Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 15.
जब मे थाने पहुँचा तब मालूम हुआ कि इंस्पेक्टर कोठारी थोड़ी देर पहले किसी दूसरे केस केँ सिलसिले मे बाहर् गय़ा हुआ हैं औऱ मुझे थाने मे हि बैठकर उसका इन्तज़ार करने कों कहा हैं। मे वहीं कुढ़ता, मन मसोसता उसके कक्ष मे उसका इन्तज़ार करनेलगा। लगभगआधे घंटेबाद वोँ आया। उसके चेहरे पऱ थकान कि भाव थि। उसकी बातों सें पताचला कि उसके कुलभूषण खन्ना केँ घऱ केँ विजिट केँ दौरान दोनों मियां पत्नि अपनेघऱ पर्र हि मिले। पुछताछ केँ दौरान अनुष्का नें वारदात वालेदिन जीजू केँ घऱ मौजूद होने कि बात स्वीकार करी। मगर उसनेअजय केँ कत्ल मे स्वयं पऱ लगे इल्जाम कां पुरजोर विरोध किया। उसके जीजू केँ घऱ मौजूद होने कि वजह जीजू केँ संग दोस्ती बताई। कुलभूषण खन्ना नें तोँ इस पुरेकेस सें अपनी अनभिज्ञता जाहिर कि। वोँ साफ मुकर गय़ा कि वोँ किसीअजय याँ किसी राजीव सोलंकी नाम केँ आदमी कों जानता भि हैं। फिरभी कत्ल केँ टाइम वोँ घऱ मे हि थां, इसकाकोई पुख्ता सबूत नहि पेशकर सका। औऱ सबसे सनसनीखेज खबरयह थि कि उनकेपास सें एक् ३६ केलिवर रिवाल्वर कां पाया जानां जोँ लाइसेंसी थि। रिवाल्वर केँ खाने मे सें तीन गोलियां कम थि जिसके बारे मे उसने बताया कि शुटिंग प्रेक्टिस केँ दौरान कहीं गायब हौ गई।
इंस्पेक्टर मेरेउपर बहुत भड़का थां कि वक़्त रहते मैंने उनके बारे मे खबर नहि कि। अगर मैंने टाइम रहतेखबर किया होता औऱ यदिउस रिवाल्वर सें गोलीचली होती तौ रिवाल्वर केँ अंदर पायेगये बारूद केँ कण औऱ उसके गन्ध सें औऱ अजय केँ बदन मे धंसेहुए गोली सें उसका जांच कराया जा सकता थां। मैंने शर्मिंदगी सें अपनी गलती कबूल कि। मेरे कों लास्ट मे ये वार्निंग देकर जाने दिया कि अगर मुझेइस केस सें सम्बंधित कोई भि जानकारी मिले तौ जल्दी उसे ख़बरकरे।
मे वहां सें दिल्ली पैराडाइज क्लब कि ओर रवाना हौ गय़ा क्योंकि टाइम भि वहां पहुंचने कां हौ गय़ा थां।
वहां पहुंचने पऱ मालूम हुआ कि १मई होने केँ कारणआज क्लबबंद हैं। मगर आफिस खुला थां। मे आफिस गय़ा वहां कुलभूषण खन्ना हमेशा कि तरह अपने आरामदायक कुर्सी पऱ बैठाकोई फाइलचेक कररहा थां। मुझे देखते हि उसने अन्दर बुलाया। मे उसके सामने एक् कुर्सी पर्र बैठ गय़ा।
" तोँ आखिर मे तुमने पुलिस केँ सामने अपना मुंहखोल हि दिया। " - उसने अपनेकान कि लौ कों सहलाते हुएकहा।
मे चुपचाप बैठारहा।
" क्यूं कियाऐसा। मैंने तुम्हें पहले भि कहा थां कि मे अनुष्का सें कितना मुहब्बत करता हूं। उसकेसंग कुछ बुरा होँ यह मे बर्दाश्त नहि कर सकता। मैंने तुम्हें यहांजॉब दि, तुम्हें इज्जत दि तोँ बदले मे तुमने इसतरह मेरा शुक्रगुजार अदा किया। " - वोँ अपनेकान कि लौ कों जोरजोर सें खिंचते हुए कठोर स्वर मे बोला।
मे चुपचाप बैठारहा।
" मुझे तुमसे ऐसीआशा नहि थि। मे तुम्हें एक् अक्लमंद युवक समझता थां मगर तुम्.। "
" खन्ना साहब, मैंने वही किया जोँ एक् आम नागरिक कां अपनेदेश केँ संग.देश केँ कानून केँ संग फर्ज होता हैं। मैंने वही किया जौ एक् यार कां एक् मित्र केँ प्रति वफादारी औऱ विश्वास कां होता हैं। औऱ मे आपसे वादा करता हूं कि यहतब तक करता रहूंगा जब तक मेरेयार केँ हत्यारे कों कानून केँ गिरफ्त मे.कानून केँ शिकंजे मे नं लादूं। औऱ हत्यारा आप् कि पत्नि क्याँ अगर मेरा बाप भि होगा तोँ भि करता रहूंगा। " - मैंने भि कठोर औऱ स्पष्ट स्वर मे कहा।
वोँ अपनी छोटी छोटी आंखों सें मुझे एक् टक देखता रहा।
मैंने अपनीबात कों जारी रखतेहुए कहा -" क्याँ आप् नहि चाहते कि क़ातिल कों उसकेकिए कि सजा मिले.क्याँ आपको अपनेदेश केँ विधि विधान सें मतलब नहि हैं.ईश्वर नं करेमगर यदि आपकी पत्नि अगर क़ातिल निकले तौ आपको उसके पहलू मे सोने सें डर नहि लगेगा। आप् सारी जीवन एक् क़ातिल केँ संग गुजारना मनपसंद करेंगे। औऱ यहीबात आप् पऱ भि लागू होता हैं। मे भि कोईपाक पवित्र व्यक्ति नहि हूं। मैंने भि समाज केँ नियमों केँ खिलाफ बर्ताव किया हैं मगर किसी कि जान लेना मेरे उसूल केँ खिलाफ हैं। यदिकोई गुनाहगार हैं तोँ सजा देना परवरदिगार कां काम हैं याँ फिन कानून कां। "
वोँ अपने चेयर पऱ बैठे बैठे कसमसाने लगा। कुछदेर तक चुपरहा फिन अपेक्षाकृत मध्यम स्वर मेंबोला - " मगर पुलिस कां शक तौ मुझ पर्र भि हैं। "
" आपनेखुन किया हैं ?
" नहि। मैंने आज तक एक् मक्खी भि नहि मारी। "
" तब आपको चिंता करने कि क्याँ जरूरत हैं। "
" मगर अनुष्का.?"
" आप् उनके हसबैंड हैं। उनके बारे मे आप् अन्य बाकी लोगों सें ज़्यादा बेहतर जानते होंगे। क्याँ आप् कों लगता हैं कि उन्होंने खून किया हौ सकता हैं। "
" मेरीसमझ मे कुछ नहि आँ रहा हैं। मे उसके बारे मे नहि कह सकता। "
" आप् निश्चित रहिए.अगर वोँ निर्दोष हैं तोँ उन्हें कुछ नहि होगा। औऱ सबसे महत्वपूर्ण बातये हैं कि अभि तक अमर कां न् तोँ आपसे औऱ न् हि आपकी पत्नि सें कोई नाता साबित हुआ हैं। "
वोँ अब पहले सें अधिक शान्त लगरहा थां। उसने अपने स्टाफ कों गरमचाय लाने कां आर्डर दिया।
" खन्ना साहब, अभि थोड़ी देर पहले आप् नें कहा कि आपने मुझे यहांजॉब देकरमुझ पर्र अहसान किया हैं। मुझे इज्जत बख्श कि हैं। इसकेलिए आपको मे एक् बार सें धन्यवाद कहता हूं मगर आप् बुरा न् मानें यहजॉब मे पार्ट वक्तकर रहा हूं.औऱ वोँ भि किसी सिफारिश पऱ नहि बल्कि मेरी काबिलियत केँ बल पऱ मिली हैं। जितनी आमद यहां होती हैं उन सें मेरी गृहस्थी नहि चल सकती.हौ सकता हैं कि अगलेछः महीने केँ अंदर मेरी इंजीनियरिंग कि पढ़ाई काम आँ जाए औऱ फिन मे यहां न् होऊं। औऱ जहां तक इज्जत कि बात हैं तौ इज्जत फोकट मे नहि मिलती हैं बल्कि कमाइ जाती हैं। औऱ इसका सबूत मेरे क्लास केँ यंग लड़के लड़कियां देंगे जिनसे मेरे बारे मे आपने बहुत छानबीन कि हैं।
वोँ हक्का बक्का मुझे देखता रहा। उसने कुर्सी सें उठने कि कोशिश कि तोँ अपने मोटे विशाल कमर केँ कारण कुर्सी कमर सें फंसाए खड़ा होँ गय़ा। उसने हाथों सें कुर्सी कों झटककर अपनेकमर सें निकाला।
" नहि नहि भई.मेरा इरादा तुम्हरा अपमान करने कां नहि थां। आजघऱ मे पुलिस आने केँ कारण मे थोडा असहज महसूस कररहा थां। यदि मेरी बातों सें तुम्हें दुःखआया हौ तौ मुझे माफ़ करना। " - वोँ बनावटी हंसी करतेहुए बोला।
तभी स्टाफ गरमचाय लेँ आया। उसके जाने केँ बाद हम् गरमचाय पीनेलगे। गरमचाय पीने केँ बाद मैंने अपना फेवरेट क्लासिक निकाल करउसे दिया तोँ उसने सहर्श एक् सिगरेट निकाल लिया। मैंने भि अपनी सिगरेट सुलगाई।
" आज पहलीमई केँ कारण यहां छुट्टी हैं इसलिये कोई भि नहि आया हैं मगर मुझेकुछ अर्जेंट काम केँ लिए आनां पड़ा। मगर तुम् आज क्यूं आँ गये ?" - वोँ वापस कुर्सी पर्र बैठ गय़ा।
" मुझे नहि मालूम थां कि आज छूट्टी हैं " - मे कुर्सी सें उठताहुआ बोला -"अच्छा खन्ना साहबअब मुझे इजाजत दीजिए। "
" सुनो, तुम्हारी सेलरी बैंक एकाउंट मे भेज दि गई हैं। चेककर लेना। "
" मगर अभि तोँ मेरा महिना पुरा नहींहुआ हैं। " - मे आश्चर्य करताहुआ बोला।
" यहांसब कि सेलरी महिने कि पहली तारीख कों दे दि जाती हैं। औऱ तुम्हारी ज्वाइनिंग पहली तारीख सें हि शुरुआत कर दि गई हैं। "
" धन्यवाद खन्ना साहब। "
मैंने उसको नमस्ते किया औऱ वहां सें निकल गय़ा। घऱ जाते वक़्त यादआया कि मैंने माॅम कों नाइटी लाने केँ लिए बोला थां तौ मे ए.टी.एम। जाकर रुपया उठाया फिन माॅलचला गय़ा औऱ उनकेलिए दो सुती केँ फुल एड़ियों तक आने वाली नाइटी खरीद लिया। फिनकुछ सोचकर श्वेता दि केँ लिए भि दो नाइटी खरीद लिया। मगर श्वेता दि वाली नाइटी बहुत हाॅट थि। एक् तोँ घुटने तक कि थि जौ सेमी ट्रांसपेरेंट थि औऱ दूसरी बेबीडॉल नाइटी थि जौ जांघ तक हि आती थि औऱ बहुत ज़्यादा ट्रांसपेरेंट थि। इसकी स्ट्रीप बहोत पतली थि। यदिकोई युवती इसेपहन लेँ तौ उसकी अस्सी प्रतिशत छाती न्यूड हौ जानी थि औऱ जांघों सें नीचे कां हिस्सा न्यूड थां हि।
मे वहां सें घऱ निकल हि रहा थां कि रीतु कां मोबाइल आया। उसने बताया संजयजी उर्वशी औऱ अपनी बेहन मधुमिता केँ संगघऱ आएहुए हें। मे हैरान हुआ न् कोई मोबाइल नं कोई मैसेज। मैंने एक् होटल सें कुछ मिठाई, समोसा, भुजिया औऱ कोल्ड ड्रिंक लियाफिन घऱ कि ओर निकल गय़ा।
साम केँ सातबजे थें जब मे घऱ पहुँचा। सबलोग हाॅल मे हि बैठे मिले। बड़े वाले सोफे पऱ डैड, संजयजी औऱ मधुमिता बैठेहुए थें जबकि उर्वशी दि औऱ माॅम सिंगल सोफे पर्र बैठेहुए थें। रीतु एक् अलग कुर्सी पर्र बैठी थि। मैंने होटल सें लाई हुईँ सारी चीजें माॅम कों दे दि। माॅमउसे लेकर रसोईचली गई। फिन मैंने संजयजी कों प्रणाम किया तोँ वोँ सोफे सें उठकरमुझ सें गले मिले। फिन मैंने उर्वशी औऱ मधुमिता कों हग किया औऱ दो मिनट मे आने कों बोलकर अपनेरूम मे चला गय़ा। वहां मैंने खरीदी हुई नाइटी मेरेबैड केँ बगल मे रखी कुर्सी पर्र रख दि फिनहाथ मुंह धोकर निचे हाॅलचला आया।
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Update 15। A.
हाॅल पहुंच करजिस सिंगल सोफे पर्र माॅम बैठी हुई थि, उस पर्र मे बैठ गय़ा। संजयजी डैड केँ पहलू मे बैठे अपनी पत्नि उर्वशी, बेहन मधुमिता औऱ रीतु सें बातों मे मशगूल थें। डैडकोई खबरिया चैनल देखने मे व्यस्त थें। मैंने फिन सें संजयजी कि ओर नजरें फिराई। वोँ हकीकत मे इतना सुन्दर थां - वैसा हि सजाधजा थां - कि फिल्म स्टार जान पड़ता थां।
मन हि मन मे सोचरहा थां, औऱ कुढ़ भि रहा थां, कि कमीना अपने खुबसूरत थोबड़े कि वजह सें हि कितनी औरतों कां मान मर्दन कर चुका होगा। जरूर गिनती करना भि मुहाल होगा। औरतें बलिहार जाती होगीउस पऱ।
औरतें उतनीखुश नहि होती जबकि उन्हें अपनी पसन्द कां मर्द मिलता हैं जितनी वोँ तबखुश होती हैं जबकि उन्हें हर किसी कि पसन्द कां मर्द मिलता हैं। औऱ संजयजी केँ हर किसी कि मनपसंद कां भेद होने मे क्याँ कसर थि।
कभी मर्द कां आकर्षण उसकी मर्दानगी मे होता थां, उसकी मूंछों मे होता थां, आजउस केँ जनानापन मे होता हैं, लड़कियों जैसी लम्बे बाल रखने मे होता हैं। पता नहि आजकल कि लड़कियों केँ मनपसंद ऐसे लड़के क्यूं होते हें ?
वजह जरूर वियाग्रा थां जोँ पुराने जमाने मे नहि होती थि औऱ जोँ किसी कों भि मर्दबना देती थि।
वियाग्रा केँ अलावा मर्दाना ताकत हासिल करने मे जौ आधुनिक तरीके मैंने सुने थें, वोँ थि :
मेंढक कि हडि्डयों कों सुरमे जैसा बारीक पीसकर फांकजाओ।
गधी केँ दूध मे चिमदागड़ कां खून घोलकर पियो।
शेर केँ अंडकोष कां ब्रेसलेट बनवा केँ पहनो।
इतने तरीके तौ मैंने सुनें थें, जौ कि शहद मे बादाम घोंट केँ पीने, दुध मे केसर उबाल केँ पीने, घोंघे खाने जैसे पुरानी तरिको पर्र हावी थें, अभि औऱ भि होंगे जिनकी मुझेखबर नहि थि।
उर्वशी गहरीलाल रंग कि साड़ी पहनी हुईँ थि जिसमें वोँ हमेशा कि तरह हाॅट औऱ सेक्सी दिखरही थि।
रीतु केँ बारे मे कुछ भि कहना अतिश्योक्ति हि होगी। जगमग जगमग, ताजे खिली हुइ कली कि तरह, नेचुरल ब्यूटी।
मधुमिता भि निहायत खुबसूरत थि औऱ मेरी पसन्द कि हरचीज उसमेथोक मे थि। जैसे कि लम्बा हाइट, छरहरा जिस्म। तनी हुई सुडौल भरपूर छातियां जौ पुरीतरह सें ढकी होने पऱ भि नुमायां जान पड़ती थि। करारी कमर, भारी नितम्ब। लम्बे सुडौल गोरे चिट्टे हाथपैर, खुबसूरत नयन नक्श, लम्बे रेशमी बाल।
एण्डवाट नाट !
वोँ एक् वीशेप खुलेगले कि स्कीवी औऱ खुली छतरी जैसी स्कर्ट पहने थि। स्कर्ट कि बेल्ट बहोत नीचे थि औऱ स्कीवी उसके असाधारण रूप सें उन्नत वक्ष कि वजह सें ऊंचीउठी हुइ थि। औऱ यूं उसका सुडौल, जाफरान मिले मक्खन कि रंगत कां पेटकम सें कमदसइंच नंगा थां। स्कीवी कां वी इतना गहरा थां कि जरा सि कोशिश सें गिरहवान मे बहोत दूर तक झांका जा सकता थां।
इन लड़कियों कों देख्ना नयनसुख अभिलाषियों केँ लिए तोँ लाटरी निकलने जैसा थां, कोईभोग भि लगा पाया होँ तोँ उसकी तकदीर मर्दों केँ लिए काबिलेरश्क थि।
" कहां खोगए। "
" सारी " - मे हड़बड़ा कर बोला। मैंने देखा संजयजी मेरीओर चेहरा किए मुस्करा रहे थें।
" कहीं नहि। क्याँ बातें होँ रही हैं ?" - मैंने मुस्करा करकहा।
" बातें मे कहां कररहा हूं भइया। बातें तौ यह औरतें कररही हैं, मे तौ केवल इनकीहां मे हां औऱ नाँ मे नां मिलारहा हूं। "- उन्होंने हंसते हुएकहा।
" हां भइया आप् तोँ केवल पंचायती कररहे हौ। बातें कहां कररहे होँ। "- मधुमिता नें अपनी आंखें तरेरते हुएकहा।
तभी माॅम ब्रेकफास्ट वगैरह लेँ कर आँ गई। माॅम नें ब्रेकफास्ट लगाते हुएकहा -" आप् लोग खानां खाकर हि जानां। "
" अरे नहि आन्टी, आपको कष्ट करने कि जरूरत नहि हैं। इतना हैवी ब्रेकफास्ट केँ बाद इतनी जल्द खानां थोड़ी हि खाया जाएगा.। "- संजयजी नें माॅम कों कहा।
" नहि नहि। मे कुछ नहि सुनने वाली हूं, आप् लोग पहलीबार हमारे यहांआए हुए हें खानां तोँ खानां हि पड़ेगा। " माॅम नें जोर देकरकहा।
" आन्टी अभि वक्त बहोत ज़्यादा होँ गय़ा हैं। मे प्रोमिस करती हूं अगलीबार हम् जरूर भोजन करके हि जाएंगेे। "- उर्वशी नें माॅम कों समझाते हुएकहा।
" अब जैसी तुम्हारी ख़्वाहिश बेटा। मगरयाद रखना अगलीबार बिनाखाए नहि जाने दुंगी। "
फिन ब्रेकफास्ट कां कार्यक्रम चलनेलगा। इसीबीच हमारी हल्की फुल्की बातें भि होतीरही। मे मधुमिता सें बातें करना चाहता थां मगर यहां सम्भव दिख नहि रहा थां।
थोड़ी देरबाद उर्वशी नें माॅम सें कहा -" आन्टी मे चाहती हूं कि जब यहांआई हुई हि हूं तोँ क्यूं नं श्वेता केँ माॅमडैड सें भि मिललूं। अगर श्वेता कों मालूम हुआ कि हम् यहांआकर उसकेघऱ नहि गये तोँ उसे बुरालग सकता हैं। "
" हांहां क्यूं नहि। जरूर होँ आओ। "- माॅम नें कहा।
कुछ वक़्त बाद रीतु उर्वशी औऱ संजयजी औऱ मधुमिता कों लेकर चाचा केँ घऱचली गई। माॅम जुठे बर्तन लेकर रसोईचली गई। डैड तोँ अपने हि कार्यक्रम टीबी देखने मे व्यस्त थि औऱ मे उपरछत पर्र चला गय़ा।
छत पर्र क्लासिक कां सिगरेट सुलगाया औऱ उन हसीन तरीन औरतों केँ बारे मे सोचने लगा जिनके संग हमबिस्तर होने कां फिन मुझे गाहे-बगाहे हासिल होतारहा थां।
आप् सोचते होंगे कि मे हमेशा औरतों केँ बारे मे हि सोचता रहता हूं। इस इल्जाम केँ जवाब मे आपके खादिम कि अर्ज हैं कि यह एक् गलत औऱ बेजा इल्जाम हैं कि मे हमेशा औरतों केँ बारे मे सोचता हूं - हमेशा तोँ मे सोचता हि नहि - अलबत्ता इतना तौ शर्तिया कबूल करता हूं कि जब सोचता हूं तोँ औरतों केँ बारे मे सोचता हूं।
औऱ क्याँ मे अकेला सोचता हूं।
मुझे उर्वशी औऱ श्वेता दि केँ अलावा सात हसीनाओं कां अभिसार सुख प्राप्त हुआ हैं। जिनमें एक् मे तौ मेरा मरहूम साथीअजय भि शामिल थां। अजय कि औऱ मेरीसोच करीब करीब-करीब एक् समान हि थि। हमने किसी भि महिला केँ संगकभी जबरन नहि किया औऱ नां हि कभी किसी कोठे पऱ गये। जिन औरतों केँ संग भि हमबिस्तर हुआ वोँ औरतों केँ राजी खुशी, उनकी ख़्वाहिश केँ अनुसार हुआ। बलात्कार औऱ औरतों केँ प्रति हिंसा कां मे सख्त विरोधी थां। सेक्स केँ मामले मे मेरायही सोचरहा कि मियां पत्नि राजी तौ क्याँ करेगा काजी।
मेरीसोच मधुमिता कि आवाज़ सुनकर भंग हुइ।
" हल्लो। "
" हल्लो " - मे मुस्कुराता हुआ बोला -" वैलकम ! प्लीज़। "
" थैंकयू "- अपने मोतियों जैसे खुबसूरत दांत चमकाती वोँ बोलि।
" क्याँ बात हैं ! बड़ी जल्द आँ गए। "
" सब नहि मात्र मे आँ गई। मुझे वहां बोरियत लगरही थि। यहांआई तौ तुम्हारी माँ नें कहाछत पऱ होँ, सोचली आई। "
" बहोत अच्छी कि। "- मैंने चेहरे पर्र गोल्डन जुबली मुस्कराहट लातेहुए कहा -" मैंने तुम्हें कईबार मोबाइल लगाया थां मगरहर बारनो रिचेबल बताता रहा। कहीं नम्बर तोँ नहि चेंजकर ली। "
" नहि तोँ। सेम नम्बर हैं। अभि लगाकर देखो। "
मैंने उसको मोबाइल लगाया फिन सें वहीसेम नो रिचेबल। वोँ मेरे लगभगआई औऱ अपनीफोन नंबरचेक करनेलगी। एक् नम्बर गलत थां। बीच केँ नंबरों मे एक् मे सात कि स्थान आठ टाइप होँ गय़ा थां। मैंने नम्बर करेक्ट किया।
उसके इतने लगभगआने सें उसकीबदन सें आती हुई खुशबू मुझे मदहोश करनेलगी। मैंने उसकीतरफ देखा वोँ मुस्कराते हुए बोलीं -" तुमने नम्बर हि रोंगलिख लिया थां। "
" हां। "- मैंने मुस्करा करकहा -" वैसेबात क्याँ हैं ! आज हजारवाट केँ वाल्व कि तरहदमक रही होँ। "
" ठीक पहचाना। आज मे बहोत खुश हूं। "
" वोँ तोँ दिखरहा हैं। क्याँ बात हैं विवाह कररही हैैं। "
" नो दोस्त। "
" तोँ हनीमून वजह होगा इतनी खुशी कां। "
" हनीमून ! वोँ तौ विवाह केँ बाद होता हैं। नो। "
" नो। कभीऐसा दकियानूसी रिवाज होता थां, अब नहि होता। अब हनीमून विवाह कां मोहताज नहि रहा। वोँ कभी भि हौ सकता हैं। बसहनी कों कबूल होना चाहिए। "
" क्याँ नानसेंस बोलरहे होँ। "
" इट्सए मैटरआफ ओपिनियन हनी। "
" यूआरए सनऑफए विच। "
" दि ओरीजनल, हनी। वैरी फर्स्ट आफ दि काइंड। इसजगत प्रसिद्ध विच नें जितने सन पैदाकिए, उनमें सें अव्वल। "
" मैंने क्याँ तुम्हरा तारीफ किया ?"
" नहि किया तोँ समझिए बिनाकिए हौ गय़ा। व्यक्ति कां बच्चा होँ तोँ अव्वल होँ, वरना न् हौ। "
वोँ कुछ क्षण खामोश रही औऱ चेहरे पर्र उलझन केँ भावलिए अपलक मुझे देखती रही। फिन चित्ताकर्षक ढंग सें मुस्कुराई। अभि वोँ कुछ बोलती कि हाॅल सें उर्वशी कि आवाज़ आई। हम् दोनों नीचेहाल चलेआए। वोँ लोग चाचा केँ घऱ सें लौटआए थें। जाते जाते संजयजी नें मुझे औऱ मेरी फेमिली कों अपनेघऱ आने कां निमंत्रण दिया। उन्होंने अपनेउस आफिस कां भि ठिकाना दिया जहां वोँ अक्सर पाए जाते हें।
उनलोगो केँ जाने केँ बाद हमनेकुछ वक्त टीबी देखने मे बिताया फिनरात केँ डीनर केँ पश्चात अपने अपने कमरे मे चलेगए। मै अपने कमरे मे प्रवेश कर अपने पहनेहुए कपड़े चेंज किया औऱ एक् ढीला सां पजामा औऱ बनियान पहनकर सिगरेट सुलगाने लगा। तभी मेरीनजर मेरेबैड केँ बगल मे पड़ी हुइ कुर्सी पर्र पड़ी। वहां मैंने जोँ नाइटी माॅम औऱ श्वेता दि केँ लिए खरीदकर रखी थि, गायब थि।
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udi baba। yeh nighty कौन le uda। kahin yeh chipkali(Ritu) ne too हाथ नहीं saaf krr दिया। और jaisa chitran bhay aapne Madhumita kaa किया h उसके pashchiyaat too मेरे man-mandir में bi kolahal sa mach गया h.
और yeh ramniya lubaavdaar lambe baalo wali manmohak soorat के adhipati Sanjay ji से too अपना launda bi insecure feel krr raha h। kahin Sanjay ji की personality से prabhavit hu krr Versha-Ritu bi behak na jaaye। haan haan। dhyan rakhna in dono mummy-betiyo kaa lekhak mahoday ji.
bus हम komal hirdyak paathako के manobhavnao की kadr karte hue addayatan ko pesh karne में shigrrta baratne kaa mehnat krna mahanubahv।
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thanks bro. nahee bhay.Rahul kaa 6 years kaa hnaa kahani kaa demand thaa , uskah koy bi sex say lena dena nahee thaa halanki rules regulation k karan ulta palta hu gyaa.Waise Rahul kaa es mai koy bi sexual encounter nahee h.
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