Sagar (Full Storyd) – New Episode
मे जानता हूं कि एपसोड थोड़ी छोटी हौ गई हैं मगरकुछ नहि करने सें कुछ करना बेहतर होता हैं औऱ लाॅक डाउन कि ढ़ील केँ पश्चात रोजी रोटीसब केँ लिए पहली प्राथमिकता बन गयीँ, हैं। मेरी कोशिश हरसंभव रहेगी कि किसी भि तरह हफ्ते भर मे दोतीन एपसोड आपके समक्ष प्रस्तुत करूं। आप् सब कों संगबने रहने केँ लिए आभार औऱ अभिनंदन ?
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Update 12 A.
ब्रेकफास्ट करने केँ पश्चात माॅम कों बाय बोला औऱ आन्टी ( अजय कि मम्मी ) केँ घऱचला गय़ा। उनकाघऱ पैदल मेरेघऱ सें पन्द्रह मिनट कि दूरी पर्र थां। अजय केँ बापू कि ऊंची पोस्ट पर्र सरकारी जॉब थि। उन्होंने पैसे बहुत कमाये थें। उनकेजॉब केँ दौरान हि मरने केँ बादपी। एफ। औऱ ग्रेच्युटी कि बहुत अच्छी रकम मिली थि। L.I.C। सें भि insurance कि मोटीरकम मिली थि जिसे उन्होंने बैंक मे जमाकरा दिया थां। उनके खर्चे पैंशन केँ पैसों सें बखूबी हौ जाता थां। उनका घर-मकान दो तल्ला थां दोनों तल्ले मे दोरूम, एक् हाल, रसोई, बाथरूम थां। दोनों तल्ला सेम पेटर्न मे बनाहुआ थां। आन्टी नीचे ग्राउंड फ्लोर पर्र रहती थि। पहले एक् रूम मे आन्टी औऱ दुसरे रूम मे अजय रहता थां मगरअमर केँ देहांत केँ बाद पुरेघऱ मे वोँ अकेली रह गई थि।
जब मे उनकेघऱ आयातब उनकामेन दरवाजा खुलाहुआ मिला। मे घऱ मे प्रवेश किया औऱ उनकेरुम केँ पास गय़ा। वोँ बैड पर्र बिस्तर केँ सिरहाने पीठ टिकाए गुमसुम बैठी सामने दिवाल पऱ देखरही थि। मैंने उनकी नजरों कां पिछा किया। दिवाल पर्र उनके पति औऱ अमर कि बड़ी फोटो लटकी हुइ थि जिस पर्र फुलों कां हारलगा हुआ थां। उनकी नजरें अमर केँ फोटो पर्र टीकी हुईँ थि। उनके आंखों सें आंसूछलक कर गालों कों भिगोरहे थें। वोँ तीलतील करमररही थि।
मेरेगले कि घंटीबजी। मन व्याकुल हुआ। ह्रदय विचलित हौ उठा। मे उनकेरुम केँ दरवाजे सें सटे दिवाल सें टेक लगाये खड़ा हौ गय़ा। आंखों सें झरझर आंसू बहनेलगे। मे बहोत अधिक भावुक हौ गय़ा थां। मुझसे उनकागम देखा नहि जारहा थां। मुझेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि मे क्याँ करूं। केसे उनको दिलासा दूं। क्याँ बोलूं। उनका जवान लड़का हमेशा केँ लिए उनकासंग छोड़ चुका थां। क्याँ बीतरही होगी उनकेदिल पर्र। क्याँ सोचरही होगी। अपने बेटे कि बचपन कि यादें। उसकी शरारतें.उसका नटखटापन.उसका रोना.याँ उसका मुस्कुराना.याँ उसका रूठना मनाना.याँ उसका प्रेम।
एक् जवान बच्चे कि मौत माँ बाप केँ लिए श्राप होती हैं। उनकी जीवन कि सबसे बड़ी त्रासदी होती हैं। बच्चा तौ चला जाता हैं मगर अपने पिछे मम्मी बाप कों जिंदगी भर केँ लिए आंसू औऱ गमदे जाता हैं। वोँ जिंदा लाश कि तरह हौ जाते हें। यह आंसू औऱ गम उनके आखिरी पड़ाव तक संग चलते रहते हें।
आंटी नें अपने पति कि मौत केँ सदमे कों अपने बेटे केँ प्रेम मे भुलने कि कोशिश कि होगी। मगर अपने बेटेअमर कि मौत केँ बाद औऱ कौन हैं जिसके लिए वोँ अमर कों भुलाने कि कोशिश करेंगी। एक् हि तोँ लड़का थां। औऱ दूसरा कोई भि तोँ नहि हैं।
ईश्वर यदि मुझसे मात्र एक् बर मांगने कों कहे तौ शर्तिया मे यही मांगूंगा कि हे प्रभु किसी भि माँ बाप केँ जिन्दा रहते उसके औलाद कि मौत नाँ हौ। औऱ अगर हौ भि तौ औलाद केँ जन्मने केँ सालभर केँ अन्दर हौ।
मैंने कहीं पढ़ा थां कि ईश्वर रामजब रावण कां बध किये थें औऱ रावण जमीन सें गिरा पड़ा थां तब उन्होंने अपने छोटे भइया लक्ष्मण कों रावण सें कुछ ज्ञान लेने केँ लिए उनकेपास भेजा थां। लक्ष्मण जमीन पर्र पड़े रावण केँ केँ पास गय़ा औऱ उनकेसिर केँ बगल खड़ा हौ गय़ा। रावणकुछ नहि बोला। तब श्रीराम नें लक्ष्मण कों समझाया कि रावण ब्राह्मण होने केँ संग-संग एक् बहोत बड़ा ज्ञानी औऱ विद्वान भि हैं। औऱ यदि किसी सें कुछ ज्ञान प्राप्त करना होँ तोँ उनके चरणों केँ पास बैठना चाहिए। लक्ष्मण दुबारा रावण केँ पासगए औऱ उनके पांवों केँ पास खड़े हौ गए। तब रावण नें लक्ष्मण कों एक् बात बताई थि कि अगर तुमने कुछ करने कां संकल्प लेँ रखा हैं तोँ उसे तत्काल कर लेना चाहिए। उसेबाद केँ लिए टालना नहि चाहिए। रावण नें कहा। मेरीतीन इच्छाएं थि जिसे मे करना चाहता थां मगर दुर्भाग्यवश नहि कर पाया। १। स्वर्ग केँ लिए सीढ़ी बनाना ( सब लोगों कों स्वर्ग भेजना )। २। समुद्र केँ खारे पानी कों दुध मे बदल देना ( कोई भि भुखा प्यासा नहि रहे। दुध कों सम्पूर्ण भोजन माना जाता हैं। ) औऱ ३। माँ बाप सें पहले उसके पुत्र कां देहांत नाँ हौ।
मैंने अपने आंसुओं कों पोंछा औऱ बड़ी मुश्किल सें चेहरे पऱ मुस्कान लिए आंटी केँ पास गय़ा। उन्हें अपनेगले लगाकर हरतरह सें दिलासा देने कि कोशिश कि। उनकेमन कों अमर कि यादों सें निकालने कि कोशिश कि।
कुछदेर बाद वोँ थोड़ी नार्मल हुईँ। उनकेघऱ कि जरूरत कि चीजें मार्केट सें लें आया। अब वोँ पहले सें बेहतर थि। फिन मैंने उन्हें उपर वाला फ्लोर श्वेता दि औऱ राजीव जीजू कों रेंट पर्र देने कि सलाह दि। औऱ उन्हें यह भि बताया कि उनलोगो केँ आने सें आपका अकेलापन भि दुर होगा। वोँ जरा सां भि आपत्ति नहि कि। केवलयही कहा -" बेटा जौ तुम्हें अच्छा लगता हैं वोँ करो। औऱ श्वेता जैसी तुम्हारी बेहन हैं उसीतरह मेरी बेटी भि हैं। उससे मुझेकोई भि किराया नहि चाहिए। "
कुछदेर वहीं बैठारहा। उनसे बातें कि। फिन मे युनिवर्सिटी चला गय़ा। वहांपता चला कि कुछ बड़ी कम्पनियां काउन्सलिंग केँ लिएआईं हुइ हैं। मतलबआज यहां ज्यादा वक़्त लगने वाला हैं। मैंने रीतु कों मोबाइल किया औऱ उससेकहा कि वोँ कालेज कि छुट्टी केँ बाद काजल कों संग मे हि अपनेघऱ लेतेहुए आनां औऱ उसकेलिए मैंने आगरा सें जौ पेठा लाया हैं वोँ उसेदे देना।
काउंसलिंग शेष होते-होते साम केँ छःबजगए। अबघऱ जाने मे कोई फायदा नहि थां इसलिये वहीं सें पैराडाइज क्लबचला गय़ा। मे अभि क्लब केँ अन्दर प्रवेश किया हि थां कि स्टाफ नें मुझेकहा ' आपको कुलभूषण खन्ना यादकर रहे हें '।
' क्याँ बात होँ सकती हैं ' सोचते हुए मे उनके आफिस कि तरफचला गय़ा।
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Update 12 A। Continue.
" वैलकम ! वैलकम ! " - कुलभूषण खन्ना अपनी चेयर पर्र बैठेहुए बोला।
मे उससेहाथ मिलाया औऱ उसके सामने पड़ी एक् कुर्सी पर्र बैठ गय़ा।
" औऱ सभी खैरियत हैं। " वोँ अपनेकान कि लौ खिंचता हुआ बोला।
" जी खन्ना साहब। सभी खैरियत हैं। "
उसने अपने स्टाफ कों गरमचाय लाने कि आर्डर दि। मे उसके बोलने कि इंतज़ार करनेलगा।
" हम् सोचरहे थें कि अमेरिका शिफ्ट हौ जाएं। "
" हम् ?"
" मे औऱ अनुष्का। "
" अमेरिका ?"
" मेरा छोटा भइया वहां रहता हैं। कयीसाल सें बुलारहा हैं। "
" सैरकर आने कों ?"
" वही सैटल हौ जाने कां। "
" क्यूं ? कोईखास वजह ?"
" वजह तुम् जानते हौ " - भावावेश मे उसकी आवाज़ कांपने लगी -" तुम्हें ये भि पता हैं कि उसदिन मैंने यहां तुम्हें क्यूं रोकरखा थां। "
" क्यूं ?"
" अपनी पत्नि सें तुम्हारा आमना सामना करवाने केँ लिए। "
" जी !"
"" तुम्हारी विजिट सें मेराये शक विश्वास मे बदल गय़ा थां कि तुम्हारे जीजा राजीव सोलंकी केँ फ्लेट मे तुम्हारा जिसकटे बालों वाली युवती सें आमना-सामना हुआ थां, वो मेरी पत्नि अनुष्का थि। तुम्हारी शक्ल देखते हि उसके चेहरे कां रंग उड़ता मैंने साफ देखा थां। औऱ वोँ समझती हैं कि बाद मे क्लब केँ बाहर् उसने तुमसे जोँ खुसुर फुसुर कि थि, उसकी मुझेखबर नहि। "
मे खामोश रहा। अपनी नर्वसनेस छुपाने केँ लिए मैंने सिगरेट सुलगा लिया।
" दो कौड़ी कि औकात नहि थि मेरी पत्नि कि मेरेसंग विवाह सें पहले " - वो जोरजोर सें अपनेकान कों मसलता हुआ बोला -" कालेज कि मामूली स्टूडेंट, टी.बी। सिरियल मे काम पाने केँ लिए सारा सारादिन मण्डी हाउस कि खाक छाना करती थि। मैंने उससे विवाह कि, उसे रूतबा दिया, इज्जत दि, सुख-सुविधा औऱ ऐश्वर्य दिया। जमीन सें उठाकर आसमान पऱ बिठाया उसे। बदले मे मुझे क्याँ मिलाउस नाशुक्री औऱ बेवफाई स्त्री सें ? धोखा ! फरेब ! बेवफाई !"
वो ठिठका। मुझेयूं लगा जैसे वो रोनेलगा हौ। मगरऐसा न् हुआ। उसने अपने आप् पऱ काबू पाया औऱ अपेक्षा कृत सुसंयत स्वर मे बोला -" मे जिन्दगी कां बड़े सें बड़ा झटका बर्दाश्त कर सकता हूं मगर महिला कि बेवफ़ाई नहि बर्दाश्त कर सकता। मे अपनी पत्नि कि कल्पना राजीव सोलंकी, तुम्हारे उस हरामजादे, कुत्ते केँ पिल्ले केँ पहलू मे नहि कर सकता। मे खूनकर दुंगा उसका। "
" फांसी हौ जाएगी " - मे धीरे-धीरे सें बोला।
" मे उसे तबाहकर दुंगा " - वो यूं बोला जैसे उसने मेरीबात सुनी नं हौ -" मे उसे कौड़ी कौड़ी कां मोहताज कर दुंगा। मे उसे गलियों मे भीख मांगने वाला मंगता बना दुंगा। "
मे खामोश रहा। तभी स्टाफ गरमचाय लेकरआया। स्टाफ केँ जाने केँ बादफिन बोला -" मेरी पत्नि बाद मे तुमसे मिली थि। "
मैंने उत्तर न् दिया।
" झुठ बोलने कां कोई फायदा नहि। मेरे व्यक्ति कों अनुष्का नें डाजदे दि थि। मगरफिन भि मुझे मालूम हैं कि वो तुम्हीं सें मिली थि। "
" फिन भि केसे मालूम हैं ?"
" वोँ छोड़ो औऱ कहो मेरी पत्नि तुमसे मिली थि। जबावये सोचकर देना कि इनकार भि करोगे तोँ मुझे विश्वास नहि होगा। "
" हां। मिली थि। "
" क्याँ चाहती थि ?"
" खासकुछ नहि। "
" फिन भि। "
" मेरा शुक्रगुजार होना चाहती थि कि मैंने उसदिन आपके सामने उसकीपोल नहि खोली थि औऱ आगे भि वो राज रखने कां वादा लेना चाहती थि। "
" ये वादा हासिल करने केँ लिए औऱ क्याँ क्याँ किया उसने ?"
" क्याँ मतलब ?"
" तुम् पर्र डोरे डालने कि कोशिश नहि कि उसने ?"
" नहि " - मे बड़े सब्र सें बोला।
" क्यूं झुठबोल रहे होँ। इसलिये इनकार कररहे होँ क्योंकि समझते हौ कि मे बुरामान जाऊंगा। तुम् खुबसूरत हौ, नौजवान होँ, मार्डन हौ, उपर सें."
" खन्ना साहब " - मे सख्ती सें बोला -" ऐसा कहकर, ऐसा सोचकर आप् अपने आप् कों टार्चर कररहे हें। ईशया कि भावना नें आपकीमति भ्रष्ट कर दि मालूम होती हैं। यूं तौ जोँ मर्द एक् सेकेंड केँ लिए आपकी पत्नि केँ पास खड़ा होगा, आप् उसी पऱ शक करने लगेंगे। ऐसा कहीं होता हैं ? इससे तोँ बेहतर हैं तौ आप् तलाकदे देंऐसी पत्नि कों। "
" उसने। उसने तलाक कां कोई जिक्र किया थां ?"
" नहि। कतई नहि। "
" हूं। "- वो बोला। उसनेकान कि लौ कों खींचने मसलने कि स्थान सहलाना आरम्भ कर दिया -" अच्छा, ये बताओ तुम्हारे ख्याल सें मेरी पत्नि कां उस व्यक्ति केँ कत्ल सें कोई नाता हौ सकता हैं जौ राजीव केँ फ्लेट मे मरा पाया गय़ा थां। क्याँ नाम थां उसका ?"
" अमर। अमर गुप्ता। "
" हां। अमर गुप्ता। उसके कत्ल सें मेरी पत्नि कां कोई नाता होँ सकता हैं ?"
" मुझे नहि मालूम। "
" भई। मैंने तुम्हारा ख्याल पुछा हैं। "
" मेरा इमानदराना ख्याल जानना चाहते हें आप् ?"
" हां। "
" फिन तोँ होँ सकता हैं। आप् कि बीबी केँ पास राजीव जी केँ फ्लैट कि चाबी थि। औऱ मौका-ए-वारदात पऱ वोँ पाई गई हैं। औऱ हालात ऐसे पैदा हौ गये हौ सकते हें कि आपकी पत्नि कों गोली चलानी पड़ गई हौ। "
" हूं। अगरऐसा हुआ, वो पकड़ी गई औऱ उसेसजा हौ गई तोँ मुझे बहोत अफसोस होगा। "
" अच्छा !"
" मे उसके बिना एक् लम्हा भि नहि रह सकता। "
" जी। "
मेरेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि यह व्यक्ति किस टाइप कां व्यक्ति हैं। घड़ी मे तोला, घड़ी मे माशा।
" मे सचकहरहा हूं। '
" अच्छा, मुझे आज्ञा दिजिए। " मैंने उठने कां उपक्रम किया।
" जरा एक् मिनट सुनो। "- वोँ बोला -" तुम्हारा जीजा भि तोँ क़ातिल हौ सकता हैं ?"
" होने कों तौ क़ातिल आप् भि हौ सकते हें। "
" क्याँ बकवास कररहे हौ। "
" मे भि आप् हि कि तरह सम्भावना व्यक्त कररहा हूं। आप् कों अपनी पत्नि पऱ शक थां। आपने अपनी पत्नि कां पिछा किया। वहां आपने अपनी पत्नि कों अपने दुसरे दोस्त अमर कि बाहों मे देखा। आपकाखून खौलने लगा। औऱ आपनेअमर कां खूनकर दिया। "
" क्याँ बे-सिर-पेर कि बातें कररहे हौ। उसकी दोस्ती तौ राजीव सें थि। मुझे मारना होता तोँ मे राजीव कों मारता। औऱ यहअमर नाम कां लड़का कहां सें स्लिम होँ गय़ा। उसे तोँ न् मे जानता हूं औऱ न् हि अनुष्का। उसेभला मे क्यूं मारूंगा। "
" आप् कों अमर केँ मर्डर केस कि सारीकथा पता हैं। क्याँ आप् बता सकते हें कि मर्डर वालेदिन सुभहदस बजे सें साढ़े ग्यारह बजे तक कहां थें ?"
" घऱ मे हुंगा औऱ कहां होऊंगा। "
" अच्छी तरह सें याद करके बताईए। शायद भविष्य मे इससे आप् कों फायदा हि हौ। "
" मे घऱ मे हि थां। "
" आप् घऱ मे थें, इसकाकोई सबूत, याँ कोई गवाह। "
" नहि कोई भि नहि थां। एक् मेडआती हैं रोजमगर शायदउस दिन वोँ आई नहि थि। औऱ अनुष्का किसी सहेली केँ पास जाने केँ लिए कहकरचली गई थि। "
" तब तोँ आपकेपास भि उससमय कि कोई पुख्ता एलीवाई नहि हैं। अच्छा अब इजाजत दिजिए। क्लास केँ लिएलेट हौ रहा हैं। "
" ठीक हैं। जाते जातेयह तोँ बताजाओ कि पुलिस कों अनुष्का केँ बारे मे कोईखबर हैं ?"
" जी नहि। "
मे वहां सें क्लास चला गय़ा। थोड़ी देर मे हि मनउचट गय़ा। औऱ खन्ना साहब सें बिदा लेँ करघऱचला गय़ा। दरवाजा रीतु नें खोला। वोँ सलवार सूट पहनेहुए थि। मे अभि हाल मे पहुँचा हि थां कि रीतु पीछे सें आकर बोलीं।
" भइया। काजल कों उसकेघऱ छोड़ दोगे क्याँ ?"
" क्याँ " - मे चौंकते हुएकहा -" वोँ अभि तक यहीं हैं। "
" हां। "
" ठीक हैं छोड़ दुंगा। कब तक निकलेगी ?"
" आधे घंटे मे। "
" माॅम कहां हैं ?
" रसोई मे। " बोलकर वोँ अपनेरूम मे चली गई।
मे रसोई मे गय़ा। माॅम हल्के गुलाबी रंग कि साड़ी पहने खड़ी हौ कर रसोई स्लैब केँ उपर सब्जी काटरही थि। गर्मी केँ कारण पसीने सें उनका ब्लाउज भीग गय़ा थां। साड़ी पेट सें हट गई, थि जिससे उनकी गोरी गोरी थोड़े फुलेहुए पेट दिखाई देरही थि। साड़ी नाभि केँ थोडा नीचे सें बंधाहुआ थां। पसीने कि बूंदें सरककर नाभि सें होतेहुए साड़ी पऱ जमा होँ रही थि। यहसभी देखकर मे थोडा उत्तेजित हौ गय़ा। मे उनकेपास गय़ा औऱ पीछे सें उनसे लिपट गय़ा।
" इतनी गर्मी मे इतना हैवी साड़ी क्यूं पहनती हौ। पुरा पसीना पसीना होँ गई हौ। तुम्हारी नाइटी कहां गई, ?"
" बड़ा जल्द आँ गय़ा। " - माॅमपलट कर मेरे बालों कों सहलाते हुए बोलि।
" हां। आजमन नहि लगा इसलिये जल्दचला आया। तुमने बताया नहि तुम्हारी नाइटी क्याँ हुईं ?"
" पुरानी हौ गई थि इसलिये फट गई। "
" तोँ दुसरी लें लेती। "
" मैंने रीतु कों बोला थां मगर वोँ बारबार भुल जाती हैं। "
" अरे ! तोँ मे हूं नां। मुझसे कहती मे लें आता। '
" अच्छा तौ तु हि लेँ आनां। "
मे माॅम केँ कन्धों केँ पसीने कों हाथों सें पोछता हुआ बोला -" कौन सि लेँ आऊंगा ?"
" कोई भि लें आनां। "
" कोई भि ?"
" हां। "
" तुम्हे पता हैं न् नाइटी कयीतरह कि आती हैं। एक् पुरे एंडी तक आने वाली, एक् घुटने सें थोड़ी नीचे तक आने वाली औऱ एक् घुटने सें थोड़ी उपर वाली। "
वोँ फिन मेरीतरफ पलटी औऱ मुझे देखते हुए मुस्कुरा कर बोलीं -" बड़ा ज्ञान हैं तुम को नाइटी कां। "
" मुझे तौ सब चीजों केँ बारे मे थोडा थोडा ज्ञान हैं। तुम् जानती हि होँ। "
" हां जानती हूं मगर थोडा थोडा नहि बल्कि अधिक अधिक ज्ञान हैं। "
" कहो नाँ। "
" क्याँ ?"
" कौन सि लेँ आऊं ?"
" घुटनों सें ऊपर वाली अपनी पत्नि कों पहनाना। मुझे एंडी तक आने वाली हि लें आनां। "
" घुटनों तक वाली पहनोगी तोँ हवा अच्छी तरह सें आयेगी औऱ इतना पसीना पसीना नहि रहोगी। "
" जरूरत नहि हैं। मुझेवही लें आनां। "
" ओकेवही लें आऊंगा। अबयह बताओ कि किस टाइप कां लें आऊं ?"
" अबयह ' किस टाइप ' क्याँ हैं ?"
" मतलब मोटे कपड़े वाली, पतले कपड़े वाली, सेमी ट्रांसपेरेंट याँ."
उसने मेरेपेट पऱ कसकर मुक्का मारा। " बहोत ज़्यादा बदमाश हौ गय़ा हैं। तुम् रहने हि दो मे रीतु सें मंगवा लुंगी। "
मे माॅम केँ गाल पर्र पप्पी लेतेहुए बोला -" ऐसे केसे रहनेदो। मे हि लेँ आऊंगा औऱ अब सें नाइटी हि नहि बल्कि तुम्हारी हर चीजें मे हि लें आऊंगा। "
" बड़ाआया लें आने वाला। पहले कमाना तब बातें करना। "
" इतना तौ कमा हि लेता हूं कि तुम्हारी जरूरत केँ चीजों कों खरीद सकूं औऱ रहीबात ज़्यादा कमाने कि तौ कुछ दिनों तक वेटकरो। सोने कि बिस्तर बनवा दुंगा। "
" किसके लिए। अपनी पत्नि केँ लिए। " - माॅम मुस्कराते हुए बोलि।
" तुम्हारे लिए। "
" मे क्याँ करूंगी सोने कि बिस्तर लेँ कर। मेरेलिए मेरा टुटा फुटा लकड़ी कां खटिया हि बहुत हैं। "
अभि मे कुछ कहतातभी रीतु औऱ काजल आँ गयीँ,। काजलघऱ जाने केँ लिए सजधजकर हौ गई थि। मे वहां सें निकला औऱ काजल कों अपनी बाइक पऱ बैठाकर उसकेघऱ कि ओर रवाना होँ गय़ा।
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