जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 9 (इसभाग मे पिक्स पऱ ज़्यादा जोर हैं। एन्जॉय। )
कुछ दिनों बाद।
शनिवार कां दिन थां। भैया औऱ मां किसी फंक्शन मे बाहर् गएहुए थें। घऱ मे सिर्फ़ मे औऱ भाभी थें। आज हमें आजादी मिल गई, थि, बड़े दिनों सें हमेऐसे पलो कां इंतज़ार थां। हम् दोनों देर सें उठे। सुभह कि धूप कमरे मे फैली हुईँ थि।
ब्रेकफास्ट-खानां करने केँ बाद मे सोफे पर्र सिर्फ़ ब्रीफ मे लेटाहुआ थां औऱ टेलीविज़न देखरहा थां। तभी भाभी बेडरूम सें बाहर् आईं। बाहर् आते हि वोँ एकदमअलग लगरही थीं।
उन्होंने सेक्सी बेबीडॉल लॉन्जरी पहनी हुईँ थि, अन्दर कालीलेस वाली ब्रा औऱ पैंटी, जौ उनके कर्व्स कों हाइलाइट कररही थि। उनकी स्किन चमकरही थि, जैसे अभि-अभि लोशन लगाया होँ। उनकेबाल खुलेहुए थें, लंबे औऱ घने, जोँ उनकीपीठ पऱ लहरारहे थें।
वोँ मुस्कुराते हुए मेरी तरफ़आईं। उनकी आँखों मे वोँ शरारत थि, जौ मुझेपता थां कि आजकुछ स्पेशल होने वाला हैं। मे उठकर टुकड़े सोफे पऱ बैठ गय़ा, वोँ धीरे-धीरे सें मेरेपास आईं, सोफे पर्र मेरेबगल मे बैठीं औऱ फिन अचानक मेरीगोद मे सरकगईं।
भाभी नें फुसफुसाते हुएकहा,
“आरामकर रहे होँ? अब मे तुम्हें औऱ आराम दूँगी। ”
उनका जिस्म मेरे खिलाफ दबाहुआ थां, गरम औऱ नरम। लॉन्जरी इतनी पतली थि कि उनकी स्किन कि गर्मी सीधे महसूस हौ रही थि।
उन्होंने झट सें लैप डांस शुरुआत किया। वोँ पलटकर मेरी जाँघों पर्र बैठगईं। अब उनकीपीठ मेरी तरफ़ थि। उन्होंने एक् रिदम पकड़ा, आहिस्ता अपनीकमर हिलाते हुए, मेरी जाँघों पर्र घूमते हुए। उनकी पैंटी एक् थॉन्ग थि। उस पतले कपड़े मे सें उनकी थरथराती नरम गांड कितनी कमाललग रही थि। रसीले कपड़े केँ ऊपर सें मैंने उनके गांड कों सहलाया। वोँ कपड़ा आज उनकी गांड कों औऱ भि सेक्सी औऱ रसीले बनारहा थां।
मैंने हल्के सें उनकेकमर पऱ हाथ लें जाया। उनकी स्मूद स्किन कों कपड़े केँ संग रगड़ा। वोँ रेशमी एहसास थां, जैसे सिल्क। भाभी नें अपनी आँखें बंदकीं औऱ सिर पीछे झुकाकर मेरे कंधे पर्र टिका दिया। उनके होंठ हल्के सें खुलेहुए थें, साँसें तेज़ हौ रहीथीं।
लैप डांस औऱ तेज़ होता गय़ा। वोँ मेरीगोद मे घूमरही थीं, अपनी गांड़ कों मेरी जाँघों पर्र रगड़ते हुए। मैंने हल्के टच सें उनके कंधों कों सहलाया, फिन नीचे कि तरफ़हाथ फेरा। ऊपर लीजाकर उनकी ब्रा केँ ऊपर सें बूब्स कों दबाया, मगरअब रुक गय़ा। मैने भाभी कि अदाएं देखने कां फैसला किया।
भाभी कि सेक्सी अदाएँ कमाल कि थीं। वोँ अपनीजीभ सें होंठ चाटतीं, फिन मुस्कुरातीं औऱ अचानक अपनीकमर कों ऐसे घुमातीं जैसेकोई प्रोफेशनल डांसर।
अब वोँ स्ट्रिप करना शुरुआत करदीं। उन्होंने पहले मटकते हुए लॉन्जरी निकालकर मेरे मुँह पऱ फेंकी। मैंने भि शरारत करतेहुए झट सें अपना ब्रीफ निकालकर उनकी तरफ़ फेंका। मेरा लन्ड अब आज़ाद थां औऱ भाभी कि हरअदा केँ संग झटके लेँ रहा थां।
भाभी नें अब ब्रा कि स्ट्रैप्स कों कंधों सें सरकाया, आराम से, मुझे तड़पाते हुए। ब्रा गिरते हि उनके बूब्स बाहर् आँ गए, बड़े, फर्म औऱ निप्पल्स हार्ड हौ चुके थें, गुलाबी औऱ उभरेहुए।
वोँ स्वयं अपने बूब्स कों हाथों सें दबाने लगीं, उन्हें मसलते हुए। फिन एक् निप्पल कों मुँह मे लेकर चबाने लगीं, जीभ सें चाटते हुए, आँखें मेरी तरफ़ देखते हुए। वोँ दाँतों सें हल्के सें बूब्स कों काटतीं औऱ एक् अहह निकालतीं, जौ मुझे औऱ उत्तेजित कररही थि।
फिन मे उठकर उनकेसंग डांस करनेलगा। मे उनके शरीर पऱ हाथफेर रहा थां, बूब्स दबाकर, उनकीपीठ सें, कमर पर्र, फिन जाँघों पऱ.
उनकी जाँघें मोटी औऱ सॉफ्ट थीं, जैसे मखमल। भाभी नें अब पैंटी कों पकड़ा औऱ आरामसे नीचे सरकाया। जैसे हि पैंटी घुटनों तक पहुँची, भाभी नें मुझे एक् हल्का धक्का देकर वापस सोफे पऱ बिठा दिया। फिन उन्होंने एक् हाथऊपर उठाया औऱ दूसरा हाथसिर केँ पीछे लें गईं। उनके बूब्स अब पूरीतरह तनेहुए थें, क्याँ नज़ारा थां!
फिन भाभी नें पेर हल्के-हल्के आगे-पीछे हिलाए पैंटी धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे खिसक गई औऱ वोँ पूरीतरह नंगी होँ गईं। उनका जिस्म एकदम परफेक्ट थां, कर्वी फिगर, क्लीन शेव्ड पुसी जौ हल्की नमी सें चमकरही थि।
अब वोँ sensual नंगा डांसकर रहीथीं, धीरे धीरे, हर मूवमेंट मे अपना जिस्म दिखाते हुए। भाभी नें फिन दोनों हाथऊपर करके स्ट्रेच किया, उनके बूब्स औऱ ऊपरउठ गए। फिन वोँ नीचे झुकीं औऱ अपनी गांड कों मेरीतरफ घुमाया, गोल, टाइट औऱ परफेक्ट शेप वाली। मैंने हल्के सें उस पर्र एक् थप्पड़ लगाया। भाभी नें एकदम सेक्सी आवाज़ मे “आह.” कि आवाज़ निकाली।
वोँ झट सें मेरेपास आईं, मेरे लन्ड कों पकड़कर जोर सें काटा औऱ फिन पीछे हटकरकमर पर्र हाथ रखकर खड़ी होँ गईं।
भाभी: “बदमाश!”
मैंने दर्द सें लन्ड कों पकड़ लिया औऱ सहलाने लगा। भाभी मेरे लन्ड कों देखकर होंठचबा रहीथीं, जैसे उनका इरादा होँ उसे कच्चा चबाने कां।
अब उन्होंने एक् गोल चक्कर लगाया औऱ जाँघों कों एक्-दूसरे सें पटकने लगीं। हर पटकने पऱ थप-थप कि आवाज़ आती औऱ जाँघें हिलतीं, मसल्स फ्लेक्स होते दिखते।
फिन वोँ घुटनों पर्र बैठगईं। दोनों हाथों सें बूब्स कों दबाकर स्वयं चबाने लगीं, निप्पल्स कों चूसते हुए, जैसे स्वयं कों प्लेज़र देरही हों। उनकी आँखें आधीबंद, साँसें भारी औऱ जिस्म पर्र पसीने कि बूँदें चमकरही थीं।
डांस औऱ इंटेंस होता गय़ा। वोँ मेरे लगभगआईं औऱ अपनी चूत कों मेरी जाँघ पर्र रगड़ने लगीं। गीली चूत सें जाँघ पऱ रगड़ने मे कोई दिक्कत नहि होँ रही थि। संग हि उन्होंने मेरा लन्ड पकड़ लिया औऱ हल्के-हल्के मॉन्स निकालते हुएउसे मसाज देने लगीं।
मे उनके पूरे जिस्म पऱ हाथफेर रहा थां, बूब्स सें लेकर जाँघों तक, उनकी गांड कों दबाते हुए। भाभी अलग-अलग हरकतें कररही थीं, कभी अपनी उँगलियाँ मुँह मे डालकर चूसतीं, कभी चूत पऱ हाथ फेरतीं, आहिस्ता इंसर्ट करतीं औऱ बाहर् निकालकर मुझे दिखातीं।
वोँ अब उठकरफिन डांस करने लगीं, हर सेकंड औऱ सेक्सी, जैसेकोई स्लो-मोशन फिल्म। वोँ घूमतीं, झुकतीं, अपना जिस्म हर एंगल सें नुमाइश करतीं, सामने सें बूब्स, साइड सें कमर कां कर्व, पीछे सें गांड कि शेप।
उनकी स्किन ग्लोकर रही थि। हर मूवमेंट मे मसल्स टाइट होते औऱ वोँ मुझे देखकर मुस्कुरातीं। आखिरकार भाभी नें अपना डांस ख़त्म किया।
वोँ धीरे-धीरे सें फर्श पऱ लेटगईं, हाँफते हुए। शरीर पर्र पसीना चमकता हुआ। वोँ किसी मॉडल कि तरह पोज़दे रही थीं, एक् हाथसिर केँ नीचे, दूसरा बूब्स पऱ, जाँघें हल्के सें खुली हुईं, पुसी पूरी नुमाइश मे। उनकी आँखें मेरी तरफ़थीं, होंठों पर्र मुस्कान, साँसें अभि भि तेज़।
मे उन्हें ऊपर सें देखरहा थां। उनका पूरा शरीर फैला हुआ, बूब्स उभरेहुए, निप्पल्स अभि भि हार्ड, जाँघें सॉफ्ट औऱ इनवाइटिंग। वोँ हल्के सें अपनी जाँघें रगड़रही थीं, जैसे औऱ तड़पा रहीहों। फर्श पऱ लेटेहुए वोँ औऱ भि सेक्सी लगरही थीं, जैसे कोई आर्टपीस, परफेक्ट औऱ इरॉटिक।
मे बस उन्हें देखता रहा, हर डिटेल सोखते हुए। औऱ वोँ जानती थीं कि अब अगला स्टेप क्याँ होगा।
मैंने उन्हें उठाया औऱ मेरेगोद मे बिठा दिया। वोँ अभि भि हाँफरही थीं। मुझेसमझ आया कि उन्हें थोडा आराम चाहिए। मे सोफे पऱ लेट गय़ा औऱ भाभी केँ नंगे शरीर कों अपनेऊपर ओढ़ लिया। उनकीपीठ औऱ गांड पर्र हाथरख दिया। भाभी कां चेहरा मेरे सीने पर्र थां। उन्होंने दोनों हाथ मेरे बालों मे डाले। थकान केँ कारण भाभी कों नींद आँ गई औऱ हम् दोनों वैसे हि एक्-दूसरे केँ आगोश मे सोगए।
जब आँख खुली तौ रात कां वक़्त होँ चुका थां। घऱ मे सन्नाटा पसराहुआ थां। हम् धीरे-धीरे उठे, बिना किसी जल्दबाज़ी केँ।
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Update - 10 (एक् छोटासा एपसोड, तबतकआगे कि कथाबन रही हैं। )
मे सजधजकर होकर बाहर् गय़ा थां, बस कुछदेर मे हि वापस आँ गय़ा, हाथों मे दोनों केँ लिए गरमा-गर्म खानां लिएहुए। द्वार (दरवाज़ा) खोलते हि नज़र भाभी पर्र पड़ी।
वोँ ब्लैक साड़ी मे रेडी खड़ीथीं, मगर वोँ साड़ी आजकुछ अलगलग रही थि। साड़ी कां ब्लाउज़ बिल्कुल नहि थां, नं ब्लाउज़, न् ब्रा। सिर्फ़ साड़ी कां पल्लू हल्के सें कंधे पऱ लिपटा हुआ थां, जोँ उनके गोरे, नरम बूब्स कों मुश्किल सें ढकपारहा थां।
पल्लू इतना ढीला थां कि हर साँस केँ संग हिलता रहता थां, औऱ उनके बड़े, गोल, दूध जैसे गोरे बूब्स आधे खुलेहुए नज़र आँ रहे थें। पतले पल्लू केँ पीछे छुपे निप्पल्स हल्के गुलाबी, थोड़े उभरेहुए औऱ ठंडीहवा मे औऱ भि सख्तलग रहे थें। उनकीपीठ पूरी नंगी थि, गोरी, चिकनी, बिना किसी दाग-धब्बे केँ। वहीं सें साड़ी कि कमर कि फोल्ड्स शुरुआत होँ रहीथीं। कमर कां कर्व इतना गहरा थां कि देखते हि साँसरुक जाती।
बाल खुले हुए, काले औऱ लंबे, पीठ पर्र झूलते हुए। वोँ मुस्कुराईं, आँखों मे वही शरारत, औऱ बोलीं,
भाभी: “जल्द आँ गए? अच्छा किया, भूख लगी हैं। ”
हम् दोनों डाइनिंग टेबल पऱ बैठगए। खानां प्लेट मे सर्व किया, दाल, सब्ज़ी, रोटी, चावल। भाभी नें पल्लू कों हल्के सें कंधे पर्र रखाहुआ थां, मगर जैसे हि वोँ झुकीं रोटी तोड़ने केँ लिए, पल्लू सरक गय़ा। उनका एक् बूब पूरीतरह बाहर् आँ गय़ा, बड़ा, भराहुआ, हल्के सें हिलता हुआ।
वोँ शरमाईं नहि, बसहँस दीं औऱ कहा,
भाभी:“अब खानां खाओ, संतरे बादमें खानां”
मे उन्हें देखता रहा, मुस्कुराते हुए। खानां खाते-खाते अचानक भाभी कि प्लेट सें थोड़ी सि दाल सीधे उनके खुलेबूब पऱ जा गिरी। दाल नीचे कि तरफ़ बहनेलगी, उनके निप्पल कों छूतेहुए। भाभी नें एक् समय कों देखा, फिन बिनाकुछ कहे पल्लू कों पूरीतरह हटा दिया।
अब वोँ टॉपलेस बैठी थीं, सिर्फ़ ब्लैक साड़ी कमर सें नीचे, ऊपर सें पूरा गोरा शरीर नंगा। उनके बूब्स अब औऱ भि हसीनलग रहे थें। दालचमक रही थि, जैसेकोई ऑइल लगाया होँ। भाभी नें खानां खानां जारीरखा, जैसेकुछ हुआ हि नहि।
मैंने कहा,
मे: “भाभी, वोँ। दाल तोँ साफ़ करनी पड़ेगी। ”
वोँ मुस्कुराईं, आँखें झुकाकर बोलीं, “तौ साफ़कर दो नां। ”
मैंने झट सें प्लेट साइड मे रखी, उनकेपास सरका औऱ धीरे-धीरे सें उनके बूब्स पऱ हाथरखा। पहले उँगलियों सें दाल कों फैलाया, उनकेनरम, गरम बूब्स पर्र हाथ फेरते हुए। फिन झुककर जीभ सें चाटना शुरुआत किया।
सबसे पहले निप्पल केँ आसपास, जहाँदाल सबसे ज्यादा थि। जीभ सें चाटा, हल्के सें चूसा। भाभी कि साँसें तेज़ हौ गईं, हाथ मेरे बालों मे चलेगए। मैंने एक् बूब कों पूरा मुँह मे लिया, जीभ सें साफ़ करतेहुए, दूसरे हाथ सें दूसरे बूब कों मसलते हुए। उनकी स्किन कि मीठीगंध सभी मिलकर कमालकर रहा थां।
भाभी हल्के सें कराहरही थीं,
भाभी: “हम्म। अच्छे सें साफ़करो.”
मैंने दोनों बूब्स कों बारी-बारी चाटा, चूसा, हल्के सें दाँतों सें काटा। उनकी स्किन पर्र अब मेरीलार कि चमक थि, बूब्स औऱ भि चमकदार लगरहे थें।
खानां ख़त्म हुआ। भाभी उठीं, अभि भि टॉपलेस, साड़ी सिर्फ़ कमर मे लिपटी हुईँ। उनके बूब्स हरकदम केँ संग हल्के सें हिलरहे थें। वोँ मुड़ीं, मुझे देखकर बोलीं,
भाभी:“अब मे बेडरूम मे जारही हूं। तुम् आओगे नाँ?”
फिन धीरे-धीरे सें बेडरूम कि तरफ़चली गईं। उनकी नंगीपीठ चमकरही थि, कमर कां कर्व, साड़ी कि फोल्ड्स, सभीकुछ इनवाइटिंग।
मे हॉल मे हि सोफे पऱ बैठारहा। दिल अभि भि तेज़ धड़करहा थां। उनके बूब्स कां स्वाद मुँह मे थां, उनकी गर्माहट हाथों मे महसूस होँ रही थि। कमरे सें हल्की-हल्की उनकी चूड़ियों कि खनक आँ रही थि, जैसे वोँ इंतजार कररही हों।
आज सुभह सें भाभी नें मुझ पर्र बहोत सितम ढाया थां। सुभह सें रात हौ गई, मगर सेक्स नहि करने दिया थां। औऱ अबकहरही थीं, आँ जाओ। मेरामन तोँ हुआ कि झट सें उठकर बेडरूम मे जाऊँ, मगर मैंने भाभी कों थोडा परेशान करने कां फैसला किया।
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Update - 11
मे लिविंग रूम मे बैठा टेलीविज़न देखने लगा। अचानक द्वार (दरवाज़ा) खुला औऱ भाभीहॉल मे आईं। वोँ एकदम सेक्सी नाइटी पहनेहुए थीं, वोँ स्किन कलर कि नाइटी पहनेहुए थीं, जौ उनके गोरे जिस्म सें चिपकी हुईँ थि। नाइटी इतनी छोटी थि कि जाँघों तक हि आती थि, औऱ नीचे सें उनके कर्व्स साफ़ नज़र आँ रहे थें। ब्रा औऱ पैंटी भि मैचिंग थीं, मगर इतनी पतली कि उनकी निप्पल्स उभरी हुईँ साफ़दिख रहीथीं।
भाभी थोडा सजधजकर होकरआई थीं, बाल खुलेहुए, होंठों पर्र लाल लिपस्टिक, गालों पऱ हल्की लाली। शायद उन्होंने थोड़ी लाली बूब्स पर्र भि लगाई थि। औऱ आँखों मे वही शरारती चमक, जौ मुझे हमेशा पागलकर देती थि।
भाभी नें कहा,
“टेलीविज़न मे ऐसा क्याँ हैं, जोँ इधर नहि?”
मैंने कोई जवाब नहि दिया औऱ सोफे केँ कोने मे उनसेदूर सरक गय़ा।
भाभी दौड़ते हुए सोफे कि तरफ़आईं।
भाभी (शरारती मुस्कान केँ संग):“आज तुझेही पकड़कर हि छोड़ूँगी, भागमत!”
मे (हँसते हुए उठतेहुए): “अरे भाभी, क्याँ बात हैं? क्याँ चाहिए? पकड़सको तोँ पकड़लो, मगर मे आसानी सें नहि दूँगा!”
फिन मैंने भाभी कों पूरेघऱ मे दौड़ाया। लिविंग रूम सें रसोई कि तरफ़, फिन डाइनिंग टेबल केँ चारों तरफ़ घुमाया। उनकी नाइटी हवा मे उड़रही थि, जाँघें चमकरही थीं, औऱ हरबार जब वोँ मेरे लगभग आतीं, तौ हल्के सें मेरे सीने कों छूतीं याँ कमर पकड़ने कि कोशिश करतीं।
भाभी (हँसते हुए, साँसें फूलते हुए):“रुक जा शैतान! आज तुम्हारी तरफसजा दूँगी। भागता कहा हैं? देख, मे कितनी रेडी हूं तेरेलिए। ”
मे (पीछे मुड़कर देखते हुए):“सजा? वोँ तोँ मे आपको दूँगा, भाभी। पकड़ो न्, अगर पकड़सको!”
रसोई मे पहुँचे तौ भाभी नें मुझे दीवार सें सटाकर पकड़ने कि कोशिश कि, मगर मे निकल गय़ा। फिन हम् हॉल कि तरफ़ भागे।
अब भाभी नें भागना बंद किया औऱ बेडरूम कि ओर जाते-जाते अपनाखेल शुरुआत किया। पहले उन्होंने नाइटी कि एक् स्ट्रैप कंधे सें सरका दि।
भाभी (शरारती अंदाज़ मे): “देख, अगर तुँ नहि रुका तौ यह स्ट्रैप गिर जाएगी। औऱ क्याँ पता, पूरी नाइटी हि उतरजाए!”
मे (रुककर देखते हुए):“वाउ भाभी, अब तौ मे स्वयं पकड़ जाऊँगा!”
फिन उन्होंने दूसरी स्ट्रैप भि सरकाई। नाइटी नीचे गिरने लगी, मगर वोँ उसे पकड़े रही। बेडरूम मे पहुँचते-पहुँचते उन्होंने नाइटी कों पूरीतरह उतार दिया। अब सिर्फ़ ब्रा औऱ पैंटी मे थीं। उनकी गोरीपीठ चमकरही थि, गांड कि गोलाई साफ़ नज़र आँ रही थि।
भाभी (पीछे मुड़कर, आँख मारते हुए):“अब? अभि भि भागेगा? देख, ब्रा भि उतारदूँ क्याँ? आँ, पकड़ मुझेअब!”
मे (साँसें फूलते हुए): “भाभी, तुम् तोँ आगलगा रही होँ। ”
बेडरूम केँ दरवाज़े पऱ पहुँचते-पहुँचते उन्होंने ब्रा उतार दि। उनकेभरे हुए बूब्स उछलकर बाहर् आँ गए, गुलाबी निप्पल्स सख्त हौ चुके थें।
भाभी (कराहते हुए, स्वयं केँ बूब्स कों छूतेहुए): “हाय.देख, यह तेरेलिए हें। अब आँ जा, मत तड़पा!”
मे (आँखें फाड़कर देखते हुए): “भाभी, तुम्हारी फिगर। वोँ निप्पल। मे तोँ मर गय़ा!”
औऱ आखिर मे, बेडरूम मे घुसते हि भाभी नें पैंटी भि उतार दि। अब वोँ पूरी नंगीथीं। उनका सफ़ेद बदन रोशनी मे चमकरहा थां, चूत पहले सें हि गीली थि।
भाभी(बेड पऱ लेटते हुए, बाहें फैलाते हुए):“अब आँ जा, तुम्हे पकड़ने दे मुझे। आज रात तेरी हैं!”
मे (द्वार (दरवाज़ा) बंद करतेहुए): “हाँ भाभी, आज कोई नहि रोकेगा। ”
मैंने द्वार (दरवाज़ा) बंद किया औऱ भाभी कों लिपटकर किसकर लिया। हमारे होंठ मिले, जीभें एक्-दूसरे मे उलझगईं। वोँ किस इतना गहरा थां कि साँसें रुकगईं।
भाभी कि नंगी छाती मेरे सीने सें सटी हुई थि। उनकी गर्माहट मुझे पिघला रही थि।
मे: (किस तोड़ते हुए) भाभी, तुम्हारे होंठ कितने मीठे हें। आज मे तुम्हें इतना प्रेम करूँगा कि तुम् कभीभूल नहि पाओगी।
भाभी: (हाँफते हुए)कर नं, मेरे राजा। मे तेरी हूं… आज पूरा लें लेँ।
मैंने उन्हें बेड पर्र लिटाया औऱ पूरे शरीर कि मालिश शुरुआत कर दि। पहले कंधों सें, उंगलियाँ उनकी गोरी त्वचा पर्र फिसलरही थीं, फिन पीठ पर्र, कमर पऱ, औऱ आरामसे नीचे जाँघों तक।
मे: (कंधों कों मसलते हुए)यहा दबाव कैसालग रहा हैं, भाभी? तुम्हारी त्वचा कितनी चिकनी हैं… जैसे रेशम।
भाभी: (हल्की चीख लेतेहुए) उफ्फ… बहोत अच्छा। नीचेकर… कमर पर्र… स्स्स, तूँ जानता हैं कहां दबाना हैं।
मैंने उनके स्तनों कों हल्के सें दबाया, निप्पल कों मसला, फिन पेट पऱ उंगलियाँ घुमाईं औऱ नाभि मे उंगली डाल दि। भाभी उतावलापन रहीथीं, उनकीकमर उछलरही थि।
भाभी: (कराहते हुए) ओह्ह… मेरे बूब्स… जोर सें दबा। हाँ, निप्पल कों ऐसे हि… मे तेरे स्पर्श सें गीली हौ रही हूं।
मे: (स्तनों कों मसलते हुए) तुम्हारे यह कितने रसीले हें, भाभी। मे तोँ इन्हें चूसना चाहता हूं, मगर पहले पूरी मालिश।
अब भाभी नें पहल कि। उन्होंने मुझे लिटाया औऱ मेरी जाँघों पर्र बैठगईं। मेरा लन्ड उनकी गांड कि दरार मे समा गय़ा। फिन उन्होंने मेरे सीने कि मालिश शुरुआत कि। उनकीगरम हथेलियाँ मेरे निप्पल पर्र घूमरही थीं, फिन नीचेपेट पऱ, औऱ उसकेबाद मेरी गांड पर्र। वोँ मेरी गांड कों मसलरही थीं, हाथ अंदर डालकर दबारही थीं। मे कमरऊपर करके उन्हें पूरा एक्सेस देरहा थां। उनकी उंगलियाँ मेरे गांड केँ छेद केँ पासफेर रहीथीं।
भाभी: (मेरी गांड कों सहलाते हुए) तेरी गांड… उफ्फ, कितनी टाइट हैं। मे तोँ इसमें उंगली डालदूँ?
मे: (कराहते हुए, धीरे-धीरे सें) हाँ भाभी, करो… तुम्हारा स्पर्श मुझे पागलकर रहा हैं। ऐसे हि प्रेम करो।
भाभी: (गांड मसलते हुए) तूँ मेरा हैं, हमेशा। अब मुझेचोद न्… इंतजार नहि होता।
भाभी अपनी चूत मेरे लन्ड पर्र रगड़रही थीं। वोँ गीली औऱ गरम थि, जैसे कोई मीठा आमंत्रण।
भाभी: (रगड़ते हुए)देख, कितनी गीली हूं तेरेलिए। अबडाल नं अंदर… धीरे-धीरे सें…
मे: (धीरे-धीरे सें अंदर धकेलते हुए)हाँ भाभी, कितनी टाइट होँ तुम्… स्स्स… मे आहिस्ता करूँगा, बहोत देर तक।
मैंने धीरे-धीरे सें अंदर धकेला। वोँ संगम कां एहसास, लन्ड कां आहिस्ता अंदर जानां, चूत कि दीवारें उसे जकड़रही थीं, इतना चैनभरा थां। मे नीचे सें कमर हिलारहा थां औऱ भाभी एक् मादकलय मे गांड हिलारही थीं। लन्ड पूरीतरह बाहर् आता, फिन सें चूत कों चीरते हुए अंदर जाता। हर बार हम् दोनों सिहर जाते।
हमनेकई मिनटों तक उस मिलन कों ऐसे हि एंजॉय किया। धीरे धीरे, बिना जल्दबाज़ी केँ, मे अंदर-बाहर् कररहा थां। भाभी कि कमर मेरेसंग ताल मिलारही थि, उनकी कराहें धीमी औऱ गहरी।
भाभी: (धीरे धीरे हिलते हुए) ओह्ह…ऐसे हि… मतरुक। तेरा लन्ड अंदर कितना अच्छा लगरहा हैं… औऱ गहरा…हाँ, ऐसे… मे तेरीहर इंच मे महसूस कररही हूं।
मे: (हल्के धक्के लगाते हुए) भाभी, तुम्हारी चूत कितनी गरम हैं… यह कसाव… मे जीवनभर तुम्हें ऐसे हि चोदता रहूँगा, प्रेम करतेहुए।
भाभी: (कराहते हुए)हाँ, कर नं… धीरे धीरे…रुक मत… औऱ एंजॉय कर… तूँ मेरासभी कुछ हैं।
मे: (औऱ धीरे-धीरे हिलते हुए) तुम् भि मेरी होँ, भाभी। यह समय… मे कभी नहि भूलूँगा।
हमने स्पीड बढ़ाई। भाभी मुझे लिपट गई, मैने भाभी केँ गांड़ कों दोनों हाथों सें पकड़ा औऱ कसके पकड़कर गांड़ कों हिलाने लगा, इससे मेरा लन्ड औऱ ज़्यादा स्पीड सें भाभी केँ चूत मे रगड़ खानेलगा। भाभी केँ चूत नें लन्ड पर्र अब कसाव बनाना चालू किया, हम् चरम पर्र पहुँचे। औऱ मैंने अंदर हि छोड़ दिया। भाभी कि चूत मे मेरारस बहरहा थां औऱ उनकारस मेरे लन्ड पऱ चिपकरहा थां।
हम् दोनों गीलेरस मे डूबेहुए थें। बदन पसीने औऱ रस सें चिपचिपे। फिन हम् वैसे हि, लन्ड अंदर रखकर, एक्-दूसरे सें लिपटकर सोगए।
भाभी: (लिपटते हुए, कान मे फुसफुसाते हुए)सो जाऐसे हि… तेरा लन्ड अंदर रखकर… मे तेरीरात भर महसूस करना चाहती हूं।
मे: (गले लगाते हुए)हाँ भाभी, मे भि… गुड नाइट, मेरीजान।
एक् गहरा लंबाकिस करके भाभी मेरे सीने पऱ सिररख दिया, मेरी बाहें उनकीकमर पऱ थि। हम् अब वोँ शांत नींदचाह रहे थें, जैसे दुनिया कि सबसेचैन वाली स्थान। मे थोडा खिसका, भाभी कों औऱ कसकर पकड़ा औऱ सो गय़ा।
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