Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 16.
मे हलकान परेशान अपनेरूम कि सारी जगहें छान मारामगर नाइटी वहां होती तौ नं मिलती। मुझेडर केवलउन दो नाइटियो कां थां जौ मैंने श्वेता दि केँ लिए खरीदी थि। औऱ वोँ भि इसलिये कि वोँ कुछहट कर थि। कौन लें गय़ा ? माॅम नें याँ रीतु नें ? मेरेलिए दोनों मे जोँ भि लेँ जाए प्रोब्लम हि थि। भले हि मेरी फेंटेसी कि वोँ दोनों प्रथम अहम हिस्सा थि मगर रिश्तो केँ कारणआगे बढ़ने कि हिम्मत मेरे मे नहि थि। मेरे मे क्याँ किसी मे भि नहि हौ सकती। न् जाने मेरे बारे मे क्याँ सोचेगी। ख़ैर जौ होना थां वोँ तौ हौ गय़ा। रात केँ ग्यारह बजगए थें मे अब उन्हें उठाकर यह तौ नहि पुछ सकता थां कि नाइटी किस नें ली हैं। यही टेंशन पाले मे खाट पर्र लेट गय़ा औऱ निंद केँ हवाले हौ गय़ा।
सुभहजब मे नौबजे केँ आसपास नीचेहाल मे आयातब रीतु कों वहीं सोफे पऱ बैठेहुए पाया। शायद माॅम रसोई मे थि औऱ डैड अपने कमरे मे आफिस केँ लिए रेडी होतेरहे होंगे। मैंने रीतु सें पूछा क्याँ उसने मेरे कमरे मे सें कोई कपड़े कां पैकेट उठाया हैं तोँ उसने नाँ मे सर हिलाया। फिन मैंने पूछा क्याँ माॅमकल मेरे कमरे मे गई, थि तौ उसनेकहा जब हम् संजयजी औऱ उनके फेमिली कों बाहर् बिदा करने निकले थें तब माँ उपरछत पर्र सुखने केँ लिएरखी हुईँ कपड़े उतारने गई थि।
मे समझ गय़ा नाइटी माॅम केँ हाथलग गयीँ, हैं। मेरादिल जोर सें लरजा। नं जाने वोँ क्याँ रियेक्ट करेंगी। कहींसब केँ सामने मेरी इज्जत कां फलूदा तोँ नहि बना देगी। याँ मेरी उम्र कां लिहाज करकेचुप रहेंगी। याँ.
.याँ मेरी सिक्रेट फेंटेसी हकीकत मे बदलने कि एक् कदम औऱ आगे अग्रसर होंगी।
डैड केँ आफिस जाने कां वक्त हौ गय़ा थां। माॅम रसोई सें ब्रेकफास्ट लेकरआई औऱ टेबल पऱ रख दि। मे चुपके सें उनकीतरफ देखरहा थां मगर उनका ध्यान मेरीतरफ नहि थां। डैड केँ आने केँ बादसभी नें ब्रेकफास्ट किया। फिनडैड अपने आफिसचले गए। नाश्ते केँ दौरान कोईबात हुईँ नहि इसलिये माॅम कां रवैया समझ मे नहि आया। रीतु भि आम दिनों केँ वनस्पति कुछ शान्त हि थि। मैंने जल्द सें ब्रेकफास्ट ख़त्म किया औऱ अपनेरूम मे चला गय़ा।
मुझेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि मे क्याँ करूं। माॅम सें बात तोँ करनी हि होगी। कोई दूसरा होता तौ मुझेबात कर नें मे झिझक महसूस नहि होतीमगर यहां तोँ.। मुझे उन्हे न् तोँ मोबाइल सें काॅल करके पुछने कि हिम्मत हौ रही थि नाँ हि ह्वाट्सएप केँ द्वारा मैसेज भेजकर कि। मैंने घड़ी मे टाईम देखादस सें उपरबज गए थें। यानी रीतु कालेज चली गई होगी। मैंने कुछ सोचा औऱ फिन माॅम सें बात करने कां निश्चय लिए हाॅलचला गय़ा। माॅम हाॅल मे नहि थि। मे उनके कमरे मे गय़ा, वोँ वहां भि नहि थि। जरूर रसोई मे होंगी। मे रसोई केँ दरवाजे पर्र पहुँचा, माॅम दरवाजे कि तरफपीठ किए रसोई कि ग्रेनाइट पत्थर कि बनी सेल्फ कों साफकर रही थि। वोँ ग्रेकलर कि साड़ी पहनी हुईँ थि औऱ ब्लाऊज़ भि फुल बांह वाली औऱ साड़ी कां मेचिंग थां। साड़ी केँ पल्लू कों अपनेकमर मे फंसाकर रखी थि। जिससे कमर कां कुछ हिस्सा खुलाहुआ थां। वोँ काम करतेहुए भि बहुत अच्छी दिखरही थि। भले हि वोँ 43 साल कि हौ गई हौ मगर उनकेबदन केँ रख रखाव, बदन कां मेनटेनेंस औऱ शारीरिक श्रम उन्हें 34.35 सें अधिकशो नहि दिखाता थां। परफेक्ट हाईट, माशल गदराया हुआबदन, भारी नितम्ब, हल्की मोटी भुजाएं, मोटी जांघें, पेट पर्र थोड़ी चर्बी ( जोँ मेच्योर औरतों कों औऱ भि नाकाबिले तारीख सेक्सी बनाते हें ), बड़े बड़े गिरिवर कि चोटियों कि तरह वक्ष, तीखे नैन-नक्श, गुलाबी रंगतलिए मुलायम होंठ, कमर सें भि नीचेआते स्याह कालेबाल किसी भि मर्द कों हाइपनोटाइजम कर सकते थें। पता नहि केसेडैड केँ भाग्य मे वोँ मिल गयीँ, जबकि डैड उनके मुकाबले कहीं पऱ भि नहि थें। पुराने जमाने मे शादियां अधिकतर अरेंज मैरिज औऱ लड़की औऱ लड़के देखे होती थि। डैडसच मे बहोत खुशनसीब थें।
मे रसोई मे दाखिल हुआ औऱ पीछे सें माॅम केँ गले मे बाहें कां हारडाल अपने चेहरे कों उनकी कन्धों पऱ रख दिया।
" क्याँ कररही हौ माॅम। " मैंने चापलूसी भरे स्वर मे कहा।
" दिख नहि रहा हैं क्याँ कररही हूं। " माॅम बिना मुड़े स्लैब कों साफ करतेहुए बोलि।
" सच मे आप् कों बहोत काम करना पड़ता हैं, उपर सें इतनी गर्मी क्यूं नहि एक् दाईरख लेती होँ। "
" दाई सें तोँ अच्छा हैं कि क्यूं नं बहु हि लें आऊं। "
" बहु ! मतलब मेरी आजादी छीनना चाहती हौ। मेरे पैरों मे बेड़ियां डालना चाहती हौ। "
" बहुआने सें तेरी आजादी छीन जाएगी। "
" औऱ नहि तौ क्याँ। अभि तोँ मेरे हंसने खाने, मौज मस्ती केँ दिन हें। अभि थोड़ी नं किसी बंधन मे बंधना हैं। "
" तेरेडैड कि विवाह तुम् सें भि कम उम्र मे होँ गई थि। "
" वोँ जमाना अलग थां माॅम। इस जमाने मे जब तक लड़का अपने पैरों पऱ खड़ा नहि हौ जाता हैं तब तक वोँ इस लफड़े सें दूर हि रहता हैं। "
" मे क्याँ कहूं, आज केँ जमाने मे विवाह ब्याह जबरदस्ती भि तोँ नहि कि जा सकती। वैसे तोँ मे भि यह मानती हूं कि जब तक लड़का औऱ लड़की अपने पैरों पर्र खड़े न् हौ जाए औऱ अपने खर्चों कां बोझ उठाने लायक़ न् हौ जाएतब तक विवाह नहि करनी चाहिए। भले हि लड़का जिन्दगी भर कुंवारा रहे। "
" क्याँ बोलरही होँ माॅम ? चार पांचसाल कि बातअलग हैं जिन्दगी भर मे कुंवारा नहि रहने वाला, भले हि मे कमाऊं याँ नं कमाऊं। मे कहे देता हूं। " - मैंने मजाक करतेहुए कहा।
" इसीलिए तौ बोलरही थि कि विवाह कर लेँ। "- माॅम नें हंसते हुएकहा।
" कर लेंगे माॅम.सही वक़्त पऱ वोँ भि कर लेंगे। "
मे माॅम सें नाईटी वालीबात कहना चाहता थां मगरसमझ नहि आँ रहा थां कि केसे कहूं। अभि थोडा मुडठीक हैं तौ पुछ हि लेताहुं। थोडा झिझकते हुए मे माॅम कि कन्धों पर्र अपने चेहरे कि हल्के सें दबाते हुएकहा -
" माॅम व.वोँ। वोँ नाइटी."
" अच्छी हैं। "- माॅम वैसे हि काम करती हुईँ बोलीं।
मे चौंका। अच्छी हैं कां मतलब क्याँ हुआ। उनके कहने कां तात्पर्य क्याँ हैं कि वोँ दो अधनंगी औऱ उनमें भि एक् करीब करीब नंगी दिखने वाली नाइटी भि अच्छी हैं।
" आपने देखी। "- मैंने बड़ी मुश्किल सें अपने स्वर कों संतुलित रखतेहुए कहा।
" हां। "
मे उनसेअलग हौ कर उनकेबगल मे खड़ा हौ गय़ा। मे क्याँ बोलूं कुछसमझ नहि आँ रहा थां।
" माॅम। " मैंने धीरे-धीरे सें कहा।
" हूं !"
" माॅम ! वोँ नाइटी.म.मेरा मतलब."
" क्याँ हुआकहो नां। "
मैंने हिम्मत करकेकहा -" माॅम उनमें सें दो नाइटी दुसरे कि हैं। "
" वोँ तौ मे भि समझरही हूं। वोँ नाइटी तु मेरेलिए तोँ नहि लाया हौ सकता हैं। कौन हैं ?"
" क्याँ मतलब ?"
" कौन हैं वोँ जिसके लिए वोँ लाया हैं। "
मे क्याँ बोलूं। श्वेता दि कां नाम तौ हरगिज नहि लेँ सकता थां। किसका नामलूं।
" माॅम वोँ मेरा नहि हैं। मेरे एक् साथी कां हैं। "- मैंने झुठ बोला।
" मित्र मतलब गर्लफ्रेंड। "
" नो माॅम। मेरे कालेज केँ एक् मेल फ्रेंड कां हैं। उसने अपनी गर्लफ्रेंड कों तोहफा देने केँ लिए मुझे लाने कों कहा थां। "
" झुठमत कहो। तुम्हारा अमर केँ अलावा कोई दूसरा जिगरी मेल मित्र थां हि नहि, यह मुझे अच्छी तरह सें पता हैं। हांअगर तुम् नहि बताना चाहते तौ बातअलग हैं। "
मे कुछदेर असमंजस कि स्थिति मे खड़ारहा। सोचरहा थां क्याँ बोलूं क्याँ नं बोलूं। फिन मैंने कुछ डिसाइड किया।
" साॅरी साॅरी माॅम। वोँ मे आपको क्याँ बोलूं एक्चुअल मे वोँ। वोँ मेरी एक् ग। गर्लफ्रेंड कां हैं। " मैंने हिम्मत करकेकहा।
" कौन हैं वोँ। क्याँ मे जानती हूं उसे। "
माॅम नें नाँ तौ नाइटी पऱ कोई नाराजगी जताई औऱ नाँ हि गर्लफ्रेंड पऱ। इसलिये मेरी हिम्मत बढ़ी।
" हां। " - मैंने कहा।
" मे जानती हूं ?" - माॅमइस बार मेरीतरफ पलटते हुए आश्चर्य सें बोलीं।
" हां। "- मैंने थोडा शरमाते हुएकहा।
" कौन हैं। "
" नहि। मे नहि बता सकता। "
" क्यूं नहि बता सकते। "
" क्याँ बताऊं ? वोँ। वोँ फ्रेंडशिप बस मात्र समयपास हैं। "
" ओह ! मतलबकोई लवशव कां चक्कर नहि हैं। बस केवल दिलजोई हैं। "
" हूं। "
उन्होंने मुझेकुछ देर तक एक् टक देखाफिन कहा -" वोँ जोँ तुम्हारी गर्लफ्रेंड हैं क्याँ वोँ भि यह जानती हैं कि यहसभी कोईलव शव कां मैटर नहि बल्कि मौज मस्ती कां मामला हैं। "
" हूं। "
माॅम नें इसबार कुछ नहि बोला। वोँ रसोई मे बनीवास वेसिन चली गई औऱ अपनी हाथों कों धोनेलगी। हाथ धोने केँ बाद दरवाजे पऱ टंगी एक् तौलिये सें अपनेहाथ कों पोंछने लगी। वोँ अपनेहाथ पोछते हुए बोलीं -" कौन हैं वोँ लड़की। "
" आप् जानकर क्याँ करोगी ? औऱ अगर मैंने आप् कों उसके बारे मे बता दिया औऱ उसेपता चला कि मैंने आपको उसके बारे मे बता दिया हैं तोँ आपकेसंग संग वोँ भि नाराज होगी। "
" उसे केसेपता चलेगा ? हांयदि तुम् स्वयं हि उसेबता दोगे तोँ बातअलग हैं। "
" मे नहि बताऊंगा। मगर आप् उस कां नाम सुनकर भड़कउठी तोँ ?"
" मे तुम्हें जोर तौ दे सकती नहि। आखिर तुम् एक् जवान औऱ मेच्योर लड़के होँ। औऱ हमारे यहांकहा जाता हैं कि जब लड़के कां हाइट बाप केँ कन्धे तक औऱ बाप कां जुता बेटे कों आनेलगे तौ बेटा अपने बाप कां साथी औऱ मम्मी कां सहारा कि तरह कां हौ जाता हैं। यदि तुम्हें लगता हैं कि तुम् मुझसे शेयरकर सकते हौ तौ मुझेकोई आपत्ती नहीं हैं। "
" ओके। मे आपसेझूठ नहि बोलूंगा। मगर सबसे पहले तौ आप् प्रोमिस करो कि यहबात डैड कों नहि बताएगी। औऱ दूसरी आप् नाराज़ नहि होंगी। "
" नहि बताऊंगी तुम्हारे डैड कों। अब बताओ। "
" आप् नाराज़ भि नहि होगी। "
" ओके। नाराज नहि हूंगी। "
" यह मे आपको रूबरू नहि बल्कि आपके ह्वाट्सएप नम्बर पऱ बताऊंगा। आप् केँ ह्वाट्सएप नम्बर पर्र उस कां नामभेज दुंगा। "
माॅमकुछ नहि बोलि। वोँ मुझे अपलक देखती रही।
" ओके। "- मैंने माॅम सें कहा।
" ओके। "- माॅम सहमति मे अपनीसर हिलाई।
मैंने अपने पैंट केँ पाकेट सें पन्द्रह हजार रुपए निकाल कर माॅम कों दे दियाफिन बोला -" माॅमकल मुझे पहली सेलरी मिली थि। संजयजी औऱ उनके परिवार केँ आने सें कल मे दे नहि पाया थां। "
" तेरा भि तौ खर्चा हैं नाँ, अपनेपास रख अपनी खर्चा पानी निकालना इन पैसों सें। मेरेपास तौ तेरेडैड केँ दिएहुए पैसे रहते हि हें। "
" मेरा इतना भि खर्चा नहि हैं माॅम। वैसे भि शुरुआत सें खर्चों कां रुपया तोँ आप् हि देती होँ। मुझेजब जरूरत होगीतब मांग लुंगा। औऱ वैसे भि बेटे केँ हरचीज पऱ मम्मी कां अधिकार सबसे ज्यादा होता हैं। रूपया रुपया आप् सें बड़ीचीज थोड़ी न् हैं। "
" कभीकभी तोँ बड़ी सयानी सयानी बातें करता हैं, बहुत अच्छी अच्छी औऱ कभीकुछ विचित्र तरह कि हरकतें करता हैं। मुझे तोँ तु एक् पहेली जैसा लगता हैं जिसे मे भि समझ नां पाऊं। "
" मे तोँ एक् खुली पुस्तक हूं जिसेहर कोई आसानी सें पढ़ सकता हैं। एक् दम सिम्पल। "
" हांहां वोँ तौ नाइटी देखकर हि समझ मे आँ रहा हैं। " माॅम नें मुस्कुराते हुएकहा।
" देखोअगर छेड़ोगी तौ अपून तुम्हें कुछ नहि बताने वाला। "- मैझुठ मुठ कां क्रोध करतेहुए बोला ।
" अच्छा अच्छा अबकुछ नहि बोलूंगी। " वोँ पूर्ववत मुस्कराते हुए बोलीं।
" आज कालेज नहि जानां हैं क्याँ ?"
" जानां हैं न्। ओके मे निकलता हूं माॅम। " कहकर मैंने माॅम कों हग किया। वोँ भि अपनी बाहों सें मुझे थोड़ी कसती हुईँ लिपट गई।
फिन वहां सें मे कालेज केँ लिए निकल गय़ा। कालेज पहुंचने पर्र मालूम हुआ कि आजकुछ खास पढ़ई नहि हैं तोँ मे वापसघऱ लौट पड़ा। मे घऱ पहुंचने हि वाला थां कि यादआया औऱ मैंने बाइकरोक दि।
घऱ मे अभि कोई भि नहि होगा, अगर माॅम नें फिनवही प्रश्न दुहराया कि वोँ लड़कीकौन थि तौ मे क्याँ कहूंगा। मैंने मैसेज भि तौ नहि किया थां। मे सोचने लगा किसका नाम लिखूं जिसे वोँ भि जानती हैं। ऐसी भि बात नहि थि कि उनकेजान पहचान युवतियों मे सें किसी केँ संग सेक्स नहि किया थां, उनकीजान पहचान कि औरतों मे मे दो केँ संग सेक्स कर चुका थां। कुछदेर तक माथापच्ची केँ बाद औऱ कुछ सोचकर एक् नाम मैंने माॅम कों ह्वाट्सएप कर दिया।
मे माॅम कों ह्वाट्सएप कररहा थां कि मेरी नज़र चाची पऱ पड़ी। वोँ अपने दरवाजे केँ बाजू मे कचरे केँ डिब्बे मे कुड़ा फेकरही थि। उन्होंने मुझे देखा औऱ वहीं सें जराजोर सें बोलीं।
" तु यहां क्याँ कररहा हैं। कालेज नहि गय़ा ?"
मैंने माॅम कों ह्वाट्सएप कर केँ अपनी बाइक उनकेघऱ केँ सामने खड़ाकर दिया औऱ नीचेउतर कर बोला - " गय़ा थां चाची मगर मुझेलगा कि शायद मेरी रूपसी रूपाली चाची कों मेरी जरूरत हैं इसलिये वापस आँ गय़ा। "
" नौटंकी बाज। मे सभी जानती हूं तेरी तिकड़म फितरत कों। जरूर किसी चक्कर मे होगा.यह बता यहां क्याँ कररहा हैं.किसको मैसेज कररहा हैं। "
" ऐसे न् कहो चाची जान। मे तिकड़म करता हूं ?। औऱ करता भि हुंगा तौ वनलीएंड वनली अपनीरूप कि रानी रूपाली चाची कों। अब आप् हि बताओ क्याँ मे अपने प्यारी सि चाची कों भि.न् करूं तौ भला किसे करूं। "- मैंने चाची कों छेड़ते हुएकहा -" वैसेयह मेरी प्यारी.किसी सियासत कि महारानी जैसी चाची इसभरी दोपहरी मे यहकौन सां काम लेकरबैठ गई हैं। अपनेइस ग़ुलाम कों कहती, मे नतमस्तक आपकी सेवा मे हाजिर होँ गय़ा होता। "
चाची हंसते हुए बोलीं - बक-बकबंद कर.चल अन्दर चल। "
मैंने चाची कों मुस्कराते हुए देखाफिन अपनी बाइक उनकेघऱ केँ सामने खड़ीकर दि। मे चाची केँ संग उनकेघऱ मे चला गय़ा। घऱ मे प्रवेश करते हि चाची नें मेन दरवाजा बंदकर दिया। घऱ मे चाची केँ अलावा कोई नहि थां। चाचा ड्यूटी पऱ गए थें औऱ राहुल अपने विद्यालय।
चाची केँ बारे मे जैसा कि पहले मैंने कहा थां वोँ बिल्कुल विद्या बालन कि यादें ताजाकरा देती हें। हूबहू वैसाबदन औऱ वैसा हि उनका चेहरा। वैसा हि होंठ। वैसा हि हाईट। मेरा मरहूम यारअजय कां कहना थां कि यदि मे कभी विवाह करूंगा तोँ वोँ बिल्कुल विद्या बालन जैसी होनी चाहिए। औऱ अगर कहीं उन्नीस बीस हौ भि तोँ वोँ कम सें कम चाची कि तरह तोँ बिल्कुल हि होनी चाहिए।
चाची उस टाइम एक् फुल गहरे ब्लूरंग कि नाइटी पहनरखी थि। नाइटी केँ अन्दर उनका सफेदरंग कां ब्रा स्पष्ट दिखाई देरहा थां जिससे यह स्पष्ट समझ मे आँ रहा थां कि उनके उरोज कितने बड़े बड़े हें। नीचे पैन्टी पहनी थि याँ नहि, यह नहि दिखरहा थां। नाइटी मे भि वोँ गजब कि सेक्सी लगरही थि।
" क्याँ खाएगा ?। पास्ता खाएगा याँ हलवा बनाऊ ?"- ड्राइंगरुम मे सोफे पऱ बैठते हुए चाची नें कहा।
" सुजी कां हलवा। " - मे चाची केँ बगल मे बैठते हुए बोला।
" ठीक हैं.तु बैठ मे दो मिनट मे नहाकर आँ रही हूं। " - चाची उठतेहुए बोलीं।
" दो मिनट मे। दो मिनट तौ आपको कपड़े उतारने मे हि लग जाएंगे। "
" अच्छा पांच मिनट मे। "- चाची नें हंसते हुएकहा।
" वैसे तोँ पांच मिनट मे भि नहि होने वाला हैं। फिन भि जाओ, मे यहीं बैठे बैठे सेकेंड, मिनट, घंटा मिलारहा हूं। "
" तुम्हे क्याँ लगता हैं मे घंटों नहारही हुंगी। "
" मुझे तोँ लगता हैं कि औरतों कों नहाने मे बहुत वक़्त लगता हैं। "
" बड़ एक्सपिरियंस हैं तुम को लड़कियों केँ नहाने कों लेकर। "
" थोडा बहोत तोँ हैं। "- मैंने मुस्कराते हुएकहा।
" जरूरकोई छोकरी पटारखी होगी.यह तौ मुझे शुरुआत सें हि शक थां। "
" चाची नहाने वालीबात कों लेकर छोकरी पटाने कि जरूरत क्यूं पड़ेगी ?। लड़कियों कों नहाने मे देर लगती हि हैं यह तोँ तुम् भि जानती होगी। जानती हौ नं ?"
" तेरे चक्कर मे रहूंगी तौ दिनभर बिना नहाएरह जाऊंगी.तु बैठ मे एक् घंटे मे आँ रही हूं। "- बोलकर चाची बाथरूम जाने केँ लिएआगे बड़ी।
" क्याँ एक् घंटे मे ?"- मैंने चिल्लाते हुएकहा।
" हां। एक् घंटे मे। तु हि तौ बोलरहा थां। मे चली। " - चाची हंसते हुए बोलि औऱ बाथरूम मे घुस गई।
चाची केँ बाथरूम जाने केँ बाद मैंने काजल कों ह्वाट्सएप किया
jabardast addayatan thaa. yeh too nighty kaa he lafda ulajh gyaa h. kahin yeh nighty apne hero ko daato tale lohe k chane na chabwa de. baharhaal dekte h. bhaisaab msg main kiska nam batane wale h. sayad itne main chachi bi naha lengi.
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Update 17.
चाची ड्राइंगरुम केँ पीछेबने बाथरूम मे चली गई। उनके बाथरूम मे घुसते हि मैंने काजल कों ह्वाट्सएप किया।
मे - कहां हौ डार्लिंग ?
जल्दी काजल कां जवाबआया।
काजल - बेहन सें सीधे डार्लिंग ?
मे - क्यूं बेहन डार्लिंग नहि होती।
काजल - क्यूं नहि होती। डार्लिंग भि होती हैं औऱ.औऱ भि बहोत कुछ होती हैं।
मे - औऱ.औऱ भि कुछ होती हैं। अच्छा.! पहलेयह बता कि अभि हैं कहां ? कालेज मे नाँ घऱ पर्र।
काजल - घऱ पर्र हि हूं। मां कि तबीयत ठीक नहि थि इसलिये नहि गई।
मे - ओह ! क्याँ हुआ उन्हें ?
काजल - खासकुछ नहि। थोडा कमर मे दर्द थां।
मे - अभि मां कि कमरदबा रही हैं नां घऱ केँ कामकर रही हैं।
काजल - घऱ कां कामकर ली हूं। अभि अपने कमरे मे फोन सें गानासुन रही हूं।
मे - गानासुन रही हैं ? जरा मे भि तोँ जानूं कौन सां गानासुन रही हैं ?
काजल - भैया मेरे राखी केँ बंधन कों निभाना।
मे - वाउ ! वाउ ! तु तोँ सचमुच पुरानी गाने कि फैन निकली। कितना सुन्दर गाना हैं भइया बेहन केँ उपर। वैसेआज तेरीयह गाना सुनने कि ख़्वाहिश केसेजाग गई।
काजल - आप् कि याद आँ रही थि न् इसलिये।
मे - ऐसा क्याँ हौ गय़ा कि मेरीयाद आते हि ' भैया मेरे राखी केँ बंधन कों निभाना ' गाना सुनने लग गई,।
काजल - मुझे रक्षाबंधन केँ वोँ दिनयाद आँ गए थें जब आपको राखी बांधने पर्र आप् मुझे उपहार कि स्थान झुनझुना थमा देते थें। एक् नम्बर केँ कंजूस थें आप्।
मे - हा.हा.अच्छा ! सबसे पहले तौ मुझे आप् आप् कहनाबंद कर.ऐसा लगता हैं जैसे मे कोई बुजुर्ग तेरा चाचा, मामाजी, फुफा टाइप कां व्यक्ति हूं।
काजल - चाचा, मामाजी, फुफा नहि होँ तौ क्याँ हुआ बड़े भैया तौ हौ।
मे - हां। भैया तौ हूं मगर दुसरे तरह वाला भैया हूं।
काजल - दुसरे तरह वाला भैया कैसा होता हैं।
मे - दुसरे वाला भैया नहि सुनी हैं ?.जोँ दिन मे भैया औऱ रात मे सैंया होता हैं।
काजल - ऐसा भि भैया होता हैं ?
मे - हां। तौ अब सें मुझे आप् नहि कहेगी न्।
काजल - आप् कों मे आप् नहि कहुगी तोँ फिन क्याँ कहूंगी।
मे - तुम् बोल्ना.तु केहना। जानु केहना। कुछ भि बोल्ना। मेरानाम लेकर पुकारना।
काजल - धत ! मुझेशरम आएगी।
मे - मुझेतु, तुम् बोलने मे शरम आएगी।
काजल - हां। कभी बोलि नहि हूं न्।
मे - उसदिन तौ शरम नहि आई तेरे कों।
काजल - किसदिन।
मे - जिसदिन पेशाब करतेहुए बाथरूम सें बातें कररही थि।
काजल - वाउरे ! उसदिन मैंने क्याँ ऐसी बातें कर दि जौ मुझेशरम आती।
मे - हांउस दिन तौ हमने भागवत कथा पर्र चर्चा कि थि नं तौ उसमें शरम वाली बातें भला कहां सें आएगी।
काजल - अच्छा बाबा ! अब सें मे आपकोतु, तुम् करकेबात करूंगी मगर मात्र अकेले मे।
मे - हांयह हुई नं मर्दों वालीबात।
काजल - मे.मै आपको.साॅरी तुमको मर्द लगती हूं।
मे - अरे नहि नहि ! वोँ तौ मैंने एक् मिसाल दिया थां। तु तोँ जवानी केँ दौलत सें मालामाल एक् भरपूर सेक्सी लड़की हैं।
काजल - वोँ तोँ हूं मगर तुमको बड़ीदेर बादपता चला।
मे - पता तोँ बहोत पहले सें थां मगरतु मुझे राखी बांधती थि नं तोँ मुझे हिम्मत नहि होती थि।
काजल - यदि हिम्मत होती तोँ क्याँ करते ?
मे - तौ। तोँ.राखी केँ दिन तेरी कैडबरी नाँ देकर उपहार केँ तौर पऱ तुम्हे पटककर तेरी लेँ लेता।
काजल - सच मे !
मे - हां।
काजल - मेरी क्याँ लेँ लेते ?
मे - वही जिसके आसपास बड़े बड़े जंगलउगा रखी हें। औऱ जिनके बीच नमकीन पानी सें भराहुआ कूआं हैं।
काजल - वोँ जंगल थोड़ी नां हैं ?
मे - तोँ क्याँ हैं ?
काजल - आपकी बेहन कि.
मे - क्याँ बेहन कि ?
काजल - आपकी बेहन कि रेशम जैसे रसीले बड़ी बड़ी झांट हैं।
मे - झांट हैं ?
काजल - हूं। औऱ झांटों केँ बीच वोँ नमकीन पानी वाला कूआं नहि बल्कि आपकी बेहन कि चु.
मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी। मैंने अपनी पैंट ढीली करके लंड कों पैंट केँ ऊपर सें बाहर् निकाल लिया औऱ जोरजोर सें अपने लंड कों मसलते हुए टाइप किया - मेरी बेहन कि चु। क्याँ ?
काजल - आपकी बेहन कि चुत हैं।
मे - मेरी बेहन कि चुत हैं ?। अच्छा उसी केँ अन्दर मुझे अपना केला घुसेड़ना हैं ?
काजल - अरे ! मे तोँ कब सें अपनी जांघ पसारे तुम्हारे केला लेने केँ लिए इन्तजार कररही थि। मगर तुम्हीं जोँ अकल केँ कोल्हू थें।
मे - चलकोई बात नहि। देरआए दुरूस्त आए। अब तक केँ सारे राखी कि तोहफा एक् बार मे हि दे दुंगा। मे देता जाऊंगा औऱ तु लेती जानां।
काजल - तौ दो नाँ। वैसे भैया ऐसी क्याँ उपहार देने वाले होँ जोँ मे लेती जाऊंगी।
मे - दुंगा न्.अपना आठइंच कां लम्बा मोटा केला.।
काजल - आठइंच कां ?
मे - हां।
अचानक सें उसका मैसेज आनांबंद हौ गय़ा। मैंने फिन सें मैसेज किया।
मे - क्याँ हुआ ?
थोड़ी देर तक उसका मैसेज नहि आया तौ मैंने फिन सें उसे मैसेज किया।
मे - क्याँ हुआ ? कहां चली गई ?
इसबार उसका मैसेज आया।
काजल - नापरही थि।
मे - क्याँ ?
काजल - इंची फीता लेकरनाप रही थि कि आठइंच कितना बड़ा होता हैं।
मे - तोँ नापली ?
काजल - हां। यह तौ बहोत बड़ा होता हैं.केसे जाएगा ?
मे - क्याँ ?
काजल - तुम्हरा लंड औऱ क्याँ। बाप रे ! मेरी तौ फट केँ इंडिया गेट होँ जाएगी।
मे - इंडिया गेट ? मे तौ बुलन्द दरवाजा केँ बारे मे सोचरहा थां।
काजल - भैया जब मेरी विवाह होगी तौ क्याँ हसबैंड कों सुहागरात मे बुलन्द दरवाजा पेश करूंगी।
मे - अरे दोस्त लड़किया तोँ बहाने बनाने मे बहुत एक्सपर्ट होती हैं.यह तुम को थोड़ी नां बताना पड़ेगा। बता देना स्पोर्ट्स याँ साइकिलिंग सें होँ गय़ा हैं.आजकल प्रायः लड़कियां ऐसा हि करती हैं। बहोत सारे बहाने होते हें।
काजल - तुम् न् सही मे बहनचोद हौ।
मे - जब अपनी देगीतब न् बहनचोद बनूंगा।
काजल - वोँ तौ तुम् लेँ हि लेगो औऱ मेरी लेकर बहनचोद भि हौ जाओगे मगरफिन भि। वोँ तुम्हारा साइज़.डर लगता हैं।
मे - तौ क्याँ हुआ ? एक् बार लें लेगी तौ फिनरोज रोज लेने कि जीद करेगी। औऱ मेरा तोँ इतना भि राक्षस जैसा नहि हैं, देखी नहि हैं विदेशी हबशियो कों वोँ तोँ बारह चौदहफुट कां लेकर घुमते हैं।
काजल - क्याँ ? बाप रे ! बारहफुट। यह तौ सर केँ ऊपर सें बाहर् निकल जाएगा।
मे - अरे नहि नहि। तु नं मुझे भि कन्फ्यूजन मे डाल देती हैं । वोँ गलती सें इन्च कि स्थान फुट लिखा गय़ा।
काजल - ओह ! मेरा अभि तक दिल धड़करहा हैं.जानते हें आप् केँ इन्च, फुट केँ चक्कर मे मेरी हार्ट फेल होने वाली थि।
मे - अरे बोला नं गलती सें होँ गय़ा। छोड़ नाँ वोँ सभी.यह बता दोनों कां संगमकब होगा ?
काजल - किन दोनो कां संगम ?
मे - तेरीचुत औऱ मेरा लंड कां।
काजल - मेरीचुत औऱ आपके लंड कां ?
मे - हां.तेरी चुत केँ अंदर मेरा लंड घुसेगा तभी नाँ संगम होगा।
काजल - हूं। बिल्कुल सहीकह रहे होँ.सुनो.माँ डैड अगले हफ्ते तीनदिन केँ लिए मामाजी केँ घऱ जाने वाले हें। मामाजी केँ बेटे कि विवाह मे मगर मे नहि जाऊंगी। मैंने पढ़ाई कां एक्सक्यूज़ बनाया हैं। औऱ तब तक यहां मेरेसंग रीतु रहेगी.रीतु भि मान गई हैं। उसी टाइम।
मे - क्याँ ? रीतु वहां रहेगी तौ फिन केसे होगा ?
काजल - अरे बुद्ध, मैंने रीतु कों दुसरी रात सें रहने कों बोला हैं.उसे मैंने कहा हैं मां डैडी दोदिन केँ लिएजा रहे हें इसका मतलब पहला पुरादिन औऱ पुरीरात हमारे नाम हैं। अब तुम्हें उस टाइम केँ लिएघऱ मे कोई बहाने बनाना होगा।
मे - एक्सक्यूज़ बनाऊंगा ? यह तोँ झुठ बोलने केँ समान होँ गय़ा नं।
काजल - तोँ सचबोल देना।
मे - क्याँ सच बोलुंगा ?
काजल - बोल देनाआज रात काजल कि चुत सें मेरे लंड कां संगम होने वाला हैं इसलिये रात मे घऱ नहि आऊंगा।
मे - तु तोँ साली मुझसे भि बड़ी कमीनी हैं। ऐसेकोई घऱ मे बोलता हैं ? जिसदिन मेरे नीचे आएगी नाँ तौ सच मे तेरीचुत कों भोसड़ा बना दूंगा।
काजल - तौ मना किसने किया हैं। मे तोँ अभि भि सर सें पैर तक एकदम नंगी अपनी जांघ फैलाए तुम्हारा इंतजार कररही हूं। आँ जाओ औऱ मेरी ओखली मे अपना मोटा मूसल घुसेड़ घुसेड़ कर भोसड़ा बनादो।
मे - आऊंगा। जरूर आऊंगा। आगलगजाए, बाढ़ आँ जाए, याँ भूकंप आँ जाए। आऊंगा जरूर। मगरउस दिनजिस दिनतु घऱ पर्र अकेली रहेगी। औऱ तेरी झांटों सें भरीचुत कों अपने मोटे लौड़े सें चोदचोद कर भोसड़ा भि बनाऊंगा।
काजल - बना देना भोसड़ा। मेरीचुत तौ कब सें रोरही हैं तुम्हारे मोटे लंड केँ लिए। अपने लौड़े कों मेरीचुत कि गहराई मे घुसेड़ घुसेड़ कर चोदना औऱ अपना पानी अन्दर गिराते रहना मेरे बहनचोद भइया।
मे - हां। जोरजोर सें चोदूंगा बेहन। औऱ अपने लंड कां पानी भि अपनी बेहन केँ चुत केँ अंदर हि छोड़ूंगा। जैसे पिचकारी सें पानी कि बौछार होती हैं नं उसीतरह मेरा लंड तेरीचुत मे पानी कि बौछार करेगा।
काजल - हां। अपने लंड केँ पानी सें मेरीचुत कि गर्मी कों ठंडा करते रहना औऱ मे भि अपनीचुत कि गाढ़ी मलाई सें अपने भइया केँ मोटे लंड कों तरावट देती रहुंगी।
मे - अरे दोस्त अब बर्दाश्त नहि हौ रहा हैं। क्याँ करूं.मेरा लंड तेरीचुत कों चोदने केँ लिए जमीन आसमान एक् किएजा रहा हैं।
काजल - मेरा भि भइया। मेरी भि चुत कां वहीहाल हैं.क्या बात है भैया अपनी बेहन कों अपने लंड कि फोटो भेजो नां।
मे - फोटोदेख कर क्याँ करेगी ?
काजल - जब तक असल नहि मिल जातातब तक उसी कों देखकर ऊंगली करती रहूं।
मे - तु भि अपनीचुत कि फोटोभेज नाँ।
काजल - पहले तुम् भेजो।
मे - अच्छा रूक। भेजता हूं।
तभी मुझेयाद आया कि मे अपने कमरे मे नहि बल्कि चाची केँ यहां बैठा हूं। मैंने पीछे मुड़कर बाथरूम कि तरफ देखा। बाथरूम कां दरवाजा खुलाहुआ थां। ओह माँ गॉड। मतलब चाची नहाकर बाथरूम सें निकल गई, हैं। कहीं उन्होंने मुझे अपना लंड हिलाते हुए तोँ नहि देख लिया। मैंने जल्द सें लंड कों पैंट केँ अन्दर किया औऱ सुकून लगाया। फिन काजल कों मैसेज किया।
मे - काजल। मे अभि नहि भेज सकता। मे चाचा केँ घऱआया हूं। अभि मोबाइल रखते हें, रात मे मैसेज करेंगे। ओके।
काजल - ओके.लव यू डार्लिंग.सि यु।
काजल आफलाइन होँ गई। मैंने भि अपनाफोन पैंट केँ अन्दर कर लिया। तभी चाची प्लेट मे सुजी कां हलवा औऱ एक् पानी कां बोतल लेकरआई। वोँ हलवा कां प्लेट मेरे हाथों मे देकर मेरेबगल मे हि बैठ गई। पानी कां बोतल अपनेहाथ मे हि रखेरही।
नहाने केँ बाद उन्होंने एक् हल्के ब्लूकलर कां साड़ी औऱ उस सें मैच करता ब्लाउज पहनरखा थां। नहाने केँ बाद वोँ बहुत फ्रेश दिखरही थि। माथे केँ बाल अभि भि भींगे हुए थें जिसे वोँ खुला छोड़रखी थि। होंठों पऱ हल्की लिपस्टिक थि। सुन्दर तौ थि हि मगरइस वक़्त वोँ मुझे बहुत सेक्सी भि दिखरही थि। थोड़ी देर पहले काजल केँ संगहुए गरमागरम चैटिंग सें मे पहले हि बहुत उत्तेजित थां। औऱ फिनउस पऱ चाची केँ बगल मे बैठना उत्तेजना कों औऱ भड़काने वाला जैसा थां।
" कितनी जल्दनहा ली चाची " - मैंने हलवा खातेहुए कहा -" मुझेपता हि नहि चला। "
" चैटिंग सैटिंग सें फुर्सत होगी तौ नां पता चलेगा। "- चाची बोतल कि ढक्कन खोलकर सिरउपर उठाकर पानी पीतेहुए बोलीं।
" आपने देखाचै.?" ( कहीं इन्होंने मुझे लंड मुठियाते हुए तोँ नहि देख लिया )
" हां देखा। "
" क्याँ देखा ?"
" चैटिंग सैटिंग करतेहुए। " - चाची मुस्कराते हुए बोलि।
" ओह ! वोँ। वोँ एक् फ्रेंड सें चैटिंग होँ रही थि। "
" अच्छा ! क्याँ बोलरही थि ?"
" वोँ बोलरही थि." - अचानक सें मे चौंका - " क्याँ मतलबबोल रही थि.?.बोल नहि रही थि बल्कि बोलरहा थां। "
" अच्छा ! बोलरहा थां.?.वैसे वोँ क्याँ बोलरहा थां। "
" यहीसभी कालेज कि कुछ पढ़ाई-लिखाई कि बातें फिन एक्जाम केँ बारे मे। "
" हांदेख तौ रही थि कि बाहर् भि पढ़ाई-लिखाई कि बातें फोन पऱ कररहा थां औऱ फिन यहां भि शुरुआत हौ गय़ा। फोन पर्र पढ़ाई-लिखाई सें लोग जल्द सें सीख जाते हें.हैं नां ?"
" क्याँ चाची ?। बच्चे कां मजाक उड़ारही हौ ?"
" बच्चा.?। कौन बच्चा ?"
" मे बच्चा। आप् कों दिख नहि रहा हैं ?"
" तु बच्चा हैं तोँ सांड किसको बोलेंगे। "
" क्यूं मजाक करती हौ चाची। मे आपको कहां सें सांड लगनेलगा ?" ( शर्तिया चाची नें मेरा लंड देख लिया हैं )
वोँ मेरे जिस्म कों अपने आंखों सें एक्सरे करती हुईँ बोलीं -" चौड़ा सीना, चौड़ा कन्धा, लोहे कि तरह मजबूत हाथ, मजबूत जबड़ा, लम्बा हाइट। सांड नहि हैं तोँ औऱ क्याँ हैं ?.तु तौ विवाह केँ लायक हौ गय़ा हैं। "
" क्याँ चाची !.तुम् तौ मुझेचने कि झाड़ पर्र चढ़ारही हौ। "- मैंने शरमाते हुएकहा।
" सचबोल रही हूं.तु तौ एकदम कामदेव कां अवतार होँ गय़ा हैं.तेरी मां सें बात करूं तेरी विवाह केँ लिए ?"
" क्याँ बात हैं आजकल माॅम औऱ तुम् दोनों मेरे विवाह केँ पीछे पड़ी हुई होँ। "
" अभि नहि पड़ेंगे तौ कब पड़ेंगे.तु कहेगा तौ मै तेरी विवाह कि बात करूं। एक् लड़की हैं मेरी निगाह मे। "
" कौन हैं ?" - मैंने चौंकते हुए पूछा।
" मेरीदुर कि एक् भाभी हैं, उनकी बेटी। दोनों माँ बेटी बहोत खूबसूरत हैं। "
" आप् कि भाभी कि बेटी ?"
" हां। "
" बेटी सुन्दर हैं ?"
" हां। "
" औऱ मम्मी भि सुन्दर हैं। "
" हां वोँ भि बहोत अच्छी हैं। "
" तोँ क्यूं नं अपनी भाभी सें हि मेरी विवाह करवादो। "
" नालायक ! मसखरी करता हैं। वोँ मेरी औऱ तेरी मां कि उमर कि हैं, पता हैं ?"
" तोँ क्याँ हुआ ?। आप् कौन सि बुढ़ी होँ गई होँ। औऱ मैंने आपकी वोँ खुबसूरत सि भाभी कों देखा हैं वोँ भि आप् हि कि तरह बहुत मस्त हैं। औऱ वैसे भि मुझे बड़ीउमर कि औरतें ज़्यादा पसन्द हैं। "
" तु बुढ़िया सें विवाह करेगा ?"
" आप् बुढ़िया हैं ?"
" एक् दम नहि।। औऱ खबरदार जौ मुझे बुढ़िया कहा। "
" वही तौ मे भि कहरहा हूं कि वोँ भि आप् कि तरह मस्त मस्त हैं। "
" तुझेही बड़ीउमर कि औरतें पसन्द हैं ?"
" हां। "
" तेरी अपनीउमर केँ समान लड़कियां मनपसंद नहि ?
" हैं नां। वोँ भि मनपसंद हैं। "
" तौ फिनउस लड़की सें विवाह करने मे क्याँ बुराई हैं ?"
" जब मे आपकी भाभी सें विवाह कर लुंगा तौ उसकी बेटी भि एटोमेटिकली मेरी पत्नि बन जाएगी। एक् केँ संग एक् फ्री। "
" कमीने वोँ तेरी बेटी बन जाएगी नां पत्नि। "
" वोँ मेरी बेटी बन जाएगी ?। ऐसे थोड़ी नं होता हैं। मे कहां 24 साल कां औऱ मेरी बेटी 20। 22 साल कि। लोग क्याँ कहेंगे ?"
" अभि बताती हूं कि लोग क्याँ कहेंगे। " - बोलकर चाची नें मेरेकान कों चुटकियों सें जोर सें पकड़ा औऱ मसलने लगी।
" अर.अरे चाची क्याँ कररही हौ ?। बहोत जोर सें लगरही हैं। "- मैंने हंसते हुए अपनीकान छुड़ाने कि कोशिश करतेहुए कहा।
चाची नें मेराकान छोड़ा औऱ पानी कां बोतल मेरेसर केँ ऊपर गिरा दि जिससे मेरा शर्ट पानी सें भीग गय़ा।
" अबऐसे हि गीले कपड़े मे रह.खाली शैतानी करते फिरता हैं। "
" देखलो चाची आपने मुझे गीला किया हैं इसका बदला मे भि एक् न् एक् दिन जरूर लुंगा.याद रखना। " - मे खड़े होकर शर्ट सें पानी झाड़ते हुएकहा।
" अच्छा ! क्याँ करेगा जरायह तौ बता ?" - चाची बोतल केँ अन्दर बचेहुए पानी पीतेहुए बोलीं।
" म। मे भि आपको गीलाकर दुंगा। "
" तौ खड़ा क्यूं हैं ? कर मुझे भि गीला। "
" अभि नहाकर नहि आई होती तौ कर हि देता। " - बोलकर मैंने अपनाहाथ धोया औऱ चाची केँ साड़ी केँ पल्लू सें अपना मुंह पोंछने लगा जिससे उनके साड़ी कां पल्लू उनके सीने पर्र सें हट गय़ा औऱ ब्लाऊज़ मे कैद उनकेकसे हुए बड़े बड़े बूब्स मेरी आंखों केँ समकक्ष आँ गए।
मे अपना मुंह उनकी साड़ी केँ पल्लू सें साफ करताहुआ बोला -" चाची, आपकी साड़ी बहोत खुबसूरत हैं। "
" तुम को अच्छी लगी.तीन हजार रुपए कि हैं। "
" हूं " - मे उनके बड़े बड़े बूब्स कों ब्लाउज केँ ऊपर सें देखता हुआ बोला -" औऱ आप् कि ब्लाउज तोँ साड़ी सें भि ज़्यादा अच्छी हैं। "
चाची नें मुझे उनके गोलाईयों कों घुरते हुएदेख लिया। वोँ मेरेसर पर्र धीरे-धीरे सें थप्पड़ जड़ती हुईँ बोलि - " चाची सें मजाक करतेहुए तेरी बड़ा अच्छा लगता हैं.हैं नाँ ?"
मे वापस सोफे पऱ बैठता हुआ बोला -" हूं। काश आप् मेरी भाभी होती तौ कितना अच्छा होता.खुब जमकर मजाक करता। "
चाची भि आकर मेरेबगल मे बैठ गई औऱ बोलीं -" मुझसे तुकौन सां कम मजाक करता हैं। भाभी वाला हि तौ मजाक करता हैं। "
" कहां भाभी वाला मजाक आपसे करता हूं। भाभी वाला मजाकअलग तरह कां होता हैं। "
" कैसा होता हैं भाभी वाला मजाक.जरा मे भि तोँ सुनूं। "
" आप् नहि सुन पाएंगी। "
" क्यूं नहि सुन पाऊंगी ?"
" क्योंकि। क्योंकि। "
" क्योंकि ?" - चाची नें मेरे आंखों मे देखते हुएकहा।
जबकि मे उनके बड़े बड़े मम्मे कों देखते हुएकहा -" क्योंकि वे बहुत हाॅट होते हें। "
" इधरउधर कहां देखरहा हैं नालायक " - चाची नें मुझे अपने छातियों पर्र देखते हुए पाया तोँ कहा -" मेरा चेहरा इधर हैं। औऱ वोँ कैसी-कैसी हाॅट होती हैं। "
मैंने हड़बड़ाते हुए अपनासर उठाया औऱ उनकी आंखों मे देखते हुएकहा -" नहि। आप् कों बुरा लगेगा सुनने मे। "
" कोईबात नहि। मे कुछ नहि कहूंगी। तुबोल। "
" मुझेशरम आँ रहा हैं। मे नहि बोल पाऊंगा। "
" बोल नां।। तुम्हें मेरीशपथ। "
मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि अब मे क्याँ बोलूं। शपथ देने केँ बाद तौ मे औऱ भि उहापोह वाली स्थिति मे थां।
" ठीक हैं जब आप् इतनाजोर देरही हैं तौ मे आपको बताऊंगा मगर आप् केँ सामने नहि। क्याँ पता मेरे बोलते हि आप् मेरासर फोड़दे इसलिये मे आपकेफोन पऱ मैसेज भेज दुंगा। "
अचानक सें चाची दुःखी हौ गई औऱ बोलीं -" कोई फायदा नहि। मेरीफोन तौ एक् महीने पहले हि चोरी हौ गई हैं। "
" अरे तोँ आपने बताया क्यूं नहि.कब चोरी हुई थि ?"
" शायदजिस दिन श्वेता कि सहेली उर्वशी कि विवाह थि, उसदिन। "
" ओह ! तोँ फिनबाद मे नयाफोन नहि खरीदी ?"
" तेरेउस खुसट चाचा कों तौ कईबार बोला हैं मगर उसकाकान कों तौ जैसे दीमकचाट गय़ा हैं। " - चाची नें उदास होकरकहा -" मगर मैंने आज बोला हैं कि यदि वोँ आज मेरेलिए नयाफोन लेकर नहि आए तोँ कल सें सागर कों बोलकर फोन खरीदवा लुंगी। "
" तौ आज तक इन्तजार करो चाची। यदि वोँ फिनभुल गएहों तोँ कल मुझे केहना। "
" वोँ आज भि भुल जाएगा, तुकल सुभह मेरे सें पैसे लें लेना औऱ एक् देखसमझ केँ अच्छी सि फोन लेँ लेना। "
" ठीक हैं चाची " - कहकर मे खड़ाहुआ -" चाची, अब चलता हूं, कुछकाम हैं। "
" क्याँ जरूरी काम हैं ?"
" अरे नहि चाची। ऐसी भि कोई जरूरी काम नहि हैं, औऱ अगर हौ भि तौ मेरी प्यारी चाची सें बढ़कर दुसरी जरूरत औऱ क्याँ होगी। "
" तुसच मे मेरा प्यारा सोना हैं। एक् तु हि तौ हैं जौ सभी कां ध्यान रखता हैं। "
चाची थोडा इमोशनल होनेलगी थि। मैंने उन्हें अपने बाहों मे कस केँ गलेलगा लिया। थोड़ी देरबाद मे अपनेघऱ चलाआया। उससमय दोपहर केँ अढ़ाई बजे थें। रीतु कालेज सें अभि आई नहि थि औऱ माॅमइस टाइम हमेशा आराम करती हैं तौ मे सीधे अपने कमरे मे चला गय़ा औऱ पैंट शर्ट खोलकर पलंग पऱ लेट गय़ा।
आजजिस तरह सें काजल सें ह्वाट्सएप पऱ चैटिंग हुईँ थि यादकर कर केँ मे गर्म होनेलगा। बहोत जल्द काजल मेरी बाहों मे होगी औऱ उसकेसंग मे खाट पर्र क्याँ क्याँ करूंगा, सोचसोच कर मे उत्तेजित होनेलगा। तभी सोचा क्यूं नं आजनेट पर्र सेक्स कहानियों वाली फोरम पढ़ाजाय।
मैंने फोन निकाला औऱ ' वोँ ' प्रसिद्ध कहानियों वाली वेवसाईट खोला। कई कहानियां थि। हरतरह कि कथा थि। कुछ कहानियां पढ़ी। कुछ बहोत अच्छी लगी। कुछ तौ एकदम बकवास लगी। मगर जोँ मुझे सबसे ज़्यादा खराबलगी वोँ थि पढ़ने वालों कि नेगेटिव कमेन्टस। मुख्य तौर पऱ औरतों केँ उपर कि जाने वाली अभद्र टिप्पणी। यदि किसी स्टोरी केँ उपरकोई महिला कमेन्टस करती हैं, उसकेबाद किस्सा केँ लेखक केँ कमेन्टस देखकर ऐसा लगता हैं कि जिस स्त्री नें कमेन्ट किया हैं याँ तौ वोँ महिला एक् निम्न श्रेणी कि गिरी हुइ स्त्री हैं। याँ तोँ उसके लेखनी सें प्रभावित होकरउस पर्र फिदा हैं। याँ वोँ एक् निम्फोमेनियाक महिला हैं। बहोत बुरालगा मुझे। बहोत हि बुरा। ऐसा नहि होना चाहिए। यहीसभी सोचते सोचते मे निद्रा केँ हवाले हौ गय़ा।
Sagar (Full Storyd) – New Episode
muzhe bi बहुत बुरा laga। आज कल के writer bi maha bakchod hote ja rahe h।
abi pahle Kajal पर too हाथ saaf krr lo bandhu। saath में chachi के blouse में bi ghusne ko taiyaar baithe hu.
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Kajal bi poori bhari hoyi baithi h। iski choot में bi poori agni lagi hoyi h। कुछ bi kaho conversation kamaal की thi।
Sagar (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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