सबका लाड़ला | incest indian sex story – New Episode
एपसोड - 25
अब आप् लोगसो जाओ, उन दौनो कों उनके कमरे मे भेजकर मै भि रूम मे आकरसो गय़ा।
अगलेदिन मैउठा औऱ नहा धोकर बाहर् आया.आज मीनाक्षी भाभी तोँ थि नहि तोँ मैनेबडे ताऊजी केँ घऱ पर्र हि ब्रेकफास्ट कर लिया, वहा पर्र रेखा भाभी औऱ संगीता भाभी मिली उनसे थोड़ी बातचीत हुई।
फिनमै बाहर् आँ गय़ा तौ वहा पर्र प्रकाश भइया मिले।
(प्रकाश औऱ सतीश भइया ट्रैक्टर रखते हैं, तौ वोँ कभी -2 बाहर् रहते हैं)
मै - भइयाजी कहां रहते होँ दिखे नहींदो - तीनदिन सें।
प्रकाश - हा दोस्त दोदिन सें बाहर् गय़ा थां, रात कों आयाहू। थोडा लंबाकाम थां।
उनकेसंग थोड़ी देर बातचीत कि फिनमा छोटे ताऊजी केँ घऱचला गय़ा।
वहां पऱ ताऊजी, ताई जी औऱ सतीश भइया बैठे थें।
दादीमा नहि दिखरही थि।
मैने पूछा दादीमा कहां पर्र हैं।
संतोष ताई - बेटा उनको बुखार हैं वोँ कमरे मे आरामकर रही हैं।
मै दादीमा केँ कमरे मे गय़ा तोँ वोँ सोरही थीं, मै वापिस बाहर् आँ गय़ा।
मैने देखा कि भाभी औऱ बच्चे सजधजकर हौ रहे हैं कहीं जाने केँ लिए।
मैने पूछा कि सभी कहां जारहे हैं।
संतोष - बहु अपने पीहरजा रही हैं बच्चो केँ संग। औऱ सतीश उनको छोड़ने जारहा हैं।
सतीश - मामैकल हि लोंटुगा।
ताई - क्यो।
सतीश - इसको छोडकर मैआगे जाऊँगा ट्रैक्टर कां काम कराने, अभि आगे बहोत कामआने वाले हैं तोँ उसको अभि ठीक करवा लेता हूं।
रात कों मै सुमन (सतीश कि बेहन) केँ पासरूक जाऊंगा।
ताई - ठीक बेटा।
संतोष ताई ताऊ सें - आज आप् घऱ पर्र आँ जानां।
ताऊ- आज केसे आँ सकताहू, आज तौ पूरीरात पानी देना हैं खेतों मे।
संतोष - मै औऱ माजीरात कों अकेली रहेगी।
श्याम ताऊ कुछ सोचकर - देव बेटा आजतुयही पर्र सो जानां तेरी ताई केँ पास।
मै - ठीक हैं ताऊजी सो जाऊँगा।
फिनमै वापिस आँ गय़ा औऱ खेतो कि तरफचल पड़ा रोशनी काकी सें मिलने।
खेत मे आया तौ देखा कि काकी अभि बसआई हि थि।
मै- क्याँ कररही हौ काकी
काकीकुछ नहि बोलि।
मै- क्याँ हुआ काकी नाराज होँ।
रोशनी काकी - मै क्यो नाराज होंऊगी।
मैने काकी कों पिछे सें पकड़ लिया।
रोशनी -आआह.छोड मुझे क्याँ कररहा हैं।
मुझे क्रोध आँ गय़ा मैउसे पकड़कर कोठरी मे लें गय़ा औऱ उसे पंलग पर्र गिराकर उसकेऊपर चढ़ गय़ा।
मै उसके होठों कों चुसने लगा, संग हि उसके चुचो कों कसके भींचने लगा।
वोँ हल्का -2 विरोध कररही थि मगर उसके विरोध मे ताकत नहि थि।
कुछदेर बाद वोँ भि मेरासंग देनेलगी, अपने हाथों सें मेरे बालों कों सहलाने लगी।
मै- साली रंडी पहले तौ नाराज होँ रही थि औऱ अब केसेमजे लें रही हैं।
रोशनी- नाराज नहि होऊ तोँ क्याँ करू एक् तु तेरेइस मुसल सें मेरे अंदरआग लगा गय़ा औऱ अब मुझे पूछता हि नहि।
तेरे सें कोई भि अधिकदेर तक नाराज नहि रह सकता
मै- चिंता मतकर काकी तेरी सारीआग बुझा दूंगा।
मैने उसका ब्लाउज निकाल दिया, मैने काकी कि चुचि कों दबाते हुएकहा – अह्ह्ह्ह…काकी आपकीयह चुचियाँ कितनी मस्त हें…जी करता हैं चूस्ता हि रहूं…
काकी -तोँ चूसो नां रजाआ….आअहह…हान्न्न….औऱ ज़ोर सें…। खाजाओ… बहोत परेशान करती हें… काटो…आहह-आहह….ज़ोर सें नहियीईईईईईई…।
मेने चूम-चूमकर उनकी चुचियों कों लालकर दिया… उत्तेजना मे कयि स्थान दाँत सें काट भि लिया…
अब मुझसे औऱ इंतेज़ार करना मुश्किल होँ रहा थां…तोँ। मैने काकी कां घाघरा निकाल दिया… औऱ उनकी बुर कों हाथ सें सहलाकर चूम लिया…
मेैने काकी कि बुर मे अपनीदो उंगलियाँ डाल दि औऱ उन्हें अंदर बाहर् करके चोदने लगा…
काकी कि आँखेलाल होनेलगी… वासना कि खुमारी उनकेसर चढ़ने लगी। औऱ उनकी बुर गीली होँ गई, …
उनकी टाँगें मेरे लन्ड केँ स्वागत मे खुल गयीँ, …
मैने अपना मूसल उनकी रसीली मुनिया केँ मुँह सें अड़ाकर अंदरडाल दिया…
जिससे काकी कों हल्का दर्दहुआ, उसने अपने होठों कों भीच लिया
मेै धीरे-धीरे-2 धक्के लगाकर उनकी चुदाई करनेलगा… आज उनकी बुर मेरे लन्ड कों कुछ ज्यादा हि जाकड़ रही थि… जिससे मुझे पहले सें अधिकमजा आँ रहा थां …
मैअबजोर -2 सें धक्के मारने लगा। काकी कि सिसकियां बढ़ने लगी थि।
रोशनी - आआआह। मेररे। राजाऐसे हि। औऱ जोर सें चोदददो। अपनी रख्ख्खेल। कों आहहह।
काकीजोर सें झड़ने लगीअब मेैने काकी कों घोड़ी बना दिया… औऱ उनकी गान्ड कों चाटने लगा…
रोशनी - नहि, यह क्याँ कररहे हौ, गंदी स्थान हैं वोँ
मै-चुप कर मेरी रंडी
मेरे गांड चाहने सें काकी केँ बदन मे झुरझुरी होनेलगी।
मै- काकी आपकी गान्ड कितनी मस्त हैं… मनकररहा हैं इसमे अपना लन्ड डालकर रगड़रोड कर चोदु
रोशनी - नहीं लल्ला। दर्द होगा।
मेै- नहीं मुझे तुम्हारी गांड मारना हैं।
काकी - तुम् भि नां बेटा… बहोत जिद्दी होँ… ! अच्छा मार लेना पहले मेरी मुनिया कि खुजली तोँ शांतकरो।
मैंने लन्ड कों काकी कि चुत पर्र सैट किया औरघचक सें पूरा लन्ड एक् हि झटके मे पेल दिया… उसके मुँह सें एक् दबीदबी सि कराह… निकल गयीँ,।
काकी कि चुचियों कों मसल्ते हुए मे ढका-धक धक्के मारने लगा…
मेरे धक्कों कि स्पीड इतनी अधिक थि कि उसकीहाल हि झड़ी बुर सूखने लग गयीँ,। औऱ घर्षण सें उसमें जलन होनेलगी…
काकी बोलीं -धीरे-धीरे कर बेटा… मेरी बुर मे जलन हौ रही हैं।
थोड़ी देरबाद उसकी बुर फिन सें पनियाने लग गयीँ, औऱ वोँ भि मज़े लें लेकर मेरे धक्कों पर्र अपनी गान्ड पीछे धकेल - धकेलकर चुदाई कां मजा लेनेलगी…
आधे घंटे मे काकीदो बार पानी छोड़ गयीँ,, तब जाकर मेने उसकी पोखर कों अपने गाढ़े पानी सें भरा…
मेने अपना लन्ड काकी कि बुर सें निकाला, पच कि आवाज़ केँ संग वोँ बाहर् आँ गय़ा, उसके घाघरे सें अपने लन्ड कों पोंच्छ करमै उसकेपास सो गय़ा……
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भाग -26
मै उसकेपास सो गय़ा……
कुछदेर आराम करने केँ बादमै उसके होठों कों चुसने लगा, मैनेदो उंगली उसकीचुत मे डाल दि, वोँ गर्म होनेलगी।
फिनमै खडा होकरतेल कि शीशी लें आया। मैने कों कों उल्टा कर दिया। औऱ थोडा तेल काकी कि गान्ड केँ छेद पर्र डाला औऱ उंगली सें उसे अंदर तक चिकना कर दिया…
फिन अपने लन्ड पऱ चुपडा… औऱ उनकी गान्ड केँ भारी-2 पाटों कों अलगकर केँ उनकेछेद पऱ टिका दिया…।
गान्ड केँ छेद पऱ लन्ड कां अहसास होते हि काकी कि गान्ड कां छेद खुलने-बंद होनेलगा…
मेने बॉटल सें दो बूँदतेल कि औऱ टपका दि… औऱ इसबार अपनीदो उंगलियाँ एक् संग अंदरडाल दि, काकी नें चिहुन्क कर अपनी गान्ड केँ छेद कों सिकोड कर मेरी उंगलियों पऱ कस लिया…।
हइई… बेटटा… क्याँ करते हौ… मेरी गान्ड चटकरही हैं…
मेने उनकी गान्ड पर्र दूसरे हाथ सें चपतमार करकहा – ऐसे गान्ड भींचोगी तोँ चट्केगी हि नाँ, इसको थोडा ढीला छोड़ो…
मेरीबात मानकर काकी नें अपनी गान्ड कों थोडा ढीलाकर लिया, अब मेरी दोनो उंगलियाँ धीरे-धीरे अंदर तक पहुँच पारही थि…
उनकी गान्ड कां छेदअब थोडा सां खुल गय़ा थां, मेने उंगलियाँ बाहर् निकाल करदो बूँदतेल औऱ डाला औऱ उसे उंगली सें अंदरकर केँ अपने लन्ड कों उसकेछेद पऱ फिन सें रख दिया…
एक् हल्के सें धक्के केँ संग मेरा पूरा सुपाडा गान्ड केँ अंदर जाकर स्लिम होँ गय़ा.…।
आआह। बेटा…। थोडा धीरे-धीरे करो… मेरी गान्ड फटरही हैं…हाईए… बसकरो…
मेने काकी कि चौड़ी पीठ कों चूमते हुए उनकी चुचियों कों थाम लिया औऱ ज़ोर ज़ोर सें मसल्ने लगा।
काकी कि गान्ड मे लन्ड कि चुभनकुछ कम होनेलगी तोँ मेने औऱ थोडा धक्का दिया… औऱ आधा लन्ड अंदरकर दिया।
हइई…बेटटटा … लगता हैं आज नहीं छोड़ोगे… मुझे…अरे मारी.उफफफफफ्फ़।
अब मेने अपने एक् हाथ कों उनकीकमर कि साइड सें नीचे लें जाकर उनकी बुर कों सहला दिया औऱ अपनीदो उंगलियाँ बुर केँ अंदरकर केँ उसे चोदने लगा…
बुर कि सुरसूराहट मे काकी अपनी गान्ड कां दर्दभूल गयीँ, … औऱ सिसकियाँ…भरने लगी…
मौकादेख कर मेने एक् औऱ धक्का मार दिया औऱ मेरा पूरा लन्ड गान्ड कि सुरंग मे खो गय़ा…
वोँ दर्द सें कराहउठी। तकिये मे मुँह देकर बेडशीट कों मुत्ठियों मे कस लिया…
मगर मेने अपनी उंगलियों सें उनकी बुर चोदना जारीरखा। औऱ धीरे-धीरे-2 कर केँ गान्ड मे लन्ड अंदर – बाहर् करनेलगा…
काकी केँ दोनो छेदो मे सुरसुरी बढ़ने लगी औऱ वोँ अब मस्ती सें आकर गान्ड मरवाने लगी…
बुर सें उंगलियाँ बाहर् निकाल कर उनकी गान्ड पऱ थपकी देतेहुए धक्के लगाने मे मुझे असीम खुशी आँ रहा थां…।
काकी भि भरपूर मजा लेतेहुए अब अपनी गान्ड कों मेरे लन्ड पर्र पटकरही थि,
जब उनकी मोटी गद्दी जैसी गान्ड मेरी जांघों सें टकराती, तोँ एक् मस्त ठप्प जैसी आवाज़ निकलती… मानोकोई टेबल पर्र थापदे रहा होँ…
15 मिनिट तक उनकी गान्ड मारने केँ बाद मेरा पानी उनकी गान्ड मे भर गय़ा। हम् दोनो हि पस्त होकर बिस्तर पऱ लेटगये…
5 मिनिट केँ बाद मेने काकी कि चुचि कों सहलाते हुए पूछा- काकी गान्ड मारने मे मजाआया कि नहीं…
काकी - शुरुआत मे तौ लगा कि मेरी गान्ड फट गयीँ,। बहोत दर्दहुआ। मगरबाद मे मजा भि खूबआया मेरे राजा…मगर आहह-आहह…। अबफिन सें दर्द हौ रहा हैं…माआ…
पर्र तुम् चिंता मतकरो, कुछदेर मे ठीक होँ जाएगा…यह गांडदेख करमै स्वयं कों रोक नहि पाया
रोशनी - कोईबात नहीं… मेरे राजा… तुम्हारे लिए तोँ मेरीजान भि हाज़िर हैं। यह निगोडी गान्ड क्याँ चीज़ हैं…
काकीअब खुलकर गान्ड, लन्ड, बुर बोलने लगी थि…
मै काकी केँ होठों कों चुसने लगा।
कुछदेर आराम करने केँ बादमै कपडे पहनने लगा, काकी भि जानेलगी तौ मैनेउसे रोका।
मैनेउसे 7 हजार रूपये दिये, औऱ बोला काकीयह रखलो।
वोँ बोलीं - नहीं बेटा इतने रूपये मै नहि लेँ सकती। तुने तौ मुझे पैसे केँ लिए चुदने वाली रंडीसमझ लिया.मै पैसे केँ लिए तुझसे नहि चुदती समझे।
मुझे क्रोध आँ गय़ा, मैने उसको पकडकर दिवार सें लगा दिया औऱ उसकी गांड पर्र जोर सें थप्पड़ मारने लगा।
काकी कों दर्द होनेलगा थां। वोँ रूकने केँ लिए बोलने लगी।
मैने काकी कों अपनीतरफ पलट लिया।
मै- साली रंडीकब सें नखरेकर रही हैं, तु मुझसे चुदती हैं इसलिये यह पैसे नहि देरहा, मुझे तेरी फिक्र हैं इसलिये देरहा हू।
पैसो मे चुदने वाली रंडी बहोत मिलती हैं, उसकेलिए तेरी जरूरत नहीं हैं, समझी.तु मेरी रखेल हैं।
देख तेरे कपडे पुराने होँ गये हैं, इनसेनये कपड़े लें लेना औऱ घऱ कां सामान लें लेना।
यह बोलकर मै बाहर् जानेलगा।
काकी कों अपनी गलती कां अहसास हौ गय़ा थां।
काकी - मुझेमाफ करदे मैने तुम्हें गलत समझा, मुझे नहि पता थां तुझेही मेरी फिक्र हैं। उसकी आँखों मे आँसू थें।
उसने मुझेगले लगा लिया, वोँ बोलीं माफ करदे मुझे।
मैने भि काकी कों गलेलगा लिया।
मै - माफ करना काकी मैने तुम्हें मारा।
काकी - माफीमत माँग, मेरे राजा, तेरी रखेल जोँ हू।
मैने काकी कों किस किया। काकी नें वोँ रूपये लें लिये।
काकी कि चाल मे थोडा लंगडापन थां, मैने उससे बोला - काकीघऱ पऱ क्याँ बोलेगी ऐसे क्यूं चलरही हैं।
काकी-बोल दूंगी फिसल गई थि।
मै-ठीक हैं
(*** काकी कों जौ इंमोशनल बाते बोलीं यह बोलनी जरूरी थि, इससे काकी कां मेरेलिए अपनापन बढ़ गय़ा। अब काकी हमेशा मेरी रखेलबनी रहेगी।
काकी भविष्य मे मेरेकाम आयेगी ***)
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भाग - 27
काकी भविष्य मे मेरेकाम आयेगी ***)
मैघऱ कि तरफचल पड़ा, आकर खानां खाया, फिन थोड़ी देर आराम किया।
आज मौसम थोडा खराब थां, बारिश हौ रही थि।
साम कों अपनी बुलेट लेकरमै गाँव मे घुमने चला गय़ा। गाँव मे मेरेकुछ खासयार हैं।
उनमे एक् हैं कुलदीप
मै औऱ कुलदीप बचपन केँ साथी हैं।
मै उससे मिलने उसकेघऱ चला गय़ा। कुलदीप केँ घऱ मे उसके मां, बापू, छोटी बेहन हें।
बापू - सम्पत शर्मा (43)
यह एक् सरकारी टीचर हैं, इनकी ड्यूटी गाँव सें 70 किलोमीटर दूर दूसरे देहात मे हैं। कभीकभी घऱ पर्र आते हैं।
मां - सुमन शर्मा (41), साइज (34-30-34) रंग गोरा, स्लीम बॉडी, यह एक् हसीन सुशील स्त्री हैं।
बेहन - महिमा
यह स्कुल मे पढ़ती हैं।
कुलदीप मुझेघऱ केँ बाहर् हि मिल गय़ा, उसे लेकरमै घुमने चला गय़ा।
अब हल्की हल्की बारिश होनेलगी थि,
बहुतदेर घुमने केँ बादउसे घऱ छोड़कर मै भि घऱ पर्र आँ गय़ा।
घऱ पर्र आने केँ बादमै फ्रेश हुआ औऱ कपडे चेंज किये, फिन मै छोटे ताऊजी केँ घऱचला गय़ा। ताईजी किचन मे कामकर रहीथीं, मैने सोचा दादीमा सें मिललु।
मै दादीमा केँ पासचला गय़ा।
मै-अब तबियत कैसी हैं आपकी।
दादीमा - बुखार अबकुछ कम हैं, बदन मे हल्का दर्द होँ रहा हैं।
मै- दादीमा मुझेमाफ करना मैनेकल कुछ ज़्यादा कर दिया।
दादीमा - ऐसेमत बोल, तु मेरेसंग कुछ भि कर सकता हैं।
बुढी़ होँ गई हू नां अब हिम्मत कम हैं इसलिये थोड़ी तबियत खराब होँ गई हैं।
मैने दादीमा केँ होठों कों चुम लिया।
ताईजी दादीमा केँ लिए खिचड़ी लें आयी, दादीमा वोँ खानेलगी
मै बाहर् आँ गय़ा। कुछ वक़्त बाद मैने औऱ ताईजी नें खानां खाया।
ताई जी किचन मे थि औऱ मै ताईजी केँ कमरे मे आँ गय़ा।
10-15 मिनटबाद मै किचन मे पानी पिने केँ लिए गय़ा, मेरी नजर ताई जी केँ बदन पर्र पड़ी।
ताईजी ठीक लंबी हैं, वोँ नाँ तोँ अधिक मोटी हैं औऱ नाँ हि पतली.इस उम्र मे भि उनकाबदन मस्त थां। उनका साईज (34-30-34)
वोँ ब्लाउज औऱ घाघरे मे थि। वोँ खडी होकरकुछ कामकर रहीथीं। मै उनके पीछे जाके खड़ा हौ गय़ा। औऱ उनको पीछे सें गलेलगा लिया।
संतोष ताई- बेटा। क्याँ कररहा हैं, काम करनेदे मुझे।
मै-मै आपकोकब रोकरहा हूं,
मैने अपनेहाथ उनके रसीले पेट पर्र रख दिये औऱ सहलाने लगा। जिससे उन्हें हल्की गुदगुदी औऱ हल्का सां करंट सां लगा।
बहोत टाइम सें ताऊ ताई कों समय नहि देरहे थें।
ताई - आआह। क्याँ कररहा हैं बेटा।
मै-कुछ भि तोँ नहि अपनी ताईजी कों प्रेम कररहा हू, ताईजी आप् बहुत सुन्दर हौ।
ताई- चल झूठा.कुछ भि बोलता हैं, अब तोँ उम्रढल गई हैं।
मै(मसका लगाते हुए )- सच्ची ताईजी आप् इस उम्र मे भि मस्त हौ।
संतोष ताई- धत्त्त। बदमाश कुछ भि बोलता हैं, मै तेरी ताई हू।
मै- तोँ क्याँ हुआ, सही हि बोलरहा हू।
मेरा लन्ड एकदम टाईट हौ गय़ा.मैने ताई कों कस केँ गलेलगा, जिससे मेरा लन्ड ताई केँ पिछे चुभने लगा।
ताई केँ मुंह सें आह निकल गई।
संतोष ताई- आआह। बेटा क्याँ कर रहहहा। हैं तु.काम करनेदे मुझे।
मैकबरोक रहहू आपकोकाम करने सें मत मेरी ताई सें प्रेम कररहा हूं।
ताई कुछ नहि बोलि उसकी भि कई टाइम सें ठीक सें चुदाई नहि हुइ थि तोँ उसे भि हल्की हल्की खुमारी छानेलगी।
मैने दौनोहाथ अब गांड पऱ रख दिये औऱ धीरे-धीरे -2 सहलाने लगा।
ताई केँ मुंह सें हल्की हल्की आवाज़ आँ रही थि। मैने मौके कां फायदा ऊठाते हुए अपनेहोठ ताई कि गर्दन पर्र रख दिये।
ताई - अहह। बेटा यह क्यया। कर रह्ह्ह्हा। हैं
मै- मेरी प्यारी ताई कों चुमरहा हू, आप् अपनाकरो मैकबरोक रहा हूं।
तभी दादीमा कि आवाज़ आयी-बहु पानी पकड़ाना।
ताईजी जल्द सें लोटे मे पानी लेकर गई औऱ मै ताईजी केँ कमरे मे आँ गय़ा.
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