सीता --गाँव की लड़की शहर में complete - Hindustani Sex Kahani - Complete Kahani All Parts
सीता --एक् गाँव कि लड़की--1
written by शमिता
ट्रेन सें उतरते हि सीता कि जान मे जान आँ गई। वोँ ईश्वर कां धन्यवाद अदा कि। बिहार कि ट्रेन मे भीड़ नां हौ यहकभी हौ नहि सकता। इसी भीड़ मे गाँव कि बेचारी सीता कों अपने पति श्याम केँ संग आनां पड़ा। श्याम जोँ कि T.T.E। हैं। हालाँकि वोँ भि गाँव कां हि हैं मगरजॉब लगने केँ बादउसे शहर रहना पड़ा। 6 महीने पहले दोनों कि विवाह हुइ थि। विवाह केँ बाद श्याम अधिकदिन तक अकेला नहि रह पाया। काम केँ दौरान वोँ बहुतथक जाता थां। फिनघऱ आकर खानां बनाने कां झंझट। मन नहि करता खानां बनाने कां पऱ क्याँ करता? होटल मे अच्छा खानां मिलता नहि। कभीकभी तोँ भूखा हि रह जाता। ऐसा नहि हैं कि वोँ महँगे होटल मे नहि जा सकता थां। मगर मात्र पेट कि भूख रहतीतब नाँ। उसे तौ नई नवेली पत्नि सीता कि भि भूखलग गई थि। आखिर क्यूं नहि लगती? सीता थि हि इतनी खूबसूरत। पूरे गाँव मे तोँ उतनी खूबसूरत कोई थि हि नहि। तभी तोँ उसकी विवाह एक् जॉब वाले लड़के सें हुइ। श्याम जब सीता कों पहलीबार देखा तोँ देखता हि रह गय़ा। एकदम चाँद कि तरह चमकती गोरीरंग, नशीली आँखें, गुलाबी होंठ, कमर तक लम्बे लम्बे बाल, नाक मे लौंग, कान मे छोटी छोटी बाली, गले मे पतली सि Necklace जिसमें अँगूठी लटकी थि। सफेद रंग कि समीज-सलवार मे सीता पूरी खूबसूरती कि मल्लिका लगरही थि। दोनों केँ परिवार वालेदेख चुके थें, पऱ सबकी ख़्वाहिश थि कि यह दोनों भि एक्-दूसरे कों देख लें तौ अच्छा रहेगा। सीता अपने भैया-भाभी केँ संग श्याम कों देखने गाँव सें 5 किलोमीटर दूर एक् मंदिर मे गई थि। गाँव मे विवाह सें पहले लड़के कां घऱ पऱ आनां तोँ दूर, बात करना भि नहि होता हैं। पर्र श्याम केँ परिवार वाले कि जिद केँ कारण एक् मुलाकात होँ सकी।
तय टाइम पऱ श्याम अपने एक् साथी केँ संग सीता सें मिलने गाँव केँ बाहर् मंदिर पऱ पहुँच गय़ा थां। अभि तक सीता नहि पहुँची थि। दोनों वहीं बाहर् बने चबूतरे पर्र बैठकर सीता केँ आने कां प्रतीक्षा करनेलगे। श्याम केँ मन मे बहुत प्रश्न पैदा हौ रहे थां। अजीब कशमकश थां, पता नहि गाँव कि लड़की हैं कैसी होगी?रंग तोँ जरूर सांवली होगी। खैर रंग कों गोली मारो, अगर शारीरिक बनावट भि अच्छी मिली तोँ हाँकर दूँगा। पर्र अबहाँ याँ नां करने सें क्याँ फायदा। जब मां-बाबूजी कों नाता मंजूर हैं तौ मुझेबस एक् आज्ञाकारी बेटा कि तरह उनकीबात माननी थि। सभीकह रहे हें अच्छी हैं तोँ अच्छी हि होगी। अच्छा
वोँ आएगी तोँ मे बात क्याँ करूँगा? संग मे उसके भैया-भाभी भि होंगे तोँ ज़्यादा बात भि नहि कर पाऊंगा। अगर पसन्द आँ भि गई तौ बात नहि कर पाऊंगा। फिन तोँ विवाह तक प्रतीक्षा करना पड़ेगा। शहर मे हि ठीक थां। आहिस्ता मिल सकते थें, बात करते, date पर्र जाते वगैरह वगैरह। पर्र यहा बदनामी कि वजह सें कुछ नहि कर सकतेभले हि आपकी उससे विवाह क्यूं नां होँ रही हौ।
तभी मोटरगाड़ी कि तेज आवाज़ सें श्याम हड़बड़ा गय़ा। सामने देखा सीता अपने भैया-भाभी केँ संग पहुँच गई। सीता कों देखते हि श्याम कों जैसे करंटछू गय़ा होँ। उसकेमन मे अब एक् हि प्रश्न रह गय़ा थां, " गाँव कि लड़की इतनी हसीन केसे? मे तोँ बेकार मे हि इतनासोच रहा थां"
तभीउसे अपने मित्र कां ख्याल आया। उसकीतरफ देखा तौ उसे तोँ एक् औऱ झटकालगा। साला मुँह फाड़े एकटकदेख रहा थां, मन तौ कियादूँ साले कों एक् जमा केँ। पऱ चोरी सें हि एक् केहुनी दे दिया तौ लगा वोँ भि सो केँ उठा होँ। फिन मेरीतरफ देख केँ शैतानी मुस्कान देरहा थां साला। खैर हमनेउसे एक् तरफ करके भैया भाभी कों प्रणाम किया। फिन भैया कुछ बहाने सें व्हीकल सें 5 मिनट मे आँ रहा हूं बोल केँ चलेगए।
"आपकानाम?" भाभी मेरे मित्र कि तरफ देखते हुइ पूछी
"जी.मे। मे। रमेश। श्याम कि मित्र। " आशा केँ विपरीत हुए प्रश्न सें साला अपना Gender भि भूल गय़ा।
पर्र भाभी मुस्कुराती हुइ बोलि,
"रमेशजी, इन्हें कुछदेर केँ लिए अकेले बात करने देंगे तोँ अच्छा रहेगा। तब तक हम् दोनों कहीं एकांत मे चलते हें। "
रमेश चुपचाप भाभी कि तरफ बढ़ने लगा।
"औऱ हाँ श्याम जी। अभि मात्र बात करना औऱ कुछ नहि। मे पास मे हि हूं, बातें नहि सुन सकती पऱ देख जरूर रहुँगी हि.हि.हि" भाभी हँसती हुई रमेश केँ संग मंदिर केँ बाहर् निकल गई।
अब मे भला क्याँ बात करता? सामने साक्षात परी जैसे लड़की खड़ी जोँ थि। मे मात्र नाम हि पूछसका। आवाज़ भि इतनी मीठी कि कोयल भि शर्मा जाए। बाकी केँ 10 मिनट तोँ बस सीता कों देखता हि रहा। गजब कि थि सीता। ऊपर सें नीचे तक देखा पऱ कहीं सें भि मुझेकमी नजर नहि आई। वोँ अपनी नजरें नीचीकिए हुएमंद मंद मुस्कुराती रही। कभी कभीजब मेरीतरफ देखती तौ लगता अपने आँखों सें हि मुझे घायलकर देगी।
तभी मुझे भाभी औऱ रमेशआते हुए दिखे। मुझे तौ उम्मीद नाँ कि हि थि, फिन भि मोबाइल केँ लिएपूछ लिया। वोँ नां मे गर्दन नचा दि। पर्र मे फिन भि बहुतखुश थां।
"क्यूं श्याम जी, बात तोँ कुछकिए नहि! लगता हैं आपको हमारी सीता मनपसंद नहि आई। घऱ जाकर बाबूजी कों मनाकर दूँ क्याँ?" भाभीआते केँ संग हि पूछ बैठी।
"नहि.नहि। भाभीजी। मुझे तौ पसन्द हैं बाकी इनसेपूछ लो" हड़बड़ाते हुए मैंने कहा जैसे किसी बच्चे सें टॉफी माँगने पऱ बच्चा हड़बड़ा जाता हौ।
मेरीबात सुनते हि सभी ठहक्का लगाकर हँसने लगे। मुझे अपनी गलती कां एहसास हुआ तोँ मे भि शर्मा केँ मुस्कुरा दिया।
"तब तोँ लगता हैं कि जल्द हि आप् दोनों फँसोगे क्योंकि सीता कों भि आप् पसन्द आँ गए" भाभी बोलीं
"पर्र भाभीजी आपने तौ इनसे पूछा हि नहि फिन केसे आप् समझ गई?" तभी रमेशबोल पड़ा।
"क्यूं ? आपके साथी केँ पास क्याँ कमी हैं जौ पसन्द नहि आएँगे? अच्छे खासे गबरु जवानलग रहे हें। बॉडी भि बहुत अच्छा हैं। दिखने मे भि अच्छे हें। सरकारी जॉब करते हें। मे अगर कुवांरी रहती तौ मे हि विवाह कर लेती इनसे। " एक् बारफिन हम् सबको हँसी आँ गई भाभी कि बात पऱ। तभी मोटरगाड़ी कि आवाज़ सुनाई दि। भैया भि तब तक आँ गए। हमें एक् अच्छे लड़के कि तरहघऱ जानां ठीकलगा अब। मैंने उन लोगों सें इजाजत लेँ कर रमेश केँ संग निकल गय़ा।
दोनों कि विवाह बड़े हि धूमधाम सें हुई। श्याम अपने सुहागरात कों लेँ बहुत व्याकुल थां। आखिर क्यूं नां होँ इतनी खूबसूरत बीबी जोँ मिली। लाल जोड़ों मे तौ सीता औऱ भि कहरढा रही थि। सुहागरात केँ लिए सीताकोई खास सोची नहि थि।
थोड़ी सि डर जरूर थि कि पहलीबार सेक्स करूँगी तौ पता नहि कितना दर्द होगा। भाभी कहती थि कि पहलीबार दर्द होती हैं, मे सह भि पाऊंगी याँ नहि। अगर नां सहपाई तोँ कहीं नाराज हौ गए तोँ क्याँ करूँगी। हमें तौ ठीक सें मनाना भि नहि आता। इसी उधेड़बुन मे खोई सीता बिस्तर पऱ बैठी थि।
तभी हल्की आहट सें दरवाजा खुला औऱ श्याम अंदर आँ गए। सीता देखते हि उठ केँ खड़ी होँ गई।
"अरे ! खड़ी क्यूं होँ गई?" श्याम प्रेम भरी व्यंग्य सें सीता सें पूछा।
कुछ सोचने केँ बाद सीताफिन सें बैठ गई औऱ श्याम कों हल्की नजरों सें देखने लगी।
श्याम तोँ बेसब्र थां हि अपने मिलन कों लेकर, पऱ सीता कों महसूस नहि होने देना चाहता थां कि मे व्याकुल हूं। उसने एक् गंजी औऱ तौलिया पहनरखा थां। वोँ सीता केँ पासआकर बैठ गय़ा औऱ सीता कों देखने लगा। सीता अपनेतरफ देखते देख शर्मा कर अपनी नजरें दूसरी तरफकर ली।
"क्याँ हुआ?डर लगरहा हैं क्याँ?" श्याम धीरे-धीरे सें पूछा
कोई जवाब नाँ पाकर श्याम बोला, " मैडम, हम् दोनों विवाह किए हें। कोई प्रेमी नहि हें जौ डररही हें। आज हमारी पहलीरात हैं तोँ थोड़ी लज्जा हमें भि आँ रही हैं। अगर आपकी इजाजत होँ तोँ हम् यह लज्जा दूरकर लें। " श्याम नें सलाह औऱ प्रश्न दोनों एक् संगकर दिए।
अब बेचारी सीता क्याँ कहती? श्याम कुछ जवाब नाँ पाकर सीता केँ औऱ निकट होँ गय़ा औऱ गले सें लगा लिया। सीता कां चेहरा लज्जा केँ मारेलाल हौ गय़ा थां। आज जीवन मे पहलीबार किसी मर्द नें छुआ थां। मर्द कि बाँहेँ स्त्री कों कितना मजा देती हैं, बेचारी सीता कों क्याँ मालूम? अभि तोँ वोँ बस श्याम केँ सीने मे सहमीसटी हुइ थि।
सीता कि तरफ सें कोई Response नाँ पाकर श्याम थोडा परेशान होनेलगा, मगरआज पहली मुलाकात कि वजह सें अधिककुछ करनाठीक नहि समझा। उसने सीता केँ दोनों कंधे पकड़कर हल्के सें अलग किया। फिन अपना चेहरा सीता केँ बहुत निकट लेँ जाकर धीमी आवाज़ मे कहा, " I Love you सीता ! पता हैं पहलीबार तुम्हें देखते हि मुझे प्रेम होँ गय़ा थां। उसदिन सें मे तुम्हारा समय-लम्हा प्रतीक्षा कररहा हूं। अपने दिल कां हाल कहना थां तुमसे। ढेर सारा प्रेम करना चाहता हूं तुमसे औऱ तुम्हारी ढेर सारी बातें सुननी थि हमें। "
सीता नजरें नीचीकिए मूकबनी बैठी थि
सीता केँ बगल मे बैठा श्याम कंधों पर्र हाथ रखकर सीता केँ गालोँ कों सहलाने लगा। स्पर्श पाकर सीता अजीब रोमांच सें भर गई। श्याम अब अपना चेहरा सीता केँ कंधों पऱ रख दिया जौ कि सीता केँ गालोँ सें सटरही थि। सीता कां रोमरोम श्याम केँ गरम साँसोँ सें सिहर गय़ा। सीता केँ बदन कि खुशबू श्याम कों मदहोश कररही थि। श्याम अपना दूसरा हाथ बढ़ाकर सीता केँ चेहरे कों अपनीतरफ किया जिससे सीता केँ होंठ श्याम केँ होंठ केँ बहुत निकट हौ गए। दोनों कि गरम साँसें टकरारही थि। सीताआगे होने वाली कां चित्रण कों यादकर तेज साँसें लेनेलगी औऱ उसके होंठ कंपकंपाने लगे। श्याम ज़्यादा देर करना उचित नहि समझा औऱ होंठ सीता केँ तपते होंठों सें चिपका दिए।
श्याम तोँ जैसे स्वर्ग मे पहुँच गय़ा सीता केँ अनछुई होठोँ कां रस पाकर। सीता केँ तौ अंगअंग सिहरगए अपने जिंदगी कि पहली चुंबन सें। अंदर सें वोँ भि बहुत उत्तेजित हौ गई थि मगर लज्जा कि वजह सें बर्दाश्त कररही थि। मगर बकराकब तक अपने जिंदगी कि खैर मनाती। श्याम जैसे हि सीता केँ चुची पर्र अपनाहाथ रखा, सीता चिहुँक केँ श्याम कों दोनों हाथों सें जकड़ली। श्याम तौ अब औऱ कस केँ होठोँ कों चुसने लगा औऱ चुची कों धीमे धीमे दबाने लगा। कुछ हि देर मे जोरदार चुंबन सें सीता कि साँसे उखड़ने लगी थि। मगर श्याम इनसभी सें अनभिज्ञ लगातार चूसेजा रहा थां। अंततः सीता बर्दाश्त नहि करपाई औऱ अपने होंठ पीछे खींचने लगीतब श्याम कों महसूस हुआ। श्याम केँ होंठअलग होते हि सीताजोर जोर सें साँस लेनेलगी औऱ सामान्य होने कि कोशिश करनेलगी। श्याम केँ हाथ अभि भि सीता केँ चुची कों सहलारहा थां।
कुछ सामान्य होने पऱ श्याम नें सीता कों प्रेम सें पूछा, "जान, तुम् इतनी मीठी होँ कि हमेंपता हि नहि चला कि अब अधिक हौ गय़ा हैं औऱ तुम्हें दिक्कत हौ रही हैं। "
अब तक शायद सीता मे भि कुछ हिम्मत आँ गई थि। वोँ शर्माती हुइ बोलि, " कम सें कम साँस भि तोँ लेने देते। "
"ओह जान सॉरी ! आगे सें ख्याल रखूँगा। "कहते हुए सीता कों अपनी बाँहो मे समेट लिया। सीता भि मुस्कुराती हुईँ श्याम केँ सीने सें चिपक गई।
"जान!जब होंठ इतने जूसी हें तोँ औऱ चीज कितनी रसीली होगी। " श्याम थोडा मजाकिया मूड मे पूछा
सीता लज्जा सें कुछबोल नहि पारही थि, बस मुस्कुरा रही थि।
कुछदेर चिपके रहने केँ बाद श्याम हटा औऱ अपना गंजी खोलते हुए कहा, "जान अबइन कपड़ों कां कोईकाम नहि हैं सोअब तुम् भि हटाओ अपने कपड़े। " श्याम अब मात्र अंडरवियर मे थां जिसमें उसका लण्ड अंगराई लेँ रहा थां। सीता तिरछी नजरों सें देखी तौ एक् बारगी डर गई मगर चेहरे पऱ भाव नहि आने दि। श्याम सीता केँ पास आँ कर साड़ी केँ पल्लू खींच दिया। सीता कि तोँ आह निकल गई। अगले हि समय साड़ी जमीन पर्र बिखरी पड़ी थि। सीता कि पीठ पर्र एक् हाथरख अपने सें चिपका लिया औऱ ब्लाउज केँ हुक खोलने लगा। ब्लाउज खुलते हि मध्यम आकार कि चुची बाहर् आँ गई जोँ कि सफेदरंग कि ब्रॉ मे कैद थि। श्याम ब्रॉ केँ ऊपर सें हि चुचीजोर सें मसल दिया। सीता कि ओह निकल गई।
अगले हि क्षण तेजी सें श्याम नें पेटीकोट कां नाड़ा भि खोल दिया। सीता तौ लज्जा सें मरीजा रही थि। श्याम पति हैं मगर पहलीबार पति केँ संग भि लड़की कों बहुत लज्जा आती हैं। यहीहाल सीता कि भि थि। बेचारी लज्जा सें श्याम केँ सीने सें चिपक गई। श्याम नें भि मौका मिलते हि ब्रॉ भि अलगकर दिया। अब दोनों केवल पेन्टी मे चिपके थें।
सीता तौ साक्षात काम देवीलग रही थि। पैरों मे पायल, हाथ मे मेँहदी, कलाई मे चूड़ी, गले मे मंगलसूत्र जौ चुची तक लटकरही थि, नाक मे छोटी सि रिंग, कान मे झुमका, माथे पे माँगटीका, कपड़ों मे केवल एक् छोटी सि पेन्टी। कुल मिलाकर इससमय सीता किसी मुर्दे कां भि लण्ड खड़ाकर देती। श्याम तोँ जिन्दा थां। उसे तौ लण्ड केँ दर्द सें हालत खराब थि। अब अंडरवियर केँ अंदर रखना मुश्किल थां तौ उसने बाहर् कर दिया औऱ सीता केँ नरम हाथों मे थमा दिया। सीता तोँ चौंक पड़ी लण्ड कि गरमी सें। उसे तौ लगरहा थि कि हाथ मे छालेपड़ जाएँगे।
"जान, अपनाहाथ आगे-पीछे करो नां। "गालोँ कों काटते हुए श्याम बोला
सीता तोँ इनसभी सें अनजान थि तोँ भला वोँ क्याँ करती। फिन भि अनमने ढंग सें करनेलगी।
कुछ हि क्षण मे लण्ड केँ दर्द सें श्याम कुलबुलाने लगा। सीता कां हाथहटा दिया औऱ गोद मे उठाबेड पऱ सुला दिया। बेड केँ नीचे सें हि श्याम नें पेन्टी कों निकाला। ओफ्फ ! बुर देखते हि श्याम कों नशालग गय़ा। एकदम चिकनी गुलाबी रंग, हल्की हल्की बाल, कसी हुइ फाकेँ, पूरी मदहोश करने वाली थि। एक् जोरदार चुंबन जड़ दिया श्याम नें। सीता तड़पउठी। श्याम नें चुंबन केँ संग हि अपनाजीभ चलाने लगा। सीता अपनासर बाएँ दाएँ करके तड़पने लगी। श्याम केँ बाल पकड़ केँ हटाने लगीमगर श्याम तोँ चुंबक कि तरह चिपका थां। उसकी बुर पानी छोड़ने लगी थि। नमकीन पानी मिलते हि औऱ जोरजोर सें चुसने लगा। सीता अधिकदेर तक बर्दाश्त नहि करसकी।
चंद मिनट मे हि सीता कि चीख निकल गई औऱ झड़ने लगी। श्याम सारा पानी जल्द जल्द पीनेलगा। जीभ सें पानी कि एक् एक् बूँद श्याम नें चाट केँ साफकर दिया। सीता बदहवास सि आँखेबंद करजोर जोर सें साँसे लें रही थि। श्याम मुस्कुराता हुआ उसकेबगल मे आँ केँ लेट गय़ा औऱ सीता कों अपनी बाँहो मे भर केँ उसके माथे कों चूमने लगा।
श्याम कां लण्ड अभि भि पूरातना हुआ थां। उसने एक् पेर सीता केँ पैरों पर्र चढ़ा दिया, जिससे लण्ड सीधा सीता कि गुलाबी बुर पऱ दस्तक देरही थि। श्याम सीता कों चूमते हुए कहा, "जानू, तुम् तौ इतनी जल्द खल्लास हौ गई। अभि तोँ असली मज़ा तौ बाकी हि हैं। "
सीताबस मुस्कुरा कररह गई।
श्याम उठ केँ सीता केँ मुँह केँ पासबैठ गय़ा जिससे उसकातना लण्ड सीता केँ होंठ केँ बहुत नजदीक ठुमके लगारहा थां। पर्र सीता आँखें बंद कि अभि भि पड़ी थि।
श्याम, "जान, अब मे तुम्हें एक् पूरी स्त्री कां एहसास दिलाना चाहता हूं, अपनी आँखें खोलो औऱ इसे प्रेम करो। "
सीता सुनते हि एकबारगी तौ चौंक पड़ी। फिन आँखें खोली तोँ सामने लण्डदेख जल्द सें अपना मुँह दूसरी तरफकर ली।
श्याम, "अरे! क्याँ हुआ?जब तुम् मेरे लण्ड कों प्रेम नहि करोगी तौ मे इसे तुम्हारी बुर मे केसे डालूँगा औऱ तुम्हें पूरी महिला केसे बनाऊंगा। "
सीता शर्माती हुइ बोलीं, "गंदा मतकहो नां औऱ आप् नीचे होँ जाओ मे हाथ सें कर देती हूं। "
श्याम, "हाथ सें नहि डॉर्लिँग मुँह सें प्रेम करना हैं औऱ गंदा क्याँ हैं लण्ड कों लण्ड नां बोलूँ तौ क्याँ बोलूँ?"
सीता केँ जिस्म मे तोँ मानो 1000 वोल्ट कां करंटलग गय़ा। आज तक बेचारी एक् किस तक नहि कि थि उसे मुँह मे लण्ड लेने कों कहा जौ जारहा थां। सीता सकुचाते होतेहुए बोलि, "छीः! मुँह मे गंदा नहि लूँगी। "
"कुछ गंदा नहि हैं मेरी रानी। मुँह मे लोगी तोँ औऱ मस्त होँ जाओगी। आजमना कररही हौ अगलीबार स्वयं हि लपककर लोगी। "
"नहि आज नहि प्लीज। औऱ जोँ करना हैं कर लीजिए मगरयह नहि कर सकती" सीता बोलीं।
अब श्याम अधिक दबाव नहि देना चाहता थां क्योंकि आज पहलीरात थि दोनों कि।
"OK। बस एक् किस हि करदो औऱ ज़्यादा कुछ नहि प्लीज" श्याम अब औऱ ज़्यादा प्रेम सें कहा।
सीता भि श्याम कों नाराज नहि करना चाहती थि। हल्की मुस्कान केँ संग बोलीं, " सिर्फ एक् किस। "
श्याम कों तोँ जैसेमन कि सारी ख़्वाहिश इतनी मे हि पूरी होँ गई पूरा चहकते हुए बोला, "हाँ हाँ डॉर्लिँग बस एक् किस। "
"ठीक हैं तौ अपनी आँखें बंद कीजिए। मुझे लज्जा आएगी" सीता बोलि।
श्याम अबयह मौका जाने नहि देना चाहता थां तोँ उसने जल्द सें अपनी आँखें बंदकर ली। सीता अभि भि लण्ड कों मुँह सें नहि लगाना चाहती थि मगरहाँ कर दि थि तोँ क्याँ करती?अब अगरमना करती हैं तोँ कहीं श्याम नाराज हौ गए तौ? फिन भि बहुत हिम्मत करके एक् हाथ सें लण्ड पकड़ी औऱ अपने होंठ लण्ड केँ निकट लेँ जानेलगी। श्याम कि तोँ मात्र छूने सें हि कराह निकलरही थि। जैसे हि सीता केँ होंठ लण्ड कों छुआ श्याम कि अहह निकल पड़ी। सीता श्याम कों मस्ती मे देखकुछ देर तक अपना होंठ लण्ड पर्र चिपकाए रखी। सीता कों अच्छा नहि लगरहा थां मगर वोँ श्याम केँ लिएऐसा कररही थि। कुछ देरबाद सीता हटने कि सोची तोँ उसने पूरा सुपाड़ा अपने होठोँ मे लेँ किस कि आवाज़ केँ संगहटा ली औऱ जल्द सें अपना चेहरा हाथ सें ढँकली।
श्याम कों तोँ ऐसालग रहा थां कि उसका लण्डअब पानी छोड़ देगा। किसीतरह रोक केँ रखा औऱ सीता कि गालोँ पर्र चुंबन केँ संग धन्यवाद अदा किया।
श्याम अबउठा औऱ सीता केँ मेकअप बॉक्स मे सें क्रीम निकाला औऱ अपने लण्ड पे मलनेलगा। फिन वोँ सीता कि बुर कों चूमते हुए उसकी बुर मे भि क्रीम लगाने लगा। सीता कों ठंड महसूस हुईँ तोँ हल्की नजरो सें देखने लगी कि क्याँ लगारहे हें। अपनीतरफ देखती पाकर श्याम बोला, "डॉर्लिँग, क्रीम लगारहा हूं ताकि आपको दर्दकम हौ। " औऱ श्याम मुस्कुरा दिया।
सीता शर्माती हुई एक् बारफिन चेहरा ढँकली।
श्याम नें सीता केँ दोनों पैरों कों मोड़कर सीने सें सटा दिया। अब सीता कि फाकेँ बहुतहद तक खुलरही थि बहुतकसी बुर केँ कारण पूरी नहि खुली थि वर्ना इस मुद्रा मे तोँ अक्सर कि बुर खुल जाती हैं। सीता कि तौ साँसें अबरुक रही थि आगे होने वाले स्थिति कों सोचकर। श्याम नें अपनी उँगली सें बुर कि दरार कों फैलाकर अपना लण्ड टिका दिया औऱ हल्का धक्का लगाया। मगर लण्ड फिसल गय़ा। पुनः उसने बुर औऱ अधिक सें खोलकर थोडा जोर कां धक्का लगाया।
सीताजोर सें अपनी आँखें भीँचते हुए चिल्ला पड़ी, " आआआआआआहहहहह। ओह ओहओफ्फ ओफ्फई ई ईईईईईईई मर गईईईईईई प्लीज निकालीए बाहरररर आहआह."
"बस रानी थोडा बर्दाश्त करलोफिन मज़ा आएगा" श्याम पुचकारते हुएकहा।
श्याम कां लण्ड 2 इंच तक घुस गय़ा थां।
श्याम नें अपना लण्ड खींचते हुए एक् औऱ झटकादे दिया। इस बार 4 इंच तक घुस गय़ा।
"ओफ्फ.माँआआआआईईईईईईई मरररर गईईईईईईईई अब औऱ नहि सह पाऊंगी। प्लीज बाहर् निकालीएएएए" सीता रोनी सूरत बनाते हुए बोलि।
"अच्छा अब नहि करूँगा। " श्याम कहतेहुए सीता कि होंठ चुसने लगे औऱ चुची मसलने लगे। कुछ देर चुसने केँ बादजब सीता थोड़ी नॉर्मल हुई तौ श्याम नें सीता केँ होठोँ कों कस केँ चुसते हुए अपना लण्ड पीछे खींचा औऱ बिनाकहे पूरी ताकत सें धक्का दे मारा।
"आआआआआआआ मां मर गईईईईईईई अहहअहह ओफ्फओह प्लीज मे आपके पांव पकड़ती हूं बाहर् निकाल लीजिए आआआआइसइस" सीता कि आँखें आँसू सें भर गई थि औऱ छूटने कि प्रयास कररही थि। जीवन मे पहलीबार उसे इतना दर्दहुआ थां वोँ भि चुदाई मे, कल्पना भि नहि कि थि बेचारी। ऐसालग रहा थां मानो चाकू सें किसी नें उसकी बुर चीर दिया होँ। श्याम कां पूरा लण्ड सीता कि छोटी सि बुर मे समा गय़ा थां औऱ उसकेबॉल सीता कि गांड केँ पास टिकी थि। श्याम सीता केँ होंठ चूमते हुएकहा, " बधाई होँ सीता रानी। अब आप् लड़की सें पूरी स्त्री बन गई हें। "
सीता बेचारी कुछ नाँ बोल सकी। श्याम लण्ड पेले हि सीता कि चुचीमसल रहा थां औऱ होंठ लगातार चूसेजा रहा थां। बहुतदेर बादजब दर्द थोड़ी कम हुइ तौ श्याम नें अपना पूरा लण्ड बाहर् निकाला औऱ जोर सें पेल दिया।
"आहहहहहह उम्मउम्मउम्म" सीता एक् बारफिन कराहउठी।
"बस रानी। आज पहलीबार हैं नां इसलिये दर्द ज़्यादा होँ रहा हैं। आज सहलोफिन पूरी जीवनमजे लेती रहना। "श्याम नें कहा औऱ कहकर सीता कों पेलने लगा।
सीता --गाँव की लड़की शहर में complete - Hindustani Sex Kahani – New Episode
सीता --एक् गाँव कि लड़की--2
लण्डअब लगातार सीता कि बुर कों चीररही थि। सीता अभि भि दर्द सें बेहाल थि। वोँ लगातार कराहरही थि मगर श्याम तोँ अब औऱ जोरजोर सें पेलने लगा। अपना लण्ड पूरा बाहर् निकालता औऱ एक् हि झटके मे जड़ तक घुसेड़ देता। वोँ सीता कि कुंवारी बुर कि लगातार धज्जियाँ उड़ारहा थां।
कुछ पलोँ मे श्याम कि रफ्तार तेज होँ गई। उसकी मुँह सें भि आवाजें निकलरही थि अब।
"अहह सीता ओहहहहह मेरीजान। कितनी प्यारी हौ तुम्। ओफ्फओह कितना मज़ा आँ रहा हैं तुम्हें चोदने मे। क्याँ मुलायम होंठपाई हैं एकदम मीठी। आहआहअहह अहह मे तोँ धन्य होँ गय़ा तुम्हें पाकर। " श्याम ऐसे हि बोलते हुए सीता कों अबतेज तेज धक्के लगारहा थां।
अचानक श्याम कि चीख निकलनी शुरुआत होँ गई। श्याम अपनेगरम गरम पानी सें सीता कि बुर कों भररहा थां। उस पानी कि गर्मी कों सीता बर्दाश्त नहि करसकी औऱ वोँ भि श्याम कों जोर सें गले लगाती हुई पानी छोड़ने लगी। सीता कों लगरहा थां जैसे उसकी बुर मे पिचकारी छोड़रहा होँ कोई। दोनों झड़ने केँ बहुतदेर बाद तक यूँ हि पड़ेरहे। फिन श्याम उठकर बाथरूम मे साफ करनेचला गय़ा। सीताउठ केँ अपनी बुर कि तरफ देखी तोँ बेहोश होते होते बची। पूरी तरहसूज गई थि औऱ उसमें सें खून औऱ लण्ड केँ पानी कां मिश्रण टपकरही थि। बेडसीट भि खून सें पूरीतरह लाल होँ चुकी थि। बेचारी सीता कों अपनीइस हालत कों देखकर रोना आँ गय़ा औऱ सुबकने लगी। सीताकुछ समझ नहि पारही थि कि क्याँ करे? इतने मे श्याम बाथरूम सें वापस आँ गय़ा। श्याम कां लण्ड सिकुड़ गय़ा थां फिन भि सीता कों डरलगरहा थां। सीता कों सुबकती देख पूछे, "जान, दर्दतेज होँ रही हैं क्याँ? पहलीबार चुदाई मे इतना हि दर्द होता हैं। मेरा लण्ड भि देखोछिल गय़ा हैं। चलो बाथरूम साफ करते हें। "
श्याम नें सीता कि बाँह पकड़ उठने मे मदद कि। फिनगोद मे उठाकर बाथरूम मे लें जाकर एक् टेबल पर्र बैठादिए। फिन पानी सें सीता कि बुर कों अच्छी तरह सें साफ किया। बेचारी सीता तौ सोची भि नहि थि कि कोई उसकी बुर कों इतना प्रेम देगा। वोँ तोँ लज्जा सें मरीजा रही थि। फिन तौलिया सें बुर कों अच्छी तरह पोँछा। फिन सहारा देकर बेडरूम तक लेँ आया। सीता कि पांव जवाबदे चुकी थि। कोई भि देखता तौ जरूर कहता कि इसकी तबीयत सें चुदाई हुई हैं। अंदरआकर श्याम नें सीता कों सुला दिया। सीता साड़ी उठाकर पहनना चाहरही थि मगर श्याम नें रोक दिया, "जान, तुम् ऐसे हि बहुत खूबसूरत लगरही हौ तौ कपड़े पहनने कि क्याँ जरूरत?"
सीता शर्मा कररह गई औऱ फिन दोनों नंगे हि सोगए।
सुभह 5 बजे मेरी नींद खुली तौ अपनी हालतदेख स्वयं शर्मा गई। मे पूरी मादरजात नंगी श्याम केँ नंगेबदन सें चिपकी थि। मे उठी तौ मेरीनजर बेडसीट पड़ी, बेडसीट पर्र खून औऱ वीर्य केँ बहुत गहरीदाग बन चुकी थि। मैंने अपने कपड़े पहने। फिन श्याम कों नींद सें जगाई तोँ वोँ भि देख मुस्कुरा दिए। मैंने जल्द सें बेडसीट बदली औऱ दूसरी बिछा दि। तब तक श्याम भि अपने कपड़े पहने औऱ फिनसो गए। नींद तौ हमें भि आँ रही थि किंतु नई स्थान थि तोँ देर तक सोती तोँ पता नहि सभीलोग क्याँ सोचते?
कुछदेर बादघऱ केँ सारे सदस्य भि जग चुके थें। मे भि नहा-धो कर फ्रेश होँ गई औऱ ब्रेकफास्ट कर अपनेरूम मे आँ गई।
सुभह 11 बजे तक श्याम सोतेरहे। फिनउठ कर फ्रेश हुए औऱ बाहर् अपने दोस्तों केँ संग निकलगए। उनके जाते हि हमारी ननदी पूजा आँ धमकी। सुभह सें तोँ श्याम थें तौ शायद इसीलिए नहि आई।
"भाभी, भैया कों सोने नहि दिए क्याँ रात मे जोँ इतनीदेर तक सोते रहे?"पूजा हँसती हुईँ बोलि।
उसकीबात सुन मुझे भि हँसी आँ गई।
पूजा सबकी लाडली थि घऱ मे। अभि वोँ 12वीं कि परीक्षा दि थि। दिखने मे भि हसीन थि बहुत। हमेशा हँसती हुई रहती थि। शारीरिक संरचना भि अच्छी थि।
पूजाअब बेड पऱ चढ़कर मुझे पीछे सें बाँहों मे भरली। फिन अपनीगाल मेरीगाल सें सटाते हुए बोलि, "भाभी बताओ नाँ प्लीज, रात मे क्याँ सभी कि?"
"आप् अपने भैया सें पूछ लीजिए कि रात मे क्याँ सभीकिए ?" मे हँसती हुइ कह दि
"क्याँ.भाभी.? भैया सें केसेपूछ सकती। बताओ नाँ प्लीज। "
"नहि पूछ सकते तौ रहने दीजिए। आपकी भि विवाह होगी तोँ स्वयं जान जाइएगा। "
"1 मिनट भाभी। यह आप् आप् क्याँ लगारखी हैं। मे अपनी भाभी सें दोस्ती करनेआई हूं औऱ आप् हें कि.?"
"ओके पूजा। "
"Thanks भाभी। अच्छा यह तोँ बताओ मेरी बेडसीट कहां हैं जौ कल बिछाई थि"
"क्याँ? वोँ तुम्हारी बेडसीट थि। "
"हाँ मेरी सीता डॉर्लिँग। जरा दिखाओ तौ क्याँ हालतकर दि। " कहतेहुए पूजा मेरी गालोँ कों चूमली
"नहि, अभि वोँ देखने लायक नहि हैं। मे साफकर दूंगी तब देख्ना"
"सीता भाभी, तुम् तौ अभि कपड़े साफ करोगी नहि। अगर जल्दसाफ नहि होगी तौ दाग ज़्यादा आँ जाएँगे। सो प्लीज हमेंदे दो मे साफकर दूंगी। प्लीज निकालो। "
"ठीक हैं मगर किसी कों दिखाना नहि वर्ना सभी हँसेगे। "मैंने स्वयं कों पूजा कि बाँहों सें अलग होतेहुए कहा।
"क्याँ? देखेंगे नहि तौ केसे समझेंगे कि दुल्हन संस्कारी हैं। "
"पागल कहीं कि मरवाएगी हमें। जाओ हमें नहि साफ करवानी। " मे बिस्तर पऱ बैठते हुए बोलीं।
"हि हि हि हि हि। मजाककर रही थि भाभी। वोँ सभी दिखाने वालीचीज होती हैं क्याँ। अबदो" पूजाजोर सें हँसती हुईँ बोलि।
मैंने अपनी सूटकेस खोल केँ ज्योंही बेडसीट निकली, पूजालपक केँ लेँ ली औऱ फूर्ति सें बेडसीट बिस्तर पर्र फैला दि औऱ चिल्ला पड़ी।
"हाय! मेरी प्यारी भाभी कि कितनी धुनाई हुईँ हैं पूरीरात। बेडसीट देखकर तौ हम् जैसी तौ डर सें विवाह भि नहि करूँगी।.भाभी, रात मे अधिकफटी तौ नहि नां। "
मे लज्जा सें लाल होँ गई औऱ फिन जल्द सें बेडसीट समेटने कि कोशिश करने लगी। पूजा तेजी सें मेरे दोनों हाथ पकड़ली औऱ मुझे बिस्तर कि धक्का देती हुइ स्वयं भि मेरे जिस्म पर्र गिर पड़ी। मे नीचे पड़ी थि औऱ पूजाऊपर सें दबाये थि।
"भाभी, रात मे जबमजे लें रही थि तब तौ लज्जा नहि आई, फिन अभि लज्जा क्यूं आँ रही हैं। " पूजा अपना चेहरा मेरे चेहरे सें करीब सटाती हुई बोलीं।
"पागल मरवाएगी हमेंअगर आपके भैया कों मालूम पड़ेगी तोँ पता हैं क्याँ होगा?" मे भि धीरे-धीरे पूजा कों समझाने कि कोशिश कि।
"कुछ नहि होगा क्योंकि हम् दोनों मे सें कोई भैया कों कुछ नहि कहने वाले हें। वैसे भाभी आपकी होंठ बहुत मस्त हें। मन तोँ होती हैं चिपका दूँ."
पूजाआगे कुछ करती उससे पहले हि मैंने धक्का देते पूजा कों अपने सें दूर किया। पूजाअलग होतेहुए जोर सें हँसने लगी। मे भि मुस्कुरा दि।
फिन पूजा बेडसीट समेटली औऱ अपनेसंग लाईबैग मे डालली।
"भाभी, अपने मित्र केँ यहाजा रही हूं। वहींयार केँ यहासाफ कर दूंगी। चिन्ता मत करना किसी कों नहि दिखाऊँगी। साम तक आँ जाऊंगी। " पूजाबैग कंधे पर्र टिकाती हुई बोलीं।
मे भि मुस्कुरा दि औऱ बोलीं, "ठीक हैं। जल्द आनां, अकेले बोर होँ जाऊंगी। "
फिन पूजाबाय कहकर निकल गई।
11 बजगए थें। अब हमें भि नींदआने लगी थि। बेड पर्र पड़ते हि मुझे नींद आँ गई औऱ मे सो गई.।
रात कि थकावट सें मे सोई तोँ बेसुध सोतीरही। अचानक मुझे अपने होंठ पऱ कुछ गीला सां महसूस हुआमगर मेरी नींद नहि खुली। तभी मेरी होंठ मे तेज दर्द हुइ जिससे मे हड़बड़ा केँ नींद सें जगी।
ओह.गॉड, एक् लड़की मुझे अपनी बाँहों मे जकड़ी होंठचुस रही थि। मे पहचान नहि सकी। किसीतरह उसे धक्का देकर अपने सें अलग किया। अलग होते हि वोँ औऱ पूजाजोर सें हँसने लगी। मुझे तौ क्रोध भि आँ रही थि मगर पूजा कों देख अपने आप् पऱ कंट्रोल कि।
"भाभी, यह लो बेडसीट। पूरीतरह साफ हौ गई। यह मेरी मित्र हैं, इसी केँ यहासाफ करने गई थि। बहुत मेहनत करनी पड़ी हम् दोनों कों तब जाकरसाफ हुइ हैं। " पूजा हँसती हुईँ बोलि।
"वोँ तोँ ठीक हैं मगरयह गंदी हरकत क्यूं कि तुम् दोनों। " मैंने करीब डाँटते हुए पूछा।
"भाभी, इतनी मेहनत सें साफ कि आपकी बेडसीट तोँ क्याँ बिनाकुछ लिए थोड़े हि छोड़ दूंगी। पिँकी तौ अपना हिस्सा लेँ ली, अब हमें भि जल्द सें दे दो। "पूजा मेरी बिस्तर पऱ चढ़ते हुए बोलीं।
मे कुछ बोलती उससे पहले हि पिँकी बोल पड़ी, " भाभीजी, सोतेहुए आप् इतनी प्यारी लगरही थि कि मे बर्दाश्त नहि करसकी औऱ चिपका डाली। वोँ तौ पूजा हि लेने वाली थि मगर मैंने हि रोक दि वर्ना औऱ बुरी हालतकर देतीयह"
दोनों कि चुहलबाजी सुन केँ मेरी भि क्रोध शांत हौ गई।
"तुम् दोनों पागल होँ गई होँ। कम सें कमजगा तौ देती। "मैंने हँसते हुए दोनों सें एक् संग प्रश्न कर दि।
इतना सुनते हि पूजाझट सें मेरीतरफ लपकी। मे कुछ समझती याँ करने कि सोचती, तब तक मे बिस्तर पर्र पड़ी थि औऱ पूजा मेरे दोनों हाथ जकड़ी चढ़ी थि मुझ पर्र। हम् सभी कों हँसी आँ गई पूजा कि इस हरकत सें। पूजा कि हरकतेँ अच्छी लगनेलगी थि हमेंसो मे भि बिनाकुछ किए पूजा केँ नीचे पड़ी थि।
पूजा कि चुची मेरी चुची कों दबारही थि। फिन पूजा मेरी गालोँ कों चूमते हुए बोलि, "सीता डॉर्लिँग, आप् मना भि करती तौ मे लेँ हि लेती। मगर मान गई यह आपकेलिए अच्छी बात हुईँ वर्ना वोँ हाल करती जौ भैया भि नहि किए हें."
"चल चल.बड़ी आई हालत खराब करने वाली। आपके भैया भि इसीतरह बोलते थें मगर थोड़ी तकलीफ केँ बादसभी ठीक हौ गई। " मे भि ताने देतेहुए बोलीं।
हम् दोनों कि बातें सुन पिँकी भि हँसती हुइ पासआई औऱ बोलि, " भाभीजी, अब तौ आपकीखैर नहि। पूजा वोँ सभी करती हैं जिसकी आप् कल्पना भि नहि कर सकती औऱ आपकीऐसी हालतकर देगी कि आप् प्यास उतावलापन केँ छोड़ने कि भीख मांगोगी। "
तभी बाहर् सें मां जी कि आवाज़ सुनाई दि। पूजा जल्द सें उठी, मे भि जल्द सें उठी औऱ औऱ अपने कपड़े ठीक कि।
"पूजा, सिर्फ बात हि करोगी। बहु सुभह हि खायी थि, अभि कुछ ब्रेकफास्ट बनादो औऱ पिँकी कों भि खिला दो। बहुत दिनबाद आई हैं। "माँ आती हुई बोल पड़ी।
"ठीक हैं माँ। "पूजा बोलि
इतना आदेशदे कर माँ जीचली गई। शायद उन्हें कहीं जानां थां।
"पूजा, मे अबलेट हौ जाऊंगी। मे भि चलती हूं" पिँकी भि हम् दोनों कि तरफ देखते हुए बोलीं।
"क्यूं, इतनी जल्द क्याँ हैं? ब्रेकफास्ट कर लीजिए फिनचले जाइएगा। "मैंने पिँकी सें पूछ बैठी।
"नहि भाभीजी, फिन आऊंगी तौ खानां हि खाऊंगी आपकेसंग। आज मां कों कुछकाम हैं इसलिये जानां होगा। पूजा सें पूछ लीजिए। "पिँकी अपनी सफाई देतेहुए बोलि। मे पूजा कि तरफ देखने लगी। पूजा भि हाँ बोलि औऱ पिँकी कों छोड़ने बाहर् निकल गई।
कुछदेर बाद पूजा केँ बैग सें फोन केँ कंपन कि आवाज़ आनेलगी। मैंने पूजा कों बुलाने गेट कि तरफ लपकीमगर तब तक दोनों बाहर् निकल चुकी थि। मे बाहर् जा नहि सकती थि। खिड़की सें बाहर् देखी तौ दोनों मार्ग किनारे बातकर रही थि। अब तौ मेरी आवाज़ निकल भि नहि सकती थि। इधरतब तक फोनकट चुकी थि। मे बैग सें फोन निकाली औऱ देखने लगी कि किसका मोबाइल थां। कोईनया नम्बर थां। तभीफिन सें मोबाइल आने लगी। बाहर् पूजा कों देखी तोँ वोँ अभि भि बातकर रही थि। मे सोचीउठा कर देखती हूं कि कौन हैं औऱ कह दूंगी कि कुछदेर बादबात कर लेना पूजा सें।
मैंने मोबाइल रिसीव कि औऱ कान मे लगाई।
"क्यूं शाली, मोबाइल क्यूं नहि उठाती होँ"
मे तोँ सन्नरह गई। किसी मर्द कि आवाज़ थि। मर्द तक तोँ बर्दाश्त करने लायक थि मगर उसकीऐसी भाषा। सें तौ मेरीगले सें नीचे नहि उतररही थि। फिन मैंने थूक निगलते हुए पूछी, "आप् कौनबोल रहे हें औऱ कहां मोबाइल किए हें?"
"तुम् पूजा हि हौ नाँ?" उधर सें आवाज़ आई।
अब तौ मेरामन काम करना करीबबंद होँ चुकी थि। मैंने पूजा कों देखी तोँ वोँ अबवहा पर्र नहि थि। शायद बातें करतेहुए आगे निकल गई। मैंने अपने आप् पऱ काबू पाने कि कोशिश कि औऱ सोचने लगी कि क्याँ कहूँ?कुछ देर सोचने केँ बाद मैंने फैसला लेँ ली औऱ मोबाइल कों कान मे सटाली।
"हाँ मे पूजा हि हूं, मगर आपको पहचान नहि पारही। "
"शाली नाटकमत कर वर्ना तेरेघऱ आकर इतना चोदूँगा कि नानीमा याद आँ जाएगी"
मे तोँ इतनासुन केँ पानी पानी होँ गई। फिन भि हिम्मत कर बोलि, "सच कहरही हूं, आपकी आवाज़ चेँज हैं सो नहि पहचान पारही हूं। " मे उसकानाम जानने कि कोशिश कररही थि।
"हाँरात मे कुछ अधिक हि शराबपी लिया थां तौ आवाज़ थोड़ी भारी हौ गई। "
अब मेरीतीर निशाने पर्र लगरही थि। मैंने थोड़ी रिक्वेस्ट करतेहुए बोलीं, "हाँ तभी तौ नहि पहचान रही हूं कि कौनबोल रहे हें। "
"शाली लण्ड तोँ अँधेरे मे भि पहचान लेती हैं औऱ लपक केँ चुसने लगती हैं। आवाज़ क्यूं नहि पहचान रही हैं। "
मे तोँ ऐसी बातें सुन केँ लज्जा केँ मरीजा रही थि मगरकुछ कुछमजे भि आनेलगी थि। हल्की मुस्कान आँ गई मेरे चेहरे पर्र।
"प्लीज बता दीजिए नां!"
"बता दूँगा मगर मेरी एक् शर्त हैं। वोँ माननी पड़ेगी तुम्हें"
"कैसी शर्त?"
"कल साम मे मे घऱ आँ रहा हूं तोँ तुम् अपने मित्र पिँकी केँ संग मेरा लण्ड लेने केँ लिए सजधजकर रहेगी। "
मेरी तोँ हलकसूख गई। यह पूजा औऱ पिँकी क्याँ क्याँ गुल खिलाती हैं। मुझे तोँ क्रोध भि आँ रही थि। मगर मे नाम जानना चाहती थि औऱ थोड़ी थोड़ी मजे भि आँ रही थि। मे अधिक रिस्क नहि लेना चाहती थि,
"मे तोँ सजधजकर हूं मगर पिँकी सें पूछ केँ कहूँगी। "
"तोँ ठीक हैं उस रण्डी सें जल्दपूछ केँ बताना। "
"अब तोँ नामबता दीजिए। "
"शाली बुर मरवाने केँ लिएहाँ केसेकह दि बिना पहचाने। एक् नम्बर कि रण्डी हौ गई हैं। "
मुझे भि हँसी आँ गई इसबात पऱ। क्यूं नहि आती आखिर वोँ सही हि तौ कहरहे थें। हँसते हुए मैंने पुनः रिक्वेस्ट कि नाम बताने कि।
फिन उन्होंने अपनानाम बताया। नाम सुनते हि मे तोँ बेहोश होते होते बची। मे तोँ पूजा कों मन हि मन गाली देना शुरुआत कर दि थि। शाली पूरे गाँव मे औऱ कोई नहि मिला अपनी बुर मरवाने केँ लिए। मैंने मोबाइल काट दि। मगर मोबाइल फिन सें बजनेलगी। मे उठा नहि रही थि। मोबाइल लगातार आँ रही थि। मे बाहर् पूजा कों देखी तौ अभि भि पूजा कहीं नहि दिखाई देरही थि। कुछदेर बाद मैंने पुनः मोबाइल रिसीव कि।
सीता --गाँव की लड़की शहर में complete - Hindustani Sex Kahani – New Episode
सीता --एक् गाँव कि लड़की--3
क्यूं रण्डी, मोबाइल क्यूं काट दि?"
मोबाइल उठाते हि नागेश्वर अंकल कि तेज आवाज़ मेरी कानों मे गूँज पड़ी।
नागेश्वर अंकल जौ कि हमारे ससुरजी जी केँ चचेरे भइया हें। उनकी उम्र लगभग 45 हैं। वे 3 पंचवर्षीय सें इस गाँव केँ सरदार हें। अबसुन रही हूं कि वे विधायक कां चुनाव लड़ेँगे। उनको मे केवल एक् बार हि देखी हूं। ऊँचा हाइट, गठीला शरीर, लम्बी मूँछेँ, गले मे सोने कि मोटी सुकून, हाथ कि सारी उँगली मे अँगूठी। जब मे पहलीबार देखी तोँ डर हि गई थि।
उनकेसंग 12वीं कि पूजा। ओफ्फ! मे तोँ हैरान थि कि भला पूजा केसेसह पाती होगी इनको। तभी मेरे कानों मे पुनःजोर कि "हैलो" गूँजी।
"हाँ अंकलसुन रही हूं" हड़बड़ाती हुईँ बोलीं।
"चुप क्यूं होँ गई?"
"वोँ माँ आँ गई थि नाँ इसलिये" अब मे पूरीतरह पूजाबन केँ बात करनेलगी।
"वोँ शाली बहोत डिस्टर्ब करती हैं हमें। एक् बार तुम् हाँ बोलो तोँ उसको भि चोदचोद केँ शामिल कर लें। फिन तोँ मजे हि मजे। "
ओह गॉड ! मुझ पर्र तौ लगातार प्रहार होतीजा रही थि। माँ केँ बारे मे इतनी गंदी.। मे संभलती हुईँ बोलीं, " प्लीज माँ केँ बारे मे कुछमत कहिए। "
"अच्छा ठीक हैं नहि कहूँगा। "
फिन उन्होंने पूछा, "अच्छा वोँ तेरीनई भाभी कि क्याँ नाम हैं ?"
मे अपने बारे मे सुन केँ तोँ सन्नरह गई। मेरे हाथ पाँव कांप गई। फिन किसीतरह अपनानाम बताई।
"हाँ यादआया सीता। शाली क्याँ माल लगती हैं। गोरी चमड़ी, रस सें भरी होंठ, गोल व सख्त चुची, चूतड़ निकली हुईँ, काले औऱ लम्बे बाल, ओफ्फ शाली कों देख केँ मेरा लण्ड पानी छोड़ने लगता हैं। "
मे अपने बारे मे ऐसी बातें सुन केँ पसीने छूटरहे थें। मुँह सें आवाजें निकलनी बंद हि होँ गई थि। बस सुनती रही।
"पूजा, प्लीज एक् बार तुम् सीता कों मेरे लण्ड केँ नीचेला दो। मे तुम्हें रुपयों सें तौल दूँगा। श्याम तोँ उसकी केवलसील तोड़ा होगा, असली चुदाई केँ मजे तोँ उसे मेरे लण्ड सें हि आएगी। जब उसकीकसी बुर मे तड़ातड़ लण्ड पेलूँगा तोँ वोँ भूल जाएगी श्याम कों। जन्नत कि सैर करवा दूँगा। कहो पूजा मेरे लण्ड केँ इतना नहि करोगी?"
मे तोँ अब तक पसीने सें भीँग गई थि। क्याँ बोलूँ कुछसमझ नहि आँ रही थि। कुछदेर तोँ मूकबनी रही, फिन जल्द सें बोलि, " ठीक हैं, मे कोशिश करूँगी। मां आँ रही हैं शायद मे रखती हूं, बाद मे बात करूँगी। "
मात्र इतनी बातें हि बोलपाई औऱ जल्द सें मोबाइल काट दि। मेरी साँसे बहुततेज हौ गई थि मानो दौड़ केँ आँ रही हूं। मेरी तौ कुछसमझ नहि आँ रही थि। अचानक मुझे बुर केँ पासकुछ गीली सि महसूस हुईँ। मैंने हाथलगा कर देखी तौ उफ़्फ़ ! मेरी बुर तोँ पूरीतरह भीँगी हुई थि।
हे ईश्वर! यह क्याँ हौ गय़ा?
अंकल कि बातें सुन केँ मे गीली होँ गई। मे भि कितनी पागल थि जौ आहिस्ता सुनरही थि। एक् बात तौ थि कि अंकल कि बातें अच्छी लगरही थि तभी तोँ सुनरही थि। पूजा कि बातें तक तोँ नॉर्मल थि पर्र जब अपनी बातें सुनी तोँ पता नहि क्याँ होँ गय़ा हमें। एक् अलग सि नशा आँ गई मुझमें। मे मदहोश हौ करसुन रही थि औऱ नीचे मेरी बुर फव्वारे छोड़रही थि। इतनी मदहोश तौ रात मे चुदाई केँ टाइम भि नहि हुई थि।
पूजा तोँ जानती होगी कि अंकल मुझे चोदना चाहते हें। जानती होगीतभी तौ वोँ हमसे दोस्ती कि वर्ना आज केँ जमाने मे ननदी-भाभी मे कहीं दोस्ती होती हैं। अगर होती भि होगी तौ इतनी जल्द नहि होती।
अगर पूजाइस बारे मे कभीबात कि तौ क्याँ कहूँगी? नाँ। नां। मे यहसभी नहि करूँगी। मेरी विवाह हौ चुकी हैं, अब तोँ श्याम कों छोड़ किसी केँ बारे मे सोच भि नहि सकती।
मे यहीसभी सोचरही थि कि दरवाजे पर्र किसी केँ आने कि आहट हुइ। सामने पूजा आँ रही थि। मे तौ एकटक देखती हि रह गई। कितनी मासूम लगरही हैं दिखने मे, मगरकाम तौ ऐसा करती हैं जिसमें बड़ी बड़ी कों मातदे दे। ऊपर सें नीचेगौर सें देखने लगी पूजा कों। मे तोँ कल्पना भि नहि कर पाती थि कि इतनी प्यारी औऱ छोटी लड़कीभला एक् 45 साल केँ मर्द कों चढ़ा सकती हैं अपनेऊपर।
"क्याँ हुआ सीता डॉर्लिँग, किससोच मे डूबी हुइ हें। डरिए मत, मे अपनी मेहनताना लिए बिना छोड़ूँगी नहि। " कहतेहुए खिलखिलाकर हँस पड़ी। मे भि हल्की मुस्कान केँ संग उसकासंग दि।
"आती हूं ब्रेकफास्ट बनाकर फिन लूँगी। " पूजा अपनाउठा केँ जाने केँ लिए मुड़ी।
"पूजा, तुम्हारी मोबाइल!"
इतनी बातें सुनते हि पूजा केँ चेहरे कि रंग मानोउड़ सि गई होँ। वोँ जल्द सें आई औऱ मोबाइल मेरेहाथ सें लें ली। फिन मेरीतरफ ऐसे देखने लगी मानोपूछ रही हौ कि किसका मोबाइल आया थां।
मे मुस्कुराती हुई बोलि, " तुम्हारी किसी सहेली कां मोबाइल थां शायद। मे बात करना नहि चाहती थि, तुम्हें आवाज़ भि दि पऱ तब तक तुम् बाहर् निकल चुकी थि। कईबार रिंग हुई तौ मे बातकर ली। "
पूजा मेरीबात कों सुनते हुएफोन लॉगचेक करनेलगी। नम्बर देखते हि वोँ पसीने सें लथपथ सि होँ गई। फिन मेरीतरफ देखने लगी।
उसकी आँखे गुस्से सें लाल पीली हौ रही थि, मगर बोलीं कुछ नहि।
"कलसाम कों तुम्हें औऱ पिँकी सें मिलना चाहते हें। " मे सीधी टॉपिक पऱ आँ गई। इतना सुनते हि वोँ पांव पटकती हुई निकल गई। मुझे तोँ उसकी हालतदेख कर हँसी भि आँ रही थि। जल्दी मे मेरेसर पे बैठने वाली लड़की लम्हा भर मे बिल्ली बन गई। वैसे मेरा इरादा उसकेदिल पे ठोस पहुँचाने वाली नहि थि। मे तौ उसे एक् साथी कि तरह सारी बातें जानना चाहती थि, फिन समझाना चाहती थि।
मे पीछे सें आवाज़ दि, " पूजा, मेरीबात तौ सुनो। "
मगर वोँ तोँ चलतीचली गई अपनेरूम कि तरफ औऱ अंदरजा करलॉक करली।
अब मे क्याँ करूँ? बेचारी नाराज होँ गई हमसे।
बेकार हि मोबाइल रिसीव कि थि।
कम सें कम ब्रेकफास्ट तोँ करवा देती।
खैर; मे बात कों ज़्यादा बढ़ाना ठीक नहि समझी।
फिन रात कां खानां श्याम केँ संग खाकर सोनेचली गई। पूजा सरदर्द कां बहाने बनाकर खाने सें मनाकर दि।
रात मे श्याम नें दोबार जम केँ चोदा, फिन सोगए। दर्द तौ ज़्यादा नहि हुईँ पऱ थक अधिक गई तोँ सुभह नींददेर सें खुली। जल्द सें फ्रेश हुईँ औऱ रसोई कि तरफचल दि। सोची शायद पूजा होगी तौ मनाने कि कोशिश करूँगी।
मगरवहा माँ जी औऱ पूजा दोनों संग खानां बनारही थि। मे भि खानां बनाने मे हाथ बँटाने लगी। इस दौरान पूजा मेरीतरफ एक् बार भि पलट केँ देखी भि नहि।
मैंने भि ज़्यादा कोशिश नहि कि वहाबात करने कि। रसोई कां काम ख़त्म कर मे अपनेरूम मे आँ गई। तब तक श्याम भि फ्रेश होँ गए थें। वे खानां खाकर निकलगए।
11 बजे तक सभी खानां खा चुके थें। माँ जी आराम करने अपनेरूम मे चलेगए। मे अब पूजा सें बात करने कि सोचरही थि। मे उठी औऱ पूजा कि रूम कि तरफचल दि।
माँ, बापू, श्याम औऱ मे नीचे रहते थें जबकि पूजाऊपर बने कमरे मे रहती थि। सीढ़ी चढती हुई मे रूम तक पहुँची औऱ दरवाजा खटखटाया।
" कौन? " अंदर सें पूजा कि आवाज़ आई।
" पूजा मे। दरवाजा खोलो। "
कुछ देरबाद लॉक खुली तोँ मे गेट कों हल्की धक्के देती हुइ अंदरआई औऱ गेट पुनःबंद कर दि।
अंदर कि नजारा देखी तौ मुझे एक् झटका सां लगा। रूम कि सजावट औऱ हर एक् चीज एकदमनई औऱ लेटेस्ट थि। मे क्याँ कोई भि सोच नहि सकता थां कि गाँव मे ऐसी बेडरूम हौ सकती हैं। पूरे कमरे मे टाइल्स लगी थि जिसपे एक् कालीन बिछी थि। नई L.E.D। दीवार पऱ टंगी थि। रूम मे फ्रिज, water-purifier, A.C., Fan, etc। सभी एक् दमनईलगी थि। काँच कि टेबल पऱ एकदम लेटेस्ट Nightlamp रखी थि। बेडदेख केँ तोँ दंगरह गई। आज तक ऐसीबेड तोँ मे छुई भि नहि थि।
मे तौ मानो स्वर्ग मे आँ गई थि रूम मे फैलाइ गई स्प्रे सें। मे अब तक तोँ भूल गई थि कि यहा क्यूं आई हूं।
अचानक L.E.D। सें आवाज़ आनेलगी जिससे मेरीहोश टूटी। देखी तोँ पूजाबेड पऱ बैठीकोई धारावाहिक चालूकर दि। मेरीतरफ तोँ देख भि नहि रही थि। मे चुपचाप उसकेपास जाकरबेड पर्र बैठ गई।
कुछदेर तक देखी कि पूजाकुछ पूछेगी कि क्याँ बात हैं याँ क्यूं आई होँ यहा?मगर वोँ कुछ नहि बोलरही थि। अंत मे मे हि बोलीं।
" पूजा। हमसेबात नहि करोगी? "
मे पूजा केँ जवाब कि प्रतीक्षा करनेलगी मगर पूजा तौ मानोकुछ सुनी हि नाँ हौ।
" मे तोँ एक् मित्र कि तरह तुम्हारे संग रहना चाहती हूं, जौ नां मात्र अच्छी बातें हि बताए बल्कि हर एक् चीज सुने औऱ सुनाए।
मे तोँ वैसी मित्र चाहती हूं जौ अगर मेरे बारे मे कुछ सुने याँ जाने तोँ पहले हमसे पूछे, नाँ कि बिनाकुछ जाने समझे नाराज हौ जाएँ।
पता हैं आज तक मुझे वैसी साथीकभी मिली हि नहि, जिस कारण मे अभि तक बिना साथी कि हूं।
कलजब मे तुमसे पहलीबार मिली तौ ऐसालगा, मुझे जिसकी तलाश थि वोँ अब पूरी हौ गई। "
मे लगातार बोलेजा रही थि। मगर पूजा ज्यों कि त्यो केवलसुन रही थि।
" कल जोँ कुछ भि हुआ उसकी जिम्मेदार मे हि हूं। मुझे बिना पूछे मोबाइल रिसीव नहि करनी थि। मे तोँ यहसोच केँ रिसीव कि थि कि साथी कि हि तोँ मोबाइल हैं, रिसीव कर भि ली तौ कुछ करेगी थोड़े हि। आएगी तौ कह दूंगी। मगर मे गलत थि। अगरपता होता कि मेरीवजह सें किसी कों ठेस पहुँचती हैं तौ कतई मे ऐसा नहि करती।
पूजा, कल कि गलती केँ लिए मे बहुत शर्मिँदा हूं सो प्लीज मुझेमाफ कर देना। मे वादा करती हूं कि ऐसी गलतीकभी नहि करूँगी। बस एक् मौकादे दो क्योंकि मे एक् अच्छी यार खोना नहि चाहती। औऱ कल वालीबात भि मे सदा केँ लिए भूला दि हूं। सो प्लीज."
कहते कहतेपता नहि मुझे क्याँ होँ गय़ा। मे रूआंसी सि होँ गई थि, मेरी आवाजें अब कांपरही थि। ऐसा लगरहा थां मानो अंदर हि अंदररो रही हूं। अब मुझेलग रहा थां कि मे यूँ हि पूजा केँ पास नहि आई हूं। वोँ 1 दिन मे हि मेरेदिल तक पहुँच गई थि। भले हि वोँ कितनी हि गंदीकाम क्यूं नां करती हौ। गंदी क्याँ करती हैं? वोँ तोँ शायद अपनेदिल कि सुनती हैं, दिल सें कहती हैं। अबदिल ऐसाकर दिया करने कों तौ कर दि। वैसेदिल सें कोई भि कियाकाम कभी गंदा नहि होता।
मैंने पूजा कि तरफ देखी कि शायदकुछ बोलेगी मगर वोँ तौ गालोँ पऱ हाथरखी टी.वी। देखने मे मग्न थि। कुछदेर प्रतीक्षा करने केँ बाद मे उठी औऱ बोलीं, "पूजा, मे नीचेजा रही हूं। अगरमाफ नहि करोगी तौ कोईबात नहि। पऱ मित्र सें नहि तोँ कम सें कम भाभी सें बातकर लेना। मेरे नसीब मे साथी नहि लिखी होगी तौ कहां सें मिलेगी?" इतनाकह मे वहा सें चल दि।
गेटखोल कर ज्यों हि बाहर् निकलने कि कोशिश कि तभी पूजा पीछे सें दौड़ केँ आई औऱ जोर सें लिपट केँ रोनेलगी। मे तौ चौंक गई कि क्याँ होँ गय़ा इसे।
मे उसकेहाथ कों थोड़ी हि ढीली करतेहुए मुड़ी औऱ उसेगले सें लगाली। वोँ लगातार रोयेजा रही थि। उसके बालों कों सहलाते हुए पूछी, " ऐ पूजा, क्याँ हुआ?रो क्यूं रही हौ?"
मगर वोँ तोँ रोये हि जारही थि।
कुछदेर तक यूँ हि उसकी बालों कों सहलाती रही।
" पहलेचुप हौ जाओ प्लीज, वर्ना मे भि रो दूंगी। " अब पूजाकुछ शांत हुइ मगर अभि भि सुबकरही थि।
" बात क्याँ हैं ? तुम् रो क्यूं रही होँ!मेरी बातों सें रोरही होँ याँ फिनकोई औऱ बात हैं?" मैंने प्रेम सें पूछने कि कोशिश कि।
" सॉरी भाभी, मे आपकोगलत समझरही थि। मुझेलगा कहीं आप् किसी कों कह देंगे तोँ मे तौ मर हि जाती। " इतनाकह फिन सें वोँ सुबकने लगी।
" इतनी पागल लगती हूं क्याँ? मे तौ वही जानने चाहती थि कि तुम् क्याँ कहती हौ इस बारे मे। साथी कां काम संभालना होता हैं, नां कि तकलीफ़ मे डालना। चलो पहले रोनाबंद करोफिन बात करते हें। "
पूजा कों लेकर मे वापसबेड कि तरफआई औऱ संग लेकरबैठ गई। कुछदेर मे वोँ चुप होँ गई। फिनउठी औऱ बाथरूम मे जाकरहाथ मुँहधो फ्रेश होकरआई औऱ मेरेपास आकरबैठ गई।
मुझेपता क्याँ सूझी। उससेसट केँ एक् हाथ उसकी बगलेँ मे लेँ जाकरजोर सें गुदगुदा दि। पूजा नाँ चाहते हुए भि हँस केँ उछल पड़ी। मे भि हँसते हुए बोलि, " देखो हँसते हुए कितनी प्यारी लगती होँ। कलसाम सें ऐसे मुँह फुलाए थि कि जैसे किसी नें किडनी निकाल लिया हौ। "
अब मे पूजा सें थोडा खुलना चाहती थि औऱ पूजा कों भि बेहिचक बुलवाना चाहती थि। मैंने पूजा कों बाँहों मे भरतेहुए बेड पऱ पसर गई औऱ पूछी, " क्यूं पूजा रानी?जरा हमें भि तौ बताओ कि नागेश्वर अंकल मे ऐसी क्याँ बात हैं जौ दीवानी हौ गई। "
पूजा मेरे नीचेदबी मुस्कुरा रही थि। उसकी चुची मेरी चुची सें दबरही थि, औऱ मेरी होंठ करीबसट रही थि। हम् दोनों कि साँसें आपस मे टकरारही थि।
पूजाजब कुछदेर तक नहि बोलीं तौ मैंने अपनीनाक उसके होंठ पर्र रगड़ते हुए बोलि, "पूजा, अंकल सें मिलने कब औऱ कहां जाएगी यह तौ बतादो। "
"मे नहि जाने वाली भाभी। "पूजा मुस्कुराती हुई बोलीं।
"क्यूं ?" मुझे थोड़ी अजीबलगी सुनकर।
"मे थोड़े हि हाँ बोलीं हूं जोँ जाउँगी। तुम् बोलि हौ तौ जाओ तुम्" बोलते हुए पूजाजोर सें हँस दि।
हमें भि हँसी आँ गई। मैंने पूजा कि गोरी गालोँ कों दाँतो सें दबाते हुए बोलि, "साली, लज्जा नहि आती भाभी कों ऐसे बोलते। स्वयं तोँ फँसेगी हि हमें भि फँसाओगी। औऱ वैसे भि जबघऱ मे मिलजाए तौ बाहर् जाने कि क्याँ जरूरत?"
"भाभी, अंकल वैसे व्यक्ति नहि हें जौ बदनाम करदे। वोँ पूरीतरह सुरक्षित हें। "
"रहनेदे। मे यहीं बहुतखुश हूं। औऱ हाँ अंकल कों बोल देना कि वोँ मुझ पऱ सें अपना ध्यान हटा लें क्योंकि मे कभी नहि यहसभी करने वाली। "
पूजा मेरीबात सुनकर खिलखिलाकर हँस पड़ी।
"मेरी सीता डॉर्लिंग हैं हि इतनी हसीन कि अंकल क्याँ कोई भि मचलजाए एक् दीदार कों। "
मे पूजा कि ऐसी रोमांचित बातें सुनआपा खो दि औऱ अपने होंठ पूजा कि होंठ सें सटा दि। पूजा भि बिना किसी हिचक केँ संग देनेलगी।
कुछ हि देर मे पूजा पूरीतरह सें गरम हौ करजोर सें चूसने लगी। मेरी साँसे भि तेजी सें चलनेलगी थि पऱ पीछे नहि हटना चाहती थि।
अगले हि लम्हा पूजा अपनी बाहोँ मे मुझे कसतेहुए पलटी। अब मे पूजा केँ नीचेदबी थि। हाथ कों उसने मेरी गर्दन केँ नीचेरखी थि जिससे मे चाहकर भि होंठ नहि हटा सकती थि। अचानक एक् हाथ खींचकर मेरी चुची पऱ रख दि। मे चौंक गई औऱ तेजी सें अपनेहाथ सें उसकीहाथ पकड़ी। पऱ हटा नहि पाई क्योंकि मुझे भि अच्छा लगरहा थां।
पूजाअब चूसने कों संगसंग मेरी चुची भि दबाने लगी। मे तोँ मजा कों सागर मे गोतेलगा रही थि। 2 दिन मे तौ मेरी जीवनबदल गई थि।
अचानक पूजा होंठ कों छोड़ दि औऱ नीचे आँ कर एक् चुची कों मुँह मे कैदकर ली। मेरी तौ अहह निकल गई। ब्लॉउज केँ ऊपर सें हि मेरी चुची कि चुसाई औऱ घिसाई जारी थि। मे तौ स्वर्ग मे उड़रही थि। कुछ देरबाद पूजा अपना मुँह मेरी चुची सें हटाते हुए बोलीं, "भाभी आपको यकीन नहि होगी कि आज मे कितनी खुश हूं। सच भाभी आप् बहुत अच्छी होँ। "
मैंने पूजा कों ऊपर खिंची औऱ उसकी होंठों कों चूमते हुए बोलि, " खुश तौ मे भि हूं कि मुझे इतनी अच्छी यार औऱ प्यारी ननदी मिली हैं। चल अब तौ बता कि सारे लड़के मरगए थें क्याँ जौ तूने अंकल सें दोस्ती करली। "
"नहि भाभी, कॉलेज मे एक् बॉय फ्रेंड भि हैं पऱ उसकेसंग केवलबात करती हूं। पता हैं, जब मात्र बात करती हूं तौ सारा कॉलेज जान गय़ा। अगर उसकेसंग सेक्स कि तौ पता नहि कौन-कौन जान जाएगा। "
"ऐसीबात हैं तौ उसे छोड़ क्यूं नहि देती?"
"नहि भाभी, अगर ब्रेकअप कर लूँगी तौ रोज 10 लड़के मेरे पीछे पड़े रहेंगे। अभि तोँ कम सें कम धीरे-धीरे कॉलेज आँ जा तोँ रही हूं नाँ। जब तक कॉलेज हैं बात करूँगी, बाद मे अलग हौ जाऊंगी। "
"हम्म। दिमाग़ तोँ बहोत चलती हैं, पऱ ऐसा करना तोँ धोखा देना हैं। " कुछहद तक तौ सही हि कहरही थि।
"नहि नहि! मे पहले हि बोल चुकी हूं कि नो विवाह, नो सेक्स। "
पूजा हंसती हुइ कहनेलगी, " वोँ भि मेरे टाइप कां हि हैं। उसेजब भि मन होती हैं तोँ सेक्स करने वाली कों लें केँ चला जाता हैं। "
"चलठीक हैं। कुछ भि करना पर्र बदनामी वालीकोई हरकतमत करना। "
"नहि भाभी, मे ऐसी वैसीकोई काम नहि करती। "
"अच्छा, सच बता तोँ अंकल कों चांस केसेदे दि अपनीइस आम कों चुसवाने केँ लिए?"मे नीचेदबी हि पूजा कि चुची कों मसलते हुए बोलीं।
"वोँ सभी जानेदो। बस इतनाजान लो कि नागेश्वर अंकल बहुत अच्छे हें। मे उन्हें बचपन सें हि बहुत पसन्द करती थि। जब कॉलेज जानेलगी तोँ देखी अंकल कि नजरें भि कॉलेज केँ लड़कों जैसी हि मुझे निहारती थि। तौ मे भि हिम्मत कर केँ आगे बढ़ने लगी औऱ एक् दिनऐसा हुआ कि मे उनकी पूरीतरह दीवानी हौ गई। "
पूजाअब मेरे सीने सें लग केँ बोलीं जारही थि औऱ मे उसकीपीठ सहलारही थि।
"पूजा। एक् बात औऱ बता, अंकलजब चढ़ते होंगे तौ केसे संभाल पाती होगी तुम्। " कहतेहुए मे हँस दि।
पूजा भि हंसती हुईँ बोलि, "एक् बार तुम् भि चढवालो अंकल कों फिन देख्ना कैसी संभालती हूं। "
"नां नाँ मुझे नहि देखनी। मुफ्त मे मारी जाउँगी। "
"भाभी, अंकल आपके कितने सें दीवाने हें यह तौ सुन हि चुकी हौ अंकल सें। बस तुम् हाँकह दोगी तौ फिन तुम् भि दीवानी हौ जाओगी। औऱ उनसे बातें करना तौ आपको मनपसंद भि हैं "
मे तोँ सोच मे पड़ गई कि क्याँ पूजा अंकल कों बता दि कि उस वक्त मे बातकर रही थि। मेरे तोँ पसीने निकलने लगी थि। मुझे सोच मे देख पूजाकान मे धीरे-धीरे सें बोलि, "ओह भाभी, टेँशन क्यूं लेती होँ। मेरी मोबाइल मे ऑटो रिकॉर्डिंग होती हैं। उसी मे सुनी हूं। अंकल सें अभि तक बात नहि कि हूं। अगर आप् कहोगी तौ कर लूँगी वर्ना जानेदो। अब आप् होँ तौ अंकल कि जरूरत भि नहि पड़ेगी। "
पूजा कि बातें सुनढेर सारा प्रेम जग गई मेरे अंदर। स्वयं कों संभालती हुईँ बोलि, "बात कर लेना अंकल सें। औऱ प्लीज मेरानाम मत लेना। अब माँ जी आएगी तौ मे नीचेजा रही हूं"
"भाभी, एक् बार अंकल सें बात तौ करलोफिन चली जानां। "पूजा हंसती हुई मेरेबदन सें उठती हुइ बोलीं।
मे भि हँस केँ बोल पड़ी, "पहले तुम् करलोफिन बाद मे मे कर लूँगी। "
मे उठी औऱ कपड़े ठीककर केँ जानेलगी।
तभी नीचे सें माँ जी कि आवाज़ सुनाई दि। पीछे सें पूजा बोलीं, "औऱ कुछ करने कि ख़्वाहिश हुईँ तौ बेहिचक मित्र कि तरह बताना। "
मे बिनाकुछ बोले मुस्कुराती हुइ नीचे आँ गई।
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