Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 18.
साम कों चारबजे मे उठा औऱ अपने कमरे सें बाहर् निकला।
बाहर् निकलते हि मैंने छत पर्र एक् साइड मे रीतु कों मोबाइल पऱ बातें करतेहुए पाया।
उसने निगाह उठाकर मेरीतरफ देखा औऱ फिन जानबूझ कर स्वर ऊंचा करतेहुए बोलि - " मे तुम्हें फिन मोबाइल करती हूं, महेश, अभि मेरे भैय्याया आँ गये हें। "
उसके भैय्याया कहने सें हि मे समझ गय़ा कि मोबाइल पर्र कोई महेश नहि थां।
मे उसके सामने जा खड़ाहुआ।
उसने बड़ीअदा सें मुझे देखा।
" महेश। " - मे उसे घुरता हुआ बोला।
" यस भैयया। " - वोँ पलक झपकते बोलि।
" कौन हैं यह महेश ?"
" मेरा ब्वायफ़्रेंड हैं। "
" वोँ तोँ सुरेश हैं नाँ। "
" वोँ प्रीलंच ब्वायफ़्रेंड हैं। यह पोस्टलंच ब्वायफ़्रेंड हैं। "
" क्याँ मतलब ?"
" भुलगए। मेरी कालेज। वोँ लड़की मधुमिता। लड़कियों कां ब्वायफ़्रेंड.घऱ सें निकलते टाइम.घऱ आते टाइम।
" ऐसे टोटल कितने हें ?"
" अधिक नहि हैं। आपकी बहनजियों सें कम हैं। "
" लिस्ट मे मेरा नम्बर कौन सां हैं ?"
" आप् कां लिस्ट मे क्याँ काम ?"
" क्यूं नहि काम ?"
" आप् ब्वायफ़्रेंड केसे होँ सकते होँ ? आप् तौ भैय्या हें। "
" भैय्या ब्वायफ़्रेंड नहि हौ सकता ?"
" नहि होँ सकता। ब्वायफ़्रेंड तौ खास होता हैं, भैय्या तौ खडुस, हमेशा अपना हुकुम चलाने वाला, बातबात मे नुक्ता चीनी निकालने वाला औऱ वाइफोकल्स लगाता हैं। "
" मे तुम कोऐसा दिखाई देता हूं ?"
" अभि नहि। "
" यानीदेर सबेर तौ वैसाबन केँ रहूंगा। "
वोँ हंसी।
" भीतर आँ, तेरे सें एक् बात करनी हैं। "
मे अपने कमरे मे प्रवेश किया औऱ खाट पऱ बैठ गय़ा ।
मेरे पीछे पीछे वोँ भि वहां पहुंच गई।
" बैठ। "
उसकी भवेंउठी।
" अरे पलंग पर्र, कुर्सी पऱ, कहीं भि बैठ मेरी माँ। "
वोँ मेरे सामने बैड पऱ बैठ गई।
" बोल बेटा। "
मेरी हंसीछुट गई।
वोँ भि हंसने लगी।
फिन हम् दोनों संजीदा हुए।
" रीतु " - मे बोला -" अमर.मेरा साथी जिसका मर्डर हौ गय़ा थां, उसकोतु जानती हि हें - मे चाहता हूं कि तु पुरीबात सुन औऱ फिन मुझेकोई सजेशन दे। "
" वोँ तौ ठीक हैं मगर पहलेयह बताओ कि मेरी पाकेट मनीकहा हैं। "
" अरे ! लेँ लेना। पहले सेनसियर होँ केँ मेरीबात सुन।
" सुनरही हूं। "
मैंने एक् सिगरेट सुलगा लिया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे तफसील सें तमाम वाकयात वयान किया।
आखिरकार मै खामोश हुआ औऱ प्रश्नसूचक निगाहों सें उसकीतरफ देखा।
" एक् सिगरेट मुझे दीजिए। " - वोँ बोलीं।
" क्याँ ?"
" सोचने केँ लिए। "
" तु सिगरेट पियेगी ?"
" खाऊंगी। आप् दीजिए तोँ सही। "
मैंने भुनभुनाते हुए अपना क्लासिक कां पैकेट औऱ लाइटर उस केँ सामने फेंका।
उसने पैकेट सें एक् सिगरेट निकाला, मगर लाइटर कि तरफहाथ नं लगाया। उसने सिगरेट कों होंठों केँ लगभग लेँ जाकर - मगर होंठों सें लगाकर नहि - नथुनों सें धुआं निकालने कां अभियान किया।
" तोँ राजीव जीजू कां अनुष्का नाम कि महिला सें अफेयर हैं। बेचारी श्वेता दि कां फिन क्याँ होगा ? वोँ तौ बेचारी टुट हि जाएंगी। "
" मैंने अभि तौ सारी बातें बताई। राजीव जीजू कां अनुष्का केँ संग इश्क मात्र जिस्मानी हैं औऱ इसके चलतेउन दोनों कि विवाह पऱ कोईअसर नहि पड़ेगा। तुमन केन्द्रित कर क़ातिल ढुढने मे। "
" आप् कि सारी कहानी सुनने केँ बाद क़ातिल होने कां शक पांच लोगों पर्र जाता हैं। "
" कौनकौन ?"
" पहलाशक अनुष्का पऱ जाता हैं। दुसरा उसके पति कुलभूषण खन्ना पर्र। औऱ तिसरा जीजू पर्र। "
" औऱ बाकीदो ?"
" चौथा आप् पर्र। "
" क्याँ बकरही हैं ?"
" हम् केस सें सम्बंधित यदिहर किसी कों शामिल करें तौ उसमें आप् भि आते हें। औऱ आप् कों यदिबाद कर दियाजाय तोँ केवलचार बचते हें। "
" चौथाकौन ?"
" आप् शायदउस गुमनाम आदमी कों भुलगए हें जिसने पुलिस कों पब्लिक बुथ सें वारदात कि सूचना दि थि। "
" ओके। तोँ हमारे पासचार सस्पेक्ट हैं। अबतु बारी बारी सें उनके बारे मे डिस्कसन कर। "
" सबसे पहले अनुष्का केँ बारे मे बात करते हें। "
" बोल। "
" मर्डर पुलिस केँ डाक्टर केँ अनुसार सुभहदस बजे सें लेकर साढ़े ग्यारह बजे केँ बीच मे हुआ हैं। ठीक। "
" हां। "
" औऱ अनुष्का मर्डर केँ वक़्त मौकाए वारदात पऱ मौजूद थि। स्वयं उसी केँ बयान केँ अनुसार वोँ वहां ज़्यादा देर तक रूकी थि। इसलिये उसकेपास मर्डर करने कां भरपूर मौका थां। "
" बिल्कुल सहीमगर खुन करने कां मकसद क्याँ थां ?"
" यहीचीज तोँ इसके पक्ष मे जारही हैं। मगर मर्डर विपन तक इसकी पहूंच तौ शर्तिया थि। इसके हसबैंड केँ पासवही रिवाल्वर हैं जिसतरह कि रिवाल्वर सें अमर कां खूनहुआ थां। "
" ३६ कैलिवर कां रिवाल्वर। औऱ उनके रिवाल्वर सें कारतूस भि कम पाया गय़ा थां। "
" इसका मतलबये हुआ कि अनुष्का केँ पास वारदात कों अंजाम देने केँ लिए मौका भि थां औऱ मर्डर करने केँ लिए हथियार भि। मगर मर्डर करने कां कारण, वजह अभि क्लियर नहि हैं। "
" हूं। अब उसके पति कुलभूषण खन्ना कि बारे मे बोल। "
" कुलभूषण खन्ना केँ पास मर्डर करने केँ लिएवजह भि हैं औऱ हथियार भि उपलब्ध हैं। "
" क्याँ वजह हैं ?"
" वोँ अपनी पत्नि सें बहोत प्रेम करता हैं। जबउसे अपनी पत्नि कि बेवफ़ाई केँ बारे मे पताचला तोँ वोँ अपनाआपा खो दिया औऱ उसकी जासूसी करते करते जीजू केँ फ्लेट मे पहूंच गय़ा। वहां उसने अपनी पत्नि कों अमर केँ बाहों मे देखा औऱ गुस्से मे अमर पऱ गोलीचला दि। "
" मगरअमर पर्र क्यूं ? अनुष्का कि आशनाई तौ जीजू केँ संग थि। अगरउसे मारना होता तोँ जीजू कों मारता। अमर कों क्यूं ?"
" क्यूं अनुष्का कि आशनाई जब जीजू सें हौ सकती हैं तोँ अमर सें क्यूं नहि। क्याँ अमर ईश्वर राम थां, क्याँ वोँ लड़कियों केँ मामले मे कोई महात्मा थां। यह तोँ आप् मुझसे बेहतर जानते होंगे। "
" मगरयह बात अभि सामने कहां आई हैं कि अनुष्का कां सम्बन्ध अमर सें भि थां। औऱ मान लियाउन दोनों केँ बीचआपस मे एक् गहरा सम्बन्ध थां मगर आशनाई करने केँ लिए उन्हें जीजू कां हि घऱ मिला थां। वे औऱ भि कहींमिल सकते थें। जीजू केँ घऱ हि क्यूं ?"
" यह तौ सब कों पता हैं कि श्वेता दि कई दिनों सें यहां अपने मायके मे हैं औऱ जीजूदिन केँ वक़्त अपने आफिस मे होते हें। औऱ आपने हि कहा थां कि फ्लेट कि एक् चाबी अनुष्का केँ पास भि रहती हैं। औऱ यहां दिल्ली सें गाजियाबाद जाने मे ट्रेन सें वक्त हि कितना लगता हैं। "
" मगरउस दिन अनुष्का कि डेट जीजू केँ संग थि। औऱ उसीलिए जीजू नें उसदिन आफिस सें छुट्टी लेकरघऱ आँ गए थें। अगर अनुष्का कि डेटउस दिन पहले सें हि फिक्स थि तोँ भला वोँ क्यूं करअजय केँ संगउसी फ्लेट मे जाएगी। "
" कुछ न् कुछ तोँ हैं जोँ अभि दिखाई नहि देरहा हैं मगरभले हि अभि कुलभूषण खन्ना केँ क़ातिल होने कि वजह नहि दिखरही होँ पऱ हथियार तौ उसकेपास भि हैं औऱ सबसे महत्वपूर्ण बातये हैं कि जिस टाइमकतल हुआ थां उस टाइम केँ लिए उसकेपास कोई एलीबाई, कोई गवाह नहि हैं। वोँ कहता हैं कि उससमय वोँ अपनेघऱ पऱ थां मगरकौन जानता हैं कि वोँ अपनेघऱ पऱ हि थां याँ वहां सें दुर गाजियाबाद मे।
" ओके। अब जीजू केँ बारे मे बता ?"
" जीजू केँ पास भि कत्ल करने कां मौका हासिल थां। "
" केसे ?"
" जीजू नें पुलिस कों दिए बयान मे कहा कि वोँ उससमय दिल्ली सें अपनेघऱ बाइ वाहनलौट रहे थें। उन्हें वहां सें अपनेघऱ तक आते-आते अढ़ाई घंटेलग गए। "
" हां। "
" कौन कहता हैं ?"
" क्याँ मतलब ?"
" यह तोँ जीजूकह रहे हें न्। होँ सकता हैं कि वोँ बहोत पहले हि आँ गयेहों। "
" औऱ ?"
" औऱ उन्होंने अनुष्का कों अमर कि बाहों मे देखा औऱ गुस्से मे अमर कां खूनकर दिया। "
" मगर हथियार। हथियार कहां सें आया ?"
" हथियार कौन सि बड़ीबात हैं। कहीं सें जुगाड़ कर लिया होगा। "
" ओके। अब वोँ चौथा खबरी ?"
" जिस नें पुलिस कों सूचना दि थि क्याँ वोँ मर्द थां ?"
" हां। "
" उसे केसेपता कि इग्जेक्ट जीजू केँ हि फ्लेट मे खूनहुआ हैं ? आप् सबसे पहले तोँ यह बताओ कि उस व्यक्ति नें पुलिस कों क्याँ कहा थां ?"
" मतलब ?"
" मतलबयह कि उसने पुलिस कों पब्लिक बुथ सें क्याँ कहा थां ? कि उसने जीजू केँ फ्लेट मे किसी गोली चलने कि आवाज़ सुनी हैं याँ किसी कां खून होतेहुए देखा हैं याँ किसी झगड़े याँ मारपीट कां अंदेशा हुआ हैं ?"
" यह तौ मुझे नहि पता। " मैंने उदास होकरकहा।
" तोँ यह भि तौ हौ सकता हैं कि उस गुमनाम खबरी नें हि अमर कां खून किया होँ औऱ चूंकि उसनेखून किया हैं तौ उसे बखूबी पता होगा कि उसनेखून कब किया हैं औऱ किसीखास वक्त कां प्रतीक्षा किया औऱ फिन उसने पुलिस कों मोबाइल करके बताया। "
" किसखास वक्त कां ?"
" उसखास टाइम कां जब फ्लेट केँ अन्दर अनुष्का मौजूद पाईजाय याँ उसखास वक्त कां जब आप् फ्लेट केँ अन्दर पाएजाय। "
मेरी आंखें चौड़ी होँ गई।
" तुम्हारे कहने कां मतलब हैं कि उसने पहलेअमर कां खून कियाफिन अनुष्का याँ फिन मुझेउस खून केँ इल्ज़ाम मे फंसाने केँ लिए पुलिस कों इन्फोर्मे किया।
नेक्स्ट रात तक।
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hmmmm!! yeh mystery बहुत ghehri h। और abi too filhaal indono के hisaab से 4 + 1 suspect h। mgr yeh muder jaroori नहीं की एक he vyakti ne किया hu। isko anjaam dene waale 1 से jyaada लोग bi too hu sakte h। और rahi बात Kulbhushan khanna की too woh itne paise wala और khela-khaya आदमी h। और उसकी pahuch bi bade logo tak h। too woh इस काम ko anzaam dene के liye apne हाथ directly kyo gande karega। Shveta didi bi too hu sakti h। isko he kyon suspect की soochi से बाहर rakkha गया h। isne too बहुत he safai से apne liye alibai taiyaar kari h। khud maayke में h। bhay ko saaman laane के liye bheja। and that particular day घर में exact moment पर घर में laash thi and एक suspect already घर में thaa.
isko anzaam dene के liye shveta और kulbhushan khanna aapas में mil bi too sakte h। और anushka और Rajesh ko fasane के liye unke घर में Amar ko marva दिया। और apne hero ko waha us moment पर bhej krr ghawah banwa दिया। bus thodi si timing galt hu gai। Sheveta kaa shauhar थोड़ा late pahucha.
hone ko too बहुत कुछ hu sakta h। क्या ptaa कोई teesra khiladee इस khel में hu.
और एक बात yeh sochne wali h की Sanjay ji की shadi में unpar जब goli chalayi gai thi। क्या ptaa woh goli sanjay पर नहीं balke apne hero पर chalayi gai hu। kyon की uss goli के direction में too अपना hero bi thaa.
क्या ptaa Amar और apne hero ne कुछ aesa देखा hu joo inko नहीं देखना चाहिए thaa। ya yeh कोई aesa raaz jaante hu। jiske kaaran कोई indono ko maarna chaahta hu.
well Versha-ritu ji aapki kahani too gazab की h। और ismein suspense bi rongate khade krr dene wala h। और baate bi।
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Update 18। Continue.
" हां। " - रीतु नें विश्वास केँ संगकहा।
" मगरकौन ? औऱ यदि वोँ मुझे याँ अनुष्का कों फंसाना चाहता थां तोँ क्यूं ? इससे उसको क्याँ हासिल होता ?"
" यह तोँ अभि तहकीकात कि विषय हैं। अच्छा ! एक् बात बताओ ? जीजू केँ फ्लेट कां पुलिस नें फिंगरप्रिंट तोँ लिया होगा ?"
" हां। वहांकुल सात लोगों कां फिंगर बोलो याँ फुट प्रिंट मिला हैं। जिनमें जीजू, श्वेता दि, अमर, अनुष्का औऱ मेरामिल चुका हैं मगर बाकी केँ दो कां मिलान अभि तक नहि होँ पाया हैं। "
" जिनदो लोगों कां मिलान अभि तक नहि हौ पाया हैं उनमें एक् तोँ वोँ खबरी भि हौ सकता हैं। "
" हौ सकता हैं। "
" अमर कि फोन कहां हैं ?"
मे चौंका। मे तोँ अमर केँ फोन केँ बारे मे भुल हि गय़ा थां ।
" यह तोँ मेरेमन सें हि उतर गय़ा थां। मैंने इसके बारे मे पुलिस सें पूछा हि नहि। "- मैंने खेद पूर्वक कहा।
" कोईबात नहि। इसबार पुछ लेना औऱ अमर कि माँ सें भि। "
" अच्छा एक् बातबता आगरा मे संजयजी केँ उपर जोँ हमलाहुआ थां, क्याँ उसका भि अमर केँ कत्ल सें कुछ सम्बन्ध हौ सकता हैं ?"
" मुझे वहां कि सारी बातें फिन सें बताओ। "
मैंने आगरा मे रिसेप्शन मे हुईँ सारी बातें बताईमगर श्वेता दि औऱ मेरेबीच हुइ सेक्स कों छुपा लिया।
" तुम्हें क्याँ लगता हैं संजयजी केँ उपर हमला कां इसकेस सें कोई सम्बन्ध हैं ?"
" आप् कों लगता हैं कि वहां किसी नें संजयजी पऱ गोली चलाई औऱ उन्हें जान सें मारने कां प्रयत्न किया। "
" हां। "
" मगर मुझे तौ कुछ औऱ हि लगरहा हैं। "
" क्याँ ?"
" मुझे तौ लगता हैं कि वहां संजयजी पर्र नहि बल्कि आप् पऱ गोली चलाई गई हैं। उस गोली कां शिकार संजयजी नहि बल्कि आप् होने वाले थें । "
मे सकपकाया। फिन हड़बड़ाया।
" क्याँ बोलरही हैं ?"
" जब गोली चलाई गई तब स्टेज पऱ संजयजी केँ ठीकआगे आप् खड़ थें। मतलब संजयजी आप् केँ ओट मे खड़े थें। आप् नें संजयजी केँ चश्मे केँ प्रतिबिंब सें अपनीतरफ तनी हुईँ रिवाल्वर देखी। आप् नें कुदकर यह निष्कर्ष निकाला कि कोई संजयजी कों मारना चाहता हैं मगर वोँ गोली उन्हें केसे लगती। वोँ तौ आप् कि कवर मे थें। यदि आप् संजयजी कों लिए जमीन पर्र नहि गिरते तोँ गोली आपने लगनी थि नां कि संजयजी कों। "
मे भौंचक्का आंखें फाड़े चुपचाप उसे देखता रहा। मुझे विश्वास नहि होँ रहा थां कि किसी नें मुझे आगरा मे मारने कि कोशिश कि थि।
मे प्रशंसा भरी नजरों सें उसे देखा।
" तब तोँ इसका मतलबयही लगरहा हैं कि दोनों घटनाएं आपस मे जुड़ी हुई हैं " - मैंने कहा।
" हौ सकता हैं औऱ नहि भि हौ सकता हैं। "
मे कुछदेर तक सोचता रहा।
" भइया " - रीतु चिन्तित भरे स्वर सें बोलीं -" कहीं आप् नें कुछऐसी वैसी हरकत तौ नहि नं कर दि जिससे कोई आप् केँ जान कां प्यासा होँ गय़ा होँ। "
" अरे नहि नहि। मैंने कोई भि ऐसी वैसी हरकत नहि कि हें। "
" तौ फिनयह सभी क्याँ हैं ? क्यूं कोई आप् केँ जान केँ पीछे पड़ा हैं ?"
" यही तोँ समझ मे नहि आँ रहा हैं। जरूरकोई किसी केँ मुगालते मे मेरे पीछेपड़ गय़ा हैं। मे एक् काम करता हूं परसो रविवार हैं, उसदिन श्वेता दि औऱ जीजू यहां शिफ्ट होने वाले हें, मे उसदिन वहीचला जाता हूं औऱ पुलिस सें भि मिल लुंगा औऱ उनसेयह सारी बातें डिसकस कर लुंगा। "
" हूं, यहसही रहेगा औऱ आप् एक् काम औऱ करना। "
" क्याँ ?"
" एक् बार अपने बुद्धि सें श्वेता दि केँ फ्लेट कि छानबीन भि कर लेना। वैसे तौ पुलिस पहले छानबीन कर चुकी हैं मगर आप् एक् बार स्वयं बड़ी बारीकी सें जांच लेना। होँ सकता हैं आप् कों कुछऐसा दिखजाए जोँ पुलिस कों न् दिखी होँ औऱ यदि दिखी भि हौ तोँ उन्हें वोँ महत्वपूर्ण जैसी नां लगी हौ। वोँ कहते हैं न् कि मुजरिम कितना भि होशियार क्यूं न् हौ मगर अपने जुर्म कि निशानी कहीं नां कहीं छोड़ हि जाता हैं। "
" एक् महिना केँ आसपास होँ गय़ा, क्याँ इतने दिनों तक कुछ निशानी याँ क्लूबची भि होंगी। इतने दिनों मे तौ कितनों बार बाथरूम हि नहि बल्कि पुरेघऱ कि साफ-सफाई होँ गई होगी। "
" फिन भि आप् देख्ना जरूर। "
" जरूर देखूंगा "- मैंने कहा -" अमर कां कत्ल३६ कैलिवर केँ रिवाल्वर सें हुआ हैं। तु कहती हैं कि काजल केँ डैड केँ पास भि रिवाल्वर हैं। क्याँ तुने वोँ रिवाल्वर देखी हैं ? क्याँ वोँ ३६ कैलिवर कि रिवाल्वर हैं ?"
" काजल केँ डैड केँ पास रिवाल्वर तोँ हैं मगर वोँ कौन सि रिवाल्वर हैं, यह मुझे नहि पता। मुझे रिवाल्वर कि किसी भि क्वालिटी केँ बारे जानकारी नहि हैं। "
मे कुछ नहि बोला।
" क्याँ आप् कों काजल केँ डैड पऱ शक हैं ?"
" नहि। मे बस जानकारी केँ लिएपुछ रहा थां - मैंने कहा -" मगर दिल्ली जैसेशहर मे गन कां लाइसेंस मिलना बड़ी मुश्किल काम हैं, जबकि यहां हम् देखरहे हें कि जोँ तौ गनलिए घुमरहा हैं।
" गन होना बड़ीबात तौ हैं हि, मगरउसे हैंडल करना भि बड़ीबात हैं। इतना भि आसान नहि हैं कि हरकोई गन सें टारगेट करसके। जिसतरह सें अमर केँ सीने मे बिल्कुल दिल केँ लगभग गोली मारी गई थि औऱ जैसा कि आगरा मे हुआ थां उससे तोँ यही लगता हैं कि वोँ व्यक्ति बहोत अच्छी तरह सें गन हैंडल करता हैं। "
" हां। बिल्कुल परफेक्ट निशाना साधा थां, वोँ तौ क़िस्मत अच्छी थि कि मैंने चश्मे मे देख लिया। "
" भइया मुझे बहोत डरलगरहा हैं। आप् प्लीज सावधानी सें रहिएगा। " - वोँ भावुक होकर बोलीं ।
" अरे क्यूं चिंता करती हैं, कुछ नहि होगा मुझे। मुझे मरना होता तोँ मे उसीदिन मर गय़ा होता। मेरा ग्रहण खतम होँ गय़ा हैं औऱ अब सें उस मादरचोद कां ग्रहण शुरुआत होने वाला हैं। " - मैंने शुष्क लहजे मे कहा।
" आप् पुलिस प्रोटेक्शन क्यूं नहि लें लेते। "
" पुलिस जिसतिस कों प्रोटेक्शन थोड़ी नं दे देती हैं। औऱ क्याँ कहेंगे पुलिस सें ? अभि हमने जोँ भि डिस्कसन किया हैं वोँ तोँ हमारी इमेजिनेशन हैं। औऱ वैसे भि तुम्हें इतना भि डरने कि जरूरत नहि हैं। कोई धोखे सें कुछकर दे तोँ बातअलग हैं। वैसेयु नो.आयम मार्शल आर्ट्स एंड ब्लेक बेल्ट होल्डर। पांचसात सें तौ ऐसे हि निपट लुंगा। "
वोँ कुछ बोलि नहि, मात्र आगे बढ़कर मेरीगले लग गई। मैंने भि उसे अपने बाहों मे कस लिया। थोड़ी देर हम् ऐसे हि पड़ेरहे फिन वोँ मुझसे अलग हौ गई औऱ बोलीं - " तोँ अब आप् क्याँ करोगे ?"
" करूंगा नां। कुछ नाँ कुछ तोँ जरूर करूंगा। पहले इंस्पेक्टर कोठारी सें मिलता हूं फिनबाद कि प्लानिंग करेंगे। "
" फिन भि क्याँ सोचे हौ ?"
" सब कि जन्म कुंडली निकालूंगा, फिन देखते हें। "
वोँ कुछ नहि बोलीं।
अचानक मुझेकुछ यादआया।
" चाची कि फोन भि चोरी हौ गई हैं। "
" क्याँ ? कब ?"- वोँ चौंकते हुए बोलि।
" जिसदिन उर्वशी कि विवाह थि। "
" औऱ उसीदिन सुभहअजय कां खूनहुआ थां "- वोँ अचरजभरे स्वर मे बोलि।
" हां। "
" क्याँ इसका भि ताल्लुक इसकेस सें हैं ?" - वोँ सवाल सूचक दृष्टि डालते हुए बोलि।
" कह नहि सकता। होँ सकता हैं कि यह एक् इत्तफाक हौ। मगर अभि जैसी परिस्थितियां हें उसमें किसी भि बात कों नजरंदाज नहि कियाजा सकता। "
मैंने कुछदेर तक सोचाफिन बोला -" जिसदिन अमर कां कतल औऱ रात मे उर्वशी कां विवाह होना थां, उसदिन यहां कि कंडीशन कैसी थि। मतलब हमारे घऱ मे। चाची केँ घऱ मे। "
" जहां तक मुझेयाद हैं आप् सुभहदस बजेडैड कि वाहन लेकर यहां सें श्वेता दि केँ घऱ जाने केँ लिए निकलगये थें। औऱ आपसे पहले हि डैड आफिस केँ लिए निकलगये थें। मे उसदिन कालेज नहि गई थि, दिनभर घऱ पर्र हि थि। आपके निकलने केँ आधे घंटेबाद चाची औऱ श्वेता दि आँ गई थि। फिन माॅम, चाची, श्वेता दि औऱ मे गपशप करनेलगे। "
" कैसीगप शप ?"
" खासकुछ नहि, औरतों वालीबात। फिन लगभगआधे घंटेबाद हि चाची चली गई। "
" क्यूं ?"
" बोलि तबीयत थोड़ी ठीक नहि हैं। "
" हूं, फिन ?"
" फिन चाची केँ जाने केँ पौन घंटेबाद श्वेता दि भि चली गई। बोलि ब्यूटी पार्लर जानां हैं। क्योंकि उसदिन उनकी सहेली उर्वशी कि विवाह जौ थि। "
" औऱ चाचा, राहुल ?"
" राहुल तौ अपने विद्यालय मे थां औऱ चाचा ड्यूटी पऱ। "
" चलठीक हैं " - मैंने घड़ी मे टाईम देखते हुएकहा -" मेरा क्लब जाने कां समय होँ गय़ा हैं, निकलता हूं अब। "
" दो मिनटरुक जाओ मे गरमचाय बना देती हूं। "
मैंने हां मे सर हिलाया। वोँ नीचेचली गई। उसके जाने केँ बाद बाथरूम मे जाकरहाथ मुंह धोयाफिन नीचेहाल मे जाकर सोफे पऱ बैठ गय़ा। माॅम अभि अपने कमरे सें बाहर् नहि निकली थि।
गरमचाय पीकर अपनी बाइक सें क्लब निकल गय़ा।
साम कों साढ़े सातबजे जब मे घऱआया तबसब मतलबडैड, माॅम औऱ रीतु कों हाल मे बैठेगहन मुद्रा मे विचार विमर्श करतेहुए पाया।
" क्याँ बात हैं ? सब इतने गम्भीर क्यूं बैठे हें ?"- मैंने डैड कि तरफ देखते हुएकहा।
" तुमने दिन मे रीतु सें जोँ बातें कि थि, उन्हीं कों लेकर चर्चा होँ रही हैं। " - डैड नें चिन्तित होँ करकहा।
" भइया " - रीतु बोलीं - " मैंने सारी बातें माॅमडैड कों बता दि हैं। "
" तुमने हमेंयह सभी पहले क्यूं नहि बताया ?" - डैड नें कहा।
" आप् सब कों सारी बातें तौ पता हि थि। अमर केँ मर्डर केस केँ बारे मे आप् सभी जानते हि हें। औऱ आगरा मे जौ हुआ थां, वोँ भि मैंने माॅम कों बताया थां " - मैंने माॅम कि तरफ देखते हुएकहा -" क्यूं माॅम बताया थां न् ?"
" हां बताया थां " - माॅम नें कहा -" मगरयह थोड़ी न् बताया थां कि वहां तेरी मारने कि कोशिश कि गई थि। "
" अरे माॅम, मुझे भि कहां पता थां कि वहां मुझे मारने केँ लिए कोशिश कि गई थि। रीतु सें बात करने सें पहले मे भि यही समझता थां कि वहां संजयजी कों मारने केँ लिए गोली चलाई गई थि। "
" भइयासही बोलरहे हें माॅम " - रीतु नें कहा - " मैंने बताया तौ थां आप् लोगों कों सारी बातें जौ भइया औऱ मेरेबीच मे हुइ थि। "
" हैं कौन वोँ जौ तुम्हारे पीछे पड़ा हैं। " - डैड नें कहा।
" मे " - रीतु नें कहा - " गरमचाय बना केँ लेँ आती हूं। "
रीतु रसोईचली गई।
मे, डैड औऱ माॅम केँ संग - जोँ बातें दिन मे रीतु केँ संग हुईँ थि - वहीसभी बातें होनेलगी।
रीतु केँ आने केँ बाद भि वहीसभी चर्चा होतीरही।
डिनर कां टाइम होँ गय़ा थां। हमने एक् संग डिनर किया।
मैंने डिनर केँ वक़्त सबको समझाया कि यह सारी बातें हमारे बीच मे हि रहनी चाहिए। कोई भि किसी कों इसके बारे मे किसी कों नहि बतायेगा। सब नें मेरीराय सें सहमति जताई।
डिनर केँ पश्चात सब अपने अपने कमरे मे चलेगए। मे भि अपनेरूम मे जाकर कपड़े वगैरह चेंजकर केँ खाट पर्र लेट गय़ा।
रीतु केँ बातों नें मुझे झकझोर केँ रख दिया थां।
कौन हैं वोँ जोँ मुझे मारना चाहता हैं ?
कौन हैं वोँ जौ मुझेअमर केँ कतल मे फंसाना चाहता हैं ?
आखिर मैंने ऐसा किया क्याँ हैं ?
कौन हैं जोँ मेरा इतना बड़ा दुश्मन बना बैठा हैं ?
अमर नें क्याँ किया थां कि उसेजान सें हाथ धोना पड़ा।
अगर हमनेकुछ ग़लत भि किया थां तोँ वोँ केवल औऱ केवल सेक्स।
मगर सेक्स भि किया तोँ किसी कों दबाव देकर नहि बल्कि उन युवतियों केँ रजामंदी सें। कभी ड्रीम्स मे भि जबरदस्ती कां ख्याल नहि आया।
क्याँ अमर कां अनुष्का केँ संगसच मे रिलेशनशिप थां ।
मगरयदि अमर कि रिलेशनशिप अनुष्का केँ संग थि भि तोँ फिन मे टारगेट क्यूं।
केवल एक् युवती थि जिसके संग मैंने औऱ अजय नें एकसाथ सेक्सुअल रिलेशनशिप बनाया थां मगर वोँ भि कईसाल पहले। शायदचार साल होँ गए होंगे। मगर हमनेकोई जबरदस्ती तोँ नहि कि थि बल्कि उसी कि ख़्वाहिश थि कि थ्रीसम करने कि।
तोँ फिन आखिर मे अजय औऱ मेराकौन ऐसा काॅमन आदमी हैं जोँ हमें दुश्मन समझता हैं।
कौन हैं वोँ चौथा व्यक्ति जिसने पुलिस कों अमर केँ खून होने कि सूचना दि।
कौन हैं वोँ खबरी।
मैंने काजल कों कहा थां कि रात मे चैटिंग करेंगे मगरइन परिस्थितियों मे मे स्वयं हि टेंशन सें भराहुआ थां। मैंने काजल कों एक् मैसेज कर दिया।
औऱ मे घंटों सोचते सोचते वक्त गुजार दिया।
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