक् झटकेकर संग ग्लास कों खालीकर दिया औऱ मेनका कों फिन सें अपने लगभग खींच लिया औऱ मेनका केँ गले मे हाथ डालकर उसकी आंखों मे झांकते हुए बोला
" आप् हमारे संगसंग परममजा महसूस करना चाहती हैं!
मेनका विक्रम कि बात सुनकर लज्जा सें लाल होँ गई औऱ उसकी उसकी सांसे इतनीतेज गति सें चल पड़ी मानो उसकी चुचियों मे एक् दूसरे सें ज़्यादा उछलने कि जंगलग गई औऱ मेनका उसकीगोद सें निकल गई औऱ बोलि:"
" हायराम पुत्र! इतनी अश्लील बाते शोभा नहि देती आपको!
इतना कहकर मेनका नें ग्लास औऱ बॉटल कों नीचेरख दिया जिससे उसकी साड़ी उसकीकमर पऱ सें उतर गई औऱ मेनका नें ढकने कि कोशिश कि नहीं कि तोँ विक्रम उसकीकमर कों देखते हुए बोला:"
" आपकाबदन इतना ज़्यादा चिकना हें कि साड़ी भि उतरउतर पड़रही हैं आपकी!
मेनका अबफिन सें बैड पऱ चढ़ गई औऱ पर्दो कों ठीक सें बंद करनेलगी जिससे उसकी साड़ी पूरीतरह सें उसकेबदन सें खिसक गई औऱ मेनका नें पर्दो कों ठीक करनेलगी तौ विक्रम बोला
" हाय मेरी मेनका! इतनी बेताबी कि परदे भि स्वयं हि बंदकर रही हौ मेरीजान!
मेनका कुछ नहि बोलि औऱ विक्रम कि आंखो मे देखते हुए एक् जोरदार अंगड़ाई ली औऱ मानोखाट पर्र जलजला आँ गय़ा क्योंकि मेनका कि एक् मम्मों बाहर् निकलआई औऱ मेनका केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी
" अह्ह्ह्हह म्म्म यह क्याँ होँ गय़ा पुत्र!!
इतना कहकर मेनका नें अपनी मम्मों कों अपनेहाथ सें ढक लिया तोँ विक्रम नें मेनका कों अपनी बांहों मे भर लिया औऱ खाट पऱ गिरपडा औऱ उसकीकमर पर्र हाथ लेँ जाकर उसकी ब्रा कों खोल दिया तौ मेनका उससे कसकर लिपट गई औऱ बोलि:"
" अह्ह्ह्ह पुत्र!
विक्रम नें उसकी चुचियों कों अपने दोनो हाथों मे भरतेहुए उसके होंठो कों अपने होंठो मे भर लिया औऱ मेनका भि उसके होंठो पर्र टूट पड़ी! विक्रम कसकसकर उसकी चूचियों कों मसलरहा थां जिससे मेनका कां मुंह खुला औऱ विक्रम कि जीभ उसके मुंह सें घुस गई औऱ मेनका कां रहासहा धैर्य भि जवाबदे गय़ा औऱ वोँ स्वयं अपनीजीभ कों विक्रम कि जीभ सें चूसने लगीं! मेनका विक्रम कों पूरी ताकत सें अपनी बांहों कसरही थि जिससे कभी मेनका उपरआती तौ कभी विक्रम ऊपर! नतीजा मेनका कि साडी उसके शरीर सें पूरीतरह सें उतर गई औऱ विक्रम नें मेनका कि चुचियों कों छोड़ते हुएउसे पकड़कर अपने नीचेदबा लिया औऱ उसके होंठो कों पूरी ताकत सें चूसने लगा! मेनका नें अपने दोनो हाथो कों उसकीकमर मे लपेट दिया औऱ उससे कसकर लिपट गई!एक् जोरदार किस केँ बाद दोनो केँ होंठअलग हुए तौ मेनका आंखेबंद किएहुए लंबी लंबी सांसे लेनेलगी औऱ विक्रम नें अपने पकड़े उतारते हुएऊपर सें नीचे तक मेनका केँ नंगे शरीर कों देखा हल्की लाल रोशनी मे मेनका कां शरीर बेहद कामुक लगरहा थां! मेनका कि सुंदर चूचियां मस्ती सें हल्की हल्की उछलरही थि!
विक्रम नें अपनेहाथ कों मेनका कि जांघो केँ बीच मे रखा तौ एक् झटके सें मेनका कि आंखेखुल गई औऱ मेनका अपनी बुर केँ आसपास पूरे नंगे विक्रम कि उंगलियां पाकर लज्जा सें दोहरी होँ गई औऱ एक् झटके केँ संगपलट गई
मेनका केँ पलटते हि जैसे कमाल होँ गय़ा क्योंकि उसकी नंगीकमर औऱ गांड़ विक्रम केँ सामने आँ गई औऱ विक्रम नें मेनका कि कमर कों चूम लिया औऱ उसकी गांड़ कों हाथो सें सहलाने लगा तौ मेनका केँ मुंह सें अहह निकल गई! विक्रम नें जैसे हि अपनीजीभ कों उसकीकमर पऱ पूरी लंबाई मे रगड़ा तौ मेनका कि टांगे खुलती चली गई औऱ विक्रम नें अपने दोनो हाथों कों मेनका कि गांड़ केँ बीच मे घुसा दिया औऱ मेनका जोर सें सिसकउठी औऱ अपनी टांगो कों कसती हुई बोलीं:"
" हाय विक्रम! अह्ह्ह्ह मत कीजिए पुत्र! हमारी जान लेकर रहोगे क्याँ आज!!
विक्रम नें मेनका कि दोनो टांगो कों फैला दिया औऱ उसकी जांघो केँ ऊपरबैठ गय़ा जिससे मेनका अब चाहकर भि अपनी टांगे बंद नहि कर सकती थि! विक्रम नें मेनका कों गांड़ केँ दोनो हिस्सो कों जोर सें मसला तोँ मेनका सिसकउठी औऱ विक्रम नें उसकी चौड़ी चिकनी गांड़ कों अबजोर जोर सें मसलना शुरुआत कर दिया तोँ मेनका जोरजोर सें सिसकने लगी औऱ उसकी बुर सें रस कि धारफूट गई तौ मेनका नें एक् हाथ कों अपने बुर केँ नीचेरख लिया जिससे उसकी टांगे पूरीतरह सें खुल गई औऱ विक्रम नें अब उसकी गांड़ केँ बीच मे अपनीनजर डाली तोँ उसे मेनका कि गांड़ कां बेहद गुलाबी रंगतलिए कसाहुआ खुलता बंद होताछेद नजरआया औऱ विक्रम नें अपनी उंगली कों मेनका कि गांड़ केँ बीच मे घुसा दिया औऱ जैसे हि उसकी उंगली गांड़ केँ छेद केँ लगभगआई तौ मेनका नें जोर सें अपनी गांड़ केँ छेद कों कस लिया औऱ उसकी आंखो मे देखते हुए इंकार मे अपनी गर्दन कों हिलाया औऱ विक्रम नें मेनका कि आंखो मे देखते हुए जैसे हि अपनी उंगली सें उसकी गांड़ केँ छेद कों छुआ तौ मेनका केँ मुंह सें जोरदार मस्ती भरीअहह निकल पड़ी
" अअह्ह्ह पुत्र! आह सीईईईईआईआई वहांमत छुईएहमे!!;
मेनका विक्रम कि मोटी उंगली कों अपनी गांड़ केँ छेद पऱ महसूस करते हि अपनेछेद कों जोर सें अंदर कि तरफकस लिया औऱ विक्रम छेद पऱ पूरी गोलाई मे उंगली फेरते हुए सिसक पड़ा:"
" हायराम मेरी मेनका! आपकी गांड़ कां छेदसच मे बेहद सुंदर हें! क्या बात है माता देखो तोँ कितना ज़्यादा कसाहुआ हैं!!
मेनका उत्तेजना सें कांपती हुई जोरजोर सें सांसे लें रही थि औऱ जैसे हि उसने विक्रम कि सांसे अपनी गांड़ पर्र महसूस करी तोँ उसके रोंगटे खड़े हौ गए औऱ उसकी मंशा समझते हुए विक्रम कों अपनेऊपर सें धकेलने कां प्रयास करनेलगी मगर विक्रम नें मेनका कि गांड़ केँ दोनो उभारों पर्र अपनी पर्र अपनी अपने होंठ टिकादिए औऱ मेनका जोर सें सीत्कार करउठी
" अअह्ह्ह्हह सीईईईईईईई यूईईईआईआई आह्ह्ह्ह्ह मत कीजिए महाराज!
विक्रम मेनका कि सिसकी सें जोश मे आँ गय़ा औऱ जीभ निकालकर उसकी गांड़ केँ उभारों कों चाटने लगा तौ मेनका अपनेबदन कों बेड पऱ पटकने लगी औऱ जैसे हि विक्रम कि जीभ गांड़ केँ छेद कि तरफ बढ़ने लगी तौ मेनका कि सांसे जैसे रुकने कों होँ गई औऱ मेनका सें अब बर्दाश्त नहि हुआ औऱ उसने अपनी सारी शक्ति समेटते हुए विक्रम कों पलट दिया औऱ एक् झटके केँ संग सीधीकमर केँ बललेट गई औऱ विक्रम बिनादेर किए उसकेऊपर फिन सें चढ़ गय़ा औऱ उसकी दोनो चूचियों कों पूरी ताकत सें मसलने लगा तौ मेनका केँ मुंह सें दर्दभरी अहह निकल पड़ी औऱ जोर सें सिसकते हुए बोलीं:"
" अह्ह्ह्ह्ह थोडा प्रेम सें पुत्र! मार हि डालोगे क्याँ हूं हमेआज!
विक्रम कां नंगा लन्ड मेनका कि गीली बुर केँ होंठो कों चूमरहा थां औऱ मेनका भि अपनी गांड़ उठाकर अपनी बुर कों लन्ड सें मिलारही थि औऱ विक्रम मेनका कि गर्दन चाटते हुए उसके कानो मे धीरे-धीरे सें बोला:"
" आपकी गांड़ हमें बेहद मनपसंद आई माता! देखने दीजिए न् फिन सें हमे एक् बार!
मेनका नें उसकीपीठ मे मुक्का मारते हुए बोलि:"
" कितने गंदे होँ आप् पुत्र! वहां गंदा होता हें!! उधर नहीं देखते!
विक्रम
विक्रम उसकी आंखो मे देखते हुए कामुक तरीके सें अपनीजीभ बाहर् निकाल कर मोड़ते हुए बोला:"
" अह्ह्ह्ह्ह हम् आपकी गांड़ कों छोड़ेंगे नहि! आज नहीं तोँ कल वोँ हमारी होगी!!!
मेनका नें उसकीतरफ बुरा सां मुंह बनाकर देखा औऱ उसकाहाथ पकड़कर अपनी भीगी बुर पर्र रख दिया औऱ कामुक अंदाज मे सिसकी
" आह्ह्ह्ह्ह यूईईईईए यह कैसीलगी पुत्र!
विक्रम नें उसकी एक् मम्मों कों मुंह मे भर लिया औऱ उसके चूचुक कों चूसते हुए बोला उसकी बुर कों सहलाते हुए बोला:"
" आपकी तौ बुर भि पूरी रसीली होँ गई हैं! हायरे देखो तोँ केसेगरम होकरदहक रही हैं राजमाता!
मेनका नें अपनी जांघो मे उसका लन्ड कस लिया औऱ सिसकते हुए बोलीं:"
" हाय महराज आपका भि तौ देखो कितना सख्तहुआ हैं आज!
विक्रम नें मेनका केँ मुंह सें लन्ड कि तारीफ सुनी तौ उसने लन्ड केँ सुपाड़े कों उसकी बुर केँ छेद पऱ रगड़ दिया औऱ बोला:"
" हमारा क्याँ माता ! नाम लेकर बताए नाँ मेनका!
मेनका लज्जा सें लाल होँ गई औऱ उसके लन्ड कों अपनी बुर केँ होंठो सें चिपका कर बोलि:"
" अह्ह्ह्ह महाराज! हमे नहींपता!
विक्रम नें मेनका कि बुर केँ छेद पऱ सुपाड़े पर्र टिका दिया औऱ दबाव देतेहुए बोला:"
" अह्ह्ह्ह्ह बताए नहीं तोँ यहघुस जायेगा आपकी बुर मे मेरी माता!
मेनका जानती थीं कि आज विक्रम लन्ड नहीं घुसा सकता क्योंकि आज केँ दिन " मोहिनी" कों प्रेम किया जाता हें चुदाई नहीं तौ मेनका बोलि:"
" अह्ह्ह्ह पुत्र! हम् मत सताओहमे!!
विक्रम नें मेनका कि मम्मों कों मुंह मे भर लिया औऱ जोरजोर सें चूसने लगा तोँ मेनका उसकेसिर कों सहलाने लगी औऱ सिसकउठी:"
" अअह्ह्ह्हह चूसो पुत्र! अपनी माता केँ पपीते चूसो मेरे पुत्र!
विक्रम नें उसकी दूसरी मम्मों कों हाथ मे भर लिया औऱ औऱ दूसरी केँ चुचक कों दांतो सें हल्का सां काटते हुए बोला:"
" अह्ह्ह्ह्ह् मेनका मेरीजान! पपीते नहीं चूचियां हें यह मेरी माता मेनका कि चूचियां!!
औऱ जैसे कमाल होँ गय़ा औऱ मेनका पूरीतरह सें मदहोश होतेहुए उसकेसिर कों अपनी मम्मों पर्र दबाते हुए सिसकउठी:"
" आह्ह्ह्ह्ह् पुत्र! मेनका कि चूचियां! चूसो मेरी चूचियां!
मेनका केँ मुंह सें चूचियां सुनकर विक्रम नें जोरजोर सें उसकी चूचियां चूसनी शुरुआत कर दि औऱ मेनका जोरजोर सें सिसकते हुए अपनी बुर कों लन्ड पर्र रगड़रही थीं औऱ विक्रम अपने दूसरे हाथ कों मेनका कि नंगी गांड़ पऱ लें गय़ा औऱ मदहोश मेनका कि गांड़ कि दरार मे अपनी उंगलियों कों फिरा दिया तोँ मेनका केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ उसकी बुर लन्ड पर्र लिपटती चली गई औऱ मेनका उसकी छाती सें चिपकती हुई सिसकउठी
" आह्ह्ह्ह क्याँ गजब करते हौ विक्रम! हायराम मेरेवीर पुत्र!!
मेनका अब पूरीतरह सें मदहोश जोरजोर सें सिसकते हुए अपनी बुर लन्ड केँ सुपाड़े पर्र रगड़रही थि औऱ मेनका कि बुर सें बहतेहुए रस सें उसकी गांड़ पूरीतरह सें चिकनी हौ गई! विक्रम नें अपनी एक् उंगली कों गांड़ केँ छेद पऱ घुमाया तौ मेनका उतावलापन उठी औऱ एक् समय केँ लिए अपनी गांड़ कों उचकाते हुए लन्ड केँ सुपाड़े कों बुर केँ मुंह पऱ चिपकाते हुए अपनी टांगो कों कस लिया औऱ विक्रम नें जैसे हि मेनका कि गांड़ केँ छेद पर्र उंगली कां दबाव दिया तौ मेनका नें डर केँ मारे अपनी गांड़ ऊपर कि तरफ उठाई औऱ नतीजा लन्ड कां मोटा तगड़ा सुपाड़ा उसकी बुर मे आधाघुस गय़ा तोँ मेनका दर्द औऱ मस्ती सें कराहउठी
" आह्ह्ह्हह्ह मार डालाहमे आपने पुत्र!
दर्द सें कराहती हुइ मेनका पीछे कों हुईँ तोँ उसकीकसी हुई बुर नें लन्ड कों छोड़ने सें इंकार सां कर दिया औऱ उल्टा विक्रम कि उंगली उसकी गांड़ केँ छेद मे घुसती चली गई औऱ मेनका दर्द केँ मारेजोर सें कराहउठी औऱ विक्रम सें कसकर लिपट गई
" अह्ह्ह्ह्ह यूईईईईई सीईईईईईईए अरे पुत्र! छोड़ दीजिए हमे!मर जायेंगे हम्!
विक्रम नें मेनका कां मुंहचूम लिया औऱ दूसरे हाथ कों उसकीकमर मे लपेटकर कसकर अपने सें चिपका लिया औऱ बोला
" अह्ह्ह्ह्ह मेरीजान ! मेरी कामुक माता! समझ नहि पारहा हूं कि आपकी बुर ज़्यादा कसी हुईँ हैं याँ गांड़! सच मे कमाल होँ आप् राजमाता!!
मेनका नें उसकीकमर मे अपने नाखून गड़ादिए औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे सिसकी
" यूईईईईईई महाराज मेरे पुत्र! अह्ह्ह्हह केसे फंसा दिया हैं हमे नं आगे हौ पारही हूं न् पीछे! दोनोतरफ दर्द होता हें!
विक्रम नें मेनका कि गांड़ केँ अंदर उंगली कों घुमाया तौ मेनका जोर सें बेचैनी करआगे कों हुईँ औऱ लन्ड कां पूरा सुपाड़ा उसकी बुर मे घुस गय़ा औऱ मेनका कि बुर केँ दोनो होंठ गुब्बारे कि तरह फैलकर सुपाड़े केँ चारोतरफ कसगए औऱ मेनका जोर सें कराहउठी
" अअह्ह्ह्हह पुत्र!!! फट गई आपकी माता कि बुर!
विक्रम मेनका केँ मुंह सें बुर सुनकर पूरेजोश मे आँ गय़ा औऱ उसने अपनी उंगली कों मेनका कि गांड़ मे पूरे एक् इंच सरका दिया तोँ मेनका दर्द सें कराहकर उससे लिपटती चली गई औऱ विक्रम बोला:"
" अह्ह्ह्ह्ह माता आपकी गांड़ औऱ बुर दोनो कितनी गरम हौ रही हें!
मेनका दर्द औऱ मजे सें कराहरही थि औऱ विक्रम कों लगरहा थां मानो उसका लन्ड किसी तपती हुइ भट्टी मे डाल दिया गय़ा हें औऱ विक्रम उससे लिपटे हुएजोर जोर सें धक्के लगारहा थां औऱ लन्ड बुर नें पूरीतरह सें कसकर पकड़रखा थां जिससे विक्रम आधाइंच भि ठीक सें नहि हिलापा रहा थां औऱ मेनका कि गरम औऱ कसी हुईँ बुर कां असर लन्ड पऱ हुआ औऱ विक्रम केँ लन्ड मे उबाल आनां शुरुआत होँ गय़ा औऱ अनुभवी मेनका जानती थि कि अब विक्रम अपनेचरम पऱ पहुंचने वाला हैं तोँ उसने अपनीगोल मटोल चुचियों कों उसकी छाती सें कसकर रगड़ना शुरुकर दिया औऱ विक्रम मेनका कि गांड़ मे उंगली घुसाए जोर सें सिसकउठा क्योंकि उसके लन्ड नें एक् जोरदार पिचकारी मेनका कि बुर केँ अंदरमार दि
" आह्ह्ह्ह्ह यूईईईईईईईई सीईईईईईईई क्या बात है माता!
मेनका सें भि बर्दाश्त नहींहुआ औऱ उसकी बुर भि वीर्य कों महसूस करतेहुए अपनारस छोड़ने लगी औऱ मेनका विक्रम सें कसकर लिपट गई तौ विक्रम नें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोला:"
" आह्ह्ह्ह्ह मेरी मोहिनी माता! कल आपकी बुर मे मेरा लन्ड होगा पूरे कां पूरा!
मेनका भि उससेजोर सें चिपक गई औऱ उसके होंठ चूसते हुए बोलि:"
" ईईई सीईईईईईईई पुत्र! पूरा नहीं लें पाएंगे हम्!
विक्रम नें मेनका केँ होंठो कों जोर सें चूसा औऱ बोला:"
" अअह्ह्ह्हह मेरीजान! आप् लें पाएगी! पुत्र कां पूरा लन्ड माता नहीं लेगी तौ फिनकौन लें पायेगा!
मेनका उसकीबात सुनकर जोर सें शर्मा गई औऱ बोलि:"
" कितने निर्लज्ज हौ गए होँ गए होँ पुत्र आप्!
उसकेबाद दोनो खिलखिला करहंस पड़े औऱ एक् दूसरे कि बांहों मे सोगए!!!!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Next part mein bada twist
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