जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 12
सुभह केँ ठीक 6 बजे मेरी नींद खुली। हम् दोनों पूरीतरह नंगे एक्-दूसरे सें लिपटकर सोएहुए थें। भाभी कां एक् हाथ मेरे सीने पर्र फैलाहुआ थां, उनकीनरम उंगलियां मेरी त्वचा कों हल्के सें छूरही थीं। उनका एक् पेर मेरे लन्ड पऱ लिपटा हुआ थां, जिससे वोँ हल्का-हल्का दबावपड़ रहा थां औऱ मेरा लन्ड पहले सें हि थोडा सख्त हौ चुका थां।
उनका नंगा जिस्म सुभह कि हल्की धूप मे दूध कि तरहचमक रहा थां, सफ़ेद, चिकना, नरम। उनके बड़े-बड़े बूब्स मेरे सीने सें सटेहुए थें, गोल-मटोल, भरे हुए, एक् साइड सें सिखरहे निप्पल्स, हल्के गुलाबी औऱ अभि भि थोड़े उभरेहुए। उनकी पतलीकमर सें नीचे वोँ परफेक्ट गोल-मटोल गांड मेरी जांघों सें चिपकी हुइ थि। उनके लंबे कालेबाल बिखरे हुए थें, तकिए पर्र फैलेहुए। उनका चेहरा सुभह केँ मासूमपन सें भरा थां, आंखें बंद, होंठ थोड़े खुलेहुए, गालों पर्र हल्की लाली, सांसें धीमी औऱ शांत, ऐसे लगरहा थां जैसेकोई परी सपनादेख रही हौ।
मैंने धीरे-धीरे सें उन्हें हिलाया औऱ उनकेकान मे फुसफुसाया, “भाभी.उठो। भैया औऱ मम्मी दो घंटे मे घऱ आँ जाएंगे। हम् इस मौके कां पूरा फायदा उठाना चाहिए। ”
भाभी नें नींदभरी आंखें खोलीं, एक् प्यारी सि मुस्कान केँ संग पूरी अंगड़ाई ली, दोनों हाथऊपर गए, बूब्स औऱ ज़्यादा उभरआए, कमर टेढ़ी हुई, औऱ वोँ सीधे मेरेऊपर चिपकगईं। “हम्म। जल्दकरो नाँ फिन” उन्होंने आलस मे कहा औऱ मेरेगले मे अपना चेहरा छिपा लिया। उनकीगरम सांसें मेरी गर्दन पऱ पड़रही थीं। शायद वो फिनसो गई।
मेंने उन्हें खुदसे अलग किया, उठकरबेड केँ नीचे गय़ा, मैंने उन्हें प्रेम सें कमरसे पकड़ा औऱ जोर लगाके उनकेकमर कों ऊपर खींचा, वोँ संग देतेहुए डॉगी पोजीशन मे आँ गई। भाभीआलस मे भि पूरीतरह संगदे रहीथीं। उन्होंने घुटनों केँ बल स्वयं कों संभाला, दोनों हाथबेड पऱ टिकाए, औऱ अपनी गांडऊपर कि तरफउठा दि।
उनकी गोरी, चिकनी गांडअब पूरीतरह बाहर् निकलकर मेरे सामने थि, दो गोल-मटोल गाल, बीच मे गहरी दरार, औऱ वोँ छोटा सां टाइटछेद सुभह कि सुनहरी रोशनी मे चमकरहा थां। उनकीकमर इतनी पतली थि कि गांड औऱ भि उभरी हुई लगरही थि। मे चुपके सें बेड केँ पासरखी तेल कि बोतलउठा लाया। भाभी कों लगा कि मे मात्र चिकनाई केँ लिएतेल लगारहा हूं। मैंने बहोत सारातेल उनके गांड़ केँ छेद पर्र डाला औऱ उंगली सें हल्का-हल्का घेरा बनाते हुए मालिश किया। भाभी हल्के सें सिहर उठीं,
भाभी: “हम्म। अच्छा लगरहा हैं.”
मैने एक् उंगली गांड़ केँ छेद मे डाली, अब शायद भाभी कों एहसास हौ गय़ा थां मे क्याँ करने वालाहु। भाभी नें हाथों सें चादर कसके पकड़ली। मैने उंगली अंदर बाहर् करना जारीरखा औऱ दूसरे हाथ सें हल्के हल्के तेल गांड़ केँ छेद मे डालरहा थां। भाभी कि गांड़ औऱ छेदतेल सें एकदम चिकने हौ गए थें।
फिन मैंने अपना सख्त, मोटा लन्ड उनके टाइटछेद पर्र रखा। पहले तौ केवल सिरा छुआ। वोँ इतनागरम औऱ सख्त थां कि भाभी कि सांस एक् लम्हा केँ लिएरुक गई।
भाभी: धीरे-धीरे धीरे-धीरे करना प्लीज, बहोत दर्द होगा। तूँ हैं तौ मे मान गई, अपने भाभी कां खयाल रखेगा नाँ।
मे झट सें आगे गय़ा, भाभी कां चेहरा एक् साइड मे थां, मैने उनके होठों पे एक् किस किया औऱ हाकहकर पीछे आँ गय़ा।
वापस पीछेआकर मैंने लन्ड फिनछेद पऱ रख दिया, मैंने आहिस्ता दबाव बढ़ाया। लन्ड कां सिरा जैसे हि उनके टाइटछेद कों फैलाते हुए अंदर घुसा, भाभीजोर सें तड़प उठीं— “आआह्ह्ह। यह.यह बहोत बड़ा हैं। दर्द होँ रहा हैं। धीरे-धीरे। प्लीज.” उनकेहाथ बेड कि चादर कों कसकर पकड़लिए, उंगलियां सफेदपड़ गईं, पूराबदन सिहरउठा।
मे रुका नहि। लन्ड कां पहलाइंच अंदर गय़ा, उनका टाइटछेद मेरे लन्ड कों इतनीजोर सें दबारहा थां जैसेकोई रबर कां रिंग होँ, गरम, नरम अंदरूनी दीवारें लन्ड कों कसकर जकड़रही थीं। एक् अनोखा दबाव महसूस हौ रहा थां, गर्मी, चिपचिपाहट, औऱ वोँ टाइटनेस जौ मुझे पागलकर रही थि। भाभी कि आंखों मे डर औऱ एक्साइटमेंट दोनों थें, डर कि कहींफट नं जाए, मगर एक्साइटमेंट कि शायद पहलीबार उनकी गांड़ इसतरह भरीजा रही थि।
मैंने औऱ धीरे-धीरे सें आगे बढ़ा। आधा इंच बाहर् निकालता औऱ फिरा थोडा आगे बढ़ता, आगे बढ़ानेसे पहले, तेल कि कुछ बूंदे मेरे लन्ड औऱ गांड़ केँ छेद केँ संगम पर्र डालता। एक् इंच, दूसरा इंच। तीसरा इंच। भाभीअब जोर-शोर सें कराहरही थीं, “म्म्म। इतना मोटा। अंदर तक भर गय़ा। हां। थोडा औऱ.” उनके टाइटछेद नें मेरे लन्ड कों पूरीतरह घेर लिया थां, हरनस, हर उभार महसूस हौ रहा थां।
अंदर कि गर्मी इतनी थि कि मेरा लन्ड जैसेआग मे जलरहा हौ, मगर वोँ चिकनाई कि वजह सें फिसलते हुए आसानी सें पूरा अंदरचला गय़ा।
आखिरकार पूरा लन्ड उनके गांड़ मे समा गय़ा, मेरी जांघें उनकी गांड सें टकराईं, उनकीगोल गांड मेरेपेट सें दब गई। भाभीअब दर्द सें कराहते हुए मुझे पीछे धकेलने लगीं, मगर उनकेबोल कुछअलग थें
भाभी:“हां। अब.अब अच्छा लगरहा हैं। धीरे धीरे। औऱ जोर सें.”
मैंने हल्के-हल्के झटके देने शुरुआत किए। हर झटके केँ संग उनका टाइटछेद मेरे लन्ड कों कसकर दबाता, फिन छोड़ता, एक् अनोखा चूसने कां एहसास। भाभी कि गांडहर झटके पर्र हिलरही थि, आवाजें गूंजरही थीं, चिक-चिक। उनकी कराहें अब खुशी मे बदल चुकीथीं। हम् दोनों नें उस टाइट, गरम छेद कों पूरीतरह एंजॉय किया। मे तेज-तेज झटके देनेलगा, उनकी गांड कों दोनों हाथों सें पकड़कर खींचता। आखिरकार दोनों एक् संगचरम पर्र पहुंच गए—मैंने पूरामाल उनके अंदर छोड़ा, औऱ भाभी भि कांपते हुएझड़ गईं।
हम् दोनों हांफते हुएकुछ देरऐसे हि लेटेरहे। फिन मैंने उन्हें उठाया औऱ बाथरूम लेँ गय़ा। मैंने शावर चालूकर दिया। गुनगुना पानी उनके नंगे जिस्म पऱ गिरने लगा। भाभी कां पूरा शरीरअब गीला होँ चुका थां, पानी कि बूंदें उनकी गोरी त्वचा पर्र मोती कि तरहचमक रहीथीं। मैंने अपनी उंगलियां उनके होठों पऱ फेरीं, वे गीले, चमकदार औऱ थोड़े फूलेहुए लगरहे थें, जैसेकोई गुलाब कि पंखुड़ी पानी मे भीग गई हौ। फिनगले पर्र, पानी कि धार उनकी गर्दन सें बहरही थि, त्वचा औऱ चिकनी, नसें हल्की उभरी हुई, पूरीतरह चमकदार।
मैंने उंगलियां उनके सीने पऱ घुमाईं, बूब्स अब औऱ भरेहुए लगरहे थें, निप्पल्स पानी सें सख्त होकर खड़े थें, गुलाबी औऱ चमकते हुए, पानी कि बूंदें उन पऱ रुककर टपकरही थीं। पेट पर्र उंगलियां फेरीं, पतला, चिकना पेट पानी सें औऱ भि चमकरहा थां, नाभि मे पानीजमा हौ गय़ा थां, हर सांस केँ संगहिल रहा थां। कमर, वोँ पतलीकमर पानी सें फिसलन भरी हौ गई थि, कर्व्स औऱ स्पष्ट दिखरहे थें। दोनों गोरी जांघें पानी सें चमकरही थीं, अंदर कि नरम त्वचा सख्त औऱ चिकनी, पानी कि धारें बहरही थीं। मैने गांड़ पर्र उंगलियां घुमाईं, दोनों गालअब औऱ भि गोल औऱ चमकदार लगरहे थें, पानी कि बूंदें दरार मे बहरही थीं। भाभी कां भीगाहुआ जिस्म औऱ कसाहुआ औऱ जवानलग रहा थां, उन्हें देखते हुए मे नहाना भूल गय़ा।
भाभी नें मुझे अपनी औऱ खींचा औऱ किस करतेहुए मुझे लिपट गई, मुझे शावर मे गोल घूमकर भिगो दिया।
कुछ देर हम् एक् दूसरे कि आगोश मे एक् दूसरे कों बाहों मे भरकर भीगते रहे।
मैने शावरबंद किया, भाभी टॉवल ढूंढने लगी, मैने भाभी कां हाथ पकड़कर उन्हें मेरेपास खींचा औऱ फिन मैंने अपने होठों सें पानी चूस-चूसकर उन्हें सूखाने कि कोशिश चालू कि।
पहले मैंने होंठों कों चूस लिया, पानी कां स्वाद मीठा थां। भाभी सिहर उठीं। फिन गालों पऱ, गले पर्र, होंठों सें चूसते हुए उनकी त्वचा कों चाटा, वोँ कांपने लगीं। सीने पर्र, बूब्स कों मुंह मे लेकर निप्पल्स चूसने लगा, पानी कि हर बूंद कों चूस लिया। भाभीअब बेचैनी रहीथीं,
भाभी: “म्म्म। यह क्याँ कररहे हौ.”
उनकेहाथ कों कंधे सें उंगली तक चूसा, पेट, कमर, जांघें, गांड़ औऱ चूत हर स्थान सें पानी चूस-चूसकर निकाला। हर चूसने केँ संग भाभी कां शरीर औऱ तड़पता, वोँ मेरे बालों मे हाथ फेरतीं, सांसें तेज हौ जातीं, मगर मे रुक नहि रहा थां। वोँ बार-बार कराहरही थीं।
भाभी:“बस। अब नहि। मे पागल होँ जाऊंगी.”
मगर उनका शरीरहर स्पर्श पर्र औऱ भि अधिक प्रतिक्रिया देरहा थां।
इसकेबाद हम् जल्द सें सजधजकर होँ गए, जैसेकुछ हुआ हि न् होँ। मगरउन दो घंटों कां हरसमय हमने पूरीतरह भोग लिया थां।
दिन गुजररहे थें। मेरेदिल कों एक् अनोखा चैनमिल गय़ा थां। भाभी कि वो चहक, वो बचकानी हँसी वापसलौट आई थि। भाभी केँ संगहुए उस गहरे मिलन केँ बाद मेरा जिस्म औऱ मेरामन दोनों हि एक् नई गहराई पा चुके थें।
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक भाग हैं भइया आनंद आँ गय़ा
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 13
रोज सुभह भैया वर्कशॉप चले जाते। मां कभी पूजा-पाठ मे, कभी किसी मंदिर मे व्यस्त रहतीं। घऱ मे मात्र भाभी औऱ मे रह जाते। हम् खूब हल्ला-गुल्ला मचाते, मगरऐसा नहि थां कि हर मौके पऱ हम् सेक्स मे उतर जाते। बल्कि हमारा बर्ताव गहरे दोस्तों जैसा अधिक थां। अकेले होने पर्र हम् हमेशा एक्-दूसरे केँ कामों मे रुचि दिखाते। मे भाभी कों किचन मे सहायता करता, कभी भाभी मेरेसंग टेलीविज़न पर्र एक्-आध मूवी कां पूरा मज़ा लेती। बड़े हक़ सें भाभीकभी डाट भि देती तोँ कभी नन्ही बच्ची जैसे आँखे बनाकर मुझसे काम करवाती।
भाभी कि कमर पर्र चुटकी भर लेना याँ फिन एक् लंबा, गहराकिस अब हमारे लिएआम बात होँ चुकी थि। रोज सुभह जैसे हि घऱ खाली होता, मे दौड़ लगाकर भाभी कों अपने बाहों मे भर लेता। हम् एक्-दूसरे कि बाहों मे चैन तलाशते। मे भाभी कि पीठ सें लेकर उनकीगोल नर्म गांड़ तक आरामसे सहलाता, उनकीनरम त्वचा पऱ अपनी उँगलियाँ फिराता। भाभी मेरे बालों मे उँगलियाँ डालकर मुझे प्रेम सें सहलातीं, अपने बूब्स कों मेरे सीने पऱ जोर लगाकर रगड़तीं। फिन एक् लंबा, गहराकिस हमारे दिन कि शुरुआत कर देता।
हम् शॉपिंग करने हमेशा संग जाते। भाभी खासतौर पऱ मेरेलिए सबसे प्यारी-प्यारी लॉन्जरी चुनतीं औऱ जब मौका मिलता, सेक्सी सेक्सी कपड़े पहनकर मुझेखूब रिझातीं, अपनीहर अदा सें मुझे पागलकर देतीं।
भाभीकभी भि सेक्स सें मना नहि करतीथीं, मगर हमने एक् अनकहा नियमबना लिया थां कि हम् दो-तीन दिन मे केवल एक् बार हि सेक्स करेंगे। जबदोदिन तक सेक्स नहि होँ पाता, तोँ दोनों केँ जिस्म कि वो गर्मी, वो दिल कि बेचैनी हमारे सेक्स कों औऱ भि जोशीला, औऱ भि मदहोश बना देती।
मैंने उसी कॉलेज मे मास्टर्स कां एडमिशन लें लिया थां। अब मात्र पंद्रह दिनबचे थें कॉलेज शुरुआत होने मे। हमें अच्छी तरहपता थां कि अबजिस तरह हम् एक्-दूसरे कां संग बिना रुकावट केँ पारहे हें, वैसे हि संग औऱ ऐसा टाइमअब आसानी सें नहि मिलेगा।
एक् दिन दोपहर मे भाभी औऱ मे सोफे पऱ बैठे थें। मे धीरे-धीरे बैठाहुआ थां औऱ भाभी कां सिर मेरीगोद मे रखाहुआ थां। मैंने एक् हाथ उनके ड्रेस केँ गले मे डालरखा थां औऱ उनकीनरम, गरम बूब्स कों हल्के-हल्के मसलरहा थां, उँगलियों सें उनकी निप्पल्स कों धीरे धीरे घुमाते हुए।
भाभी: सुनो…कुछ करो नाँ, कहीं घूमने चलते हें। तुम्हारा कॉलेज शुरुआत होँ जाएगा, फिनपता नहि हमेंऐसे चैनभरे लम्हा कब मिलेंगे।
मे: हाँ भाभी, उस दिन केँ बाद हमने खुलकर संग वक़्त हि नहि बिताया। मेरा भि बहोत मन हैं कि अपनी प्यारी भाभी कों घुमाऊँ औऱ…
भाभी: औऱ क्याँ?
मे: औऱ रात-दिन प्रेम करूँ… आपकेहर एक् अंग सें खेलूँ… आपका पूरा जिस्म चूमलूँ।
भाभी थोड़ी शरमाईं। जौ मेराहाथ उनके बूब्स पऱ थां, उस पर्र उन्होंने अपनाहाथ रख दिया औऱ हल्के सें दबाया।
भाभी:हाँ, मुझेपता हैं, घऱ पऱ मे तुम्हें अधिक टाइम नहि दे पाती, मगर इसी खबरदारी केँ वजह सें हम् कभी पकड़े भि तौ नहि गए।
मे: भाभी, आप् हि कुछ आइडिया लगाइए नाँ, आप् बड़ी होशियार हौ।
भाभी: मस्का मत लगाओ, सोचती हूं… कुछ सोचती हूं।
पाँचदिन ऐसे हि गुजरगए। इन पाँच दिनों मे बेडरूम मे छुपकर केवलदो बार हम् जल्दबाजी मे सेक्स करपाए थें, मगर वो प्यास अभि भि नहि बुझरही थि। हररात नींद मे भि मे भाभी कों सपनों मे छूते रहता।
आज भाभी सुभह सें हि खुशदिख रहीथीं। उनकी आँखों मे एक् खासचमक थि, जैसेकोई बड़ी खुशखबरी छुपारखी होँ।
नाश्ते कि टेबल पऱ हम् सभी बैठे थें।
भाभी:अजी सुनो, मेरी सहेली कि विवाह हैं, वही जौ दूसरे शहर शिफ्ट हौ गई थि। मे सोचरही थि तीनदिन केँ लिएजा करआऊँ।
भैया: (ग़ुस्सेसे, बड़ी आवाज़ मे) अरे, आज हि मैंने बताया नं, वर्कशॉप पऱ ऑडिट कां काम शुरुआत हौ गय़ा हैं, मे केसे आँ सकता हूं?
भाभी डरकरचुप हौ गयीँ,। फिन धीरेसे उन्होंने कहा।
भाभी: (मेरीओर इशारा करतेहुए.) इसकी छुट्टियाँ अभि कुछदिन बची हें। क्यूं न् हम् दोनों जाकरआएँ?
भैया: ठीक हैं, कुछ भि करो, मुझे परेशान मतकरो। वैसे भि घऱ पर्र ये खाली बैठा हैं।
मे (जान-बूझकर): भैया, मुझे नहि जानां। वहा मेरीकोई जान-पहचान कां नहि होगा, मे बहोत बोर हौ जाऊँगा।
भाभी:अरे नहि, क्यूं बोर होंगे? मे किसीसे तुम्हारी दोस्ती करवा दूँगी।
भैया: ठीक हैं, तयरहा। तुम् दोनों जाकरआओ।
मे नाराज होने कां नाटककर रहा थां औऱ भैया मुझे “समझदार बनो” वालीनजर सें देखरहे थें। उन्हें क्याँ पता कि मेरीअसल खुशीइसी बात कि थि…
अगलेदिन निकलने कां तय हौ गय़ा। मैंने बड़ेजतन सें भैया कों मनाया औऱ गाड़ी लेने कि अनुमति लेँ ली। भाभी भि बेहदखुश थीं कि मेरेसंग लंबीरोड ट्रिप होगी, बस हम् दोनों हि होंगे, घंटों संग।
आज भाभी औऱ मेनेकोई खासबात नहि कि, बस सुभह जल्द निकलने कां तय करके अपने-अपने तैयारी मे लगगए।
सुभह मे ठीक 6 बजे सजधजकर खड़ा थां। भाभी भि बस पाँच मिनटबाद बैग लेकर बेडरूम सें निकलीं। भाभी नें एक् लंबी, ढीली मैक्सी पहनी हुईँ थि जिसमें बड़े-बड़े स्लीव्स थें। मेरादिल एकदम खट्टा हौ गय़ा। मे तोँ सोचरहा थां कि आज एक् सेक्सी लड़की मेरी हमसफर बनेगी, वो लड़की जिसकी हरअदा मुझे पागलकर देती हैं, औऱ ये क्याँ? एक् बोरिंग मैक्सी?
खैर, भैया औऱ मां कों विदा करके हमनेसफर शुरुआत कर दिया।
मे नाराज़ दिखरहा थां औऱ भाभी कों अच्छी तरहसमझ आँ रहा थां। वो वाहन मे आहिस्ता सेटल होँ रहीथीं। उनकी वो वाहन वाली हरकतें शुरुआत हौ गई थीं, सीट कों सही एंगल पऱ सेट करना, टिश्यू सें लिपस्टिक ठीक करना, फोन पऱ रोमांटिक गाने ढूँढना। मे कोईबात नहि कररहा थां, मेरा पूरा ध्यान ड्राइविंग पऱ थां।
कुछ 20 किलोमीटर बाद हमनेशहर पूरीतरह छोड़ दिया औऱ एक्सप्रेसवे पऱ सफर शुरुआत हौ गय़ा। मार्ग वैसे भि खाली थां। हमनेकुछ हि मिनटों मे टोल भि क्रॉस कर लिया।
भाभी:आज बड़ा उखड़ा हुआमूड हैं जनाब कां। क्याँ हुआ? नींद पूरी नहि हुइ क्याँ?
मे: नहि तौ, ऐसेकुछ नहि।
भाभी: नं कोई तारीफ, नं वोँ नजर फेरना… भला क्याँ गलती हौ गई मुझसे?
मे: ऐसेकुछ नहि भाभी।
भाभी नें अपनीसीट कों थोडा पीछे खींच लिया औऱ आगे कि तरफझुक गईं। अब मेरी नजरें रास्ते औऱ भाभी केँ बीचझूल रहीथीं। भाभी नें नज़रे मेरे नजरो सें मिलाई औऱ, आगे झुककर मैक्सी कों नीचे सें दोनों हाथों सें पकड़ा, एक् झटके केँ संगउसे ऊपर खींचा औऱ पूरी मैक्सी उतारकर पीछे कि सीट पर्र फेंक दि।
मैंने अनजाने मे हि व्हीकल कि स्पीड धीमीकर दि औऱ भाभी कों देखता रह गय़ा।
सामने जौ नजारा थां, वो बेहद खतरनाक औऱ लुभावना थां। भाभी नें मात्र एक् स्लीवलेस, कसी हुइ शर्ट पहनी थि, जिसके ऊपर केँ चारबटन पहले सें हि खुलेहुए थें। उस खुलेगले सें उनकी बिना ब्रा वाली, भारी औऱ गोल-गोल बूब्स झाँकरहे थें, नरम, गोरी, औऱ भरेहुए बूब्स हर साँस केँ संगहिल रहे थें। नीचे उन्होंने एक् छोटा शॉर्ट पहनाहुआ थां, जोँ उनकी मोटी, गोरी औऱ गोल जांघों कों कसकर पकड़े हुए थां। शॉर्ट इतना छोटा औऱ टाइट थां कि उनकी दोनों जांघें पूरीतरह नंगीदिख रहीथीं, चिकनी, मोटी जांघें जौ एक्-दूसरे कों दबाती हुई, सेक्सी दरारबना रहीथीं। उनका पूरा शरीरआज औऱ भि अधिक आकर्षक लगरहा थां, पतलीकमर, गोल गांड़, औऱ वो चमकती हुईँ गोरी त्वचा जोँ सुभह कि धूप मे औऱ भि अधिकचमक रही थि। भाभी कि हुस्न आज मानो औऱ भि निखर गई थि, नैन-नक्श इतने नाजुक, होंठ इतने गुलाबी, आँखें इतनी शरारती कि कोई भि देख लेँ तोँ साँसथम जाए।
भाभी मेरेपास आई औऱ, गाल पे चूम लिया, फिन कान मे फुसफुसाई।
भाभी:यह रोड ट्रिप वेस्ट थोड़े हि जाने देती।
उन्होंने एक् हाथ सें मेरे लन्ड कों दबाया औऱ वापससीट पऱ बैठ गई।
मे एकदमखुश हौ गय़ा। मुझेपता थां, सफर एकदम मस्त होने वाला हैं।
भाभीअब पूरीतरह धीरे-धीरे सीट पर्र फैलकर बैठ गई थीं। उनकीपीठ सीट केँ पीछे टिकी हुई थि औऱ दोनों पांव थोड़े फैलाकर उन्होंने स्वयं कों औऱ भि सहजबना लिया थां। उन्होंने जान-बूझकर अपनी स्लीवलेस शर्ट कों नीचेकी तरफ खींच लिया थां, जिससे उनके भारी, गोल नर्म बूब्स अब पूरीतरह सें शर्ट केँ खुलेगले सें बाहर् झाँकरहे थें।
Image
दोनों बड़े-बड़े, गोरे बूब्ज़ बिना किसी ब्रा केँ आज़ाद थें, उनकी गुलाबी निप्पल्स सख्त होकरऊपर उठी हुइ थीं औऱ हर साँस केँ संग मंद-मंद हिलरही थीं। इतनीनरम, इतनीभरी हुईँ कि देखते हि मुंह मे पानी आँ जाए। मे उन्हें देखरहा थां, वोँ उन्हें देखते हुए मुझेदेख रही थि। बिनाकुछ कहे हम् एक् दूसरे कों आगलगा रहे थें।
भाभी नें शरारत भरी मुस्कान केँ संग अपना एक् हाथ मेरे बालों मे डाल दिया। उँगलियाँ आहिस्ता मेरेसिर कों सहलाने लगीं, फिन गर्दन पऱ उतरआईं औऱ वहा नाखूनों सें हल्के-हल्के खरोंचने लगीं। उनका दूसरा हाथ मेरी दाईं जाँघ पर्र आकररुक गय़ा, पहले तौ मात्र सहलाया, फिन आरामसे ऊपर कि तरफ सरकने लगा, मेरे शॉर्ट केँ अंदर तक उँगलियाँ घुसेड़ते हुए।
भाभी: “क्याँ हुआ…अब भि नाराज़ हैं?”
उन्होंने मीठी-मीठी आवाज़ मे पूछा, मगर उनकी आँखों मे शैतानी चमक थि। उनकी उँगलियाँ मेरी जाँघ केँ अंदरूनी हिस्से कों छूरही थि, मेरा लन्ड औऱ भि सख्त हौ गय़ा। मे मुश्किल सें ड्राइविंग संभाल पारहा थां, वाहन थोड़ी-थोड़ी लहरारही थि।
तभी भाभी नें झुककर मेरे शॉर्ट कां इलास्टिक पकड़ लिया औऱ एक् झटके मे उसे नीचे खींच दिया। मेरा लन्ड, जोँ पहले सें हि पूरा खड़ा औऱ तनाहुआ थां, लहराता हुआ बाहर् आँ गय़ा, मोटा, लंबा औऱ सिर पऱ चमकता हुआ। भाभीआगे झुकी, मेने गियर केँ ऊपर कां हाथहवा मे उठाया औऱ भाभी केँ पीठ पऱ रखकर गियर वापसपकड़ लिया, भाभी नें लार टपकती जीभ सें एक् बार लन्ड कों चाटा, फिन बिनाकोई बातकहे अपनागरम, नम मुंह खोलकर पूरा लन्ड मुंह मे लेँ लिया।
“आह्ह्ह…” मैंने अनजाने मे हि साँस छोड़ी। भाभी कि गर्मी, उनकीजीभ कां चक्कर, उनके होंठों कां कसाव, सभी कुछ एक् संग मुझे पागलकर रहा थां। वो ऊपर-नीचे सिर हिलाने लगीं, कभी पूरा लन्ड गले तक चूसतीं, कभी केवल सिरे कों जीभ सें घुमाकर चाटती, कभी दाँतों सें हल्के सें काटतीं। उनकीलार मेरे लन्ड पर्र बहरही थि, हर चूसने केँ संग “चुप-चुप” कि आवाज़ वाहन मे भर गई थि।
मे ड्राइविंग करतेहुए एक् हाथ सें स्टीयरिंग थामे थां, दूसरा हाथ भाभी कि पीठ पर्र रखकर उन्हें सहारा देरहा थां औऱ गियर संभलरहा थां। वाहनअब धीरे-धीरे धीरे-धीरे स्लो हौ गई थि औऱ 50-60 कि स्पीड पर्र चलरही थि, मेरी सारी इंद्रियाँ भाभी केँ मुंह मे थीं। हर बारजब भाभीगले केँ गहराई तक लन्ड लेँ जातीं, मेरा पूरा शरीर झनझना जाता। बड़ा मुश्किल होँ रहा थां वाहन कों कंट्रोल करना।
भाभी नें मुंह सें लन्ड निकालकर ऊपर देखा, होंठों पर्र लार कि लकीरचमक रही थि।
भाभी:“मजा आँ रहा हैं नां… ड्राइव करतेहुए अपना लन्ड चुसवाने मे?”
भाभी नें फिन सें पूरा लन्ड मुंह मे भर लिया औऱ तेज़ी सें चूसने लगीं। उनकी बूब्स मेरी जाँघों पर्र दबरहे थें, निप्पल्स खड़े होकर रगड़खा रहे थें। मुझेअब झड़ना थां, इतना सेक्सी एहसास मेरे कण्ट्रोल सें बहार हौ रहा थां, मे एक् हाथ सें उनकेबाल पकड़कर उनकासिर हल्के सें दबारहा थां, दूसरे हाथ सें कार संभालते हुए बार-बार साँसें फूलरही थीं। उत्तेजना इतनी थि कि लगरहा थां जैसेकार मार्ग पऱ नहि, मेरे जिस्म पऱ दौड़रही हौ। भाभी केँ हर एक् हरकत मे, शरारत औऱ भूखसभी एक् संग थां, औऱ मे बसयही चाहता थां कि मे चरम पऱ पहुंच जाऊ।
तभी मेरी साँसें पूरीतरह उफान पऱ थीं। लन्ड फटने कों रेडी थां, नसेंतनी हुई थीं, औऱ पूरा शरीर झनझना रहा थां। मैंने बड़े मुश्किल सें स्टीयरिंग कों एक् हाथ सें थामा, एक्सीलेटर सें पेर हटाया औऱ वाहन कों मार्ग केँ किनारे पर्र रोक दिया। ब्रेक लगते हि व्हीकल रुक गई।
भाभी नें भि समझ लिया। उन्होंने अंतिम बार पूरा लन्ड गले तक लेँ लिया, जीभ सें जोरदार चक्कर लगाया औऱ फिन तेज़-तेज़ चूसते हुए मुझेचरम पर्र पहुंचा दिया। “आआह्ह्ह… भाभी…!” मेरे मुँह सें बसयही निकला। गरम-गरम स्खलन उनके मुंह मे फूट पड़ा। भाभी नें कुछ भि बर्बाद नहि होने दिया, हर बूँद कों चूसकर पी लिया, आँखें बंदकिए। फिन धीरे-धीरे सें लन्ड कों मुंह सें बाहर् निकाला, होंठों पर्र चमकती लार औऱ मेरेरस कि एक् पतली लकीर थि।
उन्होंने जल्दी ऊपर उठकर मेरे गालों कों दोनों हाथों मे थामा औऱ पूरे जिस्म कों मेरेऊपर लातेहुए, एक् गहरा, जुनूनी किस दिया। उनकीजीभ मेरीजीभ सें उलझ गई, मेरेरस कां स्वाद दोनों केँ मुंह मे घुल-मिल गय़ा। किस इतना गहरा औऱ लंबा थां कि लगरहा थां जैसे वक़्त रुक गय़ा हौ। हम् एक् दूसरे केँ जीभ औऱ होठो कों चूसरहे थें। उनकी भारी बूब्स मेरे सीने सें सटीहुए थें, निप्पल्स भि सख्त औऱ गर्म होँ गए थें।
किस समाप्त होने केँ बाद भाभी नें मेरी आँखों मे देखा औऱ मुस्कुराते हुए बोलीं,
भाभी:“अब तोँ तीनदिन पूरे हमारे हें नां… मात्र तुँ औऱ मे… कोई भैया, कोई मम्मी, कोई टेंशन नहि। ”
मे हँसते हुए बोला,
मे: “हा भाभी आप् जरासबर रखो, आप् स्वयं कों समझा लीजिए भाभी, केँ तीनदिन हैं औऱ … सुभह-सुभह इतना खतरनाक ब्लोजॉब दे दिया…। वैसे मेरीकोई शिकायत नहि हैं। ”
भाभी शरमागईं, मगर उनकी आँखों मे वही शैतानी चमक थि। उन्होंने थोडा सम्भलकर सीट पऱ सीधेबैठ गईं। अपने शर्ट केँ दो-तीन बटनबंद किएफिन भि बूब्स कि गहरीखाई साफ़ झाँकरही थि, औऱ बाल सवारने लगी।
भाभी: “होटल बुकिंग मैंने कलरात हि करली थि, बेस्ट रूम लिया हैं… बालकनी वाला, किंग साइज़ बेड, जकुझी… औऱ आगेतीन दिन कां पूरा प्लान भि बना लिया। मगर साम कों हम् दोनों अकेले घूमने निकलेंगे। दूसरे दिनफुल डे आउटिंग, घूमना लञ्च… औऱ रात कों…”
बातें करते-करते हम् दोनों हँसते रहे, कभी मे उनकी जाँघ पऱ हाथ फेरता, कभी वो मेरे बालों मे उँगलियाँ फिरातीं। गाड़ीने फिन रफ़्तार पकड़ली थि, औऱ अगलेचार घंटे कां सफर हमनेऐसे हि प्रेम-भरी बातों, हँसी-मज़ाक औऱ बीच-बीच मे छेड़छाड़ मे पूराकर दिया। रास्ते मे कईबार मे उनकी बूब्स पऱ हाथरख लेता, वो मेरी जाँघ सहलातीं… मगरअब हम् दोनों कों पता थां कि असलीमजा होटल पहुँचने केँ बाद शुरुआत होगा।
आखिरकार साम ढलते-ढलते हम् होटल पहुँच गए
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 14
हम् होटल पहुँचते हि वाहन पार्क कर दि। मैंने बैग निकाले औऱ भाभी कां हाथ थामकर लॉबी मे घुसा। रिसेप्शन पऱ चेक-इन होते वक़्त भि भाभी मेरे कंधे सें सटीरही, जैसे पूरी दुनिया कों बतारही हौ कि यह मेरा व्यक्ति हैं। लिफ्ट मे जाते वक़्त मैंने उनकेकान मे फुसफुसाया, “रूम नंबर 303, बालकनी वाला, जैसा तुमने बताया। ”
कमरे कां द्वार (दरवाज़ा) खुला तोँ हम् दोनों एक् संगहँस पड़े। किंग साइज़ बेड पर्र सफ़ेद बेडशीट एकदम अच्छेसे लगायी हुइ थि, जैसे आमंत्रण देरही हौ, आओ मुझे ख़राबकरो, औऱ हल्की लाइट्स नें पूरारूम रोमांटिक बना दिया थां। भाभी नें जूते उतारे, बैगपटक दिया औऱ बेड पर्र लेटगईं। मैंने एसीऑन किया औऱ उनकेपास बैठ गय़ा।
मैंने उनके बालों मे उँगलियाँ फिराते हुए पूछा, “भाभी… वेडिंग कब हैं? कल सुभह याँ साम कों?”
भाभी नें मेरी तरफ़ देखा, आँखों मे वही शैतानी चमक। फिन अचानक हँस पड़ीं।
“अरे पागल… वेडिंग तोँ हैं हि नहि!”
मे चौंक गय़ा। “मतलब?”
उन्होंने मेरी छाती पऱ हाथ रखकर धीरे-धीरे सें बोला, “सभी झूठ थां। कोई वेडिंग नहि, कोई रिश्तेदार नहि। बस तुझेही घऱ सें निकालकर तीनदिन केँ लिए अपनेसंग लाने कां बहाने थां। ”
मे हैरान-खुश दोनों थां। मगर भाभी अचानक चुप हौ गईं। उनकी आँखें बड़ी होँ गईं, जैसेकोई भूलयाद आँ गई हौ।
“अरे…ओह नो!” उन्होंने उठकर बैठते हुएकहा, “फोटोज़! मां कों तौ मैंने बोल दिया कि वेडिंग कि तस्वीरें घसीटकर लाऊँगी। उन्होंने बोला थां, ‘अच्छे-खासे फोटो भेजना, हम् सबको दिखाएंगे। ’ अब…अब क्याँ करूँ?फेक वेडिंग कि फोटो कहां सें लाऊँ?अगर पताचल गय़ा तोँ…”
उनकी आवाज़ काँपने लगी। भाभी कां चेहरा फिक्का पड़ गय़ा। उन्होंने निचला होंठकाट लिया, भौंहें सिकुड़ गईं, आँखें थोड़ी सि नम होँ गईं। हाथ आपस मे मलनेलगी। वोँ बेड पऱ घुटनों पर्र बैठकर इधर-उधर देखरही थीं, जैसेकोई छोटी बच्ची हौ जौ विद्यालय सें झूठ बोलकर आई होँ औऱ अब पकड़ी जाने वाली हौ। उनके बड़े-बड़े आँखों मे डरछा गय़ा, वोँ हल्का काँपता निचला होंठ, औऱ वोँ उलझी हुईँ भौंहें… ईश्वर! कितनी प्यारी लगरही थीं। मेरी सेक्सी भाभी, जौ अभि तक मुझे छेड़रही थीं, अचानक इतनी मासूम, इतनी बेबस औऱ इतनी क्यूट दिखरही थीं कि मेरादिल पिघल गय़ा।
उनकी चिंता देखकर मुझमें भि चिंता हौ गई। जैसे उनकी टेंशन मेरे सीने मे उतर गई होँ। मैंने सोचा, अरे दोस्त, अगर इनकीवजह सें कोई प्रॉब्लम हौ गई तौ? मां, भैय्या पूछेंगे तोँ क्याँ जवाब देंगे? पर्र सबसे अधिक दर्दयह थां कि मेरी भाभी, मेरीजान, इतनी परेशान हौ रही हैं। मुझे औऱ भि ज्यादा चिंता होनेलगी।
मे जल्दी उनकेपास सरक गय़ा। दोनों हाथों सें उनका चेहरा अपने हाथों मे लिया, अपनी हथेलियों सें उनकी गालों कि नरमाई महसूस कि।
“चिंता मतकरो भाभी…” मैंने धीरे-धीरे सें उनकेगाल पऱ एक् प्रेम भराकिस किया। “हम् कुछ नं कुछसोच लेंगे। फोटोज़ केँ लिएकल हि कोई अच्छा फोटोग्राफ़र ढूँढ लेंगे। याँ फिन… हम् स्वयं हि कुछफेक बैकग्राउंड मे फोटो खींच लेंगे। तुम् बस मुस्कुराओ। ”
इतना कहकर, मेने, उन्हें सिनेसे लगा लिया, जैसे हि मैंने उन्हें अपने सीने सें लगा लिया, भाभी पूरीतरह पिघलगईं। उनकी सारी टेंशन, सारी चिंता एक् लम्हा मे गायब। उनका सख्त जिस्म अबनरम होकर मेरे सीने सें चिपक गय़ा। उन्होंने अपनी बाहें मेरीकमर केँ चारों ओर लपेटलीं, चेहरा मेरी छाती मे छुपा लिया। उनकी साँसें मेरी शर्ट पर्र गरम-गरम पड़रही थीं। मैंने उनके बालों मे हाथ फेरा तोँ उन्होंने औऱ भि ज़ोर सें मुझे जकड़ लिया, जैसेडर केँ बाद सुरक्षित स्थान मिल गई हौ।
“तुम् होँ नां मेरेसंग…” उन्होंने बहोत धीमी, बहोत प्यारी आवाज़ मे कहा, “तोँ मुझेकोई डर नहि। ”
उनकी आँखें बंदथीं। होंठों पऱ हल्की मुस्कान आँ गई थि। चिंता कां वोँ प्यारा-सां भावअब पूरीतरह गायब। अब सिर्फ़ प्रेम थां… औऱ वोँ गर्मी जौ उनकेबदन सें मेरे जिस्म मे घुलरही थि।
मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया, आँखों मे आँखें डालीं।
“अबबसतीन दिन तुम् मेरी होँ, भाभी… वेडिंग हौ याँ नं होँ, फोटो होँ याँ नं हौ… मेरामजा तोँ तुम्हारे संग हि पूरा होगा। ”
औऱ फिन मैंने उनके होंठों पर्र धीरे-धीरे सें किस किया… वोँ पिघलती जारही थीं, मेरी बाहों मे बिल्कुल घुलकर।
भाभी नें मेरेगाल पऱ एक् हल्का-सां किस किया औऱ बोलीं, “मे फ्रेश होकरआती हूं… तुम् थोडा रेस्ट करलो। ”
उन्होंने बालों मे क्लिप लगाई औऱ बाथरूम कि तरफ़चली गईं। द्वार (दरवाज़ा) बंद होते हि मैंने मोबाइल निकाला। अब असली चुनौती शुरुआत थि, मां कों दिखाने केँ लिएकुछ ऐसा चाहिए थां जोँ वेडिंग जैसालगे।
मे बेड पऱ लेट गय़ा औऱ इंस्टाग्राम, पिंटरेस्ट, गूगल इमेजेस सभी स्थान सर्च करनेलगा। “Indian bride red lehenga candid photos”, “traditional Indian wedding bride lehenga poses”, “Indian bridal reception photos” — हर कीवर्ड ट्राई किया।
पता नहि कितना समय गुजरा। स्क्रॉल करते-करते आँखें दुखने लगीं। मगर आखिरकार 20-25 ऐसी फोटोज़ मिलगईं, जिनमें दुल्हन कि फिगर, बॉडी लैंग्वेज, कर्व्स, कमर कि मटक, सभी कुछ भाभी कि सहेली सें करीब-करीब मैचकर रहा थां। भाभी नें गाड़ी मे सहेली केँ बारेमें बताया थां, फोटो भि दिखाई थि, मगरये नहि बताया केँ विवाह हैं हि नहि…। लंबेबाल, गोरी स्किन, बड़े-बड़े आँखें, पतलीकमर, औऱ वही सेक्सी स्माइल। एक् मे दुल्हन लाल लहंगे मे हँसरही थि, दूसरी मे साड़ी मे पोज़दे रही थि, तीसरी मे मेहंदी लगी हुईंहाथ दिखारही थि। सारे फोटोज ऐसी थि जिसमें बैकग्राउंड मे हम् दोनों ऐड हौ सके, चेहरा थोडा बहोत भाभी केँ सहेली जैसा थां, बस थोडा अलग एंगल याँ लाइटिंग। बाकीसभी वैसा हि।
मैंने उन सारी इमेजेस कों एक् फोल्डर मे सेवकर लिया। प्लान थां केँ हम् इनमें एडिटिंग करेंगे। कुछ फोटोज मे दुल्हन केँ चेहरे कि स्थान भाभी कां चेहरा स्वैप कर देंगे, याँ फिन हम् दोनों केँ फोटोइन बैकग्राउंड मे ऐडकर देंगे। मां कों लगेगा कि यह भाभी केँ सहेली कि वेडिंग हें।
तभी बाथरूम कां द्वार (दरवाज़ा) खुला।
भाभी टॉवल लपेटे बाहर् आईं। टॉवल उनके बड़े-बड़े बूब्स पर्र मुश्किल सें बंधा थां, ऊपर सें गीले बालों कि कुछ लटें चिपकी हुईंथीं। कंधे नंगे, जाँघें आधीदिख रहीथीं। मगर चेहरा अभि भि चिंतित थां। भौंहें सिकुड़ी हुईं, होंठ थोड़े सें दबेहुए, आँखों मे वोँ डर अभि भि बाकी थां, जैसे अभि भि सोचरही हों कि मम्मी कों क्याँ जवाब देंगी। वोँ धीरेसे मेरेपास आईं औऱ बेड केँ किनारे पर्र बैठगईं।
“कुछहुआ?” उनकी आवाज़ मे हल्की कंपकंपी थि।
मैंने मोबाइल उठाया औऱ स्क्रीन उनकी तरफ़ कि।
“देखो भाभी… मैंने ढूँढ लिया। 20-25 परफेक्ट फोटोज़। दुल्हन कि बॉडी, स्टाइल, सभीकुछ तुम्हारी सहेली सें मिलता-जुलता हैं। चेहरा वैसा हि हैं। कल हम् इनमें एडिटिंग कर लेंगे, तुम्हारा चेहरा इन मे सें कुछ फोटोज पऱ डाल देंगे, याँ हम् दोनों केँ फोटोइन बैकग्राउंड मे ऐडकर देंगे। बस हमेंलाए हुए कपड़ों मे कुछ पोज़ वाली फोटोज़ निकालनी होंगी, लहंगे जैसाकुछ पहनकर, याँ साड़ी मे। मां कों भेज देंगे, बस। ”
एक् लम्हा ख़ामोशी रही।
फिन भाभी कि आँखें चमक उठीं।
उनके चेहरे पऱ पहले तोँ हैरानी आई, फिन आहिस्ता वोँ मुस्कुराहट फैलने लगी, वोँ प्यारी, बच्चे जैसी, निश्छल मुस्कुराहट जौ दिल कों छू जाती हैं। आँखें चमकरही थीं, गाल लाल होँ गए। उन्होंने दोनों हाथ मुंह पऱ रखलिए, जैसे यकीन नहि होँ रहा होँ।
“सच मे? मेरे सहेली जैसे हि लगरही हें? ओह माँ गॉड… तुमने कर लिया!”
औऱ अगले हि लम्हा वोँ बच्ची कि तरहउछल पड़ीं। बेड पऱ उछलती हुईं, खुशी सें चीख़ती हुईं — “येस!येस! तुम् बेस्ट होँ! अब मां कों कोईशक नहि होगा!”
उछलते-उछलते टॉवल ढीलापड़ गय़ा। एक् झटके मे टॉवल सरककर पूरीतरह गिर गय़ा।
मेरी साँसरुक गई।
उनके नंगे, कसे हुए, गीलेपन सें चमकते नरम बूब्स मेरे सामने थें। गुलाबी निप्पल्स तनकर खड़े, बड़े-बड़े गोल, हल्के सें हिलरहे थें। पतलीकमर, गहरी नाभि, नीचे कि तरफ़ वोँ रसीले, गोरी जाँघें जौ आपस मे सटी हुईंथीं। पूरा शरीर अभि भि नहाने केँ बादगरम औऱ नम थां, पानी कि बूँदें चमकरही थीं।
भाभी कों पताचला कि टॉवलगिर गय़ा, मगर वोँ रुकी नहि। बल्कि वोँ औऱ तेज़ी सें मेरी तरफ़आईं औऱ मेरेगोद मे आकरबैठ गईं। दोनों पेर मेरीकमर केँ दोनों तरफ़, चेहरा मेरे चेहरे केँ ठीक सामने।
उनकी आँखें… हाय।
पहले तौ वोँ आँखे प्रेम सें भरीथीं, गहरी, नरम, कृतज्ञता सें चमकती हुईं, जैसेकह रहीहों “तुमने मुझेफिन सें बचा लिया, मेरीजान”। फिन आहिस्ता वोँ नज़रबदल गई। अब वोँ मादक थि, पुतलियाँ फैलगईं, आँखों मे वोँ शैतानी, कामुक चमकलौट आई। होंठ हल्के सें खुले, साँसें तेज़ औऱ गरम। वोँ मेरी आँखों मे ऐसेदेख रहीथीं जैसे मुझे पूरीतरह निगल जानां चाहती हों, जैसेकह रहीहों “अबबस तुम्हारा बदला लूँगी… प्रेम सें”।
फिन उन्होंने मेरे होंठों पर्र अपने होंठरख दिए।
यहकिस सिर्फ़ किस नहि थि, यह एक् जुनून थि, एक् भूख थि।
उन्होंने मेरी निचली होंठ कों पहले चूसा, धीरे-धीरे सें काटा, फिन ऊपरी कों। जीभ अंदर डाली औऱ मेरीजीभ कों पकड़कर चूसने लगीं। गहरा, गीला, लंबाकिस। उनकीजीभ मेरीजीभ सें लड़रही थि, चाटरही थि, चूसरही थि। गले सें निकलती कराहें मेरे मुंह मे घुलरही थीं। उनकेहाथ मेरे बालों मे थें, मेरेसिर कों पीछे घसीटकर औऱ गहराई सें किसकर रहीथीं।
मेरेहाथ उनके नंगे जिस्म पऱ फिरने लगे। पहले कंधों पर्र, वोँ नरम, गीली त्वचा। फिनपीठ पऱ नीचे होतेहुए कमर कों जकड़ा। फिनऊपर, दोनों हाथों सें उनके बूब्स थामलिए। नरम, भारी, गरम। अंगूठों सें निप्पल्स कों रगड़ा तोँ भाभी कि साँसें रुकगईं। वोँ मेरे मुंह मे हि कराह उठीं — “म्म्म्ह्ह्ह…”
उनके बूब्स मेरे हाथों मे दबरहे थें, उभाररहे थें। मैंने हल्के सें मसलना शुरुआत किया, निप्पल्स कों पिंच किया, घुमाया। भाभी मेरेगोद मे औऱ जमकरबैठ गईं, उनकी जाँघें मेरीकमर सें सटगईं, वोँ हल्के सें स्वयं कों रगड़रही थीं। वोँ मेरे होंठों कों छोड़कर मेरेगले पऱ किस करने लगीं, काटने लगीं, चाटने लगीं।
“तुम्हारे बिना… मे पागल होँ जाती…” उन्होंने मेरेकान मे फुसफुसाया, आवाज़ भारी, कामुक, साँसें गरम होँ गयीँ, थि।
मैंने उनके बूब्स कों औऱ ज़ोर सें दबाया, एक् हाथ नीचे उनकीकमर सें होतेहुए गांड पऱ लेँ गय़ा। वोँ गोल, रसीले, सख्त गांड क्याँ एहसास थां। भाभी मेरे सीने सें चिपककर औऱ भि गहराकिस करने लगीं।
किस इतना लंबाचला कि हम् दोनों कि साँसें फूलगईं। आखिरकार जबअलग हुए तौ उनकी आँखें लाल, होंठ हलकेसूझ करलाल हौ गए थें, जिस्म पसीने औऱ गर्मी सें गुलाबी लाल हौ रहा थां।
“अब…तीन दिन…” उन्होंने मेरे होंठों कों फिन सें छूतेहुए कहा, “…बस तुम् औऱ मे। कोई चिंता नहि। बस मे औऱ तुम्। ”
औऱ फिन वोँ फिन सें मेरे होंठों पर्र झपट पड़ीं…
हम् दोनों थक चुके थें। हवस कि आग अभि भि सुलगरही थि, मगरबदन अबसंग नहि देरहा थां। चूमते-चूमते, एक्-दूसरे कों जकड़े हुए, हाथों सें प्रेम करतेहुए हम् बेड पऱ लेटगए। मेरेहाथ उनकीकमर पऱ, उनकेहाथ मेरीपीठ पऱ। साँसें तेज़ थि, मगर आँखें भारी। पता हि नहि चला कि कब नींद नें हमें अपनीगोद मे लें लिया।
सुभह हुइ।
कमरे मे अभि भि अंधेरा छाया थां, खिड़की पर्र पर्दे बंद थें, सिर्फ़ बालकनी केँ दरवाज़े सें हल्की-सि सुभह कि रोशनी चुपके सें अंदर आँ रही थि। सूरज उगने केँ पहले कि वोँ रोशनी इतनीकम थि कि सभीकुछ धुंधला-सां, सपनों जैसालग रहा थां।
मैंने आँखें खोलीं। भाभीबेड पर्र नहि थीं।
नज़र उठाई तौ बालकनी मे उन्हें देखा।
बिल्कुल नंगी।
वोँ बालकनी कि रेलिंग पऱ हाथ रखकर खड़ीथीं। पीठ मेरी तरफ़, मगर पिछेसे उनका पूरा शरीर साफ़दिख रहा थां। हल्की रोशनी मे उनका सफ़ेद शरीर चाँदी-सां चमकरहा थां। लंबेबाल खुलेहुए, पीठ पऱ लहराते हुएहुए। नाजुक कंधे, पीठ कि गहरी लकीर नीचे तक जाती हुईँ। कमर इतनी पतली कि हाथों सें आसानी सें जकड़ी जा सकती थि। फिन वोँ गोल, भारी गांड, हल्के सें हिलते हुए, जैसेकोई मूर्ति हौ जोँ साँस लें रही हौ। जाँघें लंबी, रसीले, आपस मे सटी हुईं। पूरा शरीर बेफिक्र, बिंदास। जैसे उन्हें कोई परवाह हि नहि कि बाहर् कोईदेख लेगा याँ नहि। बल्कि शायद वोँ चाहती थीं कि दुनिया देखे, यह उनका जिस्म, यह उनकी आज़ादी।
मे चुपचाप पलंग सें उठा। सारे कपड़े उतारदिए। मेरा लन्ड पहले सें हि सख्त थां, हवस अभि भि बाकी थि।
आरामसे उनके पीछे जाकर खड़ा होँ गय़ा।
अपना लन्ड उनके गांड केँ बीच दबाया। गरम, रसीले मांस मे दबाव पड़ते हि भाभी नें हल्की सि हल्की चीखली। मैंने एक् हाथ सें उनकीकमर कों जकड़ा, उन्हें अपनी तरफ़ खींचा। उनका जिस्म मेरे सीने सें सट गय़ा। मेरी छाती उनकीपीठ पऱ, मेरे होंठ उनके कंधे पऱ।
हल्की रोशनी मे उनका जिस्म औऱ भि सुंदर लगरहा थां।
उनके बूब्स, बड़े, गोल, भारी थें। हल्की रोशनी मे उनकी त्वचा पर्र हल्की चमक थि, जैसे मोती जड़ा हौ। निप्पल्स गुलाबी, तनकर खड़े, ठंडीहवा सें औऱ सख्त हौ गए थें। कमर कि पतली लकीर नीचे सें ऊपर उठती हुई, फिन वोँ गोल गांड जोँ मेरे लन्ड पर्र दबावडाल रही थि। उनकी जाँघें मेरी जाँघों सें सटी हुईं थि, हमारी गर्मी एक्-दूसरे मे घुलरही थि।
मैंने उनके कंधे पर्र धीरे-धीरे सें किस किया।
भाभी नें मेरे दूसरा हाथ पकड़ा। मेरी हथेली कों उठाकर अपने बूब्स पर्र रख दिया। उनकी उँगलियाँ मेरी उँगलियों पर्र आगयी। फिन उन्होंने अपनाहाथ ऊपर उठाया, बालों मे डाल दिया, जैसे स्वयं कों औऱ खोलरही हों।
मैंने उनके बूब्स कों हल्के सें मसलना शुरुआत किया। नरम, गरम, भारी। निप्पल्स कों छेड़ते हि भाभी कां पूरा जिस्म काँपउठा। उन्होंने सिर पीछे करके मेरे कंधे पऱ टिका दिया, आँखें बंद, होंठ हल्के सें खुले।
भाभी: “उम्म्म…”
उनकी आवाज़ सुभह कि ख़ामोशी मे औऱ भि कामुक लगरही थि।
मैंने उनके गांड़ पर्र अपना लन्ड औऱ गहराई सें दबाया। आहिस्ता हिलने लगा। उनका शरीर मेरेसंग ताल मिलाकर हिलरहा थां। हल्की रोशनी मे उनकी त्वचा पऱ हलके पसीने कि बूँदें चमकरही थीं। बूब्स मेरे हाथों मे दब-दबकर उभररहे थें। कमर मेरी हथेली मे स्लिम होँ गई थि।
भाभी बिल्कुल बेफिक्र थीं। बालकनी मे खड़ी, नंगी, मेरे सीने सें सटी हुईं। जैसे दुनिया कि कोई परवाह नहि। बस हम् दोनों, यह सुभह, यह हवस, औऱ यह प्रेम।
मैंने उनकेकान मे फुसफुसाया, “भाभी…आज सें मस्ती कां काउंट डाउन शुरुआत… बस तुम् औऱ मे…”
उन्होंने मेरी तरफ़ मुड़कर देखा। आँखों मे वही शैतानी चमक।
भाभी: “तौ शुरुआत करो नाँ…”
औऱ फिन उन्होंने मेरे होंठों कों चूम लिया…
मेरा लन्ड अब भाभी कि गांड कि दरार मे रगड़खा रहा थां, गरम, सख्त, नसें फूली हुईं। हर रगड़ केँ संग उनकी रसीले, गोल गांड मेरे लन्ड कों दबारही थि, जैसेकोई गरम मखमल हौ। मैंने उनकेगले पऱ होंठरख दिए, पहले धीरे-धीरे सें चूमा, फिन जीभ सें चाटा, गले कि नस पर्र दाँत गड़ाए। भाभी नें सिर थोडा पीछे करके अपनी गर्दन मेरे मुंह केँ हवाले कर दि। फिन मैंने उनकेगाल पर्र किस किया, कान कि लौ कों चूसा, कंधे पर्र दाँत गड़ाए। बीच-बीच मे भाभी गर्दन पीछे करके मेरे होंठों कों ढूँढतीं, औऱ गहराकिस करतीं, जीभ मेरीजीभ सें लड़ती, चूसती, काटती। उनकी साँसें तेज़, गरम, मेरे चेहरे पऱ पड़रही थीं।
अब मेरा लन्ड इतनातना हुआ थां कि भाभी केँ चूत कों नीचे सें रगड़रहा थां, चूत सें निकला रस उसपर जमनेलगा। वोँ गीला, चिपचिपा रस मेरे लन्ड कि टिप पर्र फैल गय़ा। बिना किसी रुकावट केँ, बस एक् हल्का धक्का, औऱ मेरा पूरा लन्ड भाभी केँ गरम, भीगे चूत मे समा गय़ा। जैसे वोँ चूत मेरा इंतजार कररही हौ। जैसे हि लन्ड अंदर गय़ा, भाभी नें पेर थोड़े अलगकिए, गांड पीछे कि, दोनों हाथों सें रेलिंग कों कसकर पकड़ लिया। उनका जिस्म अब मेरे सामने झुकाहुआ थां — कमर टेढ़ी, बूब्स नीचे लटकते हुएहिल रहे थें।
मैंने स्पीड बढ़ाई। मेरे कुल्हे उनकीनरम, गरम गांड पर्र जोरदार झटके मारने लगे, थप! थप!थप!हर झटके केँ संग उनका पूरा शरीर काँपता, बूब्स झूलते, नितंब मेरेपेट सें टकराते। भाभी कि कराहें अब दबी-दबी, मगर गहरी हौ गईं, “ओह्ह… औऱ ज़ोर सें… अह्ह्ह…” उनकी आवाज़ सुभह कि ख़ामोशी मे गूँजरही थि। हल्की रोशनी मे उनका जिस्म पसीने सें चमकरहा थां, बूब्स कि गोलाई, पतलीकमर, नितंबों पऱ मेरे हाथों केँ निशान। हम् दोनों चरम पऱ पहुँचने वाले थें, मेरी साँसें रुकरही थीं, लन्ड फड़करहा थां, भाभी कि चूत मेरे लन्ड कों जकड़रही थि।
तभीकही सें किसी कि आवाज़ आई, कोई औऱ भि दूसरी बालकनी मे आके बातेकर रहा थां।
भाभी बिना देखे घबराकर झट सें मुझसे अलग हुईं। उनका जिस्म मेरे लन्ड सें निकला, औऱ वोँ तेज़ी सें अंदर कि तरफ़ भागीं। मे बालकनी मे अकेला खड़ा थां, मेनेझट सें लन्ड कों हाथ सें छुपाया औऱ पीछे मुड़कर उनके पीछे दौड़ा। उन्हें पकड़ने कि कोशिश कि, मगर भाभी नें पलटकर मुझे धक्का दिया औऱ बाथरूम मे घुसगईं। द्वार (दरवाज़ा) बंद होँ गय़ा।
मे मायूस होकरबेड पऱ बैठ गय़ा। लन्ड अभि भि खड़ा, गीला, ठंडापड़ रहा थां।, मे उस बाथरूम कि दिवार कों देखरहा थां, थोडा गौर सें देखा तोँ समझआया, बाथरूम कि दीवार पूरी काँच कि थि। बाहर् सें अंदरसभी साफ़दिख सकता थां। बस अंदर कां पर्दा बंद थां। औऱ वोँ पर्दा उठाने कां बटन… अंदर हि थां।
मे थोडा नाराज़-सां, वैसे हि नंगाबेड पर्र लेट गय़ा। हाथ लन्ड पर्र रखा औऱ धीरे धीरे सहलाने लगा। आँखें बंद करके भाभी केँ शरीर कि यादें ताज़ा कररहा थां।
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) - Continue reading for full story
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर उन्मादक एपसोड हैं भइया मज़ा आँ गय़ा
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