Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 11.
माॅम कों हग करके मे अपने कमरे मे चला गय़ा। कपड़े उतारने केँ बाद फ्रेश होकर एक् ढीला पायजामा पहना औऱ उपर हल्का शर्टडाल कर नीचेआया। हाॅल मे कोई नहि थां। मे रसोई मे गय़ा। माॅमरात केँ खाने कि तैयारी कररही थि।
मे रसोई मे मे प्रवेश करतेहुए बोला -" क्याँ बनारही होँ माॅम ?"
माॅमउस वक्तफुल नाइटी पहनी हुई थि। मगर उनके गदराये हुए यौवन कां आभासफिन भि होँ रहा थां। माँ मेरीतरफ पलटी औऱ मुस्कुरा कर बोलि -" दालभात औऱ कोहड़ा कि सब्जी। "
" क्याँ ?" - मैंने बुरा सां मुंह बनाया -" रात मे दालभात। औऱ यहदाल भात केँ संग कोहड़ा कि सब्जी कौन खाता हैं। "
" मे खाती हूं। तेरेडैड खाते हें। "
" मैंने तौ आज तक देखा नहि। जरुर मजाककर रही हौ। कहो नां क्याँ बनारही हौ। " मैंने कहा।
" जब खाने बैठेगा तब मालूम पड़ जाएगा। तुबता वहां कि जश्न कैसीरही। "
" शानदार। खानां पीनासभी मस्त। बड़े बड़ेलोग सुन्दर सुन्दर औरतें। उर्वशी दि केँ हसबैंड भि बहोत अच्छे हें। "
" खानां पीना ? क्याँ दारू भि थां ? "
" हां। "
" तुम् नें तोँ नहि पी नां ?"
" थोड़ी सि पी। उर्वशी दि केँ हसबैंड नें बहुतजोर दि तोँ। "
" इनसब चीजों सें दूर हि रहना। लिवर खराबकर देती हैं। औऱ श्वेता नें तुम्हारी तरफ टोका नहि। "
" वोँ क्याँ टोकेगी उसने तौ स्वयं बीयरपी थि। "
" क्याँ ?" माँ आश्चर्य करतेहुए बोलि ।
" अरे ज़्यादा नहि बस थोड़ी सि मुंह जुठारने केँ लिएली थि। अब वहां बड़े बड़ेलोग थें तोँ हम् भि नाँ नहि करसके। "
मम्मी कुछ नहि बोलि।
" डैड औऱ रीतु कहां हैं ?"
" तेरेडैड अपने दोस्तों केँ पासगये हैं औऱ रीतु अपने कमरे मे पढ़रही हैं " - माँ काम करतेहुए बोलि -" औऱ जश्न केँ बारे मे बता। "
मैंने उन्हें वहां संजयजी केँ उपर गोली चलाने वाली घटना केँ बारे मे बताया तौ वोँ बोलीं " कौन उन्हें मारना चाहता हैं। "
" यह तोँ मुझे नहि पतामगर बड़े बड़े लोगों केँ दुश्मन भि तौ कई सारे होते हें। "
तभी वहां रीतु आँ गई औऱ अपनी देखते हि पुछा -" अरे भइया आप् कबआए ?"
रीतु सलवार सूट मे थि।
" आधे घंटे पहले। तेरी पढ़ाई होँ गई। "
" हां। हौ गई। अबजरा मुझे भि बताओ कि वहां रिसेप्शन कैसारहा। क्याँ क्याँ किया ?"
" मैंने माॅम कों बता दिया हैं तु माॅम सें पुछ लेना। "
" अब इतना भि भावमत खाओ। बताओ नाँ। "
" अरेवही सभीहुआ जौ बड़े बड़े लोगों केँ बर्थडे पार्टी मे होता हैं। खाने मे स्टार्टर, मेन कोर्स, जुस, चाट, कोल्ड ड्रिंक, स्नैक्स, वाइन। मस्ती केँ लिए म्यूजिक, आर्केस्ट्रा, लीपा पोती कि हुईँ सुन्दर सुन्दर लड़कियां। औऱ तुम् तोँ ऐसेबोल रही हौ जैसे तुम् कभी जश्न मे कभी गई हि नहि होँ। "
" यह लीपा पोती सें क्याँ मतलब ?"
" मेरा मतलब फेशियल औऱ बन संवर केँ आई हुईँ लड़कियां। क्याँ जरूरत होती हैं इतना लम्बा चौड़ा मेकअप करने कि। कितनी तौ अपनेवजन सें भि ज़्यादा पाउडर क्रीम पोंतकर आई थि। " मैंने माॅम कि तरफ देखते हुएकहा -" मैंने कुछ ग़लतकहा माॅम। "
" नहि "- माॅम नें हंसते हुएकहा।
" लड़कियां मेकअप नहि करेंगी तोँ क्याँ लड़के करेंगे। औऱ तुम्हें इससे एलर्जी क्यूं होती हैं ?"
" मुझे क्यूं एलर्जी होनेलगी, मुझे उनसे क्याँ मतलब। औऱ तु जौ दोदो किलो कां मेकअप करती हैं, उसेबंद कर। एक् दम सिम्पल माॅम कि तरहरहा कर। "
" म.म। मे दो किलो कां मेकअप करती हूं। माॅमइसे समझादो नहि तौ मे इस कां सर फोड़ दुंगी। "
" मुझे तुम् दोनों केँ बीच मे नहि पड़ना हैं। यह तुम्हारा एक् दिन कां नहि रोज़ रोज़ कां काम हैं। "- माॅम नें कहा।
" औऱ तुम् जानते क्याँ होँ लड़कियों केँ मेकअप केँ बारे मे ? यह हम् लड़कियों केँ सोलह श्रृंगार कां अंग हैं। "- रीतु भड़कते हुए बोलि।
" सोलह श्रृंगार लड़कियां नहि विवाह शुदा औरतें करती हें। "
यह सुनकर मम्मी जोर सें हंसी तोँ रीतु औऱ भड़कउठी।
मैंने अपनीबात जारीरखी - " औऱ जहां तक मे समझता हूं हमारी देशी सनमारियां खट्टी लस्सी सें बाल धोती हैं तोँ शैम्पू होँ जाता हैं। बेसन याँ मुल्तानी मिट्टी कां लेप मुंह पर्र करती हैं तोँ फेशियल हौ जाता हैं। सरसों कां दिया जलाकर उसकीलपक केँ उपरकोई बर्तन उल्टा रखकरयूं धूएं सें बनी कालख इकट्ठी कर केँ आंखों मे लगाती हैं तोँ नयनसहज कारे कजरारे लगने लगते हें। दंदासा दांतों पर्र रगड़ती हैं तौ दंदासे कि हि लाली होंठों पर्र चढ़ जाती हें औऱ शायरलोग उस ' लबों कों लाली ' पऱ ' लहू जिगर कां ' दिया होने पर्र क्लेम लगाने लगते हें। यानी हींगलगे नां फिटकरी रंग चोखा। "
रीतु औऱ माॅम मुझे आंखें फाड़े देखने लगी।
" मे ठीककह रहा हूं नाँ रीतु। "
वोँ अभि भि आंखें बड़ी बड़ी करके मुझे देखेजा रही थि।
मैंने उसकीतरफ चुटकी बजाते हुएकहा -" यह हमारे देश मे होता हैं, अब तुम्हें कुछ बड़े बड़े सेलीब्रिटी केँ फेशियल केँ बारे मे बताता हूं। "
दोनों ध्यान सें सुनरही थि।
" किम करदाशियां कां नाम सुना हैं नां हालीवुड अभिनेत्री। "
" हमम."
" वोँ वैमपायर नाम कां फेशियल करती हैं। इसमें अपने हि जिस्म सें खून निकाला जाता हैं औऱ माइक्रो नीडल्स कि मदद सें चेहरे पऱ इंजेक्ट किया जाता हैं। औऱ इसकी लागत 1500 डालर पड़ती हैं।। जापान मे एक् सांग बर्डनाम कां पक्षी होता हैं उसकेबीट कों पीसकर पाउडर बनाया जाता हैं औऱ चेहरे पऱ मला जाता हैं। इसकी लागत 675 डालर पड़ती हैं।। एक् होता हैं लीच फेशियल। इसे हालीवुड अभिनेत्री डेमीमूर कराती हैं। इसकेलिए पहले तारपीन कां तेल मिले पानी सें स्नान करना होता हैं फिन चेहरे औऱ जिस्म पर्र जोंक छोड़ दिया जाता हैं औऱ वोँ जोंक उसकेबदन सें ' पुरानां खून ' चूस लेती हैं। औऱ इसकी कोस्ट 1000 डालर पड़ती हैं।। एक् होता हैं ह्यूमन प्लासेंटा फेशियल। इसे प्रसिद्ध हालीवुड अभिनेत्री जेनिफर लोपेज कराती हैं। प्लासेंटा गर्भस्थ शिशु कि नाल कों कहते हें जिसके जरिए गर्भ मे शिशु कों मम्मी केँ पेट सें पौष्टिक आहार प्राप्त होता हैं। बच्चा पैदा होने केँ बादयह नालकाट कर फेंक दि जाती हैं मगर मैडम लोपेज कि नजर मे इसके अन्दर बायोलॉजिकल प्रोटीन होता हैं। इसनाल कों पीसकर उसकी क्रीम बनाई जाती हैं औऱ उसकालेप चेहरे पऱ गर्दन पर्र किया जाता हैं। यह भि 1000 डालर मे होता हैं।। एक् हैं फोर स्किन फेशियल। बच्चों केँ खतने केँ बाद जौ खाल काटी जाती हैं उसका सीरम सजधजकर किया जाता हैं औऱ इसे एक् ऐसी सीरिंज सें इंजेक्ट किया जाता हैं जिसमें एक् नहि। सैकड़ों महीन, सुक्ष्म सुईयां होती हैं। इसकी लागत केँ बारे मे पता नहि मगरइसे हालीवुड कि कई हीरोइनें कराती हें। "
तभीडैड नें पानी केँ लिए आवाज़ लगाई। रीतु जौ आंखें फाड़े बूत बनेंसुन रही थि, चौंकते हुए ' लाती हूं ' कहकर पानी लेकर रसोई सें बाहर् चली गई। मे माॅम केँ बगल गय़ा औऱ धीरे-धीरे सें बोला -" औऱ एक् होता हैं सीमेन फेशियल। इसे एक्ट्रेस वैसेना टैडगरेव कराती हैं। मर्दों केँ सीमेन मे स्पर्माइन नामक कैमीकल पाया जाता हैं जौ बुढियापे कि प्रक्रिया कि गति कों कन्ट्रोल करता हैं औऱ चेहरे कि चमड़ी कों जवान रखने मे सहायता करता हैं। "
माॅम मुझे आंखें फाड़े चुपचाप देखती रही। तभी रीतुआई औऱ मे रसोई सें बाहर् निकलकर डैड केँ पासचला गय़ा।
थोड़ी देर तक डैड सें बातें हुईँ फिन हम् टेलीविजन देखने लगे। कुछ देरबाद माॅम नें डीनर लगाया औऱ हम् सबसंग मे खानेबैठ गये।
खाने केँ बादसब अपने अपनेरूम मे चलेगए। मे भि छत पर्र चला गय़ा। वहां टहलते हुए अपनी फेवरेट क्लासिक कां कश लगाने लगा। अबरात केँ ग्यारह बज चुके थें। मे अपने कमरे मे गय़ा औऱ फिन सें उन ' स्पेशल ' किताबों कों चेक किया। आज सारेदस केँ दस पुस्तक मौजूद थें। आजकोई भि पुस्तक मिसिंग नहि थि। कुछ सोचकर उनसब किताबों कों उठाया औऱ एक् सेक्स करतेहुए लड़के लड़कियों कां रंगीन पिक्चर वाली पुस्तक कों छोड़कर सब अपनेबैग मे रख दिया औऱ उसकेउपर तालालगा दिया।
उस पुस्तक केँ अन्दर विभिन्न मुद्राओं मे लड़की औऱ लड़के कि सेक्स करतेहुए पिक्चर थि। उस पुस्तक कों मैंने वहींरख दिया जहां पहलेरखा करता थां। फिनआकर खाट पऱ लेट गय़ा औऱ आज केँ दिनभर कि घटनाक्रम केँ बारे मे सोचने लगा। सोचा एक् बार श्वेता दि कों मोबाइल करूंफिन सोचा वोँ दोदिन केँ भागदौड़ सें थकी हारी होगी इसलिये यह विचार त्याग दिया। फिनकुछ देरबाद नींद केँ आगोश मे समा गय़ा।
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Update 12.
बादलों कि गड़गड़ाहट कि आवाज़ सें अचानक मेरी नींदखुल गई। मैंने घड़ी मे टाईम देखा सुभह केँ साढ़े पांचबज रहे थें। मे बैड सें उठकर खिड़की सें बाहर् कि तरफ आसमान कि ओर देखा। मेघों नें भास्कर कि उदय होती लालिमा कों अपनेगोद मे छुपा लिया थां। मेघ रौद्र रूप मे कहर बरपाने केँ लिए रेडी थें। आंधियों नें उनकेलय मे लय मिलाया औऱ धरती पर्र तेज आक्रमण कर दिया।
बादलों नें तीव्र गति सें हमलाकर दिया थां। हंगामा केँ संगसंग बरसात भि तीव्र गति सें होनेलगी। मैंने छत पर्र देखा वहां रस्सियों पर्र कपड़े सुखाने केँ लिए पड़ेहुए थें। मे जल्द सें दरवाजा खोला औऱ कपड़ों कों समेटने लगा। डैड केँ, मेरे, रीतु केँ, माॅम केँ सब केँ कपड़े आनन फानन मे उतारा औऱ तभी माॅम केँ साड़ियों मे छुपा उनकी पैंटी जमीन पऱ गिर पड़ी। बारिश तेज हौ गई थि। मैंने पैंटी कों उठाया औऱ भागते हुए अपने कमरे मे प्रवेश किया। सारे कपड़े वहींबगल मे पड़े कुर्सी पर्र रखा। खिड़की बंद कि औऱ बैड पऱ लेट गय़ा।
घनघोर बारिश होँ रही थि। बादल भि तेजी सें गरजरहे थें। मौसम बहुत ठंडा होँ गय़ा थां। मेरी नींद भि उचट गई थि। अचानक सें मुझेकुछ यादआया औऱ मैंने माॅम कि पैन्टी कपड़ों केँ अन्दर सें बाहर् निकला। मे उसेदेख कर उत्तेजित होँ गय़ा। पैंटी कों उपर सें भीतर सें सभीतरफ सें देखा। उसेहाथ सें सहलाया। नाक सें सूंघा। औऱ अंत मे उसे अपने पैजामा केँ अन्दर अपने जांघिया केँ अन्दर अपने लिंग सें लपेटकर सो गय़ा।
माॅम कि आवाज़ सें मेरी नींद खुली। माॅम मेरेउपर झुककर मुझे उठाने कि कोशिश कररही हैं। माॅम केँ यूं झुकने सें साड़ी कां आंचल उनके सीने सें ढलक गय़ा थां। मेरीनजर ब्लाउज मे कैद उनके बड़े बड़े उरोजो पर्र गयीँ,। एक् तौ सुभह कां इरेक्शन उपर सें ब्लाउज केँ ऊपर सें उनके बड़े बड़े संतरों कां दर्शन मेरी अवस्था नाजुक होनेलगी।
" सागर जल्द सें उठो। "
" क्याँ हुआ। " मे उनके वक्ष देखते हुए बोला।
" नीचे बाथरूम केँ पास पानीभर गय़ा हैं। औऱ अभि तक किसी नें भि बाथरूम यूज़ तक नहि किया हैं। "
" अच्छा देखता हूं। आप् चलो मे आता हूं । "
" नाले कां पानी भि जाम होँ गय़ा हैं। पानी निकल नहि रहा हैं। "
मे उठकरबैठ गय़ा। तुम् यहीं नहाओ फ्रेश हौ जाओ। मे देखता हूं। "
मैंने चुपके सें उनकी पैंटी जोँ अभि भि मेरे लिंग सें लिपटी हुईँ थि निकाल करबेड केँ नीचेरख दिया। फिन नीचेहाल मे गय़ा। डैडउठ गये थें औऱ वहींबैठ थें। उन्होंने भि मुझसे वहींकहा जौ माॅम नें कहा थां। मे हाल सें आगे बढ़ा औऱ रसोई कों पारकर केँ अन्दर केँ दरवाजे सें बाहर् निकलकर देखा।
रसोई केँ पिछे बाहर् कां बहुत एरिया ओपन थां औऱ वोँ बाउंड्री वॉल सें घिराहुआ थां। वहां हमनेकुछ आम औऱ अमरुद केँ पेड़ लगाए थें जौ कि पकगए थें। थोड़े बहोत फूल भि लगाए थें। दाहिने तरफ दिवाल सें लगकर बाथरूम कम टायलेट बनाहुआ थां जोँ ६बाई७ कां बनाहुआ थां। पहले बाथरूम थां फिनउसी सें सटकर टायलेट बनाहुआ थां जिसका फर्श बाथरूम सें एक् फीट ऊंचा थां।
सुभह कि घनघोर बारिश सें बाथरूम केँ अन्दर तक पानी प्रवेश कर गय़ा थां। पानी कों बाहर् कि ओर निकालने केँ लिए एक् नालाबना हुआ थां जोँ मिट्टी औऱ पत्तों सें जाम होँ गय़ा थां।
मैंने अपनी पैंट उतारी औऱ केवल जाघिये मे हि पानी केँ बीचउतर गय़ा। पौन घंटे कि मशक्कत केँ बाद नालासाफ हुआ। अबजमा पानी बिना रुकावट केँ बाहर् कि तरफ निकलने लगा।
साफ सफाई केँ बाद मे वहीं बाथरूम मे फ्रेश हुआ औऱ एक् तौलिया लपेटकर घऱ मे चला गय़ा। अपने कमरे मे प्रवेश कर मे कपड़े पहन रेडीहुआ तौ उसी वक्त मेरीनजर कुर्सी पर्र पड़ी। वहां पर्र जोँ कपड़े मैंने सुभह बरसात सें भींगने सें बचने केँ लिएरखे हुए थें वोँ नहि थें। मे समझ गय़ा माॅमजब मुझे जगाने आई थि उसी वक्त वोँ कपड़े लेकरचली गई।
तभी मुझे ध्यान आया कि मैंने माॅम कि पैन्टी कों अपनेखाट केँ नीचेदबा कररखा हैं। मे चिन्तित होँ गय़ा। कहीं वोँ अपनी पैंटी नं पाकरमुझ पऱ शक वगैरह नां कर बैठे। मे जल्द सें उनकी पैंटी कों बेड केँ नीचे सें निकाल करउसे पैंट केँ अन्दर छुपाकर नीचेहाल मे पहुँचा।
डैड टीबीदेख रहे थें। रीतु शायद अपने कमरे मे थि औऱ माॅम रसोई मे नाश्ते कि तैयारी कररही थि। मे माॅम केँ कमरे मे प्रवेश किया। सारे कपड़े उनके कवर्ड मे बिना चपेते हुएरखे हुए थें। मैंने उनकी पैंटी उन कपड़ों केँ अन्दर ठूंस दिया औऱ कमरे सें बाहर् निकलआया। अब मे थोडा आश्वस्त हुआ।
ब्रेकफास्ट करने केँ बादडैड बैंकचले गए औऱ रीतु कालेज। माॅम वापस रसोई मे चली गई। नाश्ते केँ दौरान माॅम केँ हावभाव सें मुझेकुछ समझ नहि आया।
मे फिन अपनेरूम मे चला गय़ा। सुभह केँ साढ़े नौबजगए थें। मैंने श्वेता दि कों मोबाइल लगाया।
" हैलो !" उधर सें श्वेता दि कि आवाज़ आई।
" कैसी होँ स्वीट हार्ट ?"
" मस्त। तु अपनीबता। "
" ठीक हि हूं। जीजू केसे हें ?"
" पहले सें बेहतर हैं। "
" तुम् कहां सें बातकर रही होँ ?"
" रसोई सें। ब्रेकफास्ट बनारही हूं। "
" औऱ जीजू ?"
" रूम मे बैठकर टेलीविज़न देखरहे हें। औऱ हां मैंने उन्हें दिल्ली शिफ्ट होने कि तुम्हारे सलाह केँ बारे मे बताया थां। वोँ राजी हें बल्कि बहोत उत्साहित हैं। "
" ठीक हैं मे आज आन्टी सें बात करता हूं। "
" तुमने ब्रेकफास्ट कर लिया ?"
" कर तौ लियामगर आनंद नहि आया। "
" क्यूं ?"
" तुम्हारा नाश्ते सें कहां घऱ कां ब्रेकफास्ट अच्छा लगेगा। "
" तौ आँ जाते। "
" ब्रेकफास्ट करा देती ? जीजू केँ रहते ?"
" हांकरा देती औऱ उन्हें क्याँ फर्क पड़ता ?"
" उन्हें फर्क नहि पड़ता कि मे साया साड़ी उठाकर अपनी मुंह तुम्हारे जांघों केँ बीच ढुकाकर अपना ब्रेकफास्ट कर लेता। "
" कुत्ता कहीं कां। सुभह सुभह हि शुरुआत हौ गय़ा। औऱ मे उसकीबात नहि कररही थि। "
" क्याँ उसका भि कोई वक्त होता हैं। "
" होता हैं। "
" कब ?"
" रात कों। औऱ बकवास बंदकरो मुझे ब्रेकफास्ट बनाना हैं। "
" एक् बात तौ बताती जाओ उर्वशी औऱ तुम्हारे बीच मे क्याँ क्याँ बातें हुईँ थि ?"
" बहोत सारी बातें हुइ थि तुम् क्याँ सुनना चाहते हौ ?"
" होटल वाली। मेरे औऱ तुम्हारे बारे मे। हमारे रिश्तों केँ बारे मे। "
" कमीने ! स्वयं हि सारीराम कथाउसे सुनाकर मुझसे पुछता हैं कि क्याँ बातें हुइ। "
" मैंने कुछ नं थोड़ी बताया। फर्श पऱ गिरेहुए हमारे कछी कों देखकर उसने स्वयं हि अंदाजा लगा लिया। औऱ उपर सें ताश केँ पत्तों पऱ हमने चित्र कारी भि तोँ कर दि थि। "
" उसी केँ बारे मे पुछरही थि। पहले तोँ मै नां नुकुर कि मगरबाद मे मानना पड़ा। "
" फिन ?"
" फिन क्याँ। फिन सारेराज खुलगये। मैंने अपना बताया तौ उसने भि अपना बताया। "
" उसने क्याँ बताया ?"
" यही कि तुम् दोनों कि किस्सा केसे चालु हुईं। अच्छा सुनो मोबाइल रखती हूं नाश्ते केँ लिए देरी होँ रही हैं। "
" ओके। बाय। " औऱ मैंने मोबाइल पऱ उसेकीस किया।
" बाय। " उसने भि कीस कियाफिन मोबाइल काट दि।
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maira nam TUSHAR h.
mai apka बहुत बड़ा fan ho। kahani बहुत achi h। Apne joo kahani mai shayari likhi h उसकी दो panti mai sunane ja raha ho arg farmayeye sir
फिन मुझे दीदा-ए-तर यादआया
दिल जिगर तिश्ना-ए-फ़रयाद आया
जिगर तिशना--मतलब बहोत बेचैन। आज मुझे अपने आँसू बहाने केँ दिनयाद आँ गए। औऱ हमारा दिल बेचैन होँ उठा औऱ अश्क बहाने कि फ़रयाद करनेलगा क्योंके उसे आँसू बहाने मे कुछ ज़्यादा हि लुत्फ़ आता हैं।
दम लिया थां न् क़यामत नें हनोज़
फिन तेरा वक़्त-ए-सफ़र यादआया
तेरे जाने केँ बाद जौ क़यामत टूटी थि, अभि उससे राहत भि नहि मिली थि केँ फिन वोँ वक़्तयाद आँ गय़ा जब तूँ रुख़्सत हुआ थां। इसतरह हमारी बेचैनी औऱ बढ़ गई।
ज़िन्दगी यूँ भि गुज़र हि जाती
क्यूं तेरा राहगुज़र यादआया
हमारी ज़िन्दगी जैसी भि गुज़ररही थि गुज़र जाती। हमें तेरा मार्ग यादआया हमने सोचाइस पर्र चलकर शायदकुछ राहत मिले। मगर ऐसाकुछ नहि हुआ। इसलिये तेरा राहगुज़र हमेंयाद हि न् आता तौ अच्छा थां।
क्याँ हि रिज़वाँ सें लड़ाई होगी
घऱ तेरा ख़ुल्द मे गरयाद आया
अगर हम् जन्नत मे आँ गए औऱ वहा रहतेहुए अगर हमें तेरेघऱ कि यादआई, तौ हम् वहा सें निकलना चाहेंगे औऱ वहा कां दारोग़ा हमें निकलने नहि देगा, तोँ ज़ाहिर हैं हमारी उस दारोग़ा सें लड़ाई होगी।
फिन तेरे कूंचे कों जाता हैं ख़्याल
दिल-ए-गुमगश्ता मगरयाद आया
हमारा ख़्याल बार-बार तेरीगली कि तरफ़जा रहा हैं। अगर हमारा खोयाहुआ दिल कहीं मिलेगा तोँ बसइसी गली मे मिलेगा। तेर कूँचे कि तरफ़ हमारे ख़्याल केँ जाने कां मतलब हैं अपनेखोए हुएदिल कों वहा ढूँडना।
कोई वीरानी सि वीरानी हैं
दश्त कों देख केँ घऱयाद आया
मे घऱ कि वीरानी सें घबराकर रेगिस्तान मे रहनेचला गय़ा। मगरयहा कि वीरानी तोँ बिल्कुल घऱ कि वीरानी जैसी हैं। यहा कि वीरानी देखकर मुझे अपनेघऱ कि याद आँ रही हैं औऱ यह भि एहसास हौ रहा हैं केँ मेराघऱ इतना वीरान हैं।
मैंने मजनूँ पे लड़कपन मे असद
साथ उठाया थां केँ सरयाद आया
लड़कपन केँ ज़माने मे जब मजनूँ कों पत्थर मारने कां ख़्याल मेरेदिल आया तौ मे रुक गय़ा। मुझे एहसास हुआ केँ मे भि तोँ एक् आशिक़ हूं। अगर कहीं मेरी भि ऐसी हालत हौ गई तौ मुझ पर्र भि पत्थर बरसाए जाएँगे। साथ तोँ मैंने मजनूँ केँ सर केँ लिए उठाया थां मगरसर मुझे अपनायाद आँ गय़ा।
Thank you sir
Sagar (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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