जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 15
मे थोडा नाराज़-सां, वैसे हि नंगाबेड पर्र लेट गय़ा। हाथ लन्ड पर्र रखा औऱ आरामसे सहलाने लगा। आँखें बंद करके भाभी केँ जिस्म कि यादें ताज़ा कररहा थां।
अचानक खर्र्र्र कि आवाज़ आई।
मैंने आँखें खोलीं। बाथरूम कां पर्दा आरामसे ऊपरउठ रहा थां। शावर तेज़ी सें चलरहा थां। औऱ पानी कि तेज़धार केँ नीचे भाभी कां नंगा जिस्म पैरों सें शुरुआत होकरऊपर तक आहिस्ता उजागर हौ रहा थां। पहले उनकी गोरी, चिकनी जाँघें, पानीउन पर्र बहकरचमक रहा थां। फिन पतलीकमर, गहरी नाभि। फिन वोँ बड़े, भारी बूब्स, पानी कि बूँदें निप्पल्स सें टपकरही थीं, जैसेकोई मोतीबरस रहेहों।
भाभीअब पूरीतरह मदमस्त होँ चुकीथीं। वोँ शावर केँ नीचे खड़ी, आँखें बंद करके अपना शरीर स्वयं हि सहलारही थीं। पहले उन्होंने दोनों हाथों सें अपनी गांड कों पकड़ा, उनपर गोल-गोल हाथ घुमाया, दोनों तरफ़ सें दबाया, फिन खींचा। गांड कि गोलाई औऱ भि उभरआई, पानीउन पऱ बहकर दरार मे घुसरहा थां। फिन वोँ धीरे-धीरे सें झुकीं, कमर सें आगे झुककर, गांड मेरीतरफ करके, चूत पूरीतरह मेरी तरफ़कर दिया। पानी कि धार सीधे उनके चूत पर्र पड़रही थि, वोँ हल्के सें काँपरही थीं। हाथों सें चूत केँ दोनों होंठों कों फैलाया, फिन उँगली अंदर डालकर बाहर् निकाली, जैसे स्वयं कों औऱ गीला करना चाहती हों।
ऐसेलग रहा थां मानो भाभी कां मनकहरहा होँ, खुदको ओर खोलो, सारीदबी इच्छाएं बाहर् निकलो। भाभी खुदसे हि प्रेम कररही थि।
फिन वोँ नीचेबैठ गईं, घुटनों पऱ, जाँघें फैलाकर। हाथ पैरों पऱ फेरना शुरुआत किए, उँगलियाँ टखनों सें ऊपर सरकती हुईं, जाँघों कि रसीले त्वचा कों रगड़ती हुईं। आरामसे ऊपरआती रहीं, जाँघों केँ बीच तक, फिन चूत पर्र रुककर मसलने लगीं। उँगलियाँ अंदर-बाहर्, तेज़ होकर। फिन हाथऊपर लें गईं, पेट पर्र, नाभि मे उँगली डालकर घुमाई, फिन दोनों बूब्स थामलिए। बूब्स कों जोर सें दबाया, मसला, निप्पल्स कों पिंच किया। पानी उनके शरीर पर्र बहरहा थां, बूब्स हिलरहे थें, निप्पल्स सख्त औऱ गुलाबी चमकरहे थें। वोँ कभी बूब्स कों ऊपर उठाकर दबातीं, कभी नीचे करके हिलातीं, जैसेकोई सेंसुअल डांसर हौ जोँ सेक्सी शोकररही हों।
मे उन्हें देखते हुए लन्ड कों जोर सें हिलाने लगा। लन्ड कों हिलाते हुए मेने मेरी आँखें उनकी आँखों सें टीकाकार रखी।
उधर भाभी भि मुझेदेख रहीथीं। उनकी आँखें, हायरे, प्रेम सें भरी, मगर हवस सें जलती हुईं। वोँ मादक अंदाज़ मे मुझे ताड़रही थीं, जैसेकह रहीहों “देखो…यह सभी सिर्फ़ तुम्हारे लिए हैं”। उनकी नज़र मे वोँ गहरा प्रेम थां, जौ कहरहा थां “तुम् मेरीजान होँ, मेरीहर साँस तुम्हारे नाम”, औऱ संग हि वोँ शैतानी हवस, जैसेकह रही होँ “मे तुम्हें आज पागलकर दूँगी, तुम्हारा लन्ड फाड़ दूँगी”। आँखें नम, पुतलियाँ फैली हुईं, होंठ हल्के सें खुले। वोँ बूब्स दबातीं, चूत मे उँगली डालकर तेज़ी सें अंदर-बाहर् करतीं, औऱ मुझे देखकर मुस्कुरातीं, वोँ मुस्कान जोँ दिल कों धड़काती थि, लन्ड कों औऱ सख्त करती थि।
मे भि उन्हें देखते हुए लन्ड हिलारहा थां, तेज़, जोर सें, बिना रुके। हम् दोनों एक्-दूसरे कों गरमकर रहे थें, बिना एक् शब्द बोले। बस आँखों सें बात होँ रही थि, प्रेम, हवस, इंतजार, भूख, सभी कुछ थां उससमय मे।
औऱ फिन हम् दोनों एक् संगझड़ गए।
मेरारस बैड पऱ फैल गय़ा, भाभी कां जिस्म शावर केँ नीचे काँपउठा। उनकी उँगलियाँ चूत मे गहरीधँस गईं, वोँ कराहते हुएझुक गईं, पेर काँपरहे थें। पानी कि आवाज़ उनकी कराहों कों ढकरही थि।
फिन भाभी नें पर्दा वापसबंद कर दिया।
मे उठा, बाथरूम केँ दरवाज़े केँ पास गय़ा।
“भाभी… मुझे भि नहाना हैं, साफ़ करना हैं… द्वार (दरवाज़ा) खोलो नाँ…”
भाभी नें अंदर सें हँसते हुएकहा, “ठीक हैं… मगरकोई शैतानी नहि, समझे?”
द्वार (दरवाज़ा) खुला। मे अंदर गय़ा। शावरचल रहा थां। भाभी मेरे सामने खड़ीथीं, गीली, चमकती हुईं। जैसे हि मे उनकेपास आया, भाभी नें मेरा लन्ड जोर सें दबाया, हल्के सें मसला, औऱ खिलखिलाकर बाहर् निकलगईं। “नाहालो… मे रेडी हौ रही हूं!”
जब मे बाथरूम सें निकला तौ भाभी नें एक् प्यारासा ड्रेस पहन लिया थां। बहोत सेक्सी, एक् ब्लैक लेसी ड्रेस जिसके अंदर स्किन कलर कां कपड़ा थां, लगरहा थां मनो पूरी ट्रांसपेरेंट ड्रेस पहनी होँ, नीचे घुटनों केँ ऊपर। कपड़ा इतना टाइट कि उनके बूब्स पऱ तनाहुआ, गहरीखाई साफ़दिख रही थि। गांड पऱ भि कपड़ा चिपका हुआ, हर कर्वउभर रहा थां। वोँ मेरी तरफ़ मुड़ीं, बाल अभि गीले, मुस्कुराती हुईं।
“चलो… अब बाहर् घूमने चलते हें, याँ पहले औऱ मजा लें?”
उनकी आँखों मे वही शैतानी चमक थि…
मे बेड पर्र बैठासोच मे डूबाहुआ थां। भाभी आइने केँ सामने बैठी मेकअप कररही थीं, लिपस्टिक लगातीं, फिन ब्लश लगातीं, बीच-बीच मे बाल संवारतीं। उनकीहर हरकत मे वोँ सजाने सवरनेकी चमक थि।
मैंने अचानक कहा, “भाभी… क्यूं न् हम् वेडिंग फोटोज़ कां काम अभि पूराकर लें? एक् टेंशन कम हौ जाएगी। मम्मी कों कलभेज देंगे, फिनमन लगा केँ एंजॉय करेंगे। ”
भाभी नें आइने मे मेरी तरफ़ देखा, होंठों पर्र हल्की मुस्कान आई। “हम्म… अच्छा आईडिया हैं। ”
मैंने आगे बताया, “तुमने जोँ फंक्शनल लहंगा लाया हैं, वोँ परफेक्ट हैं। औऱ मैंने जौ कुर्ता-पायजामा लाया हैं, उसमें फोटो निकाल लें। फोटोशॉप मे एडिटकर लेंगे, बैकग्राउंड चेंजकर देंगे, फेस थोडा एडजस्ट कर लेंगे। बसकुछ सामन चाहिए तोँ कहो। ”
भाभी नें जल्दी हामीभरी, आँखों मे चमक आँ गई। “ठीक हैं! मे सजधजकर होती हूं। तुम् एक् कामकरो — बाहर् सें कोई खाली उपहार बॉक्स लें आनां, कुछ फूल… औऱ मेरेलिए एक् बिंदी। वोँ मे लानाभूल गई। ”
“हाँ, बस जाता हूं। ” मैंने जल्द सें कैजुअल टी-शर्ट औऱ जींस पहनी औऱ बाहर् निकल गय़ा।
आधे घंटेबाद लौटा। एक् छोटा तोहफा बॉक्स, लाल-गुलाबी फूल, औऱ एक् चमकदार लाल बिंदी।
जैसे हि द्वार (दरवाज़ा) खोला, भाभी कि आवाज़ आई, “तुम्हारा कुर्ता-पायजामा बाथरूम मे रखा हैं। जल्द चेंजकर लो। मे इंतजार कररही हूं। ”
मैंने उन्हें देखा भि नहि, बस बाथरूम मे घुस गय़ा। जल्द कुर्ता-पायजामा पहना। कुर्ता सफ़ेद सिल्क कां औऱ क्रीम कलर कां पायजामा। रेडी होकर बाहर् निकला।
जैसे मे बेड केँ पासआया, औऱ मेरी साँसथम गई।
बेड पऱ वोँ नज़ारा… जैसेकोई सपनासच होँ गय़ा हौ।
खिड़की औऱ बालकनी केँ पर्दे पूरीतरह बंद थें, उन पतले पर्दो मे सें हलकी रौशनी आँ रही थि, जौ रूम कों एक् रोमांटिक अंदाज मे चमकारही थि। बेड पर्र लाल-गुलाबी फूल बिखरे हुए थें। औऱ बेड केँ बीच मे भाभी बैठीथीं, पूरी दुल्हन कि तरहसजी हुईं।
घूंघट ओढ़ेहुए, लाल जालीदार नेट वाली ओढ़नी। सिर झुकाहुआ, जैसे शरमारही हों। लहंगे सें बाहर् सिर्फ़ उनके पैरों कि उँगलियाँ दिखरही थीं, मेहंदी सें सजी हुईं, लाल नाखून। जैसे हि मैंने कदम बढ़ाया, उन्होंने पेर कि उँगलियाँ बेड कि चादर मे दबालीं, जैसे घबरा गई हों, जैसे पहलीबार दूल्हे केँ सामने बैठीहों।
मे उन्हें देखता रह गय़ा। दिल मे कुछऐसा उमड़रहा थां कि बोल नहि पारहा थां। यहवही भाभीथीं जौ कलरात मेरेगोद मे नंगी बैठीथीं, औऱ आज…आज वोँ एक् नई दुल्हन कि तरह शर्मा रही थि, बहोत प्यारी औऱ मासूम लगरही थीं। सज-संवर कर, शरमाकर, वोँ मासूमियत औऱ कामुकता कां ऐसा मिश्रण जोँ दिल कों हिला देता हैं।
मे खड़ेखड़े उस नज़ारे कों देखेजा रहा थां।
कुछदेर बाद भाभी नें धीमी, शरमाई हुई आवाज़ मे कहा, “घूंघट उठाकर नहि देखोगे?”
मे बेड पऱ चढ़ा। घूंघट कों दोनों हाथों सें पकड़ा। आहिस्ता ऊपर किया।
भाभी कि नज़रें नीचे झुकी हुईंथीं। जैसे हि उनका चेहरा दिखा, उन्होंने दाँतों सें निचला होंठकाट लिया, वोँ क्लासिक दुल्हन वालीशरम।
मेकअप कमाल कां थां। गालों पऱ हल्की लाली, नाक मे चमकती नथुनी, कानों मे लंबे, झूमते झुमके। होंठों पऱ गहरीलाल लिपस्टिक, चमकदार, गीली। आँखों मे काजल, ऊपर सें हल्का गोल्डन शेडो। माथे पर्र बिंदी, वोँ लाल वाली जौ मे लाया थां।
जैसे हि मैंने घूंघट पूरीतरह हटाया, भाभी नें मुंहफेर लिया। उनकी साँसें तेज़ होँ गईं। सीना ऊपर-नीचे हौ रहा थां।
कुछखास थां इस सजने मे। मे समझरहा थां, जबकोई लड़की साज-शृंगार करती हैं, तौ वोँ सिर्फ़ कपड़े नहि पहनती… वोँ एक् अलग हि अहसास पहनती हैं। शरम, उत्सुकता, थोड़ी सि घबराहट, औऱ बहोत सारी कामुकता। भाभीआज वही महसूस कररही थीं, जैसेसच मे पहलीरात हौ।
उनका ब्लाउज़ रेडकलर कां, V-नेक वाला। गहरी दरार साफ़दिख रही थि, बूब्स ऊपरउठे हुए, कसे हुए। नीचे लहंगा नाभि केँ ठीक नीचे बंधा थां, कमर नंगी, पतलीसी।
मैंने उनकाहाथ पकड़ा। उन्होंने चेहरा शर्माकर एक् औऱ कर दिया, उनकी उँगलियाँ मेहंदी सें सजी हुईं थि, ठंडीमगर काँपरही थीं। मैंने उनकेहाथ कि हथेली पऱ धीरे-धीरे सें किस किया। फिन उँगलियों पर्र, फिन कलाई पर्र।
भाभी कि साँसें औऱ तेज़ होँ गईं। उन्होंने धीरे-धीरे सें कहा, “फोटो खींचलो नां… वरना… मे शरम सें मर जाऊँगी। ”
मैंने मुस्कुराकर कहा, “पहले आपको अच्छे सें देखलूँ। ”
मैंने भाभी केँ हाथ कों औऱ कसकर पकड़ा, उनकी हथेली पर्र फिन सें किस किया। उनकी आँखें अभि भि नीचे झुकी हुईंथीं, मगर होंठों पऱ हल्की मुस्कान थि। मैंने धीरे-धीरे सें कहा, “भाभी… आपकी इजाज़त होँ तोँ इस प्यारी सि सुभह मे सुहागरात मना लें?”
भाभी केँ थरथराते होंठों सें आवाज़ निकली, “मगर… फोटो?”
मैंने उनके लगभगआकर फुसफुसाया, “मुझसे नहि खींचे जाएँगे… प्लीज़ इजाज़त देदो नां। ”
भाभी नें एक् लम्हा रुककर मेरी तरफ़ देखा। उनकी आँखों मे शरम थि, मगर वोँ शैतानी चमक भि। फिन धीरे-धीरे सें बोलीं, “तुम्हें कब सें इजाज़त कि ज़रूरत पड़ने लगी?”
मे खुश हौ गय़ा, मे उनके पीछेचला गय़ा। उनकेगले मे पड़ी नेकलेस कां हुक निकाला औऱ उसे बेडसाइड टेबल पर्र रख दिया। फिन उनके ब्लाउज़ कि पीठ वाली रस्सी कों धीरे-धीरे सें खींचा। रस्सी ढीली हुइ, ब्लाउज़ पीठ पऱ सें आज़ाद होँ गय़ा। उनकी गोरी, चिकनी पीठ पूरीतरह नंगी हौ गई, वोँ गहरी लकीर जोँ कमर तक जाती हुइ थि, हल्की रोशनी मे चमकरही थि।
मे सामने आया। उनकी ठुड्डी कों उँगलियों सें पकड़कर चेहरा ऊपर किया। भाभी नें आँखें बंदकर लीं। मैंने उनके होंठों पऱ बहोत हल्के सें किस किया, जैसे पहलीबार छूरहा हौ। भाभी धीरे-धीरे सें बेड पर्र लेटगईं। ब्लाउज़ अब ढीला हौ चुका थां, आधे बूब्स बाहर् झाँकरहे थें, गुलाबी निप्पल्स हल्के सें उभरेहुए।
मे उठा औऱ जल्द सें अपने सारे कपड़े उतारदिए। कुर्ता, पायजामा, सभी फर्श पर्र गिरगए। जब मे कपड़े उताररहा थां, भाभी हल्के-हल्के अपने पांव एक्-दूसरे सें रगड़रही थीं। लेहेंगा ऊपरचढ़ रहा थां औऱ उनकी जाँघें आपस मे सटरही थीं, जैसे जिस्म मे आगलग गई हौ, वोँ बेचैनी सें तड़परही थीं।
मे उन्हें देखरहा थां, आधा-नंगा सीना, वोँ पतलीकमर, लहंगा घुटनों तक ऊपर चढ़ाहुआ। हवसअब मेरे पर्र काबूकर रही थि। मे झटके सें उनकेऊपर आँ गय़ा। हाथ लहंगे मे डाला, पता चला, भाभी नें पैंटी नहि पहनी थि। चूत पहले सें गीला थि। मैंने लहंगा औऱ ऊपर किया। भाभी नें पेर थोड़े अलगकिए। मैंने लन्ड कों अच्छे सें चूत पर्र सेट किया औऱ एक् धक्के मे अंदरडाल दिया। फिन उन्हें कसकर जकड़ लिया, ऊपर आकर उनके जिस्म सें चिपक गय़ा।
दुल्हन कि तरहसजी भाभी कों उनके कपड़ों मे ऐसे प्रेम करना…यह एहसास अलग हि थां। लहंगा अभि भि उनकेबदन पर्र थां, ब्लाउज़ आधा खुला, घूंघट बिखरा हुआ। भाभी औऱ भि मस्तलग रहीथीं, आँखें बंद, होंठ हलके खुले थरथराते हुए, शरीर बेचैनी रहा थां।
मैंने उनके दोनों हाथ पकड़े औऱ ऊपर खींचे। पांव मोड़कर बैठ गय़ा औऱ भाभी कों अपनीगोद मे बिठा लिया। बिठाते टाइम लन्ड फिन सें चूत मे चला गय़ा। अब भाभी मेरीगोद मे थीं, उनकेआधे नंगे बूब्स मेरे होठो केँ सामने थें, लहंगा नीचे सें हमेंढक रहा थां। भाभी नें दोनों हाथों सें मुझे जकड़रखा थां। भाभी नें चेहरा मेरे कंधे पऱ रख दिया।
मैंने आरामसे धक्के देने शुरुआत किए। भाभी भि कोशिश कररही थीं, हर धक्के पर्र कमर हिलाकर संगदे रहीथीं। हर धक्के केँ संग उनकी चूड़ियों कि खनक कमरे मे गूँजरही थि, खन-खन-खन… जैसेकोई म्यूज़िक होँ।
भाभी नें चेहरा मेरे गालों केँ पास लाया औऱ गालों पर्र एक् किस किया। मैंने एक् हाथ सें उनका ब्लाउज़ औऱ नीचे खींचा औऱ एक् बूब कों मुंह मे समा लिया। दूसरे हाथ सें उनकेपीठ कों ऊपर सें निचे तक सहलाने लगा। निप्पल कों जीभ सें घुमाया, चूसा, हल्के सें काटा। धक्के जारीरहे। हर धक्के केँ संग भाभी मुझे औऱ कसकर पकड़रही थीं।
फिन भाभी नें अपने होंठ मेरेकान केँ पासलाए औऱ बहोत धीरे-धीरे सें कहा, “आई लवयू…”
यह सुनते हि मेरे लन्ड मे नई ताकत आँ गई। मैंने लहंगे केँ ऊपर सें हि उनकीगोल गाँड कों दोनों हाथों सें पकड़ लिया। भाभी कों ऊपर-नीचे करनेलगा, तेज़, जोरदार। धक्के औऱ तेज़ होँ गए। हम् दोनों कि कराहें अब ज़ोर सें निकलने लगीं, “आह… औऱ… अह्ह्ह…”
औऱ फिन हम् दोनों झड़गए। मेरारस उनके चूत मे भर गय़ा। झड़ते हि मैंने उन्हें गहराकिस किया औऱ कहा, “आई लवयूटू…”
भाभी बहोत थक गई थीं। जैसे हि मैंने उन्हें छोड़ा, वोँ बेड पर्र गिर पड़ीं। तेज़-तेज़ साँसें लेँ रहीथीं, आँखें बंद। उनके बिखरे बाल, चेहरे पऱ बिखरी लाली, मसलेहुए कपड़े, ब्लाउज़ आधा खुला, लहंगा कमर तक चढ़ाहुआ, पेर फैलेहुए।
उस लम्हा उनकारूप… हायराम, कितना हसीन थां। जैसेकोई नई-नई दुल्हन पहली सुहागरात केँ बादथकी हुईँ, मगर संतुष्ट होकर लेटी हौ। उनके चेहरे पर्र बिखरी लाली, लाल गाल, होंठ हलके सूझेहुए औऱ चमकते, काजल थोडा स्मज होकर आँखों केँ नीचे फैलाहुआ। बाल उलझेहुए, कुछ लटें माथे पर्र चिपकी हुईं, कुछ बेड पऱ बिखरी हुईं। आधा खुला ब्लाउज़ अब उनके सीने औऱ बूब्स कों उजागर कररहा थां, वोँ भारी, गोल बूब्स अभि भि हल्के सें हिलरहे थें, निप्पल्स सख्त औऱ गुलाबी चमककरहे थें। लालरंग कां ब्लाउज़ उनके गोरे शरीर पऱ औऱ भि गहरालग रहा थां, जैसे वोँ लालरंग उनकी हुस्न कों औऱ निखार रहा होँ, एक् नई, जवान, कामुक दुल्हन कि तरह।
उनका खुलापेट, पतलीकमर, गहरी नाभिहर साँस केँ संग ऊपर-नीचे होँ रही थि। लहंगा अबकमर सें औऱ नीचेसरक चुका थां, पेट औऱ नाभि पूरीतरह नंगी थि। वोँ पतलीकमर सें शुरुआत होकर नीचे कि तरफ़ फैलता लहंगा उनके फिगर कों आधा छुपारहा थां, मगरआधा उजागर करके औऱ भि सेक्सी बनारहा थां। लहंगा जाँघों तक ऊपर चढ़ाहुआ थां, एक् पांव मोड़ा हुआ, दूसरा सीधा। उनकी हल्की-सि चूत दिखरही थि, अभि भि गीली औऱ चमकती हुई। लंबी, गोरी टाँगें फैली हुईं, मेहंदी सें सजी उँगलियाँ हल्के सें काँपरही थीं।
भाभीऐसे लगरही थि जैसे एक् नई दुल्हन, जिसने अपना प्रेम लुटा दिया होँ, औऱ अब थककर, संतुष्ट होकर आरामकर रही हौ। उनके शरीर पऱ पसीने कि हल्की चमक, साँसों कि तेज़ी, औऱ वोँ शांत मुस्कान, सभी मिलकर उन्हें औऱ भि मोहकबना रहे थें।
मे उनके माथे कों सहलाते हुए उनके बाजू मे बैठ गय़ा। भाभी नें एक् हाथ मेरी जाँघ पऱ रख दिया, जैसेकह रहीहों, “कहींमत जानां… यहींरहो। ”
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update -16
कुछदेर ख़ामोशी रही। सिर्फ़ हमारी साँसों कि आवाज़। फिन भाभी नें आँखें खोलीं, मुस्कुराईं औऱ धीरे-धीरे सें कहा, “अब… फोटो खींचलो नां… वरना मां कों क्याँ कहूँगी?”
मे हँसा, “ जीकररहा हैं, अभि तुम्हें ऐसे हि देखता रहूँ…मगर ठीक हैं, चलो। पहले थोडा रेस्ट करलो। ”
भाभी नें मेरी जाँघ पऱ हाथ फेरा। उनकी आँखों मे वही शैतानी चमकलौट आई थि…
दिन मे हि सुहागरात मनाकर मे बहोत खुश थां। दुल्हन केँ रूप मे इतनी हसीन भाभी कों प्रेम करना…आज कां अनुभव अलग हि थां। जैसेकोई सपनासच होँ गय़ा हौ, वोँ शरम, वोँ चूड़ियों कि खनक, वोँ लाल ब्लाउज़ मे उनकी गोरी त्वचा, सभीकुछ दिल कों छू गय़ा थां। मे अभि भि उनके जिस्म कि गर्मी महसूस कररहा थां।
मे उठा औऱ बाथरूम मे गय़ा। जल्द सें कुर्ता-पायजामा फिन सें पहन लिया औऱ बाहर् आया। भाभी नें भि कपड़े संवार लिए थें। लहंगा-ब्लाउज़ उतारकर अब वोँ एक् हल्की साड़ी मे थीं, औऱ मेकअप भि ठीककर लिया थां। वोँ आइने केँ सामने बैठीथीं, लिपस्टिक कों टचअपकर रहीथीं।
भाभी नें मेरी तरफ़ देखकर शरमाते हुएकहा, “देखो नाँ… ऐसे करता हैं भलाकोई? सारा मेकअप खराबकर दिया। काजलफैल गय़ा, लिपस्टिक इधर-उधर…”
मैंने उनकेपास जाकर पीछे सें गले लगाया औऱ कान मे फुसफुसाया, “भाभी… फूलों कां रस औऱ सुगंध तोँ मसलने केँ बाद हि अधिक बाहर् आता हैं। ”
भाभी नें हँसते हुए मेरी बाँह पऱ हल्का थप्पड़ मारा, “हाँ-हाँ… बड़ेकवि बनरहे हौ। चलोअब मेरी सहायता करो…यह गहने पहनादो अच्छे सें। ”
मैंने उनकेगले मे नेकलेस लगाया। ठंडी सोने कि चेन उनकीगरम त्वचा पर्र टच हुई तोँ वोँ हल्के सें सिहरगईं। फिन लंबे झूमते हुए झुमके। कान कि लौ पर्र लगाते समय मैंने हल्के सें चूमा भि। भाभी नें आँखें बंदकर लीं औऱ मुस्कुराईं।
फिन हमनेढेर सारी फोटोज़ खींचीं। बेड पऱ फूलों केँ बीच, घूंघट ओढ़कर, हाथ जोड़कर, एक्-दूसरे कों देखकर हँसते हुए। कुछ पोज़ बहोत नैचुरल लगरहे थें, जैसेसच मे हम् हि दूल्हा-दुल्हन हों। जौ अच्छी लगीं, उन्हें अलग सें सेवकर लिया।
जब मे पहले बाहर् गय़ा थां, तब मैंने एक् लोकल फोटोग्राफर सें बातकर ली थि। उसे बताया थां, “हमारे बेस्ट फ्रेंड कि विवाह मे नहि जापाए… क्याँ आप् हमारी कुछ फोटोज़ एडिट करके उनकेसंग लगा सकते हें? जैसे हम् भि वहा थें। ” उसने हामीभर दि थि औऱ कहा थां, “कल सुभह आँ जाओ, अच्छे सें कर देंगे। ”
मे फोन लेकरउसी फोटोग्राफर केँ पास गय़ा। अच्छी वाली फोटोज़ दिखाईं। उसने देखकर कहा, “परफेक्ट हें। कल सुभह१० बजे आँ जानां, एडिट करकेदे दूँगा। ”
मे खुशी-खुशी वापसरूम पऱ लौटा।
अंदरआते हि भाभी सें बोला, “चलो भाभी… खानां खा लेते हें। सुभह सें बस एक्-दूसरे कों हि खारहे हें… ऐसेपेट नहि भरेगा। ”
भाभीअब कैजुअल टी-शर्ट औऱ जींस मे थीं — सिंपल, मगरफिन भि सेक्सी। टी-शर्ट टाइट थि, कर्व्स साफ़उभर रहे थें। वोँ हँसी, “हाँ… सच मे भूखलगी हैं। चलो। ”
हम् नीचे रेस्टोरेंट मे गए। दोनों कों इतनीभूख लगी थि कि जैसे सालों बाद खानां खारहे हों। ऑर्डर किया, बटर चिकन, नान, पनीर टिक्का, औऱ ठंडी-ठंडी लस्सी। खाते-खाते हम् हँसते रहे, हाथों सें हाथ मिलाते रहे। कोई देखता तोँ लगताकोई नया जोड़ा हैं।
खानां खाकर वापसरूम आए। भाभी थकान सें बेड पर्र लेटगईं। मैंने उन्हें डिस्टर्ब नहि किया। थोड़ी दूर उनकेबगल मे लेट गय़ा। दोनों जल्द हि सोगए।
साम कों जबआँख खुली तौ भाभी पहले सें रेडीथीं। वही सुभह वाली ब्लैक लेसी ड्रेस एकदम सेक्सी कोई मॉडल केँ जैसी, बूब्स पर्र तनी हुईँ, मोटी गाँड पर्र चिपकी हुइ। उनकेबाल खुले थें, हल्का मेकअप थां। वोँ मेरेपास आईं, चहककर बोलीं, “चलो… जल्द रेडी होँ जाओ। रूम मे हि रहना हैं क्याँ पूरादिन?”
मैंने हँसते हुएकहा, “वाउ भाभी… आप् सोगईं, औऱ अब मुझे तानामार रही होँ?”
भाभी नें झटके सें “हुंह!”कहा औऱ मेरीनाक पर्र उँगली रखकर बोलीं, “चल मेरे राजा… तेरी रानी सजधजकर हैं कब सें। ”
मे झट सें उठा। कैजुअल शर्ट-जींस पहनी औऱ रेडी हौ गय़ा।
“भाभी… क्याँ प्लान हैं अब?”
भाभी नें मुस्कुराकर कहा, “यहा एक् बहोत फेमस कैफे हैं, अच्छा व्यू, अच्छा म्यूजिक। वहा चलते हें। फिन थोड़ी शॉपिंग भि कर लेंगे। ”
सामढल रही थि। हम् दोनों होटल सें निकले, हाथ मे हाथ डाले। हम् कैफे पहुँचे, वोँ फेमस ओपन-एयर कैफे, जहाँशहर कि लाइट्स नीचेचमक रहीथीं, औऱ ऊपर आसमान मे साम कां नारंगी-गुलाबी रंग फैलाहुआ थां। हमने कोने वाली टेबलली, जहाँ सें पूरा व्यू दिखता थां। बाहर् कि हल्की ठंडीहवा आँ रही थि, मगर हम् दोनों केँ बीच कि गर्मी उससे कहीं ज़्यादा थि।
भाभी नें कप कॉफ़ी ऑर्डर कि, कैरमेल लाटे, औऱ मैंने ब्लैक कप कॉफ़ी। जबकप कॉफ़ी आई, तोँ भाभी नें अपनीकप कॉफ़ी मे चम्मच घुमाया, फिन मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुराईं। “आज कां दिन कितना परफेक्ट थां नां?”
मैंने उनकी उँगलियाँ थामलीं टेबल केँ नीचे। “हाँ भाभी…मगर सबसे परफेक्ट तौ तुम् हौ। सुभह दुल्हन बनकर… औऱ अबयहसाम मे मेरीयार बनकर। ”
भाभी शरमागईं। गाललाल होँ गए। उन्होंने सिर झुकाकर कहा, “तुम् भि नाँ… ऐसे बातें करते हौ कि दिल धड़कने लगता हैं। ”
हम् कप कॉफ़ी पीतेरहे। बीच-बीच मे भाभी मेरी तरफ़ झुककर फुसफुसातीं — “देखो वोँ कपल… कितने क्यूट हें। ” याँ “वोँ लड़की कि ड्रेस देखो… मुझे भि ऐसी चाहिए। ” मे बस उन्हें देखता रहता। उनकी आँखें जब हँसतीं, तौ चमकतीं। जब शरमातीं, तोँ नीचेझुक जातीं। उनकीहर अदा मे वोँ प्रेम थां जोँ मुझे पागलकर देता।
फिन हमने पास्ता शेयर किया। भाभी नें फोर्क सें पास्ता उठाया औऱ मेरे मुँह मे डाला। मैंने भि वैसा हि किया। वोँ खिलखिलाकर हँसीं — “देखो… कितने रोमांटिक हौ गए हें। जैसेकोई नया जोड़ा। ”
मैंने उनकेहाथ कों चूम लिया। “हम् नए जोड़े सें भि ज़्यादा हें भाभी…भले हि हमारा प्रेम छुपाहुआ हैं, मगर गहरा हैं। ”
कैफे मे हल्का म्यूजिक बजरहा थां — कोई पुरानां रोमांटिक गाना। भाभी नें मेरी तरफ़ देखा औऱ धीरे-धीरे सें कहा, “चलो… थोडा डांसकर लें?”
हम् उठे। कैफे केँ छोटे सें डांस फ्लोर पर्र गए। कोई अधिक भीड़ नहि थि। मैंने उनकीकमर पर्र हाथरखा, वोँ मेरे कंधे पऱ। हम् आहिस्ता झूमने लगे। उनकी साँसें मेरेगले पऱ पड़रही थीं। मैंने उनकेकान मे फुसफुसाया, “भाभी… तुम्हारी खुशबू… तुम्हारा स्पर्श… सभीकुछ मुझे दीवाना बना देता हैं। ”
भाभी नें सिर मेरी छाती पऱ टिका दिया। “औऱ तुम्हारा यह प्रेम… मुझे जीने कि वजह देता हैं। ”
हम् कुछदेर ऐसे हि डांस करतेरहे। बाहर् लाइट्स चमकरही थीं, शहर कि आवाज़ें दूर सें आँ रहीथीं। मगर हमारे लिए सिर्फ़ हम् दोनों थें — यह गाना, यह स्पर्श, यह प्रेम।
फिन हमने थोड़ी शॉपिंग कि। भाभी नें एक्-दो टॉप ट्राय किए। ट्रायल रूम सें निकलकर वोँ मुझे दिखातीं, “कैसीलग रही हूं?” मे बस कहता, “किसी भि चीज़ मे तुम् सबसे सुंदर लगती होँ। ”
देररात होटल लौटे। थकान थि, मगरदिल भराहुआ थां। रूम मे आकर भाभी नें लाइट्स डिमकीं। हम् दोनों नें झट सें सारे कपडेउतर दिए, औऱ हम् नंगे हि बेड पर्र लेटगए। भाभी नें चेहरा मेरे सिनेपर रखा औऱ एक् हाथ सें, मेरे सीने सें लन्ड तक मुझे सहलाने लगी।, मेने एक् हाथ उनकीकमर पे रखा, औऱ कमर सें गांड तक उन्हें सहलाता रहा
“कल फोटोग्राफर केँ पास जानां हैं…” उन्होंने फुसफुसाया।
मैंने उनके बालों मे उँगलियाँ फिराईं। “हाँ…मगर आज कां दिन… मे कभी नहि भूलूँगा। ”
भाभी नें थोड़ाऊपर खिसककर मेरेगाल पऱ किस किया।
भाभी: “मे भि नहि। ”
हम् एक्-दूसरे सें लिपटकर सोगए। बाहर् शहरसो रहा थां, मगर हमारे दिलों मे अभि भि वोँ रोमांटिक साम कि गर्मी थि…
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 17
दूसरे दिन सुभह मे उठा तौ देखा भाभी नहाकर बाहर् आँ चुकीथीं। सफ़ेद टॉवल उनके बड़े-बड़े बूब्स सें बंधाहुआ थां, बाल अभि गीले, कुछ लटें गालों पर्र चिपकी हुईं। मैंने मन हि मन स्वयं कों कोसा, अरे दोस्त, आज भाभी कों नहाते देखने कां चांसमिस हौ गय़ा।
भाभी नें मेरे चेहरे केँ भावपढ़ लिए। वोँ मुस्कुराईं, आँखों मे शैतानी चमक लाकर बोलीं, “क्याँ हुआ? चेहरा ऐसे क्यूं लटका हैं? चिंता मतकरो… आज फोर्ट पऱ जाएँगे, वहा धूल-मिट्टी बहोत होगी। तोँ वापसआकर…” वोँ रुकीं, मेरी तरफ़ देखा, होंठों पऱ हल्की मुस्कान फैलाई औऱ आगे बोलीं, “…नहाना पड़ेगा नाँ। तुम् सहायता करोगे नां मेरी?”
मे मन हि मनखुश हौ गय़ा। दिल मे एक् गरमलहर दौड़ गई। मैंने बस गर्दन हिलाकर हामीभरी, जैसेकोई बच्चा हौ जोँ एक् बड़ा तोहफा पा गय़ा होँ।
भाभी नें टॉवल कों धीरे-धीरे सें नीचे गिरा दिया। वोँ बिल्कुल नंगी होकर मिरर केँ सामने बैठगईं। उनकी फिगर…हाय राम, कितनी परफेक्ट लगरही थि। जैसेकोई मूर्ति हौ, गोरी त्वचा अभि भि नहाने केँ बादचमक रही थि, बूब्स गोल औऱ भारी, कमर इतनी पतली कि हाथों सें जकड़ सकती थि, गांडगोल औऱ सख्त, लंबी टाँगें फैली हुईं। वोँ बाल संवार रहीथीं, बिचबिच मे मिरर मे सें मेरी तरफ़देख रहीथीं।
मे उन्हें देखता रह गय़ा, जैसेकोई चमत्कार हौ।
भाभी नें मिरर सें हि मुझे देखा औऱ थोड़ी कड़क आवाज़ मे कहा, “चलो, तैयार होँ जाओ… मे तौ हूं हि पूरादिन तुम्हारे संग। जी भर केँ देख्ना। ”
मे जल्द सें सजधजकर हौ गय़ा, कैजुअल शर्ट, जींस, सनग्लास। जब बाहर् आया तोँ भाभी पहले सें सजधजकर थीं। ऑफ-शोल्डर टाइट क्रॉप टॉप, कंधे औऱ पेट नंगे, बूब्स पर्र कपड़ा तनाहुआ, गहरीखाई साफ़दिख रही थि। नीचे कार्गो शॉर्ट्स, घुटनों केँ ऊपर, मगर जाँघों कों अच्छा कवरेज देरहे थें, फिन भि उनकी गोरी जाँघें चमकरही थीं। सिर पऱ स्ट्रॉ हैट, कानों मे गोल सफ़ेद इयरिंग्स। देखकर लगरहा थां जैसेकोई कॉलेज कि लड़की, नाजुक, जवान, बिंदास।
हम् दोनों नें एक्-दूसरे कां हाथ पकड़ा औऱ होटल सें निकलगए। गाड़ी निकाली औऱ फोर्ट पहुँचे। आजकोई वीकेंड याँ स्पेशल छुट्टी नहि थि, इसलिये फोर्ट पऱ भीड़कम थि। हमनेहाथ थामे घूमना शुरुआत किया। भाभी कि तस्वीरें खींचते हुए, कभी वोँ किसी पुरानी दीवार केँ पास पोज़ देतीं, कभी हँसते हुए मेरी तरफ़ देखतीं। मे उनके चेहरे पऱ सूरज कि किरणें पड़ते देखता रहता, वोँ मुस्कान, वोँ आँखें, सभीकुछ परफेक्ट।
आधे सें अधिक फोर्ट चढ़ चुके थें। हम् एक् ऊँची मीनार केँ ऊपर पहुँचे। हम् वहाबैठ गए, दूर तक शहर नज़र आँ रहा थां, सूरज कि सुनहरी रोशनी सभी पर्र फैली हुईँ थि। भाभी मेरेबगल मे बैठीं, सर मेरे काँधे पर्र टिकाके। मैंने एक् हाथ सें उनकीकमर पकड़ली, पतली, गरम, रसीले।
भाभी नें धीरे-धीरे सें कहा, “कितना चैन हैं…”
मे चुपचाप उनकी तरफ़ देखा औऱ फिनआगे शहर कों देखता रहा।
कुछ समयबाद भाभी नें एक् सिसकी ली। मैंने झट सें उनकी तरफ़ देखा। उनकी आँखों मे आँसूभर आए थें, चेहरे पर्र उदासी। मे समझ नहि पाया, क्याँ हुआ अचानक? शायद इतने दिनों बादऐसा खुलकर प्रेम मिला थां, ऐसाचैन मिला थां… औऱ मन मे डर थां कि यह कितने दिन चलेगा। यहसभी मेरेमन केँ खयाल थें।
मेने भाभी कां चेहरा दोनों हाथो मे भर लिया औऱ, उनके आँसुओं कों बहोत हल्के सें चूमा, पहले एक् आँख, फिन दूसरी। रुमाल निकाला औऱ बड़े प्रेम सें उनके आँसू पोंछदिए। भाभी नें हल्का-सां मुस्कुराकर सिरफिन मेरे कंधे पर्र रख दिया। मेनेकुछ पूछने याँ कहने कि हिम्मत नहि कि, भाभी कि मन कि गहरायी मे क्याँ चलरहा थां क्याँ पता। मेराकाम तोँ बस उनकोखुश रखना थां।
फिन बहोत धीमी औऱ प्रेम भरी नाजुक आवाज़ मे भाभी बोलीं, “…क्याँ यह हौ सकता हैं कि तुम् जीवनभर केँ लिए मेरे… सिर्फ़ मेरे हौ जाओ, औऱ मे तुम्हारी?”
मेरेमन मे उनकेलिए प्रेम उमड़आया। मैंने उन्हें औऱ पास खींचा, उनकीकमर कों औऱ कसकर जकड़ा औऱ कहा, “भाभी… आप् जोँ चाहो वोँ सभी होँ सकता हैं। पता हैं नां, मे आपका सबसे अच्छा मित्र हूं। आपकी खुशी केँ लिए मे कुछ भि कर सकता हूं। ”
भाभी नें मुझेकमर सें औऱ कसकेपकड़ लिया। हम् वैसे हि बैठेरहे। आज तोँ मस्ती करने कां प्लान थां, मगर भाभी कां मन भारी होँ गय़ा थां। शायद उन्हें लगरहा थां कि ऐसे अच्छे दिन वापसकब आएँगे।
हम् ज़्यादा देर नहि रुके। फोर्ट सें जल्द निकले। वाहन फोटोग्राफर केँ पास रुकवाइ। मैंने फोन मे फोटोज़ डाउनलोड किए उसने अच्छे सें फोटोज बनायीं थि, पेमेंट करके हम् वो सें निकललिए।
फिन सें होटल पहुँचे। भाभीअब थोड़ी शांत हौ गई थीं। रूम मे आकर वोँ बेड पर्र लेटगईं। आँखें बंद, मगर चेहरा अभि भि दुःखी-सां। मे उनकेपास बैठ गय़ा, उनके माथे पऱ हाथ फेरा।
भाभी नें आँखें खोलीं, मेरी तरफ़ देखा औऱ धीरे-धीरे सें कहा, “सॉरी मेनेसभी आनंद ख़राबकर दियाआज। ”
मैंने उनकाहाथ पकड़ा, “ऐसेकोई बात नहि। हम् संग हें। औऱ यहदो - तीनदिन… सिर्फ़ हमारे हें। कल सें फिन मस्ती शुरुआत करेंगे, मे हु हमेशा आप् केँ संग। ”
भाभी नें हल्का-सां मुस्कुराकर मेरी जाँघ पर्र हाथरखा। “हाँ…”
मे उनकेपास लेट गय़ा। वोँ मेरे सीने सें लगगईं। हम् चुपचाप लेटेरहे, बाहर् शहर कि आवाज़ें, मगर हमारे बीच सिर्फ़ प्रेम औऱ वोँ हल्की उदासी जौ प्रेम मे कभी-कभी आँ जाती हैं।
हम् ऐसे हि लेटेरहे। भाभी कां सिर मेरी छाती पर्र टिकाहुआ थां, उनकी साँसें मेरी शर्ट पर्र गरम-गरम पड़रही थीं। कमरे मे सिर्फ़ एसी कि हल्की आवाज़ औऱ बाहर् दूर सें आतीशहर कि धुंधली आवाज़ें। मे उनके बालों मे उँगलियाँ फिरारहा थां, आरामसे, जैसे उन्हें चुपकरा रहा हूं।
अचानक भाभी नें बहोत धीमी, काँपती आवाज़ मे कहा,
“तुम् सोचते होगे…यह कैसी लड़की हैं? घऱ मे पति हैं औऱ देवर जी केँ संग…”
मैंने जल्दी उनकेसिर पऱ हाथरखा, “भाभी…ऐसे मतकहो। ऐसे तोँ मे भि कुसूरवार हूं। ”
भाभी नें सिर थोडा ऊपर उठाया, मेरी आँखों मे देखा, “तुम्हारा क्याँ दोष?”
मैंने उनकीकमर पऱ हाथ रखकरकहा, “भाभी… क्याँ हुआ? क्यूं इतनी परेशान हौ रही होँ?”
भाभी नें एक् गहरी साँसली। उनकी आवाज़ अब औऱ भारी होँ गई। “मैंने तुम्हें जोँ भैया केँ बारे मे बताया थां… वोँ आधीबात हैं। पूरीबात यह हैं कि वोँ बहोत गुस्से वाले हें। औऱ अब उनका ग़ुस्सा औऱ भि बाद गय़ा हैं। ”
मे मन हि मन सोचने लगा, हाँ, भैया थोड़े गुस्से वाले हें, मगर इतने ज़्यादा कि भाभी इतनी परेशान होँ जाएँ? मैंने चुपचाप सुना।
भाभीआगे बोलीं, “विवाह सें पहले मे अंधी थि प्रेम मे। उनका क्रोध मे हमेशा प्रेम सें संभाल लेती थि। हँसकर टाल देती थि। मगरअब… हर टाइम क्रोध। न् कोई प्रेम, न् पहले जैसा बर्ताव। मुझेपता नहि यह मे कब तक सह पाऊँगी। एक् महिला अपने पति कां संग चाहती हैं… वही एक् चीज़ हैं जौ उसेघऱ मे बाँधे रखती हैं। तेरे भैया कों तोँ मे एक् नौकर याँ एम्प्लॉयी सें ज़्यादा नहि लगती। पता नहि… मे क्याँ करूँ। ”
भाभी हलकी सिसकियों कि संग बोलेजा रही थि एक् बार शुरुआत हुईँ तौ रुक नहि पारही थीं। उनकी आवाज़ मे दर्द थां, निराशा थि। फिन अचानक जोर सें सिसकियाँ निकलने लगीं। वोँ रोने लगीं, चुपचाप बिना किसी आवाज़ केँ, मगर गहरे दर्द सें। आँसू उनकी आँखों सें बहकर मेरी शर्ट पर्र गिररहे थें।
मैंने उनकागाल पकड़ा, बहोत प्रेम सें। फिनआगे झुककर उनके माथे पर्र किस किया, लंबा, गहरा। उनकी सिसकियाँ थोड़ी काम हुईँ।
मैंने धीरे-धीरे सें कहा, “भाभी…जब मैंने कहा थां कि मे आपकेलिए कुछ भि कर सकता हूं, तोँ मजाक नहि कररहा थां। हम् दोनों केँ आगे पूरी जीवन हैं। मुझे आप् दोसाल कां समयदे दो। पढ़ाई पूरी करते हि… हम् दोनों कहींदूर चले जाएँगे। ”
भाभी नें आँसूभरी आँखों सें मेरी तरफ़ देखा, “सच?”
मैंने उनकी आँखों मे आँखें डालकर कहा, “सच। ”
थोडा रुककर भाभी नें फिनकहा, “तुम् पढ़ाई पर्र ध्यान दो। मेरीवजह सें तुम्हारी जीवन खराब नहि होनी चाहिए। हम् संग रहें याँ न् रहें… तुम् अपनी जीवन जरूर संवारना। ”
फिन उन्होंने मुझे औऱ कसकर पकड़ लिया। दोनों बाहें मेरीकमर केँ चारों ओर लपेटदीं, जैसेडर रहीहों कि मे कहींचला नं जाऊँ। उनकी सिसकियाँ धीरे धीरे शांत हौ गईं। साँसें अब नियमित हौ रहीथीं। वोँ मेरे सीने सें लगकर चुपचाप लेटी रहीं।
मैंने उनके बालों मे उँगलियाँ फिराईं, आहिस्ता। कमरे मे ख़ामोशी थि, मगर वोँ ख़ामोशी अब दर्द वाली नहि थि — वोँ एक् गहरे भरोसे वाली थि।
कुछदेर बाद भाभी नें बहोत धीमी आवाज़ मे कहा, “थैंकयू। आज तुमने मुझेफिन सें जीने कि वजह दि। ”
मैंने उनका माथा चूमा, “भाभी… आप् मेरीवजह होँ। हम् संग हें। हमेशा। ”
भाभी नें मेरे सीने पर्र सिर टिका दिया। उनकी साँसें अब शांतथीं। हम् ऐसे हि लेटेरहे, न् कोईबात, नं कोई हलचल। बस एक्-दूसरे कि गर्मी, एक्-दूसरे कां संग।
बाहर् सामढल रही थि, मगर हमारे लिए वक़्त रुक गय़ा थां।
मे उनके बालों मे उँगलियाँ फिराता रहा, मन मे उनकेलिए एक् अजीब-सि मिठास उमड़रही थि। इतना प्रेम, इतनी उदासी, इतना भरोसा… सभीकुछ मिलकर मुझे औऱ भि लगभग खींचरहा थां।
मैंने धीरे-धीरे सें कहा, “भाभी… थोडा नीचेसे आता हूं। ”
भाभी नें मेरी तरफ़ देखा, हल्की मुस्कान केँ संगसिर हिलाया। मे उठा, औऱ नीचेचला गय़ा। मन मे बस भाभी कि वोँ उदासी घूमरही थि। बहार एक् छोटीशॉप थि, वहा सें एक् - दो चॉकलेट औऱ लाल-गुलाबी गुलाबों कां छोटा गुलदस्ता लेँ लिया। मन मे एक् हि ख्याल थां, आज भाभी कों खुश देख्ना हैं, बस।
जबरूम पर्र लौटा तौ देखा भाभी अंदर नहि थीं। मोबाइल निकाला औऱ फोन किया। दो रिंग केँ बाद भाभी कि आवाज़ आई, “नीचे रेस्टोरेंट मे आँ जाओ। मे इंतजार कररही हूं। ”
मे नीचे गय़ा। रेस्टोरेंट मे साम कि हल्की रोशनी थि, कुछ टेबल्स पऱ कैंडल जलरही थीं। औऱ वहा, कोने वाली टेबल पऱ भाभी बैठीथीं, एक् फ्लोरल खूबसूरत ड्रेस मे। हल्के नीलेरंग कि, फूलों कि प्रिंट वाली, कंधों सें स्ट्राप सें लटकी हुईँ, कमर पर्र टाइट, नीचे घुटनों केँ ऊपर। बाल खुले, हल्का मेकअप। वोँ अब बिल्कुल नॉर्मल लगरही थीं, मगर चेहरे पऱ वोँ खुशी थि जौ उदासी केँ बादआती हैं, साफ़, चमकदार।
मे उनकेपास गय़ा, बैठा। भाभी नें मुस्कुराकर कहा, “आँ गए?कहा गए थें? क्याँ लाये ?” उनकी वो प्यारी चहकती अदालौट रही थि।
मैंने मेन्यू उठाया। कुछ हल्का-फुल्का ऑर्डर किया, सैंडविच, फ्रेंच फ्राइज़, औऱ एक् फ्रेश लाइम सोडा। सोडाआया एक् हि स्ट्रॉ थां। मैंने स्ट्रॉ सें पहला घूँट लिया, फिन भाभी कि तरफ़ बढ़ाया। भाभी नें मुस्कुराकर स्ट्रॉ मुंह मे लिया। जैसे उन्होने घुट लिया, मैंने जट सें स्ट्रॉ घसीटकर अपने मुंह मे लेँ लिया, जैसे स्ट्रॉ पे लगे भाभी केँ होठो कों स्ट्रॉ केँ जरिये चूमना चाहता हु। भाभी थोडा शरमागईं, गाललाल हौ गए। मैंने एक् हाथ सें उनकाहाथ पकड़रखा थां, उँगलियाँ आपस मे फँसी हुईं। भाभीकभी खानां खातीं, कभी मुझे देखतीं, आँखों मे वोँ प्रेम, वोँ शरारत।
खानां खाकर हम् रूम मे वापसआए। जैसे हि द्वार (दरवाज़ा) बंदहुआ, मैंने चॉकलेट कां बॉक्स औऱ फूल भाभी केँ हाथ मे थमादिए।
भाभी नें कूदकर मुझेगले लगाया, औऱ फिनझट सें बॉक्स खोला, चॉक्लेट कां एक् बड़ा बाइट लिया औऱ खानेलगी। जैसेकोई बच्ची हौ, होंठों पऱ, गालों पऱ, ठुड्डी पऱ चॉकलेट लग गई। वोँ हँसते हुएखा रहीथीं।
मैंने कहा, “भाभी… धीरे-धीरे खाओ, देखो पूरी चॉकलेट फैलरही हैं मुंह पर्र। ”
भाभी नें शरारत भरी नज़रों सें मुझे देखा, औऱ बोलि “तौ साफ़कर दो नाँ। ”
ऐसा कहकर उन्होंने आँखें बंदकर लीं औऱ चेहरा आगेकर दिया। मैंने उन्हें गर्दन सें हल्केसे पकड़ा। होठो सें आहिस्ता चूमकर, चूसकर चॉकलेट साफ़ करनेलगा। चॉकलेट कां मीठा स्वाद, उनकी त्वचा कि नरमाई, एक् अलग हि मिठास थि। मे उनके गालों पऱ, होंठों केँ कोनों पऱ, ठुड्डी पर्र चाटता रहा। भाभी हल्के सें सिहररही थीं।
फिन मे थोडा अलगहुआ। भाभी नें थरथराते होंठ खोले, आँखें खोलीं, शरारत भरी नजरो सें मुझे देखा। उन्होंने उँगली सें औऱ चॉकलेट लिया औऱ अपनी गर्दन पऱ रगड़ दिया। फिन आँखें बंद करके गर्दन आगेकर दि।
मुझेयह खेलअब बहोत आगे बढ़ाना थां। मैंने एक् हाथ उनकीपीठ पर्र रखा, गर्दन कों चूमते हुए चॉकलेट चाटली। भाभी सिहर उठीं, एक् हल्की कराह निकली।
फिन भाभी नें झट सें चॉकलेट सीधे बूब्स केँ ऊपरी हिस्से पर्र रगड़ दि। ड्रेस कां नेकलाइन नीचे थां, चॉकलेट गहरीखाई मे फैल गई। मैंने दोनों हाथों सें ड्रेस केँ स्ट्रैप खींचे, एक् हाथ सें बूब पकड़ा औऱ चॉकलेट चाटने लगा। जैसेकोई भूखाशेर सालों बाद शिकार पा गय़ा हौ, मे उनके बूब्स पर्र सें चॉकलेट चाटरहा थां, जीभ सें घुमाता, चूसता। भाभी कि साँसें तेज़ हौ गईं, औऱ उनकेहाथ मेरे बालों मे थें।
अब मैंने चॉकलेट उनकेहाथ सें छीनली। उन्हें धक्का देकरबेड पऱ गिरा दिया। एक् हाथ सें ड्रेस घसीटकर कमर तक नीचेकर दिया। चॉकलेट कों बूब्स सें नाभि तक रगड़ दिया, चॉक्लेट पूरीपेट पऱ फैल गई। मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी औऱ उनसे लिपट गय़ा।
हम् दोनों कां चॉकलेट सैंडविच बन गय़ा, मेरी छाती पर्र चॉकलेट, उनके शरीर पऱ। मे उन्हें किस करतारहा, जोर सें पकड़कर। चॉकलेट हम् दोनों केँ बीचफैल रही थि, गरम, चिपचिपी।
मे उनकेकान केँ पास गय़ा औऱ फुसफुसाया, “भाभी…अब तोँ मेरेऊपर भि चॉकलेट आँ गई हैं। ”
भाभी नें एक् झटके सें मुझे साइड किया औऱ मेरेऊपर आँ गईं। ऊपर आने सें पहले उन्होंने ड्रेस पूरी उतार दि, अब वोँ बिल्कुल नंगी मेरेऊपर बैठीथीं। मे सिर्फ़ शॉर्ट्स मे थां।
भाभी नीचे झुकीं, बालों कों एक् साइड करकेहाथ सें पकड़ा औऱ मेरे निप्पल्स सें नाभि तक चॉकलेट चाट-चाटकर साफ़ करने लगीं। वोँ जीभ घुमातीं, चूसतीं, कभी हल्के सें काटतीं। मुझे गुदगुदी होँ रही थि, मगर वोँ एहसास… वोँ उनकीजीभ कां गरम स्पर्श, वोँ शरारत भरा अंदाज़, मे बस लेटा-लेटा स्वर्ग कां मजा लें रहा थां।
मे अबबैठ गय़ा। भाभी मेरीगोद मे थीं। मैंने एक् हाथ सें उनकी गांड कसकर पकड़ी, उन्हें ऊपर उठाया। अब उनकापेट मेरे सामने थां। मे उनके बूब्स, पेट औऱ नाभि सें चॉकलेट चूसरहा थां, चाटरहा थां। भाभी कों किसी कुल्फी कि तरहऊपर निचेकर रहा थां। जीभ नाभि मे घुसाकर घुमाता, बूब्स कों मसलते हुए चाटता। भाभी कराहरही थीं, सिर पीछे करके। भाभी नें अपने आप् कों मुझेसोप दिया थां।
हम् ऐसे हि मस्ती कररहे थें, हँसते, चूमते, चाटते। थोड़ी देरबाद हमें एहसास हुआ, हम् कितने गंदे हौ चुके हें। चॉकलेट पूरे जिस्म पर्र फैली हुई, चिपचिपी, गरम।
मैंने भाभी कि तरफ़ देखा औऱ मुस्कुराकर कहा, “सुभह कां वादायाद हैं नाँ? नहाने वाला?”
भाभी नें शरारत भरी नज़रों सें मुझे देखा, “हाँ… अब तौ सहायता करनी पड़ेगी। चलो, शावरऑन करो… औऱ इसबार… मे तुम्हें अच्छे सें साफ़ करूँगी। ”
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