शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
salmaa jabbar ko vikram के khilaaf bhadka kr अपना ullu sidha kr rhi h। Jabbar aur vikram के bich ladaai krwa kr jabbar ko maarna chahti ismein agr vikram bi mara jata h too salmaa ko कोई apatti nahii hongi। halanki usse pahle kaash salmaa kaa bhed jabbar aur vikram के samne khul jaye too majaa hi ajaye। phir chahe Seema yeh sachaai vikram aur jabbar tak pahuncha de bss।
Ab yeh Kya nvaa natak kr rhi menka.? Ab yeh too mein pehli baar sun rah ho ya padh rah ho के Raja apne kashagrah(treaser) से dhan kaa istemal नहीं kr skta। Usko majduri krni hongi। Kya bakwas h। Bhaand mai jaye aisi menka saali ne dimag bura kr दिया h। Ab Raja jung ladna aur rajya के dekhbaal krne के liye अपना dimag khapata h। Kya yeh befazool karta h। waqt -2pr apne as-pados के rajaon से deal karna yeh sirdardi Kya Majduri से km h। Sala rath-2 bhar नहीं so skte kbhi kbhi इस fikr mai की dushmani कब akraman kr dega कोई नहीं janta। Ab yeh sab chhod kr vikram(raja) ko Majduri karna चाहिए। Jabbar aur salmaa jese dushmani से ldne के liye menka apni choot khul kr ldne jayegi। Vikram ko menka से duri bnaa लेना चाहिए। Menka jesi stri rajya aur Raja dono की sehat के liye haanikarak hu skta h। nahee चाहिए tairi choot bhot milti h aisi choot।
आप् नाम कि तरह हि unique हैं औऱ star कि तरह एकदम चमकिला सुनेहरा लिखते हौ सच मे अद्भुत भाग
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
मेनका औऱ विक्रम दोनो अपने कक्ष मे जाकरसो गए औऱ दोनो कि अगली मुलाकात नाश्ते पऱ हुइ जहां दोनों बिनाबात किएहुए खानां खारहे थें तोँ मेनका बोलि:"
" बिंदिया खानां तोँ अच्छा बनाई हौ आप्! क्यूं महराज आपको कैसालगा ?
विक्रम नें अनमने ढंग सें जवाब दिया:" अच्छा हि हें! यह तौ रोज हि अच्छा बनाती हें!
बिंदिया आज दोनो कां एक् दूसरे केँ प्रति बर्ताव देखकर समझ गई कि कुछ तौ जरूरहुआ हें हाथ जोड़कर बोलीं:"
" वैसे तौ राज परिवार केँ बीच मे बोलने कां मुझेकोई अधिकार नहीं हें नहींआज आप् दोनो कि यह शांति मुझे कष्टआया रही हें राजमाता!
मेनका:" अरे नहीं नहीं बिंदिया ऐसाकुछ नहि हैं!
बिंदिया:" माफ़ कीजिए राजमाता! मगर आप् हंसती हुईँ अधिक अच्छी लगती हैं!
मेनका उसकीबात सुनकर जोर सें हंस पड़ी औऱ बोलीं:"
" बसअबखुश हौ नां!
बिंदिया केँ चेहरे पर्र चमक आँ गई औऱ यहसभी देखकर विक्रम भि मुस्कुरा दिया औऱ बोला:"
" बड़ी अधिक चिंता करती होँ राजमाता कि!!
बिंदिया बस हल्की सि मुस्कुरा दि तौ मेनका बोलि:"
" करेगी क्यो करेगी मैनेइसे अपनी छोटी बेहन जोँ मान लिया हैं महाराज!
विक्रम:" अच्छा हैं राजमाता! आपने तौ बिंदिया कों अपने पक्ष मे कर लिया हैं!
बिंदिया:" मेरा सौभाग्य हें राजमाता जौ आप् मुझ गरीब कों इतनामान देरही हैं! महाराज आपसे मेरी विनती हें कि कभी भूले सें राजमाता कां दिलमत दुखाना क्योंकि इनकाअब आप् हि सबसे बड़ा सहारा होँ!
विक्रम नें आगे बढ़कर उसके हाथो कों थाम लिया औऱ बोला:"
" बिंदिया आप् निश्चित रहो! राजमाता मेरेलिए भि सभीकुछ हें औऱ मे इन्हें कभी किसीचीज कि कमी नहि होने दूंगा! अच्छा राजमाता मे अबराज सभा केँ लिए जाऊंगा औऱ अब भि संग हि चलिए!
मेनका:" माफ चलिए महाराज! मे आने कि कोशिश करूंगी!
विक्रम चलेगए तौ मेनका नें बिंदिया कों गलेलगा लिया औऱ बोलि:" अरे बिंदिया सच मे तूनेआज मेरादिल जीत लिया हैं! तुम्हारी तरफ किसी भि चीज कि दिक्कत होँ तोँ मुझे बताना!
बिंदिया:" आप् खुशरहे बसयही मेरी खुशी हें! वैसे हमारे महराज बेहद अच्छे औऱ प्रजा केँ सेवक हें! राजा बनने केँ कुछ हि दिनों मे उन्होंने प्रजा केँ लिएकई करमाफ करदिए हें! आज महराज नें जोँ राज्य केँ लिएकाम किए हें उनकी हि चर्चा होगी! मेरे विचार सें आपको जरूर जानां चाहिए क्योंकि आप् अपने पुत्र पर्र गर्व महसूस करेगी!
मेनका विक्रम कि तारीफ सुनकर खुश हुईँ औऱ बोलि:"
" मन तौ नहीं थि मगर तुम् बोलती हौ तोँ जरूर जाऊंगी!
बिंदिया:" मेरे बोलने यह भि औऱ राजमाता यह भि यह कर्तव्य होता हें कि वोँ भि एक् सभा कां हिस्सा बने क्योंकि यहसभा महीने मे एक् हि बार होती हें! वैसे हि हमारा राज त्योहार " मोहिनी " भि तौ दोदिन बाद हि हें राजमाता!
मेनका त्योहार कां नाम सुनकर एक् लम्हा केँ लिएसोच मे डूब गई औऱ उसे अपने पति कि याद आँ गई कि केसेइस त्योहार पर्र वोँ उनकेलिए सजती संवरती थि औऱ बोलीं:"
" जानती हौ " मोहिनी " त्यौहार मुझे सबसे ज़्यादा पसन्द थां क्योंकि इसदिन मेरे पति मेरा बहोत ध्यान रखते थें!
बिंदिया:" रखेंगे क्यूं नहींभला आप् हें हि इतनी ख़ूबसूरत कि बिना श्रंगार केँ भि मर्दों कों तोँ छोड़ो स्त्रियों केँ भि होश उड़ा देती हौ राजमाता!
मेनका उसकीबात सुनकर हल्की सि मुस्कान अपने होंठो पऱ लाती हुईँ बोलीं:"
" बहोत अधिक बाते करती होँ! अच्छा मे राजसभा सें होकरआती हूं!
बिंदिया:" ठीक हें राजमाता! पता नहि इसबार " मोहिनी" त्योहार होगा कि नहीं! मुझे तौ सबसे ज़्यादा मनपसंद यहीआता हें! इसदिन हम् औरतों कों कोईकाम नहीं करना होताबस अच्छे सें श्रृंगार करो औऱ रंगीन वस्त्र धारण करकेखूब सारी मस्ती रातभर!
मेनका:" बहोत ज़्यादा चालक होँ गई हौ बिंदिया! होगा क्यूं नहीं होगा बिंदिया! मे वचन देतीहु कि उदयगढ़ कि हर स्त्री कों यह त्यौहार मनाने कां मौका मिलेगा! अच्छा अब मे चलतीहु!
इतना कहकर मेनका निकल औऱ राज दरबार मे पहुंच गई जहांहाल आज पूरीतरह सें खचाखच भराहुआ थां! राजमाता कों देखते हि सबलोग अपनी गद्दियो सें खड़े हौ गए औऱ जोरजोर सें राजमाता कि जय हौ राजमाता कि जय होँ केँ नारे लगाने लगे!
मेनका अपनी गद्दी पर्र विराजमान होँ गई तौ सबलोग अपनी गद्दियो पऱ विराजमान होँ गए औऱ मान सिंह बोले:"
" महराज कों कार्यभार सभाले अभि सिर्फ एक् महीना हि हुआ हैं मगर उन्होंने अपनी बुद्धिमता सें कार्य करतेहुए उदयगढ़ केँ इतिहास कों हि बदल दिया हैं!
सबलोग कौतुहल सें देखने लगे तौ मान सिंहआगे बोले:"
" महाराज विक्रम नें कार्य भर संभालने केँ बाद हमारे राज्य केँ कपास केँ व्यापार कों न् मात्र देश केँ दूर दराज केँ राज्यो अपितु विदेश तक फैला दिया हैं! रेशम केँ कपड़े केँ उच्च श्रेणी कि गुणवत्ता केँ लिए आधुनिक तकनीक सें बने यंत्रों कां प्रयोग हुआ औऱ इसकेसंग हि दूसरे अनाज व्यापार जैसे अनाज औऱ दालों कों दामों पऱ विदेश मे सौदा किया हें ! इनसब कार्यों कों करने सें राज्य कि आयतीन गुनी हौ गई हैं औऱ राज्य केँ कोषागार कों पूरीतरह सें भर दिया हैं! संग हि पड़ोसी राज्यों मालवा औऱ शाहपुर कि भि आपदा मे सहायता करी हें जिससे
पूरा राज्य तालियों कि गड़गड़ाहट सें गूंजउठा औऱ सबलोग जोरजोर सें विक्रम जीजय जयकार करनेलगे! मेनका भि आंखे खोले आश्चर्य सें अपने बेटे कि तरफदेख रही थि कि जहां एक् ओर वोँ उससे तोहफा लेने सें मनाकर रही थि वही दूसरी तरफ उसके बेटे नें तोँ राज खजाने कों नए आयाम तक पहुँचा दिया थां औऱ अपने कार्य कों बिलकुल सही तरीके सें अंजाम दिया थां!
विक्रम अपने गद्दी सें खड़ेहुए औऱ सब कों शांत होने कां इशारा किया तौ जनता शांत होँ गई औऱ विक्रम बोले:"
" मेरी प्यारी प्रजा मैनेयह सभी अपने अकेले दम पर्र नहीं किया हें बल्कि इसमें राजमाता नें भि अपने बहुमूल्य सुझाव हम् दिए थें तभी जाकरयह सभी कार्य हौ पाया हैं!
मेनका हैरानी सें विक्रम कि तरफदेख रही थि औऱ देखते हि देखते पूरीसभा मे विक्रम केँ संगसंग राजमाता कि भि जय जयकार होनेलगी! मेनका पूरीसभा मे अपने द्वारा ऐसा सम्मान दिलाए जाने सें अभिभूत होँ गई औऱ दोनोहाथ जोड़ते हुए अपनी गद्दी सें खड़ी होँ गई! विक्रम केँ इशारे पर्र एक् बार प्रजा फिन सें शांत होँ गई औऱ विक्रम बोले:"
" हमारा अगला उद्देश्य पैदावार बढ़ाने केँ संग उदयगढ़ केँ हरआम नागरिक कों एक् सैनिक केँ रूप मे रेडी करना हैं ताकि जरूरत पड़ने पऱ वोँ राज्य केँ प्रति अपनी जिम्मेदारी निभासके!
सब नें हाथ उठाकर विक्रम कि बात कां समर्थन किया औऱ आगे विक्रम बोले:"
" कल सें राज त्यौहार " मोहिनी" शुरुआत होँ रहा हें औऱ हम् जानते हें कि आप् सब केँ मन मे विचार होंगे कि ऐसीदुख भरी स्थिति मे त्यौहार मनाए याँ नहीं तोँ हम् उदयगढ़ केँ महाराज होने केँ नातेयह हुक्म देते हें कि यह त्यौहार सबलोग पूरीधूम धाम केँ संग मनाए औऱ औऱ एक् परिवार कों राज खजाने सें 2500 स्वर्ण मोहरे प्रदान कि जाए ताकि उल्लास केँ संग त्यौहार मनासके! आने वाले टाइम मे हम् कई युद्ध लड़ने होंगे तौ सब औरतों सें मेरा निवेदन होगा कि आकर्षक रंगीन वस्त्र पहने औऱ खूब श्रंगार करे ताकि आपके पति कों लंबीआयु कां आशीर्वाद मिलजाए!
एक् समय केँ लिएहॉल नें सन्नाटा छा गय़ा क्योंकि किसी कों भि उम्मीद नहि थि ऐसी विकट परिस्थितियों मे भि महाराज त्यौहार मनाने कां निर्णय ली सकते हें तोँ सबने राजमाता कि तरफ देखा क्योंकि नारी होने केँ नाते" मोहिनी" त्यौहार पर्र आखिरी निर्णय लेने कां अधिकार उनके हि पास होता हें!
मेनका:" हमारा आदेश भि यही हें कि" मोहिनी त्यौहार " मनाया जाएगा औऱ संग हि संग हम् आदेश देती हें कि सब घरों कों मिलने वाली राशि कों 2500 मोहरो सें बढ़ाकर 5000 करदिए जाए!
इतना कहकर मेनका नें विक्रम कि तरफ देखा औऱ विक्रम नें स्वीकृति मे अपनी गर्दन कों हिला दिया औऱ पूरीसभा मे एक् अद्भुत जोशभर गय़ा औऱ सबलोग जोरजोर सें विक्रम औऱ मेनका कि जय जयकार करनेलगे!
विक्रम औऱ मेनका कि अगली मुलाकात दोपहर केँ भोजन पऱ हुई औऱ मेनका खानां खातेहुए बोलि:"
" महाराज हमने आपका खजाना कुछ ज़्यादा तौ नहि लूटा दिया नाँ आज ?
विक्रम:" नहीं माता! आखिरयह सभी खजाना हमे प्रजा कि मेहनत सें हि तोँ हासिल हुआ हें!
तभी बिंदिया किचन सें कुछ पकवान लेकर आँ गई औऱ बोलीं:"
" लीजिए यह पकवान खाए नं राजमाता! शुद्ध देसीघी सें बनेहुए हें!
मेनका नें एक् पकवान लिया औऱ बिंदिया सें बोलीं:" अपने महाराज कों ज़्यादा खिलाए क्योंकि यह आजकल बड़ी मेहनत कररहे हें औऱ आगे औऱ भि अधिक करेंगे!
इतना कहकर मेनका मुस्कुरा दि औऱ बिंदिया नें विक्रम कि थाली मे ढेर पकवान रखदिए औऱ बोलीं:" लीजिए महाराज! आप् उदयगढ़ केँ इतिहास केँ सबसे ताकतवर औऱ संपन्न राजाबन गए हें!
विक्रम नें आधे पकवान वापिस बिंदिया कों दिए औऱ बोले:"
" यहसभी अपनी राजमाता कों भि अच्छे सें खिलाए क्योंकि यह भि तौ मेरीसंग कंधे सें कन्धा मिलाकर मेहनत करती हैं!
इतना कहकर विक्रम नें बिंदिया कि नजर बचाकर अपनीहाथ मेनका कि जांघ पर्र रख दिया तोँ मेनका कां शरीर कांपउठा औऱ बिंदिया उसके सामने पकवान रखती हुइ बोलि:"
" लीजिए राजमाता आप् औऱ खाइए! महाराज तौ पहले सें बहुत शक्तिशाली प्रतीत होते हें! उनकासंग देने केँ लिए आपको हि ज़्यादा पकवान खाने कि जरूरत हैं!
बिंदिया कि बात सुनकर मेनका अंदर सें सिहर गई औऱ बोलीं:"
" इतने भि कमजोर नहीं हैं हम् बिंदिया जितना आप् औऱ आपके महाराज हमेसमझ रहे हौ! पूछिए अपने महराज सें कभी हम् मेहनत करने सें पीछेहटे हैं क्याँ ??
मेनका नें विक्रम केँ हाथ पऱ अपनाहाथ रख दिया औऱ अपनी जांघें स्वयं हि उसकेहाथ सें सहलाने लगी ! बिंदिया राजमाता कि बात सुनकर बोलि:"
" मेरा वोँ मतलब नहि थां राजमाता! आप् महाराज कों न् मात्र टक्कर दे सकती होँ बल्कि हरा भि सकती होँ क्योंकि आखिरकार आप् उनकी माता हुइ औऱ माता हमेशा बच्चो सें आगे हि रहती हैं!
बिंदिया कि बात सुनकर मेनका मुस्कुरा उठी तौ विक्रम बोले:"
" पुत्र जब बड़ा होँ जाए तौ फिन उसके अंदर अपार शक्ति आँ जाती हैं! वोँ बातअलग हें कि पुत्र अपनी माता केँ सामने कभी शक्ति प्रयोग नहि करते हें!
मेनका नें विक्रम कि बात सुनकर अपनी जांघो कों खोल दिया औऱ उसकाहाथ अपनी बुर पऱ रखती हुईँ बोलीं:"
" बिंदिया कह दीजिए अपने महाराज सें अपनी अपार शक्तियों कां प्रयोग करे क्योंकि हम् भि देख्ना चाहते हें कि हमारे अंदर कितनी ताकत हैं!
इतना कहकर मेनका नें अपनी बुर कों विक्रम केँ हाथ मे उभार दिया तौ विक्रम नें उसकी बुर कों मुठ्ठी मे भर लिया औऱ बोले:"
" बिंदिया समझादो अपनी राजमाता कि कहीं हमसे मुकाबला करने केँ चक्कर अपनाहाल बेहाल न् कर बैठे!
विक्रम नें मेनका कि बुर कों जोर सें मसल दिया तौ मेनका मुंहबंद करके अंदर हि अंदर सिसकउठी औऱ बिंदिया केँ विक्रम कि बात सुनकर विक्रम कि थाली सें भि आधे लड्डू उठाए औऱ सारे मेनका कि थाली मे रखदिए औऱ बोलि:"
" फिन तौ आप् हि सारे लड्डू खा लीजिए राजमाता क्योंकि महाराज राज्य केँ सबसे ताकतवर इंसान हैं औऱ उनके सामने टिक पाना आपकेकिए आसान नहीं होगा!
मेनका नें विक्रम केँ हाथ कों पूरी ताकत सें अपनी जांघो मे कस लिया औऱ नाराजगी सें बिंदिया कि तरफ देखते हुए बोलीं:"
" वाउ बिंदिया आखिर मे आप् भि महाराज कि हि तरफझुक गई हौ!
बिंदिया:" ऐसा न् कहे राजमाता बल्कि हमने तोँ सारे लड्डू आपको हि देकर आपकासंग दिया हें!
बिंदिया कि बात सुनकर विक्रम जोर सें हंस पड़ा औऱ बोला:"
" अच्छा ठीक हें मजाक बहोत होँ गय़ा! चलिएअब हमेकाम हें तोँ जानां हि होगा!
मेनका नें अपनी जांघो कों थोडा सां ढीला किया तौ विक्रम कां हाथ बाहर् आँ गय़ा औऱ विक्रम उठ खड़ेहुए तौ मेनका भि संग हि संगचल पड़ी औऱ जैसे हि दोनो मेनका केँ कक्ष केँ सामने गए तौ मेनका बोलि:"
" हमारा " मोहिनी" तोहफा कहां हें महाराज ?
विक्रम:" आप् हमसे कहां तोहफा लेना पसन्द करती हें राजमाता ?
मेनका:" हमसेसच मे भूल हुइ हैं महराज जौ सच्चाई समझ नहींपाए! मुझे आपसे गिफ्ट चाहिए क्योंकि मुझे भि आपकी मोहिनी बनना हें!
इतना कहकर मेनका अपने कक्ष मे जानेलगी तोँ विक्रम भि उसके पीछे हि घुस गय़ा औऱ उसे अपनी बाहों मे भरकर बोला:"
" क्याँ करोगे मेरी मोहिनी बनकर माता ?
मेनका नें उसके मुंह कों चूम लिया औऱ उचककर अपनी चुचियों कों उसकी छाती सें रगड़ते हुए बोलि:"
" आपकी तपस्या भंग न् कर दि तौ मेरानाम भि मेनका नहीं!!
इतना कहकर वोँ जोर पलटी औऱ अपने कक्ष मे अंदरघुस गई औऱ परदेबंद करदिए! विक्रम भि मुस्कुरा कर बाहर् आँ गय़ा औऱ अपने कक्ष मे आकर आराम करनेलगा!
साम कों लगभगसात बजे विक्रम नें अपनाभेष बदला औऱ बाजार मे पहुंच कर मेनका केँ लिए एक् बेहद आकर्षक सोने औऱ हीरो सें बना एक् वस्त्र लिया औऱ उसकेबाद वापिस लौट पड़ा!
रात कों विक्रम जान बूझकर देर सें खाने केँ लिए अपनेरूम सें निकला औऱ मेनका तब तक चली गई थि तोँ विक्रम नें वोँ वस्त्र चुपके केँ उसके कक्ष सें रखदिए औऱ बाहर् आँ गय़ा!
वहीं दूसरी तरफ सलमा नें सारी बातें अपनी अम्मी रजिया कों बताई कि केसे चालाकी सें जब्बार नें नकली तलवारे राखी हुईँ हैं औऱ सैनिक लड़ हि नहीं पायेंगे!
रजिया:" बेटी यह तोँ कुछ नहि इससे भि बड़ी बड़ी बाते अभि तुम्हें पता चलेगी! जब्बार कों पूरीतरह सें अपने शीशे मे उतारलो फिन देखो क्याँ क्याँ सच्चाई सामने आयेगी!!
सलमा:" अम्मी आप् मुझ पर्र भरोसा रखिए! मे सभीकुछ सामने लाकर हि रहूंगी!
रजिया:" एक् काम औऱ करना हि पड़ेगा किसी भि तरह सें सलीम कों सही रास्ते पर्र लाना हि पड़ेगा!
सलमा:" आप् निश्चित रहो! मे सभीठीक कर दूंगी! अच्छा मे अब चलतीहु!
इतना कहकर सलमा बाहर् निकलआई औऱ सलीम केँ कक्ष मे घुस गई तोँ देखा कि सलीम बैठेहुए मदिरा पानकर रहा थां औऱ सलमा कों देखकर बॉटल छुपाते हुए बोला:"
" आपी आप् टाइम मेरे कक्ष मे आपी ?
सलमा:" देखने आए थें कि रात कों अकेले क्याँ क्याँ गुल खिलारहे हौ! पियोखूब मदिरा पियो!
सलीम:"माफ करनाआपी मगरहमे इसकीआदत होँ गई हैं अब! बहुत कोशिश करीमगर छूटती हि नहि हैं!
सलमा उसकेपास बैठ गई औऱ बोलि:" जराहमे तोँ भि दिखाओ कि आखिर इसमें ऐसा क्याँ हें जोँ छूट नहींरही!
सलीम नें बॉटल कों सलमा केँ आगेकर दिया औऱ सलमा नें बिनादेर किएकई जोरदार घूंटभर लिए औऱ बोलि:"
" ओहो भइयायह तौ बेहद कड़वी हें ! केसेपी पाते हौ आप्?
सलीम कों सलमा सें ऐसी उम्मीद नहि थि मगर बोला:"
" शुरुआत मे जरूर कड़वी लगती हैं मगरजब यहसिर पऱ चढ़ती हैं तोँ वोँ मजा देती हैं कि बारबार पीने कां मन करता हैं!
सलमा:" अच्छा यह बताओ कि जब तक यह गंदीआदत नहीं छोड़ दोगे तौ ताकत केसे आएगी औऱ ताकत नहीं आयेगी तोँ युद्ध केसे करोगे आप् !!
सलमाजान बूझकर पेड़ पर्र गिर पड़ी औऱ उसका पल्लू सरक गय़ा तोँ उसकी चुचियों कि गहराई खुलकर सलीम केँ सामने आँ गई औऱ सलीम बोला:"
" हम् सभीकुछ छोड़ देंगे आपी! वैसे आप् हैं बड़ी हसीन!
सलमासमझ गई थीं कि सलीम कि नजरे कहां हैं औऱ खड़ी होतेहुए बोलीं:
" हमारा जानां हि बेहतर होगा क्योंकि आपकी बातो सें लगता हें कि आप् होश मे नहि हौ!
सलीम:" बैठिए नं आपी, बड़ी मुश्किल सें तौ आप् आई होँ आज औऱ आते हि जारही होँ यह क्याँ बात हुई थोड़ी देर बाते कीजिए नाँ हमसे भि!
सलमा भि स्वयं कहां हि जानां चाहती थींमगर नाटक करतेहुए बोलि:" नहीं हम् चलते हें क्योंकि रात बहुत हौ गई हैं औऱ आपकोचढ़ भि गई हैं भइया!
इतना कहकर सलमा लड़खड़ाती हुईँ जानेलगी मगरजान बूझकर गिर पड़ी तौ सलीमआगे बढ़कर उसे उठाने लगामगर उठा नहीं पाया तोँ सलमा मुस्कुराते हुए बोलीं:"
" शहजादे सलीम आपसे न् हम् संभाले जायेंगे! इतने शक्तिशाली मर्द नहीं होँ आप्!
सलीम कों यह सीधा अपना अपमान महसूस हुआ औऱ बोला:" बेशकआज हम् आपकोउठा नहीं सकतेमगर वादारहा जल्द हि आपको अपनीगोद मे उठाएंगे आपी!
सलीम नें उसकाहाथ पकड़ लिया तौ लड़खड़ाती हुई सलमा उसकेबैड तक आँ गई औऱ पेट केँ बल पलंग पर्र लेट गई औऱ बोलि:"
" सलमा सुलतानपुर कि शहजादी हें सलीमकोई आम महिला नहीं जिसे आप् आसानी सें उठासको!
सलीम उसकेपास हि बेड पऱ बैठ गय़ा औऱ उसकी उभरी हुईँ गांड़ देखते हुए बोला:
" औऱ हम् भि सुल्तानपुर केँ हि शहजादे सलीम हें औऱ आपको हम् अपनीगोद मे जरूर उठायेंगे आपी!
सलमा नें अपनी कोहनियों कों बेड पऱ बेड पर्र टिका दिया औऱ अपनी चुचियों कां भर अपनी हाथो पर्र डालकर पूरीतरह सें अपनी चुचियों कों उभारती हुई बोलीं:"
" हम् आपकी उम्मीद सें कहीं ज़्यादा भारी हें शहजादे! हमको हल्के मे लेने कि भूलमत करना!
सलीम नें उसकी चुचियों कां उभार देखा औऱ उसकी आंखों मे झांकते हुए बोला:"
" बेशक आप् हमारी सोच सें भि ज़्यादा भारी होँ सलमामगर आपनेआज हमारी मर्दानगी कों ठेस पहुंचाई हैं देख्ना आप् हम् आपको पूरी कि पूरी संभाल लेंगे शहजादी!
सलमा:" मुझे आपका वादायाद रहेगा! एक् महीना हें आपकेपास सलीम!
सलीम:" एक् महीना बहोत अधिक हैं शहजादी! आज केँ बाद हम् आपको एक् महीने बाद हि अपनी शक्ल दिखायेंगे!
सलमा:"यह हुई न् मर्दों वालीबात! अच्छा अब चलते हें! बेगम साहिबा सें हमेकुछ जरूरबात करनी थि !
सलीम:" रुकिए जराआपी! ऐसे जायेंगे तौ आपके मुंह सें आती हुईँ मदिरा कि बदबू आपकीपोल खोल देगी!यह खा लीजिए!
इतना कहकर सलीम नें एक् फल उसकीतरफ बढ़ाया तौ सलमा नें उसेखा लिया औऱ बाहर् निकल गई ! सलमा पिछले कुछदिन सें देखरही थि यह बाहर् तैनात एक् सैनिक वसीमउस पऱ अधिक हि नजररखे हुए थां औऱ कल सें तौ साए कि तरह उसके पीछाकर रहा थां तोँ सलमा कों यह मौका अच्छा लगा औऱ वही बाहर् घूमने लगी! सैनिक कों उसने अनदेखा कर दिया जैसी कि वोँ चाहती थीं औऱ थोड़ी देर हि महल केँ प्रांगण मे आँ गई कि उसकीनजर जब्बार पऱ पड़ी
तौ जब्बार आदर केँ संग बोला:"
" शहजादी आप् इस टाइम यहां ! क्याँ हुआसभी ठीक तौ हें नाँ ?
सलमा नें उसकीतरफ अदा केँ संग देखते हुए बोलीं:"
" नींद नहीं आँ रही थि तौ हम् घूमने केँ लिए आँ गए! क्यूं हमनेकोई गुनाह कर दिया क्याँ ?
जब्बार:" खुदा केँ लिएऐसा न् कहे शहजादी! हमे तौ इतनी खुशी हुई कि बयान नहींकर सकते! बताए क्याँ खिदमत करू आपकी?
सलमा:"कुछ नहींबस आँ गए हौ तौ इतना बहुत हैं हमारे लिए!
जब्बार:" कल हम् शस्त्रगार ठीक सें नहि देखपाए तौ अगर आपकी आज्ञा होँ तोँ क्यूं न् एक् बारदेख हि लेते हें!
सलमा नें मुस्कुरा कर जवाब दिया:"हमे भला क्याँ आपत्ति होगी ? आखिर हमारा तौ कर्तव्य हैं वोँ सभी देख्ना!
रात केँ अभि 10 बजेहुए थें औऱ जब्बार जानता थां कि इस वक़्त वहांदूर दूर तक कोई नहीं होगा तौ खुश होतेहुए उसकेमन कि बात जानने केँ लिए बोला:"
" जैसी आपकी आज्ञा शहजादी! मगर अभि इस वक्त क्याँ आपका जानां उचित होगा क्योंकि वहांकोई नहि होगा औऱ रोशनी कि बहुतकम होगी!
सलमा:" तौ क्याँ हुआहमे अपने राज्य मे भला कैसाडर! आखिर हम् शहजादी हें!
जब्बार कों भला क्याँ आपत्ति होती बल्कि उसने तौ पूरीतरह सें शहजादी कों साफकर दिया थां कि अंधेरे मे कुछ भि हौ सकता हें औऱ किसी केँ नं होने सें कोईडर भि नहि होगा!
सलमा नें एक् मशालली औऱ आगेआगे चल पड़ी! सलमा नें जान बूझकर ऐसे रास्ते कां चुनाव किया जिसमे उन्हे कोईदेख न् पाए! जब्बार सलमा केँ इस रास्ते कों चुनने सें हि समझ गय़ा थां कि सलमा नहीं चाहती हें कि कोई उन्हे जातेहुए देखे तौ उसकी आंखेचमक उठी औऱ बोला:"
" एक् बातकहे शहजादी अगर आपकी इजाजत हौ तौ ?
सलमा नें चलते हि पलटकर उसकीकमर देखा औऱ बोलि:"
" अपनों सें इजाजत नहींली जाती हें जब्बार!
जब्बार:" पहले तोँ आप् हमे नीचा दिखाने कि कोशिश करती थि मगरअब हम् पऱ यह मेहरबानी किसलिए ?
सलमा जानती थि कि जब्बार ऐसा प्रश्न जरूरकर सकता हैं इसलिये बोलीं:"
" पहलेहमे लगता थां कि विक्रम हि दुनिया केँ सबसे खूबसूरत औऱ ताकतवर इंसान हें! मगरहमे हमे समझाआया कि वफादारी सुंदरता सें कहीं ज़्यादा अहम होती हें जब्बार जौ आपके अंदर हें बस इसलिये!
जब्बार:" बेहद धन्यवाद आपकाहमे इस काबिल समझने केँ लिए! हम् हमेशा आपकोखुश रखेंगे शहजादी!
सलमा पऱ अबनशा पूरी ताकत सें चढ़ गय़ा थां औऱ उसकी गांड़ बेहद कामुक तरीके सें मटकरही थि औऱ जब्बार पीछे पीछे खिंचा चला आँ गय़ा रहा थां क्योंकि वोँ जानता थां कि थोड़ी हि देरबाद यह सुंदर शहजादी उसकी मजबूत भुजाओं मे होगी!
दोनो जैसे हि शस्त्र गार केँ दरवाजे पर्र पहुंचे तौ सलमारुक गई औऱ जब्बार भि उसकेसंग आँ गय़ा औऱ दोनो अंदरघुस गए औऱ सलमा बोलीं:"
" अपना वादायाद हैं नां जब्बार आपको ?
जब्बार उसके सटकर चलतेहुए बोला:"याद हैं शहजादी हमे!बस आप् अपना वादामत तोड़ देनाबाद मे!
सलमारुक गई औऱ अपनी एक् उंगली जब्बार केँ होंठो पर्र रखती हुइ बोलि:"
" चुपरहो क्योंकि शहजादी कभी अपना वादा नहीं तोड़ती !
जब्बार नें मौके कां फायदा उठाते हुए सलमा कि उंगली कों चूम लिया तौ सलमा नें अपनी उंगली उसके होंठो पर्र सें हटाली औऱ कामुक अंदाज मे बोलीं:"
" हायराम जब्बार! यह क्याँ गजब करते हौ! किसी नें देख लिया तोँ हम् मर जायेंगे!
जब्बार नें हिम्मत करके शहजादी कां हाथ पकड़ लिया औऱ बोला:"
" यहांदूर दूर तक कोई नहीं हैं शहजादी!!
सलमा जब्बार सें अपनाहाथ छुड़ाने कि नाकाम कोशिश करती हुइ बोलीं:" कोई आँ गय़ा तौ क्याँ सोचेगा ! हमारा हाथ छोड़िए नाँ जब्बार!
जब्बार नें उसकाहाथ ताकत सें पकड़कर अपनीतरफ खींच लिया औऱ बोला:"
" इतनीरात मे कोई आएगा भि नहीं शहजादी! आप् डरिएमत औऱ यह मशालहमे दीजिए हम् बुझा देते हैं इसको भि!
सलमा मशाल वालेहाथ कों उससेदूर लें जाने कि कोशिश करती हुई बोलीं:"
" अरे अम्मी!!! ऐसामत कीजिए जब्बार! हमे अंधेरे मे डर लगता हें!
जब्बार नें मशाल कों सलमा केँ संग सें लेँ लिया औऱ सलमा कां हाथ थामे अंदरबढ़ गय़ा औऱ एक् दीवार पर्र मशाल कों तिरछा करके लटका दिया जिससे अब बेहद हल्की रोशनी उन दोनो पर्र आँ रही थि औऱ सलमाउस मध्यम रोशनी मे बेहद हसीन औऱ कामुक लगरही थि औऱ अपनाहाथ छुड़ाने कि कोशिश करती हुईँ बोलि:"
" आआह्ह्ह्हह हमारा नाजुक हाथ छोड़ दीजिए नां जब्बार!
जब्बार नें उसे कंधे सें पकड़कर अपनीतरफ खींच लिया औऱ सलमा एक् झटके केँ संग उसकी छाती सें आँ लगी औऱ कसमसाते हुए बोलि:"
" हाय जब्बार! हमे जाने दीजिए नां रात अधिक होँ गई हैं!
जब्बार नें अपने दोनो हाथों कों उसकीकमर पऱ कस दिया औऱ बोला:" स्स्स शहजादी! यकीन नहि हौ रहा हैं कि आप् मेरी बांहों मे आँ गई होँ!
सलमा नें उसकी भुजाओं कि मजबूती महसूस करके उसकी ताकत कां एहसास किया औऱ एक् जोरदार झटके केँ संग उसकी पकड़ सें बाहर् निकल गई औऱ अंधेरे मे दरवाजे कि तरफ बढ़ने लगी औऱ जान बूझकर गिर पड़ी औऱ दर्द सें कराहकर नाटक करतेहुए बोलि:"
" आह्ह्ह्ह्ह्ह अम्मी गिरगए हें अंधेरे मे जब्बार!
जब्बार नें उसे उठाने केँ लिएहाथ आगेकिए तौ उसके दोनो हाथो मे सलमा कि चूचियां आँ गई औऱ विक्रम नें बिनादेर किए उसकी दोनो चूचियों कों सहला दिया तौ सलमाजोर सें सिसकउठी:"
" अह्ह्ह्ह जब्बार!
सलमा नें उसकेहाथ अपनी चूचियों पर्र सें हटादिए तोँ जब्बार नें उसे अपनीगोद मे उठा लिया तोँ सलमा नें उसकेगले मे अपनी बांहों कां हार पहना दिया औऱ उसका एक् गालचूम कर बोलि:"
" सच मे बेहद ताकतवर होँ आप् जब्बार हम् जैसी भारी भरकम शहजादी कों आपनेफूल कि तरहउठा लिया!
जब्बार उसे लेकरअब मशाल केँ लगभग आँ गय़ा थां औऱ उसकी एक् मम्मों पऱ हाथ फेरते हुए मस्ती मे बोला:"
" ओह्ह मेरी शहजादी! आप् सच मे बेहद भारी हें! देखिए नां आपका सीमा कितना बड़ा औऱ भारी हें!
सलमा जब्बार कि बात सुनकर शर्माती हुई उससे कसकर लिपट गई औऱ बोलि
:" हाय अम्मी!! आपकेलिए हि हैं सभी जब्बार! हम् आपसे इश्क करनेलगे हें मेरे महबूब!
जब्बार नें सलमा केँ होंठो कि तरफ अपने होंठ बढ़ाए तौ सलमा नें मुंह दूसरी तरफकर लिया तौ जब्बार नें सलमा केँ एक् गाल कों मुंह मे भर लिया औऱ जोर सें चूसते हुए बोला:"
" सलमा केवल मेरी हें! हम् भि आपसे बेहद प्रेम करते हें मेरी हसीन शहजादी!
सलमा नें मस्ती मे आतेहुए अपनी दोनो टांगो कों उसकीकमर पऱ लपेट दिया औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोलि:"
" ओहह जब्बार अबबस भि कीजिए नाँ! हम् तौ यहांबस हथियार देखने केँ लिएआए थें!
जब्बार सलमा केँ टांगे उसकीकमर मे लपेटते हुएजोश मे आँ गय़ा औऱ सलमा कां हाथ अपने वस्त्रों मे घुसकर अपने नंगे कड़क लन्ड पर्र रख दिया औऱ बोला:"
" आह्ह्ह्ह्ह शहजादी! लोदेख लीजिए हथियार!
सलमाजोर सें सिसकउठी औऱ उसकी पकड़ सें निकलने कि कोशिश करतेहुए बोलीं:"
" अह्ह्ह्ह सीईईईईइ ! हाय जब्बार!!!!
सलमा कां हाथ पकड़े हुए जब्बार नें लन्ड पऱ पूरी लंबाई मे घुमाया औऱ सलमा केँ कान मे बोला:"
" कैसालगा आपको हथियार शहजादी! आप् जरूरचला पाएगी उसे सलमा!
सलमा नें जोर सें उसके लन्ड केँ सुपाड़े कों मसल दिया औऱ उसकेकान मे किसी कोयल कि तरह कूकती हुई बोलि:"
" बहोत ज़्यादा बड़ा औऱ ताकतवर! हमसे नां चल पायेगा!
इतना कहकर सलमा एक् झटके केँ संग उसकीगोद सें उतरकर अंधेरे मे हि भागती चली गई औऱ जब्बार उसे पीछे सें आवाज़ देतारहा:"
"ओहो सलमा मेरीबात तौ सुनो! रुको तौ जरा!!
सलमा नें गेट खोला औऱ बोलीं:"
" नहीं आप् मार डालोगे हमे जब्बार! हमसे नाँ होँ पाएगा!
इतना कहकर सलमा बाहर् निकल गई औऱ सीधे अपने कक्ष मे हि जाकर रुकी! वोँ जानती थि कि अब जब्बार कुत्ते कि तरह उसकेआगे पीछे घूमने वाला हैं!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
शहजादी सलमा कां कायापलट, विहेवियर मे बदलाव हैरान करने वाला हैं।
जिसकाम कों वो विक्रम केँ सहयोग सें अच्छी तरह सें कर सकती थि, जब्बार औऱ उसके आदमियों सें अपने राज्य कों सौ प्रतिशत सुरक्षित कर सकती थि उसकाम केँ लिए उसने टेढ़ा मार्ग क्यूं चुना ?
जब्बार नमकहराम हैं, गद्दार सिपहसलार हैं, सलमा केँ पिता कां गुनाहगार हैं, पुरेदेश पर्र उसकी गिद्ध नजर हैं उस जब्बार पर्र सलमा कां ये दरियादिली कैसी ?
औऱ ये कहने कि जरूरत नहीं कि विक्रम सूरत मे, पर्सनैलिटीज मे, हैसियत मे, इंसानियत मे, शक्ति मे जब्बार सें एक् लाख गुणा बेहतर हैं।
सलमा कां अपने भइया सलीम कों सेड्यूश करने कि वजहसमझ मे आँ सकता हैं। वो अपने भइया कों बदलना चाहती हैं। भइया कों एक् काबिल इंसान बनाना चाहती हैं। इसकाम केँ लिए उसकी ज़रूर सराहना होनी चाहिए।
शायदआगे चलकरइन दोनो भइया-बेहन केँ बीच अनैतिक सम्बन्ध भि स्थापित होँ जाए ! येसभी फिन भि जब्बार केँ लगभग जाने सें बेहतर हैं।
इधर मेनका मैडम केँ ' मोहिनी ' अवतार कां हमे बेसब्री सें प्रतीक्षा हैं। शायद मेनका कां ये मोहिनी अवतार विक्रम कि तपस्या पुरीतरह भंगकर दे !
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग भाग यूनिक स्टार भइया।
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