जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update 18
मे बाथरूम कि औऱ बढ़ा, जैसे हि द्वार (दरवाज़ा) खुला, नज़र जकूज़ी पर्र पड़ी। अरे दोस्त… इतनेदिन होँ गए, मगर हमने इसकामजा हि नहि लिया। मैंने जल्दी नल खोला। गरम पानी कि धार तेज़ होँ गई, झागदार बुलबुले बननेलगे। १० मिनट मे जकूज़ी भर गय़ा। मैंने अपनी शॉर्ट्स उतारी औऱ अंदरबैठ गय़ा। पानीगरम थां, मगरमन औऱ भि गरम थां।
“भाभी…आओ नां!” मैंने आवाज़ लगाई।
भाभी अंदरआईं। नंगी, चमकती हुईँ। वोँ मटकते हुएआईं, कमर लहराती, बूब्स हल्के सें उछलते, जाँघें आपस मे रगड़ती हुईं। धीरे-धीरे सें वो जकूजी मे मेरे सामने बैठी हलके सें पानी मे उतरते हुए जैसेकोई जलपरि होँ जौ पानी मे अपनाअंग प्रदर्शन कररही हौ। उन्होंने मेरी तरफ़ देखा, होंठों पर्र शरारत भरी मुस्कान थि।
“शैतान… यहचलरहा थां इतनीदेर सें?” वोँ हँसकर बोलीं।
मैंने अपना एक् पेर उनके दोनों पैरों केँ बीच डाला। पांव कि उँगलियों सें हल्के सें उनके चूत पर्र दबाव डाला। भाभी नें आँखें बंदकर लीं, चेहरा एक् तरफ़ मोड़ लिया। उनकी साँसें तेज़ होँ गईं। मैंने पेर कि उँगलियों सें उनका चूत सहलाना शुरुआत किया, हल्के-हल्के, गोल-गोल। उनकेहाथ जकूज़ी केँ किनारे पर्र थें, बूब्स पानी मे हल्के-हल्के तैररहे थें। वोँ कसमसा रहीथीं, शरीर मे वोँ कंपन, वोँ बेचैनी।
फिन मे उठा औऱ उनके साइड मे आकरबैठ गय़ा। एक् हाथ पीछे सें डालकर उन्हें खींचा औऱ अपनीगोद मे बिठा लिया। अब मेरे दोनों पेर फैलेहुए थें, भाभी मेरे दोनों पैरों केँ बीच बैठीथीं। उनकीपीठ मेरी छाती सें सटी हुईँ। भाभी नें पीछे मुड़कर मुझे गहराकिस किया, जीभ मेरीजीभ सें लड़ती हुइ।
मैंने उनकीकमर सें पकड़कर ऊपर उठाया। भाभी कों पता थां क्याँ करना हैं। उन्होंने एक् हाथ पानी मे डालकर मेरा लन्ड पकड़ा, उसे अपने चूत पऱ सेट किया। मैंने कमर सें पकड़कर उन्हे आहिस्ता नीचे किया। मेरा लन्ड उनकेगरम, भीगे चूत मे समा गय़ा। भाभी कि मोटी गाँड मेरी जाँघों औऱ पेट सें दब गई। पानी मे वोँ फिसलन औऱ गर्मी, एक् अलग हि एहसास।
फिन मैंने पानी मे उनके बूब्स कों मसलना शुरुआत किया। पानी मे डूबकर भाभी सचमे जलपरि लगरही थीं, गोरी त्वचा पऱ पानी कि बूँदें चमकरही थीं, बूब्स हिलरहे थें। हर हलचल केँ संग लन्ड चूत मे घिसरहा थां। भाभी कराहरही थीं “म्म्म्ह्ह…”
मेरेहाथ उनके शरीर पर्र घूमरहे थें, बूब्स, पेट, कमर, जाँघें। पानी मे यह स्पर्श औऱ भि कामुक लगरहा थां। भाभी अपनीपीठ मेरी छाती पऱ रगड़रही थीं। फिन उन्होंने एक् हाथ नीचे डाला, मेरा लन्ड जौ आधे सें अधिक उनके चूत मे थां उस पर्र रख दिया। हाथ धीरे धीरे नीचे सरकाया औऱ मेरे अंडकोष कों हथेली मे समा लिया। पानी मे वोँ हल्के-हल्के मसाज करने लगीं। फिन हाथ औऱ आगे बढ़ाया, मगर नीचे नहि जारहा थां। मैंने दोनों पांव मोड़कर ऊपरकिए, मेरी रसीली गाँड थोड़ी आगे आँ गई। भाभी नें चूत केँ सिरे सें अंडकोष तक, फिन मेरे मोटी गाँड केँ छेद तक हाथ फेरना शुरुआत किया। उनका दूसरा हाथ पीछेआया औऱ मेरे बालों कों सहलाने लगा। मैंने उनके बूब्स सें जाँघों तक सहलाना जारीरखा। माहौल बहोत गरम होँ चुका थां।
अब भाभी एकदम मदमस्त हौ चुकीथीं। वोँ ऐसे हि सहलाते हुए बोलीं,
“अच्छा लगरहा हैं नाँ?”
मैंने “हम्म…”कहा।
भाभी नें शरारत सें कहा, “तुम्हें अच्छा लगता हैं, मेराऐसे तुम्हारी रसीली गाँड पऱ हाथ फेरना?”
मैंने “हाँ…”कहा।
भाभीअब बहोत बोल्ड हौ गई थीं। उन्होंने हाथ औऱ नीचे लेँ जाकर एक् उँगली मेरे भारी गाँड केँ छेद मे डाल दि। मे सिहरउठा। भाभी हल्के सें हँस पड़ीं।
“मेरे नंगे देवरु… बड़ामजा आँ रहा हैं भाभी केँ संग। हरामी…”
भाभी कां यहनया रूपआज मुझे नज़र आँ रहा थां, जैसेउस पानी मे कोईनशा हौ। वोँ बिंदास, वोँ बेबाक, वोँ कामुक।
कुछदेर हम् ऐसे हि मज़े लेतेरहे, सहलाते, चूमते, रगड़ते। जब भि भाभी ऊँगली सें मेरे गांड कों छेड़ती हम् दोनों कों बड़ा मज़ाआता।
फिन भाभी अचानक हल्का उठीं। मेरा लन्ड फच कि आवाज़ केँ संग बाहर् निकला। भाभी नें पानी मे डुबकी लगाई औऱ मेरा लन्ड अपने मुँह मे भर लिया। उनके बूब्स मेरी जाँघों सें रगड़रहे थें। वोँ चूसरही थीं, गहरा, गीला, जोरदार। जीभ लन्ड कि टिप पऱ घुमारही थीं।
कुछ सेकंड बाद भाभी हाँफती हुई बाहर् आईं औऱ मेरी छाती पऱ सिर रखकरलेट गईं। मे समझ गय़ा, पानी मे ब्लो नौकरी मुमकिन नहि थां। मैंने कुछ नं कहा। | मैंने उनकी एक् टाँग पकड़कर थोडा फोल्ड किया औऱ दूसरे हाथ सें लन्ड कों वापस उनके चूत मे डाल दिया।
भाभीअब कमर कों गोल-गोल घुमारही थीं। बड़ामजा आँ रहा थां। उनका शरीर पानी मे मुझसे चिपकरहा थां, फिसलरहा थां। मे लन्ड पऱ हौ रही रगड़ कों एंजॉय कररहा थां। पानी केँ अंदर उनकी गांड़ पऱ एकाधचपत भि मार देता।
भाभी नें चेहरा ऊपर किया, मेरी आँखों मे आँखें डालीं। कमर कां घुमाना अभि भि जारी थां।
“यह जवानी बस तेरी हैं… मसलदे इसे, निचोड़ दे…”
ऐसा कहकर उन्होंने मुझे एक् गहराकिस किया, जीभ मेरीजीभ सें लड़ती हुईँ, होंठ चूसते हुए, दाँत हल्के सें काटते हुए। पानी मे हम् दोनों कां जिस्म एक् हौ गय़ा थां, गरम, गीला, कामुक।
जकूज़ी कि बुलबुले हमारे चारों ओरफूट रहे थें, मगर हमारे बीच सिर्फ़ यह प्रेम थां… यहहवस थि… औऱ यह वादा थां कि यह प्रेम ख़त्म नहि होना चाहिए।
हम् दोनों फिसलकर पूरे पानी मे समागए। जकूज़ी कां पानीअब हमारी हवस कां हिस्सा बन चुका थां। हम् एक्-दूसरे कों जकड़े हुए थें, मेरी बाहें उनकीकमर पर्र, उनकी बाहें मेरी गर्दन पऱ। लन्ड औऱ चूत कां संगम अपनेचरम पऱ थां। हर हलचल केँ संग पानी चपक-चपक कि आवाज़ कररहा थां, जैसेकोई तूफ़ान होँ। भाभी कि कराहें पानी मे गूँजरही थीं, “हाय… औऱ… अह्ह्ह…
हम् मदमस्त मिलन मे डूबेहुए थें। कभीऊपर उठते, पानी सें बाहर् निकलते, फिन फिसलकर नीचे गिरते। हरबार गिरने पर्र लन्ड औऱ गहराई सें अंदर जाता, भाभी कि जांघें मेरी जाँघों सें टकराती। हम् हवस केँ नशे मे एक्-दूसरे कों काटरहे थें, कंधों पर्र, गर्दन पर्र, होंठों पऱ दाँत गाड़ते। चूमरहे थें, गहरा, गीला, भूखा। उनके होंठ मेरे होंठों पर्र, जीभ मेरीजीभ सें लड़ती। पानी हमारी साँसों कों औऱ गरमकर रहा थां।
फिन एक् जोरदार झटके केँ संग मैंने लन्ड कों पूरी ताकत सें उनके चूत मे धकेला। भाभी कां पूरा शरीर काँपउठा। उनकी नाखून मेरीपीठ पऱ गड़गए। हम् दोनों एक् संगझड़ गए, मेरारस उनके अंदरभर गय़ा, उनकारस पानी मे घुल गय़ा। हम् हाँफते हुए, साँसें फूलते हुए जकूज़ी केँ किनारे सें बैठगए।
इधर-उधर देखा तौ हँसीछूट गई। पूरा बाथरूम पानी सें भर गय़ा थां, फर्श पऱ पानी कि चादर, दीवारें गीली, जकूज़ी कां पानी बाहर् बहरहा थां। हम् दोनों ज़ोर-ज़ोर सें हँसने लगे, जैसे बच्चे हों जोँ शरारत करके पकड़े गएहों।
भाभी नें मेरी तरफ़ देखा, आँखों मे अभि भि वोँ नशा बाकी थां। “देखो नाँ… क्याँ हालकर दिया तूने मेरा… औऱ बाथरूम कां!”
मैंने हँसते हुएकहा, “भाभी… आप् हौ हि इतनी सुन्दर, कोई भि कन्ट्रोल नहि कर पायेगा, अगरऐसी जलपरी केँ संग पानी मे होँ। ”
भाभी नें मेरेगाल पर्र हल्का थप्पड़ मारा, फिन मेरे सीने सें लगगईं। “शैतान… मगर अच्छा लगरहा हैं। बहोत अच्छा। ”
हम् दोनों ऐसे हि बैठेरहे, नंगे, गीले, हँसते हुए। हमारे हर हलचल केँ संग पानी कि हलकी आवाज़ आँ रही थि, मगर हमारे दिलों मे एक् अलग हि चैन थां। बाहर् रात होँ रही थि, मगर हमारे लिए वक़्त रुक गय़ा थां।
भाभी नें धीरे-धीरे सें कहा, “चल बाहर् निकलते हैं अब पानी ठंडा होनेलगा हैं। ”
मैंने उनकीकमर पऱ हाथ फेरा औऱ फुसफुसाया, “भाभी… जैसा तुम् बोलो। ”
बाहर् निकलकर, भाभी नें टॉवल उठाया, औऱ मुझे पोंछने लगी, अच्छेसे दबाकर उन्होंने मुझे पोंछ दिया, लन्ड कों साफ करतेसमय बड़े प्रेम सें पोछा, जैसे वोँ कोई उनका प्यारा गिफ्ट हि, जिसे वोँ जानसे भि अधिक चाहती होँ।
मैनेवही टॉवल अपने हाथों मे लिया, भाभी नें दोनों हाथऊपर किये, उनके बूब्स अबहवा मे कसकर एकदम मस्तगोल शेपबना रहे थें, मैने टॉवल सें उन्हें पोंछने लगा, पूरे शरीर कों पूछनेके बाद, टॉवल छोड़कर मैने भाभी कों गोद मे उठाया औऱ बड़े प्यारे बेडरूम मे लिजाकर बेड पऱ रख दिया।
भाभी प्यारे सें मुझे देखेजा रही थि, मे भाभी केँ बाजू मे बैठ गय़ा, भाभी नें इशारा किया लेटने कां, हम् दोनों वैसे हि नंगे एक् दूसरे कों लिपटकर लेटेरहे।
रात नें हमे धीरे-धीरे सें अपनी आगोश मे लिया, थके हारे हम् एक् दूसरे कों पकड़कर सोगए।
सुभह मे जल्दउठ गय़ा। आज हमें वापसघऱ कां सफर शुरुआत करना थां औऱ होटल सें 11 बजे सें पहले चेकआउट भि करना थां।
हमने पिछले दोदिन खूब मस्ती कि थि, इसलिये कमरे मे हमारे कपड़े, सामान, लॉन्जरी, यहा तक कि भाभी कि ब्रा औऱ पैंटी भि बिखरे पड़े थें। मे एक्-एक् करकेसभी उठाने लगा औऱ बैग मे भरनेलगा।
भाभी शायदजाग चुकीथीं। मे उनकेपास गय़ा तौ उनके चेहरे पर्र एक् गहरी उदासी छाई हुईँ थि। आँखें थोड़ी नमथीं, जैसेमन हि नहि कररहा हौ उनका वापस लौटने कां। वो अभि भि नंगीथीं, मात्र चादरबदन पऱ लिपटी हुई, उनकीभरी हुईँ बूब्स चादर केँ ऊपर सें साफ़ उभरी हुई थीं औऱ गोरी जाँघें बाहर् निकली हुईँ थीं।
मैंने झुककर उनकेगाल पऱ एक् प्यारा सां चुम्मा दिया औऱ धीरे-धीरे सें कहा, “थोडा आरामकर लो भाभी, मे बैगपैक कर लेता हूं। हमें 11 बजे सें पहले निकलना पड़ेगा। ”
भाभी बच्चे कि तरह नाराज़ होँ गईं। बिनाकुछ बोले वोँ उठीं औऱ नंगा शरीर लहराते हुएहुए सीधे फ्रेश होने केँ लिए बाथरूम मे चलीगईं।
मैंने सभीकुछ अच्छे सें पैककर लिया, कपड़े मोड़कर, उनके सेक्सी सामान अलग सें छुपाकर, बैगबंद किया। फिन अपने कपडे बदलकर पूरीतरह रेडी होँ गय़ा।
कुछदेर बाद भाभी बाथरूम सें निकलीं। उन्होंने एक् सिंपल, हल्के पीलेरंग कां सलवार-कमीज़ पहनाहुआ थां। कमीज़ कां दुपट्टा कंधे पऱ लापरवाही सें पड़ाहुआ थां। बाल अभि भि थोड़े बिखरेसे थें औऱ चेहरे पर्र वोँ उदासी अभि भि बरकरार थि।
फिन भि वो कितनी हसीनलग रहीथीं, सफ़ेद चेहरा, नम आँखें, पतलीकमर औऱ सलवार मे उनकी मोटी, रसीली जाँघों कि लाइन साफ़दिख रही थि।
मैंने उनकाहाथ पकड़ा, अपनीतरफ खींचा, कमर मे हाथ डालकर उन्हें अपने सीने सें सटा लिया औऱ बोला,
“भाभी हम् घऱ पऱ तोँ संग हि हें नाँ… यह नाराज़गी छोड़दो। मुझे अपनी प्यारी भाभीऐसी नाराज़ बिल्कुल अच्छी नहि लगती। ”
भाभी नें पहले नीचे देखा, फिन मेरी आँखों मे देखा। उनकी आँखों मे प्रेम औऱ उदासी कां मिला-जुला भाव थां। उन्होंने धीरे-धीरे सें मेरे होंठों पर्र एक् छोटा, नम किस किया औऱ फुसफुसाकर बोलीं, “ठीक हैं…”
फिन उन्होंने सामान चेक करना शुरुआत कर दिया।
हम् दोनों सामान लेकर नीचे उतरे। चेकआउट कराया, बैग वाहन मे लादे औऱ घऱ वापसी कां सफर शुरुआत कर दिया।
भाभी कों हँसाने केँ लिए मैंने रास्ते भर हमारे मस्ती भरे सेक्स केँ किस्से याद दिलाने शुरुआत किए — वोँ पहला ब्लोजॉब वाली सुभह, होटल कि बालकनी मे खड़े होकर किया गय़ा सेक्स, बाथटब मे पानी केँ अंदर हमारी चीखें… भाभी पहले तौ शर्मा गईं, फिन उनकेगाल लाल हौ गए। बीच-बीच मे वो शरारत सें मेरे कंधे पर्र तेज़-तेज़ सें चपत लगातीं औऱ कहतीं, “चुपकरो नाँ… बदमाश!”
ऐसे हि हँसी-मज़ाक, छेड़छाड़ औऱ प्रेम भरी बातों मे हमारा पूरासफर बीत गय़ा। हमारा नाता मात्र सेक्स कां नहि थां। उसमें एक् गहरी दोस्ती थि, विश्वास थां, समझ थि। बिना सेक्स केँ भि हम् घंटों एक्-दूसरे कां संग एंजॉय कर लेते थें, जैसे सच्चे मित्र।
साम तक हम् घऱ पहुँच गए।
अंजान बनकर हम् अपने-अपने काम मे लगगए,। जैसेकुछ हुआ हि न् हौ।
बडा हि शानदार लाजवाब औऱ अद्भुत मनमोहक अप्रतिम रोमांचक भाग हैं भइया मज़ा आँ गय़ा
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 19
दोस्तों यह स्टोरी कां आखरीभाग हैं। पहले हि बतादू इसमें न् कोई सेक्स हैं न् कोई इमेज, मगर अगर आपने इसकेसब भागपढ़े होंगे तौ आप् समझे होंगे ये किस्सा प्यारी कि भि हैं। हर स्टोरी कों एक् अंजाम तक पहुंचना होता हैं। तौ येरहा इस किस्सा कां अंत। आशा हैं भाभी केँ सेक्सी अंदाज औऱ उनके नाजुक शरीर सें भि आगे भाभी केँ दिल कों आप् इसभाग मे समझ पाएंगे, आपकी प्रतिक्रिया जरूर दीजिये।
किस्सा आगे। ….
दूसरे दिन मे कॉलेज चला गय़ा। क्लासेस कि डिटेल्स लेनीथीं, प्रोफेसर्स सें मिलना थां, किताबें औऱ बाकी चीजें देखनी थीं। नया सेशन शुरुआत होने वाला थां… मगरदिल अभि भि उनतीन दिनों केँ पलों मे खोयाहुआ थां।
साम कों जब मे घऱ लौटा तोँ पूरा माहौल अजीब औऱ भारी थां। भैया सोफे पर्र बैठेहुए थें। उनके चेहरे पर्र घुस्सा साफ़झलक रहा थां, आँखें लाल, माथा सिकुड़ा हुआ, औऱ जबड़े कसेहुए। मेरेकदम अपने आप् धीमेपड़ गए। मे चुपचाप अपनीरूम कि तरफ मुड़ गय़ा, मगरतभी भैया कि कड़कड़ाती हुई आवाज़ आई “रुको वहीं पऱ!”
मेरादिल धड़कना भूल गय़ा। एक् लम्हा मे पूरे जिस्म मे ठंडकफैल गई। मे ठिठककर वहीं खड़ारह गय़ा। मेरेमन मे जल्दी एहसास हौ गय़ा, कुछ बहोत बड़ी गड़बड़ हौ गई हैं। मैंने नज़रें पूरे कमरे मे दौड़ाईं। भाभी कहींदिख नहि रहीथीं। मां एक् कोने मे खड़ीथीं, दीवार कां सहारा लिए, औऱ बहोत हल्के-हल्के रोरही थीं। उनकी सिसकियाँ दबाने कि कोशिश कररही थीं, मगर आँसूरुक नहि रहे थें।
मे वहींजम गय़ा। पैरों मे जान नहि बची थि। कुछ बहोत बड़ी गड़बड़ हुइ थि… कहीं भैया कों…
भैया उठे औऱ मेरे सामने आँ खड़ेहुए। उनके माथे कि नस फड़फड़ा रही थि, हाथ मुट्ठी मे भिंचे हुए थें। उन्होंने भाभी कां फोन मेरे चेहरे केँ सामने कर दिया। स्क्रीन पऱ वोँ फोटो थि, हम् दोनों कि सेल्फी, कमर तक कि। भाभी टॉपलेस थीं, उनकी भरी-भरी, गोरी बूब्स पूरीतरह नंगीदिख रहीथीं, औऱ मेरा एक् हाथउन बूब्स पर्र रखाहुआ थां। फोटो मे हम् दोनों हँसरहे थें, आँखों मे वही शरारत औऱ प्रेम।
मेरा दिमाग़ पूरीतरह सुन हौ गय़ा। सारी दुनिया घूमने लगी। हजारों प्रश्न एक् संग दिमाग़ मे घूमने लगे, भाभी नें यह सेल्फी क्यूं ली? क्यूं डिलीट नहि कि? किसने देखली? कबपता चला? मे कुछ भि बोल नहि पाया। बस नज़रें नीचे झुकालीं।
भैया नें फोन कसकर पकड़ लिया औऱ मुझे मारना शुरुआत कर दिया। एक् केँ बाद एक्, फोन सें मेरेसिर पर्र, चेहरे पर्र, कंधों पर्र, पीठ पर्र… हरवार केँ संग तेज़ दर्दफैल रहा थां। मे दर्द केँ मारे नीचेबैठ गय़ा। आँखों सें आँसू बहनेलगे। मे रोनेलगा, ज़ोर-ज़ोर सें, जैसेकोई बच्चा रोता हैं।
आखिर मे भैया नें एक् ज़ोरदार लात मेरेपेट पर्र मार दि। मे कराहउठा। फिन उन्होंने फोन ज़ोर सें फेंक दिया औऱ वहा सें चलेगए। मे ज़मीन पऱ पड़ा-पड़ा रोतारहा। मम्मी कि भि पासआने कि हिम्मत नहि हुइ। वो दूर खड़ी केवल सिसकरही थीं। दिल मे बहोत बुरे-बुरे ख़याल आनेलगे। एक् लम्हा मे मे पूरीतरह अकेला हौ गय़ा थां। समझ नहि आँ रहा थां कि अब क्याँ करूँ। बस वैसे हि रोतारहा।
कुछदेर बाद मैंने हिम्मत करकेऊपर देखा। मम्मी पूजाघऱ मे बैठकर रोरही थीं। भैया कहींदिख नहि रहे थें।
मे उठा औऱ सीधा अपनेरूम मे गय़ा। भाभी कि यादआते हि सीना फटनेलगा। इस वक़्त मुझे एक् यार कि ज़रूरत थि… मगर वो मेरेसंग नहि थि। घऱ पऱ रहने कां तौ अब प्रश्न हि नहि थां। आंखेबंद कि औऱ एक् लम्हा मे मैंने घऱ छोड़ने कां फैसला कर लिया। रोते-रोते मैंने बैग मे कुछ कपड़े भरे, सारे सर्टिफिकेट, मार्कशीट्स, जरूरी कागज़ात भि लेँ लिए। फोन चेक किया, कोई मैसेज नहि, कोईकॉल आई नहि।
हॉल मे आकर खड़ा होँ गय़ा। एक् समयलगा मम्मी सें बातकर लूँ, मगर हिम्मत नहि हुईँ। आँसू पोछते हुए मे घऱ सें बाहर् निकल गय़ा… बस स्टैंड कि तरफचल पड़ा।
पूरे रास्ते बस भाभी कां ख़याल मुझे परेशान किएजा रहा थां। कहां हें वोँ? उनकोकुछ हुआ तौ नहि? क्याँ भैया नें उन पर्र हाथ उठाया? क्याँ वोँ ठीक हें? यह प्रश्न बार-बार मन मे घूमरहे थें।
बस स्टैंड पर्र पहुँचकर मे एक् कोने मे बैठ गय़ा। अब क्याँ करूँ? कहां जाऊँ?कुछ समझ नहि आँ रहा थां। किसी मित्र सें भि क्याँ बात करूँगा? क्याँ बताऊँगा? बस आँसू बहतेरहे औऱ दिल मे मात्र एक् नाम गूँजता रहा, भाभी।
रात केँ ठीक 12 बजरहे थें। बस स्टैंड पऱ अंधेरा औऱ सन्नाटा छायाहुआ थां। मे एक् कोने मे बैठाहुआ थां, आँखों नम थि, औऱदिल मे हजार प्रश्न। मुझेकुछ भि पता नहि थां, भाभी यहीं कहीं हें याँ फिन अपने मायके चली गई हें? उन्होंने अब तक मुझे कॉन्टैक्ट क्यूं नहि किया? क्याँ उन्हें भि कुछहुआ? कई प्रश्न बार-बार मेरेमन मे चक्कर लगारहे थें।
अचानक मेरेफोन कि घंटीबज उठी। अनजान नंबर सें एक् मैसेज आया थां। मैंने हाथ काँपते हुए स्क्रीन खोली, मैसेज मे मात्र एक् लाइन थि: भाभी केँ शहर कां नाम लिखा थां। बस इतना हि।
मेरेदिल कों एक् ठंडक कि लहर दौड़ गई। साँसरुक गई। हाँ… होना हि थां। भाभी नें किसी नं किसीतरह, किसी सें ये मैसेज मुझ तक अवश्य पहुँचाया थां। उनकीयाद, उनका प्रेम, उनकी चिंता… सभी एक् संग उमड़ पड़ा। आँखों मे फिन हलके सें आंसू आँ गए, मगर इसबार उम्मीद केँ आँसू थें।
मेरेपास कुलदो हजार रुपए थें। मे जल्दी उठा औऱ बस ढूँढने लगा। एक् बस केँ पीछे दौड़ा, दूसरी केँ पीछे दौड़ा, ड्राइवरों सें चिल्ला-चिल्लाकर पूछता रहा। “भाभी केँ शहर वालीबस… कहां हैं? कब जाएगी?” लोग मुझे अजीब नज़रों सें देखरहे थें, मगर मुझे किसी कि परवाह नहि थि।
आखिरकार, प्लेटफॉर्म नंबरतीन पऱ एक् बस खड़ी मिली, उसी शहर कि। मे भागकर उसमें चढ़ गय़ा। कंडक्टर सें टिकट लिया, उसने जौ भि सीट दि, मे वहींबैठ गय़ा। टिकटहाथ मे थामे, मैंने आँखें बंदकर लीं औऱ दिल कों मात्र भाभी सें मिलने केँ ख़यालों सें भर लिया, उनकी वोँ मुस्कान, उनकी वोँ गरम बाहें, उनका वोँ स्पर्श… बसयही सोचता रहा। थकान, रोना, डर, सभीकुछ एक् समय मे भूल गय़ा। मे आरामसे सो गय़ा।
सुभहबस मेरी मंज़िल पऱ पहुँच गई।
मुझे तोँ केवल भाभी केँ कॉलोनी कां नामपता थां। मे कभी उनके मायके नहि आया थां। विवाह केँ वक्त तौ हम् हॉल सें सीधेघऱ वापसचले गए थें। रिक्शे वाले नें पूछा, “कहां जानां हैं बाबू?” मैंने केवल कॉलोनी कां नाम बताया। वो मुझे लेकरचल पड़ा।
रिक्शा कॉलोनी केँ अंदर घुसा। सुभह कि धूप, अनजान गलियाँ, अनजान चेहरे… मगर मेरेदिल मे केवल एक् नाम धड़करहा थां, भाभी। मैंने रिक्शा रुकवाया, किराया दिया औऱ उतर गय़ा। अबबस पैरों सें हि आगे बढ़ना थां… भाभी तक पहुँचने केँ लिए।
मे कॉलोनी कि गलियों मे एक्-एक् नेमप्लेट पढ़ता हुआघूम रहा थां। दिल मे धड़कन तेज़ थि, हाथ काँपरहे थें, हर नामप्लेट पऱ नज़र डालते हि उम्मीद जागती औऱ फिनटूट जाती। मे बार-बार पीछे मुड़कर देख लेता कि कोई मुझे तौ नहि देखरहा।
आखिरकार, एक् बड़े सें सफेद घर-मकान केँ गेट पर्र वोँ नामदिख गय़ा, जिसे मे जानता थां, जिसकी तलाश मे मे सारीरात औऱ सुभह सें भागाचला आँ रहा थां। मेरे पैरों मे जान आँ गई। मे झट सें कंपाउंड केँ पास पहुँच गय़ा। बाहर् खड़े होकर मे खिड़कियों मे कुछ दिखने कि उम्मीद करनेलगा, भाभी कि कोईझलक, उनकाकोई इशारा, कुछ भि। मे वहीखड़ा देखरहा थां, हिम्मत नहि थि केँ अंदरजाऊ।
तभी अचानक ऊपर सें एक् छोटा सां पत्थर आकर मेरे कंधे पर्र लगा। हल्का दर्दहुआ, मगरउस पत्थर केँ संग एक् मुड़ी हुइ चिट्ठी भि बँधी हुईँ थि। मैंने तेज़ी सें उसे उठाया, चारों तरफ देखा कि किसी नें देखा तौ नहि, औऱ चिट्ठी खोलली।
उसमें भाभी केँ हि हाथ कि लिखावट मे लिखा थां:
“तुम्हें पता नहि, तुम् यहाआकर मुझ पऱ कितना बड़ा एहसान करगए होँ। मे यहा भि जैसेकैद मे हूं। मेरेपास मोबाइल भि नहि हैं। तुम् कॉलोनी केँ बगल वाले गार्डन मे मेरा इंतजार करना… मे आऊँगी।
Love you.”
मेरी आँखों मे आँसूभर आए। गला रुँध गय़ा। चिट्ठी कों सीने सें लगा लिया। भाभी… मेरी भाभी… इतनी मुश्किल मे भि उन्होंने मुझे बुलाया थां। उनका प्रेम, उनकी चिंता, उनका विश्वास, सभीकुछ एक् लम्हा मे उमड़ पड़ा।
मैंने इधर-उधर देखा। तभी ऊपरी मंज़िल केँ एक् बाथरूम कि छोटीसी खिड़की सें एक् नाजुक, सफ़ेद हाथ बाहर् निकला, खिड़की छोटी थि, केवल हथेली हि बाहर् आपाती थि। वोँ हाथ बार-बार हिलने लगा, पहले धीरे-धीरे, फिन थोडा तेज़, जैसे मुझेदेख रहा होँ। मैंने जल्दी पहचान लिया। वोँ भाभी कां हि हाथ थां, वही पतली कलाई, वही नाखून। वोँ हाथहिल रहा थां मानोकह रहा हौ, “मे यहा हूं… तुम् अकेले नहि हौ… मे आँ रही हूं। ”
मैंने कोई हंगामा नहि मचाया। न् कोई आवाज़ निकाली, न् कोई इशारा किया। बस बार-बार मुड़कर भाभी केँ उस हिलते हाथ कों देखता रहा। आँखों मे आँसू, होंठों पऱ मुस्कान औऱ दिल मे उम्मीद लिए मे आरामसे वहा सें निकल पड़ा। पेर गार्डन कि तरफबढ़ रहे थें, मगर नज़र बार-बार पीछे मुड़रही थि, भाभी केँ उसहाथ पऱ, जोँ अभि भि हिलरहा थां, जैसे मुझे विदाकर रहा हौ औऱ वादा भि कररहा होँ कि बहोत जल्द मिलेंगे।
मुझेअब थोड़ा अच्छा लगरहा थां। कमसेकाम भाभीठीक हैं येपता चल गय़ा थां। मे एक् छोटे सें रेस्टोरेंट मे पहुंचा। पानी पिया, गला सुख गय़ा थां, पानी पीके थोडा आराम मिला। थोडा ब्रेकफास्ट किया औऱ गरमचाय। रेस्टोरेंट केँ मालिक सें विनती करके अपनाफोन चार्ज भि करवा लिया। वहा बैठे-बैठे बार-बार इधरउधर देखरहा थां, कही भाभी गार्डन कि ओर जातीहुए दिखजाए। फिनउठा औऱ सीधा गार्डन कि तरफचल पड़ा।
एक् बेंच पऱ बैठकर नज़ारे घुमारहा थां, नज़रें बार-बार गेट कि ओरजारही थीं। हर आती-जाती लड़की कों देखकर दिल धड़क उठताकही भाभी तौ नहि। 1 बजे केँ आस-पास अचानक वोँ दिखीं, मेरी भाभी। तेज़-तेज़ कदम बढ़ाती हुईँ, करीब दौड़ती हुइ मेरीतरफ आँ रहीथीं। एक् प्राचीन हुआ टी-शर्ट औऱ ट्रैक पैंट पहनेहुए थीं। बाल बिखरे हुए, चेहरा थकाहुआ, आँखें सूजी हुईं, बिल्कुल बिखरी-बिखरी सि लगरही थीं, जैसेकई रातों सें सोई न् हों।
जैसे हि वोँ मेरे लगभगआईं, उन्होंने दौड़कर स्वयं कों मेरी बाहों मे झोंक दिया। हम् दोनों नें एक्-दूसरे कों इतने ज़ोर सें गलेलगा लिया कि साँसें तक फंसगईं। फिन दोनों एक् संग रोनेलगे। सिसक-सिसक कर। आँसू बिना रुकेबह रहे थें। हम् अपने आँसुओं सें एक्-दूसरे केँ टी-शर्ट भिगोरहे थें। उनकी गर्म साँसें मेरी गर्दन पर्र पड़रही थीं, मेरेहाथ उनकीपीठ पर्र काँपरहे थें। कुछदेर तक हम् बस रोतेरहे, कोई शब्द नहि, केवल रोना औऱ गले कां कसाव।
कुछ देरबाद हमने स्वयं पर्र काबू पाया। पास कि बेंच पर्र हम् दोनों बैठगए। मैंने उनकाहाथ थामा, वो मेरे कंधे पर्र सिररखे बैठी रहीं।
कुछ देरबाद उन्होंने खामोशी कों तोड़ा।
भाभी नें धीमी, टूटी हुई आवाज़ मे बताया,
“मम्मी नें… पापा घऱ सें बाहर् जाते हि मुझेआने दिया। बोलीं, जा, मिलले, वरना तुँ टूट जाएगी। मगर जल्द वापस आनां… पापा कों पताचल गय़ा तौ… बहोत बुरा होगा। ”
उन्होंने गहरी साँसली, आँखें नीचे झुकालीं औऱ फिनआगे बोलीं,
“कलसाम… जब तुम्हारे भैया घऱआए तोँ मे मोबाइल मे उन फोटोज कों देखरही थि। तुम्हारे संग वाली। भैया नें पीछे सें सभीदेख लिया। एक् लम्हा मे उनका चेहरा लाल होँ गय़ा थां। उन्होंने मुझे बालों सें पकड़ लिया औऱ कई-कई थप्पड़ मारे… थप्पड़ पऱ थप्पड़, चेहरा जलनेलगा थां, आँखों केँ सामने अंधेरा छा गय़ा थां। मे गिर पड़ी, फिन भि वोँ रुके नहि।
मगरइस बार मैंने हिम्मत नहि हारी। मे उठी, उनकी आँखों मे आँखें डालकर बोलीं, ‘तुम्हारा यह क्रोध… यह हमेशा कां क्रोध… विवाह केँ बाद सें तुम् घऱ मे रहते हि नहि, बाहर्-बाहर्… मुझे जैसे अकेला छोड़ दिया हौ। हमारे पति पत्नि केँ रिश्तेमें कुछबचा भि हैं ? … बस क्रोध। तुमने कभी नहि पूछा कि मे क्याँ महसूस करती हूं। औऱ तुम्हारे भइया नें… मेरे देवरु नें मुझे वोँ केयर दि जोँ कोई सच्चा यार हि दे सकता हैं। उसने मेरी परवाह कि, मेरे दर्द कों समझा, मुझे हँसाया, मुझे सहारा दिया… वोँ सच्चा प्रेम जोँ तुम् कभी नहि देसके। मे हि सबसेबड़ी बेवकूफ थि जौ तुम्हारे बातों मे आँ गई, थि। अबबस।। ’
मैंने औऱ बोल दिया, ‘मुझेपता हैं अबयह ग़ुस्सा तुम् तुम्हारे भइया पर्र निकलोगे, मे वादा करती हूं… मे सभीकुछ करूँगी ताकि तुम्हारा भइया अच्छी जीवनपाए। वोँ पढ़ाई पूरी करेगा, अच्छी जॉब करेगा, आगे बढ़ेगा। मे उसकेलिए लड़ूँगी… चाहे मुझे कितना भि झेलना पड़े। तुम् उसपरदोष मत लगाना। ’
एकदम सें भाभी नें अपनामन हल्का कर दिया।
उन्होंने अपनीजेब सें कुछ रुपए निकाले औऱ मेरेहाथ मे रखदिए।
“यह लें… जितना हौ सका इकट्ठा किया। अब तुँ अकेला केसे रहेगा? कहा रहेगा? कहा खाएगा?
बात करतेहुए वोँ मेरे गालों पऱ हाथ रखती औऱ मेरेआसू पोछती, जैसे मेरेआसु पोछती, खुदके आंखोंसे आसू झलकाती। उनकीहर सिसक मे दर्द, ममता, प्रेम औऱ चिंता साफ़झलक रही थि।
फिन उन्होंने मेरी पूरी किस्सा सुनी, घऱ सें निकलने कि, मार खाने कि, बस स्टैंड पऱ रोने कि। हरबात सुनते-सुनते उनकी आँखों सें आँसू टपकते रहे। कभी नीचेदेख करकभी मेरे आंखों मे देखकर वो सिसकती रही।।
अचानक उन्होंने आसू पोछे औऱ उन्होंने मेरे चेहरे कों दोनों हाथों मे थाम लिया। आँखों मे गहरा प्रेम औऱ मातृत्व जैसी परिपक्वता थि। बोलीं,
“सुन… मुझसे वादाकर। जीवन मे आगे बढ़ेगा। अच्छी जॉब करेगा। पढ़ाई पूरी करेगा। अच्छे सें सेट हौ जाएगा। औऱ जबसमय आएगा… मुझेयहा सें लेकर जाएगा। मे इंतजार करूँगी। कितना भि वक़्त लगे… मे यहीं रहूँगी। बस तुँ टूटना मत। ”
मैंने उनके हाथों कों अपने हाथों मे लेकरकहा,
“मे वादा करता हूं… भाभी। मे सभीकुछ ठीककर लूँगा। तुम्हारे लिए… हमारे लिए। ”
भाभी नें मुझे हिम्मत बांधने केँ लिए, एक् मुस्कुराहट होठो पर्र बिखेरी।
मगर हम् फिन सें एक्-दूसरे कां हाथ पकड़कर हलके हलके रोने लगे। मगर इसबार रोने मे एक् नई ताकत थि, वादों कि, उम्मीद कि।
कुछदेर बाद भाभी उठीं।
“अब मुझे जानां होगा… पापा आने सें पहलेघऱ पहुँचना हैं। ”
वो खड़ेखड़े मुझेदेख रही थि, उन्होंने स्वयं कों संभाला, उनके चेहरे पर्र एक् गजब कां आत्मविश्वास आँ चूका थां। उन्हें देख केँ मेने आंसू पोछे औऱ खड़ा हौ गय़ा। फिन भाभी नें कहा।
“आज सें मे तेरी भाभी नहि… अब सें मे तेरी रिया हूं। आज सें कभी भि मुझे भाभीमत कहना। केवल रिया, तुम्हारी रिया”
मैंने नई उम्मीद औऱ कॉन्फिडेंस केँ संग उनकी आँखों मे देखकर कहा,
“Love you… Riya। मेरा इंतजार करना। मे आऊँगा… औऱ तुम्हे लेँ जाऊँगा। ”
रियाकुछ बोल नहि पाईं। रिया कां गला पूरीतरह भरआया थां। होंठ काँपरहे थें, मगर शब्द नहि निकलरहे थें। उसकी आँखों मे आँसू थें, उन आसुओ मे मेरे Love you कां जवाबदिख रहा थां। उन आँखों मे एक् अजब हिम्मत झलकरही थि, वोँ हिम्मत जौ कहरही थि, “मे टूटूँगी नहि… मे इंतजार करूँगी… मे तेरी हूं। ” संग हि उन आँखों मे एक् गहरा वादा भि चमकरहा थां, वोँ वादा जौ बिना बोलेकह रहा थां, “जब भि तूँ आएगा, मे यहीं खड़ी मिलूँगी… चाहे कितने भि साललग जाएँ। ” उनकी पलकें भारी होँ गई थीं, फिन भि उन्होंने मुस्कुराने कि कोशिश कि, वोँ टूटी-टूटी, मगर सच्ची मुस्कान, जोँ मात्र मेरेलिए थि।
हम् दोनों धीरे धीरेअलग होनेलगे। कदम पीछे हटनेलगे, मगर हमारे हाथ अभि भि एक्-दूसरे कों पकड़ेहुए थें। उँगलियाँ आपस मे फँसी हुईँ थीं, जैसे अंतिम साँस तक संग रहने कि जिदकर रहीहों। मेरी उँगलियाँ उनकी उँगलियों कों कसकर पकड़े हुएथीं, उनकी उँगलियाँ मेरी हथेली कों छोड़ने कां नाम नहि लें रहीथीं। हम् दोनों नें एक् संगहाथ खींचा, मगर उँगलियाँ फिन सें मिलगईं, एक्-एक् करके, जैसे बिछड़ने कां वक़्त टालरही हों। वोँ अंतिम समय मे भि अलग नहि होना चाहती थीं। जैसे हमारे दिलकह रहेहों, “बस एक् लम्हा औऱ… बस एक् स्पर्श औऱ…”
मेरे सीने मे एक् भारी दर्द थां, प्रेम कां, अलग होने कां, उम्मीद कां औऱ डर कां मिला-जुला दर्द। मगर दिल मे एक् नईआगजल रही थि, रिया केँ लिए, हमारे भविष्य केँ लिए। मे उन्हें जातेहुए नहि देखसका। बस मुड़ गय़ा। आँसू पोंछते हुए, कदम बढ़ाते हुए निकल पड़ा… पीछे मुड़कर एक् भि बार नहि देखा, क्योंकि मुझेपता थां कि अगर मैंने एक् बार औऱ देख लिया तोँ शायद वापसआगे कदमबढ़ा न् सकू।
मे चल पड़ा, एक् नई जीवन कि तरफ। रिया केँ संग वाली जीवन कि तरफ। हर कदम केँ संग उनकेउस वादे कि, उनकीउस हिम्मत कि औऱ हमारे उस आखरी स्पर्श कि याद मेरेसंग चलरही थि।
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खत्म
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
स्टोरी कों पसन्द करने औऱ इसका खुशी लेने वालेसब लोगों कों शुक्रिया।
आपके पोस्ट पर्र दिएगए सकारात्मक शब्दों केँ लिए बहोत-बहोत शुक्रिया।
अगर आपकेमन मे कोई विचार हैं जिसे आप् कथा केँ रूप मे विकसित करना चाहते हें, तौ मुझे जरूर बताएं।
फिलहाल इतना हि। फिन सें शुक्रिया।
फिन मिलेंगे एक् नए रोमांच मे।
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बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर उन्मादक एपसोड हें भइया मज़ा आँ गय़ा
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