Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 12 B.
मे बाइकलिए दरवाजे केँ बाहर् खड़ा थां जब रीतु औऱ काजल वहांआई । काजल सें रीतु कि दोस्ती विद्यालय केँ वक़्त सें हि थि। दोनों मे बहुत गहरी दोस्ती थि। इन दोनों कां एक्-दूसरे केँ घऱ जानां औऱ कभीकभी एक्-दूसरे केँ घऱरुक जानां आमबात थि। वैसे मे भि कभीकभी काजल सें मजाककर लिया करता थां। उसकेघऱ मे उसके माँ बाप केँ अलावा एक् बड़ी बेहन थि जिसकी विवाह गुड़गांव मे हि हुइ थि।
काजलडीप ब्लूकलर कि शर्ट औऱ लेगिंग्स पहनी हुई थि जोँ उसके गोरे गोरेरंग पऱ बहुतफब रहा थां। उसके बड़े-बड़े वक्ष शर्ट पऱ बहुतकसे हुए थें। उसकी मोटी मोटी जांघें लेगिंग्स मे बहोत हि सेक्सी लगरही थि। होंठों पऱ लाली, आंखों मे हल्का सुरमा, घुंघराले कमर तक आयेहुए बाल उसकी हुस्न मे चार-चांद लगारहे थें। रीतु सलवार सूट मे भि हमेशा कि तरह जगमग जगमगकर रही थि।
काजल रीतु कों बायबोल कर बाईक पर्र मेरे पिछे अपने दोनों पांव दोनों साइड करकेबैठ गई।
" सुन ! अच्छी तरह सें भइया कों पकड़कर बैठजा। " - रीतु बोलीं।
पिछे थोडा हिलडोल कर काजल अपने कों एडजस्ट करनेलगी।
' अरे ! क्याँ कररही हैं ? ठीक सें भइया कों पकड़कर बैठ। कहीं गिरा, पड़ा तौ लेने कों देनेपड़ जायेंगे। "
" हां काजल। अच्छी तरह सें पकड़ लें नहि तोँ गिर पड़ेगी " - मैंने भि काजल कों समझाया।
काजलआगे कि ओरघसक गई औऱ मुझसे सटकरबैठ गई।
" मे काजल कों गिरने केँ चलते तुम्हें पकड़कर बैठने केँ लिए नहि बोलरही हूं। "- रीतु बोलीं।
" तोँ किसलिए बोलरही होँ ?"
" तुम्हे गिरने सें बचाने केँ लिए। अगर रास्ते मे किसी सें भिड़गए तौ काजल तुम्हें बचा लेँ। "
" मुझे गिरने सें बचाने केँ लिए "- मे हैरान हुआ।
" हां। क्योंकी काजल तोँ बाईक पऱ सें गिर हि नहि सकती। वोँ तौ चुम्बक कि तरह बाईक सें चिपक जाती हैं। उसेकोई गिरा हि नहि सकता। "
" क्याँ बकवास करती हैं। " मे भड़ककर बोला।
" सचबोल रही हूं। तुम् काजल सें हि पुछलो। अभि कुछदिन पहलेजब यह मामाजी केँ यहां गई, थि तौ यह एक् दिन अपने मामाजी केँ संग उनके बाईक पऱ बैठे मार्केट जारही थि। रास्ते मे एक् कुत्ता आँ गय़ा औऱ इसका मामाजी एक्सीडेंट कर बैठा। मामाजी तौ उछलकर दुर कहीं गिरामगर यह बाईक सें चिपकी हुईँ हि रही। "
" क्याँ ?"- मे आश्चर्यचकित मुंह बाये देखता रहा।
" हां। " - रीतु काजल कों बोलीं -" चलअबकस केँ भइया कों पकड़ लें। "
काजलअब पुराआगे आँ गयीँ, औऱ मुझसे सटकर बैठते हुए अपनी दोनों बांहों कों आगेकर मेरे बाहों कों पकड़ली।
" अरे ! क्याँ कररही हैं काजल। मेरी बांह तौ छोड़, मे बाईक केसे चलाऊंगा। "
काजल नें जल्दी अपनी बाहें हटायी औऱ इसबार मेरेपेट केँ उपर बाहों कां हारबना कर पकड़ली। उसकी दोनों बड़े बड़े मम्मे मेरेपीठ पर्र धंसगये।
" हां। अबठीक हैं। "- रीतु सन्तुष्ट होँ कर बोलि।
" अब मे जाऊं ?" मैंने कहा।
" हांजाओ । "
" चलें काजल ?" मैंने काजल सें पूछा।
' हां भैया चलिए। " काजल बोलीं।
मे बाईक स्टार्ट करने हि वाला थां कि रीतुजोर सें बोलीं -" अरे काजल, तेरी बुक्स कहां हैं ? औऱ तेरा पेठा वालाबैग ?"
" ओह ! भुल गयीँ, दोस्त। लेते आँ नं। " काजल नें कहा।
" तु भि चल नाँ, दो मिनट मे आँ जाएंगे। "
फिन दोनों अन्दर चली गई। औऱ लगभग पन्द्रह मिनटबाद आई। मे बाइक पऱ बैठे बैठे भुनभुनाता रहा। काजल नें अपनी किताबें औऱ पेठा वालाबैग मुझे दिया। मैंने उसे बाइक कि डिकी मे रख दिया। फिन मेरे बाइक पऱ बैठते हि काजलउसी तरह मेरेपेट कों अपने हाथों सें पकड़कर चिपककर बैठ गई।
ज्योंहि उसके बड़े-बड़े वक्ष मेरीपीठ पऱ दबे तौ मुझेकुछ अलग सां फिलहुआ। मे उसके मम्मे कों स्पष्ट रूप सें महसूस कररहा थां। शर्तिया उसने अन्दर जाकर अपनी ब्रा उतार दि थि। मेरीदिल कि धड़कन तेज हौ गई। यह क्याँ खेल खेलना चाहती हैं।
" चलें काजल "- मैंने प्रेम सें कहा।
" हां भैया। "
काजल नें रीतु कों बाय बोला औऱ हम् वहां सें रवाना होँ गए। वोँ मुझसे इसतरह चिपकी हुई थि कि बीच मे सें हवा भि पार न् होनेपाए। उसकी छाती मेरीपीठ सें धंसी हुई थि। उसके बड़े-बड़े रसीले स्पंज कि तरह मम्मे कि रगड़ मुझे बहुत उत्तेजित कररही थि। जांघिया मे कैद मेरे छोटे सिपाही नें जैसे बाहर् निकलने केँ लिए बगावत शुरुआत कर दि थि।
काजल कां घऱ पीतमपुरा मे थां जौ हमारे यहां सें लगभगआठ किलोमीटर दूर हैं। इनका घर-मकान दो मंजिला थां। घर-मकान केँ पिछले हिस्से मे एक् छोटा सां बगीचा थां जहां हमलोगो कि तरह हि फलों केँ पेड़लगे हुए थें औऱ कुछ सब्जियां भि बोई गई थि।
" काजलकोई तकलीफ़ तोँ नहि होँ रही हैं न्। " मे बाइक चलाते हुएकहा।
" नहि भैया। "
" तुमने पेठा खाया ?"
" हां। बहोत टेस्टी हैं औऱ थैंकयू भैया। "
" तुम्हे अच्छा लगायही मेरेलिए बहुत हैं। "
बाइक चलाते हुए सामने एक् बमपरआया तोँ बाइक हल्के सें उछल गई औऱ काजल भि थोड़ी उछली औऱ फिन मेरेपीठ पर्र अपने मम्मे कों रगड़ते हुएबैठ गई। मे ' अहह ' करकेरह गय़ा । मे उससेबात करना चाहता थां मगर क्याँ कहूंसमझ मे नहि आँ रहा थां। तभीकुछ यादआया।
" काजल तुम्हे याद हैं तुम् मुझे अपनेआम खिलाने वाली थि। " मे बोला।
" हां भैया याद हैं। घऱ चलिए आप् कों खिलाती हूं। "
" अभि तोँ घऱ पर्र सब होंगे। कभी फुर्सत मे खा लेंगे। "
अपने मम्मे कों मेरेपीठ पर्र कसतेहुए बोलीं -" उससे क्याँ फर्क पड़ेगा। आप् पिछे कि तरफ सें गार्डेन मे चलियेगा। अभि इस टाइम वहांकोई नहि होगा, आप् आहिस्ता खा लिजिएगा। "
" कहीं तेरी मां डैड नें देख लिया तौ। "
" क्याँ देख लिया तोँ ?"
" कि मे तेरेआम खारहा हूं। "
वोँ अपने हाथों कों मेरेपेट सें हटाकर मेरे जांघों पऱ लिंग केँ लगभग लेँ गयीँ, औऱ उंगलियों सें जांघ कों सहलाते हुए बोलि -" डैड अभि दुकान पर्र होगें औऱ मां अपनी फेवरेट सीरियल देखरही होगी। "
लिंग केँ खड़े होने केँ कारण पैंट पऱ बहुत उभार आँ गय़ा थां। औऱ उसकी ऊंगली उभारों सें लगभग लगभगसट कर हि थि। उसके उंगलियों द्वारा वहां सहलाने सें मेरा लिंगफुल कर कुप्पा होँ गय़ा थां
" अच्छा यह तौ बहोत अच्छी बात बताई। अब तोँ मे पक्का तेरीआम चुसुगा। "
वोँ अपने मुंह मेरे कानों सें सटाकर बोलि -" भैया आपको केसेआम पसन्द हैं मतलब बड़े बड़े याँ छोटे। "
" मुझेसब पसन्द हैं। वैसे तेरीआम कैसी हैं ?"
वोँ कान मे अपनी होंठ कों सटाकर फुसफुसाई -" भैया मेरे बड़े बड़े हें। "
मुझे तोँ ऐसालगा कि सच मे हि कहीं मे एक्सीडेंट नाँ कर बैठूं। मे अपने आप् कों संभालते हुए बोला -" वाउ। बड़े बड़े। मुझे बड़े बड़े बहोत ज़्यादा पसन्द हैं। काजलसच मे अपनेआम मुझसे चुसवाएगी.मेरा मतलब चुसने देगी नं। "
" हां भैया सच मे दुंगी। आप् सें नहि चुसवाउगी.माने आप् कों चूसने नहि दुंगी तौ भला किसे दुंगी। " - फुसफुसा कर बोलि औऱ अपनी मध्यम उंगली कों मेरे लिंग केँ साइड मे हल्का हल्का सहलाने लगी।
उसके उंगलियों केँ वहां स्पर्श सें मुझेलगा कि अब मे झडने हि वाला हूं। मे बहुत उत्तेजित हौ गय़ा थां। मैंने हिम्मत करके बाइक केँ हैंडल पऱ सें अपना एक् हाथ हटाया औऱ उसकी उंगलियां जोँ मेरे जांघों केँ मध्य सें जरा हि दुर थां उसे अपने उंगलियों सें फसाकर बीच मे ठीक लिंग केँ उपररख दिया। उसनेजरा भि प्रतिवाद नहि किया।
" मे जरूर चुसुगा। दबादबा कर चुसुगा। "
" हां भैया जरूर चुसीएगा। दबादबा कर चुसीएगा। " - वोँ अपने उंगलियों कों हल्के सें पैंट केँ ऊपर सें लिंग केँ उपर दबाई।
" हां अपने दोनों हथेलियों सें पकड़कर खुबदबा दबाकर चुसुगा, पिऊंगा। "
" चुस लेना भैया। अपने हाथों सें दबोच दबोचकर पी लेना। " कहतेहुए वो अपने हथेलियों कों मेरे लंड कों पैंट केँ ऊपर सें दबाई।
" हायरे काजल। मुझे तौ तु अपनीआम चुसाएगी औऱ तुम्हे क्याँ मनपसंद हैं। तुझेही क्याँ चाहिए ?"
" हाय भैया मुझे केला पसन्द हैं। आप् मुझे खिलाओगे न् " - मेरे कानों मे धीरे-धीरे सें बोलि औऱ उसे अपनीजीभ कि नोक सें स्पर्श कर दिया।
" जरूर खिलाऊंगा काजल। मे तोँ कब सें चाहता थां कि तुम्हें अपना केला खिलाऊं। "
" तोँ यह आपकी गलती हैं नं भैया। आप् कों पहले बोल्ना चाहिए थां। "
" हां मेरी गलती हैं। मगरअब गलती नहि करूंगा। "
वोँ कुछ कहती उससे पहले हि उसकाघऱ आँ गय़ा। उसकेघऱ केँ सामने हि उसकेडैड खड़े मिले। मे समझ गय़ा अबकुछ नहि हौ सकता हैं। KLPD हौ गय़ा। मैंने काजल कि तरफ देखा। उसकी आंखें गुलाबी सि हौ गई थि। मुझे अपनीओर देखता पाकर धीरे-धीरे सें मुस्कुराई। मैंने उसकेडैड कों प्रणाम किया। उनकेसंग उनकेघऱ मे प्रवेश किया। उसके माँ औऱ डैड सें गपशप किया। गरमचाय ब्रेकफास्ट किया औऱ फिन अपनेघऱ चलाआया।
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Update 13.
रात केँ खाने केँ पश्चात थोड़ी देरछत पर्र टहला, सिगरेट फुंका औऱ काजल केँ संग थोड़ी देर पहले हुईँ बातों कों यादकर केँ गरम होनेलगा। रात केँ दसबज चुके थें। सोचा काजल सें मोबाइल पऱ बात करते हें। मे अपने कमरे मे गय़ा औऱ अपना सैमसंग कां स्मार्टफोन लेँ वापसछत पऱ आँ गय़ा। काजल कों मोबाइल लगाया। उसका मोबाइल स्विच ऑफ थां। मन खिन्न सां होँ गय़ा। फिन सोचा क्यूं न् मधुमिता कों मोबाइल करूं। मगर उसका भि मोबाइल स्विच ऑफ मिला। क्याँ बात हैं लड़कियों कि मोबाइल हड़ताल पऱ चली गई हैं क्याँ ? थोड़ी देरबाद कुछ सोचकर श्वेता दि कों मोबाइल लगाया। उन्होंने जल्दी मोबाइल उठाया।
" हैलो ! " श्वेता दि कि मधुर आवाज़ सुनाई दि।
" क्याँ कररही होँ दि ?"
" सोने कि तैयारी होँ रही हूं। "
" इतनी जल्द !"
" जल्द कहां हैं साढ़े दस बजने वाले हें। "
" औऱ जीजू ?"
" बगल मे लेटेहुए हें। क्याँ कोईकाम हैं ?"
मे समझ गय़ा दोनों अगलबगल हि हैं।
" मैयह बताने केँ लिए मोबाइल किया थां कि अजय कि माँ राजी हैं। आप् लोग यहां शिफ्ट कर सकते हें। "
" अच्छा। " - वोँ खुश होँ कर बोलीं -" यह तौ बहोत अच्छी खबर हैं। मे मोबाइल तुम्हारे जीजू कों देरही हूं वोँ तुमसे बात करना चाहते हें। "
" हैलो सागर ! क्याँ तुम्हारे साथी कि माँ मान गई। " जीजू कि आवाज़ आई।
" हां जीजू। उन्हें कोई आपत्ती नहीं हैं बल्कि उन्होंने कहा कि वोँ किराया भि नहि लेंगी। आप् लोग जितना दिन रहना चाहें, खुशी सें रह सकते हें। "
" वाउ ! सच मे अच्छी ख़बर हैं। मेरा भि बहुत आराम हौ जाएगा। यहां सें आने जाने मे एक् तोँ वक़्त बहोत लगता हैं औऱ उपर सें पेट्रोल कां अनाप-शनाप खर्च। "
" हां जीजू। वैसेकब तक यहां शिफ्ट होने कों सोचरहे हें ?"
" आज अप्रैल कां लास्ट दिन हैं औऱ कल सें मई शुरुआत हौ जाएगा तौ अगले हफ्ते मे हि रविवार कां दिन कैसा रहेगा ?"
" ठीक रहेगा। छुट्टी कां दिन रहेगा तौ सामान भि ढंग सें सजा लीजिएगा। "
" ठीक हैं लो अपनी दिदी सें बातकरो। " कहकर जीजा नें मोबाइल श्वेता दि केँ हाथ मे पकड़ा दिया।
" सागर, घऱ मे पिताजी औऱ मां कों बता देना औऱ रविवार केँ दिनघऱ पऱ हि रहना। " श्वेता दि बोलीं।
" हांहां मे घऱ पऱ हि रहूंगा। चिन्ता मतकरो। '
" ठीक हैं तोँ मे मोबाइल रखूं। "
" हांरखो। गुड नाईट। "
" सेमटू यू। " बोलकर श्वेता दि नें मोबाइल काट दिया।
कहां मैसोच रहा थां श्वेता दि सें थोड़ी हंसी मजाक करूंगा कहां.। खैर मे अपने कमरे मे आया औऱ खाट पर्र लेट गय़ा। नींद आँ नहि रही थि। आज अठाईस अप्रैल होँ गय़ा। अमर कों मरे चौबीस दिन होँ गए थें। लगभग लगभग महीना पूरा होने वाला थां मगर अभि तक क़ातिल कां कोई अता-पता नहि थां। औऱ पुलिस भि निकम्मी हाथ पऱ हाथधरे बैठी थि।
सुभहछः बजे नींद खुली। फ्रेश होकरछत पर्र वर्कआउट कियाफिन नीचेहाल मे चला गय़ा। कुछदेर बादसब नें एक् संग ब्रेकफास्ट किया। नाश्ते केँ बादडैड अपनेकाम पऱ निकलगये। माॅम रसोईचली गई औऱ मै औऱ रीतु टीबी देखने लगे। थोड़ी देर माॅमगरम चाय लेकरआई औऱ हम् तीनों गरमचाय पीतेहुए टीबी देखने लगे।
" तुम्हें आज कहीं जानां नहि हैं क्याँ ?" माॅमगरम चाय पीतेहुए बोलीं।
" नहि। आज कहीं जाने कि ख़्वाहिश नहि हैं। आजदिन भरघऱ मे हि रहूंगा। साम कों क्लब जाउंगा। "
" ठीक हैं। कभीकभी बदन कों भि आराम देना चाहिए। इसी बहाने मे भि निश्चिंत घुम आऊंगी। "
" क्यूं ! तुम् कहींजा रही होँ। " मैंने चौंकते हुएकहा।
" हां। बहोत दिनों सें ज्योत्सना अपनेघऱ बुलारही थि। औऱ आज उसकी विवाह कि बाइसवीं सालगिरह हैं तोँ सोचीचली हि जाऊं। "
ज्योत्सना माॅम औऱ चाची कि सहेली थि। वोँ अक्सर हमारे यहांआया करती थि। वोँ भि दिखने मे बहुत खूबसूरत थि।
" चाची भि जायेगी क्याँ ?" मैंने पूछा।
" हां। वोँ यहां पहुंचने हि वाली होगी। "
मैंने रीतु कों तरफ देखते हुएकहा -" आजतु इतनी शान्त शान्त क्यूं हैं ?"
" कुछ नहि भइया। सोचरही थि आज मे भि कालेज न् जाऊं। मगरयह काजल कि बच्ची जबरदस्ती बुलाने पऱ तुली हुईँ हैं। बोलती हैं उसेकोई अर्जेंट काम हैं जबकि मेरा जिस्म थकावट जैसीलग रहा हैं। "
" थकावट ! क्यूं रात मे नींद नहि आई। "
" आई। बराबर आई। फिन भि मनथका हुआ सां लगरहा हैं। "
" तेरी एक्चुअल मे थकावट किसचीज कि हैं ? बदन कि याँ मन कि। "
" यही तोँ समझ नहि आँ रहा हैं। कभी लगता हैं जिस्म थकाहुआ हैं कभी लगता हैं मनथका हुआ हैं। "
" तेरा जिस्म तौ थक सकता नहि क्योंकि तु तौ एक् रत्ती भर कां भि काम करती नहि। "- मे उसे छेड़ते हुए बोला।
" क्यूं नहि काम करती। बहोत सारेकाम करती हूं। सुभहआठ बजे उठती हूं फिन बाथरूम मे जाती हूं। पौन घंटे तक वहीं मेहनत होँ जाती हैं। फिनआधे घंटे मेकअप करने मे। उसकेबाद यहां सें बस सें कालेज खड़े खड़े जाने मे। औऱ वहां कि तौ पुछोमत। पांच सें छः घंटे पढ़ाई करने मे। पढ़ाई मे कितनी मेहनत लगती हैं यह तौ कम सें कम तुम् अच्छे सें जानते होगे। फिन वहां सें वापसघऱ बस मे खड़े खड़ेआने मे। उसकेबाद खानां खाने मे। फिनजरा सि। सिर्फ जरा सि आराम करनाफिन जल्दी साम कों पढ़ने बैठ जानां। उफ.फिन रात मे भोजन करनातब जाकररात कों दसबजे फुर्सत मिलती हैं। सुभहआठ बजे सें लेकररात केँ दसबजे तक मात्र जरा सां मात्र जरा सां आराम मिलता हैं औऱ तुम् बोलते हौ मे मेहनत नहि करती। "
मेरेसमझ मे नहि आया कि मे क्याँ बोलूं। मैंने माॅम कि तरफ देखा वोँ मुस्कराए जारही थि।
" सच मे इनसभी कामों मे बहोत मेहनत लगती हैं। " मैंने कहा।
रीतु मुझे औऱ माॅम कों संबोधित करतेहुए बोलीं -" माॅम मे कालेज सें सीधे काजल केँ घऱचली जाऊंगी औऱ भइया आप् साम केँ क्लास केँ बाद काजल केँ घऱ सें मुझे रिसीव की अपकर लेना। "
" जोँ आज्ञा। " मैंने औऱ माॅम नें एक् संगकहा। औऱ फिन तीनों ठठाकर हंस पड़े।
थोड़ी देरबाद रीतु कालेज चली गई। रीतु केँ जाते हि चाची आँ गई,। उन्होंने नीलेरंग कि साड़ी पहनी थि। औऱ उसी सें मैच करताहुआ ब्लाउज। हाइट पांचफुट तीनइंच कां। जिस्म भरा-भरा। भारी भारी बूब्ज़ शायद ४०.४२डी। होंगे। बाहर् कि ओर निकले हुए नितम्ब। पेट पऱ हल्की चर्बी। तीखे नैन-नक्श। गाल फुले फुले। इनका फिगर बिदया बालन कि याद दिला देता हैं। वैसे हि होंठ।
चाची आकर मेरेबगल मे बैठ गई तोँ माॅम रेडी होनेचली गई।
" आज कालेज नहि गय़ा ?" चाची बोलीं।
" नहि चाची आज नहि गय़ा। आज रेस्ट करने कों जी चाहा तौ घऱ पर्र हि रूक गय़ा। "
" चलो अच्छा हैं। तबतुघऱ कि रखवाली करतब तक हम् भि घुमकर आँ जायेंगे। "
" आप् लोगकब तक आँ जाओगे ?"
" साम कों पांचछः बजे तक आँ जायेंगे। बेचारी ज्योत्सना हमारे यहां बराबर आती हें औऱ हमारी बारीआती हैं तौ हम् कोई नाँ कोई बहाने बनाकर केँ मनाकर देते हें। मगरइस बार नहि गये तोँ पक्का नाराज होँ जायेंगी। "
" नहि नहि चाची आप् लोग कों जरूर जानां चाहिए। "- मे चाची सें मजाक करतेहुए बोला -" वैसे चाची आपकी सहेली ज्योत्सना केँ यहां मर्द भि तोँ बर्थडे पार्टी मे होंगे। "
" हां क्यूं ?"
मे उन्हें सर सें पैर तक निहारते हुएकहा -" आपकोदेख करउनसब कि हालत खस्ता होनी जानी हैं। सारे मर्दों केँ मुंह सें शर्तिया लार टपकनी हि टपकनी हैं। "
चाची मुस्कराते हुए बोलीं -" बदमाश। छेड़रहा हैं मुझे। "
" चाची आपकीशपथ सचबोल रहा हूं। मुझे तोँ आपकी चिंता होनेलगी हैं जरा सम्भाल कर रहिएगा। मे नहि चाहता मेरेहक पर्र कोई दुसरा डाकामार दे। "
" नालायक। तेराहक कहां सें हौ गय़ा। खाली मसखरी करता हैं। औऱ वोँ हक तोँ बहोत पहले तेरे चाचा कों मिल चुका हैं। "
" बड़े हि खुशकिस्मत हें चाचा "- मे अहह भरतेहुए बोला -" अच्छा चाची, चाचा तौ अभि भि आपको छेड़ते होंगे। "
" क्यूं नहि छेड़ना चाहिए। " चाची मुस्कराते हुए बोलि।
" जरूर छेड़नी चाहिए। मगर मुझे लगता नहि हैं कि वोँ अब आपको छेड़ते होंगे। "
" क्यूं ?"
" उनकोडर नहि होगा ? कहां तुम् सतर किलो कि औऱ कहां चाचा पचास किलो कां। चाचा कि हड्डी वडडी नहि टुट जायेंगी। "
" बेशरम कहीं कां। लाजवाज नहि आती हैं तेरे कों। "
" आती हैं चाची मगर क्याँ करूं आपकोदेख करचली जाती हैं। "
" शरमकर शरम। " चाची इसबार अपनी मुस्कान कों छिपाते हुए बोलि।
" आपसे कैसाशरम चाची। चाची आपसे एक् बात कहनी थि। "
" क्याँ ?"
मैंने उन्हें श्वेता दि केँ यहींअमर केँ घऱ मे शिफ्ट होने कि खबर बताई। मुझेलगा यहखबर सुनकर वोँ कोईखास उत्साहित नहि थि।
तभी माॅम आँ गई औऱ वोँ दोनों अपनी सहेली केँ घऱचली गई। मे घऱ मे अकेला होँ गय़ा थां। कुछदेर टेलीविज़न देखकर टाइमपास किया। फिन मधुमिता कों मोबाइल लगाया। अभि तक उसका मोबाइल बंद थां। काजल कों मोबाइल कर नहि सकता थां क्योंकि वोँ अभि कालेज मे होगी। फिन श्वेता दि कों मोबाइल लगाया। अब उनका भि मोबाइल स्विच ऑफआने लगा। मन वितृष्णा सें भर गय़ा। जब इन्हें मोबाइल बंद हि रखना थां तोँ यह मोबाइल खरीदी क्यूं। मे अपने कमरे मे गय़ा औऱ पलंग पऱ सो गय़ा।
चारबजे नींद खुली। फ्रेश हौ कर रसोई मे गय़ा। माॅम खानां बनाकर गयीँ, थि। मैंने खानां खाया। फिन थोडा फेसबुक औऱ व्हाट्स एप देखने लगा। पांच बजने वाले थें जब काजल कां मोबाइल आया। मेरी खुशी कां ठिकाना नहि रहा। मैंने जल्द सें मोबाइल उठाया।
" हैलो !" मे मिश्री सें भरे स्वर मे बोला।
" हैलो भैया !" काजल कि आवाज़ आई।
" हैलो काजल कैसी होँ ?"
" अच्छी हूं भैया। आप् केसे हौ ?"
" मे कहां ठीक हूं। औऱ तुम्हारा मोबाइल रात मे स्वीच ऑफ क्यूं आँ रहा थां ?"
" चार्ज समाप्त हौ गय़ा थां। औऱ आप् नें ऐसा क्यूं बोला ' कहां ठीक हूं '। क्याँ तबियत ठीक नहि हैं। रीतु भि बोलरही थि आज आप् घऱ मे हि रेस्ट कररहे हें। "
" नहि नहि तबीयत बिल्कुल ठीक हैं बस थोडा दिल कां धड़का सां लग गय़ा हैं। "
" धड़का ओह माँ गॉड आपको हार्ट अटैकआया हैं। "
" अरे पगली हार्ट अटैकआता तोँ क्याँ मे तुझसे बातें कररहा होता। वोँ एक्चुअल मे कल तेराआम चुस नहि पाया नं इसलिये थोडा दिल कां धड़का लग गय़ा। कल तोँ पुरा हि KLPD हौ गय़ा थां न्। "
" ओह। तोँ मे क्याँ करती भैया। मेरा तौ पुरामन थां कि आपको अपनेआम चुसवाती मगरडैड वक्त सें पहले हि घऱ आँ गए। औऱ भैया यह KLPD क्याँ होता हैं ?"
" KLPD। अच्छा सुन अभि तु कहां हैं औऱ रीतु क्याँ कररही हैं ?"
" हम् अभि घऱ केँ पीछे अपने बगीचे मे हैं। रीतुआम तोड़रही हैं औऱ मे आपसेबात कररही हूं। "
" तुम् दोनों संग मे हि हौ ?"
" नहि, मे उससे थोड़ी दुरी पर्र हूं। वोँ.वोँ मैंने उससेकहा मुझे मामीजी सें बात करनी थि। "
" वाउ ! तु तौ सच मे होशियार हैं काजल। "
" वोँ तौ हूं भैया। "
" तोँ बता नं तेरे बड़े बड़ेआम मुझेकब चुसने कों मिलेंगे। बड़ी ख़्वाहिश कररही हैं दोस्त। "
" तोँ अभि आँ जाओ नाँ। "
" अभि आँ जाऊं ?"
" हां। औऱ.खोलकर। उतारकर चुसलो। "
" हायरे काजलखोल कर, उतारकर ?"
" आम चुसने केँ लिए खोलोगे नहि, उतारोगे नहि ?"
" हां उतारूंगा तभी न् दोनों हाथों सें दबोच दबोचकर दबाऊंगा औऱ चुसुगा। "
" हां भैया खुब दबोचकर, मसलमसल कर चुसिएगा। मेरा बहोत मनकररहा हैं भैया। "
" मेरा भि बहोत मनकररहा हैं कि तेरी बड़ी बड़ी रसीली आम कों हाथों सें मसलमसल कर चुसु। "
" हां भैया। खुब चुसिएगा। मे भि आपका केला चुसुगी। भैया अपनी केला मुझे चुसावोगे न्। "
" हां बहना जरूर चुसाऊगा। मेरी बेहन अपने भइया कां केला नहि चुसेगी तोँ किसका चुसेगी। औऱ क्याँ खाली केला हि चुसेगी याँ उसकाजुस नहि पियेगी ?"
" ओह मेरे भैया आपके केले कों तब तक चूसुगी जब तक उसकाजुस नाँ पीलूं। " - काजल कि आवाज़ बहुत उत्तेजित होँ गई थि -" अच्छा भैया, मेरे बगीचे मे घांस बहुतउग गय़ा हैं। मे सोचरही थि उसेसाफ करवादूं। आपको क्याँ लगता हैं भैया उसेसाफ करवादूं याँ वैसे हि रहनेदूं। "
मेरा लंड तोँ पहले सें खड़ा थां। मगरअब वोँ जांघिया केँ अन्दर बंद रहने सें दर्द करनेलगा थां। घऱ मे कोई थां नहि। मैंने अपने सारे कपड़े उतारदिए औऱ बिल्कुल नंगा होँ गय़ा।
मे अपने लंड सहलाते हुए बोला -" मुझे तोँ बगीचे.घांस वाला भि अच्छा लगता हैं औऱ बिना घांस वाला भि। तुम्हारी तरफ क्याँ पसन्द हैं ?"
" घांस वाली। " काजल बोलीं।
" घास वाली। "
" हां भैया। '
" तौ घांस रहने हि दो। जानती हौ मेरे बगीचे मे भि बहोत घांस होँ गय़ा हैं। "- मैंने अपनी झांटों कों सहलाते हुएकहा।
" मगर मेरे सें बड़ा नहि होगा भैया। मेरी बहोत बड़ी बड़ी हैं। "
" ऐसा हैं तौ जब मिलेंगे नं तौ तु मेरी घांसचेक कर लेना औऱ मे तेरीचेक कर लुंगा। फिन देखेंगे कि तेरी झांट.साॅरी तेरी घांस बड़ी हैं नाँ मेरी। "
" ठीक हैं भैया। अच्छा भैया मे आपको थोड़ी देरबाद फ़ोन करूं। "
" क्यूं क्याँ हुआ ?"
" मुझे बहोत जोर सें पेशाब लगी हैं। "
" अरे तौ उससे क्याँ हुआ। तु पेशाब करती रहना औऱ हम् बातें भि करते रहेंगे। "
" अच्छा भैया। "
फिन मुझे उसकी आवाज़ सुनाई दि। ' रीतु मे जरा बाथरूम सें आँ रही हूं '। फिन मुझे रीतु कों आवाज़ सुनाई दि ' ठीक हैं जामगर जल्द आनां '।
दोतीन मिनट तक जब उसकी आवाज़ नहि आई तौ मे बोला -" क्याँ हुआ काजल बाथरूम नहि पहुंची क्याँ ?"
" पहुंच गई हूं भैया। सलवार उतार दि हूं अब अपनी पैंटी उताररही हूं। "
मे उसको पैंटी उतारते हुए कि कल्पना करनेलगा औऱ उत्तेजित होतारहा।
" हायरे काजलअब तक मुझे भि पेशाब लग गई हैं। "
" तौ आप् भि करलो। दोनों पेशाब करतेहुए बातें करेंगे। "
" मगर मे बाथरूम मे पुरा नंगा होँ कर पेशाब करता हूं। "
" आप् पुरा नंगा हौ कर पेशाब करते हें ?"
" हां। औऱ तु ?"
" मे तोँ नहि करतीमगर सोचती हूं आजकरलूं। "
" तौ कर नाँ। मे तौ पुरा नंगा होँ भि गय़ा हूं। "
" अरे भैया अभि आप् पुरा नंगे हौ ?"
" हां। तु हुई याँ नहि। "
उसके कपड़ों केँ सरसराहट कि आवाज़ सुनाई दि।
" मे भि हौ गई हूं। " वोँ बोलीं।
" नंगी हौ गई। '
" हां भैया। आपकी बेहनसर सें पांच तक एकदम नंगी हैं। "
" तोँ चल हम् दोनों भइया बेहन एक् संग पेशाब करते हें। "
" हां भैया। मे अबबैठ गई, हूं औऱ आप्। "
" मे भि उसको पकड़कर खड़ा हूं। "
" किसको पकड़कर खड़े होँ भैया ?"
" उसी कों जिससे वोँ निकलता हैं। "
" जिससे पेशाब निकलता हैं भैया ?"
" हां। "
" ठीक हैं आप् उसे पकड़कर खड़े होँ करकरो। औऱ मे बैठकर करती हूं।.हाय मेरा पेशाब निकल गय़ा भैया। "
उसकेयह शब्द सुनकर मे उसकीचुत सें पेशाब निकलते हुए कि कल्पना करनेलगा।
काजल केँ पेशाब करने कि आवाज़ मुझे स्पष्ट सुनाई पड़रही थि। एक् दम किसी सीटी कि आवाज़ कि तरह। मेरा तोँ पेशाब निकलने कां प्रश्न हि पैदा नहि होता थां। खड़े लंड सें कहीं पेशाब होता हैं।
" काजल, यहजोर जोर सें सीटी कि आवाज़ कहां सें आँ रही हैं ?" मैंने अपने लौड़े कों मुठियाते हुएकहा।
" यह मेरे पेशाब करने कि आवाज़ हैं भैया। बड़ीजोर सें मुतवास लगी थि नं इसलिये आवाज़ थोडा जोर सें आँ रही हैं। "
" अहह ! कितनी मधुर आवाज़ आँ रही हैं। "
' मगर आप् केँ मुतने कि आवाज़ नहि आँ रही हैं। "
" हम् लोगों कि तुम् लोगों जैसी आवाज़ नहि आती हैं नं। "
मे लगभग पांचसात मिनट तक उसके पेशाब करने कि आवाज़ सुनता रहा। जब आवाज़ आनीबंद होँ गई तोँ मैंने कहा -" पेशाब करली काजल। "
" नहि भैया अभि भि रूकरूक कर निकलरही हैं। "
" बाप रे ! कितनी देर तक मुतती हैं। पांचसात मिनट हौ गए। "
" क्याँ करूं भैया। आपको बोला थां न् बहोत जोर सें लगी हैं। आप् स्वयं देखते नं तब समझते। अच्छा होँ गय़ा अब। अब उसको पानी सें धोलूं। "
" धोली। "
" धोली भैया मगर वहां बड़ी खुजला रही हैं। "
" खुजला तोँ मेरा भि रहा हैं। एक् कामकर तु अपनी खुजला औऱ मे अपनी खुजलाता हूं। "
मे जोरजोर सें मुठ मारने लगा। मे जानता थां कि वोँ भि अपनीचुत मे ऊंगली कररही होगी।
" खुजला रही हैं काजल ?" मे मुठ मारते हुए बोला।
" हां भैया। बड़ीजोर सें चुनचुना रही हैं। औऱ आप् भैया ?"
" मे भि काजल। मे उसे हथेलियों मे कसकरउपर नीचेकर रहा हूं। "
" हायरे भैया आप् उपर नीचे सें मसलरहे हें, मे भि अपनी ऊंगली कों अन्दर बाहर् कररही हूं। "
" तु ऊंगली कों अन्दर ढुकारही हैं निकाल रही हैं। "
" हां भैया, ऊंगली मलाई सें भीग गई हैं। "
" हायराम काजल, काश तेरी ऊंगली चाट लेता। "
" चाट लेना भइया। ऊंगली हि क्यूं अपनीजीभ उसके अंदर ढुकाकर चाट लेना। "
" क्या बात है काजल बड़ामजा आँ रहा हैं। "
" मुझे भि भैया। ऐसी सुन्दर खुजली तोँ मुझेकभी नहि हुई थि। "
" ओह काजल, अभि तौ अपनी ऊंगली सें खुजली मिटाबाद मे मे अपने मोटे लम्बे केले कों उसमें डालकर खुजली मिटाऊंगा। मेरे केले कों उसमें डलवाएगी नं काजल। "
" डलवाऊंगी भैया। रोजरोज डलवाऊंगी। "
' कहां डलवाएगी काजल ?"
" अपनी घासों सें भरी हुईँ छेद मे। "
दोनों तरफ सें सेक्सी आवाजें निकलरही थि। दोनों घमासान हस्त मैथुन किएजा रहे थें। हमारा यह एक् अलगतरह कां इरोटिक सेक्स गेमचरम पर्र थां।
" अपनी घासों सें भरीछेद मे मेरा लौड़ा। मतलब केला डलवाएगी। "
" हां भैया अपनी घांस सें भरी हुई छेद मे आपका लौड़ा। मतलब केला डलवाऊंगी। "
मे जोरजोर सें मुठ मारते हुए बोला -" मेरे लौड़े कां। मेरे लंड कां। मेरे केले कां रस कहां लेगी ? अपनेछेद केँ भीतर लेगी याँ."
" हायराम मेरे राजा भैया आपके लंड.आपके लौड़े कां रसमै अपनीछेद। अपनी चूत। अपनीचुत मे लुंगी। हाय भैया चोदिए मुझे। अपने लौड़े कों मेरी चूत मे घुसेड़ करजोर जोर सें चोदिए। "
" हां चोदुगा मेरी बेहन। मेरी काजल। तेरी चूत मे अपना मोटा लौड़ा घुसेड़ करजोर जोर सें चोदुगा। तेरीचुत कों भोसड़ा बना दुंगा। अपनीचुत कों भोसड़ा बनवाएगी नं काजल। "
" हां भैया। मेरी कुंवारी चुत कों चोदचोद कर भोसड़ा बना दीजिएगा। अरे भैया मेरा निकलने वाला हैं। अभि आप् क्याँ सोचरहे हें भैया ?"
" मेरा भि निकलने वाला हैं काजल। मे सोचरहा हूं कि मेरा लंड तेरीचुत मे घुसरहा हैं औऱ निकलरहा हैं। "
" ओह भैया मे भि वहीसोच रही हूं। मेरी चूत कों आप् अपने मोटे लौड़े सें चोदरहे हें। अहह। मे गई.मेरा निकलरहा हैं भैया.। "
उसके बोलते हि मेरा पानी भि निकल गय़ा। क्याँ गजब कां इजेकुलेशन हुआ थां। हम् दोनों बहोत देर तक वैसे हि परिस्थिति मे रहे।
Sagar (Full Storyd) – New Episode
RIP Sushant Singh Rajput। ??
Update 14.
माॅम औऱ चाची केँ आने केँ बाद अपने र्पाट वक्त जाॅब करने क्लबचला गय़ा। वहांदो घंटे तक पसीना बहाया फिन काजल केँ घऱ रीतु कों लानेचला गय़ा। वहां रीतु केँ रहते काजल केँ संगकुछ गर्म गर्म होने कि संभावना कम हि थि मगरभले फिल्म न् सही ट्रेलर कि आस तौ थि हि। मगर वोँ भि नहि हुआ। काजल केँ हावभाव पहले कि हि तरह सामान्य थि। मे रीतु कों बाइक पऱ बैठाकर घऱ कि ओरचल दिया।
" आजकल काजल सें बड़ी चैटिंग सैटिंग होती हें " रीतु नें अचानक कहा।
" क्याँ मतलब ?" मे चौंकते हुए बोला।
" काजल सें बड़ी चैटिंग सैटिंग होती हैं। " वोँ बाइक पऱ थोडा आगे कि ओरसरक कर बोलीं।
" किसने कहा ? क्याँ काजल नें कहा ?" मे घबराए हुए बोला।
" हां। "
" क्याँ कहा ?"। मैंने सोचा कहीं उसने सारी बातें रीतु कों कह तौ नहि दि। आखिर वोँ दोनों सहेलियां हें। मगर नहि हमनेजिस तरह कि गन्दी बातें कि थि वोँ सभी वोँ किसी कों भि नहि बोल सकती ।
" यही कि मे सागर सें बातकर रही थि। "
" अरे ! पुरीबात बतायेगी ?"
" हम् दोनों उसके बगीचे मे थें तभी वोँ बाथरूम जाने कों बोलकर निकल गई। औऱ बाथरूम सें पुरेआधे घंटेबाद निकली। तोँ मैंने पूछा इतनीदेर क्याँ कररही थि तोँ वोँ बोलीं कि तेरे भैया सें बातकर रही थि। '
" अच्छा ! ऐसाकहा उसने। "
" हां। "
" फिनतु क्याँ बोलीं ?"
" मे क्याँ बोलती ? मैंने बस इतना हि कहा कि जरा संभलकर कहीं पंगा न् होँ जाए, औऱ कहीं तेरेडैड कों पताचल गय़ा तोँ अपनी रिवॉल्वर लेकर मेरेघऱ नाँ पहूंच जाएं। औऱ संग मे तेरी भि खैरखबर नाँ लें लें। "
" क्याँ ? उसकेडैड केँ पास रिवाल्वर हैं ?" मे चौंक गय़ा।
" हां। "
" कौन सि रिवाल्वर हैं ? तुने देखी हैं ?"
" हां। छोटी सि हैं "
" अच्छा। फिन तेरे बोलने केँ बाद काजल नें क्याँ कहा ?"
" प्रेम किया तौ डरना क्याँ। "
" क्याँ ?"
" बोलीं प्रेम किया तौ डरना क्याँ। "
" मुझे तोँ लगता हैं कि याँ तोँ वोँ तुम को बेवकूफ बनारही हैं याँ तु मुझे बेवकूफ बनारही हैं। "
" यूनो। मुझेकोई बेवकूफ नहि बना सकता। "
" इसका मतलबतु मुझे बेवकूफ बनारही हैं। "
" तुम्हें कौन बेवकूफ बना सकता हैं ?
" अच्छा !। पहलीबार सही बोलीं। "
" जी नहि। जौ पहले सें हि बेवकूफ होँ उसेभला बेवकूफ बनाने कि क्याँ जरूरत हैं। "
" मे बेवकूफ हूं ?"- मे भड़ककर बोला।
" हां, काजल तौ यही कहती हें। "
" काजल नहि, तु बकती हें यह सारी बकवास। यहसभी तेरी हमेशा वाली फितरत हैं। वैसे काजल नें तुझेही यह नहि बताया कि वोँ मुझसे क्याँ क्याँ बातें कररही थि। "
" नहि बताई कलमुंही नें। इसीलिए तोँ मे तुम् सें पुछरही थि। "
" कोईबात हुईँ होगी तोँ न् बताएगी। अब चुपचाप बैठ, हम् घऱ पहुंचने वाले हें। "
थोड़ी देरबाद हम् घऱ पहुंच गए। रात केँ खाने केँ बाद मे अपने कमरे मे चला गय़ा। कपड़े चेंजकिए फिनछत पऱ टहलते हुए सिगरेट पीनेलगा। मुझे न् जाने क्यूं शुरुआत सें लगरहा थां कि अनुष्का औऱ उसके पति कुलभूषण खन्ना केँ बारे मे पुलिस कों नं बताकर बड़ी गलतीकर दि हैं। अगर मैंने पहले हि पुलिस कों उनके बारे मे बता दिया होता तौ वोँ उनकेघऱ जाकर तहकीकात करती औऱ हौ सकता हैं कि मर्डर विपन भि बरामद हौ जातायदि वोँ क़ातिल हुए तोँ। पुलिस केँ पास जानकारी हासिल करने केँ लिए बहोत सारी चीज़ें होती हें। वोँ इन मामलों मे एक्सपर्ट होते हें। उनकेपास पावर होता हैं, टार्चर करके सच्चाई निकलवाने केँ हजारों तरीके होते हें। औऱ अगर कहीं दोनों मियां पत्नि अमेरिका खसकलिए, औऱ बाद मे वोँ गुनाहगार पाएगए तोँ सांप निकलने केँ बाद लकीरें पिटने वालीबात रह जायेगी।
मैंने डिसाइड कर लिया कि मे पुलिस कों उन केँ बारे मे बताऊंगा। मगर मे यह भि जानता थां कि पुलिस मुझे उनके बारे मे इतने दिनों तक जानकारी छुपाने पर्र मेरी बखिया उधेड़ देंगी। खैरअब पुलिस मेरेसंग जोँ भि करें मैंने उनके बारे मे पुलिस कों बताने कां निर्णय कर लिया।
.
सुभह सजधजकर होकर ब्रेकफास्ट कियाफिन माॅमडैड कों सारी बातें बताई। उन्होंने भि मुझे पुलिस केँ पास जाने कि सलाह दि। मे अपनी बाइक लेकर गाजियाबाद निकल गय़ा। थाने मे इंस्पेक्टर विजय कोठारी अपने कक्ष मे मिला। मैंने उसे सारी बातें बताई। सुनते हि वोँ भड़कउठा। भरे थाने मे मेरी बुरीतरह फजीहत कर दि। फिन उसनेकहा वोँ कुलभूषण खन्ना औऱ अनुष्का केँ घऱजारहा हैं औऱ वोँ जब तक वहां सें वापस नं आँ जाएतब तक थाने मे हि उसकी इंतजार करें। मैंने बड़ी मुश्किल सें उसे मनाया कि मे थाने मे नं रूककर अपने जीजा केँ घऱचला जाता हूं औऱ वोँ जब वहां सें वापस आँ जाएतब मे थानेचला आऊंगा।
इंस्पेक्टर अपनेलाव लश्कर केँ संग कुलभूषण खन्ना केँ घऱचला गय़ा औऱ मे जीजू केँ घऱ। अभि दिन केँ ग्यारह हि बजे थें। जब मे जीजू केँ घऱआया तब श्वेता दि रसोई मे थि औऱ दोपहर केँ भोजन बनाने कि तैयारी कररही थि औऱ जीजू अपने कमरे मे टेलीविज़न चालूकिए फोनदेख रहे थें।
मुझे देखकर श्वेता दि बहोत खुश हुई। वोँ साड़ी पहनी हुईँ थि। मैंने श्वेता दि कों हग किया औऱ अपनेहाथ कों पीछे लेँ जाकर उनके बड़े बड़े चूतड़ों कों दबोच लिया। वोँ चिहुंक कर मुझे देखी औऱ फुसफुसाई - " क्याँ करते हौ, तुम्हारे जीजूघऱ मे हें, कहींदेख लिया तौ। "
" नहि देखेंगे। कमरे सें रसोई थोड़ी हि दिखेगा। " - कहकर मैंने अपने होंठ उनके होंठों सें सटा दिया। औऱ उनकेशहद सें भि मीठे लबों कों अपने होंठों मे दबाकर चूसने लगा।
वोँ मुझेपरे धकेलते हुए बोलि -" क्याँ कररहे हौ मरवाओगे क्याँ ? चुपचाप रूम मे जाकर जीजू केँ पास बैठो। "
" क्याँ दोस्त, इतनीदूर सें आया थां कि अपनी बेहन कों प्रेम करूंगा, उसकेगले लगूंगा, मगर तुम् तौ मेरादिल हि तोड़े देती होँ। " मैंने मायूसी शक्ल बनाते हुएकहा।
" नाटकमत करो। जाओ, मे गरमचाय लेकरआती हूं। " - उन्होंने बर्तन उठाते हुएकहा।
" मगर मुझेगरम चाय नहि पिनी हैं। "
" तौ क्याँ पिनी हैं, खानां बनादूं.वैसे चावल औऱ दालबना दिया हैं, सब्जी बनानी बाकी हैं। सलादकाट देती हूं औऱ पापड़ तल देती हूं, क्यूं ठीक रहेगा नां। "
" मगर फिलहाल तौ मुझेदुध पिनी हैं औऱ वोँ भि तुम्हारी चोली केँ अंदर वाली। " - कहकर मैंने उनके एक् मम्मा दबा दिया।
" कमीना कहीं कां। अभि कुछ नहि मिलने वाला हैं। औऱ इस वक़्त तोँ हरगिज नहि। "
" चलोठीक हैं। जैसी आप् कि ख़्वाहिश। " - मे उदास होकर बोला।
औऱ मे जीजू केँ पास जानेलगा तभी उसने मेरी बांह पकड़ी औऱ रसोई केँ कोने मे लें गई,। फिन उसने मेरे चेहरे कों अपने हाथों सें पकड़ा औऱ अपने होंठ मेरे होंठों पऱ रखदिए। धीरे-धीरे धीरे-धीरे चुम्बन विल्ड होनेलगी। दोनों एक् दूसरे केँ होंठों कों बुरीतरह सें चुसने लगे। वोँ अपनीजीभ मेरे मुंह मे डाल दि। मे उसकेजीभ कों चूसने लगा। उसकीलार थूक कों मे गले केँ अन्दर लेनेलगा। वोँ उत्तेजित होकर पैंट केँ ऊपर सें हि मेरे लंड कों दबाने लगी। मे उसकी भारी चूतड़ों कों हाथों सें पकड़कर दबोचने लगा। फिन मैंने अपनीहाथ कों उसके पेटीकोट केँ अन्दर प्रवेश कराने लगा तौ उसने मेरेहाथ कों पकड़ लिया औऱ मुझसे अलग होँ गई।
" आज नहि " - वोँ हांफते हुए बोलि -" मे वहां तौ आँ हि रही हूं चार पांचदिन केँ अंदरफिन कर लेना। "
" क्याँ कर लेना ?" मैंने उसे पकड़ने कि कोशिश कि।
" प्लीज़ भइया, जाओ नां " श्वेता दि नें अनुरोध किया।
" ओके। तुम् खानां बनाओ मे जीजू केँ पास बैठता हूं। " - मैंने प्रेम सें कहा।
उसने सहमति मे सिर हिलाया। मे जीजू केँ पासचला गय़ा औऱ बिस्तर केँ बगल मे दिवाल सें लगी हुई बड़े सोफे पर्र एक् किनारे बैठ गय़ा। थोड़ी बहोत औपचारिक बातों केँ पश्चात उन्होंने मेरेआने कां कारण पूछा तोँ मैंने बहाने बनाया कि मेरे एक् मित्र कां यहां केँ कालेज मे कोईकाम हैं इसलिये उसकेसंग चलाआया। तभी श्वेता दि आई औऱ हमेंगरम चाय सर्व कियाफिन सोफे केँ दुसरे कोने मे बैठ गई। तीनों गरमचाय पीते पीतेबात करनेलगे। मैंने जीजू सें पूछा कि कामकब सें ज्वाइन करने वाले हें तौ उन्होंने कहाअब दिल्ली आकर वहीं सें काम ज्वाइन करेंगे। फिन थोड़ी देरबाद वोँ एक् टीबी सीरियल देखने मे बिजी हौ गये। शायद वोँ उनकी फेवरेट सीरियल थि जोँ दुबारा दिन मे दिखाई जारही थि।
मे गरमचाय पीतेहुए श्वेता दि कि तरफ देखा। वोँ गरमचाय पीतेहुए मुझे हि देखरही थि। मैंने अपनाफोन बाहर् निकाला औऱ श्वेता दि केँ ह्वाट्सएप पर्र मैसेज किया। श्वेता दि नें मेरीतरफ देखा तोँ मैंने इशारे सें उनको अपनाफोन देखने कों कहा। वोँ अपनीफोन उठाई जोँ उनकेबगल मे सोफे पऱ पड़ी हुइ थि।
मेरा मैसेज - वहां सन्डे कों आँ रही हौ नां।
श्वेता दि कां मैसेज - हां, क्यूं ?
मे - जीजूकाम कब सें ज्वाइन करेंगे ?
श्वेता दि - सोमवार सें।
मे - ड्यूटी पर्र निकलेंगे कितेबजे।
श्वेता दि - दसबजे। औऱ वापस लौटेंगे सातबजे।
मे - तब तौ तुम् नौ घंटे अकेले रहोगी। केसे वक़्त काटोगी।
श्वेता दि - क्यूं ? मम्मी कों याँ राहुल कों बुला लुंगी।
मे - राहुल कां विद्यालय रहेगा औऱ चाची रोजरोज थोड़ी न् आयेगी।
श्वेता दि - तौ उर्वशी कों बुला लुंगी। वोँ नहि मिली तौ रीतु याँ तुम्हारी मां कों बुला लुंगी।
मे - सारी दुनिया कों बुला लेनामगर मेरे बारे मे ख्याल तक मत करना।
श्वेता दि - क्यूं नहि ख्याल करूंगी, जब मेरे कपड़े धोने हौ तब खयाल करूंगी, जबघऱ कि साफ-सफाई करनी होगीतब खयाल करूंगी, जब बाजार सें खाने-पीने सब्जी मंगवानी होँ तब खयाल करूंगी।
मे - इतना साराकाम करवाओगी।
श्वेता दि - हां।
मे - औऱ बदले मे मजदुरी मे क्याँ दोगी।
श्वेता दि - तुम्हारे जीजू सें बोलकर पांचसौ रुपए औऱ दिवाली होली केँ दिन कपड़े।
तभी जीजू नें श्वेता दि कों टोका -" किससे चैटकर रही होँ श्वेता। "
श्वेता दि नें संभलते हुएकहा - " उर्वशी हैं। "
" अच्छा। " कहकर उन्होंने फिन अपना ध्यान टेलीविज़न पर्र केन्द्रित कर दिया।
मे - वैसे तुम् पैसे कपड़े नाँ भि देती तौ मे तुम्हारे सारेकाम कर देता।
श्वेता दि - फ्री मे।
मे - बिल्कुल फ्री मे।
श्वेता दि - कुछ भि नहि लेते।
मे - लेता न्.बस तीनों वक्त। नाश्ता, दोपहर का खाना औऱ डिनरकरा देती ।
श्वेता दि - वाउ ! यह भि कोई कहने कि बात हैं। मे पक्का नाश्ता, लञ्च, डिनरकरा दुंगी।
मे - मगरयह तौ पुछलो कि मे नाश्ता लञ्च औऱ डिनर मे क्याँ लुंगा।
श्वेता दि - क्याँ लोगे।
मे - नाश्ता मे तुम्हारे होठों औऱ जीभ कां मधुरस, दोपहर का खाना मे तुम्हारे थानों कां दुध औऱ डिनर मे तुम्हारे जांघों केँ बीच जोँ गहरी सि छेद हैं न्, वहां सें निकलने वाली मलाई।
श्वेता दि नें कामुक नज़रों सें मुझे देखाफिन जीजू कि तरफ देखा जोँ टीबी देखने मे व्यस्त थें, फिन अपनेफोन पऱ मैसेज लिखने लगी।
श्वेता दि - मात्र इतने मे पेटभर जाएगा।
मे - हां.भर तोँ जानां चाहिए। खासतौर पर्र तुम्हारी मलाई सें तोँ पक्का हि भर जाएगा। कहो पिलाओगी न् अपने चिकनी छेद सें निकलने वाली गाढ़ी मलाई कों।
श्वेता दि नें फिन एक् नज़र जीजू कों देखाफिन मैसेज टाइप कि - जरूर पिलाऊंगी अपने डार्लिंग भइया कों। अपनी गाढ़ी मलाई।
मैंने उनकीतरफ देखा वोँ कामुक नज़रों सें मुझेदेख रही थि फिन उन्होंने अपनेजीभ कों होंठों पऱ फिराने लगी।
मे - क्या बात है दिदी। मे तोँ मराजा रहा हूं तेरी सुरंग कि लसदार गाढ़ी मलाई कों पीने केँ लिए.चल नाँ बाथरूम मे.अपनी पेटीकोट कों पकड़कर अपने जांघों सें ऊपरकर खड़ी हौ जानां औऱ मे नीचेबैठ कर तेरी जांघों केँ बीच मे जोँ सुरंग हैं उस पर्र अपना मुंहरख करजीभ सें सारी मलाईचुस चुसकर पी लुंगा।
श्वेता दि - मेरी भि बहोत ख़्वाहिश कररही हैं तुम्हे पिलाने मे। मेरी तोँ अभि सें पैन्टी भीग गई हैं। अगर तुने अभि चुस लिया न् तौ मेरी इतनी मलाई निकलेगी कि तेरापेट क्याँ गला तक भर जाएगा।
तभी जीजू नें बोला -" क्याँ बोलरही हैं उर्वशी। "
श्वेता दि नें संभलते हुएकहा - " वहीसभी लड़कियों वाली बातें। गर्ल्स टाक। उसे मेरी बनाई हुइ मलाई बहोत मनपसंद हैं, वही खिलाने कों बोलरही हैं। "
" ओह ! ठीक हैं उसे दिल्ली, घऱ बुलाना वहींउसे मलाई खिला देना। " - जीजू नें कहा।
" हांवही तोँ उसेबता रही हूं दिल्ली मे जितना ख़्वाहिश हौ खा लेना। " श्वेता दि नें मुझे घुरते हुएकहा।
फिन जीजू नें मुस्कुराते हुए मुझसे कहा -" तुम् कहां बीजी होँ गये हौ, कोई गर्लफ्रेंड हैं क्याँ ?"
" अरे नहि जीजू, मेरीऐसी क़िस्मत कहां। मेरे एक् स्टुडेंट कां मोबाइल हैं। " मैंने मुस्करा कर जबाव दिया।
वोँ फिन टेलीविज़न देखने मे व्यस्त हौ गए। मैंने फिन श्वेता दि कों मैसेज किया।
मे - श्वेता दि, चलो नं बाथरूम मे।
जल्दी श्वेता दि कां मैसेज आया - किसलिए।
मे - तुम्हारी मलाई चाटने।
श्वेता दि - क्या बात है तुम् सें ज़्यादा ख़्वाहिश मेरी होँ रही हैं मगर अभि रिस्क ज़्यादा हैं। दिल्ली मे तुम्हें भरपेट मलाई चटाऊगी। जब कहोगे तब। कहो चाटोगे न् अपनी बेहन कि मलाई।
मे - हां दिदी चाटूंगा। वहां तौ तुम्हें पुरी नंगी करके तुम्हारे दोनों पैरों कों फैलाकर तुम्हारे सीने केँ उपररख कर अपनीजीभ अंदर बाहर् करकर केँ चाटूंगा। ( मैंने श्वेता दि कों जीजू केँ नजरों सें छुपाकर अपने लंड कों पैंट केँ ऊपर सें मसलते हुए दिखाया )
श्वेता दि भि पुरी गर्म होँ गई थि। उन्होंने मैसेज भेजकर मुझे देखा।
श्वेता दि - हां, मेरे बेडरूम मे मेरी पलंग पऱ जहां तुम्हारे जीजू औऱ मे सोते हें उसी पर्र मुझे नंगीकर केँ मेरी जांघों केँ बीच केँ छेद मे अपनीजीभ डालडाल कर चाटना।
मे - हां दिदी.तेरा भइया तेरीछेद केँ अंदर मुंह औऱ जीभ घुसा घुसाकर चाटेगा। तेरीआगे वाली औऱ पिछे वाली दोनों छेदों मे जीभ पेलूंगा।
श्वेता दि - खालीजीभ हि पेलेगा औऱ कुछ नहि पेलेगा।
मे - तुबता न् औऱ क्याँ पेलूंगा।
श्वेता दि - अपना मोटा लौड़ा नहि पेलेगा।
मे - हायराम मेरी दिदी.मेरा मोटा लौड़ा सें पेलवाएगी। मेरे मोटे लंड सें क्याँ पेलवाएगी।
श्वेता दि - अपनीचुत पेलवाऊगी। अपने छोटे भइया सें अपनीचुत चोदवाऊगी। अपनी गांड़ चोदवाऊगी।
जीजू वहीं बैठा टेलीविज़न देखरहा थां औऱ हम् दोनों भइया बेहनउसी केँ संग बैठे एक् दूसरे कों गन्दे गन्दे मैसेज कररहे थें। मेरा लंड तौ बहोत पहले सें हि उफ़ान पर्र थां औऱ अब वोँ किसी भि टाइम बरसात करने केँ लिए रेडी थां। औऱ जौ मुझेसमझ आँ रहा थां कि श्वेता दि भि याँ तोँ चरम पर्र पहुंच चुकी थि याँ पहुंचने वाली थि। मे श्वेता दि कों मैसेज भेजता कि जीजू नें उन्हें लञ्च सर्व करने कों बोल दिया। बहोत मुश्किल सें हम् दोनों अपने कों कन्ट्रोल किए।
खानां पीना होते-होते दोबजगए। फिन हम् तीनों उसीबेड पऱ लेटगए। जीजूबीच मे थां इसलिये औऱ कुछ होने कि संभावना नहि हि थि। हमें आराम करतेहुए एक् घंटा बीता थां कि इंस्पेक्टर कोठारी कां मोबाइल मेरेफोन पर्र आया।
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