सबका लाड़ला | incest indian sex story – New Episode
भाग - 28
मै ताईजी केँ कमरे मे आँ गय़ा।
मैनें अपने कपड़े निकाल दिये औऱ बिस्तर पऱ लेट गय़ा।
कुछदेर बाद ताई भि आँ गई।
ताईजी नें मेरीतरफ देखा
मै- ताईजी मुझेऐसे सोने कि आदत हैं, आपकोकोई दिक्कत तोँ नहि हैं
संतोष - नहि बेटा, मुझे क्याँ दिक्कत होगी। तेरी जैसे सोना हैं सोजा।
ताई भि मेरेपास लेट गई, ताई ब्लाउज औऱ घाघरे मे थि।
यह घाघरा घुटनों तक थां ( रात मे औरते अक्सर यहपहन कर सोती हैं)।
मैने ताई कि तरफ देखा, उसके ब्लाउज ऊपर केँ दोबटन खुले थें।
मुझे इतनी औऱ देखकर ताई बोलि - ऐसे क्याँ देखरहा हैं।
मै-कुछ नहि बसऐसे हि।
मैचुप हौ गय़ा।
संतोष -सो गय़ा बेटा
मै -नहीं, हल्की हल्की ठंड सि लगरही हैं। औऱ मैने ताईजी केँ ऊपर बांहे ढाल दि औऱ उनसे चिपक गय़ा।
ताई भि मेरीकमर पऱ हाथ रखकर मुझसे चिपक जाती हैं,
संतोष - अरे मेरे बेटे कों ठंडलग रही हैं, अब नहीं लगेगी,
शायद ताई केँ मन मे भि कही नं कही सेक्स कि आगजलरही थि।
मेरे औऱ ताई केँ होठो केँ बिचकुछ इंचो कां फर्क थां, ताई कि चुचींया मेरी छाती सें दबी हुइ थि, इसका असर मेरे मुसल पर्र हुआ औऱ मेरा लन्ड खड़ा होनेलगा।
मेरा लन्ड खड़ा होकर संतोष ताई कि चुत पर्र दस्तक देने लगता हैं, अगर ताई कां घाघरा नहि होता तौ वोँ अब तक ताई कि मुनिया मे झंडे गाड़ देता।
ताई कों भि अहसास होता हैं कि मेरा लन्ड उसकीचुत कों टचकररहा हैसुनहरी कों तब अहसास होता हैं जब सोनू कां लन्ड इकदम टाइट होकर उसके चूत पर्र गड़ने लगता हैं,
संतोष (मन मे)-- हे ईश्वर जौ मे सोचरही हूं क्याँ यहदेव कां वही हें, संतोष ताई केँ सोचने केवल सें हि उसकी सांसे तेज होने लगती हैं,
उसकी गर्म सांसे मुझे महसुस होती हैं, औऱ मै अपनी ताई सें औऱ चिपक जाताहैू, जिससे मेरा लन्ड ताई कों अपनीचुत पर्र सीधा महसुस होने लगता हैं, ताई कि हालत खराब होने लगती हैं, वोँ चाहकर भि मुझसे सें अलग नहीं हौ पारही थि,
ताई कि चुत कि गर्मी सें मेरे लन्ड कि हालत खराब होने लगती हैं, औऱ सोचते सोचते मै अपना एक् हाथ संतोष ताई कि चुचीं पऱ रख देताहू,
मेराहाथ जैसे हि ताई कों अपनी चुचींयो पऱ महसुस होता हैं, उसकाबदन औऱ गर्म होने लगता हैं।
ताई (मन मे) - शायददेव अभि जवान हौ रहा हैं, तोँ इसउमर मे लन्ड कां खड़ा होना लाज़मी हैं, यह तोँ अभि इस मामले मे बच्चा हैं, औऱ गलती सें इसकाहाथ मेरी चुचींयो पर्र आँ गय़ा होगा,
अरे। कितना गर्म हैं इसका लन्ड औऱ बड़ा भि लगरहा हैं।
मै धीरे-धीरे धीरे-धीरे हाथेली कों उसकी चुचीयों पऱ कस देताहू।
संतोष मन मे हे ईश्वर यहदेव क्याँ कररहा हैं,
मै अपनी हथेली उसकी चुचीयों कों औऱ जोर सें कस लेता हूं
मै चुचियो कों अब भीचने लगताहू
मैनेअब ताई कि चुची कों एकदमजोर सें अपनी हथेली मे पकड़ लिया थां, जिसकी वजह सें ताई कों दर्द होनेलगा थां, औऱ वोँ धिरे धिरे सिसकरही थि,
संतोष - आइ.मा.रे
औऱ मुझे बोलती हैं आआह। बेटा दर्द हौ रहा हैं,
मै - होनेदो
संतोष - आइ.बेटा इतनी बेरहमी सें क्यूदबा रहा हैं। मेरी चुचीं.आँ.आँ मे तेरी ताई हूं।
मै- ताई जी आपकी चुचीं कों मसलने मे मजा आँ रहा हैं,
ताई जी कों दर्द तोँ होँ रहा थां लेकीन उसेमजा भि बहोत आँ रहा थां,
वोँ भि अब आनंद लेना चाहती थि जौ उसे उसके पति नें नहि दिया थां।
संतोष - क्या बात है राम, कोई इस तरह.अहह मसलता हैं क्याँ रे,
मै - अहह ताईजी तेरी जैसी चुचीं हौ तौ ऐसे हि मसलते हैं।
संतोष - मसल लेँ बेटा.अहह.जितना चाहे, मसलना हैं, मैसभी कों बता दूंगगी। अहह म्मा धीरे-धीरे कर थोडा,
मै- मेरी प्यारी ताई कभीऐसा नहि करेगी मेरेसंग। तुम् अब मेरा हि लन्ड लोगी जिदंगी भरइस लिये।
यहबात सुनकर ताई कि चुत फुदकने लगती हैं, औऱ उसके अंदर एक् अलग हि ख़ुमार छा जाता हैं,
संतोष - अहह तुम कोशरम नहीं आँ रही हैं नां ऐसी बाते.करते हुए।
मै-जब सें तेराबदन देखा हैं, शरमवरम भुल गय़ा हु मे,
संतोष - अरेरे। तूँ मुझेऐसी नजरो सें देखता हैं
मै-कुछ भि हौ, तोरा शरीर लाजवाब हैं,
ताई भि आज पुरामजा लूटरही थि, जिसतरह मेरे मजबुत हाथ उसकी चुचीयों कों मसलरहे थें, श्याम ताऊ नें कभीऐसा नहीं मसला थां। यह सोचकर वोँ औऱ भि गर्म हौ जाती.,
संतोष - हायरे रे बेरहम.धिरे दबा.आँ.इ.बेटा
मैअब ताई केँ होठों पर्र होठरख देताहू औऱ उन्हे चुसने, काटने लगताहू।
ताई कां विरोध हल्का होँ गय़ा
मैने ताई ब्लाउज निकाल दिया, ताई कि चुचियों केँ हलके भूरे निप्पल उत्तेजना केँ मारे औऱ ज्यादा मोटे औऱ कड़े होकर सीधेखडे थें।
मै - वाउ ताई क्याँ चुचियां हें तुम्हारी दिल करता हैं इन्हें अपने हाथों मे पकडकर चूमता रहू।
ताई कि बुर सें उत्तेजना केँ मारे पानी निकलने लगा औऱ उसकी साँसें बुहत ज़ोर सें चलनेलगी, ताई कि बड़ी बड़ी चुचियां उसकी साँसों केँ संगऊपर नीचे होनेलगी।
मैने ताई कि चुचीयो पर्र मुँहलगा दिया, मै जोर सें ताई कि चुची कों चुसने लगा मसलने लगा।
संतोष - आआआह.हा बेटा। आँ। आँ। हाऐसे हि चुसता रह, हा.ऐसे हि दबा तेरी ताई कि चुचीयो कों.आज निचोड़ डाल इनकोआआह।
ताई कि चुचिया एकदमलाल होँ गई। कुछदेर तक चुचियों कों पीने केँ बादमै नीचेआया।
मै अपने हाथों सें ताई केँ घाघरे कों उतारने लगा। ताई जीअब मेरे सामने बिलकुल नंगी थि।
मैगौर सें ताई कि बुर कों देखने लगा।
ताई - तुने मुझे तोँ नंगाकर दिया पऱ तु अभि तक नंगा नहींहुआ।
मै- ताई तुम् मुझे नंगा देख्ना चाहती होँ।
ताई नें बसहा कहां।
मैने भि मेरे अंडरवीयर कों ऊतार दिया। मेरा लन्ड तनाहुआ ऊपर नीचे होतेहुए ताई कों सलामी देनेलगा, अबमै औऱ ताई दोनों नंगे थें।
मै ताई कि चुचीया दबाने लगा।
संतोष ताई - "हायराम बेटा तेरा तौ बुहत बड़ा औऱ मोटा हैं",
ताई मेरे लन्ड कों गौर सें देखने लगी।
मैनेकहा क्यूं ताऊ जी कां बड़ा नहि हैं,
ताई- नहि, वोँ तौ इससे बहोत छोटा हैं, तेरा तोँ बुहत मोटा औऱ लंबा हैं।
मै-देख लो ताई जीभर केँ देखलो।
मै नीचे कि तरफआया औऱ ताई कि झाँटों सें भरी बुर कों देखते हुएकहा - ताई तेरीचुत तोँ करारी हैं। मनकररहा हैं कि इसेचुम लू।
(सब औरतो कि तरह संतोष ताई जी नें भि वहीकहा )
ताई- नहीं बेटा यह गंदी स्थान हैं यहामुह मतलगा।
मै- ताई यह तोँ बहोत अच्छी स्थान हैं, इससे अच्छी स्थान औऱ हैं हि नहि।
मैने ताई कि टांगों कों पूरीतरह फैलाते हुएकहा।
अब ताई कि बुर खुलकर मेरे सामने आँ गई,, ताई कि बुर केँ छेद सें उत्तेजना केँ मारे पानी कि बूँदे निकलरही थि।
मै होठो सें ताई कि जांघे चुमने चाटने लगा,
मैने अपना मुँह ताई कि बुर केँ पासकर दिया, "वाउ ताई तुम्हारी बुर कि खुशबु तोँ बुहत बढिया हैं"।
मैने अपने होंठ ताई कि बुर केँ होंठो पर्र रखदिए।
मेरे होंठ अपनी बुर पऱ लगते हि ताई केँ सारे शरीर मे चीटियाँ रेंगने लगी.मै बुर सें निकलते हुए पानी अपने होंठो सें चूसने लगा।
संतोष - उह बेटा बुहत मज़ा आँ रहा हैं।
मै अपने होंठ उसकी बुर सें हटाते हुए अपनीजीभ कों निकाल कर उसकी बुर केँ छेद पऱ फेरने लगा, औऱ अपनीजीभ सें बुर सें निकलते हुए पानी कों चाटने लगा।
औऱ अपनेहाथ सें उसकी बुर केँ झाँटों कों सहलाते हुए बुर केँ दाने पर्र रख दिया औऱ उसे अपने हाथों सें मसलने लगा।
ताई कां पूराबदन अकड़कर झटके खानेलगा।
आहश ओह्ह्ह बेटटा.उत्तेजना कों सहन न् करतेहुए ताई अपनी ऑंखों बंद करके झरनेलगी।
ताई कि बुर सें पानी कि नदिया बहनेलगी औऱ मै बुर केँ पानी कों चाटने लगा।
मेरा चेहरा बुर कों चाटते हुए पूराभीग गय़ा।
मैने लन्ड कों ताई केँ हाथ मे पकडाते हुएकहा तुम् भि इसे प्रेम करो।
ताई नां नुकुर करनेलगी मगर मेरेजोर देने पर्र वोँ मान गई।
उसने लन्ड कों पकड लिया औऱ उसे सहलाती हुयी अपनीजीभ निकाल कर चाटने लगी
मैनेउसे मुँह मे लेने केँ लिएकहा।
ताई नें अपनामूह खोलकर मेरे लन्ड कों जितना होँ सकता थां अपनेमूह मे भर लिया, औऱ लन्ड कों ज़ोर सें चूसने लगी।
ताई कां मूह लन्ड केँ तनने सें पूरा भरकर दुखने लगा इसीलिए उसने लन्ड कों अपनेमूह सें निकाल दिया।
मुझसे अबरहा नहीं गय़ा मैने लन्ड केँ टोपे कों उसकी बुर केँ निकलते हुए पानी सें गीला करतेहुए बुर केँ छेद मे फँसा दिया। औऱ ताई कि टांगों कों पकडते हुए एक् धक्का मार दिया।
ताई दर्द सें लगभगऊठी।
संतोष - हाहहह बेटटटा। आररराम। सें मुझझे। दर्द होँ रहा हैं।
मै ताई केँ चुचो कों मसलने लगा।
औऱ मैने अपने लन्ड कों पीछे खीचते हुए एक् औऱ जोर कां धक्का मार दिया।
ताई जी कों दर्द होनेलगा, मैने देखा कि ताई जी कि चुत पर्र हल्का सां खूनलगा हैं। शायद ताई कि चुतआज सहीढंग सें खुली हैं।
संतोष - आआआह। बेटटटा। माररर। डाला ररररे।
अहह। तेरा लन्ड नहि मुस्स्ल्लल। हैं अहहमा।
मैने धक्के धीरे-धीरे धीरे-धीरे चालुरखे संग हि ताई केँ चुचे दबाने लगा।
संतोष - ओहहहअहह बेचा तेरा लन्ड तोँ मेरी बच्चेदानी मे हि घुस गय़ा हैं आआआह।
मै-बस ताई जीअब पूराघुस गय़ा हैं।
मैने अपना लन्ड ताईजी कि बुर सें निकला औऱ फिन सें जड़ तक घुसा दिया।
संतोष - आहह-आहह। बेटा तेरायह मुसल बुहत मोटा औऱ लम्बा हैं, उसने मेरी पूरी मुनिया कों पूराभर रखा हैं ताई जी नें मज़े सें सिसकते हुए, अहह भरतेहुए कहा।
क्यूं ताई दर्द होँ रहा होँ तोँ निकाल लू, मैने भि ताईजी कि बुर मे लन्ड सें हल्के धक्कों केँ संग अंदर बाहर् करतेहुए कहा
संतोष - आआह। नहीं बेटा अब तौ बहोत मज़ा आँ रहा हैं।
ताईजी अपने चूतड़ उछालते हुए मेरा लन्ड अपनी बुर मे लेनेलगी।
अबमै ताई जी कि टांगों कों पकडते हुए अपने लन्ड कों ज़ोर सें उसकी बुर मे अंदर बाहर् करनेलगा।
संतोष - आह्ह इस्सस बेटटा.ऐसे हि मुझे चोदो, बुहत आनंद आँ रहा हैं। आआहआज तक आआआह.मा। इतना मज़ाकभी नहि आया।
अब ताई जी भि मेरे लन्ड पऱ अपने चूतड़ उछालते हुएताल सें ताल मिलाने लगी।
मैअब अपना लन्ड ताईजी कि बुर मे बुहत तेज़ी केँ संग अंदर बाहर् करनेलगा। ताईजी कां मज़े केँ मारे बुराहाल थां, वो मजा औऱ मजे सें हवा मे उड़रही थि।
ताईजी कों मेरा लन्ड अपनी बुर कि गहराइयों तक रगड खाताहुआ महसूस होनेलगा।
मै चोदते -2 उसकेऊपर झुकते हुए उसकी चुचियों कों पकड़कर मसलने लगा, औऱ चुचियों कों दबाते हुए बुहत ज़ोर केँ धक्के लगारहा थां।
ताईजी चरम सीमा तक पुहंच चुकी थि उसका शरीर बुहत ज़ोर सें काम्प रहा थां।
संतोष - आहह-आहह। बेटा मै झडननने। वालल.ली हू। मेरीचुत मे लन्ड ज़ोर सें पेलो फाड़दो अपनी ताई कि बुर।
ताई अचानक सें चिल्लाने लगी।
मैने अपनी स्पीड एकदमतेज कर दि।
ताईजी कां जिस्म अकडने लगा औऱ उसकी बुर झटके खातेहुए मेरे लन्ड पर्र झड़ने लगी।
संतोष - आजहहह ईश ओह्ह्ह बेटा मैझड़।
औऱ ताईजी झडतेहुए ज़ोर सें चिल्लाते हुए सिसकने लगी।
मै- आजहहह ताईजी तुम्हारी बुर 2 बच्चे पैदा करने केँ बाद भि बुहतकसी हुईँ हैं, मे भि झडरहा हू।
औऱ मै भि उसकी बुर मे अपने लन्ड सें निकलता वीर्य भरनेलगा।
मै ताई केँ ऊपर हि गिर गय़ा। मेरा सिकुडा़ हुआ लन्ड अभि भि उसकीचुत मे थां।
कुछदेर बादमै साईड मे लेट गय़ा, मेरा लन्ड केँ निकलते हि ताईजी कि चुत सें मेरा वीर्य औऱ उसकी अपनी बुर कां पानी मिलकर बेड कि चादर पर्र गिरने लगा।
ताई अपनी आँखें बंद कियेहुए लेटीरही, कुछदेर बादमै उसके चुचो कों मसलते हुए बोला- आनंदआया मेरीजान।
संतोष - शरमाते हुए। अपनी ताई कों ऐसेकोई बोलता हैं, मुझे लज्जा आँ रही हैं।
मै- मेरी रानीअब कैसी लज्जा, थोड़ी देर पहले तौ मेरे मुसल कों अपनीचुत मे केसे लेँ रही थि।
बता नाँ आनंदआया। औऱ मैने उसकी चुची कों जोर सें भींच दिया।
संतोष - आआआह। बेटा धीरे-धीरे।। बहत आनंदआया।
मै ताईजी केँ होठ चुसने लगा, जिससे मेरा लन्ड खडा होनेलगा।
मै मारना तोँ ताजी कि गांड चाहता थां, पऱ मैनेटाल दिया औऱ एक् बार औऱ ताईजी कि करारी चुत कों चोदने लगा।
मै ताई जी कों उकसाने लगा, वोँ भि लज्जा छोड़कर अब खुलके मजे लेनेलग गई, पता नहि क्याँ -2 बोलने लगी थि।
20-25 मिनट चोदने केँ बादमै झड़ गय़ा, ताईजी एकदमथक चुकी थि, आजतक उसकीऐसी चुदाई नहि हुइ थि।
ताई अपनासिर मेरे सीने पऱ रखकर नंगी हि सो गई मै भि उसे बांहों मे भरकरसो गय़ा.
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एपसोड - 29
ताई अपनासिर मेरे सीने पऱ रखकर नंगी हि सो गई मै भि उसे बांहों मे भरकरसो गय़ा।
सुभह ताईजी जल्दऊठ गई, जिससे मेरी भि आँखखुल गई। वोँ मेरेबगल सें उठी औऱ अपने कपड़े समेटने लगी…
मेने उनकाहाथ पकड़कर कहा- क्याँ कररही होँ।
संतोष - अरे ! फ्रेश तौ होनेजा रहीहू … फिन तेरेलिए दुधगरम करके औऱ मेरेलिए गरमचाय बनाके लाती हूं।
मै-ऐसे हि जाओ जहाँ जानां हैं।
ताईजी अपनेमूह पर्र हाथ रखकर बोलि हाई… बेटा तुम् तोँ बड़े बेशर्म होँ, औऱ मुझे भि बेशर्म बनारहे होँ…
अबमैऐसे बाहर् केसेजा सकती हूं। माजी नें देख लिया तौ।
मेै- वोँ नहीं देखेगाी इतनी सुभह, बीमार हैं वोँ सोरही होगी, औऱ ज़्यादा डरलगरहा हैं तौ एक् चादरओढ़ लो।
ताईजी नें हार मानते हुए अपने जिस्म पऱ एक् चादरडाल ली औऱ बाहर् निकल गई, …
बाथरूम मे फ्रेश होकर वोँ रसोई मे घुस गई, …
उन्होने गरमचाय बनाने केँ लिएगॅस पर्र रख दि, औऱ संग मे मेरेलिए दुआगरम करनेलगी (क्योंकि मैगरम चाय नहि पीता हूं )
मै एकदम नंगा हि बाहर् आगया औऱ रसोईमै चला गय़ा अभि वोँ गरमचाय मे चायपती -चीनीडाल हि रही थि, मेैने पीछे सें जाकर उन्हें पकड लिया।
मेने उनकी चादर हटाकर एक् तरफरख दि, औऱ अपना कड़क लन्ड उनकी मस्त उभरी हुईँ गान्ड कि दरार मे फँसा दिया औऱ अपनीकमर चलाने लगा।
मेरा लन्ड उनकी गान्ड केँ छेद सें लेकर बुर केँ मूह तक सरकने लगा…
संतोष - आहह-आहह………सीईईईईईईईईईईईईईईईई…………। बेटटाआाआ…। रुकूऊ…गरम चाय तौ बनाने दो… बहोत बेसबरे होँ तुम्…
मैने ताईजी कों पलटा लिया औऱ किचेन केँ स्लॅब सें सटाकर उनकेहोठ चूसने लगा…
संतोष - दुधउफन जाएगा मेरे राज्जजआ….आआईयईई….नहियिइ….रकूओ……
उनकी चुचि कों दाँतों सें काटते हुए मेनेहाथ लंबा करकेगॅस बंदकर दि।
मैने अपनेहाथ कि दो उंगलियाँ उनकी बुर मे घुसा दि औऱ अंदर बाहर् करतेहुए चुचियों कों चूसने मसल्ने लगा…।
ओह्ह्ह्ह…उफ़फ्फ़…। बहोत बेसबरे हौ मेरे सोनाआ….सीईईई…आअहह….आययीईई…
तुम्हारी चुचियों कों देखकर सबर नहि हौ रहा होगा। क्याँ मस्तमाल होँ तुम्…
उनकेहोठ चबाते हुए मेैने कहा- ताऊजी भि एकदम चूतिया हैं। जौ इतने मस्तमाल कों भि नहीं चोदता। बसखेत मे लगा रहता हैं।
संतोष - उनकानाम लेकरमजा खराबमत करो बेटटाआ……सीईईईई……।
फिन मैने ताईजी कि एक् जाँघ केँ नीचे सें हाथ फँसाकर उठा लिया औऱ अपना लन्ड उनकी गीली बुर मे खड़े-2पेल दिया…।
आहह-आहह……………मैय्ाआआआआ……मारगाई……….बेटटा। धीरीईई….नहियीईईईईई….डाल सकताआआआअ….आआआआआअ….धीरे-धीरे…।
ताईजी कां एक् पांव ज़मीन पर्र थां, एक् हाथ स्लॅब पर्र टिका लिया थां औऱ दूसरा हाथ मेरेगले मे लपेट लिया…
मै धक्के लगाने लगा जिससे ताईजी कां बॅलेन्स बिगड़ने लगा।
मेैने दूसरी टाँग कों भि उठा लिया, अब ताई हवा मे मेरीकमर पऱ अपने पैरों कों लपेटे हुए थि।
इससे लन्ड इतना अंदर तक चला जाता, जिससे ताईजी कि हर धक्के पर्र कराह निकल जाती।
मै लगातार धक्के मारने लगा जिससे उनकी बुर पानी फेंकने लगी…
मेैने उनको नीचे उतारा औऱ स्लेब पर्र दोनोहाथ टिकाकर घोड़ी बना लिया…
औऱ दम लगाकर लन्ड कों उनकी बुर मे पेल दिया… एक् हि झटके मे मेरे टट्टे… गान्ड सें टकरागये।
मेैरे धक्कों सें ताईजी हाई.हाई… करउठी… मैजोर - सें धक्के मारने लगा। मेरे धक्कों नें उनकीकमर चटका दि।
20 मिनट कि मेहनत केँ बादमै उनकीचुत मे झड़ने लगा.इस बीच ताईजी दोबार झड़ गई।
वोँ लडखडाने लगी उनके पैरों मे ताकत नहि बची। वोँ 5 मिनट तक बैठीरही।
मै फ्रेश होनेचला गय़ा…
कोई 15 मिनिट बाद ताईजी दुध औऱ गरमचाय लेकर कमरे मे पहुँची। तौ मेने उन्हें गोद मे बैठा लिया औऱ मैदुध पिनेलगा।
ताईजी गरमचाय पीते बोलीं - बहोत कुटाई करते होँ बेटा। तुमने सच मे मुझे तौ तोड़ हि डाला।
मै- आपकोमजा नहींआया।
संतोष - बेटा मजा.क्याँ। मैने तौ आज पहलीबार जानां हैं कि चुदाई ऐसी भि होती हैं… इससे ज्यादा जीवन मे औऱ कोईसुख नहीं होँ सकता…सच मे…तु मुझेकभी मत छोड़ना, मैअब तेरीहू।
मै-हा मेरीजान तु मेरी हैं, तुम् बसखुश रहो।
वोँ मेरे सीने सें लिपट गई।
फिनमै दुध पीकरघऱ कि तरफ आँ गय़ा.
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एपसोड - 30
फिनमै दुध पीकरघऱ कि तरफ आँ गय़ा।
मै अपनेरूम मे चला गय़ा, फिनमै नहा धोकर बड़े ताऊजी कि तरफचला गय़ा।
वहा पर्र भाभीया औऱ ताईजी बैठी हुईँ बातेकर रहीथीं।
मै उनकेपास बैठ गय़ा, मै उनकी बातें सुनने लगा।
हमारे गाँव मे विवाह थि, वैसे वोँ बडे ताऊजी केँ साथी थें औऱ हमारे घऱ पऱ आनां जानां थां।
सब उसमे जाने केँ बारे मे बातेकर रहीथीं।
वोँ बातेकर रही थि कि वोँ क्याँ पहन केँ जायेगी (औरतो कों यहसभी चीजें बहोत पंसद होती हैं )
पंकज भाभीकुछ दुःखी थि, मुझेपता थां वोँ दुःखी क्यूं हैं। मैने पूछा प्रोग्राम कब कां हैं
तौ संगीता भाभी बोलीं - कलसाम कां हैं।
मै- पंकज भाभी आप् क्याँ कररही हैं। वोँ बोलीं कुछ नहि
मै- आप् रेडी रहनाआधे घंटे मे हम् शहर चंलेगे कपड़े लाने केँ लिए।
संगीता- किसके कपड़े।
मै- भाभी औऱ दोनो बच्चियों केँ
रेखा भाभी - आप् जारहे हौ।
मै-हा कपिल भाईजी नें कहा हैं।
संगीता - कितने पैसे दिये हैं देवरु जी नें।
पंकज- 2500
संगीता - इतने मे केसे आंयेगे, मेरेपास भि नहि हैं वरनामै दे देती।
मै - भाभी आँ जायेंगे
फिनमै भाभी कों आधे घंटे मे चलने कां बोलकर रूम मे आँ गय़ा।
उसदीन जोँ पैसे संदूक सें निकाले थें, उनको भि गिनने लगा
वोँ 2 लाख 90 हजार थें, 7 हजार रोशनी काकी कों दे दिये औऱ दो हजार कुलदीप कों, एक् मैने ख़र्च कर दिये।
मैने उनमें सें एक् लाख रूपये निकाल लिये, औऱ बाहर् आँ गय़ा।
मैने अपनी बुलेट घऱ सें बाहर् निकाल ली, उसकी आवाज़ सुनकर भाभी भि आँ गई।
मै उनको बैठाकर शहर कि तरफचल पड़ा।
पंकज - आपने सबकोबोल दिया कि इतने रूपयो मे कपड़े आँ जायेंगे, पऱ केसे आंयेगे।
मै - भाभीमै हू नां, आप् चिंता मतकरो।
आपके इससे ज़्यादा पैसे नहि लंगेगे, इनमे भि बचेगे।
पंकज - केसे।
मै-मैहू नां, मुझ पऱ भरोसा रखो।
पंकज - आप् पर्र पूरा भरोसा हैं, तभीआई हू।
हम् पास वालेशहर मे आँ गये, पर्र मेरा इरादा कुछ औऱ थां।
मै बाईक कों बडेशहर जोँ हमसे 45-50 किलोमीटर दूर हैं ( जौ पहले बताया ) कि तरफचल पड़ा।
पंकज - शहर तौ पिछेरह गय़ा। हम् कहां जारहे हैं?
मै- हम् ******* शहरजा रहे हैं।
पंकज - वहा क्यो
मै-वहा पऱ अच्छा सामान मिलता हैं, सब चीजों केँ बड़े -2 शोरूम हैं।
पंकज-वहा पर्र तोँ कपड़े महंगे मिलते हैं।
मै- तोँ क्याँ हुआ। आप् तौ बससफर कां आनंदलो।
भाभीकुछ नहीं बोलीं।
कुछदेर बाद भाभी नें मेरे कंधे केँ पीछे अपनासर रख लिया।
थोड़े वक़्त मे हम् बड़ेशहर पहुँच गये।
मैने बाईक एक् बडे शोरूम केँ बाहर् रोक दि।
मै भाभी कों लेकर अंदरचला गय़ा। पहलेमै भाभी कों बच्चों केँ सेक्शन मे लेँ गय़ा।
भाभीसब चीजों कों ध्यान सें देखरही थि।
मैने पूछा क्याँ हुआ।
पंकज - यह तोँ बहोत औऱ महंगा लगरहा हैं।
मै- कपड़े खरीदो।
भाभी कपड़े लेनेलगी। वोँ कपड़ो केँ रूपये पुछने लगी तोँ मैने सेल्स गर्ल कों बताने सें मनाकर दिया।
वोँ दौनो कि एक् -2 ड्रेस लें रही थि
मै- मैनेजोर दे केँ कहां भाभी एक् -2 सें क्याँ होगा औऱ लेँ लो।
बच्चियों केँ लिए 3-3 जोड़ी कपड़े लेकर हम् भाभी केँ लिए कपड़े लेने लेडीज़ सेक्सन मे आँ गये।
वहा पर्र साडी़या, सुटे, मॉर्डन कपडे सबकेअलग -2 सेक्शन थें।
मै भाभी कों साड़ी वाले मे लेँ गय़ा।
मैने औऱ भाभी नें एक् साड़ी पंसद कि। साड़ी बहोत अच्छी थि,
मैने उनको एक् औऱ लेने केँ लिए कहां पऱ उन्होंने मनाकर दिया।
सेल्स गर्ल नें उनको ट्राई करने केँ लिएकहा, वोँ ट्राई रूम मे चली गई।
उनके जाने केँ बादमै उनकेलिए एक् साड़ी अपनी पंसद कि देखने लगा। मैने एक् अच्छी सि साड़ी उनकेलिए पंसदतर ली। मैने वोँ साड़ी सेल्स गर्ल कों दे दि औऱ उसेलग रखने केँ लिएबोल दिया।
कुछदेर बाद वोँ बाहर् आयी.मै उनको देखता रह गय़ा, क्याँ लगरही थि वोँ साड़ी मे।
मै- आप् बहोत हसीनलग रही होँ। एकदम हीरोइन कि तरह।
भाभी मेरीबात सुनकर शरमा गई।
मैने अपने मोबाइल मे उनकी 2-3 फोटो लेँ ली, वोँ शरमाने लगी।
फिन वोँ चेंज करके आँ गई।
फिन हमने उनकेलिए दो अच्छे सें सूट लिये।
मैने उनसे पूछा औऱ कुछ कपड़े लेने हैं।
पंकज - नहि, औऱ कपड़े नहि लेने हैं, मगर।
उन्होंने अपनी नजरे झुकाली।
मै- क्याँ भाभी
पंकज - वोँ। वोँ कुछ नहि
वोँ बोल नहि पारही थीं, पऱ मै उनकीबात समझ गय़ा कि उनको क्याँ चाहिए।
मैने सेल्स गर्ल कों कहा - आप् इनको अंडरगारमेट्स दियादो। बढिया औऱ अच्छी क्वालिटी ते दिखाना।
(भाभी 9th class तक पढ़ी थि, वोँ अंडगार्मेंटस कां मतलब तौ नहि समझी पऱ उनकोपता चल गय़ा थां कि मैने क्याँ बोला हैं)
भाभी कां चेहरा शरम सें लाल हौ गय़ा, मै काउंटर कि तरफआके खड़ा होँ गय़ा।
सेल्स गर्ल उनको अच्छे औऱ बढ़िया क्वालिटी केँ ब्रा औऱ पेन्टी दिखाने लगी। भाभी उनमे सें पंसद करनेलगी।
सेल्स गर्ल - मैडमयह जौ आपकेसंग आये हैं यहकौन हैं, आपके पति तोँ नहि लगते।
पंकज भाभी - यह मेरे देवर जी हैं।
सेल्स गर्ल - बहोत समझदार औऱ अच्छे लगते हैं, केसे बिना बताये आपकीबात समझगये औऱ आप् सही सें देखसको इसलिये साईड मे चलेगये।
पंकज भाभी - हाँ, बहोत अच्छे हैं।
औऱ भाभी नें मेरीतरफ देखा
भाभी ब्रा औऱ पेंटी पंसद करके आँ गई, सेल्स गर्ल यारा सामान काउंटर पऱ लेँ आयी।
मैनेजर नें बिलबना दिया, भाभी रूपये देने केँ लिएबिल देखने लगी।
पंकज भाभी(चौंक कर )- यह क्याँ हैं, कितने कां बिल हैं।
मैनेबिल लें लिया.बिल 16000 हजार कां थां।
मैने पैसे निकाल कर मैनेजर कों दे दिये, भाभी कों समझ नहि आँ रहा थां।
मैने सारा सामान लेँ लिया औऱ भाभी कों बाहर् चलने केँ लिए बोला, भाभी बाहर् जानेलगी।
मैने चुपके सें मेरी पंसद कि हुई साड़ी लें ली औऱ उसका पैमेंट कर दिया, मै भि बाहर् आँ गय़ा।
बाहर् आते हि भाभी मुझसे प्रश्न करनेलगी
पंकज - आपने इतने रूपये क्यो दिये।
मै- भाभी कपड़े इतने केँ हि थें।
पंकज- इतने महंगे कपड़े, नहीं मुझे नहि लेना। चलिए वापिस कर देते हैं।
मै- भाभी मैंने रूपये दे दिये नां, आप् चिंता मतकरो।
पंकज - आप् इतने रूपये., नहि। नहि मै आपसे नहि लें सकती।
मै- मैनेकब कहां मैयह रूपये देरहा हूं, यह कपड़े मै अपनीतरफ सें दिलारहा हूं।
पंकज भाभी - नहि, मै नहि लें सकती बहोत महंगे हैं।
मै- क्यो नहि लें सकती।
पंकज भाभी - बस नहि लेँ सकती
मै-मै आपकाकुछ नहि लगता, मेरा आप् लोगों पर्र कोईहक नहि हैं।
ठीक हैं अगर आपको नहि लेने तोँ इन्हें फेंकदो।
औऱ मै बाईक केँ पास आँ गय़ा.भइया नें देखा कि मै नाराज हौ गय़ा हूं।
पंकज भाभी- मेरायह मतलब नहि हैं।
मैकुछ नहि बोला
पंकज भाभी - आप् नाराज मत होईए, मै रख लेतीहू।
अब तौ मान जाईए
मै मुस्कुराने लगा, मैने भाभी कों गलेलगा लिया।
भाभी मुझे अपने 2500 रू। देनेलगी, मैनेमना कर दिया।
मै - यह आप् अपनेपास रखलिए, आपकेकाम आएंगे।
हम् दौनोवहा सें चल पड़े, हमारे पास सामान थोडा ज़्यादा थां मगर हमने ऐडजस्ट कर लिया।
मै भाभी कों एक् रेस्टोरेंट पऱ लेँ गय़ा। भाभी नें पूछा हम् यहा क्यूं आये हैं
तौ मै बोला थोड़ी भूख सि लग गई हैं कुछखा लेते हैं।
भाभीऐसी स्थान पर्र पहलीबार आयी थि
मैने खाने केँ लिएकुछ मंगा लिया, हम् दोनो नें खाया औऱ वहा सें आँ गये।
मुझे चॉकलेट खाने कि आदत हैं, तोँ मैने बाईक एक् शॉप पऱ रोक दि., औऱ बहोत चॉकलेट सें आया, अपनेलिए औऱ बच्चा केँ लिए।
फिन हम् घऱ कि तरफचल पड़े, घऱ पहुँचते साम हौ गई।
मैने भाभी कों ऊतारा कर बुलेट अंदरखडी कर दि। मै अपनी मनपसंद कि हुई साड़ी औऱ चॉकलेट घऱ पऱ लेँ गय़ा।
साड़ी कों मेरेरूम मे रख दिया, ऐर चॉकलेटस् कों फ्रिज मे रख दिया.कुछ चॉकलेट मैने बच्चों केँ लिए लें ली औऱ ताऊजी केँ घऱ पऱ आँ गय़ा।
वहां पर्र सभी भाभी सें प्रश्न कररहे थें इतनीदेर केसे हुईँ।
मै- वोँ मेरे कारणदेर होँ गई, मुझेकुछ काम थां कॉलेज कों इसलिये उसमे टाईमलग गय़ा।
भाभी मेरीतरफ देखने लगी, मैने उनकोचुप रहने कां इशारा कर दिया।
दौनो भाभी औऱ ताईजी पंकज भाभी केँ कपड़े देखने लगी।
कपड़े देखकर सब तारीफ करनेलगे।
संगीता- पंकज कपडे तोँ बहोत अच्छे हैं।
रेखा - पऱ तुम् तोँ 2500 रू। हि लें गई थि, इतनेकम रूपये मे इतने ज़्यादा औऱ इतने अच्छे कपड़े केसे आँ सकते हैं।
पंकज भाभी मेरीतरफ देखने लगी।
मै- भाभी वोँ क्याँ हैं कि मेरे मित्र केँ पिताजी कि कपड़ों कि दुकान हैं शहर मे, हम् वहा पऱ गये थें। वहां पऱ सैललगी हुइ थीं जिसमे कपड़े बहोत सस्ते नां मिलरहे थें औऱ आज अंतिम दिन थां तौ हमे डिस्काउंट भि ज़्यादा मिल गय़ा।
संगीता- तौ आपनेहमे क्यो नहि बताया।
मै- मुझे भि वहा जाकरपता चला.
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