maira Pyara Devar - niyantran – New Episode
UPDATE 35
डिनर केँ बादरमा दिदी, निशा औऱ मे, हम् तीनों एक् हि बेडरूम मे आँ गये.रमा दिदी नें मुझे एक् बड़ा सां ग्लास बादाम औऱ केसरडाल केँ दूध दिया औऱ हँसकर कहती हें.
रमा दिदी – अंकुश लोयह केसर बादाम वालादूध मैंने स्पेशल तुम्हारे लिए बनाया हैं। आज सारीरात तुम्हें बहोत मेहनत करनी हैं। आज तुम्हें हम् दो जवान औऱ सेक्सी लड़कियों कि मस्त पलंगतोड़ चुदाई कर केँ बुर चोदनी हैं.
निशायह सुनकर मुझेआँख मार देती हैं। दूध पीने केँ बाद हम् तीनों फिन सें चुदाई मे जुटगये, मगर एक्-एक् राउंड करके हि हम् जल्द हि नींद मे डूबगये। इसतरह पूरे हफ्ते हम् तीनों नें आलोक जीजू केँ आने तक थ्रीसम चुदाई कां भरपूर मजा लिया.
रमा ऐसे कॉपरेटिव भैया-भाभी पाकर फूली नहि समारही थि, क्योंकि उसकीअब तक कि अधूरी प्यास अच्छे सें बुझरही थि। निशा भि बुर चुदवाने केँ ज्यादा मौकेरमा कों देरही थि। रमा केँ यह पूछने पऱ कि वोँ ऐसा क्यूं कररही हैं तोँ निशा नें कहा.
निशा - रमा दिदी… अंकुश कां लौड़ा मतलब घोड़ा तौ मेरेनाम रिजिस्टर्ड हि हैं, जिसे मे जब चाहूं दौड़ा सकती हूं। मगर मेरी प्यारी ननदी कों फिनकब ऐसा मौका मिलेगा??
निशा कि बात सुनकर रमा गदगद होँ उठी औऱ उसने निशा कों अपनेगले सें लगा लिया.इसी बीच हम् नें निशा कों दिल्ली दर्शन भि कराए, सिनेमा देखने भि गये औऱ फिन एक् दिन मे उन दोनों कों लेकर अपने गुरु औऱ आंटी सें मिलने भि गय़ा। उन्होंने उन दोनों कों अपनीबहू औऱ बेटी जैसा हि प्रेम दिया। सारेदिन अपनेपास रखा, वहीं सें नेहा कों मोबाइल करके भि बुला लिया। नेहा, निशा औऱ दिदी सें मिलकर बहोत खुश हुईँ। फिन लौटते समय वोँ उन दोनों कों उपहार देना नहि भूले.
आलोक जीजू केँ लौटने केँ बाद एक् दिनरुक कर मे औऱ निशा अपनेघऱ लौटलिए। साम तक हम् घऱ लौटे, जहाँ एक् खुशी हमारा बेसब्री सें प्रतीक्षा कररही थि, घऱभर मे खुशी कां माहौल थां। सबसे पहले हमें छोटी चाची मिली औऱ उन्होंने हमें बताया कि मोहिनी बहू मम्मी बनने वाली हैं। हम् दोनों हि लपककर उनके कमरे मे गये। देखा तोँ राम भैया उनकेपास बैठेहुए थें औऱ बड़ेखुश दिखाई देरहे थें। देखते हि उन्होंने मुझेगले सें लगा लिया औऱ खुशी सें कांपती आवाज़ मे बोले.
राम भैया - अंकुश मेरे भइया! तूँ फिन एक् बार चाचा बनाने वाला हैं.
मैंने खुशी सें उछलते हुएकहा – सच भैया!! यह तोँ बड़ी खुशी कि बात हैं…
उसकेबाद मे मोहिनी भाभी केँ पास गय़ा, जहाँ दोनों बहनें एक् दूसरे केँ गलेलगी हुइ थि.
मैंने कहा - मोहिनी भाभीइस बार मुझे नन्हा-मुन्ना प्यारा सां भतीजा चाहिए। क्यूं रुचि बेटा तुम्हें अपनेलिए छोटा सां भइया चाहिए नाँ??
रुचि नें हां मे अपनी गर्दन हिलाई औऱ बोलीं – माँ मुझे छोटा भइया दोगी नां??
भाभी नें मुस्करा करकहा – बेटा। यह तोँ ईश्वर जी हि जाने, भइया होगा याँ छोटी सि गुड़िया.
इसतरह हँसी खुशी सबने मिलकर मोहिनी भाभी औऱ राम भैया कि खुशी कों बाँटा.
अकेले मे मोहिनी भाभी नें मेरेकान मे कहा – यह तुम्हारे उसदिन कि जबरदस्त चुदाई कां फल हैं अंकुश…
यह सुनकर मे मोहिनी भाभी केँ मुँह कि तरफ ताकता हि रह गय़ा। मोहिनी भाभी मुस्करा कर…
मोहिनी भाभी – अंकुश ऐसे क्याँ देखरहे होँ?? मे सचकहरही हूं… भला मां सें ज्यादा किसेपता होगा कि उसके बच्चे कां बाप कौन हैं?? क्याँ यह सुनकर तुम्हें खुशी नहि हुईँ??
मे – नहि मोहिनी भाभी, ऐसी बात नहि हैं पऱ मुझे विश्वास नहि होँ रहा.
मोहिनी भाभी – अपनी भाभी कि बात पर्र भि नहि?
मे – अब आप् कह रहीं हें तौ अवश्य सही हि होगा। वैसे आप् खुश तोँ हें?
मोहिनी भाभी नें मेरेगाल कों कचकचाकर काट लिया औऱ फिनउसे चूमते हुए बोलीं – बहोत सें भि अधिक… मेरे होने वाले बच्चे केँ पिताजी जी… तुम्हारा अंश अपनीकोख मे पाकर मे खुश क्यूं नहि होऊंगी भला??
मैंने मोहिनी भाभी केँ डिंपल मे अपनीजीभ कि नोक डालकर कहा – क्यूं भाभी??ऐसी क्याँ खासबात हैं मेरेअंश मे??
मोहिनी भाभीबड़े हि प्रेम सें मेरे लौड़े कों सहलाकर बोलि – दो रिज़ल्ट सामने हें इसके, फिन भि पूछरहे हौ??
मोहिनी भाभी कि इसबात पर्र मे हँस पड़ा औऱ भाभीमन हि मनखुश होती हुई किचन कि तरफचली गयीँ,। उसदिन केँ बाद मेरे अंदर एक् अजीबतरह कि उत्तेजना सि रहनेलगी। मेराअंश मोहिनी भाभी कि कोख मे लम्हा रहा हैं, यह सोचकर मे अजीब सें रोमांच सें भर गय़ा। इसी खुशी केँ संग मे मन लगाकर अपनेकाम मे लग गय़ा औऱ रेग्युलर कोर्ट औऱ दफ़्तर जानेलगा.
ईश्वर दास गुप्ता जी कां लीगल एडवाइजर होने केँ नाते, अब मेरा उनके दफ़्तर औऱ घऱ आनां जानां अकसरलगा रहता थां। कई एकड़ मे बनी शानदार कोठी मे उनका 4 प्राणियों कां छोटा सां परिवार औऱ कई सारे नौकर चाकर जिनके लिए रहने कों सर्वेंट क्वॉर्टर्स भि कोठी केँ पीछेबने हुए थें.
48 वर्षीय ईश्वर दास गुप्ता जी धर्म-कर्म कों मानने वाले। उनका सुभह कां वक्त ज्यादातर पूजा-पाठ मे हि जाता थां, ख़ासतौर सें मैया लक्ष्मी केँ घोर उपासक थें गुप्ता जी। मां कि कृपा भि खूब थि उनकेउपर, धन दौलत कि कोईकमी नहि थि, बसकमी थि तोँ वक्त कि जिसके लिए उनका परिवार हमेशा तरसता रहता थां.
उनकी 45 वर्षीय पत्नि शांति, एक् भारी-भरकम स्त्री, जिस्म सें तोँ इतनी नहि मगर स्वभाव सें। बसनाम कि हि शांति देवी थि, बाकी तौ घऱ केँ नौकरों औऱ यहा तक बच्चों केँ लिए तौ वोँ चंडिका देवी थि। गुप्ता जी भि उनके सामने अधिक बोलने कि गुस्ताख़ी नहि करते थें। एकदम कड़क तीखी आवाज़, घऱ केँ किसी भि कोने मे शांति जब किसी कों डाँटती थि, तोँ उनकी आवाज़ करीब-करीब कोठी केँ हर कोने मे पहुँचती थि, जिससे सबकेकान खड़े होँ जाते.
24 वर्षीय बेटा संकेत अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट करके बिज़नेस मैनेजमेंट कां कोर्स कररहा थां। जिससे आगे चलकर अपने पिता केँ कारोबार कों सुचारु रूप सें संभाल सके.
बेटी खुशी, 19 साल कि, इसी वर्ष कालेज मे पहुँची हैं, बी.कॉम। करने। शुरुआत सें हि थोड़ी दोहरे शरीर कि हैं। ज्यादा नहि मध्यम कद केँ संग शायद 34-30-34 कां फिगर होगा.कभी मापने कां मौका नहि लगा अभि तक। अधिक गोरी तौ नहि पऱ साफरंग हैं। अपनी मां केँ जैसा, गोल मटोल चेहरा, किसी गुड़िया कि तरह। देखने मे हि बहोत मासूम औऱ भोली-भाली सि लगती हैं। बेचारी सिर्फ़ नाम कि हि खुशी हैं, बाकी उसकेलिए खुशी दूर-दूर तक नहि थि। बस थोड़ा बहोत हंसखेल लेती हैं, जब उसका भइया याँ पिताजी संग मे हों तौ। नाँ अधिक सज-संवार सकती हैं, औऱ नाँ ज्यादा मॉडर्न कपड़े पहन सकती हैं। मम्मी कि इंस्ट्रक्शन, यहमतकरो। वोँ मतकरो। यह क्यूं किया?? वग़ैरह। वग़ैरह। यूनो.
हां बेटे कों वोँ बहोत चाहती हैं, उसकीहर बात मानी भि जाती हैं, करने कि छूट भि हैं। गुप्ता जी बेचारे कों इनसभी चीज़ों सें कोई सरोकार नहि कि उनकेघऱ मे क्याँ चलता रहता हैं, क्याँ नहि। वोँ बस अपनीधन कमाने कि दुनिया मे हि मस्त रहते हें.
एक् दिन मे सुभह-सुभह एक् ज़रूरी काम सें उनकेयहा गय़ा थां। गुप्ताजी रोज़ कि तरह पूजापाठ मे लगे थें, मे हॉल मे बता उनका प्रतीक्षा कररहा थां। नीचे सेठानी शांति केँ रूम सें तेज-तेज आवाज़ें आँ रही थि। शांति अपनी बेटी कों डाँटरही थि, वैसेयह उनकी नॉर्मल आवाज़ थि… हां!
शांति – तुँ आएदिन कालेज मिस करती रहती हैं, बात क्याँ हैं?? ऐसे तौ केसेकर पाएगी अपना कोर्स पूरा???
खुशी – मे अपनेसर सें ट्यूशन मे कर लूँगी, मगर मुझे नहि जानां कालेज.
शांति – मगरबात क्याँ हैं? तुँ कालेज केँ नाम सें इतना डरती क्यूं हैं??
खुशी – कालेज केँ लफंगे लड़के बहोत परेशान करते हें.
शांति – अरे तुम कोउन लफंगों सें क्याँ लेना-देना?? सीधीजा औऱ सीधी आँ। औऱ फिनकोई तकलीफ़ हैं तोँ संकेत कों भि बोल सकती हैं, वोँ भि तौ वहा होता हि हैं.
खुशी – मैंने बताया थां भैया कों। मगर उन्होंने भि कुछ नहि किया.कुछ गुंडे टाइप केँ लड़के हें, जोँ किसी कि नहि मानते.
शांति – अब परेशान तौ करेंगे हि… इत्ति सि उमर मे, देख अभि सें कैसा पहाड़ जैसा सीना हौ गय़ा हैं तेरा…कुछ ग़लत हरकतें तोँ नहि करनेलगी हैं??
खुशी – क्याँ मां?? अनाप-शनाप बोलती रहती होँ… स्वयं नें हि तौ जबरदस्त खिला-खिलाकर मोटाकर दिया हैं मुझे.अब इसमें मेरी क्याँ ग़लती हैं.
शांति – चलठीक हैं, तेरे पिताजी सें बात करती हूं, वोँ प्रिन्सिपल सें बातकर लेंगे.
इसकेबाद खुशीहॉल मे सें होती हुई ऊपर अपनेरूम मे चली गयीँ,। ऊपर जाने केँ लिएहॉल सें एक् बड़ा सां गोलाई लिए स्टेर्स थें। मेरी नज़र खुशी केँ थिरकते हुए भारी भरकम कूल्हों पर्र जम गई,। सच मे इसउमर मे खुशीकुछ ज्यादा हि गदराई सि हौ गयीँ, थि। मगर खुशी कि बात भि सही थि, अब लाड़ प्रेम मे खिला-पिला केँ ऐसाकर दिया तोँ इसमें खुशी बेचारी भि क्याँ करे??
गुप्ता जी केँ घऱ मे मुझेसब नौकरयहा तक कि उनके दोनों बच्चे भि वकील भैया बोलते थें। खुशी केँ पीछे-2 शांति भि बाहर् आई। मैंने नमस्कार किया औऱ गुप्ता जी केँ बारे मे पूछा तौ वोँ बोलीं.
शांति – अरे भइया, उनका क्याँ ठिकाना कब तक निपटाते हें?? तुम् ऐसाकरो दफ़्तर मे हि मिल लेना मे उन्हें बोल दूँगी, कि तुम् आए थें.
इतना कहकर शांति किचनघऱ कि तरफबढ़ गई, औऱ मे उठकरवहा सें चलने कों हुआ, कि तभी खुशी मुझे नीचेआती हुईँ नज़रआई। खुशी केँ चेहरे सें लगरहा थां कि वोँ कुछ परेशान हैं। वैसे उसकी तकलीफ़ कि वजह मुझेकुछ–2 पतालग हि गयीँ, थि, फिन भि मैंने उसे आवाज़ दि.
मे - अरे खुशी। कैसी हौ??
खुशी थोडा दुखीमन सें बोलि – ठीक हि हूं वकील भैया, आप् सुनाओ… बापू सें मिलने आए थें??
मे – हां, पऱ वोँ तोँ पूजा सें हि फारिग नहि हुए। वैसे नां जाने क्यूं मुझेऐसा लगरहा हैं कि तुम् कुछ परेशान हौ.
खुशी – जाने दीजिए भैया, अबघऱ मे हि मेरी किसी कों परवाह नहि हैं तोँ आपको बताने सें क्याँ फ़ायदा??
मे – मुझे भि तुम् अपनेघऱ कां हिस्सा हि समझो। नौकर हूं तौ क्याँ हुआ?? हौ सकता हैं मे तुम्हारी कोई सहायता कर सकूँ.
खुशी – कालेज मे कुछ आवारा टाइप केँ लड़के हें। अकसर लड़कियों कों छेड़ते रहते हें। अभि तक तोँ बातों सें छेड़ते थें, मगरअब तोँ वोँ…
खुशी बोलते-बोलते चुप होँ गई,। मे उसके चेहरे कि तरफ देखने लगा तोँ उसने अपनी नज़रें नीचीकर ली औऱ अपना होंठ काटने लगी। मैंने उसेआगे बोलने केँ लिए कुरेदा
मे – मगर??मगर?? अब क्याँ हुआ खुशीकहो। देखोमान सको तोँ मुझे भि अपना भइया समझो औऱ अपनी तकलीफ़ खुलकर बोलो.
खुशी – केसे कहूँ वकील भैया??? कहतेहुए भि लज्जा आती हैं। अब तौ वोँ हरामज़ादे हमारे कहीं भि हाथलगा देते हैं… कभी पीछे, तोँ कभी…
मे – बस मे समझ गय़ा खुशी, मगर तुम् लोगों नें प्रिन्सिपल सें शिकायत नहि कि??
खुशी – कि थि, मगर थोडा बहोत डाँट फटकार कर उन्होंने छोड़ दिया.
मे – संकेत कों बताया??
खुशी – संकेत भैया तोँ बहोत बड़ा वाला फट्टू हैं… भैया उन लोगों केँ डर कि वजह सें कुछ कहता हि नहि.
मे – कहां रहते हें वोँ लफंगे??
खुशी – वहीं बॉयज हॉस्टल मे। वोँ 4 लड़के हें जौ 2-2 केँ हिसाब सें दोरूम मे रहते हें.
फिन उसने उनकेनाम औऱ रूम नंबर भि बताए.
मे – तुम् बिंदास कालेज जाओ…कल सें वोँ लौन्डे तुम्हें कुछ नहि कहेंगे… मगरहां! इसबात कां जिक्र तुम् किसी सें नहि करोगी, अपनेघऱ मे भि किसी सें नहि। ओके???
खुशी नें हां मे अपनी गर्दन हिला दि, फिन मे वहा सें कोर्ट कि तरफ निकलआया। कुछ इम्पोर्टेन्ट केस निपटाकर मे गुप्ता जी केँ दफ़्तर चला गय़ा। उनकेसंग ज़रूरी डिसकस कर केँ मे अपने फ्लैट मे आँ गय़ा जोँ गुप्ता जी नें मुझे रहने केँ लिए दिया थां.
इन लफंगों कां कुछ तौ करना पड़ेगा, यह सोचकर मैंने कुछ ज़रूरी समान लिया औऱ कालेज बंद होने केँ बाद एक् चक्कर हॉस्टल कां लगाया। बिना किसी कि नज़र मे आए केसेउन लोगों तक पहुंचा जा सकता हैं, यहसभी देखभाल कर मे वापसलौट आया। वोँ दोनों कमरे ग्राउंड फ्लोर पर्र हि थें। हॉस्टल कि पिछली बाउंड्री वॉल थोड़ी ऊँची थि, कोई 10-12 फीट, मगर कोशिश करके अंदर जायाजा सकता थां। रात लगभग 11 बजे मे पीछे कि बाउंड्री वॉल फांदकर हॉस्टल कंपाउंड मे दाखिल होँ गय़ा। इस वक्त मेरे जिस्म पऱ ऊपर सें नीचे तक काला स्याह लबादा थां, चेहरा भि स्याह कपड़े सें ढँकरखा थां। मैंने पीछे कि दीवार सें उनके कमरे कि आहटली। एक् कमरे मे शांति थि, मगर दूसरे कमरे सें विंडो कि झिर्री सें लाइट भि आँ रही थि औऱ कुछ आवाज़ें भि। अब हॉस्टल कि विंडो, सील टाइट तौ होने सें रही, कुछ दिनों केँ बाद अंदर कि छिटकनी लगना भि मुश्किल होती हैं। यह सोचकर मैंने विंडो केँ ऊपर अपनेहाथ कां थोडा सां दबाव डाला, तोँ उसका एक् पाट हल्का सां खुल गय़ा। अंदर कां जायज़ा लिया, तोँ मेरे चेहरे पर्र मुस्कान आँ गई.
विंडो कां पाट खुलते हि, अंदर सें चरस कि स्मेल केँ संग धुआँ बाहर् आया, अंदर वोँ चारों हि मौजूद थें, जौ चरस कि सिगरेट मे कस पे कस लगाएजा रहे थें औऱ सबसेखास बात कि चारों केँ जिस्म पऱ एक् भि कपड़ा नहि थां। दो लड़के घुटनों पऱ थें औऱ दोउन दोनों कि गान्ड मे अपने-2 लन्ड डालकर उनकी गान्ड कि धुनाई करने मे लगेहुए थें। चरस कि सिगरेट अलग-2 चारों केँ मुँह मे लगी हुईँ थि, बीच-बीच मे उनके मुँह सें आहें, मज़े कि कराहें भि निकल जाती.सीन देखकर तोँ मजा हि आँ गय़ा। अबइन मादरचोदों कों लाइन मे लाने केँ लिए मुझे ज़्यादा कुछ नहि करना थां। बसजेब सें फोन निकाला औऱ शुरुआत कर दि रिकॉर्डिंग। एक् बारजब वोँ दोनों उनदो कि गान्ड मे झड़गये, तोँ सीन चेंज हौ गय़ा, अब वोँ उन दोनों कि गान्ड माररहे थें। मस्त गान्ड मराई कां वीडियो बन गय़ा। फिनजब उनकाखेल खतम होँ गय़ा, तोँ चारों नंगे हि अपनी-अपनी टाँगें लंबी करके फर्श पऱ पसरगये। उनके झड़ेहुए ढीले लन्ड किसीमरे चूहे जैसे कमरे केँ फर्श पर्र पड़े थें.
अब मुझे भि एंट्री मार देनी थि, तौ घूमकर चुपके सें गैलरी मे आया औऱ जाकर हल्के सें डोरनोक कर दिया.डोर खटखटाने कि आवाज़ सुनकर वोँ चारों उछल पड़े, फिन कुछदेर बाद उनमें सें एक् नें पूछा – कौन?
मैंने थोडा आवाज़ चेंज करकेकहा – वॉर्डन, गेट खोलो.
सुनते हि उनकेहोश गुम हौ गये, झट-पट अपने फ्रेंची पहने औऱ फिनदो मिनिट केँ बाद एक् नें डोरखोल दिया। जैसे हि गेट खुला, मेरा जबरदस्त घूँसा उसगेट खोलने वाले कि नाक पऱ पड़ा.कुछ तोँ नशे कि हालत, गान्ड मराई कि थकान, ऊपर सें एक् जोरदार घूँसा नाक पऱ पड़ते हि उसकीनाक सें खून कि तेजधार फुट पड़ी औऱ वोँ चीख मारते हुए कमरे केँ बीच मे जाकर गिरा। वोँ तीनों भि अपने सामने एक् नकाबपोश कों देखकर भौंचक्के सें रहगये, ऊपर सें उनका मित्र लहूलुहान पड़ा दर्द सें उतावलापन रहा थां.
इससे पहले कि वोँ अचानक पैदा हुई इसनई सिचुएशन कों समझते तब तक मैंने अंदर सें गेटबंद कर दिया औऱ उन तीनों कि तरफसधे हुए कदमों सें बढ़ा.नशे मे उन तीनों कि टाँगें काँपने लगी, फिन उन्हें कुछहोश आया कि हम् तौ 4-4 हें, यह अकेला क्याँ हमारा उखाड़ लेगा, यह सोचते हि उनमें सें एक् बोला - कौन हौ तुम्? औऱ यहा हमारे कमरे मे आकर हमारे संग हि मार-पीट क्यूं कररहे होँ?
मे – कालाचोर… सुना हैं तुम् लोगों केँ कुछ अधिक हि पर्र निकलआए हें। इसलिये सोचा थोडा कुतरदिए जाएँ तौ अच्छा रहेगा। क्यूं ठीक हैं नां??
अब तक वोँ चौथा भि अपनीनाक कां खून पोंछते हुएउठ गय़ा थां। ठीक तोँ अब हम् तुझेही करेंगे हरामज़ादे, यह कहकर वोँ चारों मेरेऊपर एक् संग झपटे.
मैंने फुर्ती सें अपनी स्थान छोड़ दि, झोंक-झोंक मे वोँ चारों एकदूसरे मे हि उलझगये। इसका फ़ायदा उठाकर मैंने बिजली कि सि तेज़ी सें उन चारों कि धुनाई शुरुआत कर दि। उनमें सें एक् भि इस हालत मे नहि थां, जौ मेराहाथ पड़ने केँ बाद जल्दी सामना करपाए। फिन मैंने अपने लिबास सें पीठ पर्र बँधेहुए 3/4" केँ एक् लोहे केँ पाइप केँ टुकड़े कों निकाला औऱ उनकेहाथ पेर तोड़ना शुरुआत कर दिया। 15 मिनिट मे हि वोँ चारों कमरे मे पड़े कराहरहे थें, किसी कि टाँग फ्रैक्चर थि, तोँ किसी कां हाथ.हाथ जोड़े वोँ मेरे पैरों मे पड़ेदया कि भीख माँगरहे थें.
मैंने उनमें सें एक् कों गिरेबान सें उठाया औऱ सर्द लहजे मे कहा – आइन्दा तुम् लोगों मे सें कालेज मे किसी भि लड़की केँ संग बदतमीजी कि, तौ समझ लेना, वोँ हाल करूँगा कि किसी कों मुँह दिखाने केँ लायक नहि रहोगे.
फिन मैंने फोन कि क्लिप ऑन करके उनके सामने कर दि औऱ कहा - यह देखो, तुम् लोगों केँ कुकर्म पूरे कालेज मे सभीलोग देखरहे होंगे औऱ तुम् पर्र थूकरहे होंगे.
वीडियो देखकर उनकी रही-सही हवा भि सरक गई,। वोँ मिन्नतें करनेलगे, प्लीज़ यह वीडियो किसी कों मत दिखाना। वरना हम् किसी कों मुँह दिखाने लायक नहि रहेंगे। आप् जोँ कहेंगे हम् वैसा हि करेंगे। आज सें कालेज कि हर लड़की हमारी बेहन होगी.
मैंने उनको धमकाते हुएकहा - औऱ बेहन केँ संग क्याँ करते हें?? तोँ अबअगर कोई औऱ भि किसी लड़की कों छेड़े तोँ तुम् लोग उसकी सहायता करोगे.
वोँ जल्दी बोले-हां जी-हां जी हम् ऐसा हि करेंगे। प्लीज़ हमें छोड़दो.
मे – ठीक हैं, अभि मैंने तुम् लोगों कों क्षमा किया, मगर ध्यान रहेअगर तुम् लोगों नें आइन्दा कुछ भि ग़लत किया तोँ समझ सकते होँ मे क्याँ कर सकता हूं.
इतनाडोज उन लड़कों कों देकर मे चुप-चाप जैसेआया थां, वैसे हि हॉस्टल सें निकलआया.
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UPDATE 36
दोदिन तक कोईबात नहि हुइ, खुशी रोज़ कालेज जानेलगी, वोँ चारों भि कालेज मे कहीं नज़र नहि आए.मगर चौथेदिन खुशी कां मोबाइल आया, वोँ इस वक़्त चहकरही थि.
खुशी – हेलो, वकील भैया… उसकी आवाज़ मे खुशी साफ-साफ झलकरही थि। आपनेउन चारों लड़कों केँ संगऐसा क्याँ किया??आज वोँ सब लड़कियों केँ सामने हाथ जोड़कर बहनजी-बहनजी करतेफिन रहे थें। यही नहि, उनके शरीरों पऱ स्थान-स्थान प्लास्टर औऱ पट्टियाँ भि बँधी थि। जब सबने कारण पूछा तौ बोलने लगे – कि हम् लोगों कां एक्सीडेंट हौ गय़ा थां। हेहेहे… मगर भैया मे सभीसमझ गयीँ, कि यह एक्सीडेंट केसेहुआ??
मे – अब तौ तुम् खुश हौ नां खुशी?मगर यहबात किसी औऱ कों मत बताना.
खुशी – नहि बताऊंगी भैया… थैंक्स सब लड़कियों कि तरफ सें औऱ हां, आई लवयू… आप् बहोत अच्छे हें। साम कों घऱ आनांफिन बात करती हूं। आओगे नाँ???
मे – नहि खुशीआज मे अपने देहात जारहा हूं, फिनकभी आता हूं। औऱ हां, अगर कोई औऱ भि किसी भि लड़की कों परेशान करे, तोँ उन चारों लड़कों कों केहना। वोँ अब तुम् लोगों कि सहायता करेंगे.
खुशी चौंकते हुए बोलि – क्याँ? ऐसा क्याँ काला चमत्कार कर दिया आपनेउन हरामजादों पऱ??
मैंने हँसते हुएकहा – कोई चमत्कार-वादू नहि किया हैं, बस थोडा हेवी डोज़दे दिया हैं, जिससे वोँ अब अपनी औकात मे आँ गये हें.
खुशी – मगर मुझे आपसे मिलना थां। मेरी हेल्प करने केँ लिए स्पेशल थैंक्स करना थां आपको…
मैंने हँसते हुएकहा – स्पेशल थैंक्स क्याँ होता हैं? मोबाइल पर्र हि बोलदे नां.
खुशी – नहि, वोँ तौ जब आप् मिलोगे तभी कहूँगी.
मे - चलठीक हैं कह देना, अब मोबाइल रखता हूं, टेक केयर…बाइ.
खुशी – बाइ भैया… थैंक्स अगेन…लव यू…
इस घटना केँ बाद खुशी केँ कालेज मे रोमियो गैंग कां जैसेनाम हि खतम होँ गय़ा.
उन चारों केँ अलावा अगरकोई औऱ लड़का भि किसी लड़की केँ संगइस तरह कि हिमाकत करता तौ वोँ लड़के अपनेतौर पर्र उसेसबक सीखा देते औऱ अगर उनकेबस सें बाहर् कि बात होती तोँ वोँ अपना एक्साम्प्ल देकर उनके अंदरडर पैदा करते, बताते कि कोई नक़ाबपोश हैं जोँ यहसभी नहि होने देगा औऱ वोँ डरकर उनकीबात मान लेते.इस कालेज कि सब लड़कियाँ एक् तरह सें सेफ होँ गयीँ, थि। उन चारों लड़कों केँ अंदरआए बदलाव सें स्टूडेंट्स केँ संग-संग कालेज प्रशासन भि आश्चर्यचकित थां.
दोदिन बाद मे गुप्ता जी सें मिलने जब उनकेघऱ गय़ा, रोज़ कि तरह गुप्ता जी पूजा मे थें, अनायास हि कालेज कों निकलती खुशी मुझेहॉल मे हि मिल गई,। मुझे देखते हि वोँ खुशी सें उछल पड़ी.आव नां देखाताव, दौड़कर वोँ मेरेगले मे झूल गयीँ, औऱ अनगिनत चुंबन मेरे गालों पऱ जड़दिए.
मे - अरे खुशी रुको तौ सही, क्याँ करती हौ??
मे बोलता हि रह गय़ा, मगर खुशी अपनेमन कि करके हि रुकी.फिन खुशी नें मेरे हाथों कों अपने हाथों मे लेकरचूम लिया औऱ बोलि – थैंकयू भैया मेरी सहायता करने केँ लिए.
यह नज़ारा अपने कमरे सें बाहर् निकलते हुए उसकी मां, शांति, नें देख लिया। कयामत हि टूट पड़ीउस बेचारी केँ उपर.
शांति वहीं सें बुरीतरह चीखते हुए दहाड़ी – ख़ुशी…यह क्याँ हिमाकत हैं?? नौकर औऱ मालिक कां लिहाज भि नहि हैं तुझेही????
उपरोक्त डाइलॉग बोलती हुईँ शांति हमारी ओर लपकी औऱ तड़ाक-तड़ाक दो-तीन तमाचे ख़ुशी केँ गाल पर्र जड़दिए। मैंने ख़ुशी कों बचाने कि कोशिश कि, मगर शांति मेरीओर पलटकर दहाड़ी - दूररहो… खबरदार जोँ आगे बढ़े तौ… नमकहराम कहीं कां, जिस थाली मे ख़ाता हैं उसी मे छेद करने कि कोशिश कररहा हैं… निकलजा यहा सें अभि केँ अभि…
खुशी तौ बेचारी बुरीतरह सें रोनेलगी.
मैंने कहा – देखिए आप् मेरीबात तौ सुनिए.
मेरीबात अभि पूरी भि नहि हुई कि, तडाक, एक् जोरदार तमाचा मेरे भि गाल पर्र पड़ा.तब जाकर मुझे अंदाज़ा हुआ कि खुशी इतना क्यूं रोरही हैं। क्याँ भारीहाथ थां शांति कां। दिन मे तारे नज़रआने लगे मुझे। तौ खुशी कां क्याँ हालहुआ होगा???
इतने मे शोर सुनकर घऱ केँ सारे नौकर, संकेत जोँ कालेज केँ लिए तैयार हौ रहा थां, यहा तक कि गुप्ता जी भि अपनी पूजा छोड़कर दौड़े चलेआए.
गुप्ता जी – क्याँ बात हैं शांति?? क्यूं इतनाशोर कररही होँ सुभह-सुभह??? औऱ यह खुशी इतना क्यूं रोरही हैं?
शांति उसी दहाड़ केँ संग – पुछो अपनीइस लाड़ली सें… एक् नौकर केँ गलेलग कर मुँह कालाकर रही थि… यह हरामी नां जानेइसे कब सें अपनेजाल मे फँसारहा हैं.
गुप्ता जी चौंकते हुए बोले – तुम् अंकुश कि बातकर रही हौ?? क्याँ किया हैं इन्होंने??
शांति – ख़ुशी अंकुश केँ गले लगकर अंकुश केँ मुँह कों चूमरही थि.
गुप्ता जी – क्यूं वकील साहब, क्याँ शांति सचबोल रही हैं??
मैंने उनके चेहरे पर्र अपनी नज़र गड़ाते हुएकहा – हां। जोँ इन्होंने देखा वोँ सच हैं। मगर इनके कहने कां मतलब ग़लत हैं.
शांति – अच्छा… मे अंधी हूं? नासमझ हूं?? इतनी भि समझ नहि हैं मुझे कि एक् लड़की क्यूं किसी पराए मर्द केँ गलेलग करउसे चूमती हैं.
मैंने एकदम शांत लहजे मे कहा – मगर मे क्याँ कररहा थां?
शांति – इससे क्याँ फर्क पड़ता हैं, कि तुम् कुछकर रहे थें याँ नहि?? छुरी खरबूजे पऱ गिरे याँ खरबूजा छुरी पऱ, काटना तोँ खरबूजे कों हि हैं नाँ??
अपनी मां कि बात सुनकर खुशी कां धैर्य जवाबदे गय़ा औऱ वोँ पूरी ताक़त लगाकर चीखते हुए बोलि – यह क्याँ बकवास हैं, कुछ तोँ लज्जा करो मां… अपनी बेटी पऱ इतना घिनौना इल्जाम लगाने सें पहले एक् बार भि नहि सोचा कि आख़िर मैंने वोँ क्यूं किया???
गुप्ता जी – तुम् कहना क्याँ चाहती हौ बेटी?? सच्चाई क्याँ हैं?
खुशी – सच्चाई जानना चाहते हैं डैडी… तोँ सुनिए। पुछो माँ सें मुझेयह ज़बरदस्ती कालेज भेजती रहती थि, बावजूद इसके कि मैंने इनसेकहा थां कि मुझे कालेज मे कुछ गुंडे परेशान करते हैं। पूछिए अपने लाड़ले बेटे सें, इनको भि बोला थां, मगरकुछ करना तौ दूरयह उन लड़कों सें बात करने सें भि डरते थें। फिन वकील भैया नें मेरी तकलीफ़ कां कारण पूछा। मे इन्हें नहि बताना चाहती थि, मगर मेरी तकलीफ़ देखकर अंकुश नें कहा – तुँ मुझे अपना भइया समझकर बोल… क्याँ प्राब्लम हैं?? तोँ मैंने इन्हें वोँ बात बताई, औऱ जानते हें डैडी उसकेबाद क्याँ हुआ?
इससे पहले कि खुशीकुछ बोले, मैंने बीच मे आतेहुए कहा – अरे छोड़ नां खुशी, इतनी छोटी सि बात केँ लिए क्यूं इतना बखेड़ा कररही हैं। मैंने प्रिन्सिपल सें शिकायत करकेउन लड़कों कों समझा दिया हैं, बस इतनी सि बात केँ लिए तुँ इतना एक्साईटेड हौ गई, कि मेरेगले सें लगकर मुझे थैंक्स करनेलगी। अब इसमें शांति जी कि भि क्याँ ग़लती हैं, उन्हें लगा कि तुम् पता नहि क्यूं ऐसाकर रही हौ.
गुप्ता जी संकेत कों डाँटते हुए बोले – यहकाम तूँ नहि कर सकता थां?? प्रिन्सिपल सें शिकायत तौ तुँ भि कर सकता थां नाँ??
संकेत नीची नज़र झुकाए हुए बोला – मैंने कहा थां उनसे, मगर वोँ लड़के बहोत बदमाश थें, नहि माने… बदले मे उनकी हरकतें औऱ बढ़ गयीँ,.
गुप्ताजी – तौ फिनअब केसेमान गये?
खुशी भभकते हुए स्वर मे बोल पड़ी – क्योंकि इस नौकर। अंकुश नें उन लड़कों कि हड्डियाँ तोड़ केँ रख दि हें… जिससे उसके मालिक कि बेटी चैन सें कालेज जासके.
सब केँ मुँह सें एक् संग निकाला – क्याँ?????
खुशी – हां… औऱ इसकाम मे अंकुश कों भि कुछ होँ सकता थां। मगर इन्होंने इसबात कि परवाह नाँ करके, एक् पराई लड़की केँ लिएयह ख़तरा मोल लिया औऱ मेरासगा भइया, दुम दबाएरहा। इसलिये मैंने सच्चे दिल सें अंकुश कों अपना भइया माना हैं, औऱ अपने भइया केँ गले लगकर उसकेगाल पर्र किस करनाकौन सां गुनाह हैं डैडी?? आप् हि बताओ, सही मायने मे भइया कां फ़र्ज़ किसने निभाया हैं??
यह कहते-कहते खुशी हिचकियाँ लेँ-लेकर रोनेलगी। शांति सरम केँ मारे अपनासर झुकाए खड़ी थि। गुप्ता जी कां पारा अपनी बेटी कों रोतेहुए देखकर चढ़ गय़ा औऱ शायद जीवन मे पहलीबार उन्होंने शांति केँ गाल पऱ एक् तमाचा जड़ दिया। शांति कों इसबात कि कतईआशा नहि थि, कि उनका चूहा पति, एक् शेरनी कों तमाचा भि मार सकता हैं.
शांति गुर्राते हुए बोलि – तुम्हारी इतनी हिम्मत??
तडाक्क्क… शांति अपनीबात पूरी भि नहि करपाई, कि एक् औऱ तमाचा पड़ा औऱ इसी केँ संग गुप्ता जी किसीसोए हुएशेर केँ जागने केँ बाद वाले स्वर मे बोले-अब औऱ एक् शब्द नहि। बिना सोचे समझे इतना बड़ाशोर खड़ाकर दिया तुमने, एक् भले व्यक्ति कों नाँ जाने क्याँ-क्याँ बोलती रही.इस घऱ कि मालकिन हौ तौ इसकायह मतलब तौ नहि कि किसी केँ संग जैसा चाहो व्यवहार करो?? औऱ एक् यह हें जिन्होंने हमारे ऊपर अनगिनत एहसान किए हें। आज हमारी बेटी कि इज़्ज़त बचाकर तोँ इन्होंने वोँ काम किया हैं जोँ तुम्हारे इस लाड़ले बेटे कों करना चाहिए थां। उसका एहसान मानने कि बजाय नां जाने क्याँ-2 बोलती रही। इन्हें जलील करतीरही तुम्। फिन भि इनकी बड़प्पन देखो, तुम्हें ग़लत नहि ठहराया – अरेअब तौ सुधरजाओ औऱ हर एक् केँ संग एक् जैसा बर्ताव करनाबंद करो.
फिन गुप्ता जी मेरे सामने हाथ जोड़कर बोले – शांति केँ बर्ताव केँ लिए हम् तुमसे माफी माँगते हें अंकुश.
मैंने गुप्ता जी केँ हाथ पकड़लिए औऱ कहा – यह क्याँ कररहे हें आप्?? यह शांति जी सें अंजाने मे हुआ हैं औऱ इसमें उनकी अपनी बेटी कि चिंता हि दिखाई देती हैं। प्लीज़ सर, आप् माफीमत मांगिए… शांति जी केँ लिए मेरेमन मे कोई ग़लत विचार नहि हें.
शायद शांति कों बातसमझ आँ गई थि, तौ चुपचाप किसी मुजरिम कि तरहसर झुकाए खड़ीरही। दोनों बच्चे उन्हें उसी अवस्था मे खड़ा छोड़कर वहा सें चलेगये। गुप्ता जी भि भुन-भुनाते हुए अपनेकाम मे लगगये, तौ फिन मैंने भि वहा सें सरकने मे हि अपनी भलाई समझी औऱ बिना किसी सें कुछकहे सुने मे बाहर् कि तरफचल दिया.
मेरे मुड़ते हि शांति मेरे सामने आई औऱ हाथ जोड़कर बोलि – अंकुश बेटा… हौ सके तौ मुझे क्षमा कर देना.
शांति कि आँखों मे पश्चाताप केँ आँसू थें, रुँधे गले सें बोलि – मे सच मे बहोत बुरी हूं, मगर मे भि क्याँ करूँ??कोई समझाने वाला थां हि नहि, इन्होंने कभी मुझे रोका-टोका नहि। अपने रुपया कमाने मे हि लगेरहे, तौ जैसा मेरेमन मे आया करतीरही.
मैंने उनकेहाथ पकड़लिए औऱ कहा – मे समझता हूं, आंटीजी, आप् बिल्कुल ग़लत नहि हें। बस स्वभाव थोडा तीखा हैं, इसलिये सबको ग़लत लगता हैं। सच मानिए मुझे आपकीबात कां बुरा नहि लगा औऱ इसमें थोड़ी सि ग़लती खुशी कि भि हैं, उसे अपनी भावनाओं पर्र कंट्रोल नहि रहा.
शांति – नहि बेटा… वोँ तौ बच्ची हैं, उसकेमन मे जोँ आया उसनेकर दिया, मगर मे तोँ इतनीउमर गुज़ार चुकी हूं, अभि तक अपने बच्चों कों नहि समझपाई। पऱ अब बेटा मेरी एक् विनती हैं, ईश्वर केँ लिएइसी तरह मेरे बच्चों कां ख्याल बनाए रखना, मेरीवजह सें हमें छोड़मत जानां.
मे – आप् चिंता मतकरो। मे हमेशा इस परिवार केँ संग खड़ा हूं.
शांति - बहोत–बहोत शुक्रिया अंकुश बेटा… तुम् सच मे बहोत अच्छे इंसान होँ, यह कहतेहुए उनकी रुलाई फुट पड़ी औऱ वोँ मेरे सीने सें लगकर रोनेलगी.
शांति देवीऊपर सें जितनी कड़क दिखती थि, आज मेरे सीने सें लगकर रोतेहुए देखकर मुझेलगा कि वोँ अंदर सें कितनी कोमल हें। उन्होंने सच हि कहा थां, उनकेइस स्वभाव कां मूल कारण भि कहीं नाँ कहीं गुप्ता जी कि पैसे कमाने कि धुन हि थि, जिसकी वजह सें उन्होंने अपने परिवार पर्र कोई ध्यान नहि दिया.
मैंने उन्हें चुप करतेहुए कहा – आप् शांत हौ जाइए आंटीजी, प्लीज़ रोइएमत.
बजायचुप होने केँ उन्होंने मुझे औऱ तेज़कस लिया औऱ बोलि - नहि अंकुश बेटा… मुझेआज जीभरकर रो लेनेदो। आज तक मे अपनेइन आँसुओं कों मुद्दत सें अपने अंदर समेटे हुए थि, इन्हें बह जानेदो। क्योंकि मेरेइस घऱ मे आने केँ बाद सें आज तक कोई मजबूत कंधा मिला हि नहि जिसका सहारा पाकर मे अपने अंदर केँ गुबार कों निकाल पाती.आज तुमने जौ खुशी केँ लिए किया हैं, उसे देखकर मुझे लगनेलगा कि मेरे अलावा भि कोई तौ हैं, जौ मेरे बच्चों कां संगदे सकता हैं.
शांति देवी सीने सें लगी मेरे कंधे कों अपने आँसुओं सें तर करतीरही, मैंने भि उन्हें अलग करने कि कोशिश नहि कि। अच्छा हैं, आज इनकेमन कां गुबार जितना होँ सके निकलजाए। उनके अंदर कां डर, क्रोध, चिंता सभीआज उनके आँसुओं केँ माध्यम सें बाहर् निकलरहे थें। मगर, अब उनके 38” केँ खरबूजे मुझे परेशान करनेलगे थें, जोँ कि बुरीतरह सें मेरे सीने मे दबेहुए थें। उनको सांत्वना स्वरूप पीठ सहलाता हुआ मेराहाथ अनायास हि उनकीकमर तक चला गय़ा, मांसल जांघें मेरी जांघों सें सटाती जारही थि। मुझे लगनेलगा कि यह इमोशंस कोई दूसरा हि रूप लेतेजा रहे हें। इससे पहले कि मेरी पैंट मे क़ैद मेराशेर जागजाए, मैंने उनके कंधे पकड़कर अपने सें अलगकर दिया। उनके आँसू पोंछे, औऱ सांत्वना देकर मे वहा सें चलाआया…
अपने दफ़्तर मे आकर एक् केस स्टडी करनेलगा, तभी मेरे मोबाइल कि बेल बजनेलगी, मैंने कॉलआई करने वाले कां नाम देखा, तौ मेरे चेहरे पर्र मुस्कान आँ गई.
मैंने कॉलआई रिसीव की कि औऱ बोला – हेलो, डॉक्टर वीना, कैसी हें आप्??
वीना – ओ। अंकुश। हाई हैंडसम। तुम् सुनाओ… लगता हैं जनाब हमें तौ भूल हि गये??
मे – आप् जैसी स्वप्न सुंदरी भूलने वाली चीज़ थोड़ी हैं। मे तोँ आपके बुलावे केँ प्रतीक्षा मे हि थां.
वीना – हेहेहे… तोँ अब मे चीज़ हौ गई,। चलोकोई बात नहि अंकुश। इस चीज़ केँ बारे मे क्याँ ख़याल हैं.
मे – हुक्म कीजिए मालिक। आदमी हाजिर हौ जाएगा.
वीना – वैसे अभि फ्री होँ क्याँ?
मे – नहि हें, तोँ भि होँ जाएँगे। बोलिए कब औऱ कहां आनां हैं?
वीना – अभि आँ जाओ मेरेघऱ… अकेली हूं.
मे – क्यूं?? आपके डॉक्टर साहब कहां गये? औऱ आज हॉस्पिटल नहि गयीँ, ?
वीना – अंकुश, मेरे हस्बैंड फॉरेन गये हें। किसीकाम सें एक् हफ्ते मे लौटेंगे औऱ आज हॉस्पिटल बंद रहेगा। कोई इमरजेंसी होगी तोँ हि खुलेगा… बस पुराने मरीज़ों कों हि देखा जाएगा, जौ नर्स संभाल लेंगी.
मे – ठीक हैं। मे एक् घंटे मे हाज़िर हौ जाता हूं, आप् अड्रेस बताइए.
वीना – मे अभि संदेश कर देती हूं… जल्द आनां.
मे एक् घंटे केँ बाद डॉक्टर वीना केँ अड्रेस केँ सामने खड़ा थां। अरेवाह, क्याँ शानदार बंग्लॉ थां। लगता हैं काफ़ी दौलत कमाई हैं, दोनों नें मिलकर। मैंने मेनगेट कि बेल बजाई.कुछ देर मे एक् मोटी सि अधेड़ स्त्री नें आकरगेट खोला। उसकी पहाड़ जैसी चुचिया। उसके गाउन कों फाड़ेदे रहे थें.
मुझेदेख कर वोँ बोलि - किसको मिलना हैं??
तभी पीछे सें डॉक्टर वीना कि आवाज़ आई - जूलीकौन हैं?
जूली – पता नहि मेमसाहब। कोई छोकरा सां हैं.
तब तक वीना नें अपनेहॉल केँ गेट सें हि मुझेदेख लिया औऱ बोलीं – आनेदो जूली… इन्हें मैंने हि बुलाया हैं.
जूली मुझे अंदर लेकर वापस जाने कों पलटी। बाप रे… इतनी बड़ी गान्ड… ऐसा लगता थां मानोदो बड़े-2 मटके उलटे करकेकमर सें बाँधदिए हों। जूली उन्हें हिलाते हुए मेरे आगे–आगे चल दि। मेरी नज़र जूली कि हिलती हुई भारी भरकम गान्ड पऱ हि टिकी थि। मुझेदेख कर डॉक्टर वीना, वहीं खड़ी–2 मुस्करा रही थि। जूली दूसरी तरफचली गयीँ, औऱ मे वीना केँ संगहॉल मे आँ गय़ा.
वीना चुटकी लेतेहुए हँसकर बोलि – क्याँ देखरहे थें अंकुश??
मे – बाप रे!!! क्याँ गान्ड हैं इसकी?? केसे संभालती होगी इतनेवजन कों?? ऊपर सें इतनी भारी बूब्स…
वीना मेरीबात सुनकर ठहाका लगाकर हँसने लगी। औऱ बोलीं – अंकुश लगता हैं, जूली कि गान्ड पऱ मन आँ गय़ा हैं तुम्हारा…
मे हँसते हुएकहा – कोई पागल हि होगा… जौ ऐसे माँस केँ लोथड़े पर्र अपनी एनर्जी वेस्ट करेगा.
maira Pyara Devar - niyantran – New Episode
UPDATE 37
कुछदेर वीणा औऱ मे इसबात पर्र हँसते रहे.
वीणा – अंकुश क्याँ लोगे?? ठंडा। गर्म.कोई हार्ड याँ सॉफ्ट ड्रिंक??
मे – मुझे तोँ बस एक् हि चीज़ कि प्यास हैं इस टाइम…
वीणा मेरीबात कों समझते हुए बोलि – क्याँ?? यहाहर चीज़ मौजूद हैं.
तौ मैंने खड़े-2 हि, वीणा केँ चेहरे कों अपने हाथों मे लेकर उसके होंठों कों चूम लिया.
मे - वीणाइन मुलायम होंठों कों छोड़कर भला औऱ रस पीना क्यूं चाहेगा कोई??
वीणा – यह भि मिलेगा अंकुश। थोडा बैठो, जल्द तौ नहि हैं नाँ??
यह कहकर वीणा नें मेराहाथ पकड़कर सोफे पर्र बिठा लिया.
वीणा नें प्रश्न किया - अंकुश वैसेअब तक तुमने यह नहि बताया कि तुम् काम क्याँ करते होँ? उसने प्रश्न किया.
मे - एडवोकेट हूं औऱ यहीं डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मे प्रैक्टिस कररहा हूं.
हम् दोनों हॉल मे पड़े मास्टर सोफे पर्र एक् दूसरे सें सटेहुए हि बैठे थें.
वीणा (मेरी जाँघ सहलाते हुए) - ओह्ह्ह। तोँ वकील साहब कैसीचल रही हैं आपकी वकालत??
मैंने भि वीणा कि एक् चुचि कों मसलते हुए जवाब दिया – ठीक हि हैं, धीरे-धीरे–2 वाहन पटरी पऱ आतीजा रही हैं…
बातों–2 मे हि हम् दोनों एक् दूसरे केँ जिस्म कों छेड़ते हुए गर्म होनेलगे.
वीणा नें मेरा पैंटखोल कर मेरा लन्ड बाहर् निकाल लिया औऱ अपनी मुट्ठी मे लेकर बोलीं – अंकुश जब सें तुम्हारा यहडिक देखा हैं… ड्रीम्स मे भि मुझेयही दिखाई देता हैं… नाँ जाने कितनी बारइसे सोच-सोच कर अपनी पुसी मे फिंगरिंग कर चुकी हूं… आज नहि छोड़ूँगी तुम्हारे डिक कों… आज तोँ इसकाजूस पीकर हि रहूंगी…
इतना बोलकर वीणा नें मेरा लन्ड अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ लॉलीपॉप कि तरह चूसने लगी। वीना एक् झीने कपड़े कि शॉर्ट मिडी पहने थि, जोँ उसके घुटनों तक हि थि। सोफे पर्र बैठी वीणाझुक कर मेरा लन्ड चूसरही थि। मैंने उसकी मिडी कों उसकी गान्ड केँ ऊपर तक उठाकर वीणा कि गान्ड कों नंगाकर दिया औऱ उसकी गद्देदार गान्ड कों मसलने लगा। उसकी छोटी सि पैंटी गान्ड कि दरार मे घुसी पड़ी थि। जिसे मैंने साइड मे करके उसकी गान्ड केँ सुराख मे उंगली डाल दि। वीणा अपनी गान्ड कों इधर-उधर हिलाकर अपनी गान्ड केँ छेद सें मेरी उंगली कों निकालने कि कोशिश करनेलगी, मगर लन्ड मुँह सें नहि निकलने दिया। मैंने उसकी मिडी कों औऱ ऊपर करके उसकेसर केँ ऊपर सें निकाल दिया। उतने टाइम केँ लिए मेरा लन्ड उसके मुँह सें बाहर् आया। वीणाअब मात्र ब्रा औऱ पैंटी मे थि.
मैंने वीणा सें पूछा – बेडरूम मे चलें??
तौ वीणा इठलाकर बोलि – मुझेगोद मे उठाकर लें चलो, तौ हि जाऊंगी.
वीणा थोड़ी सि माँसल तौ थि, मगर मैंने उसे धीरे-धीरे उठा लिया औऱ उसके बेडरूम मे लें जाकरबेड पऱ पटक दिया। सॉफ्ट गद्दे केँ ऊपर वीणा दो-तीन बार उपर-नीचे जंप हुइ। मैंने भि अपने सारे कपड़े निकाल दिए औऱ वीणा कि ब्रा औऱ पैंटी कों निकाल कर, बिस्तर पऱ लेट गय़ा। वीणा अपनी गान्ड लेकर मेरे मुँह पऱ बैठ गई,, फिन मेरेऊपर लेटकर मेरा लन्ड फिन सें मुँह मे लेँ लिया.
अब हम् 69 कि पोज़िशन मे थें। वीणा मेरा लन्ड चूसरही थि औऱ मे उसकी बुर कि खुदाई अपनीजीभ घुसा-घुसा कर करनेलगा। कभी वीणा कि बुर कों दाँतों सें काट लेता तोँ वोँ अपनी गान्ड कों औऱ ज़ोर सें हिला-हिला कर मेरे मुँह पऱ रगड़ देती। 10-15 मिनिट मे हि हम् दोनों एक् दूसरे केँ मुँह मे झड़गये औऱ अगल-बगल मे लेटकर लंबी-2 साँस भरनेलगे। मुँह एक् दूसरे केँ रस सें सनाहुआ थां तोँ वीणा औऱ मे फिन सें किस्सिंग मे जुटगये औऱ अपने-2रस कां स्वाद बाँट लिया.कुछ देरबाद हम् फिन सें एक् दूसरे सें लिपटगये। डॉक्टर वीना, जल्द हि कामातुर होकर मेरा लन्ड लेने कों बावली सि होँ गयीँ,। मैंने वीणा कि गान्ड केँ नीचेदो पिलोरखे औऱ वीणा कि रसीली बुर मे अपना लौड़ापेल दिया। शुरुआत-शुरुआत मे वीणा कि रसीली बुर कों मेरा लन्ड एडजस्ट करने मे थोड़ी परेशानी हुइ, मगरफिन जल्द हि मज़े लेकर चुदने लगी.साम तक मैंने डॉक्टर वीना केँ दोनों छेदो कि जमकर खुदाई कि। वीणा मेरे लन्ड कि दीवानी हौ गई,.
वीणा - अंकुश तुम् सच मे बहोत मजा देते हौ… किसी स्त्री कि बुर कों चोदकर संतुष्ट करने कि कला अच्छे सें आती हैं तुम्हें. वीणा मेरे बालों मे अपनी उंगलियाँ घुमाते हुए बोलीं.
मैंने कहा – मजा तोँ आया नां वीणा, मेरेसंग सेक्स कर केँ???
वीणा (मेरे लन्ड सें खेलते हुए) – बहोत… मेरे हस्बैंड नें कभी मुझे इतनीदेर तक नहि चोदा… औऱ वैसे भि उनका लन्ड तुम्हारे सें छोटा भि हैं। इसलिये शुरुआत मे थोडा हार्ड लगा मुझेइसे अपनी पुसी मे लेने मे.
हम् दोनों अभि भि नंगे उसकेबैड पर्र पड़ेहुए थें। फिन वीणाउठी औऱ फ्रेश होकरकप कॉफ़ी बनाने चली गयीँ,। इतने मे मैंने भि अपने कपड़े पहनलिए थें। कप कॉफ़ी कां मग मुझे पकड़ते हुए वोँ बोलि.
वीणा – अरे दोस्त अंकुश… एक् बेचारी लड़की मेरे हॉस्पिटल मे हैं, उसकेसंग गैंगरेप हुआ हैं। अबरेप करने वाले लड़के बड़े-2 घरों सें हें तौ पुलिस भि उसकी कंप्लेंट नहि लें रही। तुम् लॉयर हौ, कुछकरो नां दोस्त। बेचारी केँ घरवाले भि बड़ी मुसीबत मे हें। उनको धमकी भि मिलरही हें लगातार कि अगर उन्होंने पुलिस मे रिपोर्ट करने कि कोशिश कि तौ सारे परिवार कों खतम करवा देंगे.
मैंने कहा – चलोचल केँ देखते हें, क्याँ होँ सकता हैं?
कप कॉफ़ी खतम करके वीणा भि तैयार हौ गयीँ,। वोँ अपनी गाड़ी सें औऱ मे अपनी बुलेट सें उसके हॉस्पिटल कि तरफचल दिए.राम लाल, मुनिसिपल कॉर्पोरेशन मे क्लर्क हैं, अपनी पत्नि औऱ तीन बच्चों केँ संग, दो रूम एक् केँ छोटे सें घर-मकान मे अपनी जीवनबसर कररहा थां.
बड़ी बेटी प्राची, कालेज मे पढ़ती हैं, इस वक़्त वोँ सेकेंड ईयर कि स्टूडेंट हैं, उमर अभि 20 पूरा हि किया थां। दूसरी बेटी साक्षी 12थ मे हैं, औऱ सबसे छोटा एक् बेटा, सुनील जौ 9थ मे पढ़ता हैं.
पाँच प्राणियों कां यह परिवार रामलाल कि छोटी सि पगार सें हि चलता हैं औऱ इसी मे सभीलोग हँसी खुशी जीवनबसर कर लेते थें। गुणी पत्नि भाव्या, अपने पति कि आमदनी कों सहीढंग सें इस्तेमाल करकेघऱ कां खर्चा पूराकर लेती थि। थोडा बहोत बचत करकेघऱ केँ लोन कि ईएमआई भि भर जाती थि.
बड़ी बेटी प्राची, पड़ोस केँ हि दोचार बच्चों कों ट्यूशन देकर थोडा बहोत सहारा देरही थि। सहारा भि क्याँ, बससमझ लो अपने कालेज कां खर्चा निकाल लेती थि। प्राची, मध्यम हाइट काठी, गोरेरंग औऱ अच्छे नयन नक्श वाली लड़की थि। 32-26-32 केँ फिगर केँ संग उसमें इतना आकर्षण तौ थां कि कालेज केँ लड़के उससे नजदीकी रखने कि कोशिश करते रहते थें। मगरसरल स्वभाव औऱ संस्कारी प्राची, अपनेकाम सें काम रखती.घऱ सें कालेज, कालेज सें घऱ, बसयही उसका रुटीन रहता। कालेज मे उसकी अधिक फ्रेंड्स भि नहि थि। बस दो-चार लड़कियों सें जस्ट हाई-हेलो हौ जाती थि। इसका बहोत बड़ा कारण थां, उसका अपना घरेलू स्टेटस, जोँ उन दूसरी लड़कियों सें मेल नहि ख़ाता थां.
शहर कां नामी गिरामी गुंडा, नाम हैं उस्मान खान.सब उसे उस्मान भइयाकह कर बुलाते हें। ऐसाकोई ग़लतकाम नहि हैं, जोँ उसने अपने जिंदगी मे नां किया हौ। किसी जमाने कां एक् टुच्चा सां गली कां गुंडा, आजशहर कां ड्रग माफिया थां। शुरुआत-2 मे उसने पॉकेट मारी सें लेकर छोटी- मोटी चोरियाँ करना, ऐसे कामों सें शुरुआत कि। फिन वोँ लोगों कों लूटने लगा, धीरे-धीरे-2 औऱ छोटे-मोटे गुंडे उससे जुड़ते गये औऱ उसने देखते-देखते एक् बड़ा सां गैंग खड़ाकर दिया। पॉल्टिकल मर्डर, ज़मीन हथियाना ऐसे कामों सें आगे बढ़ते हुए उसने ड्रग कां धंधा, गैर क़ानूनी शराब औऱ यहा तक कि हथियारों कि तस्करी भि करनेलगा। अब तौ शहर केँ जाने माने पॉलिटिशियन, ब्यूरोक्रेटस औऱ बिल्डर्स भि उसकी सहायता लेनेलगे औऱ वक्तआने पर्र वोँ उनकी सहायता सें अपने कों बचाए भि रखता थां.
जिस कालेज मे प्राची पढ़रही थि, उसी मे उस्मान कां बेटा असलम भि पढ़ता थां। असलम गाहे बगाहे लड़कियों कों छेड़ना, किसी कों भि मारना पीटना उसकेलिए आम सि बात थि। असलम केँ दोस्तों कि फेहरिस्त मे भि अच्छे-2 परिवार केँ लड़के हि थें, जोँ कहीं नाँ कहीं उसके बाप केँ कारोबार मे उसके सहभागी थें.
प्राची केँ बयान केँ मुताबिक असलम नें कईबार उसको भि छेड़ा, पर्र वोँ बेचारी लहू कां सां घूँट पीकरबस उस जैसे गुण्डों सें किसीतरह अपने आपको बचाती रही। एक् दिन कालेज मे फंक्शन थां, सभी उसमें बिज़ी थें। प्राची भि उस वक्त कालेज मे हि थि। संग मे एक् काजलनाम कि लड़की बैठी थि.
अचानक सें काजल उससे बोलीं – चल प्राची कैंटीन मे चलकरकुछ ठंडा गर्म पीते हें.
प्राची नें बहोत मना किया, मगर काजल नहि मानी औऱ उसे जबरदस्ती खींच लें गई,। प्राची कों कैंटीन कि बेंच पर्र बिठाकर काजल रिसेप्शन सें दो ठंडे कि बॉटल लें आई। एक् प्राची कों दि औऱ दूसरी उसने स्वयं लें ली। ठंडा पीने केँ कुछदेर बाद हि प्राची कां सर चकराने लगा.जब प्राची नें काजल कों यहबात बताई.
काजल – होँ सकता हैं, तुम्हें कालेज केँ हंगामा-शराबे कि वजह सें ऐसाफील होँ रहा होँ, चल मे तुम्हें घऱ छोड़ देती हूं.
काजल नें प्राची कों रिक्शा मे बिठाया औऱ वहा सें निकल गई,। रिक्शा मे बैठने केँ कुछदेर बाद हि प्राची कि आँखें बंद हौ गयीँ, औऱ वोँ काजल कि गोद मे लुढ़क गयीँ,। जब प्राची कों होशआया, तोँ उसने अपने आप् कों किसी फार्म हाउस केँ एक् बड़े सें कमरे मे बेड पऱ लेटेहुए पाया। प्राची कां सर अभि भि चकरारहा थां, मगर जिस्म मे एक् अजीब सि उत्तेजना भरतीजा रही थि। अभि वोँ उसबेड सें उतरकर खड़ी हि हुईँ थि, कि उसने असलम कों कमरे केँ अंदरआते हुए देखा.
प्राची असलम कों देखकर चौंक पड़ी औऱ बोलीं – त्त्त्त्तुम्म्म… मे यहा केसे पहुँच गई, ?
असलम – हम् लेकरआए हें मेरीजान तुम्हें यहा। चिंता मतकरो। यहा तुम्हें कोई परेशानी, नहि होगी.बस थोडा सां हमेंखुश कर देना.
इतनाकह कर असलम एक् दरिंदगी वाली हँसी हँसते हुए उसके नज़दीक आया औऱ प्राची केँ जिस्म केँ संग छेड़ खानी करनेलगा। प्राची नें अपनेहाथ सें असलम कां हाथ अपने जिस्म सें दूरझटक दिया.
प्राची – मुझे जानेदो। मे यहसभी नहि कर सकती.
तब तक कमरे मे असलम केँ तीन दोस्त औऱ आँ गये। जिनमें एक् एमएलए रास बिहारी कां भतीजा भि थां। बाकीदो कों वोँ नहि पहचानती थि। उन चारों नें मिलकर प्राची कों घेर लिया औऱ उसकेसंग ज़ोर जबरदस्ती करनेलगे। प्राची उनसे बचने कि कोशिश करतीरही, मगरबच नहि पारही थि। कभी एक् सें बचती तोँ दूसरा प्राची कों पकड़कर उसके नाज़ुक अंगों सें छेड़-छाड़ कर देता। एक् लम्हा कों प्राची भि उन्माद सें भर जाती, शायदयह उसको दि गई, दवा कां असर थां। मगर दूसरे हि लम्हा वोँ उनसेफिन बच निकलने केँ प्रयास करने लगती। प्राची चीखती रही चिल्लाती रही.मगर उन दरिंदों नें प्राची कि एक् नाँ सुनी औऱ उसके जिस्म सें एक्-एक् करके सारे कपड़े नोच डाले.फिन खेल शुरुआत हुआ दरिंदगी भरा। वोँ चारों मिलकर प्राची कों नोचते-खसोटते रहे। प्राची केँ जिस्म पर्र कई स्थान दाँतों केँ काटने सें घावबन गये, जोँ उसकेगाल, थोड़ी, गले पऱ साफ-साफ दिखरहे थें। उन चारों नें प्राची कों जीभरकर मसला, बुरीतरह सें रौंदा, इस दौरान वोँ कईबार अपनी चेतना भि खो चुकी थि। मगर वोँ नरभक्षी भेड़िए उसके शरीर कों तब तक नोचते-खसोटते रहे, जब तक उनकी स्वयं कि उत्तेजना शांत नहि होँ गयीँ,। फिन उन्होंने प्राची केँ बेदम होँ चुकेबदन कों वाहन मे डाला औऱ हॉस्पिटल केँ सामने फुटपाथ पऱ फेंककर भागगये.
फुटपाथ पऱ भि नाँ जाने प्राची कितनी देर तक पड़ीरही। फिन एक् राह चलते व्यक्ति नें हॉस्पिटल मे आकर बताया, तब कहीं जाकर प्राची कों अंदरलाए औऱ उसका ट्रीटमेंट शुरुआत किया.
प्राची कि दुखभरी स्टोरी सुनकर मेरे जिस्म केँ रोएं खड़े होँ गये। गुस्से सें मेराबदन काँपने लगा। मे उसके चेहरे औऱ गर्दन केँ घावों कों हि देखरहा थां, कि तभी डॉक्टर वीना बोलि.
वीना – क्याँ देखरहे होँ अंकुश। यह तोँ कुछ भि नहि हें। इसके बाकी केँ बदन केँ घावों कों तौ तुम् देख भि नहि सकोगे। इसके वक्षों कों तौ इसकदर दाँतों सें काटकर घायल किया हैं कि बस क्याँ कहूँ?बता भि नहि सकती मे। इसके निप्पल्स कों तौ बिल्कुल खा हि लिया हैं उन हरामजादों नें। पिछले 48 घंटों सें यहइसी तरह दर्द सें तड़प उठती हैं। अभि भि अधिक हिलने डुलने कि कोशिश मे इसकी बुर सें खून बहने लगता हैं.
मे – इसकी रिपोर्ट मिल सकती हैं मुझे?
वीना नें मुझे रिपोर्ट लाकर दि, जिसे मैंने एक् बार पढ़ा औऱ फिन कृष्णा भैया कों मोबाइल लगा दिया.कॉल आई उठाई होते हि…
मे – मे आईटॉक टू एसपी कृष्णा शर्मा?
वोँ – यस! एसपी कृष्णा हियर.
मे - मे अंकुश बोलरहा हूं भैया, क्याँ आप् अभि सहयोग हॉस्पिटल आँ सकते हें। इट्सएन इमरजेंसी.
कृष्णा भैया – अंकुश क्याँ कुछ सीरीयस हैं??
मे – हाँ भैया बहोत हि सीरियस मैटर हैं.
कृष्णा भैया – ठीक हैं, मे 1 घंटे मे पहुँचता हूं.
एक् घंटे केँ बाद भैया अपने दल-बल केँ संग हॉस्पिटल पहुँच गये। मैंने उन्हें सारी वस्तु स्थिति सें अवगत कराया। उन्होंने प्राची कां स्टेटमेंट दर्ज कराया, फिन उसके पिता सें बोले – रामलाल जी आपनेकौन सें थाने मे फरियाद कि थि?
रामलाल जी नें उस थाने कां नाम बताया, तोँ कृष्णा भैया नें उस थाने कां नंबर लगाया, औऱ उस इंस्पेक्टर कों इम्मीडियेट तलब किया। उसकेआते हि उन्होंने उसे बुरीतरह सें लताड़ा औऱ वहीं खड़े-2 लाइन हाज़िर कर दिया। वोँ गिड़गिड़ाता रहा औऱ बड़े–2नाम होने कि वजह सें रिपोर्ट नां लिखने कां कारण बताया। मगर कृष्णा भैया नें उसकी एक् नाँ सुनी.वहा सें हम् सीधे कमिश्नर दफ़्तर पहुँचे। जबउनदो लड़कों केँ नाम बताए, तोँ कमिश्नर हड़बड़ा गये.
कमिश्नर – जानते हौ एसपी कृष्णा उनचार लड़कों मे एक् हमारा भि बेटा हैं.
एसपी कृष्णा – क्याँ कहरहे हें सर?? आपका लड़कारेप मे शामिल हैं???
कमिश्नर- हां औऱ इसलिये हम् तुम्हें यह सलाह देंगे, कि तुम् इस मामले कों जैसे भि होँ रफ़ा दफ़ाकरो, लड़की केँ परिवार कों हम् संभाल लेंगे.
अब मेरा माथा ठनका, क्यूं यह पुलिस इंस्पेक्टर रिपोर्ट नहि लिखरहा थां?? बेचारे कि इतनी औकात नहि थि कि कमिश्नर केँ बेटे कों हि अरेस्ट करसके.
मैंने कहा - कमिश्नर साहब आप् क़ानून केँ रखवाले हें, औऱ आप् हि ऐसा करेंगे मुजरिमों कों बचाने कि कोशिश करेंगे, यह तोँ अपनेपद केँ संग गद्दारी हुइ नाँ.
कमिश्नर भड़ककर बोले – हूआरयू? मुझेमत सिख़ाओ क़ानून केँ संग क्याँ करना हैं क्याँ नहि.
मैंने कहा – मे भि क़ानून कां मुहाफ़िज़ हूं, औऱ क़ानून कि इज़्ज़त करना मेरा धर्म हैं.
कमिश्नर – हम् इस मामले मे तुम् लोगों केँ संगकोई बहस नहि करना चाहते। बस एक् बात हमारी सुनलो एसपी कृष्णा, इसकेस मे आगे बढ़ाने केँ लिए हम् तुम्हें परमिशन नहि दे सकते.
मैंने सीट सें उठतेहुए कहा - कोईबात नहि सर, हम् सीधे कोर्ट सें हि अरेस्ट वारंट निकलवा लेते हें। चलो एसपी साहब…
मेरीबात सुनकर कमिश्नर भड़क गय़ा औऱ कृष्णा भैया कों धमकाने लगा - लुक एसपी कृष्णा, अगर तुमने मेरे बेटे याँ उसके दोस्तों कों हाथ भि लगाया… तौ समझ सकते होँ तुम्हारा क्याँ हाल होगा.
मे – ज्यादा सें ज्यादा ट्रांसफर हि कर सकते हें आप्, इससे अधिक आपकेहाथ मे कुछ नहि हैं.
इतना बोलकर हम् कमिश्नर कि औऱ कोईबात बिना सुनेवहा सें निकलआए। मे कृष्णा भैया कों लेकर सीधा जस्टिस ढींगरा केँ पास पहुंचा। उनको सारीबात बताई, मेडिकल सर्टिफिकेट कि बिना पऱ उन्होंने जल्दी अरेस्ट वारंट इश्यू कर दिया.आनन फानन मे उनतीन लड़कों कों अरेस्ट कर लिया गय़ा, चौथे कां नाम उनसे उगलवा कर, उसे भि दबोच लिया, जोँ योगराज बिल्डर कां बेटा थां। चार्ज शीटबना कर उन्हें दूसरे दिन हि कोर्ट मे पेश किया गय़ा औऱ पुलिस कस्टडी लें ली। भैया नें अपनेतौर पऱ तौ अपनाकाम कर दिया थां। जिसके लिए उन्हें कमिश्नर सें काफ़ी लताड़ भि सुननी पड़ी.मगर हवालात मे उन लड़कों केँ संग मुजरिमों जैसा व्यवहार कतई नहि किया गय़ा। हमारे निकलते हि पुलिस वाले किसी मेहमान कि तरहउन हरामजादों कि सेवा मे लगगये.
इस दौरान रामलाल पऱ काफ़ी दबाव भि डाला, यहा तक कि, उसको खरीदने कि भि कोशिश कि गई,। मगर प्राची नें अपने बाप कों साफ-2बोल दिया, कि अगर उसनेऐसा कुछ भि करने कां सोचा भि तोँ वोँ मौत कों अपनेगले लगा लेगी.मगर अपने जीतेजी, उन कुत्तों कों क्षमा नहि करेगी। दोदिन बाद प्राची कों हॉस्पिटल सें छुट्टी मिल गयीँ,, औऱ वोँ लोग अपनेघऱ आँ गये.
8 दिन कि पुलिस रिमांड केँ दौरान उन लोगों नें जी तोड़ कोशिश कि। वोँ कहावत हैं नाँ, कि पैसों सें यहासभी कुछ खरीदा जा सकता हैं। वहीसभी हुआ, राम लाल 10 लाख लेकर कोर्ट मे मुकर गय़ा। उसने प्राची कों भि सच्चाई बयान नहि करने दि। पैसों केँ दम पर्र उन्होंने सुनवाई भि अपने फेवर केँ जज केँ यहाकरा ली, जौ उनका हि व्यक्ति थां। सारे सबूत झूठे साबित करदिए गये, यहा तक कि मेडिकल रिपोर्ट भि बदलवा दि गयीँ, औऱ उन चारों कों बा-इज़्ज़त रिहाकर दिया गय़ा। जिन्होंने कभी किसी कि इज़्ज़त नहि कि। उसकेदो दिनबाद हि प्राची नें अपने आपको पंखे सें लटका लिया औऱ वोँ इस लालच सें भरी दुनिया कों छोड़कर चली गई,। पैसों केँ वजन केँ आगे, राम लाल कों बेटी कां गम भि हल्का महसूस हुआ। जोँ उन लोगों नें बाद मे औऱ बढ़ा दिया थां, औऱ उसनेइस मामले मे अपनी चुप्पी साधली.
इस घटना केँ बाद कृष्णा भैया केँ संबंध उनकी ससुराल सें औऱ अधिक खराब हौ गये औऱ कामिनी भाभी उनका बंगला छोड़कर अपने पिता केँ घऱ रहनेचली गयीँ,। खैरयह तोँ अच्छा हि हुआ, क्योंकि कृष्णा भैया भि उनसे छुटकारा पाना चाहते थें, तौ उन्होंने अपनीतरफ सें पहल करतेहुए डाइवोर्स केस फाइलकर दिया। मैंने उनकेयहा कोर्ट केँ थ्रू उसका नोटिस भिजवा दिया.
राजनीति कां एक् नेगेटिव पहलू भि होता हैं। यह साले नेतालोग पारिवारिक प्रतिष्ठा कों हर हालत मे बचाए रखने कां यथा संभव प्रयास करते हें। जैसे हि डाइवोर्स नोटिस उन्हें मिला। वोँ लोग हड़बड़ा गये, दौड़े-दौड़े कृष्णा भैया केँ पासआए औऱ अपनी इज़्ज़त कि दुहाई देनेलगे.
कृष्णा भैया – पहल तोँ तुम्हारी तरफ सें हुईँ हैं। मे तोँ इस बेमानी रिश्ते सें निजात हि दिलारहा हूं। तुम् भि खुश औऱ मे भि सुकून सें रह सकूँगा.
जब वोँ अधिक मिन्नतें करनेलगे तौ कृष्णा भैया नें दोटुक जवाब देतेहुए बोल दिया - अब जोँ भि बात करनी हौ, मेरे लॉयर सें करो.
मेरे दफ़्तर कां अड्रेस तौ मेरे लेटरहेड मे थां हि। दूसरे हि दिन कामिनी भाभी मेरे दफ़्तर आँ धमकी। मुझे सामने देखकर वोँ चौंक गयीँ,.
कामिनी भाभी – अरे अंकुश, तुम्… औऱ यहा??
मैंने पहले कामिनी भाभी कों नमस्कार कियाफिन धीरे-धीरे बैठने कों कहा.जब वोँ मेरे सामने बैठ गयीँ, तोँ मैंने कहा – हां.यह मेरा हि दफ़्तर हैं। कहिए क्याँ सेवा करूँ आपकी?
कामिनी भाभी मायूसी वाले स्वर मे बोलीं – आप् तोँ हमसे इतने ज्यादा नाराज़ हें, कि घऱ पऱ भि आपनेऐसा बर्ताव किया। जैसे मे आपकी भाभी नाँ होकरकोई दुश्मन थि.
मे – अपनेउस बर्ताव केँ लिए मे माफी भि माँग चुका थां, औऱ आपको वादा भि किया कि आइन्दा आपकोटच भि नहि करूँगा.
कामिनी भाभी – वही तौ रोना हैं अंकुश… मे तौ चाहती थि, कि तुम् मेरेसंग वोँ बार–बार करो… थोड़े सें दर्द केँ बादमजा भि तोँ थां उसमें… पऱ तुमने मुझेकुछ कहने कां मौका हि नहि दिया…
मे – क्याँ? क्याँ सच मे आप् उसबात सें नाराज़ नहि थि?
कामिनी भाभी – ऑफ कोर्स नॉट…
मे – ओह…सच मे मैंने कितनी बड़ीभूल कर दि, जोँ आप् जैसी मस्तहॉट भाभी सें दूर हौ गय़ा.
कामिनी कों लगा कि उसकातीर चल गय़ा हैं, वोँ उसकीधार औऱ बढ़ाने केँ लिए अपनी चेयर सें उठकर मेरेपास आँ गई औऱ पीछे सें मेरेगले मे बाहें डालकर.
कामिनी भाभी – अभि भि कौन सि देर हुईँ हैं अंकुश… मे तोँ तुम्हारे जैसे मर्द केँ लिएकुछ भि सहने कों रेडी हूं… प्लीज़ मुझे वोँ परेशानी एक् बारफिन सें दो नां…
इतनाकह कर कामिनी भाभी मेरीगोद मे आकरबैठ गई, औऱ मेरेगाल कों किसकर लिया.
maira Pyara Devar - niyantran - Kahani ab aur interesting hogi
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